Author: bharati

  • एक मंडप तीन दुल्हनें अनोखी शादी ने मचाया तहलका मध्यप्रदेश से आई चौंकाने वाली कहानी

    एक मंडप तीन दुल्हनें अनोखी शादी ने मचाया तहलका मध्यप्रदेश से आई चौंकाने वाली कहानी

    अलीराजपुर । मध्यप्रदेश के अलीराजपुर जिले के नानपुर गांव से सामने आई एक अनोखी शादी इन दिनों पूरे देश में चर्चा का विषय बनी हुई है जहां एक शख्स ने अपनी एक नहीं बल्कि तीन प्रेमिकाओं के साथ एक ही मंडप में सात फेरे लेकर सबको हैरान कर दिया। यह शादी सिर्फ एक निजी समारोह नहीं रही बल्कि सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होती हुई एक ऐसी कहानी बन गई जिसने परंपरा समाज और रिश्तों को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

    समरथ मौर्य नाम के इस व्यक्ति ने अपनी तीनों प्रेमिकाओं के साथ जनजातीय रीति रिवाजों के अनुसार विवाह किया। यह विवाह एक दिन का नहीं बल्कि पूरे तीन दिनों तक चलने वाला आयोजन था जिसमें गांव के सैकड़ों लोग शामिल हुए और इस अनोखे पल के गवाह बने। सबसे दिलचस्प बात यह रही कि इस शादी में उनके छह बच्चे भी शामिल हुए जिन्होंने अपने पिता की बारात में जमकर नृत्य किया और इस आयोजन को एक अलग ही रंग दे दिया।

    बताया जाता है कि समरथ मौर्य का अपनी पहली प्रेमिका के साथ रिश्ता साल 2003 से जुड़ा हुआ था और समय के साथ बाकी दो महिलाएं भी उनके जीवन का हिस्सा बन गईं। पिछले करीब 15 वर्षों से ये सभी एक साथ लिव इन रिलेशनशिप में रह रहे थे और एक परिवार की तरह जीवन बिता रहे थे। लंबे समय तक बिना शादी के साथ रहने के बाद आखिरकार उन्होंने सामाजिक मान्यता और पारिवारिक पहचान के लिए विवाह करने का निर्णय लिया।

    इस फैसले के पीछे दो मुख्य कारण सामने आए हैं। पहला यह कि उनके बच्चों को समाज में किसी तरह की असहज स्थिति का सामना न करना पड़े और उन्हें एक स्पष्ट पहचान मिल सके। दूसरा कारण जनजातीय परंपराओं से जुड़ा हुआ है जहां किसी भी धार्मिक या सामाजिक कार्यक्रम में भाग लेने के लिए विवाहित होना आवश्यक माना जाता है। ऐसे में इस परिवार ने अपने रिश्ते को औपचारिक रूप देने का रास्ता चुना।

    इस अनोखी शादी को लेकर कानूनी पहलुओं पर भी चर्चा तेज हो गई है। सामान्य परिस्थितियों में एक से अधिक विवाह भारतीय कानून के तहत मान्य नहीं होते लेकिन जनजातीय समुदायों को उनके पारंपरिक रीति रिवाजों के अनुसार कुछ विशेष छूट दी गई है। इसी वजह से यह विवाह उस समाज की परंपराओं के अंतर्गत वैध माना जा रहा है।

    सोशल मीडिया पर इस शादी की तस्वीरें और वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं। कोई इसे प्रेम और जिम्मेदारी का उदाहरण बता रहा है तो कोई इसे सामाजिक मान्यताओं के खिलाफ मानकर सवाल उठा रहा है। हालांकि इस पूरे घटनाक्रम ने एक बात साफ कर दी है कि भारत के अलग अलग हिस्सों में परंपराएं और सामाजिक संरचनाएं आज भी विविधता से भरी हुई हैं जहां रिश्तों को देखने का नजरिया भी अलग अलग हो सकता है।

    यह शादी अब सिर्फ एक व्यक्तिगत निर्णय नहीं रही बल्कि एक ऐसी कहानी बन गई है जो यह दिखाती है कि बदलते समय के बीच भी परंपराएं किस तरह लोगों के जीवन को प्रभावित करती हैं और कैसे लोग अपने हालात और सामाजिक जरूरतों के अनुसार फैसले लेते हैं।

  • वसंत में खिला कश्मीर लाखों ट्यूलिप के बीच उमड़ी भीड़ ने तोड़े सारे रिकॉर्ड

    वसंत में खिला कश्मीर लाखों ट्यूलिप के बीच उमड़ी भीड़ ने तोड़े सारे रिकॉर्ड


    नई दिल्ली । जम्मू कश्मीर का मशहूर ट्यूलिप गार्डन इस साल वसंत के मौसम में आकर्षण का सबसे बड़ा केंद्र बनकर उभरा है जहां पर्यटकों की रिकॉर्ड तोड़ भीड़ उमड़ रही है। 16 मार्च को तय समय से पहले खोले गए इस गार्डन ने महज दो हफ्तों में 1.4 लाख से अधिक विजिटर्स का आंकड़ा पार कर लिया है जो अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है। हर दिन हजारों की संख्या में लोग यहां पहुंचकर रंग बिरंगे फूलों की खूबसूरती का आनंद ले रहे हैं और कश्मीर घाटी को मानो एक जादुई फूलों की दुनिया में बदलते देख रहे हैं।

    इस साल गार्डन में लगभग 18 लाख ट्यूलिप के फूल लगाए गए हैं जिनमें 70 से 75 अलग अलग किस्में शामिल हैं। इन फूलों के रंग और उनकी विविधता पर्यटकों को खासा आकर्षित कर रही है। सुबह और शाम के समय जब सूरज की किरणें इन फूलों पर पड़ती हैं तो पूरा गार्डन सुनहरे रंगों में नहाया हुआ दिखाई देता है जिसे देखने के लिए लोग खास तौर पर गोल्डन आवर का इंतजार करते हैं।

    गार्डन प्रशासन के अनुसार पहले यह गार्डन अप्रैल के शुरुआती हफ्ते में खोला जाता था लेकिन इस बार पर्यटकों की बढ़ती मांग और पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से इसे दो हफ्ते पहले ही खोल दिया गया। इसका असर साफ तौर पर देखने को मिला और शुरुआत से ही यहां भारी भीड़ जुटने लगी। रमजान के दौरान जहां रोजाना 4 से 5 हजार लोग आते थे वहीं ईद के बाद यह संख्या बढ़कर 10 से 12 हजार तक पहुंच गई जिसमें बड़ी संख्या स्थानीय लोगों की भी रही।

    पर्यटकों के बीच इस गार्डन को लेकर खासा उत्साह देखा जा रहा है। देश के अलग अलग हिस्सों के साथ साथ विदेशी सैलानी भी यहां पहुंच रहे हैं। लोग इसकी तुलना यूरोप के प्रसिद्ध फूलों के बागानों से कर रहे हैं और इसे धरती पर स्वर्ग जैसा अनुभव बता रहे हैं। ज़बरवान पर्वतमाला और डल झील की पृष्ठभूमि में खिले ये ट्यूलिप फूल पर्यटकों के लिए एक यादगार अनुभव बन रहे हैं।

    वाराणसी से आए एक पर्यटक ने बताया कि उन्होंने इस जगह के बारे में बहुत सुना था लेकिन यहां आकर उन्हें इसकी असली खूबसूरती का एहसास हुआ जो उम्मीद से कहीं ज्यादा शानदार है। वहीं एक अन्य पर्यटक ने कहा कि कई दिन बाद आने के बावजूद फूल पूरी तरह खिले और ताजगी से भरे हुए थे जो इस गार्डन की खासियत को दर्शाता है।

    इस गार्डन को तैयार करने में सैकड़ों माली और कर्मचारी महीनों तक मेहनत करते हैं। करीब छह महीने की योजना और देखभाल के बाद यह बाग जनता के लिए खोला जाता है। इसकी इसी भव्यता और विशालता के कारण इसे एशिया के सबसे बड़े ट्यूलिप गार्डन के रूप में अंतरराष्ट्रीय पहचान भी मिल चुकी है। लगातार बढ़ती पर्यटकों की संख्या यह संकेत देती है कि आने वाले दिनों में यह गार्डन न केवल कश्मीर बल्कि पूरे देश के पर्यटन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाएगा।

  • केरल विधानसभा चुनाव 2026: प्रधानमंत्री मोदी करेंगे रोड शो और रैली, राज्य में त्रिकोणीय मुकाबला

    केरल विधानसभा चुनाव 2026: प्रधानमंत्री मोदी करेंगे रोड शो और रैली, राज्य में त्रिकोणीय मुकाबला


    नई दिल्ली/तिरुवनंतपुरम। केरल में विधानसभा चुनाव प्रचार अपने चरम पर है और राजनीतिक हलकों में चुनावी गतिविधियों का शोर हर तरफ सुनाई दे रहा है। रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी केरल के पलक्कड़ और त्रिशूर में चुनावी कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे। उन्होंने इस मौके पर कहा कि केरल के लोगों के बीच रहने का उन्हें बेसब्री से इंतजार है।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा कि आज शाम वह पलक्कड़ में एक रैली को संबोधित करेंगे और उसके बाद त्रिशूर में रोड शो में हिस्सा लेंगे। मोदी ने कहा कि केरल में आम माहौल एनडीए के पक्ष में है और लोग एलडीएफ और यूडीएफ के कुशासन से नाखुश हैं। यह स्पष्ट संदेश है कि भाजपा इस बार केरल में अपनी पैठ मजबूत करने के लिए पूरी ताकत झोंक रही है।

    केरल चुनाव में राजनीतिक दलों ने पूरी ताकत झोंक दी है। राज्य भर में विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रमुख नेता सक्रिय रूप से रैलियों और चुनावी कार्यक्रमों में भाग ले रहे हैं। मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने भी रविवार को पलक्कड़ जिले की चार विधानसभा सीटों पर चुनावी कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। यह दिखाता है कि चुनावी माहौल तेज और प्रतिस्पर्धात्मक है।

    इस बार केरल विधानसभा चुनाव में कुल 140 सीटों के लिए चुनाव होने हैं। वोटिंग 9 अप्रैल 2026 को होगी और मतों की गिनती और परिणाम 4 मई 2026 को घोषित किए जाएंगे। केरल विधानसभा का वर्तमान कार्यकाल 23 मई को समाप्त होने वाला है। भारतीय निर्वाचन आयोग की अंतिम मतदाता सूची के अनुसार, इस चुनाव में 2.71 करोड़ मतदाता अपने मत का इस्तेमाल करने के पात्र हैं।

    राजनीतिक विश्लेषक बता रहे हैं कि इस बार केरल में त्रिकोणीय मुकाबला है, जिसमें माकपा के नेतृत्व वाले एलडीएफ, कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ और भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए आमने-सामने हैं। एलडीएफ सत्ता बनाए रखने की चुनौती का सामना कर रहा है, यूडीएफ वापसी की कोशिश में है और भाजपा को पहली बार बड़ी सफलता की उम्मीद है।

    पिछले चुनावों की बात करें तो 2021 में एलडीएफ ने 99 सीटें जीतीं, कांग्रेस नेतृत्व वाले यूडीएफ को 41 सीटें मिलीं और भाजपा को कोई सीट नहीं मिली थी। 2016 में भाजपा ने पहली बार केवल एक सीट जीती थी। इस बार भाजपा की रणनीति और प्रधानमंत्री मोदी की सक्रिय भागीदारी एनडीए की स्थिति मजबूत करने के लिए अहम मानी जा रही है।

    चुनावी माहौल हर तरफ उत्साही है। प्रधानमंत्री मोदी की पलक्कड़ और त्रिशूर की रैलियां राज्य में एनडीए के प्रचार अभियान को और गति देंगी। राजनीतिक दल हर क्षेत्र में मतदाताओं से संवाद कर रहे हैं और जनता के बीच चुनावी मुद्दों पर बहस चल रही है। राज्य में त्रिकोणीय मुकाबले और जनता की बढ़ती भागीदारी के बीच आगामी चुनावों के परिणाम पर सभी की नजर है।

  • कामदा एकादशी व्रत कथा: पति-पत्नी की खुशहाली और पापों का नाश केवल आज

    कामदा एकादशी व्रत कथा: पति-पत्नी की खुशहाली और पापों का नाश केवल आज


    नई दिल्ली । आज 29 मार्च 2026 को कामदा एकादशी का व्रत रखा जा रहा है जो चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी पर पड़ता है और हिन्दू नववर्ष का पहला एकादशी माना जाता है इसे हिन्दू धर्म की सबसे महत्वपूर्ण एकादशियों में से एक माना जाता है और इस दिन व्रत रखने वालों के लिए कथा का पाठ करना बेहद शुभ होता है क्योंकि बिना कथा का पाठ किए पूजा अधूरी रह सकती है

    कथा के अनुसार प्राचीन काल में भोगीपुर नामक नगर में पुण्डरीक नामक राजा राज्य करता था वहां ललित और ललिता नामक पति-पत्न रहते थे जिनके बीच गहरा प्रेम था ललित राजा पुण्डरीक के दरबार में संगीत सुनाता था और एक बार गंधर्वों के साथ संगीत प्रस्तुत करते समय उसका ध्यान अपनी पत्नी पर गया और उसका सुर बिगड़ गया राजा ने इसे अपमान माना और क्रोध में आकर ललित को राक्षस बनने का श्राप दे दिया श्राप के प्रभाव से ललित मांस खाने लगा और उसका चेहरा भी भयानक हो गया लेकिन ललिता ने पति का साथ निभाना जारी रखा और लोगों से उपाय पूछने लगी

    दिन-ब-दिन ललित का स्वरूप और विकराल होता गया एक दिन वह जंगल की ओर गया और उसकी पत्नी भी पीछे-पीछे चली जंगल में ललिता को एक सुंदर आश्रम दिखाई दिया वहां उसने ऋषियों का प्रणाम किया ऋषि ने पूछा कि तुम कौन हो और ललिता ने अपना नाम बताया और अपने पति को मिले श्राप के बारे में बताया ऋषि ने ललिता को बताया कि इस समय चैत्र माह की एकादशी का व्रत रखने और इसका पुण्य अपने पति को देने से ललित ठीक हो सकता है

    विधि-विधान से ललिता ने कामदा एकादशी का व्रत रखा और द्वादशी तिथि को व्रत का पारण ऋषि के सामने किया और पुण्यफल अपने पति को दिया इसके परिणामस्वरूप ललित धीरे-धीरे ठीक होने लगा इसके बाद पति-पत्नी ने निरंतर एकादशी व्रत का पालन करना शुरू किया और उनके जीवन में खुशहाली लौट आई कामदा एकादशी का व्रत रखने वालों के सभी पाप नष्ट होते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है

    आज के दिन व्रत का पालन करने से व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं यह व्रत माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु को समर्पित है व्रत रखने वाले को शारीरिक और मानसिक सुख की प्राप्ति होती है पितरों और पूर्वजों की कृपा मिलती है और परिवार में खुशहाली कायम होती है इस दिन कथा का पाठ करने से व्रत पूर्ण फल देता है और जीवन की सभी बाधाएं दूर होती हैं

    इस अवसर पर भक्तों को चाहिए कि वे व्रत के दिन विधि-विधान से निर्जला या अन्न जल का व्रत करें और भगवान विष्णु की पूजा अर्चना के साथ कथा का पाठ अवश्य करें ताकि उनके जीवन में सुख, समृद्धि और खुशहाली आए व्रत का पालन केवल आध्यात्मिक लाभ ही नहीं बल्कि पारिवारिक और सामाजिक जीवन में भी शांति और सौभाग्य लेकर आता है

    कामदा एकादशी का महत्व सिर्फ धार्मिक नहीं बल्कि जीवन में नैतिक और आध्यात्मिक दिशा देने वाला है व्रत और कथा का पालन करने से व्यक्ति का मन शुद्ध होता है उसका जीवन धर्म और भक्ति में समर्पित होता है और सभी पापों से मुक्ति मिलती है इस प्रकार आज कामदा एकादशी का व्रत रखने से जीवन में खुशहाली, स्वास्थ्य और समृद्धि सुनिश्चित होती है और पूजा अधूरी नहीं रहती

  • Bank Holidays Alert: अप्रैल में कई दिन बंद रहेंगे बैंक, जानें कब-कब रहेंगी छुट्टियां

    Bank Holidays Alert: अप्रैल में कई दिन बंद रहेंगे बैंक, जानें कब-कब रहेंगी छुट्टियां


    नई दिल्ली। अप्रैल 2026 में बैंक से जुड़े काम करने वालों के लिए जरूरी खबर है। इस महीने कई ऐसे दिन हैं जब देशभर में अलग-अलग कारणों से बैंक बंद रहेंगे। अगर आप बैंक से जुड़े जरूरी काम करने की योजना बना रहे हैं, तो पहले इन छुट्टियों की लिस्ट जान लेना बेहद जरूरी है।

    इतने दिन बैंकों में बंद रहेगा कामकाज
    अप्रैल महीने की शुरुआत ही बैंकिंग छुट्टी से होती है। 1 अप्रैल को कई राज्यों में बैंकों का सालाना क्लोजिंग डे होता है, जिसके चलते बैंक बंद रहते हैं। इसके अलावा 3 अप्रैल को गुड फ्राइडे के अवसर पर देश के कई हिस्सों में बैंक बंद रहेंगे। महीने में नियमित छुट्टियों की बात करें तो 11 अप्रैल को दूसरा शनिवार और 25 अप्रैल को चौथा शनिवार पड़ रहा है, जिस दिन पूरे देश में बैंक बंद रहते हैं। इसके अलावा सभी रविवार को भी बैंकिंग सेवाएं बंद रहती हैं।

    14 अप्रैल को डॉ. भीमराव आंबेडकर जयंती और कई राज्यों में बैसाखी जैसे त्योहारों के कारण बैंक बंद रह सकते हैं। यह छुट्टी कई राज्यों में लागू होती है, इसलिए अपने राज्य की छुट्टी जरूर चेक कर लें।

    इसके अलावा कुछ राज्यों में स्थानीय त्योहारों और विशेष अवसरों के कारण अलग-अलग तारीखों पर बैंक बंद रह सकते हैं। यानी यह जरूरी नहीं है कि सभी छुट्टियां पूरे देश में एक जैसी हों। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) हर साल राज्यवार बैंक छुट्टियों की सूची जारी करता है।

    हालांकि, बैंक बंद रहने के बावजूद ग्राहकों को घबराने की जरूरत नहीं है। ऑनलाइन बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग और एटीएम सेवाएं सामान्य रूप से चालू रहती हैं, जिससे आप अपने जरूरी काम आसानी से निपटा सकते हैं।

    कुल मिलाकर, अप्रैल 2026 में कई छुट्टियां होने वाली हैं, ऐसे में बैंक जाने से पहले छुट्टियों की लिस्ट जरूर चेक करें ताकि आपको किसी परेशानी का सामना न करना पड़े।

  • पीएम मोदी ने टीम इंडिया की विश्व कप जीत को बताया ऐतिहासिक पल, जम्मू-कश्मीर टीम को भी दी बधाई

    पीएम मोदी ने टीम इंडिया की विश्व कप जीत को बताया ऐतिहासिक पल, जम्मू-कश्मीर टीम को भी दी बधाई

    नई दिल्ली। प्रधानमंत्री रेंद्र मोदी ने मन की बात के 132वें एपिसोड में भारतीय टीम के टी20 वर्ल्ड कप 2026 का खिताब जीतने को लेकर बात की। इसके साथ ही पीएम ने पहली बार रणजी ट्रॉफी का खिताब जीतने वाली जम्मू-कश्मीर टीम की भी जमकर सराहना की। प्रधानमंत्री ने कहा कि पारस डोगरा की कप्तानी में किया गया टीम का प्रदर्शन जम्मू-कश्मीर के लोगों को प्रेरित करेगा।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि मार्च का महीना देश के सभी क्रिकेट फैंस के लिए जोश और उत्साह से भर देने वाला रहा। पीएम मोदी ने कहा कि जब भारतीय टीम ने टी20 विश्व कप 2026 का खिताब जीतकर ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की, तो पूरे देश में खुशी की लहर दौड़ गई। उन्होंने कहा कि अपनी टीम की इस सफलता पर हम सभी को गर्व है।

    पीएम मोदी ने कर्नाटक को फाइनल में हराकर पहली बार रणजी ट्रॉफी का खिताब जीतने वाली जम्मू-कश्मीर टीम के प्रदर्शन की भी जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि सबसे ज्यादा खुशी की बात यह है कि टीम ने लगभग सात दशकों का लंबा इंतजार खत्म करते हुए खिताब को अपने नाम किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि टीम की यह सफलता खिलाड़ियों के कई वर्षों के निरंतर प्रयासों का नतीजा है। उन्होंने जम्मू-कश्मीर के कप्तान पारस डोगरा की कप्तानी को भी सराहा। पीएम ने कहा कि पारस ने बतौर कप्तान शानदार कौशल दिखाया और अपनी कप्तानी से टीम की जीत में अहम योगदान दिया।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि देश में जम्मू-कश्मीर के तेज गेंदबाज आकिब नबी डार के नाम की भी खूब चर्चा हो रही है, जिन्होंने रणजी ट्रॉफी के इस सीजन में 60 विकेट चटकाए। पीएम ने कहा कि फाइनल में मिली ऐतिहासिक जीत से टीम के खिलाड़ी, कोचिंग स्टाफ और जम्मू-कश्मीर के लोग बहुत रोमांचित हैं और क्रिकेट में मिली यह सफलता वहां के लोगों को खेलों के प्रति और आकर्षित करेगी। पीएम मोदी ने गुलमर्ग में आयोजित हुए विंटर ओलंपिक का भी जिक्र किया। उन्होंने उम्मीद जताई कि जम्मू-कश्मीर के खिलाड़ियों का जीत का यह सिलसिला इसी तरह से जारी रहेगा।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने न्यूयॉर्क में पुरुषों की हाफ मैराथन में नेशनल रिकॉर्ड तोड़ने वाले दूरी के धावक गुलवीर सिंह की भी तारीफ की। गुलवीर ने इस मैराथन में तीसरा स्थान हासिल किया और वह एक घंटे से कम समय में हाफ मैराथन को पूरा करने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बने। स्क्वैश ऑन फायर ओपन का खिताब जीतने वालीं स्क्वैश खिलाड़ी अनाहत सिंह के प्रदर्शन की भी प्रधानमंत्री ने सराहना की।

  • देशवासियों को पीएम मोदी का संदेश, संकट में संयम, सतर्कता और एकजुटता बनाए रखें

    देशवासियों को पीएम मोदी का संदेश, संकट में संयम, सतर्कता और एकजुटता बनाए रखें

    नई दिल्ली:प्रधानमंत्री मोदी ने देशवासियों से बार-बार अपील की है कि वह जागरूक रहें और अफवाहों के बहकावे में ना आएं। नई दिल्ली में पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के कारण भारत के सामने उत्पन्न चुनौतियों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों को संदेश दिया कि कठिन परिस्थितियों में भी संयम और सतर्कता बनाए रखना आवश्यक है। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि हम सब मिलकर इन संकटों से अच्छी तरह बाहर निकलेंगे।

    प्रधानमंत्री मोदी ने रविवार को रेडियो कार्यक्रम “मन की बात” के 132वें एपिसोड के जरिए राष्ट्र से संवाद किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि देशवासियों को चाहिए कि वह सरकारी स्रोतों से मिलने वाली जानकारी पर भरोसा करें और उसी के आधार पर किसी भी कदम को आगे बढ़ाएं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अफवाहों और झूठी खबरों के कारण समाज में अस्थिरता पैदा हो सकती है।

    उन्होंने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि जैसा कि देश ने पहले भी कठिन परिस्थितियों में अपनी 140 करोड़ जनता की सामर्थ्य से संकटों का सामना किया है, वैसे ही इस बार भी हम सब मिलकर इस कठिनाई से बाहर निकलेंगे। प्रधानमंत्री ने मार्च महीने की वैश्विक घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि पूरी दुनिया कोविड के कारण लंबी समस्याओं से गुजर रही थी और सभी को उम्मीद थी कि महामारी के बाद दुनिया नई प्रगति की ओर बढ़ेगी। लेकिन दुर्भाग्य से अलग-अलग क्षेत्रों में युद्ध और संघर्ष की परिस्थितियां लगातार बनी रहीं, जिससे वैश्विक स्थिरता प्रभावित हुई।

    प्रधानमंत्री मोदी ने विशेष रूप से खाड़ी देशों का आभार व्यक्त किया, जहां भारतीय नागरिक बड़ी संख्या में कार्यरत हैं। उन्होंने बताया कि पड़ोसी देशों में वर्तमान में भीषण युद्ध चल रहा है, और हमारे लाखों परिवारों के सदस्य वहां रहकर रोज़मर्रा की चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। खाड़ी देशों ने भारतीय नागरिकों को हर प्रकार की मदद मुहैया कराई है और उनके प्रयासों के लिए प्रधानमंत्री मोदी ने उन्हें धन्यवाद दिया।

    प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि हमें इस समय संयम और धैर्य के साथ काम करने की आवश्यकता है। उन्होंने देशवासियों से यह अपील की कि वे किसी भी अफवाह या सोशल मीडिया की झूठी खबर पर विश्वास न करें और हमेशा सत्यापित जानकारी ही स्वीकार करें। उनका संदेश स्पष्ट था कि संकट चाहे जितना बड़ा क्यों न हो, जब देशवासियों का सामूहिक सामर्थ्य और एकता सामने आती है तो हर मुश्किल परिस्थिति का सामना किया जा सकता है।

    प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संदेश में आशा और विश्वास के भाव व्यक्त किए और कहा कि भारत की जनता हर चुनौती का सामना करने में सक्षम है। उन्होंने नागरिकों से यह भी आग्रह किया कि वे अपने पड़ोसियों, परिवार और समाज के लोगों को भी सतर्क रहने और अफवाहों से बचने की सीख दें। उनका यह संदेश न केवल सतर्कता का था बल्कि यह लोगों में एकजुटता और देशभक्ति की भावना को भी प्रोत्साहित करता है।

  • अगले हफ्ते कैसी रहेगी शेयर बाजार की चाल? ऑटो सेल्स, GST और कच्चा तेल तय करेंगे दिशा

    अगले हफ्ते कैसी रहेगी शेयर बाजार की चाल? ऑटो सेल्स, GST और कच्चा तेल तय करेंगे दिशा


    नई दिल्ली भारतीय शेयर बाजार के लिए आने वाला हफ्ता बेहद अहम रहने वाला है। नए वित्त वर्ष 2026-27 की शुरुआत के साथ कई ऐसे बड़े फैक्टर सामने आएंगे, जो बाजार की दिशा तय करेंगे। कंपनियों की नजर दूसरी कंपनियों पर ऑटो सेल्स डेटा, GST कलेक्शन, कच्चे तेल की कीमतें और वैश्विक तनाव पर टिकी रहेगी।

    1 अप्रैल के आंकड़े दिखाएंगे अर्थव्यवस्था की सेहत
    1 अप्रैल को ऑटो कंपनियां अपनी बिक्री के आंकड़े जारी करेंगी, वहीं सरकार गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) कलेक्शन डेटा पेश करेगी। ये आंकड़े देश में मांग (डिमांड) की स्थिति का साफ संकेत देंगे। अगर आंकड़े मजबूत रहे, तो बाजार में पॉजिटिव माहौल बन सकता है।

    कच्चे तेल की कीमतें बढ़ना बना चिंता का कारण
    वैश्विक स्तर पर तनाव के चलते कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल देखने को मिला है। ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत करीब 105 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच चुकी है। भारत अपनी जरूरत का लगभग 80% तेल आयात करता है, इसलिए कीमतों में बढ़ोतरी से महंगाई और बाजार दोनों पर दबाव बढ़ सकता है।

    मध्य पूर्व तनाव से बढ़ते अनिश्चितता
    यूनाइटेड स्टेट्स, इज़राइल और ईरान के बीच जारी तनाव और संघर्ष का असर भी बाजार पर साफ दिख रहा है। इस जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता के चलते निवेशक सतर्क रुख अपना रहे हैं।

    FII का रुख बना रहेगा निवेशक
    विदेशी निवेशक (FII) पिछले कई हफ्तों से लगातार बिकवाली कर रहे हैं। अगर यह ट्रेंड जारी रहता है, तो बाजार पर दबाव बना रह सकता है। वहीं, अगर FII खरीदारी शुरू करते हैं, तो बाजार में तेजी से देखने को मिल सकती है।

    पिछले हफ्ते बाजार में रही गिरावट
    23 से 27 मार्च के बीच बाजार में कमजोरी देखी गई:

    निफ्टी 50 करीब 1.28% गिरकर 22,819 पर बंद हुआ
    BSE सेंसेक्स 1.27% गिरकर 73,583 पर पहुंच गया

    मिडकैप और स्मॉलकैप रिकवरी में भी गिरावट दर्ज की गई, जिससे बाजार का सेंटिमेंट कमजोर रहा।

    किन सेक्टर्स पर रहा दबाव, कौन चमका?
    पिछले हफ़्ते:

    डिफेंस, PSU बैंक, रियल्टी और मेटल सेक्टर में बड़ी गिरावट
    IT, हेल्थकेयर और फार्मा सेक्टर में तेज़ी से गिरावट

    इससे साफ़ है कि इन्वेस्टर डिफेंसिव सेक्टर की ओर झुक रहे हैं।

    इन्वेस्टर के लिए क्या है स्ट्रैटेजी?
    आने वाला हफ़्ता डेटा और ग्लोबल लेवल पर आधारित रहेगा। ऐसे में:

    जल्दबाजी में निवेश से बचें
    बड़े इवेंट्स पर नज़र रखें
    सेक्टर-बेस्ड स्ट्रैटेजी अपनाएं

  • पीएम मोदी ने मन की बात में जल संरक्षण का संकल्प दोहराने की अपील की, त्रिपुरा-तेलंगाना-छत्तीसगढ़ के गांवों को सराहा

    पीएम मोदी ने मन की बात में जल संरक्षण का संकल्प दोहराने की अपील की, त्रिपुरा-तेलंगाना-छत्तीसगढ़ के गांवों को सराहा

    नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ की ताज़ा कड़ी में देशवासियों से जल संरक्षण के अपने संकल्प को दोहराने की अपील की। उन्होंने कहा कि पिछले 11 वर्षों में ‘जल संचय अभियान’ ने लोगों में जागरूकता पैदा की है और अब गांव-गांव में सामुदायिक स्तर पर जल संरक्षण के प्रयास शुरू हो गए हैं। पीएम मोदी ने विशेष रूप से बताया कि अमृत सरोवर अभियान के तहत देशभर में लगभग 70 हजार सरोवर बनाए गए हैं और बारिश से पहले उनकी साफ-सफाई भी हो रही है।

    प्रधानमंत्री मोदी ने त्रिपुरा, तेलंगाना और छत्तीसगढ़ के गांवों में हुए प्रेरक प्रयासों का जिक्र करते हुए बताया कि कैसे छोटे प्रयास बड़े बदलाव की ओर ले जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि त्रिपुरा की जंपुई पहाड़ियों में वांगमुन गांव 3000 फीट की ऊंचाई पर बसा है और वहां पहले पानी की कमी गंभीर समस्या थी। गर्मियों में गांव के लोग पानी के लिए लंबी दूरी तय करते थे। लेकिन गांववासियों ने मिलकर बारिश का पानी सहेजने का संकल्प लिया और अब लगभग हर घर में ‘रूफटॉप रेनवाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम’ स्थापित है। यह गांव जल संरक्षण की प्रेरक मिसाल बन गया है।

    छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले में भी किसानों ने छोटे-छोटे रिचार्ज तालाब और सोखता गड्ढे बनाकर बारिश के पानी को खेतों में रोकने और धीरे-धीरे जमीन में जाने का असर सुनिश्चित किया। प्रधानमंत्री ने बताया कि अब 1200 से अधिक किसान इस मॉडल को अपनाकर अपने क्षेत्र में भूजल स्तर सुधारने में सफल रहे हैं। इसी तरह तेलंगाना के मंचेरियाल जिले के मुधिगुंटा गांव के लोगों ने मिलकर अपने घरों में सोख गड्ढे बनाए और जल संरक्षण का एक जन-आंदोलन खड़ा किया। इससे गांव का भूजल स्तर सुधरा है और प्रदूषित पानी से होने वाली बीमारियों में भी कमी आई है।

    पीएम मोदी ने कहा कि जल संकट से निपटना सिर्फ सरकार की जिम्मेदारी नहीं बल्कि सामूहिक प्रयास की जरूरत है। उन्होंने जोर देकर कहा कि हमें जल संरक्षण के प्रति अपनी जिम्मेदारी को गंभीरता से लेना होगा और गांव-गांव में इस दिशा में किए गए छोटे प्रयासों को पूरे देश में प्रेरणा के रूप में देखना चाहिए। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अपने घरों और आसपास के इलाकों में जल संचयन के उपाय अपनाएं और जल को बचाने के लिए अपनी आदतों में बदलाव लाएं।

    प्रधानमंत्री ने यह भी बताया कि पिछले 11 साल में जल संचय अभियान और अमृत सरोवर जैसी पहलें देशभर में व्यापक रूप से फैल चुकी हैं। अब हर क्षेत्र में जल संरक्षण की नई मिसालें बन रही हैं और ये अनुभव अन्य गांवों के लिए प्रेरणा बन रहे हैं। पीएम मोदी ने देशवासियों से कहा कि जल हमारी जीवनधारा है और इसे बचाना हर नागरिक की जिम्मेदारी है। उन्होंने यह सुनिश्चित करने की बात कही कि जल संरक्षण के प्रयास केवल योजनाओं तक सीमित न रहें बल्कि रोजमर्रा की जीवनशैली में भी इसका पालन किया जाए।

  • पीएम मोदी ने 'मन की बात' में सराहा मछुआरों का महत्व, बंदरगाह और नवाचार से बढ़े आत्मनिर्भर प्रयास

    पीएम मोदी ने 'मन की बात' में सराहा मछुआरों का महत्व, बंदरगाह और नवाचार से बढ़े आत्मनिर्भर प्रयास


    नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ की 132वीं कड़ी में देश के मछुआरों के योगदान को सराहा और उन्हें केवल समुद्र के योद्धा नहीं बल्कि आत्मनिर्भर भारत की मजबूत नींव बताया। पीएम मोदी ने कहा कि हमारे मछुआरे भाई-बहन हर दिन सुबह होने से पहले समुद्र की लहरों से जूझते हैं और अपने परिवार के साथ-साथ देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती देने में जुट जाते हैं। उन्होंने बताया कि आज उनके जीवन को आसान बनाने के लिए कई प्रयास किए जा रहे हैं। बंदरगाहों का विकास, मछुआरों के लिए बीमा और तकनीक के उपयोग से उनकी मेहनत का फल अब अधिक सुरक्षित और बेहतर ढंग से मिल रहा है।

    प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि समुद्र में मछुआरों की गतिविधियों पर मौसम का बड़ा प्रभाव पड़ता है। इसे ध्यान में रखते हुए तकनीक का इस्तेमाल करके उन्हें पूरी मदद दी जा रही है। इससे मत्स्य पालन क्षेत्र में न केवल समृद्धि आई है बल्कि नवाचार के नए द्वार भी खुले हैं। समुद्री शैवाल और मछली पालन के क्षेत्र में नए तरीके अपनाकर मछुआरे आत्मनिर्भर बन रहे हैं।

    पीएम मोदी ने ओडिशा की सुजाता भूयान की कहानी साझा की। सुजाता जी एक गृहणी थीं लेकिन उन्होंने कुछ नया करके अपने परिवार की मदद करना चाहा। उन्होंने हीराकुंड जलाशय में मछली पालन शुरू किया। शुरुआती दिनों में मौसम, मछलियों का खाना और घर की जिम्मेदारियों के संतुलन जैसी कई चुनौतियां थीं, लेकिन उनका हौसला अडिग था। केवल दो-तीन वर्षों में उनका प्रयास फलता-फूलता उद्योग बन गया। उनकी सफलता अब समुदाय की महिलाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी है।

    लक्षद्वीप के मिनीकॉय की हाव्वा गुलजार ने भी मछली उद्योग में अपनी अद्भुत संकल्प-शक्ति दिखाई। वह पहले एक फिश प्रोसेसिंग यूनिट चलाती थीं, लेकिन उन्होंने बेहतर प्रबंधन और बिक्री के लिए कोल्ड स्टोरेज यूनिट लगाने का निर्णय लिया। आज इसी योजना से उनका कारोबार और मजबूत हुआ और वे बेहतर प्लानिंग के साथ मछली उद्योग चला पा रही हैं।

    पीएम मोदी ने बेलगावी के शिवलिंग सतप्पा हुद्दार के प्रयास का भी उल्लेख किया। उन्होंने पारंपरिक खेती से अलग तालाब-खेत का निर्माण किया और प्रशिक्षण प्राप्त कर मछलियों की बिक्री से अच्छा लाभ कमाया। वहीं समुद्री शैवाल की खेती करने वाले कई लोग इस क्षेत्र में अच्छा व्यवसाय कर रहे हैं और इससे लाभ कमा रहे हैं।

    प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि देश में इस तरह के कई प्रेरक प्रयास हो रहे हैं। मछुआरों के इन प्रयासों से न केवल उनके जीवन में बदलाव आया है बल्कि देश की अर्थव्यवस्था भी मजबूत हुई है। उन्होंने मत्स्य पालन क्षेत्र में कार्यरत सभी लोगों की सराहना की और कहा कि उनका योगदान आत्मनिर्भर भारत की नींव को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा रहा है।