Author: bharati

  • झारखंड में जेपीएससी जेएसएससी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी के खिलाफ छात्रों का प्रदर्शन तेज, बैरिकेड तोड़ विधानसभा की ओर बढ़े आंदोलनकारी

    झारखंड में जेपीएससी जेएसएससी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी के खिलाफ छात्रों का प्रदर्शन तेज, बैरिकेड तोड़ विधानसभा की ओर बढ़े आंदोलनकारी

    नई दिल्ली । झारखंड में जेपीएससी और जेएसएससी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी के खिलाफ छात्रों का आंदोलन सोमवार को उस समय तेज हो गया, जब बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी विधानसभा की ओर बढ़ने लगे। रांची में प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने प्रशासन की ओर से लगाए गए बैरिकेड पार किए और कई जगह उन्हें हटाकर आगे बढ़ने की कोशिश की। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल किया, लेकिन प्रदर्शनकारी पीछे हटने को तैयार नहीं हुए।

    आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों ने एक के बाद एक आठ बैरिकेड तोड़ दिए। मुख्य सड़क पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत किए जाने के बाद कई छात्र कच्चे और पहाड़ी रास्तों से विधानसभा की ओर बढ़ने लगे। कुछ स्थानों पर प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड खींचकर रास्ते से हटाए और फिर समूह के साथ आगे बढ़ते रहे।

    आंदोलन की अगुवाई जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म मोर्चा के स्वयंसेवकों ने की। मोर्चा के प्रतिनिधियों ने प्रदर्शनकारियों को विधानसभा के गेट की तरफ आगे नहीं बढ़ने की अपील की। उन्होंने छात्रों से जगन्नाथ मंदिर तक मार्च करने और वहीं धरना जारी रखने का आग्रह किया। भीड़ में किसी असामाजिक तत्व की मौजूदगी की जानकारी देने की अपील भी की गई।

    प्रदर्शनकारियों को रोकने के दौरान मोर्चा के प्रतिनिधियों और कुछ छात्रों के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति भी बनी। इसके बाद आंदोलनकारियों को नियंत्रित करने के लिए तीन स्तर की मानव शृंखला बनाई गई। बड़ी संख्या में छात्र सड़क पर बैठ गए और नारेबाजी शुरू कर दी। प्रदर्शन स्थल पर वंदे मातरम और भारत माता की जय के नारे भी सुनाई दिए।

    इस आंदोलन में नौ दिनों से अनशन कर रहे जेएलकेएम नेता देवेंद्र नाथ महतो की मौजूदगी भी खास रही। जयपाल सिंह स्टेडियम में अनशन पर बैठे महतो को उनके समर्थक कपड़े और डंडों से तैयार पालकी में कंधों पर लेकर विधानसभा के करीब पहुंचे। इससे पहले एंबुलेंस से विधानसभा की ओर जाते समय उन्हें जगन्नाथ मंदिर के पास रोक दिया गया था।

    रोक दिए जाने के बाद समर्थकों ने महतो को कंधों पर उठा लिया और कुछ दूरी तक उन्हें इसी तरह आगे ले गए। बाद में वह पालकी पर बैठकर धरना स्थल तक पहुंचे। इस दौरान उनके हाथ में पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन की तस्वीर भी दिखाई दी। महतो की मौजूदगी ने छात्रों के आंदोलन को राजनीतिक समर्थन का भी संकेत दिया।

    सदन की कार्यवाही में हिस्सा लेने के बाद जेएलकेएम के विधायक भी प्रदर्शनकारी छात्रों के बीच पहुंचे। उन्होंने छात्रों से विधानसभा के गेट तक नहीं जाने और उससे पहले ही रुकने की अपील की। विधायक ने आंदोलन को शांतिपूर्ण तरीके से जारी रखने का आग्रह किया और प्रदर्शनकारियों से संयम बनाए रखने को कहा।

    प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों को विधानसभा की ओर बढ़ने से रोकने के लिए कई स्तर पर बैरिकेडिंग की थी। वाटर कैनन के इस्तेमाल के बावजूद आंदोलनकारी अपनी मांगों पर कायम रहे। पुलिस बल की तैनाती बढ़ाई गई और ड्रोन के जरिए प्रदर्शन की निगरानी तथा रिकॉर्डिंग भी की गई।

    प्रदर्शन के दौरान विरोध का अलग अंदाज भी देखने को मिला। कुछ छात्र स्पाइडरमैन और वनमानुष की वेशभूषा में पहुंचे और अपने हाथों में संदेश लिखे पोस्टर लेकर प्रदर्शन किया। भीड़ में फिल्म पुष्पा के किरदार जैसी वेशभूषा में भी एक प्रदर्शनकारी नजर आया।

    छात्रों का यह आंदोलन अब विधानसभा के आसपास के क्षेत्रों तक पहुंच चुका है। प्रदर्शनकारी जेपीएससी और जेएसएससी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी से जुड़े मामलों को लेकर अपनी मांगों पर कायम हैं। वहीं प्रशासन प्रदर्शनकारियों को विधानसभा परिसर की ओर आगे बढ़ने से रोकने और स्थिति को नियंत्रित रखने में जुटा है।

  • पोडियम पर क्यों रोई थीं मीराबाई चानू? PM मोदी ने पूछा सवाल, बोलीं- चार साल में बहुत कुछ सहा

    पोडियम पर क्यों रोई थीं मीराबाई चानू? PM मोदी ने पूछा सवाल, बोलीं- चार साल में बहुत कुछ सहा


    नई दिल्ली । कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में लगातार तीसरी बार गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रचने वाली भारतीय वेटलिफ्टर मीराबाई चानू की भावुक तस्वीरें अब भी लोगों के जेहन में हैं। ग्लासगो में पोडियम पर खड़ी मीराबाई जब अपने गले में गोल्ड मेडल पहनकर भारत का राष्ट्रगान सुन रही थीं तो उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े थे। रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने आवास पर कॉमनवेल्थ गेम्स से पदक जीतकर लौटे भारतीय खिलाड़ियों से मुलाकात की। इस दौरान पीएम मोदी ने मीराबाई चानू के उसी भावुक पल का जिक्र करते हुए उनकी उपलब्धि और संघर्ष की जमकर सराहना की।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मीराबाई से पूछा कि गोल्ड मेडल जीतने के बाद वह पोडियम पर इतनी भावुक क्यों हो गई थीं। पीएम ने बेहद भावुक अंदाज में कहा कि उनके इतने आंसू बह रहे थे कि ऐसा लग रहा था जैसे हर आंसू की बूंद से गोल्ड मेडल टपक रहा हो। प्रधानमंत्री की यह बात सुनकर मीराबाई ने भी अपने भावुक होने की वजह बताई और कहा कि उस दिन वह बेहद खुश और भावुक थीं। उन्होंने बताया कि पेरिस ओलंपिक में वह सिर्फ एक किलो के अंतर से पदक से चूक गई थीं और उस अनुभव ने उन्हें भीतर तक प्रभावित किया था।

    मीराबाई ने बताया कि एक खिलाड़ी के सफर में केवल मैदान पर प्रदर्शन करना ही चुनौती नहीं होता, बल्कि इसके साथ कई व्यक्तिगत और शारीरिक संघर्ष भी जुड़े होते हैं। उन्होंने कहा कि पिछले चार वर्षों के दौरान उन्हें लगातार चोटों का सामना करना पड़ा। इसके साथ ही परिवार में भी कई तरह की परेशानियां चल रही थीं। इन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने अपनी तैयारी जारी रखी और खुद को दोबारा मजबूत बनाकर कॉमनवेल्थ गेम्स में वापसी की।

    मीराबाई ने कहा कि जब वह पोडियम पर खड़ी थीं और भारत का राष्ट्रगान बजना शुरू हुआ, तो वह अपनी भावनाओं पर नियंत्रण नहीं रख सकीं। ऊपर लहराता भारतीय तिरंगा देखकर उनके आंसू अपने आप निकल आए। उनके लिए वह पल केवल एक व्यक्तिगत जीत नहीं था, बल्कि वर्षों की मेहनत, संघर्ष, चोटों और निराशाओं के बाद देश के लिए सम्मान हासिल करने का क्षण था।

    कॉमनवेल्थ गेम्स में मीराबाई चानू का प्रदर्शन भारतीय खेल इतिहास के लिए बेहद खास रहा। उन्होंने लगातार तीसरे कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल जीतकर ऐसी उपलब्धि हासिल की, जो इससे पहले किसी महिला वेटलिफ्टर के नाम नहीं थी। उन्होंने 48 किलोग्राम वर्ग में कुल 190 किलोग्राम भार उठाकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। उनकी इस जीत ने एक बार फिर साबित किया कि मुश्किल परिस्थितियों के बावजूद निरंतर मेहनत और मजबूत इच्छाशक्ति से दुनिया के बड़े मंच पर सफलता हासिल की जा सकती है।

    मीराबाई की उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि उनके सामने पिछले कुछ वर्षों में कई चुनौतियां आईं। चोटों के कारण उन्हें अपनी फिटनेस और तैयारी पर लगातार काम करना पड़ा। पेरिस ओलंपिक में पदक से मामूली अंतर से चूकने के बाद उनके लिए वापसी आसान नहीं थी। लेकिन उन्होंने निराशा को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया और कॉमनवेल्थ गेम्स में शानदार प्रदर्शन करते हुए फिर से स्वर्ण पदक हासिल किया।

    प्रधानमंत्री मोदी ने खिलाड़ियों से मुलाकात के दौरान भारतीय दल के प्रदर्शन की भी सराहना की। ग्लासगो में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत ने कुल 39 पदक जीते। इनमें 13 गोल्ड, 17 सिल्वर और 9 ब्रॉन्ज मेडल शामिल रहे। भारतीय खिलाड़ियों के इस प्रदर्शन ने देश को गौरवान्वित किया और मीराबाई चानू की ऐतिहासिक हैट्रिक ने इस सफलता को और खास बना दिया। उनके पोडियम पर छलके आंसू उस संघर्ष की कहानी बयां कर रहे थे, जिसने उन्हें लगातार तीसरी बार कॉमनवेल्थ चैंपियन बनाया।

  • Gold Silver Price: चांदी में ₹3,700 की जोरदार उछाल, सोना भी चढ़ा, जानें आज का ताजा भाव

    Gold Silver Price: चांदी में ₹3,700 की जोरदार उछाल, सोना भी चढ़ा, जानें आज का ताजा भाव

    नई दिल्ली । सोने और चांदी की कीमतों में सोमवार को कारोबारी सप्ताह की शुरुआत तेजी के साथ हुई। घरेलू वायदा बाजार में चांदी ने एक बार फिर निवेशकों का ध्यान खींचा और शुरुआती कारोबार में इसकी कीमत में 3,700 रुपये से अधिक की तेजी दर्ज की गई। वहीं सोने में शुरुआत में मुनाफावसूली के कारण दबाव देखने को मिला, लेकिन कुछ ही समय बाद इसमें तेज रिकवरी हुई और कीमत करीब 1,000 रुपये तक ऊपर चली गई। कीमती धातुओं में यह उतार-चढ़ाव ऐसे समय में देखने को मिल रहा है, जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों और ब्याज दरों को लेकर निवेशकों की उम्मीदें बदल रही हैं।

    घरेलू वायदा बाजार में सितंबर डिलीवरी वाली चांदी पिछले कारोबारी सत्र में 2,31,466 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुई थी। सोमवार को यह 2,31,799 रुपये पर खुली और शुरुआती कारोबार में तेजी पकड़ते हुए 2,35,200 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर तक पहुंच गई। यानी पिछले बंद भाव की तुलना में इसमें 3,700 रुपये से ज्यादा की मजबूती देखने को मिली। चांदी में इस तरह की तेज चाल ने बाजार में निवेशकों की सक्रियता बढ़ा दी है।

    सोने की बात करें तो अक्टूबर डिलीवरी वाला सोना पिछले सत्र में 1,51,820 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था। सोमवार को यह 1,51,793 रुपये पर खुला और शुरुआती कारोबार में गिरकर 1,51,461 रुपये तक पहुंच गया। हालांकि इसके बाद खरीदारी लौटी और सोने ने तेजी से रिकवरी करते हुए 1,52,842 रुपये प्रति 10 ग्राम का स्तर छू लिया। इससे साफ है कि शुरुआती मुनाफावसूली के बाद बाजार में सोने के प्रति फिर से मजबूत खरीदारी देखने को मिली।

    सर्राफा बाजार में हालांकि तस्वीर कुछ अलग रही। खुदरा स्तर पर उपलब्ध दरों के अनुसार 24 कैरेट सोना करीब 380 रुपये की गिरावट के साथ 1,51,970 रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास कारोबार करता दिखाई दिया। 22 कैरेट सोने की कीमत लगभग 350 रुपये घटकर 1,39,300 रुपये और 18 कैरेट सोने की कीमत करीब 280 रुपये कम होकर 1,13,980 रुपये तक पहुंच गई। शहरों के अनुसार कीमतों में मामूली अंतर बना हुआ है।

    दिल्ली में 24 कैरेट सोने का भाव करीब 15,212 रुपये प्रति ग्राम, जबकि 22 कैरेट का भाव 13,945 रुपये प्रति ग्राम के आसपास रहा। मुंबई, कोलकाता, बेंगलुरु और कई अन्य प्रमुख शहरों में 24 कैरेट सोने की कीमत करीब 15,197 रुपये प्रति ग्राम रही। चेन्नई और कुछ दक्षिण भारतीय शहरों में यह दर करीब 15,218 रुपये प्रति ग्राम रही। भोपाल और इंदौर में 24 कैरेट सोना लगभग 15,202 रुपये प्रति ग्राम के स्तर पर रहा।

    कीमती धातुओं की तेजी के पीछे अंतरराष्ट्रीय बाजार की गतिविधियां भी महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं। अमेरिकी लेबर मार्केट से जुड़े आंकड़े उम्मीद से कमजोर रहने के बाद वहां ब्याज दरों को लेकर बाजार की धारणा में बदलाव आया है। कम ब्याज दरों की संभावना आम तौर पर सोने के लिए सकारात्मक मानी जाती है, क्योंकि ऐसे माहौल में बिना ब्याज देने वाली संपत्तियों की निवेश आकर्षण क्षमता बढ़ सकती है।

    हालांकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोमवार को स्पॉट गोल्ड और स्पॉट सिल्वर में हल्की कमजोरी दिखाई दी। डॉलर में उतार-चढ़ाव, अमेरिकी आर्थिक आंकड़े, केंद्रीय बैंक की नीतियां और वैश्विक स्तर पर निवेशकों की जोखिम धारणा आने वाले दिनों में सोने और चांदी की कीमतों की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकती है। घरेलू बाजार में भी त्योहारी मांग, निवेशकों की खरीदारी और अंतरराष्ट्रीय संकेतों के कारण कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना है।

  • Gold Silver Price: चांदी में ₹3,700 की जोरदार उछाल, सोना भी चढ़ा, जानें आज का ताजा भाव

    Gold Silver Price: चांदी में ₹3,700 की जोरदार उछाल, सोना भी चढ़ा, जानें आज का ताजा भाव

    नई दिल्ली । सोने और चांदी की कीमतों में सोमवार को कारोबारी सप्ताह की शुरुआत तेजी के साथ हुई। घरेलू वायदा बाजार में चांदी ने एक बार फिर निवेशकों का ध्यान खींचा और शुरुआती कारोबार में इसकी कीमत में 3,700 रुपये से अधिक की तेजी दर्ज की गई। वहीं सोने में शुरुआत में मुनाफावसूली के कारण दबाव देखने को मिला, लेकिन कुछ ही समय बाद इसमें तेज रिकवरी हुई और कीमत करीब 1,000 रुपये तक ऊपर चली गई। कीमती धातुओं में यह उतार-चढ़ाव ऐसे समय में देखने को मिल रहा है, जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों और ब्याज दरों को लेकर निवेशकों की उम्मीदें बदल रही हैं।

    घरेलू वायदा बाजार में सितंबर डिलीवरी वाली चांदी पिछले कारोबारी सत्र में 2,31,466 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुई थी। सोमवार को यह 2,31,799 रुपये पर खुली और शुरुआती कारोबार में तेजी पकड़ते हुए 2,35,200 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर तक पहुंच गई। यानी पिछले बंद भाव की तुलना में इसमें 3,700 रुपये से ज्यादा की मजबूती देखने को मिली। चांदी में इस तरह की तेज चाल ने बाजार में निवेशकों की सक्रियता बढ़ा दी है।

    सोने की बात करें तो अक्टूबर डिलीवरी वाला सोना पिछले सत्र में 1,51,820 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था। सोमवार को यह 1,51,793 रुपये पर खुला और शुरुआती कारोबार में गिरकर 1,51,461 रुपये तक पहुंच गया। हालांकि इसके बाद खरीदारी लौटी और सोने ने तेजी से रिकवरी करते हुए 1,52,842 रुपये प्रति 10 ग्राम का स्तर छू लिया। इससे साफ है कि शुरुआती मुनाफावसूली के बाद बाजार में सोने के प्रति फिर से मजबूत खरीदारी देखने को मिली।

    सर्राफा बाजार में हालांकि तस्वीर कुछ अलग रही। खुदरा स्तर पर उपलब्ध दरों के अनुसार 24 कैरेट सोना करीब 380 रुपये की गिरावट के साथ 1,51,970 रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास कारोबार करता दिखाई दिया। 22 कैरेट सोने की कीमत लगभग 350 रुपये घटकर 1,39,300 रुपये और 18 कैरेट सोने की कीमत करीब 280 रुपये कम होकर 1,13,980 रुपये तक पहुंच गई। शहरों के अनुसार कीमतों में मामूली अंतर बना हुआ है।

    दिल्ली में 24 कैरेट सोने का भाव करीब 15,212 रुपये प्रति ग्राम, जबकि 22 कैरेट का भाव 13,945 रुपये प्रति ग्राम के आसपास रहा। मुंबई, कोलकाता, बेंगलुरु और कई अन्य प्रमुख शहरों में 24 कैरेट सोने की कीमत करीब 15,197 रुपये प्रति ग्राम रही। चेन्नई और कुछ दक्षिण भारतीय शहरों में यह दर करीब 15,218 रुपये प्रति ग्राम रही। भोपाल और इंदौर में 24 कैरेट सोना लगभग 15,202 रुपये प्रति ग्राम के स्तर पर रहा।

    कीमती धातुओं की तेजी के पीछे अंतरराष्ट्रीय बाजार की गतिविधियां भी महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं। अमेरिकी लेबर मार्केट से जुड़े आंकड़े उम्मीद से कमजोर रहने के बाद वहां ब्याज दरों को लेकर बाजार की धारणा में बदलाव आया है। कम ब्याज दरों की संभावना आम तौर पर सोने के लिए सकारात्मक मानी जाती है, क्योंकि ऐसे माहौल में बिना ब्याज देने वाली संपत्तियों की निवेश आकर्षण क्षमता बढ़ सकती है।

    हालांकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोमवार को स्पॉट गोल्ड और स्पॉट सिल्वर में हल्की कमजोरी दिखाई दी। डॉलर में उतार-चढ़ाव, अमेरिकी आर्थिक आंकड़े, केंद्रीय बैंक की नीतियां और वैश्विक स्तर पर निवेशकों की जोखिम धारणा आने वाले दिनों में सोने और चांदी की कीमतों की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकती है। घरेलू बाजार में भी त्योहारी मांग, निवेशकों की खरीदारी और अंतरराष्ट्रीय संकेतों के कारण कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना है।

  • यूपी में ब्राह्मण वोट पर सियासी घमासान, अखिलेश-मायावती की नजर, क्या भाजपा का समीकरण बिगड़ेगा?

    यूपी में ब्राह्मण वोट पर सियासी घमासान, अखिलेश-मायावती की नजर, क्या भाजपा का समीकरण बिगड़ेगा?


    लखनऊ।
    उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों के बीच ब्राह्मण मतदाता एक बार फिर सियासी दलों के केंद्र में आते दिख रहे हैं। पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक वर्ग के गठजोड़ यानी पीडीए की राजनीति करने वाले समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव अब ब्राह्मणों को साधने की कोशिश में जुटे हैं। पूर्व केंद्रीय मंत्री और सपा के संस्थापक सदस्यों में शामिल जनेश्वर मिश्र की जयंती पर आयोजित प्रबुद्ध सम्मेलन में अखिलेश ने पीडीए के ‘पीडी’ का अर्थ ‘पंडित’ बताया।

    अखिलेश ने विकास दुबे एनकाउंटर और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के विजन व उनकी स्मृतियों की कथित उपेक्षा जैसे मुद्दों के जरिए भाजपा पर निशाना साधा। सियासी जानकारों की नजर में यह कोशिश इसलिए अहम है, क्योंकि उत्तर प्रदेश में ब्राह्मणों की आबादी करीब 12 से 14 प्रतिशत मानी जाती है और करीब 115 से 120 विधानसभा सीटों पर उनका प्रभाव माना जाता है। पूर्वांचल के कुछ क्षेत्रों में यह हिस्सेदारी 20 प्रतिशत तक बताई जाती है।

    राम मंदिर आंदोलन के बाद बदला ब्राह्मणों का रुख
    90 के दशक में राम जन्मभूमि आंदोलन को लेकर कांग्रेस की नीतियों से नाराज ब्राह्मणों का बड़ा हिस्सा भाजपा की ओर चला गया। इसके पीछे सांस्कृतिक और धार्मिक मुद्दों के प्रति समुदाय का झुकाव भी एक प्रमुख कारण माना गया। इसी दौर में मुस्लिम मतदाता भी कांग्रेस से दूर हुए।

    1990 में अयोध्या जा रहे कारसेवकों की गिरफ्तारी और पुलिस कार्रवाई के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव को मुस्लिम समुदाय का मजबूत समर्थन मिला। यादव और मुस्लिम मतों के समीकरण ने मुलायम की राजनीतिक जमीन को मजबूती दी। वहीं, ब्राह्मणों के भाजपा के साथ आने से 1991 में भाजपा ने उत्तर प्रदेश में पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई।

    1993 में सपा और बसपा के गठबंधन ने पिछड़ा, दलित और मुस्लिम समीकरण के सहारे सत्ता हासिल की। हालांकि यह गठबंधन ज्यादा समय तक नहीं चला और बाद में भाजपा और सपा के बीच मुख्य राजनीतिक मुकाबला बन गया।

    मायावती ने भी आजमाया था ब्राह्मण कार्ड
    2003 में भाजपा से गठबंधन टूटने के बाद बसपा प्रमुख मायावती ने ब्राह्मणों को अपने साथ जोड़ने की रणनीति अपनाई। उन्होंने दलित और ब्राह्मणों के बीच राजनीतिक समीकरण बनाने के लिए अभियान चलाया। 2007 के विधानसभा चुनाव में बसपा ने 86 ब्राह्मण उम्मीदवारों को टिकट दिया, जिनमें 41 चुनाव जीते। इसके बाद मायावती पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाने में सफल रहीं।

    इस दौरान बसपा के नारे भी बदले और पार्टी ने ‘सर्वजन हिताय-सर्वजन सुखाय’ की राजनीति को आगे बढ़ाया। सतीश मिश्र और रामवीर उपाध्याय जैसे ब्राह्मण नेताओं को पार्टी में प्रमुख भूमिका मिली। हालांकि सरकार बनने के कुछ समय बाद दलित और ब्राह्मण कैडर के बीच मतभेद की खबरें सामने आने लगीं।

    2012 में सपा ने भी साधे ब्राह्मण
    2012 के विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी ने भी ब्राह्मणों को साधने की कोशिश की। मुलायम सिंह यादव ने 45 ब्राह्मण उम्मीदवारों को टिकट दिया, जिनमें 21 चुनाव जीतने में सफल रहे। इसके बाद अखिलेश यादव के नेतृत्व में सपा की पूर्ण बहुमत की सरकार बनी।

    हालांकि सरकार के कार्यकाल के दौरान कानून-व्यवस्था, सांप्रदायिक घटनाओं और हिंदू धार्मिक आयोजनों को लेकर उठे सवालों ने ब्राह्मणों के एक वर्ग को सपा से दूर कर दिया। इसके बाद 2017 में भाजपा की प्रचंड जीत के साथ ब्राह्मण मतदाताओं का बड़ा हिस्सा फिर भाजपा के साथ दिखाई दिया।

    भाजपा के साथ क्यों जुड़ा ब्राह्मण वोट?
    2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 68 ब्राह्मण उम्मीदवारों को टिकट दिया था, जिनमें 46 जीतकर विधानसभा पहुंचे। 2022 के चुनाव में भी भाजपा के 46 ब्राह्मण विधायक निर्वाचित हुए।

    योगी आदित्यनाथ की हिंदुत्ववादी राजनीति, कानून-व्यवस्था पर सख्त रुख और सनातन से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता देने की नीति को भाजपा के साथ ब्राह्मणों के जुड़ाव की वजहों में गिना जाता है। हालांकि, पिछले कुछ समय से यूजीसी गाइडलाइन, ट्रांसफर-पोस्टिंग और संगठन में प्रतिनिधित्व जैसे मुद्दों पर ब्राह्मणों की कथित नाराजगी की चर्चाएं भी सामने आती रही हैं।

    पिछले वर्ष दिसंबर में भाजपा विधायक पीएन पाठक के घर ब्राह्मण विधायकों की बैठक और इस पर पार्टी अध्यक्ष पंकज चौधरी की सार्वजनिक नाराजगी के बाद यह मुद्दा और चर्चा में आया।

    अखिलेश के सामने बड़ी चुनौती
    अखिलेश यादव अब इन्हीं संभावित असंतोष के बीच भाजपा के ब्राह्मण वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश कर रहे हैं। जनेश्वर मिश्र की जयंती पर प्रबुद्ध सम्मेलन और अयोध्या से पूर्व मंत्री पवन पांडेय को पहला प्रत्याशी घोषित करना इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

    हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक अखिलेश के लिए यह राह आसान नहीं होगी। 2022 से पहले भी सपा ने परशुराम और विष्णु मंदिर बनाने तथा ब्राह्मणों को सम्मान देने जैसे वादों के जरिए इसी तरह की कोशिश की थी, लेकिन उसका चुनावी असर सीमित रहा।

    इसके अलावा सपा का पारंपरिक यादव वोट बैंक और ब्राह्मण मतदाताओं के बीच राजनीतिक तालमेल बनाना भी चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है। वहीं, अखिलेश के सामने मुस्लिम मतदाताओं को अपने साथ बनाए रखने और ब्राह्मणों को आकर्षित करने के बीच संतुलन साधने की चुनौती भी होगी।

    मायावती भी पीछे नहीं
    ब्राह्मण वोटों को लेकर बसपा प्रमुख मायावती भी सक्रिय हैं। उन्होंने अपने घोषित उम्मीदवारों में ब्राह्मणों को अच्छी संख्या में जगह दी है। जालौन के माधौगढ़ से आशीष पांडेय को उम्मीदवार घोषित कर उन्होंने ब्राह्मण समुदाय को संदेश देने की कोशिश की है। मायावती पहले भी ब्राह्मण-दलित समीकरण के जरिए सत्ता हासिल कर चुकी हैं। 2007 में उनका प्रयोग सफल रहा था। इस बार भी वह दलित, ब्राह्मण, मुस्लिम और पिछड़े वर्गों के बीच सामाजिक समीकरण बनाने की कोशिश कर रही हैं।

    किसके पाले में जाएगा ब्राह्मण वोट?
    2027 के चुनाव में सपा और बसपा दोनों ब्राह्मण मतदाताओं को अपने पाले में लाने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि भाजपा के सामने अपने पुराने सामाजिक समीकरण को मजबूत बनाए रखने की चुनौती है। अखिलेश के लिए सबसे बड़ा सवाल यह है कि वह ब्राह्मणों को आकर्षित करते हुए अपने पारंपरिक यादव-मुस्लिम आधार को किस तरह साथ रख पाएंगे। वहीं मायावती के सामने 2007 वाला सामाजिक समीकरण दोहराने की चुनौती है। ऐसे में यूपी की सियासत में ब्राह्मण वोट किस दल के पक्ष में कितना झुकता है, इसका असर 2027 के विधानसभा चुनाव के कई सीटों के समीकरण पर पड़ सकता है।

  • PoK में विरोध के बीच तीसरे चरण का मतदान टला, PML-N ने 24 सीटें जीतीं और सरकार बनाने की स्थिति में पहुंची.

    PoK में विरोध के बीच तीसरे चरण का मतदान टला, PML-N ने 24 सीटें जीतीं और सरकार बनाने की स्थिति में पहुंची.

    नई दिल्ली । पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर यानी PoK में लगातार जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच 10 अगस्त को होने वाले विधानसभा चुनाव के तीसरे चरण का मतदान अनिश्चितकाल के लिए टाल दिया गया है। तीसरे चरण में 11 सीटों पर मतदान होना था। चुनाव टलने से पहले दो चरणों में पाकिस्तान मुस्लिम लीग नवाज यानी PML-N ने कुल 24 सीटों पर जीत दर्ज की थी। इन नतीजों के बाद पार्टी सरकार बनाने की स्थिति में पहुंच गई थी, लेकिन तीसरे चरण की प्रक्रिया रुकने से चुनावी घटनाक्रम फिलहाल प्रभावित हुआ है।

    PoK विधानसभा में कुल 45 सीटें हैं। पहले दो चरणों में PML-N के पक्ष में आए नतीजों ने पार्टी को मजबूत स्थिति में पहुंचा दिया। हालांकि, तीसरे चरण के मतदान से पहले क्षेत्र में लगातार विरोध प्रदर्शन और तनाव की स्थिति बनी हुई थी। इसी कारण सोमवार को होने वाला मतदान टालने का फैसला लिया गया।

    चुनावी प्रक्रिया के दौरान हिंसा की घटनाएं भी सामने आई थीं। पहले चरण के चुनाव के दौरान अलग-अलग घटनाओं में कम से कम 19 लोगों की मौत होने की जानकारी सामने आई। कई स्थानों पर मतदान केंद्रों के आसपास झड़पों और विरोध प्रदर्शन की खबरें आईं। प्रदर्शनकारियों की ओर से चुनावी प्रक्रिया में धांधली के आरोप भी लगाए गए।

    जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी यानी JAAC इस आंदोलन में प्रमुख भूमिका निभा रहा है। संगठन के समर्थकों ने सरकार की नीतियों और चुनावी व्यवस्था को लेकर विरोध दर्ज कराया है। संगठन की ओर से यह आरोप भी लगाया गया कि रावलकोट में प्रदर्शन के दौरान पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की गोलीबारी में लोगों की मौत हुई। हालांकि, इन आरोपों को संबंधित घटनाक्रम के संदर्भ में जांच और स्वतंत्र पुष्टि की जरूरत है।

    JAAC की मांगें केवल महंगाई और स्थानीय सुविधाओं से जुड़े मुद्दों तक सीमित नहीं हैं। संगठन अब PoK को अधिक स्वायत्तता और राजनीतिक अधिकार देने की मांग भी उठा रहा है। उसकी प्रमुख मांग विधानसभा की 45 सीटों में से 12 आरक्षित सीटों को समाप्त करने की है।

    ये 12 सीटें उन कश्मीरी शरणार्थियों के लिए आरक्षित हैं, जो पाकिस्तान के दूसरे हिस्सों में रहते हैं। JAAC का तर्क है कि PoK से बाहर रहने वाले लोगों को क्षेत्र की सरकार चुनने की प्रक्रिया में इस तरह की भूमिका नहीं मिलनी चाहिए। संगठन का मानना है कि आरक्षित सीटों के कारण स्थानीय मतदाताओं के राजनीतिक प्रभाव में कमी आती है।

    भारत ने PoK में चल रही चुनावी प्रक्रिया को मान्यता देने से इनकार किया है। भारत का आधिकारिक रुख है कि पाकिस्तान के पास उस क्षेत्र में राजनीतिक प्रक्रिया संचालित करने का अधिकार नहीं है, जिसे भारत अपना अभिन्न हिस्सा मानता है। भारत ने PoK में होने वाले चुनावों को पाकिस्तान के कब्जे को वैध दिखाने की कोशिश के तौर पर खारिज किया है।

    इस बीच पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री और PML-N अध्यक्ष नवाज शरीफ का बयान भी चर्चा में रहा। उन्होंने कहा था कि यदि उनकी पार्टी PoK में जीत हासिल करती है तो वह शहबाज शरीफ से उन्हें PoK का प्रधानमंत्री बनाने के लिए कहेंगे। हालांकि, PoK के मौजूदा संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार प्रधानमंत्री का चुनाव विधानसभा के मुस्लिम सदस्यों में से होता है।

    PoK विधानसभा का सदस्य बनने के लिए संबंधित व्यक्ति का स्थायी निवासी होना और मतदाता सूची में नाम होना आवश्यक है। नवाज शरीफ इस चुनाव में किसी विधानसभा सीट से उम्मीदवार नहीं हैं। ऐसे में केवल PML-N अध्यक्ष होने या पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की सहमति से वह सीधे PoK के प्रधानमंत्री नहीं बन सकते।

    फिलहाल तीसरे चरण के मतदान के स्थगित होने से चुनावी प्रक्रिया की अगली तारीख स्पष्ट नहीं है। विरोध प्रदर्शनों, सुरक्षा स्थिति और राजनीतिक मांगों के बीच चुनाव आयोग तथा संबंधित प्रशासन के सामने मतदान प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की चुनौती बनी हुई है। वहीं PML-N पहले दो चरणों के परिणामों के आधार पर मजबूत स्थिति में है, लेकिन अंतिम चुनावी तस्वीर तीसरे चरण की 11 सीटों पर मतदान के बाद ही पूरी तरह स्पष्ट होगी।

  • 6 छक्के और 9 चौकों से मचाई तबाही, युगल सैनी की 91 रन की आतिशी पारी से सेंट्रल दिल्ली की रोमांचक जीत

    6 छक्के और 9 चौकों से मचाई तबाही, युगल सैनी की 91 रन की आतिशी पारी से सेंट्रल दिल्ली की रोमांचक जीत


    नई दिल्ली । दिल्ली प्रीमियर लीग 2026 में सेंट्रल दिल्ली किंग्स ने शानदार बल्लेबाजी का प्रदर्शन करते हुए साउथ दिल्ली सुपरस्टार्स को 4 विकेट से हरा दिया। दोनों टीमों के बीच खेले गए लीग के 19वें मुकाबले में रनों की जमकर बारिश हुई। साउथ दिल्ली सुपरस्टार्स ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवर में 6 विकेट खोकर 220 रन का विशाल स्कोर खड़ा किया। जवाब में सेंट्रल दिल्ली किंग्स ने लक्ष्य का पीछा करते हुए 2 गेंद शेष रहते 6 विकेट गंवाकर 221 रन बनाते हुए मुकाबला अपने नाम कर लिया। टीम की इस जीत के सबसे बड़े नायक युगल सैनी रहे जिन्होंने दबाव के बीच 45 गेंदों में 91 रन की तूफानी पारी खेलकर मैच का रुख पूरी तरह बदल दिया।

    221 रन के बड़े लक्ष्य का पीछा करने उतरी सेंट्रल दिल्ली किंग्स की शुरुआत उम्मीद के मुताबिक नहीं रही। कप्तान यश धुल महज एक रन बनाकर पवेलियन लौट गए। इसके बाद सिद्धार्थ जून ने तेजी से रन बनाने की कोशिश की और 14 गेंदों में 26 रन बनाए लेकिन अपनी पारी को बड़ी पारी में तब्दील नहीं कर सके। जोंटी सिद्धू ने भी 13 गेंदों में 5 चौकों की मदद से 24 रन की तेज पारी खेली। शुरुआती झटकों के बीच केशव डब्बास ने पारी को संभालने की कोशिश की और 27 गेंदों में 39 रन बनाकर टीम को मुकाबले में बनाए रखा।

    इसके बाद नंबर तीन पर बल्लेबाजी करने आए युगल सैनी ने पूरी जिम्मेदारी अपने कंधों पर ले ली। उन्होंने शुरुआत से ही आक्रामक अंदाज अपनाया और साउथ दिल्ली के गेंदबाजों पर लगातार दबाव बनाया। युगल ने सिर्फ 45 गेंदों में 91 रन ठोक दिए। उनकी पारी में 9 चौके और 6 छक्के शामिल रहे। उन्होंने मैदान के चारों ओर शॉट लगाते हुए सेंट्रल दिल्ली को लक्ष्य के बेहद करीब पहुंचा दिया। युगल सैनी अपने शतक से महज 9 रन दूर रह गए और उनकी पारी खत्म होने के बावजूद टीम ने मुकाबले पर पकड़ बनाए रखी।

    अंत में वंश बेदी ने तेजी से रन बनाते हुए टीम को जीत तक पहुंचाया। उन्होंने केवल 13 गेंदों का सामना किया और 4 चौकों की मदद से नाबाद 21 रन बनाकर सेंट्रल दिल्ली की जीत सुनिश्चित कर दी। साउथ दिल्ली की ओर से अंशुमन हुड्डा सबसे सफल गेंदबाज रहे और उन्होंने 3 विकेट हासिल किए, लेकिन सेंट्रल दिल्ली के बल्लेबाजों को लक्ष्य तक पहुंचने से नहीं रोक सके।

    इससे पहले साउथ दिल्ली सुपरस्टार्स ने टॉस के बाद बल्लेबाजी करते हुए 220 रन का मजबूत स्कोर बनाया था। हालांकि टीम की शुरुआत अच्छी नहीं रही और अनमोल शर्मा केवल 6 रन बनाकर आउट हो गए। सनत सांगवान ने 23 गेंदों में 38 रन बनाए। उनकी पारी में 3 चौके और 3 छक्के शामिल रहे। कप्तान आयुष बदोनी ने भी आक्रामक बल्लेबाजी की और केवल 25 गेंदों में 44 रन ठोक दिए। उन्होंने 6 चौके और 2 छक्के लगाए। प्रणव पंत ने 19 गेंदों में 29 रन बनाकर टीम के स्कोर को गति दी।

    साउथ दिल्ली के लिए सबसे विस्फोटक पारी तेजस्वी दहिया ने खेली। उन्होंने महज 31 गेंदों में 69 रन की आतिशी पारी खेली। तेजस्वी ने इस दौरान 8 छक्के और एक चौका लगाया। उनके लगातार बड़े शॉट्स ने सेंट्रल दिल्ली के गेंदबाजों पर दबाव बढ़ा दिया। करन गर्ग ने भी आखिरी ओवरों में तेजी से रन जोड़े और 9 गेंदों में नाबाद 19 रन बनाकर टीम को 220 रन के बड़े स्कोर तक पहुंचाया।

    गेंदबाजी में सेंट्रल दिल्ली की ओर से मनी ग्रेवाल ने 26 रन देकर 2 विकेट हासिल किए। गवनीश खुराना ने भी 2 विकेट अपने नाम किए। इसके बावजूद साउथ दिल्ली के बल्लेबाजों ने अंतिम ओवरों में तेजी से रन बनाकर मजबूत स्कोर खड़ा किया। लेकिन युगल सैनी की धमाकेदार बल्लेबाजी के सामने यह लक्ष्य भी छोटा साबित हुआ और सेंट्रल दिल्ली किंग्स ने रोमांचक मुकाबले में 4 विकेट से जीत दर्ज कर ली।

  • भोपाल मेट्रो का अंडरग्राउंड मिशन तेज, दो TBM एक साथ कर रहीं खुदाई; 3.39 किमी सुरंग से जुड़ेंगे रेलवे स्टेशन और नादरा

    भोपाल मेट्रो का अंडरग्राउंड मिशन तेज, दो TBM एक साथ कर रहीं खुदाई; 3.39 किमी सुरंग से जुड़ेंगे रेलवे स्टेशन और नादरा


    भोपाल । भोपाल में मेट्रो रेल परियोजना का अंडरग्राउंड काम अब तेजी से आगे बढ़ रहा है। शहर के सबसे व्यस्त और घनी आबादी वाले इलाकों में सड़क यातायात का दबाव कम करने के लिए जमीन के करीब 60 फीट नीचे सुरंग तैयार की जा रही है। इस काम में लगी दोनों टनल बोरिंग मशीन यानी TBM एक साथ खुदाई कर रही हैं और अब तक करीब 260 मीटर सुरंग का निर्माण पूरा हो चुका है। खास बात यह है कि यह भूमिगत कॉरिडोर भोपाल रेलवे स्टेशन और नादरा बस स्टैंड जैसे बेहद व्यस्त इलाकों के नीचे से होकर गुजरेगा। मेट्रो अधिकारियों के मुताबिक अंडरग्राउंड रूट का पूरा काम अगले डेढ़ से दो साल में पूरा करने का लक्ष्य है।

    भूमिगत सुरंग का निर्माण दो चरणों में किया जा रहा है। पहले चरण में दोनों TBM भोपाल रेलवे स्टेशन से ऐशबाग की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। पहली टनल बोरिंग मशीन करीब 160 मीटर और दूसरी लगभग 100 मीटर सुरंग तैयार कर चुकी है। इस तरह दोनों मशीनें मिलकर करीब 260 मीटर भूमिगत रास्ता बना चुकी हैं। खुदाई के साथ ही सुरंग के भीतर प्री-कास्ट आरसीसी रिंग भी लगाई जा रही हैं। ये रिंग सुरंग की दीवारों को मजबूती देती हैं और जमीन के दबाव के बीच पूरे स्ट्रक्चर को स्थिर रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

    भोपाल जैसे घनी आबादी वाले शहर में जमीन के नीचे इतनी बड़ी परियोजना को सुरक्षित तरीके से पूरा करना बड़ी चुनौती है। इसी वजह से निर्माण के दौरान आसपास के भवनों और दूसरी संरचनाओं की लगातार निगरानी की जा रही है। सुरंग के ऊपर मौजूद इमारतों में कंपन और जमीन के संभावित धंसाव यानी सेटलमेंट पर नजर रखने के लिए आधुनिक इंस्ट्रूमेंटेशन और मॉनिटरिंग सिस्टम लगाए गए हैं। इससे जमीन या किसी भवन में असामान्य बदलाव दिखाई देने पर समय रहते जरूरी कदम उठाए जा सकेंगे।

    सुरंग के अंदर काम करने वाले श्रमिकों की सुरक्षा के लिए भी विशेष इंतजाम किए गए हैं। यहां फ्रेश एयर वेंटिलेशन सिस्टम लगाया गया है, जिससे भूमिगत हिस्से में पर्याप्त हवा पहुंचती रहे। इसके अलावा गैस मॉनिटरिंग सिस्टम के जरिए सुरंग के भीतर गैस की लगातार जांच की जा रही है। निर्माण स्थल पर 24 घंटे सुरक्षा निगरानी रखी जा रही है ताकि किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके।

    भोपाल मेट्रो के इस प्रोजेक्ट की एक खास बात यह भी है कि मध्यप्रदेश में पहली बार इस तरह दो TBM को एक साथ भूमिगत सुरंग निर्माण में लगाया गया है। यह सुरंग ऐशबाग से सिंधी कॉलोनी के बीच तैयार की जा रही है और आगे भोपाल रेलवे स्टेशन तथा नादरा बस स्टैंड जैसे प्रमुख परिवहन केंद्रों को मेट्रो नेटवर्क से जोड़ेगी। TBM तकनीक को खासतौर पर ऐसे घने शहरी इलाकों के नीचे काम करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है जहां ऊपर सड़क, इमारतें और लगातार चलता यातायात मौजूद रहता है।

    इस अंडरग्राउंड कॉरिडोर में भोपाल और नादरा नाम से दो भूमिगत स्टेशन बनाए जा रहे हैं। दोनों स्टेशनों की लंबाई करीब 180-180 मीटर होगी। TBM से बनने वाली मुख्य सुरंग की लंबाई करीब 3.39 किलोमीटर रहेगी। नादरा स्टेशन के आगे बड़ा बाग के पास करीब 143 मीटर लंबे स्लोप के जरिए मेट्रो दोबारा जमीन के ऊपर आएगी।

    अंडरग्राउंड स्टेशनों को यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखकर तीन प्रमुख स्तरों में तैयार किया जाएगा। ग्राउंड लेवल पर मुख्य प्रवेश और निकास, बस व वाहन ड्रॉप-ऑफ जोन, टिकट काउंटर और कमर्शियल दुकानें होंगी। कॉनकोर्स लेवल पर टिकटिंग व्यवस्था, ऑटोमेटिक फेयर कलेक्शन गेट, ग्राहक सहायता केंद्र, एस्केलेटर, लिफ्ट और प्रतीक्षालय जैसी सुविधाएं रहेंगी। सबसे नीचे प्लेटफॉर्म लेवल पर मेट्रो ट्रेन के प्लेटफॉर्म, डिजिटल डिस्प्ले, बैठने की व्यवस्था और सुरक्षा तथा आपातकालीन सुविधाएं उपलब्ध होंगी।

    भोपाल में एम्स से करोंद चौराहे तक ऑरेंज लाइन का काम भी जारी है। सुभाषनगर से एम्स के बीच करीब 6 किलोमीटर लंबा प्रायोरिटी कॉरिडोर पहले से मेट्रो संचालन के लिए तैयार है। अब इसी लाइन के दूसरे चरण में सुभाषनगर से करोंद के बीच काम आगे बढ़ रहा है। इस हिस्से में मेट्रो का एक महत्वपूर्ण भाग भूमिगत होगा। परियोजना को गति देने में भोपाल नगर निगम, पीडब्ल्यूडी, रेलवे, पुलिस विभाग, स्थानीय प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और शहरवासियों का सहयोग मिल रहा है। अंडरग्राउंड काम पूरा होने के बाद भोपाल के व्यस्ततम हिस्सों में सड़क के ऊपर यातायात के साथ जमीन के नीचे मेट्रो का नया विकल्प उपलब्ध होगा।

  • मध्य प्रदेश में पुलिस महकमे को बड़ी मजबूती, 3 नई SISF बटालियन बनेंगी; हजारों पुलिसकर्मियों को प्रमोशन और भर्ती का ऐलान

    मध्य प्रदेश में पुलिस महकमे को बड़ी मजबूती, 3 नई SISF बटालियन बनेंगी; हजारों पुलिसकर्मियों को प्रमोशन और भर्ती का ऐलान


    भोपाल । मध्यप्रदेश में औद्योगिक संस्थानों और महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोमवार को भोपाल के रवीन्द्र भवन में आयोजित पुलिस विभाग की नवीन भर्ती और पदोन्नति आभार प्रदर्शन समारोह में राज्य औद्योगिक सुरक्षा बल यानी एसआईएसएफ की तीन नई बटालियन गठित करने का ऐलान किया। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि इन तीन बटालियनों में से एक का गठन खंडवा में किया जाएगा, जबकि बाकी दो बटालियन कहां स्थापित होंगी इसका फैसला बाद में किया जाएगा। सरकार के इस कदम को औद्योगिक और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इसी कार्यक्रम में राज्य के अति पिछड़े जनजातीय समूहों के युवाओं को सुरक्षा बल में अवसर देने की भी घोषणा की। उन्होंने कहा कि बैगा, भारिया और सहरिया समुदायों की अलग-अलग कंपनियां गठित की जाएंगी। इन कंपनियों में संबंधित जनजातीय समुदायों के युवाओं को शामिल किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य इन समुदायों के युवाओं को रोजगार और सुरक्षा बल में प्रतिनिधित्व देने के साथ उन्हें मुख्यधारा से जोड़ना भी है। इस फैसले से आदिवासी क्षेत्रों के युवाओं के लिए सरकारी सेवा में नए अवसर खुलने की उम्मीद है।

    कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने पुलिस विभाग में पदोन्नति को लेकर भी सरकार की उपलब्धियां गिनाईं। उन्होंने बताया कि जुलाई 2026 में प्रदेश के विभिन्न विभागों में पदोन्नति की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई और पुलिस विभाग में 58 संवर्गों के कुल 27,534 अफसरों और कर्मचारियों को पदोन्नति मिली। इनमें 30 रक्षित निरीक्षक पदोन्नत होकर उप पुलिस अधीक्षक बने हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि लंबे समय से पदोन्नति का इंतजार कर रहे पुलिसकर्मियों के लिए यह फैसला उनके मनोबल को बढ़ाने वाला है। उन्होंने कहा कि पुलिसकर्मियों के कंधों पर लगे सितारे सिर्फ पदोन्नति का प्रतीक नहीं बल्कि बढ़ी हुई जिम्मेदारी और क्षमता का भी संकेत हैं।

    मुख्यमंत्री ने यह भी स्वीकार किया कि पदोन्नति में लंबे समय तक आई रुकावट के कारण 20 हजार से ज्यादा पुलिसकर्मी सेवानिवृत्त हो गए और उन्हें अपने सेवाकाल में पदोन्नति का लाभ नहीं मिल सका। उन्होंने कहा कि इस बात का उन्हें मलाल है, लेकिन अब पदोन्नति का रास्ता खोल दिया गया है और आगे पात्रता के आधार पर पुलिसकर्मियों को आगे बढ़ने के अवसर मिलते रहेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि पुलिस विभाग को मजबूत बनाने के लिए नए पदों की स्वीकृति और नियमित भर्ती पर सरकार लगातार काम कर रही है।

    डीजीपी कैलाश मकवाना ने बताया कि दिसंबर 2024 में पदभार संभालने के बाद पुलिस विभाग की विभिन्न शाखाओं की विस्तृत समीक्षा की गई थी। इस दौरान भर्ती एवं चयन शाखा में करीब 20 हजार पद खाली मिले। इनमें सब इंस्पेक्टर, सूबेदार, स्टेनो और एएसआई एम जैसे महत्वपूर्ण पद भी शामिल थे। डीजीपी के मुताबिक इन पदों पर करीब आठ साल से भर्ती नहीं हुई थी। लंबे समय तक रिक्तियां रहने के कारण मौजूदा पुलिसकर्मियों पर काम का दबाव बढ़ रहा था और इसका असर विभाग की कार्यक्षमता पर भी पड़ रहा था।

    सरकार ने अब इस स्थिति को बदलने के लिए भर्ती प्रक्रिया तेज की है। डीजीपी ने बताया कि वर्ष 2025 में करीब 6,500 पदों पर भर्ती का प्रस्ताव सरकार को भेजा गया था। इसके बाद विभिन्न पदों पर भर्ती की अनुमति मिली। वर्ष 2026 में भी पुलिस विभाग के अलग-अलग पदों पर 9,662 भर्तियों की अनुमति दी गई है। विभिन्न संवर्गों में 14,704 उम्मीदवारों का चयन हो चुका है, जबकि पुलिस बैंड और एफएसएल से जुड़ी भर्तियां दूसरे चरण में हैं। कुल मिलाकर 9,751 से अधिक पदों पर भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ रही है।

    नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए भी सरकार ने अतिरिक्त पदों को मंजूरी दी है। डीजीपी ने बताया कि मुख्यमंत्री की स्वीकृति से हॉक फोर्स में 325 और विशेष सहयोगी दस्ते में 882 पद स्वीकृत किए गए हैं। उन्होंने कहा कि लगातार उठाए गए कदमों और सुरक्षा बलों को मजबूत करने के परिणामस्वरूप मध्यप्रदेश नक्सल समस्या से मुक्त होने वाला देश का पहला राज्य बना है।

    मुख्यमंत्री ने पुलिसकर्मियों का उत्साह बढ़ाते हुए कहा कि पुलिस की वर्दी पहनने के बाद व्यक्ति के भीतर जिम्मेदारी और साहस का अलग भाव पैदा होता है। उन्होंने कहा कि पुलिस देशभक्ति और जनसेवा की भावना के साथ अपनी अलग पहचान बनाती है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि गृह विभाग की जिम्मेदारी उनके पास होने के कारण वह पुलिस और आंतरिक सुरक्षा से जुड़े विषयों पर विशेष ध्यान देने का प्रयास करते हैं। कार्यक्रम में गृह विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों और पुलिस विभाग के आला अधिकारियों की मौजूदगी में मुख्यमंत्री का अभिनंदन किया गया और नई भर्तियों तथा पदोन्नतियों के लिए आभार व्यक्त किया गया।

  • नरेंदर बेरवाल ने पीएम मोदी को सुनाया पाकिस्तान बॉक्सर से जुड़ा मजेदार किस्सा, नाम को लेकर हुई टिप्पणी पर हंस पड़े प्रधानमंत्री

    नरेंदर बेरवाल ने पीएम मोदी को सुनाया पाकिस्तान बॉक्सर से जुड़ा मजेदार किस्सा, नाम को लेकर हुई टिप्पणी पर हंस पड़े प्रधानमंत्री

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 9 अगस्त को स्कॉटलैंड के ग्लासगो में कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में पदक जीतने वाले भारतीय खिलाड़ियों से मुलाकात की। इस दौरान प्रधानमंत्री ने खिलाड़ियों को उनकी उपलब्धियों के लिए बधाई दी और प्रतियोगिता में उनके प्रदर्शन की सराहना की। बातचीत के दौरान खिलाड़ियों ने अपने खेल करियर से जुड़े कई अनुभव भी साझा किए।

    इसी मुलाकात के दौरान कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में सिल्वर मेडल जीतने वाले हैवीवेट बॉक्सर नरेंदर बेरवाल ने प्रधानमंत्री मोदी को अपने पुराने मुकाबले से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा सुनाया। यह घटना वर्ष 2015 में आयोजित वर्ल्ड मिलिट्री गेम्स की है, जब नरेंदर का सामना पाकिस्तान के एक बॉक्सर से हुआ था।

    नरेंदर बेरवाल ने बताया कि यह पाकिस्तान के बॉक्सर के खिलाफ उनकी पहली फाइट थी। मुकाबले से पहले भारतीय सेना की ओर से उन्हें खास तौर पर कहा गया था कि पाकिस्तान के खिलाफ मुकाबला हारना नहीं है। इसके बाद उन्होंने मुकाबले में पूरी ताकत के साथ प्रदर्शन किया और शुरुआती दोनों राउंड में बढ़त बना ली।

    नरेंदर के मुताबिक उन्होंने पहला राउंड 4-1 से जीता, जबकि दूसरे राउंड में भी 3-2 से बढ़त हासिल की। मुकाबला काफी कड़ा था और इसी दौरान दोनों खिलाड़ियों के सिर आपस में जोर से टकरा गए। फाइट खत्म होने के बाद दोनों खिलाड़ियों को इलाज के लिए अस्पताल जाना पड़ा और उन्हें टांके भी लगवाने पड़े।

    बेरवाल ने बताया कि मुकाबले के दौरान उनके साथ भारतीय सेना के कोच नरेंद्र राणा भी मौजूद थे। फाइट के बाद पाकिस्तानी बॉक्सर ने उनसे बातचीत की। कुछ देर सोचने के बाद उसने नरेंदर से कहा कि वह उनसे एक बात कहना चाहता है। नरेंदर ने उसे अपनी बात कहने के लिए कहा।

    इसके बाद पाकिस्तानी बॉक्सर ने मजाकिया अंदाज में कहा कि भारतीय बॉक्सर का नाम नरेंदर है, उनके कोच का नाम नरेंद्र राणा है और भारत के प्रधानमंत्री का नाम भी नरेंद्र है। उसने आगे कहा कि अब उसे नरेंद्र नाम से ही नफरत हो गई है। मुकाबले के तनाव के बीच कही गई इस बात ने माहौल को हल्का कर दिया था।

    नरेंदर बेरवाल ने जब प्रधानमंत्री मोदी के सामने यह पुराना किस्सा दोहराया तो प्रधानमंत्री भी हंस पड़े। खिलाड़ियों के साथ बातचीत के दौरान सामने आया यह प्रसंग मुलाकात के हल्के-फुल्के पलों में शामिल रहा। बेरवाल ने अपने अनुभव को सहज अंदाज में साझा किया, जिसे सुनकर वहां मौजूद माहौल भी खुशनुमा हो गया।

    कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में सिल्वर मेडल जीतने के बाद नरेंदर बेरवाल की प्रधानमंत्री के साथ हुई यह बातचीत उनके खेल सफर से जुड़े एक पुराने अनुभव को फिर सामने ले आई। एक तरफ यह मुकाबला भारत और पाकिस्तान के खिलाड़ियों के बीच खेल प्रतिस्पर्धा से जुड़ा था, वहीं दूसरी ओर मुकाबले के बाद हुई बातचीत ने खेल के मैदान से बाहर का एक अलग मानवीय पहलू भी दिखाया।

    प्रधानमंत्री से मुलाकात के दौरान भारतीय खिलाड़ियों ने अपनी उपलब्धियों और अनुभवों को साझा किया। नरेंदर बेरवाल का 2015 का यह किस्सा इसी बातचीत का खास हिस्सा बना, जिसे प्रधानमंत्री मोदी ने भी हंसी के साथ सुना।