Author: bharati

  • क्या सचमुच धरती पर आते हैं एलियन? जानिए क्यों अब तक नहीं हो पाया दूसरे ग्रहों के जीवों से संपर्क

    क्या सचमुच धरती पर आते हैं एलियन? जानिए क्यों अब तक नहीं हो पाया दूसरे ग्रहों के जीवों से संपर्क


    नई दिल्ली । क्या ब्रह्मांड में पृथ्वी के अलावा भी कहीं जीवन मौजूद है? यह सवाल विज्ञान की दुनिया के सबसे बड़े रहस्यों में से एक बना हुआ है। एलियन यानी पृथ्वी के बाहर रहने वाले संभावित जीवों को लेकर वर्षों से दावे और कहानियां सामने आती रही हैं, लेकिन अब तक ऐसा कोई ठोस वैज्ञानिक प्रमाण नहीं मिला है जो उनके अस्तित्व या पृथ्वी पर आने की पुष्टि कर सके।

    हाल के वर्षों में अमेरिका सहित कई देशों ने अनआइडेंटिफाइड एरियल फिनोमेना (UAP) से जुड़े दस्तावेज सार्वजनिक किए हैं। इसके बावजूद वैज्ञानिक समुदाय का मानना है कि अभी तक किसी भी घटना को एलियन गतिविधि से जोड़ने वाला पुख्ता सबूत सामने नहीं आया है। दूसरी ओर, सर्वेक्षणों में बड़ी संख्या में लोग यह मानते हैं कि ब्रह्मांड में कहीं न कहीं जीवन अवश्य मौजूद होगा।

    हमारी कल्पना से कहीं अधिक विशाल है ब्रह्मांड
    विशेषज्ञों के अनुसार ब्रह्मांड इतना विशाल है कि उसकी पूरी सीमा का अनुमान लगाना भी मुश्किल है। पृथ्वी के सबसे नजदीकी तारों में से एक Proxima Centauri लगभग 40 ट्रिलियन किलोमीटर दूर स्थित है। इतनी दूरी तय करने में प्रकाश को भी करीब 4.3 वर्ष लग जाते हैं।

    आज तक मानव द्वारा विकसित अंतरिक्ष यान प्रकाश की गति के बेहद छोटे हिस्से तक ही पहुंच पाए हैं। मौजूदा तकनीक के अनुसार किसी अंतरिक्ष यान को प्रॉक्सिमा सेंटॉरी तक पहुंचने में हजारों वर्ष लग सकते हैं। ऐसे में दूसरे ग्रहों तक यात्रा करना या वहां से किसी सभ्यता का पृथ्वी तक पहुंचना बेहद कठिन माना जाता है।

    अंतरिक्ष यात्रा की सबसे बड़ी चुनौती है ऊर्जा
    वैज्ञानिकों का कहना है कि अंतरतारकीय यात्रा के लिए अकल्पनीय मात्रा में ऊर्जा की आवश्यकता होगी। यदि कोई यान प्रकाश की गति के करीब पहुंचना चाहता है, तो उसे ऊर्जा का ऐसा स्रोत चाहिए होगा जो वर्तमान विज्ञान की पहुंच से बहुत आगे है।

    इसके अलावा अंतरिक्ष पूरी तरह खाली नहीं है। वहां गैसों और सूक्ष्म कणों की मौजूदगी होती है। अत्यधिक गति से यात्रा करने पर इन कणों से टकराव भी विनाशकारी साबित हो सकता है। यही कारण है कि लंबी दूरी की अंतरिक्ष यात्राओं को लेकर अभी भी कई तकनीकी चुनौतियां बनी हुई हैं।

    क्या एलियन पृथ्वी पर आना चाहेंगे?
    कुछ वैज्ञानिक यह भी सवाल उठाते हैं कि यदि कोई सभ्यता इतनी उन्नत है कि वह तारों के बीच यात्रा कर सकती है, तो उसे पृथ्वी पर आने की आवश्यकता क्यों होगी? संभव है कि ऐसी सभ्यता अपनी जरूरत की लगभग हर चीज अपने ग्रह या तकनीक की मदद से हासिल कर सकती हो। इसी वजह से कई वैज्ञानिक मानते हैं कि एलियन सभ्यताओं के होने की संभावना और उनके पृथ्वी तक पहुंचने की संभावना दो अलग-अलग बातें हैं।

    पृथ्वी का वातावरण हर जीव के लिए उपयुक्त नहीं
    पृथ्वी का जैवमंडल यहां मौजूद जीवन के लिए अनुकूल है, लेकिन जरूरी नहीं कि किसी दूसरे ग्रह के जीव भी इसी वातावरण में जीवित रह सकें। पृथ्वी पर जीवन के विकास में ऑक्सीजन की महत्वपूर्ण भूमिका रही है, लेकिन संभव है कि किसी अन्य ग्रह पर जीवन पूरी तरह अलग रासायनिक परिस्थितियों में विकसित हुआ हो। ऐसी स्थिति में यदि कोई बाहरी जीव पृथ्वी पर आए भी, तो उसे विशेष सुरक्षा उपकरणों या अलग वातावरण की आवश्यकता पड़ सकती है।

    अरबों ग्रहों में जीवन की तलाश जारी
    वैज्ञानिकों ने अब तक हजारों एक्सोप्लैनेट यानी सौरमंडल के बाहर मौजूद ग्रहों की खोज की है। केवल हमारी आकाशगंगा में ही अरबों तारे और उनसे जुड़े असंख्य ग्रह मौजूद होने का अनुमान है। ऐसे में यह मानना कठिन है कि पूरे ब्रह्मांड में पृथ्वी ही जीवन का एकमात्र केंद्र हो।

    फिर भी आज तक किसी एलियन सभ्यता या पृथ्वी पर उनके आगमन का प्रमाण नहीं मिला है। विज्ञान लगातार नए ग्रहों और संभावित जीवन की तलाश में जुटा है, लेकिन फिलहाल एलियन का अस्तित्व एक रोमांचक संभावना है, सिद्ध तथ्य नहीं।

  • गरुड़ पुराण में बताई गईं ये 5 आदतें बना सकती हैं कंगाल! धनवान व्यक्ति भी हो सकता है आर्थिक संकट का शिकार

    गरुड़ पुराण में बताई गईं ये 5 आदतें बना सकती हैं कंगाल! धनवान व्यक्ति भी हो सकता है आर्थिक संकट का शिकार


    नई दिल्ली । सनातन परंपरा के महत्वपूर्ण ग्रंथों में शामिल Garuda Purana केवल मृत्यु और परलोक से जुड़े विषयों का ही वर्णन नहीं करता, बल्कि जीवन को बेहतर बनाने वाले अनेक आचार-विचार भी सिखाता है। इसके आचार कांड में व्यक्ति के दैनिक व्यवहार, स्वच्छता, अनुशासन और सामाजिक आचरण को लेकर कई महत्वपूर्ण बातें कही गई हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कुछ ऐसी आदतें हैं जो घर की समृद्धि को प्रभावित कर सकती हैं और आर्थिक परेशानियों का कारण बन सकती हैं।

    हालांकि इन बातों को धार्मिक और सांस्कृतिक मान्यताओं के रूप में देखा जाता है, लेकिन इनमें से कई आदतें व्यवहारिक जीवन में भी अनुशासन और सकारात्मकता बनाए रखने की सीख देती हैं।

    सुबह देर तक सोना
    गरुड़ पुराण के अनुसार सूर्योदय के बाद भी लंबे समय तक सोते रहना शुभ नहीं माना गया है। धार्मिक मान्यता है कि सुबह का समय सकारात्मक ऊर्जा और नए कार्यों की शुरुआत का समय होता है। देर तक सोने से आलस्य बढ़ता है और व्यक्ति के कार्यों की गति प्रभावित हो सकती है। इसी कारण शास्त्रों में ब्रह्म मुहूर्त में जागने की सलाह दी गई है।

    गंदे कपड़े पहनना और स्वच्छता की अनदेखी
    धार्मिक ग्रंथों में स्वच्छता को विशेष महत्व दिया गया है। मान्यता है कि जहां साफ-सफाई होती है, वहां सुख और समृद्धि का वास होता है। गंदे कपड़े पहनना, नियमित स्नान न करना या घर में अव्यवस्था बनाए रखना नकारात्मकता को बढ़ावा देता है। यही कारण है कि घर और शरीर दोनों को स्वच्छ रखने पर जोर दिया गया है।

    रसोई में जूठे बर्तन छोड़ना
    रसोई को घर का सबसे पवित्र स्थान माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार रात में सिंक या रसोई में जूठे बर्तन छोड़ना शुभ नहीं माना जाता। कहा जाता है कि इससे घर में नकारात्मक वातावरण बन सकता है। इसलिए सोने से पहले रसोई को साफ-सुथरा रखने की परंपरा प्राचीन समय से चली आ रही है।

    दूसरों की निंदा और बेवजह क्रोध
    गरुड़ पुराण में दूसरों की बुराई करने, ईर्ष्या रखने और हर समय क्रोधित रहने की प्रवृत्ति को भी नुकसानदायक बताया गया है। ऐसी आदतें व्यक्ति के रिश्तों को प्रभावित करती हैं और घर का वातावरण अशांत बना सकती हैं। धार्मिक मान्यता है कि जहां कलह और तनाव अधिक होता है, वहां सुख-शांति लंबे समय तक नहीं टिकती।

    नाखून चबाने जैसी अशुभ आदतें
    ग्रंथ में दांतों से नाखून चबाने जैसी आदतों को भी अनुचित माना गया है। इसे अनुशासनहीनता और अस्वच्छ व्यवहार का प्रतीक माना जाता है। आधुनिक दृष्टिकोण से भी यह आदत स्वास्थ्य के लिए ठीक नहीं मानी जाती। इसलिए इसे छोड़ने की सलाह दी जाती है।

    जीवन में अनुशासन का महत्व
    गरुड़ पुराण की इन शिक्षाओं का मूल संदेश यही है कि व्यक्ति अपने जीवन में स्वच्छता, अनुशासन, सकारात्मक सोच और अच्छे व्यवहार को अपनाए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ऐसा करने से घर में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है। वहीं व्यवहारिक दृष्टि से भी ये आदतें व्यक्ति के जीवन को व्यवस्थित और सफल बनाने में मदद कर सकती हैं।

  • रिलीज से पहले ही ‘वेलकम टू द जंगल’ का बड़ा धमाका, IMDb की मोस्ट अवेटेड फिल्मों की लिस्ट में पहुंची नंबर 1 पर

    रिलीज से पहले ही ‘वेलकम टू द जंगल’ का बड़ा धमाका, IMDb की मोस्ट अवेटेड फिल्मों की लिस्ट में पहुंची नंबर 1 पर


    नई दिल्ली । बॉलीवुड अभिनेता Akshay Kumar की बहुप्रतीक्षित फिल्म Welcome to the Jungle रिलीज से पहले ही लगातार सुर्खियां बटोर रही है। हाल ही में फिल्म का ट्रेलर जारी किया गया था, जिसे दर्शकों और फिल्म समीक्षकों से शानदार प्रतिक्रिया मिली। अब फिल्म ने एक और बड़ी उपलब्धि अपने नाम कर ली है। IMDb की मोस्ट अवेटेड इंडियन फिल्मों की सूची में ‘वेलकम टू द जंगल’ पहले स्थान पर पहुंच गई है।

    फिल्म के ट्रेलर को रिलीज के महज दो दिनों के भीतर 28 मिलियन से अधिक व्यूज मिल चुके हैं। यूट्यूब पर ट्रेलर लगातार ट्रेंड कर रहा है और सोशल मीडिया पर भी इसे लेकर चर्चा तेज है। कॉमेडी, एक्शन और मनोरंजन से भरपूर इस फिल्म को लेकर दर्शकों में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है।

    फिल्म का निर्देशन Ahmed Khan ने किया है। खास बात यह है कि इस फिल्म के जरिए अक्षय कुमार एक बार फिर लोकप्रिय ‘वेलकम’ फ्रेंचाइजी में वापसी कर रहे हैं। इससे पहले भी इस फ्रेंचाइजी की फिल्मों को दर्शकों का भरपूर प्यार मिला था और अब इसके नए अध्याय से भी बड़ी उम्मीदें लगाई जा रही हैं।

    ट्रेलर के अनुसार फिल्म की कहानी हास्य और भ्रम की घटनाओं पर आधारित है। इसमें अक्षय कुमार एक संघर्षरत अभिनेता की भूमिका में दिखाई देते हैं, जो अपने करियर को दोबारा पटरी पर लाने की कोशिश कर रहा है। इस दौरान वह एक सफल अभिनेत्री, जिसका किरदार Jacqueline Fernandez निभा रही हैं, के साथ एक फिल्म की शूटिंग के लिए गांव पहुंचता है। हालांकि गांव के लोग पूरी टीम को असली सेना का दल समझ लेते हैं और उनसे एक खतरनाक अपराधी से बचाने की गुहार लगाते हैं। इसके बाद शुरू होता है भ्रम, कॉमेडी और रोमांच से भरपूर घटनाओं का सिलसिला।

    फिल्म में कई बड़े कलाकार नजर आने वाले हैं, जिनमें Jackie Shroff भी शामिल हैं। मल्टीस्टारर कास्ट और बड़े पैमाने पर तैयार की गई इस फिल्म को लेकर ट्रेड एक्सपर्ट्स भी सकारात्मक संकेत दे रहे हैं।

    अक्षय कुमार की हालिया फिल्मों की बात करें तो वह हाल ही में एक हॉरर-कॉमेडी फिल्म में नजर आए थे, जिसे Priyadarshan ने निर्देशित किया था। फिल्म ने वैश्विक स्तर पर अच्छी कमाई की और दर्शकों का मनोरंजन किया। अब सभी की निगाहें 26 जून को रिलीज होने जा रही ‘वेलकम टू द जंगल’ पर टिकी हैं।

    इस फिल्म के बाद अक्षय कुमार कई बड़े प्रोजेक्ट्स में दिखाई देने वाले हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार वह आगामी फिल्म ‘हैवान’ में नजर आएंगे, जिसमें उनके साथ Saif Ali Khan भी दिखाई देंगे। इसके अलावा वह Golmaal 5 का भी हिस्सा होंगे, जिसका निर्देशन Rohit Shetty कर रहे हैं।

    मीडिया रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया जा रहा है कि ‘गोलमाल 5’ में अक्षय कुमार एक अलग और संभवतः नकारात्मक भूमिका में नजर आ सकते हैं। हालांकि निर्माताओं की ओर से इस बारे में आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं की गई है।

    फिलहाल ‘वेलकम टू द जंगल’ की बढ़ती लोकप्रियता और IMDb रैंकिंग यह संकेत दे रही है कि फिल्म रिलीज से पहले ही दर्शकों के बीच मजबूत पकड़ बना चुकी है। अब देखना दिलचस्प होगा कि 26 जून को सिनेमाघरों में उतरने के बाद यह बॉक्स ऑफिस पर कितना बड़ा कमाल दिखा पाती है।

  • काला हिरण' फिल्म पर गहराया कानूनी संकट: अभिनेता गोविंद नामदेव के बयानों से भड़के निर्माता अमित जानी, मानहानि के तहत कोर्ट में घसीटने की दी चेतावनी

    काला हिरण' फिल्म पर गहराया कानूनी संकट: अभिनेता गोविंद नामदेव के बयानों से भड़के निर्माता अमित जानी, मानहानि के तहत कोर्ट में घसीटने की दी चेतावनी

    नई दिल्ली। फिल्म उद्योग में वास्तविक और चर्चित आपराधिक मामलों पर बनने वाली फिल्मों को लेकर अक्सर विवाद खड़े होते रहे हैं, लेकिन वर्तमान में फिल्म ‘काला हिरण’ को लेकर शुरू हुआ आंतरिक घमासान अब कानूनी चौखट तक पहुंच गया है। अभिनेता सलमान खान से जुड़े चर्चित ब्लैकबक कानूनी मामले से प्रेरित इस आगामी फिल्म के मुख्य कलाकार गोविंद नामदेव और फिल्म के निर्माता अमित जानी के बीच सीधा वैचारिक और कानूनी टकराव पैदा हो गया है। अभिनेता गोविंद नामदेव ने हाल ही में सार्वजनिक मंच पर यह बयान देकर सनसनी फैला दी थी कि उन्हें फिल्म की वास्तविक पटकथा और संदर्भ के बारे में पूरी तरह अंधेरे में रखा गया था। अभिनेता के अनुसार, यदि उन्हें पहले से इस बात का भान होता कि यह पूरी फिल्म सलमान खान की छवि के विपरीत और उनके खिलाफ केंद्रित है, तो वह कभी भी इस परियोजना का हिस्सा नहीं बनते।

    इस गंभीर और एकतरफा आरोप के सार्वजनिक होते ही फिल्म के निर्माता अमित जानी ने बेहद आक्रामक रुख अपनाते हुए अभिनेता के दावों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। निर्माता ने एक वीडियो संदेश के माध्यम से अपना कड़ा विरोध दर्ज कराते हुए कहा कि किसी भी अनुभवी और वरिष्ठ अभिनेता के साथ बिना लिखित पटकथा के तीन-चार दिनों तक लगातार अदालत के दृश्यों की शूटिंग करना व्यावहारिक रूप से असंभव है। प्रोडक्शन हाउस का स्पष्ट तर्क है कि फिल्म का शीर्षक ही ‘काला हिरण’ है, जो सीधे तौर पर वर्ष 1998 से लेकर 2018 तक जोधपुर की निचली और उच्च अदालतों में चले ऐतिहासिक मुकदमे की याद दिलाता है। ऐसे में यह कहना कि कलाकार को विषय की गहराई और संदर्भ की जानकारी नहीं थी, पूरी तरह से असत्य और हास्यास्पद है।

    निर्माता ने तकनीकी और दस्तावेजी साक्ष्यों का हवाला देते हुए बताया कि गोविंद नामदेव फिल्म में मुख्य सरकारी वकील की भूमिका निभा रहे हैं, जो अयान खान नामक चरित्र के खिलाफ अदालती पैरवी कर रहा है। शूटिंग के दौरान अभिनेता ने स्वयं कई जटिल कानूनी और प्रासंगिक संवाद बोले हैं, जिसमें जीप पर लगे खून के धब्बे और टायरों में फंसे हिरण के बालों जैसे संवेदनशील विवरणों का जिरह के दौरान उल्लेख शामिल है। प्रोडक्शन हाउस के अनुसार, सेट पर बिना किसी दबाव या गनपॉइंट के पूरी स्वेच्छा से किए गए काम को अब साक्षात्कार के माध्यम से धोखे का नाम दिया जा रहा है, जो कि केवल एक बड़े सुपरस्टार को खुश करने और उद्योग में अपने संबंधों को बचाने की एक कमजोर कोशिश मात्र है।

    इस पूरे प्रकरण में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब निर्माता अमित जानी ने दोनों पक्षों के बीच हस्ताक्षरित कानूनी अनुबंध का खुलासा किया। निर्माता के दावों के अनुसार, गोविंद नामदेव ने न केवल इस वर्तमान फिल्म के लिए बल्कि भविष्य में बनने वाले इसके दूसरे भाग के लिए भी बकायदा कानूनी एग्रीमेंट साइन किया था। अब सार्वजनिक रूप से इस तरह के विरोधाभासी बयान देना न केवल उस कानूनी अनुबंध की शर्तों का खुला उल्लंघन है, बल्कि इससे प्रोडक्शन हाउस की बाजार साख और फिल्म की व्यावसायिक छवि को भी भारी वित्तीय और नैतिक नुकसान पहुंचा है।

    इस विवाद के बाद प्रोडक्शन हाउस ने अब रक्षात्मक रुख छोड़कर पूरी तरह से आक्रामक कानूनी कार्रवाई करने का मन बना लिया है। फिल्म निर्माता ने स्पष्ट किया है कि वे इस अनुबंध उल्लंघन और मानहानि के मामले को लेकर बहुत जल्द कानूनी नोटिस जारी करने जा रहे हैं। इस मामले की आधिकारिक सुनवाई और जांच के लिए अभिनेता को नोएडा की जिला अदालत में आकर अपना जवाब दाखिल करना होगा। सिनेमा जगत के विश्लेषकों का मानना है कि इस आंतरिक कलह और आने वाले कानूनी नोटिस के बाद फिल्म के समय पर प्रदर्शन और इसके भविष्य को लेकर अनिश्चितता के बादल और अधिक गहरे हो गए हैं।

  • एक दिन में 47 फिल्में साइन करने वाला बॉलीवुड स्टार, पहली ही फिल्म ने बनाया सुपरस्टार, फिर फीका पड़ गया करियर

    एक दिन में 47 फिल्में साइन करने वाला बॉलीवुड स्टार, पहली ही फिल्म ने बनाया सुपरस्टार, फिर फीका पड़ गया करियर


    नई दिल्ली । हिंदी सिनेमा के इतिहास में कई ऐसे कलाकार हुए हैं जिन्होंने अपनी पहली ही फिल्म से दर्शकों के दिलों में खास जगह बना ली। हालांकि, हर किसी की सफलता लंबे समय तक कायम नहीं रह पाती। अभिनेता Rahul Roy की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। एक समय था जब फिल्म निर्माता उनके साथ काम करने के लिए कतार में खड़े रहते थे और उनके पास फिल्मों की इतनी भरमार थी कि उन्होंने एक ही दिन में 47 फिल्में साइन कर ली थीं।

    हाल ही में राहुल रॉय टीवी शो लाफ्टर शेफ्स में नजर आए, जहां उनके फिल्मी करियर से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा सामने आया। शो के दौरान अभिनेता Karan Kundrra ने राहुल से पूछा कि क्या उन्होंने एक दिन में 150 फिल्में साइन की थीं। इस पर राहुल ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया कि यह आंकड़ा गलत है। उन्होंने बताया कि उन्होंने 150 नहीं, बल्कि 47 फिल्में एक ही दिन में साइन की थीं। यह सुनकर शो में मौजूद सभी लोग हैरान रह गए।

    राहुल रॉय को सबसे ज्यादा पहचान फिल्म Aashiqui से मिली थी। यह उनकी पहली फिल्म थी और रिलीज होते ही देशभर में जबरदस्त हिट साबित हुई। फिल्म में उनके साथ अभिनेत्री Anu Aggarwal नजर आई थीं। रोमांटिक कहानी और यादगार संगीत के कारण ‘आशिकी’ ने दर्शकों के दिलों में खास जगह बना ली। फिल्म की लोकप्रियता इतनी अधिक थी कि राहुल रॉय को लंबे समय तक ‘आशिकी बॉय’ के नाम से जाना जाता रहा।

    एक इंटरव्यू में राहुल रॉय ने बताया था कि ‘आशिकी’ सिनेमाघरों में करीब छह महीने तक हाउसफुल चली थी। फिल्म की सफलता ने उन्हें रातोंरात स्टार बना दिया और उनके पास फिल्मों के प्रस्तावों की बाढ़ आ गई। निर्माता और निर्देशक उन्हें अपनी फिल्मों में लेने के लिए उत्सुक रहते थे। इसी दौरान उन्होंने 47 फिल्मों पर हस्ताक्षर कर दिए।

    हालांकि, इतनी बड़ी संख्या में फिल्में साइन करना उनके लिए मुश्किल साबित हुआ। राहुल ने बाद में स्वीकार किया था कि उनके पास सभी फिल्मों के लिए समय नहीं था। मजबूरी में उन्हें कई प्रोजेक्ट छोड़ने पड़े और लगभग 21 निर्माताओं को उनकी एडवांस राशि भी लौटानी पड़ी। यह उनके करियर का एक ऐसा दौर था जब लोकप्रियता अपने चरम पर थी, लेकिन सही प्रबंधन न होने के कारण वह उसका पूरा लाभ नहीं उठा सके।

    फिल्मों के अलावा राहुल रॉय रियलिटी शो की दुनिया में भी अपनी पहचान बना चुके हैं। वे वर्ष 2007 में प्रसारित हुए Bigg Boss के पहले सीजन के विजेता रहे थे। बिग बॉस की ट्रॉफी जीतने के बाद भी उनके करियर को वैसी रफ्तार नहीं मिल सकी जैसी ‘आशिकी’ के दौर में देखने को मिली थी।

    राहुल रॉय ने अपने करियर में 28 से अधिक फिल्मों में काम किया, लेकिन उनकी बाद की अधिकांश फिल्में बॉक्स ऑफिस पर अपेक्षित सफलता हासिल नहीं कर सकीं। धीरे-धीरे उनका स्टारडम कम होता गया और वे फिल्मी दुनिया से दूर होते चले गए।

    हाल के वर्षों में राहुल रॉय सोशल मीडिया पर भी चर्चा में रहे हैं। कुछ समय पहले एक कंटेंट क्रिएटर के साथ रील वीडियो बनाने को लेकर उन्हें ट्रोलिंग का सामना करना पड़ा था। आलोचनाओं का जवाब देते हुए राहुल ने कहा था कि वह ईमानदारी से काम कर रहे हैं और मेहनत करके अपनी जिम्मेदारियां निभा रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा था कि यदि लोग उनकी इतनी चिंता करते हैं तो उन्हें बेहतर काम दिलाने में मदद करें।

    राहुल रॉय की कहानी बॉलीवुड में सफलता और संघर्ष दोनों का अनोखा उदाहरण है। एक दौर में जहां वे इंडस्ट्री के सबसे चर्चित सितारों में शामिल थे, वहीं आज उनकी यात्रा नई पीढ़ी के कलाकारों को सफलता के साथ संतुलन बनाए रखने का संदेश देती है।

  • भिंडी-मटन की ‘रिश्वत’ देकर गवाया गया था मन्ना डे का यह अमर गीत, आज भी सुनते ही झूम उठते हैं संगीत प्रेमी

    भिंडी-मटन की ‘रिश्वत’ देकर गवाया गया था मन्ना डे का यह अमर गीत, आज भी सुनते ही झूम उठते हैं संगीत प्रेमी


    नई दिल्ली । भारतीय सिनेमा के महान पार्श्वगायकों में शुमार Manna Dey ने अपने लंबे और शानदार करियर में सैकड़ों यादगार गीत गाए। शास्त्रीय संगीत की मजबूत पकड़ और मधुर आवाज के कारण उन्हें हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के सबसे सम्मानित गायकों में गिना जाता है। उनके जीवन से जुड़े कई किस्से आज भी संगीत प्रेमियों के बीच चर्चा का विषय बने रहते हैं। ऐसा ही एक दिलचस्प किस्सा फिल्म देख कबीरा रोया के मशहूर गीत “कौन आया मेरे मन के द्वारे” से जुड़ा हुआ है।

    साल 1957 में रिलीज हुई Dekh Kabira Roya का निर्देशन अमेय चक्रवर्ती ने किया था, जबकि फिल्म का संगीत दिग्गज संगीतकार Madan Mohan ने तैयार किया था। फिल्म का गीत “कौन आया मेरे मन के द्वारे” उस दौर के सबसे लोकप्रिय गीतों में गिना जाता है। यह गीत अभिनेता Anup Kumar पर फिल्माया गया था और आज भी रेडियो, संगीत कार्यक्रमों और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर खूब सुना जाता है।

    कहा जाता है कि इस गीत की धुन तैयार करते समय मदन मोहन के मन में केवल एक ही नाम था और वह था मन्ना डे। दरअसल, यह गीत शास्त्रीय संगीत के रंग में रंगा हुआ था। संगीत जगत में माना जाता था कि शास्त्रीय रागों पर आधारित गीतों को भावपूर्ण ढंग से प्रस्तुत करने में मन्ना डे का कोई मुकाबला नहीं था। यही वजह थी कि मदन मोहन किसी अन्य गायक के बजाय मन्ना डे की आवाज में ही इस गीत को रिकॉर्ड करना चाहते थे।

    हालांकि, मन्ना डे को मनाने के लिए मदन मोहन ने एक अनोखा तरीका अपनाया। चर्चित किस्सों के अनुसार, उन्होंने मन्ना डे से पूछा कि वे क्या कर रहे हैं। जब मन्ना डे ने बताया कि उनके पास फिलहाल कोई विशेष काम नहीं है, तब मदन मोहन ने उन्हें अपने घर आने का निमंत्रण दिया और कहा कि वे उन्हें उनकी पसंद का भिंडी-मटन खिलाएंगे।

    मदन मोहन अपने बेहतरीन खानपान और मेहमाननवाजी के लिए भी जाने जाते थे। ऐसे में स्वादिष्ट भोजन का न्योता सुनकर मन्ना डे उनके घर पहुंच गए। वहां उनका शानदार स्वागत हुआ और उन्हें भिंडी-मटन परोसा गया। भोजन के बाद मदन मोहन ने बड़ी सहजता से उन्हें गीत की धुन सुनाई और कहा कि वे चाहते हैं कि यह गीत मन्ना डे ही गाएं।

    बताया जाता है कि धुन सुनते ही मन्ना डे प्रभावित हो गए और उन्होंने तुरंत गीत गाने के लिए हामी भर दी। इसके बाद रिकॉर्ड हुआ “कौन आया मेरे मन के द्वारे” हिंदी फिल्म संगीत का एक कालजयी गीत बन गया। इसकी मधुरता, शास्त्रीयता और मन्ना डे की अद्भुत गायकी ने इसे अमर बना दिया। दशकों बाद भी यह गीत संगीत प्रेमियों की पसंदीदा सूची में शामिल है।

    मन्ना डे की प्रतिभा का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्हें अपने करियर में अनेक प्रतिष्ठित सम्मान मिले। उन्हें वर्ष 1971 में पद्म श्री, 2005 में दादा साहब फाल्के पुरस्कार और 2012 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया। इसके अलावा उन्हें तीन बार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार भी प्राप्त हुआ। उनकी आवाज और संगीत साधना आज भी नई पीढ़ी के गायकों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी हुई है।

  • निर्जला एकादशी पर शनि और शुक्र रचेंगे दुर्लभ इतिहास: ज्योतिषीय गणना में 120 डिग्री पर नवपंचम राजयोग का महासंयोग

    निर्जला एकादशी पर शनि और शुक्र रचेंगे दुर्लभ इतिहास: ज्योतिषीय गणना में 120 डिग्री पर नवपंचम राजयोग का महासंयोग

    नई दिल्ली। सनातन परंपरा में सबसे कठिन और महत्वपूर्ण मानी जाने वाली निर्जला एकादशी इस बार न केवल धार्मिक दृष्टि से बल्कि ज्योतिषीय समीकरणों के लिहाज से भी अत्यंत विशेष होने जा रही है। आगामी पच्चीस जून को मनाए जाने वाले इस पावन पर्व पर आकाशमंडल में एक बेहद दुर्लभ और शक्तिशाली नवपंचम राजयोग का निर्माण होने जा रहा है। ज्योतिष शास्त्र के विशेषज्ञों के अनुसार यह शुभ संयोग तब बनता है जब दो मित्र ग्रह एक-दूसरे से विशेष त्रिकोणीय दूरी पर स्थापित होते हैं। इस बार न्याय के देवता शनि और सुख-वैभव के प्रदाता शुक्र एक-दूसरे से ठीक एक सौ बीस डिग्री के कोण पर विराजमान होकर इस अद्भुत योग को पूर्ण करेंगे, जिसका सीधा सकारात्मक प्रभाव मानव जीवन के आर्थिक और व्यावसायिक क्षेत्रों पर देखने को मिलेगा।

    मध्य प्रदेश। ज्योतिष विज्ञान में शनि और शुक्र को नैसर्गिक रूप से परम मित्र माना गया है, इसलिए इन दोनों के बीच बनने वाला पांचवें और नौवें भाव का यह त्रिकोणीय संबंध बेहद फलदायी माना जाता है। इस बार निर्जला एकादशी के दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की संयुक्त आराधना के साथ इस राजयोग का मिलना एक महान आध्यात्मिक संयोग है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस विशेष दिन पर व्रत रखने, जप करने और जरूरतमंदों को शीतल जल व अन्न का दान करने से ग्रहों के नकारात्मक प्रभाव पूरी तरह शांत होते हैं। ज्योतिषीय गणनाओं से स्पष्ट संकेत मिल रहे हैं कि इस राजयोग के प्रभाव से देश के आर्थिक परिदृश्य और विशेषकर चार भाग्यशाली राशियों के जीवन में अप्रत्याशित और सकारात्मक बदलाव आने तय हैं।

    इस महासंयोग से मुख्य रूप से लाभान्वित होने वाली राशियों में वृषभ राशि के जातकों का नाम सबसे ऊपर आ रहा है। वृषभ राशि के लोगों के लिए यह समय करियर और आजीविका के क्षेत्र में एक बड़ी लंबी छलांग लगाने का साबित हो सकता है। कार्यस्थल पर लंबे समय से लंबित पड़ी योजनाएं अचानक गति पकड़ेंगी और व्यावसायिक क्षेत्र में काम करने वाले लोगों को कोई बहुत बड़ी व्यापारिक डील हासिल हो सकती है। इसके अलावा पैतृक संपत्ति के मामलों में भी इन्हें बड़ी सफलता मिलने के योग बन रहे हैं, जिससे समाज और कार्यक्षेत्र में इनकी प्रतिष्ठा और प्रशासनिक धाक में भारी वृद्धि दर्ज की जाएगी।

    ग्रहों का यह विशेष परिवर्तन मिथुन राशि के जातकों के लिए भी वरदान से कम नहीं सिद्ध होने वाला है। इस राशि के लोगों के लिए आय के एक से अधिक नए स्रोत विकसित होंगे, जिससे आर्थिक स्थिति को बहुत अधिक मजबूती मिलेगी। व्यापार और आजीविका के सिलसिले में की जाने वाली सुदूर यात्राएं इस अवधि में अत्यधिक आर्थिक लाभ प्रदान करेंगी। पारिवारिक जीवन के दृष्टिकोण से भी यह समय अनुकूल रहेगा, जहां पुराने समय से चले आ रहे आपसी मतभेद और तनाव पूरी तरह समाप्त होंगे और जीवनसाथी के साथ संबंधों में प्रगाढ़ता आएगी।

    इसके साथ ही कन्या राशि के जातकों को इस राजयोग के प्रभाव से आकस्मिक और अप्रत्याशित धन लाभ होने की प्रबल संभावनाएं दिखाई दे रही हैं। शेयर बाजार, लॉटरी या अतीत में किए गए किसी पुराने निवेश से इस समय भारी मुनाफा हाथ लग सकता है। नौकरीपेशा वर्ग से जुड़े लोगों को उच्च अधिकारियों के पूर्ण सहयोग के साथ बड़ी प्रशासनिक जिम्मेदारी या पदोन्नति मिलने के स्पष्ट संकेत हैं। विशेष रूप से जो लोग रचनात्मक कार्यों, लेखन, कला, मीडिया या डिजिटल मीडिया के क्षेत्र से जुड़े हैं, उनकी कल्पनाशीलता और कार्यक्षमता इस दौरान अपने सर्वोच्च स्तर पर होगी।

    इस राजयोग की चौथी सबसे महत्वपूर्ण लाभार्थी राशि कुंभ है, जिसके स्वयं स्वामी ग्रह शनि देव हैं। शनि की विशेष कृपा के चलते कुंभ राशि के जातकों के आत्मविश्वास और निर्णय लेने की क्षमता में जबरदस्त बढ़ोतरी देखने को मिलेगी। यदि इस राशि के जातक लंबे समय से किसी नए व्यापार, स्टार्टअप या स्वतंत्र कार्य की शुरुआत करने की योजना बना रहे थे, तो उनके लिए यह समय सबसे अधिक अनुकूल और सफलता की गारंटी देने वाला सिद्ध होगा। इसके प्रभाव से पिछले कई महीनों से चला आ रहा मानसिक तनाव और स्वास्थ्य संबंधी विकार भी पूरी तरह समाप्त हो जाएंगे।

  • दीप्ति शर्मा के 'पंजे' और मंधाना के अर्धशतक से उड़ी पाकिस्तानी टीम, भारतीय महिला टीम की ऐतिहासिक और एकतरफा जीत

    दीप्ति शर्मा के 'पंजे' और मंधाना के अर्धशतक से उड़ी पाकिस्तानी टीम, भारतीय महिला टीम की ऐतिहासिक और एकतरफा जीत

    नई दिल्ली। आईसीसी विमेंस टी20 वर्ल्ड कप 2026 में भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने अपने अभियान की शुरुआत धमाकेदार अंदाज में की है। बर्मिंघम के एजबेस्टन मैदान पर खेले गए इस हाई-वोल्टेज मुकाबले में कप्तान हरमनप्रीत कौर की अगुवाई में भारतीय टीम ने चिर-प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान को 64 रनों के बड़े अंतर से पराजित किया। इस एकतरफा जीत के साथ ही भारत ने टूर्नामेंट में अपनी मजबूत दावेदारी पेश कर दी है। मैच में टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी भारतीय टीम ने निर्धारित 20 ओवरों में पाकिस्तान के सामने 171 रनों का चुनौतीपूर्ण लक्ष्य रखा था, जिसके जवाब में पाकिस्तानी टीम महज 106 रनों पर ढेर हो गई।

    भारतीय टीम की इस शानदार और ऐतिहासिक जीत में सलामी बल्लेबाज स्मृति मंधाना और स्टार ऑलराउंडर दीप्ति शर्मा ने मुख्य भूमिका निभाई। स्मृति मंधाना ने पाकिस्तानी गेंदबाजों की जमकर खबर लेते हुए 44 गेंदों पर 68 रनों की बेहद प्रभावशाली पारी खेली, जिसमें नौ आकर्षक चौके और दो गगनचुंबी छक्के शामिल रहे। मध्यक्रम में कप्तान हरमनप्रीत कौर ने सूझबूझ का परिचय देते हुए 36 रन बनाए, जबकि अंतिम ओवरों में विकेटकीपर बल्लेबाज ऋचा घोष ने महज 17 गेंदों पर ताबड़तोड़ 34 रन कूटकर भारतीय टीम के स्कोर को एक सम्मानजनक और मजबूत स्थिति तक पहुंचाया। पाकिस्तान की ओर से कप्तान फातिमा सना और सादिया इकबाल ने जरूर कुछ सफलताएं हासिल कीं, लेकिन वे भारतीय बल्लेबाजों पर अंकुश लगाने में नाकाम रहीं।

    लक्ष्य का पीछा करने उतरी पाकिस्तान टीम की शुरुआत बेहद खराब रही और भारतीय गेंदबाजों के सटीक आक्रमण के सामने उनकी बल्लेबाजी ताश के पत्तों की तरह बिखर गई। पाकिस्तान की तरफ से केवल सलामी बल्लेबाज मुनीबा अली ही भारतीय गेंदबाजों का डटकर सामना कर सकीं, जिन्होंने 35 गेंदों में 41 रनों का योगदान दिया। उनके अलावा आलिया रियाज ने 18 रन, गुल फिरोजा और आयशा जफर ने 12-12 रन बनाए। टीम की बाकी सात बल्लेबाज दहाई का आंकड़ा भी छूने में पूरी तरह नाकाम रहीं और पूरी टीम 17 ओवरों में ही पवेलियन लौट गई।

    भारत की इस ऐतिहासिक गेंदबाजी प्रदर्शन की कमान दीप्ति शर्मा के हाथों में रही, जिन्होंने अपनी फिरकी के जाल में पाकिस्तानी बल्लेबाजों को ऐसा उलझाया कि उन्होंने अकेले ही 5 विकेट चटकाकर विपक्षी टीम की कमर तोड़ दी। दीप्ति के इस घातक स्पेल के अलावा श्री चरणी ने बेहतरीन लाइन-लेंथ से गेंदबाजी करते हुए 3 विकेट अपने नाम किए, जबकि सलामी बल्लेबाज शेफाली वर्मा ने भी पार्ट-टाइम स्पिनर के तौर पर 1 विकेट हासिल किया। इस मैच की खास बात यह रही कि पाकिस्तानी टीम के कुल 9 विकेट भारतीय स्पिन गेंदबाजों के खाते में गए, जबकि एक बल्लेबाज मुनीबा अली रन आउट होकर पवेलियन लौटीं।

    इस शानदार जीत के बाद भारतीय महिला टीम का मनोबल सातवें आसमान पर है और टीम अब अपने अगले मुकाबले में 17 जून को नीदरलैंड्स का सामना करने के लिए मैदान पर उतरेगी। भारतीय टीम आज तक विमेंस टी20 वर्ल्ड कप का खिताब अपने नाम नहीं कर सकी है, जहां उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन साल 2020 में उपविजेता के रूप में रहा था। इस बार हरमनप्रीत कौर की कप्तानी में भारतीय टीम का एकमात्र लक्ष्य पहली बार विश्व विजेता बनकर इतिहास रचना है, जिसकी शुरुआत उन्होंने चिर-प्रतिद्वंद्वी पर एकतरफा जीत दर्ज करके कर दी है।

  • जाह्नवी कपूर के किरदार विवाद पर बढ़ी बहस: डायरेक्टर की माफी से असहमत दिखे गीतकार, बोले- ऐसे चला तो कमर्शियल सिनेमा मुश्किल होगा

    जाह्नवी कपूर के किरदार विवाद पर बढ़ी बहस: डायरेक्टर की माफी से असहमत दिखे गीतकार, बोले- ऐसे चला तो कमर्शियल सिनेमा मुश्किल होगा


    नई दिल्ली । तेलुगु सिनेमा की चर्चित फिल्म Peddi इन दिनों बॉक्स ऑफिस के साथ-साथ विवादों की वजह से भी सुर्खियों में बनी हुई है। फिल्म में Janhvi Kapoor द्वारा निभाए गए अच्चियम्मा के किरदार को लेकर सोशल मीडिया पर बहस छिड़ी हुई है। कुछ दर्शकों और सोशल मीडिया यूजर्स ने आरोप लगाया था कि फिल्म में अभिनेत्री के किरदार को जरूरत से ज्यादा ग्लैमरस या ओवर-सेक्सुअलाइज्ड तरीके से प्रस्तुत किया गया है। विवाद बढ़ने के बाद फिल्म के निर्देशक Buchi Babu Sana ने सार्वजनिक रूप से माफी भी मांगी थी।

    हालांकि अब फिल्म के गीतकार Anantha Sriram ने निर्देशक की माफी पर असहमति जताते हुए रचनात्मक स्वतंत्रता का समर्थन किया है। एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि किसी भी किरदार का व्यवहार और प्रस्तुति निर्देशक की कल्पना का हिस्सा होती है और उसे उसी दृष्टिकोण से देखा जाना चाहिए।

    अनंत श्रीराम ने कहा कि किसी फिल्मी पात्र को जिस तरह लिखा और प्रस्तुत किया जाता है, वह पूरी तरह रचनात्मक प्रक्रिया का हिस्सा होता है। उनके अनुसार, यदि हर रचनात्मक निर्णय पर सोशल मीडिया के दबाव में सवाल उठाए जाएंगे और फिल्मकारों को लगातार सफाई देनी पड़ेगी, तो इससे सिनेमा की स्वतंत्र अभिव्यक्ति प्रभावित हो सकती है।

    गीतकार ने यह भी कहा कि आज सोशल मीडिया पर अपनी राय रखने वाले लोग कई बार किसी विषय को अलग नजरिए से देखते हैं और उसी आधार पर आलोचना करते हैं। उन्होंने तर्क दिया कि यदि फिल्म निर्माताओं और निर्देशकों को अपनी कल्पना के अनुसार पात्र गढ़ने की स्वतंत्रता नहीं मिलेगी तो रचनात्मकता सीमित हो जाएगी।

    अपने बयान में उन्होंने यह भी कहा कि फिल्मों के कुछ संवाद या दृश्य अलग-अलग संदर्भों में अलग तरीके से देखे जाते हैं। उनके अनुसार, कभी-कभी एक ही बात को आधुनिक या परिष्कृत भाषा में कहा जाए तो उसे स्वीकार कर लिया जाता है, जबकि वही बात किसी ग्रामीण या पारंपरिक पात्र के माध्यम से दिखाई जाए तो उसे आलोचना का सामना करना पड़ता है।

    अनंत श्रीराम का मानना है कि निर्देशक द्वारा माफी मांगना उनकी व्यक्तिगत संवेदनशीलता और दर्शकों की भावनाओं के प्रति सम्मान का प्रतीक हो सकता है, लेकिन लगातार इस तरह की परिस्थितियां बनने से व्यावसायिक फिल्मों के निर्माण पर असर पड़ सकता है।

    वहीं, इससे पहले निर्देशक बुची बाबू सना ने सोशल मीडिया पर जारी बयान में कहा था कि उनकी टीम का उद्देश्य किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं था। उन्होंने लिखा था कि दर्शकों की प्रतिक्रियाओं का सम्मान किया जाता है और यदि किसी को फिल्म के किसी हिस्से से ठेस पहुंची है तो वह इसके लिए खेद व्यक्त करते हैं।

    फिल्म की बात करें तो इसमें Ram Charan, Janhvi Kapoor, Shiva Rajkumar, Divyenndu और Boman Irani प्रमुख भूमिकाओं में नजर आ रहे हैं। फिल्म को दर्शकों का अच्छा प्रतिसाद मिल रहा है और यह बॉक्स ऑफिस पर मजबूत प्रदर्शन कर रही है।

  • राम मंदिर के चढ़ावे में गबन का मामला लंबे समय दबाए रखने पर उठे सवाल…..SIT ने शुरू की जांच

    राम मंदिर के चढ़ावे में गबन का मामला लंबे समय दबाए रखने पर उठे सवाल…..SIT ने शुरू की जांच


    लखनऊ ।
    श्रीराम मंदिर (Shri Ram Temple) के चंदा गबन करने के मामले में अब तक एफआईआर (FIR) दर्ज न कराना सबसे बड़ा सवाल बना हुआ है। आखिर ऐसी क्या मजबूरी है जो ट्रस्ट ने केस दर्ज नहीं कराया है। गबन के साक्ष्य मिल चुके हैं, बड़ी रकम भी बरामद हुई और संदिग्ध भी पकड़े गए, उसके भी रिपोर्ट न करना गंभीर सवाल खड़े करता है। सीधेतौर पर अब ट्रस्ट के बड़े जिम्मेदारों की मंशा पर सवाल उठ रहे हैं।

    प्रकरण सामने आने के बाद ट्रस्ट ने मामला दबाए रखा था। जब मीडिया में उजागर हुआ तो ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने चुप्पी साध ली। जो पदाधिकारी आएदिन तमाम बयान देते रहते थे वह अब सामने आने को तैयार नहीं हैं। इस बीच ट्रस्ट ने खुद ही संदिग्ध पकड़े। उनकी निशानदेही पर रकम बरामद की। मतलब इससे साबित हो चुका है कि चंदा राशि चोरी की गई। ऐसे में ट्रस्ट को मामले में केस दर्ज करवाना चाहिए लेकिन ऐसा नहीं किया गया है। एफआईआर अब तक क्यों नहीं दर्ज कराई जा रही है? इसकी वजह नहीं पता चल रही है। हालांकि ऐसे में कयास है कि किसी न किसी को बचाने के लिए पर्दा डाला जा रहा है।


    अब एसआईटी आगे, सब पीछे

    मामले में भले ही एसआईटी (SIT) गठित कर दी गई हो लेकिन मामला आपराधिक है। इसलिए केस दर्ज होना चाहिए थे। उसके साथ एसआईटी की भी जांच जारी रहती। चूंकि अब एसआईटी गठित हो चुकी है तो पूरा मामला पीछे छूट जाएगा, खासकर एफआईआर न दर्ज करवाने वाला। अब हर सवाल पर यही होगा कि एसआईटी जांच कर रही है, उसके बाद ही कुछ कार्रवाई की जाएगी।

    ये किसी ट्रस्ट का काम नहीं
    जिस तरह से अब तक संदिग्ध पकड़े गए और फिर नकदी बरामद की गई, ये कार्य करना किसी ट्रस्ट या निजी संस्था आदि का नहीं है। विशेषज्ञों का कहना है कि चोरी हुई है तो पहले एफआईआर करवानी चाहिए। फिर पुलिस या अन्य जांच एजेंसी आगे की कार्रवाई करते हुए आरोपियों से पूछताछ, बरामदगी आदि की कार्रवाई करती।


    एसआईटी जुटाएगी ब्योरा, संदिग्धों से पूछताछ भी करेगी

    राम मंदिर के चढ़ावे में गबन के मामले के तूल पकड़ने के बाद केंद्र भी सक्रिय हो गया है। रविवार को पीएमओ की तरफ से एक बड़े अफसर के मंदिर पहुंचने की चर्चा है। अफसर अपने स्तर से जांच पड़ताल के बाद जानकारी जुटाकर पीएमओ को देंगे। हालांकि इसकी पुष्टि नहीं हो सकी है।

    वहीं, मामले की जांच के लिए गठित तीन सदस्यीय एसआईटी (विशेष जांच दल) सोमवार को अयोध्या पहुंचेगी। टीम ट्रस्ट के पदाधिकारियों से जानकारी लेने के साथ मंदिर के कर्मचारियों और चिह्नित संदिग्धों से पूछताछ करेगी। ट्रस्ट की ओर से की गई अब तक की जांच का पूरा ब्योरा भी जुटाएगी।

    इस बीच एक सप्ताह पहले उजागर हुए इस मामले में गबन के साक्ष्य मिलने के बाद भी अब तक एफआईआर दर्ज नहीं कराई गई है। मंदिर की दान राशि में हेरफेर का मामला बीते सप्ताह उजागर हुआ था। ट्रस्ट के पदाधिकारी तब से खुद ही गोपनीय जांच में जुटे हैं। ट्रस्ट के ऑफिस के पास किसी भी बाहरी शख्स के जाने पर रोक है।

    इन सबके बीच शनिवार को श्रीराम मंदिर ट्रस्ट के अनुरोध के बाद मुख्यमंत्री के निर्देश पर शासन ने तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन किया था। इसमें लखनऊ के मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, आईजी रेंज लखनऊ किरन एस और विशेष सचिव वित्त नील रतन शामिल हैं।

    चर्चा थी कि एसआईटी रविवार से जांच शुरू करेगी, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। सूत्रों के मुताबिक, एसआईटी सोमवार को अयोध्या पहुंचकर जांच शुरू करेगी। टीम केवल धन के लेन-देन और तकनीकी पहलुओं की जांच ही नहीं, बल्कि यह भी पता लगाएगी कि किसी स्तर पर संरक्षण, लापरवाही या मिलीभगत तो नहीं हुई। किसी ट्रस्टी या पदाधिकारी की संलिप्तता या प्रशासनिक चूक के प्रमाण मिलने पर उनके अधिकार सीमित किए जा सकते हैं।


    चंपत राय बीमार, अनिल मिश्रा चिकित्सकीय जांच के लिए केरल गए

    राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण की जांच के लिए गठित एसआईटी के अयोध्या पहुंचने की तैयारी के बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय अस्वस्थ बताए जा रहे हैं। ट्रस्ट के वरिष्ठ सदस्य अनिल मिश्रा चिकित्सकीय परामर्श के लिए केरल गए हैं।

    सूत्रों के अनुसार चंपत राय को जुकाम के साथ शुगर बढ़ने की शिकायत है, जिसके चलते वह स्वास्थ्य लाभ ले रहे हैं। अनिल मिश्रा आंखों की जांच और चिकित्सकीय परामर्श के लिए केरल गए हैं।