Author: bharati

  • शंकराचार्य सदानंद सरस्वती ने उठाई सनातन बोर्ड की मांग, बोले- मंदिरों को पर्यटन स्थल समझ रहे अधिकारी

    शंकराचार्य सदानंद सरस्वती ने उठाई सनातन बोर्ड की मांग, बोले- मंदिरों को पर्यटन स्थल समझ रहे अधिकारी


    अयोध्या  अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे और दानपात्रों से जुड़ी कथित अनियमितताओं और चोरी के आरोपों को लेकर देशभर में चर्चा के बीच द्वारका पीठ के शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती ने मंदिरों के प्रबंधन को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। जबलपुर प्रवास के दौरान उन्होंने कहा कि मंदिरों को केवल प्रशासनिक दृष्टि से नहीं, बल्कि धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टिकोण से संचालित किया जाना चाहिए। इसी के साथ उन्होंने सनातन धर्म बोर्ड या सनातन धर्म संरक्षण समिति के गठन की मांग भी रखी।

    परमहंसी गंगा आश्रम के लिए रवाना होने से पहले जबलपुर में पत्रकारों से चर्चा करते हुए शंकराचार्य ने कहा कि जब किसी कार्य की जिम्मेदारी उन लोगों को सौंप दी जाती है, जिन्हें उस विषय का पर्याप्त ज्ञान और अनुभव नहीं होता, तब इस प्रकार की घटनाएं सामने आती हैं। उनका कहना था कि मंदिरों की देखरेख करने वाले कई अधिकारी और कर्मचारी मंदिरों को धार्मिक आस्था के केंद्र के बजाय पर्यटन स्थल के रूप में देखते हैं, जबकि करोड़ों श्रद्धालु वहां दर्शन, साधना और आध्यात्मिक शांति की प्राप्ति के लिए जाते हैं।

    उन्होंने कहा कि सनातन धर्मावलंबियों के अधिकांश मंदिर शासन के अधीन हैं और इनकी देखरेख करने वाले अधिकारियों का लगातार तबादला होता रहता है। ऐसे में उन्हें न तो धार्मिक परंपराओं की गहरी समझ होती है और न ही शास्त्रों, विधि-विधान तथा पाप-पुण्य की अवधारणा का पर्याप्त ज्ञान होता है। यही कारण है कि मंदिरों के संचालन और संरक्षण में अपेक्षित संवेदनशीलता दिखाई नहीं देती।

    अयोध्या में सामने आई कथित चोरी की घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए शंकराचार्य ने कहा कि यह केवल आर्थिक अपराध नहीं बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था के साथ खिलवाड़ है। उन्होंने कहा कि लोग अपनी मेहनत और विश्वास की कमाई मंदिरों में अर्पित करते हैं, इसलिए उस धन का उपयोग पूरी ईमानदारी और पारदर्शिता के साथ होना चाहिए। यदि किसी ने इस प्रकार का अपराध किया है तो उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि भविष्य में किसी भी धार्मिक स्थल पर ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

    स्वामी सदानंद सरस्वती ने कहा कि मंदिरों की आय का उपयोग गौशालाओं, पाठशालाओं, यज्ञशालाओं, धर्मशालाओं और औषधालयों जैसे जनकल्याणकारी कार्यों में होना चाहिए। इसके साथ ही मंदिरों के आसपास के क्षेत्रों का भी समुचित विकास किया जाना चाहिए। उनका मानना है कि मंदिर केवल पूजा-अर्चना के केंद्र नहीं हैं, बल्कि भारतीय संस्कृति, परंपरा और सामाजिक जीवन के महत्वपूर्ण आधार हैं।

    उन्होंने कहा कि देश की स्वतंत्रता के बाद यह अपेक्षा थी कि भारतीय संस्कृति, शिक्षा पद्धति और परंपराओं को अधिक मजबूती मिलेगी, लेकिन कई क्षेत्रों में यह लक्ष्य पूरी तरह हासिल नहीं हो पाया। शंकराचार्य ने जोर देकर कहा कि धार्मिक स्थलों का संचालन ऐसे लोगों को सौंपा जाना चाहिए जिन्हें धर्म, परंपरा और आध्यात्मिक मूल्यों की समझ हो। उन्होंने सरकारों से भी आग्रह किया कि वे मंदिरों की संपत्तियों और धरोहरों के संरक्षण की जिम्मेदारी निभाएं, लेकिन धार्मिक संस्थानों के धन और संचालन में अनावश्यक हस्तक्षेप से बचें।

  • जबलपुर में नगर निगम के स्वास्थ्य अधिकारी पर ईओडब्ल्यू का शिकंजा, आय से अधिक संपत्ति मामले में घर पर छापा

    जबलपुर में नगर निगम के स्वास्थ्य अधिकारी पर ईओडब्ल्यू का शिकंजा, आय से अधिक संपत्ति मामले में घर पर छापा


    जबलपुर जबलपुर में मंगलवार को आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) की टीम ने नगर निगम के प्रभारी सहायक स्वास्थ्य अधिकारी पोला राव के निवास पर छापामार कार्रवाई कर हड़कंप मचा दिया। आय से अधिक संपत्ति की शिकायत मिलने के बाद कोर्ट से सर्च वारंट प्राप्त कर यह कार्रवाई की गई। सुबह शुरू हुई जांच देर तक जारी रही, जिसमें अधिकारियों ने संपत्ति, बैंक खातों और निवेश से जुड़े कई महत्वपूर्ण दस्तावेजों की पड़ताल की।

    जानकारी के अनुसार, पोला राव वर्तमान में जबलपुर नगर निगम के स्वास्थ्य विभाग में प्रभारी सहायक स्वास्थ्य अधिकारी के रूप में पदस्थ हैं। मूल रूप से आंध्रप्रदेश निवासी पोला राव का निवास विजय नगर क्षेत्र स्थित मुस्कान प्लाजा में है, जहां ईओडब्ल्यू की टीम ने पहुंचकर तलाशी अभियान शुरू किया। अधिकारियों ने घर के भीतर मौजूद दस्तावेजों, बैंक रिकॉर्ड, बीमा पॉलिसियों और अन्य वित्तीय अभिलेखों की जांच की।

    प्रारंभिक जांच में ईओडब्ल्यू को जबलपुर में पोला राव के नाम एक फ्लैट और लगभग 10 हजार वर्गफुट का प्लॉट होने की जानकारी मिली है। इसके अलावा आंध्रप्रदेश में करीब एक एकड़ कृषि भूमि से संबंधित दस्तावेज भी जांच के दौरान सामने आए हैं। अधिकारियों का मानना है कि इन संपत्तियों का वास्तविक मूल्य और उनकी खरीद के स्रोत की जांच करना आवश्यक है।

    ईओडब्ल्यू के अधिकारियों के अनुसार जांच में चार दोपहिया वाहन और एक चारपहिया वाहन की जानकारी भी मिली है, जिनकी अनुमानित कीमत 15 से 16 लाख रुपए बताई जा रही है। टीम ने इन वाहनों से जुड़े दस्तावेजों की भी जांच शुरू कर दी है। साथ ही बैंक खातों में हुए लेन-देन, निवेश और बीमा योजनाओं से संबंधित अभिलेखों को भी जब्त किया गया है।

    जांच के दौरान अधिकारियों का ध्यान पोला राव के पारिवारिक संबंधों और उनसे जुड़े संपत्ति विवरणों पर भी गया है। ईओडब्ल्यू के अनुसार उनकी बहन और बहनोई भी जबलपुर में निवास करते हैं। उनके मकान और उससे संबंधित दस्तावेजों की भी जांच की जा रही है। बताया जा रहा है कि संबंधित संपत्ति नजूल भूमि पर बनी हुई है, इसलिए उसके वैधानिक पहलुओं की भी पड़ताल की जा रही है।

    ईओडब्ल्यू के डीएसपी मनजीत सिंह ने बताया कि फिलहाल सभी दस्तावेजों का विश्लेषण किया जा रहा है। जांच का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि अधिकारी की घोषित आय और उनके नाम पर मौजूद संपत्तियों के बीच कितना अंतर है। यदि जांच में आय से अधिक संपत्ति के प्रमाण मिलते हैं तो आगे नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    गौरतलब है कि पोला राव वर्तमान में नगर निगम के कई महत्वपूर्ण वार्डों का प्रभार संभाल रहे हैं। ऐसे में उनके खिलाफ हुई यह कार्रवाई शहर में चर्चा का विषय बन गई है। देर शाम तक जारी जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि उनके पास कुल कितनी चल-अचल संपत्ति है और उसका स्रोत क्या है। फिलहाल ईओडब्ल्यू की कार्रवाई जारी है और अधिकारी पूरे मामले की बारीकी से जांच कर रहे हैं।

  • ‘पेपर लीक नहीं, सिर्फ कंप्रोमाइज हुआ था’, घनश्याम तिवाड़ी के बयान से नई बहस, धर्मेंद्र प्रधान को बताया बधाई का पात्र

    ‘पेपर लीक नहीं, सिर्फ कंप्रोमाइज हुआ था’, घनश्याम तिवाड़ी के बयान से नई बहस, धर्मेंद्र प्रधान को बताया बधाई का पात्र

    नई दिल्ली । राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा से जुड़े विवाद के बीच भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद घनश्याम तिवाड़ी का एक बयान राजनीतिक और शैक्षणिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है। देशभर में परीक्षा की पारदर्शिता और सुरक्षा को लेकर चल रही बहस के बीच तिवाड़ी ने दावा किया कि संबंधित परीक्षा का पेपर लीक नहीं हुआ था, बल्कि वह केवल “कंप्रोमाइज” हुआ था। उनके इस बयान ने परीक्षा प्रक्रिया और उससे जुड़े घटनाक्रम को लेकर एक नई बहस को जन्म दे दिया है।

    तिवाड़ी ने कहा कि किसी परीक्षा को पेपर लीक तभी माना जा सकता है जब प्रश्नपत्र के सभी या अधिकांश प्रश्न परीक्षा से पहले पूरी तरह बाहर आ जाएं और बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों तक पहुंच जाएं। उनके अनुसार संबंधित मामले में ऐसी स्थिति नहीं थी। उन्होंने कहा कि कुछ विद्यार्थियों द्वारा कुछ प्रश्नों को याद करके दूसरे स्थानों तक पहुंचाने की जानकारी सामने आई थी, जिसे पेपर लीक की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। उनके मुताबिक यह स्थिति पेपर के कंप्रोमाइज होने की थी, न कि पूर्ण रूप से लीक होने की।

    बीजेपी सांसद ने इस पूरे मामले में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की भूमिका का भी बचाव किया। उन्होंने कहा कि जैसे ही परीक्षा की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हुए, सरकार ने गंभीरता दिखाते हुए पूरी प्रक्रिया की समीक्षा की। उनके अनुसार परीक्षा को रद्द करने, दोबारा आयोजन सुनिश्चित करने और अभ्यर्थियों को राहत देने जैसे कदम सरकार की जवाबदेही को दर्शाते हैं। तिवाड़ी ने कहा कि ऐसी परिस्थिति में संबंधित मंत्री की आलोचना के बजाय उनकी तत्परता की सराहना की जानी चाहिए।

    नीट विवाद को लेकर विपक्ष द्वारा लगातार सरकार पर हमले किए जा रहे हैं। इसी संदर्भ में तिवाड़ी ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के प्रस्तावित छात्र संवाद कार्यक्रम पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि जिस मामले को लेकर राजनीतिक अभियान चलाया जा रहा है, उसके तथ्यों को पहले पूरी तरह समझना आवश्यक है। उनका मानना है कि परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों को राजनीतिक मंचों की बजाय संस्थागत और प्रशासनिक स्तर पर अधिक गंभीरता से देखा जाना चाहिए।

    तिवाड़ी ने राजस्थान की राजनीति का उल्लेख करते हुए कांग्रेस पर भी निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि पूर्ववर्ती सरकारों के दौरान राज्य में कई भर्ती और प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर विवाद सामने आए थे, जबकि वर्तमान सरकार के कार्यकाल में ऐसी घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण देखने को मिला है। उन्होंने कहा कि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना किसी भी सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी होती है और इसी दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि परीक्षा संबंधी मामलों पर दिए गए ऐसे बयान आने वाले दिनों में राजनीतिक चर्चा का केंद्र बने रह सकते हैं। एक ओर विपक्ष परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता को लेकर सवाल उठा रहा है, वहीं सत्तापक्ष सरकार द्वारा उठाए गए कदमों को पर्याप्त और प्रभावी बता रहा है। ऐसे में छात्रों, अभिभावकों और शिक्षा जगत की नजरें अब उन सुधारात्मक उपायों पर टिकी हैं, जिनसे भविष्य में किसी भी परीक्षा की निष्पक्षता और विश्वसनीयता पर सवाल न उठें।

    नीट विवाद केवल एक परीक्षा तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह देश की परीक्षा व्यवस्था, प्रशासनिक जवाबदेही और राजनीतिक विमर्श का महत्वपूर्ण विषय बन चुका है। आने वाले समय में इस मुद्दे पर सरकार और विपक्ष दोनों की रणनीतियां छात्रों और युवाओं के बीच व्यापक चर्चा का विषय बनी रह सकती हैं।

  • राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 20 जून को जबलपुर दौरे पर, योग दिवस और दीक्षांत समारोह में लेंगी हिस्सा

    राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 20 जून को जबलपुर दौरे पर, योग दिवस और दीक्षांत समारोह में लेंगी हिस्सा


    जबलपुर देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 20 जून को मध्य प्रदेश के जबलपुर दौरे पर आ रही हैं। राष्ट्रपति के प्रस्तावित दौरे को लेकर जिला प्रशासन, पुलिस और विभिन्न विभागों ने तैयारियों को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। सुरक्षा व्यवस्था से लेकर कार्यक्रम स्थलों की व्यवस्थाओं तक हर पहलू पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। राष्ट्रपति के आगमन को देखते हुए पूरे शहर में प्रशासनिक गतिविधियां तेज हो गई हैं और अधिकारियों द्वारा लगातार निरीक्षण किया जा रहा है।

    जिला कलेक्टर राघवेंद्र सिंह के अनुसार राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 20 जून की शाम लगभग 6 बजे जबलपुर पहुंचेंगी। वह करीब 18 घंटे तक शहर में रहेंगी और इस दौरान दो महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में शामिल होंगी। राष्ट्रपति के दौरे को लेकर केंद्र सरकार की सुरक्षा गाइडलाइन और ब्लू बुक के अनुसार व्यापक इंतजाम किए जा रहे हैं। सभी विभागों को उनकी जिम्मेदारियां सौंप दी गई हैं और समन्वय के साथ तैयारियां पूरी की जा रही हैं।

    राष्ट्रपति के आगमन से पहले प्रशासन द्वारा 20 जून को फाइनल रिहर्सल भी आयोजित की जाएगी। इस रिहर्सल में सुरक्षा व्यवस्था, यातायात प्रबंधन, प्रोटोकॉल और कार्यक्रम संचालन से जुड़े सभी पहलुओं का परीक्षण किया जाएगा। पुलिस विभाग ने भी सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए हैं और संवेदनशील स्थानों की निगरानी बढ़ा दी गई है।

    राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर जबलपुर के गैरिसन ग्राउंड में आयोजित मुख्य कार्यक्रम में शामिल होंगी। योग दिवस के इस विशेष आयोजन में बड़ी संख्या में नागरिकों, विद्यार्थियों, सामाजिक संगठनों और विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना है। राष्ट्रपति की उपस्थिति इस आयोजन को और अधिक महत्वपूर्ण बना देगी।

    योग दिवस कार्यक्रम के बाद राष्ट्रपति रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय पहुंचेंगी, जहां वह विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगी। समारोह के दौरान विभिन्न संकायों के विद्यार्थियों को उपाधियां और सम्मान प्रदान किए जाएंगे। विश्वविद्यालय प्रशासन ने भी इस कार्यक्रम को लेकर तैयारियां तेज कर दी हैं।

    दीक्षांत समारोह में राष्ट्रपति के साथ मध्य प्रदेश के राज्यपाल मंगुभाई पटेल, मुख्यमंत्री मोहन यादव, लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह, विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर राजेश कुमार वर्मा सहित कई गणमान्य अतिथि मौजूद रहेंगे। इस अवसर पर उच्च शिक्षा, शोध और नवाचार से जुड़े महत्वपूर्ण संदेश भी विद्यार्थियों को दिए जाने की संभावना है।

    प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक राष्ट्रपति की छोटी बेटी के भी इस दौरे में शामिल होने की संभावना जताई जा रही है, हालांकि इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। कार्यक्रमों में भाग लेने के बाद राष्ट्रपति उसी दिन दिल्ली के लिए रवाना हो जाएंगी।

    राष्ट्रपति के दौरे को लेकर जबलपुर में उत्साह का माहौल है। प्रशासन का प्रयास है कि सभी कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हों और सुरक्षा व व्यवस्थाओं में किसी प्रकार की कमी न रहे। राष्ट्रपति का यह दौरा शहर के लिए गौरव और महत्व का अवसर माना जा रहा है।

  • ट्विशा शर्मा मौत केस में बढ़ी हलचल, गिरिबाला ने कोर्ट में रखीं कई मांगें; 30 जून तक बढ़ी न्यायिक हिरासत

    ट्विशा शर्मा मौत केस में बढ़ी हलचल, गिरिबाला ने कोर्ट में रखीं कई मांगें; 30 जून तक बढ़ी न्यायिक हिरासत


    भोपाल भोपाल  के चर्चित ट्विशा शर्मा मौत मामले में मंगलवार को हुई अदालत की सुनवाई ने एक बार फिर इस बहुचर्चित प्रकरण को सुर्खियों में ला दिया। मामले में आरोपी पति समर्थ सिंह और उनकी मां, सेवानिवृत्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश गिरिबाला सिंह को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत में पेश किया गया। सुनवाई के बाद अदालत ने दोनों की न्यायिक हिरासत 30 जून तक बढ़ा दी। इस दौरान गिरिबाला सिंह ने जेल में मिलने वाली सुविधाओं और जांच प्रक्रिया से जुड़े कई मुद्दे अदालत के समक्ष रखे।

    सुनवाई के दौरान गिरिबाला सिंह ने कहा कि जेल प्रशासन द्वारा उपलब्ध कराए जाने वाले हिंदी और अंग्रेजी अखबारों में उनके मामले से संबंधित खबरों को काट दिया जाता है। उन्होंने अदालत से अनुरोध किया कि उन्हें बिना किसी कटौती के पूरा अखबार पढ़ने की अनुमति दी जाए, ताकि वे अपने मामले से जुड़ी खबरों और घटनाक्रम की जानकारी प्राप्त कर सकें।

    इसके अलावा उन्होंने वकीलों से मुलाकात के लिए निर्धारित 20 मिनट की समय सीमा को अपर्याप्त बताते हुए इसे समाप्त करने या बढ़ाने की मांग की। गिरिबाला का कहना था कि मामला गंभीर और जटिल है, इसलिए प्रभावी कानूनी सलाह के लिए अधिक समय जरूरी है। उन्होंने यह भी आग्रह किया कि उन्हें और उनके बेटे समर्थ सिंह को एक साथ अपने अधिवक्ताओं से मिलने की अनुमति दी जाए, जिससे कानूनी रणनीति पर बेहतर समन्वय किया जा सके।

    गिरिबाला सिंह ने अदालत के समक्ष यह भी आपत्ति दर्ज कराई कि ट्विशा शर्मा के परिजन और रिश्तेदार लगातार मीडिया में बयान दे रहे हैं। उन्होंने अदालत से अनुरोध किया कि इस संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए जाएं। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि जांच के दौरान ट्विशा की जब्त की गई दवाइयों का जब्ती पंचनामा अभी तक बचाव पक्ष को उपलब्ध नहीं कराया गया है, जिसे उपलब्ध कराया जाना चाहिए।

    सुनवाई के दौरान गिरिबाला ने सीबीआई द्वारा दाखिल न्यायिक हिरासत बढ़ाने संबंधी आवेदन की प्रति भी मांगी। अदालत के निर्देश पर संबंधित दस्तावेज उनके वकीलों को उपलब्ध करा दिए गए। वहीं ट्विशा पक्ष के अधिवक्ता शुभांग दीक्षित ने अदालत को बताया कि सीबीआई को अभी तक दूसरी पोस्टमार्टम रिपोर्ट प्राप्त नहीं हुई है। यह रिपोर्ट जांच की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

    इसके बाद सीबीआई ने दोनों आरोपियों की न्यायिक हिरासत बढ़ाने का अनुरोध किया, जिसे अदालत ने स्वीकार करते हुए 30 जून तक बढ़ा दिया। एजेंसी का कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है और कई अहम पहलुओं की पड़ताल की जा रही है।

    इधर, मामले में लीगल एड वकीलों की भूमिका को लेकर भी विवाद गहराता नजर आ रहा है। ट्विशा शर्मा के पिता नवनिधि शर्मा ने मध्य प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण को शिकायत भेजकर कुछ लीगल एड वकीलों की निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं। शिकायत में दावा किया गया है कि गिरिबाला सिंह के न्यायिक कार्यकाल के दौरान नियुक्त कुछ वकील आरोपी पक्ष से जुड़े दिखाई दिए। उन्होंने इस पूरे मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।

    अब इस हाई-प्रोफाइल मामले में सभी की निगाहें सीबीआई की आगे की जांच, दूसरी पोस्टमार्टम रिपोर्ट और 30 जून को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हुई हैं। जांच में सामने आने वाले तथ्य ही इस मामले की आगामी दिशा तय करेंगे।

  • AI निगरानी, बायोमेट्रिक जांच और एयरफोर्स से पेपर डिलीवरी पर विवाद, NEET री-टेस्ट से पहले अन्नामलाई और बीजेपी आमने-सामने

    AI निगरानी, बायोमेट्रिक जांच और एयरफोर्स से पेपर डिलीवरी पर विवाद, NEET री-टेस्ट से पहले अन्नामलाई और बीजेपी आमने-सामने

    नई दिल्ली । देश की सबसे महत्वपूर्ण मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं में शामिल NEET री-टेस्ट से पहले सुरक्षा व्यवस्था को लेकर राजनीतिक और शैक्षणिक बहस तेज हो गई है। आगामी 21 जून को आयोजित होने वाली परीक्षा के लिए केंद्र सरकार और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी ने अभूतपूर्व सुरक्षा उपाय लागू किए हैं। हालांकि इन व्यवस्थाओं को लेकर विभिन्न पक्षों से अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। एक ओर परीक्षा की निष्पक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने की बात कही जा रही है, वहीं दूसरी ओर छात्रों पर बढ़ते मानसिक दबाव को लेकर भी चिंता व्यक्त की जा रही है।

    हाल के वर्षों में कई प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और नकल से जुड़े मामलों ने परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े किए थे। इसी पृष्ठभूमि में इस बार NEET री-टेस्ट के लिए बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था तैयार की गई है। परीक्षा प्रश्नपत्रों को देशभर के विभिन्न केंद्रों तक पहुंचाने के लिए विशेष सुरक्षा प्रबंध किए गए हैं। परीक्षा केंद्रों पर अभ्यर्थियों की पहचान सुनिश्चित करने के लिए बायोमेट्रिक सत्यापन और कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित फेस रिकग्निशन तकनीक का भी उपयोग किया जाएगा।

    इन सुरक्षा उपायों पर प्रतिक्रिया देते हुए पूर्व तमिलनाडु भाजपा अध्यक्ष के. अन्नामलाई ने सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि परीक्षा की सुरक्षा महत्वपूर्ण है, लेकिन सुरक्षा के नाम पर ऐसी व्यवस्थाएं नहीं होनी चाहिएं जो छात्रों के लिए अतिरिक्त तनाव का कारण बन जाएं। उन्होंने कहा कि लंबी जांच प्रक्रियाएं, बढ़ी हुई निगरानी और अतिरिक्त सत्यापन छात्रों की मानसिक स्थिति को प्रभावित कर सकते हैं, विशेष रूप से तब जब वे पहले से ही एक अत्यधिक प्रतिस्पर्धी परीक्षा की तैयारी कर रहे हों।

    अन्नामलाई ने यह भी तर्क दिया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का प्रमुख उद्देश्य छात्रों पर परीक्षा संबंधी दबाव कम करना था। उनके अनुसार वर्तमान व्यवस्था इस लक्ष्य के विपरीत दिखाई देती है। उन्होंने परीक्षा से पहले एडमिट कार्ड डाउनलोड करने में आई तकनीकी समस्याओं का भी उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे मुद्दे छात्रों की चिंता को और बढ़ा सकते हैं।

    वहीं भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने इन आलोचनाओं का जवाब देते हुए कहा है कि परीक्षा की विश्वसनीयता और पारदर्शिता सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। पार्टी नेताओं का कहना है कि बायोमेट्रिक सत्यापन, सीसीटीवी निगरानी और डिजिटल पहचान जैसी व्यवस्थाएं आज दुनिया की कई प्रमुख परीक्षाओं में सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा हैं। उनका मानना है कि इन उपायों का उद्देश्य किसी पर दबाव बनाना नहीं बल्कि योग्य और मेहनती छात्रों के हितों की रक्षा करना है।

    परीक्षा एजेंसियों का भी कहना है कि हाल के वर्षों में सामने आए पेपर लीक नेटवर्क और संगठित नकल गिरोहों को देखते हुए सुरक्षा मानकों को मजबूत करना आवश्यक हो गया था। इसी क्रम में डिजिटल संचार माध्यमों की निगरानी और कुछ प्लेटफॉर्म्स की पहुंच पर अस्थायी नियंत्रण जैसे कदम भी उठाए गए हैं ताकि किसी भी प्रकार की अनियमितता को रोका जा सके।

    शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि परीक्षा की निष्पक्षता और छात्रों की सुविधा दोनों के बीच संतुलन बनाना सबसे बड़ी चुनौती है। जहां मजबूत सुरक्षा व्यवस्था परीक्षा प्रणाली में विश्वास बढ़ाती है, वहीं यह भी आवश्यक है कि छात्रों को अनावश्यक प्रक्रियात्मक दबाव का सामना न करना पड़े। ऐसे में NEET री-टेस्ट केवल एक परीक्षा नहीं बल्कि परीक्षा प्रबंधन और सुरक्षा मॉडल की भी महत्वपूर्ण परीक्षा बन गया है, जिसके परिणाम भविष्य की राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं की दिशा तय कर सकते हैं।

  • जबलपुर एसपी ऑफिस में महिलाओं के बीच मारपीट, बाल खींचे-गाल नोचे; पुलिस ने कराया बीच-बचाव

    जबलपुर एसपी ऑफिस में महिलाओं के बीच मारपीट, बाल खींचे-गाल नोचे; पुलिस ने कराया बीच-बचाव

    जबलपुर जबलपुर के पुलिस अधीक्षक (एसपी) कार्यालय परिसर में मंगलवार दोपहर उस समय हंगामे की स्थिति बन गई, जब दो महिलाएं आपस में भिड़ गईं। देखते ही देखते दोनों के बीच कहासुनी मारपीट में बदल गई और कार्यालय परिसर में अफरा-तफरी मच गई। घटना के दौरान दोनों महिलाओं ने एक-दूसरे को धक्का दिया, बाल खींचे और जमीन पर पटकने तक की नौबत आ गई। मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों और अन्य लोगों ने हस्तक्षेप कर दोनों को अलग कराया।

    जानकारी के अनुसार, घटना मंगलवार दोपहर करीब एक बजे की है। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक दोनों महिलाओं के बीच पहले तीखी बहस हुई, जिसके बाद विवाद अचानक बढ़ गया। दोनों महिलाएं एक-दूसरे पर आरोप लगाते हुए हाथापाई करने लगीं। इस दौरान एक महिला के चेहरे पर नाखून लगने से चोट आई और उसके गाल से खून निकलने लगा। घटना को देखकर आसपास मौजूद लोग भी हैरान रह गए।

    हंगामे की सूचना मिलते ही पुलिसकर्मी मौके पर पहुंचे और दोनों महिलाओं को अलग कराया। इसके बाद सिविल लाइन थाना पुलिस को बुलाया गया। पुलिस दोनों महिलाओं को अपने साथ थाने ले गई, जहां उनसे पूछताछ की गई। बाद में मेडिकल परीक्षण के लिए जिला अस्पताल भी भेजा गया।

    एएसपी सूर्यकांत शर्मा के अनुसार, प्रारंभिक जानकारी में सामने आया है कि खुद को यूट्यूब पत्रकार बताने वाली विद्या रैकवार और पिंकी नामक महिला के बीच किसी पुराने विवाद को लेकर कहासुनी हुई थी। इसी विवाद ने मारपीट का रूप ले लिया। पुलिस दोनों पक्षों के बयान दर्ज कर मामले की जांच कर रही है।

    दूसरी ओर, पिंकी ने आरोप लगाया कि वह एक शिकायत लेकर एसपी कार्यालय पहुंची थी। उसके अनुसार, वहां पहले से मौजूद विद्या रैकवार ने उसके साथ अभद्र व्यवहार किया और विवाद बढ़ने पर मारपीट शुरू हो गई। पिंकी का कहना है कि उसने पहले भी संबंधित मामले की शिकायत पुलिस में की थी और उसे पूर्व में धमकियां भी मिल चुकी हैं। हालांकि इन आरोपों की पुष्टि पुलिस जांच के बाद ही हो सकेगी।

    पुलिस अधिकारियों ने बताया कि पूछताछ के दौरान यह भी सामने आया है कि दोनों महिलाओं के बीच पहले भी विवाद हो चुका है, जिसकी शिकायत संबंधित थाने में दर्ज कराई गई थी। अब पुलिस पुराने विवाद और वर्तमान घटना के बीच संबंधों की भी जांच कर रही है।

    फिलहाल दोनों महिलाओं का मेडिकल परीक्षण कराया गया है और मामले से जुड़े सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने और तथ्यों के सामने आने के बाद नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। एसपी कार्यालय जैसे संवेदनशील परिसर में हुई इस घटना ने सुरक्षा व्यवस्था और अनुशासन को लेकर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

  • नरसिंहपुर में 12 एकड़ सरकारी जमीन अतिक्रमण मुक्त, प्रशासन का बड़ा एक्शन; जेसीबी से ढहाया कच्चा मकान

    नरसिंहपुर में 12 एकड़ सरकारी जमीन अतिक्रमण मुक्त, प्रशासन का बड़ा एक्शन; जेसीबी से ढहाया कच्चा मकान


    नरसिंहपुर नरसिंहपुर जिले की गाडरवारा तहसील के ग्राम टेकापार में सोमवार को प्रशासन ने अतिक्रमण के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए करीब 12 एकड़ शासकीय भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया। राजस्व विभाग, पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की संयुक्त टीम द्वारा चलाए गए इस अभियान के दौरान लंबे समय से सरकारी जमीन पर किए गए अवैध कब्जों को हटाया गया। कार्रवाई के दौरान जेसीबी मशीन और ट्रैक्टरों की सहायता से अतिक्रमण को हटाते हुए एक कच्चे मकान को भी ध्वस्त किया गया।

    प्रशासन की इस कार्रवाई को क्षेत्र में अतिक्रमण के खिलाफ अब तक की महत्वपूर्ण कार्रवाई माना जा रहा है। सुबह शुरू हुआ अभियान देर शाम तक जारी रहा। कार्रवाई के दौरान पूरे इलाके में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे, ताकि किसी प्रकार की अप्रिय स्थिति उत्पन्न न हो। बड़ी संख्या में ग्रामीण भी मौके पर मौजूद रहे और प्रशासनिक कार्रवाई को देखते रहे।

    जानकारी के अनुसार, टेकापार गांव स्थित शासकीय भूमि पर लंबे समय से अवैध कब्जा किया गया था। राजस्व विभाग को इसकी शिकायतें लगातार मिल रही थीं। जांच के बाद प्रशासन ने नियमानुसार कार्रवाई का निर्णय लिया और संयुक्त अभियान चलाकर कब्जे हटाने की प्रक्रिया शुरू की। अभियान का नेतृत्व नायब तहसीलदार ने किया, जबकि राजस्व विभाग के पटवारी, पुलिस बल और अन्य अधिकारी भी मौके पर तैनात रहे।

    अतिक्रमण हटाने के लिए 4 से 5 ट्रैक्टरों के साथ एक जेसीबी मशीन का उपयोग किया गया। अधिकारियों ने जमीन की पैमाइश कर सीमांकन के आधार पर कब्जे हटाए। इस दौरान सरकारी भूमि पर बना एक कच्चा मकान भी प्रशासन ने हटवा दिया। अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई पूरी तरह नियमों के तहत की गई है और शासकीय भूमि को सुरक्षित रखने के लिए भविष्य में भी ऐसे अभियान जारी रहेंगे।

    कार्रवाई के दौरान प्रशासन ने यह सुनिश्चित किया कि कानून-व्यवस्था बनी रहे। पुलिस बल की मौजूदगी के कारण पूरा अभियान शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ। किसी भी तरह के विरोध या विवाद की स्थिति सामने नहीं आई। प्रशासनिक अधिकारियों ने मौके पर मौजूद लोगों को शासकीय भूमि पर कब्जा न करने और नियमों का पालन करने की समझाइश भी दी।

    राजस्व विभाग के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जिलेभर में सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जों की पहचान की जा रही है। जहां भी अतिक्रमण पाया जाएगा, वहां नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि सरकारी संपत्तियों और भूमि की सुरक्षा प्रशासन की प्राथमिकता है और अतिक्रमण के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा।

    टेकापार में हुई इस कार्रवाई के बाद जिले के अन्य क्षेत्रों में भी अतिक्रमणकारियों के बीच हड़कंप की स्थिति देखी जा रही है। प्रशासन के सख्त रुख से यह संदेश गया है कि सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जों को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

  • उन्हेल में युवक की खून से सनी लाश मिलने से सनसनी, घर के अंदर संदिग्ध हालत में मिला शव; हत्या की आशंका

    उन्हेल में युवक की खून से सनी लाश मिलने से सनसनी, घर के अंदर संदिग्ध हालत में मिला शव; हत्या की आशंका

    उज्जैन उज्जैन जिले के उन्हेल थाना क्षेत्र में उस समय सनसनी फैल गई, जब एक युवक का शव उसके ही घर के अंदर खून से लथपथ हालत में मिला। घटना की जानकारी मिलते ही इलाके में लोगों की भीड़ जुट गई और पुलिस महकमे में भी हड़कंप मच गया। प्रथम दृष्टया मामला हत्या का प्रतीत होने पर पुलिस ने गंभीरता से जांच शुरू कर दी है। घटनास्थल पर फोरेंसिक विशेषज्ञों और डॉग स्क्वाड की मदद से साक्ष्य जुटाए गए हैं।

    जानकारी के अनुसार, बुधवार सुबह उन्हेल थाना पुलिस को सूचना मिली कि क्षेत्र के एक मकान में एक व्यक्ति मृत अवस्था में पड़ा हुआ है। सूचना मिलते ही थाना प्रभारी अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे और घर के अंदर जाकर स्थिति का जायजा लिया। पुलिस ने देखा कि युवक का शव खून से सना हुआ था, जिससे मामला संदिग्ध नजर आया। इसके बाद वरिष्ठ अधिकारियों को सूचना देकर एक्सपर्ट टीम और डॉग स्क्वाड को बुलाया गया।

    पुलिस जांच में मृतक की पहचान विक्रम पिता अशोक, उम्र लगभग 35 वर्ष, निवासी नाग चबूतरा मंदिर के पीछे, उन्हेल के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि विक्रम मजदूरी कर अपने परिवार का पालन-पोषण करता था। उसके परिवार में पत्नी और एक बच्चा है। युवक की अचानक हुई मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है, वहीं आसपास के लोग भी घटना से स्तब्ध हैं।

    घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण करने के बाद पुलिस ने कई महत्वपूर्ण साक्ष्य एकत्र किए हैं। अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि युवक की मौत किन परिस्थितियों में हुई और इसके पीछे कोई आपराधिक साजिश तो नहीं है। आसपास के लोगों और परिजनों से भी पूछताछ की जा रही है ताकि घटना से जुड़े महत्वपूर्ण सुराग मिल सकें।

    सीएसपी विक्रम सिंह अहिरवार ने बताया कि प्रारंभिक जांच में मामला संदिग्ध प्रतीत हो रहा है, इसलिए पुलिस सभी संभावनाओं को ध्यान में रखकर जांच कर रही है। उन्होंने कहा कि घटनास्थल से कुछ महत्वपूर्ण साक्ष्य एकत्र किए गए हैं, जिनकी जांच की जा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद मौत के वास्तविक कारणों का खुलासा हो सकेगा।

    पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की विवेचना जारी है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने और सभी तथ्यों के सामने आने के बाद ही घटना के कारणों तथा संभावित आरोपियों के बारे में स्पष्ट जानकारी दी जा सकेगी। फिलहाल पूरे क्षेत्र में इस घटना को लेकर चर्चा का माहौल है और लोग पुलिस जांच के नतीजों का इंतजार कर रहे हैं।

  • जुबली गर्ल आशा पारेख के त्याग की अनकही दास्तान: शादीशुदा फिल्ममेकर से बेइंतहा मोहब्बत के बाद भी ताउम्र क्यों कुंवारी रहीं दिग्गज अभिनेत्री

    जुबली गर्ल आशा पारेख के त्याग की अनकही दास्तान: शादीशुदा फिल्ममेकर से बेइंतहा मोहब्बत के बाद भी ताउम्र क्यों कुंवारी रहीं दिग्गज अभिनेत्री

    नई दिल्ली । हिंदी सिनेमा के सुनहरे दौर में साठ और सत्तर के दशक में सिल्वर स्क्रीन
     राज करने वाली सदाबहार अभिनेत्री आशा पारेख की पेशेवर जिंदगी जितनी चकाचौंध और सफलताओं से भरी रही, उनकी निजी जिंदगी में उतनी ही खामोशी और त्याग की एक अनूठी कहानी छिपी रही। अपनी बेमिसाल खूबसूरती और बेहतरीन अभिनय के दम पर करोड़ों प्रशंसकों को अपना दीवाना बनाने वाली इस महान अदाकारा ने अपनी असल जिंदगी में प्यार की एक ऐसी गरिमापूर्ण मिसाल पेश की, जिसकी चर्चा आज भी बॉलीवुड के गलियारों में बेहद सम्मान के साथ की जाती है। उन्होंने एक शादीशुदा मर्द से सच्ची मोहब्बत तो की, लेकिन समाज में ‘घर तोड़ने वाली’ कहलाने का कलंक झेलने की बजाय ताउम्र कुंवारी रहने का रास्ता चुना।

    इस निश्छल और मूक प्रेम कहानी की शुरुआत वर्ष उन्नीस सौ उनसठ में हुई थी, जब मशहूर फिल्म निर्माता और निर्देशक नासिर हुसैन ने युवा आशा पारेख की प्रतिभा को पहचानते हुए उन्हें अपनी फिल्म ‘दिल देके देखो’ में मुख्य अभिनेत्री के तौर पर एक बड़ा ब्रेक दिया था। यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर ब्लॉकबस्टर साबित हुई और इसके बाद इस जोड़ी ने एक के बाद एक कई शानदार और जुबली फिल्में सिनेमा जगत को दीं। सेट पर एक साथ लगातार काम करने के दौरान आशा पारेख कब अपने निर्देशक को दिल दे बैठीं, उन्हें खुद भी इसका अहसास नहीं हुआ और दूसरी तरफ नासिर हुसैन के दिल में भी उनके लिए वही सम्मानजनक भावनाएं थीं।

    नासिर हुसैन के लिए अपने दिल में बेइंतहा मोहब्बत और कशिश होने के बावजूद आशा पारेख ने कभी भी अपने हक के लिए उनके सामने कोई जिद या शर्त नहीं रखी। इसके पीछे की सबसे बड़ी वजह यह थी कि नासिर हुसैन पहले से ही शादीशुदा थे और बाल-बच्चों के साथ एक खुशहाल जीवन बिता रहे थे। अभिनेत्री के भीतर के नैतिक मूल्यों ने उन्हें कभी इस बात की इजाजत नहीं दी कि उनके व्यक्तिगत सुख या प्यार की खातिर किसी दूसरी औरत का सुहाग और एक हंसता-खेलता परिवार हमेशा के लिए बिखर जाए। उन्होंने अपने दिल की आवाज को दबाकर दूसरे के आशियाने की हिफाजत करना ज्यादा जरूरी समझा।

    दशकों तक इस खामोश दर्द और मोहब्बत को अपने सीने में दफन रखने के बाद, आशा पारेख ने वर्ष दो हजार सत्रह में प्रकाशित हुई अपनी आत्मकथा ‘द हिट गर्ल’ में इस राज से पर्दा उठाया था। उन्होंने बेहद भावुक शब्दों में स्वीकार किया था कि नासिर हुसैन ही उनकी जिंदगी के एकमात्र ऐसे पुरुष थे जिनसे उन्होंने बेहद शिद्दत से प्यार किया था। लेकिन किसी का घर उजाड़कर अपनी खुशियों का महल खड़ा करना उनके संस्कारों के खिलाफ था, यही वजह थी कि उन्होंने नासिर हुसैन पर शादी का दबाव बनाने की बजाय खुद अकेले जिंदगी काटने का एक बेहद कठिन और साहसिक निर्णय लिया।

    अपनी पूरी जिंदगी तन्हाई और अकेलेपन में गुजारने के बाद भी इस उम्र में पद्मश्री और दादा साहब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित अभिनेत्री के मन में अपने अतीत के फैसलों को लेकर कोई मलाल, कड़वाहट या शिकायत नहीं है। उनका हमेशा से यह दृढ़ विश्वास रहा है कि किसी दूसरे को दुख देकर हासिल की गई खुशी कभी भी स्थायी और सच्ची नहीं हो सकती। आज बयासी वर्ष से अधिक की उम्र पार कर चुकीं आशा पारेख अपने इस फैसले पर अडिग रहते हुए पूरे आत्मसम्मान, सुकून और गरिमा के साथ अपनी एकाकी जिंदगी का आनंद ले रही हैं, जो आज के दौर के रिश्तों के लिए एक बहुत बड़ी नजीर है।