Author: bharati

  • स्लीपर बस या चलता-फिरता खतरा? सैकड़ों मौतों के बाद सरकार ने कसे शिकंजे

    स्लीपर बस या चलता-फिरता खतरा? सैकड़ों मौतों के बाद सरकार ने कसे शिकंजे

    नई दिल्ली। पिछले छह महीनों में देश के अलग-अलग हिस्सों में स्लीपर कोच बसों से जुड़े भीषण सड़क हादसों और आग की घटनाओं ने परिवहन व्यवस्था की खामियों को उजागर कर दिया। इन दुर्घटनाओं में अब तक करीब 145 यात्रियों की जान जा चुकी है। खासतौर पर रात के समय लंबी दूरी की यात्रा करने वाली स्लीपर बसों में आग लगने और आपात निकास की कमी के चलते जान-माल का भारी नुकसान हुआ। बढ़ते हादसों को गंभीरता से लेते हुए केंद्र सरकार ने स्लीपर बसों की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने का फैसला किया है।
    मान्यता प्राप्त कंपनियां ही बनाएंगी स्लीपर बस
    केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने नए नियमों की घोषणा करते हुए कहा कि अब स्लीपर कोच बसों का निर्माण केवल वही ऑटोमोबाइल कंपनियां या बॉडी बिल्डर्स कर सकेंगे, जिन्हें केंद्र सरकार से मान्यता प्राप्त होगी। स्थानीय और मैनुअल बॉडी बिल्डर्स को स्लीपर बस बनाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। सरकार का मानना है कि इससे निर्माण गुणवत्ता में सुधार होगा और सुरक्षा मानकों से किसी भी तरह का समझौता नहीं होगा।
    मौजूदा बसों में भी अनिवार्य होंगे नए सेफ्टी फीचर्स
    सरकार ने केवल नई बसों ही नहीं, बल्कि सड़कों पर चल रही सभी मौजूदा स्लीपर बसों में भी अतिरिक्त सुरक्षा उपकरण लगाना अनिवार्य कर दिया है। इनमें फायर डिटेक्शन सिस्टम, इमरजेंसी लाइटिंग सिस्टम, इमरजेंसी एग्जिट, सेफ्टी हैमर, ड्राइवर की नींद का अलर्ट देने वाला सिस्टम और एडवांस ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम (ADAS) शामिल हैं। इन सुविधाओं से आपात स्थिति में यात्रियों की जान बचाने में मदद मिलेगी।
    AIS-052 बस बॉडी कोड का पालन जरूरी
    नए नियमों के तहत सभी स्लीपर बसों को AIS-052 बस बॉडी कोड और संशोधित बस बॉडी कोड का पालन करना अनिवार्य होगा। यह संशोधित कोड 1 सितंबर 2025 से प्रभावी हो चुका है। बिना इस मानक को पूरा किए किसी भी स्लीपर बस का रजिस्ट्रेशन या संचालन संभव नहीं होगा। जो बसें इन नियमों का पालन नहीं करेंगी, उन्हें सड़कों से हटाया जा सकता है।
    यात्रियों की सुरक्षा होगी मजबूत
    AIS-052 भारत का आधिकारिक बस बॉडी सेफ्टी और डिजाइन मानक है, जिसमें बस की संरचना, निर्माण गुणवत्ता और सुरक्षा से जुड़े जरूरी प्रावधान तय किए गए हैं। सरकार का कहना है कि इन सख्त कदमों का मकसद भविष्य में ऐसे दर्दनाक हादसों को रोकना और स्लीपर कोच सेवाओं को सुरक्षित, भरोसेमंद और आधुनिक बनाना है। नए नियमों से न सिर्फ यात्रियों का भरोसा बढ़ेगा, बल्कि देश में सड़क सुरक्षा को भी नई दिशा मिलने की उम्मीद है।
  • राज्यपाल सीवी आनंद बोस को बम से उड़ाने की धमकी! पश्चिम बंगाल में हाई अलर्ट

    राज्यपाल सीवी आनंद बोस को बम से उड़ाने की धमकी! पश्चिम बंगाल में हाई अलर्ट

    पश्चिम बंगाल । पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सीवी आनंद बोस को ईमेल के जरिए जान से मारने की धमकी मिलने के बाद राज्य और केंद्र की सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह सतर्क हो गई हैं। ‘बम से उड़ा देंगे’ जैसे गंभीर शब्दों वाली इस धमकी के बाद पूरे सुरक्षा तंत्र को हाई अलर्ट पर रखा गया है। राज्य पुलिस और सीआरपीएफ की संयुक्त तैनाती के बीच राज्यपाल की जेड-प्लस सुरक्षा को और मजबूत किया गया है, जबकि धमकी देने वाले की पहचान और गिरफ्तारी के लिए साइबर और तकनीकी जांच तेज कर दी गई है।

    दरअसल, पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सीवी आनंद बोस को गुरुवार देर रात एक ईमेल के जरिए जान से मारने की धमकी मिलने से प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में खलबली मच गई है। धमकी भरे ईमेल में साफ शब्दों में लिखा गया कि राज्यपाल को बम से उड़ा दिया जाएगा। इस गंभीर मामले के सामने आते ही पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट कर दिया गया और आधी रात को उच्चस्तरीय सुरक्षा बैठक बुलाई गई।

    लोक भवन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यह ईमेल रात करीब 11 बजे प्राप्त हुआ, जिसके तुरंत बाद राज्यपाल की सुरक्षा में तैनात एजेंसियों ने स्थिति की समीक्षा की। मामले की जानकारी पश्चिम बंगाल के डीजीपी, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और केंद्रीय गृह मंत्रालय को भी दे दी गई है।

    ईमेल में मोबाइल नंबर, जांच तेज

    इस मामले में एक अधिकारी ने बताया, धमकी देने वाले व्यक्ति ने ईमेल में अपना मोबाइल नंबर भी दिया है। इससे जांच एजेंसियों को तकनीकी तौर पर बड़ी मदद मिलने की उम्मीद है। पुलिस का साइबर सेल ईमेल की आईपी ट्रैकिंग, मोबाइल नंबर की लोकेशन और कॉल डिटेल रिकॉर्ड खंगालने में जुटा है। आरोपी को जल्द गिरफ्तार करने के लिए विशेष टीमें गठित कर दी गई हैं और यह भी जांच की जा रही है कि धमकी किसी संगठित साजिश या आतंकी नेटवर्क से तो जुड़ी नहीं है। धमकी के बाद राज्यपाल सीवी आनंद बोस की सुरक्षा को और मजबूत कर दिया गया है। उन्हें पहले से ही जेड-प्लस श्रेणी की सुरक्षा प्राप्त है, लेकिन अब इसमें अतिरिक्त केंद्रीय बल जोड़े गए हैं।

    अधिकारियों के मुताबिक, राज्य पुलिस और सीआरपीएफ के बीच समन्वय के तहत राज्यपाल की सुरक्षा में लगभग 60 से 70 केंद्रीय पुलिस कर्मियों को तैनात किया गया है। राजभवन परिसर में अतिरिक्त सीसीटीवी कैमरे, ड्रोन निगरानी और प्रवेश बिंदुओं पर सख्त चेकिंग की जा रही है। राज्यपाल के आवागमन के दौरान बुलेटप्रूफ वाहनों और एस्कॉर्ट की संख्या भी बढ़ा दी गई है।

    राज्य और केंद्र सतर्क

    इस पूरे घटनाक्रम को गंभीरता से लेते हुए केंद्रीय गृह मंत्रालय लगातार राज्य सरकार और सुरक्षा एजेंसियों के संपर्क में है। केंद्र ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि राज्यपाल की सुरक्षा में किसी भी स्तर पर कोई चूक न हो। राज्य पुलिस को भी अतिरिक्त संसाधन और बल मुहैया कराए गए हैं।

    राजनीतिक घमासान तेज

    राज्यपाल को मिली धमकी के बाद राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इस मुद्दे को लेकर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनकी सरकार पर तीखा हमला बोला है। बीजेपी नेताओं ने सोशल मीडिया पर आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में कानून व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है और राज्यपाल जैसे संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति भी सुरक्षित नहीं हैं।

    भाजपा नेताओं का कहना है कि यह घटना राज्य में बढ़ते अपराध और राजनीतिक हिंसा का प्रमाण है। पार्टी ने मांग की है कि राज्य सरकार कानून-व्यवस्था पर तुरंत नियंत्रण करे और इस मामले में पारदर्शी कार्रवाई सुनिश्चित करे। वहीं, तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने भाजपा के आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताया है। टीएमसी नेताओं का कहना है कि राज्य पुलिस पूरी तरह मुस्तैद है और आरोपी को जल्द पकड़ लिया जाएगा।

    पहले भी मिल चुकी हैं धमकियां

    आपको बतादें कि यह पहली बार नहीं है जब राज्यपाल सीवी आनंद बोस को धमकी मिली हो। पिछले कुछ वर्षों में उन्हें ईमेल और फोन के जरिए धमकियां मिलती रही हैं, जिसके चलते उनकी सुरक्षा को क्रमशः बढ़ाया गया था। मौजूदा घटना के बाद सुरक्षा व्यवस्था की दोबारा व्यापक समीक्षा की जा रही है। गौरतलब है कि इस धमकी ने एक बार फिर पश्चिम बंगाल में सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

  • मध्य प्रदेश: सरकारी स्कूलों में 19 जनवरी को होगी पीटीएम, अभिभावकों को दिखायी जाएंगी प्रीबोर्ड परीक्षा की उत्तरपुस्तिकाएं

    मध्य प्रदेश: सरकारी स्कूलों में 19 जनवरी को होगी पीटीएम, अभिभावकों को दिखायी जाएंगी प्रीबोर्ड परीक्षा की उत्तरपुस्तिकाएं


    ग्वालियर । मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में 19 जनवरी को होने वाली पैरेंट्स-टीचर मीटिंग ,पीटीएम में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया जा रहा है। इस दिन छात्रों के अभिभावकों को उनके बच्चों की प्रीबोर्ड परीक्षा की उत्तरपुस्तिकाएं भी दिखाई जाएंगी ताकि वे अपने बच्चों के प्रदर्शन का जायजा ले सकें और आगामी बोर्ड परीक्षा की तैयारी में सुधार कर सकें।इस साल, 10वीं और 12वीं कक्षा के छात्रों की प्रीबोर्ड परीक्षाएं 13 जनवरी तक चल रही हैं, और इनके मूल्यांकन के बाद छात्रों को अपनी उत्तर पुस्तिका दिखाई जाएगी।
    इसके बाद 19 जनवरी को आयोजित होने वाली पीटीएम के दौरान अभिभावकों को भी उनके बच्चों की उत्तरपुस्तिका दिखायी जाएगी। इस कदम से अभिभावकों को यह समझने में मदद मिलेगी कि उनके बच्चे की तैयारी किस स्तर पर है और उन्हें किन क्षेत्रों में और सुधार की आवश्यकता है। शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार पिछले कुछ महीनों में त्रैमासिक और अर्द्धवार्षिक परीक्षाओं के दौरान छात्रों के प्रदर्शन को देखा गया था। इसके आधार पर विभाग ने कमजोर प्रदर्शन करने वाले छात्रों की पहचान की और उन्हें विशेष ध्यान और मार्गदर्शन देने का निर्णय लिया।

    प्रीबोर्ड परीक्षा के बाद का योजनाबद्ध तरीका

    प्रीबोर्ड परीक्षा के बाद छात्रों को अगले विषय की तैयारी के लिए अतिरिक्त कक्षाएं दी जा रही हैं। शिक्षक उन्हें यह भी बता रहे हैं कि बोर्ड परीक्षा में प्रश्न किस प्रकार के आ सकते हैं और उत्तर को लिखने के उचित तरीके क्या होंगे। इस प्रक्रिया से छात्रों को आत्मविश्वास मिलेगा और वे परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त करने में सक्षम होंगे। शिक्षा विभाग का उद्देश्य यह है कि छात्र बिना किसी भ्रम के परीक्षा की तैयारी करें और उन्हें सही दिशा में मार्गदर्शन मिले। इसके अलावा, विभाग ने छात्रों को मानसिक और शारीरिक रूप से तैयार करने के लिए प्रेरणा और प्रोत्साहन देने के कई कार्यक्रमों की योजना बनाई है।
  • इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी का संक्रमण फैला, 5013 घरों तक पहुंची एनएचएम की टीम

    इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी का संक्रमण फैला, 5013 घरों तक पहुंची एनएचएम की टीम


    इंदौर ।इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी से उत्पन्न संक्रमण की स्थिति गंभीर हो गई है। नेशनल हेल्थ मिशन के रैपिड एक्टिव सर्विलांस के दौरान यह सामने आया कि पूरे क्षेत्र में दूषित पानी का संक्रमण फैल चुका है। एनएचएम की 200 टीमों ने डेढ़ दिन तक घर-घर जाकर सर्वे किया, जिसके बाद यह निष्कर्ष निकला कि 463 घरों में उल्टी और दस्त की शिकायत वाले मरीज सामने आए हैं। सर्वे में 5013 घरों तक पहुंचने और 25,100 लोगों की जानकारी एकत्र करने में सफलता मिली है।

    एनएचएम के स्टेट सर्विलांस अफसर डॉ. अश्विन भागवत ने बताया कि सर्वे के दौरान जिन 463 घरों में उल्टी-दस्त के मरीज मिले, वहां से अब संक्रमण की चेन को तोड़ने के लिए जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि एक गली या एक क्लस्टर से मरीज नहीं मिले, बल्कि पूरे क्षेत्र से ही मरीजों की सूचना प्राप्त हुई। इस बात ने क्षेत्र में दूषित पानी के व्यापक फैलाव को उजागर किया है।

    सर्वे के बाद, प्रशासन ने जल वितरण व्यवस्था में सुधार की दिशा में त्वरित कदम उठाए हैं। जल आपूर्ति को शुद्ध करने और उपचार की सुविधा देने से मरीजों की संख्या में काफी कमी आई है। इसके साथ ही, जिओ मैपिंग तकनीक के माध्यम से मरीजों की पहचान की गई है, ताकि संक्रमण फैलने के अन्य कारणों का पता लगाया जा सके और उनका इलाज किया जा सके।

    इस सर्वे से यह भी पता चला कि संक्रमण के कारण प्रभावित घरों में समय पर इलाज मिलने और जल वितरण व्यवस्था के सुधार से अब स्थिति नियंत्रण में आ रही है। हालांकि, स्थिति अभी भी चिंताजनक है और प्रशासन लगातार इलाके में सफाई अभियान और पानी की गुणवत्ता को लेकर काम कर रहा है। अब तक, प्रशासन ने क्षेत्र में त्वरित सुधार कार्यों के साथ-साथ नागरिकों को दूषित पानी से बचने के लिए जागरूक किया है। इंदौर नगर निगम और अन्य प्रशासनिक विभागों का कहना है कि जल आपूर्ति में सुधार के बाद, 11 जनवरी से भागीरथपुरा के लोग पीने योग्य पानी प्राप्त कर सकेंगे, जिससे दूषित पानी के कारण उत्पन्न स्वास्थ्य संकट को समाप्त करने में मदद मिलेगी।

  • इंदौर: भागीरथपुरा में 11 जनवरी से मिलेगा पीने योग्य नर्मदा जल

    इंदौर: भागीरथपुरा में 11 जनवरी से मिलेगा पीने योग्य नर्मदा जल


    इंदौर । इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी से हो रही बीमारियों और मौतों के मामलों के बाद प्रशासन ने नर्मदा पेयजल आपूर्ति को सुनिश्चित करने का दावा किया है। कलेक्टर शिवम वर्मा ने बताया कि 11 जनवरी से इस क्षेत्र के नागरिकों को पीने योग्य नर्मदा पानी मिलना शुरू हो जाएगा। नर्मदा जल की लाइनों को पूरी तरह से साफ किया जा चुका है और पानी के सैंपल लेकर उनकी गुणवत्ता की जांच भी की जा रही है।

    कलेक्टर के अनुसार, गुरुवार रात को भागीरथपुरा में नर्मदा पेयजल पाइपलाइन को प्रेशर से क्लोरीन द्वारा फ्लश किया गया था। इसके बाद पानी के सैंपल लिए गए और उनका परीक्षण किया जा रहा है। परीक्षण की रिपोर्ट मिलने के बाद 11 जनवरी से लोगों को नर्मदा जल पीने के लिए उपलब्ध होगा।कलेक्टर ने यह भी कहा कि फिलहाल क्षेत्र के सभी बोरिंग में क्लोरीन डाला जा चुका है और इन्हें केवल घरेलू उपयोग के लिए ही इस्तेमाल किया जा सकता है। इस बीच, प्रशासन द्वारा टैंकरों के माध्यम से पानी की सप्लाई भी की जा रही है ताकि लोगों को पानी की समस्या से राहत मिल सके।

    भागीरथपुरा में नर्मदा जल आपूर्ति की व्यवस्था को लेकर स्थानीय निवासियों में उम्मीद जगी है। लंबे समय से यहां के लोग दूषित पानी से हो रही स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे थे और अब प्रशासन की ओर से सुधार के प्रयासों से उम्मीद जताई जा रही है कि जल समस्या जल्द हल हो जाएगी।नर्मदा जल की आपूर्ति से पहले, भागीरथपुरा क्षेत्र में पानी की गुणवत्ता को सुधारने के लिए पाइप लाइनों की मरम्मत और सफाई का काम जोरों से चल रहा है। फिलहाल, कलेक्टर और प्रशासन का कहना है कि 11 जनवरी तक नर्मदा जल क्षेत्रवासियों को सुरक्षित, शुद्ध और पीने योग्य पानी उपलब्ध करवा दिया जाएगा।

  • इंदौर में तेज रफ्तार कार की ट्रक से टक्कर, पूर्व गृहमंत्री बाला बच्चन की बेटी समेत तीन की मौत

    इंदौर में तेज रफ्तार कार की ट्रक से टक्कर, पूर्व गृहमंत्री बाला बच्चन की बेटी समेत तीन की मौत


    इंदौर ।इंदौर के तेजाजी नगर क्षेत्र में शुक्रवार सुबह एक दिल दहला देने वाली दुर्घटना हुई, जिसमें तीन युवाओं की मौत हो गई। दुर्घटना उस समय घटी जब एक तेज रफ्तार कार रालामंडल इलाके में ट्रक से टकरा गई। हादसे में मध्य प्रदेश के पूर्व गृहमंत्री बाला बच्चन की बेटी प्रेरणा बच्चन, कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता आनंद कासलीवाल के बेटे प्रखर कासलीवाल और मान संधू की मौके पर ही मौत हो गई। हादसे में कार सवार एक अन्य युवती, अनुष्का राठी, गंभीर रूप से घायल हो गई, जिसे अस्पताल में भर्ती कर इलाज चल रहा है।

    यह दुर्घटना शुक्रवार सुबह उस समय हुई जब कार सवार युवक-युवतियां एक पार्टी से लौट रहे थे। बताया जा रहा है कि कार की रफ्तार काफी तेज थी, और अचानक ट्रक से टकराने के कारण कार का अगला हिस्सा पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया। पुलिस के मुताबिक ट्रक का चालक दुर्घटना के बाद मौके से फरार हो गया। स्थानीय पुलिस और प्रशासन ने मौके पर पहुंचकर शवों को बाहर निकाला और घायलों को तुरंत अस्पताल पहुंचाया। दुर्घटना के बाद घटनास्थल पर भारी संख्या में लोग जमा हो गए, और सड़क पर यातायात बाधित हो गया। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और फरार ट्रक चालक की तलाश जारी है।

    घटना के बाद बाला बच्चन और कासलीवाल परिवार में शोक की लहर दौड़ गई है। मध्य प्रदेश के पूर्व गृहमंत्री बाला बच्चन ने दुर्घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया है और अपने परिवार के साथ इस कठिन समय को सहन करने की अपील की है। वहीं, कांग्रेस पार्टी ने भी इस हादसे पर दुख जताया और पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की। इस दुर्घटना ने एक बार फिर इंदौर में तेज रफ्तार और सड़क सुरक्षा की आवश्यकता पर सवाल उठाए हैं। पुलिस ने बताया कि सड़क पर तेज रफ्तार से गाड़ियां चलाना बहुत खतरनाक हो सकता है, और ऐसे हादसों से बचने के लिए यातायात नियमों का पालन जरूरी है।

    इंदौर में इस प्रकार की दुर्घटनाएं आम हो गई हैं, और लोग सड़क सुरक्षा के प्रति अपनी जिम्मेदारी को समझते हुए दुर्घटनाओं से बचने की कोशिश नहीं करते। प्रशासन ने चेतावनी दी है कि तेज रफ्तार और लापरवाही से गाड़ी चलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। यह हादसा एक और बार यह साबित करता है कि सड़कों पर अनियंत्रित और लापरवाह ड्राइविंग से न केवल वाहन चालकों, बल्कि पैदल चलने वालों और अन्य लोगों की जान भी खतरे में पड़ सकती है।

  • राष्ट्रीय युवा दिवस पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव करेंगे खेलो एमपी यूथ गेम्स का शुभारंभ

    राष्ट्रीय युवा दिवस पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव करेंगे खेलो एमपी यूथ गेम्स का शुभारंभ


    भोपाल।
    मध्‍य प्रदेश के खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने गुरुवार को बड़े तालाब स्थित वॉटर स्पोर्ट्स अकादमी पहुंचकर खेलो एमपी यूथ गेम्स की लॉन्चिंग तैयारियों का निरीक्षण किया। मंत्री सारंग ने संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश देते हुए कहा कि कार्यक्रम में अधिक से अधिक खेल प्रेमियों की सहभागिता सुनिश्चित की जाए तथा सुरक्षा, तकनीकी एवं व्यवस्थागत सभी इंतजाम पूर्णतः पुख्ता हों।

    मंत्री सारंग ने बताया कि स्वामी विवेकानंद की जयंती ‘राष्ट्रीय युवा दिवस’ 12 जनवरी को खेलो एमपी यूथ गेम्स का भव्य शुभारंभ किया जाएगा। यह शुभारंभ कार्यक्रम मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मुख्य आतिथ्य में शाम 6 बजे बड़े तालाब से किया जाएगा। उन्होंने बताया कि देश में पहली बार लॉन्चिंग इवेंट के दौरान दर्शकों को 4K वॉटर प्रोजेक्शन देखने को मिलेगा। यह वॉटर प्रोजेक्शन दर्शकों को एक इमर्सिव और सिनेमाई अनुभव प्रदान करेगा, जो अब तक राज्य स्तर के किसी भी खेल आयोजन में देखने को नहीं मिला है।

    देश में पहली बार फ्लोटिंग स्टेज पर ऐतिहासिक लॉन्चिंग

    देश में पहली बार किसी राज्य स्तरीय यूथ स्पोर्ट्स इवेंट की लॉन्चिंग फ्लोटिंग स्टेज पर की जाएगी, जहाँ 4K वॉटर प्रोजेक्शन इस ऐतिहासिक समारोह का मुख्य आकर्षण होगा। भोपाल के बड़े तालाब की प्राकृतिक भव्यता के बीच जल-परदे पर अत्याधुनिक 4K तकनीक के माध्यम से खेलो एमपी यूथ गेम्स की थीम, लोगो, विज़ुअल स्टोरी और खेल भावना को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस अत्याधुनिक प्रस्तुति के साथ हाई-क्वालिटी विजुअल डिस्प्ले, टॉर्च लाइटिंग के माध्यम से आकर्षक फायर वर्क तथा 20 फीट ऊँची ‘लार्जर दैन लाइफ’ जर्सी जैसे विशेष आकर्षण समारोह की भव्यता को बढ़ायेंगे। आधुनिक तकनीक और खेल संस्कृति के इस अद्वितीय संगम के माध्यम से यह शुभारंभ समारोह मध्यप्रदेश की नवाचार क्षमता, खेल प्रतिबद्धता और सांस्कृतिक गौरव को राष्ट्रीय स्तर पर प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करेगा।

    लोगो, मैस्कॉट, एंथम और जर्सी का होगा अनावरण

    मंत्री सारंग ने बताया कि शुभारंभ समारोह के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा खेलो एमपी यूथ गेम्स के लोगो, मैस्कॉट, एंथम एवं आधिकारिक जर्सी का भव्य लोकार्पण किया जाएगा। यह क्षण खेलो एमपी यूथ गेम्स की पहचान और भावना को सशक्त रूप से प्रस्तुत करेगा। इस अवसर पर प्रदेश एवं राष्ट्रीय स्तर के विभिन्न खेल संघों के पदाधिकारी, प्रतिनिधि एवं वरिष्ठ खेल प्रशासक भी विशेष रूप से उपस्थित रहेंगे।

    शुभारंभ समारोह में दिखेगी भोपाल के तालाबों की भव्यता

    मंत्री सारंग ने बताया कि खेलो एमपी यूथ गेम्स का शुभारंभ समारोह विशेष रूप से आकर्षक एवं यादगार बनाया गया है। इस अवसर पर ताल-तलैयों की नगरी भोपाल के ऐतिहासिक तालाबों की भव्यता दिखेगी। शुभारंभ समारोह के माध्यम से एमपी की पहचान केवल खेलों के राज्य के रूप में ही नहीं, बल्कि संस्कृति, सौंदर्य और युवाशक्ति के केंद्र के रूप में भी देश के सामने प्रस्तुत की जाएगी। यह आयोजन खिलाड़ियों, दर्शकों और आमजन के लिए प्रेरणादायी एवं उत्साहवर्धक अनुभव सिद्ध होगा।

    देश में पहली बार खेल विभाग और सभी खेल संघ मिलकर करेंगे आयोजन

    मंत्री सारंग ने कहा कि यह देश में पहली बार हो रहा है, जब खेल विभाग के साथ सभी मान्यता प्राप्त खेल संघ मिलकर समन्वित रूप से यूथ गेम्स का आयोजन एवं संचालन कर रहे हैं। यह पहल खेल विभाग का एक ऐतिहासिक और नवाचारी कदम है। खेलो एमपी यूथ गेम्स केवल एक खेल आयोजन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह भविष्य की राज्य टीम चयन प्रक्रिया का सशक्त, व्यवस्थित और पारदर्शी मंच बनेगा। इस व्यवस्था के माध्यम से प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की पहचान प्रारंभिक स्तर पर ही हो सकेगी, जिससे उन्हें आगे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुँचने का सशक्त अवसर प्राप्त होगा।

    28 खेलों के लिये चरणबद्ध चयन प्रक्रिया

    खेलो एमपी यूथ गेम्स की चयन प्रक्रिया ब्लॉक स्तर से प्रारंभ की जाएगी। इसके अंतर्गत ब्लॉक स्तरीय प्रतियोगिताएँ 12 से 16 जनवरी 2026, जिला स्तरीय प्रतियोगिताएँ 16 से 20 जनवरी 2026, संभाग स्तरीय प्रतियोगिताएँ 21 से 25 जनवरी 2026 तथा राज्य स्तरीय प्रतियोगिताएँ 28 से 31 जनवरी 2026 तक आयोजित की जाएँगी। यूथ गेम्स के अंतर्गत कुल 28 खेलों की प्रतियोगिताएँ आयोजित की जाएँगी। खेल संघों के साथ बेहतर एवं प्रभावी समन्वय सुनिश्चित करने के उद्देश्य से विभाग द्वारा समन्वय अधिकारियों की नियुक्ति की गई है।

    क्षेत्रीय परंपरा के अनुसार खेल आयोजन

    मंत्री सारंग ने बताया कि प्रतियोगिताओं का आयोजन इस सिद्धांत पर किया जाएगा कि जिन खेलों की परंपरा एवं लोकप्रियता जिस क्षेत्र में है, वहीं संबंधित खेलों का आयोजन किया जाए। राज्य स्तरीय प्रतियोगिताएँ भोपाल, इंदौर, उज्जैन, जबलपुर, रीवा, शिवपुरी, ग्वालियर, सागर एवं नर्मदापुरम में प्रस्तावित हैं। ब्लॉक स्तर से प्रारंभ होने वाली इस चयन प्रक्रिया में जिला स्तर पर प्रदेश के 313 विकासखंडों की सहभागिता सुनिश्चित की गई है। राज्य स्तर पर प्रदेश के 10 संभागों की टीमें प्रतियोगिताओं में भाग लेंगी।

    पहली बार पारंपरिक एवं लोकप्रिय खेलों को किया शामिल

    मंत्री सारंग ने बताया कि यूथ गेम्स में पहली बार पारंपरिक एवं लोकप्रिय खेलों को विशेष स्थान दिया गया है। इस क्रम में पिट्टू और रस्साकशी जैसे पारंपरिक खेलों के साथ-साथ क्रिकेट और थ्रो बॉल को भी प्रतियोगिता में शामिल किया गया है। इन खेलों के समावेशन का उद्देश्य ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में प्रचलित खेलों को संस्थागत मंच प्रदान करना, अधिक से अधिक युवाओं को खेलों से जोड़ना तथा छिपी हुई प्रतिभाओं को आगे लाना है।

  • मां ने लगाया मौत को गले पास बैठी बिलखती रही 2 साल की मासूम मंजर देख कांप उठी रूह

    मां ने लगाया मौत को गले पास बैठी बिलखती रही 2 साल की मासूम मंजर देख कांप उठी रूह


    कानपुर । उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले से एक ऐसी हृदयविदारक घटना सामने आई है जिसने मानवीय संवेदनाओं को झकझोर कर रख दिया है। शहर के रावतपुर थाना क्षेत्र के आनंद नगर इलाके में एक महिला ने घर के भीतर फांसी लगाकर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली। यह घटना उस वक्त और भी दर्दनाक हो गई जब मृतका की दो साल की मासूम बेटी अपनी मां को फंदे पर लटका देख वहीं बैठकर बिलखती रही। जिस मां की गोद में वह सुकून पाती थी उसी मां को बेजान हालत में देख बच्ची की चीखें पूरे घर में गूंजती रहीं।

    शोर सुनकर जब कमरे में पहुंचे परिजन जानकारी के मुताबिक आनंद नगर निवासी प्रॉपर्टी डीलर राकेश तिवारी की पत्नी संध्या तिवारी 38 ने बुधवार देर शाम अज्ञात कारणों के चलते कमरे में पंखे के कुंडे से दुपट्टे के सहारे फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। घटना के वक्त घर के अन्य सदस्य अपने कामों में व्यस्त थे। काफी देर तक जब संध्या कमरे से बाहर नहीं निकली और अंदर से छोटी बेटी नायरा के रोने की लगातार आवाजें आने लगीं तो परिवार को अनहोनी की आशंका हुई। संध्या की 14 वर्षीय बड़ी बेटी भूमि जैसे ही कमरे के भीतर पहुंची वहां का खौफनाक मंजर देख उसकी चीख निकल गई। उसकी आंखों के सामने उसकी मां का शव फंदे से लटक रहा था और पास ही उसकी दो साल की छोटी बहन नायरा अपनी मां के शव के पास बैठी रो रही थी।

    पुलिस जांच और परिजनों का हाल भूमि की चीख पुकार सुनकर घर के अन्य सदस्य और आस-पड़ोस के लोग तुरंत मौके पर जमा हो गए। आनन-फानन में पुलिस को सूचना दी गई जिसके बाद रावतपुर थाना पुलिस और फॉरेंसिक टीम ने घटनास्थल का मुआयना किया। पुलिस ने शव को फंदे से नीचे उतारकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। घर में मचे इस कोहराम से हर किसी की आंखें नम हैं। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और वे इस बात को स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं कि संध्या ने आखिर इतना बड़ा कदम क्यों उठाया।

    अनसुलझे सवाल और मासूम की सिसकियां इस घटना ने कई सवाल भी पीछे छोड़ दिए हैं। पुलिस इस मामले की हर पहलू से जांच कर रही है कि आखिर सुसाइड के पीछे की मुख्य वजह क्या थी? क्या यह घरेलू कलह का मामला है या फिर कोई और मानसिक तनाव। हालांकि सबसे ज्यादा विचलित करने वाली बात वह दृश्य था जिसमें एक दो साल की मासूम को यह भी समझ नहीं आ रहा था कि उसकी मां उसे हमेशा के लिए छोड़कर जा चुकी है। वह बस अपनी मां को उठने की उम्मीद में निहारती रही। फिलहाल पुलिस पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार कर रही है ताकि मौत के सही कारणों और समय की पुष्टि हो सके। इस घटना ने पूरे आनंद नगर इलाके में मातम पसरा दिया है।

  • अभी भी दूषित पानी पीने को मजबूर शहरवासी, जबलपुर की 80 प्रतिशत पाइपलाइन नालों में डूबी

    अभी भी दूषित पानी पीने को मजबूर शहरवासी, जबलपुर की 80 प्रतिशत पाइपलाइन नालों में डूबी


    जबलपुर। प्रदेश के पहले नगर निगम होने का गौरव रखने वाला जबलपुर नगर निगम आज भी अपने नागरिकों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने में विफल साबित हो रहा है। नर्मदा तट पर बसा यह शहर जो कभी अपनी स्वच्छता और सुंदरता के लिए जाना जाता था आज अपने नागरिकों को दूषित और बदबूदार पानी पीने के लिए मजबूर है।

    वर्षों से नगर निगम द्वारा शुद्ध पेयजल आपूर्ति के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं लेकिन शहर की करीब 80 प्रतिशत पाइपलाइनें नालों में डूबी हैं जिससे पानी में गंदगी और अशुद्धता बढ़ रही है। नर्मदा का पानी भले ही शहर तक पहुंचता है लेकिन पाइपलाइन की खराब स्थिति के कारण वह पानी जैसे ही घरों तक पहुंचता है वह दूषित हो जाता है।

    वर्ष 1950 में जबलपुर नगर निगम की स्थापना के बाद नगर निगम ने कई बार पेयजल व्यवस्था में सुधार के दावे किए। लेकिन अब तक किसी भी सरकार या प्रशासक द्वारा यह समस्या पूरी तरह से हल नहीं हो पाई है। एशियन डेवलपमेंट बैंक  और अमृत योजना जैसी  परियोजनाओं के तहत नगर निगम को करोड़ों रुपये मिले लेकिन शहर के पानी की गुणवत्ता में कोई खास सुधार नहीं हुआ है।शहर की बढ़ती आबादी के साथ पानी की खपत भी बढ़ी है लेकिन पाइपलाइन की पुरानी और जर्जर अवस्था के कारण पानी में कई तरह की गंदगी समाहित हो जाती है। साथ ही नालों और सीवेज सिस्टम के पास से गुजरने वाली पाइपलाइनें शहरवासियों के लिए एक बड़ी चिंता का कारण बन चुकी हैं।

    नागरिकों का कहना है कि उन्हें कभी-कभी पानी की गंध और रंग देखकर यह डर लगता है कि क्या उनका स्वास्थ्य इससे प्रभावित होगा। शुद्ध पेयजल की समस्या न केवल शहरवासियों के जीवन में परेशानी का कारण बन रही है बल्कि इससे संबंधित स्वास्थ्य समस्याएं भी बढ़ रही हैं।
    शहरवासी लगातार नगर निगम से शुद्ध पानी की मांग कर रहे हैं लेकिन सरकार और प्रशासन की तरफ से इस गंभीर मुद्दे पर ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं। अब यह देखना बाकी है कि क्या सरकार इस समस्या का समाधान कर पाएगी ताकि जबलपुर के नागरिकों को शुद्ध और सुरक्षित पेयजल मिल सके।

  • नकल करते पकड़े गए तो रद्द होगा पूरा रिजल्ट, बोर्ड परीक्षा को लेकर मंडल के कड़े निर्देश

    नकल करते पकड़े गए तो रद्द होगा पूरा रिजल्ट, बोर्ड परीक्षा को लेकर मंडल के कड़े निर्देश


    जबलपुर । मध्य प्रदेश बोर्ड की आगामी बोर्ड परीक्षाओं को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने के लिए माध्यमिक शिक्षा मंडल ने नकल के मामलों को लेकर कड़े निर्देश जारी किए हैं। बोर्ड ने परीक्षा के दौरान नकल करने और परीक्षा केंद्र पर अनुशासनहीनता दिखाने वाले परीक्षार्थियों के लिए सख्त सजा का प्रावधान किया है।

    मंडल के आदेशों के अनुसार यदि कोई परीक्षार्थी परीक्षा के दौरान नकल करते हुए पकड़ा जाता है या फिर शिक्षक केंद्राध्यक्ष या अन्य परीक्षा ड्यूटी में लगे कर्मचारियों से बदतमीजी या उद्दंड व्यवहार करता है तो उसका संपूर्ण परीक्षाफल रद्द कर दिया जाएगा। इस आदेश से नकल करने और कराने वालों में हड़कंप मच गया है क्योंकि परीक्षा में इस तरह की सख्त कार्रवाई से उनके भविष्य पर गंभीर असर हो सकता है।

    परीक्षा के दौरान नकल के मामलों में कड़ी कार्रवाई का यह निर्णय बोर्ड द्वारा जारी किए गए दिशा-निर्देशों में स्पष्ट रूप से उल्लेखित किया गया है। मंडल ने सभी प्राचार्यों मूल्यांकन अधिकारियों और परीक्षा केंद्राध्यक्षों को बताया है कि आगामी 2026 की बोर्ड परीक्षा में नकल मामलों के लिए विभिन्न स्तरों पर कार्रवाई की जाएगी। यदि किसी परीक्षार्थी से एक विषय में नकल सामग्री बरामद होती है वह चिट निगलता है उत्तर पुस्तिका बदलता है या फाड़ देता है या उत्तर पुस्तिका लेकर भाग जाता है और उस विषय में नकल प्रमाणित होती है तो उस विषय की परीक्षा रद्द कर दी जाएगी और परीक्षाफल में ‘कैंसिल’ दर्ज किया जाएगा।

    इस नए निर्देश से शिक्षा मंडल का उद्देश्य नकल पर पूरी तरह से काबू पाना और परीक्षाओं को पूरी तरह से पारदर्शी और निष्पक्ष बनाना है। बोर्ड ने सभी परीक्षा केंद्रों पर कड़ी निगरानी रखने और नकल के प्रयासों को रोकने के लिए अतिरिक्त उपायों को लागू करने की बात कही है। इसके अलावा यदि किसी परीक्षार्थी के खिलाफ नकल करने के मामले में कार्रवाई की जाती है तो उसे भविष्य में भी बोर्ड की परीक्षाओं से संबंधित गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। मंडल ने सभी छात्रों से अपील की है कि वे नकल से बचें और अपनी मेहनत से परीक्षा में सफलता प्राप्त करें ताकि उनकी मेहनत और ईमानदारी से कड़ी मेहनत को सही तरीके से सम्मान मिल सके।