Author: bharati

  • स्थानीय निकायों को आत्मनिर्भर बनाने की तैयारी, जनता से सुझाव लेने के लिए जल्द शुरू होगा पोर्टल

    स्थानीय निकायों को आत्मनिर्भर बनाने की तैयारी, जनता से सुझाव लेने के लिए जल्द शुरू होगा पोर्टल

    उज्जैन। मध्यप्रदेश के पंचायत और नगरीय निकायों को आर्थिक रूप से मजबूत और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में राज्य सरकार बड़ा कदम उठाने जा रही है। छठे मध्यप्रदेश वित्त आयोग के अध्यक्ष जयभान सिंह पवैया ने बताया कि जल्द ही एक ऑनलाइन पोर्टल शुरू किया जाएगा, जिसके माध्यम से आम नागरिक भी स्थानीय निकायों के विकास और वित्तीय मजबूती के लिए अपने सुझाव दे सकेंगे। फिलहाल आयोग संभाग स्तर पर जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से सुझाव जुटा रहा है।

    उज्जैन प्रवास के दौरान सर्किट हाउस में मीडिया से बातचीत करते हुए पवैया ने बताया कि आयोग अब तक छह संभागों का दौरा कर चुका है। पहले चरण में सांसदों, विधायकों, नगरीय निकायों और पंचायतों के प्रतिनिधियों तथा प्रशासनिक अधिकारियों से सुझाव लिए जा रहे हैं। सभी नौ संभागों से प्राप्त सुझावों के आधार पर आयोग अपनी रिपोर्ट तैयार करेगा, जिसे राज्यपाल को सौंपा जाएगा। इसी रिपोर्ट के आधार पर राज्य सरकार स्थानीय निकायों को वित्तीय आवंटन करेगी।

    उन्होंने बताया कि अब तक कई उपयोगी सुझाव मिले हैं। इनमें प्रत्येक पंचायत और नगरीय निकाय में सोलर एनर्जी प्लांट स्थापित करने का सुझाव विशेष रूप से प्रभावी माना गया है। उनका कहना है कि वर्तमान में स्थानीय निकायों की बड़ी राशि स्ट्रीट लाइट और नल-जल योजनाओं के बिजली बिल पर खर्च होती है। यदि निकाय स्वयं बिजली उत्पादन करें तो न केवल उनका खर्च कम होगा, बल्कि अतिरिक्त बिजली बेचकर आय भी अर्जित कर सकेंगे। उन्होंने इंदौर नगर निगम का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां सोलर ऊर्जा और कचरे से बायोगैस बनाकर आय बढ़ाने की दिशा में सफल प्रयास किए जा रहे हैं।

    केंद्रीय वित्त आयोग की अनुदान राशि में कटौती के सवाल पर पवैया ने स्पष्ट किया कि फंड में कमी नहीं की गई है। बल्कि पहले की तुलना में अधिक राशि उपलब्ध कराई जा रही है। हालांकि अब अनुदान प्राप्त करने के लिए निकायों के कार्यों की वार्षिक ऑडिट रिपोर्ट अनिवार्य कर दी गई है, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित होगी।

    उन्होंने बताया कि जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से सुझाव लेने के बाद पंचायत और जनपद स्तर पर भी संवाद किया जाएगा। इसके बाद आम नागरिकों के सुझाव प्राप्त करने के लिए पोर्टल शुरू किया जाएगा। साथ ही आर्थिक विशेषज्ञों से भी परामर्श लिया जाएगा, ताकि स्थानीय निकायों को आत्मनिर्भर बनाने और विकास कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने वाली प्रभावी सिफारिशें तैयार की जा सकें।

    बैठक के दौरान कई अन्य सुझाव भी सामने आए। नागदा-खाचरौद विधायक डॉ. तेजबहादुर सिंह चौहान ने ग्रामीण क्षेत्रों में बारिश के दौरान आवश्यक कच्चे कार्यों, जैसे मुरम और चूरी डालने की अनुमति देने का प्रस्ताव रखा। वहीं कांग्रेस विधायक दिनेश जैन बोस और महेश परमार ने भी आयोग के समक्ष अपने सुझाव प्रस्तुत किए।

  • प्रमोशन में आरक्षण पर नई बहस, सरकार के डेटा को कोर्ट में चुनौती दे सकता है सामान्‍य वर्ग

    प्रमोशन में आरक्षण पर नई बहस, सरकार के डेटा को कोर्ट में चुनौती दे सकता है सामान्‍य वर्ग

    जबलपुर। मध्य प्रदेश में प्रमोशन में आरक्षण का मामला एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। फिलहाल हाईकोर्ट की विशेष खंडपीठ ने स्पष्ट किया है कि इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामले की स्थिति साफ होने के बाद ही आगे सुनवाई होगी। अदालत ने सरकार और सभी पक्षों को शीर्ष अदालत में शीघ्र सुनवाई का आग्रह करने की सलाह दी है।

    हालांकि न्यायिक प्रक्रिया फिलहाल रुकी हुई है, लेकिन दोनों पक्ष अपनी कानूनी तैयारियों में जुटे हैं। जानकारी के अनुसार, अगली सुनवाई में सरकार द्वारा प्रस्तुत क्वांटिफिएबल डेटा सबसे बड़ा विवाद का विषय बन सकता है।

    सरकार के आंकड़ों पर उठेंगे सवाल
    सामान्य वर्ग की ओर से अदालत में यह तर्क रखा जाएगा कि कई सरकारी विभागों में अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) का प्रतिनिधित्व पहले से पर्याप्त है। ऐसे में पदोन्नति में आरक्षण जारी रखने का आधार क्या है, इस पर सरकार से जवाब मांगा जाएगा। सूत्रों के मुताबिक, सामान्य वर्ग विभिन्न विभागों के आंकड़ों के जरिए यह साबित करने की तैयारी में है कि जहां पर्याप्त प्रतिनिधित्व मौजूद है, वहां भी आरक्षण का लाभ जारी रखा गया।

    X और Y फैक्टर पर रहेगा फोकस
    मामले में सबसे अहम मुद्दा सरकार द्वारा तय किए गए X और Y फैक्टर हैं, जिनके आधार पर प्रमोशन में आरक्षण का प्रतिशत निर्धारित किया गया है।

    SC वर्ग के लिए: कुल पद × (16 × X) ÷ 100
    ST वर्ग के लिए: कुल पद × (20 × Y) ÷ 100

    यदि X या Y का मान 1 रखा जाता है तो पूरा आरक्षण लागू होता है, जबकि कम मान होने पर आरक्षण का प्रतिशत भी घट जाता है। सामान्य वर्ग का आरोप है कि कई विभागों में पर्याप्त प्रतिनिधित्व होने के बावजूद X और Y का मान कम नहीं किया गया, जिससे आरक्षण का प्रतिशत अधिक बना रहा।

    प्रक्रिया पर भी उठेंगे सवाल
    याचिकाकर्ताओं का कहना है कि X और Y तय करने के लिए कोई स्पष्ट और समान मानक नहीं अपनाया गया। समान परिस्थितियों वाले विभागों में अलग-अलग मान निर्धारित किए गए, जिससे पूरी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े होते हैं।

    प्रशासनिक दक्षता भी बनेगी मुद्दा

    अगली सुनवाई में प्रशासनिक दक्षता का मुद्दा भी प्रमुख रहेगा। सामान्य वर्ग का पक्ष है कि केवल एसीआर (वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट) के आधार पर दक्षता का आकलन पर्याप्त नहीं माना जा सकता। उनका तर्क है कि संविधान के अनुच्छेद-335 के अनुरूप कार्यक्षमता का व्यापक मूल्यांकन होना चाहिए।

    पांच साल तक एक ही फॉर्मूले पर आपत्ति

    सरकार द्वारा X और Y फैक्टर को पांच वर्ष तक लागू रखने के प्रावधान पर भी सवाल उठाए जाएंगे। सामान्य वर्ग का कहना है कि प्रतिनिधित्व की स्थिति समय के साथ बदलती रहती है, इसलिए पुराने आंकड़ों के आधार पर लंबे समय तक एक ही व्यवस्था लागू रखना उचित नहीं है।

    सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिकी नजर
    फिलहाल पूरे मामले की दिशा सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई पर निर्भर है। हाईकोर्ट ने भी संकेत दिया है कि शीर्ष अदालत की स्थिति स्पष्ट होने के बाद ही आगे की कार्रवाई होगी। हालांकि, माना जा रहा है कि अगली सुनवाई में सरकार के डेटा, X-Y फैक्टर और प्रशासनिक दक्षता जैसे मुद्दों पर विस्तृत और अहम बहस देखने को मिल सकती है, जिसका असर हजारों सरकारी कर्मचारियों पर पड़ सकता है।

  • चरखी दादरी में दिनदहाड़े 30 राउंड फायरिंग से सनसनी, स्कॉर्पियो सवार सात लोग घायल, सीसीटीवी से आरोपियों की तलाश

    चरखी दादरी में दिनदहाड़े 30 राउंड फायरिंग से सनसनी, स्कॉर्पियो सवार सात लोग घायल, सीसीटीवी से आरोपियों की तलाश

    नई दिल्ली । हरियाणा के चरखी दादरी में दिनदहाड़े हुई ताबड़तोड़ फायरिंग की घटना ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी। सिटी थाने के सामने एक काली स्कॉर्पियो को निशाना बनाकर अज्ञात हमलावरों ने लगातार गोलियां चलाईं, जिससे वाहन में सवार सात लोग घायल हो गए। घटना के बाद आसपास मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई और पूरे क्षेत्र में दहशत का माहौल बन गया। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया।

    प्रारंभिक जानकारी के अनुसार हमलावर एक बाइक पर सवार होकर आए थे। उन्होंने स्कॉर्पियो को बीच रास्ते में रुकवाया और अचानक फायरिंग शुरू कर दी। कुछ ही क्षणों में वाहन गोलियों से छलनी हो गया। वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी मौके से फरार हो गए। घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तत्काल इलाके की घेराबंदी कर दी और आसपास के क्षेत्रों में सतर्कता बढ़ा दी।

    हमले में घायल हुए लोगों की पहचान अंकित, कीर्तिमान, सूरज, सनी, कृष्ण, अमित और एक अन्य अंकित के रूप में हुई है। सभी घायलों को पहले स्थानीय सिविल अस्पताल ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए रोहतक स्थित पीजीआई रेफर कर दिया गया। चिकित्सकों की निगरानी में उनका इलाज जारी है और पुलिस लगातार उनकी स्थिति पर नजर बनाए हुए है।

    घटना की सूचना मिलते ही वरिष्ठ पुलिस अधिकारी, डीएसपी और अन्य अधिकारी घटनास्थल पर पहुंचे। फोरेंसिक विशेषज्ञों की टीम ने मौके से साक्ष्य जुटाने का काम शुरू किया। घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया गया और गोलियों के खोखे सहित अन्य महत्वपूर्ण सुराग एकत्र किए गए। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच के दौरान किसी भी संभावना को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा और हर पहलू की गहन पड़ताल की जाएगी।

    हमलावरों की पहचान के लिए आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है। पुलिस तकनीकी साक्ष्यों के साथ प्रत्यक्षदर्शियों से भी पूछताछ कर रही है ताकि आरोपियों की गतिविधियों और उनके भागने के रास्ते का पता लगाया जा सके। इसके अलावा आसपास के थाना क्षेत्रों को भी सतर्क कर दिया गया है और संदिग्ध वाहनों की जांच तेज कर दी गई है।

    घटना के पीछे की वजह फिलहाल स्पष्ट नहीं हो सकी है। पुलिस का कहना है कि आपसी रंजिश, पुराना विवाद और अन्य संभावित कारणों सहित सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। अधिकारियों ने भरोसा दिलाया है कि उपलब्ध साक्ष्यों और तकनीकी जांच के आधार पर आरोपियों तक जल्द पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है। इस घटना के बाद क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था और पुलिस गश्त भी बढ़ा दी गई है ताकि कानून-व्यवस्था बनाए रखी जा सके और लोगों में सुरक्षा का भरोसा कायम रहे।

  • जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर संसद में गतिरोध जारी है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने गृह मंत्री से सदन में बयान देने की मांग दोहराई।

    जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर संसद में गतिरोध जारी है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने गृह मंत्री से सदन में बयान देने की मांग दोहराई।

    नई दिल्ली । जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर संसद में राजनीतिक टकराव लगातार गहराता जा रहा है। विपक्ष इस पूरे मामले पर सरकार से विस्तृत जवाब की मांग कर रहा है, जबकि सदन की कार्यवाही भी बार-बार बाधित हो रही है। इसी बीच कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि इस मुद्दे पर गृह मंत्री अमित शाह को स्वयं सदन में उपस्थित होकर पूरे घटनाक्रम की जानकारी देनी चाहिए ताकि सभी सवालों का स्पष्ट उत्तर मिल सके।

    मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि विपक्ष पिछले कई दिनों से इस विषय पर चर्चा की मांग कर रहा है, लेकिन अब तक सरकार की ओर से कोई औपचारिक जवाब सामने नहीं आया है। उनका कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में ऐसे संवेदनशील मामलों पर संसद के भीतर खुली चर्चा होना आवश्यक है। उन्होंने दावा किया कि राज्यसभा के सभापति ने संसदीय कार्य मंत्री को विपक्ष की भावनाओं से गृह मंत्री को अवगत कराने का निर्देश दिया है, जिससे इस विषय पर चर्चा का रास्ता निकल सके।

    कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि विपक्ष का उद्देश्य केवल राजनीतिक विरोध करना नहीं, बल्कि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जानकारी प्राप्त करना है। उन्होंने कहा कि यदि प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने लाठीचार्ज, आंसू गैस या अन्य बल प्रयोग किया है तो यह जानना जरूरी है कि ऐसे कदम उठाने का निर्णय किस स्तर पर लिया गया था। उनके अनुसार संसद इस प्रकार के मुद्दों पर जवाबदेही तय करने का सर्वोच्च लोकतांत्रिक मंच है और सरकार को यहां विस्तृत स्पष्टीकरण देना चाहिए।

    खड़गे ने अपनी पार्टी की ओर से दो प्रमुख मांगों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस चाहती है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस पूरे घटनाक्रम पर अपनी प्रतिक्रिया दें और दूसरी ओर गृह मंत्री अमित शाह सदन में उपस्थित होकर विपक्ष के सवालों का जवाब दें। उनका कहना था कि यदि सरकार इस विषय पर स्पष्ट रुख नहीं अपनाती है तो राजनीतिक विवाद और गहराने की संभावना बनी रहेगी।

    उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष संसद की कार्यवाही को सुचारु रूप से चलाना चाहता है, लेकिन महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा से बचने की स्थिति में गतिरोध समाप्त होना कठिन है। उनके अनुसार लोकतंत्र में संवाद और जवाबदेही दोनों समान रूप से आवश्यक हैं तथा जनता से जुड़े मामलों पर सरकार को पारदर्शी रुख अपनाना चाहिए।

    अपने बयान के दौरान खड़गे ने झारखंड में भर्ती परीक्षाओं से जुड़े विवाद का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस छात्रों के हितों और उनके अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर लगातार आवाज उठाती रहेगी। उनका कहना था कि किसी भी राज्य में यदि युवाओं और छात्रों से जुड़े प्रश्न सामने आते हैं तो उन पर निष्पक्ष जांच और उचित कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए।

    जंतर-मंतर की घटना को लेकर संसद में जारी गतिरोध के बीच अब सभी की निगाहें सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं। यदि इस विषय पर सदन में विस्तृत चर्चा होती है तो राजनीतिक दलों के बीच जारी टकराव कम होने की संभावना बन सकती है। फिलहाल विपक्ष अपने रुख पर कायम है और सरकार से आधिकारिक जवाब की मांग लगातार दोहरा रहा है।

  • यूपी चुनाव 2027 की पहली बड़ी घोषणा, अयोध्या सीट से पवन पांडे होंगे सपा के उम्मीदवार, अखिलेश का ऐलान

    यूपी चुनाव 2027 की पहली बड़ी घोषणा, अयोध्या सीट से पवन पांडे होंगे सपा के उम्मीदवार, अखिलेश का ऐलान

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज होती जा रही हैं। इसी बीच समाजवादी पार्टी ने अपनी पहली बड़ी चुनावी घोषणा करते हुए अयोध्या विधानसभा सीट से तेज नारायण पांडे उर्फ पवन पांडे को उम्मीदवार घोषित कर दिया है। पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान इस फैसले का ऐलान किया। इसके साथ ही स्पष्ट हो गया है कि समाजवादी पार्टी अयोध्या जैसी महत्वपूर्ण सीट पर एक बार फिर अनुभवी और पुराने चेहरे पर भरोसा जता रही है।

    उम्मीदवार की घोषणा ऐसे समय की गई है जब प्रदेश में चुनावी तैयारियां धीरे-धीरे गति पकड़ रही हैं। कार्यक्रम में कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि उन्हें विश्वास है कि पवन पांडे जनता का भरोसा एक बार फिर जीतेंगे। उन्होंने कहा कि पवन पांडे का क्षेत्र से मजबूत जुड़ाव है और उन्होंने पहले भी यहां के लोगों का विश्वास हासिल किया है। पार्टी नेतृत्व को उम्मीद है कि उनका अनुभव आगामी चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

    तेज नारायण पांडे, जिन्हें राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र में पवन पांडे के नाम से जाना जाता है, लंबे समय से समाजवादी पार्टी से जुड़े हुए हैं। उनका राजनीतिक सफर छात्र राजनीति से शुरू हुआ था। उन्होंने युवाओं से जुड़े विभिन्न आंदोलनों में सक्रिय भूमिका निभाई और संगठन में लगातार जिम्मेदारियां निभाते हुए अपनी पहचान बनाई। छात्र जीवन से ही सक्रिय राजनीति में रहने के कारण उन्हें संगठनात्मक कार्यों का भी व्यापक अनुभव प्राप्त हुआ।

    पवन पांडे पहली बार व्यापक चर्चा में वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव के दौरान आए, जब उन्होंने अयोध्या विधानसभा सीट से जीत दर्ज कर राज्य की राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाई। विधायक रहने के दौरान उन्होंने क्षेत्र के विकास, सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा और बुनियादी सुविधाओं से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। इसी राजनीतिक अनुभव और संगठन में सक्रिय भूमिका को देखते हुए पार्टी ने एक बार फिर उन्हें चुनावी मैदान में उतारने का निर्णय लिया है।

    अयोध्या विधानसभा सीट उत्तर प्रदेश की सबसे चर्चित और राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण सीटों में गिनी जाती है। ऐसे में इस सीट पर प्रत्याशी की घोषणा को चुनावी रणनीति के लिहाज से अहम माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि शुरुआती चरण में उम्मीदवार घोषित कर समाजवादी पार्टी ने चुनावी तैयारियों का स्पष्ट संदेश दिया है और संगठन को समय रहते सक्रिय करने की कोशिश की है।

    पार्टी की इस घोषणा के बाद प्रदेश की राजनीति में चुनावी सरगर्मियां और तेज होने की संभावना है। आने वाले समय में अन्य प्रमुख दलों की ओर से भी उम्मीदवारों और चुनावी रणनीति को लेकर महत्वपूर्ण घोषणाएं की जा सकती हैं। फिलहाल समाजवादी पार्टी ने अयोध्या से पवन पांडे को उम्मीदवार बनाकर चुनावी अभियान की औपचारिक शुरुआत कर दी है। अब सभी की निगाहें इस बात पर रहेंगी कि अन्य राजनीतिक दल इस महत्वपूर्ण सीट पर किस चेहरे को मैदान में उतारते हैं और चुनावी मुकाबला किस दिशा में आगे बढ़ता है।

  • प्रदीप रावत ने बताया था क्यों छोड़ा सलमान खान का साथ, वर्षों बाद मुलाकात में गले लगाकर जताया अपनापन

    प्रदीप रावत ने बताया था क्यों छोड़ा सलमान खान का साथ, वर्षों बाद मुलाकात में गले लगाकर जताया अपनापन


    नई दिल्ली ।
    दिवंगत अभिनेता प्रदीप रावत के निधन के बाद उनके जीवन से जुड़े कई पुराने किस्से एक बार फिर चर्चा में हैं। इन्हीं में से एक किस्सा अभिनेता सलमान खान के साथ उनकी गहरी दोस्ती का है। प्रदीप रावत ने एक पुराने इंटरव्यू में बताया था कि संघर्ष के दिनों में वह करीब छह महीने तक सलमान खान के घर रहे थे। उस दौरान दोनों के बीच बेहद मजबूत दोस्ती थी, लेकिन बाद में उन्होंने अपने करियर पर ध्यान केंद्रित करने के लिए खुद ही सलमान से दूरी बना ली थी।

    प्रदीप रावत ने बताया था कि उनकी और सलमान खान की दोस्ती फिल्म ‘बागी’ के दौरान शुरू हुई थी। शुरुआती मुलाकातों के बाद दोनों के बीच अच्छा तालमेल बन गया। दोनों को फिटनेस का शौक था और अक्सर साथ समय बिताते थे। धीरे-धीरे स्थिति ऐसी हो गई कि सलमान खान उन्हें अपने घर से वापस जाने ही नहीं देते थे। वह वहीं रहते, खाना खाते, व्यायाम करते और कई बार साथ में सामाजिक कार्यक्रमों में भी शामिल होते थे।

    उन्होंने बताया था कि उस दौर में सलमान खान ने उनका हर तरह से साथ दिया। बड़े आयोजनों में जाने के लिए यदि उनके पास उपयुक्त कपड़े नहीं होते थे तो उनकी भी व्यवस्था कराई जाती थी। प्रदीप रावत के अनुसार, सलमान खान हमेशा अपने दोस्तों का पूरा ध्यान रखते थे और जरूरत के समय बिना किसी संकोच के मदद करते थे। उन्होंने सलमान को बड़े दिल वाला और अपने लोगों का ख्याल रखने वाला इंसान बताया था।

    हालांकि कुछ समय बाद प्रदीप रावत ने महसूस किया कि वह इस आरामदायक जीवनशैली के अभ्यस्त होते जा रहे हैं। उन्हें लगा कि यदि वह इसी माहौल में लंबे समय तक रहे तो अपने व्यक्तिगत संघर्ष और करियर की दिशा से भटक सकते हैं। इसी सोच के साथ उन्होंने खुद को सलमान के करीब रहने वाले दायरे से अलग करने का फैसला किया और अपने अभिनय करियर पर पूरा ध्यान देना शुरू किया।

    कई वर्षों तक दोनों के बीच मुलाकात नहीं हुई। बाद में एक दिन सड़क पर अचानक दोनों आमने-सामने आ गए। प्रदीप रावत ने बताया था कि सलमान खान ने उन्हें देखते ही अपनी गाड़ी रोक दी और उनसे गले मिलकर पूछा कि वह इतने वर्षों से कहां थे। इस मुलाकात ने दोनों की पुरानी दोस्ती की यादें फिर ताजा कर दीं। प्रदीप के अनुसार, सलमान उनसे नाराज जरूर थे कि उन्होंने बिना बताए दूरी बना ली थी, लेकिन उनके व्यवहार में अपनापन पहले जैसा ही था।

    प्रदीप रावत ने अपने संघर्ष के दिनों का एक और प्रसंग साझा करते हुए बताया था कि जब वह बैंक में नौकरी करते थे, तब सलमान खान उनसे मिलने वहां भी पहुंच जाते थे और उनके काम खत्म होने तक बैठकर इंतजार करते थे। उन्होंने यह भी बताया था कि बाद में एक फिल्म के हिंदी संस्करण के लिए उन्होंने निर्देशक को सलमान खान के बजाय आमिर खान का नाम सुझाया था। उनके अनुसार, यह फैसला पूरी तरह पेशेवर सोच के आधार पर लिया गया था और इसका उनकी निजी दोस्ती से कोई संबंध नहीं था। आज प्रदीप रावत के निधन के बाद उनकी और सलमान खान की यह दोस्ती तथा उससे जुड़ी यादें एक बार फिर लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई हैं।

  • मथुरा: ब्रज की बढ़ती आध्यात्मिक लोकप्रियता: हर वर्ष मथुरा-वृंदावन में 7.5 करोड़ से अधिक श्रद्धालु-पर्यटक पहुंच रहे

    मथुरा: ब्रज की बढ़ती आध्यात्मिक लोकप्रियता: हर वर्ष मथुरा-वृंदावन में 7.5 करोड़ से अधिक श्रद्धालु-पर्यटक पहुंच रहे


    मथुरा। दक्षिण भारत के मदुरै को लंबे समय से देश की प्रमुख टेंपल सिटी के रूप में जाना जाता है, लेकिन अब उत्तर भारत में भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि मथुरा-वृंदावन भी तेजी से नए ‘टेंपल कैपिटल’ के रूप में उभर रहा है। काशी विश्वनाथ धाम के पुनर्विकास और अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण के बाद ब्रज क्षेत्र धार्मिक पर्यटन और आर्थिक विकास का बड़ा केंद्र बनता दिखाई दे रहा है।

    मंदिरों की संख्या के लिहाज से भी ब्रज की पहचान लगातार मजबूत हो रही है। तमिलनाडु के मदुरै में मीनाक्षी अम्मन मंदिर सहित करीब 100 से 150 प्रमुख मंदिर हैं, जबकि मथुरा जनपद में 5 हजार से अधिक पंजीकृत और पौराणिक मंदिर मौजूद हैं। इनमें अकेले वृंदावन में ही लगभग 4 हजार मंदिर हैं, जिससे यह दुनिया के सबसे सघन मंदिर क्षेत्रों में शामिल हो गया है। तुलना करें तो वाराणसी में 3 हजार से अधिक और अयोध्या में करीब 4 हजार मंदिर एवं मठ हैं।

    श्रद्धालुओं की संख्या भी ब्रज की बढ़ती लोकप्रियता का प्रमाण है। उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग के अनुसार, वाराणसी में हर वर्ष 8.5 से 10 करोड़, अयोध्या में 5.5 से 6.5 करोड़ और मथुरा-वृंदावन में 7.5 करोड़ से अधिक श्रद्धालु एवं पर्यटक पहुंच रहे हैं। दिल्ली-एनसीआर से बेहतर सड़क संपर्क और वीकेंड पर्यटन ने यहां आने वालों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी की है।

    ब्रज क्षेत्र में चल रही कई महत्वाकांक्षी परियोजनाएं इसकी धार्मिक और आर्थिक पहचान को नई ऊंचाई दे रही हैं। काशी की तर्ज पर प्रस्तावित बांके बिहारी कॉरिडोर, दुनिया का सबसे ऊंचा 70 मंजिला चंद्रोदय मंदिर, यमुना एक्सप्रेसवे के पास प्रस्तावित 9 हजार हेक्टेयर की राया हेरिटेज सिटी और जेवर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे की निकटता इस क्षेत्र को वैश्विक धार्मिक पर्यटन के बड़े केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में अहम मानी जा रही है।

    इन परियोजनाओं के चलते ब्रज में निवेश भी तेजी से बढ़ रहा है। बड़े होटल समूह यहां अपने प्रोजेक्ट विकसित कर रहे हैं, जबकि जमीनों की कीमतों में पिछले कुछ वर्षों में 200 से 300 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। धार्मिक पर्यटन, आधारभूत ढांचे और निवेश के बढ़ते दायरे के साथ ब्रज अब उत्तर भारत के नए ‘टेंपल कैपिटल’ के रूप में अपनी मजबूत पहचान बना रहा है।

  • झांसी: अतीक अहमद के बेटे आबान की सड़क हादसे में मौत, जेल में बंद भाई अली से मिलने जा रहा था

    झांसी: अतीक अहमद के बेटे आबान की सड़क हादसे में मौत, जेल में बंद भाई अली से मिलने जा रहा था


    झांसी।
    उत्तर प्रदेश के झांसी जिले में गुरुवार सुबह हुए भीषण सड़क हादसे में माफिया और पूर्व सांसद अतीक अहमद के सबसे छोटे बेटे आबान अहमद की मौत हो गई। हादसे में उसके साथ सफर कर रहे सोनू खान की भी जान चली गई, जबकि तीन अन्य युवक गंभीर रूप से घायल हो गए। सभी लोग प्रयागराज से झांसी जेल में बंद अली अहमद से मिलने जा रहे थे।

    जानवर को बचाने में अनियंत्रित हुई कार
    यह हादसा झांसी-कानपुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर पूंछ थाना क्षेत्र के खिल्ली गांव के पास गुरुवार सुबह करीब 10:30 बजे हुआ। पुलिस के अनुसार, तेज रफ्तार क्रेटा कार के सामने अचानक एक जानवर आ गया। उसे बचाने के प्रयास में चालक ने नियंत्रण खो दिया और कार डिवाइडर से जा टकराई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि वाहन का अगला हिस्सा पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया।

    आबान और सोनू की मौके पर मौत
    हादसे में आगे की सीट पर बैठे आबान अहमद और सोनू खान के सिर में गंभीर चोटें आईं, जिससे दोनों की मौके पर ही मौत हो गई। वहीं अहजम, मोहम्मद जैद और उमर अहमद गंभीर रूप से घायल हो गए। सभी घायल प्रयागराज के रहने वाले हैं और उनका इलाज मेडिकल कॉलेज में चल रहा है।

    शादी के कार्ड से हुई पहचान
    दुर्घटनाग्रस्त कार की तलाशी के दौरान पुलिस को एक शादी का निमंत्रण कार्ड मिला। उस पर दर्ज मोहम्मद जैद के नाम और संपर्क नंबर के आधार पर पुलिस ने मृतकों और घायलों की पहचान सुनिश्चित की। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक घायल युवक बार-बार सिर्फ यही पूछ रहे थे—”भाई कैसे हैं?”

    एसएसपी ने की पहचान की पुष्टि
    झांसी के एसएसपी बीबीजीटीएस मूर्ति ने बताया कि प्रारंभिक जांच में मृतकों में एक की पहचान अतीक अहमद के बेटे आबान अहमद के रूप में हुई है। पुलिस ने हादसे की जांच शुरू कर दी है।

    झांसी जेल में बंद है अली अहमद
    उमेश पाल हत्याकांड और रंगदारी से जुड़े मामलों में आरोपी अली अहमद को 1 अक्टूबर 2025 को प्रयागराज की नैनी जेल से हाई सिक्योरिटी के तहत झांसी जेल स्थानांतरित किया गया था। नैनी जेल में उसकी बैरक से नकदी मिलने के बाद उसे झांसी भेजा गया था और तब से वह वहीं बंद है।

    2023 में एनकाउंटर में मारा गया था असद
    अतीक अहमद का बेटा असद अहमद 13 अप्रैल 2023 को झांसी के बड़ागांव क्षेत्र में एसटीएफ के साथ मुठभेड़ में मारा गया था। उमेश पाल हत्याकांड में वांछित असद पर पांच लाख रुपये का इनाम घोषित था।

  • FCRA बिल को लेकर बढ़ा राजनीतिक विवाद, शशि थरूर बोले- सामाजिक संस्थाओं की स्वतंत्रता बचाने के लिए विपक्ष एकजुट हो

    FCRA बिल को लेकर बढ़ा राजनीतिक विवाद, शशि थरूर बोले- सामाजिक संस्थाओं की स्वतंत्रता बचाने के लिए विपक्ष एकजुट हो

     
    नई दिल्ली । प्रस्तावित फॉरेन कंट्रीब्यूशन रेगुलेशन संशोधन विधेयक को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने इस विधेयक का खुलकर विरोध करते हुए इसे नागरिक समाज, शैक्षणिक संस्थानों और सामाजिक संगठनों के लिए गंभीर चुनौती बताया है। उन्होंने विपक्षी दलों से अपील की है कि संसद में इस विधेयक के खिलाफ एकजुट होकर आवाज उठाई जाए और इसे वर्तमान स्वरूप में पारित होने से रोका जाए। थरूर का कहना है कि यह केवल कानूनी संशोधन का मामला नहीं बल्कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की कार्यप्रणाली और स्वतंत्रता से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है।

    शशि थरूर ने कहा कि वर्षों से शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक कल्याण के क्षेत्र में कार्य कर रहे अनेक संस्थानों ने देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनका मानना है कि प्रस्तावित संशोधन के कारण ऐसे संगठनों पर अतिरिक्त कानूनी और प्रशासनिक दबाव बढ़ सकता है। उन्होंने चिंता जताई कि यदि नियम अत्यधिक कठोर हुए तो अनेक संस्थाओं के नियमित कार्य प्रभावित हो सकते हैं, जिसका असर समाज के कमजोर और जरूरतमंद वर्गों तक पहुंचने वाली सेवाओं पर भी पड़ेगा।

    कांग्रेस सांसद ने आरोप लगाया कि पिछले कुछ वर्षों में गैर-लाभकारी संस्थाओं और सामाजिक संगठनों पर लगातार सख्ती बढ़ी है। उनके अनुसार विदेशी अंशदान प्राप्त करने वाले संगठनों की संख्या और फंडिंग में पहले ही उल्लेखनीय गिरावट देखी जा चुकी है। उन्होंने कहा कि यदि नया संशोधन लागू होता है तो अनेक संस्थाओं के संचालन पर और अधिक प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने इस पूरे मुद्दे को लोकतांत्रिक व्यवस्था और नागरिक समाज की भूमिका से जोड़ते हुए गंभीर चिंता व्यक्त की।

    थरूर ने विशेष रूप से केरल का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां लंबे समय से कई सामाजिक, शैक्षणिक और स्वास्थ्य संस्थान बिना किसी भेदभाव के समाज की सेवा करते रहे हैं। उनके अनुसार इन संस्थाओं ने शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं को आम लोगों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने आशंका जताई कि नए प्रावधानों से ऐसे संगठनों की कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है, जिससे समाज के विभिन्न वर्गों पर प्रतिकूल असर पड़ने की संभावना है।

    उन्होंने विपक्षी सांसदों से आग्रह किया कि इस विधेयक पर संसद में व्यापक चर्चा कराई जाए और सभी दल मिलकर अपनी बात मजबूती से रखें। उनका कहना है कि लोकतंत्र में किसी भी महत्वपूर्ण कानून पर सभी पक्षों की राय और विस्तृत विचार-विमर्श आवश्यक होता है। उन्होंने इसे केवल राजनीतिक मुद्दा नहीं बल्कि संस्थागत स्वतंत्रता और सार्वजनिक हित से जुड़ा विषय बताया।

    दूसरी ओर, सरकार का कहना है कि विदेशी अंशदान से जुड़े कानूनों का उद्देश्य पारदर्शिता, जवाबदेही और राष्ट्रीय हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। सरकार के अनुसार नियामक व्यवस्था को मजबूत बनाने और विदेशी फंड के उपयोग की प्रभावी निगरानी के लिए समय-समय पर कानूनी संशोधन आवश्यक होते हैं। ऐसे में अब प्रस्तावित विधेयक को लेकर संसद में होने वाली चर्चा और विभिन्न राजनीतिक दलों की रणनीति पर सभी की नजर बनी हुई है।

  • प्रतापगढ़ में दर्दनाक हादसा: बारिश में ढहा 100 साल पुराना मकान, एक ही परिवार के 6 लोगों की मौत

    प्रतापगढ़ में दर्दनाक हादसा: बारिश में ढहा 100 साल पुराना मकान, एक ही परिवार के 6 लोगों की मौत


    प्रतापगढ़।
    उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले में बुधवार देर रात एक दर्दनाक हादसे में एक ही परिवार के छह लोगों की मौत हो गई। चिलबिला कोतवाली क्षेत्र के महुली मंडी इलाके में लगातार बारिश के बीच करीब 100 साल पुराना जर्जर मकान अचानक भरभराकर ढह गया। हादसे के समय पूरा परिवार घर के एक कमरे में सो रहा था।

    सूचना मिलते ही पुलिस, प्रशासन और स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे और राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया। मलबे में दबे सात लोगों को बाहर निकाला गया, जिनमें छह की मौत हो गई, जबकि परिवार का एक सदस्य सुरक्षित बच गया।

    माता-पिता, बेटा-बहू और दो मासूमों की गई जान
    हादसे में प्रमोद श्रीवास्तव (45), उनकी पत्नी रीता श्रीवास्तव (42), पुत्र अमन/नितिन (24), बहू माधुरी (24), दो वर्षीय पोते माधव और छह माह के मासूम बाबू की मौत हो गई। सभी को तत्काल मेडिकल कॉलेज ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

    बारिश के बीच रात में ढही छत
    पुलिस के अनुसार, परिवार बुधवार रात भोजन के बाद एक ही कमरे में सो रहा था। देर रात करीब दो से तीन बजे के बीच लगातार बारिश के दौरान मकान की छत अचानक भरभराकर गिर गई, जिससे पूरा परिवार मलबे में दब गया।

    प्रशासन जांच में जुटा, सीएम ने जताया शोक
    सीओ सिटी आशुतोष मिश्रा ने छह लोगों की मौत की पुष्टि करते हुए बताया कि हादसे के कारणों की जांच की जा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घटना पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए अधिकारियों को राहत एवं बचाव कार्य में तेजी लाने और पीड़ित परिवार को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।