Author: bharati

  • मध्य प्रदेश में पुलिस महकमे को बड़ी मजबूती, 3 नई SISF बटालियन बनेंगी; हजारों पुलिसकर्मियों को प्रमोशन और भर्ती का ऐलान

    मध्य प्रदेश में पुलिस महकमे को बड़ी मजबूती, 3 नई SISF बटालियन बनेंगी; हजारों पुलिसकर्मियों को प्रमोशन और भर्ती का ऐलान


    भोपाल । मध्यप्रदेश में औद्योगिक संस्थानों और महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोमवार को भोपाल के रवीन्द्र भवन में आयोजित पुलिस विभाग की नवीन भर्ती और पदोन्नति आभार प्रदर्शन समारोह में राज्य औद्योगिक सुरक्षा बल यानी एसआईएसएफ की तीन नई बटालियन गठित करने का ऐलान किया। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि इन तीन बटालियनों में से एक का गठन खंडवा में किया जाएगा, जबकि बाकी दो बटालियन कहां स्थापित होंगी इसका फैसला बाद में किया जाएगा। सरकार के इस कदम को औद्योगिक और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इसी कार्यक्रम में राज्य के अति पिछड़े जनजातीय समूहों के युवाओं को सुरक्षा बल में अवसर देने की भी घोषणा की। उन्होंने कहा कि बैगा, भारिया और सहरिया समुदायों की अलग-अलग कंपनियां गठित की जाएंगी। इन कंपनियों में संबंधित जनजातीय समुदायों के युवाओं को शामिल किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य इन समुदायों के युवाओं को रोजगार और सुरक्षा बल में प्रतिनिधित्व देने के साथ उन्हें मुख्यधारा से जोड़ना भी है। इस फैसले से आदिवासी क्षेत्रों के युवाओं के लिए सरकारी सेवा में नए अवसर खुलने की उम्मीद है।

    कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने पुलिस विभाग में पदोन्नति को लेकर भी सरकार की उपलब्धियां गिनाईं। उन्होंने बताया कि जुलाई 2026 में प्रदेश के विभिन्न विभागों में पदोन्नति की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई और पुलिस विभाग में 58 संवर्गों के कुल 27,534 अफसरों और कर्मचारियों को पदोन्नति मिली। इनमें 30 रक्षित निरीक्षक पदोन्नत होकर उप पुलिस अधीक्षक बने हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि लंबे समय से पदोन्नति का इंतजार कर रहे पुलिसकर्मियों के लिए यह फैसला उनके मनोबल को बढ़ाने वाला है। उन्होंने कहा कि पुलिसकर्मियों के कंधों पर लगे सितारे सिर्फ पदोन्नति का प्रतीक नहीं बल्कि बढ़ी हुई जिम्मेदारी और क्षमता का भी संकेत हैं।

    मुख्यमंत्री ने यह भी स्वीकार किया कि पदोन्नति में लंबे समय तक आई रुकावट के कारण 20 हजार से ज्यादा पुलिसकर्मी सेवानिवृत्त हो गए और उन्हें अपने सेवाकाल में पदोन्नति का लाभ नहीं मिल सका। उन्होंने कहा कि इस बात का उन्हें मलाल है, लेकिन अब पदोन्नति का रास्ता खोल दिया गया है और आगे पात्रता के आधार पर पुलिसकर्मियों को आगे बढ़ने के अवसर मिलते रहेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि पुलिस विभाग को मजबूत बनाने के लिए नए पदों की स्वीकृति और नियमित भर्ती पर सरकार लगातार काम कर रही है।

    डीजीपी कैलाश मकवाना ने बताया कि दिसंबर 2024 में पदभार संभालने के बाद पुलिस विभाग की विभिन्न शाखाओं की विस्तृत समीक्षा की गई थी। इस दौरान भर्ती एवं चयन शाखा में करीब 20 हजार पद खाली मिले। इनमें सब इंस्पेक्टर, सूबेदार, स्टेनो और एएसआई एम जैसे महत्वपूर्ण पद भी शामिल थे। डीजीपी के मुताबिक इन पदों पर करीब आठ साल से भर्ती नहीं हुई थी। लंबे समय तक रिक्तियां रहने के कारण मौजूदा पुलिसकर्मियों पर काम का दबाव बढ़ रहा था और इसका असर विभाग की कार्यक्षमता पर भी पड़ रहा था।

    सरकार ने अब इस स्थिति को बदलने के लिए भर्ती प्रक्रिया तेज की है। डीजीपी ने बताया कि वर्ष 2025 में करीब 6,500 पदों पर भर्ती का प्रस्ताव सरकार को भेजा गया था। इसके बाद विभिन्न पदों पर भर्ती की अनुमति मिली। वर्ष 2026 में भी पुलिस विभाग के अलग-अलग पदों पर 9,662 भर्तियों की अनुमति दी गई है। विभिन्न संवर्गों में 14,704 उम्मीदवारों का चयन हो चुका है, जबकि पुलिस बैंड और एफएसएल से जुड़ी भर्तियां दूसरे चरण में हैं। कुल मिलाकर 9,751 से अधिक पदों पर भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ रही है।

    नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए भी सरकार ने अतिरिक्त पदों को मंजूरी दी है। डीजीपी ने बताया कि मुख्यमंत्री की स्वीकृति से हॉक फोर्स में 325 और विशेष सहयोगी दस्ते में 882 पद स्वीकृत किए गए हैं। उन्होंने कहा कि लगातार उठाए गए कदमों और सुरक्षा बलों को मजबूत करने के परिणामस्वरूप मध्यप्रदेश नक्सल समस्या से मुक्त होने वाला देश का पहला राज्य बना है।

    मुख्यमंत्री ने पुलिसकर्मियों का उत्साह बढ़ाते हुए कहा कि पुलिस की वर्दी पहनने के बाद व्यक्ति के भीतर जिम्मेदारी और साहस का अलग भाव पैदा होता है। उन्होंने कहा कि पुलिस देशभक्ति और जनसेवा की भावना के साथ अपनी अलग पहचान बनाती है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि गृह विभाग की जिम्मेदारी उनके पास होने के कारण वह पुलिस और आंतरिक सुरक्षा से जुड़े विषयों पर विशेष ध्यान देने का प्रयास करते हैं। कार्यक्रम में गृह विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों और पुलिस विभाग के आला अधिकारियों की मौजूदगी में मुख्यमंत्री का अभिनंदन किया गया और नई भर्तियों तथा पदोन्नतियों के लिए आभार व्यक्त किया गया।

  • नरेंदर बेरवाल ने पीएम मोदी को सुनाया पाकिस्तान बॉक्सर से जुड़ा मजेदार किस्सा, नाम को लेकर हुई टिप्पणी पर हंस पड़े प्रधानमंत्री

    नरेंदर बेरवाल ने पीएम मोदी को सुनाया पाकिस्तान बॉक्सर से जुड़ा मजेदार किस्सा, नाम को लेकर हुई टिप्पणी पर हंस पड़े प्रधानमंत्री

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 9 अगस्त को स्कॉटलैंड के ग्लासगो में कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में पदक जीतने वाले भारतीय खिलाड़ियों से मुलाकात की। इस दौरान प्रधानमंत्री ने खिलाड़ियों को उनकी उपलब्धियों के लिए बधाई दी और प्रतियोगिता में उनके प्रदर्शन की सराहना की। बातचीत के दौरान खिलाड़ियों ने अपने खेल करियर से जुड़े कई अनुभव भी साझा किए।

    इसी मुलाकात के दौरान कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में सिल्वर मेडल जीतने वाले हैवीवेट बॉक्सर नरेंदर बेरवाल ने प्रधानमंत्री मोदी को अपने पुराने मुकाबले से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा सुनाया। यह घटना वर्ष 2015 में आयोजित वर्ल्ड मिलिट्री गेम्स की है, जब नरेंदर का सामना पाकिस्तान के एक बॉक्सर से हुआ था।

    नरेंदर बेरवाल ने बताया कि यह पाकिस्तान के बॉक्सर के खिलाफ उनकी पहली फाइट थी। मुकाबले से पहले भारतीय सेना की ओर से उन्हें खास तौर पर कहा गया था कि पाकिस्तान के खिलाफ मुकाबला हारना नहीं है। इसके बाद उन्होंने मुकाबले में पूरी ताकत के साथ प्रदर्शन किया और शुरुआती दोनों राउंड में बढ़त बना ली।

    नरेंदर के मुताबिक उन्होंने पहला राउंड 4-1 से जीता, जबकि दूसरे राउंड में भी 3-2 से बढ़त हासिल की। मुकाबला काफी कड़ा था और इसी दौरान दोनों खिलाड़ियों के सिर आपस में जोर से टकरा गए। फाइट खत्म होने के बाद दोनों खिलाड़ियों को इलाज के लिए अस्पताल जाना पड़ा और उन्हें टांके भी लगवाने पड़े।

    बेरवाल ने बताया कि मुकाबले के दौरान उनके साथ भारतीय सेना के कोच नरेंद्र राणा भी मौजूद थे। फाइट के बाद पाकिस्तानी बॉक्सर ने उनसे बातचीत की। कुछ देर सोचने के बाद उसने नरेंदर से कहा कि वह उनसे एक बात कहना चाहता है। नरेंदर ने उसे अपनी बात कहने के लिए कहा।

    इसके बाद पाकिस्तानी बॉक्सर ने मजाकिया अंदाज में कहा कि भारतीय बॉक्सर का नाम नरेंदर है, उनके कोच का नाम नरेंद्र राणा है और भारत के प्रधानमंत्री का नाम भी नरेंद्र है। उसने आगे कहा कि अब उसे नरेंद्र नाम से ही नफरत हो गई है। मुकाबले के तनाव के बीच कही गई इस बात ने माहौल को हल्का कर दिया था।

    नरेंदर बेरवाल ने जब प्रधानमंत्री मोदी के सामने यह पुराना किस्सा दोहराया तो प्रधानमंत्री भी हंस पड़े। खिलाड़ियों के साथ बातचीत के दौरान सामने आया यह प्रसंग मुलाकात के हल्के-फुल्के पलों में शामिल रहा। बेरवाल ने अपने अनुभव को सहज अंदाज में साझा किया, जिसे सुनकर वहां मौजूद माहौल भी खुशनुमा हो गया।

    कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में सिल्वर मेडल जीतने के बाद नरेंदर बेरवाल की प्रधानमंत्री के साथ हुई यह बातचीत उनके खेल सफर से जुड़े एक पुराने अनुभव को फिर सामने ले आई। एक तरफ यह मुकाबला भारत और पाकिस्तान के खिलाड़ियों के बीच खेल प्रतिस्पर्धा से जुड़ा था, वहीं दूसरी ओर मुकाबले के बाद हुई बातचीत ने खेल के मैदान से बाहर का एक अलग मानवीय पहलू भी दिखाया।

    प्रधानमंत्री से मुलाकात के दौरान भारतीय खिलाड़ियों ने अपनी उपलब्धियों और अनुभवों को साझा किया। नरेंदर बेरवाल का 2015 का यह किस्सा इसी बातचीत का खास हिस्सा बना, जिसे प्रधानमंत्री मोदी ने भी हंसी के साथ सुना।

  • छात्र आंदोलन पर लोकसभा में चर्चा को सरकार तैयार, किरन रिजिजू बोले गृह मंत्री अमित शाह देंगे जवाब

    छात्र आंदोलन पर लोकसभा में चर्चा को सरकार तैयार, किरन रिजिजू बोले गृह मंत्री अमित शाह देंगे जवाब

    नई दिल्ली । मानसून सत्र के दौरान छात्र आंदोलन को लेकर लोकसभा में जारी गतिरोध के बीच सरकार ने इस मुद्दे पर चर्चा के लिए अपनी सहमति जताई है। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरन रिजिजू ने कहा कि सरकार छात्रों से जुड़े विषय पर सदन में विस्तृत चर्चा के लिए तैयार है और गृह मंत्री अमित शाह विपक्ष के सवालों का जवाब देंगे।

    रिजिजू ने कहा कि सरकार की ओर से चर्चा से पीछे हटने का सवाल नहीं है। छात्र आंदोलन से जुड़े मुद्दे पर सदन में विस्तार से बातचीत होगी और उठाए जाने वाले सवालों का जवाब दिया जाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जब गृह मंत्री सदन में सरकार का पक्ष रखेंगे तो विपक्षी सांसदों को उनका जवाब सुनना चाहिए।

    केंद्रीय मंत्री ने विपक्ष से सदन की कार्यवाही के दौरान व्यवधान पैदा नहीं करने की अपील की। उनका कहना था कि सरकार जवाब देने के लिए तैयार है, इसलिए चर्चा को हंगामे में बदलने के बजाय संसदीय तरीके से आगे बढ़ाया जाना चाहिए। उन्होंने संकेत दिया कि सरकार चाहती है कि मुद्दे पर पूरी चर्चा हो और सभी पक्षों को अपनी बात रखने का अवसर मिले।

    वहीं विपक्ष ने छात्र आंदोलन के साथ अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी का मुद्दा भी उठाया है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि यदि गृह मंत्री छात्रों के मामले में सदन में बयान देने के लिए तैयार हैं, तो राम मंदिर से जुड़े मामले पर भी उन्हें अपना पक्ष रखना चाहिए। विपक्ष ने दोनों मुद्दों पर जवाब की मांग को संसद में जारी गतिरोध से जोड़ दिया है।

    संसद के मानसून सत्र में पिछले कई दिनों से विपक्षी दल अलग-अलग मुद्दों को लेकर सरकार पर दबाव बना रहे हैं। सोमवार को भी सदन की कार्यवाही शुरू होते ही कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और अन्य विपक्षी दलों के सांसदों ने छात्र प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई तथा राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़े आरोपों को लेकर गृह मंत्री से जवाब देने की मांग की।

    हंगामे के कारण प्रश्नकाल भी प्रभावित हुआ। विपक्षी सांसदों ने सदन के भीतर अपनी मांगों को लेकर नारेबाजी की और कार्यवाही सामान्य तरीके से चलाने में बाधा आई। इससे पहले विपक्षी दल संसद परिसर में भी अलग-अलग तरीकों से प्रदर्शन करते रहे हैं। समाजवादी पार्टी के सांसद सोमवार को पानी और दूध लेकर परिसर में पहुंचे और सरकार के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया।

    कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी समेत विपक्ष के कई नेताओं ने भी कहा है कि जब तक गृह मंत्री दोनों प्रमुख मुद्दों पर सदन में जवाब नहीं देते, तब तक गतिरोध समाप्त होने की संभावना कम है। विपक्ष लगातार मांग कर रहा है कि सरकार संसद के भीतर इन मामलों पर स्पष्ट स्थिति रखे।

    अब सरकार की ओर से छात्र आंदोलन पर चर्चा के लिए सहमति जताए जाने के बाद सदन की अगली कार्यवाही पर सभी की नजरें हैं। हालांकि विपक्ष की दूसरी मांग को लेकर स्थिति अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार और विपक्ष के बीच सहमति बनती है या इन मुद्दों पर संसद में टकराव आगे भी जारी रहता है।

  • संजय राउत ने पीएम मोदी की संसद में अनुपस्थिति पर कसा तंज, राहुल गांधी को लेकर कही राजनीतिक धुलाई की बात

    संजय राउत ने पीएम मोदी की संसद में अनुपस्थिति पर कसा तंज, राहुल गांधी को लेकर कही राजनीतिक धुलाई की बात

    नई दिल्ली । शिवसेना यूबीटी सांसद संजय राउत ने संसद के मानसून सत्र के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की सदन में मौजूदगी को लेकर तीखा राजनीतिक हमला बोला है। राउत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तंज कसते हुए कहा कि उन्हें कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से डरने की जरूरत नहीं है। उन्होंने प्रधानमंत्री के 56 इंच वाले राजनीतिक संदर्भ का इस्तेमाल करते हुए उन्हें सदन के भीतर आने की चुनौती दी।

    संजय राउत ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संसद में आने से डरना नहीं चाहिए। उन्होंने राहुल गांधी का जिक्र करते हुए कहा कि कांग्रेस नेता संसद के मुख्य दरवाजे पर खड़े हैं और प्रधानमंत्री को हिम्मत दिखाकर सदन के अंदर आना चाहिए। राउत ने अपने बयान में राहुल गांधी को अच्छा और संस्कारी व्यक्ति बताते हुए कहा कि वह प्रधानमंत्री के साथ कुछ नहीं करेंगे, बल्कि केवल थोड़ी राजनीतिक धुलाई करेंगे।

    राउत का यह बयान संसद के जारी मानसून सत्र के बीच सामने आया है। इस दौरान विपक्षी दल विभिन्न मुद्दों को लेकर सरकार पर सवाल उठा रहे हैं। विपक्षी गठबंधन की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह की संसद में मौजूदगी को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। इसी राजनीतिक माहौल के बीच राउत ने दोनों नेताओं की गैरमौजूदगी को लेकर सरकार पर निशाना साधा।

    संजय राउत ने प्रधानमंत्री को संबोधित करते हुए कहा कि उन्हें राहुल गांधी से डरने की कोई जरूरत नहीं है। उनके मुताबिक प्रधानमंत्री को सदन में आकर विपक्ष के सवालों और बहस का सामना करना चाहिए। राउत के बयान में संसद के भीतर सरकार और विपक्ष के बीच सीधे राजनीतिक संवाद की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया।

    राउत ने अपने बयान में अमित शाह का भी उल्लेख किया और संसद में उनकी अनुपस्थिति को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सरकार के शीर्ष नेताओं को महत्वपूर्ण संसदीय चर्चाओं के दौरान सदन में मौजूद रहना चाहिए। विपक्ष की ओर से लगातार यह मुद्दा उठाया जा रहा है कि सरकार के वरिष्ठ नेताओं को संसद में उपस्थित रहकर विपक्ष के सवालों का जवाब देना चाहिए।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संदर्भ में 56 इंच का उल्लेख भारतीय राजनीति में पहले से इस्तेमाल होने वाला राजनीतिक मुहावरा है। राउत ने इसी संदर्भ को अपने तंज में शामिल करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री को अपनी राजनीतिक ताकत पर भरोसा है तो उन्हें संसद में आने से बचना नहीं चाहिए। उन्होंने प्रधानमंत्री से सदन के भीतर आने और विपक्ष का सामना करने की बात कही।

    राउत की टिप्पणी के बाद सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक बयानबाजी और तेज हो गई है। सत्तारूढ़ भाजपा की ओर से उनके बयान को राजनीतिक मर्यादा के खिलाफ बताया गया और इसे प्रचार पाने की कोशिश के तौर पर भी देखा गया। वहीं विपक्षी खेमे की ओर से संसद में सरकार की जवाबदेही और वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी का मुद्दा उठाया जा रहा है।

    इस बयान में राहुल गांधी भी राजनीतिक चर्चा के केंद्र में रहे। राउत ने प्रधानमंत्री और विपक्ष के नेता के बीच संसद में राजनीतिक बहस का संकेत देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री को राहुल गांधी से घबराने के बजाय सदन में आना चाहिए। उनका तंज मुख्य रूप से प्रधानमंत्री की संसद में अनुपस्थिति और विपक्ष के साथ सीधे मुकाबले को लेकर था।

    संसद के मानसून सत्र में सरकार और विपक्ष के बीच कई मुद्दों पर राजनीतिक टकराव जारी है। ऐसे में संजय राउत की टिप्पणी ने दोनों पक्षों के बीच चल रही बयानबाजी को और प्रमुख बना दिया है। फिलहाल राउत ने प्रधानमंत्री की सदन में मौजूदगी को लेकर सवाल उठाते हुए राहुल गांधी के संदर्भ में जो टिप्पणी की है, वह संसद के भीतर सरकार और विपक्ष के बीच जारी राजनीतिक खींचतान का हिस्सा बन गई है।

  • BHEL गेट के पास बोरी में मिला युवक का शव, पहचान नहीं हुई; CCTV फुटेज खंगाल रही गोविंदपुरा पुलिस

    BHEL गेट के पास बोरी में मिला युवक का शव, पहचान नहीं हुई; CCTV फुटेज खंगाल रही गोविंदपुरा पुलिस


    भोपाल । भोपाल के गोविंदपुरा थाना क्षेत्र में सोमवार दोपहर उस वक्त सनसनी फैल गई जब BHEL गेट नंबर 8 के पास झाड़ियों में बोरी के अंदर एक युवक का शव बरामद हुआ। झाड़ियों में शव मिलने की सूचना फैलते ही आसपास के इलाके में लोगों की भीड़ जमा हो गई। सूचना मिलने के बाद गोविंदपुरा थाना पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। शुरुआती जांच में पुलिस को आशंका है कि शव करीब चार से पांच दिन पुराना हो सकता है। शव की हालत और घटनास्थल की परिस्थितियों को देखते हुए मामला संदिग्ध माना जा रहा है और पुलिस ने हर संभावित पहलू से जांच शुरू कर दी है।

    पुलिस के सामने फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती मृतक की पहचान करना है। युवक के पास से ऐसा कोई स्पष्ट दस्तावेज या पहचान संबंधी जानकारी नहीं मिली है जिससे उसकी तुरंत पहचान हो सके। पुलिस आसपास के थानों में दर्ज गुमशुदगी की शिकायतों की जानकारी जुटा रही है। इसके साथ ही पुलिस दूसरे संभावित माध्यमों से भी मृतक की पहचान करने का प्रयास कर रही है। आसपास के लोगों से पूछताछ की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि पिछले कुछ दिनों में इलाके में किसी संदिग्ध व्यक्ति या गतिविधि को देखा गया था या नहीं।

    शव की जांच के दौरान युवक के शरीर पर गंभीर चोटों के निशान भी मिले हैं। इन्हीं चोटों के कारण पुलिस हत्या की आशंका से इनकार नहीं कर रही है। हालांकि पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अभी मौत की वास्तविक वजह को लेकर अंतिम निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि युवक की मौत किस वजह से हुई और शरीर पर मिले चोटों के निशान किस परिस्थिति में आए। पुलिस हत्या समेत अन्य सभी संभावनाओं को ध्यान में रखकर जांच आगे बढ़ा रही है।

    घटनास्थल से पुलिस ने जरूरी साक्ष्य जुटाए हैं। शव को जिस जगह बोरी में बंद करके फेंका गया था उसके आसपास के इलाके की भी बारीकी से जांच की गई है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि शव को कहीं और से लाकर यहां फेंका गया या वारदात इसी इलाके में हुई। इसके लिए घटनास्थल तक पहुंचने वाले रास्तों और आसपास की गतिविधियों की जानकारी जुटाई जा रही है।

    मामले की जांच में CCTV फुटेज को भी अहम माना जा रहा है। BHEL गेट नंबर 8 और आसपास के प्रमुख रास्तों पर लगे CCTV कैमरों की रिकॉर्डिंग खंगाली जा रही है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि पिछले चार से पांच दिनों के दौरान किसी संदिग्ध वाहन या व्यक्ति की आवाजाही तो नहीं हुई थी। अगर किसी वाहन के जरिए शव यहां लाए जाने की पुष्टि होती है तो CCTV फुटेज से जांच को महत्वपूर्ण सुराग मिल सकता है।

    फिलहाल युवक की पहचान और मौत की वजह दोनों ही पुलिस के लिए रहस्य बनी हुई हैं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और CCTV फुटेज की जांच के साथ पुलिस आसपास के लोगों से पूछताछ कर रही है। पुलिस को उम्मीद है कि जांच के दौरान मिलने वाले साक्ष्यों से मृतक की पहचान के साथ ही यह भी पता चल सकेगा कि युवक की मौत किन परिस्थितियों में हुई और उसका शव BHEL गेट के पास झाड़ियों में बोरी के अंदर किसने और क्यों फेंका।भोपाल के गोविंदपुरा थाना क्षेत्र में सोमवार दोपहर उस वक्त सनसनी फैल गई जब BHEL गेट नंबर 8 के पास झाड़ियों में बोरी के अंदर एक युवक का शव बरामद हुआ। झाड़ियों में शव मिलने की सूचना फैलते ही आसपास के इलाके में लोगों की भीड़ जमा हो गई। सूचना मिलने के बाद गोविंदपुरा थाना पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। शुरुआती जांच में पुलिस को आशंका है कि शव करीब चार से पांच दिन पुराना हो सकता है। शव की हालत और घटनास्थल की परिस्थितियों को देखते हुए मामला संदिग्ध माना जा रहा है और पुलिस ने हर संभावित पहलू से जांच शुरू कर दी है।

    पुलिस के सामने फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती मृतक की पहचान करना है। युवक के पास से ऐसा कोई स्पष्ट दस्तावेज या पहचान संबंधी जानकारी नहीं मिली है जिससे उसकी तुरंत पहचान हो सके। पुलिस आसपास के थानों में दर्ज गुमशुदगी की शिकायतों की जानकारी जुटा रही है। इसके साथ ही पुलिस दूसरे संभावित माध्यमों से भी मृतक की पहचान करने का प्रयास कर रही है। आसपास के लोगों से पूछताछ की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि पिछले कुछ दिनों में इलाके में किसी संदिग्ध व्यक्ति या गतिविधि को देखा गया था या नहीं।

    शव की जांच के दौरान युवक के शरीर पर गंभीर चोटों के निशान भी मिले हैं। इन्हीं चोटों के कारण पुलिस हत्या की आशंका से इनकार नहीं कर रही है। हालांकि पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अभी मौत की वास्तविक वजह को लेकर अंतिम निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि युवक की मौत किस वजह से हुई और शरीर पर मिले चोटों के निशान किस परिस्थिति में आए। पुलिस हत्या समेत अन्य सभी संभावनाओं को ध्यान में रखकर जांच आगे बढ़ा रही है।

    घटनास्थल से पुलिस ने जरूरी साक्ष्य जुटाए हैं। शव को जिस जगह बोरी में बंद करके फेंका गया था उसके आसपास के इलाके की भी बारीकी से जांच की गई है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि शव को कहीं और से लाकर यहां फेंका गया या वारदात इसी इलाके में हुई। इसके लिए घटनास्थल तक पहुंचने वाले रास्तों और आसपास की गतिविधियों की जानकारी जुटाई जा रही है।

    मामले की जांच में CCTV फुटेज को भी अहम माना जा रहा है। BHEL गेट नंबर 8 और आसपास के प्रमुख रास्तों पर लगे CCTV कैमरों की रिकॉर्डिंग खंगाली जा रही है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि पिछले चार से पांच दिनों के दौरान किसी संदिग्ध वाहन या व्यक्ति की आवाजाही तो नहीं हुई थी। अगर किसी वाहन के जरिए शव यहां लाए जाने की पुष्टि होती है तो CCTV फुटेज से जांच को महत्वपूर्ण सुराग मिल सकता है।

    फिलहाल युवक की पहचान और मौत की वजह दोनों ही पुलिस के लिए रहस्य बनी हुई हैं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और CCTV फुटेज की जांच के साथ पुलिस आसपास के लोगों से पूछताछ कर रही है। पुलिस को उम्मीद है कि जांच के दौरान मिलने वाले साक्ष्यों से मृतक की पहचान के साथ ही यह भी पता चल सकेगा कि युवक की मौत किन परिस्थितियों में हुई और उसका शव BHEL गेट के पास झाड़ियों में बोरी के अंदर किसने और क्यों फेंका।

  • BHEL गेट के पास बोरी में मिला युवक का शव, पहचान नहीं हुई; CCTV फुटेज खंगाल रही गोविंदपुरा पुलिस

    BHEL गेट के पास बोरी में मिला युवक का शव, पहचान नहीं हुई; CCTV फुटेज खंगाल रही गोविंदपुरा पुलिस


    भोपाल । भोपाल के गोविंदपुरा थाना क्षेत्र में सोमवार दोपहर उस वक्त सनसनी फैल गई जब BHEL गेट नंबर 8 के पास झाड़ियों में बोरी के अंदर एक युवक का शव बरामद हुआ। झाड़ियों में शव मिलने की सूचना फैलते ही आसपास के इलाके में लोगों की भीड़ जमा हो गई। सूचना मिलने के बाद गोविंदपुरा थाना पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। शुरुआती जांच में पुलिस को आशंका है कि शव करीब चार से पांच दिन पुराना हो सकता है। शव की हालत और घटनास्थल की परिस्थितियों को देखते हुए मामला संदिग्ध माना जा रहा है और पुलिस ने हर संभावित पहलू से जांच शुरू कर दी है।

    पुलिस के सामने फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती मृतक की पहचान करना है। युवक के पास से ऐसा कोई स्पष्ट दस्तावेज या पहचान संबंधी जानकारी नहीं मिली है जिससे उसकी तुरंत पहचान हो सके। पुलिस आसपास के थानों में दर्ज गुमशुदगी की शिकायतों की जानकारी जुटा रही है। इसके साथ ही पुलिस दूसरे संभावित माध्यमों से भी मृतक की पहचान करने का प्रयास कर रही है। आसपास के लोगों से पूछताछ की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि पिछले कुछ दिनों में इलाके में किसी संदिग्ध व्यक्ति या गतिविधि को देखा गया था या नहीं।

    शव की जांच के दौरान युवक के शरीर पर गंभीर चोटों के निशान भी मिले हैं। इन्हीं चोटों के कारण पुलिस हत्या की आशंका से इनकार नहीं कर रही है। हालांकि पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अभी मौत की वास्तविक वजह को लेकर अंतिम निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि युवक की मौत किस वजह से हुई और शरीर पर मिले चोटों के निशान किस परिस्थिति में आए। पुलिस हत्या समेत अन्य सभी संभावनाओं को ध्यान में रखकर जांच आगे बढ़ा रही है।

    घटनास्थल से पुलिस ने जरूरी साक्ष्य जुटाए हैं। शव को जिस जगह बोरी में बंद करके फेंका गया था उसके आसपास के इलाके की भी बारीकी से जांच की गई है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि शव को कहीं और से लाकर यहां फेंका गया या वारदात इसी इलाके में हुई। इसके लिए घटनास्थल तक पहुंचने वाले रास्तों और आसपास की गतिविधियों की जानकारी जुटाई जा रही है।

    मामले की जांच में CCTV फुटेज को भी अहम माना जा रहा है। BHEL गेट नंबर 8 और आसपास के प्रमुख रास्तों पर लगे CCTV कैमरों की रिकॉर्डिंग खंगाली जा रही है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि पिछले चार से पांच दिनों के दौरान किसी संदिग्ध वाहन या व्यक्ति की आवाजाही तो नहीं हुई थी। अगर किसी वाहन के जरिए शव यहां लाए जाने की पुष्टि होती है तो CCTV फुटेज से जांच को महत्वपूर्ण सुराग मिल सकता है।

    फिलहाल युवक की पहचान और मौत की वजह दोनों ही पुलिस के लिए रहस्य बनी हुई हैं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और CCTV फुटेज की जांच के साथ पुलिस आसपास के लोगों से पूछताछ कर रही है। पुलिस को उम्मीद है कि जांच के दौरान मिलने वाले साक्ष्यों से मृतक की पहचान के साथ ही यह भी पता चल सकेगा कि युवक की मौत किन परिस्थितियों में हुई और उसका शव BHEL गेट के पास झाड़ियों में बोरी के अंदर किसने और क्यों फेंका।भोपाल के गोविंदपुरा थाना क्षेत्र में सोमवार दोपहर उस वक्त सनसनी फैल गई जब BHEL गेट नंबर 8 के पास झाड़ियों में बोरी के अंदर एक युवक का शव बरामद हुआ। झाड़ियों में शव मिलने की सूचना फैलते ही आसपास के इलाके में लोगों की भीड़ जमा हो गई। सूचना मिलने के बाद गोविंदपुरा थाना पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। शुरुआती जांच में पुलिस को आशंका है कि शव करीब चार से पांच दिन पुराना हो सकता है। शव की हालत और घटनास्थल की परिस्थितियों को देखते हुए मामला संदिग्ध माना जा रहा है और पुलिस ने हर संभावित पहलू से जांच शुरू कर दी है।

    पुलिस के सामने फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती मृतक की पहचान करना है। युवक के पास से ऐसा कोई स्पष्ट दस्तावेज या पहचान संबंधी जानकारी नहीं मिली है जिससे उसकी तुरंत पहचान हो सके। पुलिस आसपास के थानों में दर्ज गुमशुदगी की शिकायतों की जानकारी जुटा रही है। इसके साथ ही पुलिस दूसरे संभावित माध्यमों से भी मृतक की पहचान करने का प्रयास कर रही है। आसपास के लोगों से पूछताछ की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि पिछले कुछ दिनों में इलाके में किसी संदिग्ध व्यक्ति या गतिविधि को देखा गया था या नहीं।

    शव की जांच के दौरान युवक के शरीर पर गंभीर चोटों के निशान भी मिले हैं। इन्हीं चोटों के कारण पुलिस हत्या की आशंका से इनकार नहीं कर रही है। हालांकि पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अभी मौत की वास्तविक वजह को लेकर अंतिम निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि युवक की मौत किस वजह से हुई और शरीर पर मिले चोटों के निशान किस परिस्थिति में आए। पुलिस हत्या समेत अन्य सभी संभावनाओं को ध्यान में रखकर जांच आगे बढ़ा रही है।

    घटनास्थल से पुलिस ने जरूरी साक्ष्य जुटाए हैं। शव को जिस जगह बोरी में बंद करके फेंका गया था उसके आसपास के इलाके की भी बारीकी से जांच की गई है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि शव को कहीं और से लाकर यहां फेंका गया या वारदात इसी इलाके में हुई। इसके लिए घटनास्थल तक पहुंचने वाले रास्तों और आसपास की गतिविधियों की जानकारी जुटाई जा रही है।

    मामले की जांच में CCTV फुटेज को भी अहम माना जा रहा है। BHEL गेट नंबर 8 और आसपास के प्रमुख रास्तों पर लगे CCTV कैमरों की रिकॉर्डिंग खंगाली जा रही है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि पिछले चार से पांच दिनों के दौरान किसी संदिग्ध वाहन या व्यक्ति की आवाजाही तो नहीं हुई थी। अगर किसी वाहन के जरिए शव यहां लाए जाने की पुष्टि होती है तो CCTV फुटेज से जांच को महत्वपूर्ण सुराग मिल सकता है।

    फिलहाल युवक की पहचान और मौत की वजह दोनों ही पुलिस के लिए रहस्य बनी हुई हैं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और CCTV फुटेज की जांच के साथ पुलिस आसपास के लोगों से पूछताछ कर रही है। पुलिस को उम्मीद है कि जांच के दौरान मिलने वाले साक्ष्यों से मृतक की पहचान के साथ ही यह भी पता चल सकेगा कि युवक की मौत किन परिस्थितियों में हुई और उसका शव BHEL गेट के पास झाड़ियों में बोरी के अंदर किसने और क्यों फेंका।

  • नेपाल PM बालेन शाह ने पहली बार भारतीय राजदूत से की वन-टू-वन मुलाकात, चीन के राजदूत से भी आज करेंगे सीधी बातचीत

    नेपाल PM बालेन शाह ने पहली बार भारतीय राजदूत से की वन-टू-वन मुलाकात, चीन के राजदूत से भी आज करेंगे सीधी बातचीत


    नई दिल्ली । 
    नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने विदेशी राजदूतों से वन-टू-वन मुलाकात नहीं करने की अपनी पुरानी नीति में बड़ा बदलाव किया है। प्रधानमंत्री बनने के बाद पहली बार उन्होंने किसी विदेशी राजदूत से अकेले मुलाकात की। सोमवार को उन्होंने भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव से अलग बैठक की। इस दौरान दोनों के बीच भारत और नेपाल के संबंधों, विकास सहयोग और आपसी हित से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई।

    मुलाकात के दौरान नवीन श्रीवास्तव ने बालेन शाह को प्रधानमंत्री बनने पर बधाई दी। उन्होंने भारत की ओर से नेपाल के साथ बेहतर संबंधों और सहयोग को आगे बढ़ाने की बात कही। बालेन शाह ने भी दोनों देशों के बीच पुराने और भरोसेमंद रिश्तों को मजबूत करने पर जोर दिया।

    नेपाल और भारत के बीच व्यापार, ऊर्जा, सड़क और विकास परियोजनाओं को लेकर लंबे समय से सहयोग रहा है। ऐसे में प्रधानमंत्री पद संभालने के बाद भारतीय राजदूत के साथ बालेन शाह की पहली व्यक्तिगत बैठक को दोनों देशों के बीच सीधे संवाद की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

    बालेन शाह इससे पहले विदेशी अधिकारियों और राजदूतों से अकेले मुलाकात करने से परहेज करते रहे थे। प्रधानमंत्री बनने के शुरुआती दौर में उन्होंने विदेश मंत्री के स्तर से नीचे के विदेशी अधिकारियों के साथ वन-टू-वन बैठक नहीं करने की नीति अपनाई थी। विदेशी राजदूतों के साथ भी वह सामूहिक बैठकों को प्राथमिकता देते थे।

    इसी नीति के तहत भारतीय विदेश सचिव विक्रम मिस्री की मई में नेपाल यात्रा के दौरान भी बालेन शाह ने उनसे अलग मुलाकात नहीं की थी। इसके अलावा अमेरिकी अधिकारियों के साथ प्रस्तावित कुछ व्यक्तिगत बैठकों को भी उन्होंने स्वीकार नहीं किया था। इसके बजाय उन्होंने काठमांडू में तैनात कई देशों के राजदूतों के साथ सामूहिक बैठकें की थीं।

    बालेन शाह की इस नीति के पीछे उनका यह तर्क बताया जाता रहा है कि बड़े और प्रभावशाली देशों के प्रतिनिधि नेपाल की सरकारी व्यवस्था को दरकिनार कर सीधे शीर्ष नेतृत्व तक पहुंच बनाने की कोशिश कर सकते हैं। सामूहिक बैठकों के जरिए वह सभी देशों के साथ समान व्यवहार और नेपाल की संप्रभुता का संदेश देना चाहते थे।

    हालांकि, सरकार गठन के करीब 100 दिन पूरे होने के बाद उनकी कार्यशैली में बदलाव दिखाई देने लगा। सलाहकारों की ओर से घरेलू और विदेशी स्तर पर अलग-अलग लोगों के साथ सीधे संवाद बढ़ाने की सलाह के बाद शाह ने नेताओं, कारोबारियों और उद्योगपतियों के साथ व्यक्तिगत बैठकें शुरू कीं। अब विदेशी राजदूतों के साथ सीधी मुलाकात भी इसी बदली हुई रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है।

    भारतीय राजदूत से मुलाकात के बाद बालेन शाह चीनी राजदूत झांग माओमिंग से भी अलग बैठक करने वाले हैं। भारत और चीन दोनों नेपाल के प्रमुख पड़ोसी और महत्वपूर्ण साझेदार हैं। एक ही दिन दोनों देशों के राजदूतों के साथ व्यक्तिगत संवाद का कार्यक्रम नेपाल की संतुलित विदेश नीति के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    नेपाल में लंबे समय से प्रधानमंत्री और बड़े देशों के राजदूतों के बीच सीधे संवाद की परंपरा रही है। कई बार ऐसी बैठकें प्रधानमंत्री के निजी आवास पर भी होती रही हैं। इन बैठकों में विदेश मंत्रालय के अधिकारियों की मौजूदगी जरूरी नहीं होती थी और कुछ मुलाकातों का औपचारिक रिकॉर्ड भी नहीं रखा जाता था।

    बालेन शाह के प्रधानमंत्री बनने के बाद इस व्यवस्था में बदलाव आया था, लेकिन अब उनकी नीति फिर बदलती नजर आ रही है। भारत और चीन के राजदूतों के साथ सीधे संवाद से यह संकेत मिलता है कि नेपाल सरकार महत्वपूर्ण द्विपक्षीय मामलों पर सामूहिक बैठकों के साथ व्यक्तिगत कूटनीतिक संपर्क को भी जगह दे रही है।

  • मध्य प्रदेश में बारिश का कहर: भोपाल में 7 इंच पानी से हाहाकार, विदिशा में 17 लोगों का रेस्क्यू; कई शहरों में रास्ते बंद

    मध्य प्रदेश में बारिश का कहर: भोपाल में 7 इंच पानी से हाहाकार, विदिशा में 17 लोगों का रेस्क्यू; कई शहरों में रास्ते बंद


    मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश में मानसून का स्ट्रॉन्ग सिस्टम एक्टिव होने के बाद सोमवार को प्रदेश के कई हिस्सों में तेज बारिश ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया। राजधानी भोपाल समेत विदिशा सीहोर शाजापुर रायसेन राजगढ़ और कई अन्य जिलों में लगातार बारिश के कारण निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बन गई है। विदिशा में बाढ़ के पानी में बच्चों समेत 17 लोग फंस गए जिन्हें पुलिस प्रशासन और होमगार्ड की टीम ने रेस्क्यू कर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। वहीं भोपाल में पिछले 24 घंटे के दौरान करीब 7 इंच बारिश दर्ज की गई जिसके बाद शहर के कई इलाकों में सड़कें जलमग्न हो गईं और घरों तक पानी पहुंच गया।

    भोपाल में बारिश का असर रेलवे स्टेशन से लेकर पुलिस थाने तक दिखाई दिया। भोपाल रेलवे स्टेशन के ट्रैक पर पानी भरने से रेल परिचालन प्रभावित होने की स्थिति बनी वहीं ईंटखेड़ी थाना परिसर में भी बारिश का पानी घुस गया। शहर की कई कॉलोनियों में जलभराव के कारण लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ा। सेमरा इलाके में करीब 200 घरों के आसपास 5 से 6 फीट तक पानी भरने की सूचना है जिससे बड़ी संख्या में लोग अपने घरों में ही फंसकर रह गए। अपोलो अस्पताल के आसपास की कॉलोनियों कंफर्ट ग्रीन कॉलोनी और पुलिस हाउसिंग कॉलोनी में भी पानी भरने से लोगों की मुश्किलें बढ़ गईं। पेड़ गिरने के कारण वीआईपी रोड पर यातायात भी प्रभावित हुआ।

    बारिश का असर भोपाल के आसपास के ग्रामीण इलाकों में भी देखने को मिला। भोपाल बैरसिया मार्ग पर ईंटखेड़ी पुल के आसपास पानी बढ़ने और कई नदियों नालों के उफान पर आने से आवागमन प्रभावित हुआ। बैरसिया और आसपास के क्षेत्रों में जलभराव के कारण कई रास्तों पर आवाजाही रोकनी पड़ी। ब्यावरा में रेलवे अंडरपास में पानी भर जाने से करीब 25 गांवों का संपर्क टूट गया है। सीहोर में भी कई रास्तों पर पानी बहने लगा और श्यामपुर समेत कई इलाकों में मकानों के भीतर बारिश का पानी घुस गया। सेवनिया में मंदिर के डूबने की तस्वीरें भी सामने आई हैं।

    विदिशा में ग्राम बामनखेड़ा के लश्करपुर रोड पर बाढ़ का पानी भरने के बाद करीब 17 लोग फंस गए थे। सूचना मिलते ही पुलिस प्रशासन और होमगार्ड की टीम मौके पर पहुंची और रेस्क्यू अभियान शुरू किया। सभी लोगों को सुरक्षित बाहर निकालकर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया। लगातार बारिश के कारण जिले में नदी नालों का जलस्तर बढ़ा हुआ है और प्रशासन की ओर से लोगों को जलभराव वाले इलाकों से दूर रहने की सलाह दी गई है।

    शाजापुर जिले के अकोदिया क्षेत्र में कालीसिंध नदी उफान पर है। नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ने के कारण आसपास के निचले इलाकों में खतरा बढ़ गया है। प्रशासन ने लोगों से नदी के आसपास नहीं जाने और जलभराव वाले क्षेत्रों से दूरी बनाए रखने की अपील की है। नलखेड़ा रोड की पड़ाव कॉलोनी में कई घरों और दुकानों में पानी घुस गया। वहीं उकावल जाने वाले मार्ग के रेलवे अंडरब्रिज में पानी भरने से आवाजाही प्रभावित हुई।

    रतलाम में भी सुबह से हो रही बारिश के कारण नदी नालों और जलस्रोतों का जलस्तर बढ़ गया है। सैलाना के आडवानिया स्थित केदारेश्वर महादेव मंदिर का झरना तेज धार के साथ बहने लगा। सावन के दूसरे सोमवार के कारण मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ भी पहुंची। सीहोर में उफनते नाले के बीच एक गर्भवती महिला को अस्पताल पहुंचाने का मामला भी सामने आया। वहीं कई गांवों में रास्ते पानी में डूब गए हैं।

    पिछले 24 घंटे के आंकड़ों पर नजर डालें तो भोपाल में करीब 7 इंच बारिश हुई। नर्मदापुरम में 5 इंच रायसेन में 4.9 इंच राजगढ़ और शाजापुर में करीब 4.5 इंच तथा सीहोर में लगभग 4 इंच बारिश दर्ज की गई। मंडला में नर्मदा का जलस्तर कुछ कम हुआ है लेकिन छोटा पुल अब भी पानी में डूबा हुआ है। उमरिया के जोहिला डैम के दो गेट खोलकर पानी छोड़ा जा रहा है।

    लगातार बारिश से जहां किसानों को फसलों के लिए राहत मिली है वहीं जलभराव और बाढ़ ने कई इलाकों में लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। प्रशासन की टीमें संवेदनशील क्षेत्रों पर नजर बनाए हुए हैं और जहां भी लोग पानी में फंस रहे हैं वहां रेस्क्यू अभियान चलाया जा रहा है। मौसम विभाग के अलर्ट के बीच लोगों से नदी नालों पुलों और जलभराव वाले रास्तों से दूरी बनाए रखने की अपील की गई है।

  • मध्य प्रदेश में बारिश का कहर: भोपाल में 7 इंच पानी से हाहाकार, विदिशा में 17 लोगों का रेस्क्यू; कई शहरों में रास्ते बंद

    मध्य प्रदेश में बारिश का कहर: भोपाल में 7 इंच पानी से हाहाकार, विदिशा में 17 लोगों का रेस्क्यू; कई शहरों में रास्ते बंद


    मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश में मानसून का स्ट्रॉन्ग सिस्टम एक्टिव होने के बाद सोमवार को प्रदेश के कई हिस्सों में तेज बारिश ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया। राजधानी भोपाल समेत विदिशा सीहोर शाजापुर रायसेन राजगढ़ और कई अन्य जिलों में लगातार बारिश के कारण निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बन गई है। विदिशा में बाढ़ के पानी में बच्चों समेत 17 लोग फंस गए जिन्हें पुलिस प्रशासन और होमगार्ड की टीम ने रेस्क्यू कर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। वहीं भोपाल में पिछले 24 घंटे के दौरान करीब 7 इंच बारिश दर्ज की गई जिसके बाद शहर के कई इलाकों में सड़कें जलमग्न हो गईं और घरों तक पानी पहुंच गया।

    भोपाल में बारिश का असर रेलवे स्टेशन से लेकर पुलिस थाने तक दिखाई दिया। भोपाल रेलवे स्टेशन के ट्रैक पर पानी भरने से रेल परिचालन प्रभावित होने की स्थिति बनी वहीं ईंटखेड़ी थाना परिसर में भी बारिश का पानी घुस गया। शहर की कई कॉलोनियों में जलभराव के कारण लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ा। सेमरा इलाके में करीब 200 घरों के आसपास 5 से 6 फीट तक पानी भरने की सूचना है जिससे बड़ी संख्या में लोग अपने घरों में ही फंसकर रह गए। अपोलो अस्पताल के आसपास की कॉलोनियों कंफर्ट ग्रीन कॉलोनी और पुलिस हाउसिंग कॉलोनी में भी पानी भरने से लोगों की मुश्किलें बढ़ गईं। पेड़ गिरने के कारण वीआईपी रोड पर यातायात भी प्रभावित हुआ।

    बारिश का असर भोपाल के आसपास के ग्रामीण इलाकों में भी देखने को मिला। भोपाल बैरसिया मार्ग पर ईंटखेड़ी पुल के आसपास पानी बढ़ने और कई नदियों नालों के उफान पर आने से आवागमन प्रभावित हुआ। बैरसिया और आसपास के क्षेत्रों में जलभराव के कारण कई रास्तों पर आवाजाही रोकनी पड़ी। ब्यावरा में रेलवे अंडरपास में पानी भर जाने से करीब 25 गांवों का संपर्क टूट गया है। सीहोर में भी कई रास्तों पर पानी बहने लगा और श्यामपुर समेत कई इलाकों में मकानों के भीतर बारिश का पानी घुस गया। सेवनिया में मंदिर के डूबने की तस्वीरें भी सामने आई हैं।

    विदिशा में ग्राम बामनखेड़ा के लश्करपुर रोड पर बाढ़ का पानी भरने के बाद करीब 17 लोग फंस गए थे। सूचना मिलते ही पुलिस प्रशासन और होमगार्ड की टीम मौके पर पहुंची और रेस्क्यू अभियान शुरू किया। सभी लोगों को सुरक्षित बाहर निकालकर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया। लगातार बारिश के कारण जिले में नदी नालों का जलस्तर बढ़ा हुआ है और प्रशासन की ओर से लोगों को जलभराव वाले इलाकों से दूर रहने की सलाह दी गई है।

    शाजापुर जिले के अकोदिया क्षेत्र में कालीसिंध नदी उफान पर है। नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ने के कारण आसपास के निचले इलाकों में खतरा बढ़ गया है। प्रशासन ने लोगों से नदी के आसपास नहीं जाने और जलभराव वाले क्षेत्रों से दूरी बनाए रखने की अपील की है। नलखेड़ा रोड की पड़ाव कॉलोनी में कई घरों और दुकानों में पानी घुस गया। वहीं उकावल जाने वाले मार्ग के रेलवे अंडरब्रिज में पानी भरने से आवाजाही प्रभावित हुई।

    रतलाम में भी सुबह से हो रही बारिश के कारण नदी नालों और जलस्रोतों का जलस्तर बढ़ गया है। सैलाना के आडवानिया स्थित केदारेश्वर महादेव मंदिर का झरना तेज धार के साथ बहने लगा। सावन के दूसरे सोमवार के कारण मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ भी पहुंची। सीहोर में उफनते नाले के बीच एक गर्भवती महिला को अस्पताल पहुंचाने का मामला भी सामने आया। वहीं कई गांवों में रास्ते पानी में डूब गए हैं।

    पिछले 24 घंटे के आंकड़ों पर नजर डालें तो भोपाल में करीब 7 इंच बारिश हुई। नर्मदापुरम में 5 इंच रायसेन में 4.9 इंच राजगढ़ और शाजापुर में करीब 4.5 इंच तथा सीहोर में लगभग 4 इंच बारिश दर्ज की गई। मंडला में नर्मदा का जलस्तर कुछ कम हुआ है लेकिन छोटा पुल अब भी पानी में डूबा हुआ है। उमरिया के जोहिला डैम के दो गेट खोलकर पानी छोड़ा जा रहा है।

    लगातार बारिश से जहां किसानों को फसलों के लिए राहत मिली है वहीं जलभराव और बाढ़ ने कई इलाकों में लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। प्रशासन की टीमें संवेदनशील क्षेत्रों पर नजर बनाए हुए हैं और जहां भी लोग पानी में फंस रहे हैं वहां रेस्क्यू अभियान चलाया जा रहा है। मौसम विभाग के अलर्ट के बीच लोगों से नदी नालों पुलों और जलभराव वाले रास्तों से दूरी बनाए रखने की अपील की गई है।

  • कर्नाटक कैबिनेट विस्तार के बाद बढ़ी कांग्रेस की अंदरूनी नाराजगी, डीके शिवकुमार ने खड़गे और वेणुगोपाल से की मुलाकात

    कर्नाटक कैबिनेट विस्तार के बाद बढ़ी कांग्रेस की अंदरूनी नाराजगी, डीके शिवकुमार ने खड़गे और वेणुगोपाल से की मुलाकात


    नई दिल्ली । कर्नाटक में कांग्रेस सरकार के हालिया कैबिनेट विस्तार के बाद पार्टी के भीतर असंतोष की स्थिति सामने आने लगी है। मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिलने से कुछ कांग्रेस विधायक नाराज बताए जा रहे हैं। इसी बीच मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने सोमवार को कांग्रेस के शीर्ष नेताओं से मुलाकात कर मंत्रियों के विभागों के बंटवारे और संभावित छोटे बदलावों को लेकर चर्चा की।

    डीके शिवकुमार ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच दो घंटे से अधिक समय तक बातचीत होने की जानकारी सामने आई है। इससे पहले शिवकुमार ने कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल से भी चर्चा की। इन बैठकों को कर्नाटक मंत्रिमंडल में हालिया विस्तार के बाद बने राजनीतिक समीकरणों के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    कर्नाटक सरकार में इस महीने की शुरुआत में बड़ा कैबिनेट विस्तार किया गया था। इस विस्तार में 19 नए मंत्रियों को शामिल किया गया। इसके बाद मुख्यमंत्री समेत मंत्रियों की कुल संख्या 33 हो गई। हालांकि, नए मंत्रियों को अभी तक विभागों का आवंटन नहीं किया गया है। विभागों के बंटवारे में हो रही देरी के बीच पार्टी के भीतर असंतोष की खबरें भी सामने आई हैं।

    मंत्रिमंडल में जगह नहीं पाने वाले कुछ विधायक अपनी नाराजगी खुलकर जाहिर कर चुके हैं। ऐसे में पार्टी नेतृत्व के सामने इन नेताओं को साथ बनाए रखने की चुनौती है। वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं और कुछ मंत्रियों ने ऐसे विधायकों से बातचीत भी की है। इसका उद्देश्य नाराजगी को कम करना और संगठन के भीतर समन्वय बनाए रखना बताया जा रहा है।

    विभागों के बंटवारे को लेकर मुख्यमंत्री की शीर्ष नेतृत्व के साथ हुई बातचीत को इसी प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है। चर्चा है कि नाराज विधायकों को संतुष्ट करने के लिए कुछ मंत्रियों के विभागों में बदलाव किया जा सकता है। इसके अलावा एक या दो मौजूदा मंत्रियों को हटाने की संभावना पर भी राजनीतिक हलकों में चर्चा है, हालांकि इस संबंध में अंतिम निर्णय सामने नहीं आया है।

    डीके शिवकुमार ने कैबिनेट में महिला प्रतिनिधित्व को लेकर भी संकेत दिया है। उन्होंने कहा कि मंत्रिमंडल में एक महिला को शामिल किया जाना चाहिए और इस दिशा में काम किया जाएगा। साथ ही उन्होंने जल्दबाजी से बचने की बात कही। इससे माना जा रहा है कि कैबिनेट में संभावित बदलाव केवल विभागों के पुनर्वितरण तक सीमित नहीं रह सकते हैं।

    कर्नाटक विधानसभा का मानसून सत्र 13 अगस्त से शुरू होना है। कांग्रेस नेतृत्व की कोशिश है कि विधानसभा सत्र शुरू होने से पहले मंत्रियों के विभागों का बंटवारा और आवश्यक बदलाव पूरे कर लिए जाएं। इससे सरकार को सदन में एकजुटता के साथ काम करने में मदद मिल सकती है और मंत्रियों को भी अपनी जिम्मेदारियों के साथ काम शुरू करने का अवसर मिलेगा।

    उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर ने भी विभागों के बंटवारे को लेकर कहा है कि इसमें कोई बड़ी परेशानी नहीं है। उनके अनुसार, जल्द ही सभी मंत्रियों को जिम्मेदारियां सौंप दी जाएंगी। इससे संकेत मिलता है कि सरकार विभागों के आवंटन को लेकर अंतिम चरण की प्रक्रिया में है।

    कर्नाटक कांग्रेस के सामने फिलहाल दोहरी चुनौती है। एक तरफ नए मंत्रियों को विभाग देकर सरकार के कामकाज को व्यवस्थित करना है, वहीं दूसरी तरफ मंत्रिमंडल से बाहर रह गए विधायकों की नाराजगी को संभालना है। ऐसे में खड़गे और वेणुगोपाल के साथ डीके शिवकुमार की बैठकों को पार्टी के भीतर समन्वय बनाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।

    हालांकि, संभावित फेरबदल को लेकर अभी अंतिम फैसला सामने नहीं आया है। विभागों के बंटवारे और मंत्रियों में बदलाव से जुड़ी तस्वीर विधानसभा के मानसून सत्र से पहले स्पष्ट होने की उम्मीद है। फिलहाल कांग्रेस नेतृत्व विधायकों की नाराजगी दूर करने और सरकार के भीतर संतुलन बनाए रखने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।