Author: bharati

  • भारत-चीन सीमा वार्ता में LAC पर शांति के साथ नदी जल डेटा साझा करने और अपस्ट्रीम परियोजनाओं में पारदर्शिता पर जोर

    भारत-चीन सीमा वार्ता में LAC पर शांति के साथ नदी जल डेटा साझा करने और अपस्ट्रीम परियोजनाओं में पारदर्शिता पर जोर


    नई दिल्ली ।
    भारत और चीन के बीच सीमा मामलों को लेकर बातचीत का एक और महत्वपूर्ण दौर हुआ, जिसमें वास्तविक नियंत्रण रेखा यानी LAC की मौजूदा स्थिति, लंबित सीमा मुद्दों, सीमा प्रबंधन और दोनों देशों के बीच नदी सहयोग से जुड़े विषयों पर चर्चा की गई। बातचीत के दौरान भारत ने स्पष्ट किया कि सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता दोनों देशों के संबंधों को सामान्य दिशा में आगे बढ़ाने के लिए बेहद जरूरी है। इसके साथ ही भारत ने चीन की अपस्ट्रीम नदी परियोजनाओं से जुड़ी गतिविधियों में पारदर्शिता बढ़ाने और निचले बहाव वाले देशों के हितों का ध्यान रखने की आवश्यकता पर जोर दिया।

    भारत की ओर से सीमा पार नदियों से जुड़े सहयोग को दोबारा सक्रिय करने का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। भारत ने 2006 में स्थापित एक्सपर्ट लेवल मैकेनिज्म ऑन ट्रांस-बॉर्डर रिवर्स की अगली बैठक जल्द आयोजित करने की जरूरत बताई। इस तंत्र के माध्यम से दोनों देशों के बीच सीमा पार बहने वाली नदियों से जुड़े तकनीकी और जल संसाधन संबंधी विषयों पर बातचीत होती रही है। भारत ने अपस्ट्रीम परियोजनाओं से संबंधित तकनीकी सूचनाओं को साझा करने को भी महत्वपूर्ण बताया है, ताकि नदियों के प्रवाह और संभावित प्रभावों को लेकर बेहतर समन्वय कायम किया जा सके।

    यह मुद्दा इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि चीन की ओर से बड़े बांध और जलविद्युत परियोजनाओं को लेकर गतिविधियां बढ़ी हैं। भारत लगातार इस बात पर जोर देता रहा है कि ऊपरी बहाव में बनने वाली बड़ी जल परियोजनाओं का असर निचले बहाव वाले देशों के हितों पर नहीं पड़ना चाहिए। भारत ने चीन के समक्ष अपनी चिंताओं को रखते हुए कहा है कि अपस्ट्रीम गतिविधियों के संबंध में पर्याप्त पारदर्शिता और समय पर जानकारी साझा करना जरूरी है।

    हाइड्रोलॉजिकल डेटा यानी नदियों के जल प्रवाह और जल स्तर से संबंधित आंकड़ों को साझा करना भी दोनों देशों के बीच सहयोग का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। भारत का मानना है कि नियमित और विश्वसनीय आंकड़ों की उपलब्धता से बाढ़ जैसी परिस्थितियों से निपटने, जल संसाधन प्रबंधन बेहतर करने और सीमा पार नदियों से जुड़े संभावित जोखिमों को समझने में मदद मिल सकती है। इसी वजह से भारत ने सीमा पार नदी सहयोग को फिर से मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया है।

    भारत-चीन सीमा मामलों पर बातचीत के लिए गठित वर्किंग मैकेनिज्म फॉर कंसल्टेशन एंड कोऑर्डिनेशन यानी WMCC की 36वीं बैठक में इन मुद्दों के साथ LAC से जुड़े लंबित विषयों पर भी विस्तार से चर्चा हुई। दोनों पक्षों ने गलतफहमी और तनाव की स्थिति से बचने के लिए उपलब्ध कूटनीतिक और सैन्य माध्यमों का इस्तेमाल जारी रखने पर सहमति जताई। सीमा क्षेत्रों में स्थिरता बनाए रखना दोनों देशों के बीच व्यापक संबंधों में सुधार के लिए महत्वपूर्ण माना गया।

    बैठक में सीमा निर्धारण और बॉर्डर मैनेजमेंट से जुड़े विषयों पर भी चर्चा हुई। पिछले वर्ष हुई स्पेशल रिप्रेजेंटेटिव स्तर की 24वीं वार्ता के परिणामों को आगे बढ़ाने पर दोनों पक्षों ने विचार किया। इसी प्रक्रिया के तहत सीमा निर्धारण से जुड़े कुछ मुद्दों पर शुरुआती प्रगति की संभावनाओं का अध्ययन करने के लिए WMCC के तहत विशेषज्ञ समूह गठित करने की दिशा में भी काम आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया है।

    भारत और चीन के बीच सीमा विवाद लंबे समय से दोनों देशों के संबंधों के लिए संवेदनशील मुद्दा रहा है। ऐसे में LAC पर शांति बनाए रखने के साथ नदी जल और सीमा पार सहयोग जैसे विषयों पर नियमित संवाद दोनों देशों के लिए महत्वपूर्ण है। ताजा बातचीत से संकेत मिलता है कि दोनों पक्ष विवादित मुद्दों के साथ-साथ व्यावहारिक सहयोग के क्षेत्रों में भी संवाद बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं। आने वाले समय में सीमा वार्ता और नदी सहयोग से जुड़े तंत्र की अगली बैठकों से यह स्पष्ट होगा कि इन मुद्दों पर जमीनी स्तर पर कितना आगे बढ़ा जा सकता है।

  • डीपफेक पर मेटा से सरकार की दो टूक, कार्रवाई नहीं हुई तो भारतीय कानून के तहत तय हो सकती है कंपनी की जवाबदेही

    डीपफेक पर मेटा से सरकार की दो टूक, कार्रवाई नहीं हुई तो भारतीय कानून के तहत तय हो सकती है कंपनी की जवाबदेही

    नई दिल्ली । डीपफेक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता से तैयार होने वाली भ्रामक सामग्री को लेकर केंद्र सरकार ने सोशल मीडिया मंच मेटा के प्रति सख्त रुख अपनाया है। सरकार ने कंपनी से डीपफेक सामग्री के खिलाफ ठोस और प्रभावी कदम उठाने को कहा है। साथ ही मेटा के साथ हुई बैठकों के परिणामों की समीक्षा के बाद आगे की कार्रवाई को लेकर कानूनी राय लेने की प्रक्रिया शुरू करने की बात सामने आई है। सरकार यह भी जांच कर रही है कि भारतीय कानून के तहत मेटा और अन्य ऑनलाइन मंचों को मिलने वाले मध्यस्थ के दर्जे की शर्तों का सही तरीके से पालन किया जा रहा है या नहीं।

    सरकारी सूत्रों के अनुसार, मौजूदा समीक्षा का मुख्य सवाल यह है कि ऑनलाइन मंच भारतीय कानून में मध्यस्थों के लिए निर्धारित जिम्मेदारियों का पालन कर रहे हैं या नहीं। सरकार यह भी देख रही है कि यदि किसी मंच की तकनीकी प्रणाली यह तय करती है कि किसी यूजर को कौन-सी सामग्री दिखाई जाएगी, तो उस स्थिति में उसकी भूमिका केवल एक निष्क्रिय मध्यस्थ तक सीमित मानी जा सकती है या नहीं। इसी आधार पर संबंधित कंपनियों की जिम्मेदारी तय करने को लेकर कानूनी पहलुओं की जांच की जा रही है।

    सरकार की नजर केवल मेटा तक सीमित नहीं रहने वाली है। आने वाले समय में अन्य प्रमुख ऑनलाइन मंचों को भी बातचीत के लिए बुलाया जा सकता है। इनके माध्यम से यह समझने की कोशिश होगी कि उनकी अनुशंसा प्रणाली किस तरह काम करती है और यूजर्स तक सामग्री पहुंचाने में उनकी तकनीकी भूमिका कितनी सक्रिय है। सरकार यह भी देख रही है कि भुगतान वाली सामग्री को बढ़ावा देने और यूजर के लिए सामग्री चुनने वाली प्रणालियों की भूमिका भारतीय कानून के मौजूदा प्रावधानों के तहत किस तरह निर्धारित होती है।

    डीपफेक को लेकर सरकार की चिंता इसलिए भी बढ़ी है क्योंकि एआई तकनीक के इस्तेमाल से वास्तविक व्यक्ति के चेहरे, आवाज और वीडियो को बदलकर ऐसी सामग्री तैयार की जा सकती है, जो देखने में वास्तविक लगती है। ऐसी सामग्री का इस्तेमाल गलत सूचना फैलाने, किसी व्यक्ति की छवि खराब करने और लोगों को भ्रमित करने के लिए किया जा सकता है। बिना स्पष्ट लेबल वाली एआई-जनित सामग्री भी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर यूजर्स के लिए भ्रम की स्थिति पैदा कर सकती है।

    सरकार और मेटा के बीच इस मुद्दे पर लगातार कई दौर की बैठकें हुई हैं। दो दिनों तक कंपनी की टीम से विस्तृत पूछताछ के बाद तीसरे दिन तकनीकी स्तर पर चर्चा की गई। इसमें डीपफेक, बाल यौन शोषण सामग्री और बिना लेबल वाली एआई-जनित सामग्री से निपटने के लिए कंपनी की कार्ययोजना पर विशेष रूप से चर्चा हुई। सरकार की ओर से प्लेटफॉर्म की तकनीकी व्यवस्था और कंटेंट मॉडरेशन प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए गए।

    यह पूरा मामला उस घटनाक्रम के बाद और महत्वपूर्ण हो गया, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक सोशल मीडिया पोस्ट पर मेटा के एआई आधारित कंटेंट फिल्टर की वजह से अस्थायी रोक लग गई थी। बाद में कंपनी ने इसे तकनीकी गलती बताया और पोस्ट बहाल करते हुए माफी मांगी थी। इसके बाद सरकार और कंपनी के बीच हुई बैठकों में प्लेटफॉर्म की कंटेंट मॉडरेशन व्यवस्था और तकनीकी प्रणालियों की भूमिका पर विशेष ध्यान दिया गया।

    अब सरकार बैठकों से मिले जवाबों और मेटा की कार्ययोजना की समीक्षा कर रही है। इसके बाद कानूनी राय के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जा सकती है। यदि जांच में यह पाया जाता है कि प्लेटफॉर्म भारतीय कानून के तहत अपनी जिम्मेदारियों का पालन नहीं कर रहे हैं, तो उनकी जवाबदेही तय करने की दिशा में कदम उठाए जा सकते हैं। इससे भारत में डीपफेक, एआई सामग्री और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारी को लेकर नियामकीय व्यवस्था और सख्त होने के संकेत मिल रहे हैं।

  • रांची में JPSC-JSSC छात्रों और सरकार के बीच बातचीत सकारात्मक, मांगें पूरी नहीं होने तक आंदोलन जारी रखने का फैसला

    रांची में JPSC-JSSC छात्रों और सरकार के बीच बातचीत सकारात्मक, मांगें पूरी नहीं होने तक आंदोलन जारी रखने का फैसला

    नई दिल्ली । झारखंड की राजधानी रांची में सरकारी भर्ती परीक्षाओं को लेकर छात्रों का आंदोलन शनिवार को 15वें दिन भी जारी रहा। जेपीएससी और जेएसएससी की परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी के आरोपों को लेकर प्रदर्शन कर रहे छात्रों के एक प्रतिनिधिमंडल ने सरकार के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत की। शुक्रवार रात से शुरू हुई बातचीत शनिवार को भी आगे बढ़ी। छात्रों ने बैठक को सकारात्मक बताया, लेकिन साफ कर दिया कि अभी उनकी किसी प्रमुख मांग पर ठोस फैसला नहीं हुआ है। ऐसे में आंदोलन समाप्त करने का निर्णय नहीं लिया गया है।

    देवेंद्र नाथ महतो के नेतृत्व वाले JPSC-JSSC न्याय गुट के आठ छात्रों ने राज्य अतिथि गृह में सरकार के प्रतिनिधियों से मुलाकात की। जानकारी के अनुसार बैठक शनिवार सुबह करीब 11 बजकर 20 मिनट पर शुरू हुई। बातचीत के बाद छात्र वापस प्रदर्शन स्थल पर लौट आए। छात्र नेताओं ने कहा कि सरकार के साथ बातचीत का माहौल सकारात्मक रहा और उनकी बातों को सुना गया, लेकिन केवल बातचीत से आंदोलन समाप्त नहीं होगा। उनका कहना है कि उन्हें आश्वासन के बजाय अपनी मांगों पर स्पष्ट और ठोस कार्रवाई चाहिए।

    छात्रों की प्रमुख मांग 14वीं जेपीएससी परीक्षा को लेकर है। प्रदर्शनकारी इस परीक्षा को रद्द करने की मांग कर रहे हैं। उनका आरोप है कि परीक्षा प्रक्रिया में गड़बड़ी हुई है और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए। छात्रों ने जांच के लिए केंद्रीय जांच एजेंसी या राज्य से बाहर के सेवानिवृत्त हाई कोर्ट न्यायाधीशों की समिति गठित करने की मांग रखी है। इसके अलावा जेपीएससी और जेएसएससी की परीक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की मांग भी आंदोलन का अहम हिस्सा है।

    बातचीत के बाद झारखंड सरकार की ओर से मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने कहा कि सरकार अलग-अलग छात्र समूहों और संबंधित लोगों से लगातार बातचीत करेगी। उन्होंने कहा कि सभी पक्षों के सुझाव लिए जाएंगे ताकि मामले को समझकर आगे की कार्रवाई की जा सके। सरकार की ओर से लोगों से अपनी बात और सुझाव साझा करने के लिए ईमेल के माध्यम से जानकारी देने की व्यवस्था भी किए जाने की बात सामने आई है।

    छात्रों का कहना है कि भर्ती परीक्षाओं की निष्पक्षता उनके भविष्य से सीधे जुड़ी हुई है। इसलिए वे कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच और परीक्षा प्रणाली में सुधार के मुद्दे पर पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक धरना जारी रहेगा।

    आंदोलनकारियों ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि रविवार तक उनकी मांगों पर संतोषजनक फैसला नहीं लिया गया, तो 10 अगस्त को विधानसभा की ओर मार्च किया जाएगा। इससे आने वाले दिनों में आंदोलन के और तेज होने की संभावना बनी हुई है। हालांकि सरकार और छात्रों के बीच बातचीत शुरू होने से समाधान की उम्मीद जरूर जगी है, लेकिन फिलहाल दोनों पक्षों के बीच प्रमुख मांगों को लेकर गतिरोध कायम है। अब नजर इस बात पर है कि सरकार छात्रों की मांगों पर क्या कदम उठाती है और क्या बातचीत के जरिए आंदोलन को समाप्त करने का रास्ता निकल पाता है।

  • अपने होम स्टेट में घर बसाना चाहते हैं ऋषभ पंत, तीन साल से जमीन की तलाश के बाद सीएम से लगाई गुहार

    अपने होम स्टेट में घर बसाना चाहते हैं ऋषभ पंत, तीन साल से जमीन की तलाश के बाद सीएम से लगाई गुहार

    नई दिल्ली । भारतीय क्रिकेट टीम के स्टार विकेटकीपर-बल्लेबाज ऋषभ पंत इन दिनों श्रीलंका दौरे पर हैं, लेकिन इस बीच उनका एक सोशल मीडिया पोस्ट चर्चा में आ गया है। पंत ने उत्तराखंड में जमीन नहीं मिलने को लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मदद की अपील की है। उन्होंने कहा कि वह दिल्ली से अपने गृह राज्य उत्तराखंड में वापस आकर बसना चाहते हैं और इसके लिए लंबे समय से जमीन तलाश रहे हैं, लेकिन उन्हें अब तक उपयुक्त जमीन नहीं मिल सकी है।

    ऋषभ पंत ने सोशल मीडिया पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को संबोधित करते हुए कहा कि वह लंबे समय से उत्तराखंड में जमीन लेने की कोशिश कर रहे हैं। उनका कहना है कि वह दिल्ली से उत्तराखंड शिफ्ट होना चाहते हैं और अपने परिवार के साथ अपने राज्य में रहना चाहते हैं। पंत ने बड़ी और अच्छी जमीन की जरूरत बताई, जहां वह अपना घर बना सकें और स्थायी रूप से रह सकें।

    पंत ने अपनी पोस्ट में उत्तराखंड के प्रति अपने लगाव का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि वह अपने राज्य से बेहद प्यार करते हैं और पहाड़ के लोगों के बीच रहना चाहते हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री से मामले को देखने और जमीन उपलब्ध कराने में मदद करने की अपील की। पंत के मुताबिक, इस प्रयास को करीब तीन साल हो चुके हैं, लेकिन अब तक उन्हें जमीन नहीं मिल पाई है।

    क्रिकेटर ने यह भी कहा कि उन्हें उत्तराखंड को प्रमोट करने के उद्देश्य से कुछ अन्य जमीन भी मिलनी थी, लेकिन वह प्रक्रिया भी पूरी नहीं हो सकी। इसके बाद पंत ने एक और पोस्ट करते हुए कहा कि अपने राज्य के लिए देश का उच्च स्तर पर प्रतिनिधित्व करने के बदले अगर राज्य की ओर से घर बनाने के लिए जमीन मिल जाए तो यह उनके लिए खुशी की बात होगी। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जरूरत पड़ने पर वह सरकार से जमीन खरीदने के लिए तैयार हैं।

    ऋषभ पंत की अपील पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रतिक्रिया देते हुए मदद का भरोसा दिया। मुख्यमंत्री ने पंत को उत्तराखंड का गौरव बताते हुए कहा कि उन्होंने अपने खेल और उपलब्धियों से देश-दुनिया में देवभूमि का नाम रोशन किया है। उन्होंने पंत की मातृभूमि के प्रति भावना और उत्तराखंड लौटकर योगदान देने की इच्छा की सराहना की।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि पंत द्वारा उठाए गए मामले के संबंध में संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए जा रहे हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि अधिकारी जल्द ही ऋषभ पंत से संपर्क करेंगे और नियमानुसार हरसंभव सहयोग सुनिश्चित किया जाएगा। इससे पंत की जमीन से जुड़ी समस्या के समाधान की उम्मीद बढ़ी है।

    हालांकि, ऋषभ पंत उत्तराखंड में पूरी तरह जमीनविहीन नहीं हैं। रुड़की में उनके परिवार का करीब दो से ढाई हजार वर्ग गज में फैला पैतृक मकान है। इसी परिसर में उनके पिता स्वर्गीय राजेंद्र पंत पहले न्यू मॉडर्न पब्लिक स्कूल भी चलाते थे। परिवार का यह आवास आज भी मौजूद है और वहां ऋषभ पंत की मां रहती हैं। मकान पर उनके पिता के साथ ऋषभ पंत के नाम की नेम प्लेट भी लगी हुई है।

    पंत का पैतृक संबंध पिथौरागढ़ जिले के गंगोलीहाट विकासखंड के गांव पाली से भी है। गांव में उनके परिवार के सदस्य और उनके दो चाचा जगदीश चंद्र पंत और हेम पंत रहते हैं। ऐसे में उत्तराखंड में जमीन और घर को लेकर पंत की इच्छा उनके पुराने पारिवारिक जुड़ाव से भी जुड़ी हुई है। अब मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद संबंधित अधिकारी इस मामले में क्या कदम उठाते हैं, इस पर सभी की नजर रहेगी।

  • आज प्रयागराज से राहुल गांधी का यूपी में चुनावी शंखनाद, 2 लाख छात्रों से करेंगे संवाद

    आज प्रयागराज से राहुल गांधी का यूपी में चुनावी शंखनाद, 2 लाख छात्रों से करेंगे संवाद

    प्रयागराज। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी शनिवार को प्रयागराज से उत्तर प्रदेश में चुनावी अभियान का आगाज करेंगे। वह केपी इंटर कॉलेज मैदान में करीब दो घंटे तक छात्रों से सीधा संवाद करेंगे। कांग्रेस ने इस कार्यक्रम के जरिए पूर्वांचल के युवाओं तक पहुंच बनाने की रणनीति तैयार की है। कार्यक्रम में प्रदेश के करीब 25 जिलों के शहर और जिला अध्यक्षों के साथ कांग्रेस के सभी छह सांसद और कई वरिष्ठ नेता भी मौजूद रहेंगे।

    राहुल गांधी शाम 6:30 बजे से रात 8:30 बजे तक छात्रों से संवाद करेंगे। इस दौरान नीट, आरओ/आरआरओ समेत अन्य भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक, परीक्षाओं में देरी, भर्ती प्रक्रिया में भ्रष्टाचार और बेरोजगारी जैसे मुद्दे प्रमुख रहेंगे। कांग्रेस के मुताबिक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए करीब दो लाख छात्रों ने रजिस्ट्रेशन कराया है।

    स्वराज भवन में नेताओं के साथ करेंगे मंथन
    छात्र संवाद कार्यक्रम से पहले राहुल गांधी अपने पैतृक आवास स्वराज भवन पहुंचेंगे। यहां वह करीब ढाई घंटे रुकेंगे। इस दौरान पार्टी के सांसदों, विधायकों, प्रदेश प्रभारी, सहप्रभारियों और वरिष्ठ नेताओं के साथ आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर चर्चा करेंगे। कांग्रेस ने प्रयागराज को चुनने के पीछे यहां मौजूद बड़ी छात्र आबादी को भी अहम वजह माना है। राजस्थान और उत्तराखंड के बाद राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के तहत प्रयागराज में यह आयोजन किया जा रहा है।

    प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का बड़ा केंद्र है प्रयागराज
    प्रयागराज में करीब दो लाख छात्र अलग-अलग डेलीगेसियों और हॉस्टलों में रहकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। इनमें आधे से ज्यादा युवा पूर्वांचल के विभिन्न जिलों से आते हैं। ऐसे में कांग्रेस की नजर इस बड़े युवा वर्ग पर है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय लंबे समय से देश की राजनीति का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। इसके अलावा मोती लाल नेहरू राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान और भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान जैसे प्रमुख संस्थानों में भी देशभर से छात्र पढ़ने आते हैं।

    पॉप सिंगर लश्करी और MC अल्ताफ देंगे प्रस्तुति
    कार्यक्रम की शुरुआत सांस्कृतिक और सांगीतिक प्रस्तुतियों से होगी। जेन-जी की पसंद को ध्यान में रखते हुए पॉप सिंगर लश्करी और एमसी अल्ताफ को प्रस्तुति के लिए बुलाया गया है। आयोजकों के मुताबिक कार्यक्रम में किसी तरह का राजनीतिक भाषण नहीं होगा। राहुल गांधी सीधे छात्रों से संवाद करेंगे और उनके सामने रोजगार, भर्ती परीक्षाओं और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करेंगे।

  • जेकेआरएलएम की पहल से ग्रामीण महिलाएं बन रहीं उद्यमी, स्वयं सहायता समूहों के जरिए रोजगार और आय के बढ़े अवसर

    जेकेआरएलएम की पहल से ग्रामीण महिलाएं बन रहीं उद्यमी, स्वयं सहायता समूहों के जरिए रोजगार और आय के बढ़े अवसर


    नई दिल्ली ।
    जम्मू-कश्मीर के ग्रामीण इलाकों में महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। अवंतीपोरा में स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं ने मिशन के सहयोग से फूड सर्विस एंटरप्राइज स्थापित कर यह साबित किया है कि उचित प्रशिक्षण, संसाधन और संस्थागत सहयोग मिलने पर ग्रामीण महिलाएं सफल उद्यम खड़ा कर सकती हैं। इस पहल के जरिए महिलाओं को सम्मानजनक आय का साधन मिलने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी तैयार हो रहे हैं।

    राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन को जम्मू-कश्मीर में जम्मू-कश्मीर ग्रामीण आजीविका मिशन यानी जेकेआरएलएम के नाम से लागू किया जा रहा है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से संगठित कर उन्हें आर्थिक गतिविधियों से जोड़ना और उनकी आय बढ़ाने के अवसर उपलब्ध कराना है। अवंतीपोरा में शुरू किया गया फूड सर्विस उद्यम इसी प्रयास का एक उदाहरण है, जहां महिलाओं ने आजीविका के पारंपरिक साधनों से आगे बढ़कर कारोबार की दिशा में कदम रखा है।

    ग्रामीण विकास विभाग के सचिव एजाज असद ने बताया कि जेकेआरएलएम को ‘उम्मीद’ के नाम से भी जाना जाता है और इस पहल ने ग्रामीण महिलाओं के लिए आर्थिक अवसरों का विस्तार किया है। उन्होंने कहा कि पुलवामा जिले में फूड सर्विस एंटरप्राइज शुरू किया गया है। इसके लिए राष्ट्रीय संसाधन संगठन ‘कुडुम्बश्री’ के साथ समझौता किया गया है। कुडुम्बश्री को फूड सर्विस से जुड़े उद्यमों को स्थापित करने और संचालित करने का अनुभव है।

    अधिकारियों के अनुसार पुलवामा सहित जम्मू-कश्मीर के 12 अन्य जिलों में भी इस तरह के उद्यम शुरू किए जा चुके हैं। योजना का लक्ष्य आने वाले समय में प्रदेश के सभी 20 जिलों तक इस मॉडल का विस्तार करना है। इन उद्यमों की जिम्मेदारी स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को दी जाएगी। इसका उद्देश्य महिलाओं को केवल समूह आधारित गतिविधियों तक सीमित रखने के बजाय उन्हें स्थायी आय और कारोबार के अवसर उपलब्ध कराना है, ताकि वे ‘लखपति दीदी’ बनने की दिशा में आगे बढ़ सकें।

    जेकेआरएलएम की महिला अधिकारी शाबरा शर्मा ने बताया कि मिशन का मुख्य उद्देश्य स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना है। अवंतीपोरा में स्थापित फूड सर्विस एंटरप्राइज इसी सोच के तहत विकसित किया गया है। महिलाओं को उद्यम संचालन से जोड़कर उन्हें व्यावसायिक अनुभव हासिल करने और अपनी आय बढ़ाने का अवसर दिया जा रहा है।

    ग्रामीण क्षेत्रों में परिवहन की समस्या भी महिलाओं के आर्थिक अवसरों में बाधा बनती है। इसे ध्यान में रखते हुए योजना के तहत जरूरतमंद महिलाओं को वाहनों की सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है। अधिकारियों के मुताबिक जम्मू-कश्मीर में करीब 96 हजार स्वयं सहायता समूह हैं, जिनसे लगभग साढ़े आठ लाख महिलाएं जुड़ी हुई हैं। इन समूहों के जरिए महिलाओं को सामूहिक रूप से आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने और उन्हें उद्यमिता की ओर ले जाने का प्रयास किया जा रहा है। अवंतीपोरा का फूड सर्विस उद्यम इसी बदलाव की तस्वीर पेश करता है, जहां ग्रामीण महिलाएं अब केवल आजीविका चलाने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि अपने कारोबार को आगे बढ़ाने और दूसरों के लिए रोजगार पैदा करने की दिशा में भी कदम बढ़ा रही हैं।

  • श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर 9 अगस्त से कारसेवा, मथुरा में जुटने लगे साधु-संत, पुलिस अलर्ट

    श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर 9 अगस्त से कारसेवा, मथुरा में जुटने लगे साधु-संत, पुलिस अलर्ट

    मथुरा। श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर निर्माण के लिए मथुरा में 9 अगस्त से प्रस्तावित कारसेवा को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। राधाकुंड क्षेत्र के जुल्हेंदी स्थित चित्रगुप्त पीठ में 9 अगस्त को कारसेवा का शंखनाद किया जाएगा। आयोजन से पहले ही देश के अलग-अलग हिस्सों से साधु-संतों का मथुरा पहुंचना शुरू हो गया है। कार्यक्रम में 13 अखाड़ों के महंतों के शामिल होने का दावा किया जा रहा है। आयोजन को देखते हुए पुलिस-प्रशासन भी सतर्क हो गया है।

    श्रीराम मंदिर में लगे पत्थरों की पहली खेप पहुंची
    श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर निर्माण के लिए मंगाए गए गुलाबी पत्थरों की पहली खेप शुक्रवार देर रात चित्रगुप्त पीठ पहुंच गई। ये पत्थर राजस्थान के भरतपुर स्थित बंसीपहाड़पुर से मंगाए गए हैं। इसी क्षेत्र के गुलाबी पत्थरों का इस्तेमाल अयोध्या में श्रीराम मंदिर के निर्माण में भी किया गया है। चित्रगुप्त पीठाधीश्वर स्वामी सच्चिदानंद महाराज की ओर से इन पत्थरों का ऑर्डर दिया गया है। रविवार से शंखनाद कार्यक्रम के लिए पत्थरों को तराशने का काम शुरू किए जाने की तैयारी है।

    5 हजार मीट्रिक टन पत्थरों का दिया गया है ऑर्डर
    स्वामी सच्चिदानंद महाराज के अनुसार, 9 अगस्त को आश्रम से विधिवत कारसेवा की घोषणा की जाएगी। इसके लिए एक बड़े कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें 13 अखाड़ों के साधु-संतों को आमंत्रित किया गया है। उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण की जन्मभूमि पर भव्य मंदिर निर्माण का संकल्प लिया गया है। इसके लिए गुलाबी रंग के करीब 5 हजार मीट्रिक टन पत्थरों का ऑर्डर दिया गया है। इनमें से एक खेप शुक्रवार देर रात पहुंच चुकी है।

    अयोध्या आंदोलन की तर्ज पर कारसेवा का ऐलान
    स्वामी सच्चिदानंद ने इससे पहले 4 जुलाई को अयोध्या आंदोलन की तर्ज पर श्रीकृष्ण जन्मभूमि की मुक्ति के लिए कारसेवा का ऐलान किया था। इसके बाद 12 जुलाई को उन्होंने हरिद्वार स्थित वात्सल्य गंगा आश्रम में साध्वी ऋतंभरा से मुलाकात कर इस अभियान के लिए समर्थन मांगा था।

    अब 9 अगस्त को चित्रगुप्त पीठ में होने वाले कार्यक्रम पर सभी की नजर है। साधु-संतों के जुटने और कारसेवा के ऐलान को देखते हुए प्रशासन ने भी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सतर्कता बढ़ा दी है।

  • पीयूष गोयल बोले- मिथिला मखाना की बढ़ती विदेशी मांग से बिहार के किसानों को मिल रहे आय और रोजगार के नए अवसर

    पीयूष गोयल बोले- मिथिला मखाना की बढ़ती विदेशी मांग से बिहार के किसानों को मिल रहे आय और रोजगार के नए अवसर

    नई दिल्ली । बिहार के प्रसिद्ध जीआई टैग प्राप्त मिथिला मखाना ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी मजबूत पहचान बनाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शनिवार को बताया कि बिहार से पहली बार 18 मीट्रिक टन मिथिला मखाना समुद्री मार्ग के जरिए ऑस्ट्रेलिया निर्यात किया गया है। इस उपलब्धि को राज्य के किसानों और कृषि निर्यात क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सरकार का कहना है कि विदेशी बाजारों में मिथिला मखाना की बढ़ती मांग से बिहार के किसानों के लिए आय बढ़ाने और नए कारोबारी अवसर पैदा होने की संभावनाएं मजबूत हुई हैं।

    पीयूष गोयल ने बताया कि कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण के सहयोग से जीआई टैग वाले मिथिला मखाना की खेप ऑस्ट्रेलिया भेजी गई। खास बात यह रही कि निर्यात के लिए मखाना सीधे दरभंगा के किसानों से खरीदा गया। इससे स्थानीय उत्पादकों को अंतरराष्ट्रीय बाजार से जुड़ने का अवसर मिला। मंत्री के अनुसार, इस पहल में शामिल किसानों को सामान्य बाजार भाव की तुलना में लगभग 18 प्रतिशत अधिक लाभ प्राप्त हुआ है। इससे मखाना उत्पादन से जुड़े किसानों की आय बढ़ाने की संभावनाओं को बल मिला है।

    मिथिला मखाना बिहार की कृषि अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। मिथिला क्षेत्र में उत्पादित यह कृषि उपज अपनी गुणवत्ता, स्वाद और पौष्टिकता के लिए देश के साथ-साथ विदेशी बाजारों में भी पहचान बना रही है। बदलती खाद्य आदतों के बीच मखाना स्वास्थ्यवर्धक स्नैक के रूप में तेजी से लोकप्रिय हुआ है। कम तेल में तैयार किए जाने वाले और विभिन्न स्वादों में उपलब्ध मखाने की मांग विशेष रूप से शहरी तथा अंतरराष्ट्रीय उपभोक्ता बाजार में बढ़ी है।

    ऑस्ट्रेलिया को समुद्री मार्ग से हुआ यह निर्यात ऐसे समय में हुआ है, जब बिहार के मखाना उत्पाद लगातार नए विदेशी बाजारों में पहुंच बना रहे हैं। इससे पहले बिहार से पहली बार समुद्री मार्ग के जरिए कनाडा को भी मखाना निर्यात किया गया था। उस दौरान दरभंगा से सात मीट्रिक टन फ्लेवर्ड मखाना कनाडा भेजा गया था। इस निर्यात को भी कृषि उत्पादों को वैश्विक बाजार से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना गया था।

    विदेशी बाजारों में बढ़ती मांग का असर केवल मखाना किसानों तक सीमित रहने की संभावना नहीं है। निर्यात बढ़ने से मखाना की सफाई, प्रसंस्करण, पैकेजिंग, भंडारण और मूल्य संवर्धन से जुड़े कारोबार को भी प्रोत्साहन मिल सकता है। इससे बिहार में कृषि आधारित छोटे और मध्यम उद्योगों के लिए नए अवसर पैदा हो सकते हैं। यदि अंतरराष्ट्रीय मांग लगातार बनी रहती है तो स्थानीय स्तर पर मखाना प्रसंस्करण केंद्रों और आधुनिक पैकेजिंग सुविधाओं के विस्तार को भी बढ़ावा मिल सकता है।

    ऑस्ट्रेलिया और कनाडा जैसे बाजारों में भारतीय मखाने की पहुंच बढ़ना बिहार के कृषि उत्पादों के लिए सकारात्मक संकेत है। समुद्री मार्ग से निर्यात होने से बड़े अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक नियमित आपूर्ति की संभावनाएं बढ़ती हैं और कृषि उत्पादों को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में शामिल करने में मदद मिलती है। इससे किसानों को स्थानीय बाजार पर निर्भर रहने के बजाय व्यापक बाजार तक पहुंच बनाने का अवसर मिल सकता है।

    मिथिला मखाना का लगातार विदेशी बाजारों में पहुंचना बिहार के कृषि निर्यात के लिए नई संभावनाएं खोल रहा है। बेहतर कीमत, बढ़ता निर्यात और प्रसंस्करण क्षेत्र में संभावित निवेश किसानों की आय बढ़ाने के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती दे सकता है। आने वाले समय में यदि अन्य अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी मिथिला मखाना की मांग बढ़ती है तो बिहार भारत के प्रमुख कृषि निर्यात केंद्रों में अपनी स्थिति और मजबूत कर सकता है।

  • वृंदावन पहुंचे पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, ठाकुरजी के दर्शन कर विवेकानंद प्रतिमा पर चढ़ाए फूल

    वृंदावन पहुंचे पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, ठाकुरजी के दर्शन कर विवेकानंद प्रतिमा पर चढ़ाए फूल


    वृंदावन।
    पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद अपने तीन दिवसीय प्रवास के तहत शनिवार सुबह वृंदावन पहुंचे। यहां उन्होंने रामकृष्ण मिशन सेवाश्रम हॉस्पिटल का दौरा किया। अस्पताल पहुंचने पर सेवाश्रम के सचिव स्वामी सुप्रकाशानंद और अस्पताल प्रभारी स्वामी काली कृष्णानंद ने पुष्पगुच्छ भेंट कर उनका स्वागत किया।

    अस्पताल परिसर में पूर्व राष्ट्रपति ने स्वामी विवेकानंद की आदमकद प्रतिमा पर वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पुष्पांजलि अर्पित की। इसके बाद वह रामकृष्ण मठ पहुंचे और मंदिर में ठाकुरजी के दर्शन कर पूजा-अर्चना की।
    अस्पताल परिसर में पूर्व राष्ट्रपति ने स्वामी विवेकानंद की आदमकद प्रतिमा पर वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पुष्पांजलि अर्पित की। इसके बाद वह रामकृष्ण मठ पहुंचे और मंदिर में ठाकुरजी के दर्शन कर पूजा-अर्चना की।

    ‘शारदा ब्लॉक’ का किया अवलोकन
    ठाकुरजी के दर्शन के बाद रामनाथ कोविंद ने अस्पताल के ‘शारदा ब्लॉक’ का भी अवलोकन किया। यह वही ब्लॉक है जिसका उनके राष्ट्रपति कार्यकाल के दौरान लोकार्पण हुआ था। इस दौरान उन्होंने रामकृष्ण मिशन सेवाश्रम के संतों से मुलाकात की और उनके साथ आत्मीय संवाद किया।

    सिग्नेचर वृंदावन धाम आश्रम का किया उद्घाटन
    रामकृष्ण मिशन सेवाश्रम के कार्यक्रम पूरे करने के बाद पूर्व राष्ट्रपति रुकमणि विहार स्थित ‘सिग्नेचर वृंदावन धाम आश्रम’ पहुंचे। यहां उन्होंने आश्रम का औपचारिक उद्घाटन किया। इस अवसर पर संतों और गणमान्य लोगों की मौजूदगी में रामनाथ कोविंद ने आश्रम परिसर में पौधरोपण भी किया। पौधरोपण के जरिए उन्होंने पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।

  • पीयूष गोयल बोले, बिहार की प्रतिभा और उत्पादों को मिल रही नई पहचान, मुक्त व्यापार समझौतों से बढ़ेंगे निर्यात के अवसर

    पीयूष गोयल बोले, बिहार की प्रतिभा और उत्पादों को मिल रही नई पहचान, मुक्त व्यापार समझौतों से बढ़ेंगे निर्यात के अवसर

    नई दिल्ली । वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शनिवार को कहा कि बिहार की प्रतिभा और राज्य में तैयार होने वाले उत्पादों को वैश्विक बाजार में नई पहचान मिल रही है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की ओर से किए जा रहे नए मुक्त व्यापार समझौतों यानी एफटीए के माध्यम से बिहार के किसानों, छोटे उद्योगों, उद्यमियों और निर्यातकों के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच के नए अवसर तैयार हो रहे हैं।

    गोयल ने कहा कि बिहार के कृषि और कृषि-प्रसंस्कृत उत्पादों के साथ टेक्सटाइल, चमड़ा, फुटवियर, इंजीनियरिंग, रसायन और फार्मास्युटिकल क्षेत्र से जुड़े उत्पादों के लिए दुनिया के विभिन्न बाजारों के दरवाजे खुल रहे हैं। इससे राज्य के उत्पादों को घरेलू बाजार से आगे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने और निर्यात बढ़ाने में मदद मिल सकती है। उन्होंने इस बदलाव को बिहार की आर्थिक क्षमता और स्थानीय प्रतिभा के लिए महत्वपूर्ण अवसर बताया।

    केंद्र सरकार के अनुसार, भारत ने वित्त वर्ष 2025-26 में 863.1 अरब डॉलर का रिकॉर्ड निर्यात दर्ज किया है। सरकार लगातार भारतीय उत्पादों के लिए नए बाजार तलाशने और मौजूदा बाजारों में पहुंच बढ़ाने पर जोर दे रही है। मुक्त व्यापार समझौतों के जरिए भारतीय कंपनियों को विभिन्न देशों में व्यापार करने के लिए बेहतर परिस्थितियां उपलब्ध कराने की कोशिश की जा रही है। इससे निर्यात को अधिक विविध बनाने के साथ श्रम-प्रधान क्षेत्रों को भी मजबूत करने की उम्मीद है।

    सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में व्यापारिक साझेदार देशों के साथ कई महत्वपूर्ण मुक्त व्यापार समझौतों को आगे बढ़ाया है। इनमें भारत-मॉरीशस सीईसीपीए, भारत-यूएई सीईपीए, भारत-ऑस्ट्रेलिया ईसीटीए, भारत-ईएफटीए टीईपीए, भारत-ओमान सीईपीए, भारत-यूके सीईटीए और भारत-न्यूजीलैंड एफटीए जैसे समझौते शामिल हैं। इन समझौतों का उद्देश्य द्विपक्षीय व्यापार बढ़ाने के साथ भारतीय उत्पादों के लिए नए बाजार उपलब्ध कराना है।

    एफटीए के तहत व्यापारिक साझेदार देशों के बीच शुल्क और अन्य व्यापारिक बाधाओं को कम करने की दिशा में काम किया जाता है। इससे भारतीय निर्यातकों के लिए विदेशी बाजारों में प्रतिस्पर्धा करने की क्षमता बढ़ सकती है। विशेष रूप से टेक्सटाइल, परिधान, चमड़ा और फुटवियर जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों के लिए ऐसे समझौते रोजगार और उत्पादन बढ़ाने के लिहाज से महत्वपूर्ण माने जाते हैं।

    सरकार का कहना है कि व्यापार समझौतों को तैयार करते समय भारतीय उद्योग, किसानों, निर्यातकों और अन्य हितधारकों के हितों को ध्यान में रखा जा रहा है। इसके साथ ही विदेशी बाजारों में तकनीकी मानकों और नियमों से जुड़ी बाधाओं को कम करने की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं। अलग-अलग देशों के मानकों को समझने और भारतीय उत्पादों को उनके अनुरूप तैयार करने से निर्यातकों के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रवेश आसान हो सकता है।

    निर्यात को बढ़ावा देने के लिए सरकार निर्यात संवर्धन मिशन, विदेशों में भारतीय मिशनों, निर्यात संवर्धन परिषदों, उद्योग संगठनों और अन्य संबंधित पक्षों के साथ मिलकर काम कर रही है। द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और बहुपक्षीय मंचों पर लगातार बातचीत के जरिए भारतीय उत्पादों के लिए बेहतर बाजार पहुंच सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है। ऐसे में बिहार के कृषि, विनिर्माण और श्रम-प्रधान क्षेत्रों के उत्पादों के लिए वैश्विक बाजार में विस्तार की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।