Author: bharati

  • पीयूष गोयल बोले, बिहार की प्रतिभा और उत्पादों को मिल रही नई पहचान, मुक्त व्यापार समझौतों से बढ़ेंगे निर्यात के अवसर

    पीयूष गोयल बोले, बिहार की प्रतिभा और उत्पादों को मिल रही नई पहचान, मुक्त व्यापार समझौतों से बढ़ेंगे निर्यात के अवसर

    नई दिल्ली । वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शनिवार को कहा कि बिहार की प्रतिभा और राज्य में तैयार होने वाले उत्पादों को वैश्विक बाजार में नई पहचान मिल रही है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की ओर से किए जा रहे नए मुक्त व्यापार समझौतों यानी एफटीए के माध्यम से बिहार के किसानों, छोटे उद्योगों, उद्यमियों और निर्यातकों के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच के नए अवसर तैयार हो रहे हैं।

    गोयल ने कहा कि बिहार के कृषि और कृषि-प्रसंस्कृत उत्पादों के साथ टेक्सटाइल, चमड़ा, फुटवियर, इंजीनियरिंग, रसायन और फार्मास्युटिकल क्षेत्र से जुड़े उत्पादों के लिए दुनिया के विभिन्न बाजारों के दरवाजे खुल रहे हैं। इससे राज्य के उत्पादों को घरेलू बाजार से आगे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने और निर्यात बढ़ाने में मदद मिल सकती है। उन्होंने इस बदलाव को बिहार की आर्थिक क्षमता और स्थानीय प्रतिभा के लिए महत्वपूर्ण अवसर बताया।

    केंद्र सरकार के अनुसार, भारत ने वित्त वर्ष 2025-26 में 863.1 अरब डॉलर का रिकॉर्ड निर्यात दर्ज किया है। सरकार लगातार भारतीय उत्पादों के लिए नए बाजार तलाशने और मौजूदा बाजारों में पहुंच बढ़ाने पर जोर दे रही है। मुक्त व्यापार समझौतों के जरिए भारतीय कंपनियों को विभिन्न देशों में व्यापार करने के लिए बेहतर परिस्थितियां उपलब्ध कराने की कोशिश की जा रही है। इससे निर्यात को अधिक विविध बनाने के साथ श्रम-प्रधान क्षेत्रों को भी मजबूत करने की उम्मीद है।

    सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में व्यापारिक साझेदार देशों के साथ कई महत्वपूर्ण मुक्त व्यापार समझौतों को आगे बढ़ाया है। इनमें भारत-मॉरीशस सीईसीपीए, भारत-यूएई सीईपीए, भारत-ऑस्ट्रेलिया ईसीटीए, भारत-ईएफटीए टीईपीए, भारत-ओमान सीईपीए, भारत-यूके सीईटीए और भारत-न्यूजीलैंड एफटीए जैसे समझौते शामिल हैं। इन समझौतों का उद्देश्य द्विपक्षीय व्यापार बढ़ाने के साथ भारतीय उत्पादों के लिए नए बाजार उपलब्ध कराना है।

    एफटीए के तहत व्यापारिक साझेदार देशों के बीच शुल्क और अन्य व्यापारिक बाधाओं को कम करने की दिशा में काम किया जाता है। इससे भारतीय निर्यातकों के लिए विदेशी बाजारों में प्रतिस्पर्धा करने की क्षमता बढ़ सकती है। विशेष रूप से टेक्सटाइल, परिधान, चमड़ा और फुटवियर जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों के लिए ऐसे समझौते रोजगार और उत्पादन बढ़ाने के लिहाज से महत्वपूर्ण माने जाते हैं।

    सरकार का कहना है कि व्यापार समझौतों को तैयार करते समय भारतीय उद्योग, किसानों, निर्यातकों और अन्य हितधारकों के हितों को ध्यान में रखा जा रहा है। इसके साथ ही विदेशी बाजारों में तकनीकी मानकों और नियमों से जुड़ी बाधाओं को कम करने की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं। अलग-अलग देशों के मानकों को समझने और भारतीय उत्पादों को उनके अनुरूप तैयार करने से निर्यातकों के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रवेश आसान हो सकता है।

    निर्यात को बढ़ावा देने के लिए सरकार निर्यात संवर्धन मिशन, विदेशों में भारतीय मिशनों, निर्यात संवर्धन परिषदों, उद्योग संगठनों और अन्य संबंधित पक्षों के साथ मिलकर काम कर रही है। द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और बहुपक्षीय मंचों पर लगातार बातचीत के जरिए भारतीय उत्पादों के लिए बेहतर बाजार पहुंच सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है। ऐसे में बिहार के कृषि, विनिर्माण और श्रम-प्रधान क्षेत्रों के उत्पादों के लिए वैश्विक बाजार में विस्तार की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।

  • भारत का मेड-टेक इकोसिस्टम मजबूत, घरेलू विनिर्माण और सरकारी योजनाओं से वैश्विक बाजार में बढ़ रही देश की विश्वसनीयता

    भारत का मेड-टेक इकोसिस्टम मजबूत, घरेलू विनिर्माण और सरकारी योजनाओं से वैश्विक बाजार में बढ़ रही देश की विश्वसनीयता

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत के तेजी से विकसित हो रहे मेडिकल टेक्नोलॉजी यानी मेड-टेक क्षेत्र की प्रगति को रेखांकित करते हुए कहा है कि घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने, आयात पर निर्भरता घटाने और सरकारी प्रोत्साहन योजनाओं के कारण भारत वैश्विक स्तर पर एक भरोसेमंद मेड-टेक साझेदार के रूप में उभर रहा है। उन्होंने कहा कि देश में सस्ती, सुलभ और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं के लक्ष्य को हासिल करने में मजबूत मेडिकल उपकरण उद्योग की महत्वपूर्ण भूमिका होगी।

    प्रधानमंत्री के मुताबिक, भारत का मेड-टेक क्षेत्र घरेलू उत्पादन बढ़ने और विभिन्न सरकारी पहलों के कारण लगातार मजबूत हो रहा है। मेडिकल उपकरणों के निर्माण को बढ़ावा देने के लिए प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव यानी पीएलआई योजना, मेडिकल डिवाइस पार्क और फार्मा-मेडटेक क्षेत्र में अनुसंधान एवं नवाचार को प्रोत्साहित करने वाली योजनाओं पर जोर दिया जा रहा है। इन प्रयासों का उद्देश्य देश में उत्पादन क्षमता बढ़ाने के साथ तकनीकी विकास और निवेश को गति देना है।

    सरकार के अनुसार, पीएलआई योजना के तहत भारत में अब तक 50 से अधिक अत्याधुनिक मेडिकल उपकरणों का निर्माण शुरू हो चुका है। इसके साथ ही इस क्षेत्र में विदेशी निवेश में भी वृद्धि देखी जा रही है। निवेश बढ़ने को मेडिकल उपकरण निर्माण क्षेत्र में बढ़ते भरोसे के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। घरेलू उत्पादन का विस्तार भारत को चिकित्सा उपकरणों के लिए केवल आयात आधारित बाजार के बजाय एक बड़े विनिर्माण केंद्र के रूप में विकसित करने में मदद कर सकता है।

    मेडिकल उपकरणों के आयात पर निर्भरता कम होने से आपूर्ति शृंखला मजबूत होने और लागत घटाने में मदद मिलने की उम्मीद है। इसका असर उन्नत डायग्नोस्टिक उपकरणों, इमेजिंग सिस्टम, इम्प्लांट्स और आईसीयू में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों की उपलब्धता पर भी पड़ सकता है। घरेलू स्तर पर इन उपकरणों का उत्पादन बढ़ने से स्वास्थ्य क्षेत्र में जरूरी तकनीक की पहुंच को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।

    मेड-टेक क्षेत्र में नई तकनीकों के लिए भी व्यापक संभावनाएं दिखाई दे रही हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सॉफ्टवेयर ऐज ए मेडिकल डिवाइस, कनेक्टेड मेडिकल डिवाइस, रोबोटिक्स और रिमोट डायग्नोस्टिक्स जैसे क्षेत्रों में तेजी से विकास हो रहा है। इन तकनीकों का इस्तेमाल आने वाले समय में मरीजों की जांच, निगरानी और उपचार की प्रक्रियाओं को अधिक प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

    मौजूदा आंकड़ों के अनुसार, भारत का मेड-टेक बाजार करीब 15 से 16 अरब डॉलर का है और लगभग 12 प्रतिशत की वार्षिक दर से बढ़ रहा है। भारत एशिया का चौथा सबसे बड़ा मेडिकल टेक्नोलॉजी बाजार है और वैश्विक स्तर पर शीर्ष 20 बाजारों में शामिल है। बाजार के विस्तार से घरेलू कंपनियों, निवेशकों और तकनीकी क्षेत्र के लिए नए अवसर पैदा होने की संभावना है।

    सरकार नियामकीय ढांचे, परीक्षण सुविधाओं और क्लीनिकल डेटा से जुड़ी व्यवस्था को भी मजबूत करने पर ध्यान दे रही है। इसका उद्देश्य मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और भारत में निर्मित मेडिकल उपकरणों को अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों के अनुरूप बनाना है। बेहतर परीक्षण और गुणवत्ता व्यवस्था से भारतीय उत्पादों की वैश्विक बाजार में स्वीकार्यता बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

    मेडिकल डिवाइस उद्योग के मजबूत होने से विनिर्माण और रोजगार के साथ निर्यात तथा तकनीकी विकास को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। हालिया अनुमान के अनुसार, करीब 14 अरब डॉलर का भारतीय चिकित्सा उपकरण बाजार इस दशक के अंत तक 30 से 50 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। वर्ष 2047 तक इसके 250 अरब डॉलर तक पहुंचने की संभावना जताई गई है। ऐसे में घरेलू उत्पादन, अनुसंधान, निवेश और नई तकनीकों का विस्तार भारत को वैश्विक मेड-टेक क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की दिशा में आगे ले जा सकता है।

  • Cancer का खतरा कम करने की नई रणनीति, समय पर जांच से बच सकती हैं हजारों जानें, जानें भारत का पूरा प्लान

    Cancer का खतरा कम करने की नई रणनीति, समय पर जांच से बच सकती हैं हजारों जानें, जानें भारत का पूरा प्लान


    नई दिल्ली। भारत में कैंसर का बढ़ता संकट केवल मरीजों की संख्या तक सीमित नहीं है बल्कि सबसे बड़ी चुनौती बीमारी की देर से पहचान है। अस्पतालों तक पहुंचने वाले बड़ी संख्या में मरीजों में कैंसर काफी आगे बढ़ चुका होता है। ऐसी स्थिति में इलाज मुश्किल होने के साथ महंगा भी हो जाता है और मरीज के ठीक होने की संभावना कम हो सकती है। यही वजह है कि कैंसर के खिलाफ लड़ाई में आधुनिक उपचार के साथ समय पर पहचान और बचाव पर सबसे ज्यादा जोर देने की जरूरत है।

    कैंसर के मामलों में बढ़ोतरी के पीछे बढ़ती उम्र के साथ बदलती जीवनशैली धूम्रपान तंबाकू का सेवन असंतुलित खानपान शारीरिक गतिविधियों की कमी और पर्यावरणीय कारणों को महत्वपूर्ण माना जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार कैंसर के कई जोखिम कारकों को जीवनशैली में बदलाव और समय पर जांच के जरिए कम किया जा सकता है। इसलिए कैंसर के खिलाफ जागरूकता की शुरुआत इलाज के बाद नहीं बल्कि बचपन से होनी चाहिए।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि स्कूलों में बच्चों को स्वस्थ जीवनशैली के बारे में जानकारी देना बेहद जरूरी है। खानपान शारीरिक गतिविधि मानसिक स्वास्थ्य नशे से दूरी टीकाकरण और व्यक्तिगत स्वास्थ्य जैसे विषयों को जीवन कौशल का हिस्सा बनाया जाना चाहिए। बचपन से अच्छी आदतें विकसित होने पर भविष्य में कैंसर के साथ साथ हृदय रोग डायबिटीज और दूसरी गंभीर बीमारियों के जोखिम को भी कम किया जा सकता है।

    कैंसर की शुरुआती पहचान के लिए एक आसान बात लोगों को हमेशा याद रखनी चाहिए। अगर शरीर में कोई असामान्य लक्षण लगातार तीन सप्ताह या उससे अधिक समय तक बना रहता है तो उसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। लगातार दर्द शरीर में असामान्य गांठ बिना वजह वजन कम होना लंबे समय तक रहने वाली खांसी निगलने में परेशानी असामान्य रक्तस्राव या लंबे समय से बनी कमजोरी जैसे लक्षणों की स्थिति में डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। हालांकि ऐसे लक्षण हमेशा कैंसर का संकेत नहीं होते लेकिन लगातार बने रहने पर चिकित्सकीय जांच जरूरी हो जाती है।

    स्क्रीनिंग भी कैंसर से होने वाली मौतों को कम करने में अहम भूमिका निभा सकती है। कुछ कैंसर की पहचान शुरुआती चरण में स्क्रीनिंग के जरिए की जा सकती है। यही वह समय होता है जब उपचार के विकल्प अपेक्षाकृत बेहतर हो सकते हैं। आने वाले समय में तकनीक इस क्षेत्र को और मजबूत कर सकती है। मल्टी कैंसर अर्ली डिटेक्शन जैसे रक्त आधारित परीक्षणों पर दुनियाभर में शोध जारी है। इनका उद्देश्य एक ही रक्त नमूने से कई प्रकार के कैंसर से जुड़े संकेतों की पहचान करना है। हालांकि ऐसे परीक्षणों को व्यापक स्तर पर अपनाने से पहले उनकी सटीकता उपयोगिता और चिकित्सकीय प्रभाव का वैज्ञानिक मूल्यांकन जरूरी है।

    भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस भी कैंसर की पहचान और रिसर्च में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। मेडिकल इमेजिंग और पैथोलॉजी डेटा के बड़े डेटाबेस की मदद से AI आधारित सिस्टम को प्रशिक्षित किया जा सकता है। इससे संदिग्ध मामलों की पहचान में डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों को सहायता मिल सकती है और जरूरत पड़ने पर मरीजों को विशेषज्ञ केंद्र तक जल्दी पहुंचाया जा सकता है।

    भारत जैसे विशाल देश में कैंसर स्क्रीनिंग का एक ही मॉडल सभी क्षेत्रों के लिए प्रभावी नहीं हो सकता। गांवों और दूरदराज के इलाकों तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने के लिए कम्युनिटी हेल्थ वर्कर्स मोबाइल डायग्नोस्टिक सेवाएं डिजिटल रिस्क असेसमेंट और मजबूत रेफरल सिस्टम की जरूरत होगी। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से लेकर बड़े कैंसर अस्पताल तक मरीजों को समय पर जोड़ना इस पूरी व्यवस्था की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी हो सकती है।

    कैंसर के खिलाफ भारत की असली सफलता केवल आधुनिक मशीनों अस्पतालों या महंगे उपचारों की संख्या से तय नहीं होगी। असली सफलता तब मानी जाएगी जब बीमारी की पहचान शुरुआती चरण में होने लगे और कम मरीज गंभीर अवस्था में अस्पताल पहुंचें। जागरूकता समय पर जांच स्वस्थ जीवनशैली AI आधारित तकनीक और मजबूत स्वास्थ्य व्यवस्था मिलकर कैंसर के खिलाफ भारत की लड़ाई को नई दिशा दे सकते हैं।

  • UP: हरिद्वार तक पहुंचेगा गंगा एक्सप्रेसवे, बिजनौर से होकर बनेगा करीब 30 किमी नया लिंक

    UP: हरिद्वार तक पहुंचेगा गंगा एक्सप्रेसवे, बिजनौर से होकर बनेगा करीब 30 किमी नया लिंक

    मेरठ। गंगा एक्सप्रेसवे को हरिद्वार से जोड़ने की परियोजना को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हो गया है। उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड सरकार के बीच इस परियोजना को लेकर समझौता ज्ञापन (एमओयू) हो चुका है। समझौते में दोनों राज्यों की जिम्मेदारियां तय कर दी गई हैं। प्रस्तावित एक्सप्रेसवे बिजनौर के रास्ते हरिद्वार तक पहुंचेगा और इसकी लंबाई करीब 30 किलोमीटर होगी।

    गंगा एक्सप्रेसवे के निर्माण की जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण के पास रहेगी। दोनों राज्यों के बीच इस परियोजना को लेकर पिछले महीने सहमति बनी थी।

    उत्तराखंड पर नहीं आएगा निर्माण का खर्च
    एमओयू के अनुसार हरिद्वार तक एक्सप्रेसवे के निर्माण में होने वाला वित्तीय खर्च उत्तराखंड सरकार को नहीं उठाना होगा। हालांकि, उत्तराखंड की ओर से भूमि अधिग्रहण और यूटिलिटी शिफ्टिंग में सहयोग किया जाएगा। शासन से जुड़े अधिकारियों के अनुसार परियोजना से संबंधित दोनों एमओयू पिछले महीने ही अंतिम रूप ले चुके थे। समझौते को कैबिनेट की मंजूरी भी मिल चुकी है।

    बिजनौर के रास्ते हरिद्वार तक करीब 30 किमी का लिंक
    हरिद्वार को गंगा एक्सप्रेसवे से जोड़ने के लिए तैयार किए जा रहे प्रस्तावित मार्ग का एक हिस्सा बिजनौर से होकर गुजरेगा। करीब 30 किलोमीटर के इस लिंक से पश्चिमी उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के बीच सड़क संपर्क पहले से बेहतर होने की उम्मीद है। परियोजना को लेकर दोनों राज्यों के अधिकारियों के बीच कई चरणों में बैठकें हो चुकी हैं। अब निर्माण से जुड़ी प्रक्रियाओं को तेजी मिलने की संभावना है।

    धार्मिक पर्यटन से लेकर कारोबार तक को फायदा
    गंगा एक्सप्रेसवे के हरिद्वार तक पहुंचने से धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। देश के अलग-अलग हिस्सों से हरिद्वार आने वाले श्रद्धालुओं के लिए आवागमन आसान होगा।

    इसके अलावा बेहतर कनेक्टिविटी का असर औद्योगिक निवेश और व्यापारिक गतिविधियों पर भी पड़ सकता है। परियोजना के जरिए क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर पैदा होने की संभावना है। साथ ही पश्चिमी उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के बीच लोगों और सामान की आवाजाही अधिक सुगम हो सकेगी।

  • UP Election 2027 से पहले PDA की नई परिभाषा पर मायावती का हमला, अखिलेश यादव की रणनीति पर उठाए सवाल

    UP Election 2027 से पहले PDA की नई परिभाषा पर मायावती का हमला, अखिलेश यादव की रणनीति पर उठाए सवाल


    नई दिल्ली ।
    उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले राज्य की राजनीति में जातीय समीकरणों को लेकर बयानबाजी तेज होती दिखाई दे रही है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की ओर से PDA फॉर्मूले में ‘P’ का अर्थ पंडित बताए जाने के बाद बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती ने समाजवादी पार्टी पर तीखा हमला बोला है। मायावती ने आरोप लगाया कि सपा चुनावी परिस्थितियों और राजनीतिक जरूरतों के अनुसार अपने सामाजिक समीकरण की व्याख्या बदलती रहती है। उनके बयान के बाद उत्तर प्रदेश की सियासत में PDA को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।

    मायावती ने कहा कि समाजवादी पार्टी पहले PDA में ‘P’ का अर्थ पिछड़ा बताती थी, जबकि इसके साथ दलित और अल्पसंख्यक वर्गों को जोड़ा जाता था। अब अखिलेश यादव की ओर से ‘P’ को पंडित बताए जाने को उन्होंने चुनावी रणनीति से जोड़कर देखा है। मायावती का कहना है कि ब्राह्मण समाज के लोगों का बसपा की ओर बढ़ता जुड़ाव देखकर सपा ने अपने राजनीतिक संदेश में बदलाव किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव नजदीक आने पर अलग-अलग सामाजिक वर्गों को साधने के लिए सपा अपनी राजनीतिक भाषा और समीकरण में परिवर्तन करती है।

    उत्तर प्रदेश में लंबे समय से जातीय और सामाजिक गठजोड़ चुनावी राजनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा रहे हैं। ऐसे में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले प्रमुख राजनीतिक दल अलग-अलग समुदायों के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। अखिलेश यादव का PDA फॉर्मूला भी पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक वर्गों को राजनीतिक रूप से एकजुट करने की रणनीति के तौर पर सामने आया था। अब इसमें पंडित शब्द को शामिल किए जाने से सपा की रणनीति को लेकर विपक्षी दलों को हमला करने का नया मुद्दा मिल गया है।

    मायावती ने इस दौरान बसपा की राजनीतिक विचारधारा को भी सामने रखा। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी किसी एक जाति, समुदाय या वर्ग के हित तक सीमित नहीं है। बसपा ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ की नीति पर काम करने का दावा करती है और उसका उद्देश्य समाज के सभी वर्गों को साथ लेकर चलना है। मायावती ने अपनी पार्टी की पिछली सरकारों का उल्लेख करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में बसपा की सरकारों के दौरान भी सभी वर्गों के हितों को ध्यान में रखकर नीतियां बनाई गई थीं।

    बसपा प्रमुख ने लोगों से जाति आधारित राजनीतिक नारों और चुनावी समीकरणों को लेकर सतर्क रहने की अपील भी की। उनका कहना है कि चुनाव के समय अलग-अलग समुदायों को आकर्षित करने के लिए राजनीतिक दल अपनी भाषा और रणनीति बदल सकते हैं, लेकिन इससे समाज की मूल समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं होता। मायावती ने सपा पर निशाना साधते हुए कहा कि चुनावी लाभ के लिए राजनीतिक समीकरण बदलने के बजाय सभी वर्गों के व्यापक हित पर ध्यान दिया जाना चाहिए।

    उत्तर प्रदेश की राजनीति में ब्राह्मण मतदाताओं की भूमिका को देखते हुए अखिलेश यादव के बयान और मायावती की प्रतिक्रिया को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले जातीय संतुलन और सामाजिक गठबंधन को लेकर राजनीतिक दलों के बीच प्रतिस्पर्धा और तेज होने की संभावना है। आने वाले समय में PDA की परिभाषा और इसके दायरे को लेकर सपा, बसपा तथा अन्य दलों के बीच बयानबाजी और बढ़ सकती है। मायावती का ताजा हमला इसी व्यापक राजनीतिक मुकाबले का हिस्सा माना जा रहा है।

  • पश्चिमी यूपी में ‘बम भोले’ की गूंज, डाक कांवड़ और पैदल जत्थों में दिखा जोश

    पश्चिमी यूपी में ‘बम भोले’ की गूंज, डाक कांवड़ और पैदल जत्थों में दिखा जोश

    मेरठ। सावन के साथ कांवड़ यात्रा 2026 ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सड़कों को पूरी तरह भक्तिमय कर दिया है। दिल्ली-हरिद्वार हाईवे से लेकर मेरठ, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर और बागपत तक हर तरफ ‘हर-हर महादेव’ और ‘बम भोले’ के जयकारे सुनाई दे रहे हैं। कंधों पर गंगाजल लेकर शिवभक्त अपने गंतव्य और शिवालयों की ओर लगातार बढ़ रहे हैं। दिन हो या रात, हाईवे पर कांवड़ियों की भीड़ कम नहीं हो रही। पैदल जत्थों के साथ डाक कांवड़िए भी तेज रफ्तार में आगे बढ़ते नजर आ रहे हैं।

    शिव भजनों पर झूमते कांवड़िए, डीजे-ढोल बना आकर्षण
    कांवड़ यात्रा के दौरान कई जत्थों में भक्ति का उत्साह देखते ही बन रहा है। शिवभक्त रास्ते में शिव भजनों पर नाचते-गाते आगे बढ़ रहे हैं। कई जत्थों के साथ डीजे, ढोल और भजन मंडलियां भी चल रही हैं। शाम ढलते ही कांवड़ मार्गों की रौनक और बढ़ जाती है। रोशनी से सजी कांवड़ें, डीजे की धुन और भगवा वस्त्रों में नजर आते शिवभक्त पूरे माहौल को मेले जैसा बना देते हैं।

    हाईवे पर डाक कांवड़िए तेजी से अपने गंतव्य की तरफ बढ़ रहे हैं। वहीं सामान्य कांवड़ लेकर पैदल चल रहे शिवभक्त भजनों और जयकारों के बीच अपनी यात्रा पूरी कर रहे हैं। कांवड़ियों का जोश राह से गुजरने वाले लोगों का भी ध्यान खींच रहा है। शहरों के लोग बड़ी संख्या में कांवड़ मार्गों तक पहुंचकर यात्रा का नजारा देख रहे हैं और कई जगह सेवा शिविरों में शिवभक्तों की मदद भी कर रहे हैं।

    सेवा शिविरों में भंडारे, जगह-जगह फूलों से स्वागत
    कांवड़ मार्गों पर शिवभक्तों के लिए जगह-जगह सेवा शिविर लगाए गए हैं। इन शिविरों में भोजन, पानी, शरबत और आराम करने की व्यवस्था की गई है। बड़ी संख्या में युवा और स्वयंसेवक दिन-रात कांवड़ियों की सेवा में जुटे हुए हैं। कई जगह शिवभक्तों का पुष्प वर्षा कर स्वागत भी किया जा रहा है। मुजफ्फरनगर में सीओ ऋषिका सिंह भी महिला कांवड़ियों की सेवा करती नजर आईं। महिला कांवड़ियों के पैर दबाते हुए उनका वीडियो और तस्वीरें भी चर्चा में रहीं।

    11 अगस्त को महाशिवरात्रि, और बढ़ेगी कांवड़ियों की भीड़
    कांवड़ यात्रा के दौरान शाम और रात में हाईवे और कांवड़ मार्गों पर मेले जैसा दृश्य दिखाई दे रहा है। शिवभक्तों के साथ स्थानीय लोग भी इन रास्तों पर पहुंच रहे हैं। कुछ लोग कांवड़ यात्रा का भक्तिमय नजारा देखने आ रहे हैं तो कई सेवा शिविरों में पहुंचकर कांवड़ियों की सेवा कर रहे हैं। 11 अगस्त को महाशिवरात्रि के अवसर पर शिवालयों में कांवड़िए गंगाजल चढ़ाएंगे। इस वजह से कांवड़ मार्गों पर श्रद्धालुओं की आवाजाही और बढ़ने की संभावना है।

  • पीएम मोदी ने IIT दिल्ली के छात्रों को भविष्य की चुनौतियों के लिए किया तैयार, नई सोच और समाधान खोजने पर दिया जोर

    पीएम मोदी ने IIT दिल्ली के छात्रों को भविष्य की चुनौतियों के लिए किया तैयार, नई सोच और समाधान खोजने पर दिया जोर

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को राजधानी दिल्ली स्थित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान यानी IIT दिल्ली के 57वें दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने संस्थान से पढ़ाई पूरी करने वाले तीन हजार से अधिक छात्रों को संबोधित किया और उन्हें जीवन की नई पारी के लिए शुभकामनाएं दीं। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में छात्रों को यह समझाने की कोशिश की कि कॉलेज की पढ़ाई पूरी होने के बाद उनके सामने वास्तविक दुनिया की ऐसी चुनौतियां आएंगी, जिनका सामना करने के लिए केवल किताबी ज्ञान पर्याप्त नहीं होगा। उन्होंने विद्यार्थियों से अपनी सोच, मेहनत, रचनात्मकता और नए विचारों के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया।

    पीएम मोदी ने कहा कि कॉलेज और बाहर की दुनिया में काफी अंतर होता है। पढ़ाई के दौरान छात्रों को यह मालूम होता है कि उन्हें कौन सा विषय पढ़ना है और परीक्षा में किस तरह के सवाल सामने आ सकते हैं। लेकिन नौकरी, व्यवसाय या रोजमर्रा की जिंदगी में परिस्थितियां पहले से तय नहीं होतीं। कई बार अचानक कोई नई समस्या सामने आती है और उस समय यह भी स्पष्ट नहीं होता कि असल समस्या क्या है। ऐसे अवसरों पर व्यक्ति को खुद स्थिति को समझना पड़ता है और समाधान तलाशना होता है। प्रधानमंत्री ने छात्रों से कहा कि उन्हें भविष्य की ऐसी परिस्थितियों के लिए मानसिक रूप से तैयार रहना चाहिए।

    उन्होंने छात्रों के भविष्य के सपनों का जिक्र करते हुए कहा कि आज समारोह में मौजूद हर विद्यार्थी के मन में आने वाले कल की अपनी अलग तस्वीर होगी। कोई पहली नौकरी और पहली सैलरी का इंतजार कर रहा होगा, तो कोई नए शहर में नई शुरुआत की तैयारी कर रहा होगा। कुछ विद्यार्थी अपना पहला स्टार्टअप शुरू करने का सपना भी देख रहे होंगे। प्रधानमंत्री ने कहा कि सभी का रास्ता और सपना अलग हो सकता है, लेकिन दीक्षांत समारोह का यह अवसर सभी के लिए समान रूप से विशेष है।

    समारोह में पीएम मोदी ने IIT दिल्ली में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़ी नई पहलों का भी उल्लेख किया। उन्होंने इन पहलों के लिए संस्थान और छात्रों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने संकेत दिया कि तेजी से बदलती तकनीकी दुनिया में विद्यार्थियों के लिए नई तकनीकों को समझना महत्वपूर्ण है, लेकिन इसके साथ अपनी मौलिक सोच और समस्या समाधान की क्षमता को मजबूत करना भी जरूरी है।

    प्रधानमंत्री ने छात्रों के साथ हल्के-फुल्के अंदाज में संवाद करते हुए उनके मन में चल रहे विचारों का जिक्र किया। उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि वह बाबा बागेश्वर नहीं हैं, लेकिन कुछ तो पता चलता होगा कि विद्यार्थियों के मन में क्या चल रहा है। उन्होंने IIT दिल्ली में छात्रों के पहले दिन से लेकर दीक्षांत समारोह तक के सफर का उल्लेख करते हुए कहा कि ओरिएंटेशन से कनवोकेशन तक की यात्रा पूरी करना उनके लिए संतोष का विषय होगा।

    पीएम मोदी ने कहा कि IIT दिल्ली से निकलने वाले छात्र केवल डिग्री लेकर आगे नहीं बढ़ रहे हैं, बल्कि देश के लिए कुछ बड़ा करने का सपना भी लेकर जा रहे हैं। उन्होंने सभी विद्यार्थियों को उनकी नई यात्रा के लिए बधाई दी और उम्मीद जताई कि वे अपनी प्रतिभा और ज्ञान का इस्तेमाल समाज तथा देश की प्रगति में करेंगे। उन्होंने छात्रों को बदलती परिस्थितियों के अनुरूप खुद को तैयार रखने और हर चुनौती को सीखने तथा आगे बढ़ने के अवसर के रूप में देखने का संदेश दिया।

  • मेरठ में कांवड़ियों पर CM योगी ने बरसाए फूल, शिवभक्तों ने लगाए ‘बोल बम’ के जयकारे

    मेरठ में कांवड़ियों पर CM योगी ने बरसाए फूल, शिवभक्तों ने लगाए ‘बोल बम’ के जयकारे


    मेरठ। कांवड़ यात्रा के दौरान शनिवार को मेरठ में शिवभक्तों का भव्य स्वागत किया गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ दुल्हैडा चुंगी पहुंचे और हरिद्वार से कांवड़ लेकर लौट रहे कांवड़ियों पर पुष्प वर्षा कर उनका अभिनंदन किया। मुख्यमंत्री के पहुंचते ही कांवड़ मार्ग पर उत्साह का माहौल बन गया और शिवभक्तों ने ‘बोल बम’ के जयकारे लगाए।

    भगवा रंग में सजे कांवड़ मार्ग पर जब फूलों की बारिश हुई तो पूरा माहौल भक्तिमय नजर आया। मुख्यमंत्री करीब 30 मिनट तक कार्यक्रम स्थल पर मौजूद रहे।

    पुष्पवर्षा के बाद हिंडन एयरपोर्ट के लिए रवाना हुए CM
    कांवड़ियों पर पुष्प वर्षा करने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कार से शोभित विश्वविद्यालय स्थित हेलीपैड के लिए रवाना हुए। यहां से उनका हेलिकॉप्टर गाजियाबाद के हिंडन एयरपोर्ट के लिए रवाना हुआ। मुख्यमंत्री के दौरे को देखते हुए प्रशासन ने कांवड़ यात्रा की व्यवस्थाओं पर विशेष निगरानी रखी। कांवड़ियों की बढ़ती संख्या के मद्देनजर यातायात, सुरक्षा और मार्गों की निगरानी को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरती गई।

    कांवड़ मार्ग पर चाक-चौबंद रही सुरक्षा
    मुख्यमंत्री के कार्यक्रम को देखते हुए शोभित विश्वविद्यालय के हेलीपैड से लेकर दुल्हैडा चुंगी तक सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। पूरे मार्ग में जगह-जगह पुलिस बल तैनात रहा। यातायात व्यवस्था सुचारु रखने के साथ कांवड़ मार्ग पर सुरक्षा व्यवस्था को भी लगातार मॉनिटर किया गया। कार्यक्रम स्थल के आसपास सुरक्षा एजेंसियां भी सक्रिय रहीं। मुख्यमंत्री की मौजूदगी को देखते हुए पुलिस-प्रशासन ने किसी भी तरह की चूक रोकने के लिए विशेष सतर्कता बरती।

    मंच के सामने काफी देर उड़ता रहा ड्रोन, पुलिस में मचा हड़कंप
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कार्यक्रम के दौरान उस समय सुरक्षा को लेकर हलचल मच गई, जब मंच के सामने आसमान में एक ड्रोन काफी देर तक उड़ता दिखाई दिया। कार्यक्रम स्थल पर ड्रोन उड़ाने की अनुमति नहीं थी।

    ड्रोन नजर आने के बाद पुलिस और सुरक्षा कर्मियों ने उसके संचालक की तलाश शुरू कर दी। आसपास मौजूद लोगों से पूछताछ की गई और ड्रोन ऑपरेटर की पहचान करने का प्रयास किया गया। इसी दौरान कार्यक्रम स्थल पर लगे माइक से घोषणा कराई गई कि ड्रोन उड़ाने वाला व्यक्ति तत्काल उसे नीचे उतार ले। घोषणा के कुछ देर बाद ड्रोन को नीचे उतार लिया गया।

  • UP बीजेपी में संगठनात्मक फेरबदल, क्षेत्रीय और मोर्चा प्रभारियों की नियुक्ति

    UP बीजेपी में संगठनात्मक फेरबदल, क्षेत्रीय और मोर्चा प्रभारियों की नियुक्ति

    लखनऊ। उत्तर प्रदेश में संगठन को और सक्रिय करने के लिए भारतीय जनता पार्टी ने क्षेत्र और विभिन्न मोर्चों के प्रभारियों की नियुक्ति कर दी है। पार्टी की ओर से जारी सूची में छह नेताओं को प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों की जिम्मेदारी सौंपी गई है। दिलीप पटेल को अवध क्षेत्र का प्रभारी बनाया गया है।

    पार्टी के फैसले के मुताबिक रामप्रताप सिंह चौहान को पश्चिम, गीता शाक्य को ब्रज, शंकर लोधी को कानपुर, दिलीप पटेल को अवध, रमेश सिंह को काशी और अभिजात मिश्रा को गोरखपुर क्षेत्र का प्रभारी नियुक्त किया गया है।

    मोर्चों की जिम्मेदारी भी तय
    भाजपा ने अलग-अलग मोर्चों के लिए भी प्रभारियों के नाम घोषित किए हैं। सूची के अनुसार राजेश चौधरी को युवा मोर्चा प्रभारी, संजय राय को पिछड़ा मोर्चा प्रभारी, डॉ. धर्मेंद्र सिंह को अनुसूचित मोर्चा प्रभारी, कामेश्वर सिंह को महिला मोर्चा प्रभारी, डॉ. प्रियंका रावत को अनुसूचित जनजाति मोर्चा प्रभारी, देवेश कोरी को अल्पसंख्यक मोर्चा प्रभारी, शंकर गिरी को किसान मोर्चा प्रभारी बनाया है।

    संगठन के अन्य पदों पर भी नियुक्तियां
    पार्टी ने संगठन से जुड़े कुछ अन्य महत्वपूर्ण दायित्व भी तय किए हैं। गोविंद नारायण शुक्ला को मुख्यालय प्रभारी बनाया गया है। वहीं प्रदेश मंत्री नरेंद्र शर्मा को मीडिया प्रभारी की जिम्मेदारी मिली है।

    इसके अलावा प्रदेश उपाध्यक्ष ब्रज बहादुर को विस्तारक योजना का संयोजक बनाया गया है। अर्चना मिश्रा को ‘मन की बात’ का संयोजक और राहुल वाल्मीकि को सह-संयोजक नियुक्त किया गया है। भाजपा की इन नियुक्तियों को प्रदेश में संगठनात्मक गतिविधियों को तेज करने और अलग-अलग क्षेत्रों व मोर्चों के बीच समन्वय मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

  • पेजेशकियान ने 48 घंटे में ईरान पर कब्जे की कथित योजना का किया खुलासा, मुस्लिम देशों से एकजुट होने की अपील

    पेजेशकियान ने 48 घंटे में ईरान पर कब्जे की कथित योजना का किया खुलासा, मुस्लिम देशों से एकजुट होने की अपील

    नई दिल्ली । ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने अमेरिका और इजरायल के साथ जारी तनाव और सैन्य संघर्ष को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने दावा किया कि ईरान ने यह लड़ाई शुरू नहीं की थी, बल्कि उसके खिलाफ पहले सैन्य कार्रवाई की गई। पेजेशकियान के अनुसार, ईरान पर लगातार दबाव बनाया गया और उसे कमजोर करने की कोशिश की गई, लेकिन इसके बावजूद देश अपनी स्थिति पर मजबूती से कायम है। उन्होंने कहा कि ईरानी नेतृत्व ने संकट के बीच देश की एकता और मजबूती बनाए रखने पर जोर दिया है।

    पेजेशकियान ने बताया कि संघर्ष शुरू होने से पहले उनकी सरकार बातचीत के जरिए समाधान निकालना चाहती थी। उनका कहना है कि ईरान युद्ध नहीं चाहता था और तनाव को कूटनीतिक माध्यमों से कम करने की कोशिश की जा रही थी। हालांकि, उनके मुताबिक दूसरी ओर से सैन्य कार्रवाई की गई, जिसके बाद हालात तेजी से बदल गए। राष्ट्रपति ने कहा कि ईरान पर सैन्य और राजनीतिक दबाव के बावजूद देश ने अपने फैसलों से पीछे हटने के बजाय राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता दी है। उनके बयान में ईरान की ओर से संघर्ष को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश दिखाई देती है।

    ईरानी राष्ट्रपति ने विरोधियों की कथित रणनीति का जिक्र करते हुए कहा कि यह अनुमान लगाया गया था कि ईरान ज्यादा समय तक दबाव का सामना नहीं कर पाएगा। उनके अनुसार, सीरिया जैसे हालात पैदा करके 48 घंटे के भीतर ईरान पर कब्जा करने या उसे कमजोर करने की योजना बनाई गई थी। पेजेशकियान ने दावा किया कि यह आकलन गलत साबित हुआ। उन्होंने कहा कि मुश्किल परिस्थितियों के दौरान ईरान ने अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया और देश को टूटने नहीं दिया। राष्ट्रपति ने भरोसा जताया कि ईरान आने वाले समय में भी अपने फैसलों और राष्ट्रीय हितों पर कायम रहेगा।

    पेजेशकियान ने मुस्लिम देशों से एकजुट होने की अपील भी की। उन्होंने कहा कि अगर मुस्लिम देश एक साथ खड़े होते हैं तो बाहरी दबाव और चुनौतियों का सामना करना कम मुश्किल हो सकता है। उनके इस आह्वान को मौजूदा क्षेत्रीय संकट के बीच समर्थन जुटाने की कोशिश के रूप में देखा जा सकता है। ईरान का मानना है कि क्षेत्रीय देशों की एकजुटता से बाहरी दबाव का प्रभाव कम किया जा सकता है। ऐसे में पेजेशकियान का संदेश केवल घरेलू जनता तक सीमित नहीं है, बल्कि मुस्लिम देशों के लिए भी राजनीतिक संकेत देता है।

    ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई को लेकर भी पेजेशकियान ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में उनसे संपर्क करना आसान नहीं है। हालांकि, इसके बावजूद उन्होंने खामेनेई की मौजूदगी को देश के लिए बेहद महत्वपूर्ण बताया। राष्ट्रपति की यह टिप्पणी ईरान के मौजूदा नेतृत्व और संकट के दौरान निर्णय लेने की प्रक्रिया को लेकर महत्वपूर्ण मानी जा रही है। खामेनेई की भूमिका को लेकर ईरानी नेतृत्व की प्राथमिकता भी इस बयान में दिखाई देती है।

    पेजेशकियान के बयान ऐसे समय में सामने आए हैं जब ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच तनाव क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बना हुआ है। ईरानी राष्ट्रपति एक तरफ बातचीत की कोशिशों और युद्ध शुरू नहीं करने का दावा कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ किसी भी दबाव के सामने मजबूती से खड़े रहने का संदेश दे रहे हैं। आने वाले समय में सैन्य गतिविधियों के साथ कूटनीतिक प्रयास भी महत्वपूर्ण होंगे। यदि बातचीत का रास्ता खुलता है तो तनाव कम करने की संभावना बन सकती है, लेकिन सैन्य टकराव बढ़ने की स्थिति में इसका असर पूरे क्षेत्र पर पड़ सकता है।