Author: bharati

  • चारधाम यात्रा: IRCTC की वेबसाइट पर आज से हेलीकॉप्टर टिकट की बुकिंग शुरू

    चारधाम यात्रा: IRCTC की वेबसाइट पर आज से हेलीकॉप्टर टिकट की बुकिंग शुरू


    देहरादून।
    आज 16 अक्तूबर से नौ नवंबर के बीच हेलीकॉप्टर (Helicopter) से चारधाम यात्रा (Char Dham Yatra) के लिए शुक्रवार को टिकट बुक होंगे। आईआरसीटीसी की वेबसाइट www.heliyatra.irctc.co.in पर यह बुकिंग की जा सकेगी। यूकाडा के सीईओ प्रतीक जैन ने यह जानकारी दी। हेलीकॉप्टर से चारधाम यात्रा करने के लिए आज टिकट बुक होंगे। आईआरसीटीसी की अधिकृत वेबसाइट पर शाम तीन बजे से बुकिंग विंडो खुलेगी।


    सिर्फ ऑनलाइन ही बुक होंगे टिकट

    उत्तराखंड सिविल एविएशन डेवलपमेंट अथॉरिटी (यूकाडा) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रतीक जैन ने बताया कि चारधाम यात्रा के लिए हेलीकॉप्टर की ऑनलाइन टिकट सिर्फ www.heliyatra.irctc.co.in के माध्यम से ही बुक हो पाएंगे।


    फर्जी एजेंटों से सावधान रहें

    उन्होंने कहा कि यात्री किसी भी तरह की धोखाधड़ी से बचने के लिए अनधिकृत व्यक्तियों, ट्रैवल एजेंटों या फर्जी वेबसाइट अथवा लिंक के माध्यम से टिकट बुकिंग न करें।


    प्रभावित न हो कुंभ की तैयारी: बर्द्धन

    देहरादून। मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने कुंभ मेले की तैयारियों को समय पर पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि चुनाव और जनगणना की वजह से कुंभ के कार्य प्रभावित नहीं होने चाहिए। मुख्य सचिव ने गुरुवार को कुंभ की तैयारियों की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि कार्यों के लिए समय सीमा निर्धारित की जाए और जो कार्य समानांतर रूप से किए जा सकते हैं, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाए। जनगणना व चुनावों के कार्यों के कारण कुंभ के लिए कर्मचारियों की उपलब्धता प्रभावित न हो यह भी सुनिश्चित किया जाए।


    संस्कृत ग्रामों को पर्यटन से जोड़ेंगे

    उत्तराखंड में आदर्श संस्कृत ग्रामों को अब पर्यटन गतिविधियों से जोड़ा जाएगा। मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन की अध्यक्षता में गुरुवार को संस्कृत संस्थानम् के शासी निकाय की तीसरी बैठक में संस्कृत के उत्थान के लिए कई फैसले लिए गए। मुख्य सचिव ने संस्कृत स्पर्धाओं में प्रतिभागियों की संख्या बढ़ाने पर जोर दिया। साथ ही संस्कृत के प्रचार के लिए ऑनलाइन मॉड्यूल तैयार करने के साथ ही सूचनात्मक रील्स बनाने, मोबाइल ऐप के प्रभावी उपयोग के निर्देश दिए।

  • भोपाल के न्यू मार्केट में भीषण आग से मची तबाही, 5 से 6 दुकानें और 12 रेहड़ियां जलकर राख, 5 करोड़ तक नुकसान का अनुमान

    भोपाल के न्यू मार्केट में भीषण आग से मची तबाही, 5 से 6 दुकानें और 12 रेहड़ियां जलकर राख, 5 करोड़ तक नुकसान का अनुमान


    भोपाल । भोपाल के सबसे व्यस्त बाजारों में शामिल न्यू मार्केट में गुरुवार को भीषण आग लगने से अफरा तफरी मच गई। आग इतनी तेजी से फैली कि कुछ ही देर में आसपास की कई दुकानें इसकी चपेट में आ गईं। इस हादसे में मोबाइल कुर्ता पजामा बर्तन और रेडीमेड कपड़ों की दुकानों में रखा दिवाली का स्टॉक जलकर राख हो गया। आग की चपेट में आने से 10 से 12 रेहड़ियां भी पूरी तरह नष्ट हो गईं। व्यापारियों के मुताबिक इस घटना में करीब 4 से 5 करोड़ रुपये का नुकसान होने का अनुमान है। हालांकि वास्तविक नुकसान का आकलन जांच और सर्वे के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

    जानकारी के मुताबिक आग की शुरुआत खेड़ापति हनुमान मंदिर के पीछे स्थित बालाजी छोले भटूरे की दुकान से हुई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार दोपहर में भटूरे बनाते समय भट्ठी से आग भड़की और देखते ही देखते लपटें ऊपर लगे बैनर और फ्लैक्स तक पहुंच गईं। दुकान के अंदर फर्नीचर और पर्दे होने के कारण आग तेजी से फैलती चली गई। करीब 25 फीट ऊंची लपटों ने आसपास की पांच से छह दुकानों को अपनी चपेट में ले लिया। घटना के समय दुकान में लगभग 50 से 60 लोग मौजूद थे। आग लगते ही लोगों में भगदड़ जैसी स्थिति बन गई और सभी अपनी जान बचाने के लिए बाहर निकलने लगे।

    प्रत्यक्षदर्शियों ने दुकान में दो से तीन गैस सिलेंडर रखे होने और धमाकों की आवाज सुनाई देने की बात कही है। हालांकि नगर निगम के फायर अधिकारी सौरभ पटेल ने सिलेंडर रखे होने की पुष्टि की लेकिन उनके फटने की पुष्टि नहीं की। आग से दुकान पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। आसपास की दुकानों में दिवाली के लिए बड़ी मात्रा में सामान रखा था जो आग की भेंट चढ़ गया। त्योहार से ठीक पहले हुए इस हादसे ने व्यापारियों की चिंता बढ़ा दी है।

    इस घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल दमकल की पहुंच और बाजार में अतिक्रमण को लेकर खड़ा हो गया है। व्यापारियों के अनुसार माता मंदिर फायर स्टेशन घटनास्थल से लगभग एक किलोमीटर दूर है लेकिन दमकल को मौके तक पहुंचने में करीब 25 से 30 मिनट लग गए। दुकानदारों का कहना है कि सूचना देने के बाद घटनास्थल की सही लोकेशन समझाने में भी समय लगा। इसके बाद संकरी सड़कों पर खड़ी रेहड़ियों और अन्य अतिक्रमण के कारण दमकल वाहनों को आगे बढ़ने में परेशानी हुई। पुलिस और अन्य टीमों को रास्ता खाली कराने के लिए मशक्कत करनी पड़ी।

    न्यू मार्केट में लगभग 900 पंजीकृत दुकानें और करीब 400 रेहड़ियां होने की बात कही जाती है। भीड़भाड़ वाले हिस्सों में शाम के समय पैदल निकलना भी मुश्किल हो जाता है। व्यापार संरक्षण समिति के उपाध्यक्ष अजय देवनानी ने अतिक्रमण के कारण दमकल को देरी होने की बात कही और बाजार में अतिरिक्त अग्निशमन व्यवस्था की मांग उठाई। उन्होंने नो हॉकर्स जोन के नियमों का सख्ती से पालन कराने की जरूरत भी बताई।

    हादसे ने बाजार में फायर सेफ्टी की तैयारियों पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस दुकान से आग शुरू हुई उसके संचालक के खिलाफ करीब आठ महीने पहले अतिक्रमण को लेकर एफआईआर दर्ज कराए जाने की जानकारी सामने आई है। अधिकारियों के अनुसार पहले भी नोटिस दिए गए थे और अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई हुई थी। ऐसे में सवाल है कि कार्रवाई के बावजूद अतिक्रमण दोबारा कैसे हो गया। अब जरूरी है कि बाजार में अग्निशमन वाहनों के लिए रास्ते स्थायी रूप से खुले रखे जाएं और दुकानों में सुरक्षा नियमों का प्रभावी पालन सुनिश्चित किया जाए।

  • बच्चों को मोटापा घटाने की दवाएं देने से पहले सावधान, WHO ने 10 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए किया मना

    बच्चों को मोटापा घटाने की दवाएं देने से पहले सावधान, WHO ने 10 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए किया मना

    नई दिल्ली: विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने बच्चों और किशोरों में मोटापे के इलाज को लेकर नए दिशा-निर्देश जारी करते हुए वजन घटाने वाली दवाओं और सर्जरी के इस्तेमाल पर सावधानी बरतने को कहा है। संगठन के अनुसार अधिक वजन वाले बच्चों के लिए दवाएं और सर्जरी सीधे समाधान नहीं हैं। इसके बजाय संतुलित आहार और नियमित शारीरिक गतिविधियों पर जोर दिया जाना चाहिए। WHO ने स्पष्ट किया है कि 0 से 9 वर्ष तक के बच्चों के लिए वजन घटाने वाली दवाओं, पेट या पाचन तंत्र से जुड़ी सर्जरी और वजन कम करने वाले उपकरणों के इस्तेमाल की सिफारिश नहीं की जाती है।

    WHO के अनुसार 10 से 19 वर्ष के किशोरों के लिए वजन घटाने वाली दवाओं पर विचार किया जा सकता है, लेकिन यह विकल्प तभी अपनाया जाना चाहिए जब विशेषज्ञों की निगरानी में किए गए दूसरे उपाय प्रभावी साबित न हों। वहीं, अत्यधिक मोटापे से जूझ रहे किशोरों के लिए सर्जरी पर भी कुछ विशेष परिस्थितियों में विचार किया जा सकता है। इसके लिए कड़ी शर्तों का पालन जरूरी होगा। संगठन ने बच्चों और किशोरों में मोटापे से निपटने के लिए उपचार के साथ स्वस्थ जीवनशैली और शारीरिक गतिविधियों को महत्वपूर्ण बताया है।

    आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2024 में दुनियाभर में 5 से 9 वर्ष की आयु के लगभग 7 करोड़ बच्चे मोटापे से प्रभावित थे। इसी अवधि में 10 से 19 वर्ष की आयु के करीब 10 करोड़ किशोर भी मोटापे से जूझ रहे थे। 5 से 19 वर्ष की आयु के लोगों में मोटापे की दर 1990 में करीब 2 प्रतिशत थी, जो बढ़कर 2024 में 8 प्रतिशत हो गई। इन आंकड़ों से बच्चों और किशोरों में बढ़ते मोटापे की स्थिति का पता चलता है। ऐसे में वजन कम करने के लिए अपनाए जाने वाले तरीकों को लेकर सावधानी जरूरी मानी जा रही है।

    वजन घटाने के लिए पिछले कुछ वर्षों में कैलोरी कम करने वाली डाइट भी लोकप्रिय हुई है। इस तरह की डाइट में व्यक्ति भोजन से मिलने वाली ऊर्जा यानी कैलोरी की मात्रा कम करता है। इसमें इंटरमिटेंट फास्टिंग, अल्टरनेट डे फास्टिंग और फास्ट 800 जैसी डाइट शामिल हैं। इन तरीकों में भोजन के समय या मात्रा को सीमित करके कैलोरी का सेवन काफी कम किया जाता है। इसका आधार यह है कि जब शरीर को खर्च होने वाली ऊर्जा की तुलना में कम कैलोरी मिलती है, तो वह जमा वसा का इस्तेमाल करता है और समय के साथ वजन कम हो सकता है।

    विभिन्न शोधों में पाया गया है कि कैलोरी कम करने वाली डाइट से वजन और कमर का घेरा घट सकता है। इससे रक्त शर्करा और कोलेस्ट्रॉल के नियंत्रण में भी सुधार देखा गया है, जिससे हृदय रोग के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है। खासकर अधिक वजन, मोटापे या टाइप-2 मधुमेह से जूझ रहे लोगों में इसके कुछ लाभ सामने आए हैं। हालांकि, उपलब्ध अध्ययनों में से अधिकांश केवल 2 से 12 सप्ताह की छोटी अवधि पर आधारित हैं। वजन कम करने के बाद उसे लंबे समय तक बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है और कई लोगों में डाइट खत्म होने के बाद कम हुआ कुछ या उससे अधिक वजन दोबारा बढ़ सकता है।

  • फ्लाईदुबई की उड़ान में 174 यात्रियों की जान बचाने वाले भारतीय पायलट को इस्राइल देगा राष्ट्रपति पुरस्कार

    फ्लाईदुबई की उड़ान में 174 यात्रियों की जान बचाने वाले भारतीय पायलट को इस्राइल देगा राष्ट्रपति पुरस्कार


    तेल अवीव। फ्लाईदुबई की उड़ान में कथित अपहरण की कोशिश को नाकाम करने और बड़ी विमानन दुर्घटना टालने में अहम भूमिका निभाने वाले भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छार को इस्राइल नागरिक वीरता के लिए राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित करेगा। राष्ट्रपति आइजैक हर्जोग ने गुरुवार को इसकी घोषणा की। घटना के दौरान गंभीर रूप से घायल हुए कैप्टन मच्छार फिलहाल अबू धाबी के अस्पताल में स्वास्थ्य लाभ ले रहे हैं। इस्राइल ने विमान में सवार छह यात्रियों को भी उनकी बहादुरी के लिए सम्मानित किया है।

    छह इस्राइली यात्रियों को भी मिलेगा नागरिक वीरता पदक
    राष्ट्रपति हर्जोग ने पिछले सप्ताह फ्लाइट FZ1073 को दुर्घटनाग्रस्त करने की कथित कोशिश को विफल करने में मदद करने वाले छह इस्राइली यात्रियों को नागरिक वीरता के लिए राष्ट्रपति पदक प्रदान किया। जेरूसलम पोस्ट और टाइम्स ऑफ इस्राइल की रिपोर्ट के मुताबिक, सम्मानित होने वालों में ताली मानेस, ज्विका मानेस, यानिव हयौन, डॉ. शोता मुसायेव, आसफ राजुआन और ओर पारडिलोव शामिल हैं। इन सभी ने कथित अपहरण के प्रयास को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

    यात्रियों की सूझबूझ से टली बड़ी विमानन दुर्घटना
    घटना के दौरान ताली मानेस ने सबसे पहले खतरे को भांपकर चेतावनी दी। इसके बाद यानिव हयौन, ज्विका मानेस, ओर पारडिलोव और आसफ राजुआन ने मिलकर सह-पायलट को काबू करने में मदद की। पेशे से चिकित्सक डॉ. शोता मुसायेव ने घायल पायलट को तत्काल चिकित्सा सहायता दी।

    राष्ट्रपति हर्जोग ने यरुशलम में इन यात्रियों की सराहना करते हुए कहा कि सामान्य नागरिकों ने असाधारण साहस दिखाकर खुद को सच्चा नायक साबित किया। उनके मुताबिक, साहस, दृढ़ संकल्प और सूझबूझ से इन लोगों ने एक विनाशकारी विमानन हादसे को टालने में मदद की। ऐसी घटना से पूरी दुनिया हिल सकती थी, लेकिन यात्रियों की तत्परता से 174 लोगों की जान बचाने में मदद मिली।

    वैकल्पिक पायलटों और अन्य यात्रियों का भी जताया आभार
    इस्राइली राष्ट्रपति ने विमान को संभालने वाले वैकल्पिक पायलटों और आपात स्थिति के दौरान मदद करने वाले अन्य यात्रियों के प्रति भी आभार जताया। उन्होंने कहा कि संकट के समय सभी के सहयोग से बड़ी त्रासदी को टालना संभव हुआ।

    हालांकि, हर्जोग ने यह भी स्पष्ट किया कि यात्रियों की बहादुरी और सूझबूझ घटना की पूरी जांच की जरूरत को खत्म नहीं करती। उन्होंने कहा कि इस घटना से जुड़े सभी सवालों के जवाब हासिल करना जरूरी है। नागरिकों के साहस और तत्परता के बावजूद जांच की जिम्मेदारी से बचा नहीं जा सकता।

    पीएम नेतन्याहू ने भी कैप्टन स्मित की बहादुरी को सराहा
    इस घटना के बाद इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अस्पताल में भर्ती भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छार से फोन पर बातचीत की थी। बातचीत के दौरान नेतन्याहू ने उनकी बहादुरी और विपरीत परिस्थितियों में शांत रहने की क्षमता की प्रशंसा की।

    नेतन्याहू ने कहा था कि कैप्टन मच्छार ने कई लोगों की जान बचाई और दुनिया में मानवता की भावना को मजबूत किया। उन्होंने भारतीय पायलट को भारत और इस्राइल के लोगों के साथ-साथ पूरी दुनिया का हीरो बताया।

    नेतन्याहू ने इस्राइल आने का दिया न्योता
    प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने कैप्टन मच्छार से स्वस्थ होने के बाद इस्राइल आने का आग्रह किया और कहा कि देश उनके साहस के लिए आभारी है। सूत्रों के मुताबिक, नेतन्याहू ने कैप्टन मच्छार और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस्राइल के स्वतंत्रता दिवस समारोह में मशाल जलाने के लिए आमंत्रित किया है। इस्राइल का स्वतंत्रता दिवस 14 मई को मनाया जाता है।

    अबू धाबी के अस्पताल में चल रहा इलाज
    कैप्टन मच्छार फिलहाल अबू धाबी के एक अस्पताल में अपनी चोटों से उबर रहे हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, उड़ान के कॉकपिट में सह-पायलट के कथित हमले के दौरान उन्हें गंभीर चोटें आई थीं। इसके बावजूद संकट की स्थिति में उनकी भूमिका विमान और उसमें सवार यात्रियों की सुरक्षा के लिहाज से अहम रही।

    इस्राइल की ओर से राष्ट्रपति पुरस्कार देने की घोषणा को कैप्टन मच्छार के साहस और कर्तव्यनिष्ठा की अंतरराष्ट्रीय पहचान के रूप में देखा जा रहा है। इस सम्मान के जरिए उस घटना में जोखिम उठाकर लोगों की जान बचाने में योगदान देने वालों के प्रयासों को भी मान्यता दी जाएगी। घटना में सह-पायलट की भूमिका और कथित अपहरण की कोशिश से जुड़े सभी पहलुओं की जांच के नतीजे सामने आना भी महत्वपूर्ण होगा।

  • ओडिशा में एंबुलेंस के अंदर ऑक्सीजन सिलेंडर फटा, मरीज की मौत, दो झुलसे, धमाके से छत उड़ी

    ओडिशा में एंबुलेंस के अंदर ऑक्सीजन सिलेंडर फटा, मरीज की मौत, दो झुलसे, धमाके से छत उड़ी


    बारीपाड़ा। ओडिशा के मयूरभंज जिले में गुरुवार शाम एक एंबुलेंस के अंदर ऑक्सीजन सिलेंडर फटने से मरीज की मौत हो गई, जबकि दो अन्य लोग झुलस गए। हादसा उदला अनुमंडल अस्पताल के बाहर उस समय हुआ, जब गंभीर हालत में मरीज को भुवनेश्वर ले जाया जा रहा था। धमाका इतना तेज था कि एंबुलेंस की छत उड़ गई। पुलिस के मुताबिक, मरीज को ऑक्सीजन देने के लिए सिलेंडर का वाल्व खोला गया था, तभी यह घटना हुई।

    भुवनेश्वर ले जाते समय हुआ हादसा
    मृतक की पहचान 35 वर्षीय सुजोष बारिक के रूप में हुई है। वह मयूरभंज जिले के उदला थाना क्षेत्र के कुंडाबाई का रहने वाला था और गंभीर रक्त संक्रमण से पीड़ित था। उसकी हालत को देखते हुए परिजन उसे इलाज के लिए भुवनेश्वर के एक अस्पताल ले जा रहे थे।

    इसके लिए एक निजी संचालक से एंबुलेंस किराये पर ली गई थी। इसी दौरान उदला अनुमंडल अस्पताल के बाहर ऑक्सीजन सिलेंडर में विस्फोट हो गया। एंबुलेंस के भीतर आग फैलने से मरीज गंभीर रूप से झुलस गया और उसकी मौत हो गई।

    मरीज को बचाने की कोशिश में दो लोग झुलसे
    उदला थाने के प्रभारी निरीक्षक बनमाली बारिक ने बताया कि सिलेंडर फटने से एंबुलेंस के अंदर आग लग गई थी। मरीज को बाहर निकालकर बचाने की कोशिश में दो अन्य लोग भी झुलस गए।

    पुलिस के अनुसार, परिवार के सदस्यों ने जलती हुई एंबुलेंस से मरीज को बाहर निकाल लिया था, लेकिन वह बुरी तरह झुलस चुका था। कुछ ही मिनटों में उसकी मौत हो गई।

    ऑक्सीजन सिलेंडर में कैसे हुआ विस्फोट?
    पुलिस के मुताबिक, एंबुलेंस चालक ने मरीज को ऑक्सीजन देने के लिए सिलेंडर का वाल्व खोला था। इसी दौरान धमाका हुआ। शुरुआती आशंका है कि सिलेंडर से अचानक ऑक्सीजन गैस का रिसाव हुआ, जिसके बाद आग लग गई और सिलेंडर फट गया।

    हालांकि, गैस रिसाव या आग लगने की वास्तविक वजह की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। केवल ऑक्सीजन का रिसाव अपने आप आग लगने का कारण नहीं होता; ऑक्सीजन खुद नहीं जलती, लेकिन आग को तेजी से भड़काने में मदद करती है। इसलिए किसी ज्वलनशील पदार्थ या अन्य संभावित कारण की भूमिका की जांच जरूरी है।

    धमाके से एंबुलेंस की छत उड़ी
    पुलिस ने बताया कि विस्फोट की तीव्रता इतनी ज्यादा थी कि एंबुलेंस की छत उड़ गई। घटना के बाद दमकल कर्मियों को बुलाया गया, जिन्होंने आग पर काबू पाया।

    पुलिस ने मामले में केस दर्ज कर लिया है। अब जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि ऑक्सीजन सिलेंडर में विस्फोट किन परिस्थितियों में हुआ और हादसे के लिए कोई तकनीकी खराबी या अन्य वजह जिम्मेदार थी या नहीं।

  • प्रेमानंद महाराज के शिष्य की मौत का मामला मानवाधिकार आयोग पहुंचा, ADG को जांच के निर्देश

    प्रेमानंद महाराज के शिष्य की मौत का मामला मानवाधिकार आयोग पहुंचा, ADG को जांच के निर्देश


    मथुरा। वृंदावन में संत प्रेमानंद महाराज के शिष्य रसिक दुलारी उर्फ दीपक पटेल लोधी की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत का मामला अब राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग तक पहुंच गया है। आयोग ने शिकायत पर संज्ञान लेते हुए आगरा जोन के अपर पुलिस महानिदेशक (ADG) को मामले की निष्पक्ष जांच कराने और आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में शरीर पर चोटों के निशान मिलने और परिजनों की ओर से लगाए गए आरोपों के बाद इस मामले की जांच में कई पहलुओं पर ध्यान दिया जा रहा है।

    सामाजिक कार्यकर्ता की शिकायत पर आयोग ने लिया संज्ञान
    राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने दिल्ली निवासी सामाजिक कार्यकर्ता कृष्णा राजपूत की शिकायत के बाद यह कदम उठाया है। शिकायत में रसिक दुलारी के जीवन और गरिमा के साथ जीने के अधिकार का हवाला देते हुए घटना की स्वतंत्र और पारदर्शी जांच की मांग की गई है।

    शिकायतकर्ता ने मामले से जुड़े सभी सीसीटीवी फुटेज, फॉरेंसिक साक्ष्य, मृतक के कमरे की परिस्थितियों और अन्य महत्वपूर्ण सबूतों की जांच कराने की मांग की है। आयोग ने आगरा जोन के ADG को मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।

    आश्रम की चौथी मंजिल से गिरने से हुई थी मौत
    रसिक दुलारी की 25 सितंबर को वृंदावन स्थित गुरु कृपा कुंज आश्रम में मौत हो गई थी। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, वह आश्रम की चौथी मंजिल से नीचे गिरे थे। शुरुआती जानकारी में घटना को आत्महत्या बताया गया था, लेकिन बाद में सामने आए साक्ष्यों और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट ने मामले की परिस्थितियों को लेकर सवाल खड़े कर दिए।

    पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में उनके शरीर पर सात स्थानों पर चोट के निशान मिलने की बात सामने आई है। इनमें निजी अंगों पर गंभीर चोटों का भी उल्लेख किया गया है। इन चोटों की परिस्थितियों और घटना से उनके संबंध की जांच की जा रही है। फिलहाल इन तथ्यों के आधार पर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।

    परिवार ने लगाए दो साल तक संपर्क नहीं करने देने के आरोप
    रसिक दुलारी के परिवार ने आरोप लगाया है कि आश्रम में दीक्षा लेने के बाद पिछले दो वर्षों से उन्हें अपने बेटे से मिलने या फोन पर बात करने की अनुमति नहीं दी गई। परिजनों का यह भी आरोप है कि उनकी मौत के बाद आश्रम से जुड़े लोगों ने जल्दबाजी में अंतिम संस्कार कर दिया।

    परिवार ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से पूरे मामले की केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से जांच कराने की मांग की है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।

    CCTV फुटेज में खून से लथपथ हालत में दिखे
    पुलिस जांच में आश्रम के सीसीटीवी फुटेज भी अहम कड़ी माने जा रहे हैं। हाल में सामने आए फुटेज में रसिक दुलारी खून से लथपथ और बदहवास हालत में कमरे से बाहर निकलकर सीढ़ियों के रास्ते छत की ओर जाते दिखाई दिए थे।

    जांच एजेंसियां फुटेज के घटनाक्रम, कमरे की स्थिति और अन्य साक्ष्यों का मिलान कर रही हैं, ताकि मौत से पहले की परिस्थितियों को समझा जा सके। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि आश्रम में रहने वाले शिष्यों के मोबाइल फोन के इस्तेमाल और बाहरी लोगों से संपर्क को लेकर किस तरह के नियम या प्रतिबंध लागू थे।

    कमरे से मिला खून लगा ग्राइंडर, फॉरेंसिक जांच जारी
    पुलिस को कमरे से खून लगा एक ग्राइंडर मिलने की जानकारी भी सामने आई है। इसके अलावा जांच में नशीले पदार्थों से जुड़े किसी संभावित पहलू को भी खारिज करने के लिए खून के नमूनों की फॉरेंसिक और टॉक्सिकोलॉजी जांच कराई जा रही है।

    इन जांचों का उद्देश्य घटनास्थल से मिले साक्ष्यों और मृतक के शरीर में किसी संभावित पदार्थ की मौजूदगी के बारे में तथ्य जुटाना है। जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद ही इन पहलुओं पर स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

    ट्रस्ट ने पुलिस जांच में सहयोग की बात कही
    इस मामले के सामने आने के बाद प्रेमानंद महाराज के श्री राधा केलीकुंज ट्रस्ट ने बयान जारी कर पुलिस जांच में पूरा सहयोग करने की बात कही है। अब राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के निर्देशों के बाद जांच की निष्पक्षता और साक्ष्यों के परीक्षण पर विशेष ध्यान रहने की उम्मीद है।

    फिलहाल पुलिस विभिन्न साक्ष्यों और परिस्थितियों की जांच कर रही है। मौत के कारणों, शरीर पर मिले चोटों के निशानों और परिवार की ओर से लगाए गए आरोपों को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।

  • आज का राशिफल 9 अक्टूबर, ग्रहों की चाल बदलेगी इन राशियों की किस्मत, धन लाभ और करियर में मिल सकते हैं बड़े मौके

    आज का राशिफल 9 अक्टूबर, ग्रहों की चाल बदलेगी इन राशियों की किस्मत, धन लाभ और करियर में मिल सकते हैं बड़े मौके


    नई दिल्ली। 9 अक्टूबर 2026 का दिन कई राशियों के लिए नए अवसर और सकारात्मक बदलाव लेकर आ सकता है। ग्रहों की स्थिति के प्रभाव से कुछ जातकों को कार्यक्षेत्र में सफलता मिल सकती है जबकि कुछ लोगों को आर्थिक मामलों में सावधानी बरतने की जरूरत होगी। आज किए गए प्रयासों का परिणाम आने वाले समय में देखने को मिल सकता है। नौकरी करने वालों के लिए जिम्मेदारियां बढ़ सकती हैं वहीं कारोबार से जुड़े लोगों को नए संपर्कों से फायदा मिलने की संभावना है। परिवार में किसी शुभ समाचार से माहौल खुशनुमा हो सकता है।

    मेष राशि वालों के लिए आज का दिन मेहनत और आत्मविश्वास से आगे बढ़ने वाला रहेगा। नौकरी में आपकी कार्यक्षमता की तारीफ हो सकती है। किसी महत्वपूर्ण काम की जिम्मेदारी मिलने से आपकी स्थिति मजबूत होगी। कारोबार में लाभ के नए अवसर मिल सकते हैं। आर्थिक स्थिति बेहतर होने की संभावना है लेकिन अनावश्यक खर्च से बचना जरूरी होगा। परिवार के साथ अच्छा समय बिताने का मौका मिलेगा।

    वृषभ राशि के जातकों को आज धैर्य से काम लेना होगा। कार्यक्षेत्र में किसी काम को पूरा करने में अपेक्षा से अधिक समय लग सकता है। कारोबार में पुराने ग्राहक से लाभ मिल सकता है। धन से जुड़े मामलों में किसी पर आंख बंद करके भरोसा न करें। परिवार में किसी सदस्य की सलाह आपके लिए उपयोगी साबित हो सकती है। स्वास्थ्य को लेकर लापरवाही से बचें।

    मिथुन राशि वालों के लिए आज का दिन नए अवसर लेकर आ सकता है। नौकरी की तलाश कर रहे लोगों को अच्छी खबर मिल सकती है। कार्यक्षेत्र में कोई महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल हो सकती है। व्यापार में नई योजना पर काम शुरू करने का मौका मिलेगा। प्रेम संबंधों में मधुरता बढ़ेगी। किसी पुराने मित्र से मुलाकात मन को प्रसन्न कर सकती है।

    कर्क राशि के लोगों के लिए आज परिवार और करियर के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी होगा। नौकरी में अधिकारियों का सहयोग मिल सकता है। आर्थिक स्थिति सामान्य रहेगी। पुराने निवेश से फायदा मिलने की संभावना है। घर परिवार में किसी शुभ कार्य की योजना बन सकती है। विद्यार्थियों को पढ़ाई में एकाग्रता बनाए रखने की जरूरत होगी।

    सिंह राशि वालों के लिए आज का दिन आत्मविश्वास बढ़ाने वाला रहेगा। कार्यक्षेत्र में आपकी बात को महत्व मिल सकता है। कारोबार में कोई बड़ी डील आगे बढ़ सकती है। धन लाभ के योग बन रहे हैं। परिवार में चल रही किसी गलतफहमी को बातचीत से दूर किया जा सकता है। प्रेम जीवन में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

    कन्या राशि के जातकों को आज अपने काम की प्राथमिकता तय करके आगे बढ़ना चाहिए। नौकरी में काम का दबाव बढ़ सकता है लेकिन मेहनत का अच्छा परिणाम भी मिलेगा। व्यापार में खर्च बढ़ने की संभावना है इसलिए बजट पर ध्यान दें। परिवार का सहयोग मिलेगा। मानसिक तनाव से बचने के लिए आराम के लिए समय निकालें।

    तुला राशि वालों के लिए 9 अक्टूबर का दिन विशेष रूप से सकारात्मक रह सकता है। नौकरी और कारोबार में आगे बढ़ने के नए रास्ते खुल सकते हैं। किसी पुराने संपर्क से बड़ा फायदा मिलने की संभावना है। धन की स्थिति मजबूत हो सकती है। परिवार में खुशी का माहौल रहेगा। प्रेम संबंधों में नजदीकियां बढ़ सकती हैं।

    वृश्चिक राशि वालों को आज किसी महत्वपूर्ण निर्णय का सामना करना पड़ सकता है। काम के सिलसिले में यात्रा संभव है। आर्थिक मामलों में सोच समझकर फैसला लेना बेहतर होगा। किसी विवाद में उलझने से बचें। परिवार के साथ रिश्ते मजबूत होंगे और किसी करीबी से जरूरी सलाह मिल सकती है।

    धनु राशि के लिए आज का दिन शुभ संकेत लेकर आ सकता है। करियर में नई जिम्मेदारी या अवसर मिल सकता है। कारोबार में लाभ बढ़ने की संभावना है। रुका हुआ पैसा वापस मिल सकता है। विद्यार्थियों को प्रतियोगिता में सफलता के लिए मेहनत का फायदा मिलेगा। परिवार में शुभ समाचार मिलने से खुशी बढ़ेगी।

    मकर राशि वालों को आज अपने लक्ष्य पर ध्यान बनाए रखना होगा। कार्यक्षेत्र में प्रतिस्पर्धा बढ़ सकती है लेकिन आप अपनी समझदारी से स्थिति संभाल सकते हैं। आर्थिक मामलों में दिन सामान्य रहेगा। बिना जरूरत खरीदारी करने से बचें। परिवार के साथ समय बिताने से मन को शांति मिलेगी।

    कुंभ राशि के लिए आज का दिन नए संपर्क और नए अवसर लेकर आ सकता है। नौकरी में बदलाव को लेकर कोई अच्छी खबर मिल सकती है। व्यापारियों को नए ग्राहक मिल सकते हैं। सामाजिक प्रतिष्ठा बढ़ेगी। रिश्तों में विश्वास मजबूत होगा। स्वास्थ्य सामान्य रहने की संभावना है।

    मीन राशि वालों के लिए आज का दिन मिला जुला रह सकता है। काम में सफलता पाने के लिए धैर्य रखना जरूरी होगा। अचानक कोई खर्च सामने आ सकता है। परिवार का सहयोग आपको मानसिक मजबूती देगा। पुराने मित्र से बातचीत हो सकती है। किसी बड़े निवेश या महत्वपूर्ण फैसले में जल्दबाजी न करें।

  • पाकिस्तान के नक्शे में बड़े बदलाव की चर्चा, 12 से 15 प्रांत बनाने की योजना, विवाद बढ़ा

    पाकिस्तान के नक्शे में बड़े बदलाव की चर्चा, 12 से 15 प्रांत बनाने की योजना, विवाद बढ़ा


    इस्लामाबाद। पाकिस्तान में चार बड़े प्रांतों को छोटे प्रशासनिक हिस्सों में बांटने की चर्चा ने राजनीतिक विवाद बढ़ा दिया है। मीडिया रिपोर्टों में सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर को इस विचार का समर्थक बताया गया है, जबकि पाकिस्तान के योजना मंत्री अहसान इकबाल भी 12 से 15 नए प्रांत बनाने या 160 सशक्त जिला प्रशासनिक इकाइयां गठित करने का विकल्प सामने रख चुके हैं। हालांकि, इस दिशा में अंतिम फैसला होने की पुष्टि नहीं है और प्रस्ताव को लेकर राजनीतिक सहमति भी नहीं बनी है।

    पाकिस्तान में इस बहस के केंद्र में केवल प्रशासनिक सुधार नहीं, बल्कि राजनीतिक शक्ति का बंटवारा भी है। पंजाब और सिंध जैसे प्रभावशाली प्रांतों के छोटे हिस्सों में बंटने से चुनावी समीकरण बदल सकते हैं। दूसरी ओर, समर्थकों का तर्क है कि छोटे प्रशासनिक क्षेत्र बनने से आम लोगों तक सरकारी सेवाएं पहुंचाना आसान हो सकता है।

    चार प्रांतों की जगह 12 से 15 बनाने का विचार
    पाकिस्तान फिलहाल चार प्रांतों—पंजाब, सिंध, खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान—में बंटा है। इनकी आबादी, क्षेत्रफल और राजनीतिक प्रभाव में काफी अंतर है। द इकोनॉमिस्ट की रिपोर्ट के हवाले से आई खबरों में इन प्रांतों को छोटे हिस्सों में बांटने की संभावना जताई गई है। एक विकल्प में 12 से 15 नए प्रांत बनाने, जबकि दूसरे में 160 छोटे प्रशासनिक क्षेत्र तैयार करने की बात है।

    योजना मंत्री अहसान इकबाल ने भी सितंबर में प्रशासनिक ढांचे में बदलाव की जरूरत बताते हुए इन विकल्पों पर राष्ट्रीय और राजनीतिक चर्चा कराने की बात कही थी। उनके मुताबिक, करीब 26 करोड़ की आबादी वाले देश में मौजूदा व्यवस्था पर दबाव बढ़ा है और प्रांतीय स्तर पर सत्ता के केंद्रीकरण से स्वास्थ्य, शिक्षा तथा अन्य सेवाओं की डिलीवरी प्रभावित हुई है।

    हालांकि, दोनों विकल्पों में बुनियादी अंतर है। नए प्रांत बनाने से देश की संघीय संरचना और प्रांतीय सीमाओं में बदलाव होगा, जबकि सशक्त जिला प्रशासन की व्यवस्था में मौजूदा प्रांतों को बनाए रखते हुए स्थानीय स्तर पर अधिकार और संसाधन बढ़ाए जा सकते हैं।

    पंजाब की आबादी, बलूचिस्तान का क्षेत्रफल
    पाकिस्तान में नए प्रांत बनाने के पक्ष में सबसे बड़ा तर्क प्रशासनिक असमानता का दिया जा रहा है। पंजाब देश का सबसे अधिक आबादी वाला प्रांत है। वहीं, बलूचिस्तान क्षेत्रफल के लिहाज से सबसे बड़ा है, लेकिन उसकी आबादी पंजाब की तुलना में काफी कम है।

    इतने बड़े और विविध क्षेत्रों का प्रशासन चलाना चुनौतीपूर्ण माना जाता है। दूरदराज के ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों को सरकारी सेवाओं तक पहुंचने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ सकती है। इस लिहाज से छोटे प्रांतों या सशक्त जिला प्रशासन को सेवाओं की पहुंच बेहतर करने के विकल्प के रूप में देखा जा रहा है।

    लेकिन प्रशासनिक सीमाएं बदलना अपने आप में आर्थिक समस्याओं का समाधान नहीं है। नए प्रांत बनाने पर अलग प्रशासनिक ढांचा, सरकारी संस्थान और अन्य व्यवस्थाएं खड़ी करनी पड़ेंगी। इससे खर्च बढ़ सकता है। पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति को देखते हुए यह सवाल भी अहम है कि सरकार इतने बड़े पुनर्गठन का खर्च कैसे उठाएगी।

    असीम मुनीर की बढ़ती ताकत के बीच क्यों उठे सवाल?
    पाकिस्तान में सेना लंबे समय से राजनीति और शासन व्यवस्था में प्रभावशाली भूमिका निभाती रही है। ऐसे में प्रांतों के पुनर्गठन की चर्चा को केवल प्रशासनिक सुधार के रूप में नहीं देखा जा रहा। इसके संभावित राजनीतिक नतीजों पर भी सवाल उठ रहे हैं।

    द इकोनॉमिस्ट की रिपोर्ट पर आधारित विश्लेषणों में आशंका जताई गई है कि बड़े प्रांतों को छोटे हिस्सों में बांटने से केंद्र के सामने मौजूद क्षेत्रीय राजनीतिक शक्ति कमजोर हो सकती है। छोटे प्रांतों की सरकारें संसाधनों और प्रशासनिक फैसलों के लिए केंद्र पर अधिक निर्भर हो सकती हैं। ऐसी स्थिति में केंद्र और सैन्य प्रतिष्ठान का प्रभाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि, यह प्रस्ताव के संभावित राजनीतिक असर का विश्लेषण है, न कि इसके घोषित उद्देश्य का प्रमाण।

    पंजाब और सिंध का बंटवारा सबसे संवेदनशील
    पंजाब और सिंध पाकिस्तान की राजनीति में अहम स्थान रखते हैं। पंजाब को पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (PML-N) का मजबूत आधार माना जाता है, जबकि सिंध में पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) का प्रभाव रहा है।

    इन प्रांतों की बड़ी आबादी और चुनावी ताकत उन्हें राष्ट्रीय राजनीति में महत्वपूर्ण बनाती है। यदि इनके क्षेत्रीय और प्रशासनिक ढांचे में बदलाव होता है, तो राजनीतिक दलों के प्रभाव और चुनावी समीकरणों पर भी असर पड़ सकता है।

    सिंध में इस मुद्दे पर विरोध खुलकर सामने आ चुका है। सितंबर 2026 में सिंध विधानसभा ने प्रांत को बांटने या उसकी क्षेत्रीय सीमाएं बदलने के प्रस्तावों के खिलाफ प्रस्ताव पारित किया था। मुख्यमंत्री मुराद अली शाह ने भी सिंध की भौगोलिक एकता से समझौता नहीं करने की बात कही। इससे स्पष्ट है कि नए प्रांतों का विचार केवल प्रशासनिक सुधार तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रांतीय पहचान और राजनीतिक अधिकारों से भी जुड़ा है।

    इमरान खान की पार्टी वाले प्रांत में भी तनाव
    पाकिस्तान में प्रांतों के पुनर्गठन की बहस ऐसे समय चल रही है, जब केंद्र और खैबर पख्तूनख्वा की सरकार के बीच राजनीतिक तनाव बना हुआ है। यह प्रांत पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के शासन में है।

    इमरान खान जेल में हैं और उनकी पार्टी के समर्थक उनकी रिहाई की मांग करते रहे हैं। इस बीच PTI और केंद्र के बीच टकराव ने संघीय राजनीति को और जटिल बनाया है। खैबर पख्तूनख्वा उग्रवादी हिंसा की समस्या से भी जूझ रहा है।

    ऐसे माहौल में प्रांतीय सीमाओं में बदलाव की किसी भी योजना को राजनीतिक नजरिए से देखा जाना स्वाभाविक है। यदि नए प्रांत बनाने की प्रक्रिया आगे बढ़ती है, तो यह तय करना भी चुनौती होगा कि उनकी सीमाएं कैसे तय होंगी और स्थानीय राजनीतिक प्रतिनिधित्व किस तरह सुनिश्चित किया जाएगा।

    बलूचिस्तान में संसाधन और स्थानीय अधिकार भी मुद्दा
    बलूचिस्तान में लंबे समय से अलगाववादी हिंसा और केंद्र के साथ संसाधनों के बंटवारे को लेकर विवाद रहे हैं। ऐसे में प्रांत का पुनर्गठन जमीन, प्राकृतिक संसाधनों और स्थानीय राजनीतिक अधिकारों से जुड़े सवाल खड़े कर सकता है।

    पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में भी शासन व्यवस्था, महंगाई, करों और आर्थिक परिस्थितियों को लेकर असंतोष सामने आता रहा है। इन परिस्थितियों में देश के प्रशासनिक नक्शे में बड़े बदलाव के लिए केवल सरकारी निर्णय पर्याप्त नहीं होगा। इसके लिए संवैधानिक प्रक्रिया, राजनीतिक सहमति और संबंधित क्षेत्रों की चिंताओं पर विचार करना भी जरूरी होगा।

    क्या वास्तव में बदल जाएगा पाकिस्तान का नक्शा?
    फिलहाल नए प्रांतों की चर्चा को अंतिम सरकारी निर्णय मानना जल्दबाजी होगी। पाकिस्तान में इस विषय पर राजनीतिक बहस चल रही है, लेकिन सितंबर में आई रिपोर्टों के मुताबिक, अतिरिक्त प्रांतों या प्रशासनिक इकाइयों के गठन पर कोई औपचारिक प्रस्ताव संघीय कैबिनेट के सामने नहीं रखा गया था।

    छोटे प्रांतों के समर्थक इसे बेहतर प्रशासन और सरकारी सेवाओं की पहुंच बढ़ाने का रास्ता मानते हैं। विरोध करने वालों की चिंता प्रांतीय पहचान, राजनीतिक प्रतिनिधित्व और सत्ता के केंद्रीकरण को लेकर है। इसलिए पाकिस्तान के सामने असली चुनौती केवल प्रांतों की संख्या बढ़ाने की नहीं, बल्कि यह तय करने की है कि बदलाव से अधिकार और संसाधन आम लोगों तक पहुंचेंगे या केंद्र की शक्ति और मजबूत होगी।

  • MP के 9 जिलों में आज बारिश की संभावना, 12 अक्टूबर से साफ होगा मौसम

    MP के 9 जिलों में आज बारिश की संभावना, 12 अक्टूबर से साफ होगा मौसम


    भोपाल। मध्य प्रदेश के पूर्वी हिस्से में अगले तीन दिन मौसम का उतार-चढ़ाव जारी रहने का अनुमान है। शुक्रवार को रीवा-शहडोल संभाग के 9 जिलों में बारिश का अलर्ट है, जबकि भोपाल-इंदौर समेत पश्चिमी मध्य प्रदेश में धूप खिली रहेगी। मौसम विभाग के अनुमान के मुताबिक, 12 अक्टूबर से प्रदेश में बारिश का दौर थमने और आसमान साफ होने की संभावना है।

    साइक्लोनिक सर्कुलेशन और ट्रफ के असर से पूर्वी मध्य प्रदेश में पिछले चार दिनों से आंधी-बारिश हो रही है। इस बार मानसून सीजन में प्रदेश में सामान्य से 4% कम बारिश दर्ज की गई। जून से सितंबर के बीच 908.4 मिमी पानी गिरा, जबकि सामान्य बारिश का आंकड़ा 949.5 मिमी है।

    अगले तीन दिन कैसा रहेगा मौसम?

    मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक के मुताबिक, मौजूदा मौसम प्रणाली के सक्रिय रहने से पूर्वी मध्य प्रदेश में बारिश की संभावना बनी हुई है। शुक्रवार को पन्ना, सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, मैहर, शहडोल और अनूपपुर में अगले 24 घंटे के दौरान बारिश हो सकती है।

    10 और 11 अक्टूबर को भी पूर्वी मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में बारिश होने का अनुमान है। वहीं, पश्चिमी मध्य प्रदेश में मौसम मुख्य रूप से शुष्क रहने और धूप निकलने की संभावना है। 12 अक्टूबर से प्रदेश में मौसम साफ हो सकता है। इस दिन कहीं भी बारिश होने का अनुमान नहीं है।

    बदलते मौसम का खेती पर असर

    मौसम में हो रहे बदलाव का असर खेती-किसानी पर भी पड़ सकता है। पूर्वी मध्य प्रदेश में स्थानीय स्तर पर होने वाली बारिश से मिट्टी की ऊपरी परत में नमी बढ़ सकती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि पूरे प्रदेश में खेतों को समान रूप से नमी मिलेगी।

    दूसरी ओर, पश्चिमी मध्य प्रदेश में शुष्क मौसम रहने की संभावना को देखते हुए किसानों को बोवनी और सिंचाई से जुड़े फैसले स्थानीय परिस्थितियों के आधार पर लेने होंगे। खेत में मौजूद नमी, मिट्टी की स्थिति और सिंचाई के साधनों को ध्यान में रखना जरूरी होगा।

    3 अक्टूबर को लौट चुका है मानसून

    मध्य प्रदेश से दक्षिण-पश्चिम मानसून 3 अक्टूबर को विदा हो चुका है। इसके बावजूद साइक्लोनिक सर्कुलेशन और ट्रफ जैसी मौसम प्रणालियों के प्रभाव से बारिश हो रही है।

    मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक के मुताबिक, पिछले 10 वर्षों के आंकड़ों में अक्टूबर के दौरान बारिश, गर्मी और ठंड तीनों तरह की मौसमी स्थितियां देखने को मिली हैं। इस बार भी महीने की शुरुआत में कहीं तेज धूप रही, तो कहीं रात के तापमान में ठंडक महसूस हुई। कई जिलों में बारिश भी दर्ज की गई। प्रदेश में इस बार मानसून करीब 100 दिन सक्रिय रहा।

    पूर्वी MP में 4% ज्यादा, पश्चिमी हिस्से में 12% कम बारिश

    इस मानसून सीजन में प्रदेश के पूर्वी हिस्से में सामान्य से 4% अधिक बारिश हुई, जबकि पश्चिमी मध्य प्रदेश में सामान्य से 12% कम पानी गिरा। पूर्वी हिस्से में जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग शामिल हैं।

    हालांकि, पूर्वी क्षेत्र के कुछ जिलों में भी बारिश का आंकड़ा सामान्य से नीचे रहा। बालाघाट, छिंदवाड़ा, दमोह, जबलपुर, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, रीवा, सागर और सिवनी में सामान्य से 5% से 21% तक कम बारिश दर्ज की गई।

    पश्चिमी मध्य प्रदेश के आलीराजपुर, अशोकनगर, बड़वानी, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में सामान्य से 9% से 51% तक कम बारिश हुई।

    इन 25 जिलों में बारिश का कोटा पूरा

    प्रदेश के 55 जिलों में से 25 जिलों में मानसून सीजन के दौरान बारिश का कोटा पूरा हो गया। इनमें भोपाल, राजगढ़, बुरहानपुर, खरगोन, कटनी, मंडला, डिंडौरी, ग्वालियर, गुना, दतिया, पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी, मैहर, आगर-मालवा, भिंड, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, सतना, मऊगंज, शहडोल, उमरिया और अनूपपुर शामिल हैं।

    30 जिलों में सामान्य से कम बारिश

    प्रदेश के बाकी 30 जिलों में मानसून सीजन के दौरान सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई। इनमें नरसिंहपुर, दमोह, बालाघाट, अशोकनगर, मुरैना, मंदसौर, खंडवा, बड़वानी, नीमच, जबलपुर, रीवा, सागर, देवास, सिवनी, सीहोर, शिवपुरी, रायसेन, छिंदवाड़ा, विदिशा, शाजापुर, पांढुर्णा, इंदौर, उज्जैन, बैतूल, हरदा, नर्मदापुरम, रतलाम, झाबुआ, धार और आलीराजपुर शामिल हैं।

    कुल मिलाकर, प्रदेश में मानसून की विदाई के बाद भी पूर्वी जिलों में बारिश का सिलसिला जारी है, जबकि पश्चिमी हिस्से में मौसम शुष्क रहने के आसार हैं। 12 अक्टूबर से मौसम साफ होने पर दिन में धूप और रात में अपेक्षाकृत ठंडक का असर देखने को मिल सकता है।

  • सरकार अगले महीने एआई नियमों पर जारी करेगी परामर्श पत्र, डीपफेक और सुरक्षित तकनीकी इस्तेमाल पर रहेगा मुख्य फोकस

    सरकार अगले महीने एआई नियमों पर जारी करेगी परामर्श पत्र, डीपफेक और सुरक्षित तकनीकी इस्तेमाल पर रहेगा मुख्य फोकस

    नई दिल्ली ।केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा है कि सरकार अगले महीने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई से जुड़े नियमों पर एक परामर्श पत्र जारी करेगी। इसका मुख्य उद्देश्य एआई के सुरक्षित इस्तेमाल को सुनिश्चित करना और तेजी से बढ़ रहे डीपफेक के खतरे से निपटना होगा। सरकार की ओर से एआई के इस्तेमाल से जुड़े जोखिमों को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा को नियमन का प्रमुख आधार बनाने की बात कही गई है।

    एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वैष्णव ने कहा कि वह विभाग से एआई नियमन को लेकर एक चर्चा पत्र तैयार करने का अनुरोध करेंगे। उन्होंने कहा कि इस दस्तावेज का प्रमुख फोकस सुरक्षा पर होना चाहिए। उनके मुताबिक, एआई के इस्तेमाल से जुड़ा सबसे बड़ा मुद्दा सुरक्षा है और इसे गंभीरता से संबोधित करने की जरूरत है। उन्होंने डीपफेक को बड़ी समस्या बताते हुए कहा कि इससे समाज में गंभीर दुष्प्रभाव पैदा हो सकते हैं।

    केंद्रीय मंत्री ने कहा कि लोग कई बार डीपफेक सामग्री को वास्तविक मान लेते हैं। इससे गलत धारणाएं बन सकती हैं और लोग भ्रामक जानकारी के आधार पर फैसले ले सकते हैं। प्रस्तावित परामर्श पत्र केवल एआई के नियमन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसमें कौशल विकास और सुरक्षा जैसे पहलुओं पर भी ध्यान दिया जाएगा। साथ ही यह सुनिश्चित करने पर जोर होगा कि एआई तकनीक के विस्तार के दौरान कोई भी पीछे न छूटे।

    वैष्णव ने कहा कि एआई से जुड़े नियामक ढांचे में मानव हित सबसे महत्वपूर्ण होना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि एआई को केवल कानून बनाकर नियंत्रित नहीं किया जा सकता। इसके लिए तकनीक और नियमन दोनों को साथ लेकर चलना जरूरी होगा। उन्होंने इसे टेक्नो-लीगल समाधान की जरूरत बताया और कहा कि इस प्रक्रिया में उद्योग, विशेषज्ञों तथा अन्य हितधारकों की भागीदारी भी आवश्यक है।

    मंत्री ने एआई से जुड़े जोखिमों, साइबर हमलों और डीपफेक जैसी चुनौतियों से निपटने में उद्योग जगत की जिम्मेदारी पर भी जोर दिया। सरकार पहले ही इंडिया एआई गवर्नेंस गाइडलाइन्स जारी कर चुकी है, जिसमें सुरक्षित, जिम्मेदार और मानव-केंद्रित एआई इस्तेमाल के लिए ढांचा दिया गया है। इन दिशा-निर्देशों में भ्रामक सूचना, डीपफेक, एल्गोरिदमिक पक्षपात और एआई से होने वाले संभावित सामाजिक नुकसान को प्रमुख जोखिमों में शामिल किया गया है।

    दिशा-निर्देशों में एआई से जुड़ी कानूनी खामियों की पहचान, जवाबदेही, डेटा संरक्षण, कॉपीराइट, कंटेंट प्रमाणीकरण और जनरेटिव एआई के दुरुपयोग जैसे मुद्दों की समीक्षा की सिफारिश की गई है। इसके अलावा एआई गवर्नेंस और इकोनॉमिक ग्रुप, टेक्नोलॉजी एंड पॉलिसी एक्सपर्ट कमिटी तथा एआई सेफ्टी इंस्टीट्यूट जैसी संस्थागत व्यवस्थाओं का प्रावधान किया गया है। सरकार इंडिया एआई मिशन के तहत सेफ एंड ट्रस्टेड एआई पहल पर भी काम कर रही है, जिसमें डीपफेक पहचान, गोपनीयता-सुरक्षित एआई, एल्गोरिदमिक पक्षपात कम करने और एआई जोखिम मूल्यांकन से जुड़े प्रोजेक्ट शामिल हैं।