Author: bharati

  • आजादी के वक्त भोपाल में हुआ था बड़ा फैसला, 14 अगस्त की रात 8:15 बजे बदली तस्वीर; 10 दिन तक दुनिया से छिपी रही बात

    आजादी के वक्त भोपाल में हुआ था बड़ा फैसला, 14 अगस्त की रात 8:15 बजे बदली तस्वीर; 10 दिन तक दुनिया से छिपी रही बात


    भोपाल  भारत में मुस्लिम रियासतों की स्वतंत्र पहचान और स्वायत्तता सुरक्षित रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। इसी सोच के चलते नवाब भोपाल को भारत और पाकिस्तान दोनों से अलग एक स्वतंत्र रियासत के रूप में बनाए रखने की कोशिश कर रहे थे। लेकिन आजादी के साथ बदलते राजनीतिक समीकरणों ने उनकी योजनाओं को धीरे धीरे कमजोर कर दिया।

    पाकिस्तान के साथ संभावित राजनीतिक रास्ते को लेकर भी कोशिशें की गईं लेकिन यह योजना सफल नहीं हो सकी। दूसरी ओर स्वतंत्र रियासत के रूप में भोपाल का अस्तित्व बनाए रखना भी लगातार मुश्किल होता जा रहा था। ऐसे राजनीतिक दबाव के बीच आखिरकार 14 अगस्त 1947 की रात करीब 8 बजकर 15 मिनट पर नवाब हमीदुल्ला खान ने भारतीय संघ में शामिल होने के लिए इंस्ट्रूमेंट ऑफ एक्सेशन पर हस्ताक्षर कर दिए। इस दस्तावेज पर हस्ताक्षर होते ही संवैधानिक रूप से भोपाल भारत का हिस्सा बन गया।

    हालांकि यह पूर्ण विलय नहीं था। इंस्ट्रूमेंट ऑफ एक्सेशन के तहत भोपाल ने रक्षा विदेश मामले और संचार जैसे महत्वपूर्ण विषय भारत सरकार को सौंपे थे जबकि आंतरिक प्रशासन कानून व्यवस्था और शासन की जिम्मेदारी नवाब के पास ही बनी रही। यानी संवैधानिक स्तर पर भोपाल भारत से जुड़ चुका था लेकिन रियासत के भीतर नवाबशाही का प्रभाव तत्काल खत्म नहीं हुआ था।

    इस फैसले को लेकर एक दिलचस्प पहलू यह भी था कि नवाब ने हस्ताक्षर करने के बाद तत्काल इसकी सार्वजनिक घोषणा नहीं करने का अनुरोध किया। उन्होंने गवर्नर जनरल लॉर्ड माउंटबेटन से करीब 10 दिन तक इस फैसले को गोपनीय रखने की इच्छा जताई। माउंटबेटन ने उनकी बात स्वीकार कर ली थी। हालांकि यह खबर लंबे समय तक छिपी नहीं रह सकी। भारत सरकार के स्टेट्स डिपार्टमेंट के सचिव वीपी मेनन इस पूरी प्रक्रिया से परिचित थे। बाद में उन्होंने अपनी पुस्तक द स्टोरी ऑफ द इंटिग्रेशन ऑफ द इंडियन स्टेट्स में रियासतों के एकीकरण की प्रक्रिया का विस्तार से उल्लेख किया।

    भोपाल के इतिहास का सबसे दिलचस्प विरोधाभास यह था कि जिस समय महल के भीतर भारत से जुड़ने का ऐतिहासिक फैसला हो चुका था उसी समय शहर की सड़कों पर आजादी का जश्न मनाने की तैयारियां चल रही थीं। 15 अगस्त 1947 की सुबह भोपाल में सार्वजनिक अवकाश था। यादगार ए शाहजहानी पार्क में पंडित चतुरनारायण मालवीय की अध्यक्षता में प्रजामंडल की बड़ी सभा आयोजित हुई। आम लोग देश की आजादी का उत्सव मना रहे थे लेकिन उन्हें यह जानकारी नहीं थी कि एक रात पहले ही भोपाल के भविष्य को लेकर बड़ा संवैधानिक फैसला हो चुका है।

    इसके बाद 16 अगस्त को लॉर्ड माउंटबेटन ने भी भोपाल के इंस्ट्रूमेंट ऑफ एक्सेशन को मंजूरी दे दी। इस तरह भोपाल का भारत से संवैधानिक संबंध और मजबूत हुआ। हालांकि पूर्ण राजनीतिक एकीकरण की प्रक्रिया बाद में आगे बढ़ी और अंततः भोपाल रियासत का भारतीय संघ में पूरा विलय हुआ।

    भोपाल के भारत में शामिल होने की यह कहानी सिर्फ एक दस्तावेज पर हस्ताक्षर की कहानी नहीं है बल्कि यह उस दौर के बदलते राजनीतिक समीकरणों स्वतंत्र रियासतों की चिंताओं और आजाद भारत के निर्माण की जटिल प्रक्रिया को भी सामने लाती है। 14 अगस्त 1947 की वह रात भोपाल के इतिहास में इसलिए खास बन गई क्योंकि उसी रात एक रियासत ने बदलते समय की वास्तविकता को स्वीकार करते हुए भारत के साथ अपने संवैधानिक रिश्ते की शुरुआत की।

  • JPSC-JSSC विवाद: लाठीचार्ज के विरोध में आज झारखंड बंद, 17वें दिन भी जारी छात्रों का आंदोलन

    JPSC-JSSC विवाद: लाठीचार्ज के विरोध में आज झारखंड बंद, 17वें दिन भी जारी छात्रों का आंदोलन


    रांची। झारखंड में JPSC-JSSC परीक्षाओं को लेकर शुरू हुआ छात्रों का आंदोलन 17वें दिन भी जारी है। सोमवार को विधानसभा घेराव के दौरान पुलिस लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल के बाद विवाद और बढ़ गया। छात्रों के समर्थन में बीजेपी ने मंगलवार, 11 अगस्त को झारखंड बंद का आह्वान किया है। वहीं मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने छात्रों से शांति बनाए रखने और सरकार पर भरोसा रखने की अपील की है।

    आंदोलन के बीच JPSC के पूर्व चेयरमैन एल खियांग्ते की गिरफ्तारी, तीन भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने और 14वीं JPSC परीक्षा से जुड़ी कथित वित्तीय अनियमितताओं की ED जांच को मंजूरी जैसे कदम भी सामने आए हैं। इसके बावजूद प्रदर्शनकारी CBI जांच की मांग पर अड़े हुए हैं।

    विधानसभा घेराव में पुलिस से भिड़े छात्र
    JPSC-JSSC परीक्षाओं में कथित धांधली के विरोध में सोमवार को बड़ी संख्या में छात्र विधानसभा का घेराव करने पहुंचे थे। पुलिस ने बैरिकेडिंग कर प्रदर्शनकारियों को रोकने का प्रयास किया, लेकिन कई छात्र विधानसभा के गेट तक पहुंच गए। इसके बाद पुलिस ने लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े।

    घटना के दौरान कई छात्रों और पुलिसकर्मियों के घायल होने की बात सामने आई। तनाव के चलते विधानसभा की कार्यवाही भी प्रभावित हुई। बाद में सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों को मौके से हटाया। अनशन पर बैठे छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो की देर शाम तबीयत बिगड़ गई, जिसके बाद उन्हें सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया।

    छात्र नेता रविंद्र पासवान ने आरोप लगाया कि छात्र पूरे दिन शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे, लेकिन शाम को पुलिस ने बल प्रयोग किया और कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया। उन्होंने दावा किया कि कुछ छात्रों के साथ मारपीट भी हुई। पासवान के मुताबिक, आंदोलन अब सिर्फ छात्रों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि जन आंदोलन का रूप ले चुका है।

    सीएम सोरेन ने की शांति की अपील
    घटनाक्रम के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने छात्रों से संयम बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में छात्रों को अपनी बात रखने का अधिकार है और सरकार उनकी मांगों को गंभीरता से सुन रही है। मुख्यमंत्री ने पुलिस और प्रशासन के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि वरिष्ठ मंत्री लगातार छात्रों से बातचीत कर रहे हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और जवाबदेह बनाने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएंगे। हालांकि, सोरेन ने कुछ विपक्षी नेताओं पर आंदोलन को राजनीतिक रंग देने का आरोप भी लगाया और छात्रों से किसी के बहकावे में नहीं आने की अपील की।

    लाठीचार्ज के खिलाफ बीजेपी का आज बंद
    10 अगस्त को प्रदर्शन के दौरान बीजेपी नेता बाबूलाल मरांडी को पुलिस ने हिरासत में लिया था। इसके बाद बीजेपी ने छात्रों पर हुए लाठीचार्ज के विरोध में मंगलवार, 11 अगस्त को झारखंड बंद का ऐलान किया। रांची में बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू और बाबूलाल मरांडी ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सरकार पर छात्रों की आवाज दबाने का आरोप लगाया। बीजेपी नेताओं ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर बल प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए था। पार्टी ने प्रदेश के लोगों से बंद को समर्थन देने की अपील की है।

    राहुल गांधी ने भी उठाया लाठीचार्ज का मुद्दा
    छात्रों का आंदोलन अब राष्ट्रीय राजनीति में भी चर्चा का विषय बन गया है। राहुल गांधी ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बल प्रयोग पर सवाल उठाते हुए झारखंड सरकार से जल्द समाधान निकालने की अपील की। उनके बयान पर बीजेपी ने पलटवार करते हुए आरोप लगाया कि राहुल गांधी विपक्षी दलों की सरकार वाले राज्यों में छात्रों के मुद्दे उठाते हैं, जबकि सहयोगी दलों की सरकार वाले राज्यों में उनका रुख अलग होता है।

    कांग्रेस की पूर्व विधायक अंबा प्रसाद ने कहा कि झारखंड सरकार में कांग्रेस भागीदार है, लेकिन JPSC-JSSC मामले में पार्टी किसी भी तरह से शामिल नहीं है। उन्होंने परीक्षाओं में गड़बड़ी की बात स्वीकार करते हुए छात्रों के आंदोलन का समर्थन किया और लाठीचार्ज व आंसू गैस के इस्तेमाल को गलत बताया।

    अंबा प्रसाद ने मामले की CBI जांच की मांग की। उनका तर्क है कि शिक्षा, गृह और पुलिस विभाग मुख्यमंत्री के अधीन हैं और JPSC का गठन भी सरकार की सिफारिश पर होता है। ऐसे में CID की जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठ सकते हैं।

    सरकार तीन परीक्षाएं कर चुकी है रद्द
    सरकार JPSC-JSSC विवाद के बीच तीन भर्ती परीक्षाएं रद्द करने का फैसला पहले ही ले चुकी है। इनमें 14वीं JPSC संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा भी शामिल है। सरकार ने 14वीं JPSC परीक्षा में कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच ED से कराने की मांग भी स्वीकार कर ली है। हालांकि, छात्र संगठन अभी भी CBI जांच की मांग पर कायम हैं।

    पूर्व JPSC चेयरमैन एल खियांग्ते गिरफ्तार
    विवाद के बीच JPSC के पूर्व चेयरमैन एल खियांग्ते को CID ने गिरफ्तार कर लिया है। इससे पहले 3 अगस्त को उनसे करीब 7 घंटे तक पूछताछ की गई थी। यह कार्रवाई JPSC परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच के तहत हुई। इसी मामले में CID ने राज्यभर में 18 स्थानों पर छापेमारी भी की थी।

    22 जुलाई 2026 को CID की छापेमारी के बाद खियांग्ते ने JPSC चेयरमैन पद से इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने कहा था कि निष्पक्ष जांच के लिए पद छोड़ना उचित है। खियांग्ते पर JPSC की 14वीं सिविल सेवा परीक्षा के लिए पहले से ब्लैकलिस्टेड कंपनी TSR Data Processing Limited (TDPL) को काम देने का आरोप है। प्रदर्शनकारी छात्र TDPL से जुड़ी सभी परीक्षाओं को रद्द करने की मांग कर रहे हैं। रविवार को JPSC के तीन सदस्यों ने भी इस्तीफा दिया था।

    मुख्य सचिव पद से रिटायर होने के बाद बने थे चेयरमैन
    एल खियांग्ते राज्य के मुख्य सचिव पद से सेवानिवृत्त होने के बाद पिछले साल फरवरी में JPSC के चेयरमैन नियुक्त हुए थे। उन पर झारखंड में कई परीक्षाओं के संचालन का ठेका TDPL को देने का आरोप है। TDPL को JSSC ने कथित अनियमितताओं के चलते ब्लैकलिस्ट किया था। इसके बावजूद एजेंसी को परीक्षा संबंधी काम दिए जाने को लेकर सवाल उठे हैं। TDPL के मार्केटिंग मैनेजर अभय तिवारी ने आरोप लगाया था कि खियांग्ते ने ठेका देने के बदले 2 करोड़ रुपये और सभी भुगतानों पर 20 फीसदी कमीशन की मांग की थी। हालांकि, ये आरोप हैं और झारखंड CID की ओर से इन आरोपों पर अब तक कोई अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है।

    अभय तिवारी के पोस्टर लेकर प्रदर्शन कर रहे छात्र
    विधानसभा घेराव के दौरान प्रदर्शनकारी छात्रों के हाथों में अभय तिवारी के पोस्टर भी नजर आए। छात्र उनके खिलाफ नारेबाजी कर रहे थे। CID के अनुसार, अभय तिवारी पहले TDPL में मार्केटिंग मैनेजर था और बाद में गोड्डा जिले में ब्लॉक सप्लाई ऑफिसर बना। जांच एजेंसी के मुताबिक, परीक्षा में कथित अनियमितताओं के मामले में उसका नाम सामने आया है।

    अभय तिवारी पर आरोप है कि वह प्रतियोगी परीक्षाओं में ‘गारंटीड सिलेक्शन’ का दावा कर अभ्यर्थियों से 25 से 40 लाख रुपये तक मांगता था। हालांकि, इन आरोपों की जांच अभी जारी है। प्रदर्शनकारियों के पोस्टरों में उसके कथित रिश्तेदारों के अलग-अलग भर्ती परीक्षाओं में चयन और रैंक का भी दावा किया गया।

    अब बातचीत से निकलेगा रास्ता या बढ़ेगा आंदोलन?
    JPSC-JSSC विवाद को लेकर छात्र अभी भी CBI जांच समेत अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं। सरकार बातचीत और परीक्षा व्यवस्था में सुधार का भरोसा दे रही है, जबकि बीजेपी ने लाठीचार्ज के विरोध में बंद का ऐलान कर राजनीतिक दबाव बढ़ा दिया है। ऐसे में मंगलवार के झारखंड बंद और सरकार-छात्र संगठनों के बीच आगे होने वाली बातचीत पर सबकी नजर रहेगी। अब यह देखना अहम होगा कि सरकार की ओर से उठाए गए कदम आंदोलन को शांत कर पाते हैं या छात्रों का प्रदर्शन और व्यापक रूप लेता है।

  • एमपी में मानसून का स्ट्रॉन्ग सिस्टम एक्टिव, आज 10 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट

    एमपी में मानसून का स्ट्रॉन्ग सिस्टम एक्टिव, आज 10 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट


    भोपाल। मध्य प्रदेश में सक्रिय मानसूनी सिस्टम का असर लगातार देखने को मिल रहा है। मानसून ट्रफ और लो प्रेशर एरिया के प्रभाव से पिछले दो दिनों में प्रदेश के कई हिस्सों में जोरदार बारिश हुई। राजधानी भोपाल में 24 घंटे के दौरान करीब 7 इंच वर्षा दर्ज की गई, जिससे कई कॉलोनियों और सड़कों पर जलभराव की स्थिति बन गई। नदियों और नालों के उफान पर आने से कई मार्गों पर यातायात प्रभावित रहा।

    भारी बारिश का असर सीहोर, शाजापुर, विदिशा, मंडला और राजगढ़ जिलों में भी देखने को मिला। राजगढ़ के ब्यावरा क्षेत्र में रेलवे अंडरपास में पानी भरने से करीब 25 गांवों का संपर्क प्रभावित हुआ। विदिशा में बाढ़ के पानी में फंसे 17 लोगों को सुरक्षित निकाला गया। वहीं राजगढ़ में नाले में एक ईको वैन बह जाने से तीन बच्चों और दो महिलाओं सहित नौ लोगों की मौत हो गई।

    सीहोर जिले में भीलाखेड़ी नदी के पास एक मकान में एक ही परिवार के 10 लोग पानी से घिर गए थे। सूचना मिलने पर पुलिस और ग्रामीणों की मदद से सभी को सुरक्षित बाहर निकाला गया।

    आज इन जिलों में भारी बारिश की चेतावनी
    मौसम विभाग (IMD) ने मंगलवार के लिए नीमच, मंदसौर, रतलाम, आलीराजपुर, आगर-मालवा, राजगढ़, गुना, शिवपुरी, श्योपुर और मुरैना जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है।

    इसके अलावा भोपाल, रायसेन, सीहोर, विदिशा, इंदौर, धार, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, झाबुआ, उज्जैन, शाजापुर, देवास, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, ग्वालियर, दतिया, अशोकनगर, भिंड, जबलपुर, कटनी, छिंदवाड़ा, सिवनी, नरसिंहपुर, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, पांढुर्णा, रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, मऊगंज, मैहर, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, सागर, पन्ना, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी में हल्की से मध्यम बारिश के साथ कुछ स्थानों पर तेज वर्षा होने की संभावना है।

    नदियां उफान पर, कई पुल डूबे
    रायसेन जिले में लगातार बारिश से नदी-नालों का जलस्तर बढ़ गया है। सांची रोड स्थित पगनेश्वर क्षेत्र और भोपाल रोड पर जाखा बेतवा नदी के छोटे पुल पानी में डूब गए। कई इलाकों में पानी खेतों तक पहुंच गया। मंगलवार सुबह तक जिले में रुक-रुककर बारिश जारी रही।

    बारिश की स्थिति को देखते हुए भोपाल और आगर-मालवा जिलों में स्कूलों की छुट्टी घोषित कर दी गई है। प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने और जलभराव वाले क्षेत्रों में अनावश्यक आवाजाही से बचने की अपील की है।

  • 11 अगस्त का राशिफल: किसी को धन लाभ तो किसी को करियर में नई जिम्मेदारी, जानें सभी 12 राशियों का भविष्यफल

    11 अगस्त का राशिफल: किसी को धन लाभ तो किसी को करियर में नई जिम्मेदारी, जानें सभी 12 राशियों का भविष्यफल


    नई दिल्ली । 11 अगस्त 2026 का दिन कई राशियों के लिए नई उम्मीद और सकारात्मक बदलाव लेकर आ सकता है। ग्रहों की स्थिति के प्रभाव से कुछ जातकों को नौकरी और कारोबार में आगे बढ़ने के अवसर मिल सकते हैं तो कुछ लोगों को आर्थिक मामलों में सावधानी बरतने की जरूरत होगी। आज जल्दबाजी में लिया गया फैसला नुकसान का कारण बन सकता है इसलिए किसी भी महत्वपूर्ण निर्णय से पहले परिस्थितियों को अच्छी तरह समझना आपके लिए बेहतर रहेगा। कार्यक्षेत्र से लेकर परिवार और आर्थिक स्थिति तक आज कई राशियों के लिए दिन महत्वपूर्ण रहने वाला है।

    मेष राशि के जातकों के लिए आज का दिन मेहनत और आत्मविश्वास से भरपूर रहने वाला है। कार्यक्षेत्र में आपकी सक्रियता अधिकारियों का ध्यान आकर्षित कर सकती है। लंबे समय से अटका हुआ कोई काम आज पूरा होने की दिशा में आगे बढ़ सकता है। आत्मविश्वास के साथ काम करने पर सफलता मिलने की संभावना है।

    वृषभ राशि वालों के लिए आर्थिक दृष्टि से दिन अच्छा रह सकता है। रुका हुआ पैसा वापस मिलने के संकेत हैं। कारोबार से जुड़े लोगों को कोई नया और लाभकारी अवसर मिल सकता है। हालांकि पैसों से जुड़े फैसले सोच समझकर लेना बेहतर रहेगा।

    मिथुन राशि के जातकों का दिन व्यस्तता से भरा रह सकता है। काम का दबाव बढ़ सकता है लेकिन आपकी समझदारी और बेहतर योजना के कारण कई परेशानियां आसानी से दूर हो सकती हैं। एक साथ कई जिम्मेदारियां मिलने पर प्राथमिकता तय करके काम करना लाभकारी रहेगा।

    कर्क राशि वालों के लिए परिवार का सहयोग आज बड़ी ताकत बनेगा। घर में सुखद और सकारात्मक माहौल बना रह सकता है। नौकरी करने वाले लोगों को अपनी मेहनत का अच्छा परिणाम मिलने की उम्मीद है। परिवार के किसी सदस्य से महत्वपूर्ण सहयोग भी मिल सकता है।

    सिंह राशि के लिए आज का दिन करियर के लिहाज से खास रह सकता है। नई जिम्मेदारी मिलने के साथ पद और प्रतिष्ठा में वृद्धि के संकेत हैं। आपकी नेतृत्व क्षमता की सराहना हो सकती है और कार्यक्षेत्र में आपकी स्थिति मजबूत हो सकती है।

    कन्या राशि के जातकों को आज अपने खर्चों पर नियंत्रण रखना जरूरी होगा। बिना सोचे समझे खरीदारी करने से बजट बिगड़ सकता है। जरूरी खर्च और गैरजरूरी खर्च के बीच अंतर करना आपके लिए फायदेमंद रहेगा।

    तुला राशि वालों को रिश्तों और काम के बीच संतुलन बनाकर चलना होगा। किसी करीबी व्यक्ति से मिली सलाह आपके लिए उपयोगी साबित हो सकती है। बातचीत के जरिए पुराने मतभेद दूर करने का अवसर भी मिल सकता है।

    वृश्चिक राशि के जातकों को अपनी मेहनत का पूरा लाभ मिलने की उम्मीद है। व्यापार से जुड़े लोगों के सामने नई डील या कमाई का अवसर आ सकता है। किसी पुराने प्रयास का सकारात्मक परिणाम भी सामने आ सकता है।

    धनु राशि वालों के लिए यात्रा या किसी नए काम की शुरुआत के योग बन रहे हैं। नई योजना पर काम शुरू करने से पहले अनुभवी व्यक्ति की सलाह लेना आपके लिए लाभकारी रहेगा। जल्दबाजी से बचना जरूरी होगा।

    मकर राशि के जातकों को कार्यक्षेत्र में अपनी क्षमता दिखाने का अवसर मिलेगा। अधिकारियों और सहकर्मियों के साथ संबंध बेहतर हो सकते हैं। आर्थिक स्थिति मजबूत होने के संकेत हैं और मेहनत का अच्छा परिणाम मिल सकता है।

    कुंभ राशि वालों के लिए दिन मिलाजुला रहने वाला है। पुरानी चिंता कम हो सकती है लेकिन किसी जरूरी काम को पूरा करने के लिए अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ सकती है। धैर्य बनाए रखना आपके लिए सबसे महत्वपूर्ण रहेगा।

    मीन राशि के जातकों के लिए दिन सकारात्मक रहने वाला है। धन लाभ के साथ परिवार में खुशियां आने के संकेत हैं। लंबे समय से अटका हुआ कोई काम पूरा हो सकता है और मानसिक संतुष्टि भी मिल सकती है।

    कुल मिलाकर 11 अगस्त का दिन कई राशियों के लिए अवसरों और सकारात्मक बदलाव का संकेत दे रहा है। किसी को करियर में तरक्की मिल सकती है तो किसी के लिए धन लाभ के रास्ते खुल सकते हैं। हालांकि राशिफल सामान्य ज्योतिषीय गणनाओं पर आधारित होता है इसलिए किसी भी महत्वपूर्ण निर्णय में अपनी व्यक्तिगत परिस्थितियों को जरूर ध्यान में रखें।

  • कोलंबिया में 7.4 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप, 77 लोगों की मौत, कई इमारतें क्षतिग्रस्त

    कोलंबिया में 7.4 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप, 77 लोगों की मौत, कई इमारतें क्षतिग्रस्त


    बोगोटा।
    दक्षिण अमेरिकी देश कोलंबिया में सोमवार सुबह आए शक्तिशाली भूकंप से भारी तबाही हुई है। रिक्टर पैमाने पर 7.4 तीव्रता के भूकंप के झटकों से पश्चिमी कोलंबिया के कई इलाकों में इमारतें क्षतिग्रस्त हो गईं और कई स्थानों पर लोग मलबे में फंस गए। अब तक कम से कम 77 लोगों की मौत की सूचना है। राहत एवं बचाव कार्य जारी रहने के कारण मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका है।

    भूकंप का केंद्र चोको प्रांत में सैन जोस डेल पालमार के निकट बताया गया है। भूकंप के झटके राजधानी बोगोटा सहित देश के कई हिस्सों में महसूस किए गए। रिसाराल्दा प्रांत में सबसे अधिक जनहानि की सूचना सामने आई है। पेरेइरा, काली, मनिजालेस और बुएनावेंचुरा समेत कई शहरों में इमारतों को नुकसान पहुंचा है। कुछ स्थानों पर इमारतें गिरने के कारण लोग मलबे में दब गए।

    भूकंप के झटके महसूस होते ही लोगों में अफरा-तफरी मच गई। बड़ी संख्या में लोग अपने घरों और इमारतों से बाहर निकलकर खुले स्थानों पर पहुंच गए। प्रशासन और आपातकालीन सेवाओं की टीमें प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव अभियान चला रही हैं। मलबे में फंसे लोगों को निकालने के प्रयास किए जा रहे हैं।

    आफ्टरशॉक्स का खतरा

    मुख्य भूकंप के बाद संभावित आफ्टरशॉक्स को लेकर भी प्रशासन सतर्क है। प्रभावित क्षेत्रों में इमारतों की सुरक्षा जांच की जा रही है। नागरिकों से क्षतिग्रस्त इमारतों से दूर रहने और प्रशासन की ओर से जारी सुरक्षा निर्देशों का पालन करने की अपील की गई है।

    भूकंप के झटके कोलंबिया के अलावा पड़ोसी इक्वाडोर में भी महसूस किए गए। हालांकि शुरुआती जानकारी में वहां बड़े पैमाने पर नुकसान की पुष्टि नहीं हुई है। अधिकारियों ने प्रभावित इलाकों में स्थिति पर नजर बनाए रखी है।

    राहत एजेंसियां लगातार नुकसान का आकलन कर रही हैं। मलबे में लोगों के दबे होने की आशंका के चलते बचाव अभियान को प्राथमिकता दी जा रही है। प्रशासन ने जरूरत पड़ने पर राजधानी बोगोटा और मेडेलिन से अतिरिक्त राहत एवं बचाव दल भेजने की तैयारी भी की है।

  • Weather Alert: एमपी, यूपी, राजस्थान और हिमाचल में भारी बारिश से संकट, दिल्ली में 60 किलोमीटर प्रति घंटे हवाओं की चेतावनी

    Weather Alert: एमपी, यूपी, राजस्थान और हिमाचल में भारी बारिश से संकट, दिल्ली में 60 किलोमीटर प्रति घंटे हवाओं की चेतावनी

    नई दिल्ली । देश के कई राज्यों में मानसून की सक्रियता के कारण भारी बारिश, जलभराव और बाढ़ जैसी स्थिति बनी हुई है। राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और अन्य राज्यों में लगातार बारिश से सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ है। कई इलाकों में सड़कें जलमग्न हो गई हैं, नदियों का जलस्तर बढ़ रहा है और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए राहत एवं बचाव अभियान चलाए जा रहे हैं।

    राजस्थान के झालावाड़ में भारी बारिश के कारण मनोहर थाना क्षेत्र के झीकनी गांव स्थित सरकारी स्कूल में पानी भर गया। स्कूल में मौजूद 30 से अधिक विद्यार्थी पानी के बीच फंस गए। स्थानीय लोगों ने तत्परता दिखाते हुए सभी बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाला। क्षेत्र में पानी की स्थिति को देखते हुए कालीसिंध बांध के 12 गेट भी खोले गए हैं।

    राजस्थान के बाड़मेर और बीकानेर में भी बारिश के बाद जलभराव की स्थिति बनी हुई है। बाड़मेर में रविवार रात करीब ढाई घंटे हुई तेज बारिश के बाद निचले इलाकों में दुकानों और घरों तक पानी पहुंच गया। श्रीडूंगरगढ़ में सड़कों पर दो से तीन फीट तक पानी जमा होने की जानकारी सामने आई है। कई प्रमुख मार्गों और सार्वजनिक स्थानों पर भी जलभराव हुआ।

    उत्तर प्रदेश में गंगा, यमुना, शारदा और सरयू समेत कई नदियों का जलस्तर बढ़ा हुआ है। फर्रुखाबाद और बिजनौर क्षेत्रों में गंगा का पानी हाईवे तक पहुंच गया है। कई सड़कें डूबने से आवागमन प्रभावित हुआ है। करीब 40 गांवों के बाढ़ की चपेट में होने की जानकारी है।

    वाराणसी में गंगा का जलस्तर बढ़ने के कारण घाटों तक पहुंचने वाले कई रास्ते जलमग्न हो गए हैं। काशी विश्वनाथ मंदिर के छह प्रवेश द्वारों में से मुख्य गंगा द्वार को भी बढ़ते जलस्तर के कारण बंद किया गया है। मणिकर्णिका घाट तक पानी पहुंचने से अंतिम संस्कार और अन्य गतिविधियों पर भी असर पड़ा है।

    मध्य प्रदेश में भी बारिश का असर कई जिलों में देखने को मिल रहा है। भोपाल में लगातार बारिश के कारण सड़कों पर पानी भर गया है। डिंडौरी में नर्मदा नदी का पानी पुल के ऊपर से बहने की स्थिति बनी हुई है। राजगढ़ में निर्माणाधीन पुल से एक कार बह जाने की घटना में नौ लोगों की मौत हुई, जबकि दो लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया।

    हिमाचल प्रदेश में भारी बारिश के कारण 124 सड़कें बंद हैं और 255 बिजली ट्रांसफॉर्मर प्रभावित हुए हैं। मंडी में सबसे अधिक 51 सड़कें बंद हैं। कुल्लू में 39 और शिमला में 13 सड़कें बंद होने से आवाजाही प्रभावित है। इस मानसून में प्रदेश में बारिश और अन्य संबंधित घटनाओं से बड़ी संख्या में लोगों की जान जा चुकी है।

    सिक्किम में तेज बारिश के बाद राष्ट्रीय राजमार्ग दस पर मलबा आने से सड़क बंद हो गई। यह मार्ग सिक्किम को पश्चिम बंगाल से जोड़ने वाला प्रमुख रास्ता है। सड़क बंद होने से स्थानीय लोगों, पर्यटकों और वाहनों की आवाजाही प्रभावित हुई है।

    उत्तराखंड के सभी जिलों में बारिश का दौर जारी है और चार जिलों में ऑरेंज अलर्ट की स्थिति बताई गई है। वहीं बिहार के 12 जिलों में बारिश का यलो अलर्ट जारी है। ओडिशा में भी बंगाल की खाड़ी में कम दबाव का क्षेत्र बनने की संभावना के कारण 16 अगस्त तक भारी बारिश की आशंका जताई गई है।

    दिल्ली में भी अगले कुछ घंटों के दौरान तेज आंधी और भारी बारिश की संभावना है। मौसम विभाग ने करीब 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने की चेतावनी दी है। ऐसे में देश के कई हिस्सों में प्रशासन और स्थानीय लोगों को जलभराव, बाढ़ और तेज हवाओं को लेकर सतर्क रहने की जरूरत है।

  • झारखंड छात्र आंदोलन में पुष्पा राज और स्पाइडरमैन से लेकर तिरंगा मार्च तक, रांची प्रदर्शन के प्रमुख दृश्य चर्चा में

    झारखंड छात्र आंदोलन में पुष्पा राज और स्पाइडरमैन से लेकर तिरंगा मार्च तक, रांची प्रदर्शन के प्रमुख दृश्य चर्चा में

    नई दिल्ली । झारखंड में जेपीएससी और जेएसएससी भर्ती परीक्षाओं में कथित धांधली और अनियमितताओं के खिलाफ छात्रों का आंदोलन सोमवार को राजधानी रांची में बड़े प्रदर्शन में बदल गया। राज्य के अलग-अलग हिस्सों से बड़ी संख्या में छात्र विधानसभा घेराव मार्च के लिए पहुंचे। प्रदर्शन के दौरान छात्रों और पुलिस के बीच कई जगह टकराव की स्थिति बनी और बैरिकेडिंग पार करने की कोशिशों के बीच पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए सुरक्षा इंतजाम बढ़ाए।

    विधानसभा मार्च के दौरान प्रदर्शन का तरीका भी कई जगह अलग-अलग नजर आया। कुछ छात्रों ने पुलिस की बैरिकेडिंग को पार करने की कोशिश की, जबकि कुछ प्रदर्शनकारी बैरिकेडिंग पर चढ़ते दिखाई दिए। कई स्थानों पर कंटीले तार लगाए गए थे, लेकिन आंदोलनकारी छात्रों ने उन्हें भी पार करने का प्रयास किया। प्रदर्शन के बीच बड़ी संख्या में छात्र अपनी मांगों को लेकर नारेबाजी करते रहे।

    प्रदर्शन में शामिल युवाओं ने अपनी बात रखने के लिए अलग-अलग प्रतीकों और तरीकों का इस्तेमाल किया। एक छात्र हाथ में गुलाब और तिरंगा लेकर पहुंचा और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग रखने का संदेश देता दिखाई दिया। दूसरी ओर कुछ प्रदर्शनकारियों ने लोकप्रिय फिल्मों और किरदारों से प्रेरित अंदाज अपनाकर भी अपनी बात लोगों तक पहुंचाने की कोशिश की।

    प्रदर्शन के दौरान एक युवक पुष्पा राज के अंदाज में नजर आया। बताया गया कि वह महाराष्ट्र से कुल्हाड़ी लेकर प्रदर्शन में शामिल होने पहुंचा था। इसके अलावा एक छात्र स्पाइडरमैन की पोशाक में दिखाई दिया। इन अलग-अलग रूपों ने प्रदर्शन के दृश्य को चर्चा का विषय बना दिया।

    छात्रों ने अपनी नाराजगी जताने के लिए रचनात्मक तरीकों का भी सहारा लिया। परीक्षा और भर्ती प्रक्रिया में कथित गड़बड़ी के मुद्दे को उजागर करने के लिए कुछ प्रदर्शनकारी नौकरी को तौलकर बेचने जैसी प्रस्तुति करते दिखाई दिए। इसका उद्देश्य भर्ती प्रक्रिया को लेकर छात्रों की नाराजगी और सवालों को प्रतीकात्मक तरीके से सामने रखना था।

    पुलिस की ओर से प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए वाटर कैनन का इस्तेमाल भी किया गया। इसके बावजूद कुछ छात्र पानी की बौछार के बीच नाचते और विरोध जताते दिखाई दिए। इस दौरान प्रदर्शन का माहौल कुछ समय के लिए अलग रूप लेता नजर आया, लेकिन छात्रों की मुख्य मांगें भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता और कथित अनियमितताओं पर कार्रवाई से जुड़ी रहीं।

    प्रदर्शन के दौरान कुछ जगहों पर पुलिस और छात्रों के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति भी बनी। बैरिकेडिंग तोड़े जाने के बाद पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने की कोशिश की। बाद में लाठीचार्ज की कार्रवाई किए जाने और कुछ छात्रों को पुलिस द्वारा वहां से ले जाने की जानकारी सामने आई।

    छात्रों ने कई जगह फ्लैश लाइट और तिरंगा मार्च भी निकाला। भारत माता की जय के नारे लगाते हुए प्रदर्शनकारियों ने अपनी एकजुटता प्रदर्शित की। कुछ छात्र भगत सिंह के पोस्टर लेकर भी आंदोलन में शामिल हुए। इन गतिविधियों के जरिए प्रदर्शनकारियों ने भर्ती परीक्षाओं को लेकर अपनी मांगों को व्यापक स्तर पर सामने रखने का प्रयास किया।

    JPSC और JSSC परीक्षाओं में कथित धांधली के खिलाफ चल रहे आंदोलन के बीच छात्रों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनका विरोध जारी रहेगा। रांची में हुए विधानसभा मार्च के दौरान सामने आए अलग-अलग दृश्य यह दिखाते हैं कि छात्रों ने अपनी नाराजगी दर्ज कराने के लिए पारंपरिक विरोध के साथ कई रचनात्मक तरीकों का भी इस्तेमाल किया।

  • आंवला है पोषक तत्वों का खजाना, डाइट में सही तरीके से शामिल करने पर इम्युनिटी और पाचन समेत मिल सकते हैं कई फायदे

    आंवला है पोषक तत्वों का खजाना, डाइट में सही तरीके से शामिल करने पर इम्युनिटी और पाचन समेत मिल सकते हैं कई फायदे

    नई दिल्ली ।आंवला आकार में छोटा जरूर होता है, लेकिन पोषण के लिहाज से इसे बेहद उपयोगी फल माना जाता है। इसमें विटामिन C, फाइबर और कई तरह के एंटीऑक्सीडेंट यौगिक पाए जाते हैं। भारतीय खान-पान में आंवले का इस्तेमाल लंबे समय से किया जाता रहा है। इसे संतुलित आहार का हिस्सा बनाकर शरीर को कई जरूरी पोषक तत्व उपलब्ध कराए जा सकते हैं।

    आंवले में मौजूद विटामिन C शरीर के सामान्य इम्यून फंक्शन के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। यह शरीर में एंटीऑक्सीडेंट की भूमिका भी निभाता है। इसलिए नियमित और संतुलित डाइट में आंवले को शामिल करना पोषण की दृष्टि से उपयोगी हो सकता है। हालांकि किसी एक खाद्य पदार्थ को बीमारी से बचाव या इलाज का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए।

    पाचन तंत्र के लिए भी आंवला उपयोगी हो सकता है। इसमें फाइबर मौजूद होता है, जो पाचन तंत्र के सामान्य कामकाज में मदद करता है। पर्याप्त फाइबर का सेवन मल त्याग को नियमित रखने में सहायक हो सकता है। आंवले को सलाद, चटनी या भोजन के साथ शामिल करना डाइट में फाइबर बढ़ाने का आसान तरीका हो सकता है।

    आंवले में मौजूद विटामिन C और एंटीऑक्सीडेंट त्वचा के लिए भी महत्वपूर्ण पोषक तत्व उपलब्ध कराते हैं। विटामिन C शरीर में कोलेजन बनाने की प्रक्रिया में भूमिका निभाता है। इसी वजह से संतुलित भोजन में आंवले को शामिल करना त्वचा की सामान्य सेहत के लिए उपयोगी हो सकता है।

    बालों की सेहत के संदर्भ में भी आंवले का इस्तेमाल पारंपरिक रूप से किया जाता रहा है। आंवला खाने से मिलने वाले पोषक तत्व शरीर के समग्र पोषण में योगदान करते हैं। हालांकि केवल आंवला खाने से बालों से जुड़ी सभी समस्याएं दूर होने का दावा उचित नहीं है। बालों की अच्छी सेहत के लिए प्रोटीन, आयरन और अन्य जरूरी पोषक तत्वों की पर्याप्त मात्रा भी जरूरी होती है।

    आंवला विभिन्न एंटीऑक्सीडेंट यौगिकों का स्रोत भी है। शरीर में बनने वाले फ्री रेडिकल्स से कोशिकाओं को ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस का सामना करना पड़ सकता है। संतुलित आहार में शामिल फल और सब्जियां शरीर को अलग-अलग प्रकार के एंटीऑक्सीडेंट उपलब्ध कराने में मदद करते हैं। आंवला इसी तरह के पौष्टिक खाद्य विकल्पों में शामिल किया जा सकता है।

    हृदय की सेहत के लिहाज से भी आंवले को संतुलित डाइट का हिस्सा बनाया जा सकता है। इसमें फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं। हालांकि किसी एक फल को हृदय रोग से बचाव या उपचार का साधन मानना सही नहीं होगा। स्वस्थ हृदय के लिए संतुलित भोजन, नियमित शारीरिक गतिविधि और बेहतर जीवनशैली जरूरी है।

    आंवले को खाने का सबसे आसान तरीका इसे अच्छी तरह धोकर छोटे टुकड़ों में काटकर खाना है। स्वाद के लिए थोड़ी मात्रा में काला नमक या भुना जीरा मिलाया जा सकता है। इसे चटनी, सलाद या अन्य भोजन में भी शामिल किया जा सकता है।

    कई लोग आंवले का सेवन मुरब्बे और कैंडी के रूप में करते हैं, लेकिन ऐसे उत्पादों में अतिरिक्त चीनी हो सकती है। इसलिए रोजमर्रा की डाइट में ताजा आंवला या कम चीनी वाले विकल्पों को प्राथमिकता देना बेहतर हो सकता है। किसी विशेष स्वास्थ्य समस्या, एलर्जी या आहार संबंधी प्रतिबंध की स्थिति में विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार इसका सेवन करना उचित रहेगा।

  • भारत से तनाव के बीच बलूचिस्तान, खैबर पख्तूनख्वा और पीओके की चुनौतियां पाकिस्तान की सुरक्षा रणनीति पर भारी

    भारत से तनाव के बीच बलूचिस्तान, खैबर पख्तूनख्वा और पीओके की चुनौतियां पाकिस्तान की सुरक्षा रणनीति पर भारी

    नई दिल्ली । पाकिस्तान इस समय कई स्तरों पर सुरक्षा और रणनीतिक चुनौतियों का सामना कर रहा है। भारत के साथ जारी तनाव के अलावा बलूचिस्तान, खैबर पख्तूनख्वा, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर और अफगानिस्तान से जुड़े मुद्दे उसकी आंतरिक और बाहरी सुरक्षा व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बने हुए हैं। इसी बीच ईरान और उसके समर्थक समूहों से जुड़ी संभावित परिस्थितियां भी पाकिस्तान के सामने अतिरिक्त दबाव पैदा कर रही हैं।

    हाल ही में पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की के बीच मक्का रक्षा समझौते ने क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरण को लेकर चर्चा बढ़ा दी है। इस समझौते को व्यापक इस्लामी सुरक्षा ढांचे की दिशा में महत्वपूर्ण कदम के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि पाकिस्तान के लिए इसकी वास्तविक उपयोगिता इस बात पर निर्भर करेगी कि वह अपने मौजूदा सुरक्षा संकटों से किस तरह निपटता है।

    पाकिस्तान के सामने सबसे प्रमुख चुनौती भारत से जुड़ा सुरक्षा तनाव है। पिछले वर्ष मई में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सैन्य कार्रवाई में पाकिस्तान के कई सैन्य और रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाए जाने का दावा किया गया था। इसके बाद पाकिस्तान के रक्षा ढांचे और एयरबेस की क्षमता को लेकर भी सवाल उठे।

    पाकिस्तान के भीतर बलूचिस्तान लंबे समय से सुरक्षा संकट का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। अलगाववादी गतिविधियों और हिंसक घटनाओं ने इस क्षेत्र में सरकार के नियंत्रण को चुनौती दी है। खैबर पख्तूनख्वा में भी आतंकवादी गतिविधियां पाकिस्तान की सुरक्षा एजेंसियों के लिए लगातार परेशानी का कारण बनी हुई हैं।

    पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर भी राजनीतिक और सामाजिक असंतोष से जूझ रहा है। दूसरी ओर अफगानिस्तान के साथ सीमा और सुरक्षा संबंधी तनाव पाकिस्तान के लिए अलग चुनौती पेश करता है। इन परिस्थितियों के बीच ईरान के साथ क्षेत्रीय समीकरण भी महत्वपूर्ण हो गए हैं, खासकर तब जब मध्य पूर्व में तनाव का प्रभाव आसपास के देशों पर पड़ रहा है।

    तुर्की और सऊदी अरब के साथ रक्षा सहयोग पाकिस्तान को राजनीतिक और रणनीतिक समर्थन दे सकता है, लेकिन इससे उसकी सभी आंतरिक समस्याओं का समाधान अपने आप नहीं हो जाता। तुर्की नाटो का सदस्य है और उसकी अपनी मजबूत सैन्य क्षमता है। सऊदी अरब के लिए भी ईरान और हूती गतिविधियों से जुड़ी सुरक्षा चुनौतियां लंबे समय से महत्वपूर्ण रही हैं।

    भारत ने भी क्षेत्रीय स्तर पर अपने रक्षा और रणनीतिक संबंधों को मजबूत किया है। ग्रीस, साइप्रस और आर्मेनिया के साथ भारत के संबंधों में रक्षा सहयोग का महत्व बढ़ा है। इजरायल के साथ भारत की सैन्य और तकनीकी साझेदारी भी लंबे समय से महत्वपूर्ण मानी जाती है।

    ऐसे में मक्का रक्षा समझौता पाकिस्तान को एक व्यापक सुरक्षा ढांचे से जोड़ने की कोशिश जरूर है, लेकिन उसके सामने सबसे बड़ी चुनौती उसके अपने घरेलू हालात हैं। यदि बलूचिस्तान, खैबर पख्तूनख्वा और पीओके जैसे क्षेत्रों में अस्थिरता बनी रहती है, तो बाहरी रक्षा सहयोग के बावजूद पाकिस्तान पर सुरक्षा और आर्थिक दबाव बढ़ सकता है।

    पाकिस्तान के लिए आने वाला समय इस लिहाज से महत्वपूर्ण रहेगा कि वह इन अलग-अलग मोर्चों पर एक साथ बढ़ते दबाव को किस तरह नियंत्रित करता है। सऊदी अरब और तुर्की का समर्थन उसके लिए रणनीतिक सहारा हो सकता है, लेकिन दीर्घकालिक स्थिरता के लिए आंतरिक सुरक्षा, राजनीतिक स्थिरता और आर्थिक क्षमता को मजबूत करना भी उतना ही जरूरी होगा।

  • अमेरिका की 100% टैरिफ धमकी के बीच भारत के लिए 15 देशों में खुल सकता है 19 लाख करोड़ रुपये का नया बाजार

    अमेरिका की 100% टैरिफ धमकी के बीच भारत के लिए 15 देशों में खुल सकता है 19 लाख करोड़ रुपये का नया बाजार

    नई दिल्ली । अमेरिका की ओर से भारत समेत कुछ देशों के खिलाफ 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने की धमकी के बीच भारतीय निर्यात को लेकर चिंता बढ़ी है। हालांकि, अर्थशास्त्रियों का मानना है कि अमेरिकी बाजार पर निर्भरता कम करने के लिए भारत के पास कई वैकल्पिक रास्ते मौजूद हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक करीब 15 देशों के बाजार भारतीय निर्यातकों के लिए बड़ा अवसर बन सकते हैं, जहां लगभग 200 अरब डॉलर यानी करीब 19 लाख करोड़ रुपये के कारोबार की संभावनाएं मौजूद हैं।

    इस पूरे घटनाक्रम का केंद्र अमेरिकी शुल्क नीति और भारत के रूस से कच्चा तेल खरीदने से जुड़ा विवाद है। अमेरिका की ओर से रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर अतिरिक्त शुल्क लगाने की चेतावनी के बाद भारतीय निर्यातकों के सामने अमेरिकी बाजार को लेकर अनिश्चितता बढ़ी है। ऐसे में भारत के लिए दूसरे देशों में अपने उत्पादों की पहुंच बढ़ाना महत्वपूर्ण हो सकता है।

    जानकारों के अनुसार भारत अमेरिका को बड़े पैमाने पर वस्तुओं का निर्यात करता है। वित्त वर्ष 2025-26 में अमेरिका को भारत का मर्चेंडाइज निर्यात करीब 87.3 अरब डॉलर रहा, जबकि वित्त वर्ष 2024-25 में यह आंकड़ा लगभग 86.5 अरब डॉलर था। इससे स्पष्ट है कि अमेरिकी बाजार भारतीय निर्यात के लिए महत्वपूर्ण है, लेकिन पूरी अर्थव्यवस्था की निर्भरता केवल इसी बाजार पर नहीं है।

    विशेषज्ञों के मुताबिक नीदरलैंड्स, फ्रांस, ब्रिटेन, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, नेपाल और लैटिन अमेरिकी देशों समेत कई बाजारों में भारतीय उत्पादों के लिए संभावनाएं हैं। इन बाजारों में निर्यात को बढ़ावा देकर भारतीय कंपनियां किसी एक देश में शुल्क बढ़ने से होने वाले जोखिम को कम कर सकती हैं।

    आंकड़ों और विशेषज्ञ आकलन के अनुसार अमेरिका के बाहर मौजूद इन बाजारों में भारतीय उत्पादों की मांग बढ़ रही है। जहां अमेरिकी बाजार में भारत का निर्यात करीब 10 से 15 प्रतिशत की दर से बढ़ रहा है, वहीं कई वैकल्पिक बाजारों में निर्यात वृद्धि दर 20 से 25 प्रतिशत तक बताई गई है। इससे भारतीय कंपनियों के लिए बाजारों के विस्तार की गुंजाइश दिखाई देती है।

    भारत के श्रम-केंद्रित और प्रतिस्पर्धी लागत वाले उत्पादों को भी इस बदलाव में फायदा मिल सकता है। कपड़ा, इंजीनियरिंग उत्पाद, रसायन, दवाइयां, ऑटो कंपोनेंट्स और दूसरे विनिर्मित सामानों के लिए वैश्विक बाजार में भारत की स्थिति मजबूत करने की कोशिश लंबे समय में निर्यात को अधिक विविध बना सकती है।

    हालांकि, अमेरिकी बाजार में किसी बड़े शुल्क का असर पूरी तरह नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। अमेरिका भारत का प्रमुख व्यापारिक साझेदार है और दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंध काफी व्यापक हैं। ऐसे में 100 प्रतिशत तक टैरिफ लागू होने की स्थिति में भारतीय निर्यातकों के लिए कीमतों और प्रतिस्पर्धा से जुड़ी चुनौतियां बढ़ सकती हैं।

    दूसरी ओर, विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि भारी टैरिफ का असर अमेरिका पर भी पड़ सकता है। भारतीय उत्पादों पर आयात शुल्क बढ़ने से अमेरिकी बाजार में उनकी कीमत बढ़ सकती है, जिसका बोझ अंततः वहां के उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है। खासकर ऐसे उत्पादों में, जिनकी आपूर्ति भारत से प्रतिस्पर्धी लागत पर होती है, वैकल्पिक स्रोत तलाशना अमेरिकी कारोबार के लिए भी आसान नहीं होगा।

    भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते को लेकर बातचीत भी महत्वपूर्ण है। ऐसे में व्यापारिक तनाव को बढ़ाने के बजाय दोनों देशों के आर्थिक हितों को ध्यान में रखकर समाधान तलाशने की जरूरत बताई जा रही है। फिलहाल भारत के लिए अमेरिकी बाजार के साथ संबंध बनाए रखते हुए यूरोप, पश्चिम एशिया, दक्षिण एशिया और लैटिन अमेरिका में निर्यात का दायरा बढ़ाना रणनीतिक विकल्प बन सकता है।