Author: bharati

  • वंदे मातरम् के 150 वर्ष: देशभर में भारतीय सेना के विशेष बैंड कार्यक्रम, देशभक्ति की धुनों से गूंजेंगे शहर

    वंदे मातरम् के 150 वर्ष: देशभर में भारतीय सेना के विशेष बैंड कार्यक्रम, देशभक्ति की धुनों से गूंजेंगे शहर



    नई दिल्ली
    । राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् की 150वीं वर्षगांठ को ऐतिहासिक और यादगार बनाने के लिए भारतीय सेना ने देशभर में विशेष बैंड परफॉर्मेंस आयोजित करने की व्यापक योजना बनाई है। यह आयोजन केवल एक सांगीतिक प्रस्तुति नहीं होगा बल्कि राष्ट्र की एकता सांस्कृतिक विरासत और देशभक्ति की भावना को सशक्त करने का प्रयास भी होगा। सेना के ये विशेष कार्यक्रम 19 से 26 जनवरी 2026 तक देश के प्रमुख शहरों में आयोजित किए जाएंगे।भारतीय सेना के अनुसार प्रत्येक बैंड परफॉर्मेंस लगभग 45 मिनट की होगी और इन्हें दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे के बीच आयोजित किया जाएगा। इन कार्यक्रमों में मिलिट्री बैंड और आर्मी सिम्फनी बैंड द्वारा वंदे मातरम् सहित कई देशभक्ति गीतों की प्रस्तुति दी जाएगी। संगीत के माध्यम से आम जनता को राष्ट्र के इतिहास बलिदान और एकता की भावना से जोड़ना इन आयोजनों का मुख्य उद्देश्य है।

    इन विशेष प्रस्तुतियों के लिए देश के लगभग हर क्षेत्र को शामिल किया गया है। बिहार में पटना और गया उत्तर प्रदेश में लखनऊ और प्रयागराज उत्तराखंड में देहरादून छत्तीसगढ़ में रायपुर ओडिशा में गोपालपुर और कर्नाटक में बेंगलुरु में सेना के बैंड कार्यक्रम होंगे। मध्य प्रदेश में जबलपुर महाराष्ट्र में मुंबई और पुणे तेलंगाना में हैदराबाद हिमाचल प्रदेश में शिमला राजस्थान में जयपुर और लद्दाख के कारगिल जैसे सामरिक और ऐतिहासिक महत्व वाले स्थानों को भी इस आयोजन में शामिल किया गया है।राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में इंडिया गेट पर 18 जनवरी 2026 को आर्मी सिम्फनी बैंड की विशेष प्रस्तुति होगी जिसे इस श्रृंखला का प्रमुख आकर्षण माना जा रहा है। वहीं पश्चिम बंगाल के नैहाटी में एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा जो वंदे मातरम् के रचयिता बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की जन्मस्थली है। इस आयोजन को सांस्कृतिक और भावनात्मक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    भारतीय सेना का कहना है कि इन कार्यक्रमों का उद्देश्य नई पीढ़ी को राष्ट्रीय गीतों और स्वतंत्रता संग्राम के सांस्कृतिक पक्ष से जोड़ना है। सेना के अधिकारियों के अनुसार संगीत एक ऐसा माध्यम है जो बिना शब्दों के भी देशप्रेम और एकता का संदेश देता है। यही कारण है कि इन प्रस्तुतियों को सार्वजनिक और निःशुल्क रखा गया है ताकि अधिक से अधिक लोग इसमें भाग ले सकें।विशेषज्ञों और शिक्षाविदों का मानना है कि ऐसे आयोजन युवाओं में राष्ट्रीय चेतना को मजबूत करते हैं और उन्हें अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ते हैं। सेना के इन कार्यक्रमों में विभिन्न सांस्कृतिक और शैक्षिक संस्थानों की सहभागिता भी सुनिश्चित की जा रही है जिससे यह आयोजन केवल सैन्य नहीं बल्कि एक व्यापक राष्ट्रीय उत्सव का रूप ले सके।

  • घर में गंगाजल रखते समय न करें ये गलतियां जानें सही तरीका

    घर में गंगाजल रखते समय न करें ये गलतियां जानें सही तरीका


    नई दिल्ली । गंगाजल को हिंदू धर्म में अत्यधिक पवित्र और शुद्ध माना जाता है। इसे देवी गंगा का स्वरूप माना जाता है, और यह घर में शुद्धता और आशीर्वाद लाने के लिए रखा जाता है। मगर गंगाजल को सही विधि से रखना बेहद जरूरी है, क्योंकि अगर इसे गलत तरीके से रखा जाए तो इसके आध्यात्मिक प्रभाव में कमी आ सकती है। आइए जानते हैं कि घर में गंगाजल रखने का सही तरीका क्या है और कौन सी गलतियां नहीं करनी चाहिए।

    सही पात्र का चयन करें

    गंगाजल को हमेशा तांबे, पीतल, चांदी या कांच के बर्तन में ही रखें। ये सामग्री पवित्रता को बनाए रखने में मदद करती हैं। प्लास्टिक और लोहे के बर्तनों में गंगाजल रखना अशुद्ध माना जाता है। साथ ही, बर्तन को हमेशा साफ और गंगाजल के लिए ही इस्तेमाल करें, ताकि उसमें कोई और अशुद्धता न घुले।

    गंगाजल रखने की सही जगह

    गंगाजल को घर के मंदिर या पूजा स्थल में ही रखना चाहिए। इसे कभी भी जमीन पर नहीं रखें। गंगाजल रखने के लिए सबसे उपयुक्त स्थान पूजा का स्थान है, जहां नियमित रूप से श्रद्धा भाव से पूजा होती हो। बाथरूम, रसोई या शयनकक्ष में गंगाजल रखना गलत माना जाता है, क्योंकि इन स्थानों को पवित्र नहीं माना जाता।

    ढककर रखें

    गंगाजल के पात्र को हमेशा ढककर रखें ताकि उसमें धूल या कोई भी अशुद्धता न जाए। ढक्कन साफ होना चाहिए और उसे नियमित रूप से धोकर रखना चाहिए। गंगाजल का शुद्धता बनाए रखना बहुत महत्वपूर्ण है, इसलिए इसे बिना ढके रखने से बचें।

    गंगाजल का उपयोग केवल पवित्र कार्यों के लिए करें

    गंगाजल का इस्तेमाल केवल पूजा, हवन, व्रत, संस्कार और शुद्धिकरण के लिए ही करना चाहिए। इसे किसी आम कार्य के लिए इस्तेमाल करना अनुचित होता है। साथ ही अशुद्ध अवस्था में या बिना स्नान किए गंगाजल को छूने से बचें। यह गंगाजल की पवित्रता को प्रभावित कर सकता है।

    बचा हुआ गंगाजल कैसे निपटान करें

    गंगाजल का नाली में बहाना कभी भी नहीं करना चाहिए, क्योंकि यह गंगाजल की पवित्रता के खिलाफ है। यदि गंगाजल बच जाए तो इसे पौधों की जड़ों में डाल सकते हैं, जो कि शुभ माना जाता है। इससे वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और पौधों की वृद्धि में भी मदद मिलती है। गंगाजल को घर में रखना एक पवित्र कार्य है और इसे सही तरीके से रखने से इसके आध्यात्मिक प्रभाव और शुद्धता में वृद्धि होती है। गंगाजल को सही पात्र में सही स्थान पर और सही तरीके से रखने से न केवल घर में शांति और सौभाग्य का वास होता है बल्कि इससे जीवन में सकारात्मक ऊर्जा भी बनी रहती है। इन सरल नियमों का पालन करके आप गंगाजल की महिमा और शक्ति का सही तरीके से अनुभव कर सकते हैं।

  • प्रदूषण से जूझते मध्य प्रदेश में विकास की भारी कीमत, 15 लाख पेड़ों की कटाई पर उठे गंभीर सवाल

    प्रदूषण से जूझते मध्य प्रदेश में विकास की भारी कीमत, 15 लाख पेड़ों की कटाई पर उठे गंभीर सवाल


    मध्य प्रदेश में एक ओर वायु प्रदूषण लगातार खतरनाक स्तर पर पहुंच रहा है, वहीं दूसरी ओर विकास परियोजनाओं के नाम पर बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई प्रस्तावित है। राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण एनजीटीद्वारा राज्य के आठ शहरों को गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट की श्रेणी में रखे जाने के बावजूद इन्हीं क्षेत्रों में लाखों पेड़ों को काटने की तैयारी ने पर्यावरण और जनस्वास्थ्य दोनों को लेकर चिंता बढ़ा दी है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार केवल इन आठ शहरों में ही करीब 6.50 लाख पेड़ों के कटने का प्रस्ताव है, जबकि पूरे प्रदेश में विभिन्न परियोजनाओं के चलते लगभग 15 लाख पेड़ संकट में हैं।

    जिन शहरों को एनजीटी और प्रदूषण नियंत्रण एजेंसियों ने सबसे अधिक प्रदूषित माना है, उनमें भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, उज्जैन, सिंगरौली, सागर और देवास शामिल हैं। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड सीपीसीबीके अनुसार इन शहरों में पीएम-10 का औसत स्तर 130 से 190 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर और पीएम-2.5 का स्तर 80 से 100 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर तक दर्ज किया गया है, जो सुरक्षित सीमा से कई गुना अधिक है। इसके बावजूद इन्हीं इलाकों में सड़क, मेट्रो, कोयला, ऊर्जा और परिवहन से जुड़ी परियोजनाओं के लिए पुराने और परिपक्व पेड़ों को हटाने की योजनाएं आगे बढ़ाई जा रही हैं।

    सबसे बड़ा पर्यावरणीय खतरा सिंगरौली जिले में प्रस्तावित धिरौली कोल ब्लॉक परियोजना से जुड़ा माना जा रहा है। इस परियोजना के लिए करीब 1,397 हेक्टेयर वन भूमि आवंटित की गई है, जिसमें अधिकांश हिस्सा घने जंगल का है। जानकारी के अनुसार अब तक लगभग 35 हजार पेड़ काटे जा चुके हैं, जबकि करीब 5.70 लाख और पेड़ों के कटने की आशंका जताई जा रही है। सिंगरौली पहले से ही कोयला खनन और ताप विद्युत संयंत्रों के कारण गंभीर प्रदूषण झेल रहा है।राजधानी भोपाल में अयोध्या बायपास को फोरलेन से 10 लेन में तब्दील करने की योजना के तहत लगभग 7,800 पेड़ों को हटाने की अनुमति दी गई है। इसके अलावा कोलार बायपास और बंगरसिया से भोजपुर तक सड़क निर्माण कार्यों में भी बड़ी संख्या में पेड़ पहले ही काटे जा चुके हैं। इंदौर में रीगल चौराहे पर मेट्रो स्टेशन निर्माण के लिए 1,200 से अधिक पेड़ों पर संकट है, जबकि इंदौर-उज्जैन मार्ग के चौड़ीकरण में करीब 3,000 पेड़ प्रभावित होंगे।

    ग्वालियर में थाटीपुर रीडेंसिफिकेशन योजना और अन्य सड़क परियोजनाओं के चलते हजारों पुराने पेड़ हटाए जा चुके हैं या हटाने की प्रक्रिया में हैं। मंडला जिले में बसनिया डेम और उससे जुड़ी नहर व पावर परियोजनाओं से लगभग 2,100 हेक्टेयर वन क्षेत्र प्रभावित होगा, जहां करीब 5 लाख पेड़ों के कटने का अनुमान है। डिंडोरी में नर्मदा पर प्रस्तावित राघवपुर बांध और महू-खंडवा रेलवे लाइन परियोजना भी बड़े पैमाने पर वन कटाई का कारण बन रही हैं।पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि प्रदूषण से जूझ रहे शहरों में हरित आवरण का इस तरह कम होना सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट को और गहरा सकता है। वहीं सरकार का तर्क है कि इन परियोजनाओं के बदले बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण किया जाएगा, लेकिन विशेषज्ञ सवाल उठा रहे हैं कि क्या नए पौधे दशकों पुराने पेड़ों की भरपाई कर पाएंगे।

  • वेश्यावृत्ति व तस्करी के आरोपों पर हाईकोर्ट सख्त, IG से कहा– सोच बदलिए, 11 साल का डेटा पेश करें

    वेश्यावृत्ति व तस्करी के आरोपों पर हाईकोर्ट सख्त, IG से कहा– सोच बदलिए, 11 साल का डेटा पेश करें


    ग्वालियर। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने लड़कियों की कथित तस्करी और जबरन वेश्यावृत्ति से जुड़े एक गंभीर मामले में पुलिस प्रशासन के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई है। ग्वालियर खंडपीठ ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि महिलाओं और नाबालिगों से जुड़े अपराधों को हल्के में लेना अस्वीकार्य है। अदालत ने ग्वालियर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक अरविंद सक्सेना को व्यक्तिगत रूप से पेश होने के निर्देश देते हुए वर्ष 2014 से अब तक के 11 वर्षों में ग्वालियर संभाग से लापता हुई लड़कियों और उनकी बरामदगी से जुड़ा विस्तृत रिकॉर्ड तलब किया है।

    यह सख्त आदेश पायल नामक महिला द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया गया। याचिका में आरोप लगाया गया है कि शिवपुरी जिले में कुछ संगठित गिरोह युवतियों को बंधक बनाकर उनसे जबरन देह व्यापार करवा रहे हैं। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता ऋषिकेश बोहरे ने अदालत को बताया कि इस संबंध में पुलिस और प्रशासन को कई बार शिकायतें दी गईं, लेकिन कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से पेश जवाब पर अदालत ने तीखी आपत्ति जताई। शासन ने अपने जवाब में इस पूरे मामले को आपसी पारिवारिक विवाद बताया था। हाईकोर्ट ने इस तर्क को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि यदि आरोपों में जरा भी सच्चाई है, तो यह केवल निजी विवाद नहीं बल्कि संगठित अपराध, मानव तस्करी और गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन का मामला बनता है।

    खंडपीठ ने टिप्पणी की कि पुलिस का दृष्टिकोण बेहद चिंताजनक है। अदालत ने कहा कि महिलाओं और नाबालिगों की सुरक्षा से जुड़े मामलों में संवेदनशीलता और जिम्मेदारी सबसे अहम है। इसी क्रम में कोर्ट ने आईजी को स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा कि केवल फाइलों और कागजी जवाबों से काम नहीं चलेगा, बल्कि सोच और कार्यशैली में बदलाव जरूरी है।हाईकोर्ट ने निर्देश दिए हैं कि वर्ष 2014 से अब तक ग्वालियर संभाग में दर्ज सभी गुमशुदगी मामलों का विस्तृत ब्योरा पेश किया जाए। इसमें यह जानकारी भी शामिल करनी होगी कि कितनी लड़कियां लापता घोषित की गईं, कितनी को बरामद किया गया और कितने मामलों की जांच अब तक लंबित है। अदालत ने संकेत दिए हैं कि इन आंकड़ों के विश्लेषण के बाद पुलिस प्रशासन पर और भी सख्त निर्देश जारी किए जा सकते हैं।

    गौरतलब है कि इससे पहले शिवपुरी जिले के पुलिस अधीक्षक को भी इस मामले में तलब किया जा चुका है। हाईकोर्ट ने दो टूक कहा कि गंभीर आरोपों को नजरअंदाज करना या उन्हें घरेलू विवाद बताकर दबाना कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।अदालत के इस सख्त रुख के बाद पुलिस महकमे में हलचल मच गई है। अधिकारियों के अनुसार, पुराने रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं और आंकड़ों को संकलित करने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। वहीं महिला अधिकार संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने हाईकोर्ट के हस्तक्षेप को अहम बताते हुए कहा है कि इससे लड़कियों की सुरक्षा और पुलिस की जवाबदेही तय करने की दिशा में ठोस कदम उठाए जा सकेंगे।

  • बजट 2026 की उम्मीदें क्या मिडिल क्लास को मिलेगा राहत या फिर टैक्स की नई टेंशन

    बजट 2026 की उम्मीदें क्या मिडिल क्लास को मिलेगा राहत या फिर टैक्स की नई टेंशन


    नई दिल्ली । जैसे-जैसे फरवरी का महीना नजदीक आता है, देश के करोड़ों नौकरीपेशा और मध्यम वर्गीय परिवारों की निगाहें वित्त मंत्री के बजट भाषण पर टिक जाती हैं। 1 फरवरी 2026 को मोदी सरकार का तीसरा पूर्ण बजट पेश किया जाएगा, जो केवल आंकड़ों का हिसाब-किताब नहीं बल्कि आम आदमी की जेब और उसकी बचत का भविष्य तय करेगा।

    मौजूदा टैक्स सिस्टम का अंतिम बजट

    इस बार का यूनियन बजट 2026-27 खास और ऐतिहासिक माना जा रहा है, क्योंकि यह मौजूदा इनकम टैक्स कानून के तहत पेश होने वाला आखिरी पूर्ण बजट होगा। सरकार 1 अप्रैल 2026 से नए ‘Income Tax Act 2025’ को लागू करने की तैयारी कर रही है, जो करीब 60 साल पुराने टैक्स कानूनों को बदलने वाला है। ऐसे में, यह बजट न केवल वर्तमान टैक्स व्यवस्था को सुधारने की दिशा में अहम कदम होगा, बल्कि आने वाली टैक्स व्यवस्था की नींव भी रखेगा। आइए जानते हैं कि इस बार के बजट से टैक्सपेयर्स को किन प्रमुख राहतों की उम्मीद है

    पुराने टैक्स रिजीम का दर्द: क्या मिलेगा राहत

    पिछले साल, यानी बजट 2025 में, सरकार ने न्यू टैक्स रिजीम को आकर्षक बना दिया था। इसमें 12 लाख रुपये तक की आय को टैक्स-फ्री करने और बेसिक छूट सीमा को 4 लाख रुपये तक बढ़ाने जैसे फैसले किए गए थे। हालांकि, इसका फायदा उन लोगों को कम हुआ जिन्होंने ‘ओल्ड टैक्स रिजीम पुराना टैक्स सिस्टम अपनाया है। पुराने सिस्टम में टैक्स देने वाले लोग पीएफ होम लोन और इंश्योरेंस जैसी योजनाओं के जरिए अपनी बचत पर जोर देते हैं।

    इन लोगों की सबसे बड़ी मांग है कि बेसिक छूट सीमा जो अभी 2.5 लाख रुपये पर अटकी हुई है उसे बढ़ाकर कम से कम 3 लाख रुपये किया जाए। इसके अलावा, धारा 80C के तहत मिलने वाली 1.5 लाख रुपये की छूट अब महंगाई के दौर में नाकाफी हो चुकी है। टैक्सपेयर्स की मांग है कि इसे बढ़ाकर कम से कम 2 लाख रुपये किया जाए ताकि बच्चों की पढ़ाई स्वास्थ्य बीमा और अन्य आवश्यक खर्चों को ध्यान में रखते हुए उन्हें राहत मिल सके।

    घर और इलाज पर राहत मिडिल क्लास की बड़ी जरूरत

    महंगाई के इस दौर में घर खरीदना और बीमारी का इलाज कराना मिडिल क्लास के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। टैक्सपेयर्स का मानना है कि राहत केवल टैक्स स्लैब बदलने से नहीं मिलेगी बल्कि जरूरी खर्चों पर छूट देने से ही असली फायदा होगा। खासतौर पर होम लोन के ब्याज पर मिलने वाली 2 लाख रुपये की छूट अब घर की बढ़ती कीमतों को देखते हुए बहुत कम लगती है। ऐसे में उम्मीद है कि सरकार होम लोन ब्याज छूट को बढ़ाकर अधिक लाभकारी बनाएगी।इसके अलावा मिडिल क्लास की यह भी मांग है कि अगर सरकार न्यू टैक्स रिजीम को भविष्य के लिए स्थायी बनाना चाहती है तो इसमें स्वास्थ्य बीमा और होम लोन पर टैक्स छूट की सुविधा भी शामिल की जाए। इससे बचत और निवेश को बढ़ावा मिलेगा और मिडिल क्लास को राहत मिलेगी।

    आसान नियम और सरल टैक्स प्रक्रिया

    टैक्सपेयर्स केवल टैक्स कम करने की उम्मीद नहीं कर रहे, बल्कि वे जटिल प्रक्रियाओं से भी राहत चाहते हैं। कई बार इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने के बाद रिफंड के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है या फिर टीडीएस मैचिंग में समस्याएं आती हैं। नए से सबसे बड़ी उम्मीद यही है कि नियमों को सरल और स्पष्ट बनाया जाए।इसके अलावा ईयर की जगह टैक्स ईयर का कॉन्सेप्ट लाने की चर्चा भी हो रही है जो प्रक्रिया को और भी सरल बनाएगा। साथ ही टैक्सपेयर्स को उम्मीद है कि कैपिटल गेन टैक्स से जुड़ी जटिलताओं को दूर किया जाएगा। फिलहाल शेयर बाजार म्यूचुअल फंड और प्रॉपर्टी पर अलग-अलग टैक्स नियम लागू हैं जिससे भ्रम पैदा होता है। लोग चाहते हैं कि सभी एसेट्स के लिए एक जैसी और सरल टैक्स व्यवस्था लागू हो।

    टैक्स स्लैब में बदलाव: क्या मिलेगा राहत

    मिडिल क्लास उम्मीद कर रहा है कि टैक्स स्लैब में भी कुछ बदलाव किए जाएं ताकि उनकी टैक्स भार को हल्का किया जा सके। कई एक्सपर्ट्स का मानना है कि आयकर स्लैब की सीमा को बढ़ाने से टैक्सपेयर्स को सीधा फायदा होगा। खासकर उन लोगों को जिनकी आय 5 लाख रुपये से 10 लाख रुपये के बीच है उन्हें राहत की जरूरत है। इस स्लैब को बढ़ाकर टैक्स रेट को कम किया जा सकता है।

    भविष्य की टैक्स व्यवस्था क्या है नई उम्मीदें

    वित्त मंत्री द्वारा पेश किए जाने वाले बजट 2026 में सबसे बड़ी उम्मीद यही होगी कि नए टैक्स कानूनों का खाका तैयार किया जाएगा ताकि टैक्सपेयर्स को आने वाले समय में सटीक और सही जानकारी मिल सके। नए टैक्स कानूनों का उद्देश्य टैक्स सिस्टम को और अधिक पारदर्शी सटीक और आसान बनाना होगा ताकि आम नागरिक को किसी भी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े। बजट 2026 के जरिए मिडिल क्लास और नौकरीपेशा वर्ग को उम्मीद है कि सरकार उनके लिए टैक्स राहत, आसान नियम, और आवश्यक खर्चों पर छूट की सुविधाएं प्रदान करेगी। इस बजट का असर सीधे-सीधे लाखों लोगों की जेब और जीवनशैली पर पड़ेगा, इसलिए इस बार के बजट में टैक्सपेयर्स को खास राहत मिलने की उम्मीदें जताई जा रही हैं।

  • वंदे मातरम् के 150 साल भारतीय सेना का बैंड कार्यक्रम, इंडिया गेट से नैहाटी तक पूरे देश में धूम

    वंदे मातरम् के 150 साल भारतीय सेना का बैंड कार्यक्रम, इंडिया गेट से नैहाटी तक पूरे देश में धूम


    नई दिल्ली । भारतीय सेना वंदे मातरम् के 150 साल पूरे होने के अवसर पर देश भर में विशेष कार्यक्रमों का आयोजन कर रही है। इसके तहत 19 से 26 जनवरी 2026 तक भारतीय सेना कई प्रमुख शहरों में मिलिट्री बैंड की परफॉर्मेंस पेश करेगी। इस आयोजन का उद्देश्य न केवल वंदे मातरम् के ऐतिहासिक महत्व को सम्मान देना है, बल्कि देशवासियों में देशभक्ति एकता और राष्ट्रीय गर्व की भावना को भी मजबूत करना है।

    कार्यक्रम का शेड्यूल

    इस विशेष कार्यक्रम का हिस्सा बनने वाले प्रमुख शहरों में बिहार के पटना और गया, झारखंड के रांची, उत्तर प्रदेश के लखनऊ और प्रयागराज, उत्तराखंड के देहरादून, छत्तीसगढ़ के रायपुर, ओडिशा के गोपालपुर कर्नाटक के बेंगलुरु, मध्य प्रदेश के जबलपुर ,महाराष्ट्र के मुंबई और पुणे, तेलंगाना के हैदराबाद हिमाचल प्रदेश के शिमला, लद्दाख के कारगिल ,राजस्थान के जयपुर और दिल्ली के इंडिया गेट शामिल हैं। इन बैंड परफॉर्मेंस का उद्देश्य भारतीय सेना के संगीत और सेना के गौरव को प्रदर्शित करना है साथ ही लोगों में एकता और राष्ट्रीय गौरव का एहसास दिलाना है।

    वंदे मातरम् के रचयिता बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की जन्मस्थली पर कार्यक्रम

    विसेष महत्व रखने वाले कार्यक्रमों में से एक पश्चिम बंगाल के नैहाटी में आयोजित होगा, जो वंदे मातरम् के रचयिता बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की जन्मस्थली है। यहां सेना के बैंड द्वारा खास प्रस्तुति दी जाएगी। यह कार्यक्रम वंदे मातरम् के इतिहास को सम्मान देने और लोगों में देशभक्ति का भाव जागृत करने का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होगा।

    दिल्ली में इंडिया गेट पर आर्मी सिम्फनी बैंड की विशेष प्रस्तुति

    18 जनवरी 2026 को दिल्ली के इंडिया गेट पर आर्मी सिम्फनी बैंड का एक विशेष परफॉर्मेंस आयोजित होगा। इस कार्यक्रम का समय दोपहर 2 से 5 बजे के बीच होगा और यह आयोजन वंदे मातरम् के ऐतिहासिक महत्व को सम्मानित करने के साथ-साथ भारतीय संस्कृति और राष्ट्रीय गर्व को प्रदर्शित करेगा। सभी कार्यक्रम करीब 45 मिनट के होंगे, जो दर्शकों को भारतीय सेना की संगीत कला और देशभक्ति की भावना से प्रेरित करेंगे। इस दौरान हर शहर में सेना के मिलिट्री बैंड की लयबद्ध धुनें गूंजेंगी जो ना केवल ऐतिहासिक दृष्टिकोण से बल्कि देशवासियों के दिलों में गहरी पैठ भी बनाएंगी।

    देशभर में एकता और गौरव की लहर

    इन कार्यक्रमों का उद्देश्य वंदे मातरम् की अनमोल धुन और उसके संदेश को जनता तक पहुंचाना है। इस आयोजन के माध्यम से भारतीय सेना ने देशभर में एकता और राष्ट्रीय गौरव की लहर को फैलाने का एक बड़ा कदम उठाया है। भारत के इतिहास और संस्कृति में वंदे मातरम् का जो स्थान है, उसे और भी मजबूत बनाने की दिशा में यह आयोजन अहम साबित हो सकता है।

  • बीजेपी ने नेहरू पर निशाना साधा, सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण के विरोध में लिखे थे 17 पत्र

    बीजेपी ने नेहरू पर निशाना साधा, सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण के विरोध में लिखे थे 17 पत्र


    गुजरात। गुजरात स्थित सोमनाथ मंदिर, जिसे महमूद ग़ज़नी और अलाउद्दीन खिलजी जैसे आक्रमणकारियों ने लूटा था अब 1000 साल का उत्सव मना रहा है। इस बीच भारतीय जनता पार्टी ने एक बार फिर से पंडित जवाहरलाल नेहरू पर निशाना साधा है, जिनकी सरकार ने स्वतंत्रता के बाद सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण का विरोध किया था। बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने दावा किया कि पंडित नेहरू ने पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री लियाकत अली खान को 17 पत्र लिखे थे जिनमें उन्होंने सोमनाथ मंदिर के जीर्णोद्धार के खिलाफ अपनी नापसंदगी व्यक्त की थी।

    सुधांशु त्रिवेदी ने 21 अप्रैल, 1951 को नेहरू द्वारा लियाकत अली खान को लिखे पत्र का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि पंडित नेहरू ने मंदिर के पुनर्निर्माण के प्रयास को झूठा बताया और इसे लेकर किसी प्रकार की आस्था या राजनीति को अस्वीकार किया। त्रिवेदी ने कहा कि नेहरू ने लियाकत अली खान को प्रिय नवाबजादा कहकर संबोधित किया और सोमनाथ मंदिर के बारे में किसी भी पुनर्निर्माण के प्रयास की बात से इनकार किया।

    इस पत्र को बीजेपी ने तुष्टीकरण की राजनीति का उदाहरण बताते हुए कहा कि नेहरू ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री को खुश करने के लिए यह कदम उठाया। सुधांशु त्रिवेदी ने यह भी दावा किया कि पंडित नेहरू ने एक तरह से पाकिस्तान के प्रति आत्मसमर्पण करते हुए सोमनाथ मंदिर के निर्माण को नकार दिया था और यह दिखाता है कि स्वतंत्र भारत में नेहरू को भगवान सोमनाथ से सबसे ज्यादा नफरत थी।

    बीजेपी के प्रवक्ता ने यह सवाल भी उठाया कि अगर यह तुष्टीकरण की राजनीति और मुग़ल आक्रमणकारियों के महिमामंडन के अलावा कुछ और था तो पंडित नेहरू को लियाकत अली खान को पत्र क्यों लिखना पड़ा उन्होंने आरोप लगाया कि स्वतंत्रता के बाद के दौर में पंडित नेहरू ने भारतीय संस्कृति धार्मिक आस्थाओं और इतिहास से दूर रहते हुए पाकिस्तान के साथ संबंधों को प्राथमिकता दी।

    सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण के इस विवाद ने कई बार राजनीतिक हलकों में चर्चा पैदा की है, जहां एक तरफ बीजेपी इसे भारतीय संस्कृति और धार्मिक पुनर्निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानती है वहीं दूसरी तरफ विपक्ष इस मुद्दे पर विभाजन और तुष्टीकरण की राजनीति के आरोप लगाता रहा है।

    वर्तमान में सोमनाथ मंदिर के जीर्णोद्धार का यह उत्सव न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है बल्कि यह भारतीय राजनीति और इतिहास को भी पुन परिभाषित करने का एक अवसर बन चुका है। सोमनाथ के पुनर्निर्माण की कहानी को लेकर न केवल हिंदू धर्म के अनुयायी बल्कि भारतीय राजनीति में भी एक गहरी बहस छिड़ चुकी है।

  • शुरू हुई जनगणना की प्रक्रिया, पहले चरण के लिए टाइमलाइन घोषित

    शुरू हुई जनगणना की प्रक्रिया, पहले चरण के लिए टाइमलाइन घोषित

    नई दिल्ली । केंद्रीय गृह मंत्रालय ने बुधवार को भारत की जनगणना 2027 के पहले चरण यानी हाउसिंग और हाउसलिस्टिंग की समय-सीमा को औपचारिक रूप से अधिसूचित कर दिया। इसके तहत मकान सूचीकरण और आवास गणना की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। सरकार द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, यह प्रक्रिया इस साल 1 अप्रैल से 30 सितंबर के बीच आयोजित की जाएगी। प्रत्येक राज्य और केंद्र शासित प्रदेश इस अवधि के दौरान अपनी सुविधानुसार 30 दिनों का समय तय करेंगे। इस अधिसूचना के साथ ही 7 जनवरी 2020 की पिछली अधिसूचना को निरस्त कर दिया गया है, हालांकि उससे पहले किए गए कार्यों पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा।

    आत्म-गणना का विकल्प
    अधिसूचना में यह भी स्पष्ट किया गया है कि जनगणना 2027 में नागरिकों को सेल्फ-एन्यूमरेशन यानी स्वयं विवरण भरने का विकल्प मिलेगा। यह प्रक्रिया संबंधित राज्य/केंद्र शासित प्रदेश में 30 दिवसीय घर-घर जाकर होने वाली हाउसलिस्टिंग से ठीक पहले 15 दिनों की अवधि में पूरी की जाएगी।

    नागरिक इस दौरान जनगणना ऐप या पोर्टल के माध्यम से स्वयं जानकारी दर्ज कर सकेंगे।
    दो चरणों में होगी जनगणना

    कोविड-19 महामारी के कारण टल गई जनगणना 2021 के बाद, अब 2027 की जनगणना करने की यह कवायद दो चरणों में संपन्न की जाएगी- अप्रैल से सितंबर 2026 तक घरों की सूची बनाना और आवास गणना, और फरवरी 2027 में आबादी की गणना।

    यह पूरी प्रक्रिया 1 अप्रैल 2026 से 28 फरवरी 2027 तक चलेगी। जनगणना के लिए 1 मार्च 2027 की मध्यरात्रि (00:00 बजे) को संदर्भ तिथि माना जाएगा। हालांकि, लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश, बर्फीले क्षेत्र तथा जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के कुछ गैर-समानांतर इलाकों के लिए अलग प्रावधान किए गए हैं।
    कैबिनेट की मंजूरी और लागत

    पिछले वर्ष 12 दिसंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने जनगणना 2027 के आयोजन को मंजूरी दी थी। इस व्यापक अभियान पर कुल 11,718.2 करोड़ रुपये का खर्च अनुमानित है। इस बार की जनगणना में जातिगत पहचान से संबंधित आंकड़े भी दर्ज किए जाएंगे।
    पहली डिजिटल जनगणना

    जनगणना 2027 भारत की पहली पूर्णतः डिजिटल जनगणना होगी। इसके तहत:

    डेटा कलेक्शन के लिए मोबाइल ऐप का उपयोग किया जाएगा
    निगरानी के लिए केंद्रीय पोर्टल विकसित किया गया है
    लगभग 30 लाख फील्ड फंक्शनरी इस प्रक्रिया में शामिल होंगे

    यह जनगणना दुनिया का सबसे बड़ा प्रशासनिक और सांख्यिकीय अभ्यास मानी जा रही है।
    बेहतर डेटा और ‘’सेंसस-एज-ए-सर्विस’

    सरकार ने हाल ही में कहा है कि इस बार जनगणना के आंकड़ों का प्रकाशन अधिक पारदर्शी और यूजर-फ्रेंडली होगा। नीति-निर्माण से जुड़े सभी आवश्यक आंकड़े एक क्लिक पर उपलब्ध कराए जाएंगे। इसके तहत ‘सेंसस-एज-ए-सर्विस’ (CaaS) मॉडल अपनाया जाएगा, जिससे विभिन्न मंत्रालयों को स्वच्छ, मशीन-रीडेबल और उपयोगी डेटा उपलब्ध कराया जा सकेगा।

    घर-घर जाकर होगी गणना

    जनगणना प्रक्रिया के तहत प्रत्येक परिवार से अलग-अलग प्रश्नावलियों के जरिए हाउसलिस्टिंग एवं हाउसिंग जनगणना तथा जनसंख्या गणना की जाएगी। आमतौर पर सरकारी शिक्षक और अन्य नामित कर्मचारी, जिन्हें राज्य सरकारें नियुक्त करती हैं, वे अपने नियमित कार्यों के साथ-साथ यह गणना कार्य करेंगे।
    रीयल-टाइम मॉनिटरिंग और सुरक्षा

    पूरी प्रक्रिया के प्रबंधन और निगरानी के लिए जनगणना प्रबंधन और निगरानी प्रणाली (CMMS) नामक एक विशेष पोर्टल विकसित किया गया है। डिजिटल जनगणना को सुरक्षित बनाने के लिए उचित साइबर सुरक्षा प्रावधान भी किए गए हैं। कुल मिलाकर, जनगणना 2027 न केवल आंकड़ों के लिहाज से बल्कि तकनीक, पारदर्शिता और नीति निर्माण के स्तर पर भी भारत के लिए एक ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित होने जा रही है।

  • होमवर्क न करने पर 6 साल की बच्ची को टीचर ने ऐसा मारा थप्पड़ कि गिरने से टूटा हाथ

    होमवर्क न करने पर 6 साल की बच्ची को टीचर ने ऐसा मारा थप्पड़ कि गिरने से टूटा हाथ

    सतना। मध्यप्रदेश के सतना जिले के एक प्राइवेट स्कूल में 6 साल की मासूम बच्ची को होमवर्क पूरा न करने की ऐसी सजा मिली कि उसका हाथ टूट गया। इंग्लिश टीचर ने बच्ची को इतनी जोर से थप्पड़ मारा कि वह जमीन पर गिरी और उसका हाथ फ्रैक्चर हो गया। अब बच्ची के हाथ पर प्लास्टर चढ़ा है। हैरानी की बात यह है कि जब पिता स्कूल पहुंचे और सीसीटीवी फुटेज मांगा, तो प्रबंधन ने रटा-रटाया जवाब दे दिया कि “कैमरे खराब हैं”।
    फिलहाल पिता की शिकायत पर सिविल लाइन पुलिस ने सम्बंधित टीचर के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है।

    बर्थडे, होमवर्क और टीचर की सजा
    दरअसल पूरा मामला शहर के सिविल लाइन थाना क्षेत्र अंतर्गत आने वाले अमौधा स्थित सीएमए विद्यालय का है। यहां पतेरी के चौहान नगर निवासी पीड़ित बच्ची के पिता ने बताया की बच्ची मंगलवार को स्कूल गई थी। घर पर छोटी बहन का जन्मदिन होने के कारण वह अपना इंग्लिश का होमवर्क पूरा नहीं कर पाई थी। क्लास में जब इंग्लिश टीचर सपना खरे ने होमवर्क चेक किया और अधूरा पाया, तो वे गुस्से में तमतमा गईं।

    उन्होंने बच्ची को जोरदार थप्पड़ जड़ दिया। थप्पड़ लगते ही मासूम का संतुलन बिगड़ा और वह जमीन पर गिर पड़ी, जिससे उसके हाथ की हड्डी टूट गई।
    डरी सहमी बच्ची घर पहुंची और…

    स्कूल से लौटने के बाद डरी-सहमी बच्ची ने शाम को हाथ में दर्द की शिकायत की। मां को लगा मामूली चोट होगी, इसलिए बाम लगा दिया और बच्ची सो गई। बुधवार सुबह जब स्कूल जाने के लिए बच्ची को उठाया गया, तो उसका हाथ बुरी तरह सूजा हुआ था। परिजन घबराकर उसे जिला अस्पताल ले गए। वहां एक्स-रे करने पर फ्रैक्चर की पुष्टि हुई और डॉक्टरों ने तुरंत प्लास्टर चढ़ाया है।
    सीसीटीवी फुटेज की मांग पर क्या बोला स्कूल

    बेटी की हालत देख पिता का गुस्सा फूट पड़ा है। वे पहले सिविल लाइन थाने गए और फिर स्कूल पहुंचे।

    पिता ने प्रिंसिपल से घटना की शिकायत की और क्लासरूम का सीसीटीवी फुटेज दिखाने को कहा। लेकिन स्कूल प्रबंधन ने अपनी लापरवाही छिपाते हुए कह दिया कि कैमरे कई दिनों से खराब हैं। परिजनों का यह भी आरोप है की कभी कभार फीस लेट हो जाने पर बच्ची को परीक्षा में न बैठने की धमकी भी दी जा चुकी है। स्कूल में अनुशासन के नाम पर बच्चों के साथ शारीरिक हिंसा की जा रही है, जो कानूनन अपराध है। प्रबंधन आरोपी टीचर को बचाने की कोशिश कर रहा है।

    वही, सिविल लाइन पुलिस ने पिता की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए सम्बंधित शिक्षिका के खिलाफ बीएनएस की धाराओं के तहत मामला दर्ज लिया है और मामले पर आंगे जांच कर रही है।

  • जिनपिंग बनने जा रहे 'शांति दूत'; चीन की मदद से सुधरेंगे उत्तर और दक्षिण कोरिया के रिश्ते?

    जिनपिंग बनने जा रहे 'शांति दूत'; चीन की मदद से सुधरेंगे उत्तर और दक्षिण कोरिया के रिश्ते?


    वीजिंग। दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे-म्योंग ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से एक महत्वपूर्ण अपील की है। उत्तर कोरिया के परमाणु संकट को सुलझाने और दोनों कोरियाई देशों के बीच बढ़ती शत्रुता को कम करने के लिए उन्होंने चीन से शांति मध्यस्थ की भूमिका निभाने का आग्रह किया है। दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे-म्योंग ने बुधवार को कहा कि उन्होंने उत्तर कोरियाई परमाणु संकट के समाधान और दोनों कोरियाई देशों के बीच शत्रुता कम करने में मदद के लिए चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मध्यस्थता करने का अनुरोध किया है।
    म्योंग ने कहा कि उन्होंने यह अनुरोध दोनों नेताओं के इस सप्ताह की शुरुआत में बीजिंग में हुए शिखर सम्मेलन के दौरान किया था।

    दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति ने अपने बयान में कहा कि हम प्रयास कर रहे हैं, लेकिन उत्तर कोरिया के साथ हमारे सभी संपर्क चैनल पूरी तरह से बंद हैं, इसलिए हम बिल्कुल संवाद नहीं कर पा रहे हैं। मैंने उनसे कहा कि चीन का शांति के लिए मध्यस्थ की भूमिका निभाना अच्छा होगा। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने हमारे प्रयासों की सराहना की और कहा कि धैर्य रखने की जरूरत है।

    चीन उत्तर कोरिया का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार और प्रमुख कूटनीतिक समर्थक है। दक्षिण कोरिया और अमेरिका ने बार-बार चीन से अपने प्रभाव का उपयोग करके उत्तर कोरिया को लंबे समय से ठप पड़ी कूटनीति को फिर से शुरू करने या परमाणु निरस्त्रीकरण के लिए मनाने का आग्रह किया है।

    चीन ने उत्तर कोरिया से जुड़े मुद्दों में शामिल सभी पक्षों से संयम बरतने का आह्वान किया है। उसने हाल के वर्षों में संयुक्त राष्ट्र प्रस्तावों के तहत प्रतिबंधित हथियारों के परीक्षणों के बावजूद उत्तर कोरिया पर प्रतिबंध कड़े करने के अमेरिका और अन्य देशों के प्रयासों को रोक दिया है।

    उत्तर कोरिया ने दक्षिण कोरिया और अमेरिका के साथ बातचीत करने से इनकार कर दिया है और 2019 में उसके नेता किम जोंग उन की अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ उच्च स्तरीय परमाणु कूटनीति विफल होने के बाद से अपने परमाणु शस्त्रागार का विस्तार करने के कदम उठाए हैं।