Author: bharati

  • तेल कंपनी में नौकरी का मौका, IOCL ने टेक्नीशियन, ग्रेजुएट और ट्रेड अप्रेंटिस के 433 पदों पर निकाली भर्ती

    तेल कंपनी में नौकरी का मौका, IOCL ने टेक्नीशियन, ग्रेजुएट और ट्रेड अप्रेंटिस के 433 पदों पर निकाली भर्ती

    नई दिल्ली । इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड में अप्रेंटिस के तौर पर काम करने की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए महत्वपूर्ण अवसर सामने आया है। कंपनी ने टेक्नीशियन, ग्रेजुएट और ट्रेड अप्रेंटिस के कुल 433 पदों पर भर्ती के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी है। इन पदों के लिए योग्य उम्मीदवार 7 अगस्त 2026 से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन करने की अंतिम तारीख 6 सितंबर 2026 निर्धारित की गई है। इच्छुक अभ्यर्थियों को अंतिम समय का इंतजार किए बिना निर्धारित प्रक्रिया के तहत अपना रजिस्ट्रेशन पूरा करने की सलाह दी गई है।

    आईओसीएल की ओर से जारी भर्ती में दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, चंडीगढ़, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में स्थित केंद्रों के लिए रिक्तियां शामिल हैं। कुल 433 पदों में सबसे अधिक 121 पद उत्तर प्रदेश के लिए निर्धारित किए गए हैं। इसके बाद राजस्थान में 76, पंजाब में 57, दिल्ली में 50, हरियाणा में 37, चंडीगढ़ में 30, हिमाचल प्रदेश में 22, जम्मू-कश्मीर में 20 और उत्तराखंड में भी 20 पद शामिल हैं। अलग-अलग राज्यों में पदों का वितरण उम्मीदवारों के लिए अपने क्षेत्र के अनुसार आवेदन का अवसर उपलब्ध कराता है।

    इन रिक्तियों में टेक्नीशियन अप्रेंटिस के लिए मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल, इंस्ट्रूमेंटेशन, सिविल, इलेक्ट्रिकल एंड इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे विषय शामिल हैं। ट्रेड अप्रेंटिस के तहत फिटर, इलेक्ट्रीशियन, इलेक्ट्रॉनिक्स मैकेनिक, इंस्ट्रूमेंट मैकेनिक और मशीनिस्ट जैसे ट्रेड में अवसर दिए गए हैं। इसके अलावा ग्रेजुएट अप्रेंटिस और डेटा एंट्री ऑपरेटर के पद भी भर्ती में शामिल हैं। इस तरह अलग-अलग शैक्षणिक और तकनीकी योग्यता रखने वाले युवाओं के लिए आवेदन का विकल्प उपलब्ध है।

    ट्रेड अप्रेंटिस पदों के लिए उम्मीदवार के पास मैट्रिक के साथ संबंधित ट्रेड में नियमित रूप से दो वर्ष का आईटीआई होना जरूरी है। टेक्नीशियन अप्रेंटिस के लिए संबंधित इंजीनियरिंग विषय में तीन वर्ष का नियमित फुल टाइम डिप्लोमा और न्यूनतम 50 प्रतिशत अंक निर्धारित किए गए हैं। ग्रेजुएट अप्रेंटिस पदों के लिए बीबीए, बीए, बीकॉम, बीएससी या किसी अन्य विषय में नियमित फुल टाइम स्नातक डिग्री के साथ कम से कम 50 प्रतिशत अंक आवश्यक हैं। डेटा एंट्री ऑपरेटर पद के लिए उम्मीदवार का 12वीं या इंटरमीडिएट पास होना जरूरी है।

    आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों की न्यूनतम आयु 18 वर्ष और अधिकतम आयु 24 वर्ष निर्धारित है। आयु की गणना 31 अगस्त 2026 के आधार पर की जाएगी। आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को सरकारी नियमों के अनुसार अधिकतम आयु सीमा में छूट का लाभ मिलेगा। चयन प्रक्रिया में आवेदन की जांच, मेरिट सूची, दस्तावेज सत्यापन और मेडिकल फिटनेस टेस्ट शामिल होंगे। चयनित उम्मीदवारों को अप्रेंटिस प्रशिक्षण के दौरान लागू नियमों के अनुसार स्टाइपेंड दिया जाएगा।

    आवेदन प्रक्रिया 7 अगस्त को सुबह 10 बजे से शुरू हो चुकी है और 6 सितंबर को शाम 5 बजे तक चलेगी। उम्मीदवारों को संबंधित पद के लिए निर्धारित एनएटीएस या एनएपीएस पोर्टल के माध्यम से रजिस्ट्रेशन और आवेदन प्रक्रिया पूरी करनी होगी। अप्रेंटिस प्रशिक्षण के दौरान निर्धारित स्टाइपेंड के अलावा इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड की ओर से अन्य खर्चों के लिए 2,500 रुपये प्रतिमाह दिए जाने का भी प्रावधान बताया गया है। ऐसे में आईटीआई, डिप्लोमा और ग्रेजुएशन कर चुके युवाओं के लिए यह भर्ती व्यावहारिक प्रशिक्षण और करियर की दिशा में महत्वपूर्ण अवसर साबित हो सकती है।

  • जयंत चौधरी के करीबी रामाशीष राय ने छोड़ा आरएलडी प्रदेश अध्यक्ष पद, राजनीति में मूल्यों की कमी पर उठाए सवाल

    जयंत चौधरी के करीबी रामाशीष राय ने छोड़ा आरएलडी प्रदेश अध्यक्ष पद, राजनीति में मूल्यों की कमी पर उठाए सवाल

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले राष्ट्रीय लोकदल यानी आरएलडी को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष रामाशीष राय ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपना इस्तीफा पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी को भेजा है। राय के इस्तीफे के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में आरएलडी के संगठन और आगामी चुनावी रणनीति को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है।

    रामाशीष राय को जयंत चौधरी के करीबी नेताओं में गिना जाता रहा है। प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर उन्होंने संगठन को मजबूत करने के लिए कई जिलों का दौरा किया और कार्यकर्ताओं के साथ संवाद बढ़ाने की कोशिश की। इस्तीफा देते हुए उन्होंने पार्टी के प्रति आभार जताया, लेकिन अपने पत्र में देश की राजनीति और सामाजिक परिस्थितियों को लेकर कई गंभीर चिंताएं भी जाहिर कीं।

    राय ने कहा कि उन्होंने प्रदेश अध्यक्ष के रूप में अपनी जिम्मेदारियों को पूरी प्रतिबद्धता के साथ निभाने का प्रयास किया। उन्होंने संगठन के विस्तार और कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने के लिए लगातार काम किया। हालांकि, अब उन्होंने अपने विचारों और राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए पद छोड़ने का निर्णय लिया है। उनके इस फैसले को 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले आरएलडी के लिए महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।

    अपने इस्तीफे के दौरान रामाशीष राय ने राजनीति में मूल्यों के कमजोर होने पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि राजनीतिक व्यवस्था में विचारधारा और सिद्धांतों की जगह धीरे-धीरे दूसरी चीजों का प्रभाव बढ़ रहा है। उनके मुताबिक राजनीति में धन और परिवार का प्रभाव बढ़ना लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चुनौती बन सकता है।

    राय ने सामाजिक परिस्थितियों को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि जाति और समाज के नाम पर लोगों के बीच दूरी बढ़ रही है। उनका मानना है कि सामाजिक एकता और लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने के लिए राजनीतिक दलों को गंभीर प्रयास करने की जरूरत है। उनके बयान से साफ है कि इस्तीफे के पीछे केवल संगठनात्मक कारण ही नहीं, बल्कि राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों को लेकर उनकी अपनी चिंताएं भी हैं।

    उन्होंने किसानों और युवाओं से जुड़े मुद्दों का भी जिक्र किया। राय के अनुसार किसानों को उनकी फसलों का उचित मूल्य मिलने की समस्या बनी हुई है, जबकि बड़ी संख्या में युवा रोजगार को लेकर परेशान हैं। उन्होंने इन मुद्दों को देश और समाज के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए लोकतंत्र को मजबूत करने और लोगों के बीच एकता बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया।

    उत्तर प्रदेश में 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं और सभी राजनीतिक दल अभी से अपने संगठन को मजबूत करने की तैयारी में जुटे हैं। ऐसे समय में किसी प्रमुख क्षेत्रीय दल के प्रदेश अध्यक्ष का इस्तीफा संगठन के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। आरएलडी पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय रही है और किसान तथा ग्रामीण मुद्दे पार्टी की राजनीति का अहम हिस्सा रहे हैं।

    रामाशीष राय के इस्तीफे के बाद अब पार्टी के सामने प्रदेश संगठन के नेतृत्व को लेकर अगला फैसला करने की चुनौती होगी। यह भी देखना महत्वपूर्ण होगा कि उनके स्थान पर किस नेता को जिम्मेदारी दी जाती है और आगामी चुनाव को ध्यान में रखते हुए आरएलडी अपनी संगठनात्मक रणनीति में क्या बदलाव करती है।

    जयंत चौधरी के नेतृत्व वाली आरएलडी के लिए यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर समीकरण तेजी से आकार ले रहे हैं। राय के इस्तीफे के बाद पार्टी के भीतर और प्रदेश की राजनीतिक गतिविधियों पर नजर बनी रहेगी। फिलहाल उनके फैसले ने चुनाव से पहले आरएलडी के संगठन और नेतृत्व को लेकर चर्चा जरूर तेज कर दी है।

  • दिल्ली में शेख हसीना की प्रेस कॉन्फ्रेंस पर भड़का बांग्लादेश, भारत के सामने जताई कड़ी नाराजगी और प्रत्यर्पण की मांग दोहराई

    दिल्ली में शेख हसीना की प्रेस कॉन्फ्रेंस पर भड़का बांग्लादेश, भारत के सामने जताई कड़ी नाराजगी और प्रत्यर्पण की मांग दोहराई


    नई दिल्ली ।
    बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की दिल्ली में हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस को लेकर भारत और बांग्लादेश के बीच राजनीतिक तनाव एक बार फिर चर्चा में आ गया है। बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने हसीना को भारत में मीडिया के सामने खुलकर अपनी बात रखने का अवसर दिए जाने पर कड़ी नाराजगी जताई है। ढाका ने आरोप लगाया कि हसीना और उनके सहयोगियों ने भारत की जमीन से बांग्लादेश और उसके लोगों के खिलाफ जहरीली बयानबाजी की। बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने कहा कि इस कार्यक्रम को लेकर उसने पहले ही भारत सरकार के सामने अपनी चिंता रखी थी, इसके बावजूद प्रेस कॉन्फ्रेंस होने दी गई।

    बांग्लादेश सरकार ने हसीना के बयानों को इतिहास की धारा को पलटने की नाकाम कोशिश करार दिया। ढाका का कहना है कि जिस समय बांग्लादेश में जुलाई क्रांति की दूसरी बरसी मनाई जा रही थी, उसी समय भारत से हसीना का मीडिया को संबोधित करना वहां के लोगों की भावनाओं को आहत करने वाला कदम है। बांग्लादेशी विदेश मंत्रालय ने इसे देश की संप्रभुता और जुलाई आंदोलन के दौरान जान गंवाने वाले लोगों के प्रति अपमान बताया। सरकार ने संयुक्त राष्ट्र की ओर से जुलाई-अगस्त 2024 की हिंसा और नागरिकों की मौत से जुड़े तथ्यों का भी हवाला दिया।

    ढाका ने हसीना और उनके सहयोगियों के बयानों को खारिज करते हुए कहा कि बांग्लादेश के लोग देश को दोबारा उस दौर में नहीं ले जाना चाहते, जिसे वह फासीवाद का अंधेरा दौर बताता है। बांग्लादेश सरकार ने यह भी कहा कि देश किसी दूसरे राष्ट्र का क्लाइंट स्टेट नहीं बनेगा। इस बयान से स्पष्ट है कि हसीना के राजनीतिक भविष्य और उनके भारत में रहने को लेकर ढाका का रुख अभी भी बेहद सख्त है।

    बांग्लादेश ने भारत के साथ संबंधों को लेकर भी अपनी स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश की है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि वह भारत के साथ संप्रभु समानता, आपसी सम्मान और एक-दूसरे के आंतरिक मामलों में गैर-हस्तक्षेप के आधार पर रचनात्मक संबंध चाहता है। हालांकि, इसी के साथ ढाका ने हसीना के प्रत्यर्पण का मुद्दा फिर उठा दिया। बांग्लादेश ने कहा कि वर्ष 2013 में दोनों देशों के बीच हुए प्रत्यर्पण समझौते के तहत वह शेख हसीना को वापस भेजने की मांग कई बार कर चुका है, लेकिन भारत की ओर से उसकी मांग पर अभी तक स्पष्ट जवाब नहीं मिला है।

    बांग्लादेश सरकार के मुताबिक, हसीना को भारत में खुले तौर पर मीडिया से बातचीत का अवसर मिलना वहां के लोगों के लिए बेहद पीड़ादायक है। ढाका ने आशंका जताई कि इस तरह की घटनाएं भारत-बांग्लादेश संबंधों को सामान्य बनाने की कोशिशों को नुकसान पहुंचा सकती हैं। दूसरी ओर, भारत में मौजूद हसीना की सार्वजनिक गतिविधियों को लेकर बांग्लादेश की आपत्ति इस बात का संकेत है कि दोनों देशों के बीच उनके प्रत्यर्पण का मुद्दा अभी भी संवेदनशील बना हुआ है।

    शेख हसीना को लेकर बांग्लादेश का रुख आने वाले समय में भारत-बांग्लादेश संबंधों के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। ढाका एक तरफ भारत के साथ बेहतर और सम्मानजनक संबंधों की बात कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ हसीना के प्रत्यर्पण और दिल्ली में उनकी सार्वजनिक मौजूदगी को लेकर लगातार दबाव बना रहा है। ऐसे में दिल्ली में हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस ने दोनों देशों के बीच पहले से मौजूद राजनीतिक मतभेदों को एक बार फिर सामने ला दिया है।

  • पंजाब चुनाव 2027 से पहले क्या फिर साथ आएंगे बीजेपी और अकाली दल, सुखबीर बादल की पीएम मोदी से मुलाकात अहम

    पंजाब चुनाव 2027 से पहले क्या फिर साथ आएंगे बीजेपी और अकाली दल, सुखबीर बादल की पीएम मोदी से मुलाकात अहम

    नई दिल्ली । पंजाब में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले सियासी गतिविधियां तेज हो गई हैं। शिरोमणि अकाली दल के प्रमुख सुखबीर सिंह बादल ने शुक्रवार को दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। संसद भवन में हुई इस बैठक के बाद पंजाब की राजनीति में बीजेपी और अकाली दल के बीच दोबारा गठबंधन की संभावनाओं को लेकर चर्चा तेज हो गई है। हालांकि, दोनों दलों ने अभी तक किसी नए गठबंधन की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।

    सुखबीर बादल ने मुलाकात के बाद बताया कि प्रधानमंत्री के साथ पंजाब की कानून व्यवस्था और राज्य की सरकारी योजनाओं में कथित भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों पर बातचीत हुई। बैठक का विस्तृत एजेंडा सार्वजनिक नहीं किया गया है। ऐसे में इस मुलाकात को आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों और राज्य में बन रहे नए राजनीतिक समीकरणों के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    बीजेपी और अकाली दल का पंजाब में करीब ढाई दशक पुराना चुनावी गठबंधन रहा है। दोनों दल लंबे समय तक साथ चुनाव लड़ते रहे और अलग-अलग क्षेत्रों में अपनी राजनीतिक ताकत के आधार पर एक-दूसरे को लाभ पहुंचाते रहे। अकाली दल का प्रभाव मुख्य रूप से ग्रामीण और किसान वर्ग में रहा, जबकि बीजेपी ने शहरी क्षेत्रों और हिंदू मतदाताओं के बीच अपनी पकड़ मजबूत की।

    हालांकि, वर्ष 2020 में कृषि कानूनों के खिलाफ शुरू हुए किसान आंदोलन ने दोनों दलों के रिश्तों को बदल दिया। पंजाब में किसानों के व्यापक विरोध के बीच शिरोमणि अकाली दल ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन से अलग होने का फैसला किया। इसके साथ ही बीजेपी और अकाली दल की करीब 25 वर्ष पुरानी राजनीतिक साझेदारी टूट गई।

    बाद में केंद्र सरकार ने तीनों कृषि कानून वापस ले लिए, लेकिन दोनों दलों के बीच पुराना गठबंधन तुरंत बहाल नहीं हुआ। 2022 के पंजाब विधानसभा चुनाव और 2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी और अकाली दल ने अलग-अलग चुनाव लड़ा। दोनों दलों को इसके बाद राज्य में अपने राजनीतिक आधार को लेकर नए सिरे से रणनीति बनाने की जरूरत महसूस हुई।

    अकाली दल फिलहाल अपने पारंपरिक जनाधार को वापस मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। बीजेपी भी पंजाब में अपने संगठन को विस्तार देने और स्वतंत्र राजनीतिक आधार तैयार करने में जुटी है। इसके बावजूद राज्य की जटिल सामाजिक और क्षेत्रीय राजनीति में दोनों दलों के पुराने तालमेल को पूरी तरह नजरअंदाज करना आसान नहीं है।

    पंजाब विधानसभा में कुल 117 सीटें हैं। पुराने गठबंधन में बीजेपी सीमित सीटों पर चुनाव लड़ती थी, जबकि अकाली दल अधिक सीटों पर मैदान में उतरता था। वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में गठबंधन के तहत बीजेपी ने 23 सीटों पर चुनाव लड़ा और तीन सीटें जीती थीं। 2022 में दोनों दल अलग-अलग मैदान में उतरे और बीजेपी को भी अपेक्षित सफलता नहीं मिली।

    दोनों दलों के लिए गठबंधन की अपनी-अपनी राजनीतिक जरूरतें भी हैं। अकाली दल को ग्रामीण और पारंपरिक वोट आधार को मजबूत करने के साथ व्यापक राजनीतिक विकल्प खड़ा करना है। वहीं बीजेपी के सामने पंजाब में संगठनात्मक विस्तार के बावजूद अकेले दम पर सत्ता की दौड़ में मजबूत स्थिति बनाने की चुनौती है।

    पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार के खिलाफ बीजेपी, कांग्रेस और अकाली दल अपने-अपने स्तर पर राजनीतिक अभियान चला रहे हैं। ऐसे में यदि बीजेपी और अकाली दल के बीच किसी तरह का समझौता होता है तो इसका सीधा असर चुनावी मुकाबले और सीटों के समीकरण पर पड़ सकता है।

    फिलहाल सुखबीर बादल की प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात को गठबंधन की औपचारिक शुरुआत नहीं कहा जा सकता। दोनों पक्षों की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। लेकिन चुनावी तैयारियों के बीच हुई इस बैठक ने इतना जरूर संकेत दिया है कि पंजाब में 2027 के चुनाव से पहले पुराने राजनीतिक रिश्तों और नए समीकरणों को लेकर संभावनाएं खुली हुई हैं।

  • भारत-चीन सीमा वार्ता में डिलिमिटेशन, सीमा प्रबंधन और ट्रांस-बॉर्डर सहयोग पर बातचीत, एलएसी पर शांति बनाए रखने पर जोर

    भारत-चीन सीमा वार्ता में डिलिमिटेशन, सीमा प्रबंधन और ट्रांस-बॉर्डर सहयोग पर बातचीत, एलएसी पर शांति बनाए रखने पर जोर

    नई दिल्ली । भारत और चीन ने सीमा मामलों पर परामर्श और समन्वय के लिए कार्य तंत्र यानी डब्ल्यूएमसीसी की 36वीं बैठक में सीमा से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की। नई दिल्ली में 6 अगस्त को आयोजित बैठक में दोनों देशों ने सीमा निर्धारण, सीमा प्रबंधन, मौजूदा तंत्र को मजबूत करने और सीमा पार सहयोग से जुड़े विषयों पर विचार साझा किए। वार्ता के दौरान लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल यानी एलएसी पर मौजूदा स्थिति की भी समीक्षा की गई।

    बैठक में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व विदेश मंत्रालय के संयुक्त सचिव सुजीत घोष ने किया, जबकि चीनी प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई चीन के विदेश मंत्रालय के बाउंड्री और ओशनिक अफेयर्स डिपार्टमेंट की महानिदेशक होउ यांकी ने की। दोनों पक्षों के बीच बातचीत को स्पष्ट और व्यावहारिक बताया गया। चर्चा का मुख्य उद्देश्य सीमा क्षेत्रों में स्थिरता बनाए रखने और लंबित मुद्दों के समाधान के लिए संवाद को आगे बढ़ाना रहा।

    भारत और चीन ने इस बात पर जोर दिया कि सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और स्थिरता दोनों देशों के व्यापक द्विपक्षीय संबंधों के विकास के लिए महत्वपूर्ण है। एलएसी पर किसी भी तरह की गलतफहमी या गलत आकलन को रोकने के लिए दोनों पक्षों ने मौजूदा राजनयिक और सैन्य माध्यमों का इस्तेमाल जारी रखने पर सहमति जताई।

    इन माध्यमों में डब्ल्यूएमसीसी के अलावा स्थानीय कमांडर स्तर की बैठकें और पहले से निर्धारित अन्य संवाद तंत्र शामिल हैं। दोनों देशों का मानना है कि नियमित बातचीत के जरिए सीमा पर पैदा होने वाली परिस्थितियों को बेहतर तरीके से संभाला जा सकता है और लंबित मामलों के समाधान की दिशा में आगे बढ़ा जा सकता है।

    बैठक में 24वें विशेष प्रतिनिधि स्तर के दौर की वार्ता के परिणामों के बाद सीमा से जुड़े विषयों पर आगे चर्चा की गई। इसमें सीमा निर्धारण, सीमा प्रबंधन, संस्थागत तंत्र के निर्माण और सीमा पार सहयोग जैसे मुद्दे प्रमुख रहे। दोनों पक्षों ने इन क्षेत्रों में आपसी संवाद और समन्वय बनाए रखने की जरूरत पर सहमति जताई।

    भारत ने सीमा पार नदियों से संबंधित विशेषज्ञ स्तर के तंत्र की अगली बैठक जल्द आयोजित करने की आवश्यकता भी दोहराई। भारतीय पक्ष ने विशेष रूप से चीन की ओर से ऊपरी क्षेत्रों में प्रस्तावित या संचालित परियोजनाओं से जुड़े तकनीकी विवरण साझा करने के महत्व पर जोर दिया। सीमा पार नदियों से जुड़े विषय भारत के लिए रणनीतिक और पर्यावरणीय दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं।

    भारत और चीन के संबंधों में हाल के समय में लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने से जुड़े कुछ कदम भी उठाए गए हैं। इनमें कैलाश मानसरोवर यात्रा की दोबारा शुरुआत और दोनों देशों के बीच नागरिक विमानन संपर्क बहाल करना शामिल है। इन कदमों को दोनों देशों के बीच जनस्तरीय संपर्क सुधारने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    विदेश मंत्रालय ने भी भारत-चीन संबंधों में सकारात्मक प्रगति की उम्मीद जताई है। मंत्रालय के अनुसार दोनों देशों के बीच बातचीत जारी है और संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए लोगों के बीच संपर्क बेहतर करने वाले कदम उठाए जा रहे हैं। भारत का मानना है कि इस तरह के प्रयासों से द्विपक्षीय संबंधों में सकारात्मक माहौल मजबूत हो सकता है।

    इस बीच चीन के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भारतीयों और भारतीय संस्कृति के खिलाफ आपत्तिजनक सामग्री बढ़ने को लेकर भी भारतीय समुदाय की चिंताएं सामने आई हैं। बीजिंग स्थित भारतीय दूतावास के एक खुले संवाद कार्यक्रम में समुदाय के सदस्यों ने यह मुद्दा उठाया था। सीमा संबंधी बातचीत के साथ लोगों के बीच संपर्क और आपसी विश्वास मजबूत करना भी भारत-चीन संबंधों के लिए महत्वपूर्ण बना हुआ है।

  • लखनऊ में कार के अंदर मिला फाइनेंस कर्मी का शव, दुर्गंध आने पर लोगों को हुई जानकारी

    लखनऊ में कार के अंदर मिला फाइनेंस कर्मी का शव, दुर्गंध आने पर लोगों को हुई जानकारी


    लखनऊ।
    आशियाना थाना क्षेत्र में शुक्रवार को सड़क किनारे खड़ी एक कार से युवक का शव मिलने से हड़कंप मच गया। कार से दुर्गंध आने पर आसपास के लोगों को इसकी जानकारी हुई, जिसके बाद पुलिस को सूचना दी गई। मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।

    मृतक की पहचान रायबरेली जिले के बरहा, थाना कोतवाली निवासी ज्ञानेंद्र सिंह (36) के रूप में हुई है। वह पिछले कुछ दिनों से लखनऊ के आशियाना स्थित बंगला बाजार इलाके में पत्नी प्रियंका और साढ़े तीन साल की बेटी के साथ रह रहे थे।

    निजी कंपनी में करते थे लोन फाइनेंस का काम
    परिजनों के मुताबिक, ज्ञानेंद्र सिंह निजी क्षेत्र में लोन फाइनेंस का काम करते थे। शुक्रवार को उनका शव सड़क किनारे खड़ी कार के अंदर मिला। कार से दुर्गंध आने के बाद लोगों ने पुलिस को सूचना दी। जानकारी मिलते ही पुलिस टीम के साथ फोरेंसिक टीम भी मौके पर पहुंची और घटनास्थल से जरूरी साक्ष्य जुटाए। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।

    मौत की वजह जानने के लिए पोस्टमार्टम
    पुलिस के अनुसार, फिलहाल मौत के कारणों की स्पष्ट जानकारी नहीं मिल सकी है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। प्रारंभिक जांच में पुलिस सभी संभावित पहलुओं को ध्यान में रखकर मामले की पड़ताल कर रही है। पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और घटनास्थल से मिले साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

  • महुआ मोइत्रा को सुप्रीम कोर्ट से झटका, वर्चुअल पेशी की मांग खारिज, सांसद होने पर अलग सुविधा देने से कोर्ट का इनकार

    महुआ मोइत्रा को सुप्रीम कोर्ट से झटका, वर्चुअल पेशी की मांग खारिज, सांसद होने पर अलग सुविधा देने से कोर्ट का इनकार

    नई दिल्ली । सुप्रीम कोर्ट ने तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा को सोशल मीडिया पोस्ट से जुड़े आपराधिक मामले में राहत देने से इनकार कर दिया है। अदालत ने पुलिस के सामने वर्चुअल तरीके से पेश होने की उनकी मांग वाली याचिका खारिज कर दी। सुनवाई के दौरान पीठ ने स्पष्ट किया कि केवल सांसद होने के आधार पर किसी आरोपी को जांच एजेंसी के सामने व्यक्तिगत रूप से पेश होने से छूट नहीं दी जा सकती।

    जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की पीठ के सामने महुआ मोइत्रा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने पक्ष रखा। उन्होंने अदालत को बताया कि एक फेसबुक पोस्ट के संबंध में महुआ के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है और पुलिस ने उन्हें उनके संसदीय क्षेत्र के संबंधित थाने में जांच अधिकारी के सामने उपस्थित होने को कहा है। उनकी ओर से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेश होने की अनुमति मांगी गई थी।

    महुआ की ओर से अदालत में सुरक्षा संबंधी चिंता भी रखी गई। उनके वकील ने कहा कि पिछली बार जब वह पुलिस के सामने पेश हुई थीं, तब उनके खिलाफ प्रदर्शन और विरोध की स्थिति बनी थी। उनका दावा था कि अंडे फेंके जाने की आशंका के कारण उन्हें व्यक्तिगत रूप से थाने पहुंचने में खतरा महसूस हो रहा है। इसी आधार पर पुलिस के सामने वर्चुअल उपस्थिति की मांग की गई थी।

    इस दलील पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया। अदालत ने सवाल किया कि वर्चुअल पेशी की मांग क्या इसलिए की जा रही है क्योंकि महुआ मोइत्रा संसद सदस्य हैं। पीठ ने यह भी टिप्पणी की कि राजनीति में आने के बाद सार्वजनिक विरोध जैसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ सकता है। सुनवाई के दौरान स्वतंत्रता सेनानियों का उल्लेख करते हुए अदालत ने कहा कि इस तरह की याचिकाएं केवल राजनीतिक पद के आधार पर स्वीकार नहीं की जानी चाहिए।

    सुप्रीम कोर्ट ने यह भी ध्यान दिलाया कि कलकत्ता हाई कोर्ट पहले ही महुआ मोइत्रा को जांच एजेंसी के साथ सहयोग करने का निर्देश दे चुका है। अदालत ने हाई कोर्ट के आदेश के संबंधित हिस्से का पालन करने की बात कही और स्पष्ट किया कि यदि वह जांच अधिकारी के सामने पेश नहीं होती हैं, तो इसके परिणाम उन्हें हाई कोर्ट में भुगतने पड़ सकते हैं।

    आखिरकार सुप्रीम कोर्ट ने महुआ मोइत्रा की याचिका खारिज कर दी। इसका मतलब है कि उन्हें जांच प्रक्रिया में व्यक्तिगत रूप से शामिल होकर पुलिस के निर्देशों का पालन करना होगा। अदालत ने फिलहाल उनके लिए वर्चुअल पेशी की विशेष व्यवस्था को मंजूरी नहीं दी है।

    महुआ मोइत्रा के खिलाफ यह मामला पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद सोशल मीडिया पर किए गए दो वीडियो पोस्ट से जुड़ा है। एक बीजेपी नेता की शिकायत के बाद पुलिस ने उनके खिलाफ मामला दर्ज किया था। यह विवाद उस समय और बढ़ा जब उनके संसदीय क्षेत्र कृष्णानगर में एक अदालत के बाहर उनके खिलाफ प्रदर्शन की स्थिति बनी और प्रदर्शनकारियों के पास अंडे और टमाटर होने की बात सामने आई।

    इस मामले में कलकत्ता हाई कोर्ट ने पिछले महीने महुआ मोइत्रा की एफआईआर रद्द करने की मांग पर उन्हें अंतरिम सुरक्षा दी थी, लेकिन साथ ही जांच में सहयोग करने का निर्देश भी दिया था। हाई कोर्ट के आदेश के मुताबिक उन्हें 14 अगस्त को जांच अधिकारी के सामने पेश होना है। सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश के बाद अब जांच में उनकी व्यक्तिगत पेशी का रास्ता साफ हो गया है।

  • UP में आटे में मिलावट का बड़ा खेल: पत्थर का चूरा मिलाकर बेच रहे सफेद आटा, आगरा की 30 मिलों पर छापे

    UP में आटे में मिलावट का बड़ा खेल: पत्थर का चूरा मिलाकर बेच रहे सफेद आटा, आगरा की 30 मिलों पर छापे

    आगरा। बाजार में बिकने वाले गेहूं के आटे को लेकर चौंकाने वाला मामला सामने आया है। मुनाफे के लिए कुछ मिल संचालकों पर गेहूं के साथ सेलखड़ी यानी मुलायम पत्थर का चूरा पीसकर आटा तैयार करने का आरोप है। फिरोजाबाद में मिलावट पकड़े जाने के बाद आगरा में खाद्य एवं औषधि विभाग ने आटा मिलों के खिलाफ जांच अभियान तेज कर दिया है। पिछले एक सप्ताह में 30 इकाइयों से 35 से अधिक नमूने लिए गए हैं, जिन्हें जांच के लिए भेजा गया है। रिपोर्ट आने के बाद मिलावट की पुष्टि होने पर संबंधित मिल संचालकों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

    फिरोजाबाद की मिल में मिली 30 किलो सेलखड़ी
    मामला उस समय सामने आया जब मंगलवार शाम खाद्य एवं औषधि विभाग की टीम ने फिरोजाबाद के रजावली क्षेत्र के रामनगर गांव स्थित शिवाय ट्रेडिंग कंपनी की आटा मिल पर छापा मारा। टीम को वहां 30 किलो सेलखड़ी मिली। आरोप है कि इसे गेहूं के साथ पीसकर राज रसोई प्रीमियम ब्रांड के आटे की पैकिंग की जा रही थी। जांच में सेलखड़ी की आपूर्ति आगरा से होने की जानकारी सामने आई। खाद्य सुरक्षा विभाग ने शिवाय ट्रेडिंग कंपनी के दो संचालकों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई है। दोनों फिलहाल फरार बताए जा रहे हैं और पुलिस उनकी तलाश कर रही है।

    आगरा में दो दिन से मिलों की जांच
    खाद्य एवं औषधि विभाग की आयुक्त डॉ. रोशन जैकब के निर्देश पर प्रदेशभर की आटा मिलों की जांच शुरू की गई है। अधिकारियों के अनुसार, इससे पहले आटे में चावल के चूरे की मिलावट के मामले सामने आते रहे हैं, लेकिन सेलखड़ी मिलाने का मामला पहली बार सामने आया है।

    आगरा में बुधवार को बसई खुर्द स्थित श्याम भोग एंटरप्राइजेज से श्याम भोग ब्रांड का 1,496 किलो आटा सील किया गया। इसके बाद गुरुवार देर रात तक भी विभाग की कार्रवाई जारी रही। जांच के दौरान कुछ स्थानों पर ब्रांडेड आटे की पैकिंग वाली जगहों पर गंदगी भी मिली।

    30 मिलों से लिए गए 35 से ज्यादा नमूने
    सहायक आयुक्त खाद्य महेंद्र श्रीवास्तव ने बताया कि सेलखड़ी मिलाकर गेहूं के आटे की बिक्री की शिकायत पर मुख्यालय स्तर से जांच कराई जा रही है। आगरा में अब तक 30 आटा मिलों से 35 से अधिक नमूने लिए जा चुके हैं। इनकी जांच रिपोर्ट में यदि मिलावट की पुष्टि होती है तो संबंधित इकाइयों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

    आटे में क्यों मिलाते हैं सेलखड़ी?
    अधिकारियों के अनुसार, मिल संचालक सेलखड़ी के इस्तेमाल को लेकर अलग-अलग कारण बताते हैं। कभी इसे अनाज को कीड़ों से बचाने और कभी प्लास्टिक की बोरियों को चिकना करने के लिए इस्तेमाल करने की बात कही जाती है। हालांकि, मजदूरों से पूछताछ में एक अलग वजह सामने आई। बताया गया कि घटिया या खराब गेहूं से तैयार आटे में हल्का कालापन आ जाता है। उसे सफेद और चमकदार दिखाने के लिए सेलखड़ी मिलाई जाती है।

    ऐसे कर सकते हैं आटे की जांच
    खाद्य सुरक्षा अधिकारी अमित कुमार सिंह के अनुसार, घर पर भी कुछ सामान्य तरीकों से आटे में मिलावट की आशंका की जांच की जा सकती है।

    एक कटोरी आटे में नींबू की कुछ बूंदें डालें। बुलबुले उठने पर मिलावट की आशंका हो सकती है। एक गिलास पानी में आटा डालकर चम्मच से मिलाएं। आटा नीचे बैठने पर मिलावट की आशंका जताई गई है। हथेली पर आटा रखकर रगड़ें। सामान्य आटा खुरदरा महसूस होता है, जबकि असामान्य चिकनाहट मिलावट का संकेत हो सकती है। हालांकि, घरेलू परीक्षण केवल प्रारंभिक संकेत दे सकते हैं। मिलावट की पक्की पुष्टि प्रयोगशाला जांच से ही होगी।

    सेहत के लिए भी नुकसानदेह होने की आशंका
    सीएमओ आगरा डॉ. अरुण श्रीवास्तव के मुताबिक, लंबे समय तक सेलखड़ी शरीर में पहुंचने से पेट संबंधी समस्याएं बढ़ सकती हैं। इससे पेट दर्द, अपच और आंतों में रुकावट का खतरा बढ़ने की बात कही गई है। कैल्शियम या सिलिकेट के बारीक कण शरीर में जमा होने पर गुर्दे में पथरी की समस्या हो सकती है। इसके अलावा दांतों की ऊपरी परत को नुकसान और मसूढ़ों में जख्म होने की आशंका भी बताई गई है। सीने में सेलखड़ी के कण जमा होने से टीबी संक्रमण का खतरा बढ़ने की बात भी सामने आई है।

    शिकायत के लिए नंबर
    खाद्य पदार्थों में मिलावट की शिकायत के लिए टोल फ्री नंबर 18001805533 और कार्यालय नंबर 0562-2970049 पर संपर्क किया जा सकता है। कार्यालय में शिकायत का समय सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक है।

  • वृंदावन पहुंचे पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, आज बांकेबिहारी के करेंगे दर्शन, तीन दिन रहेंगे

    वृंदावन पहुंचे पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, आज बांकेबिहारी के करेंगे दर्शन, तीन दिन रहेंगे


    मथुरा।
    पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद शुक्रवार दोपहर अपने निर्धारित कार्यक्रम के तहत वृंदावन पहुंचे। सड़क मार्ग से वृंदावन पहुंचने के बाद वे होटल विवांता गए, जहां कुछ देर विश्राम किया।

    पूर्व राष्ट्रपति के शुक्रवार शाम विश्व प्रसिद्ध ठाकुर श्री बांके बिहारी मंदिर में दर्शन-पूजन करने का कार्यक्रम है। उनके आगमन को लेकर जिला प्रशासन और पुलिस ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए हैं। मंदिर परिसर के साथ-साथ आसपास के क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए भी विशेष प्रबंध किए गए हैं।

    रामनाथ कोविंद के दर्शन कार्यक्रम को देखते हुए मंदिर प्रशासन ने भी तैयारियां पूरी कर ली हैं। आम श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी न हो और सुरक्षा व्यवस्था बनी रहे, इसके लिए आवश्यक व्यवस्थाएं की गई हैं। बांकेबिहारी मंदिर में दर्शन-पूजन के बाद पूर्व राष्ट्रपति प्रेम मंदिर भी जाएंगे। रामनाथ कोविंद का वृंदावन में तीन दिन प्रवास प्रस्तावित है।

  • NDA सांसदों की बैठक में सोशल मीडिया पर खास जोर, PM मोदी ने युवाओं से कनेक्शन बढ़ाने और डिजिटल सक्रियता की दी सलाह

    NDA सांसदों की बैठक में सोशल मीडिया पर खास जोर, PM मोदी ने युवाओं से कनेक्शन बढ़ाने और डिजिटल सक्रियता की दी सलाह

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ NDA के नए लोकसभा सांसदों की बैठक में इस बार सोशल मीडिया की सक्रियता को खास महत्व दिया गया। बैठक के दौरान सांसदों को उनके पिछले 90 दिनों की सोशल मीडिया गतिविधियों का एक पेज का रिपोर्ट कार्ड सौंपा गया। इसमें अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर सांसदों की सक्रियता, पोस्ट की संख्या, लोगों तक पहुंच और प्रतिक्रियाओं से जुड़े आंकड़े शामिल थे। सांसदों से सोशल मीडिया के जरिए युवाओं के साथ अपना संपर्क और मजबूत करने को कहा गया।

    बैठक में प्रधानमंत्री ने NDA के भीतर पुराने और नए सांसदों के बीच समानता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि गठबंधन में कोई सांसद 20 साल पुराना हो या 20 दिन पुराना, सभी के लिए बराबर सम्मान है। बैठक में हाल के राजनीतिक बदलावों के बाद NDA के साथ आए कुछ सांसद भी शामिल हुए। इनमें टीएमसी से अलग होकर NCPI में शामिल हुए सांसद और शिवसेना यूबीटी से अलग होकर शिवसेना में आए सांसद भी मौजूद रहे।

    सोशल मीडिया रिपोर्ट कार्ड को बैठक की प्रमुख बातों में माना जा रहा है। इसमें सांसदों के पिछले तीन महीनों के डिजिटल प्रदर्शन का आकलन किया गया। रिपोर्ट में एक्स पर सांसद द्वारा की गई पोस्ट की संख्या, उन पोस्ट पर आए इंप्रेशन और कमेंट जैसे आंकड़े दर्ज किए गए। इसी तरह फेसबुक और इंस्टाग्राम पर सांसदों की गतिविधियों और उनकी पहुंच से जुड़े आंकड़े भी रिपोर्ट में शामिल किए गए।

    सांसदों को समझाया गया कि आज के दौर में जनता, खासकर युवाओं तक अपनी बात पहुंचाने के लिए सोशल मीडिया एक महत्वपूर्ण माध्यम बन चुका है। इसलिए केवल संसद और क्षेत्र में सक्रिय रहना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी नियमित और प्रभावी संवाद जरूरी है। सांसदों को अपनी सोशल मीडिया मौजूदगी को अधिक सक्रिय और जनता से जुड़ा बनाने का सुझाव दिया गया।

    90 दिनों के डेटा को आधार बनाकर तैयार किया गया यह रिपोर्ट कार्ड सांसदों की डिजिटल सक्रियता का तुलनात्मक आकलन करने में भी मदद कर सकता है। पोस्ट की संख्या और इंप्रेशन जैसे आंकड़े यह समझने में मदद करते हैं कि सांसद सोशल मीडिया पर कितने सक्रिय हैं और उनकी सामग्री कितने लोगों तक पहुंच रही है। इसके अलावा कमेंट और अन्य प्रतिक्रियाएं जनता की ऑनलाइन भागीदारी का संकेत देती हैं।

    बैठक में सांसदों के स्वास्थ्य को लेकर भी चर्चा हुई। प्रधानमंत्री ने सांसदों से अपने स्वास्थ्य पर ध्यान देने और नियमित जांच कराने की सलाह दी। खासतौर पर 40 वर्ष से अधिक उम्र के सांसदों को नियमित मेडिकल चेकअप कराने की बात कही गई। योग को लेकर भी उन्होंने सांसदों से सवाल किया और पूछा कि नियमित योग करने वाले कितने सांसद हैं।

    प्रधानमंत्री ने स्थिर सरकार के महत्व का भी उल्लेख किया। बातचीत के दौरान उन्होंने विदेशों में सरकारों के बार-बार बदलने का उदाहरण देते हुए राजनीतिक स्थिरता की जरूरत पर बात की। साथ ही सांसदों को भरोसा दिलाया कि यदि उन्हें अपने क्षेत्र से जुड़ी कोई समस्या या व्यक्तिगत स्तर पर कोई कठिनाई हो तो वे सीधे उनसे संपर्क कर सकते हैं।

    बैठक में पूर्वी भारत के विकास को लेकर भी प्रधानमंत्री ने बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि आने वाले कुछ वर्षों में कोलकाता, ओडिशा और भुवनेश्वर का ऐसा कायाकल्प होगा जिसकी अभी कल्पना करना भी मुश्किल है। इस तरह बैठक में डिजिटल सक्रियता, स्वास्थ्य, राजनीतिक स्थिरता और क्षेत्रीय विकास जैसे कई मुद्दों पर सांसदों को दिशा देने की कोशिश की गई।