Author: bharati

  • कपिल शर्मा की एक्स गर्लफ्रेंड कहे जाने पर भड़कीं प्रीति सिमोस, बोलीं- मेरी पहचान सिर्फ रिश्ते से नहीं

    कपिल शर्मा की एक्स गर्लफ्रेंड कहे जाने पर भड़कीं प्रीति सिमोस, बोलीं- मेरी पहचान सिर्फ रिश्ते से नहीं


    नई दिल्ली ।
    टीवी इंडस्ट्री की जानी-मानी प्रोड्यूसर प्रीति सिमोस ने कॉमेडियन कपिल शर्मा की एक्स गर्लफ्रेंड के टैग को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की है। प्रीति सिमोस का कहना है कि लंबे समय से उनकी पहचान उनके काम और उपलब्धियों के बजाय कपिल शर्मा के साथ रहे पुराने रिश्ते के आधार पर की जाती रही है। उन्होंने कहा कि यह स्थिति उनके लिए काफी निराशाजनक है, क्योंकि उन्होंने टेलीविजन इंडस्ट्री में अपनी अलग पहचान बनाने के लिए वर्षों तक मेहनत की है।

    प्रीति सिमोस ने एक बातचीत के दौरान कहा कि एक समय तक वह किसी की गर्लफ्रेंड के रूप में जानी जाती थीं, लेकिन रिश्ता खत्म होने के बाद भी उन्हें उसी पुराने रिश्ते के नाम से जोड़कर देखा जाता है। उन्होंने कहा कि ब्रेकअप के बाद दोनों अपनी-अपनी जिंदगी में आगे बढ़ चुके हैं, लेकिन मीडिया और लोगों के एक वर्ग ने अब भी उन्हें उसी नजरिए से देखना जारी रखा है। उनके अनुसार, यह उनके काम और प्रोफेशनल पहचान के साथ न्याय नहीं करता।

    प्रीति ने कहा कि उन्हें सबसे ज्यादा परेशानी इस बात से होती है कि उनकी मेहनत और करियर की उपलब्धियों की चर्चा कम होती है, जबकि कपिल शर्मा के साथ उनके रिश्ते को ज्यादा महत्व दिया जाता है। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति की पहचान केवल उसके निजी रिश्तों से नहीं होनी चाहिए। हर इंसान की अपनी मेहनत, प्रतिभा और उपलब्धियां होती हैं, जिन्हें भी महत्व मिलना चाहिए।

    उन्होंने यह भी कहा कि दो लोगों के बीच रिश्ते की वास्तविकता को बाहर के लोग पूरी तरह नहीं जानते। कई बार लोग अलग होने के बाद भी एक-दूसरे के साथ सम्मानजनक संबंध बनाए रखते हैं या दोस्त बने रहते हैं। इसके बावजूद समाज और मीडिया अक्सर पुराने रिश्तों के आधार पर लोगों को पहचानने लगता है। प्रीति ने कहा कि खासतौर पर महिलाओं को ऐसे टैग का सामना ज्यादा करना पड़ता है और उनके बारे में गलत धारणाएं बनाई जाती हैं।

    प्रीति सिमोस ने टेलीविजन इंडस्ट्री में अपनी मजबूत पहचान बनाई है। वह कई लोकप्रिय शो और प्रोजेक्ट्स से जुड़ी रही हैं। उन्होंने ‘कॉमेडी नाइट्स विद कपिल’ और ‘द कपिल शर्मा शो’ जैसे चर्चित कार्यक्रमों के निर्माण में अहम भूमिका निभाई है। इसके अलावा वह ‘कानपुर वाले खुरानाज’, ‘गैंग्स ऑफ फिल्मिस्तान’, ‘आखिरी सच’ और कई अन्य प्रोजेक्ट्स का हिस्सा रही हैं। अपने काम के जरिए उन्होंने टीवी प्रोडक्शन क्षेत्र में खास मुकाम हासिल किया है।

    कपिल शर्मा और प्रीति सिमोस का नाम एक समय निजी रिश्ते को लेकर चर्चा में रहा था। हालांकि बाद में दोनों अलग हो गए और अपनी-अपनी जिंदगी में आगे बढ़ गए। कपिल शर्मा ने वर्ष 2018 में गिन्नी चतरथ से शादी की थी। अब कपिल अपनी पारिवारिक जिंदगी और प्रोफेशनल प्रोजेक्ट्स में व्यस्त हैं। वहीं प्रीति सिमोस भी लगातार अपने काम पर ध्यान दे रही हैं।

    प्रीति का कहना है कि किसी महिला की पहचान केवल उसके किसी प्रसिद्ध व्यक्ति के साथ जुड़े रिश्ते से नहीं होनी चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि लोगों को किसी के काम और व्यक्तिगत उपलब्धियों के आधार पर पहचान मिलनी चाहिए। उनका बयान सोशल मीडिया और मनोरंजन जगत में चर्चा का विषय बना हुआ है।

  • स्पाइडर-मैन की आंधी में फीकी पड़ी राघव जुयाल की फिल्म, छह दिनों में सिर्फ 1 करोड़ का आंकड़ा पार कर पाई

    स्पाइडर-मैन की आंधी में फीकी पड़ी राघव जुयाल की फिल्म, छह दिनों में सिर्फ 1 करोड़ का आंकड़ा पार कर पाई


    नई दिल्ली ।
    बॉलीवुड अभिनेता राघव जुयाल की फिल्म ‘भाई तेरा स्टार है’ बॉक्स ऑफिस पर दर्शकों को आकर्षित करने में संघर्ष करती नजर आ रही है। फिल्म की शुरुआत बेहद कमजोर रही और रिलीज के पहले दिन ही यह महज 25 लाख रुपये की कमाई कर सकी। इसके बाद भी फिल्म के कलेक्शन में कोई बड़ा सुधार देखने को नहीं मिला। छह दिनों के भीतर फिल्म की कुल कमाई करीब 1.02 करोड़ रुपये तक ही पहुंच पाई है। दूसरी ओर हॉलीवुड फिल्म ‘स्पाइडर-मैन: ब्रांड न्यू डे’ को दर्शकों का अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है, जिसका असर भारतीय फिल्म के प्रदर्शन पर भी दिखाई दे रहा है।

    राघव जुयाल की यह पहली सोलो लीड फिल्म बताई जा रही है, जिससे काफी उम्मीदें जुड़ी थीं। हालांकि, रिलीज के बाद मिले कमजोर रिव्यू और दर्शकों की कम प्रतिक्रिया के कारण फिल्म को बॉक्स ऑफिस पर मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। फिल्म के कलेक्शन में शुरुआती दिनों से ही गिरावट दर्ज की गई। पहले दिन जहां फिल्म ने 25 लाख रुपये कमाए, वहीं दूसरे दिन भी कमाई लगभग इतनी ही रही। तीसरे दिन कलेक्शन घटकर 20 लाख रुपये और चौथे दिन करीब 21 लाख रुपये रहा।

    वीकेंड के बाद फिल्म की कमाई में भारी गिरावट देखने को मिली। पांचवें दिन फिल्म सिर्फ 6 लाख रुपये का कारोबार कर सकी, जबकि छठे दिन यह आंकड़ा और गिरकर करीब 5 लाख रुपये रह गया। लगातार कम होते कलेक्शन के कारण फिल्म की स्क्रीन संख्या भी घटकर लगभग 300 के आसपास रह गई है। इससे आने वाले दिनों में फिल्म की कमाई बढ़ने की संभावनाएं और कम हो गई हैं।

    ‘भाई तेरा स्टार है’ का बजट करीब 20 से 25 करोड़ रुपये बताया जा रहा है। मौजूदा रफ्तार को देखते हुए अनुमान लगाया जा रहा है कि फिल्म का पहला हफ्ता भी 1.2 करोड़ रुपये से कम के कलेक्शन पर खत्म हो सकता है। अगर यही स्थिति आगे भी बनी रही तो फिल्म की कुल कमाई 1.5 करोड़ रुपये के आसपास ही सीमित रह सकती है। ऐसे में फिल्म के लिए अपनी लागत निकालना बेहद मुश्किल दिखाई दे रहा है।

    फिल्म की कमजोर कमाई के पीछे कई कारण माने जा रहे हैं। सबसे बड़ा कारण दर्शकों की ओर से मिली सीमित प्रतिक्रिया और बड़े स्तर पर रिलीज हुई हॉलीवुड फिल्म से मिली चुनौती है। ‘स्पाइडर-मैन: ब्रांड न्यू डे’ के प्रति दर्शकों में उत्साह देखने को मिल रहा है, जिसके कारण कई सिनेमाघरों में शो की प्राथमिकता भी बदल गई है। इसका सीधा असर छोटे बजट और सीमित प्रचार वाली फिल्मों पर पड़ता है।

    ‘भाई तेरा स्टार है’ का निर्देशन और निर्माण विवेक बी अग्रवाल ने किया है। फिल्म में राघव जुयाल के अलावा निकी वालिया, संजय कपूर, निहारिका एनएम, विवान भटेना और टीना देसाई जैसे कलाकार नजर आए हैं। फिल्म की कहानी और कलाकारों की मौजूदगी के बावजूद बॉक्स ऑफिस पर इसे मजबूत शुरुआत नहीं मिल सकी।

    फिल्म इंडस्ट्री में किसी भी फिल्म की सफलता के लिए शुरुआती दिनों की कमाई बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। राघव जुयाल की फिल्म के मामले में शुरुआती प्रदर्शन कमजोर रहने के बाद अब दूसरे सप्ताह में स्क्रीन संख्या बनाए रखना भी चुनौती बन सकता है। आने वाले दिनों में फिल्म की कमाई में कितना सुधार होता है, यह दर्शकों की प्रतिक्रिया पर निर्भर करेगा।

  • ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों पर नियंत्रण के लिए बिल का ड्राफ्ट पेश किया, नियम तोड़ने पर भारी जुर्माने का प्रावधान

    ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों पर नियंत्रण के लिए बिल का ड्राफ्ट पेश किया, नियम तोड़ने पर भारी जुर्माने का प्रावधान

    नई दिल्ली । ईरान ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री यातायात को नियंत्रित करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। ईरानी सांसदों ने इस जलमार्ग से गुजरने वाले जहाजों के लिए नए नियमों से जुड़े एक विधेयक का ड्राफ्ट तैयार किया है। इस प्रस्ताव में कुछ जहाजों की आवाजाही पर रोक लगाने और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर आर्थिक जुर्माना लगाने का प्रावधान शामिल किया गया है।

    यह बिल फिलहाल ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा आयोग की समीक्षा में है। प्रस्तावित कानून का उद्देश्य होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले समुद्री यातायात को नियंत्रित करना और ईरान के अनुसार सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना बताया जा रहा है। हालांकि, इस कदम को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता भी बढ़ सकती है, क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग माना जाता है।

    प्रस्तावित ड्राफ्ट में इजरायल से जुड़े जहाजों और कुछ अन्य देशों या कंपनियों से जुड़े सैन्य तथा नागरिक कार्गो पर प्रतिबंध लगाने की बात कही गई है। इसमें कहा गया है कि ऐसे जहाजों को मुआवजा मिलने तक ट्रांजिट की अनुमति नहीं दी जाएगी। इसके अलावा नियमों का उल्लंघन करने वाले जहाजों पर उनके कार्गो मूल्य का 20 प्रतिशत तक जुर्माना लगाने का प्रावधान भी प्रस्ताव में शामिल किया गया है।

    ईरान की योजना के अनुसार, जिन जहाजों को होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने की अनुमति दी जाएगी, उनसे नौवहन सेवाओं के खर्च को पूरा करने के लिए शुल्क लिया जा सकता है। यह शुल्क ईरानी मुद्रा में जमा करना होगा। ईरान का कहना है कि यह व्यवस्था समुद्री सुरक्षा और सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए जरूरी है।

    होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। यहां से बड़ी मात्रा में तेल और गैस का परिवहन होता है। किसी भी तरह की बाधा या नियंत्रण व्यवस्था का असर अंतरराष्ट्रीय बाजारों, ऊर्जा कीमतों और वैश्विक व्यापार पर पड़ सकता है। इसी कारण ईरान के इस कदम पर कई देशों की नजर बनी हुई है।

    इससे पहले भी ईरान की ओर से होर्मुज स्ट्रेट को लेकर कानून बनाने की कोशिश की गई थी। शुरुआती प्रस्तावों में केवल उन देशों के जहाजों को निशाना बनाने की बात कही गई थी, जिन्हें ईरान अपना विरोधी मानता है। नए ड्राफ्ट में प्रतिबंधों का दायरा बढ़ाते हुए अधिक जहाजों और कार्गो को शामिल किया गया है।

    इसी बीच ईरान और ओमान के बीच होर्मुज स्ट्रेट से जुड़े समुद्री मार्गों को लेकर बातचीत भी जारी है। ईरानी अधिकारियों के अनुसार, दोनों देशों के बीच नौवहन मार्ग के भौगोलिक निर्देशांकों को लेकर सहमति बन चुकी है और संयुक्त बयान की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। हालांकि, इस समझौते को लेकर ओमान की ओर से अभी सार्वजनिक पुष्टि नहीं की गई है।

    प्रस्तावित व्यवस्था के तहत ईरान अपने नियंत्रण वाले समुद्री मार्गों से गुजरने वाले जहाजों की निगरानी करेगा। ईरान का कहना है कि वह समुद्री सुरक्षा और नौवहन व्यवस्था बनाए रखने के लिए जरूरी कदम उठाने का अधिकार रखेगा। इस व्यवस्था को लेकर क्षेत्रीय देशों और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण होगी।

    होर्मुज स्ट्रेट को लेकर ईरान के नए कदम ऐसे समय सामने आए हैं जब मध्य पूर्व में पहले से ही राजनीतिक और सैन्य तनाव बना हुआ है। समुद्री मार्गों पर किसी भी तरह का अतिरिक्त नियंत्रण या प्रतिबंध वैश्विक व्यापार के लिए नई चुनौती पैदा कर सकता है। आने वाले दिनों में इस बिल की समीक्षा और क्षेत्रीय देशों की प्रतिक्रिया पर दुनिया की नजर रहेगी।

  • मध्य पूर्व तनाव में समुद्री सुरक्षा बढ़ी, सरकार ने भारतीय नाविकों के लिए किए कई इंतजाम

    मध्य पूर्व तनाव में समुद्री सुरक्षा बढ़ी, सरकार ने भारतीय नाविकों के लिए किए कई इंतजाम

    नई दिल्ली । पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और समुद्री सुरक्षा चुनौतियों के बीच भारत सरकार ने भारतीय जहाजों और नाविकों की सुरक्षा को लेकर उठाए गए कदमों की जानकारी दी है। सरकार ने बताया कि खाड़ी क्षेत्र से अब तक 4,052 भारतीय नाविकों को सुरक्षित वापस लाया गया है। इसके अलावा भारत आने वाले 62 जहाज होर्मुज स्ट्रेट से सफलतापूर्वक गुजर चुके हैं।

    केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री ने संसद में जानकारी देते हुए बताया कि इन 62 जहाजों में 23 भारतीय ध्वज वाले और 39 विदेशी ध्वज वाले जहाज शामिल थे। बदलते समुद्री हालात को देखते हुए सरकार लगातार स्थिति की निगरानी कर रही है और सुरक्षा उपायों को मजबूत किया जा रहा है।

    मध्य पूर्व में जारी संघर्ष और समुद्री मार्गों पर बढ़ते जोखिम को देखते हुए समुद्री प्रशासन महानिदेशालय की ओर से समय-समय पर सुरक्षा संबंधी दिशानिर्देश जारी किए जा रहे हैं। इन निर्देशों का उद्देश्य भारतीय नाविकों और व्यापारिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करना है।

    सरकार ने बताया कि व्यापारिक जहाजों पर संभावित हमलों को देखते हुए अंतरराष्ट्रीय पोत और बंदरगाह सुविधा सुरक्षा नियमों के तहत जरूरी सुरक्षा उपाय लागू किए गए हैं। इसके अलावा खाड़ी क्षेत्र से गुजरने वाली यात्राओं में भारतीय नाविकों की तैनाती को लेकर भी विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

    इसके साथ ही काला सागर क्षेत्र में काम करने वाले भारतीय नाविकों वाले जहाजों के लिए भी सुरक्षा निर्देश जारी किए गए हैं। जहाज संचालकों और चालक दल को यात्रा से पहले सुरक्षा आकलन करने, जारी सलाह का पालन करने और किसी भी आपात स्थिति की तुरंत जानकारी देने के लिए कहा गया है।

    सरकार ने बाब-अल-मंडेब स्ट्रेट, दक्षिणी लाल सागर और यमन के आसपास के समुद्री क्षेत्रों में संचालित जहाजों के लिए भी सतर्कता बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। जहाज मालिकों और कप्तानों को सुरक्षा घटनाक्रमों पर लगातार नजर रखने और जोखिम कम करने के लिए अतिरिक्त कदम उठाने को कहा गया है।

    होर्मुज स्ट्रेट क्षेत्र में भारतीय नाविकों की सुरक्षा के लिए विशेष व्यवस्था की गई है। इसके तहत चौबीसों घंटे संचालित होने वाला नियंत्रण कक्ष बनाया गया है। इसके अलावा जहाजों और चालक दल का लाइव डेटाबेस तैयार रखा जा रहा है, जिससे किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जा सके।

    सरकार ने समुद्री घटनाओं की निगरानी के लिए हर 24 घंटे में स्थिति रिपोर्ट तैयार करने की व्यवस्था भी की है। इसमें जहाजों की आवाजाही, भारतीय नाविकों की स्थिति, किसी भी घटना और संभावित नुकसान से जुड़ी जानकारी शामिल की जाती है।

    त्वरित सूचना और प्रतिक्रिया व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म भी विकसित किया गया है। इसमें समुद्री दुर्घटनाओं की रिपोर्टिंग, संकट प्रबंधन और नाविकों की शिकायतों के समाधान के लिए अलग-अलग सुविधाएं जोड़ी गई हैं।

    केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रभावित नाविकों के परिवारों के साथ सरकार लगातार संपर्क बनाए हुए है और जरूरत के अनुसार सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। किसी नाविक की मृत्यु की स्थिति में मुआवजा और तत्काल आर्थिक सहायता की व्यवस्था भी की गई है।

    पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा भारत के लिए महत्वपूर्ण बनी हुई है। होर्मुज स्ट्रेट वैश्विक ऊर्जा और व्यापार आपूर्ति के लिहाज से बेहद अहम समुद्री मार्ग है। ऐसे में भारत सरकार की प्राथमिकता अपने नागरिकों और समुद्री हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

  • समुद्री रास्तों पर बढ़े तनाव के बीच भारत की तैयारी तेज, नाविकों और जहाजों की सुरक्षा बनी पहली प्राथमिकता

    समुद्री रास्तों पर बढ़े तनाव के बीच भारत की तैयारी तेज, नाविकों और जहाजों की सुरक्षा बनी पहली प्राथमिकता

    नई दिल्ली । खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते समुद्री सुरक्षा जोखिमों के बीच भारत सरकार ने भारतीय नाविकों और भारतीय ध्वज वाले जहाजों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताया है। विदेश मंत्रालय ने कहा है कि भारतीय मिशन लगातार स्थानीय अधिकारियों, समुद्री संस्थानों और संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय में काम कर रहे हैं, ताकि किसी भी आपात स्थिति में भारतीय नाविकों को तुरंत सहायता उपलब्ध कराई जा सके। इसके लिए कई देशों में स्थित भारतीय मिशनों ने 24 घंटे चलने वाली हेल्पलाइन भी सक्रिय कर रखी है।

    विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि खाड़ी क्षेत्र में मौजूद भारतीय नाविकों और जहाजों की सुरक्षा को लेकर सरकार लगातार निगरानी बनाए हुए है। उन्होंने बताया कि भारतीय मिशन शिपिंग मंत्रालय, स्थानीय समुद्री प्राधिकरणों और अन्य संबंधित विभागों के साथ नियमित संपर्क में हैं। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि समुद्री मार्गों पर किसी भी चुनौती की स्थिति में भारतीय नागरिकों और जहाजों को समय पर सहायता मिल सके।

    सरकार की ओर से शुरू की गई 24 घंटे हेल्पलाइन व्यवस्था केवल नाविकों तक सीमित नहीं है, बल्कि अन्य भारतीय नागरिक भी जरूरत पड़ने पर इसका उपयोग कर सकते हैं। विदेश मंत्रालय के अनुसार, यह व्यवस्था पिछले कई महीनों से लगातार काम कर रही है और भविष्य में भी जारी रहेगी। इससे संकट की स्थिति में भारतीय नागरिकों को सीधे सहायता प्राप्त करने का माध्यम उपलब्ध हो रहा है।

    विदेश मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में सुरक्षित और निर्बाध आवाजाही का समर्थन करता है। सरकार का कहना है कि समुद्री व्यापार वैश्विक अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है, इसलिए सभी पक्षों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि आम नागरिकों, वाणिज्यिक जहाजों और उनमें काम करने वाले नाविकों को किसी भी तरह का नुकसान न पहुंचे।

    खाड़ी क्षेत्र और होर्मुज स्ट्रेट में बदलती सुरक्षा परिस्थितियों को देखते हुए भारत ने समुद्री निगरानी और आपात प्रबंधन को मजबूत किया है। केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के अनुसार, खाड़ी क्षेत्र से अब तक 4,052 भारतीय नाविकों को सुरक्षित वापस लाया जा चुका है। इसके अलावा 3 अगस्त तक भारत आने वाले 62 जहाज होर्मुज स्ट्रेट से सफलतापूर्वक गुजर चुके हैं। इनमें 23 भारतीय ध्वज वाले और 39 विदेशी ध्वज वाले जहाज शामिल हैं।

    समुद्री सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए समुद्री प्रशासन महानिदेशालय लगातार अपनी सलाह और दिशानिर्देशों को अपडेट कर रहा है। इसका उद्देश्य भारतीय नाविकों को बदलती परिस्थितियों के अनुसार सुरक्षा उपायों की जानकारी देना और किसी भी संभावित खतरे से बचाव करना है।

    सरकार ने होर्मुज स्ट्रेट में भारतीय नाविकों की सुरक्षा के लिए कई विशेष कदम उठाए हैं। इनमें 24 घंटे संचालित होने वाला नियंत्रण कक्ष, जहाजों और चालक दल की जानकारी वाला लाइव डेटाबेस और नियमित स्थिति रिपोर्ट तैयार करना शामिल है। इसके माध्यम से जहाजों की आवाजाही, नाविकों की स्थिति, किसी भी घटना और संभावित जोखिमों पर लगातार नजर रखी जा रही है।

    भारत का कहना है कि समुद्री सुरक्षा केवल व्यापार से जुड़ा मुद्दा नहीं है, बल्कि हजारों भारतीय परिवारों की सुरक्षा से भी जुड़ा विषय है। इसी कारण सरकार ने नाविकों और जहाजों की सुरक्षा के लिए बहुस्तरीय व्यवस्था लागू की है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तेजी से कार्रवाई की जा सके।

  • मोहम्मद रफी की आवाज का ऐसा जादू, बिना इंटरनेट के 26 भाषाओं में गूंजे गीत और बनी विश्व पहचान

    मोहम्मद रफी की आवाज का ऐसा जादू, बिना इंटरनेट के 26 भाषाओं में गूंजे गीत और बनी विश्व पहचान

    नई दिल्ली । भारतीय संगीत जगत के महानतम पार्श्वगायकों में शामिल मोहम्मद रफी की आवाज का जादू आज भी करोड़ों लोगों के दिलों में कायम है। जिस दौर में न इंटरनेट था, न सोशल मीडिया और न ही डिजिटल प्लेटफॉर्म, उस समय रफी साहब की आवाज सीमाओं को पार करते हुए दुनिया के कई हिस्सों तक पहुंच चुकी थी। 1940 के दशक में अपने गायन सफर की शुरुआत करने वाले मोहम्मद रफी ने कई दशकों तक भारतीय सिनेमा को अपनी सुरीली आवाज से समृद्ध किया और हर तरह के गीतों को अपनी गायकी से यादगार बना दिया।

    मोहम्मद रफी की खासियत यह थी कि वह हर भावना को अपनी आवाज में पूरी गहराई के साथ उतार देते थे। रोमांटिक गीतों से लेकर दर्द भरे नगमों, भजनों, कव्वालियों और देशभक्ति गीतों तक उन्होंने अपनी गायकी की अलग पहचान बनाई। उनकी आवाज में ऐसी मिठास और भावनात्मक प्रभाव था कि हर उम्र के श्रोता उनसे जुड़ जाते थे। यही वजह है कि कई दशक गुजर जाने के बाद भी उनके गीतों की लोकप्रियता कम नहीं हुई है।

    रफी साहब की गायकी केवल हिंदी फिल्मों तक सीमित नहीं रही। उन्होंने अपने करियर में करीब 26 भाषाओं में गीत रिकॉर्ड किए। इनमें हिंदी, उर्दू, पंजाबी, बंगाली, मराठी, गुजराती, भोजपुरी, तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम और ओड़िया जैसी भारतीय भाषाओं के अलावा अंग्रेजी, फारसी, स्पेनिश, डच और क्रियोल जैसी विदेशी भाषाएं भी शामिल थीं। यह उपलब्धि उस समय और भी बड़ी मानी जाती है, जब तकनीक और संचार के साधन आज की तरह विकसित नहीं थे।

    उनकी विदेशी भाषाओं में रिकॉर्ड की गई कुछ प्रस्तुतियां हिंदी फिल्मों के लोकप्रिय गीतों की धुनों पर आधारित थीं। फिल्म ‘गुमनाम’ के चर्चित गीत ‘हम काले हैं तो क्या हुआ दिलवाले हैं’ की धुन पर उन्होंने अंग्रेजी गीत भी रिकॉर्ड किया था। इसी तरह फिल्म ‘सूरज’ के सदाबहार गीत ‘बहारों फूल बरसाओ’ की धुन पर भी उन्होंने अंग्रेजी में गीत गाया था। यह दिखाता है कि उनकी आवाज की पहुंच केवल भारतीय श्रोताओं तक नहीं थी।

    मोहम्मद रफी से जुड़ा एक दिलचस्प तथ्य यह भी है कि उन्होंने फिल्मों के अलावा विज्ञापनों के लिए भी अपनी आवाज दी थी। 1950 के दशक में उन्होंने बर्मा शेल ऑयल कंपनी के लिए एक जिंगल रिकॉर्ड किया था, जिसका इस्तेमाल रेडियो विज्ञापन के रूप में किया जाता था। उस समय रेडियो ही लोगों तक पहुंचने का सबसे बड़ा माध्यम था और रफी साहब की आवाज ने उस विज्ञापन को भी खास बना दिया था।

    इसके अलावा उन्होंने कुछ सरकारी अभियानों और अन्य विशेष परियोजनाओं के लिए भी अपनी आवाज का योगदान दिया। हालांकि, उनकी सबसे बड़ी पहचान हमेशा भारतीय फिल्मों के उन हजारों गीतों से रही, जो आज भी संगीत प्रेमियों के बीच लोकप्रिय हैं।

    मोहम्मद रफी केवल एक गायक नहीं थे, बल्कि भारतीय संगीत की ऐसी विरासत हैं, जिसने भाषा और भौगोलिक सीमाओं को पार किया। उनकी आवाज में मौजूद भावनाओं और सुरों की गहराई ने उन्हें दुनिया भर में सम्मान दिलाया। आज भी उनकी गायकी नई पीढ़ी को प्रेरित करती है और उनके गीत भारतीय संगीत इतिहास की अमूल्य धरोहर बने हुए हैं।

  • सीजेपी समर्थकों ने संगठन में लोकतंत्र की मांग उठाई, कोर टीम से नहीं मिलने पर अभिजीत दीपके पर लगाए आरोप

    सीजेपी समर्थकों ने संगठन में लोकतंत्र की मांग उठाई, कोर टीम से नहीं मिलने पर अभिजीत दीपके पर लगाए आरोप

    नई दिल्ली । कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी में संगठनात्मक स्तर पर असंतोष के स्वर सामने आए हैं। दिल्ली के जंतर-मंतर पर पिछले महीने हुए छात्र आंदोलन में शामिल होने का दावा करने वाले दो युवकों ने शुक्रवार को सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके के आवास के बाहर धरना दिया। प्रदर्शनकारियों ने संगठन के कामकाज और आंदोलन की आगे की रणनीति को लेकर गंभीर सवाल उठाए।

    अहमदाबाद से आए मनीष ब्रह्मभट्ट और राहुल पांड्या ने दीपके के आवास के बाहर पहुंचकर सड़क पर बैठकर विरोध जताया। दोनों युवकों ने दावा किया कि उन्होंने सीजेपी से जुड़े आंदोलन में सक्रिय रूप से हिस्सा लिया था, लेकिन इसके बाद उन्हें संगठन की कोर टीम से मिलने का अवसर नहीं दिया गया। इसी मुद्दे को लेकर उन्होंने विरोध प्रदर्शन शुरू किया।

    प्रदर्शनकारियों का कहना था कि आंदोलन किसी एक व्यक्ति या सीमित समूह तक केंद्रित नहीं होना चाहिए। उनके मुताबिक, यह आंदोलन देशभर के युवाओं से जुड़ा हुआ है और इसकी आगे की रणनीति तय करने में आंदोलन से जुड़े कार्यकर्ताओं और समर्थकों को भी अपनी बात रखने का अवसर मिलना चाहिए।

    मनीष ब्रह्मभट्ट ने आरोप लगाया कि आंदोलन शुरू होने के समय इसका कोई स्पष्ट चेहरा नहीं था और उन्होंने तथा कई अन्य स्वयंसेवकों ने जंतर-मंतर पर आयोजित कार्यक्रम में योगदान दिया था। उनका कहना था कि इसके बाद उन्होंने सीजेपी की टीम से संपर्क कर बैठक में शामिल होने की कोशिश की, लेकिन उन्हें संगठन की बैठक में बुलाया नहीं गया।

    ब्रह्मभट्ट ने संगठन के निर्णय लेने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि आंदोलन की आगे की रणनीति केवल कुछ रिश्तेदारों और मित्रों के बीच बैठकर तय नहीं की जानी चाहिए। उनके अनुसार, आंदोलन से जुड़े लोगों को निर्णय प्रक्रिया में शामिल करना और उनके सुझाव सुनना जरूरी है।

    प्रदर्शनकारियों ने सीजेपी में लोकतांत्रिक तरीके से कामकाज की मांग रखी। उनका कहना था कि यदि संगठन युवाओं के नेतृत्व और भागीदारी की बात करता है तो आंदोलन से जुड़े युवाओं को भी अपनी राय रखने और संगठन की दिशा तय करने में योगदान देने का अवसर मिलना चाहिए।

    प्रदर्शन के दौरान युवकों ने अभिजीत दीपके के खिलाफ नाराजगी जताते हुए कहा कि वे संगठन में ऐसी व्यवस्था नहीं चाहते, जिसमें निर्णय सीमित लोगों के स्तर पर लिए जाएं। प्रदर्शनकारियों ने अपने विरोध को आगे भी जारी रखने की बात कही और आवास के बाहर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू करने का ऐलान किया।

    मनीष ब्रह्मभट्ट ने यह भी कहा कि युवाओं के नेतृत्व में चलने वाले किसी भी संगठन के लिए पारदर्शिता और लोकतांत्रिक प्रक्रिया महत्वपूर्ण है। उन्होंने आंदोलन से जुड़े अन्य लोगों को भी सुझाव देने और रणनीति पर चर्चा के लिए आमंत्रित किए जाने की मांग की।

    सीजेपी समर्थकों के इस विरोध से संगठन के भीतर नेतृत्व, निर्णय प्रक्रिया और कार्यकर्ताओं की भागीदारी को लेकर बहस शुरू होने के संकेत मिले हैं। फिलहाल प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग यही है कि आंदोलन से जुड़े लोगों को संगठन की बैठकों और रणनीतिक फैसलों में अपनी बात रखने का अवसर दिया जाए। अभिजीत दीपके की ओर से लगाए गए आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया सामने आती है, यह घटनाक्रम का अगला महत्वपूर्ण पहलू होगा।

  • कोयला माफिया और अपराध की कहानी ने रचा इतिहास, गैंग्स ऑफ वासेपुर 2 के कलाकारों को मिली नई पहचान

    कोयला माफिया और अपराध की कहानी ने रचा इतिहास, गैंग्स ऑफ वासेपुर 2 के कलाकारों को मिली नई पहचान

    नई दिल्ली । भारतीय सिनेमा में कुछ फिल्में ऐसी होती हैं जो रिलीज के लंबे समय बाद भी दर्शकों के दिलों में अपनी जगह बनाए रखती हैं। अनुराग कश्यप की फिल्म गैंग्स ऑफ वासेपुर 2 भी ऐसी ही फिल्मों में शामिल है, जिसने अपराध, राजनीति और कोयला माफिया की पृष्ठभूमि पर बनी कहानी से हिंदी सिनेमा में एक अलग पहचान बनाई। करीब 14 साल बाद भी यह फिल्म अपने किरदारों, संवादों और अनोखे अंदाज के कारण दर्शकों के बीच चर्चा में बनी हुई है।

    फिल्म का सबसे चर्चित किरदार फैजल खान रहा, जिसे अभिनेता नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने निभाया था। यह किरदार उनके करियर का ऐसा मोड़ साबित हुआ जिसने उन्हें एक प्रतिभाशाली कलाकार से आगे बढ़ाकर देश के सबसे भरोसेमंद अभिनेताओं में शामिल कर दिया। फैजल खान की शांत लेकिन प्रभावशाली शैली, उनकी नजरों का आत्मविश्वास और संवाद बोलने का अलग अंदाज दर्शकों के बीच बेहद लोकप्रिय हुआ।

    गैंग्स ऑफ वासेपुर 2 की खासियत यह थी कि फिल्म ने अपराध की दुनिया को केवल हिंसा के रूप में नहीं दिखाया, बल्कि उसके पीछे की सामाजिक परिस्थितियों, पारिवारिक संघर्षों और सत्ता की राजनीति को भी सामने रखा। कोयला खदानों, स्थानीय वर्चस्व और पीढ़ियों से चले आ रहे संघर्षों की कहानी ने फिल्म को आम अपराध आधारित फिल्मों से अलग पहचान दी।

    नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने फैजल खान के किरदार में जिस तरह की सहजता दिखाई, उसने अभिनय की नई मिसाल पेश की। उनके चेहरे के भाव, संवादों के बीच ठहराव और छोटे-छोटे हावभाव ने किरदार को बेहद वास्तविक बना दिया। फिल्म में उनका अभिनय इतना प्रभावशाली रहा कि फैजल खान आज भी हिंदी सिनेमा के यादगार किरदारों में गिना जाता है।

    इस फिल्म ने न सिर्फ नवाजुद्दीन सिद्दीकी को नई पहचान दी, बल्कि इसमें काम करने वाले कई कलाकारों के करियर को भी मजबूती मिली। फिल्म की कहानी, निर्देशन, अभिनय और प्रस्तुति की खूब प्रशंसा हुई। गैंग्स ऑफ वासेपुर 2 ने फिल्मफेयर समेत कई पुरस्कारों में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई और इसे आधुनिक भारतीय सिनेमा की महत्वपूर्ण फिल्मों में शामिल किया गया।

    फिल्म की सफलता के बाद नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने अलग-अलग तरह के किरदार निभाकर अपनी अभिनय क्षमता साबित की। उन्होंने द लंचबॉक्स, बदलापुर, मंटो, सीरियस मेन जैसी फिल्मों और कई वेब सीरीज में अपनी अलग छाप छोड़ी। उनकी सबसे बड़ी ताकत यह रही कि उन्होंने खुद को किसी एक तरह के किरदार तक सीमित नहीं रखा और हर भूमिका में नई ऊर्जा दिखाई।

    एक ऐसे दौर में जब हिंदी सिनेमा में बड़े सितारों और भव्य प्रस्तुतियों का दबदबा था, गैंग्स ऑफ वासेपुर 2 ने साबित किया कि मजबूत कहानी और दमदार अभिनय भी दर्शकों को आकर्षित कर सकते हैं। फिल्म ने छोटे शहरों की कहानियों और स्थानीय किरदारों को मुख्यधारा में जगह दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

    14 साल बाद भी गैंग्स ऑफ वासेपुर 2 का प्रभाव कम नहीं हुआ है। फैजल खान का किरदार आज भी सोशल मीडिया और दर्शकों के बीच चर्चा में रहता है। नवाजुद्दीन सिद्दीकी की यह भूमिका उनके अभिनय सफर की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक मानी जाती है।

    भारतीय सिनेमा में ऐसी फिल्में कम बनती हैं जो समय बीतने के बाद भी अपनी प्रासंगिकता बनाए रखें। गैंग्स ऑफ वासेपुर 2 ने न केवल अपराध और समाज की जटिलताओं को दिखाया, बल्कि यह भी साबित किया कि एक मजबूत किरदार किसी कलाकार के पूरे करियर की दिशा बदल सकता है।

  • पश्चिम एशिया तनाव का असर, सेंसेक्स 456 अंक टूटा और निफ्टी 24,600 से नीचे बंद हुआ

    पश्चिम एशिया तनाव का असर, सेंसेक्स 456 अंक टूटा और निफ्टी 24,600 से नीचे बंद हुआ


    नई दिल्ली ।वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार को सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन दबाव देखने को मिला। पश्चिम एशिया में बढ़ती अनिश्चितता, होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े घटनाक्रम और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई। इसके चलते प्रमुख घरेलू सूचकांक गिरावट के साथ बंद हुए।

    बाजार बंद होने पर बीएसई सेंसेक्स 455.59 अंक यानी 0.58 प्रतिशत की गिरावट के साथ 78,499.17 के स्तर पर रहा। इसी तरह एनएसई निफ्टी 50 में 65.35 अंक यानी 0.27 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और यह 24,570.65 पर बंद हुआ। इस गिरावट के साथ निफ्टी 24,600 के स्तर से नीचे चला गया।

    व्यापक बाजार की बात करें तो तस्वीर पूरी तरह कमजोर नहीं रही। निफ्टी मिडकैप सूचकांक में 0.22 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 0.05 प्रतिशत की मामूली गिरावट के साथ बंद हुआ। इससे संकेत मिलता है कि दबाव मुख्य रूप से बड़े और प्रमुख शेयरों में ज्यादा दिखाई दिया।

    सेक्टरवार कारोबार में वित्तीय सेवाओं, निजी बैंकों और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स से जुड़े शेयरों पर सबसे ज्यादा दबाव रहा। इसके विपरीत ऑटो और आईटी क्षेत्र में मजबूती देखने को मिली। मेटल और पीएसयू बैंक सूचकांकों ने भी बाजार की गिरावट के बीच बेहतर प्रदर्शन किया।

    निफ्टी 50 में ग्रासिम इंडस्ट्रीज, टीसीएस, हिंडाल्को, महिंद्रा एंड महिंद्रा, एचसीएल टेक और एसबीआई प्रमुख बढ़त वाले शेयरों में शामिल रहे। दूसरी ओर बजाज फाइनेंस, बजाज फिनसर्व, ट्रेंट, आईसीआईसीआई बैंक, जियो फाइनेंशियल सर्विसेज और श्रीराम फाइनेंस पर बिकवाली का दबाव रहा।

    बाजार में शुक्रवार की कमजोरी की बड़ी वजह पश्चिम एशिया में दोबारा बढ़ता तनाव रहा। होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बनी नई अनिश्चितता ने कच्चे तेल की कीमतों को प्रभावित किया है। तेल की कीमतों में तेजी से महंगाई, कंपनियों की लागत और वैश्विक आर्थिक गतिविधियों पर संभावित असर को लेकर निवेशकों की चिंता बढ़ती है।

    बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, इस समय कंपनियों के तिमाही नतीजों का दौर भी जारी है और अलग-अलग कंपनियों के परिणामों के आधार पर शेयरों में प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। इसके अलावा वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेतों ने भी घरेलू कारोबार पर दबाव बनाया।

    हालांकि बाजार के मौजूदा रुख को पूरी तरह नकारात्मक नहीं माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया में तनाव कम होता है और संभावित शांति समझौते की दिशा में प्रगति होती है तो कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आ सकती है। इससे भारतीय बाजार को राहत मिल सकती है।

    कच्चे तेल की कीमतों का स्तर भारतीय अर्थव्यवस्था और शेयर बाजार के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के एक बड़े हिस्से के लिए आयात पर निर्भर है। इसलिए तेल की कीमतों में लगातार तेजी से आयात बिल और महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है, जबकि कीमतों में नरमी बाजार के लिए सकारात्मक संकेत बन सकती है।

    फिलहाल निवेशकों की नजर पश्चिम एशिया के घटनाक्रम, कच्चे तेल की कीमतों और कंपनियों के तिमाही नतीजों पर बनी हुई है। आने वाले कारोबारी सत्रों में इन्हीं संकेतों के आधार पर बाजार की दिशा तय होने की संभावना रहेगी।

  • पटना में युवक की मौत के बाद बवाल, 10 वाहनों में लगाई आग, ट्रैफिक पुलिस पोस्ट फूंकी, 9 थानों की फोर्स तैनात

    पटना में युवक की मौत के बाद बवाल, 10 वाहनों में लगाई आग, ट्रैफिक पुलिस पोस्ट फूंकी, 9 थानों की फोर्स तैनात

    पटना। पटना में सड़क हादसे में 26 वर्षीय युवक की मौत के बाद शुक्रवार सुबह जमकर हंगामा हुआ। अगमकुआं थाना क्षेत्र के जीरो माइल के पास तेज रफ्तार बस की चपेट में आने से युवक ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। हादसे से आक्रोशित लोगों ने पहले बस में आग लगा दी। इसके बाद स्थिति लगातार बिगड़ती गई और भीड़ ने करीब 10 वाहनों को आग के हवाले कर दिया।

    हंगामे की सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंची, लेकिन प्रदर्शनकारियों ने दमकल कर्मियों को घटनास्थल तक नहीं पहुंचने दिया। इसके बाद पुलिस की टीम वहां पहुंची तो भीड़ और उग्र हो गई। प्रदर्शनकारियों ने दो पुलिस वाहनों समेत बस और बाइक सहित करीब 10 वाहनों में आग लगा दी।

    ट्रैफिक पुलिस पोस्ट भी जलाई
    उपद्रव के दौरान भीड़ ने ट्रैफिक पुलिस पोस्ट को भी आग लगा दी। इसके अलावा नेशनल हाईवे-30 पर जाम लगा दिया गया, जिससे यातायात व्यवस्था प्रभावित हुई। मौके पर कवरेज के लिए पहुंचे पत्रकारों के साथ भी मारपीट की गई। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए आसपास के 9 थानों की पुलिस फोर्स को मौके पर बुलाया गया। पुलिस ने प्रदर्शन कर रहे लोगों को वहां से खदेड़ दिया, जिसके बाद हालात काबू में आए और हाईवे पर यातायात व्यवस्था बहाल कर दी गई।

    CCTV से उपद्रवियों की पहचान
    पुलिस अब घटनास्थल और आसपास लगे CCTV कैमरों की फुटेज खंगाल रही है। अधिकारियों के मुताबिक, आगजनी और तोड़फोड़ में शामिल लोगों की पहचान की जा रही है। उपद्रवियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    26 साल का था मृतक मनीष
    हादसे में जान गंवाने वाला युवक मनीष 26 साल का था। वह पटना में फ्लेक्स बनाने का काम करता था और रोज अपने गांव से पटना आता-जाता था। तीन भाई-बहनों में मनीष सबसे बड़ा था। परिजनों के मुताबिक, वह रोज की तरह शुक्रवार सुबह करीब 7 बजे काम के लिए घर से निकला था, लेकिन रास्ते में हादसे का शिकार हो गया। युवक की मौत के बाद गुस्साए लोगों के प्रदर्शन ने कुछ ही देर में हिंसक रूप ले लिया, जिसके चलते इलाके में काफी देर तक तनाव की स्थिति बनी रही।