Author: bharati

  • रूस ने भारत तक रेल कनेक्शन की संभावना जताई, पाकिस्तान और ईरान के रास्ते व्यापारिक संपर्क बढ़ाने की तैयारी पर चर्चा

    रूस ने भारत तक रेल कनेक्शन की संभावना जताई, पाकिस्तान और ईरान के रास्ते व्यापारिक संपर्क बढ़ाने की तैयारी पर चर्चा

    नई दिल्ली । रूस और भारत के बीच व्यापारिक संपर्क को मजबूत करने के लिए एक नए जमीनी परिवहन मार्ग की संभावना पर चर्चा शुरू हुई है। रूस ने भारत तक पहुंचने वाले संभावित वैकल्पिक रास्तों पर विचार करने की बात कही है। प्रस्तावित मार्ग रूस से शुरू होकर तुर्कमेनिस्तान, ईरान, अफगानिस्तान और पाकिस्तान के रास्ते हिंद महासागर तक पहुंच सकता है। हालांकि, अभी यह केवल प्रारंभिक प्रस्ताव है और किसी औपचारिक रेल परियोजना को मंजूरी नहीं मिली है।

    यह पहल ऐसे समय सामने आई है जब पश्चिम एशिया में तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े जोखिमों के कारण समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई है। भारत और रूस के बीच बड़े पैमाने पर व्यापार वर्तमान में समुद्री मार्गों पर निर्भर है। ऐसे में किसी महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग में व्यवधान आने पर वैकल्पिक जमीनी नेटवर्क दोनों देशों के बीच माल ढुलाई के लिए अतिरिक्त विकल्प उपलब्ध करा सकता है।

    रूस के उप प्रधानमंत्री मरात खुसनुलिन ने भारत तक पहुंचने वाले हर संभावित मार्ग पर विचार करने की जरूरत बताई है। उन्होंने बोस्फोरस और होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े जोखिमों के मद्देनजर वैकल्पिक संपर्क मार्ग विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। प्रस्ताव का उद्देश्य केवल रेल संपर्क तक सीमित नहीं है, बल्कि रूस और भारत के बीच व्यापार को अधिक सुरक्षित और विविध परिवहन नेटवर्क उपलब्ध कराने से भी जुड़ा है।

    भारत के लिए ऐसा मार्ग ऊर्जा और व्यापार दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण हो सकता है। समुद्री मार्गों में किसी तरह की बाधा या शिपिंग लागत में वृद्धि की स्थिति में जमीनी परिवहन अतिरिक्त विकल्प दे सकता है। रूस से भारत आने वाले कच्चे तेल, उर्वरक और अन्य महत्वपूर्ण सामानों की आपूर्ति के लिए भी वैकल्पिक परिवहन नेटवर्क उपयोगी हो सकता है।

    दूसरी ओर, भारत से रूस को भेजे जाने वाले कृषि उत्पाद, दवाएं और मशीनरी जैसे सामानों के लिए भी जमीनी संपर्क समय और परिवहन लागत को प्रभावित कर सकता है। दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंध बढ़ने के साथ परिवहन के नए विकल्पों की जरूरत भी बढ़ी है। ऐसे में प्रस्तावित मार्ग को व्यापक यूरेशियाई व्यापार नेटवर्क के संदर्भ में देखा जा रहा है।

    भारत पहले से ही अंतरराष्ट्रीय उत्तर दक्षिण परिवहन गलियारे के जरिए रूस और मध्य एशिया तक संपर्क बढ़ाने की दिशा में काम कर रहा है। ईरान के चाबहार बंदरगाह के माध्यम से क्षेत्रीय संपर्क मजबूत करने की भारत की नीति भी इस प्रस्ताव से जुड़ सकती है। हालांकि, प्रस्तावित नए मार्ग में कई जटिल चुनौतियां मौजूद हैं।

    सबसे बड़ी चुनौती पाकिस्तान से जुड़ी है। प्रस्तावित मार्ग पाकिस्तान से होकर गुजरता है, जबकि भारत और पाकिस्तान के बीच जमीनी व्यापार लंबे समय से गंभीर प्रतिबंधों का सामना कर रहा है। भारत के माल को पाकिस्तान से होकर गुजरने की अनुमति और ट्रांजिट अधिकार देना इस योजना के लिए महत्वपूर्ण कूटनीतिक प्रश्न होगा।

    अफगानिस्तान की सुरक्षा और बुनियादी ढांचे की स्थिति भी इस मार्ग के संचालन में बड़ी चुनौती बन सकती है। इसके अलावा अलग-अलग देशों में रेल गेज, सीमा शुल्क व्यवस्था, सीमा पार प्रक्रियाएं और नए बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए बड़े निवेश की आवश्यकता होगी।

    फिलहाल रूस का यह प्रस्ताव शुरुआती विचार के स्तर पर है। इसे वास्तविक रेल परियोजना में बदलने के लिए भारत समेत संबंधित देशों के बीच राजनीतिक सहमति, सुरक्षा व्यवस्था, तकनीकी समन्वय और आर्थिक व्यवहार्यता का आकलन जरूरी होगा। यदि भविष्य में इन बाधाओं का समाधान होता है, तो यह मार्ग भारत और रूस के बीच व्यापार के लिए समुद्री परिवहन के अलावा एक अतिरिक्त विकल्प बन सकता है।

  • एयरपोर्ट संचालकों के एयरलाइन कारोबार में उतरने पर कोई सरकारी रोक नहीं, कुछ PPP समझौतों में स्वामित्व की शर्तें लागू

    एयरपोर्ट संचालकों के एयरलाइन कारोबार में उतरने पर कोई सरकारी रोक नहीं, कुछ PPP समझौतों में स्वामित्व की शर्तें लागू


    नई दिल्ली ।
    केंद्र सरकार ने सोमवार को स्पष्ट किया कि देश में ऐसी कोई व्यापक सरकारी नीति लागू नहीं है, जो बड़े हवाई अड्डों के संचालकों को एयरलाइन कंपनियों में बड़ी हिस्सेदारी रखने या खुद एयरलाइन कारोबार संचालित करने से रोकती हो। सरकार का यह स्पष्टीकरण ऐसे समय में आया है जब भारत के तेजी से बढ़ते विमानन क्षेत्र में एयरपोर्ट संचालन और एयरलाइन कारोबार के बीच संभावित कारोबारी संबंधों को लेकर चर्चा बढ़ रही है। हालांकि, सरकार ने यह भी साफ किया कि सार्वजनिक-निजी भागीदारी यानी PPP मॉडल के तहत विकसित कुछ हवाई अड्डों के मौजूदा समझौतों में स्वामित्व से जुड़ी विशेष शर्तें मौजूद हैं।

    सरकार के अनुसार, प्रमुख हवाई अड्डों के संचालकों पर एयरलाइन कारोबार में प्रवेश को लेकर कोई सामान्य नीतिगत प्रतिबंध नहीं है। इसका मतलब यह है कि किसी एयरपोर्ट ऑपरेटर के लिए एयरलाइन कंपनी में पर्याप्त हिस्सेदारी रखना या एयरलाइन संचालन से जुड़ना अपने आप में प्रतिबंधित नहीं है। हालांकि, किसी विशेष हवाई अड्डे के लिए किए गए रियायत समझौते यानी कंसेशन एग्रीमेंट की शर्तें इस मामले में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

    PPP मॉडल पर विकसित कुछ हवाई अड्डों के लिए किए गए मौजूदा समझौतों में ऐसी शर्तें रखी गई हैं, जिनके तहत अनुसूचित एयरलाइनों या उनसे संबंधित समूह कंपनियों और सहयोगी संस्थाओं को एयरपोर्ट संचालन करने वाली कंपनी में इक्विटी हिस्सेदारी रखने से सीमित किया गया है। इन प्रावधानों का उद्देश्य एयरपोर्ट संचालन और एयरलाइन कारोबार के बीच संभावित हितों के टकराव को नियंत्रित करना माना जाता है।

    सरकार ने यह भी बताया कि इस तरह के एक मौजूदा अनुबंध की शर्त में छूट देने का अनुरोध भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण के पास पहुंचा है। इस अनुरोध के जरिए संबंधित पक्ष एयरपोर्ट संचालन और एयरलाइन कारोबार के बीच मौजूदा स्वामित्व संबंधी सीमा में राहत चाहता है। यदि अनुबंध की शर्तों में बदलाव या छूट मिलती है तो संबंधित एयरपोर्ट संचालक के लिए एयरलाइन कारोबार में प्रवेश का रास्ता आसान हो सकता है।

    हालांकि, सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस अनुरोध पर अभी नागर विमानन मंत्रालय की ओर से औपचारिक समीक्षा नहीं की गई है। यानी फिलहाल केवल अनुरोध प्राप्त हुआ है और उस पर अंतिम निर्णय या नीति संबंधी बदलाव की स्थिति नहीं बनी है। ऐसे में किसी एयरपोर्ट ऑपरेटर के एयरलाइन क्षेत्र में प्रवेश को लेकर तत्काल कोई निश्चित व्यवस्था मानना जल्दबाजी होगी।

    विमानन क्षेत्र में एयरपोर्ट और एयरलाइन के बीच कारोबारी संबंध लंबे समय से महत्वपूर्ण विषय रहे हैं। एक ही कारोबारी समूह के पास एयरपोर्ट और एयरलाइन से जुड़ी हिस्सेदारी होने पर प्रतिस्पर्धा, स्लॉट आवंटन, यात्री सेवाओं और अन्य कारोबारी फैसलों को लेकर सवाल उठ सकते हैं। दूसरी ओर, एकीकृत कारोबारी मॉडल के समर्थकों का मानना है कि इससे बुनियादी ढांचे और विमानन सेवाओं के बीच बेहतर तालमेल बनाया जा सकता है।

    भारत में हवाई यातायात और एयरपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर का लगातार विस्तार हो रहा है। निजी निवेश और PPP मॉडल की भूमिका भी बढ़ी है। ऐसे में एयरपोर्ट संचालकों और एयरलाइन कंपनियों के बीच स्वामित्व संबंधों को लेकर आने वाले समय में नियमों और अनुबंधों की भूमिका महत्वपूर्ण रहेगी। फिलहाल सरकार के रुख से इतना स्पष्ट है कि एयरपोर्ट ऑपरेटरों के एयरलाइन कारोबार में उतरने पर कोई देशव्यापी सरकारी रोक नहीं है, लेकिन संबंधित PPP समझौतों की शर्तें किसी विशेष मामले में अलग स्थिति पैदा कर सकती हैं।

  • SBI भर्ती 2026 में जूनियर एसोसिएट्स के 1,538 पदों पर आवेदन शुरू, जानें योग्यता, आयु सीमा, चयन प्रक्रिया और सैलरी

    SBI भर्ती 2026 में जूनियर एसोसिएट्स के 1,538 पदों पर आवेदन शुरू, जानें योग्यता, आयु सीमा, चयन प्रक्रिया और सैलरी

    नई दिल्ली ।भारतीय स्टेट बैंक ने क्लर्क कैडर में जूनियर एसोसिएट्स कस्टमर सपोर्ट एंड सेल्स के 1,538 पदों पर विशेष भर्ती अभियान शुरू किया है। यह भर्ती एससी, एसटी और ओबीसी श्रेणी की बैकलॉग रिक्तियों को भरने के लिए की जा रही है। इच्छुक और पात्र उम्मीदवार 7 अगस्त से आवेदन प्रक्रिया में शामिल हो सकते हैं। आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि 27 अगस्त निर्धारित की गई है।

    इस भर्ती में अलग अलग राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए रिक्तियां निर्धारित की गई हैं। सबसे अधिक 289 पद गुजरात में हैं। महाराष्ट्र में 165, मध्य प्रदेश में 134, झारखंड में 133, कर्नाटक में 120 और ओडिशा में 111 पद रखे गए हैं। राजस्थान में 106, आंध्र प्रदेश में 88, तमिलनाडु में 65 और पश्चिम बंगाल में 55 पद शामिल हैं।

    इसके अलावा असम में 39, जम्मू कश्मीर में 42, तेलंगाना में 32, उत्तर प्रदेश में 31, छत्तीसगढ़ में 26, चंडीगढ़ में 22, त्रिपुरा में 22, पंजाब में 18, दिल्ली में 17, बिहार में 12 और हिमाचल प्रदेश में 11 पद निर्धारित किए गए हैं। कुल रिक्तियों में एससी के 207, एसटी के 1,219 और ओबीसी के 112 पद शामिल हैं।

    शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उम्मीदवार के पास किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय या संस्थान से किसी भी विषय में स्नातक की डिग्री होनी चाहिए। केंद्र सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त समकक्ष योग्यता रखने वाले उम्मीदवार भी पात्र माने जाएंगे। जिन अभ्यर्थियों के पास इंटीग्रेटेड डुअल डिग्री है, उनके लिए डिग्री पूरी होने की तारीख 31 दिसंबर 2026 या उससे पहले होना जरूरी है।

    जो उम्मीदवार स्नातक के अंतिम वर्ष या अंतिम सेमेस्टर में हैं, वे भी इस भर्ती के लिए आवेदन कर सकते हैं। हालांकि, ऐसे उम्मीदवारों को चयन होने की स्थिति में 31 दिसंबर 2026 या उससे पहले स्नातक परीक्षा पास करने का प्रमाण देना होगा।

    आयु सीमा की बात करें तो उम्मीदवार की न्यूनतम उम्र 20 वर्ष और अधिकतम उम्र 28 वर्ष निर्धारित की गई है। आयु की गणना 1 अप्रैल के आधार पर की जाएगी। आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को सरकारी नियमों के अनुसार अधिकतम आयु सीमा में निर्धारित छूट मिलेगी।

    उम्मीदवारों का चयन ऑनलाइन परीक्षा और स्थानीय भाषा से जुड़े परीक्षण के आधार पर किया जाएगा। चयन प्रक्रिया में प्रारंभिक परीक्षा और मुख्य परीक्षा शामिल होगी। उम्मीदवारों को संबंधित पद के लिए चुनी गई स्थानीय भाषा का परीक्षण भी देना होगा। अंतिम चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद सफल अभ्यर्थियों को जूनियर एसोसिएट्स के पद पर नियुक्ति दी जाएगी।

    चयनित उम्मीदवारों को 24,050 रुपये से लेकर 64,480 रुपये तक मासिक वेतनमान मिलेगा। इसके अतिरिक्त बैंक के नियमों के अनुसार विभिन्न लाभ और भत्ते भी दिए जाएंगे। वेतन और सुविधाओं के कारण बैंकिंग क्षेत्र में करियर बनाने वाले उम्मीदवारों के लिए यह भर्ती महत्वपूर्ण अवसर मानी जा सकती है।

    आवेदन शुल्क उम्मीदवार की श्रेणी के अनुसार निर्धारित किया गया है। ओबीसी श्रेणी के उम्मीदवारों को 750 रुपये शुल्क का भुगतान करना होगा। एससी, एसटी, पीडब्ल्यूबीडी, एक्सएस और डीएक्सएस श्रेणी के अभ्यर्थियों को आवेदन शुल्क में छूट दी गई है।

    उम्मीदवारों को आवेदन प्रक्रिया पूरी करते समय अपनी शैक्षणिक योग्यता, आयु और श्रेणी से संबंधित जानकारी सावधानीपूर्वक दर्ज करनी होगी। आवेदन की अंतिम तिथि 27 अगस्त है, इसलिए पात्र अभ्यर्थियों को निर्धारित समय सीमा के भीतर आवेदन प्रक्रिया पूरी करनी होगी।

  • श्रीलंका की धरती पर टीम इंडिया का दबदबा, 24 टेस्ट में 9 जीत; कोहली की कप्तानी में 2017 में किया था क्लीन स्वीप

    श्रीलंका की धरती पर टीम इंडिया का दबदबा, 24 टेस्ट में 9 जीत; कोहली की कप्तानी में 2017 में किया था क्लीन स्वीप


    नई दिल्ली । भारत और श्रीलंका के बीच दो मैचों की टेस्ट सीरीज का रोमांच 15 अगस्त से शुरू होने जा रहा है। नए टेस्ट कप्तान शुभमन गिल की अगुवाई में टीम इंडिया श्रीलंका की धरती पर अपने मजबूत रिकॉर्ड को बरकरार रखने के इरादे से मैदान में उतरेगी। भारतीय टीम के सामने न सिर्फ सीरीज जीतने की चुनौती होगी बल्कि पिछले कुछ वर्षों से श्रीलंका के खिलाफ टेस्ट क्रिकेट में चले आ रहे दबदबे को कायम रखने की जिम्मेदारी भी होगी।

    श्रीलंका की सरजमीं पर भारतीय टीम का रिकॉर्ड काफी प्रभावशाली रहा है। भारत ने अब तक वहां कुल 24 टेस्ट मैच खेले हैं। इनमें टीम इंडिया ने 9 मुकाबलों में जीत दर्ज की है, जबकि 7 मैचों में उसे हार का सामना करना पड़ा। वहीं 8 टेस्ट मुकाबले ड्रॉ रहे हैं। आंकड़े बताते हैं कि विदेशी परिस्थितियों में खेलने के बावजूद भारतीय टीम ने श्रीलंका के खिलाफ लगातार मजबूत प्रदर्शन किया है।

    भारत ने आखिरी बार 2017 में श्रीलंका का दौरा किया था। उस दौरे पर विराट कोहली की कप्तानी में टीम इंडिया ने शानदार प्रदर्शन करते हुए श्रीलंकाई टीम का सीरीज में 3-0 से क्लीन स्वीप किया था। उस दौरे की जीत भारतीय टेस्ट क्रिकेट के यादगार अभियानों में शामिल रही। टीम इंडिया ने तीनों मुकाबलों में अपना दबदबा कायम रखा और श्रीलंका को किसी भी मैच में वापसी का मौका नहीं दिया।

    अगर भारत और श्रीलंका के बीच ओवरऑल टेस्ट रिकॉर्ड की बात करें तो दोनों टीमों के बीच अब तक 46 टेस्ट मुकाबले खेले गए हैं। इनमें भारत ने 22 मैचों में जीत हासिल की है, जबकि श्रीलंका को सिर्फ 7 मुकाबलों में जीत मिली है। दोनों टीमों के बीच कई मुकाबले ड्रॉ भी रहे हैं। यह आंकड़ा साफ तौर पर बताता है कि टेस्ट क्रिकेट में श्रीलंका के खिलाफ भारतीय टीम का पलड़ा काफी भारी रहा है।

    भारत और श्रीलंका की आखिरी टेस्ट भिड़ंत 2022 में हुई थी। रोहित शर्मा की कप्तानी वाली भारतीय टीम ने उस सीरीज में श्रीलंका को 2-0 से हराया था। ऐसे में भारतीय टीम के पास श्रीलंका के खिलाफ लगातार सीरीज जीतने का सिलसिला आगे बढ़ाने का मौका है। हालांकि इस बार कप्तानी की जिम्मेदारी शुभमन गिल के कंधों पर है और उनके लिए यह सीरीज बतौर टेस्ट कप्तान एक महत्वपूर्ण परीक्षा मानी जा रही है।

    सीरीज शुरू होने से पहले भारतीय टीम ने तीन दिवसीय वॉर्मअप मुकाबले में भी अपनी तैयारियों का मजबूत संकेत दिया। टीम इंडिया ने श्रीलंका क्रिकेट इलेवन को 6 विकेट से हराया। इस मुकाबले में भारतीय बल्लेबाजों ने अच्छी लय दिखाई। यशस्वी जायसवाल, देवदत्त पडिक्कल, रवींद्र जडेजा और कप्तान शुभमन गिल ने प्रभावशाली बल्लेबाजी की।

    देवदत्त पडिक्कल ने पहली पारी में शानदार शतक लगाते हुए 142 रन की नाबाद पारी खेली। उनके प्रदर्शन से भारतीय टीम के मध्यक्रम को मजबूती मिली। वहीं अन्य बल्लेबाजों ने भी उपयोगी पारियां खेलकर सीरीज से पहले अपनी तैयारियों का संकेत दिया।

    अब सबकी नजरें 15 अगस्त से शुरू होने वाली टेस्ट सीरीज पर हैं। शुभमन गिल के लिए यह सिर्फ श्रीलंका के खिलाफ दो टेस्ट मैचों की सीरीज नहीं होगी बल्कि बतौर कप्तान अपने नेतृत्व को मजबूत करने का भी बड़ा अवसर होगा। भारत के शानदार पुराने रिकॉर्ड, हालिया प्रदर्शन और खिलाड़ियों की अच्छी फॉर्म को देखते हुए टीम इंडिया को मजबूत दावेदार माना जा रहा है। हालांकि श्रीलंका की परिस्थितियों में स्पिन और मौसम जैसी चुनौतियां भारतीय टीम की परीक्षा ले सकती हैं। ऐसे में गिल की कप्तानी में टीम इंडिया अपने पुराने दबदबे को नए अंदाज में कायम कर पाती है या नहीं, इसका जवाब सीरीज के दौरान मिलेगा।

  • UP : मुरादाबाद मंडल में सियासी विरासत का दबदबा, 6 मौजूदा विधायकों के पिता भी रह चुके हैं MP-MLA

    UP : मुरादाबाद मंडल में सियासी विरासत का दबदबा, 6 मौजूदा विधायकों के पिता भी रह चुके हैं MP-MLA

    मुरादाबाद। उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद मंडल की राजनीति में सियासी विरासत का असर साफ दिखाई देता है। मंडल के मौजूदा छह विधायक ऐसे हैं, जिनके पिता भी राजनीति में सक्रिय रहे और विधायक या सांसद के रूप में सदन तक पहुंचे। इनमें संभल के दो, जबकि मुरादाबाद, रामपुर, अमरोहा और बिजनौर के एक-एक विधायक शामिल हैं। खास बात यह है कि इन छह विधायकों में तीन समाजवादी पार्टी और तीन भारतीय जनता पार्टी से हैं।

    मंडल के कई राजनीतिक परिवारों में पिता के बाद बेटों ने राजनीति की कमान संभाली। इनमें कुछ नेताओं ने अपनी अलग पहचान बना ली है और लगातार चुनाव जीतकर क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं, जबकि कुछ की राजनीतिक पारी ज्यादा लंबी नहीं चल सकी।

    छह मौजूदा विधायकों की सियासी विरासत
    वर्तमान में भाजपा की ओर से सुशांत सिंह, आकाश सक्सेना और राजीव तरारा विधायक हैं। वहीं सपा से इकबाल महमूद, पिंकी यादव और मोहम्मद फहीम विधानसभा में क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। इन सभी के पिता भी राजनीति में सक्रिय रहे और विधायक या सांसद रह चुके हैं।

    इनमें इकबाल महमूद सबसे अनुभवी हैं और सातवीं बार विधानसभा पहुंचकर संभल सीट का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। वहीं रामपुर के विधायक आकाश सक्सेना पहली बार विधानसभा पहुंचे हैं। पिंकी यादव और मोहम्मद फहीम तीसरी बार, जबकि सुशांत सिंह और राजीव तरारा दूसरी बार विधायक बने हैं।

    इकबाल महमूद: पिता भी तीन बार रहे विधायक
    संभल विधानसभा सीट से सपा विधायक इकबाल महमूद सातवीं बार सदन में पहुंचे हैं। मंडल के प्रमुख सपा नेताओं में उनकी गिनती होती है। उनके पिता महमूद हसन खान भी संभल सीट से तीन बार विधायक रह चुके थे। इकबाल महमूद ने पिता की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाते हुए अपनी मजबूत पहचान बनाई है।

    मोहम्मद फहीम: पिता के निधन के बाद उपचुनाव से शुरुआत
    मुरादाबाद की बिलारी सीट से सपा विधायक मोहम्मद फहीम तीसरी बार विधानसभा पहुंचे हैं। उनके पिता हाजी इरफान 2012 में बिलारी से विधायक चुने गए थे। सड़क हादसे में उनकी मौत के बाद मोहम्मद फहीम ने उपचुनाव जीतकर पहली बार विधानसभा में कदम रखा था। इसके बाद उन्होंने लगातार अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत की।

    सुशांत सिंह: पिता पांच बार विधायक, एक बार सांसद
    बिजनौर की बढ़ापुर विधानसभा सीट से भाजपा विधायक सुशांत सिंह लगातार दूसरी बार चुनाव जीत चुके हैं। वह पूर्व सांसद सर्वेश सिंह के बेटे हैं। सर्वेश सिंह ठाकुरद्वारा विधानसभा सीट से पांच बार विधायक और मुरादाबाद लोकसभा सीट से एक बार सांसद रहे थे। सुशांत अब अपने पिता की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं।

    राजीव तरारा: पिता भी रह चुके विधायक
    अमरोहा जिले की मंडी धनौरा सीट से भाजपा विधायक राजीव तरारा भी लगातार दूसरी बार विधानसभा पहुंचे हैं। उनके पिता तोताराम वर्ष 1996 में गंगेश्वरी विधानसभा सीट से विधायक चुने गए थे। राजीव ने भी पिता के बाद राजनीति में अपनी जगह बनाई और लगातार दूसरी बार चुनाव जीतने में सफल रहे।

    पिंकी यादव: पिता सांसद और तीन बार विधायक
    असमोली सीट से सपा विधायक पिंकी यादव लगातार तीसरी बार विधानसभा पहुंची हैं। उनके पिता बिजेंद्र पाल सिंह यादव तीन बार विधायक और एक बार सांसद रह चुके हैं। पिंकी यादव ने अपने पिता की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाते हुए असमोली में अपनी पकड़ कायम रखी है।

    आकाश सक्सेना: आजम खां की सीट से पहुंचे विधानसभा
    रामपुर विधानसभा सीट से भाजपा विधायक आकाश सक्सेना ने उपचुनाव में जीत दर्ज की थी। यह वही सीट है, जहां लंबे समय तक आजम खां का राजनीतिक प्रभाव रहा। आकाश सक्सेना के पिता शिव बहादुर सक्सेना रामपुर की स्वार सीट से चार बार विधायक रह चुके हैं। इस तरह आकाश भी राजनीतिक परिवार की दूसरी पीढ़ी के प्रतिनिधि हैं।

    इन नेताओं के बेटे भी रह चुके विधायक
    मुरादाबाद मंडल में राजनीतिक परिवारों की सूची सिर्फ मौजूदा छह विधायकों तक सीमित नहीं है। कई अन्य नेताओं की संतानों ने भी चुनावी राजनीति में कदम रखा है।

    – पूर्व विधायक चौधरी नौनिहाल सिंह के बेटे राजेश सिंह चुन्नू कांठ से विधायक रह चुके हैं।
    – पूर्व विधायक रिजवानुल हक के बेटे मोहम्मद उस्मान मुरादाबाद देहात से विधायक रह चुके हैं।
    – आजम खां के बेटे अब्दुल्ला आजम रामपुर की स्वार सीट से विधायक रह चुके हैं।
    – पूर्व विधायक रियासत हुसैन के बेटे सौलत अली मुरादाबाद देहात से विधायक रह चुके हैं।
    – अमरोहा विधायक महबूब अली के बेटे परवेज अली पूर्व एमएलसी रह चुके हैं।
    – अमरोहा सांसद कंवर सिंह तंवर के बेटे ललित तंवर वर्तमान में अमरोहा के जिला पंचायत अध्यक्ष हैं।

    2027 में भी दिखेगा राजनीतिक परिवारों का असर
    2027 के विधानसभा चुनाव से पहले मुरादाबाद मंडल में कुछ और राजनीतिक परिवार अपने अगली पीढ़ी के नेताओं को चुनावी मैदान में उतारने की तैयारी में हैं। एक सांसद अपने बेटे को कुंदरकी विधानसभा सीट से चुनाव लड़ाने की तैयारी में बताए जा रहे हैं। वहीं मुरादाबाद देहात सीट से एक पूर्व विधायक के बेटे के भी चुनाव मैदान में उतरने की चर्चा है। ऐसे में 2027 के विधानसभा चुनाव में मुरादाबाद मंडल की सियासत में राजनीतिक विरासत बनाम नई नेतृत्वकारी पीढ़ी का मुकाबला भी देखने को मिल सकता है।

  • तीन पदकों के साथ भारत ने रचा शानदार अभियान, पूजा सिंह का हाई जंप फाइनल में नहीं चला जलवा

    तीन पदकों के साथ भारत ने रचा शानदार अभियान, पूजा सिंह का हाई जंप फाइनल में नहीं चला जलवा


    नई दिल्ली । यूजीन में आयोजित वर्ल्ड एथलेटिक्स अंडर-20 चैंपियनशिप में भारत का अभियान तीन पदकों के साथ समाप्त हुआ। भारतीय खिलाड़ियों ने प्रतियोगिता में दो सिल्वर और एक ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया। हालांकि नेशनल सीनियर रिकॉर्ड होल्डर पूजा सिंह से महिलाओं की हाई जंप स्पर्धा में बड़ी उम्मीदें थीं, लेकिन फाइनल में उनका प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा और उन्हें सातवें स्थान से संतोष करना पड़ा।

    19 वर्षीय पूजा सिंह इस प्रतियोगिता में मजबूत दावेदार के तौर पर उतरी थीं। उन्होंने इसी साल की शुरुआत में 1.93 मीटर की छलांग लगाकर नेशनल सीनियर रिकॉर्ड बनाया था। इसके अलावा मई में एशियन अंडर-20 एथलेटिक्स चैंपियनशिप में भी पूजा ने 1.93 मीटर की ऊंचाई पार करते हुए गोल्ड मेडल जीता था। शानदार फॉर्म के कारण उनसे वर्ल्ड अंडर-20 चैंपियनशिप में भी पदक की उम्मीद की जा रही थी।

    महिलाओं की हाई जंप फाइनल में पूजा सिंह ने 1.84 मीटर की ऊंचाई सफलतापूर्वक पार की। इसके बाद उन्होंने 1.87 मीटर की ऊंचाई पार करने की तीन कोशिशें कीं, लेकिन तीनों प्रयास असफल रहे। इस कारण उन्हें सातवें स्थान पर प्रतियोगिता से बाहर होना पड़ा। ऑस्ट्रेलिया की इजोबेल लुइसन-रो ने 1.92 मीटर की छलांग लगाकर गोल्ड मेडल अपने नाम किया। हंगरी की लिलियाना बाटोरी ने सिल्वर और स्पेन की एताना अलोंसो ने ब्रॉन्ज मेडल जीता।

    पूजा का इस सीजन में प्रदर्शन हालांकि बेहद प्रभावशाली रहा है। एशियन अंडर-20 चैंपियनशिप में रिकॉर्ड प्रदर्शन के साथ गोल्ड जीतने के अलावा वह सीनियर एशियन एथलेटिक्स चैंपियनशिप की मौजूदा चैंपियन भी हैं। ऐसे में वर्ल्ड अंडर-20 चैंपियनशिप में पदक से चूकना उनके लिए निराशाजनक जरूर रहा, लेकिन उनका लगातार बेहतर प्रदर्शन भारतीय एथलेटिक्स के लिए सकारात्मक संकेत है।

    भारत की महिला 4×400 मीटर रिले टीम का प्रदर्शन भी फाइनल में उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा। भूमिका नेहते, तहुरा खातून, तनु चौधरी और थिया अरुमुगम की भारतीय टीम ने 3 मिनट 45.28 सेकंड का समय दर्ज किया और फाइनल में आखिरी स्थान पर रही। अमेरिका ने 3 मिनट 29.15 सेकंड के समय के साथ गोल्ड मेडल जीता। ऑस्ट्रेलिया को 3 मिनट 31.39 सेकंड के साथ सिल्वर और ग्रेट ब्रिटेन को 3 मिनट 32.08 सेकंड के साथ ब्रॉन्ज मेडल मिला।

    भारत के तीन पदकों में दो सिल्वर और एक ब्रॉन्ज शामिल रहे। आशीष यादव ने पुरुषों की जैवलिन थ्रो में सिल्वर मेडल जीतकर भारत के अभियान की शुरुआत की। इसके बाद बसंत कुमार मेघवाल ने पुरुषों की हाई जंप में सिल्वर मेडल अपने नाम किया। पुरुषों की लॉन्ग जंप में शाहनवाज खान ने ब्रॉन्ज मेडल जीतकर भारत की पदक संख्या तीन तक पहुंचाई।

    इस प्रदर्शन के साथ भारत ने वर्ल्ड एथलेटिक्स अंडर-20 चैंपियनशिप का समापन तीन पदकों के साथ किया। खास बात यह है कि भारत ने 2021 और 2022 के संस्करणों में जितने कुल पदक जीते थे, इस बार भी उतने ही पदक हासिल किए। पूजा सिंह भले ही अपने रिकॉर्ड प्रदर्शन को पदक में नहीं बदल सकीं, लेकिन युवा भारतीय एथलीटों का यह प्रदर्शन आने वाले वर्षों के लिए उम्मीद जगाता है।

  • PM मोदी के शब्दों से गदगद मीराबाई चानू, बोलीं- आने वाली प्रतियोगिताओं में और कड़ी मेहनत करने की मिलेगी प्रेरणा

    PM मोदी के शब्दों से गदगद मीराबाई चानू, बोलीं- आने वाली प्रतियोगिताओं में और कड़ी मेहनत करने की मिलेगी प्रेरणा


    नई दिल्ली । कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में ऐतिहासिक गोल्ड मेडल जीतकर देश का गौरव बढ़ाने वाली भारतीय महिला वेटलिफ्टर मीराबाई चानू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के बाद उनका आभार जताया है। रविवार को प्रधानमंत्री आवास पर कॉमनवेल्थ गेम्स में पदक जीतने वाले भारतीय खिलाड़ियों से खास मुलाकात हुई। इस दौरान पीएम मोदी ने खिलाड़ियों की उपलब्धियों की सराहना करते हुए उनका हौसला बढ़ाया। मीराबाई चानू ने कहा कि प्रधानमंत्री के उत्साह बढ़ाने वाले शब्द उन्हें और अन्य खिलाड़ियों को आने वाली प्रतियोगिताओं में कड़ी मेहनत करने के लिए प्रेरित करेंगे।

    प्रधानमंत्री से मुलाकात के बाद मीराबाई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के जरिए उनका धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों की यात्रा में प्रधानमंत्री का लगातार सहयोग और प्रोत्साहन काफी महत्वपूर्ण है। मीराबाई ने लिखा कि मुलाकात के दौरान हर पदक विजेता के लिए पीएम मोदी के उत्साह बढ़ाने वाले शब्द निश्चित तौर पर खिलाड़ियों को भविष्य की प्रतियोगिताओं के लिए और बेहतर तैयारी करने की प्रेरणा देंगे।

    इस मुलाकात के दौरान पीएम मोदी ने मीराबाई के उस भावुक पल का भी जिक्र किया जब उन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल जीतने के बाद पोडियम पर आंसू बहाए थे। प्रधानमंत्री ने उनसे पूछा कि वह उस समय इतनी भावुक क्यों हो गई थीं। पीएम मोदी ने मजाकिया और भावुक अंदाज में कहा कि उनके इतने आंसू निकल रहे थे कि ऐसा लग रहा था जैसे हर आंसू की बूंद से गोल्ड मेडल टपक रहा हो।

    मीराबाई ने इसके जवाब में अपने संघर्ष की पूरी कहानी बताई। उन्होंने कहा कि गोल्ड मेडल जीतने के बाद वह बेहद खुश और भावुक थीं। उनकी आंखों से आंसू इसलिए भी निकल आए क्योंकि पेरिस ओलंपिक में वह महज एक किलो के अंतर से पदक जीतने से चूक गई थीं। इसके बाद के चार वर्षों में उन्होंने कई तरह की चुनौतियों का सामना किया। चोटों ने उनकी तैयारी को प्रभावित किया और परिवार में भी कई परेशानियां चलती रहीं। इन मुश्किल परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और लगातार अपनी फिटनेस तथा प्रदर्शन पर काम करती रहीं।

    मीराबाई ने बताया कि जब वह कॉमनवेल्थ गेम्स के पोडियम पर खड़ी थीं और भारत का राष्ट्रगान बजना शुरू हुआ तो वह खुद को रोक नहीं सकीं। उन्होंने कहा कि जब सामने देश का तिरंगा ऊपर उठता है और राष्ट्रगान बजता है तो भावनाएं अपने आप उमड़ पड़ती हैं। उनके लिए वह पल वर्षों की मेहनत और संघर्ष का परिणाम था।

    कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में मीराबाई ने 48 किलोग्राम वर्ग में कुल 190 किलोग्राम भार उठाकर गोल्ड मेडल अपने नाम किया। इस जीत के साथ उन्होंने एक ऐसा रिकॉर्ड बनाया जो भारतीय खेल जगत के लिए बेहद खास है। मीराबाई लगातार तीन कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल जीतने वाली दुनिया की पहली वेटलिफ्टर बन गई हैं।

    मीराबाई की इस उपलब्धि के पीछे केवल उनकी ताकत और तकनीक ही नहीं बल्कि लंबे समय तक किया गया संघर्ष भी शामिल है। पेरिस ओलंपिक की निराशा, चोटों और निजी चुनौतियों के बाद उन्होंने जिस तरह वापसी की, वह युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा बन गई है। प्रधानमंत्री से मुलाकात और उनके प्रोत्साहन के बाद मीराबाई ने भी संकेत दिया कि उनका लक्ष्य यहीं खत्म नहीं हुआ है। आने वाली प्रतियोगिताओं में वह और बेहतर प्रदर्शन करने के लिए पूरी मेहनत करेंगी और देश के लिए नए पदक जीतने की कोशिश जारी रखेंगी।

  • उतार-चढ़ाव के बीच मामूली बढ़त पर बंद हुआ शेयर बाजार, सेंसेक्स 43 अंक चढ़ा और निफ्टी 24,583 पर पहुंचा

    उतार-चढ़ाव के बीच मामूली बढ़त पर बंद हुआ शेयर बाजार, सेंसेक्स 43 अंक चढ़ा और निफ्टी 24,583 पर पहुंचा


    नई दिल्ली । हफ्ते के पहले कारोबारी दिन सोमवार को भारतीय शेयर बाजार में पूरे सत्र के दौरान उतार-चढ़ाव देखने को मिला। अमेरिका और ईरान के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने को लेकर समझौते की अनिश्चितता का असर निवेशकों के रुख पर दिखाई दिया। कारोबार के दौरान बाजार में कई बार तेजी और कमजोरी के दौर आए, लेकिन अंत में प्रमुख सूचकांक मामूली बढ़त के साथ बंद हुए।

    कारोबार समाप्त होने पर सेंसेक्स 43.27 अंक यानी 0.06 प्रतिशत की बढ़त के साथ 78,542.44 के स्तर पर बंद हुआ। इसी तरह निफ्टी50 में 13.15 अंक यानी 0.05 प्रतिशत की मामूली तेजी दर्ज की गई और यह 24,583.80 के स्तर पर पहुंच गया। दोनों प्रमुख सूचकांकों की सीमित बढ़त से संकेत मिला कि निवेशकों ने मौजूदा वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच सतर्क रुख बनाए रखा।

    व्यापक बाजार में हालांकि तस्वीर कुछ अलग रही। निफ्टी मिडकैप सूचकांक में 0.62 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 0.27 प्रतिशत कमजोर होकर बंद हुआ। इसके बावजूद दोनों सूचकांक अपने-अपने रिकॉर्ड उच्च स्तरों के आसपास बने हुए हैं। इससे व्यापक बाजार में अब भी मजबूती कायम रहने का संकेत मिलता है।

    क्षेत्रवार कारोबार में निफ्टी पीएसयू बैंक सबसे कमजोर प्रदर्शन करने वाला क्षेत्र रहा और इसमें करीब 2 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। फार्मा और एफएमसीजी क्षेत्र के शेयरों में भी दबाव देखने को मिला। इसके विपरीत निफ्टी रियल्टी ने अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया और बाजार की कमजोरी के बीच मजबूती दिखाई।

    निफ्टी50 में टाइटन, टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स, बजाज फाइनेंस, श्रीराम फाइनेंस, ग्रासिम और टाटा स्टील प्रमुख बढ़त वाले शेयरों में शामिल रहे। इन कंपनियों के शेयरों में खरीदारी का रुख दिखाई दिया और इन्होंने सूचकांक को संभालने में योगदान दिया।

    दूसरी ओर एसबीआई, इटरनल, आईटीसी, डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज, टीसीएस, विप्रो और कोल इंडिया के शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। इन प्रमुख शेयरों में बिकवाली के कारण बाजार की बढ़त सीमित रही और कारोबार का समग्र रुख सपाट बना रहा।

    आने वाले कारोबारी सत्रों में निफ्टी के लिए 24,750 से 24,800 का स्तर महत्वपूर्ण रेजिस्टेंस क्षेत्र माना जा रहा है। यदि सूचकांक इस दायरे के ऊपर मजबूती से टिकता है तो आगे 24,950 और फिर 25,100 के स्तर की ओर बढ़ने की संभावना बन सकती है।

    वहीं, बाजार में कमजोरी आने पर 24,450 से 24,420 का क्षेत्र निफ्टी के लिए अहम सपोर्ट जोन रहेगा। इस स्तर के ऊपर सूचकांक के बने रहने तक बाजार की व्यापक संरचना सकारात्मक रहने की उम्मीद है। ऐसे में वैश्विक घटनाक्रम, विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़ी स्थिति, आने वाले कारोबारी सत्रों में निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण संकेतक बनी रहेगी।

  • सिनर की चोट ने बढ़ाई टेंशन, सिनसिनाटी ओपन से नाम लिया वापस; अब यूएस ओपन पर टिकी नजरें

    सिनर की चोट ने बढ़ाई टेंशन, सिनसिनाटी ओपन से नाम लिया वापस; अब यूएस ओपन पर टिकी नजरें


    नई दिल्ली । दुनिया के नंबर एक टेनिस खिलाड़ी यानिक सिनर को यूएस ओपन से पहले बड़ा झटका लगा है। इटली के स्टार खिलाड़ी ने दाहिने घुटने की चोट के कारण सिनसिनाटी ओपन से अपना नाम वापस ले लिया है। टूर्नामेंट आयोजकों ने सिनर के हटने की पुष्टि कर दी है। साल के आखिरी ग्रैंड स्लैम यूएस ओपन की तैयारियों के लिहाज से सिनर के लिए यह फैसला काफी अहम माना जा रहा है क्योंकि उन्हें हार्ड कोर्ट पर अपनी लय हासिल करने के लिए सिनसिनाटी ओपन में उतरना था। अब उनका पूरा ध्यान चोट से उबरने और यूएस ओपन के लिए खुद को फिट करने पर होगा।

    24 वर्षीय सिनर ने अपने फैसले के बारे में बताते हुए कहा कि डॉक्टरों और अपनी टीम से सलाह लेने के बाद उन्होंने सिनसिनाटी में होने वाले मास्टर्स 1000 टूर्नामेंट से हटने का फैसला किया। उन्होंने बताया कि उनके दाहिने घुटने में परेशानी है और मेडिकल टीम उनके साथ लगातार काम कर रही है। हालांकि अभी वह मुकाबले के लिए पूरी तरह तैयार नहीं हैं, इसलिए उन्होंने जोखिम लेने के बजाय आराम और रिकवरी को प्राथमिकता देने का फैसला किया है।

    सिनर के लिए यह इस महीने का दूसरा बड़ा हार्ड कोर्ट टूर्नामेंट होगा जिससे उन्हें बाहर रहना पड़ेगा। इससे पहले उन्होंने कैनेडियन ओपन से भी अपना नाम वापस लिया था। ऐसे में यूएस ओपन से पहले उनके पास प्रतिस्पर्धी मुकाबले के जरिए अपनी तैयारी मजबूत करने के मौके काफी कम हो गए हैं। पिछले महीने विंबलडन में अपना पांचवां ग्रैंड स्लैम खिताब जीतने के बाद सिनर से उम्मीद की जा रही थी कि वह नॉर्थ अमेरिका के हार्ड कोर्ट टूर्नामेंटों में शानदार प्रदर्शन करते हुए यूएस ओपन में अपने खिताब की रक्षा की तैयारी करेंगे।

    सिनर ने सिनसिनाटी ओपन से हटने पर निराशा भी जताई। उन्होंने कहा कि इस टूर्नामेंट में नहीं खेल पाना उनके लिए निराशाजनक है, लेकिन इस समय सबसे जरूरी पूरी तरह फिट होना है। उन्होंने संकेत दिया कि अब उनका ध्यान यूएस ओपन की तैयारी पर रहेगा और वह चोट को लेकर किसी तरह का जोखिम नहीं उठाना चाहते।

    सिनर के हटने से सिनसिनाटी ओपन की स्टार पावर को भी बड़ा झटका लगा है। इससे पहले यूएस ओपन चैंपियन कार्लोस अल्काराज भी कलाई की चोट के कारण टूर्नामेंट से बाहर हो चुके हैं। ऐसे में सिनसिनाटी के मुख्य ड्रॉ में दो बड़े नामों की गैरमौजूदगी ने टूर्नामेंट की तस्वीर बदल दी है। वहीं सिनर के लिए इसका सीधा असर यूएस ओपन की तैयारियों पर पड़ सकता है क्योंकि अब उन्हें हार्ड कोर्ट पर प्रतिस्पर्धी अभ्यास का सीमित अवसर मिलेगा।

    सिनसिनाटी ओपन का मेन ड्रॉ 13 अगस्त से शुरू होना है, जबकि यूएस ओपन का मेन ड्रॉ 30 अगस्त से शुरू होगा। ऐसे में सिनर के पास लगभग दो सप्ताह से थोड़ा अधिक समय रहेगा जिसमें उन्हें घुटने की समस्या से पूरी तरह उबरना होगा। उनके लिए चुनौती यह होगी कि वह बिना जल्दबाजी किए फिटनेस हासिल करें और यूएस ओपन में अपने खिताब की रक्षा के लिए कोर्ट पर उतरें।

    सिनर का इस समय चोट से बचने का फैसला उनके लंबे सीजन को देखते हुए भी महत्वपूर्ण है। लगातार बड़े टूर्नामेंट खेलने के बाद शरीर पर दबाव बढ़ना स्वाभाविक है और घुटने की समस्या को गंभीर होने से रोकने के लिए आराम करना जरूरी हो सकता है। अब टेनिस प्रशंसकों की नजर इस बात पर होगी कि सिनर अगले कुछ हफ्तों में कितनी तेजी से रिकवरी करते हैं और क्या वह यूएस ओपन में पूरी फिटनेस के साथ अपने अभियान की शुरुआत कर पाते हैं।

  • प्रदीप रावत के बेटे विक्रमादित्य ने पिता के अनसुने सपनों का किया खुलासा, बताया क्यों अभिनेता नहीं बनना चाहते थे

    प्रदीप रावत के बेटे विक्रमादित्य ने पिता के अनसुने सपनों का किया खुलासा, बताया क्यों अभिनेता नहीं बनना चाहते थे

    नई दिल्ली ।अभिनेता प्रदीप रावत के निधन के बाद उनके परिवार और प्रशंसकों के बीच उनकी यादें ताजा हैं। हिंदी सिनेमा, दक्षिण भारतीय फिल्मों और टेलीविजन में अपनी अलग पहचान बनाने वाले प्रदीप रावत का 5 अगस्त 2026 को 74 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उनके निधन के बाद अब उनके बेटे विक्रमादित्य रावत ने पिता के जीवन से जुड़े कई ऐसे पहलुओं का खुलासा किया है, जिनके बारे में बहुत कम लोग जानते थे।

    विक्रमादित्य ने बताया कि उनके पिता का पहला सपना अभिनेता बनना नहीं था। वह बचपन से सेना में जाने की इच्छा रखते थे। उनके दादा भी सैनिक थे और इसी पारिवारिक पृष्ठभूमि का प्रभाव प्रदीप रावत के मन पर पड़ा था। हालांकि, परिस्थितियों के चलते वह सेना में शामिल नहीं हो सके और आगे चलकर उनका जीवन अभिनय की दुनिया की ओर मुड़ गया।

    विक्रमादित्य के मुताबिक, अभिनय उनके पिता के जीवन में एक ऐसे मोड़ के रूप में आया, जिसने आगे चलकर उन्हें देशभर में पहचान दिलाई। उन्होंने अपने काम के जरिए हिंदी सिनेमा के साथ दक्षिण भारतीय फिल्मों और टेलीविजन में भी मजबूत जगह बनाई। अलग-अलग तरह के किरदारों को प्रभावशाली ढंग से निभाने की उनकी क्षमता दर्शकों के बीच उनकी खास पहचान बनी।

    प्रदीप रावत को बीआर चोपड़ा के लोकप्रिय धारावाहिक महाभारत में अश्वत्थामा के किरदार से घर-घर में पहचान मिली। इस भूमिका ने उनके अभिनय करियर को एक मजबूत आधार दिया। इसके बाद उन्होंने फिल्मों में भी कई महत्वपूर्ण और प्रभावशाली भूमिकाएं निभाईं। आमिर खान की फिल्म गजनी में उनका किरदार विशेष रूप से चर्चित रहा और इस भूमिका ने नई पीढ़ी के दर्शकों के बीच भी उन्हें पहचान दिलाई।

    विक्रमादित्य ने अपने पिता के व्यक्तित्व की एक और खास बात साझा करते हुए कहा कि वह बेहद आत्मनिर्भर स्वभाव के व्यक्ति थे। वह मुश्किल परिस्थितियों में भी दूसरों से मदद मांगने के बजाय अपनी मेहनत और क्षमता पर भरोसा करते थे। उनके लिए आत्मसम्मान और खुद के दम पर आगे बढ़ना जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा था।

    उन्होंने बताया कि उनके पिता हमेशा मेहनत करने और ईश्वर पर विश्वास रखने की बात कहते थे। उनका मानना था कि इंसान के हाथ में केवल अपना प्रयास होता है, जबकि परिणाम हमेशा उसके नियंत्रण में नहीं होता। इसलिए व्यक्ति को ईमानदारी से अपना काम करते रहना चाहिए और इसके बाद मिलने वाले परिणाम को स्वीकार करना चाहिए। यही सोच उनके जीवन और व्यक्तित्व का महत्वपूर्ण हिस्सा रही।

    विक्रमादित्य ने यह भी बताया कि उनके पिता की एक बड़ी इच्छा थी कि वह अपने बेटे को फिल्मी दुनिया में एक सफल कलाकार के रूप में देखें। प्रदीप रावत चाहते थे कि उनका बेटा भी अभिनय के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाए और बड़ा नाम हासिल करे। अब विक्रमादित्य ने पिता के इस सपने को पूरा करने का संकल्प जताया है।

    प्रदीप रावत के निधन की खबर सामने आने के बाद फिल्म जगत में शोक की लहर दौड़ गई। वह बीमारी का इलाज करा रहे थे और उनके जीवन के अंतिम दौर में स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां बढ़ गई थीं। उनके निधन के बाद बेटे द्वारा साझा की गई यादों ने उनके प्रशंसकों को उनके अभिनय के साथ-साथ उनके निजी व्यक्तित्व और जीवन मूल्यों को भी करीब से समझने का अवसर दिया है।