Author: bharati

  • बर्फ के नीचे छिपे मायावी न्यूट्रिनो से ब्रह्मांड के रहस्य खोलने वाले फ्रांसिस हाल्जन को भौतिकी का नोबेल

    बर्फ के नीचे छिपे मायावी न्यूट्रिनो से ब्रह्मांड के रहस्य खोलने वाले फ्रांसिस हाल्जन को भौतिकी का नोबेल

    नई दिल्ली: रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज ने 2026 का भौतिकी नोबेल पुरस्कार फ्रांसिस हाल्जन को देने का फैसला किया है। उन्हें यह सम्मान आइसक्यूब न्यूट्रिनो ऑब्जर्वेटरी में योगदान और खगोलीय मूल के हाई एनर्जी न्यूट्रिनो की खोज के लिए दिया गया है। हाल्जन ने दक्षिण ध्रुव की बर्फ का इस्तेमाल न्यूट्रिनो नामक बेहद मायावी कणों को पकड़ने और ट्रैक करने के लिए करने का दृष्टिकोण विकसित किया। उनके वैज्ञानिक नेतृत्व और विचारों ने ऐसी वेधशाला के निर्माण का रास्ता तैयार किया, जिसके जरिए दूर ब्रह्मांड से आने वाले अत्यधिक ऊर्जावान न्यूट्रिनो का अध्ययन संभव हुआ।

    आइसक्यूब ऑब्जर्वेटरी एक घन किलोमीटर बर्फ में लगाए गए प्रकाश सेंसरों का विशाल नेटवर्क है। जब कोई न्यूट्रिनो किसी परमाणु नाभिक से टकराता है तो प्रकाश की चमक पैदा होती है। साफ ग्लेशियर बर्फ में लगाए गए सेंसर इस चमक को दर्ज कर सकते हैं और उसके आधार पर न्यूट्रिनो के बारे में जानकारी हासिल की जाती है। दक्षिण ध्रुव की बर्फ इस प्रयोग के लिए कई फायदे देती है। यह क्षेत्र भूगर्भीय रूप से स्थिर है और यहां प्रयोग के दौरान कई तरह के व्यवधान कम होते हैं। इसी आधार पर न्यूट्रिनो का पता लगाने की यह तकनीक आगे विकसित होती गई।

    फ्रांसिस हाल्जन ने वर्ष 1988 में दक्षिण ध्रुव पर न्यूट्रिनो पकड़ने का अपना दृष्टिकोण पहली बार प्रस्तुत किया था। उनके विचार को दूसरे शोधकर्ताओं का समर्थन मिला और कुछ वर्षों के भीतर बर्फ में सेंसर लगाने के शुरुआती परीक्षण शुरू हुए। समय के साथ यह परियोजना बड़े वैज्ञानिक प्रयास में बदलती गई और आइसक्यूब दुनिया की सबसे बड़ी न्यूट्रिनो ऑब्जर्वेटरी बन गई। इसके जरिए वैज्ञानिक उन कणों का अध्ययन कर पा रहे हैं, जो ब्रह्मांड की अत्यंत ऊर्जावान घटनाओं और दूरस्थ स्रोतों से पृथ्वी तक पहुंचते हैं।

    न्यूट्रिनो को ब्रह्मांड के सबसे मायावी कणों में गिना जाता है, क्योंकि वे पदार्थ के साथ बहुत कम प्रतिक्रिया करते हैं और आसानी से उसके आर-पार गुजर सकते हैं। अन्य कणों की तुलना में न्यूट्रिनो अपनी दिशा बदले बिना और ऊर्जा खोए बिना पृथ्वी तक पहुंच सकते हैं। इसी वजह से वे ब्रह्मांड के उन हिस्सों और घटनाओं की जानकारी दे सकते हैं, जिन्हें दूसरे तरीकों से समझना मुश्किल होता है। वैज्ञानिक लंबे समय से जानते हैं कि ब्रह्मांड में प्राकृतिक स्रोत ऐसे कण पैदा करते हैं जिनकी ऊर्जा पृथ्वी की प्रयोगशालाओं में हासिल की जा सकने वाली ऊर्जा से लाखों गुना अधिक हो सकती है। इन स्रोतों की प्रकृति और उनके भीतर चलने वाली प्रक्रियाएं अब भी कई सवाल खड़े करती हैं।

    आइसक्यूब के जरिए हाई एनर्जी वाले खगोलीय न्यूट्रिनो की पुष्टि ने ब्रह्मांड के अध्ययन का नया क्षेत्र खोला है। ऐसे न्यूट्रिनो सुपरनोवा विस्फोट, ब्लैक होल के आसपास होने वाली प्रक्रियाओं और गामा रे बर्स्ट जैसी अत्यंत ऊर्जावान घटनाओं को समझने में मदद कर सकते हैं। न्यूट्रिनो खगोल विज्ञान के जरिए वैज्ञानिक दृश्य प्रकाश और अन्य तरंगों से अलग एक नए नजरिए से ब्रह्मांड को देख पा रहे हैं। दक्षिण ध्रुव की कठिन परिस्थितियों में इतनी विशाल ऑब्जर्वेटरी विकसित करने में हाल्जन के वैज्ञानिक नेतृत्व और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की महत्वपूर्ण भूमिका रही। यह सम्मान कण भौतिकी और खगोल भौतिकी के संगम में उनके योगदान को मान्यता देता है।

  • बृहस्पति का नक्षत्र परिवर्तन लाएगा बड़ा बदलाव, वृषभ कर्क और मकर वालों के शुरू होंगे अच्छे दिन, धन से लेकर करियर तक लाभ

    बृहस्पति का नक्षत्र परिवर्तन लाएगा बड़ा बदलाव, वृषभ कर्क और मकर वालों के शुरू होंगे अच्छे दिन, धन से लेकर करियर तक लाभ


    नई दिल्ली। वैदिक ज्योतिष में देवगुरु बृहस्पति को ज्ञान सौभाग्य धर्म शिक्षा और समृद्धि से जुड़ा प्रमुख ग्रह माना जाता है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार गुरु की राशि या नक्षत्र में होने वाला परिवर्तन सभी राशियों के जीवन पर किसी न किसी रूप में प्रभाव डाल सकता है। अक्टूबर 2026 में गुरु की स्थिति में एक महत्वपूर्ण बदलाव होने जा रहा है। 8 अक्टूबर को देवगुरु बृहस्पति अश्लेषा नक्षत्र के चौथे चरण में प्रवेश करेंगे। माना जा रहा है कि इस परिवर्तन का प्रभाव विशेष रूप से करियर धन संबंधों और मानसिक स्थिति से जुड़े मामलों पर दिखाई दे सकता है।

    इस समय बृहस्पति कर्क राशि में स्थित हैं और ज्योतिष में कर्क को गुरु की उच्च राशि माना जाता है। ऐसे में अश्लेषा नक्षत्र के चौथे चरण में गुरु का प्रवेश कुछ राशियों के लिए विशेष शुभ परिणाम देने वाला माना जा रहा है। लंबे समय से अटके कामों में गति आ सकती है और मेहनत का बेहतर परिणाम मिलने की संभावना बन सकती है। हालांकि ज्योतिषीय फल व्यक्ति की कुंडली और ग्रहों की स्थिति के आधार पर अलग अलग हो सकते हैं।

    वृषभ राशि के जातकों के लिए यह नक्षत्र परिवर्तन सकारात्मक बदलाव लेकर आ सकता है। इस दौरान साहस और आत्मविश्वास में वृद्धि होने की संभावना है। जो लोग कारोबार में पार्टनरशिप के जरिए काम कर रहे हैं उनके बीच चल रहे मतभेद दूर हो सकते हैं। व्यापार में नए अवसर मिलने और लाभ बढ़ने के संकेत मिल सकते हैं। परिवार के साथ समय बिताने का मौका मिलेगा और मानसिक रूप से भी राहत महसूस हो सकती है। किसी महत्वपूर्ण फैसले को लेकर लंबे समय से चल रहा असमंजस दूर होने की संभावना है।

    कर्क राशि के लिए गुरु का यह परिवर्तन खास माना जा रहा है क्योंकि कर्क राशि में बृहस्पति को उच्च का माना जाता है। इस दौरान आत्मविश्वास बढ़ सकता है और कार्यक्षेत्र में आपके निर्णयों को महत्व मिलने की संभावना है। नौकरी करने वाले लोगों को नई जिम्मेदारी या प्रमोशन से जुड़ा अवसर मिल सकता है। शिक्षा मीडिया और वित्त जैसे क्षेत्रों से जुड़े लोगों के लिए भी नए रास्ते खुल सकते हैं। अपनी क्षमता का सही इस्तेमाल करने वाले जातकों को इस अवधि में बेहतर परिणाम मिलने की उम्मीद की जा सकती है।

    मकर राशि वालों के लिए भी गुरु का यह नक्षत्र परिवर्तन करियर और रिश्तों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अविवाहित जातकों के लिए विवाह से जुड़े अच्छे प्रस्ताव आ सकते हैं या किसी रिश्ते की बात आगे बढ़ सकती है। नौकरी और कारोबार में मेहनत का सकारात्मक परिणाम मिल सकता है। कारोबारियों के लिए किसी बड़ी डील के फाइनल होने के योग बन सकते हैं। साथ ही समाज में मान सम्मान और प्रतिष्ठा बढ़ने की संभावना भी जताई जा रही है।

    कुल मिलाकर 8 अक्टूबर से होने वाला बृहस्पति का अश्लेषा नक्षत्र के चौथे चरण में प्रवेश ज्योतिषीय दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वृषभ कर्क और मकर राशि के जातकों के लिए यह समय विशेष रूप से अनुकूल रहने की संभावना बताई गई है। हालांकि ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार किसी भी ग्रह परिवर्तन का वास्तविक प्रभाव व्यक्ति की जन्मकुंडली में ग्रहों की स्थिति पर निर्भर करता है। इसलिए इन संकेतों को सामान्य ज्योतिषीय आकलन के तौर पर ही देखना बेहतर होगा।

  • आस्था और धर्म पर जावेद अख्तर का बड़ा सवाल, एलन मस्क के उदाहरण से समझाया क्यों नहीं मानते सभी धर्म समान

    आस्था और धर्म पर जावेद अख्तर का बड़ा सवाल, एलन मस्क के उदाहरण से समझाया क्यों नहीं मानते सभी धर्म समान


    नई दिल्ली। मशहूर लेखक और गीतकार जावेद अख्तर अपनी बेबाक राय के लिए पहचाने जाते हैं। वह अक्सर उन मुद्दों पर खुलकर बात करते हैं जिन पर लोग बिना ज्यादा सवाल किए विश्वास करते हैं। हाल ही में एक बातचीत में उन्होंने धर्म आस्था भगवान और नास्तिकता को लेकर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि मुश्किल समय में धर्म और आस्था इंसान को मानसिक सहारा दे सकते हैं लेकिन किसी चीज से सुकून मिलना इस बात का प्रमाण नहीं हो सकता कि वह चीज सच भी है।

    जावेद अख्तर के मुताबिक जब इंसान किसी परेशानी में होता है तो उसे किसी बड़ी शक्ति पर भरोसा करने से भावनात्मक राहत मिल सकती है। उसे लगता है कि कोई ऐसी ताकत मौजूद है जो उसकी देखभाल कर रही है और उसकी मुश्किल दूर कर देगी। उनका सवाल यह है कि केवल इस भरोसे से उस विश्वास को वास्तविक कैसे मान लिया जाए। उनके अनुसार मानसिक शांति और किसी चीज के सच होने के बीच अंतर समझना जरूरी है।

    अपनी बात समझाने के लिए जावेद अख्तर ने कारोबारी एलन मस्क का उदाहरण दिया। उन्होंने एक काल्पनिक स्थिति के जरिए समझाया कि अगर कोई व्यक्ति पूरे विश्वास के साथ यह मान ले कि एलन मस्क उसका भाई है और अगले महीने उसे अरबों रुपये मिलने वाले हैं तो इस सोच से उसे खुशी और सुरक्षा का एहसास हो सकता है। वह लगातार इसी उम्मीद में रह सकता है कि अगले महीने पैसा जरूर आएगा। लेकिन केवल विश्वास करने से यह साबित नहीं हो जाता कि एलन मस्क वास्तव में उसका भाई है या उसे पैसे मिलने वाले हैं। जावेद अख्तर ने इसी उदाहरण के जरिए आस्था और वास्तविकता के बीच अंतर को समझाने की कोशिश की।

    उन्होंने धर्म को लेकर भी एक सवाल उठाया। जावेद अख्तर ने कहा कि दुनिया में बड़ी संख्या में लोग उसी धर्म को मानते हैं जिसमें उनका जन्म हुआ होता है। उन्होंने दावा किया कि करीब 99 फीसदी लोग उसी धर्म में मरते हैं जिसमें उन्होंने जन्म लिया था। उनके मुताबिक यह सवाल खड़ा करता है कि क्या लोगों ने अपने धार्मिक विश्वासों को खुद तर्क और विचार के आधार पर चुना है या फिर उन्हें बचपन से परिवार और समाज के जरिए ये मान्यताएं मिली हैं।

    जावेद अख्तर ने यह भी कहा कि किसी व्यक्ति की बात को सिर्फ इसलिए सही नहीं मान लेना चाहिए क्योंकि हम उस व्यक्ति पर विश्वास करते हैं। उनके अनुसार इंसान समय के साथ अपनी राय बदल सकता है इसलिए जरूरी है कि किसी व्यक्ति की पहचान के बजाय उसके विचार और तर्क को परखा जाए। उनका नजरिया यह है कि कौन बात कह रहा है इससे ज्यादा महत्वपूर्ण यह है कि कही गई बात के पीछे कितना मजबूत तर्क मौजूद है।

    धर्मों की समानता को लेकर भी जावेद अख्तर ने अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि दुनिया के सभी धर्मों को सिर्फ इसलिए एक जैसा नहीं कहा जा सकता क्योंकि उनमें इंसान को बेहतर बनने की सीख मिलती है। उनके मुताबिक अलग अलग धर्मों की मान्यताएं विचार और सिद्धांत अलग हो सकते हैं। इसलिए सभी धर्म बिल्कुल एक ही बात कहते हैं ऐसा कहना सही नहीं है।

    जावेद अख्तर लंबे समय से धर्म तर्क और आस्था जैसे विषयों पर अपनी राय सार्वजनिक रूप से रखते रहे हैं। उनके विचारों से जहां कुछ लोग सहमत नजर आते हैं वहीं कई बार उनके बयानों को लेकर असहमति भी सामने आती है। इस बार भी उनका बयान सोशल मीडिया और सार्वजनिक चर्चा में बहस का विषय बना हुआ है।

  • संजू सैमसन की लगातार नाकामी से फैन्स नाराज, 4 टी20 में 29 रन के बाद वैभव सूर्यवंशी की एंट्री को लेकर बढ़ा दबाव

    संजू सैमसन की लगातार नाकामी से फैन्स नाराज, 4 टी20 में 29 रन के बाद वैभव सूर्यवंशी की एंट्री को लेकर बढ़ा दबाव


    नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट टीम ने वेस्टइंडीज के खिलाफ लखनऊ के इकाना स्टेडियम में खेले गए पहले टी20 मुकाबले में शानदार जीत दर्ज की। भारत ने यह मैच 8 विकेट से अपने नाम किया। मुकाबले में कप्तान श्रेयस अय्यर ने तूफानी शतक जड़कर टीम की जीत में अहम भूमिका निभाई। हालांकि इस शानदार जीत के बीच विकेटकीपर बल्लेबाज संजू सैमसन का खराब फॉर्म एक बार फिर चर्चा में आ गया। संजू इस मुकाबले में भी बड़ी पारी खेलने में नाकाम रहे और महज 11 रन बनाकर पवेलियन लौट गए।

    संजू सैमसन के लिए हालिया मुकाबले बेहद निराशाजनक रहे हैं। वेस्टइंडीज के खिलाफ 9 गेंदों पर 11 रन बनाने से पहले वह पाकिस्तान के खिलाफ सिर्फ 2 रन बनाकर आउट हुए थे। उससे पहले श्रीलंका के खिलाफ उनके बल्ले से 7 रन निकले थे जबकि जापान के खिलाफ वह 9 रन ही बना सके थे। इस तरह उनकी पिछली चार टी20 पारियों को देखें तो संजू के बल्ले से कुल 29 रन ही निकले हैं। लगातार चार मैचों में बड़ी पारी नहीं खेल पाने के कारण अब उनके प्रदर्शन को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

    हालांकि इन खराब पारियों से पहले संजू ने अफगानिस्तान के खिलाफ 17 सितंबर को शानदार अर्धशतक लगाया था। उन्होंने 35 गेंदों पर 50 रन की पारी खेली थी। उस पारी के बाद उम्मीद थी कि संजू लगातार अपने बल्ले का दम दिखाएंगे लेकिन इसके बाद उनका प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा। लगातार छोटी पारियों ने टीम में उनकी जगह को लेकर चर्चा तेज कर दी है।

    संजू की लगातार नाकामी के बाद सोशल मीडिया पर फैन्स का एक वर्ग अब युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी को मौका देने की मांग कर रहा है। 15 साल के वैभव भारतीय क्रिकेट में अपनी कम उम्र और आक्रामक बल्लेबाजी के कारण पहले ही काफी चर्चा बटोर चुके हैं। वेस्टइंडीज के खिलाफ पहले टी20 में उन्हें प्लेइंग इलेवन में जगह नहीं मिली और वह बाहर बैठकर मुकाबला देखते नजर आए। इसके बाद सोशल मीडिया पर कई फैन्स ने टीम मैनेजमेंट के फैसले पर सवाल खड़े किए।

    कुछ यूजर्स का कहना है कि संजू को काफी मौके मिल चुके हैं और अगर उनका बल्ला लगातार खामोश है तो युवा खिलाड़ी को आजमाने पर विचार किया जाना चाहिए। एक यूजर ने कहा कि अब संजू से आगे बढ़ने का समय आ गया है। वहीं कुछ फैन्स ने मुख्य कोच गौतम गंभीर और चयनकर्ताओं पर भी सवाल उठाए और पूछा कि आखिर वैभव को प्लेइंग इलेवन में मौका कब मिलेगा।

    हालांकि सिर्फ चार पारियों के आधार पर किसी खिलाड़ी के भविष्य पर फैसला करना आसान नहीं होता। संजू के पास अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का अनुभव है और वह कई मौकों पर अपनी बल्लेबाजी से टीम को मैच जिता चुके हैं। ऐसे में टीम मैनेजमेंट उनके अनुभव पर भरोसा जारी रखता है या युवा वैभव को मौका देकर भविष्य की तैयारी शुरू करता है यह आने वाले मुकाबलों में साफ होगा।

    फिलहाल भारत ने सीरीज में जीत के साथ शुरुआत कर दी है और अब नजर अगले मुकाबले पर है। एक तरफ संजू सैमसन के बल्ले से बड़ी पारी की उम्मीद होगी तो दूसरी तरफ फैन्स की निगाहें 15 साल के वैभव सूर्यवंशी पर रहेंगी। अगर टीम मैनेजमेंट प्लेइंग इलेवन में बदलाव करता है तो वैभव को मौका मिलना इस सीरीज की सबसे बड़ी चर्चाओं में से एक हो सकता है।

  • पाप का हिस्सा बनने से बचिए… हाथ जोड़कर शोभिनव सत्य ने की थी अपील अब इसी बयान पर जमकर हो रहे ट्रोल

    पाप का हिस्सा बनने से बचिए… हाथ जोड़कर शोभिनव सत्य ने की थी अपील अब इसी बयान पर जमकर हो रहे ट्रोल


    नई दिल्ली। ‘हनुमान अंश’ इन दिनों बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन को लेकर लगातार चर्चा में बनी हुई है। महज 2 करोड़ रुपये के बजट में तैयार हुई इस फिल्म की कमाई 300 करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर चुकी है। फिल्म को दर्शकों का जबरदस्त रिस्पॉन्स मिल रहा है लेकिन इसी बीच फिल्म के लीड एक्टर शोभिनव सत्य का एक पुराना वीडियो सोशल मीडिया पर फिर से वायरल हो गया है। इस वीडियो में अभिनेता दर्शकों से फिल्म का पाइरेटेड वर्जन ऑनलाइन नहीं देखने की अपील करते नजर आ रहे हैं। हालांकि उनकी इस अपील में इस्तेमाल की गई पाप वाली बात कुछ यूजर्स को पसंद नहीं आई और इसके बाद सोशल मीडिया पर उन्हें ट्रोल किया जाने लगा।

    दरअसल शोभिनव सत्य ने इसी साल अगस्त में अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर यह वीडियो शेयर किया था। वीडियो में उन्होंने सबसे पहले फिल्म को मिल रहे प्यार के लिए दर्शकों का शुक्रिया अदा किया। इसके बाद उन्होंने फिल्म की पाइरेसी को लेकर अपनी चिंता जाहिर की। अभिनेता ने बताया कि फिल्म के पाइरेटेड वर्जन को बड़ी संख्या में लोग मोबाइल फोन और टीवी पर देख रहे हैं। उन्होंने कहा कि मेकर्स ने फिल्म को इंटरनेट पर रिलीज नहीं किया है। इसके बावजूद कुछ लोग चोरी छिपे फिल्म को ऑनलाइन उपलब्ध करा रहे हैं और दर्शक उसे देख रहे हैं।

    शोभिनव ने अपनी बात समझाते हुए कहा था कि अगर कोई व्यक्ति इस तरह चोरी से फिल्म देखता है तो वह अनजाने में किसी दूसरे के पाप का हिस्सा बन रहा है। अभिनेता ने हाथ जोड़कर लोगों से पाइरेटेड कॉपी नहीं देखने की अपील की थी। उन्होंने यह भी कहा था कि अगर किसी ने मोबाइल पर फिल्म देख भी ली है तो उसे यह समझ आ गया होगा कि यह ऐसी फिल्म नहीं है जिसे अकेले मोबाइल की छोटी स्क्रीन पर देखने का वही अनुभव मिले जो थिएटर में मिलता है। उनके मुताबिक फिल्म को पूरे परिवार के साथ सिनेमाघर में देखने का अनुभव अलग है।

    वीडियो में शोभिनव ने यह भी जानकारी दी थी कि फिल्म की टीम अब तक करीब 600 से 700 पाइरेटेड लिंक हटवा चुकी है। रिलीज के बाद से ही मेकर्स ऑनलाइन लीक को रोकने के लिए लगातार कार्रवाई कर रहे हैं। हालांकि अब जब यह पुराना वीडियो दोबारा वायरल हुआ तो फिल्म की पाइरेसी से ज्यादा अभिनेता के बयान पर चर्चा शुरू हो गई।

    सोशल मीडिया और रेडिट पर कुछ यूजर्स ने शोभिनव के पाप वाले बयान को लेकर सवाल उठाए। एक यूजर ने धार्मिक भावनाओं और फिल्म से जुड़े बिजनेस को लेकर अपनी नाराजगी जताई। वहीं दूसरे यूजर ने कहा कि पाइरेसी के खिलाफ अपील करना सही है लेकिन इसे पाप से जोड़ना उसे समझ नहीं आया। कुछ लोगों ने यह भी कहा कि फिल्म की पाइरेसी रोकने की बात अपनी जगह ठीक है लेकिन धार्मिक शब्दों के इस्तेमाल से मामला अनावश्यक रूप से विवादित हो गया।

    हालांकि शोभिनव की मूल अपील का केंद्र फिल्म की पाइरेसी रोकना ही था। फिल्म की टीम का कहना है कि ऑनलाइन लीक से फिल्म के आधिकारिक कारोबार पर असर पड़ सकता है। यही वजह है कि टीम लगातार ऐसे लिंक हटाने की कोशिश कर रही है। दूसरी तरफ फिल्म बॉक्स ऑफिस पर अपनी मजबूत पकड़ बनाए हुए है। रिपोर्ट्स के मुताबिक 60 दिनों में ‘हनुमान अंश’ ने भारत में करीब 325.48 करोड़ रुपये का नेट कलेक्शन किया है जबकि इसका वर्ल्डवाइड ग्रॉस कलेक्शन करीब 424.24 करोड़ रुपये बताया गया है। ऐसे में फिल्म की कमाई के साथ अब शोभिनव सत्य का पुराना वीडियो भी सोशल मीडिया पर चर्चा का बड़ा कारण बन गया है।

  • फिल्म बेचने के लिए डर का ऐसा खेल, प्रमोशन देखकर सहम गए लोग, जानिए सिनेमा के 5 सबसे खौफनाक कैंपेन

    फिल्म बेचने के लिए डर का ऐसा खेल, प्रमोशन देखकर सहम गए लोग, जानिए सिनेमा के 5 सबसे खौफनाक कैंपेन


    नई दिल्ली। फिल्मों की कहानी और कलाकारों के अलावा उनका प्रमोशन भी दर्शकों को सिनेमाघरों तक खींचने में अहम भूमिका निभाता है। आमतौर पर फिल्म निर्माता पोस्टर ट्रेलर इवेंट और सोशल मीडिया कैंपेन के जरिए अपनी फिल्मों को दर्शकों तक पहुंचाते हैं। लेकिन हॉरर फिल्मों के मेकर्स ने कई बार प्रमोशन का ऐसा तरीका अपनाया जिसने फिल्म देखने से पहले ही लोगों के बीच डर का माहौल बना दिया। कुछ प्रमोशन इतने वास्तविक लगे कि लोगों को समझ ही नहीं आया कि वे किसी फिल्म के प्रचार का हिस्सा हैं या सचमुच किसी खतरनाक घटना के बीच फंस गए हैं। सिनेमा इतिहास में ऐसे कई प्रमोशन दर्ज हैं जिन्हें आज भी बेहद यादगार माना जाता है।

    साल 1960 में रिलीज हुई अल्फ्रेड हिचकॉक की फिल्म साइको के प्रमोशन को इस तरह के प्रयोगों की शुरुआत से जोड़कर देखा जाता है। फिल्म को लेकर दर्शकों में डर का माहौल बनाने के लिए सिनेमाघरों के बाहर डॉक्टरों और नर्सों जैसी वेशभूषा में लोगों को तैनात किया गया था। दर्शकों को फिल्म की भयावहता को लेकर चेतावनी दी जाती थी। इसके साथ ही फिल्म शुरू होने के बाद देर से आने वाले दर्शकों को प्रवेश नहीं देने का नियम भी प्रचार का हिस्सा बना। इस माहौल ने लोगों की उत्सुकता के साथ डर भी बढ़ा दिया।

    इसके बाद साल 1999 में आई द ब्लेयर विच प्रोजेक्ट ने गुरिल्ला मार्केटिंग का बेहद अलग तरीका अपनाया। फिल्म के निर्माताओं ने इंटरनेट पर ऐसा माहौल तैयार किया जिससे लोगों को लगा कि फिल्म में दिखाई गई घटनाएं वास्तविक हैं। कॉलेज कैंपस और सिनेमाघरों के आसपास फिल्म के कलाकारों के लापता होने वाले पोस्टर लगाए गए। वेबसाइट पर भी कहानी को इस तरह पेश किया गया कि कई लोगों को शुरुआत में यह फिल्म नहीं बल्कि वास्तविक घटना लगी। इस अभियान ने फिल्म को लेकर जबरदस्त चर्चा पैदा की।

    साल 2006 में मिशन इम्पॉसिबल 3 के प्रमोशन के दौरान भी एक ऐसा मामला सामने आया जिसने लोगों को डरा दिया। फिल्म की थीम ट्यून बजाने वाले छोटे डिजिटल म्यूजिक प्लेयर अखबारों के बॉक्स के अंदर लगाए गए थे। बॉक्स खोलते ही अचानक आवाज आने लगी। अंदर दिखाई देने वाले तारों और अचानक बजने वाली धुन से कुछ लोगों को लगा कि वहां कोई संदिग्ध उपकरण रखा गया है। मामला इतना गंभीर हो गया कि कुछ स्थानों पर सुरक्षा एजेंसियों को बुलाना पड़ा और बम निरोधक दस्ते तक को सक्रिय करना पड़ा।

    साल 2013 में आई एक हॉरर फिल्म के प्रमोशन के लिए न्यूयॉर्क की एक कॉफी शॉप में भी डरावना प्रैंक किया गया। वहां छिपे हुए तारों रिमोट से चलने वाली कुर्सियों और नकली दीवारों की मदद से ऐसा माहौल तैयार किया गया कि आम ग्राहक अचानक डर गए। एक अभिनेत्री ने अपनी कथित मानसिक शक्ति से चीजों को हिलाने का अभिनय किया। टेबल और कुर्सियों के अचानक हिलने से वहां मौजूद लोग चीखते हुए बाहर निकल गए।

    इसके बाद स्माइल और स्माइल 2 के प्रमोशन ने भी लोगों का ध्यान खींचा। इन फिल्मों के प्रचार के दौरान लाइव बेसबॉल मैचों और टीवी कार्यक्रमों में डरावनी मुस्कान वाले लोगों को दर्शकों के बीच बैठाया गया। वे लंबे समय तक कैमरे की तरफ बिना पलक झपकाए देखते रहे। टीवी पर यह दृश्य देखकर लोगों को कुछ पल के लिए समझ नहीं आया कि यह किसी फिल्म का प्रमोशन है या वास्तविक घटना। इन सभी उदाहरणों से साफ है कि फिल्म प्रमोशन अब केवल पोस्टर और ट्रेलर तक सीमित नहीं रहा। मेकर्स दर्शकों को कहानी का अनुभव पहले ही कराने के लिए डर और रोमांच को प्रचार का हिस्सा बना चुके हैं।

  • कृति सेनन ने खोला रक्षाबंधन विज्ञापन विवाद का राज, करीना कपूर से बोलीं मेरी चोली पर हुई थी घंटों बहस

    कृति सेनन ने खोला रक्षाबंधन विज्ञापन विवाद का राज, करीना कपूर से बोलीं मेरी चोली पर हुई थी घंटों बहस

    नई दिल्ली। करीना कपूर एक बार फिर अपने चर्चित टॉक शो व्हाट वीमेन वांट के नए सीजन के साथ दर्शकों के बीच लौटने वाली हैं। शो के सीजन 6 का ट्रेलर सामने आ चुका है और इसमें बॉलीवुड की कई चर्चित हस्तियां नजर आ रही हैं। ट्रेलर में कृति सेनन भी करीना कपूर के साथ बातचीत करती दिखाई दे रही हैं। इस दौरान कृति ने रक्षाबंधन के दौरान सामने आए अपने एक विज्ञापन विवाद को लेकर खुलकर बात की। उन्होंने बताया कि किस तरह उनके कपड़ों को लेकर शुरू हुआ विवाद इतना बढ़ गया कि उनकी चोली तक प्राइम टाइम टीवी डिबेट का विषय बन गई।

    करीना कपूर से बातचीत के दौरान कृति सेनन ने कहा कि उन्हें यकीन नहीं हुआ था कि उनके कपड़े इतने बड़े मुद्दे में बदल जाएंगे। उन्होंने मजाकिया लेकिन हैरान करने वाले अंदाज में बताया कि उनकी चोली प्राइम टाइम न्यूज पर छह लोगों के पैनल डिस्कशन का विषय बन गई थी। कृति की बात सुनकर करीना कपूर ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी और कहा कि वह इस बात से परिचित हैं। बातचीत का यह हिस्सा शो के ट्रेलर में सबसे ज्यादा ध्यान खींचने वाले हिस्सों में शामिल है।

    दरअसल रक्षाबंधन के दौरान कृति सेनन ने ज्वेलरी ब्रांड जीवा के लिए एक विज्ञापन किया था। विज्ञापन सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर उनके पहनावे को लेकर काफी विवाद हुआ। कृति इस विज्ञापन में सफेद रंग के इंडो वेस्टर्न लहंगे के साथ डीप नेक ब्रालेट स्टाइल टॉप में नजर आई थीं। कुछ लोगों ने उनके कपड़ों को लेकर आपत्ति जताई और इसे धार्मिक भावनाओं से जोड़कर सवाल उठाए। विवाद बढ़ने के बाद विज्ञापन को लेकर कंपनी को भी आलोचना का सामना करना पड़ा और बाद में इसे वापस ले लिया गया।

    इस पूरे मामले पर कृति सेनन ने उस समय सोशल मीडिया के जरिए अपनी बात रखी थी। उन्होंने सवाल उठाया था कि आखिर महिलाओं के कपड़ों को ही उनकी संस्कृति और सम्मान का पैमाना क्यों बनाया जाता है। कृति का कहना था कि पिछले कुछ वर्षों में एथनिक फैशन में काफी बदलाव आया है लेकिन आज भी महिलाओं के पहनावे को लेकर उनकी संस्कृति पर सवाल खड़े कर दिए जाते हैं। उन्होंने साफ तौर पर कहा था कि संस्कृति और परंपराएं किसी महिला के दिल और सोच में होती हैं न कि उसके पहनावे में।

    कृति की इसी बेबाक सोच की झलक अब करीना कपूर के शो के ट्रेलर में भी दिखाई दे रही है। दोनों अभिनेत्रियों के बीच बातचीत के दौरान रक्षाबंधन विज्ञापन विवाद का जिक्र होने से यह एपिसोड पहले ही चर्चा में आ गया है। व्हाट वीमेन वांट के नए सीजन में करीना कपूर एक बार फिर सेलिब्रिटीज से उनकी निजी जिंदगी करियर और समाज से जुड़े मुद्दों पर खुलकर सवाल करती नजर आएंगी।

    शो के ट्रेलर में कृति सेनन के अलावा पंकज त्रिपाठी मीरा राजपूत कपूर अली फजल सुहानी शाह नीतू कपूर नेहा कक्कड़ ताहिरा कश्यप महीप कपूर और गुनीत मोंगा समेत कई चर्चित चेहरे दिखाई दे रहे हैं। सोशल मीडिया पर दर्शक खासतौर पर कृति और करीना के एपिसोड को लेकर उत्साहित नजर आ रहे हैं।

    कृति सेनन के वर्कफ्रंट की बात करें तो हाल ही में उनकी फिल्म कॉकटेल 2 रिलीज हुई थी। फिल्म में उनके साथ रश्मिका मंदाना और शाहिद कपूर नजर आए थे। यह फिल्म 2012 में आई कॉकटेल का सीक्वल थी। हालांकि बॉक्स ऑफिस पर फिल्म को उम्मीद के मुताबिक सफलता नहीं मिल सकी। अब कृति एक बार फिर अपने बेबाक अंदाज और आने वाले प्रोजेक्ट्स को लेकर सुर्खियों में हैं।

  • KBC 18 के मंच पर खुली सारा अली खान की दिल की बात, अमिताभ के साथ काम कर चुके आयुष्मान से क्यों हुई जलन

    KBC 18 के मंच पर खुली सारा अली खान की दिल की बात, अमिताभ के साथ काम कर चुके आयुष्मान से क्यों हुई जलन


    नई दिल्ली। कौन बनेगा करोड़पति 18 का मंच इन दिनों सितारों की मौजूदगी और मजेदार किस्सों को लेकर लगातार चर्चा में है। हालिया एपिसोड में आयुष्मान खुराना और सारा अली खान अमिताभ बच्चन के सामने नजर आए। दोनों कलाकार अपनी आने वाली फिल्म उड़ता तीर के प्रमोशन के लिए शो में पहुंचे थे। इस दौरान अमिताभ बच्चन और आयुष्मान खुराना ने अपनी पुरानी फिल्म गुलाबो सिताबो की यादें भी ताजा कीं। बातचीत के दौरान आयुष्मान ने अमिताभ बच्चन से कुछ ऐसा कहा कि पूरा माहौल हंसी मजाक में बदल गया।

    आयुष्मान खुराना और अमिताभ बच्चन ने साल 2019 में रिलीज हुई फिल्म गुलाबो सिताबो में पहली बार साथ काम किया था। फिल्म में आयुष्मान के किरदार ने अमिताभ बच्चन के किरदार को बुढ़ऊ कहकर संबोधित किया था। KBC 18 के मंच पर इसी पुराने सीन को याद करते हुए दोनों कलाकारों ने इसे दोबारा एक्ट किया। इसके बाद आयुष्मान ने मजाकिया अंदाज में अमिताभ बच्चन से माफी मांगते हुए कहा कि फिल्म में उन्हें बुढ़ऊ कहने के लिए माफ कर दीजिए। उन्होंने अमिताभ की उम्र को लेकर भी मजेदार अंदाज में उनकी तारीफ की और कहा कि अमिताभ 84 की हरकतें नहीं करते बल्कि 28 साल के जैसे हैं।

    आयुष्मान की बात सुनकर अमिताभ बच्चन भी मुस्कुराने लगे और उन्होंने मजाक को आगे बढ़ाते हुए पूछ लिया कि 84 साल वाली हरकतें आखिर होती कैसी हैं। इसके बाद सेट पर मौजूद सभी लोग हंस पड़े। दोनों कलाकारों की यह बातचीत शो के सबसे दिलचस्प पलों में शामिल हो गई। अमिताभ और आयुष्मान की बॉन्डिंग ने एक बार फिर गुलाबो सिताबो की यादें दर्शकों के सामने ला दीं।

    इसी बातचीत के दौरान सारा अली खान ने भी अपने दिल की बात सामने रख दी। सारा ने बताया कि उन्हें इस बात की जलन होती है कि आयुष्मान खुराना अमिताभ बच्चन के साथ पहले ही फिल्म में काम कर चुके हैं। सारा ने कहा कि उनके परिवार के कई बड़े कलाकार अमिताभ बच्चन के साथ काम कर चुके हैं लेकिन अभी तक उन्हें महानायक के साथ स्क्रीन शेयर करने का अवसर नहीं मिला है।

    सारा अली खान का परिवार फिल्म और अभिनय की दुनिया से लंबे समय से जुड़ा रहा है। उनकी मां अमृता सिंह और दादी शर्मिला टैगोर समेत परिवार के कई कलाकार अमिताभ बच्चन के साथ काम कर चुके हैं। ऐसे में सारा के लिए अमिताभ के साथ काम करना एक खास सपना माना जा सकता है। शो पर उन्होंने इसी भावना को मजाकिया अंदाज में जाहिर किया।

    अमिताभ बच्चन ने भी सारा अली खान के परिवार की तारीफ की। उन्होंने पटौदी परिवार के लोगों की खूबसूरत आंखों का जिक्र किया और सारा के दादा तथा पूर्व भारतीय क्रिकेटर मंसूर अली खान पटौदी से जुड़ी एक पुरानी याद भी साझा की। उन्होंने दिल्ली में उनकी मां को खुले जैगुआर में गाड़ी चलाते हुए देखने का किस्सा सुनाया।

    KBC के इस एपिसोड में आयुष्मान खुराना ने अमिताभ बच्चन को खास अंदाज में सम्मान भी दिया। उन्होंने KBC रेडियो एपिसोड के एक सेगमेंट में अमिताभ की फिल्मों के मशहूर डायलॉग बोलकर उन्हें समर्पित किया। इस तरह शो में फिल्मी यादों हास्य और भावनात्मक किस्सों का ऐसा मेल देखने को मिला जिसने एपिसोड को खास बना दिया।

  • दुनिया में बजा भारतीय मूल की बेटी का डंका, हेली पिसाडी ने जीता मिस इंडिया वर्ल्डवाइड का खिताब

    दुनिया में बजा भारतीय मूल की बेटी का डंका, हेली पिसाडी ने जीता मिस इंडिया वर्ल्डवाइड का खिताब


    नई दिल्ली। भारतीय मूल की 19 वर्षीय हेली पिसाडी ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए मिस इंडिया वर्ल्डवाइड 2026 का खिताब अपने नाम कर लिया है। त्रिनिदाद और टोबैगो का प्रतिनिधित्व करने वाली हेली ने दुनिया के अलग अलग देशों से पहुंची भारतीय मूल की प्रतिभागियों को पीछे छोड़ते हुए यह प्रतिष्ठित ताज हासिल किया। हेली फिलहाल कानून की पढ़ाई कर रही हैं और इतनी कम उम्र में मिली इस सफलता ने उन्हें भारतीय प्रवासी समुदाय के बीच चर्चा का प्रमुख चेहरा बना दिया है। यह प्रतियोगिता भारत के बाहर आयोजित होने वाली सबसे लंबे समय से चल रही भारतीय सौंदर्य प्रतियोगिताओं में शामिल है और इस वर्ष इसका 33वां संस्करण आयोजित किया गया।

    मिस इंडिया वर्ल्डवाइड 2026 का आयोजन त्रिनिदाद और टोबैगो के नेशनल एकेडमी फॉर द परफॉर्मिंग आर्ट्स में किया गया। इसी कार्यक्रम के दौरान वर्ल्डवाइड पेजेंट्स की को चेयरपर्सन नीलम सरन ने हेली पिसाडी को मिस इंडिया वर्ल्डवाइड का ताज पहनाया। जीत के बाद हेली को ताज और सैश के साथ देखा गया। उनकी इस उपलब्धि को भारतीय मूल के लोगों के लिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि प्रतियोगिता भारतीय संस्कृति और विरासत से जुड़े प्रतिभागियों को वैश्विक मंच प्रदान करती है।

    हेली पिसाडी की खासियत केवल उनकी खूबसूरती नहीं बल्कि उनकी शिक्षा और आत्मविश्वास भी है। वह कानून की पढ़ाई कर रही हैं और पढ़ाई के साथ उन्होंने अंतरराष्ट्रीय सौंदर्य प्रतियोगिता में हिस्सा लेकर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। त्रिनिदाद और टोबैगो जैसे देश से भारतीय मूल की प्रतिनिधि के तौर पर इस मंच पर पहुंचना भी अपने आप में महत्वपूर्ण उपलब्धि है। प्रतियोगिता में अलग अलग देशों में रहने वाली भारतीय मूल की महिलाओं ने हिस्सा लिया और अपनी प्रतिभा तथा व्यक्तित्व का प्रदर्शन किया।

    इस आयोजन में केवल मिस इंडिया वर्ल्डवाइड का खिताब ही नहीं दिया गया बल्कि दो अन्य प्रमुख श्रेणियों में भी विजेताओं का चयन हुआ। अमेरिका का प्रतिनिधित्व करने वाली डॉ. श्रीदेवी मंगिनानी ने मिसेज इंडिया वर्ल्डवाइड 2026 का खिताब अपने नाम किया। वहीं नीदरलैंड्स की लूना जयराम मिस टीन इंडिया वर्ल्डवाइड 2026 चुनी गईं। इस तरह तीन अलग अलग देशों की भारतीय मूल की महिलाओं ने प्रतियोगिता के तीन प्रमुख खिताब अपने नाम किए।

    मिस इंडिया वर्ल्डवाइड प्रतियोगिता की शुरुआत तीन दशक से भी अधिक समय पहले हुई थी। इसका उद्देश्य दुनिया के अलग अलग हिस्सों में रहने वाले भारतीय मूल के लोगों को अपनी संस्कृति और पहचान से जोड़ना भी है। समय के साथ यह प्रतियोगिता भारतीय प्रवासी समुदाय के लिए एक अंतरराष्ट्रीय मंच के रूप में अपनी पहचान बना चुकी है। प्रतियोगिता में शामिल होने वाली प्रतिभागियां अपनी भारतीय विरासत के साथ उस देश का भी प्रतिनिधित्व करती हैं जहां वे रहती हैं।

    हेली पिसाडी की जीत इसी वैश्विक भारतीय समुदाय की बढ़ती पहचान को दर्शाती है। त्रिनिदाद और टोबैगो में आयोजित इस आयोजन ने भारतीय मूल की प्रतिभाओं को एक मंच पर लाने का काम किया। 19 साल की हेली के लिए यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि वह अभी कानून की पढ़ाई कर रही हैं और शिक्षा के साथ उन्होंने सौंदर्य प्रतियोगिता में अंतरराष्ट्रीय सफलता हासिल की है। उनकी जीत ने भारतीय मूल की युवा प्रतिभाओं के लिए एक नई मिसाल कायम की है।

  • श्मशान घाट नदियों के किनारे ही क्यों होते हैं, हिंदू धर्म की इस परंपरा के पीछे छिपा है गहरा रहस्य

    श्मशान घाट नदियों के किनारे ही क्यों होते हैं, हिंदू धर्म की इस परंपरा के पीछे छिपा है गहरा रहस्य


    नई दिल्ली। हिंदू धर्म में जन्म से लेकर मृत्यु तक जल का विशेष महत्व माना गया है। धार्मिक परंपराओं में नदियों को केवल पानी का स्रोत नहीं बल्कि पवित्रता और जीवन का प्रतीक माना जाता है। यही वजह है कि भारत में पुराने समय के कई प्रमुख श्मशान घाट नदियों के किनारे देखने को मिलते हैं। वाराणसी का मणिकर्णिका घाट हरिद्वार के घाट और प्रयागराज का संगम क्षेत्र इसके प्रमुख उदाहरण हैं। आज भी इन स्थानों पर अंतिम संस्कार से जुड़ी परंपराएं निभाई जाती हैं।

    दरअसल श्मशान घाटों का नदियों के पास होना केवल धार्मिक मान्यताओं से जुड़ा विषय नहीं है। इसके पीछे पुराने समय की भौगोलिक और सामाजिक परिस्थितियां भी बड़ी वजह रही हैं। प्राचीन भारत में अधिकांश नगर और बस्तियां नदियों के आसपास ही विकसित होती थीं। नदियां पीने के पानी खेती आवागमन और दैनिक जीवन के लिए बेहद महत्वपूर्ण थीं। नदी किनारे खुले स्थान भी अपेक्षाकृत आसानी से उपलब्ध होते थे। ऐसे में अंतिम संस्कार के लिए नदी के किनारे स्थान का चयन करना व्यावहारिक भी था। समय के साथ इन्हीं स्थानों पर घाट विकसित हुए और वे धार्मिक तथा सामाजिक जीवन का हिस्सा बन गए।

    हिंदू दर्शन में शरीर को पंचतत्वों से बना माना गया है। ये पंचतत्व पृथ्वी जल अग्नि वायु और आकाश हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार मृत्यु के बाद शरीर इन्हीं तत्वों में वापस विलीन होता है। दाह संस्कार में अग्नि शरीर के स्थूल रूप को प्रकृति में वापस लौटाने का माध्यम मानी जाती है। इसके बाद बची राख और अस्थियों को जल में विसर्जित करने की परंपरा भी लंबे समय से चली आ रही है। इसे प्रकृति के चक्र में शरीर की वापसी के प्रतीक के रूप में देखा जाता है।

    जल को हिंदू परंपरा में शुद्धि और पवित्रता से भी जोड़ा गया है। यही कारण है कि अंतिम संस्कार की प्रक्रिया में जल का इस्तेमाल कई स्तरों पर दिखाई देता है। दाह संस्कार के बाद अस्थि और राख को जल में प्रवाहित करने की परंपरा कई परिवारों में आज भी निभाई जाती है। धार्मिक दृष्टि से इसे दिवंगत व्यक्ति के प्रति अंतिम कर्तव्य से जोड़ा जाता है। वहीं वैज्ञानिक दृष्टि से दाह संस्कार के बाद बचे अवशेषों में विभिन्न खनिज तत्व होते हैं जिनमें कुछ पानी में घुल सकते हैं जबकि कुछ तलछट का हिस्सा बन सकते हैं।

    पुराने समय में नदी किनारे श्मशान होने का एक और व्यावहारिक लाभ यह था कि अंतिम संस्कार के बाद जरूरी धार्मिक क्रियाएं उसी क्षेत्र में पूरी की जा सकती थीं। नदी तक पहुंच आसान होने के कारण अस्थि विसर्जन जैसी परंपराओं को पूरा करना भी सुविधाजनक था। इतिहास से जुड़े शोध भी बताते हैं कि भारत में परंपरागत दाह संस्कार स्थल अक्सर नदी या समुद्र के करीब बनाए जाते थे ताकि राख और अस्थियों को जल में विसर्जित किया जा सके।

    हालांकि समय के साथ शहरों का विस्तार हुआ और आबादी तेजी से बढ़ी। कई जगह पुराने नदी किनारे वाले श्मशान घाट शहरों के बीच आ गए जबकि नई जगहों पर आबादी से दूर श्मशान घाट बनाए जाने लगे। इसके बावजूद नदियों और श्मशान घाटों का यह संबंध आज भी हिंदू संस्कृति में गहराई से दिखाई देता है। इसलिए श्मशान घाटों का नदियों के किनारे होना केवल किसी एक धार्मिक रहस्य का परिणाम नहीं बल्कि आस्था परंपरा भूगोल और प्राचीन जीवन व्यवस्था के लंबे मेल का परिणाम माना जा सकता है।