Author: bharati

  • Makar Sankranti 2026 : मकर संक्रांति पर कैसे पकेगी खिचड़ी, षट्तिला एकादशी ने चावल दान पर भी फंसाया पेंच, अब मकर संक्रांति पर क्या करें?

    Makar Sankranti 2026 : मकर संक्रांति पर कैसे पकेगी खिचड़ी, षट्तिला एकादशी ने चावल दान पर भी फंसाया पेंच, अब मकर संक्रांति पर क्या करें?


    नई दिल्ली। मकर संक्रांति इस बार 14 जनवरी को मनाया जाएगा। हालांकि, इस बार की मकर संक्रांति बेहद ही खास होने वाली है। क्योंकि,मकर संक्रांति पर इस बार एकादशी तिथि का संयोग बन गया है। ऐसे में मकर संक्रांति पर सूर्यदेव के साथ भगवान विष्णु की कृपा का लाभ भी मिलने वाला है। लेकिन इससे मकर संक्रांति पर एक दुविधा की स्थिति भी बन गई है जिसको लेकर लोगों में उलझन की स्थिति बनी हुई है। दरअसल मकर संक्रांति पर खिचड़ी खाने और दान करने का विशेष महत्व बताया गया है। लेकिन, एकादशी तिथि होने के कारण अब सवाल यह उठता है कि, क्या इस बार मकर संक्रांति पर भगवान को खिचड़ी का भोग लगाना,खिचड़ी खाना और दान करना शुभ रहेगा या नहीं। आपके इन्हीं सवालों के जवाब यहां हम आपको बताने जा रहे हैं कि अबकी बार मकर संक्रांति पर एकादशी तिथि के संयोग में खिचड़ी खाने, दान करने और भगवान को भोग लगाने के संबंध में आप क्या कर सकते हैं।

    क्या मकर संक्रांति 2026 पर कर सकते हैं चावल और खिचड़ी का दान ?
    सूर्य धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं तो मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाता है। सूर्य इस दिन अपने पुत्र शनि की राशि मकर में प्रवेश करते हें। इस दिन से सूर्य उत्तरायण होते हैं और देवताओं का दिन भी शुरू होता है। श्रीमद्भागवत गीता में भी मकर संक्रांति के दिन का बड़ा महत्व बताया गया है, इस दिन से देवलोक में दिन आरंभ होता और सूर्यदेव अपने दिए हुए वरदान के अनुसार मकर राशि में आकर धन समृद्धि और सुख लाते हैं। इसलिए भी इस दिन का विशेष महत्व है। और परंपराओं से चल मान्यता चली आ रही है कि मकर संक्रांति के दिन खिचड़ी का भोग लगता है और खिचड़ी एवं चावल का दान भी किया जाता है। लेकिन अबकी बार मकर संक्रांति के साथ षटतिला एकादशी का संयोग होने से दुविधा की स्थिति बन गई है।

    शास्त्रों के अनुसार, एकादशी तिथि पर अन्न का सेवन और अन्न दान करना वर्जित माना गया है। खास तौर पर चावल खाने और दान करने की मनाही है। ऐसे में मकर संक्रांति पर इस बार आप तिल, गुड़ और मूंगफली आदि का दान कर सकते हैं। इस दिन आप चावल और खिचड़ी का बाकी सामान दान के निमित्त अलग से निकालकर घर के मंदिर में रख दें।
    मकर संक्रांति 14 जनवरी बुधवार के दिन और उससे अगले दिन 15 जनवरी को गुरुवार है। शास्त्रों में गुरुवार के दिन खिचड़ी का सेवन वर्जित बताया गया है। ऐसे में आप उस दिन भी खिचड़ी नहीं बना सकते हैं तो ऐसे में शनिवार का दिन यानी 17 जनवरी को आप खिचड़ी बना सकते हैं और इसी दिन आप चावल का दान भी कर सकते हैं। बता दें कि 17 जनवरी शनिवार के दिन सप्तमी उपरांत अष्टमी तिथि रहेगी जो शनि से संबंधित है और सूर्य जब तक मकर राशि में गोचर करते रहेंगे तब तक माघ मास में दान पुण्य का संयोग बना रहेगा। ऐसे में इस दिन जो भी आप चावल आदि का दान करेंगे उसका आपको उत्तम फल मिलेगा। आप 17 जनवरी को खिचड़ी का सेवन भी करेंगे तो यह शुभ रहेगा और आपके ग्रह दोष कटेंगे।

    मकर संक्रांति 2026 पर क्या दान करें ?
    मकर संक्रांति पर इस बार आप चाहें तो गुड़, तिल, तिल से बनी चीजें जैसे लड्डू आदि का दान करें। इस दिन तिल का दान करने से पापों का नाश होता है। साथ ही तिल का दान करने से सूर्य देव प्रसन्न होते हैं। इस दिन दान पुण्य करने से सुख समृद्धि की प्राप्ति होती है।

  • ISPL 2026 बना स्टार्स का संगम, अक्षय-सूर्या-राम चरण की फोटो पर फैंस का जबरदस्त रिएक्शन

    ISPL 2026 बना स्टार्स का संगम, अक्षय-सूर्या-राम चरण की फोटो पर फैंस का जबरदस्त रिएक्शन

    नई दिल्ली। इंडियन स्ट्रीट प्रीमियर लीग (ISPL) के तीसरे सीजन का उद्घाटन समारोह शुक्रवार को गुजरात के सूरत में भव्य अंदाज में आयोजित किया गया। इस मौके पर खेल और मनोरंजन की दुनिया का अनोखा मेल देखने को मिला। कार्यक्रम में भारतीय सिनेमा के तीन बड़े सितारे-अक्षय कुमार, सूर्या और राम चरण—एक साथ पहुंचे और मंच पर कैमरे के लिए पोज देते हुए फैंस को यादगार लम्हा दे गए। जैसे ही तीनों कलाकारों की तस्वीर सामने आई, सोशल मीडिया पर यह पल वायरल हो गया।

    फैंस बोले-‘एक फ्रेम में तीन लेजेंड्स’

    इस खास पल में अक्षय कुमार, सूर्या और राम चरण एक-दूसरे को गले लगाते हुए नजर आए। स्टेडियम में मौजूद दर्शकों ने जोरदार तालियों और सीटियों से उनका स्वागत किया। सोशल मीडिया पर फैंस ने तस्वीर शेयर करते हुए लिखा—“Legends in one frame” और “Indian cinema power packed moment।” कई यूजर्स ने इसे भारतीय सिनेमा की तीन बड़ी इंडस्ट्रीज़ का ऐतिहासिक संगम बताया।

    स्टाइल में भी दिखी अलग पहचान

    तीनों सितारे अपने-अपने स्टाइल में भी अलग नजर आए। अक्षय कुमार ने ब्लू हुडी, डेनिम जींस और व्हाइट स्नीकर्स के साथ कैजुअल लेकिन कूल लुक अपनाया। वहीं सूर्या बेज कलर के सूट और व्हाइट टी-शर्ट में बेहद डैपर दिखे। राम चरण ने व्हाइट टी-शर्ट, ब्लू जींस और ब्लैक लेदर जैकेट के साथ अपने सिग्नेचर स्वैग को बरकरार रखा। तीनों का यह अंदाज फैंस को काफी पसंद आया।

    क्या है इंडियन स्ट्रीट प्रीमियर लीग

    इंडियन स्ट्रीट प्रीमियर लीग एक टी10 टेनिस बॉल क्रिकेट टूर्नामेंट है, जिसमें देशभर की टीमें हिस्सा लेती हैं। ISPL सीजन 3 की शुरुआत 9 जनवरी 2026 से हो चुकी है और यह टूर्नामेंट 6 फरवरी 2026 तक चलेगा। लीग के सभी मुकाबले जियोहॉटस्टार पर लाइव स्ट्रीम किए जा रहे हैं।

    स्टार्स की टीमों से सजी ISPL

    ISPL सीजन 3 में कई नामचीन सितारे टीम ओनर के तौर पर जुड़े हैं। मौजूदा चैंपियन माजी मुंबई (अमिताभ बच्चन), टाइगर्स ऑफ कोलकाता (सौरव गांगुली, सैफ अली खान और करीना कपूर), श्रीनगर के वीर (अक्षय कुमार), चेन्नई सिंगम्स (सूर्या), बेंगलुरु स्ट्राइकर्स (ऋतिक रोशन), फाल्कन राइजर्स हैदराबाद (राम चरण) के अलावा नई टीमों दिल्ली सुपरहीरोज (सलमान खान) और अहमदाबाद लॉयंस (अजय देवगन) भी इस लीग का हिस्सा हैं।

    मनोरंजन और क्रिकेट का दमदार मेल

    ISPL 2026 न सिर्फ क्रिकेट प्रेमियों बल्कि फिल्मी सितारों के फैंस के लिए भी खास बनता जा रहा है। उद्घाटन समारोह में अक्षय कुमार, सूर्या और राम चरण की मौजूदगी ने इस लीग की चमक को और बढ़ा दिया है। अब दर्शकों को मैदान पर रोमांचक मुकाबलों के साथ-साथ सितारों की मौजूदगी का भी भरपूर मनोरंजन मिलने वाला है।

  • बॉक्स ऑफिस पर प्रभास का जलवा: ‘द राजा साब’ ने पहले दिन कमाए 54.15 करोड़

    बॉक्स ऑफिस पर प्रभास का जलवा: ‘द राजा साब’ ने पहले दिन कमाए 54.15 करोड़

    नई दिल्ली। प्रभास स्टारर हॉरर-कॉमेडी फिल्म ‘द राजा साब’ ने बॉक्स ऑफिस पर दमदार एंट्री की है। Sacnilk वेबसाइट के शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक, फिल्म ने रिलीज के पहले दिन भारत में सभी भाषाओं में करीब 45 करोड़ रुपये नेट की कमाई की। वहीं, गुरुवार को हुए पेड प्रीव्यू से फिल्म ने पहले ही 9.15 करोड़ रुपये कमा लिए थे। इस तरह ओपनिंग डे पर फिल्म का कुल कलेक्शन 54.15 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो इसे साल की बड़ी ओपनिंग फिल्मों में शामिल करता है।

    तेलुगु बेल्ट में जबरदस्त रिस्पॉन्स

    फिल्म को सबसे ज्यादा फायदा तेलुगु राज्यों से मिला, जहां प्रभास का स्टारडम साफ नजर आया। तेलुगु में कुल ऑक्यूपेंसी 57.16 प्रतिशत दर्ज की गई। मॉर्निंग शो 50.92 प्रतिशत से शुरू हुए, दोपहर में 50.82 प्रतिशत रहे, जबकि शाम के शो बढ़कर 57.70 प्रतिशत और रात के शो 69.20 प्रतिशत तक पहुंच गए। इससे साफ है कि जैसे-जैसे दिन बढ़ा, दर्शकों की दिलचस्पी और भी मजबूत होती गई।

    हिंदी और तमिल में मिला मिला-जुला रिस्पॉन्स

    हिंदी बेल्ट में फिल्म की शुरुआत थोड़ी धीमी रही। यहां कुल ऑक्यूपेंसी 15.63 प्रतिशत दर्ज की गई। मॉर्निंग शो सिर्फ 7.47 प्रतिशत रहे, लेकिन रात तक यह आंकड़ा बढ़कर 21.34 प्रतिशत तक पहुंच गया। तमिल वर्जन की बात करें तो यहां फिल्म ने औसत प्रदर्शन किया। तमिल में कुल ऑक्यूपेंसी 22.61 प्रतिशत रही, जबकि नाइट शोज में यह करीब 28 प्रतिशत तक पहुंच गई।

    शाम और रात के शोज बने गेमचेंजर

    जैसे-जैसे दिन आगे बढ़ा, दर्शकों की संख्या में साफ इजाफा देखने को मिला। खासकर शाम और रात के शोज में फिल्म को बेहतर रिस्पॉन्स मिला। डॉल्बी सिनेमा के तेलुगु शोज में भी करीब 24.93 प्रतिशत ऑक्यूपेंसी दर्ज की गई, जो फिल्म के लिए सकारात्मक संकेत मानी जा रही है।

    स्टारकास्ट और रिव्यू

    मारुति के निर्देशन में बनी ‘द राजा साब’ में प्रभास के साथ संजय दत्त, मालविका मोहनन, निधि अग्रवाल, बोमन ईरानी, रिद्धि कुमार और ज़रीना वहाब अहम भूमिकाओं में नजर आ रहे हैं। ETimes की समीक्षा के मुताबिक, प्रभास इस फिल्म में हल्के-फुल्के और स्वैग से भरे अंदाज में जमे हुए दिखते हैं। हालांकि, कुछ हिस्सों में कहानी की रफ्तार थोड़ी धीमी पड़ती है। कुल मिलाकर फिल्म को दर्शकों और समीक्षकों से मिला-जुला लेकिन उत्साहजनक रिस्पॉन्स मिल रहा है।

    पहले दिन की कमाई को देखते हुए साफ है कि वीकेंड पर ‘द राजा साब’ का बॉक्स ऑफिस ग्राफ और ऊपर जा सकता है।

  • संगीत सेरेमनी में कृति सेनन और नूपुर सेनन का धमाकेदार डांस, दोनों बहनों के ग्लैमरस लुक ने लूटी महफिल

    संगीत सेरेमनी में कृति सेनन और नूपुर सेनन का धमाकेदार डांस, दोनों बहनों के ग्लैमरस लुक ने लूटी महफिल

    नई दिल्ली। बॉलीवुड अभिनेत्री कृति सेनन की बहन नूपुर सेनन 11 जनवरी को उदयपुर में सिंगर स्टेबिन बेन के साथ सात फेरे लेने जा रही हैं। शादी से पहले तीन दिन तक चलने वाले इस निजी समारोह की शुरुआत 9 जनवरी को संगीत सेरेमनी के साथ हुई। इस खास मौके पर परिवार और करीबी दोस्तों की मौजूदगी में संगीत का रंगारंग कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें कृति और नूपुर सेनन ने अपने डांस और स्टाइल से समां बांध दिया।

    ‘सजना जी वारी वारी’ पर बहनों का धमाकेदार डांस

    संगीत समारोह का सबसे खास पल तब आया जब नूपुर सेनन अपनी ब्राइड्समेड्स और बहन कृति सेनन के साथ मशहूर गाने ‘सजना जी वारी वारी’ पर थिरकती नजर आईं। दोनों बहनों की केमिस्ट्री, एनर्जी और एक्सप्रेशंस ने दर्शकों को खूब एंटरटेन किया। सोशल मीडिया पर इस डांस का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है और फैंस दोनों बहनों की तारीफ करते नहीं थक रहे।

    कृति सेनन का हाई-फैशन ग्लैमरस अवतार

    संगीत समारोह में कृति सेनन का लुक चर्चा का विषय बन गया। उन्होंने पिंक और ब्लू शेड्स वाला एम्ब्रॉयडर्ड लहंगा पहना, जिसमें स्पेगेटी स्ट्रैप्स वाला कुर्ती-स्टाइल ब्लाउज, वी-नेकलाइन और साइड स्लिट्स थे। लहंगे के हेम पर शीशे और कढ़ाई वाले शेल टैसल्स ने आउटफिट को और खास बना दिया। फ्लेयर्ड और प्लीटेड स्कर्ट में शिमरी शीशे की डिटेलिंग ने कृति के ग्लैम को नई ऊंचाई दी।

    हेयरस्टाइल और ज्वेलरी ने बढ़ाया चार्म

    कृति ने हाफ-टाई हेयरस्टाइल अपनाया, जिसमें ढीली लटें चेहरे को खूबसूरती से फ्रेम कर रही थीं। बन पर शीशे और शेल से सजी ज्वेलरी ने उनके लुक को यूनिक टच दिया। कुंदन चोकर, झुमके, गुलाबी चूड़ियां और चंकी ब्रेसलेट के साथ उनका मेकअप-स्मोकी आईज, ग्लॉसी पिंक लिप्स और रूज-टिन्टेड गाल- उन्हें परफेक्ट पार्टी लुक दे रहा था।

    नूपुर सेनन बनीं संगीत की स्टार

    दुल्हन बनने जा रहीं नूपुर सेनन भी किसी से कम नहीं दिखीं। उन्होंने रंग-बिरंगे पैनल डिजाइन वाला लहंगा पहना, जिसमें गोल्ड एम्ब्रॉयडर्ड ब्लाउज और शीशे-सिक्विन की खूबसूरत कढ़ाई थी। उनके लुक की खासियत ब्लाउज की डिटेलिंग रही, जिसमें टैसल एम्ब्रॉयडरी और शीशे वाली चेन हाथों और पीठ से होती हुई हेयरस्टाइल से जुड़ी नजर आई।

    दुल्हन के अंदाज ने लूटी तारीफें

    नूपुर ने चोकर नेकलेस, मांग टीका, चूड़ियां और बालों से जुड़े झुमकों के साथ अपने लुक को पूरा किया। ड्यूई ग्लैम मेकअप और गुंथे हुए बालों में वह एकदम ब्राइडल वाइब्स देती दिखीं। संगीत समारोह में दोनों बहनों का यह स्टाइलिश और एनर्जेटिक अंदाज शादी के जश्न को और खास बना गया, जिसकी तस्वीरें और वीडियो अब सोशल मीडिया पर छाए हुए हैं।

  • Hrithik Roshan: बचपन में हकलाने की समस्या, 21 की उम्र में गंभीर बीमारी, चुनौतियों से पार पाकर बने सुपरस्टार

    Hrithik Roshan: बचपन में हकलाने की समस्या, 21 की उम्र में गंभीर बीमारी, चुनौतियों से पार पाकर बने सुपरस्टार

    नई दिल्‍ली ।  ऋतिक रोशन का जन्म 10 जनवरी 1974 को मुंबई में हुआ था। उनकी गिनती हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के सबसे प्रतिभाशाली अभिनेताओं में होती। अपने बेहतरीन अभिनय, डांस की खास शैली और दिलकश लुक्स की वजह से वह लाखों दिलों पर राज करते हैं। हालांकि, उनकी सफलता की कहानी सिर्फ चमक-दमक और स्टाइल से जुड़ी नहीं है। फिल्मों से कदम रखन से पहले उनके संघर्ष की कहानी कई लोगों के लिए प्रेरणा का काम कर सकती है।
    फिल्म परिवार से रखते हैं ताल्लुक
    ऋतिक रोशन का जन्म एक फिल्मी परिवार में हुआ था। उनके पिता राकेश रोशन बॉलीवुड के मशहूर अभिनेता और फिल्म निर्माता हैं। वहीं, उनकी मां पिंकी रोशन, एक गृहिणी हैं। उनके दादा, रोशनलाल नागरथ भी संगीतकार थे। उनके चाचा राजेश रोशन भी संगीतकार हैं। राकेश की फिल्मों का संगीत वह ही तैयार करते हैं।
    बचपन में कई चुनौतियों का किया सामना
    फिल्मी परिवार से ताल्लुक रखने के बावजूद ऋतिक का बचपन काफी संघर्षों के साथ गुजरा। वह हकलाने की समस्या से जूझते थे, जिसके कारण वह लोगों के बीच बोलने में संकोच करते थे। इसके अलावा वह अपने हाथ के अतिरिक्त अंगूठे की वजह से काफी खराब महसूस करते थे। स्कूल के दोस्त उनका मजाक उड़ाया करते थे। पहली फिल्म में नजर आने से पहले वह अपने इस अंगूठे को कटवाना चाहते थे, लेकिन मां की सलाह के बाद उन्होंने ऐसा नहीं किया।
    21 साल की उम्र में हुई गंभीर बीमारी
    ऋतिक एक और गंभीर शारीरिक समस्या का सामना कर चुके हैं। 21 साल की उम्र में उन्हें स्कोलियोसिस नामक बीमारी का पता चला, जिसमें रीढ़ की हड्डी में घुमाव होता है और यह व्यक्ति की शारीरिक गतिविधियों को प्रभावित करता है। डॉक्टर ने यह तक कह दिया था कि वह कभी डांस नहीं कर सकते। हालांकि, ऋतिक ने अपनी मेहनत और समर्पण से इस बीमारी पर भी जीत हासिल की और बॉलीवुड के सबसे बेहतरीन डांसर्स में अपनी जगह बनाई।
    चुनौतियों से पार पाकर बने सुपरस्टार
    ऋतिक रोशन ने 2000 में कहो न प्यार है से हिंदी सिनेमा में कदम रखा। इस फिल्म ने उन्हें स्टार बना दिया और वह रातों-रात लाखों दिलों की धड़कन बन गए। उनकी आकर्षक पर्सनालिटी, कड़ी मेहनत और डांस स्टाइल ने दर्शकों को अपना दीवाना बना लिया। इस फिल्म की सफलता ने उन्हें बॉलीवुड के शीर्ष अभिनेताओं में जगह दिलाई।
    इस फिल्म में जल्द आएंगे नजर
    इसके बाद उन्होंने कई सुपरहिट फिल्मों में अभिनय किया, जिनमें, धूम 2, जिंदगी ना मिलेगी दोबारा, वॉर, और सुपर 30 जैसी फिल्मों का नाम प्रमुख है। उनकी फिल्मों में न सिर्फ उनके अभिनय का जादू देखने को मिला, बल्कि उन्होंने अपने डांस और स्टाइल से भी करोड़ों लोगों को अपना प्रशंसक बनाया। मौजूदा समय में वह वॉर 2 में काम कर रहे हैं। इस फिल्म का निर्देशन अयान मुखर्जी कर रहे हैं। फिल्म इस साल स्वतंत्रता दिवस के आस-पास रिलीज हो सकती है।
  • आप भी खड़े होकर पीते हैं पानी? तो जाएं सावधान; जानिए इसके बड़े नुकसान

    आप भी खड़े होकर पीते हैं पानी? तो जाएं सावधान; जानिए इसके बड़े नुकसान


    नई दिल्ली । स्वस्थ रहने के लिए पानी पीना उतना ही जरूरी है जितना कि उसका सही तरीका अपनाना। आजकल हम अक्सर जल्दबाजी में खड़े होकर पानी पी लेते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह आदत आपके शरीर के लिए कितनी हानिकारक हो सकती है? हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार, खड़े होकर पानी पीने से कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं, जिनमें किडनी, पाचन तंत्र और फेफड़ों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। आइए जानते हैं कि खड़े होकर पानी पीने के क्या नुकसान हो सकते हैं और इसे ठीक से पीने का तरीका क्या है।

    खड़े होकर पानी पीने के नुकसान

    मांसपेशियों और जोड़ों पर असर खड़े होकर पानी पीने से शरीर में टॉक्सिन्स जमा हो सकते हैं क्योंकि इस स्थिति में पानी पेट के निचले हिस्से में दबाव डालते हुए पहुंचता है। इससे शरीर की नसों पर भी दबाव पड़ता है जिससे कमर और रीढ़ की हड्डी में दर्द और जकड़न की समस्या हो सकती है। लंबे समय तक इस आदत को अपनाने से मांसपेशियों और जोड़ों में ऐंठन और समस्या हो सकती है।

    किडनी से जुड़ी परेशानियां

    जब आप खड़े होकर पानी पीते हैं तो पानी जल्दी से पेट के निचले हिस्से में पहुंचता है और किडनी के ऊपर अधिक दबाव डालता है। इस दबाव के कारण किडनी का कार्य प्रभावित हो सकता है, जिससे शरीर में पानी का फिल्टरेशन सही तरीके से नहीं हो पाता। दूसरी ओर बैठकर पानी पीने से शरीर धीरे-धीरे पानी अवशोषित करता है, जिससे किडनी का कार्य संतुलित रहता है और किडनी पर दबाव कम पड़ता है।

    फेफड़ों और हृदय को नुकसान

    खड़े होकर पानी पीने से विटामिन्स और पोषक तत्व सही तरीके से पाचन तंत्र और लिवर तक नहीं पहुंच पाते। इससे हृदय और फेफड़ों की सेहत पर भी असर पड़ सकता है। इसके अलावा यह शरीर में ऑक्सीजन के स्तर को भी प्रभावित कर सकता है जिससे सांस लेने में तकलीफ हो सकती है।

    पाचन प्रक्रिया होती है प्रभावित

    खड़े होकर पानी पीने से पानी तेजी से पेट में पहुंचता है, जो पाचन तंत्र को सही तरीके से काम करने का समय नहीं देता। इससे गैस, अपच पेट भारी रहने और पेट की अन्य समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। पानी का सही तरीके से पाचन में शामिल होना बेहद जरूरी है और बैठकर पानी पीने से यह प्रक्रिया बेहतर तरीके से होती है।

    पानी पीने का सही तरीका

    स्वस्थ शरीर और बेहतर पाचन के लिए पानी पीने का तरीका बहुत महत्वपूर्ण है। विशेषज्ञों के अनुसार बैठकर पानी पीना सबसे अच्छा होता है। इसे धीरे-धीरे और शांतिपूर्वक पीना चाहिए, जिससे पानी अच्छे से शरीर में अवशोषित हो सके। पीठ सीधी रखकर पानी पिएं ताकि शरीर में कोई अतिरिक्त दबाव न पड़े और रक्त संचार सही से हो। 7-8 गिलास पानी हर दिन पीना चाहिए, ताकि शरीर हाइड्रेटेड रहे और विषाक्त तत्व बाहर निकल सकें। पानी पीना जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी उसका सही तरीका अपनाना भी है। खड़े होकर पानी पीने से शरीर पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है, खासकर किडनी पाचन तंत्र और हृदय पर। इसलिए, स्वस्थ रहने के लिए हमेशा बैठकर और धीरे-धीरे पानी पिएं ताकि शरीर को बेहतर तरीके से हाइड्रेट किया जा सके और आपकी सेहत पर कोई बुरा असर न पड़े।

  • प्रेमानंद महाराज का असली नाम और उनके जीवन की प्रेरणादायक यात्रा

    प्रेमानंद महाराज का असली नाम और उनके जीवन की प्रेरणादायक यात्रा


    नई दिल्ली । प्रेमानंद महाराज का नाम आज के समय में किसी आध्यात्मिक चमत्कार से कम नहीं माना जाता है। उनका जीवन आत्मसमर्पण, भक्ति और अडिग विश्वास का प्रतीक बन चुका है। जहां एक ओर चिकित्सकीय दृष्टिकोण से उनकी दोनों किडनियां पूरी तरह से खराब हो चुकी हैं और वे डायलिसिस पर हैं वहीं दूसरी ओर प्रेमानंद महाराज हर रात 2 बजे उठकर वृंदावन की परिक्रमा करते हैं और अपने भक्तों को ऊर्जा से भरपूर प्रवचन देते हैं। यह असाधारण साहस और भक्ति का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत करता है।

    अनिरुद्ध से प्रेमानंद महाराज तक का सफर

    प्रेमानंद महाराज का जन्म उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले के एक छोटे से गाँव सरसौल में हुआ था। उनका असली नाम अनिरुद्ध कुमार पांडे था। उनका पालन-पोषण एक धर्मनिष्ठ ब्राह्मण परिवार में हुआ, जहां भक्ति के संस्कार उन्हें विरासत में मिले थे। उनके दादा एक सन्यासी थे और माता-पिता भी धार्मिक प्रवृत्तियों के अनुयायी थे। बचपन से ही अनिरुद्ध का झुकाव आध्यात्मिकता की ओर था। वह बाकी बच्चों की तरह खेल-कूद में व्यस्त नहीं रहते थे बल्कि अक्सर ध्यान और मंत्र जाप में लीन रहते थे।13 वर्ष की उम्र में, जब अन्य बच्चे अपने भविष्य के सपनों में खोए रहते हैं, अनिरुद्ध ने घर छोड़कर संन्यास की राह पकड़ ली। इस समय से उनकी आध्यात्मिक यात्रा की शुरुआत हुई और उन्होंने नैमिषारण्य में गहरी तपस्या की। यहां उन्हें आनंद स्वरूप ब्रह्मचारी के नाम से पहचाना गया।

    शिव भक्ति से कृष्ण प्रेम तक का सफर

    आध्यात्मिकता के प्रति अपनी गहरी निष्ठा के कारण अनिरुद्ध ने भगवान शिव की उपासना की और मोक्ष प्राप्ति के लिए जीवन समर्पित कर दिया। लेकिन एक दिन उन्हें किसी संत के माध्यम से वृंदावन की महिमा और भगवान कृष्ण की रासलीला के बारे में ज्ञात हुआ। इसके बाद उन्होंने महादेव की आज्ञा लेकर वृंदावन की यात्रा की और वहां पहुंचते ही उनका दिल पूरी तरह से बदल गया। वृंदावन की रज में कदम रखते ही उन्होंने राधा वल्लभ संप्रदाय को अपनाया और चैतन्य महाप्रभु की भक्ति पद्धति से प्रभावित हुए। यहीं पर उनकी मुलाकात उनके गुरु गौरांगी शरण महाराज से हुई। गुरु के साथ बिताए गए समय में उन्होंने 10 वर्षों तक सेवा की, और राधा रानी के चरणों में अनन्य भक्ति के कारण उन्हें नया नाम मिला: प्रेमानंद गोविंद शरण, जिसे आज पूरी दुनिया प्रेमानंद महाराज के नाम से जानती है।

    किडनियां फेल, फिर भी भक्ति का पावर हाउस

    प्रेमानंद महाराज का जीवन किसी चमत्कार से कम नहीं है। चिकित्सकों के अनुसार उनकी दोनों किडनियां पूरी तरह से फेल हो चुकी हैं और वे लंबे समय से डायलिसिस पर हैं। ऐसी स्थिति में किसी सामान्य व्यक्ति के लिए बिस्तर से उठना भी मुश्किल होता, लेकिन प्रेमानंद महाराज की भक्ति और आत्मविश्वास की कोई सीमा नहीं। हर रात 2 बजे उठकर वे वृंदावन की परिक्रमा करते हैं और घंटों तक अपने भक्तों को ऊर्जावान प्रवचन देते हैं। उनकी भक्ति की शक्ति का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि उन्होंने अपनी किडनियों का नाम राधा और कृष्ण रखा है। वे अक्सर कहते हैं कि यह शरीर केवल राधा रानी की सेवा का एक साधन है, और जब तक उनकी इच्छा है, यह शरीर कार्य करता रहेगा। प्रेमानंद महाराज की भक्ति का ये अद्वितीय रूप उनके भक्तों के लिए एक निरंतर प्रेरणा स्रोत है। उनका जीवन यह सिद्ध करता है कि आत्मविश्वास, भक्ति और विश्वास के बल पर कोई भी कठिनाई अजेय नहीं होती।

  • अघोरी बाबा बनने की कठिन साधना: 12 साल की तपस्या और 5 कठिन नियम

    अघोरी बाबा बनने की कठिन साधना: 12 साल की तपस्या और 5 कठिन नियम


    नई दिल्ली । अघोरी बाबा हिंदू धर्म के सबसे रहस्यमयी और कठिन आध्यात्मिक पंथों में से एक माने जाते हैं। भगवान शिव के भैरव रूप के उपासक अघोरी अपनी कठोर साधना भूत-प्रेत से संबंधित क्रियाओं और सनातन मार्ग से अलग हटकर जीवनशैली के लिए प्रसिद्ध हैं। अघोर शब्द का शाब्दिक अर्थ होता है जो घोर न हो यानी एक ऐसा व्यक्ति जो संसार की जटिलताओं से ऊपर उठकर अत्यधिक सरल और सहज जीवन जीता हो। हालांकि इस सहजता तक पहुंचने का मार्ग अत्यंत कठिन है और इसके लिए एक कठोर साधना की आवश्यकता होती है।

    अघोरी बनने के लिए 12 वर्षों की कठिन तपस्या

    अघोरी बनने के लिए सबसे पहली शर्त है 12 वर्षों की तपस्या। यह तपस्या किसी साधारण साधना से कहीं अधिक कठोर होती है। अघोरी बनने के इच्छुक व्यक्ति को पहले अपने गुरु के पास जाकर उनका दीक्षा ग्रहण करना होता है। इस दौरान गुरु के मार्गदर्शन में शारीरिक मानसिक और आध्यात्मिक स्तर पर कठिन साधनाएं की जाती हैं। अघोरी बनने के इस रास्ते में व्यक्ति को अपने शरीर और आत्मा को नियंत्रित करने की अत्यधिक कठिन प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। गुरु की उपस्थिति में 12 साल की साधना के दौरान, अघोरी ने अपनी चेतना को शुद्ध करने के लिए व्रत, उपवास और अन्य कठिन तपों का पालन करना होता है। यह तपस्या आत्मा को शुद्ध करने और शिव भक्ति में गहरे उतरने के लिए की जाती है।

    सांसारिक मृत्यु और नया जन्म

    अघोरी बनने से पूर्व व्यक्ति को एक मानसिक और शारीरिक मृत्यु का अनुभव करना होता है। इसका अर्थ है कि वह अपने परिवार और समाज के लिए पूरी तरह से मृत हो चुका है और उसे एक नए जन्म की आवश्यकता होती है। यह मृत्यु एक प्रकार का ‘पिंडदान’ होती है जिसमें व्यक्ति अपने पुराने अहंकार और सांसारिक आकर्षण को छोड़कर केवल शिव भक्ति की ओर अग्रसर होता है। अघोरी बनने के बाद उनका जीवन पूरी तरह से गुरु और शिव की सेवा में समर्पित हो जाता है। उनके द्वारा किए गए कार्यों और साधनाओं में कोई भी परंपरागत या सामाजिक बंधन नहीं होते। वे अपने मार्ग में जाने वाले हर कार्य को भैरव रूप में स्वीकार करते हैं।

    अघोरी जीवन के 5 कठिन नियम

    शरीर की तपस्या: अघोरी के लिए शरीर केवल एक माध्यम होता है, और इसे पूरी तरह से शुद्ध किया जाता है। शरीर को संयमित और तपस्वी जीवन जीने के लिए तैयार किया जाता है। सांसारिक मोह-माया से दूर रहना: अघोरी के लिए यह आवश्यक है कि वह सांसारिक सुख-साधनों से दूर रहे। उन्हें अपनी इच्छाओं और भौतिक सुखों से कोई आकर्षण नहीं होता। मृत्यु और जीवन के बीच की सीमा को समझना: अघोरी प्राचीन परंपराओं के अनुसार मृत्यु को एक प्राकृतिक प्रक्रिया मानते हैं और वे उसे शिव के रूप में स्वीकार करते हैं। इसके कारण वे शवों के पास बैठकर साधना करते हैं और शमशान भूमि को भी अपने साधना स्थल के रूप में चुनते हैं।

    नकारात्मक ऊर्जा से संवाद अघोरी अक्सर भूत-प्रेत और नकारात्मक शक्तियों से संवाद करते हैं। इसका उद्देश्य आत्मा को शुद्ध करना और सच्चे शिव दर्शन को प्राप्त करना होता है। निर्विकल्प समर्पण: अघोरी बाबा के लिए समर्पण सबसे बड़ा साधना है। उन्हें अपने जीवन में कोई दुराव या स्वार्थ नहीं होता वे पूर्ण रूप से शिव की भक्ति में लीन रहते हैं। घोरी बनने की साधना को आम तौर पर एक अत्यंत कठिन और जोखिमपूर्ण प्रक्रिया माना जाता है, लेकिन इसके जरिए व्यक्ति अपनी आत्मा की शुद्धि और शिव के निकटता प्राप्त करने का प्रयास करता है। यह एक ऐसा मार्ग है जिसमें शरीर, मन, और आत्मा की पूरी तपस्या और बलिदान शामिल होता है।

  • Post Office Time Deposit: ₹7 लाख निवेश पर 5 साल में ₹10.14 लाख, गारंटीड रिटर्न और जीरो रिस्क वाली सुरक्षित स्कीम

    Post Office Time Deposit: ₹7 लाख निवेश पर 5 साल में ₹10.14 लाख, गारंटीड रिटर्न और जीरो रिस्क वाली सुरक्षित स्कीम


    नई दिल्ली। पोस्ट ऑफिस टाइम डिपॉज़िट स्कीम (Post Office Time Deposit Scheme) उन निवेशकों के लिए फिर से आकर्षण का केंद्र बन गई है, जो सुरक्षित और गारंटीड रिटर्न की तलाश में हैं। यह योजना बैंक एफडी की तरह काम करती है और इसे पूरी तरह से भारत सरकार का समर्थन प्राप्त है, जिससे इसमें निवेश पूरी तरह सुरक्षित माना जाता है। इस स्कीम के तहत निवेशक ऑफलाइन और ऑनलाइन दोनों तरीकों से अकाउंट खोल सकते हैं और जरूरत पड़ने पर इसे देश के किसी भी पोस्ट ऑफिस में आसानी से ट्रांसफर किया जा सकता है।

    पोस्ट ऑफिस टाइम डिपॉज़िट एक फिक्स्ड-इनकम स्मॉल सेविंग स्कीम है, जिसमें निवेशक अपनी पसंद की अवधि के लिए एकमुश्त राशि जमा कर सकते हैं और तय अवधि के बाद गारंटीड ब्याज प्राप्त कर सकते हैं। वर्तमान में इस योजना पर 1 साल से लेकर 5 साल की अवधि के लिए 6.90% से 7.50% तक की ब्याज दर मिल रही है।

    इसका मतलब यह है कि कम जोखिम चाहने वाले निवेशक इस योजना के जरिए बिना बाजार की चिंता किए मजबूत रिटर्न हासिल कर सकते हैं।

    इस योजना की सबसे बड़ी खासियत इसकी सुरक्षा और स्थिरता है। चूंकि यह वित्त मंत्रालय का समर्थन प्राप्त है, इसलिए इसमें निवेश का जोखिम लगभग नगण्य है। निवेशक अपनी सुविधा अनुसार 1, 2, 3 या 5 साल की अवधि में पैसा लगा सकते हैं। न्यूनतम निवेश केवल 1,000 रुपये है और इसके बाद 1,000 रुपये के मल्टीपल में कोई भी राशि जमा की जा सकती है। अधिकतम निवेश की कोई सीमा नहीं है, जिससे बड़े निवेशक भी आसानी से इसमें पैसा लगा सकते हैं।

    लिक्विडिटी के मामले में भी यह स्कीम निवेशकों के लिए बेहद लाभकारी है।

    अकाउंट खोलने के 6 महीने बाद समय से पहले पैसा निकालने की अनुमति होती है। हालांकि, प्री-मैच्योर विदड्रॉल पर ब्याज दर थोड़ी कम हो सकती है, लेकिन यह सुविधा फाइनेंशियल इमरजेंसी की स्थिति में बेहद उपयोगी साबित होती है।

    अब बात करते हैं 7 लाख रुपये के निवेश पर मिलने वाले रिटर्न की। यदि कोई निवेशक पोस्ट ऑफिस की 5 साल वाली टाइम डिपॉज़िट स्कीम में 7.50% ब्याज दर पर ₹7,00,000 एकमुश्त जमा करता है, तो 60 महीने बाद उसे लगभग ₹3,14,964 सिर्फ ब्याज के रूप में प्राप्त होंगे। मैच्योरिटी के समय कुल राशि लगभग ₹10,14,964 बन जाएगी। इस रिटर्न की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह पूरी तरह गारंटीड है और इसमें बाजार के उतार-चढ़ाव का कोई असर नहीं पड़ता।

    टैक्स के नजरिए से भी यह स्कीम निवेशकों के लिए फायदेमंद है। 5 साल की टाइम डिपॉज़िट पर इनकम टैक्स एक्ट की धारा 80C के तहत सालाना ₹1.5 लाख तक की टैक्स छूट का लाभ उठाया जा सकता है। हालांकि, स्कीम से मिलने वाले ब्याज पर टैक्स देना अनिवार्य है और अगर सालाना ब्याज तय सीमा से ज्यादा होता है तो TDS कट सकता है। पोस्ट ऑफिस टाइम डिपॉज़िट में ब्याज की गणना तिमाही आधार पर कंपाउंडिंग के साथ की जाती है और ब्याज का भुगतान सालाना होता है।

    यह व्यवस्था उन निवेशकों के लिए बेहद लाभकारी है, जो लंबी अवधि में कंपाउंडिंग से बेहतर फंड बनाना चाहते हैं और हर साल निश्चित ब्याज आय पाना चाहते हैं।

    कुल मिलाकर, पोस्ट ऑफिस टाइम डिपॉज़िट स्कीम उन लोगों के लिए एक बेहतरीन निवेश विकल्प है जो सुरक्षित, गारंटीड और जोखिम-रहित रिटर्न चाहते हैं। 7 लाख रुपये के निवेश पर 5 साल में 10 लाख रुपये से अधिक का फंड तैयार होना इस बात का सबूत है कि यह योजना लंबी अवधि के लिए भरोसेमंद और मजबूत निवेश विकल्प साबित हो सकती है।

  • प्रधानमंत्री मोदी का गुजरात दौरा: धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों मे

    प्रधानमंत्री मोदी का गुजरात दौरा: धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों मे


    नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार शाम से गुजरात दौरे की शुरुआत करेंगे। वे शाम 8 बजे सोमनाथ मंदिर में ओंकार मंत्र का जाप करने वाले भक्तों के साथ शामिल होंगे। इसके बाद मंदिर परिसर में आयोजित विशेष ड्रोन शो का अवलोकन करेंगे, जो धार्मिक और सांस्कृतिक समर्पण का प्रतीक माना जा रहा है।

    सोमनाथ स्वाभिमान पर्व और शौर्य यात्रा

    11 जनवरी को प्रधानमंत्री सुबह 9:45 बजे ‘शौर्य यात्रा’ में भाग लेंगे, जिसमें उन वीर योद्धाओं को सम्मानित किया जाएगा जिन्होंने सोमनाथ मंदिर की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दी। इसके बाद सुबह 10:15 बजे मंदिर में दर्शन और पूजा होगी। सुबह 11 बजे ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ के तहत एक सार्वजनिक कार्यक्रम आयोजित होगा।

    राजकोट में वाइब्रेंट गुजरात सम्मेलन

    सोमनाथ के कार्यक्रम के बाद प्रधानमंत्री राजकोट के लिए रवाना होंगे। वहां वे कच्छ और सौराष्ट्र क्षेत्र के लिए आयोजित ‘वाइब्रेंट गुजरात क्षेत्रीय सम्मेलन’ में शामिल होंगे। दोपहर 1:30 बजे वे सम्मेलन के व्यापार शो और प्रदर्शनी का उद्घाटन करेंगे, इसके बाद दोपहर 2 बजे मारवाड़ी विश्वविद्यालय में क्षेत्रीय सम्मेलन का औपचारिक उद्घाटन होगा और प्रतिभागियों को संबोधित करेंगे।

    अहमदाबाद मेट्रो का उद्घाटन

    राजकोट से प्रधानमंत्री अहमदाबाद जाएंगे। शाम 5:15 बजे महात्मा मंदिर मेट्रो स्टेशन पर सेक्टर 10A से महात्मा मंदिर तक अहमदाबाद मेट्रो के चरण 2 के शेष खंड का उद्घाटन करेंगे। यह परियोजना शहर की परिवहन सुविधा को और बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

    अहमदाबाद में जर्मन चांसलर से द्विपक्षीय बैठक

    12 जनवरी को प्रधानमंत्री मोदी अहमदाबाद में जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज से मुलाकात करेंगे। सुबह 9:30 बजे दोनों नेता साबरमती आश्रम का दौरा करेंगे और 10 बजे साबरमती रिवरफ्रंट पर अंतरराष्ट्रीय पतंग महोत्सव में भाग लेंगे। इसके बाद 11:15 बजे महात्मा मंदिर, गांधीनगर में द्विपक्षीय वार्ता होगी। यह बैठक भारत-जर्मनी रणनीतिक साझेदारी की 25 वर्ष की प्रगति की समीक्षा करेगी।

    तीन दिवसीय दौरे का महत्व

    प्रधानमंत्री मोदी का यह तीन दिवसीय दौरा धार्मिक स्थलों, क्षेत्रीय विकास और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को जोड़ने वाला माना जा रहा है। सोमनाथ और अहमदाबाद में सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ-साथ राजकोट में वाइब्रेंट गुजरात सम्मेलन में उद्योग और व्यापार पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। यह दौरा गुजरात की सामाजिक, आर्थिक और कूटनीतिक महत्वाकांक्षाओं को मजबूत करने में सहायक होगा।