Author: bharati

  • Honeymoon Place in Winter: सर्दियों में हनीमून के लिए भारत की सबसे रोमांटिक जगहें

    Honeymoon Place in Winter: सर्दियों में हनीमून के लिए भारत की सबसे रोमांटिक जगहें

    नई दिल्ली।  शादी के बाद हर कपल के लिए हनीमून जिंदगी का सबसे खूबसूरत दौर होता है। यही वह समय होता है जब दो लोग एक-दूसरे को बेहतर समझते हैं और साथ में यादगार पल बिताते हैं। अक्सर लोग हनीमून के लिए यूरोप का सपना देखते हैं, जहां बर्फीली वादियां, झीलें और पहाड़ हों। लेकिन अगर आप सर्दियों में भारत में ही हनीमून प्लान कर रहे हैं, तो यहां ऐसी कई जगहें हैं जो किसी विदेशी डेस्टिनेशन से कम नहीं हैं।

    गुलमर्ग, जम्मू और कश्मीर

    गुलमर्ग को भारत का विंटर वंडरलैंड कहा जाता है। सर्दियों में यहां बर्फ की चादर बिछ जाती है और पूरा इलाका किसी रोमांटिक फिल्म के सीन जैसा लगने लगता है। यहां आप दुनिया की सबसे ऊंची गोंडोला केबल कार की सवारी कर सकते हैं, बर्फबारी का आनंद ले सकते हैं और बर्फीली वादियों में अपने पार्टनर के साथ हाथ थामकर घूम सकते हैं। रोमांस और एडवेंचर का परफेक्ट कॉम्बिनेशन गुलमर्ग में मिलता है।

    औली, उत्तराखंड

    औली को मिनी स्विट्जरलैंड ऑफ इंडिया कहा जाता है। बर्फ से ढकी पहाड़ियां, शांत माहौल और स्कीइंग का रोमांच—ये सब औली को हनीमून कपल्स के लिए खास बनाते हैं। दिसंबर से मार्च के बीच औली का नजारा बेहद रोमांटिक होता है। अगर आप शांति, प्रकृति और रोमांस चाहते हैं, तो औली एक बेहतरीन विकल्प है।

    मनाली, हिमाचल प्रदेश

    मनाली नए शादीशुदा जोड़ों के बीच सबसे लोकप्रिय हनीमून डेस्टिनेशन में से एक है। यहां सोलांग वैली में पैराग्लाइडिंग, रोहतांग पास में बर्फ, और कैफे कल्चर कपल्स को खूब आकर्षित करता है। सर्दियों में मनाली की ठंड, बर्फ और पहाड़ों के बीच बिताया गया समय हनीमून को यादगार बना देता है।

    सिक्किम

    सिक्किम उन कपल्स के लिए है जो भीड़ से दूर शांति और प्राकृतिक सुंदरता चाहते हैं। गंगटोक से कंचनजंगा के नजारे किसी सिनेमाई दृश्य से कम नहीं लगते। वहीं लाचुंग और युमथांग घाटी किसी स्विस पोस्टकार्ड जैसी दिखाई देती हैं। यहां का शांत वातावरण और ठंडी हवा हनीमून के लिए परफेक्ट है।

    अंडमान और निकोबार

    अगर आप बर्फ नहीं, बल्कि समुद्र और बीच के दीवाने हैं, तो अंडमान और निकोबार आपके लिए बेस्ट है। यहां के साफ-सुथरे समुद्र तट, स्कूबा डाइविंग, स्नॉर्कलिंग और रोमांटिक सनसेट हनीमून को खास बना देते हैं। यह जगह सर्दियों में कपल्स के बीच बेहद लोकप्रिय रहती है।

  • गले की खराश और दर्द को कहें अलविदा! सर्दियों में अपनाएं ये असरदार घरेलू उपाय

    गले की खराश और दर्द को कहें अलविदा! सर्दियों में अपनाएं ये असरदार घरेलू उपाय


    नई दिल्ली। सर्दियों के मौसम में ठंडी हवा, प्रदूषण और कमजोर इम्युनिटी की वजह से गले में दर्द, खराश, खांसी और जुकाम की समस्या आम हो जाती है। कई बार सही समय पर ध्यान न देने से यह परेशानी बढ़कर इंफेक्शन का रूप भी ले सकती है। ऐसे में दवाइयों के साथ-साथ कुछ घरेलू और आयुर्वेदिक उपाय बेहद कारगर साबित हो सकते हैं।

    लहसुन से बढ़ाएं रोग प्रतिरोधक क्षमता
    लहसुन में मौजूद एलिसिन तत्व में एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं। यह गले में सूजन और संक्रमण पैदा करने वाले बैक्टीरिया से लड़ने में मदद करता है। रोज़ 1–2 कली लहसुन का सेवन सर्दी-जुकाम और गले की खराश से बचाव करता है।

    अदरक, काली मिर्च और तुलसी वाली चाय
    अगर गले में दर्द या बैठापन महसूस हो रहा है तो अदरक, काली मिर्च और तुलसी डालकर बनाई गई गर्म चाय बेहद फायदेमंद होती है।
    अदरक सूजन कम करता है
    काली मिर्च बलगम निकालने में मदद करती है
    तुलसी इम्युनिटी को मजबूत बनाती है
    यह चाय शरीर को गर्म रखती है और गले को राहत देती है।

    मुलेठी: आयुर्वेदिक रामबाण
    आयुर्वेद में मुलेठी को गले की बीमारियों के लिए कारगर माना गया है। मुलेठी का छोटा टुकड़ा धीरे-धीरे चूसने से इसका रस गले की खराश को शांत करता है और खांसी में आराम देता है।

    शहद से मिले प्राकृतिक आराम
    शहद में एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं।

    यह गले की जलन को कम करता है और खांसी को शांत करता है। गुनगुने पानी या हर्बल चाय में शहद मिलाकर पीना बेहद लाभकारी होता है।

    ओटमील और पोषक आहार का सेवन
    ओटमील में जिंक, मैग्नीशियम और एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं, जो इम्युन सिस्टम को मजबूत करते हैं। इसमें केला, शहद, दालचीनी और थोड़ा अदरक मिलाकर खाने से गले को आराम मिलता है और शरीर को जरूरी पोषण भी मिलता है।
    कब जाएं डॉक्टर के पास?
    अगर गले का दर्द 3–4 दिन से ज्यादा बना रहे, बुखार हो, निगलने में परेशानी हो या आवाज लगातार बैठी रहे, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

  • शंख भस्म: हड्डियों और पेट की सेहत के लिए आयुर्वेद का चमत्कारी खजाना

    शंख भस्म: हड्डियों और पेट की सेहत के लिए आयुर्वेद का चमत्कारी खजाना


    नई दिल्ली। आयुर्वेद सदियों से जड़ी-बूटियों और भस्मों के माध्यम से स्वास्थ्य को सुधारने का अनमोल ज्ञान देता आया है। इस कड़ी में शंख भस्म एक ऐसा खजाना है जिसे आयुर्वेद में चमत्कारी भस्म के रूप में जाना जाता है। इसे मुख्यतः पेट और हड्डियों की बीमारियों में लाभकारी माना गया है।शंख भस्म मुख्य रूप से कैल्शियम कार्बोनेट से बनती है। इसका उपयोग एसिड रिफ्लक्स, पेट की जलन और पाचन से जुड़ी समस्याओं में किया जाता है। आयुर्वेदिक विशेषज्ञ बताते हैं कि शंख भस्म पेट की पाचन अग्नि को रीसेट करती है, जिससे भोजन बेहतर ढंग से पचता है और गैस, पेट दर्द, उल्टी जैसी परेशानियों में राहत मिलती है।

    हड्डियों और जोड़ों के लिए वरदान:
    शंख भस्म कैल्शियम से भरपूर होने के कारण हड्डियों को मजबूत बनाने ऑस्टियोपोरोसिस को रोकने और दांतों की मजबूती बनाए रखने में सहायक होती है। शरीर में कैल्शियम की कमी होने पर भी शंख भस्म लाभकारी है। खास बात यह है कि यह वात और कफ दोषों को संतुलित करने में भी मदद करती है, जिससे शरीर में असंतुलन की वजह से होने वाली बीमारियों को रोका जा सकता है।

    त्वचा और सौंदर्य में भी उपयोगी:
    शंख भस्म का लेपन या सेवन चेहरे पर मुहांसों, दाग-धब्बों और त्वचा की समस्याओं में भी लाभकारी माना गया है। आयुर्वेद में इसे न केवल आंतरिक स्वास्थ्य बल्कि बाहरी सुंदरता और त्वचा की चमक बनाए रखने के लिए भी प्रयोग किया जाता है।

    सुरक्षित उपयोग:
    ध्यान रखें कि शंख भस्म को सीधा नहीं खाना चाहिए। इसे किसी आयुर्वेदिक मिश्रण या चिकित्सा के अनुसार लिया जाता है। सेवन की मात्रा और तरीका रोग और शरीर की स्थिति के अनुसार अलग-अलग होता है। गर्भवती महिलाएं और बच्चों के लिए चिकित्सक की सलाह आवश्यक है। संक्षेप में शंख भस्म आयुर्वेद का एक ऐसा खनिज है, जो पाचन, हड्डियों, जोड़ों और त्वचा को स्वस्थ बनाए रखने में सहायक है। इसके नियमित और सही उपयोग से शरीर में ऊर्जा, संतुलन और मजबूती आती है।

  • नहाते समय कान में चला गया पानी? घरेलू उपायों से मिल सकती है राहत, लापरवाही बढ़ा सकती है संक्रमण का खतरा

    नहाते समय कान में चला गया पानी? घरेलू उपायों से मिल सकती है राहत, लापरवाही बढ़ा सकती है संक्रमण का खतरा

    नई दिल्ली । नहाते समय या बाल धोते वक्त कान में पानी चला जाना एक आम समस्या हैजिसे अधिकतर लोग हल्के में ले लेते हैं। हालांकि डॉक्टरों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यह छोटी-सी परेशानी समय पर ध्यान न देने पर गंभीर रूप ले सकती है। कान में फंसा पानी न सिर्फ असहजता पैदा करता हैबल्कि संक्रमणदर्द और सुनने की क्षमता पर असर जैसी समस्याओं का कारण भी बन सकता है। इसलिए जरूरी है कि सही और सुरक्षित तरीकों से ही इस समस्या से राहत पाई जाए। विशेषज्ञों के अनुसारजब नहाते समय तेज दबाव के साथ पानी कान में प्रवेश करता हैतो वह ईयर कैनाल में फंस सकता है। कान की बनावट और अंदर मौजूद ईयर वैक्स कान का मैल कई बार पानी को बाहर निकलने से रोक देता है।
    इससे कान भारी लगने लगता हैआवाजें साफ सुनाई नहीं देतीं और एक अजीब-सी झनझनाहट महसूस होती है। लंबे समय तक नमी बनी रहने से कान के अंदर गर्म और नम वातावरण बन जाता हैजो बैक्टीरिया और फंगस के पनपने के लिए अनुकूल होता है। यही कारण है कि लापरवाही करने पर इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है। डॉक्टरों का कहना है कि सबसे आसान और सुरक्षित घरेलू उपाय गुरुत्वाकर्षण (ग्रैविटी) का इस्तेमाल करना है। जिस कान में पानी गया होउस तरफ सिर झुकाकर कुछ मिनट तक लेटना कई बार पानी को बाहर निकालने के लिए पर्याप्त होता है। इसी दौरान कान की लोब को हल्के से नीचे और बाहर की ओर खींचने से ईयर कैनाल सीधी होती है और फंसा हुआ पानी बाहर निकल सकता है।

    कुछ मामलों में हेयर ड्रायर का उपयोग भी मददगार हो सकता है। ड्रायर को कम गर्मी या ठंडी हवा के मोड पर रखकर कान से सुरक्षित दूरी पर इस्तेमाल किया जाए तो अंदर की नमी सूख सकती है। हालांकि विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि ड्रायर को बहुत पास लाना या ज्यादा देर तक गर्म हवा देना नुकसानदेह हो सकता है। डॉक्टर साफ तौर पर बताते हैं कि कान में कॉटन बडपिनमाचिस की तीली या किसी भी नुकीली वस्तु का इस्तेमाल बिल्कुल नहीं करना चाहिए। इससे कान की अंदरूनी त्वचा को चोट लग सकती है और ईयर ड्रम के फटने का भी खतरा रहता है। इसी तरह जबरदस्ती फूंक मारना या किसी तरल पदार्थ को कान में डालना स्थिति को और बिगाड़ सकता है।

    यदि 24 घंटे से अधिक समय तक कान में पानी भरा हुआ महसूस होदर्दखुजली या जलन शुरू हो जाएया कान से पीले रंग का स्राव निकलने लगेतो तुरंत ईएनटी विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए। जिन लोगों का पहले कान का ऑपरेशन हो चुका हो या जिनके कान के पर्दे में छेद की समस्या रही होउन्हें घरेलू उपाय करने से पहले विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। विशेषज्ञों की सलाह है कि नहाते समय या तैराकी के दौरान ईयर प्लग का इस्तेमाल किया जाए। जरूरत पड़ने पर कॉटन पर हल्की वैसलीन लगाकर कान में रखा जा सकता हैताकि पानी अंदर न जाए। साथ ही बार-बार कान साफ करने की आदत से भी बचना चाहिएक्योंकि इससे ईयर वैक्स का प्राकृतिक संतुलन बिगड़ सकता है।

  • सर्दियों में देसी घी: रूखी त्वचा के लिए प्राकृतिक मॉइस्चराइजर, पोषण और एंटी-एजिंग का असरदार उपाय

    सर्दियों में देसी घी: रूखी त्वचा के लिए प्राकृतिक मॉइस्चराइजर, पोषण और एंटी-एजिंग का असरदार उपाय


    नई दिल्ली।  सर्दियों का मौसम आते ही रूखी, खिंची और बेजान त्वचा एक आम समस्या बन जाती है। ठंडी हवा, हीटर का इस्तेमाल और गरम पानी से नहाने की आदत त्वचा की प्राकृतिक नमी छीन लेती है। ऐसे में जहां बाजार के कई मॉइस्चराइजर केवल ऊपरी परत को मुलायम बनाते हैं, वहीं शुद्ध देसी घी त्वचा को गहराई से पोषण देने का एक प्राकृतिक और प्रभावी विकल्प बनकर सामने आया है।

    2025 की रिपोर्ट Necole Bitchie और Healthline के अनुसार, देसी घी में मौजूद विटामिन A, D, E और K के साथ-साथ प्राकृतिक फैटी एसिड त्वचा की नमी को लॉक करने, सूजन कम करने और फाइन लाइन्स को रोकने में मदद करते हैं। यही वजह है कि आयुर्वेद में घी को न सिर्फ खाने बल्कि त्वचा पर लगाने के लिए भी लाभकारी माना गया है।विशेषज्ञों के मुताबिक, सर्दियों में त्वचा की बैरियर लेयर कमजोर हो जाती है, जिससे Transepidermal Water Loss TEWL बढ़ता है। घी इस बैरियर को मजबूत करता है और त्वचा को अंदर से रिपेयर करने में मदद करता है। आयुर्वेदिक परंपरा में इस्तेमाल होने वाला शतधौत घृत 100 बार धुला घी विशेष रूप से स्किन हाइड्रेशन बढ़ाने, जलन कम करने और एक्जिमा व सोरायसिस जैसी समस्याओं में राहत देने के लिए जाना जाता है।

    टॉपिकल इस्तेमाल की बात करें तो घी सूखी, फटी और संवेदनशील त्वचा के लिए सुरक्षित माना गया है। सर्दियों में फटे होंठ, रूखे हाथ, ड्राई पैच और फटी एड़ियों पर घी लगाने से त्वचा जल्दी मुलायम होती है। यही नहीं, बच्चों की मालिश और बीमारी के बाद स्किन रिकवरी में भी देसी घी का इस्तेमाल पारंपरिक रूप से किया जाता रहा है।हालांकि विशेषज्ञ यह भी चेतावनी देते हैं कि घी का टेक्सचर काफी रिच और ऑयली होता है। ऐसे में एक्ने-प्रोन या बहुत तैलीय त्वचा पर इसका ज्यादा इस्तेमाल पोर्स ब्लॉक कर सकता है, जिससे पिंपल्स की समस्या बढ़ सकती है। इसलिए ऐसी त्वचा वाले लोगों को घी को सीधे पूरे चेहरे पर लगाने के बजाय पहले पैच टेस्ट करना चाहिए या सिर्फ बहुत सूखे हिस्सों पर सीमित मात्रा में उपयोग करना चाहिए।

    त्वचा विशेषज्ञों का कहना है कि घी में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स झुर्रियों दाग-धब्बों और सूजन को कम करने में मदद करते हैं, जिससे त्वचा ज्यादा स्वस्थ और जवां दिखती है। रात में सोने से पहले हल्के हाथों से घी लगाने से त्वचा को गहरी नमी और पोषण मिलता है।इस रूप में देसी घी सर्दियों में केवल एक पारंपरिक घरेलू नुस्खा नहीं बल्कि वैज्ञानिक रूप से समर्थित स्किन केयर विकल्प भी है। सही मात्रा और सही त्वचा प्रकार के अनुसार इसका इस्तेमाल करने से यह सर्दियों में त्वचा की सेहत के लिए बेहद फायदेमंद साबित हो सकता है। यदि त्वचा बहुत संवेदनशील हो, तो विशेषज्ञ या डॉक्टर की सलाह लेना बेहतर रहेगा।

  • बांग्लादेश में हिंदू युवक की जघन्य हत्या, BNP नेता ने कार से कुचलकर कर उतारा मौत के घाट

    बांग्लादेश में हिंदू युवक की जघन्य हत्या, BNP नेता ने कार से कुचलकर कर उतारा मौत के घाट


    नई दिल्ली। बांग्लादेश के राजबाड़ी जिले में BNP नेता अबुल हाशेम सुजन ने पेट्रोल पंप कर्मचारी रिपन साहा को 5,000 टका का पेट्रोल बिना भुगतान करने पर अपनी जीप से कुचलकर मौत के घाट उतार दिया। घटना का सीसीटीवी फुटेज सामने आने के बाद पुलिस ने आरोपी और ड्राइवर को गिरफ्तार कर लिया है।

    बांग्लादेश में एक और हिंदू युवक की दर्दनाक हत्या ने देश में सनसनी फैला दी है। राजबाड़ी जिले के पेट्रोल पंप पर काम करने वाले 30 वर्षीय रिपन साहा को कथित तौर पर बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के नेता अबुल हाशेम सुजन ने अपनी ब्लैक लैंड क्रूजर जीप से कुचल दिया।

    घटना शुक्रवार की सुबह लगभग 4:30 बजे हुई।

    पुलिस और स्थानीय लोगों के अनुसार, सुजन ने अपने वाहन में करीब 5,000 टका का ऑक्टेन भरवाया, लेकिन भुगतान किए बिना भागने की कोशिश की। रिपन ने वाहन रोककर भुगतान की मांग की तो आरोपी और उनके ड्राइवर कमल हुसैन ने गुस्से में आकर अपशब्द कहे और गाड़ी तेज कर दी।

    सीसीटीवी में साफ दिखा क्रूर हमला
    पेट्रोल पंप के सीसीटीवी फुटेज में दिख रहा है कि रिपन पेट्रोल पंप के पास खड़ा था, वहीं सुजन की गाड़ी आती है, रिपन भुगतान मांगता है और फिर अचानक गाड़ी तेज कर दी जाती है।रिपन को गाड़ी के नीचे कुचलते हुए देखा गया। सिर और चेहरे को बुरी तरह कुचला गया। घटनास्थल से शव ढाका-खुलना हाईवे पर पड़ा मिला।

     रिपन की सिर और चेहरे को बुरी तरह कुचला गया और वह मौके पर ही मृत हो गया। शव बाद में ढाका-खुलना हाईवे पर पड़ा मिला।

    BNP नेता समेत दो गिरफ्तार
    पुलिस ने वाहन जब्त कर लिया और अबुल हाशेम सुजन को उनके गांव बारो मुरारीपुर से गिरफ्तार किया। उनके ड्राइवर कमल हुसैन को भी हिरासत में लिया गया।

    राजबाड़ी सदर पुलिस स्टेशन के ओसी खोंडकर जियाउर रहमान ने बताया कि सीसीटीवी फुटेज और गवाहों के बयान के आधार पर दोनों को हिरासत में लिया गया है।

    हिंदू समुदाय में भय का माहौल
    स्थानीय हिंदू समुदाय में इस घटना के बाद दहशत का माहौल है। यह घटना बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं के खिलाफ बढ़ती हिंसा के पैटर्न से जुड़ी मानी जा रही है। कई रिपोर्टों में इसे सांप्रदायिक हिंसा के रूप में देखा जा रहा है, जबकि पुलिस इसे मुख्य रूप से भुगतान विवाद बता रही है।
    इस घटना ने स्थानीय हिंदू समुदाय में भय और आक्रोश बढ़ा दिया है। बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यक के खिलाफ बढ़ती हिंसा के बीच यह घटना एक बार फिर सांप्रदायिक तनाव को बढ़ा सकती है। जबकि पुलिस इसे भुगतान विवाद बता रही है, कई लोगों का मानना है कि यह हिंदू समुदाय के खिलाफ हिंसा की एक कड़ी है। 

  • मौन व्रत: मानसिक शांति और स्वास्थ्य के लिए वरदान..

    मौन व्रत: मानसिक शांति और स्वास्थ्य के लिए वरदान..


    नई दिल्ली। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी और शोर-शराबे से भरी दुनिया में शांति एक दुर्लभ लेकिन बेहद जरूरी चीज बन गई है। लगातार अशांति और शोर-शराबा न केवल शरीर को बीमारियों की ओर ले जाता हैबल्कि तनावचिड़चिड़ापन और मानसिक थकान भी बढ़ाता है। ऐसे में मौन का अभ्यास सेल्फ-अवेयरनेसमानसिक स्पष्टता और आंतरिक शांति का बेहतरीन साधन बन जाता है।

    सनातन धर्म में मौन व्रत को सर्वोत्तम तप माना गया है। हर साल मौनी अमावस्या को यह व्रत रखा जाता है। यह न केवल धार्मिक महत्व रखता हैबल्कि स्वास्थ्य के लिहाज से भी अत्यंत लाभकारी माना जाता है। मौन का अभ्यास केवल बाहर की शांति नहीं हैबल्कि यह एक सक्रिय प्रक्रिया हैजो हमें आंतरिक दुनिया की ओर ले जाती है और मन को शांत करती है।

    आयुर्वेद के अनुसारअधिक बोलना वात दोष को बढ़ाता हैजिससे मन अशांत होता हैनींद प्रभावित होती है और ऊर्जा का क्षय होता है। मौन रहने से मन शांत रहता हैसत्व गुण बढ़ते हैंऊर्जा बचती है और एकाग्रताध्यान और मानसिक क्षमता मजबूत होती है। यह तनावक्रोध और हृदय स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी माना जाता है।भगवद्गीता में मौन को गुह्य ज्ञान कहा गया है। इसमें मौन व्रत को मानसिक तप का रूप माना गया हैजो शरीर और मन के संतुलन के लिए फायदेमंद है। मौन व्रत से वाणी और संयम के जरिए ओजस की रक्षा होती है और सेहत मजबूत बनती है।

    कई रिसर्च में यह सिद्ध हुआ है कि शोर प्रदूषण मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर डालता हैजबकि मौन का दिमाग पर हीलिंग प्रभाव पड़ता है। अध्ययन बताते हैं कि रोजाना दो घंटे का मौन ब्रेन सेल्स के विकास को बढ़ाता हैजिससे याददाश्तभावनाएं और सीखने की क्षमता सुधरती है। मौन तनाव हार्मोन कोर्टिसोल को कम करता हैब्लड प्रेशर और हृदय गति को नियंत्रित करता हैनींद सुधारता है और एकाग्रताक्रिएटिविटी और भावनात्मक संतुलन बढ़ाता है।संक्षेप मेंमौन व्रत केवल आध्यात्मिक साधना नहीं हैबल्कि यह शारीरिकमानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य का वरदान भी है। जीवन में शांति और संतुलन बनाए रखने के लिए मौन व्रत को अपनी दिनचर्या में अपनाना एक अत्यंत उपयोगी साधन हो सकता है।

  • भारत का टैरिफ अपडेट: अमेरिकी दालों पर बढ़ी इंपोर्ट ड्यूटी, सीनेटर ने ट्रंप को लिखा लेटर

    भारत का टैरिफ अपडेट: अमेरिकी दालों पर बढ़ी इंपोर्ट ड्यूटी, सीनेटर ने ट्रंप को लिखा लेटर

    नई दिल्ली।  भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील लंबे समय से अटकी हुई है, और अब इसमें नया विवाद जुड़ सकता है। इसका कारण है अमेरिकी दालों पर भारत द्वारा लगाई गई इंपोर्ट ड्यूटी। अमेरिकी सीनेटरों ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को पत्र लिखकर भारत द्वारा लगाई गई 30% ड्यूटी को अनुचित बताया और इसे हटाने के लिए दबाव डालने का अनुरोध किया।

    विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की तरफ से यह ड्यूटी ट्रंप द्वारा अमेरिकी सामान पर लगाए गए 50% टैरिफ का जवाब माना जा रहा है। ऐसे में भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील की बातचीत और जटिल हो सकती है।

    भारत ने अक्टूबर 2025 में लगाया दाल पर टैरिफ

    नॉर्थ डकोटा के सीनेटर केविन क्रेमर और मोंटाना के स्टीव डेन्स ने बताया कि भारत ने 30 अक्टूबर 2025 को अमेरिकी पीली मटर पर 30% टैरिफ लगाने की घोषणा की थी, जो 1 नवंबर से लागू हो गया। इस फैसले पर तब ज्यादा ध्यान नहीं गया और भारत सरकार ने इसे बड़े पैमाने पर प्रचारित भी नहीं किया। विशेषज्ञ इसे चुपके से किया गया पलटवार मान रहे हैं।

    16 जनवरी को लिखे गए पत्र में कहा गया कि इस अनुचित टैरिफ की वजह से अमेरिकी दाल उत्पादकों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। यह मामला विशेष रूप से डकोटा और मोंटाना जैसे कृषि-प्रधान राज्यों के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि इन राज्यों में मटर और दाल का उत्पादन अधिक होता है।

    भारत दुनिया में सबसे बड़ा दाल कंज्यूमर

    पत्र में आगे कहा गया कि भारत में सबसे अधिक खाई जाने वाली दालें मसूर, चना, सूखी फलियां और मटर हैं, और अमेरिका की ये प्रोडक्शन वाली दालें भारत के बाजार में बड़ी मांग रखती हैं। भारत द्वारा लगाई गई टैरिफ से अमेरिकी उत्पादकों को बाजार हिस्सेदारी और आय में नुकसान हो रहा है।

    ट्रेड डील में कृषि और डेयरी ‘रेड लाइन’

    भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील का पेंच मुख्य रूप से कृषि और डेयरी प्रोडक्ट्स को लेकर फंसा हुआ है। भारत के लिए यह क्षेत्र रेड लाइन है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर कोई ट्रेड डील भारत से अपने घरेलू उत्पादकों की कीमत पर दाल बाजार खोलने की मांग करता है, तो यह डील संभव नहीं होगी।

    इस विवाद से यह साफ है कि भारत अपनी घरेलू फसलों और किसानों के हितों की सुरक्षा करना चाहता है, जबकि अमेरिका के कृषि-प्रधान राज्य अपने उत्पादकों की रक्षा के लिए दबाव बना रहे हैं। ऐसे में आने वाले महीनों में ट्रेड डील की दिशा और बातचीत की जटिलता दोनों बढ़ने की संभावना है।

  • कश्मीरी गेट अब अकेला नहीं! दिल्ली मेट्रो में 3 नए ट्रिपल-इंटरचेंज हब बनेंगे, आजादपुर, नई दिल्ली और लाजपत नगर

    कश्मीरी गेट अब अकेला नहीं! दिल्ली मेट्रो में 3 नए ट्रिपल-इंटरचेंज हब बनेंगे, आजादपुर, नई दिल्ली और लाजपत नगर


    नई दिल्ली। दिल्ली मेट्रो की तस्वीर बदलने जा रही है। लंबे समय तक कश्मीरी गेट ही राजधानी का एकमात्र ट्रिपल-इंटरचेंज स्टेशन रहा, जहां तीन मेट्रो लाइनें मिलती हैं। लेकिन अब फेज-4 के तहत आजादपुर, नई दिल्ली और लाजपत नगर भी ट्रिपल-इंटरचेंज बनेंगे, जिससे दिल्ली में यात्रा और तेज, आसान और सुविधाजनक होगी।

    फेज-4 में तीन नए सुपर हब
    दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) ने कहा है कि फेज-4 के पूरा होने के बाद ये तीनों स्टेशन ऐसे हब बनेंगे जहां तीन-तीन लाइनें एक ही प्लेटफॉर्म/कनेक्शन पॉइंट पर मिलेंगी। इससे यात्रियों को बार-बार लाइन बदलने की परेशानी कम होगी और सफर का समय भी घटेगा।

    खासकर उत्तर से दक्षिण और पूर्व से पश्चिम दिल्ली की कनेक्टिविटी मजबूत होगी।

    कश्मीरी गेट की मौजूदा भूमिका
    वर्तमान में कश्मीरी गेट स्टेशन रेड, येलो और वायलेट लाइन को जोड़ता है और रोजाना भारी संख्या में यात्रियों का यह प्रमुख ट्रांजिट प्वाइंट है। यह स्टेशन उत्तर/उत्तर-पश्चिम दिल्ली को मध्य और दक्षिण दिल्ली से जोड़ने में अहम भूमिका निभाता रहा है।

    2026 तक 3 नए ट्रिपल-इंटरचेंज हब
    फेज-4 में सबसे पहले आजादपुर ट्रिपल-इंटरचेंज के रूप में काम करेगा, जहां येलो, पिंक और मैजेंटा लाइन मिलेगी। अधिकारियों के अनुसार यह हब 2026 के अंत तक चालू हो जाएगा, जिससे उत्तर, पश्चिम और दक्षिण दिल्ली के बीच यात्रा आसान हो जाएगी।

    नई दिल्ली स्टेशन बनेगा एयरपोर्ट-हब
    नई दिल्ली स्टेशन भी जल्द ही येलो लाइन, एयरपोर्ट एक्सप्रेस और ग्रीन लाइन से जुड़कर ट्रिपल-इंटरचेंज बन जाएगा। इससे एयरपोर्ट, सेंट्रल दिल्ली और पश्चिमी दिल्ली के बीच कनेक्टिविटी और मजबूत होगी। हालांकि, ग्रीन लाइन का विस्तार अभी शुरू नहीं हुआ है और इसे चालू होने में कुछ साल लग सकते हैं।
    लाजपत नगर होगा दक्षिण दिल्ली का नया हब
    लाजपत नगर स्टेशन वायलेट, पिंक और प्रस्तावित गोल्डन लाइन को जोड़कर दक्षिण दिल्ली में एक प्रमुख कनेक्टिविटी पॉइंट बन जाएगा। इससे दक्षिण दिल्ली में ईस्ट-वेस्ट और नॉर्थ-साउथ कनेक्टिविटी मजबूत होगी और यात्रियों को रूट बदलने की जरूरत कम होगी।

    फेज-5 (ए) में सेंट्रल सेक्रेटेरिएट भी बनेगा हब
    फेज-5 (ए) में सेंट्रल सेक्रेटेरिएट स्टेशन को भी ट्रिपल-इंटरचेंज बनाने की योजना है, जहां येलो, वायलेट और मैजेंटा लाइनें मिलेंगी। इससे सेंट्रल विस्टा और सरकारी इलाकों तक पहुंच और आसान होगी।

    DMRC का दावा
    DMRC अधिकारियों का कहना है कि ट्रिपल-इंटरचेंज स्टेशनों से यात्रियों का समय बचेगा, मेट्रो का उपयोग बढ़ेगा और सड़क ट्रैफिक व प्रदूषण कम होंगे।

  • नई ट्रेंडिंग स्टाइल: क्यों लोग बदल रहे हैं बालों का रंग और क्या है इसका असर?

    नई ट्रेंडिंग स्टाइल: क्यों लोग बदल रहे हैं बालों का रंग और क्या है इसका असर?

    नई दिल्ली।  आजकल बालों का रंग बदलना सिर्फ फैशन नहीं रहा, बल्कि यह खुद को व्यक्त करने और स्टाइल स्टेटमेंट बनाने का तरीका बन गया है। सलून और हेयर स्टाइलिस्ट्स का कहना है कि पिछले कुछ सालों में बाल रंगने की मांग में 40-50% बढ़ोतरी देखी गई है। खासकर युवाओं और सोशल मीडिया प्रभावित पीढ़ी में ब्राउन, ब्लॉन्ड, पेस्टल और हाईलाइटेड बालों का ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है।

    बालों का रंग बदलने के पीछे सिर्फ स्टाइल का फैक्टर नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि लोग अपने स्वयं के व्यक्तित्व और मूड को दर्शाने के लिए यह कदम उठा रहे हैं। उदाहरण के लिए, गहरे रंग के बाल अधिक पारंपरिक और गंभीर, जबकि हल्के और पेस्टल टोन के बाल क्रिएटिव और फ्री स्पिरिटेड व्यक्तित्व को दिखाते हैं।

    बालों के रंग में नया तकनीकी इनोवेशन

    आजकल हेयर कलर में कई नए और सुरक्षित फॉर्मूले उपलब्ध हैं। प्राकृतिक हर्बल और ऑर्गेनिक हेयर डाई बाजार में तेजी से लोकप्रिय हो रही है। ये न केवल बालों को सुरक्षित रखती हैं, बल्कि लंबे समय तक रंग को बनाए रखने में भी मदद करती हैं। कुछ ब्रांड्स में फेड-फ्री और UV प्रोटेक्टेड कलर भी उपलब्ध है, जिससे बाल चमकदार और स्वस्थ रहते हैं।

    सैलून प्रोफेशनल्स बताते हैं कि ग्रैजुएट, ऑफिस-गोइंग और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर युवाओं के बीच कलर ट्रेंड्स को काफी प्रभावित कर रहे हैं। अब लोग सिर्फ पार्टी या इवेंट्स के लिए नहीं, बल्कि डेली लुक के लिए भी रंग बदलते हैं।

    बाल रंगते समय ध्यान रखने वाली बातें

    हेयर एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि बालों को कलर करने से पहले हमेशा सैलून प्रोफेशनल से सलाह लें। घर पर खुद से डाई लगाने से बालों में डैमेज और ब्रेकेज हो सकता है। इसके अलावा, बालों को रंगने के बाद मास्क, कंडीशनर और सन्सक्रीन का इस्तेमाल करना जरूरी है ताकि रंग लंबे समय तक बना रहे और बाल स्वस्थ रहें।

    बालों का रंग बदलने से व्यक्तित्व में भी नया आत्मविश्वास आता है। कई लोग कहते हैं कि नया हेयर कलर उन्हें सक्रिय और ऊर्जा से भरा महसूस कराता है। इस वजह से बालों का रंग केवल फैशन नहीं, बल्कि एक प्रकार की मानसिक और सामाजिक अभिव्यक्ति बन गया है।

    सोशल मीडिया और सेलिब्रिटी का असर

    सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और बॉलीवुड-हॉलीवुड सितारे भी इस ट्रेंड को बढ़ावा दे रहे हैं। इंस्टाग्राम और टिकटॉक पर बालों के नए रंगों के वीडियो और टिप्स वायरल होते रहते हैं। युवा अपने हेयर कलर के लिए फोटोशूट और सोशल मीडिया पोस्ट के लिए भी प्रेरित हो रहे हैं।