Author: bharati

  • सावन शिवरात्रि के अगले दिन लगेगा साल का आखिरी सूर्य ग्रहण, रात 9:04 बजे शुरू होगा अद्भुत खगोलीय नजारा

    सावन शिवरात्रि के अगले दिन लगेगा साल का आखिरी सूर्य ग्रहण, रात 9:04 बजे शुरू होगा अद्भुत खगोलीय नजारा


    नई दिल्ली । साल 2026 का दूसरा और आखिरी सूर्य ग्रहण 12 अगस्त को लगने जा रहा है। यह पूर्ण सूर्य ग्रहण होगा और खगोलीय दृष्टि से बेहद खास माना जा रहा है। खास बात यह है कि यह सूर्य ग्रहण सावन शिवरात्रि के ठीक अगले दिन पड़ेगा। इसके साथ ही इसी दिन श्रावण मास की हरियाली अमावस्या भी रहेगी। ऐसे में धार्मिक और खगोलीय दोनों नजरिए से 12 अगस्त की तारीख महत्वपूर्ण हो गई है। हालांकि भारत में रहने वाले लोगों को इस ग्रहण का प्रत्यक्ष नजारा देखने को नहीं मिलेगा क्योंकि ग्रहण के समय भारत में रात होगी।

    भारतीय समय के अनुसार सूर्य ग्रहण 12 अगस्त की रात 9 बजकर 4 मिनट पर शुरू होगा और इसका समापन 13 अगस्त की देर रात 1 बजकर 27 मिनट पर होगा। ग्रहण अपने चरम यानी पीक पर रात करीब 11 बजकर 17 मिनट पर पहुंचेगा। चूंकि उस समय भारत के अधिकांश हिस्सों में रात होगी इसलिए यहां से सूर्य ग्रहण दिखाई नहीं देगा। खगोलीय गणना के अनुसार पूर्ण सूर्य ग्रहण का मुख्य नजारा उत्तरी गोलार्ध के कई क्षेत्रों में देखने को मिलेगा। ग्रीनलैंड आइसलैंड स्पेन रूस और अटलांटिक महासागर के कुछ हिस्सों में पूर्ण सूर्य ग्रहण का प्रभाव देखा जा सकेगा। इसके अलावा यूरोप के अधिकांश हिस्सों उत्तरी अमेरिका के कुछ क्षेत्रों और अफ्रीका के उत्तर पश्चिमी भागों में यह आंशिक सूर्य ग्रहण के रूप में नजर आएगा।

    अब सवाल यह है कि जब भारत में सूर्य ग्रहण दिखाई ही नहीं देगा तो क्या यहां सूतक काल भी माना जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सूर्य ग्रहण से करीब 12 घंटे पहले सूतक काल शुरू होता है लेकिन यह नियम सामान्य तौर पर उन्हीं स्थानों पर लागू माना जाता है जहां ग्रहण दिखाई देता है। चूंकि 12 अगस्त का सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा इसलिए भारत में इसका सूतक काल मान्य नहीं होगा। इसका मतलब यह है कि मंदिरों के कपाट बंद करने या धार्मिक और मांगलिक कार्य रोकने जैसी परंपराएं यहां लागू नहीं होंगी और सामान्य पूजा पाठ किया जा सकेगा।

    ज्योतिषीय नजरिए से भी इस सूर्य ग्रहण को महत्वपूर्ण बताया जा रहा है। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार ग्रहण के समय ग्रहों की विशेष स्थिति का प्रभाव अलग अलग राशियों पर पड़ सकता है। ज्योतिषियों के मुताबिक सिंह कुंभ मेष और मकर राशि के जातकों को वाणी निवेश और स्वास्थ्य से जुड़े मामलों में सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है। वहीं मिथुन तुला और धनु राशि के लिए यह समय करियर और आर्थिक मामलों में सकारात्मक बदलाव के संकेत देने वाला माना जा रहा है। हालांकि ज्योतिषीय प्रभाव धार्मिक मान्यताओं और ज्योतिषीय गणनाओं पर आधारित होते हैं और इन्हें वैज्ञानिक भविष्यवाणी नहीं माना जाता।

    ग्रहण के दौरान धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सूर्य मंत्र या महामृत्युंजय मंत्र का मानसिक जाप करना शुभ माना जाता है। हरियाली अमावस्या के संयोग को देखते हुए जरूरतमंद लोगों को अन्न वस्त्र तिल या धन का दान करने की परंपरा भी बताई गई है। इसके अलावा इस अवसर पर पौधारोपण करना भी शुभ माना जाता है। इस तरह 12 अगस्त का सूर्य ग्रहण खगोलीय घटना होने के साथ धार्मिक मान्यताओं और ज्योतिषीय चर्चाओं के कारण भी लोगों के बीच खास आकर्षण का केंद्र बना रहेगा।

  • जमशेदपुर के बाटालुका गांव में नक्सल विरोधी अभियान पर निकली पुलिस टीम को ग्रामीणों ने बनाया बंधक

    जमशेदपुर के बाटालुका गांव में नक्सल विरोधी अभियान पर निकली पुलिस टीम को ग्रामीणों ने बनाया बंधक

    नई दिल्ली । झारखंड के जमशेदपुर अंतर्गत पटमदा थाना क्षेत्र स्थित बाटालुका गांव में नक्सल विरोधी अभियान के दौरान पुलिस और सुरक्षा बलों को स्थानीय ग्रामीणों के कड़े विरोध का सामना करना पड़ा। शनिवार तड़के सर्च ऑपरेशन पर निकली पुलिस और कोबरा बटालियन की संयुक्त टीम को आक्रोशित ग्रामीणों ने लगभग पांच घंटे तक बंधक बनाए रखा। ग्रामीणों द्वारा एक परिवार के सदस्यों को हिरासत में लिए जाने का विरोध किया जा रहा था, जिसके बाद स्थानीय जनप्रतिनिधियों के हस्तक्षेप से मामला शांत हो सका।

    प्राप्त जानकारी के अनुसार, पटमदा थाना प्रभारी के नेतृत्व में पुलिस और कोबरा बटालियन के जवानों की टीम दलमा रेंज के तराई इलाकों में बड़े नक्सली कमांडरों की तलाश में उतरी थी। सुरक्षा बल एक करोड़ के इनामी भाकपा माओवादी आकाश और 15 लाख के इनामी रामप्रसाद मार्डी उर्फ सचिन समेत अन्य संदिग्धों की तलाश में विभिन्न गांवों में सर्च ऑपरेशन चला रहे थे। इस दौरान पुलिस टीम जब बाटालुका गांव पहुंची तो एक स्थानीय निवासी और उसकी दो पत्नियों को पूछताछ के लिए साथ ले जाने लगी।

    संदेह के आधार पर की जा रही इस कार्रवाई के दौरान घर में मौजूद बालिका के रोने पर आसपास के ग्रामीण एकत्र हो गए। देखते ही देखते लाठी-डंडों से लैस सैकड़ों ग्रामीणों ने पुलिस टीम को चारों तरफ से घेर लिया। ग्रामीणों की मांग थी कि हिरासत में लिए गए लोगों को तुरंत रिहा किया जाए और पूर्व से पुलिस हिरासत में रखे गए एक अन्य ग्रामीण को भी मुक्त किया जाए। बारिश के बीच सुबह पांच बजे से दस बजे तक सुरक्षा बल गांव में फंसे रहे और वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशों का इंतजार करते रहे।

    घटना की सूचना मिलने के बाद स्थानीय स्तर पर प्रशासनिक और राजनीतिक प्रयास शुरू हुए। स्थानीय जिला पार्षद के हस्तक्षेप और मध्यस्थता के बाद पूर्व में हिरासत में लिए गए व्यक्ति को मौके पर लाया गया। इसके पश्चात ग्रामीणों और पुलिस के बीच बातचीत के जरिए सहमति बनी और हिरासत में लिए गए लोगों को छोड़ने के बाद ग्रामीणों ने सुरक्षा बलों को वहां से जाने दिया। लगभग पांच घंटे के भारी तनाव के बाद क्षेत्र में स्थिति सामान्य हो सकी।

    उल्लेखनीय है कि बाटालुका और आसपास के तराई क्षेत्र लंबे समय से नक्सल विरोधी अभियानों के केंद्र में रहे हैं। भौगोलिक दृष्टि से यह इलाका जंगलों और पहाड़ियों से घिरा हुआ है, जिसका फायदा उठाकर असामाजिक तत्व आवाजाही करते रहे हैं। सुरक्षा एजेंसियां इस क्षेत्र में लगातार निगरानी बनाए रखती हैं ताकि नक्सली गतिविधियों पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके।

    झारखंड की इस घटना के बाद सीमावर्ती राज्यों में भी सतर्कता बढ़ा दी गई है। मध्य प्रदेश सहित अन्य राज्यों के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में तैनात पुलिस और सुरक्षा बल इस प्रकार के अभियानों के दौरान स्थानीय नागरिकों के साथ संवाद और प्रोटोकॉल को लेकर अतिरिक्त सावधानी बरत रहे हैं। पुलिस प्रशासन अब पूरे घटनाक्रम की समीक्षा कर रहा है ताकि भविष्य में इस तरह के गतिरोध से बचा जा सके।

  • कौन बनेगा करोड़पति 18 में लागू हुए नए नियम, सोचना पड़ेगा थीम के साथ शुरू हुआ नया सीजन

    कौन बनेगा करोड़पति 18 में लागू हुए नए नियम, सोचना पड़ेगा थीम के साथ शुरू हुआ नया सीजन

    नई दिल्ली ।भारतीय टेलिविजन के सबसे लोकप्रिय क्विज शो ‘कौन बनेगा करोड़पति’ का 18वां सीजन कई नए और अनोखे बदलावों के साथ शुरू होने जा रहा है। तकनीक और सूचना के इस आधुनिक दौर को ध्यान में रखते हुए इस बार शो के गेमप्ले और प्रारूप में काफी फेरबदल किए गए हैं। अमर उजाला को दिए एक विशेष साक्षात्कार में शो के निर्देशक अरुण शेषकुमार ने बताया कि अब केवल सामान्य ज्ञान और सही उत्तर देना ही काफी नहीं होगा, बल्कि प्रतिभागियों को हर कदम पर ठोस रणनीति बनानी होगी।

    इस नए सीजन की मुख्य थीम ‘सोचना पड़ेगा’ रखी गई है, जो यह संदेश देती है कि जानकारी के इस दौर में ज्ञान के सही इस्तेमाल और सोच का महत्व सबसे अधिक है। निर्देशक के अनुसार, इस बार फास्टेस्ट फिंगर फर्स्ट राउंड में भी ट्विस्ट लाया गया है ताकि हॉट सीट तक पहुंचने का रास्ता पहले से थोड़ा सहज हो सके। हालांकि, मुख्य खेल में प्रवेश करने के बाद प्रतियोगियों को मिलने वाली लाइफलाइन्स पाने के लिए भी प्रतिस्पर्धा करनी होगी और उन्हें हासिल करना पड़ेगा।

    नियमों में बदलाव के बावजूद शो के मूल स्वरूप से कोई समझौता नहीं किया गया है। प्रतिभागियों के सामने पहले की तरह ही 16 सवाल रखे जाएंगे और अंतिम प्रश्न की धनराशि 7 करोड़ रुपये ही बनी रहेगी। शो में पहुंचने वाले प्रतियोगियों का चयन कई कठिन चरणों, लिखित परीक्षाओं और सामान्य ज्ञान के परीक्षण के बाद किया जाता है, जिससे केवल योग्य और प्रतिभाशाली लोग ही मुख्य मंच तक पहुंच पाते हैं।

    मध्य प्रदेश के विभिन्न जिलों और कस्बों से भी हर साल कई मेधावी प्रतियोगी अपनी प्रतिभा और ज्ञान के बल पर इस मंच तक पहुंचते रहे हैं। राज्य के युवाओं और छात्र-छात्राओं के बीच इस कार्यक्रम का खासा प्रभाव देखने को मिलता है, जहां लोग इसे न केवल मनोरंजन बल्कि प्रेरणा और ज्ञानवर्धन के एक प्रमुख माध्यम के रूप में देखते हैं।

    शो के निर्देशक ने अमिताभ बच्चन के समर्पण और कार्यशैली की सराहना करते हुए उन्हें इस कार्यक्रम की वास्तविक आत्मा करार दिया। उन्होंने बताया कि शो की शुरुआत और अंत के अलावा अधिकांश बातचीत पूरी तरह से स्वाभाविक होती है। अमिताभ बच्चन प्रत्येक प्रतियोगी की पृष्ठभूमि को समझते हैं और उनके साथ संवेदनशीलता से संवाद स्थापित करते हैं, जिससे प्रतिभागियों को सहज महसूस होता है।

    डिजिटल युग और सोशल मीडिया के दौर में भी ‘कौन बनेगा करोड़पति’ अपनी प्रासंगिकता और विश्वसनीयता बनाए रखने में सफल रहा है। हर नए सीजन के साथ इसमें किए जाने वाले बदलाव नई पीढ़ी को जोड़ने के साथ-साथ पुराने दर्शकों के अनुभव को भी नयापन प्रदान करते हैं।

  • हजार कमल लेकर पहुंचे थे विष्णु जी, शिव ने छिपा दिया एक फूल तो चढ़ा दिया अपना कमलनयन, फिर मिला दिव्य वरदान

    हजार कमल लेकर पहुंचे थे विष्णु जी, शिव ने छिपा दिया एक फूल तो चढ़ा दिया अपना कमलनयन, फिर मिला दिव्य वरदान



    नई दिल्ली । सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित माना जाता है और इस दौरान महादेव की आराधना का विशेष महत्व बताया गया है। सावन के सोमवार पर श्रद्धालु शिवलिंग का जलाभिषेक करते हैं और भगवान शिव से सुख शांति समृद्धि तथा मनोकामना पूर्ति की प्रार्थना करते हैं। शिव पुराण में भगवान शिव से जुड़ी ऐसी अनेक कथाओं का वर्णन मिलता है जिनमें उनकी करुणा के साथ साथ भक्तों की परीक्षा लेने वाली लीलाओं का भी उल्लेख है। ऐसी ही एक कथा भगवान विष्णु से जुड़ी है जिसमें भगवान शिव ने उनकी भक्ति की कठिन परीक्षा ली और अंत में प्रसन्न होकर उन्हें दिव्य सुदर्शन चक्र प्रदान किया।

    पौराणिक कथा के अनुसार एक समय दानवों और दैत्यों का अत्याचार बहुत बढ़ गया था। उनके बढ़ते प्रभाव से देवता चिंतित हो गए और उन्होंने भगवान विष्णु से सहायता की प्रार्थना की। सृष्टि की रक्षा के लिए भगवान विष्णु ने भगवान शिव को प्रसन्न करने का संकल्प लिया। इसके बाद उन्होंने कैलाश पर्वत पर पहुंचकर महादेव की विधि विधान से आराधना शुरू की। भगवान विष्णु ने शिव की स्तुति करते हुए उनके एक हजार नामों का स्मरण किया और प्रत्येक नाम के साथ भगवान शिव को एक कमल पुष्प अर्पित करने का संकल्प लिया।

    कथा के अनुसार भगवान विष्णु की भक्ति और उनके संकल्प की परीक्षा लेने के लिए भगवान शिव ने एक लीला रची। उन्होंने भगवान विष्णु द्वारा पूजा के लिए लाए गए एक हजार कमल पुष्पों में से एक कमल को छिपा दिया। भगवान विष्णु को इसकी जानकारी नहीं थी। जब पूजा के दौरान उन्होंने कमल गिनने शुरू किए तो एक पुष्प कम मिला। उन्होंने काफी खोज की लेकिन वह कमल कहीं नहीं मिला।

    भगवान विष्णु को कमलनयन भी कहा जाता है। जब उन्हें लगा कि उनकी पूजा एक कमल के अभाव में अधूरी रह जाएगी तो उन्होंने अपनी भक्ति को पूरा करने के लिए अद्भुत त्याग का निर्णय लिया। उन्होंने अपने एक नेत्र को कमल के समान मानकर उसे भगवान शिव को अर्पित करने का संकल्प किया। जैसे ही भगवान विष्णु अपना नेत्र अर्पित करने के लिए आगे बढ़े उसी समय भगवान शिव उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर प्रकट हो गए।

    भगवान शिव ने भगवान विष्णु को रोक दिया और उनकी आंख को पहले जैसा कर दिया। महादेव ने विष्णु जी की अटूट भक्ति और समर्पण से प्रसन्न होकर उन्हें वरदान मांगने के लिए कहा। तब भगवान विष्णु ने किसी व्यक्तिगत सुख की मांग नहीं की बल्कि दानवों और दैत्यों के अत्याचार से सृष्टि की रक्षा करने के लिए एक ऐसे दिव्य और अजेय अस्त्र की इच्छा जताई जिससे अधर्म का नाश किया जा सके।

    भगवान शिव ने उनकी इच्छा पूरी करते हुए उन्हें दिव्य सुदर्शन चक्र प्रदान किया। यही सुदर्शन चक्र आगे चलकर भगवान विष्णु के प्रमुख अस्त्रों में शामिल हुआ। पौराणिक मान्यता के अनुसार भगवान विष्णु ने इसी दिव्य अस्त्र की शक्ति से दैत्यों का संहार किया और सृष्टि की रक्षा की। इस तरह भगवान शिव और भगवान विष्णु के बीच भक्ति तथा आशीर्वाद का यह प्रसंग हिंदू धार्मिक परंपरा में विशेष महत्व रखता है।

    सावन में इस कथा का स्मरण भक्तों को भक्ति के साथ समर्पण और निस्वार्थ भाव का संदेश भी देता है। धार्मिक मान्यता है कि भगवान शिव अपने भक्तों की सच्ची श्रद्धा से प्रसन्न होते हैं। सावन के दौरान श्रद्धालु जलाभिषेक रुद्राभिषेक बेलपत्र अर्पित करने और शिव मंत्रों का जाप करने जैसी धार्मिक परंपराओं का पालन करते हैं। मान्यता के अनुसार सच्चे मन से की गई शिव आराधना से मन को शांति मिलती है और भक्त के भीतर सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। हालांकि इन धार्मिक मान्यताओं को आस्था और पौराणिक परंपरा के संदर्भ में ही देखा जाता है।

    भगवान शिव और भगवान विष्णु की यह कथा इस बात का प्रतीक मानी जाती है कि सच्ची भक्ति में केवल पूजा की विधि नहीं बल्कि श्रद्धा त्याग और समर्पण का भाव भी महत्वपूर्ण होता है। सावन के पावन महीने में इस कथा का स्मरण भक्तों को अपनी आस्था को और मजबूत करने तथा जीवन में सत्य धर्म और सेवा के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।

  • ट्रेकिंग पर गए इंदौर निवासी अद्वैत की तलाश में जुटी बेंगलुरु पुलिस, परिजनों ने जताई अनहोनी की आशंका

    ट्रेकिंग पर गए इंदौर निवासी अद्वैत की तलाश में जुटी बेंगलुरु पुलिस, परिजनों ने जताई अनहोनी की आशंका

    नई दिल्ली । कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु के बाहरी इलाके में स्थित शिवगंगे पहाड़ियों से मध्य प्रदेश के इंदौर निवासी एक युवक के अचानक लापता होने का मामला सामने आया है। लापता युवक की पहचान 31 वर्षीय अद्वैत उपाध्याय के रूप में हुई है, जो बेंगलुरु के बेगुर क्षेत्र में रहकर एक निजी फाइनेंस कंपनी में कार्यरत है। घटना की सूचना मिलने के बाद स्थानीय पुलिस और जिला प्रशासन की टीमों ने घने पहाड़ी इलाकों में बड़े पैमाने पर तलाशी और बचाव अभियान प्रारंभ कर दिया है।

    प्राप्त जानकारी के अनुसार, अद्वैत उपाध्याय ने शुक्रवार को सुबह ट्रेकिंग पर जाने से पूर्व अपनी मंगेतर को अपनी इस यात्रा की जानकारी दी थी। इसके बाद उसने आवागमन के लिए एक दुपहिया वाहन किराए पर लिया और शिवगंगे पहाड़ी की तलहटी में पहुंचा। सुबह लगभग साढ़े छह बजे उसने अपना वाहन पार्क किया और पहाड़ी की ओर चढ़ना शुरू किया। तलहटी के समीप स्थापित सीसीटीवी कैमरों में उसे अकेले पहाड़ी की ओर जाते हुए देखा गया है।

    पहाड़ी पर चढ़ने के कुछ समय बाद से ही अद्वैत का कोई संपर्क नहीं हो सका है और उसका मोबाइल फोन भी लगातार बंद आ रहा है। लंबे समय तक सुराग न मिलने पर परिजनों ने किसी अनहोनी या राहजनी की आशंका व्यक्त की है। परिजनों को संदेह है कि सुनसान इलाका होने के कारण किसी आपराधिक तत्व ने उसे निशाना बनाया हो सकता है।

    घटना के संबंध में कडुगोडी पुलिस थाने में औपचारिक गुमशुदगी का मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, शिवगंगे की कठिन और दुर्गम पहाड़ियों में पुलिसकर्मियों की विशेष टीमों के साथ डॉग स्क्वायड को भी तैनात किया गया है। पुलिस मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए दुर्घटना, राहजनी और अपहरण समेत सभी संभावित पहलुओं को ध्यान में रखकर गहन छानबीन कर रही है।

    मध्य प्रदेश के इंदौर शहर से जुड़े इस मामले के सामने आने के बाद स्थानीय प्रशासन और पुलिस भी कर्नाटक पुलिस के संपर्क में हैं। मध्य प्रदेश में अद्वैत के परिवारजन और रिश्तेदार उसकी सकुशल वापसी की प्रार्थना कर रहे हैं। राज्य के गृह विभाग द्वारा भी इस संबंध में आवश्यक समन्वय स्थापित किया जा रहा है ताकि तलाशी अभियान में तेजी लाई जा सके।

    बेंगलुरु पुलिस ने आसपास के ग्रामीणों और पर्यटकों से भी पूछताछ शुरू कर दी है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मोबाइल नेटवर्क लोकेशन और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर सुराग जुटाने के प्रयास निरंतर जारी हैं। प्रशासन ने जल्द ही स्थिति स्पष्ट होने और युवक को सुरक्षित ढूंढ निकालने का आश्वासन दिया है।

  • मध्य प्रदेश के गुना में भतीजे की करतूत की सजा मिलने और अपमानजनक होने से पीड़ित की मौत

    मध्य प्रदेश के गुना में भतीजे की करतूत की सजा मिलने और अपमानजनक होने से पीड़ित की मौत

    मध्य प्रदेश।  के गुना जिले से इंसानियत और सामाजिक ताने-बाने को तार-तार कर देने वाली एक दुखद घटना सामने आई है। जिले के राघौगढ़ क्षेत्र में एक युवक द्वारा शादीशुदा महिला को भगा ले जाने के बाद पीड़ित परिवार और गांव के लोगों ने आरोपी युवक के चाचा को बंधक बनाकर अमानवीय यातनाएं दीं। करीब सवा महीने पुराने इस घटनाक्रम का वीडियो हाल ही में सोशल मीडिया पर प्रसारित होने के बाद पीड़ित व्यक्ति गहरे मानसिक सदमे में चला गया, जिससे उसकी दुखद मृत्यु हो गई।

    घटना के संदर्भ में प्राप्त जानकारी के अनुसार, अमरपुरा गांव निवासी 45 वर्षीय अजोड़ सिंह बंजारा के भतीजे पर आरोप था कि वह पड़ोसी गांव की एक विवाहित महिला को अपने साथ ले गया था। इस बात से आक्रोशित होकर महिला के ससुराल पक्ष के लोगों ने अजोड़ सिंह को धोखे से पकड़ लिया और उन्हें बंधक बना लिया। आरोपियों ने पीड़ित के हाथ-पैर बांधकर उनके साथ जमकर मारपीट की और सार्वजनिक रूप से अपमानित करने के लिए उनके गले में जूते-चप्पलों की माला डालकर गांव में घुमाया।

    उस समय घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस ने मौके पर पहुंचकर पीड़ित व्यक्ति को आरोपियों के चंगुल से मुक्त कराया था। पीड़ित परिजनों का कहना है कि इस गंभीर और अपमानजनक घटना के संबंध में पुलिस प्रशासन और जनसुनवाई के माध्यम से उच्च अधिकारियों को लिखित शिकायतें दी गई थीं। परिजनों का आरोप है कि यदि समय रहते प्रशासनिक स्तर पर दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की गई होती, तो यह अनहोनी टाली जा सकती थी।

    घटनाक्रम में नया मोड़ तब आया जब शुक्रवार को पीड़ित किसी कार्यवश समीपस्थ कस्बे में गए थे। वहां एक परिचित व्यक्ति ने उनके मोबाइल पर उसी पुरानी घटना का वायरल वीडियो दिखा दिया। वीडियो में खुद को बंधा हुआ और गले में जूतों की माला पहने देखकर पीड़ित बेहद आहत हुए। घर लौटने के बाद उन्होंने परिजनों से अपनी पीड़ा व्यक्त की कि लोग अब इस वीडियो के जरिए उनका उपहास उड़ा रहे हैं। इसके तुरंत बाद उनकी तबीयत बिगड़ने लगी और अस्पताल ले जाते समय रास्ते में उन्होंने दम तोड़ दिया।

    मृतक अपने पीछे पत्नी, पांच बेटियों और एक मासूम बेटे का रोता-बिलखता परिवार छोड़ गए हैं। इस घटना के बाद से पूरे अमरपुरा और आसपास के ग्रामीण इलाकों में मातम का माहौल है। घटना की भयावहता को देखते हुए स्थानीय पुलिस चौकी और वरिष्ठ अधिकारियों ने मामले का संज्ञान लिया है। पुलिस प्रशासन अब वायरल वीडियो, पूर्व में हुई मारपीट और पीड़ित की मृत्यु के कारणों की व्यापक स्तर पर जांच कर रहा है।

    कानूनी विशेषज्ञों और सामाजिक विचारकों का मानना है कि किसी अन्य व्यक्ति के अपराध की सजा किसी रिश्तेदार को देना और फिर सोशल मीडिया पर अपमानजनक सामग्री प्रसारित करना एक गंभीर अपराध है। गुना जिले की इस घटना ने एक बार फिर साबित किया है कि साइबर अपराध और सामाजिक लिंचिंग के बढ़ते मामले किस प्रकार बेकसूर लोगों की जान ले रहे हैं।

  • कहीं पाताल में समा जाता है जल तो कहीं बिजली गिरते ही टूट जाता है शिवलिंग, जानें महादेव के 5 रहस्यमयी धाम

    कहीं पाताल में समा जाता है जल तो कहीं बिजली गिरते ही टूट जाता है शिवलिंग, जानें महादेव के 5 रहस्यमयी धाम


    नई दिल्ली । सावन का दूसरा सोमवार भगवान शिव की आराधना के लिए बेहद खास माना जाता है। इस पावन अवसर पर देशभर के शिव मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ रही है। श्रद्धालु भोलेनाथ का जलाभिषेक कर सुख शांति और समृद्धि की कामना कर रहे हैं। भारत में भगवान शिव को समर्पित हजारों मंदिर हैं लेकिन इनमें कुछ ऐसे धाम भी हैं जो अपनी अनोखी प्राकृतिक परिस्थितियों और उनसे जुड़ी धार्मिक मान्यताओं के कारण विशेष आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। इन मंदिरों के बारे में ऐसी कई कथाएं प्रचलित हैं जिन्हें सुनकर श्रद्धालु भी आश्चर्यचकित रह जाते हैं। आइए जानते हैं भगवान शिव के ऐसे ही पांच अनोखे धामों के बारे में।

    गुजरात के कैंबे तट पर अरब सागर के बीच स्थित स्तम्भेश्वर महादेव मंदिर सबसे अनोखे शिव मंदिरों में गिना जाता है। इस मंदिर की खासियत यह है कि ज्वार आने पर समुद्र का पानी शिवलिंग को पूरी तरह ढक लेता है और मंदिर कुछ समय के लिए दिखाई देना बंद हो जाता है। ज्वार उतरने के बाद मंदिर फिर नजर आने लगता है। इसी वजह से श्रद्धालु यहां समुद्र के ज्वार भाटे के समय को ध्यान में रखकर दर्शन के लिए पहुंचते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार तारकासुर के वध के बाद भगवान कार्तिकेय ने यहां शिवलिंग की स्थापना की थी।

    गुजरात के भावनगर जिले में स्थित निष्कलंक महादेव मंदिर भी समुद्र के बीच अपनी अनोखी पहचान रखता है। कोलियाक तट से करीब तीन किलोमीटर अंदर स्थित यह मंदिर ज्वार आने पर पानी में डूब जाता है और केवल मंदिर का ध्वज दिखाई देता है। समुद्र का पानी उतरने के बाद श्रद्धालु पैदल चलकर यहां पहुंचते हैं। मान्यता है कि महाभारत युद्ध के बाद पांडवों ने यहां भगवान शिव की आराधना की थी। इसी धार्मिक विश्वास के कारण यह स्थान भक्तों के बीच विशेष महत्व रखता है।

    राजस्थान के धौलपुर में चंबल के बीहड़ों के बीच स्थित अचलेश्वर महादेव मंदिर भी अपने रहस्यमय स्वरूप के लिए प्रसिद्ध है। यहां शिवलिंग के रंग बदलने को लेकर मान्यता प्रचलित है। कहा जाता है कि सुबह इसका रंग लाल दिखाई देता है जबकि दोपहर में केसरिया और शाम के समय काला नजर आता है। इसके अलावा शिवलिंग की गहराई को लेकर भी कई तरह की मान्यताएं हैं। श्रद्धालुओं के लिए यह मंदिर आस्था और रहस्य का अनोखा संगम है।

    छत्तीसगढ़ में स्थित लक्ष्मेश्वर महादेव मंदिर भी अपनी विशेष मान्यताओं के कारण प्रसिद्ध है। यहां मौजूद शिवलिंग को लक्ष्यलिंग कहा जाता है और इसमें हजारों छोटे छिद्र होने की बात कही जाती है। मान्यता है कि इनमें से एक छिद्र पाताल तक जाता है और उसमें चढ़ाया गया जल दिखाई नहीं देता। वहीं एक अन्य स्थान पर पानी हमेशा भरा रहने की मान्यता है जिसे अक्षय कुंड कहा जाता है। धार्मिक कथाओं के अनुसार इस स्थान का संबंध भगवान राम और लक्ष्मण से भी जोड़ा जाता है।

    हिमाचल प्रदेश के कुल्लू में ऊंचे पहाड़ पर स्थित बिजली महादेव मंदिर भी श्रद्धालुओं के बीच विशेष आस्था का केंद्र है। मान्यता है कि करीब 12 वर्ष के अंतराल पर यहां शिवलिंग पर आकाशीय बिजली गिरती है जिससे शिवलिंग खंडित हो जाता है। इसके बाद मंदिर के पुजारी मक्खन की सहायता से शिवलिंग के टुकड़ों को जोड़ते हैं और कुछ समय बाद वह दोबारा अपने पुराने स्वरूप में आ जाता है। इसी मान्यता ने इस मंदिर को देशभर में अलग पहचान दी है।
    हिमाचल प्रदेश के कुल्लू में ऊंचे पहाड़ पर स्थित बिजली महादेव मंदिर भी श्रद्धालुओं के बीच विशेष आस्था का केंद्र है। मान्यता है कि करीब 12 वर्ष के अंतराल पर यहां शिवलिंग पर आकाशीय बिजली गिरती है जिससे शिवलिंग खंडित हो जाता है। इसके बाद मंदिर के पुजारी मक्खन की सहायता से शिवलिंग के टुकड़ों को जोड़ते हैं और कुछ समय बाद वह दोबारा अपने पुराने स्वरूप में आ जाता है। इसी मान्यता ने इस मंदिर को देशभर में अलग पहचान दी है।

    भगवान शिव के इन पांचों धामों की खासियत सिर्फ इनके धार्मिक महत्व तक सीमित नहीं है। समुद्र के ज्वार से मंदिर का डूबना हो या प्राकृतिक घटनाओं से जुड़ी मान्यताएं इन स्थानों का वातावरण श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक अनुभव देता है। हालांकि इनसे जुड़े चमत्कारों और मान्यताओं को धार्मिक विश्वास के रूप में देखा जाना चाहिए। सावन के पवित्र महीने में इन धामों की चर्चा और भी बढ़ जाती है और देशभर से श्रद्धालु महादेव के दर्शन के लिए यहां पहुंचते हैं।

  • सुपरस्टार सलमान खान से गोविंदा ने क्यों कहा था कि तुम हीरो जैसे नहीं दिखते, इंटरव्यू में सामने आया सच

    सुपरस्टार सलमान खान से गोविंदा ने क्यों कहा था कि तुम हीरो जैसे नहीं दिखते, इंटरव्यू में सामने आया सच

    नई दिल्ली । बॉलीवुड के दो दिग्गज अभिनेताओं गोविंदा और सलमान खान की जोड़ी ने वर्ष 2007 में प्रदर्शित फिल्म ‘पार्टनर’ के जरिए बॉक्स ऑफिस पर बड़ी सफलता हासिल की थी। निर्देशक डेविड धवन के निर्देशन में बनी इस ब्लॉकबस्टर कॉमेडी फिल्म की शूटिंग के दौरान के अनुभवों को याद करते हुए गोविंदा ने एक बड़ा खुलासा किया है। एक हालिया साक्षात्कार में गोविंदा ने साझा किया कि उन्होंने उस समय सलमान खान को उनके व्यक्तिगत जीवन, शारीरिक फिटनेस और करियर के दृष्टिकोण से संबंधित कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए थे।

    गोविंदा ने बताया कि ‘पार्टनर’ की शूटिंग के समय सलमान खान एक कठिन दौर से गुजर रहे थे और काफी अंतर्मुखी हो गए थे। उस समय दोनों ने साथ बैठकर बातचीत की, जिसमें गोविंदा ने उन्हें जीवन की प्राथमिकताओं को समझने और अपने भीतर झांकने का परामर्श दिया। गोविंदा के अनुसार, उस दौर में सलमान खान का आभामंडल काफी उदास और नकारात्मकता से घिरा हुआ महसूस होता था, जिससे उबरने की उन्हें सख्त जरूरत थी।

    बातचीत के दौरान गोविंदा ने सलमान खान को स्पष्ट रूप से कहा था कि उन्हें अपनी फिटनेस पर ध्यान देकर वजन कम करना चाहिए, ताकि वे पर्दे पर दोबारा मुख्य अभिनेता यानी हीरो के रूप में प्रभावी दिख सकें। गोविंदा ने मजाकिया लेकिन व्यावहारिक अंदाज में कहा कि यदि समय रहते वजन नहीं घटाया गया तो उद्योग उन्हें चरित्र अभिनेता के रूप में देखने लगेगा। उन्होंने सलमान खान को सलाह दी कि वे उस दौर की नकारात्मक वाइब्स को पीछे छोड़कर अपने वास्तविक आकर्षण को पुनः प्राप्त करें।

    इंटरव्यू में गोविंदा ने सलमान खान के व्यक्तित्व और सिनेमाई प्रभाव की खुलकर सराहना भी की। उन्होंने कहा कि दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र के बाद सलमान खान ही हिंदी फिल्म उद्योग के ऐसे एकमात्र स्टार हैं, जिन्हें एक शानदार चेहरा, बेहतरीन व्यक्तित्व और स्वाभाविक आकर्षण प्राप्त है। उन्होंने कहा कि उनमें आज भी वह प्रभाव छोड़ने की क्षमता है जिससे दर्शक उन्हें देखते ही सच्चा हीरो मानने लगें।

    फिल्म ‘पार्टनर’ के बाद से ही प्रशंसक इस हिट जोड़ी को दोबारा बड़े पर्दे पर साथ देखने का इंतजार कर रहे हैं। मध्य प्रदेश के भोपाल और इंदौर जैसे शहरों में भी इन दोनों कलाकारों की बड़ी प्रशंसक संख्या मौजूद है, जहां आज भी इस फिल्म की कॉमेडी को बेहद पसंद किया जाता है। राज्य के सिनेमाप्रेमियों के बीच दोनों अभिनेताओं के पुनर्मिलन और ‘पार्टनर 2’ के निर्माण को लेकर समय-समय पर उत्सुकता बनी रहती है।

    कलाकारों द्वारा एक-दूसरे को दिए जाने वाले इस प्रकार के पारस्परिक मार्गदर्शन और सहयोग को हिंदी सिनेमा के इतिहास में एक सकारात्मक उदाहरण माना जाता है। गोविंदा के इस वक्तव्य से यह स्पष्ट होता है कि फिल्मों में प्रतिस्पर्धा के बावजूद अभिनेताओं के बीच व्यक्तिगत और सहयोगात्मक संबंध बने रहते हैं, जो संकट के समय में एक-दूसरे के लिए मार्गदर्शक सिद्ध होते हैं।

  • ओटीटी पर इस हफ्ते आ रही हैं 11 नई फिल्में और वेब सीरीज, देखें पूरी लिस्ट और रिलीज डेट

    ओटीटी पर इस हफ्ते आ रही हैं 11 नई फिल्में और वेब सीरीज, देखें पूरी लिस्ट और रिलीज डेट


    नई दिल्ली ।
    डिजिटल स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स पर मनोरंजन का नया दौर शुरू होने जा रहा है। 10 अगस्त से 16 अगस्त के मध्य ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर एक्शन, थ्रिलर, रियलिटी शो और क्षेत्रीय सिनेमा से जुड़ी 11 नई फिल्में और वेब सीरीज प्रदर्शित की जाएंगी। इनमें हॉलीवुड के चर्चित शो के नए सीजन, बॉलीवुड की हालिया बॉक्स ऑफिस फिल्में और लोकप्रिय कोरियन ड्रामा शामिल हैं। बिंज-वॉच और डिजिटल मनोरंजन पसंद करने वाले दर्शकों के लिए यह हफ्ता बेहद खास रहने वाला है।

    साप्ताह की शुरुआत में खेल और अंतरराष्ट्रीय कंटेंट को प्राथमिकता दी गई है। 11 अगस्त को फुटबॉल के मशहूर मैनेजर होसे मोरिन्हो की जिंदगी पर आधारित स्पोर्ट्स डॉक्यूमेंट्री सीरीज मोरिन्हो नेटफ्लिक्स पर आ रही है। इसके अलावा अमेजन प्राइम वीडियो पर कोरियन ड्रामा द लीजेंड ऑफ किचन सोल्जर और ऑफिस लाइफ पर केंद्रित फिफ्टीज प्रोफेशनल्स को हिंदी, तमिल और तेलुगू भाषाओं में स्ट्रीम किया जाएगा।

    एक्शन और रियलिटी आधारित सामग्री की बात करें तो 12 अगस्त को अमेजन प्राइम वीडियो पर लोकप्रिय थ्रिलर शो रीचर का चौथा सीजन प्रदर्शित होगा। 13 अगस्त को करण जौहर का चर्चित रियलिटी गेम शो द ट्रेटर्स इंडिया का दूसरा सीजन अमेजन प्राइम वीडियो पर आ रहा है, जिसमें 21 सेलिब्रिटीज हिस्सा ले रहे हैं। उसी दिन गॉय रिची के निर्देशन में बनी एक्शन फिल्म इन द ग्रे, मलयालम ड्रामा कैटलन और इमोशनल मेक्सिकन फिल्म अ चाइल्ड ऑफ माय ओन भी रिलीज होगी।

    स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर 14 अगस्त को बॉलीवुड की बड़ी फिल्में ओटीटी पर दस्तक देने जा रही हैं। सिनेमाघरों में सफल रही शाहिद कपूर, कृति सेनन और रश्मिका मंदाना स्टारर रोमांटिक कॉमेडी फिल्म कॉकटेल 2 का नेटफ्लिक्स पर प्रीमियर होगा। इसके साथ ही कंगना रनौत की सर्वाइवल ड्रामा फिल्म भारत भाग्य विधाता को जी5 पर दर्शकों के लिए उपलब्ध कराया जाएगा। इसी दिन इंडिपेंडेंट ड्रामा फिल्म डोन्ट से गुड लक भी नेटफ्लिक्स पर रिलीज होगी।

    मध्य प्रदेश के भोपाल, इंदौर और ग्वालियर जैसे प्रमुख शहरों में डिजिटल प्लेटफॉर्म्स का उपयोग तेजी से बढ़ा है, जहां युवा और परिवार वीकेंड पर ओटीटी स्ट्रीमिंग को प्राथमिकता देते हैं। प्रदेश में मल्टी-लिंगुअल और विविध शैलियों वाले कंटेंट की मांग को देखते हुए इन नई रिलीज को लेकर दर्शकों में अच्छा खासा उत्साह देखा जा रहा है।

    विभिन्न ओटीटी प्लेटफॉर्म्स द्वारा इस हफ्ते पेश किया जा रहा विविध सामग्री का यह बुके अलग-अलग आयु वर्ग के दर्शकों की पसंद को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। आने वाले दिनों में इन फिल्मों और सीरीज की स्ट्रीमिंग के बाद डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर दर्शकों की व्यूअरशिप में बढ़ोतरी दर्ज किए जाने की संभावना जताई जा रही है।

  • जिंदगी भर की कमाई मिट्टी में दबाई, जगह भूला किसान तो दीमक खा गई 5 लाख की पूरी रकम

    जिंदगी भर की कमाई मिट्टी में दबाई, जगह भूला किसान तो दीमक खा गई 5 लाख की पूरी रकम


    नई दिल्ली । राजस्थान के बालोतरा जिले से सामने आई यह घटना जितनी हैरान करने वाली है उतनी ही बड़ी सीख भी देती है। पचपदरा थाना क्षेत्र के नेवाई गांव के रहने वाले किसान मांगीलाल मेघवाल ने चोरी और फिजूलखर्ची से बचाने के लिए अपने 5 लाख रुपये खेत में गाड़ दिए। रकम प्लॉट बेचने के बाद मिली थी और किसान इस पैसे से खेत में पक्का कमरा बनवाना चाहता था। लेकिन करीब एक साल बाद जब उसे अपनी छिपाई हुई रकम की याद आई तो उसे यह तक याद नहीं रहा कि आखिर उसने पैसे खेत में किस जगह दबाए थे। काफी तलाश के बाद जब रकम मिली तो ज्यादातर नोटों को दीमक बुरी तरह चट कर चुकी थी।

    मांगीलाल अपने परिवार के साथ खेत में बनी कच्ची ढाणी में रहता है। प्लॉट बेचने के बाद उसके पास 5 लाख रुपये आए थे। वह चाहता था कि यह रकम सुरक्षित रहे और चोरी या बेवजह खर्च न हो जाए। इसी सोच के साथ उसने नोटों को पॉलीथिन में रखा और खेत में गड्ढा खोदकर जमीन के अंदर दबा दिया। उसने इस बारे में अपनी पत्नी और बेटों को भी नहीं बताया। परिवार के मुताबिक किसान को नशे की लत है और वह अक्सर चीजें भूल जाता है। यही भूल बाद में उसके लिए भारी आर्थिक नुकसान की वजह बन गई।

    कुछ समय बाद जब कमरे के निर्माण के लिए पैसों की जरूरत पड़ी तो मांगीलाल को याद आया कि उसने रकम खेत में छिपाई थी। लेकिन तब तक वह उस जगह को भूल चुका था। करीब 10 बीघा में फैले खेत में उसने कई जगह खुदाई की लेकिन पैसे नहीं मिले। आखिरकार उसने अपनी पत्नी और बेटों को पूरी बात बताई। परिवार ने भी खेत में कई जगह तलाश की लेकिन रकम का कोई पता नहीं चला। धीरे धीरे सभी ने उम्मीद छोड़ दी।

    करीब एक साल बाद बारिश के मौसम में जब खेत में बुवाई की तैयारी चल रही थी तब एक रात जमीन से रुपयों वाली पॉलीथिन बाहर निकल आई। अगले दिन तारबंदी ठीक करते समय किसान की पत्नी और बेटे की नजर उस थैली पर पड़ी। थैली खोलते ही परिवार के होश उड़ गए। उसमें 500 रुपये के नोट मौजूद थे लेकिन उनकी हालत बेहद खराब थी। नोटों को दीमक ने जगह जगह से काट दिया था और कई नोट छोटे छोटे टुकड़ों में बदल चुके थे।

    परिवार ने बचे हुए नोटों को संभाला और उन्हें बदलवाने की उम्मीद में पचपदरा स्थित एसबीआई शाखा पहुंचा। वहां बैंक कर्मचारियों ने नोटों की स्थिति देखने के बाद उन्हें बदलने से इनकार कर दिया। इसके बाद परिवार बालोतरा स्थित एसबीआई की मुख्य शाखा भी पहुंचा लेकिन वहां भी शुरुआती तौर पर उन्हें निराशा हाथ लगी। इस तरह चोरी से बचाने के लिए खेत में छिपाई गई 5 लाख रुपये की रकम अब लगभग बर्बाद होने की स्थिति में पहुंच गई है।

    यह घटना सिर्फ एक किसान की आर्थिक परेशानी की कहानी नहीं बल्कि नकदी को असुरक्षित तरीके से छिपाकर रखने के जोखिम की भी मिसाल है। मेहनत से कमाई गई रकम को सुरक्षित रखने के लिए बैंक या अन्य औपचारिक माध्यमों का इस्तेमाल ज्यादा सुरक्षित माना जाता है। मांगीलाल ने पैसे बचाने के इरादे से जो तरीका अपनाया वही आखिरकार उसकी सबसे बड़ी मुसीबत बन गया। अब परिवार बची हुई रकम को लेकर बैंक से किसी समाधान की उम्मीद कर रहा है।