Author: bharati

  • खलनायक से नायक बनने की कहानी, शत्रुघ्न सिन्हा के जीवन पर बन रही बड़ी डॉक्यूमेंट्री।

    खलनायक से नायक बनने की कहानी, शत्रुघ्न सिन्हा के जीवन पर बन रही बड़ी डॉक्यूमेंट्री।

    मुंबई ।हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता और राजनेता शत्रुघ्न सिन्हा के जीवन पर आधारित एक भव्य डॉक्यूमेंट्री की शूटिंग अपनी पूर्णता की ओर अग्रसर है। फिल्म और टेलीविजन संस्थान पुणे के छात्र रहे शत्रुघ्न सिन्हा के भारतीय सिनेमा और सार्वजनिक जीवन में तय किए गए लंबे सफर को इस नॉन-फिक्शन फीचर में विस्तार से दिखाया जाएगा। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, ऑस्कर विजेता लघु फिल्म की संपादक संचारी दास इस प्रोजेक्ट के संपादन से जुड़ी हुई हैं, जबकि इसका निर्देशन शशि रंजन कर रहे हैं। व्यापक ऐतिहासिक शोध के बाद तैयार की जा रही इस डॉक्यूमेंट्री का नब्बे प्रतिशत से अधिक निर्माण कार्य पूरा कर लिया गया है।

    यह डॉक्यूमेंट्री एक अखिल भारतीय स्तर का प्रोजेक्ट है, जिसमें भारतीय फिल्म जगत की कई जानी-मानी हस्तियां शामिल हो रही हैं। रिपोर्टों के अनुसार, दक्षिण और हिंदी सिनेमा के दिग्गज कलाकार जैसे रजनीकांत, चिरंजीवी, मोहन बाबू, सलमान खान, आमिर खान और अनिल कपूर इस डॉक्यूमेंट्री में नजर आएंगे। ये सभी सितारे शत्रुघ्न सिन्हा के साथ अपने अनुभवों और उनके अभिनय सफर के प्रभाव को दर्शकों के सामने साझा करते हुए दिखाई देंगे।

    सिनेमा में शत्रुघ्न सिन्हा का सफर बेहद अनोखा रहा है। उन्होंने वर्ष 1969 में अपने करियर की शुरुआत की और शुरुआत में एक सशक्त खलनायक के रूप में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई। उनकी कड़क आवाज, संवाद अदायगी और शैली ने उन्हें हिंदी सिनेमा का सबसे लोकप्रिय एंटी-हीरो बना दिया। वर्ष 1976 में आई ब्लॉकबस्टर फिल्म कालीचरण के बाद उनके करियर को नई दिशा मिली और वे भारतीय सिनेमा के स्थापित एक्शन हीरो के रूप में उभरे।

    इसके बाद उन्होंने विश्वनाथ, दोस्ताना, काला पत्थर और नसीब जैसी कई क्लासिक फिल्मों के जरिए दर्शकों के दिलों पर अमिट छाप छोड़ी। अभिनय के बाद उन्होंने राजनीति के क्षेत्र में भी सफल कदम बढ़ाए और लोक सेवा में अपनी नई पहचान बनाई। यह डॉक्यूमेंट्री उनके शुरुआती संघर्षों, स्टारडम के दौर और राजनीतिक जीवन के विभिन्न पड़ावों को दर्शकों के सामने प्रामाणिक रूप से प्रस्तुत करने का प्रयास करेगी।

  • बांग्लादेशी राजनीति में नया बवाल, बीएनपी सांसद ने शेख हसीना की अवामी लीग के विलय का किया समर्थन।

    बांग्लादेशी राजनीति में नया बवाल, बीएनपी सांसद ने शेख हसीना की अवामी लीग के विलय का किया समर्थन।

    नई दिल्ली ।बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के भारत से दिए गए बयान और दिसंबर में स्वदेश वापसी की घोषणा के बीच देश की राजनीति में एक नया विवाद गहरा गया है। सत्तारूढ़ बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के सांसद नासिर उद्दीन चौधरी ने पूर्व प्रधानमंत्री की पार्टी अवामी लीग को अपना राजनीतिक सहयोगी बताते हुए दोनों दलों के भविष्य में विलय का सुझाव दिया है। प्रधानमंत्री तारिक रहमान के नेतृत्व वाली पार्टी के सांसद के इस अप्रत्याशित बयान के बाद देश के राजनीतिक गलियारों में भारी हलचल मच गई है, क्योंकि दोनों दलों के बीच ऐतिहासिक रूप से गहरा राजनीतिक विरोध रहा है।

    सुनामगंज-2 संसदीय क्षेत्र से सांसद नासिर उद्दीन चौधरी ने एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि अवामी लीग को दुश्मन के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि वे एक सहयोगी की भूमिका में हैं। उन्होंने 1971 के मुक्ति संग्राम के साझा इतिहास का हवाला देते हुए दावा किया कि आने वाले समय में अवामी लीग का विलय बीएनपी में हो सकता है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश की अंतरिम व्यवस्था और वर्तमान सरकार शेख हसीना के प्रत्यर्पण की मांग कर रही है तथा अवामी लीग की राजनीतिक गतिविधियों पर कड़े प्रतिबंध लागू हैं।

    सांसद के इस बयान के तुरंत बाद बीएनपी के शीर्ष नेतृत्व और सरकारी प्रवक्ताओं ने स्पष्ट किया है कि यह विचार पूरी तरह से व्यक्तिगत है और इसका पार्टी की आधिकारिक नीति से कोई संबंध नहीं है। पार्टी नेतृत्व का कहना है कि पूर्ववर्ती शासन के दौरान हुए घटनाक्रमों और राजनीतिक दमन के कारण दोनों दलों के बीच किसी भी प्रकार के तालमेल या विलय का प्रश्न ही नहीं उठता। सरकारी प्रतिनिधियों ने शेख हसीना के हालिया बयानों पर भी आपत्ति जताते हुए इसे देश के लोकतांत्रिक ढांचे और राजनीतिक स्थिरता के प्रतिकूल बताया है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि वर्ष 2024 के घटनाक्रमों के बाद से बांग्लादेश की राजनीति अत्यंत संवेदनशील दौर से गुजर रही है। एक तरफ जहां सरकार पूर्व प्रधानमंत्री को वापस लाने और उन पर कानूनी प्रक्रिया चलाने के प्रयास में जुटी है, वहीं पार्टी के भीतर से आने वाले इस तरह के बयानों से संगठन की आंतरिक एकजुटता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। सांसद के इस विवादित बयान से आम जनता और राजनीतिक हलकों में बहस छिड़ गई है कि आगामी चुनावों से पहले देश के राजनीतिक समीकरण क्या मोड़ लेंगे।

  • तुर्किए और पाकिस्तान के साथ सऊदी अरब के रक्षा समझौते पर भड़का ईरान, बताया कागजी समझौता।

    तुर्किए और पाकिस्तान के साथ सऊदी अरब के रक्षा समझौते पर भड़का ईरान, बताया कागजी समझौता।

    नई दिल्ली ।पश्चिम एशिया के कूटनीतिक और सामरिक परिदृश्य में उस समय नया मोड़ आ गया जब सऊदी अरब, तुर्किए और पाकिस्तान ने मक्का में एक ऐतिहासिक संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस त्रिपक्षीय समझौते के मुख्य प्रावधान के अनुसार, तीनों में से किसी भी एक देश पर होने वाले किसी भी सैन्य हमले को तीनों देशों पर सामूहिक हमला माना जाएगा। इस उच्चस्तरीय बैठक में सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान, तुर्किए के राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दोगन और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ शामिल हुए। हालांकि, इस समझौते के सामने आते ही पड़ोसी देश ईरान की ओर से कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की गई है।

    ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति आयोग के वरिष्ठ सदस्य इब्राहिम रजाई ने इस समझौते पर तीखा हमला बोलते हुए इसे बेअसर करार दिया। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से कहा कि तुर्किए और पाकिस्तान के साथ केवल कागजी समझौते कर लेने से सऊदी अरब को वास्तविक सुरक्षा हासिल नहीं हो सकती। उन्होंने अतीत का हवाला देते हुए टिप्पणी की कि जिस प्रकार दशकों तक पश्चिमी देशों पर निर्भर रहने के बाद भी स्थायी सुरक्षा नहीं मिल सकी, उसी प्रकार यह समझौता भी निष्प्रभावी साबित होगा। ईरान ने सुझाव दिया कि सुरक्षा की तलाश करने के बजाय अपनी क्षेत्रीय नीतियों में बुनियादी बदलाव लाने की आवश्यकता है।

    दूसरी ओर, समझौते में शामिल तीनों देशों ने इस रक्षा तंत्र को पूरी तरह से रक्षात्मक और संतुलित बताया है। सऊदी अरब के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यह कदम किसी विशेष सैन्य गुट या सांप्रदायिक समूह के निर्माण के उद्देश्य से नहीं उठाया गया है और न ही यह उनके अन्य अंतरराष्ट्रीय संबंधों को प्रभावित करेगा। तुर्किए के प्रतिनिधियों का कहना है कि यह समझौता किसी एक देश के खिलाफ केंद्रित नहीं है और भविष्य में अन्य क्षेत्रीय देशों के शामिल होने का मार्ग भी खुला रखा गया है।

    सामरिक विश्लेषकों का मानना है कि यह समझौता तीनों देशों की अलग-अलग क्षमताओं के एकत्रीकरण का परिणाम है। इसमें पाकिस्तान का विशाल सैन्य अनुभव, सऊदी अरब की मजबूत आर्थिक क्षमता और तुर्किए की आधुनिक रक्षा तकनीक शामिल है। जहां एक तरफ यह गठबंधन तीनों देशों के बीच दशकों पुराने संबंधों को संस्थागत रूप देने का प्रयास है, वहीं ईरान की तीखी आपत्ति से स्पष्ट है कि इस रक्षा सौदे ने खाड़ी और दक्षिण एशियाई क्षेत्र की राजनीति में एक नई बहस को जन्म दे दिया है।

  • ई20 पेट्रोल पर राहुल गांधी का केंद्र सरकार पर हमला, कहा- 'दाल में कुछ काला नहीं, पूरी दाल ही काली है'।

    ई20 पेट्रोल पर राहुल गांधी का केंद्र सरकार पर हमला, कहा- 'दाल में कुछ काला नहीं, पूरी दाल ही काली है'।


    नई दिल्ली ।
    देश में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रित यानी ई20 पेट्रोल को लेकर राजनीतिक घमासान काफी तेज हो गया है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने एक विशेष वीडियो संदेश जारी कर केंद्र सरकार की इथेनॉल मिश्रण नीति पर तीखा प्रहार किया है। उन्होंने सरकार की इस नीति की नीयत और निष्पादन पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि आमतौर पर कहावत है कि दाल में कुछ काला है, लेकिन ई20 पेट्रोल के मामले में तो पूरी दाल ही काली नजर आ रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस निर्णय से देश की आम जनता पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव पड़ रहा है और यह सीधे तौर पर लोगों की जेब काटने जैसा है।

    राहुल गांधी ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर जारी किए गए वीडियो में स्पष्ट किया कि ई20 ईंधन का मुद्दा सीधे तौर पर देश के करोड़ों वाहन चालकों और आम नागरिकों के जीवन से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल के इस्तेमाल से चारपहिया वाहनों, मोटरसाइकिलों और स्कूटरों के इंजन पर बेहद बुरा असर पड़ रहा है। इसके साथ ही वाहनों का माइलेज घटने के कारण लोगों को ईंधन पर अधिक पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं। विपक्षी नेता ने आश्वासन दिया कि कांग्रेस पार्टी इस मुद्दे को शांत नहीं होने देगी और इसके खिलाफ आने वाले दिनों में व्यापक स्तर पर जन-अभियान चलाया जाएगा।

    मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस का दावा है कि ई20 लागू करते समय सरकार ने उपभोक्ताओं को सस्ता ईंधन देने का जो वादा किया था, उसे पूरा नहीं किया गया है। पार्टी के अनुसार, अधिकांश पेट्रोल पंपों पर केवल ई20 ईंधन उपलब्ध कराए जाने के कारण वाहन मालिकों के पास अन्य कोई विकल्प नहीं बचा है। विपक्ष का आरोप है कि माइलेज कम होने से उपभोक्ताओं पर अरबों रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ा है, जबकि इसका सबसे अधिक वित्तीय लाभ केवल इथेनॉल उत्पादन से जुड़े उद्योगपतियों और कंपनियों को ही मिल रहा है।

    दूसरी ओर, केंद्र सरकार इस नीति को देशहित और पर्यावरण के अनुकूल बताकर इसका बचाव कर रही है। सरकार का तर्क है कि इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विदेशी कच्चे तेल पर भारत की निर्भरता को कम करना और कीमती विदेशी मुद्रा बचाना है। इसके साथ ही, इथेनॉल उत्पादन से देश के गन्ना किसानों और कृषि क्षेत्र को बेहतर मूल्य मिलने की बात कही गई है। हालांकि, विपक्ष अब इस मुद्दे को आम जनता के आर्थिक नुकसान से जोड़कर बड़े आंदोलन की रूपरेखा तैयार कर रहा है, जिससे इस विषय पर आने वाले समय में राजनीतिक पारा और चढ़ने की पूरी संभावना है।

  • श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर निर्माण के लिए मथुरा पहुंचे भरतपुर के गुलाबी पत्थर, नौ अगस्त से कारसेवा का एलान।

    श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर निर्माण के लिए मथुरा पहुंचे भरतपुर के गुलाबी पत्थर, नौ अगस्त से कारसेवा का एलान।

    मथुरा । श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति और मंदिर निर्माण अभियान को लेकर मथुरा में हलचल काफी तेज हो गई है। राधाकुंड क्षेत्र के जुल्हैंदी स्थित चित्रगुप्त पीठ में भव्य मंदिर निर्माण के उद्देश्य से मंगाए गए गुलाबी पत्थरों की पहली खेप देर रात पहुंच गई है। ये विशेष पत्थर राजस्थान के भरतपुर स्थित बंसीपहाड़पुर से मंगवाए गए हैं। उल्लेखनीय है कि इन्हीं प्रसिद्ध पत्थरों का उपयोग अयोध्या में भगवान श्रीराम के भव्य मंदिर निर्माण में भी किया गया है। चित्रगुप्त पीठाधीश्वर स्वामी सच्चिदानंद महाराज के नेतृत्व में पत्थरों के आगमन के साथ ही नौ अगस्त से विधिवत कारसेवा और पत्थर तराशने का काम शुरू करने का ऐलान किया गया है।

    स्वामी सच्चिदानंद महाराज ने बताया कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि की मुक्ति के लिए नौ अगस्त को आश्रम से शंखनाद किया जाएगा। इसके लिए एक भव्य धार्मिक कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें देश भर के 13 अखाड़ों के साधु-संतों और प्रमुख धर्माचार्यों को आमंत्रित किया गया है। महाराज ने स्पष्ट किया कि जन्मस्थान पर भव्य मंदिर के निर्माण हेतु कुल पांच हजार मीट्रिक टन गुलाबी पत्थरों का ऑर्डर दिया गया है। पत्थरों की पहली खेप पहुंचने से यह साफ हो गया है कि पूर्व निर्धारित योजना के अनुसार कार्य को गति दी जाएगी।

    इस अभियान की रूपरेखा तैयार करने के लिए जुलाई माह से ही गतिविधियां जारी थीं। स्वामी सच्चिदानंद महाराज ने पूर्व में अयोध्या आंदोलन की तर्ज पर कारसेवा का आह्वान किया था, जिसके समर्थन में उन्होंने हरिद्वार जाकर वरिष्ठ संतों से मुलाकात भी की थी। इस पहल को अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद और निर्मोही अखाड़े सहित कई प्रमुख धार्मिक संगठनों का समर्थन प्राप्त हो चुका है। संतों के इस रुख और पत्थरों के आगमन के बाद स्थानीय प्रशासन और पुलिस व्यवस्था पूरी तरह से सतर्क हो गई है।

    प्रशासनिक अधिकारियों ने शांति व्यवस्था बनाए रखने और स्थिति की समीक्षा के लिए कई बार आयोजकों से बातचीत की थी। हालांकि, आश्रम परिसर में पत्थरों के पहुंचने के बाद संतों का रुख पूरी तरह से स्पष्ट दिखाई दे रहा है। नौ अगस्त से शुरू होने वाले इस कार्यक्रम में संतों का बड़ा जमावड़ा होने की उम्मीद है, जहां से आगामी रूपरेखा पर निर्णय लिया जाएगा। इस पूरे घटनाक्रम ने मथुरा और आसपास के क्षेत्रों में राजनीतिक व धार्मिक सरगर्मियों को और बढ़ा दिया है।

  • दक्षिण अफ्रीका के खास पौधे रूइबोस की दुनिया भर में बढ़ी मांग, कैफीन-फ्री चाय बनी पहली पसंद।

    दक्षिण अफ्रीका के खास पौधे रूइबोस की दुनिया भर में बढ़ी मांग, कैफीन-फ्री चाय बनी पहली पसंद।

    नई दिल्ली ।दक्षिण अफ्रीका की सेडरबर्ग पहाड़ियों में प्राकृतिक रूप से उगने वाला विशेष पौधा रूइबोस इन दिनों अपनी विशिष्टताओं के कारण वैश्विक स्तर पर आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। ‘लाल झाड़ी’ के नाम से मशहूर यह पौधा केवल दक्षिण अफ्रीका के लगभग साठ हजार हेक्टेयर के सीमित भौगोलिक क्षेत्र में ही पैदा होता है। इसकी पत्तियों से तैयार की जाने वाली लाल चाय की मांग दुनिया के पचास से अधिक देशों में तेजी से बढ़ रही है। हालिया आंकड़ों के अनुसार, इसके अंतरराष्ट्रीय निर्यात में रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे यह हर्बल पेय पदार्थों के बाजार में एक प्रमुख स्थान हासिल कर रहा है।

    इस पौधे की सबसे बड़ी खासियत इसका पूरी तरह से कैफीन-मुक्त होना है। इसके अलावा इसमें एंटीऑक्सीडेंट और पॉलीफेनॉल जैसे प्राकृतिक पोषक तत्व प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं, जो स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोगों को आकर्षित कर रहे हैं। जो लोग सामान्य चाय या कॉफी में मौजूद कैफीन के सेवन से बचना चाहते हैं, उनके लिए यह एक बेहतरीन और स्वास्थ्यवर्धक विकल्प बनकर उभरा है। अब इस पौधे का उपयोग केवल पारंपरिक चाय बनाने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका इस्तेमाल विभिन्न प्रकार के हर्बल पेय पदार्थों और स्किन केयर उत्पादों में भी बड़े पैमाने पर किया जाने लगा है।

    भौगोलिक दृष्टि से यह पौधा अत्यंत संवेदनशील है और इसे पनपने के लिए विशिष्ट प्रकार की मिट्टी, कम बारिश और शुष्क जलवायु की आवश्यकता होती है। इन्हीं कठोर प्राकृतिक शर्तों के कारण दुनिया के अन्य हिस्सों में इसकी व्यावसायिक खेती कर पाना लगभग असंभव रहा है। एशियाई और यूरोपीय बाजारों में इसकी लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अकेले जापान इसके कुल वैश्विक निर्यात का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है। इसके अतिरिक्त अमरीका और यूरोपीय देशों में भी इसकी खपत में निरंतर वृद्धि दर्ज की जा रही है।

    हालांकि, वैश्विक बाजार में बढ़ती मांग के बावजूद जलवायु परिवर्तन और अनिश्चित मौसम इस अनोखे पौधे की खेती के लिए गंभीर खतरे पैदा कर रहे हैं। पिछले कुछ वर्षों के दौरान क्षेत्र में हुई कम बारिश और बढ़ते तापमान के कारण इसके कुल वार्षिक उत्पादन में गिरावट दर्ज की गई है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मौसम का यही रुख बना रहा, तो आने वाले समय में इस सीमित प्राकृतिक संसाधन की आपूर्ति को बनाए रखना बेहद चुनौतीपूर्ण हो जाएगा, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी उपलब्धता प्रभावित हो सकती है।

  • श्रीलंका बोर्ड इलेवन के खिलाफ वॉर्म-अप मैच में भारतीय गेंदबाजों की खुली पोल, पहले दिन लुटाए 363 रन।

    श्रीलंका बोर्ड इलेवन के खिलाफ वॉर्म-अप मैच में भारतीय गेंदबाजों की खुली पोल, पहले दिन लुटाए 363 रन।

    नई दिल्ली ।आगामी टेस्ट श्रृंखला की तैयारियों के सिलसिले में कोलंबो में खेले जा रहे तीन दिवसीय अभ्यास मैच के पहले ही दिन भारतीय गेंदबाजी आक्रमण की कमजोरियां खुलकर सामने आ गईं। श्रीलंका क्रिकेट इलेवन के बल्लेबाजों ने भारतीय गेंदबाजों की ढीली गेंदों का पूरा फायदा उठाते हुए दिन का खेल खत्म होने तक 8 विकेट के नुकसान पर 363 रनों का विशाल स्कोर खड़ा कर दिया। इस मुकाबले में नियमित कप्तान की अनुपस्थिति के कारण टीम की कमान संभाल रहे अनुभवी बल्लेबाज के नेतृत्व में भारतीय गेंदबाजों को शुरुआती सफलता हासिल करने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा।

    मेजबान टीम के सलामी बल्लेबाजों ने भारतीय तेज गेंदबाजों और स्पिनरों पर दबाव बनाते हुए पहले विकेट के लिए शतकीय साझेदारी निभाई। निशान मदुष्का और रविंदु रसंथा के अर्धशतकों ने श्रीलंका इलेवन को मजबूत आधार प्रदान किया। इसके बाद मध्यक्रम में सोनल दिनुशा ने भी जिम्मेदारी से बल्लेबाजी करते हुए अर्धशतक जड़ा। भारतीय मुख्य गेंदबाजों की लाइन-लेंथ पूरी तरह से बिखरी हुई नजर आई, जिसके चलते श्रीलंकाई बल्लेबाजों ने आसानी से चार रन प्रति ओवर से भी अधिक की औसत से रन बनाए।

    हालांकि, खेल के दूसरे और तीसरे सत्र में स्पिन गेंदबाजों ने वापसी का प्रयास किया। रवींद्र जडेजा, मानव सुथार और कुलदीप यादव ने आपस में विकेट बांटकर विपक्षी टीम की रन गति को रोकने की कोशिश की। इसके बावजूद, आगामी टेस्ट मैचों की तैयारियों के लिहाज से लगभग सभी प्रमुख गेंदबाज काफी महंगे साबित हुए। प्रसिद्ध कृष्णा, मोहम्मद सिराज और सारांश जैन जैसे गेंदबाज विकेट हासिल करने में नाकाम रहे और उन्होंने प्रति ओवर चार से अधिक रन लुटाए।

    उंगली की चोट के कारण टीम के नियमित कप्तान शुभमन गिल पहले दिन मैदान पर नहीं उतर सके, जिससे टीम प्रबंधन की चिंताएं थोड़ी और बढ़ गई हैं। टेस्ट श्रृंखला शुरू होने से पहले यह अभ्यास मैच खिलाड़ियों की फॉर्म और लय परखने का अहम अवसर माना जा रहा था। गेंदबाजी विभाग के इस प्रदर्शन ने टीम प्रबंधन को अपनी रणनीतियों पर फिर से विचार करने के लिए मजबूर कर दिया है ताकि मुख्य मुकाबलों में इस तरह की गलतियों से बचा जा सके।

  • पेट्रोल-डीजल के दाम कब घटेंगे? हरदीप पुरी ने दिया जवाब, जानिए क्‍या कहा ?

    पेट्रोल-डीजल के दाम कब घटेंगे? हरदीप पुरी ने दिया जवाब, जानिए क्‍या कहा ?


    नई दिल्ली। कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में पिछले दो महीनों में दो बार कटौती के बाद अब लोगों की नजर पेट्रोल और डीजल के दामों पर है। सवाल उठ रहा है कि क्या आने वाले समय में पेट्रोल-डीजल सस्ता होगा? केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी ने इस सवाल का जवाब देते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद भारत में पेट्रोल-डीजल के दामों को काफी हद तक नियंत्रित रखा गया है।

    भारत में महज 4% बढ़ी कीमत

    हरदीप पुरी ने एक कार्यक्रम में पेट्रोल-डीजल की कीमतों की तुलना भारत और दूसरे देशों से करते हुए कहा कि पिछले चार वर्षों में भारत में ईंधन की कीमतें लगभग स्थिर रही हैं। उनके मुताबिक, अगर पूरे चार साल की अवधि को देखा जाए तो कीमतों में कमी ही आई है।

    पेट्रोलियम मंत्री ने इसका श्रेय केंद्र सरकार की एक्साइज ड्यूटी में कटौती को दिया। उन्होंने बताया कि नवंबर 2021, अप्रैल 2024 और मार्च 2026 में केंद्र सरकार ने एक्साइज ड्यूटी घटाई। इन फैसलों से देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों को नियंत्रित रखने में मदद मिली।

    पुरी के अनुसार, फ्रांस और जर्मनी में पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में करीब 24 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। वहीं पाकिस्तान और श्रीलंका जैसे पड़ोसी देशों में यह वृद्धि 40 प्रतिशत तक पहुंच गई। इसके मुकाबले भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में करीब 4 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।

    E20 विवाद पर भी बोले हरदीप पुरी

    पेट्रोल में 20 प्रतिशत तक इथेनॉल मिश्रण यानी E20 को लेकर चल रहे विवाद पर भी पेट्रोलियम मंत्री ने अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि कुछ लोग जानबूझकर इस मुद्दे को विवाद का रूप देने की कोशिश कर रहे हैं।

    पुरी ने कहा कि देश में हर दिन करीब 6 से 7 करोड़ उपभोक्ता पेट्रोल पंपों पर ईंधन भरवाते हैं। उन्होंने दावा किया कि 1.07 लाख पेट्रोल पंपों की जांच के दौरान केवल चार जगहों पर ईंधन में मिलावट पाई गई। तेल कंपनियों की ओर से रोजाना 2,000 से अधिक पेट्रोल पंपों की जांच की जा रही है।

    उन्होंने ईंधन में मिलावट की तुलना खाने-पीने की चीजों में होने वाली मिलावट और हवा में मौजूद प्रदूषण से करते हुए कहा कि भारत में बायोफ्यूल ब्लेंडिंग का कार्यक्रम अच्छी तरह आगे बढ़ रहा है।

    सरकार के सामने कीमतें घटाने की चुनौती

    सरकार की ओर से एक्साइज ड्यूटी में कटौती के जरिए पेट्रोल-डीजल की कीमतों को नियंत्रित रखने की कोशिश की गई है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत, रुपये की विनिमय दर और टैक्स जैसे कई कारक घरेलू ईंधन कीमतों को प्रभावित करते हैं। ऐसे में फिलहाल पेट्रोल-डीजल की कीमतों में अगली बड़ी कटौती को लेकर हरदीप पुरी ने कोई निश्चित समयसीमा नहीं बताई है।

  • सांसद पार्थ भौमिक के खिलाफ बैरकपुर में लगे विवादित पोस्टर, पीएम मोदी से मुलाकात के बाद बढ़ा तनाव।

    सांसद पार्थ भौमिक के खिलाफ बैरकपुर में लगे विवादित पोस्टर, पीएम मोदी से मुलाकात के बाद बढ़ा तनाव।

    नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल की राजनीति में उस समय नया विवाद खड़ा हो गया जब बैरकपुर लोकसभा क्षेत्र से सांसद पार्थ भौमिक के खिलाफ उनके अपने ही क्षेत्र में जगह-जगह विवादित पोस्टर देखने को मिले। तृणमूल कांग्रेस का दामन छोड़कर हाल ही में नई पार्टी में शामिल हुए भौमिक के खिलाफ लगाए गए इन पोस्टरों में उन्हें गद्दार करार दिया गया है और स्थानीय नागरिकों को उनसे सतर्क रहने की चेतावनी दी गई है। यह घटनाक्रम नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व के साथ उनकी हुई उच्चस्तरीय बैठकों के तुरंत बाद सामने आया है।

    दीर्घकालिक राजनीतिक करियर वाले पार्थ भौमिक लंबे समय तक तृणमूल कांग्रेस के प्रमुख नेताओं में शामिल रहे हैं। वे 2011 से 2021 के बीच तीन बार विधायक चुने गए और इसके बाद 2024 के आम चुनावों में तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर बैरकपुर से सांसद बने थे। हालांकि, राजनीतिक घटनाक्रमों के बाद उन्होंने पार्टी और इंडिया गठबंधन से दूरी बना ली तथा नेशनलिस्ट सिटिजन पार्टी ऑफ इंडिया का हिस्सा बनकर बीजेपी को अपना समर्थन दे दिया। दिल्ली में शीर्ष नेताओं के साथ उनकी बैठकों और तस्वीरों के सार्वजनिक होने के बाद से ही उनके खिलाफ राजनीतिक विरोध मुखर होने लगा था।

    बैरकपुर क्षेत्र में दिखे इन पोस्टरों पर किसी राजनीतिक दल का आधिकारिक नाम दर्ज नहीं है, बल्कि इन्हें स्थानीय नागरिकों के नाम से लगाया गया है। पोस्टरों में भौमिक की तस्वीर के साथ जनता से विश्वासघात करने के आरोप जड़े गए हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने राज्य में तृणमूल कांग्रेस और बागी नेताओं के बीच की कड़वाहट को और अधिक गहरा कर दिया है। स्थानीय स्तर पर इन पोस्टरों के सामने आने के बाद राजनीतिक दलों के नेताओं के बीच बयानबाजी का दौर भी तेज हो गया है।

    स्थानीय नेताओं का कहना है कि पार्टी बदलने और गठबंधन बदलने के फैसले से क्षेत्र के उन लाखों मतदाताओं में भारी नाराजगी है, जिन्होंने उन्हें 2024 के चुनाव में अपना समर्थन दिया था। विरोधियों का दावा है कि यह आक्रोश आम जनता और मतदाताओं की भावना का परिणाम है जो खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। वहीं, समर्थक इसे राजनीतिक द्वेष से प्रेरित और विरोधी दलों की हताशा का नतीजा बता रहे हैं।

    संसदीय क्षेत्र में पोस्टरों के जरिए शुरू हुआ यह विरोध प्रदर्शन बंगाल की भावी राजनीति में बढ़ते तनाव का स्पष्ट संकेत दे रहा है। दिल्ली में बैठकों के बाद उभरे इस विवाद से बैरकपुर सहित आसपास के क्षेत्रों में राजनीतिक सरगर्मियां बढ़ गई हैं। आने वाले दिनों में इस मुद्दे को लेकर विरोध और समर्थन की राजनीति और तीखी होने की संभावना जताई जा रही है।

  • महुआ मोइत्रा केस पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी पर CJP प्रवक्ता ने दी प्रतिक्रिया, उठाए सवाल

    महुआ मोइत्रा केस पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी पर CJP प्रवक्ता ने दी प्रतिक्रिया, उठाए सवाल


    नई दिल्ली। तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद महुआ मोइत्रा की एक आपराधिक मामले में पुलिस के सामने वर्चुअल पेशी की मांग सुप्रीम कोर्ट ने 7 अगस्त को खारिज कर दी। सुनवाई के दौरान जस्टिस दीपांकर दत्ता की टिप्पणी के बाद राजनीतिक हलकों में विवाद खड़ा हो गया है। अब कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रवक्ता सौरव दास ने अदालत की टिप्पणी पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए जज की भूमिका पर सवाल उठाए हैं।

    अंडे फेंके जाने का दिया गया था हवाला

    महुआ मोइत्रा के खिलाफ फेसबुक पोस्ट से जुड़े मामले में एफआईआर दर्ज है। कलकत्ता हाई कोर्ट ने उन्हें 14 अगस्त को जांच अधिकारी के सामने पेश होने का निर्देश दिया था। सुप्रीम कोर्ट में महुआ की ओर से वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायणन ने मांग की थी कि उन्हें व्यक्तिगत रूप से पुलिस के सामने जाने के बजाय वर्चुअली पेश होने की अनुमति दी जाए।

    वकील ने अदालत को बताया कि पिछली बार अपने निर्वाचन क्षेत्र के पुलिस स्टेशन जाने के दौरान महुआ पर अंडे फेंके गए थे। ऐसे में दोबारा वहां जाने पर भीड़ द्वारा उन्हें निशाना बनाए जाने की आशंका है।

    जस्टिस दीपांकर दत्ता की टिप्पणी पर विवाद

    जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की पीठ ने वर्चुअल पेशी की मांग पर राहत देने से इनकार कर दिया। सुनवाई के दौरान जस्टिस दत्ता ने टिप्पणी की कि राजनीति में आने के बाद महुआ को अंडों से डर क्यों लगता है, जबकि स्वतंत्रता सेनानियों ने गोलियां तक अपने सीने पर झेली थीं।

    सुप्रीम कोर्ट के इस रुख के बाद महुआ मोइत्रा की ओर से दायर याचिका वापस ले ली गई, जिसके बाद अदालत ने उसे खारिज कर दिया।

    CJP प्रवक्ता ने जज पर उठाए सवाल

    अदालत की टिप्पणी के बाद CJP प्रवक्ता सौरव दास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या सुप्रीम कोर्ट के जज चाहते हैं कि महुआ मोइत्रा गोलियां खाएं। उन्होंने न्यायाधीशों की नियुक्ति और न्यायिक जवाबदेही को लेकर भी सवाल खड़े किए।

    सौरव दास ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में यह टिप्पणी निंदनीय है। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि अगर महुआ मोइत्रा को कुछ होता है तो इसके लिए जस्टिस दीपांकर दत्ता की अध्यक्षता वाली पीठ जिम्मेदार होगी। उन्होंने न्यायिक जवाबदेही की जरूरत बताते हुए यहां तक कहा कि ऐसे मामलों में जजों को इस्तीफा देने के लिए मजबूर किया जाना चाहिए या महाभियोग चलना चाहिए।

    CJP संस्थापक ने भी जताई आपत्ति

    CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने भी सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी पर आपत्ति जताई। उन्होंने सवाल किया कि क्या अब अदालत चाहती है कि हर कोई गोलियां खाए। उन्होंने कहा कि यदि संवैधानिक अदालत के न्यायाधीश विपक्षी नेताओं के खिलाफ इस तरह की टिप्पणी करते हैं, तो आम नागरिक के लिए क्या उम्मीद बचती है।

    मोइत्रा को पहले भी मिल चुकी है अंतरिम राहत

    इस मामले से जुड़े एक अन्य प्रकरण में कलकत्ता हाई कोर्ट ने 21 जुलाई को महुआ मोइत्रा को पांच अक्टूबर तक किसी भी तरह की दंडात्मक कार्रवाई से अंतरिम राहत दी थी। यह मामला कथित तौर पर नफरत फैलाने वाले भाषण से जुड़ा है। महुआ मोइत्रा ने आरोपों को मनगढ़ंत बताया है।