Author: bharati

  • निपटने की तैयारी में भारत, इजराइल से मिसाइल डिफेंस डील

    निपटने की तैयारी में भारत, इजराइल से मिसाइल डिफेंस डील


    नई दिल्‍ली। भारत का डिफेंस सेक्‍टर अभी भी मुख्‍य रूप से विदेशी खरीद पर निर्भर है. पिछले कुछ सालों में इसमें काफी बदलाव आया है. ‘आत्‍मनिर्भर भारत’ के सूत्र के साथ देश आगे बढ़ रहा है. यही वजह है कि अब भारत भी एक महत्‍वपूर्ण हथियार विक्रेता देश बनता जा रहा है. आंकड़े इसकी गवाही दे रहे हैं.
    भारत के पश्चिमी बॉर्डर पर पाकिस्‍तान तो पूर्वी सीमा पर चीन स्थित है. इन दोनों देशों का रुख भारत के प्रति शत्रुतापूर्ण रहा है. अतीत में हुए युद्ध इसकी गवाही देते हैं. ऐसे में भारत के लिए एक साथ दो मोर्चों पर युद्ध जैसी स्थिति से निपटने की तैयारी करना अनिवार्य है. ऑपरेशन सिंदूर के बाद दोस्‍त और दुश्‍मन की पहचान और भी स्‍पष्‍ट हो चुकी है. बदले सामरिक माहौल को देखते हुए भारत अपने डिफेंस सिस्‍टम को मजबूत और अपडेट करना शुरू कर दिया है.
    आर्मी, एयरफोर्स और नेवी को महाबली बनाने की प्रक्रिया लगातार जारी है. नेवी में अब हर 6 सप्‍ताह के बाद एक युद्धपोत को शामिल करने की प्‍लानिंग है तो वहीं आर्मी ड्रोन फ्लीट बनाने की दिशा में लगातार आगे बढ़ रही है. एयरफोर्स के लिए भी हजारों करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं. फाइटर जेट से लेकर एयर टू एयर और एयर टू सर्फेस मिसाइल को बेड़े में शामिल किया जा रहा है. प्रिसीजन गाइडेड बम की खरीद भी चल रही है. इसके अलावा एयर डिफेंस सिस्‍टम प्रोजेक्‍ट के तहत देश को किसी भी तरह के एरियल थ्रेट से सुरक्षित करने पर लगातार काम चल रहा है. इन सबके बीच एक और बड़ी खबर सामने आई है. भारत मित्र देश इजरायल से कटिंग एज वेपन, मिसाइल और बम खरीदने के लिए बड़ी डील करने की तैयारी में है. इनमें से कुछ मिसाइल की रेंज 300 से 400 किलोमीटर तक है. मतलब घर बैठे बटन दबाते ही लाहौर में तबाही लाई जा सकती है. लाहौर भारतीय सीमा के करीब स्थित बड़ा शहर है.

    जानकारी के अनुसार, भारत और इज़राइल के बीच रक्षा सहयोग एक नए और अहम दौर में प्रवेश कर रहा है. ‘एक रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय वायुसेना (IAF) को और अधिक ताकतवर बनाने के लिए भारत इजरायल से लगभग 8.7 अरब डॉलर (₹78217 करोड़) की डिफेंस डील करने की तैयारी में है. इस पैकेज में अत्याधुनिक SPICE-1000 प्रिसिजन गाइडेड बम, रैम्पेज मिसाइल, एयर लोरा (Air LORA) और आइस ब्रेकर (Ice Breaker) जैसी आधुनिक मिसाइलें शामिल हैं. इस प्रस्ताव को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता वाली डिफेंस एक्विज़िशन काउंसिल (DAC) से मंजूरी मिल चुकी है. यह सौदा ऐसे समय में हो रहा है, जब भारत को अपनी सीमाओं पर कई तरह की सुरक्षा चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है. एक ओर वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर चीन की उन्नत एयर डिफेंस तैनाती है, वहीं दूसरी ओर पाकिस्तान की ओर से GPS जैमिंग जैसी तकनीकों का इस्तेमाल देखा गया है, खासकर मई 2025 में हुए ऑपरेशन ‘सिंदूर’ के दौरान.

    ऐसे में भारत की यह खरीद उसकी रणनीतिक जरूरतों को दर्शाती है. आंकड़ों के अनुसार, 2020 से 2024 के बीच इजरायल के कुल रक्षा निर्यात का 34 प्रतिशत भारत को गया, जिससे भारत इजरायल का सबसे बड़ा रक्षा खरीदार बन गया है. इस नए पैकेज में सिर्फ मिसाइलें ही नहीं, बल्कि एयर-टू-एयर मिसाइलें, लोइटरिंग म्यूनिशन, आधुनिक रडार, सिमुलेटर और नेटवर्क आधारित कमांड सिस्टम भी शामिल हैं.
    रैम्पेज मिसाइल: भरोसेमंद वेपन
    रैम्पेज मिसाइल, जिसे इज़राइल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज (IAI) ने विकसित किया है, पहले से ही भारतीय वायुसेना और नौसेना के पास मौजूद है. यह मिसाइल Su-30MKI, MiG-29, Jaguar और MiG-29K जैसे विमानों से दागी जा सकती है. करीब 570 किलो वजनी यह मिसाइल GPS/INS गाइडेंस से लैस है और इसमें एंटी-जैमिंग क्षमता भी है. रैम्पेज का इस्तेमाल दुश्मन के एयरबेस, बंकर, कंट्रोल टावर और लॉजिस्टिक ठिकानों पर दूर से हमला करने के लिए किया जा सकता है. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों पर इसकी प्रभावशीलता देखी गई थी.
  • स्पेस स्टेशन में खराब हुई एस्ट्रोनॉट की तबीयत, जानिए NASA ने क्‍या लिया फैसला

    स्पेस स्टेशन में खराब हुई एस्ट्रोनॉट की तबीयत, जानिए NASA ने क्‍या लिया फैसला

    न्यूयॉर्क। अमेरिका की अंतरिक्ष एजेंसी NASA ने एक दुर्लभ फैसला लेते हुए अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन यानी कि ISS पर चल रहे एक मिशन को जल्दी खत्म करने का ऐलान किया है। NASA ने कहा कि एक अंतरिक्ष यात्री की स्वास्थ्य संबंधी समस्या के कारण यह फैसला लेना पड़ा है। स्पेस एजेंसी ने गुरुवार को बताया कि अमेरिका-जापान-रूस के 4 अंतरिक्ष यात्रियों की टीम अब तय किए गए प्लान से पहले ही अगले कुछ दिनों में पृथ्वी पर लौट आएगी। इस स्वास्थ्य समस्या की वजह से NASA ने नए साल की पहली स्पेसवॉक को भी रद्द कर दिया।

    NASA के मुख्य स्वास्थ्य अधिकारी ने क्या कहा?
    NASA ने मरीज की निजता का हवाला देते हुए प्रभावित अंतरिक्ष यात्री का नाम या बीमारी का विवरण नहीं बताया। हालांकि, NASA ने साफ किया कि अंतरिक्ष यात्री अब स्थिर स्थिति में है। एजेंसी के मुख्य स्वास्थ्य और चिकित्सा अधिकारी डॉ. जेम्स पोल्क ने कहा कि यह कोई आपात स्थिति नहीं है, लेकिन हम अंतरिक्ष यात्री की सुरक्षा के लिए सतर्कता बरत रहे हैं।

    उन्होंने बताया कि अंतरिक्ष स्टेशन से यह NASA का यह पहला मेडिकल एग्जिट होगा, हालांकि पहले दांत दर्द या कान के दर्द जैसी छोटी समस्याओं का इलाज स्टेशन पर ही किया गया है।
    कम से कम 6 महीने रहने की योजना थी

    पृथ्वी पर लौट रही 4 सदस्यीय टीम SpaceX के यान से अगस्त में अंतरिक्ष स्टेशन पहुंची थी और उसकी वहां कम से कम 6 महीने रहने की योजना थी। टीम में NASA के जीना कार्डमैन और माइक फिंके, जापान के किमिया युई तथा रूस के ओलेग प्लातोनोव शामिल हैं। फिंके और कार्डमैन को स्पेसवॉक करके अंतरिक्ष स्टेशन के लिए एक्स्ट्रा बिजली प्रदान करने वाले नए सोलर पैनल की तैयारी करनी थी।

    यह फिंके का अंतरिक्ष स्टेशन का चौथा दौरा जबकि युई का दूसरा दौरा था। कार्डमैन और प्लातोनोव पहली बार अंतरिक्ष यात्रा पर गए हैं।
    स्पेस स्टेशन पर 3 अन्य अंतरिक्ष यात्री भी मौजूद

    बता दें कि इस समय अंतरिक्ष स्टेशन पर 3 अन्य अंतरिक्ष यात्री भी हैं। इनमें NASA के क्रिस विलियम्स तथा रूस के सर्गेई मिकाएव और सर्गेई कुद-सेवर्चकोव शामिल हैं। ये नवंबर में सोयुज रॉकेट से 8 महीने के लिए स्पेस स्टेशन पर रहने के लिए आए थे। अब ये तीनों अंतरिक्ष यात्री गर्मियों में लौटेंगे। NASA ने SpaceX को अंतरिक्ष स्टेशन को 2030 के अंत या 2031 की शुरुआत में समुद्र के ऊपर सुरक्षित तरीके से कक्षा से बाहर करने की जिम्मेदारी सौंपी है।

  • भारतीय सेना का सुपर रोबोटिक डॉग, एक रिमोट से चढ़ जाएगा ऊंची पहाड़ों पर

    भारतीय सेना का सुपर रोबोटिक डॉग, एक रिमोट से चढ़ जाएगा ऊंची पहाड़ों पर


    जयपुर। भारतीय सेना में शामिल हुए रोबोटिक म्यूल ने सेना का काम काफी आसान कर दिया है। दुर्गम स्थानों पर गोला बारूद, हथियार या भोजन सामग्री सहित अन्य सामान पहुंचाने में अब रोबोटिक म्यूल का इस्तेमाल किया जाने लगा है। दो साल पहले इसे भारतीय सेना में शामिल किया गया था। इससे पहले भारी भरकम सामान सैनिकों को अपने कंधों पर ले जाना पड़ता था लेकिन अब यह काम रोटोबिट म्यूल करता है।
    आम भाषा में लोग इसे रोबोट डॉग के नाम से जानते हैं।

    ऊंची पहाड़ी हो या उबड़ खाबड़ रास्ता, नहीं डगमगाता
    साल 2023 में इस रोबोटिक म्यूल को मिलिट्री इंटेलिजेंस में शामिल किया गया। जैसे एक इंसान जमीन पर चलता है। ठीक वैसे ही यह रोबोटिक म्यूल चलता है। चाहे ऊंची पहाड़ी हो, उबड़ खाबड़ रास्ता हो, अचानक चढाई या ढलान हो। हर तरह के दुर्गम रास्तों में यह रोबोटिक म्यूल आसानी से चल सकता है। इसे रिमोट के जरिए कंट्रोल किया जाता है। आर्मी ऑफिसर कहते हैं कि इस रोबोटिक म्यूल के चारों ओर कैमरे लगे होते हैं। रिमोट से कंट्रोल करने वाला जवान इस पर नजर रखता है। जहां रास्ता दिखाई देता है, उस दिशा में इसे चलाया जाता है। इसकी कोई रेंज लिमिट नहीं हैं। जहां तक नेटवर्क मिलता रहेगा। तब तक इसे कंट्रोल करते हुए चलाया जा सकता है।

    रात्रि गश्त करने में भी माहिर
    यह रोबोटिक म्यूल 1 क्विंटल तक वजन उठा सकता है। कहीं गोला बारूद पहुंचाना हो या सैन्य जवानों के लिए भोजन और दवाइयों सहित अन्य सामग्री भिजवानी हो। ऐसे में इस रोबोटिक म्यूल का उपयोग किया जाता है।

    यह नदी को भी पार कर सकता है और ऊंची पहाड़ी पर भी आसानी से चढ़ सकता है। इसके जरिए रात्रि गश्त भी की जाने लगी है। लेटेस्ट टेक्नोलॉजी के इलेक्ट्रो-ऑप्टिक्स और इंफ्रारेड टेक्नोलॉजी से लैस रोटोबिक म्यूल रात्रि गश्त करने में भी माहिर है। इन्हें एआई मोड से संचालित कर निगरानी रखी जा सकती है।

    आर्मी डे की परेड में शामिल रोबोटिक म्यूल
    आर्मी डे के मौके पर पहली बार सैन्य छावनी के बाहर जयपुर की सड़कों पर सेना परेड हो रही है। परेड में अलग-अलग रेजिमेंट की टुकड़ियों के साथ रोबोटिक म्यूल को भी शामिल किया गया है।

    जयपुर के भवानी निकेतन परिसर में लगाई गई सेना की प्रदर्शनी में भी रोबोटिक म्यूल का प्रदर्शन किया गया है।

    सर्दी और गर्मी बेअसर
    इस रोबोटिक म्यूल पर सर्दी और गर्मी का कोई असर नहीं होता है। सेना के अधिकारियों का कहना है कि यह माइनस 40 डिग्री सेल्सियस के तापमान में भी आसानी से चल सकता है और अधिकतम 55 डिग्री सेल्सियस के तापमान में भी चल सकता है। भारतीय सेना में यह आधुनिकीकरण का एक बड़ा हिस्सा है।

  • पाकिस्तान में 10 करोड़ से अधिक मोबाइल ब्लॉक

    पाकिस्तान में 10 करोड़ से अधिक मोबाइल ब्लॉक

    इस्‍ल्‍माबाद। पाकिस्तान टेलीकॉम अथॉरिटी (PTA) ने 2024-25 वित्तीय वर्ष में लगभग 10 करोड़ मोबाइल फोन्स को ब्लॉक किया है। चोरी, नकली और क्लोन किए गए फोन पर नकेल कसने के लिए यह अहम कदम उठाया गया है। इससे पाकिस्तान के मोबाइल मार्केट में बड़ा बदलाव आने की उम्मीद है। PTA ने ग्राहकों को सुरक्षित रखने के लिए डिवाइस आइडेंटिफिकेशन रजिस्ट्रेशन एंड ब्लॉकिंग सिस्टम (DIRBS) का इस्तेमाल किया है।
    इस कदम ने ना सिर्फ ग्राहकों को सुरक्षित किया बल्कि स्थानीय मोबाइल निर्माण को भी इससे काफी बढ़ावा मिला है। भारत को भी ऐसे सख्त कदम उठाने की जरूरत है।

    7.2 करोड़ नकली फोन हुए ब्लॉक
    PTA की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, ब्लॉक किए गए मोबाइल फोन में 7.2 करोड़ नकली या डुप्लीकेट फोन थे। इसके अलावा, 2.7 करोड़ ऐसे फोन थे, जिनके IMEI नंबर डुप्लीकेट या क्लोन किए गए थे। वहीं, 8.68 लाख हैंडसेट खोए हुए या चोरी के बताए गए थे। ये कार्रवाई पाकिस्तान के डिजिटल माहौल को सुरक्षित करने और ऐसे डिवाइस को मार्केट में आने से रोकने के लिए किए गए बड़े प्रयासों का हिस्सा है, जो ग्राहकों की सुरक्षा के लिए ठीक नहीं थे।
    क्या है DIRBS?
    आपकी जानकारी के लिए बता दें कि DIRBS को मोबाइल डिवाइस मैनेजमेंट (MDM) रेगुलेशन, 2021 के तहत लाया गया था। इस सिस्टम ने डिवाइस रजिस्ट्रेशन को नेटवर्क ऑथराइजेशन से जोड़ा है।

    सिस्टम की मदद से पाकिस्तान में स्मगलिंग और अनऑथराइज्ड डिवाइस के इस्तेमाल को बहुत कम कर दिया गया है। इस कारण पाकिस्तानी नेटवर्क पर सिर्फ वेरिफाइड और नियमों का पालन करने वाले डिवाइस ही काम कर सकेंगे।

    पाकिस्तान में बने मोबाइल का हो रहा ज्यादा इस्तेमाल
    PTA द्वारा उठाए गए इस कदम की मदद से स्थानीय मोबाइल निर्माण में भारी वृद्धि भी देखने को मिली। 2025 तक, पाकिस्तान में इस्तेमाल होने वाले 95% से अधिक डिवाइस वहीं बने थे। इसमें 68% स्मार्टफोन शामिल हैं।

    पाकिस्तान में कुल 36 कंपनियों को निर्माण करने की अनुमति मिली है। इनमें सैमसंग, शाओमी, ओप्पो और वीवो जैसी बड़ी कंपनियां भी शामिल हैं।

    रेवन्यू में हुई बढ़ोतरी
    2019 से, व्यक्तिगत मोबाइल डिवाइस रजिस्ट्रेशन से सरकार को 83 अरब रुपये से अधिक का रेवेन्यू मिला है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के कदमों से ग्राहकों को ना सिर्फ घटिया और नुकसान पहुंचाने वाले डिवाइसों से सुरक्षा मिलती है। साथ ही, यह स्थानीय उत्पादन और प्रौद्योगिकी विकास में निवेश को भी प्रोत्साहित करता है।

    भारत को भी उठाना चाहिए सख्त कदम
    एक्सपर्ट का कहना है कि सरकार को भी इस तरह का अहम कदम उठाना चाहिए। हाल ही में दिल्ली के करोल बाग में सैमसंग के नकली फोन बेचने वाले गिरोह का पर्दा फाश किया गया है। गिरोह कीमतों में सैमसंग के नकली प्रीमियम स्मार्टफोन्स को बेच रहा था, जिससे ग्राहकों की प्राइवेसी को नुकसान पहुंचा।

  • ट्रप ने 500% तक टैरिफ की अनुमति वाले बिल को दी मंजूरी… भारत-चीन ही नहीं, EU के लिए भी बड़ा अलार्म

    ट्रप ने 500% तक टैरिफ की अनुमति वाले बिल को दी मंजूरी… भारत-चीन ही नहीं, EU के लिए भी बड़ा अलार्म


    नई दिल्‍ली.
    रूस (Russia) से पेट्रोलियम आयात (Import Petroleum) करने वाले देशों (Countries) पर 500 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने की अनुमति देने वाले नए विधेयक को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) द्वारा मंजूरी दिए जाने से दुनिया में खलबली मची है. यह कदम सिर्फ भारत और चीन की नींद उड़ाने वाला नहीं है, बल्कि यूरोपीय संघ के लिए भी एक बड़ा ‘अलार्म’ है. अक्सर माना जाता है कि अमेरिकी प्रतिबंधों का निशाना सिर्फ प्रतिद्वंद्वी देश होते हैं, लेकिन यह नया विधेयक एक अलग ही कहानी बयां कर रहा है. भले ही यूरोपीय संघ (EU) ने यूक्रेन युद्ध के मुद्दे पर मॉस्को की कड़ी निंदा की हो, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि वह अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए अब भी रूसी संसाधनों पर निर्भर है.

    यूरोपीय संघ (EU) में 27 सदस्य देश हैं, जिनमें ऑस्ट्रिया, बेल्जियम, बुल्गारिया, क्रोएशिया, साइप्रस, चेक गणराज्य, डेनमार्क, एस्टोनिया, फिनलैंड, फ्रांस, जर्मनी, ग्रीस, हंगरी, आयरलैंड, इटली, लातविया, लिथुआनिया, लक्ज़मबर्ग, माल्टा, नीदरलैंड, पोलैंड, पुर्तगाल, रोमानिया, स्लोवाकिया, स्लोवेनिया, स्पेन और स्वीडन शामिल हैं. पहले ब्रिटेन (UK) भी ईयू में शामिल था लेकिन यह 2020 में इससे अलग हो गया था.

    ईयू भी खूब खरीद रहा रूसी तेल

    एक रिपोर्ट के अनुसार, सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (CREA) के आंकड़े चौंकाने वाले हैं. फरवरी 2022 से अब तक रूस ने ईंधन निर्यात से लगभग 1.2 ट्रिलियन डॉलर की कमाई की है. रूस के खजाने को भरने में तेल का हिस्सा 68 प्रतिशत रहा है, जबकि बाकी हिस्सा गैस और कोयले से आया है. आयातकों की सूची में चीन 245 अरब डॉलर की खरीद के साथ शीर्ष पर बैठा है, जबकि भारत 168 अरब डॉलर के साथ दूसरे स्थान पर है. यूरोपीय संघ ने 125 अरब डॉलर का रूसी ईंधन खरीदा है. यह आंकड़ा यह बताने के लिए काफी है कि ट्रंप की ‘टैरिफ गन’ की रेंज में यूरोपीय संघ के देश भी आएंगे.

    ट्रंप की धमकी का भारत पर असर नहीं
    नवंबर में चीन का रूस से तेल आया थोड़ा घटा, वहीं भारत का आयात अक्टूबर के 2.5 अरब यूरो से बढ़कर नवंबर में 2.6 अरब यूरो हो गया. भारत ने हमेशा अपने ‘व्यावसायिक हितों’ और ऊर्जा सुरक्षा को सर्वोपरि रखा है, लेकिन ट्रंप का यह 500% वाला नया समीकरण इस रणनीति की कड़ी परीक्षा लेने वाला है.

    दबाव की राजनीति या बातचीत का नया पैंतरा?
    विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप का यह कड़ा रुख वास्तव में रूस को झुकाने की सोची-समझी बिसात है. वे चाहते हैं कि रूस बातचीत की मेज पर आए और उन शर्तों को माने जो ट्रंप तय करना चाहते हैं. यह विधेयक रूस के आर्थिक रडार पर चलने वाले हर देश को एक संदेश है कि या तो वे अमेरिका के साथ व्यापार करें या फिर रूसी तेल की भारी कीमत चुकाने को तैयार रहें. हालांकि, ऊर्जा नीति विशेषज्ञ नरेंद्र तनेजा जैसे जानकारों का मानना है कि हमें जल्दबाजी में किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचना चाहिए. उनका तर्क है कि विधेयक का पारित होना एक बात है और प्रशासन द्वारा उसे पूरी कड़ाई से लागू करना दूसरी.


    भारत की चुनौतियां

    रूस फिलहाल भारत के कच्चे तेल का सबसे बड़ा स्रोत बना हुआ है. हालांकि, लुकोइल और रोसनेफ्ट जैसी रूसी कंपनियों पर बढ़ते प्रतिबंधों के कारण आने वाले समय में भारत की खरीद में कुछ गिरावट की संभावना है. भारत ने अब तक पश्चिमी दबाव को दरकिनार कर सस्ते रूसी तेल के दम पर अपनी अर्थव्यवस्था को महंगाई से बचाया है, लेकिन यदि ट्रंप ने इस 500% टैरिफ के चाबुक को सच में चला दिया, तो भारत को अपने ऊर्जा विकल्पों पर दोबारा विचार करना पड़ सकता है.


    वैश्विक बाजार में अनिश्चितता का दौर

    क्या दुनिया वास्तव में रूस से पूरी तरह किनारा कर पाएगी? या ट्रंप का यह विधेयक केवल एक रणनीतिक दबाव है? फिलहाल पूरी दुनिया ‘वेट एंड वॉच’ की स्थिति में है. लेकिन एक बात तय है कि वैश्विक ऊर्जा की शतरंज पर अब अगली चाल वाशिंगटन की होगी, और उसकी गूंज नई दिल्ली से लेकर बर्लिन तक सुनाई देगी. आने वाले महीने यह तय करेंगे कि दुनिया की अर्थव्यवस्था तेल की चमक से रोशन होगी या टैरिफ की आग में झुलसेगी।

  • पाक-चीन की खैर नहीं…! भारत स्वदेशी रॉकेट की बढ़ाने जा रहा लंबी रेंज

    पाक-चीन की खैर नहीं…! भारत स्वदेशी रॉकेट की बढ़ाने जा रहा लंबी रेंज

    नई दिल्ली। ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत ने रक्षा क्षेत्र में खुद को तेजी से मजबूत किया है। पिछले कुछ महीनों में भारतीय सेना ने स्वदेशी डिफेंस कंपनियों के साथ करोड़ों की डील की है। वहीं सेना का फोकस अमेरिका और रूस की सैन्य तकनीक पर भी है। अब सेना अपने पिनाका मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्चर को बड़े पैमाने पर अपग्रेड कर रही है। इसके लिए निजी क्षेत्र की बड़ी रक्षा कंपनियां टाटा और लार्सन एंड टुब्रो (L&T) को ऑर्डर मिले हैं। ये कंपनियां पहले भी पिनाका सिस्टम बना चुकी हैं।

    इस कॉन्ट्रैक्ट के तहत, ये दोनों कंपनियां सेना के बेस वर्कशॉप्स के साथ मिलकर काम करेंगी। वे पिनाका के जरूरी पुर्जों को अपग्रेड करेंगी, लगातार तकनीकी सहायता देंगी और पुराने हिस्सों को बदलेंगी। स्वदेशी पिनाका अब सेना का मुख्य रॉकेट सिस्टम बन गया है। इसकी रेंज को 150 किमी से ज्यादा बढ़ाने पर काम चल रहा है।

    यह साझेदारी, जिसमें टाटा और L&T भारतीय सेना के ईएमई कोरके साथ काम करेंगी, पिनाका रेजीमेंट की ऑपरेशनल तैयारी और आधुनिकीकरण को बेहतर बनाएगी। L&T के एक प्रवक्ता ने कहा, ‘यह एक अनोखी साझेदारी है, जिसमें एक घरेलू निजी ओईएम (Original Equipment Manufacturer) और भारतीय सेना, फ्रंटलाइन तोपखाने प्रणालियों के रखरखाव के लिए साथ आए हैं। यह भारत में बने, सेवा में मौजूद तोपखाने प्रणालियों के प्रोडक्ट लाइफसाइकिल सपोर्ट के लिए एक बड़ा कदम है।’
    इस कॉन्ट्रैक्ट के तहत, पहले चरण में 510 ABW के सहयोग से पिनाका लॉन्चर और बैटरी कमांड पोस्ट का एक पायलट ओवरहाल किया जाएगा। इसके पूरा होने के बाद, बाकी सभी सिस्टम्स का ओवरहाल किया जाएगा। प्रवक्ता ने आगे कहा, ‘यह मॉडल अन्य रक्षा प्लेटफॉर्मों पर भी इसी तरह के लाइफसाइकिल मैनेजमेंट और अपग्रेड कार्यक्रमों के लिए एक खाका (Blueprint) का काम करेगा।’
    टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स ने भी इस कॉन्ट्रैक्ट की घोषणा की है। कंपनी ने बताया कि वे पहले से ही पिनाका लॉन्चर के निर्माण में लगभग 80% स्वदेशी सामग्री का उपयोग कर रहे हैं। टाटा के एक प्रवक्ता ने कहा, ‘टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स ने बड़ी संख्या में पिनाका एमएलआरएस (MLRS) की आपूर्ति की है, जो वर्तमान में भारतीय सेना की ओर से ऑपरेशनल रूप से तैनात हैं। इससे कंपनी के लैंड कॉम्बैट सिस्टम्स पोर्टफोलियो को और मजबूती मिली है।’

    क्या है पिनाका कार्यक्रम?
    पिनाका कार्यक्रम को डीआरडीओ (DRDO) ने विकसित किया है। इसके तहत प्राइवेट सेक्टर आधुनिक हथियारों का निर्माण कर रहा है। यह कार्यक्रम रक्षा क्षेत्र में ‘मेक इन इंडिया’ की एक बड़ी सफलता की कहानी बन गया है। पिछले साल सरकार ने अब तक का सबसे बड़ा घरेलू रक्षा कॉन्ट्रैक्ट साइन किया था। यह कॉन्ट्रैक्ट पिनाका रॉकेट के लिए था, जिसकी कीमत 10,000 करोड़ रुपये से ज्यादा थी।

  • Bharat Coking Coal (BCCL) IPO: जीएमपी 50% के करीब, पैसा लगाएं या नहीं?

    Bharat Coking Coal (BCCL) IPO: जीएमपी 50% के करीब, पैसा लगाएं या नहीं?



    नई दिल्ली। भारत की कोकिंग कोल कंपनी Bharat Coking Coal Limited (BCCL) ने साल 2026 का पहला मेनबोर्ड आईपीओ लॉन्च कर दिया है। यह IPO 9 से 13 जनवरी 2026 तक खुलेगा, जिसका लक्ष्य 1,071 करोड़ रुपये जुटाना है। कोल इंडिया से जुड़ी यह मिनी रत्न कंपनी देश में कोकिंग कोल की सबसे बड़ी उत्पादक है और FY25 में घरेलू उत्पादन में इसका 58.5% हिस्सा रहा।

    IPO से पहले 8 जनवरी 2026 को एंकर निवेशकों से 273.13 करोड़ रुपये जुटाए गए। इसमें LIC सबसे बड़ा निवेशक रही, जिसने 78 करोड़ रुपये के 3.39 करोड़ शेयर खरीदे। निप्पॉन इंडिया म्यूचुअल फंड और बंधन म्यूचुअल फंड ने 75-75 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे।

    ब्रोकरेज के मुताबिक 23 रुपये के ऊपरी प्राइस बैंड पर IPO 6.4x EV/EBITDA पर वैल्यूएशन पर है। FY25 में EBITDA मार्जिन 12.7% और ROCE 18.2% रहा।

    BCCL IPO का स्ट्रक्चर:

    यह पूरी तरह से OFS (Offer for Sale) है, जिसमें कोल इंडिया अपनी 10% हिस्सेदारी बेच रही है।

    प्राइस बैंड: 21–23 रुपये

    कुल शेयर: 46.57 करोड़

    रिटेल निवेशकों के लिए न्यूनतम लॉट: 600 शेयर (ऊपरी प्राइस बैंड पर 13,800 रुपये)

    अलॉटमेंट स्ट्रक्चर:

    रिटेल: 35%

    QIB: 50%

    NII: 10%

    कोल इंडिया शेयरधारकों के लिए 107 करोड़ रुपये के शेयर आरक्षित

    IPO के ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) की रिपोर्ट भी सामने आई है।

    BCCL के शेयर ग्रे मार्केट में लगभग 50% प्रीमियम पर ट्रेड कर रहे हैं, जो मजबूत लिस्टिंग की संभावना दिखाता है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि GMP केवल अनलिस्टेड मार्केट की धारणा दर्शाता है और अस्थिर रह सकता है।

    पोस्ट-इश्यू मार्केट कैप लगभग 10,711 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है, और लिस्टिंग के बाद कोल इंडिया की हिस्सेदारी 90% रहेगी।

    BCCL के फायदे और निवेश के कारण:

    देश में सबसे बड़ी कोकिंग कोल उत्पादक

    7.91 अरब टन का अनुमानित कोल रिजर्व

    34 ऑपरेशनल माइंस

    FY23–FY25 के दौरान बिक्री और मुनाफा क्रमशः 5% और 37% CAGR से बढ़ा

    मजबूत वित्तीय प्रदर्शन और विश्वसनीय ट्रैक रिकॉर्ड

    जोखिम जिन पर नजर रखनी जरूरी है:

    कोल रिजर्व में लंबी अवधि में कमी

    टॉप 10 ग्राहकों पर 80% से अधिक निर्भरता

    रिन्यूएबल

    एनर्जी के बढ़ते उपयोग से कोल की मांग पर असर

    निवेशक इस IPO में कट-ऑफ प्राइस पर सब्सक्राइब कर सकते हैं, जबकि लिस्टिंग गेन के लिए उत्सुक लोग भी इसे देख सकते हैं। ग्रे मार्केट प्रीमियम 50% के करीब होने के कारण यह IPO शॉर्ट-टर्म लिस्टिंग के लिए आकर्षक नजर आता है, लेकिन निवेशकों को लंबी अवधि के जोखिमों का ध्यान रखना जरूरी है।

  • 09 जनवरी 2026 पंचांग: सप्तमी तिथि पर उत्तर फाल्गुनी और हस्त नक्षत्र का संयोग, जानिए शुभ और अशुभ काल

    09 जनवरी 2026 पंचांग: सप्तमी तिथि पर उत्तर फाल्गुनी और हस्त नक्षत्र का संयोग, जानिए शुभ और अशुभ काल


    नई दिल्ली । आज 09 जनवरी 2026 को माघ माह के कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि है। इस दिन का संयोग उत्तर फाल्गुनी और हस्त नक्षत्र के बनने से विशेष महत्व रखता है। शुक्रवार के दिन जो मां लक्ष्मी को समर्पित होता है इस तिथि और नक्षत्र का संगम विशेष शुभ फल देने वाला माना जाता है। यहां जानिए आज के शुभ और अशुभ काल के बारे में ताकि आप अपने दैनिक कार्यों को सही समय पर नियोजित कर सकें।

    शुभ काल

    अभिजीत मुहूर्त 1212 PM – 1255 PM यह समय बेहद शुभ माना जाता है, खासकर महत्वपूर्ण कार्यों के लिए। व्यापारिक फैसले, घर की शांति, और नए काम की शुरुआत के लिए यह अवधि श्रेष्ठ है।

    अमृत काल 0605 AM – 0746 AM यह काल बेहद फलदायक है। इस समय में पूजा-अर्चना और आध्यात्मिक कार्यों के लिए विशेष महत्व होता है। जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

    ब्रह्म मुहूर्त 0538 AM – 0626 AM इस समय का उपयोग ध्यान साधना और मानसिक शांति प्राप्त करने के लिए किया जा सकता है। यह समय भी अत्यंत शुभ है और धार्मिक कार्यों के लिए सर्वोत्तम माना जाता है।

    अशुभ काल

    राहू काल 1113 AM – 1233 PM यह समय किसी भी महत्वपूर्ण कार्य के लिए उपयुक्त नहीं होता है। यात्रा, नई शुरुआत और किसी भी बड़े निवेश से बचना चाहिए।

    यम गण्ड 313 PM – 433 PM इस समय भी नकारात्मक प्रभाव होते हैं। महत्वपूर्ण निर्णय लेने से बचें और कोई भी नया कार्य प्रारंभ करने से परहेज करें।
    कुलिक 834 AM – 954 AM यह समय भी अशुभ माना जाता है। इस समय में किसी भी प्रकार की तात्कालिक कार्रवाई या दांव लगाने से बचना चाहिए।
    दुर्मुहूर्त 0922 AM – 1004 AM, 1255 PM – 0137 PM इस समय में भी कार्यों को स्थगित करना बेहतर है, क्योंकि यह समय शुभ नहीं होता।
    वर्ज्यम् 1046 PM – 1230 AM यह समय भी कार्यों को करने के लिए अनुकूल नहीं होता। किसी भी महत्वपूर्ण कार्य के लिए इसे टाल देना सही रहेगा।

    सूर्य और चंद्रमा का समय

    सूर्योदय 0714 AM आज सूर्योदय का समय है 714 AM, जो दिन की शुरुआत के लिए शुभ है।
    सूर्यास्त 0553 PM सूर्यास्त का समय 553 PM है, और यह समय रात की शुरुआत का संकेत है।
    चन्द्रोदय 1151 PM चंद्रमा का उदय रात के 1151 बजे होगा, जो रात्रि में चंद्र ग्रहण का संकेत कर सकता है।
    चन्द्रास्त 1144 AM, Jan 10 चंद्रमा का अस्त 1144 AM पर होगा, जो दिन के समय होगा और अगले दिन का संकेत देगा।

    आज के पंचांग के अनुसार, इस दिन को विशेष रूप से शुभ कार्यों के लिए उपयोग किया जा सकता है, खासकर उन समयों में जब अभिजीत मुहूर्त, अमृत काल और ब्रह्म मुहूर्त जैसी शुभ अवधी हो। वहीं, राहू काल और यम गण्ड जैसे अशुभ कालों में किसी भी महत्वपूर्ण कार्य को स्थगित कर देना चाहिए।

  • दिल्ली की मस्जिद के पास बुलडोजर चला तो पाकिस्तान बोला-'भारत में निशाने पर मुस्लिम इमारतें'

    दिल्ली की मस्जिद के पास बुलडोजर चला तो पाकिस्तान बोला-'भारत में निशाने पर मुस्लिम इमारतें'

    इस्लामाबाद। पाकिस्तान ने एक बार फिर भारत के मामले में नाक घुसाते हुए नई दिल्ली पर अल्पसंख्यकों के उत्पीड़न का आरोप लगाया है। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने दिल्ली के तुर्कमेनिस्तान गेट के पास स्थित फैज-ए-इलाही मस्जिद के आस-पास चलाए गए अतिक्रमण विरोधी अभियान पर प्रतिक्रिया देते हुए इसे मुस्लिम विरासत के खिलाफ अभियान बताया। पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग में कहा कि हमने दिल्ली की फैज-ए-इलाही मस्जिद के पास चलाए गए अभियान पर नजर रखी है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह अतिक्रमण विरोधी अभियान के बहाने मस्जिदों को निशाना बनाने के राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ समर्थित अभियान का हिस्सा है।

    पाकिस्तान फैलाने लगा प्रोपेगैंडा
    पाकिस्तानी प्रवक्ता ने कहा कि हम फैज-ए-इलाही मस्जिद के आस-पास मौजूद प्रॉपर्टी को गिराए जाने से चिंतित हैं। उन्होंने कहा कि फैज-ए-इलाही मस्जिद सदियों पुरानी है और मुस्लिम सांस्कृतिक, धार्मिक और ऐतिहासिक विरासत का प्रतिनिधित्व करती है। अंद्राबी ने पाकिस्तानी प्रोपेगैंडा फैलाते हुए अतिक्रमण विरोधी अभियान को भारत में मुस्लिमों के खिलाफ RSS के बड़े अभियान का हिस्सा बता दिया। यही नहीं पाकिस्तानी प्रवक्ता ने संयुक्त राष्ट्र से भारत में अल्पसंख्यकों के धार्मिक और सांस्कृतिक अधिकारों की रक्षा की अपील कर डाली।

    क्या है पूरा मामला?
    दिल्ली के तुर्कमेनिस्तान गेट के पास स्थित सैयद फैज-ए-इलाही से सटे इलाके में अतिक्रमण के खिलाफ बुधवार सुबह तड़के अभियान चलाया गया था। यह अभियान दिल्ली नगर निगम (MCD) ने दिल्ली हाई कोर्ट के निर्देशों के बाद चलाया था।

    पाकिस्तानी प्रोपेगैंडा के उलट एमसीडी के एक अधिकारी ने बताया था कि अभियान के दौरान मस्जिद को कोई नुकसान नहीं पहुंचा था।

    इस पूरी कार्रवाई के दौरान मस्जिद के पास इलाके में अवैध घोषित प्रॉपर्टी को ही ढहाया गया। दिल्ली पुलिस ने बताया था कि मस्जिद के पास की जमीन एमसीडी की है और उसने अभियान चलाने से पहले पुलिस को सूचना दी थी। वहीं, एमसीडी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अभियान के दौरान 36,000 वर्ग फुट क्षेत्र से अतिक्रमण हटाया गया। इसमें एक मैरिज हॉल और औषधालय और दो मंजिला चहारदीवारी भी शामिल थी। अतिक्रमण विरोधी अभियान के दौरान कुछ उपद्रवियों ने पथराव करके अशांति फैलाने का प्रयास किया जिसके बाद पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा था।

  • गुड न्यूज… वैश्विक बाजारों में मची हलचल के बीच तेजी से बढ़ेगी भारतीय अर्थव्यवस्था

    गुड न्यूज… वैश्विक बाजारों में मची हलचल के बीच तेजी से बढ़ेगी भारतीय अर्थव्यवस्था


    वाशिंगटन ।
    पूरी दुनिया (Whole World) के बाजारों में इस वक्त हलचल मची हुई है. कहीं वॉरकी वजह से टेंशन के हालात हैं तो कहीं ट्रेड को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है. लेकिन इन सबके बीच भारत (India) के लिए एक साथ दो ऐसी खबरें आई हैं, जो बताती हैं कि आने वाला समय हमारा है. संयुक्त राष्ट्र (United Nations-UN) और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (State Bank of India-SBI) दोनों ने अपनी ताजा रिपोर्ट्स में माना है कि साल 2026 में भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था बना रहेगा। जब दुनिया के बाकी देश अपनी रफ्तार बचाने के लिए संघर्ष कर रहे होंगे, तब भारत की अर्थव्यवस्था तेजी से दौड़ रहा होगा।

    संयुक्त राष्ट्र की ‘विश्व आर्थिक स्थिति और संभावनाएं 2026’ रिपोर्ट में भारत को लेकर बहुत पॉजिटिव बात कही गई है. रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2026 में जब पूरी दुनिया की विकास दर महज 2.7 प्रतिशत रहने का अनुमान है, तब भारत 6.6 प्रतिशत की दमदार रफ्तार से आगे बढ़ेगा। यूएन का कहना है कि भारत की घरेलू मांग इतनी मजबूत है कि दुनिया में होने वाली किसी भी उथल-पुथल का इस पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा. भले ही वैश्विक स्तर पर व्यापार करने के तरीके बदल रहे हों, लेकिन भारत अपनी मजबूती बनाए रखने में कामयाब रहेगा।

    यूएन के बाद देश के सबसे बड़े बैंक एसबीआई (SBI) ने तो भारत की तरक्की को लेकर और भी बड़ा अनुमान लगाया है. एसबीआई की रिपोर्ट कहती है कि भारत की जीडीपी साल 2025-26 में 7.5 प्रतिशत की रफ्तार से बढ़ सकती है. यह सरकार और आरबीआई के अनुमानों से भी थोड़ा ज्यादा है। रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत का काम-काज और टैक्स कलेक्शन इतना अच्छा है कि घाटे की चिंता कम है. एसबीआई का मानना है कि भारत की आर्थिक नींव इतनी मजबूत हो चुकी है कि वह हर चुनौती को पार करने के लिए तैयार है.


    दुनिया में मंदी का खतरा, भारत क्यों है सुरक्षित?

    संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में आगाह किया गया है कि दुनिया की अर्थव्यवस्था लंबे समय तक सुस्त रह सकती है. अमेरिका जैसे देशों में व्यापार नियमों में बदलाव और भू-राजनीतिक तनाव ने माहौल को थोड़ा खराब किया है. महंगाई के कारण दुनिया भर के परिवारों का बजट बिगड़ा हुआ है. लेकिन भारत के मामले में कहानी अलग है. भारत एकमात्र ऐसी प्रमुख अर्थव्यवस्था होगी जो 6 प्रतिशत से ज्यादा की ग्रोथ रेट हासिल करेगी. भारत सरकार का भी अनुमान यही कहता है कि चालू वित्त वर्ष में जीडीपी 7.4 प्रतिशत की रफ्तार से आगे बढ़ेगी.


    आम आदमी पर क्या होगा असर?

    जब देश की अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ती है, तो इसका सीधा असर आम लोगों के जीवन पर पड़ता है. इससे नए रोजगार के अवसर पैदा होते हैं और लोगों की आमदनी बढ़ने का रास्ता साफ होता है. भले ही दुनिया भर में सप्लाई चेन बिगड़ने का खतरा हो या महंगाई का दबाव हो, भारत की मजबूत ग्रोथ यह भरोसा दिलाती है कि हमारा बाजार सुरक्षित है. सरकार के नए आंकड़ों से भी साफ है कि भारत आत्मनिर्भर बनने की दिशा में सही कदम बढ़ा रहा है, जिससे आने वाले समय में अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी.