Author: bharati

  • प्राइवेट कर्मचारियों को कब और कैसे मिलती है पेंशन? 10 साल की सर्विस और 58 साल की उम्र का पूरा गणित समझिए

    प्राइवेट कर्मचारियों को कब और कैसे मिलती है पेंशन? 10 साल की सर्विस और 58 साल की उम्र का पूरा गणित समझिए


    नई दिल्ली । निजी क्षेत्र में काम करने वाले करोड़ों कर्मचारियों के लिए रिटायरमेंट के बाद पेंशन एक बड़ा सहारा होती है। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन के तहत चलाई जा रही कर्मचारी पेंशन योजना इसी उद्देश्य से बनाई गई है लेकिन इसके नियम और गणित अक्सर लोगों को उलझा देते हैं। कई कर्मचारी यह नहीं समझ पाते कि पेंशन कब मिलेगी कितनी मिलेगी और इसके लिए कौनकौन सी शर्तें जरूरी हैं। अगर आप भी प्राइवेट नौकरी करते हैं तो ईपीएफ और ईपीएस के इस सिस्टम को समझना बेहद जरूरी है। सबसे पहले यह जानना जरूरी है कि आपकी सैलरी से कटने वाला पीएफ दो हिस्सों में बंटता है। पहला है ईपीएफ जिसमें कर्मचारी और नियोक्ता दोनों का योगदान जमा होता है और इस पर ब्याज मिलता है।
    दूसरा है ईपीएस जिसमें केवल नियोक्ता के योगदान का 8.33 प्रतिशत हिस्सा जाता है। यही ईपीएस फंड आगे चलकर आपकी मासिक पेंशन का आधार बनता है। प्राइवेट कर्मचारियों को पेंशन पाने के लिए दो सबसे अहम शर्तें पूरी करनी होती हैं। पहली शर्त है कम से कम 10 साल की पेंशन योग्य सेवा। इसका मतलब यह है कि आपने कुल मिलाकर 10 साल तक ईपीएस में योगदान किया हो। अगर आप बीच-बीच में नौकरी बदलते हैं तो अपना पीएफ अकाउंट ट्रांसफर कराना बेहद जरूरी है ताकि आपकी सर्विस की अवधि जुड़ती रहे। दूसरी शर्त है उम्र। ईपीएस नियमों के अनुसार नियमित पेंशन 58 साल की उम्र पूरी होने के बाद ही शुरू होती है।

    हालांकि ईपीएफओ कुछ मामलों में समय से पहले पेंशन का विकल्प भी देता है। यदि आपकी उम्र 50 साल हो चुकी है और आपने 10 साल की पेंशन योग्य सेवा पूरी कर ली है तो आप अर्ली पेंशन के लिए आवेदन कर सकते हैं। लेकिन इसमें एक नुकसान भी है आपकी पेंशन की राशि हर साल के लिए 4 प्रतिशत कम कर दी जाती है। यानी 58 साल से पहले जितने साल पेंशन लेंगे उतनी कटौती होगी। अगर कोई कर्मचारी 10 साल की सेवा पूरी करने से पहले नौकरी छोड़ देता है तो उसे मासिक पेंशन नहीं मिलती। ऐसे मामलों में वह ईपीएस का पैसा एकमुश्त निकाल सकता है। वहीं अगर 10 साल की सेवा पूरी हो चुकी है लेकिन उम्र 58 साल नहीं हुई है तो कर्मचारी स्कीम सर्टिफिकेट ले सकता है। यह सर्टिफिकेट भविष्य में पेंशन पाने का अधिकार सुरक्षित रखता है।

    पेंशन की गणना एक तय फॉर्मूले से होती है। इसका सामान्य फॉर्मूला है मासिक पेंशन = पेंशन योग्य वेतन × पेंशन योग्य सेवा ÷ 70 यहां पेंशन योग्य वेतन आमतौर पर अंतिम वर्षों का औसत वेतन माना जाता है जिस पर ईपीएस का योगदान हुआ हो। कुल मिलाकर प्राइवेट कर्मचारियों के लिए पेंशन का गणित 10 साल की सेवा और 58 साल की उम्र के इर्द-गिर्द घूमता है। अगर आप समय रहते नियम समझ लें और पीएफ ट्रांसफर जैसी प्रक्रियाएं सही से पूरी करें तो रिटायरमेंट के बाद एक सुनिश्चित मासिक आय का लाभ उठा सकते हैं।

  • माणिक्य भस्म: चेहरे पर निखार और हृदय स्वास्थ्य के लिए औषधि, जानें सेवन की सावधानियां

    माणिक्य भस्म: चेहरे पर निखार और हृदय स्वास्थ्य के लिए औषधि, जानें सेवन की सावधानियां

    नई दिल्ली।  प्राचीन आयुर्वेद में जड़ी-बूटियों के साथ-साथ रत्नों का भी इस्तेमाल होता आया है। हिमालय की पहाड़ियों पर मिलने वाली दुर्लभ जड़ी-बूटियों की तरह ही, रत्नों में भी संजीवनी शक्ति होती है। खासतौर पर माणिक्य भस्म का आयुर्वेद में लंबा इतिहास है, जो स्वास्थ्य सुधारने के साथ चेहरे के निखार और मानसिक क्षमता बढ़ाने में मदद करता है।

    हृदय, पाचन और श्वसन के लिए फायदेमंद

    माणिक्य भस्म का प्रयोग हृदय संबंधी विकार, अल्पशुक्राणुता, पाचन दोष, सांस संबंधी रोग और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए किया जाता है। आयुर्वेद में इसे वात और कफ दोष को संतुलित करने वाला माना गया है। जब शरीर में इन दोषों की अधिकता होती है, तो सर्दी, जुकाम, बुखार, पेट में अल्सर और गर्मी जैसी समस्याएं उत्पन्न होती हैं। माणिक्य भस्म का सेवन इन सभी समस्याओं को कम करने में मदद करता है।

    त्वचा और चेहरे की सुंदरता में लाभकारी

    माणिक्य भस्म चेहरे की चमक वापस लाने में भी सहायक है। इसका सेवन और लेपन चेहरे के ओज को बढ़ाता है, त्वचा की खुजली, जलन, एलर्जी जैसी समस्याओं से राहत दिलाता है। समय से पहले झुर्रियों या बुजुर्ग दिखने की समस्या में यह संजीवनी साबित हो सकता है।

    माणिक्य भस्म का निर्माण और सेवन

    भस्म बनाने में शुद्ध माणिक्य, पारा, ऑर्पिमेंट और आर्सेनिक सल्फाइड का इस्तेमाल होता है। सामग्री को कई बार शोधन करके सुरक्षित बनाया जाता है। इसे चिकित्सक की सलाह और वजन के अनुसार ही लेना चाहिए। पीलिया, काला बुखार, बार-बार पेशाब आना या अन्य मूत्र संबंधी बीमारियों में माणिक्य भस्म औषधि की तरह काम करता है और कई दिनों में लाभ दिखाता है।

    संजीवनी गुणों की भरमार

    माणिक्य भस्म का नियमित और चिकित्सकीय सेवन रक्त शुद्ध करता है, पेट संबंधी विकार ठीक करता है, ऊर्जा और मानसिक क्षमता बढ़ाता है। आयुर्वेद में इसे संजीवनी के रूप में माना गया है, जो शरीर और मन दोनों को संतुलित रखता है।

  • ऑस्ट्रेलिया में सोशल मीडिया बैन को महीनेभर से ज्यादा समय बीता, कितना प्रभावी रहा ये फैसला?

    ऑस्ट्रेलिया में सोशल मीडिया बैन को महीनेभर से ज्यादा समय बीता, कितना प्रभावी रहा ये फैसला?

    नई दिल्ली।  ऑस्ट्रेलिया अब दुनिया का पहला ऐसा देश बन गया है, जहां 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल पूरी तरह बंद कर दिया गया है। यह कानून 10 दिसंबर से लागू हुआ और अब लगभग एक महीने के बाद इसके शुरुआती असर सामने आए हैं।

    यूरो न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, इस महीने के भीतर सोशल मीडिया कंपनियों ने लगभग 50 लाख नाबालिग अकाउंट हटा दिए हैं। ऑस्ट्रेलिया के इंटरनेट रेगुलेटर ने बताया कि कानून के पालन के लिए 4.7 मिलियन अकाउंट्स हटाए गए हैं।

    ई-सेफ्टी कमिश्नर जूली इनमैन ग्रांट ने कहा कि यह शुरुआती संकेत हैं कि बड़े प्लेटफॉर्म 16 साल से कम उम्र के लोगों को अकाउंट रखने से रोकने के लिए जरूरी कदम उठा रहे हैं। उन्होंने आगे कहा, “मैं इन शुरुआती नतीजों से बहुत खुश हूं। डिजिटल सुरक्षा की रेगुलेटरी गाइडेंस और प्लेटफॉर्म के साथ जुड़ाव पहले से ही अच्छे नतीजे दे रहा है।”

    इस कानून का उल्लंघन करने पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को 4.95 करोड़ ऑस्ट्रेलियाई डॉलर तक का जुर्माना लग सकता है। इनमैन ग्रांट ने माना कि कुछ बच्चे सोशल मीडिया पर बने रहने के लिए क्रिएटिव तरीके निकाल सकते हैं, लेकिन उन्होंने जोर देकर कहा कि डिजिटल सुरक्षा नियमों का पालन समाज में सुरक्षा और सांस्कृतिक मानदंडों को दोबारा स्थापित करने के लिए जरूरी है।

    डेनमार्क जैसे नॉर्डिक देश भी ऐसे ही कानूनों पर नजर रख रहे हैं। नवंबर में उन्होंने घोषणा की कि 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया एक्सेस ब्लॉक किया जाएगा, जिसे 2026 के मध्य तक कानून का रूप दिया जा सकता है। नॉर्डिक देश उत्तरी यूरोप के पांच संप्रभु राष्ट्रों—डेनमार्क, नॉर्वे, स्वीडन, फिनलैंड, आइसलैंड—और उनके स्वायत्त क्षेत्रों का समूह है।

    इस तरह ऑस्ट्रेलिया और नॉर्डिक देशों के कदम यह दिखाते हैं कि डिजिटल दुनिया में बच्चों की सुरक्षा को लेकर सरकारें अब कड़े नियम लागू कर रही हैं और तकनीकी प्लेटफॉर्म को जवाबदेह बना रही हैं।

  • आलिया भट्ट ; ने सोशल मीडिया पर साझा कीं ,10 साल पुरानी यादें शाहरुख खान और मां के साथ दिखीं खास झलकियां

    आलिया भट्ट ; ने सोशल मीडिया पर साझा कीं ,10 साल पुरानी यादें शाहरुख खान और मां के साथ दिखीं खास झलकियां


    नई दिल्ली । बॉलीवुड की टैलेंटेड और चहेती एक्ट्रेस आलिया भट्ट इन दिनों अपनी अपकमिंग फिल्म अल्फा को लेकर सुर्खियों में बनी हुई हैं। एक्टिंग के साथ-साथ सोशल मीडिया पर भी आलिया काफी एक्टिव रहती हैं और अक्सर अपनी जिंदगी से जुड़े खास पलों की झलक फैंस के साथ साझा करती रहती हैं। इसी कड़ी में हाल ही में आलिया भट्ट ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर करीब 10 साल पुरानी कुछ यादगार तस्वीरें शेयर की हैं जो देखते ही देखते वायरल हो गईं।

    इन तस्वीरों में आलिया भट्ट के करियर और निजी जिंदगी के खूबसूरत लम्हे कैद नजर आते हैं। एक तस्वीर में आलिया कालीन पर बैठकर बेहद सादगी भरे अंदाज़ में पोज देती दिखाई दे रही हैं। वहीं दूसरी तस्वीर में वह बॉलीवुड के किंग खान शाहरुख खान के साथ नजर आ रही हैं जो उनके शुरुआती करियर के खास पलों की याद दिलाती है। इसके अलावा एक फोटो में आलिया अपनी मां सोनी राजदान के साथ दिखाई दे रही हैं जो फैंस को काफी भावुक कर रही है।

    इन तस्वीरों के साथ आलिया भट्ट ने एक लंबा और भावनात्मक कैप्शन भी लिखा है जिसमें उन्होंने साल 2016 की शुरुआत को याद किया है। उन्होंने लिखा कि 2016 की शुरुआत सामान्य रही लेकिन उसी दौरान उन्हें अपने पसंदीदा को-एक्टर के साथ शूटिंग के कुछ बेहद खूबसूरत पल मिले। आलिया ने फिल्म बद्रीनाथ की दुल्हनिया के सुपरहिट गाने तम्मा तम्मा की शूटिंग गोल्डन टेंपल की सुनहरी यादें एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मिली गॉसिप एले मैगजीन के 2016 कवर शूट और कोल्डप्ले बर्लिन 2016 कॉन्सर्ट का भी जिक्र किया।

    आलिया की यह पोस्ट उनके फैंस के लिए किसी टाइम कैप्सूल से कम नहीं है। फैंस कमेंट सेक्शन में उनके पुराने दिनों की तारीफ करते हुए उनकी जर्नी को प्रेरणादायक बता रहे हैं। कई यूजर्स ने लिखा कि कैसे आलिया ने एक दशक में खुद को एक बेहतरीन और परिपक्व अभिनेत्री के रूप में साबित किया है। वर्कफ्रंट की बात करें तो आलिया भट्ट जल्द ही फिल्म अल्फा में नजर आने वाली हैं जिसमें उनके साथ शरवरी अनिल कपूर और बॉबी देओल के नजर आने की संभावना है। इसके अलावा वह संजय लीला भंसाली की बहुप्रतीक्षित फिल्म लव एंड वॉर में भी अहम भूमिका निभाती दिखाई देंगी। लगातार दमदार फिल्मों के साथ आलिया भट्ट एक बार फिर दर्शकों का दिल जीतने के लिए तैयार हैं।

  • सोने की तेजी से भारतीय परिवारों की संपत्ति में 2025 में रिकॉर्ड बढ़ोतरी, 117 लाख करोड़ रुपए का इजाफा

    सोने की तेजी से भारतीय परिवारों की संपत्ति में 2025 में रिकॉर्ड बढ़ोतरी, 117 लाख करोड़ रुपए का इजाफा


    नई दिल्ली। साल 2025 में सोने की कीमतों में आई जबरदस्त तेजी ने भारतीय परिवारों की संपत्ति को ऐतिहासिक स्तर तक बढ़ा दिया। एचडीएफसी म्यूचुअल फंड ईयरबुक 2026 के आंकड़ों के मुताबिक 2025 में भारतीय घरों की कुल संपत्ति में करीब 117 लाख करोड़ रुपए या लगभग 1.3 ट्रिलियन डॉलर का इजाफा हुआ। यह पिछले 25 वर्षों में सोने की कीमतों में हुई सबसे बड़ी वृद्धि है।

    रिपोर्ट के अनुसारसाल 2025 में 15 दिसंबर तक सोने की कीमत प्रति 10 ग्राम लगभग 57, 000 रुपए तक पहुंच गई। पिछले साल 2024 में भी सोने की कीमत में प्रति 10 ग्राम 14,000 रुपए की वृद्धि हुई थी। इस तेजी ने न केवल परिवारों की संपत्ति बढ़ाई बल्कि रिटेल लोन की मांग को भी बढ़ावा दिया क्योंकि सोने के बदले लिए जाने वाले लोन में उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखने को मिली।जबकि शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव रहा सोना सुरक्षित निवेश बनकर उभरा। रिपोर्ट में बताया गया है कि 2025 भारतीय शेयर बाजार के लिए स्थिरता का साल रहा। वहीं वैश्विक स्तर पर सोना, उभरते बाजार, यूरोप और मैग्निफिसेंट 7 स्टॉक सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वालों में शामिल रहे। दूसरी ओर ऑयल अमेरिकी डॉलर और बिटकॉइन जैसी संपत्तियों का प्रदर्शन कमजोर रहा।

    हालांकि भारत का प्रदर्शन वैश्विक बाजारों के मुकाबले कमजोर रहा। निफ्टी का प्रदर्शन वैश्विक और उभरते बाजारों के मुकाबले करीब 25 प्रतिशत कमजोर रहा जो पिछले लगभग 30 वर्षों का सबसे खराब प्रदर्शन माना जा रहा है। इस गिरावट के बावजूद भारतीय बाजार का वैल्यूएशन अब अपने लंबे समय के औसत स्तर के करीब आ गया है।रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि 2025 में स्मॉल-कैप और मिड-कैप शेयरों का प्रदर्शन लार्ज-कैप शेयरों के मुकाबले कमजोर रहा। करीब 30 प्रतिशत स्मॉल-कैप शेयर अपने 52 हफ्तों के उच्चतम स्तर से 30 प्रतिशत या उससे ज्यादा गिर चुके हैं। फिर भी लार्ज-कैप स्टॉक्स को निवेशकों के लिए अभी भी बेहतर विकल्प माना जा रहा है।

    निवेश को लेकर सलाह देते हुए एचडीएफसी म्यूचुअल फंड ने कहा कि नए निवेशकों को हाइब्रिड फंड्स पर विचार करना चाहिए। ऐसे फंड्स में इक्विटी डेट और सोने का मिश्रण होता है, जिससे बाजार में उतार-चढ़ाव के समय निवेशकों को बेहतर संतुलन और सुरक्षा मिलती है।इस तरह 2025 में सोने की तेजी ने भारतीय परिवारों की संपत्ति को नया आयाम दिया है। निवेशकों के लिए यह साल चुनौती और अवसर दोनों लेकर आया, जहां सोना सुरक्षित निवेश का सबसे भरोसेमंद विकल्प साबित हुआ।

  • अक्षय कुमार; ने अनोखे अंदाज़ में ,Twinkle Khanna को शादी की सिल्वर जुबली ,की दी बधाई सास डिंपल कपाड़िया की कही बात आई याद

    अक्षय कुमार; ने अनोखे अंदाज़ में ,Twinkle Khanna को शादी की सिल्वर जुबली ,की दी बधाई सास डिंपल कपाड़िया की कही बात आई याद


    नई दिल्ली । बॉलीवुड के सबसे चहेते और मजबूत रिश्तों में शुमार अक्षय कुमार और ट्विंकल खन्ना की शादी को आज 25 साल पूरे हो गए हैं। सिल्वर जुबली के इस खास मौके पर अक्षय कुमार ने अपने चिर-परिचित मज़ाकिया और दिल से जुड़े अंदाज़ में पत्नी ट्विंकल खन्ना को शादी की सालगिरह की बधाई दी। अभिनेता ने सोशल मीडिया पर एक मजेदार वीडियो साझा किया जिसमें उनके और ट्विंकल के रिश्ते की झलक दिखाई देती है। इस वीडियो के साथ अक्षय कुमार ने जो कैप्शन लिखा वह फैंस का दिल जीत रहा है।
    उन्होंने अपनी सास और दिग्गज अभिनेत्री डिंपल कपाड़िया की शादी के समय कही एक बात को याद करते हुए लिखा कि जब 2001 में उनकी शादी हुई थी तब डिंपल कपाड़िया ने उनसे कहा था बेटा अजीबोगरीब हालात में भी हंसने के लिए तैयार रहना क्योंकि वो बिल्कुल वैसा ही करेगी। अक्षय ने आगे मजाकिया लहजे में लिखा कि 25 साल बीत जाने के बाद अब उन्हें पूरी तरह समझ आ गया है कि उनकी सास ने कभी झूठ नहीं बोला। उन्होंने लिखा कि ट्विंकल जिंदगी में सीधा चलने के बजाय नाचते-गाते जीना पसंद करती हैं। अक्षय ने अपनी पत्नी को सलाम करते हुए कहा कि ट्विंकल उन्हें लगातार हंसाती हैं सोचने पर मजबूर करती हैं और कभी-कभी हल्का-सा परेशान भी कर देती हैं। अंत में उन्होंने प्यार भरे शब्दों में लिखा हैप्पी 25वीं एनिवर्सरी टीना 25 साल की मस्ती जिसे हम दोनों दिल से प्यार करते हैं।

    अक्षय कुमार और ट्विंकल खन्ना की लव स्टोरी भी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं रही है। दोनों की पहली मुलाकात एक मैगजीन फोटोशूट के दौरान हुई थी। फिल्मों में साथ काम करते-करते दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं और प्यार परवान चढ़ा। शादी से पहले ट्विंकल ने अक्षय के सामने एक अनोखी शर्त रखी थी अगर उनकी फिल्म मेला फ्लॉप हुई तो वे शादी कर लेंगे। संयोग से फिल्म फ्लॉप हो गई और 17 जनवरी 2001 को दोनों ने सात फेरे ले लिए। आज 25 साल बाद भी यह जोड़ी अपनी केमिस्ट्री दोस्ती और हल्के-फुल्के मज़ाक के लिए जानी जाती है। अक्षय कुमार जहां आज भी फिल्मों में लगातार सक्रिय हैं वहीं ट्विंकल खन्ना ने अभिनय को अलविदा कहकर लेखन की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई है। उनकी कई किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं जिन्हें पाठकों का भरपूर प्यार मिला है।

  • T20 वर्ल्ड कप 2026: बांग्लादेश ने भारतीय मूल ICC अधिकारी को वीजा न देकर विवाद खड़ा किया

    T20 वर्ल्ड कप 2026: बांग्लादेश ने भारतीय मूल ICC अधिकारी को वीजा न देकर विवाद खड़ा किया


    नई दिल्ली। टी20 वर्ल्ड कप 2026 को लेकर बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (BCB) की तरफ से उठाए जा रहे कदम लगातार विवादों का कारण बन रहे हैं। ताजा विवाद तब सामने आया जब बांग्लादेश ने भारतीय मूल के एक वरिष्ठ ICC अधिकारी को वीजा देने से इनकार कर दिया। यह कदम क्रिकेट जगत में बेहद असहज और शर्मनाक माना जा रहा है और ICC तथा बांग्लादेश के बीच तनाव और बढ़ गया है।

    बांग्लादेश की ओर से यह मांग की जा रही है कि टी20 वर्ल्ड कप 2026 में उसके भारत में होने वाले चार ग्रुप मैचों को श्रीलंका में शिफ्ट किया जाए।

    भारत और श्रीलंका इस टूर्नामेंट के सह-मेजबान हैं, लेकिन टूर्नामेंट शुरू होने में समय कम होने के कारण शेड्यूल में बदलाव करना मुश्किल माना जा रहा है।

    ICC ने इस मसले को सुलझाने के लिए दो वरिष्ठ अधिकारियों को बांग्लादेश भेजा था। इनमें से एक भारतीय मूल का अधिकारी भी था। लेकिन बांग्लादेश सरकार ने उसे वीजा देने में देरी की और अंततः वीजा नहीं दिया। नतीजतन ICC का प्रतिनिधिमंडल अधूरा रह गया और केवल एंटी करप्शन यूनिट एवं सिक्योरिटी प्रमुख एंड्रयू एफग्रेव ही ढाका पहुंच सके।

    ICC अधिकारियों का यह दौरा मुख्य रूप से सुरक्षा चिंताओं को दूर करने और BCB को आश्वस्त करने के लिए था कि भारत में बांग्लादेशी टीम को किसी भी तरह का खतरा नहीं है। ICC का मानना है कि भारत में सभी टीमों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी। इस दौरे में ICC अधिकारी BCB के साथ-साथ बांग्लादेश के युवा और खेल मंत्रालय के पदाधिकारियों से भी चर्चा कर रहे थे।

    टी20 वर्ल्ड कप 2026 में बांग्लादेश के चार मैच भारत में तय हैं

    कोलकाता के ईडन गार्डन्स में तीन और मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में एक। हाल में बांग्लादेश में हिंदू युवकों की हत्या के विरोध में भारत में विरोध-प्रदर्शन और कुछ विवादित घटनाओं के बाद BCB ने भारत में मैचों को कराने पर असमर्थता जताई और शिफ्ट करने की मांग उठाई।

    अब ICC के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वह टूर्नामेंट की निष्पक्षता, सुरक्षा और शेड्यूल को बनाए रखते हुए इस विवाद को कैसे सुलझाता है। अगर यह विवाद समय रहते नहीं सुलझा तो T20 वर्ल्ड कप 2026 की छवि और आयोजन व्यवस्था पर असर पड़ सकता है।

  • बसंत पंचमी से होली का उत्सव: ऋतु और धर्म का अद्भुत संगम.

    बसंत पंचमी से होली का उत्सव: ऋतु और धर्म का अद्भुत संगम.


    नई दिल्ली। मकर संक्रांति के बाद जैसे-जैसे बसंत पंचमी का पर्व करीब आता है देशभर में उत्सव की तैयारियां शुरू हो जाती हैं। बसंत पंचमी हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण त्योहार है जिस दिन विद्या कला और संगीत की देवी मां सरस्वती की पूजा की जाती है। लेकिन इसके साथ ही एक और रंगीन पर्व होली की तैयारी भी शुरू हो जाती है। सवाल यह है कि जब होली फाल्गुन मास में मनाई जाती है तो बसंत पंचमी पर इसकी तैयारी क्यों शुरू हो जाती है? इसका उत्तर ऋतु और धार्मिक विश्वासों में छिपा है।

    बसंत पंचमी का आगमन बसंत ऋतु के साथ होता है। बसंत ऋतु को ऋतुओं का राजा कहा जाता है। इस समय प्रकृति अपने सबसे सुंदर रूप में दिखाई देती है। पेड़ों पर फूल खिलते हैं सरसों के खेत पीले रंग से लहलहा उठते हैं और वातावरण में नई ऊर्जा का संचार होता है। यही कारण है कि बसंत पंचमी को प्रकृति का उत्सव और नई खुशियों का प्रतीक माना जाता है। इस दिन न केवल देवी सरस्वती की पूजा होती है बल्कि यह समय प्रकृति की सौंदर्य और रंगों का जश्न मनाने का भी है।

    धार्मिक दृष्टि से भी बसंत पंचमी और होली का संबंध गहरा है। हिंदू कैलेंडर के अनुसार बसंत ऋतु का आगमन ही होली के उत्सव का संकेत देता है। उत्तर भारत के विशेषकर ब्रज क्षेत्र में बसंत पंचमी से ही फाग गीत गाए जाने लगते हैं और होली की तैयारियां शुरू हो जाती हैं। यह उत्सव लगभग 40 दिनों तक चलता है जिसमें हर दिन मंदिरों और घरों में रंगों और गुलाल के साथ भगवान की पूजा की जाती है। बसंत पंचमी से होली तक का यह समय प्रकृति के 12 रंगों और नई ऊर्जा का उत्सव माना जाता है।

    पौराणिक कथाओं के अनुसार बसंत पंचमी और होली के बीच का यह समय प्रेम उल्लास और आनंद का प्रतीक है। ऐसा माना जाता है कि सृष्टि में रंग भरने और प्रेम बनाए रखने के लिए कामदेव और रति ने भगवान शिव की तपस्या को भंग किया था। इसी घटना के बाद से बसंत पंचमी से लेकर होली तक का समय प्रेम और उत्साह के लिए पवित्र माना गया। इस अवधि में प्रकृति प्रेम और उल्लास सभी मिलकर मनुष्य और समाज में एक नई ऊर्जा का संचार करते हैं।

    इस प्रकार बसंत पंचमी न केवल ज्ञान और विद्या का पर्व है बल्कि यह होली के रंगीन उत्सव की शुरुआत का संकेत भी देता है। ऋतु और धर्म का यह अद्भुत संगम समाज में उत्साह प्रेम और रंगों का संदेश फैलाता है।

  • मुनमुन दत्ता, ने प्यार और ब्रेकअप पर खोले दिल के राज, बोलीं ‘मैं तुरंत किसी से रिश्ता खत्म नहीं करती’

    मुनमुन दत्ता, ने प्यार और ब्रेकअप पर खोले दिल के राज, बोलीं ‘मैं तुरंत किसी से रिश्ता खत्म नहीं करती’

    नई दिल्ली । टीवी जगत की मशहूर अभिनेत्री मुनमुन दत्ता जिन्हें लोकप्रिय कॉमेडी शो तारक मेहता का उल्टा चश्मा में बबीता अय्यर के किरदार से घर-घर में पहचान मिली हाल ही में अपने निजी जीवन को लेकर खुलकर सामने आई हैं। मुनमुन हाल ही में यूट्यूबर और पॉडकास्टर रणवीर अल्लाहबादिया के पॉडकास्ट में नजर आईं जहां उन्होंने करियर के साथ-साथ प्यार रिश्तों और ब्रेकअप जैसे संवेदनशील विषयों पर बेबाकी से अपनी राय रखी। पॉडकास्ट के दौरान मुनमुन दत्ता ने कहा कि प्यार को लेकर लोगों की सोच अक्सर एकतरफा होती है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि रिश्तों में प्यार खत्म होना केवल लड़कों के साथ नहीं बल्कि लड़कियों के साथ भी हो सकता है। मुनमुन ने स्वीकार किया कि उनके जीवन में भी ऐसे मौके आए हैं जब उन्हें महसूस हुआ कि शायद अब रिश्ते में पहले जैसी भावना नहीं रही।

    ब्रेकअप को लेकर अपनी सोच साझा करते हुए उन्होंने कहा मैं तुरंत किसी के साथ ब्रेकअप नहीं कर सकती। मैं हमेशा रिश्ते को बचाने की कोशिश करती हूं। मैं बहुत कुछ देती हूं भावनाएं समय और समझ। लेकिन एक वक्त ऐसा आता है जब मुझे लगता है कि अब पाने का समय है। जब लगातार देने वाला ही बनकर रह जाओ और बदले में कुछ न मिले तो वह बहुत बुरा लगता है। मुनमुन ने आगे कहा कि जब किसी रिश्ते में देने और पाने का संतुलन बिगड़ जाता है तो धीरे-धीरे नीरसता आने लगती है। यही नीरसता रिश्ते को कमजोर कर देती है और इंसान को यह सोचने पर मजबूर कर देती है कि क्या वाकई यह रिश्ता आगे चल पाएगा। उनका मानना है कि प्यार हमेशा स्थायी नहीं होता और इसे स्वीकार करना भी जिंदगी का एक हिस्सा है।

    अगर मुनमुन दत्ता के करियर की बात करें तो उन्होंने साल 2004 में टीवी शो हम सब बाराती से अपने अभिनय करियर की शुरुआत की थी। इसके बाद वह मुंबई एक्सप्रेस 2005 और हॉलीडे 2006 जैसी फिल्मों में भी नजर आ चुकी हैं। हालांकि उन्हें असली पहचान तारक मेहता का उल्टा चश्मा से ही मिली जिसने उन्हें टीवी की सबसे लोकप्रिय अभिनेत्रियों में शामिल कर दिया। पॉडकास्ट में मुनमुन की यह ईमानदार बातचीत सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बनी हुई है। फैंस उनकी साफगोई और रिश्तों को लेकर परिपक्व सोच की तारीफ कर रहे हैं।

  • ऑस्ट्रेलिया में सोशल मीडिया बैन: एक महीने में हटे 50 लाख अकाउंट, कितना कारगर रहा फैसला?

    ऑस्ट्रेलिया में सोशल मीडिया बैन: एक महीने में हटे 50 लाख अकाउंट, कितना कारगर रहा फैसला?


    नई दिल्ली। ऑस्ट्रेलिया दुनिया का पहला ऐसा देश बन गया है जहां 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया है। इस ऐतिहासिक फैसले को लागू हुए अब एक महीने से अधिक समय बीत चुका है और इसके शुरुआती नतीजे सामने आने लगे हैं। सवाल यह है कि क्या यह सख्त कदम वास्तव में असरदार साबित हो रहा है?

    यूरो न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक कानून लागू होने के पहले ही महीने में सोशल मीडिया कंपनियों ने करीब 50 लाख नाबालिग अकाउंट हटा दिए हैं। ऑस्ट्रेलिया के इंटरनेट रेगुलेटर ने बताया कि 10 दिसंबर से लागू हुए इस कानून के तहत 16 साल से कम उम्र के करीब 4.7 मिलियन अकाउंट विभिन्न प्लेटफॉर्म्स से डिलीट किए गए हैं। इसे डिजिटल सुरक्षा के लिहाज से एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

    ऑस्ट्रेलिया की ई-सेफ्टी कमिश्नर ने इस संबंध में गुरुवार को आधिकारिक डेटा जारी किया। उन्होंने बताया कि यह आंकड़े इस बात का शुरुआती संकेत हैं कि बड़े सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स अब नियमों को गंभीरता से लागू कर रहे हैं और नाबालिगों को प्लेटफॉर्म से दूर रखने के लिए ठोस कदम उठा रहे हैं।ई-सेफ्टी कमिश्नर जूली इनमैन ग्रांट ने इन शुरुआती नतीजों पर संतोष जताते हुए कहा “मैं इन आंकड़ों से बहुत खुश हूं। यह साफ है कि डिजिटल सुरक्षा को लेकर दी गई रेगुलेटरी गाइडेंस और प्लेटफॉर्म्स के साथ बेहतर समन्वय अब सकारात्मक नतीजे देने लगा है।” उन्होंने इसे कम्प्लायंस पर पहला सरकारी डेटा बताया।

    हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि कुछ 16 साल से कम उम्र के अकाउंट अभी भी सक्रिय हैं। उनका कहना था कि जैसे समाज में अन्य सुरक्षा कानूनों के साथ होता है वैसे ही इस कानून की सफलता केवल पूर्ण रोक से नहीं बल्कि नुकसान को कम करने और सामाजिक व्यवहार को बदलने से आंकी जाएगी। उन्होंने माना कि कुछ बच्चे सोशल मीडिया पर बने रहने के लिए “क्रिएटिव तरीके” अपना सकते हैं लेकिन कानून का उद्देश्य एक सुरक्षित डिजिटल संस्कृति तैयार करना है।इन नियमों का उल्लंघन करने पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर 4.95 करोड़ ऑस्ट्रेलियाई डॉलर तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। यही कारण है कि टेक कंपनियां अब उम्र सत्यापन और अकाउंट मॉनिटरिंग को लेकर ज्यादा सख्त रवैया अपना रही हैं।

    ऑस्ट्रेलिया के इस कदम पर अब दुनिया के कई देश नजर बनाए हुए हैं। डेनमार्क समेत अन्य नॉर्डिक देशों ने भी इसी तरह के कानून पर काम शुरू कर दिया है। नॉर्डिक देशों के समूह ने नवंबर में घोषणा की थी कि वे 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया एक्सेस ब्लॉक करने को लेकर एक समझौते पर पहुंचे हैं जिसे 2026 के मध्य तक कानून का रूप दिया जा सकता है।डिजिटल सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ऑस्ट्रेलिया का यह प्रयोग भविष्य में अन्य देशों के लिए एक मॉडल बन सकता है। हालांकि इसकी वास्तविक सफलता का मूल्यांकन लंबे समय में ही संभव होगा जब यह देखा जाएगा कि इससे बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य ऑनलाइन सुरक्षा और डिजिटल व्यवहार में कितना सकारात्मक बदलाव आता है।