Author: bharati

  • 'महिला आयोग को क्या समझ रखा है..' मुलायम सिंह की छोटी बहू अपर्णा यादव किस पर भड़कीं?

    'महिला आयोग को क्या समझ रखा है..' मुलायम सिंह की छोटी बहू अपर्णा यादव किस पर भड़कीं?

    उत्तर प्रदेश । उत्तर प्रदेश महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव शुक्रवार को उस वक्त भड़क गईं जब किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी के कुलपति से मिलने पहुंचीं मगर उनसे कोई मिलना नहीं आया. अपर्णा यादव, रमीज और धर्मांतरण के मामले को लेकर केजीएमयू पहुंचीं थीं. इसके बाद एक प्रेस वार्ता में अपर्णा ने कहा कि महिला आयोग को केजीएमयू ने क्या समझ रखा है? मैं तो कुछ जानकारी करने के लिए आई थी लेकिन मुझसे मिलने वॉइस चांसलर नहीं आईं. उन्होंने कहा कि पीड़िता से मेरी बात हुई थी उसने बताया केजीएमयू के एचओडी के बताने के बाद में भी कोई सुनवाई नहीं हुई.

    यादव ने दावा किया कि पीड़िता को केजीएमयू के सीनियर डॉक्टर के द्वारा कहा गया कि आप महिला आयोग क्यों गई? उन्होंने आरोप लगाया कि उस व्यक्ति को बचाने के लिए व्यक्ति विशेष काम कर रहे हैं.यादव ने विशाखा कमेटी के द्वारा जारी रिपोर्ट पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने बयान दिया है उनके बयान बदलने के लिए दबाव दिया जा रहा है. अपर्णा ने दावा किया कि विशाखा कमेटी को अपनी तरह से तोड़ मरोड़ कर बताए गए.

    उन्होंने पूछा कि क्या महिला आयोग, संवैधानिक संस्था नहीं है?

    केजीएमयू वीसी से मुलाकात के संदर्भ में यादव ने कहा कि हमारी कुछ बात होती जिस पर हम किसी निष्कर्ष पर पहुंचते. शायद तब मैं प्रेसवार्ता भी नहीं करती. मुझे लगता है कि प्रदेश सरकार विधि और न्याय सम्मत काम करेगी. सीएम योगी आदित्यनाथ इन मामलों में सचेत रहते हैं.

    महिला आयोग की उपाध्यक्ष ने कहा-केजीएमयू में महिलाओं के साथ छेड़छाड़ हो रही है, यह सब क्या चल रहा है और यहां का प्रशासन मौन है. उन्होंने आरोप लगाया कि 2 साल से बिना लाइसेंस के केजीएमयू में ब्लड बैंक चल रहा है.

    यादव ने राज्यपाल आनंदीबेन पटेल का जिक्र करते हुए कहा कि अगर वो इस बात को जानेंगी तो वह भी इसे गंभीरतापूर्वक समझेंगी. उन्होंने आरोप लगाया कि जब रमीज मलिक यहां से भागा तब प्रोफेसर वाहिद अली और सुरेश बाबू के संपर्क में रहे. केजीएमयू प्रशासन ने उन पर कार्रवाई क्यों नहीं की?

  • Bharat Coking Coal IPO 2026: ग्रे मार्केट 50% उछाल, लिस्टिंग पर बड़ा रिटर्न या निवेश का मौका?

    Bharat Coking Coal IPO 2026: ग्रे मार्केट 50% उछाल, लिस्टिंग पर बड़ा रिटर्न या निवेश का मौका?


    नई दिल्ली। साल 2026 का पहला मेनबोर्ड IPO Bharat Coking Coal Limited (BCCL) लेकर आया है, जो 9 से 13 जनवरी 2026 तक खुलेगा। IPO का लक्ष्य 1,071 करोड़ रुपये जुटाना है। BCCL, Coal India की सहायक कंपनी और देश की सबसे बड़ी कोकिंग कोल उत्पादक कंपनी है। FY25 में BCCL का घरेलू उत्पादन में हिस्सा 58.5% रहा।

    IPO से पहले 8 जनवरी 2026 को एंकर निवेशकों से 273.13 करोड़ रुपये जुटाए गए। इसमें LIC सबसे बड़ा निवेशक रही, जिसने 78 करोड़ रुपये के 3.39 करोड़ इक्विटी शेयर खरीदे। इसके अलावा निप्पॉन इंडिया और बंधन म्यूचुअल फंड ने 75-75 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे।

    SBI Securities ने निवेशकों को कट-ऑफ प्राइस पर सब्सक्राइब करने की सलाह दी, जबकि Anand Rathi ने इसे लिस्टिंग गेन के नजरिए से निवेश करने की सिफारिश की। IPO का ऊपरी प्राइस बैंड 23 रुपये है और वैल्यूएशन 6.4x EV/EBITDA के हिसाब से है। FY25 में EBITDA मार्जिन 12.7% और ROCE 18.2% रहा। FY23–FY25 के दौरान बिक्री और मुनाफा क्रमशः 5% और 37% CAGR से बढ़ा।

    IPO संरचना और डिटेल्स: यह IPO पूरी तरह OFS (Offer for Sale) है, जिसमें Coal India अपनी 10% हिस्सेदारी बेच रही है। कुल शेयर 46.57 करोड़ हैं और प्राइस बैंड 21–23 रुपये निर्धारित किया गया है। रिटेल निवेशकों के लिए न्यूनतम लॉट 600 शेयर है, जिसके लिए ऊपरी प्राइस बैंड पर निवेश 13,800 रुपये होगा। अलॉटमेंट स्ट्रक्चर के अनुसार, रिटेल निवेशक को 35%, QIB को 50%, और NII को 10% शेयर मिलेंगे।

    इसके अलावा Coal India के शेयरधारकों के लिए 107 करोड़ रुपये के शेयर आरक्षित हैं, और कर्मचारियों को प्रति शेयर 1 रुपये की छूट भी दी जाएगी।

    ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP): BCCL के शेयर ग्रे मार्केट में लगभग 50% प्रीमियम पर कारोबार कर रहे हैं, जो लिस्टिंग पर मजबूत रिटर्न का संकेत देता है। विशेषज्ञों का कहना है कि GMP केवल अनलिस्टेड मार्केट की धारणा को दर्शाता है और अस्थिर रह सकता है। पोस्ट-इश्यू मार्केट कैपिटलाइजेशन का अनुमान लगभग 10,711 करोड़ रुपये है। लिस्टिंग के बाद Coal India की हिस्सेदारी 90% रहेगी, जो न्यूनतम पब्लिक शेयरहोल्डिंग नियम से काफी अधिक है।

    BCCL के फायदे और निवेश के कारण: देश की सबसे बड़ी कोकिंग कोल उत्पादक कंपनी होने के साथ BCCL के पास 7.91 अरब टन अनुमानित कोल रिजर्व और 34 ऑपरेशनल माइंस हैं। FY23–FY25 के दौरान बिक्री और मुनाफा क्रमशः 5% और 37% CAGR से बढ़ा। FY25 में EBITDA मार्जिन 12.7% और ROCE 18.2% रहा। मजबूत वित्तीय प्रदर्शन और विश्वसनीय ट्रैक रिकॉर्ड इसे निवेशकों के लिए आकर्षक बनाते हैं।

    जोखिम: लंबी अवधि में कोल रिजर्व में कमी, टॉप 10 ग्राहकों पर 80% से अधिक निर्भरता, और रिन्यूएबल एनर्जी के बढ़ते उपयोग से कोल की मांग पर असर मुख्य जोखिम हैं।

    लिस्टिंग और अलॉटमेंट डेट: BCCL IPO का अलॉटमेंट 14 जनवरी 2026 को होने की संभावना है, जबकि लिस्टिंग 16 जनवरी 2026 को होने की उम्मीद है। बुक रनिंग लीड मैनेजर IDBI Capital और ICICI Securities हैं।

    निवेशक इस IPO में कट-ऑफ प्राइस पर सब्सक्राइब कर सकते हैं, जबकि लिस्टिंग गेन की उम्मीद रखने वाले निवेशक इसे देख सकते हैं। ग्रे मार्केट प्रीमियम और कंपनी के मजबूत फंडामेंटल्स इसे शॉर्ट-टर्म और मिड-टर्म दोनों के लिए आकर्षक विकल्प बनाते हैं।

  • उज्जैन के बड़नगर में बिजली विभाग की टीम पर हमला: कनेक्शन काटने पर किसान ने की मारपीट

    उज्जैन के बड़नगर में बिजली विभाग की टीम पर हमला: कनेक्शन काटने पर किसान ने की मारपीट


    उज्जैन । मध्यप्रदेश के उज्जैन जिले के बड़नगर क्षेत्र में बिजली विभाग की टीम पर हमला होने का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। यह घटना ग्राम पिपलु में हुई, जहां एक किसान ने बिजली बिल का लंबा समय से भुगतान न करने के बाद जब बिजली विभाग की टीम ने उसका कनेक्शन काटा, तो किसान ने कर्मचारियों पर हमला कर दिया।

    घटना का विवरण

    बताया जा रहा है कि सुपरवाइजर जनार्दन द्विवेदी अपनी टीम के साथ बकाया बिजली बिल की वसूली के लिए किसान लोकेंद्र के घर पहुंचे थे। लोकेंद्र पर काफी समय से बिजली का बिल बकाया था, और जब विभागीय टीम ने कनेक्शन काटने की प्रक्रिया शुरू की, तो किसान लोकेंद्र आक्रोशित हो गए। उन्होंने जनार्दन द्विवेदी और उनके साथियों से मारपीट करना शुरू कर दिया।

    मोबाइल में कैद हुई मारपीट की घटना

    किसान द्वारा की गई मारपीट की घटना को किसी ने अपने मोबाइल कैमरे में कैद कर लिया, जिसके बाद इसका वीडियो वायरल हो गया। वीडियो में देखा जा सकता है कि किसान ने कनेक्शन काटने के दौरान कर्मचारियों से हाथापाई की। इस वीडियो के सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद घटना ने काफी तूल पकड़ लिया।

    पुलिस में शिकायत और जांच

    मारपीट की इस घटना के बाद सभी कर्मचारी बड़नगर थाने पहुंचे और आरोपी किसान लोकेंद्र के खिलाफ शासकीय कार्य में बाधा डालने और मारपीट करने की शिकायत की। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और आरोपी किसान के खिलाफ आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

    घटना का असर

    इस घटना ने बिजली विभाग के कर्मचारियों के लिए सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ऐसे में जहां एक ओर बिजली विभाग की टीम कनेक्शन काटने के लिए जाती है, वहीं दूसरी ओर इस तरह की हिंसक घटनाएं विभाग के कार्यों में रुकावट डाल सकती हैं।अब देखना होगा कि पुलिस मामले की जांच के बाद क्या कार्रवाई करती है और क्या किसान लोकेंद्र के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी या नहीं।

  • भोपाल का पानी 'जहर', 7 जगह इंदौर से भी ज्यादा दूषित, पीने पर रोक

    भोपाल का पानी 'जहर', 7 जगह इंदौर से भी ज्यादा दूषित, पीने पर रोक


    भोपाल। भोपाल नगर निगम की रिपोर्ट के मुताबिक, इस पानी में कैंसर, हैजा, टाइफाइड और हेपेटाइटिस-ए जैसी बीमारियों का कारण बनने वाले बैक्टीरिया मौजूद हैं। नल से आने वाला पानी कुछ ही मिनटों में लाल हो जाता है और बदबू इतनी तीव्र होती है कि सांस लेना मुश्किल हो जाता है। टीडीएस (टोटल डिसॉल्व्ड सॉलिड्स), कैल्शियम, टोटल हार्डनेस, सल्फेट और कोलीफॉर्म भी उच्च मात्रा में पाए गए हैं।

    स्थानीय लोग अब पूरी तरह से पानी के टैंकरों पर निर्भर हैं।

    आदमपुर खंती और पड़रिया के इलाकों में लोग भूजल का पानी पीने के बजाय, केवल फसलों की सिंचाई और साफ-सफाई में इस्तेमाल कर रहे हैं। कुछ इलाकों में तो हैंडपंप से लाल और बदबूदार पानी निकल रहा है, जिसे देखकर लोग पीने से डर रहे हैं।

    पर्यावरणविद् डॉ. सुभाष पांडे के मुताबिक, जनवरी 2018 से भोपाल का कचरा आदमपुर खंती में डंप किया जा रहा है, जिससे आसपास के 7 गांवों का भूजल गंभीर रूप से प्रदूषित हो चुका है। डंपिंग साइट पर फिलहाल 14 लाख टन कचरा जमा है, जिससे लिक्विड रसायन (लीचेट) निकलकर पानी को और दूषित कर रहा है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि भोपाल का भूजल इंदौर से भी ज्यादा गंभीर स्थिति में है। आदमपुर खंती और आसपास के इलाकों में भूजल में आयरन और क्रोमियम भी मिले हैं, जो लंबे समय तक स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकते हैं और कैंसर जैसी बीमारियों का कारण बन सकते हैं। CPCB और MPPCB की रिपोर्ट्स में भी यह तथ्य सामने आया है।

    सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, भोपाल से प्रतिदिन लगभग 850 टन कचरा निकलता है, जिसमें से 800 टन कचरा प्रोसेसिंग के लिए खंती भेजा जाता है। लेकिन यूनिट की क्षमता केवल 420 टन है, जिससे कचरे का ढेर लगातार बढ़ता जा रहा है और आसपास के गांवों का पानी दूषित होता जा रहा है।

    भोपाल के खानूगांव, आदमपुर छावनी और वाजपेयी नगर का पानी फेल सैंपल्स दे चुका है। पानी में पाया गया ई-कोलाई बैक्टीरिया वही है, जो इंदौर के भागीरथपुरा में पाया गया था और जिसके कारण अब तक 20 लोगों की मौत हो चुकी है।
    भोपाल का ग्राउंड वाटर वर्तमान में पीने योग्य नहीं है और स्थानीय लोगों को सुरक्षित पानी की तत्काल आवश्यकता है। प्रशासन और पर्यावरण एजेंसियों को मिलकर पानी की सफाई और कचरा प्रबंधन के लिए सख्त कदम उठाने होंगे, ताकि जनता की जान और स्वास्थ्य सुरक्षित रह सके।

  • ज्योतिरादित्य सिंधिया और बुआओं के बीच संपत्ति विवाद में बॉम्बे हाईकोर्ट से अतिरिक्त समय

    ज्योतिरादित्य सिंधिया और बुआओं के बीच संपत्ति विवाद में बॉम्बे हाईकोर्ट से अतिरिक्त समय


    ग्वालियर। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनकी बुआओं वसुंधरा राजे, ऊषा राजे और यशोधरा राजे के बीच चल रहे संपत्ति विवाद में अब राजीनामा दाखिल करने की समय सीमा बढ़ा दी गई है। यह मामला लंबे समय से न्यायालयों में विचाराधीन है और इसके समाधान के लिए दोनों पक्ष समझौते की प्रक्रिया में हैं। ग्वालियर खंडपीठ में बुआओं की ओर से दायर आवेदन में बताया गया कि बॉम्बे हाईकोर्ट में लंबित मामले की अगली सुनवाई 10 फरवरी 2026 को निर्धारित है।
    बुआओं की ओर से कोर्ट से अनुरोध किया गया कि पहले से तय 90 दिनों की अवधि को बढ़ाकर अतिरिक्त 30 दिन दिया जाए, ताकि समझौते की सभी औपचारिकताएं पूरी की जा सकें। कोर्ट ने इस आवेदन को मंजूरी दे दी है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि दोनों पक्ष बिना किसी बाधा के विवाद का समाधान कर सकें और समझौते को विधिक रूप से अंतिम रूप दिया जा सके।

    यह संपत्ति विवाद मूल रूप से 2010 में जिला न्यायालय, ग्वालियर में दर्ज हुआ था। तब से लेकर अब तक यह मामला लंबित है और 2017 में इसे हाईकोर्ट में स्थानांतरित किया गया। विवाद मुख्य रूप से सिंधिया और उनकी बुआओं के बीच पारिवारिक संपत्ति के बंटवारे को लेकर है। बुआओं और भतीजे दोनों पक्ष चाहते हैं कि यह विवाद समझौते के माध्यम से समाप्त हो जाए, ताकि लंबित कानूनी प्रक्रियाओं का बोझ खत्म हो सके।

    सितंबर 2025 में जिला न्यायालय ने याचिका का निस्तारण करते हुए दोनों पक्षों को 90 दिनों में समझौता पेश करने का निर्देश दिया था। लेकिन बॉम्बे हाईकोर्ट में लंबित केस के कारण यह समय पूरा नहीं हो पाया। अब हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि लंबित मामले के निस्तारण के बाद दोनों पक्षों को समझौता दाखिल करने के लिए अतिरिक्त 30 दिन का समय मिलेगा।

    इससे यह सुनिश्चित होगा कि सभी औपचारिकताएं और कानूनी प्रक्रियाएं पूरी हों और किसी भी तरह का विवाद भविष्य में न उभरे।

    विशेषज्ञों के अनुसार, यह कदम पारिवारिक विवादों के शीघ्र समाधान के लिए अहम है। अक्सर लंबित कानूनी मामले सालों तक अटके रहते हैं और दोनों पक्षों के बीच मतभेद बढ़ते हैं। ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनकी बुआओं के मामले में भी यह समय वृद्धि पारिवारिक समझौते को सुरक्षित और न्यायसंगत तरीके से पूरा करने की दिशा में महत्वपूर्ण है।

    इस मामले से जुड़े जानकार बताते हैं कि समझौते की प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखना आवश्यक है।

    इसमें संपत्ति के बंटवारे, कानूनी अधिकारों की पुष्टि और किसी भी वित्तीय या प्रशासनिक बाधा का समाधान शामिल है। अतिरिक्त 30 दिन की अवधि दोनों पक्षों को ये सुनिश्चित करने का अवसर देती है कि समझौते में सभी औपचारिकताएं और दस्तावेज़ सही तरीके से तैयार किए जाएं।

    कुल मिलाकर, यह कदम ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनकी बुआओं के बीच लंबित संपत्ति विवाद को शांतिपूर्ण और कानूनी ढंग से समाप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है। कोर्ट की अनुमति से दोनों पक्ष बिना किसी दबाव के समझौता अंतिम रूप दे सकेंगे। इससे परिवार के बीच तनाव कम होगा और लंबित न्यायिक प्रक्रियाओं का बोझ भी घटेगा।

    इस मामले की अगली सुनवाई 10 फरवरी 2026 को बॉम्बे हाईकोर्ट में होगी, जिसके बाद अतिरिक्त 30 दिनों में समझौते की औपचारिकताएं पूरी की जाएंगी। इस प्रक्रिया के सफलतापूर्वक पूर्ण होने से परिवार के सभी सदस्यों के बीच संपत्ति विवाद का स्थायी समाधान निकलने की संभावना है।

  • रेत माफिया के खिलाफ ग्रामीणों का उग्र आंदोलन: महाकाल मिनरल्स पर अवैध उत्खनन का आरोप, ट्रकों की लंबी कतार

    रेत माफिया के खिलाफ ग्रामीणों का उग्र आंदोलन: महाकाल मिनरल्स पर अवैध उत्खनन का आरोप, ट्रकों की लंबी कतार


    शहडोल । शहडोल मध्यप्रदेश के शहडोल जिले में रेत माफिया के खिलाफ ग्रामीणों का आक्रोश सड़कों पर फूट पड़ा है। उमरिया जिले की महाकाल मिनरल्स कंपनी के खिलाफ ग्राम पंचायत पोड़ी कलां के ग्रामीणों ने मोर्चा खोल दिया है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि महाकाल मिनरल्स कंपनी ने शहडोल जिले के अमिलिया टेढ़ी घाट में अवैध रूप से रेत का उत्खनन शुरू कर दिया है और यह कंपनी उमरिया जिले की सीमा को लांघकर इस क्षेत्र में रेत खनन कर रही है।

    अवैध उत्खनन पर विरोध

    ग्रामीणों ने रेत से लदे ओवरलोड ट्रकों को रोककर धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया है, जिससे मौके पर ट्रकों की लंबी कतारें लग गईं। उनका कहना है कि भारी मशीनों और ओवरलोड वाहनों के द्वारा न केवल नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं, बल्कि इस गतिविधि से पर्यावरण को भी गंभीर नुकसान हो रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि उन्होंने इस अवैध उत्खनन की शिकायत पहले ही जिला प्रशासन से की थी, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है, जिसके चलते उन्हें इस आंदोलन को शुरू करने पर मजबूर होना पड़ा है।

    सड़कें हो रही हैं क्षतिग्रस्त

    ग्रामीणों का कहना है कि ओवरलोड रेत परिवहन के कारण क्षेत्रीय सड़कें बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो रही हैं, जिससे हादसों का खतरा बढ़ गया है। इसके साथ ही, नदी का प्राकृतिक स्वरूप भी बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। इन समस्याओं को लेकर ग्रामीणों में गहरा आक्रोश है और वे प्रशासन से तत्काल सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

    तहसीलदार पर हमला: आक्रोश और बढ़ा

    हाल ही में, ब्यौहारी में तहसीलदार पर रेत माफिया द्वारा कथित हमला और उन्हें जान से मारने की धमकी देने का मामला सामने आया था। इस घटना के बाद ग्रामीणों में और भी अधिक गुस्सा फूट पड़ा है, और अब वे खुलकर रेत माफिया के खिलाफ विरोध कर रहे हैं। इस घटना ने स्थिति को और भी तनावपूर्ण बना दिया है।

    आंदोलन को उग्र करने की चेतावनी

    यादव महासभा के जिला उपाध्यक्ष हेमराज यादव ने कहा महाकाल मिनरल्स कंपनी द्वारा उमरिया जिले की सीमा से बाहर आकर खुलेआम रेत का उत्खनन किया जा रहा है। हमने प्रशासन को इसकी जानकारी दी थी, लेकिन कार्रवाई न होने से माफियाओं के हौसले बुलंद हो गए हैं। यदि अवैध उत्खनन तुरंत बंद नहीं हुआ तो हम आंदोलन को और उग्र करेंगे।

    प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग

    ग्रामीणों का कहना है कि अगर जल्द ही प्रशासन ने इस मामले में कार्रवाई नहीं की, तो वे अपना आंदोलन और तेज करेंगे। फिलहाल, मौके पर स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है और ग्रामीण जिला प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग पर अड़े हुए हैं। यह आंदोलन केवल रेत माफिया के खिलाफ ही नहीं, बल्कि क्षेत्रीय सुरक्षा और पर्यावरणीय संतुलन के लिए भी एक गंभीर सवाल उठाता है। अब देखना होगा कि जिला प्रशासन इस स्थिति से कैसे निपटता है और क्या रेत माफिया के खिलाफ प्रभावी कदम उठाए जाते हैं।

  • शाहिद कपूर ने विशाल भारद्वाज की ओ रोमियो का इंटेंस फर्स्ट लुक जारी किया, फिल्म इस तारीख को रिलीज होगी

    शाहिद कपूर ने विशाल भारद्वाज की ओ रोमियो का इंटेंस फर्स्ट लुक जारी किया, फिल्म इस तारीख को रिलीज होगी

    नई दिल्‍ली ।  एक्टर शाहिद कपूर ने शुक्रवार, 9 जनवरी को अपनी आने वाली फिल्म ओ रोमियो का शानदार फर्स्ट-लुक पोस्टर जारी किया, जिससे फैंस उनके दमदार और खून से सने अवतार को देखकर उत्सुक हो गए। सोशल मीडिया पर पोस्टर शेयर करते हुए, शाहिद ने कैप्शन दिया, “रोमियो ओ रोमियो तुम कहाँ हो ओ’रोमियो!” और घोषणा की कि फिल्म का ट्रेलर 10 जनवरी को रिलीज होगा।
    शाहिद ने ओ रोमियो का फर्स्ट लुक जारी किया
    पोस्टर में, शाहिद मुंह खोलकर चिल्लाते हुए दिख रहे हैं, उनका चेहरा, गर्दन और हाथ खून से सने हुए हैं और उन पर कट और चोट के निशान हैं और टैटू बने हुए हैं। एक डार्क, आंशिक रूप से बिना बटन वाली शर्ट पहने, बेल्ट, अंगूठियां, ब्रेसलेट और एक चेन नेकलेस के साथ, एक्टर में एक कच्ची तीव्रता दिख रही है, जो एक डार्क और भावनात्मक रूप से चार्ज कहानी का संकेत देती है। पोस्ट के साथ कैप्शन में लिखा था, “#ORomeo की दुनिया की एक झलक देखें। कल आ रहा है!” फिल्म साजिद नाडियाडवाला द्वारा प्रस्तुत की गई है और 13 फरवरी को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है।
    शाहिद और विशाल के पिछले सहयोग
    ओ रोमियो शाहिद कपूर और जाने-माने फिल्म निर्माता विशाल भारद्वाज के बीच एक और सहयोग है, यह जोड़ी शक्तिशाली और अपरंपरागत सिनेमा देने के लिए जानी जाती है। दोनों ने पहले समीक्षकों द्वारा प्रशंसित फिल्मों जैसे कमीने (2009) और हैदर (2014) में एक साथ काम किया है, दोनों में शाहिद ने अपने कुछ सबसे बेहतरीन प्रदर्शन किए हैं। उनके सहयोग गहन कहानी कहने, परतदार किरदारों और बोल्ड कहानियों के लिए जाने जाते हैं, जिससे ओ रोमियो के उनकी फिल्मोग्राफी में एक और जुड़ाव होने की उम्मीद बढ़ गई है।
    ओ रोमियो के बारे में और जानें
    ओ रोमियो को शेक्सपियर के रोमियो और जूलियट से प्रेरित एक आधुनिक, डार्क रीइमेजिनिंग के रूप में वर्णित किया गया है, जो एक कठोर और हिंसक पृष्ठभूमि पर आधारित है। फिल्म प्यार, जुनून, क्रोध और विश्वासघात के विषयों की पड़ताल करती है, जिसमें शाहिद का किरदार एक ऐसी दुनिया में घूमता है जो क्रूरता और भावनात्मक उथल-पुथल से भरी हुई है। फिल्म में तृप्ति डिमरी फीमेल लीड के रूप में हैं। विशाल भारद्वाज द्वारा निर्देशित, ओ रोमियो स्टाइलिश हिंसा, काव्यात्मक कहानी कहने और दिल को छू लेने वाले संगीत का मिश्रण होने का वादा करती है, जो फिल्म निर्माता की सिग्नेचर शैली की पहचान है।
  • इंदौर एमवाय अस्पताल में फिर लापरवाही: चेस्ट वार्ड में डेढ़ माह के मासूम का अंगूठा कटा, नर्स सस्पेंड

    इंदौर एमवाय अस्पताल में फिर लापरवाही: चेस्ट वार्ड में डेढ़ माह के मासूम का अंगूठा कटा, नर्स सस्पेंड


    इंदौर । इंदौर प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी अस्पतालों में शुमार एमवाय अस्पताल एक बार फिर गंभीर लापरवाही के कारण सुर्खियों में है। चूहा कांड के बाद अब अस्पताल में एक और शर्मनाक घटना सामने आई है, जिसमें एक डेढ़ माह के मासूम का अंगूठा कट गया। यह घटना चेस्ट वार्ड में हुई, जहां एक नर्स की लापरवाही के कारण मासूम का अंगूठा काटा गया। इस घटना के बाद अस्पताल प्रशासन में हड़कंप मच गया और तत्काल कार्रवाई की गई।

    घटना का विवरण

    बताया जा रहा है कि बेटमा से निमोनिया के इलाज के लिए एक मासूम को एमवाय अस्पताल के चेस्ट वार्ड में भर्ती कराया गया था। यहां, नर्स ने बच्चे के हाथ पर लगे टेप को काटने के लिए कैंची का इस्तेमाल किया। लापरवाही से कैंची बच्चे के अंगूठे पर लग गई, जिससे उसका अंगूठा कट गया। घटना के बाद बच्चे के परिजन आक्रोशित हो गए और अस्पताल प्रशासन पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए।

    अस्पताल प्रशासन की कार्रवाई

    इस गंभीर लापरवाही को लेकर अस्पताल प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए संबंधित नर्स को सस्पेंड कर दिया। इसके साथ ही तीन नर्सिंग इंचार्ज का वेतन रोकने की भी कार्रवाई की गई। अस्पताल प्रशासन ने इस घटना की जांच के आदेश दिए हैं और कहा है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे।

    बच्चे का उपचार

    हालांकि, इस घटना के बाद बच्चे की स्थिति गंभीर थी, लेकिन उसे इंदौर के सुपर स्पेशलिटी अस्पताल रेफर किया गया, जहां प्लास्टिक सर्जन की टीम ने ऑपरेशन कर कटे हुए अंगूठे को सफलतापूर्वक ठीक कर दिया। एमजीएम मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. अरविंद घनघोरिया ने बताया कि बच्चे की हालत स्थिर है और उसे निगरानी में रखा गया है।

    पहले भी विवादों में रहा अस्पताल

    यह पहला मामला नहीं है, जब एमवाय अस्पताल विवादों में आया हो। इससे पहले भी नवजात बच्चों को चूहों द्वारा कुतरे जाने की घटनाएं सामने आई थीं, जिससे अस्पताल की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े हुए थे। लगातार ऐसी लापरवाहियां सामने आने के बाद अब अस्पताल प्रशासन को सख्त कार्रवाई की जरूरत है, ताकि मरीजों और उनके परिजनों का विश्वास बना रहे।

  • मऊगंज में खाकी का गवाह घोटाला: पुलिस के 'सुपर गवाह' ने खोला तंत्र का कच्चा चिट्ठा, 1000 मुकदमे और सिर्फ 6 चेहरे

    मऊगंज में खाकी का गवाह घोटाला: पुलिस के 'सुपर गवाह' ने खोला तंत्र का कच्चा चिट्ठा, 1000 मुकदमे और सिर्फ 6 चेहरे


    मऊगंज । मऊगंज अभय मिश्रा मऊगंज जिले के नईगढ़ी और लौर थाने में पुलिस द्वारा गवाहों के नाम पर एक बड़े घोटाले का पर्दाफाश हुआ है जो ना सिर्फ कानून की धज्जियां उड़ाने वाला है, बल्कि न्याय व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करता है। यहां पर ऐसे सुपर गवाह सामने आए हैं, जो एक ही दिन में 7-7 मुकदमों में गवाही देते हैं और हर मामले में वही चेहरा दिखाई देता है। इन गवाहों में प्रमुख नाम है अमित कुशवाहा का जो अब तक 500 से ज्यादा मामलों में गवाही दे चुका है।

    गवाहों के नाम पर खेल

    अमित कुशवाहा, जो खुद एक सरकारी वाहन चालक है, मऊगंज पुलिस के पॉकेट गवाह के रूप में सामने आया है। आश्चर्यजनक रूप से, 2020 की एक FIR में उसकी उम्र 20 साल दर्ज की जाती है, जबकि 5 साल बाद 2025 की FIR में उसकी उम्र केवल 21 साल बताई जाती है। यह सवाल खड़ा करता है कि क्या मऊगंज पुलिस ने जानबूझकर यह गवाह तैयार किया है। RTI के जवाब में पुलिस ने दावा किया था कि अमित कुशवाहा उनका वाहन चालक नहीं है, लेकिन जब उसे सरकारी गाड़ी चलाते पकड़ा गया तो यह सफाई पूरी तरह से झूठी साबित हो गई। इसके अलावा यह भी तथ्य सामने आया है कि अमित कुशवाहा थाना प्रभारी जगदीश सिंह ठाकुर के साथ हमेशा रहता है और जहां-जहां साहब का तबादला होता है वह गवाही देने पहुंच जाता है।

    पुलिसिया तंत्र की पोल
    टीम ने यह भी खुलासा किया कि गवाही देने वाले इसी पॉकेट गवाह के जरिए पुलिस ने दर्जनों निर्दोषों को सलाखों के पीछे डाला। उदाहरण के तौर पर जहरीली शराब मामले में 20 से अधिक लोगों पर एफआईआर दर्ज की गई जिसमें अमित कुशवाहा गवाह बना। यह मामला सिर्फ एक उदाहरण था क्योंकि ऐसे कई मामलों में गवाह वही चेहरा नजर आता है जिससे पुलिस ने तंत्र को पूरी तरह से मजाक बना दिया। नईगढ़ी थाना प्रभारी जगदीश सिंह ठाकुर का नाम इस पूरे खेल में सबसे ऊपर है, क्योंकि उनके कार्यकाल में गवाहों के इस सिंडिकेट का पूरी तरह से विस्तार हुआ। इनका ट्रैक रिकॉर्ड विवादों से भरा पड़ा है जिसमें बिछिया थाने में एक निर्दोष व्यक्ति की पिटाई के मामले में मानवाधिकार आयोग ने जुर्माना लगाया था लेकिन इसके बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।

    किसकी हो रही है सुनवाई

    मऊगंज के इस मामले में आरोप है कि पुलिस ने 80 साल के बुजुर्ग नंदकुमार तिवारी को आधी रात को लॉकअप में डाल दिया। उनके खिलाफ कोई ठोस आरोप नहीं था बस उन्होंने पुलिस की रात में मौजूदगी पर सवाल उठाया था। वायरल ऑडियो में पुलिसकर्मी खुद स्वीकार कर रहे हैं कि उनके पास शराब नहीं बल्कि पेट्रोल था फिर भी आरोप आबकारी का बनाया गया और गवाह वही पुलिस का चहेता अमित कुशवाहा।

    सिंडीकेट का बड़ा खुलासा

    नईगढ़ी और लौर थाने में पॉकेट गवाहों की पूरी फौज खड़ी कर दी गई है, जिनमें राहुल विश्वकर्मा, दिनेश कुशवाहा जैसे नाम शामिल हैं, जो थाने में चपरासी तक के काम करते हैं। यह मामला अब राज्य की सियासत के लिए एक बड़ी चुनौती बन चुका है। समाजसेवी कुंजबिहारी तिवारी ने इस संगठित अपराध की शिकायत मुख्यमंत्री, डीजीपी, आईजी और लोकायुक्त से की है। उनके पास साक्ष्य और वीडियो प्रमाण हैं, जो पुलिस के खिलाफ गवाही दे रहे हैं।

    सीसीटीएनएस पोर्टल और मैनुअल जांच
    मऊगंज पुलिस का गवाह घोटाला अब सीसीटीएनएस पोर्टल के जरिए सामने आया है, जहां पर दर्ज डिजिटल रिकॉर्ड से इस पूरे तंत्र का खुलासा हुआ है। जानकारों का मानना है कि अगर मैनुअल FIR और पुरानी केस डायरियों की निष्पक्ष जांच की जाए तो यह आंकड़ा कई गुना बढ़ सकता है, जो मऊगंज के नईगढ़ी और लौर थाना पुलिस के ताबूत में आखिरी कील साबित हो सकता है।

    न्याय के गले में फंसा ताला
    क्या खाकी अब बेगुनाहों की जिंदगी से खेल रही है यह सवाल मऊगंज की पुलिस पर ही नहीं पूरे न्यायिक तंत्र पर भी है। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अमानुल्लाह ने हाल ही में पॉकेट गवाहों पर सख्त टिप्पणी करते हुए इसे न्याय का कत्ल बताया था लेकिन मऊगंज का यह मामला पूरी तरह से पुलिसिया तंत्र की पोल खोलने का काम कर रहा है। अब सवाल यह है कि इस घोटाले पर कब कार्रवाई होगी ।

  • Winter Hair Care Tips: नारियल तेल में ऐसे मिलाएं आंवला, फिर बालों पर करें अप्लाई, झड़ने की समस्या होगी खत्म

    Winter Hair Care Tips: नारियल तेल में ऐसे मिलाएं आंवला, फिर बालों पर करें अप्लाई, झड़ने की समस्या होगी खत्म

    नई दिल्‍ली । ठंड के मौसम में हवा में नमी कम हो जाती है, जिससे सिर की त्वचा रूखी होने लगती है. स्कैल्प ड्राई होने से बालों की जड़ें कमजोर पड़ती हैं और बाल झड़ने लगते हैं. इसके अलावा ठंड में पानी कम पीना और धूप की कमी भी बालों के झड़ने का बड़ा कारण बनती है.

    सर्दियों में खानपान में लापरवाही से शरीर में आयरन, प्रोटीन और विटामिन्स की कमी हो जाती है. खासकर विटामिन-सी, विटामिन-ई और बायोटिन की कमी बालों की ग्रोथ को प्रभावित करती है, जिससे हेयर फॉल की समस्या बढ़ जाती है.
    ठंड में अक्सर लोग गर्म पानी से सिर धोते हैं, जिससे स्कैल्प का नैचुरल ऑयल खत्म हो जाता है. बार-बार शैंपू करना, गीले बालों में कंघी करना और हेयर ड्रायर का ज्यादा इस्तेमाल भी बाल झड़ने का कारण बनता है.
    ब्यूटी एक्सपर्ट रिजवाना परवीन बताती है कि सर्दियों में हल्के गुनगुने पानी से ही बाल धोएं और हफ्ते में दो बार से ज्यादा शैंपू न करें. नारियल, सरसों या तिल के तेल से नियमित मालिश करें. साथ ही हरी सब्जियां, फल, सूखे मेवे और पर्याप्त पानी को डाइट में शामिल करें.
    उन्होंने कहा कि आंवले का तेल बालों के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है. इसमें भरपूर मात्रा में विटामिन-सी और एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं, जो बालों की जड़ों को मजबूत करते हैं, समय से पहले सफेद होने से रोकते हैं और बालों में प्राकृतिक चमक लाते हैं.
    उन्होंने कहा कि घर पर आंवला तेल बनाने के लिए 5–6 ताजे आंवले, 250 मिली नारियल या तिल का तेल और एक साफ कांच की बोतल लें. आंवले को अच्छे से धोकर छोटे टुकड़ों में काट लें या कद्दूकस कर लें.
    कढ़ाही में तेल डालकर धीमी आंच पर गरम करें और उसमें आंवला डाल दें. जब आंवला काला पड़ जाए और तेल से खुशबू आने लगे तो गैस बंद कर दें. ठंडा होने पर तेल को छानकर कांच की बोतल में भर लें. यह तेल 2–3 महीने तक सुरक्षित रहता है.
    उन्होंने कहा कि हफ्ते में 2–3 बार आंवला तेल से हल्के हाथों से सिर की मालिश करें और 1–2 घंटे बाद बाल धो लें. नियमित इस्तेमाल से बाल झड़ना कम होता है, डैंड्रफ दूर होता है और बाल घने, मजबूत और चमकदार बनते हैं.