Author: bharati

  • ईरान में गुस्सा: ‘ट्रंप के हाथ ईरानियों के खून से सने’, विरोध प्रदर्शन तेज

    ईरान में गुस्सा: ‘ट्रंप के हाथ ईरानियों के खून से सने’, विरोध प्रदर्शन तेज

    ईरान | ईरान में महंगाई और आर्थिक संकट के खिलाफ शुरू हुआ प्रदर्शन अब सीधे सर्वोच्च नेता आयतुल्ला अली खामेनेई की सत्ता को चुनौती देने वाले आंदोलन में बदल गया है। विरोध प्रदर्शन में हजारों लोग सड़कों पर उतरकर ईरान के निर्वासित विपक्षी नेता रजा पहलवी के समर्थन में नारे लगा रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने देश की सत्ता क्राउन प्रिंस रजा पहलवी को सौंपने की मांग की।

    सरकारी बयान और अमेरिका-इजरायल पर आरोप

    ईरान के सरकारी टीवी ने पहली बार विरोध प्रदर्शनों को दिखाया और दावा किया कि अमेरिका और इजरायल के ‘आतंकवादी एजेंटों’ ने माहौल बिगाड़ा है। आयतुल्ला अली खामेनेई ने राष्ट्र को संबोधित करते हुए कहा कि कुछ दंगाई अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को खुश करने के लिए तोड़फोड़ कर रहे थे। उन्होंने चेतावनी दी कि ईरान विदेशियों के भाड़े के सैनिकों को बर्दाश्त नहीं करेगा।

    खामेनेई का विरोधकारियों और अमेरिका पर बयान

    खामेनेई ने कहा, “लाखों कुर्बानियों के बाद हम सत्ता में आए हैं और इतनी आसानी से झुकने वाले नहीं हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के हाथ हजारों ईरानियों के खून से सने हैं। ईरान के युवाओं को एकता बनाए रखनी होगी।” उन्होंने जून 2025 में ईरान के परमाणु संयंत्रों पर अमेरिकी हमले का भी जिक्र किया। इस दौरान भीड़ ने अमेरिका मुर्दाबाद के नारे लगाए।

    रजा पहलवी का आह्वान और हिंसा की झलक

    निर्वासित क्राउन प्रिंस रजा पहलवी ने सोशल मीडिया पोस्ट में ईरान के लोगों से आह्वान किया कि वे सड़कों पर उतरें, क्योंकि पूरी दुनिया की निगाहें ईरान पर हैं। सरकारी टीवी पर मेट्रो स्टेशनों और बैंकों में आग, जलती हुई बसें और कारें दिखाई गईं। ईरानी मीडिया ने पीपुल्स मुजाहिदीन ऑर्गनाइजेशन (एमकेओ) पर इस अशांति का आरोप लगाया, जो 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद अलग हुआ एक विपक्षी गुट है।

    इंटरनेट और संचार बाधित

    गुरुवार, 8 जनवरी 2026 की रात ईरान सरकार ने इंटरनेट और टेलीफोन लाइनें काट दीं। इंटरनेट कंपनियों क्लाउडफ्लेयर और नेटब्लॉक्स ने इसे रिपोर्ट किया और कहा कि इसका कारण ईरान सरकार का हस्तक्षेप था। इससे पूरे देश में विरोध प्रदर्शन की जानकारी और संचार बाधित हो गया।

    परिस्थितियों का अंतरराष्ट्रीय असर

    महंगाई विरोध से शुरू हुए आंदोलन का असर राजनीतिक अस्थिरता और सरकार की जवाबदेही पर पड़ रहा है। खामेनेई और अमेरिका-इजरायल के बीच आरोप-प्रत्यारोप, देश में इंटरनेट ब्लैकआउट और रजा पहलवी का आह्वान ईरान की आंतरिक स्थिति को और नाजुक बना रहे हैं। विरोध प्रदर्शन ने केवल आर्थिक मुद्दों को नहीं, बल्कि राजनीतिक और सुरक्षा के गंभीर पहलुओं को भी उजागर किया है।

  • ईरान में उबाल: बढ़ते विरोध के आगे झुकी खामेनेई सरकार, सरकारी टीवी ने मानी हिंसा

    ईरान में उबाल: बढ़ते विरोध के आगे झुकी खामेनेई सरकार, सरकारी टीवी ने मानी हिंसा

    अंतरराष्ट्रीय मध्य पूर्व के देश ईरान में हालात लगातार गंभीर होते जा रहे हैं. बीते करीब 12 दिनों से देश के अलग-अलग हिस्सों में सरकार के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन चल रहे हैं. सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की सरकार के खिलाफ जनता का गुस्सा खुलकर सड़कों पर नजर आ रहा है.

    गुरुवार रात हालात और बिगड़ गए, जब राजधानी तेहरान समेत 100 से ज्यादा शहरों में हिंसक प्रदर्शन हुए.

    प्रदर्शनों के दौरान कई जगह आगजनी की घटनाएं हुईं. सरकारी इमारतों और सार्वजनिक संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने की खबरें सामने आईं. इसके साथ ही, कुछ इलाकों में प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी की भी सूचना मिली है, जिससे हालात और तनावपूर्ण हो गए. बड़ी संख्या में सुरक्षाबलों की तैनाती के बावजूद हालात काबू में आते नहीं दिख रहे हैं.

    अमेरिका की चेतावनी और ईरान का जवाब

    इन घटनाओं के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को सख्त चेतावनी दी है. उन्होंने कहा कि अगर प्रदर्शनकारियों पर हिंसक कार्रवाई की गई, तो इसका कड़ा जवाब दिया जाएगा. इस बयान के बाद ईरान ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए अपना एयरस्पेस बंद कर दिया है. इससे यह साफ संकेत मिलता है कि ईरान सरकार किसी भी संभावित खतरे को लेकर सतर्क है.

    सरकारी टीवी ने तोड़ी चुप्पी

    लंबे समय तक हालात पर चुप्पी साधे रखने के बाद अब ईरान के सरकारी टेलीविजन ने पहली बार हिंसा की बात स्वीकार की है. एक कार्यक्रम के दौरान यह माना गया कि प्रदर्शनों के समय हिंसक घटनाएं हुई हैं और कुछ लोगों की जान भी गई है. यह स्वीकारोक्ति बताती है कि हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि अब उन्हें छिपाना संभव नहीं रहा.

    हालांकि, सरकार ने जनता के गुस्से को इन घटनाओं की वजह मानने से इनकार किया है. सरकारी टीवी का दावा है कि आगजनी और हिंसा के पीछे अमेरिका और इज़रायल से जुड़े ‘आतंकी एजेंट’ हैं. ईरानी शासन का कहना है कि देश में अशांति फैलाने के लिए बाहर से साजिश रची जा रही है. यह पहली बार नहीं है जब सरकार ने अंदरूनी विरोध को विदेशी हस्तक्षेप बताया हो.

    आर्थिक संकट बना बड़ा कारण

    राजनीतिक जानकारों का मानना है कि देश में चल रहा आर्थिक संकट, बढ़ती महंगाई और बेरोजगारी जनता के गुस्से की बड़ी वजह हैं. आम लोगों का जीवन मुश्किल होता जा रहा है, जिससे असंतोष बढ़ता जा रहा है. ऐसे हालात में सरकार के लिए स्थिति संभालना आसान नहीं रह गया है.

  • मकर संक्रांति कब है 2026: जानें कब मनाई जाएगी और किन चीजों का करें दान

    मकर संक्रांति कब है 2026: जानें कब मनाई जाएगी और किन चीजों का करें दान


    नई दिल्ली । मकर संक्रांति हिंदू धर्म में एक बेहद महत्वपूर्ण और खास त्योहार है, जो हर साल सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने के साथ मनाया जाता है। यह त्योहार विशेष रूप से पौष माह में आता है और इस दिन सूर्य देव उत्तरायण होते हैं जिसे देवताओं का दिन माना जाता है। इस दिन सूर्य की उपासना दान और विशेष रूप से गंगा या किसी पवित्र नदी में स्नान का महत्व होता है।

    मकर संक्रांति कब है 2026

    पंचांग के अनुसार, सूर्य देव 14 जनवरी 2026, बुधवार को दोपहर 3 बजकर 13 मिनट पर मकर राशि में प्रवेश करेंगे। इसलिए मकर संक्रांति का पर्व 14 जनवरी 2026 को मनाया जाएगा। इस दिन का विशेष पुण्य काल दोपहर 3:13 बजे से शुरू होकर लगभग 2 घंटे 32 मिनट तक रहेगा। इस दौरान किए गए स्नान, दान, सूर्य को अर्घ्य अर्पित करने और जप-तप का विशेष महत्व है।

    मकर संक्रांति पर किन चीजों का करें दान

    मकर संक्रांति का दिन विशेष रूप से दान के लिए महत्वपूर्ण होता है। इस दिन दान करने से न केवल पुण्य मिलता है बल्कि जीवन में सुख-समृद्धि भी आती है। मान्यता है कि मकर संक्रांति के दिन निम्नलिखित चीजों का दान करने से पापों का नाश होता है और व्यक्ति को खुशहाली मिलती है तिल: तिल का दान बहुत शुभ माना जाता है और यह शरीर को निरोगी बनाता है।

    गुड़: गुड़ का दान करने से घर में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है। खिचड़ी: खिचड़ी का दान करना और उसका सेवन करना विशेष रूप से इस दिन शुभ माना जाता है। चावल और उड़द: चावल और उड़द का दान करना भी मकर संक्रांति के दिन फलदायी होता है।हल्दी और नमक: हल्दी और नमक का दान भी पवित्रता और शुभता का प्रतीक माना जाता है। धान: धान का दान करने से अनर्थ और दरिद्रता का नाश होता है। इसके अलावा इस दिन दीन-हीन और गरीबों को वस्त्र, वस्तुएं, अन्न और अन्य जरूरी सामान दान करने का भी महत्व है।

    मकर संक्रांति का महत्व

    मकर संक्रांति का पर्व सूर्य देव के उत्तरायण होने के कारण विशेष रूप से महत्व रखता है। यह दिन अत्यंत शुभ माना जाता है, क्योंकि इस दिन से सूर्य की किरणें पृथ्वी पर अधिक शक्ति और ऊर्जा लेकर आती हैं। यही कारण है कि इस दिन को शुभ कार्यों की शुरुआत और दान-पुण्य के लिए सबसे अच्छा दिन माना जाता है।

    स्नान-दान का महत्व

    मकर संक्रांति के दिन सूर्योदय से पहले गंगा या किसी पवित्र नदी में स्नान करना अत्यंत फलदायी माना जाता है। साथ ही सूर्य को अर्घ्य अर्पित करना और विशेष रूप से मंत्रों का जाप करना पुण्यदायी होता है। मकर संक्रांति का पर्व एक नई ऊर्जा, उत्साह और सकारात्मकता लेकर आता है, जो जीवन को उज्जवल और समृद्ध बनाता है।

  • Border 2 Song: ‘इश्क़ दा चेहरा’ ने छुआ दिल, प्यार–त्याग और जज़्बातों से सजी है ‘बॉर्डर 2’ की नई पेशकश

    Border 2 Song: ‘इश्क़ दा चेहरा’ ने छुआ दिल, प्यार–त्याग और जज़्बातों से सजी है ‘बॉर्डर 2’ की नई पेशकश




    नई दिल्ली।
    देशभक्ति से ओत-प्रोत बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘बॉर्डर 2’ लगातार दर्शकों की उत्सुकता बढ़ा रही है। फिल्म का हाल ही में रिलीज़ हुआ नया गाना ‘इश्क़ दा चेहरा’ दिल को छू लेने वाली भावनाओं से भरा हुआ है, जिसे सुनकर और देखकर दर्शकों की आंखें नम हो रही हैं। यह गाना सिर्फ एक रोमांटिक ट्रैक नहीं, बल्कि सरहद पर तैनात जवानों और उनके परिवारों के प्यार, इंतज़ार और बलिदान की कहानी को बेहद खूबसूरती से बयां करता है।

    इससे पहले फिल्म का गाना ‘घर कब आओगे’ रिलीज़ हुआ था, जिसे दर्शकों का जबरदस्त प्यार मिला।

    सोशल मीडिया पर इस गाने पर हजारों रील्स बनीं और यह गाना जवानों के जज़्बातों की आवाज़ बन गया। अब ‘इश्क़ दा चेहरा’ उसी भावनात्मक सफर को और आगे बढ़ाता है, जहां देश की रक्षा कर रहे सैनिकों की निजी ज़िंदगी, उनके रिश्ते और परिवार के प्रति उनका प्यार सामने आता है।

    ‘इश्क़ दा चेहरा’ एक सोलफुल और रोमांटिक मेलोडी है, जो यह दिखाती है कि कैसे प्यार और परिवार का सहारा जवानों को बॉर्डर पर हर मुश्किल से लड़ने की ताकत देता है। गाने में पत्नियों का इंतज़ार, उनका त्याग और रिश्तों की गहराई इतनी संवेदनशीलता से दिखाई गई है कि हर सीन दिल को छू जाता है। यह गाना याद दिलाता है कि वर्दी के पीछे भी एक इंसान होता है, जिसके अपने जज़्बात, सपने और रिश्ते होते हैं।

    इस गाने को संगीत की दुनिया की मशहूर जोड़ी सचेत–परंपरा ने तैयार किया है, जबकि इसके भावुक और खूबसूरत बोल कौसर मुनीर ने लिखे हैं।

    गाने में दिलजीत दोसांझ, परंपरा टंडन और सचेत टंडन की आवाज़ सुनाई देती है, जो इसकी भावनात्मक गहराई को और मजबूत बनाती है। खासतौर पर दिलजीत दोसांझ की आवाज़ गाने में एक अलग ही असर छोड़ती है।

    ‘इश्क़ दा चेहरा’ में फिल्म के कई प्रमुख किरदारों की प्रेम कहानियां भी दिखाई गई हैं। इसमें सनी देओल–मोना सिंह, वरुण धवन–मेधा राणा, दिलजीत दोसांझ–सोनम बाजवा, और अहान शेट्टी–आन्या सिंह की ऑन-स्क्रीन जोड़ियां नजर आती हैं। हर जोड़ी की कहानी प्यार के अलग-अलग रंगों को दिखाती है, जो हालात चाहे जैसे भी हों, रिश्तों की मजबूती को बनाए रखते हैं।

    ‘बॉर्डर 2’ को टी-सीरीज़ और जेपी फिल्म्स ने मिलकर प्रोड्यूस किया है, जबकि फिल्म का निर्देशन अनुराग सिंह ने किया है।

    यह फिल्म देशभक्ति, साहस और बलिदान की भव्य कहानी को नए दौर की संवेदनाओं के साथ पेश करने वाली है।

    देश के जवानों को समर्पित यह फिल्म 23 जनवरी 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज़ होने जा रही है। ‘इश्क़ दा चेहरा’ ने यह साफ कर दिया है कि ‘बॉर्डर 2’ सिर्फ एक वॉर फिल्म नहीं, बल्कि उन जज़्बातों की कहानी है, जो सरहद के उस पार और इस पार दोनों जगह बराबर महसूस किए जाते हैं।

  • अनुशासनहीनता की हद: स्कूल प्रबंधन सोया रहा, 8 फीट की बाउंड्री फांदकर स्कूल से बंक मारती नजर आईं छात्राएं

    अनुशासनहीनता की हद: स्कूल प्रबंधन सोया रहा, 8 फीट की बाउंड्री फांदकर स्कूल से बंक मारती नजर आईं छात्राएं


    सतना । मध्य प्रदेश के सतना जिले के शासकीय कन्या हायर सेकंडरी स्कूल नागौद में एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है। यहां की छात्राएं स्कूल की 8 फीट ऊंची बाउंड्री फांदकर बाहर जा रही थीं, लेकिन स्कूल प्रबंधन को इसकी भनक तक नहीं लगी। यह मामला तब सुर्खियों में आया, जब बाउंड्री फांदते हुए छात्राओं का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। विडंबना यह है कि विद्यालय के पीछे से बाउंड्री लांघकर छात्राएं मुख्य सड़क पर कूद रही थीं, जहां दिनभर वाहनों की आवाजाही होती रहती है। इस स्थिति में किसी भी वक्त बड़ा हादसा हो सकता था। वीडियो में छात्राएं बाउंड्री फांदते समय गिरती भी नजर आ रही हैं, जिससे यह सवाल उठता है कि अगर कोई गंभीर दुर्घटना हो जाती, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होती

    स्थानीय लोगों और अभिभावकों का कहना है कि यह मामला छात्राओं की सुरक्षा से जुड़ा हुआ है, और स्कूल प्रशासन की लापरवाही बेहद चिंताजनक है। स्कूल समय के दौरान छात्राओं का इस तरह बाउंड्री फांदकर बाहर जाना न केवल अनुशासनहीनता का प्रतीक है, बल्कि उनकी जान को भी खतरे में डालने वाला है। जैसे ही यह वीडियो मीडिया में आया, जिला शिक्षा अधिकारी कंचन श्रीवास्तव ने इस पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, “हमने इस घटना के बारे में जानकारी प्राप्त की है। हम प्राचार्य से चर्चा करेंगे और इस मामले में उचित प्रबंध कराने के लिए निर्देश देंगे।

    स्कूल की प्राचार्य, विनीता श्रीवास्तव ने इस पर सफाई देते हुए कहा, मुख्य गेट पर ताला लगा हुआ था और अंदर प्री-बोर्ड परीक्षाएं चल रही थीं। अब हमें इस घटना की जानकारी मिली है और इसके लिए उचित प्रबंध किए जाएंगे। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं हो पाया कि जब गेट पर ताला लगा था, तो स्कूल प्रबंधन ने छात्राओं के बाहर जाने पर नजर क्यों नहीं रखी। यह मामला विद्यालय प्रबंधन की घोर लापरवाही को उजागर करता है, जो छात्रों की सुरक्षा और अनुशासन की जिम्मेदारी लेने में नाकाम रहा। अगर भविष्य में कोई दुर्घटना होती है, तो यह बड़ा सवाल बनकर खड़ा हो जाएगा कि इसके लिए जिम्मेदार कौन होगा।
     

  • गर्भावस्था में एंटीबायोटिक्स का उपयोग और नवजातों में GBS रोग का खतरा

    गर्भावस्था में एंटीबायोटिक्स का उपयोग और नवजातों में GBS रोग का खतरा

    ई दिल्ली एक अध्ययन के अनुसार, गर्भावस्था के दौरान एंटीबायोटिक्स का उपयोग नवजात शिशुओं में ग्रुप बी स्ट्रेप्टोकोकस (GBS) रोग के विकास के जोखिम को बढ़ा सकता है।

    हालांकि ये बैक्टीरिया आमतौर पर आंत या जननांगों में हानिरहित रहते हैं, लेकिन ये नवजातों, बुजुर्गों और इम्यूनोकॉम्प्रोमाइज्ड व्यक्तियों में गंभीर संक्रमण का कारण बन सकते हैं, जिससे सेप्सिस, मेनिनजाइटिस और निमोनिया हो सकता है।

    स्वीडन के करोलिंस्का इंस्टीट्यूट और बेल्जियम के एंटवर्प विश्वविद्यालय के एक अंतरराष्ट्रीय दल द्वारा किए गए इस अध्ययन में पाया गया कि गर्भावस्था के दौरान एंटीबायोटिक संपर्क नवजात GBS रोग के बढ़ते जोखिम से जुड़ा था, जो जन्म के चार सप्ताह के भीतर होता है। तीसरे तिमाही में प्रारंभिक संपर्क का सबसे मजबूत संबंध देखा गया।

    शोधकर्ताओं ने कहा, “गर्भावस्था के दौरान एंटीबायोटिक संपर्क नवजातों में GBS के जोखिम को चार सप्ताह के भीतर बढ़ा सकता है, विशेष रूप से उन नवजातों में जिन्हें जोखिम-आधारित अंतःप्रसूति प्रोफिलैक्सिस से कवर नहीं किया गया है।”

    इस अध्ययन में 2006 से 2016 के बीच स्वीडन में सभी एकल जीवित जन्मों का जनसंख्या-आधारित अध्ययन किया गया।

    1,095,644 जीवित जन्मों में से 24.5 प्रतिशत नवजातों को एंटीबायोटिक्स का संपर्क हुआ।

    GBS की घटनाएं संपर्क में आए नवजातों में बिना संपर्क वाले नवजातों की तुलना में अधिक पाई गईं (0.86 बनाम 0.66 प्रति 1,000 जीवित जन्म)।

    शोधकर्ताओं के अनुसार, यह अध्ययन नवजात GBS रोग के जोखिम से संबंधित गर्भावस्था के दौरान एंटीबायोटिक संपर्क की जांच करने वाला पहला अध्ययन है। हालांकि, यह पिछले नॉर्डिक अध्ययनों के साथ मेल खाता है, जिन्होंने गर्भावस्था के दौरान एंटीबायोटिक संपर्क के बाद प्रारंभिक बचपन (1-5 वर्ष) में संक्रमण के 16-34 प्रतिशत बढ़ते जोखिम की रिपोर्ट की थी।

    अध्ययन में यह भी पाया गया कि जन्म के करीब (चार सप्ताह के भीतर) दिए गए GBS-गतिशील एंटीबायोटिक्स कोई सुरक्षा प्रदान नहीं करते।

    गर्भावस्था के दौरान किसी भी एंटीबायोटिक के संपर्क का नवजात GBS रोग के साथ संबंध केवल उन गर्भधारणाओं में देखा गया जिनमें GBS जोखिम कारक नहीं थे।

    इससे यह संकेत मिलता है कि बिना स्थापित GBS जोखिम कारकों वाले नवजातों को गर्भावस्था के दौरान एंटीबायोटिक संपर्क को सीमित करने से अधिक लाभ हो सकता है।

    अधिक शोध की आवश्यकता पर जोर देते हुए, टीम ने उन नवजातों की निगरानी में बढ़ती सतर्कता की आवश्यकता को भी रेखांकित किया जो मौजूदा GBS रोकथाम दिशानिर्देशों के बाहर आते हैं, विशेष रूप से उन नवजातों के लिए जो प्रारंभिक तीसरी तिमाही में गर्भ में एंटीबायोटिक्स के संपर्क में आए।

  • दूषित पानी से हुई मौतों पर भाजपा सांसद का शर्मनाक बयान, जनता से सरकार के भरोसे न बैठने की अपील

    दूषित पानी से हुई मौतों पर भाजपा सांसद का शर्मनाक बयान, जनता से सरकार के भरोसे न बैठने की अपील


    खंडवा । मध्य प्रदेश के इंदौर जिले के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी पीने से लगभग 18 लोगों की मौत हो गई जिसे लेकर शासन-प्रशासन की व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। इस दिल दहला देने वाली घटना के बाद लोगों की उम्मीदें टूटती जा रही हैं और अब भाजपा नेताओं के विवादास्पद बयानों ने इन उम्मीदों को और बिखेर दिया है। पहले मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और अब खंडवा सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल का बयान सामने आया है, जिसमें उन्होंने जनता से अपील की कि वे सरकार के भरोसे न बैठें और अपनी जिम्मेदारी खुद निभाएं।

    सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल खंडवा में एक कार्यक्रम में हिस्सा लेने आए थे। जब उनसे इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों के बारे में सवाल किया गया, तो उन्होंने कहा, चाहे खंडवा हो, नगर परिषद हो या ग्राम पंचायत हो, इंदौर की घटना से हम सभी को सबक लेना चाहिए। सिर्फ सरकार ही सब कुछ करे सरकार के भरोसे हम रहे, ये भी ठीक नहीं है। जनता की भी एक जिम्मेदारी बनती है। इस बयान से उन्होंने एक तरह से साफ कर दिया कि गंदगी और दूषित पानी की समस्या के लिए अब जिम्मेदारी सरकार के बजाय जनता पर डाल दी गई है।

    सांसद का यह बयान विवादों में घिर चुका है क्योंकि इसने सीधे तौर पर जनता पर सफाई का जिम्मा थोप दिया। सवाल यह उठता है कि क्या अब जनता खुद सड़कें खोदकर पाइपलाइन लगाएगी या फिर नगर निगम की टंकियों को साफ कर घर-घर पानी पहुंचाने का काम करेगी अगर यही जिम्मेदारी जनता की है, तो फिर सवाल यह भी है कि सांसद जैसे जिम्मेदार पद पर बैठे लोग क्या कर रहे हैं क्या उनके कर्तव्यों में ऐसी समस्याओं का समाधान करना नहीं आता ।

    यह पहली बार नहीं है जब भाजपा नेताओं के बयानों ने विवाद उठाया है। इससे पहले मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने पत्रकार से अभद्रता करते हुए ‘घंटा’ शब्द कहा था, जिसके बाद कांग्रेस ने इस बयान के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया था। इस घटना के बाद विजयवर्गीय भी बयान देने से बचते नजर आ रहे हैं। इंदौर में हुए हादसे के बाद से प्रशासन की नाकामी और नेताओं के विवादास्पद बयानों ने लोगों के विश्वास को तोड़ा है। अब सवाल यह है कि क्या जिम्मेदार लोग अपनी जिम्मेदारी निभाएंगे या फिर इस बार भी जनता को ही दोषी ठहराया जाएगा।

  • इंदौर में कॉल सेंटर कर्मचारी पर धर्म परिवर्तन का दबाव, युवती ने बीच सड़क जूतों से की पिटाई

    इंदौर में कॉल सेंटर कर्मचारी पर धर्म परिवर्तन का दबाव, युवती ने बीच सड़क जूतों से की पिटाई


    इंदौर। मध्य प्रदेश के इंदौर में एक कॉल सेंटर में कार्यरत युवती पर लगातार धर्म परिवर्तन का दबाव बनाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। आरोपी युवक का नाम अब्दुल कलाम है, जो कॉल सेंटर में एमओ मैनेजमेंट ऑफिसर के पद पर कार्यरत था। युवती ने अपनी शिकायत में कहा कि आरोपी काम के दौरान उसे बार-बार धर्म परिवर्तन करने के लिए मानसिक रूप से प्रताड़ित करता था। इस दबाव से परेशान होकर युवती ने कॉल सेंटर की नौकरी छोड़ दी, लेकिन आरोपी का पीछा तब भी नहीं रुका।

    युवती ने बताया कि कंपनी के दो माह के नोटिस पीरियड के दौरान, जब वह रोजाना काम पर जा रही थी, तब भी आरोपी उसे रास्ते में रोककर परेशान करता रहा। लगातार उत्पीड़न से तंग आकर एक दिन युवती का गुस्सा फूट पड़ा। रास्ते में ही उसने आरोपी की जूतों से पिटाई कर दी। इसके बाद, पीड़िता ने पूरे मामले की शिकायत लसूड़िया थाना पुलिस में दर्ज कराई।

    पुलिस ने युवती की शिकायत के आधार पर आरोपी के खिलाफ धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम के तहत केस दर्ज किया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपी से पूछताछ की जा रही है और मामले की जांच जारी है। यह घटना एक बार फिर कार्यस्थलों पर महिलाओं की सुरक्षा और धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़ी गंभीर सवालों को उजागर करती है। क्या हमारे कार्यस्थलों पर महिलाओं को सुरक्षित महसूस होता है क्या हम उनके धार्मिक विश्वासों और स्वतंत्रता का सम्मान करते हैं? इन सवालों का जवाब अब समाज और जिम्मेदार अधिकारियों को देना होगा ।

  • साढ़े 3 लाख शिक्षकों पर एस्मा लागू, छुट्टियों और धरना-प्रदर्शन पर रोक

    साढ़े 3 लाख शिक्षकों पर एस्मा लागू, छुट्टियों और धरना-प्रदर्शन पर रोक


    भोपाल । मध्य प्रदेश में साढ़े तीन लाख शिक्षकों पर एस्मा सार्वजनिक आपातकालीन सेवा संरक्षण अधिनियम लागू कर दिया गया है। यह आदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल माशिमं ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को जारी किया है, जिसके तहत शिक्षकों और कर्मचारियों की छुट्टियों पर रोक लगाई गई है और उनका धरना-प्रदर्शन करना भी प्रतिबंधित कर दिया गया है। एस्मा के तहत अगले दो महीनों तक शिक्षकों को कोई भी छुट्टी लेने की अनुमति नहीं होगी और वे अपनी ड्यूटी से इंकार नहीं कर सकेंगे। यह आदेश 1 फरवरी से 30 अप्रैल तक लागू रहेगा।

    एस्मा के इस आदेश का मुख्य उद्देश्य आगामी 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं केमद्देनजर परीक्षा ड्यूटी में किसी प्रकार की विघ्न नहीं आनी चाहिए। प्रदेश में 7 फरवरी से बोर्ड परीक्षाएं शुरू हो रही हैं और इनमें करीब 17 लाख विद्यार्थी शामिल होंगे। इस दौरान शिक्षकों को अपनी ड्यूटी से न भागने और परीक्षा के सुचारू संचालन को सुनिश्चित करने के लिए यह कदम उठाया गया है।

    यह आदेश सार्वजनिक सेवा में किसी भी प्रकार की बाधा डालने या ड्यूटी से मना करने को कानून के उल्लंघन के रूप में देखा जाएगा। एस्मा लागू होने से शिक्षकों के लिए यह जरूरी हो गया है कि वे अपनी जिम्मेदारियों का पालन करें, खासकर परीक्षा के दौरान।इस फैसले के बाद शिक्षकों और कर्मचारियों के लिए अगले दो महीनों तक कोई विशेष छुट्टी या अवकाश लेने की सुविधा नहीं होगी। इस दौरान अगर कोई शिक्षक या कर्मचारी ड्यूटी से इंकार करता है या प्रदर्शन करता है, तो उसे कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।

  • यासीन मछली की जमानत याचिका खारिज, कोर्ट ने अपराध की गंभीरता को आधार बनाया

    यासीन मछली की जमानत याचिका खारिज, कोर्ट ने अपराध की गंभीरता को आधार बनाया


    भोपाल । मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने यासीन अहमद उर्फ मछली की जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने यासीन के खिलाफ दर्ज आरोपों की गंभीरता और उसके आपराधिक इतिहास को देखते हुए यह फैसला लिया। यासीन मछली, जो एक पत्रकार के नाम पर जारी फर्जी विधानसभा पार्किंग पास का इस्तेमाल कर रहा था, को इस मामले में गिरफ्तार किया गया था। हाईकोर्ट ने यासीन की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए इसे ठुकरा दिया, यह कहते हुए कि मामले की गंभीरता को देखते हुए जमानत देने का कोई आधार नहीं बनता।

    यह घटना भोपाल में उस समय सामने आई थी जब यासीन मछली विधानसभा पार्किंग में एक फर्जी पास लगाकर अपनी कार पार्क कर रहा था। यह पास एक पत्रकार के नाम पर जारी हुआ था, जिसे दिसंबर 2024 के विधानसभा सत्र के लिए जारी किया गया था। पत्रकार ने इस मामले की शिकायत भोपाल अरेरा हिल्स पुलिस से की थी, जिसके बाद यासीन को गिरफ्तार कर लिया गया था।

    यासीन मछली के खिलाफ कई गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं। पुलिस ने यासीन और उसके चाचा शाहवर को ड्रग्स के साथ गिरफ्तार किया था। इसके अलावा, आरोपी के मोबाइल से अश्लील वीडियो भी बरामद हुए थे, जो जांच में एक और बड़ा मामला सामने लाए। यासीन और उसके साथियों के खिलाफ एक और गंभीर आरोप यह है कि वह स्कूल और कॉलेज की लड़कियों को पार्टियों के बहाने ड्रग्स की लत लगवाते थे, फिर उनका यौन शोषण करते और उन्हें ब्लैकमेल कर वीडियो बनाते थे। इसके अलावा, धर्मांतरण का दबाव भी इन अपराधों से जुड़ा हुआ था, जो पुलिस की जांच में उभरकर आया है।

    इस मामले के बाद से यासीन मछली की आपराधिक गतिविधियों की गहराई से जांच की जा रही है, और पुलिस उसे सख्त सजा दिलाने के लिए अपनी कोशिशें तेज कर चुकी है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का यह फैसला अपराधियों के खिलाफ सख्त संदेश देता है, कि कोर्ट गंभीर अपराधों में लिप्त आरोपियों को किसी भी प्रकार की राहत नहीं देगी। इस फैसले से यह भी स्पष्ट हो गया है कि अपराधी चाहे कितनी भी ताकतवर स्थिति में क्यों न हो, कानून के सामने सभी समान होते हैं।