Author: bharati

  • लाल सागर में भारतीय जहाज पर मिसाइल हमला, समुद्र में डूबा MSV Faize Noore Oliya; 13 भारतीयों समेत सभी 14 क्रू सुरक्षित

    लाल सागर में भारतीय जहाज पर मिसाइल हमला, समुद्र में डूबा MSV Faize Noore Oliya; 13 भारतीयों समेत सभी 14 क्रू सुरक्षित


    नई दिल्ली।
    यमन के तट के पास लाल सागर में भारतीय झंडे वाले कमर्शियल जहाज MSV Faize Noore Oliya पर 4 अगस्त को अचानक मिसाइल/प्रोजेक्टाइल से हमला किया गया। हमले में बुरी तरह क्षतिग्रस्त होने के बाद जहाज समुद्र में डूब गया। राहत की बात यह रही कि जहाज पर सवार सभी 14 नाविकों को सुरक्षित बचा लिया गया, जिनमें 13 भारतीय नागरिक शामिल थे।

    जानकारी के मुताबिक, जहाज पर बिना किसी उकसावे के हमला हुआ। घटना के बाद जहाज में आग लग गई और वह कुछ ही समय में लाल सागर में समा गया। यमनी कोस्ट गार्ड ने तुरंत रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू कर सभी नाविकों को सुरक्षित निकाल लिया और उन्हें मोखा बंदरगाह पहुंचाया गया।

    सभी 14 नाविक सुरक्षित, 13 भारतीय नागरिक

    हमले के समय MSV Faize Noore Oliya पर कुल 14 क्रू मेंबर मौजूद थे। इनमें 13 भारतीय और एक अन्य देश का नागरिक शामिल था। हमले के बाद पैदा हुई आपात स्थिति के बीच यमनी कोस्ट गार्ड ने तेजी से कार्रवाई करते हुए सभी को बचा लिया।

    बचाए गए नाविकों को मोखा बंदरगाह पहुंचाने के बाद उनकी सुरक्षा और आवश्यक सहायता को लेकर संबंधित एजेंसियां सक्रिय हैं।

    भारत ने निहत्थे व्यापारिक जहाज पर हमले की निंदा की

    घटना पर भारत सरकार ने कड़ा रुख अपनाते हुए निहत्थे व्यापारिक जहाज पर हुए हमले की तीखी निंदा की है। केंद्रीय बंदरगाह, नौवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल और विदेश मंत्रालय (MEA) ने हमले को गंभीर घटना बताते हुए ऐसे हमलों को तत्काल रोकने की बात कही है।

    केंद्रीय मंत्री सोनोवाल ने कहा कि भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने डायरेक्टरेट जनरल ऑफ मैरिटाइम एडमिनिस्ट्रेशन (DGMA) को संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय कर क्षेत्र में भारतीय नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और बचाए गए क्रू को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।

    लाल सागर में बढ़ा समुद्री सुरक्षा का खतरा

    लाल सागर अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। यहां किसी कमर्शियल जहाज को निशाना बनाए जाने की घटना से एक बार फिर क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।

    भारतीय पक्ष ने स्पष्ट किया है कि व्यापारिक और निहत्थे जहाजों को निशाना बनाना स्वीकार्य नहीं है। फिलहाल सभी 14 नाविक सुरक्षित हैं, जबकि संबंधित एजेंसियां घटना के कारणों और हमले की परिस्थितियों से जुड़ी जानकारी जुटा रही हैं।

  • रिलीज से पहले 'रामायण पार्ट 2' को लेकर बड़ा खुलासा, रणबीर बोले दूसरे भाग में बढ़ेगा हनुमान का दमदार रोल

    रिलीज से पहले 'रामायण पार्ट 2' को लेकर बड़ा खुलासा, रणबीर बोले दूसरे भाग में बढ़ेगा हनुमान का दमदार रोल


    नई दिल्ली ।
    भारतीय सिनेमा की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘रामायण’ को लेकर दर्शकों के बीच उत्सुकता लगातार बढ़ती जा रही है। दो भागों में बनाई जा रही इस मेगा बजट फिल्म को लेकर अभिनेता रणबीर कपूर ने बड़ा अपडेट साझा किया है। उन्होंने बताया कि पहले भाग की रिलीज से पहले ही दूसरे भाग की लगभग आधी शूटिंग पूरी की जा चुकी है। इस खुलासे के बाद फिल्म को लेकर दर्शकों की उत्सुकता और बढ़ गई है।

    रणबीर कपूर ने कहा कि फिल्म के दोनों भागों की तैयारी काफी पहले से योजनाबद्ध तरीके से की गई थी। इसी वजह से पहले भाग के निर्माण के साथ-साथ दूसरे भाग की शूटिंग भी लगातार आगे बढ़ाई गई। उनका मानना है कि इससे फिल्म के दोनों भागों के बीच निरंतरता बनी रहेगी और दर्शकों को कहानी का बेहतर अनुभव मिलेगा।

    अभिनेता ने फिल्म में हनुमान के किरदार को लेकर भी महत्वपूर्ण जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सनी देओल इस भूमिका में नजर आएंगे और दूसरे भाग में उनके किरदार का दायरा पहले भाग की तुलना में कहीं अधिक बड़ा होगा। पहले भाग में उनकी उपस्थिति सीमित रहेगी, जबकि दूसरे भाग में कहानी आगे बढ़ने के साथ हनुमान का किरदार अधिक प्रभावशाली रूप में दिखाई देगा।

    रणबीर कपूर ने यह भी कहा कि रामायण जैसी महान गाथा को केवल दो भागों में समेटना आसान नहीं है। उनके अनुसार इस महाकाव्य में इतने व्यापक प्रसंग और पात्र हैं कि इसे कई भागों में भी प्रस्तुत किया जा सकता है। उन्होंने फिल्म के निर्देशक और लेखन टीम की सराहना करते हुए कहा कि इतनी विशाल कथा को संतुलित रूप में प्रस्तुत करना बड़ी चुनौती रही है।

    उन्होंने स्पष्ट किया कि फिल्म बनाते समय मूल कथा और उसके मूल भाव से किसी प्रकार की छेड़छाड़ नहीं की गई है। पूरी टीम ने इस बात का विशेष ध्यान रखा है कि कहानी की धार्मिक, सांस्कृतिक और भावनात्मक गरिमा बनी रहे। उनका कहना है कि भगवान श्रीराम केवल एक पौराणिक पात्र नहीं बल्कि करोड़ों लोगों के लिए आदर्श, मर्यादा और जीवन मूल्यों के प्रतीक हैं।

    फिल्म में भगवान श्रीराम की भूमिका रणबीर कपूर निभा रहे हैं, जबकि माता सीता के किरदार में साई पल्लवी नजर आएंगी। रावण की भूमिका में अभिनेता यश दिखाई देंगे। इसके अलावा सनी देओल हनुमान के किरदार में दर्शकों के सामने आएंगे। फिल्म की स्टार कास्ट और भव्य निर्माण इसे भारतीय सिनेमा की सबसे चर्चित फिल्मों में शामिल कर रहा है।

    बताया जा रहा है कि फिल्म का निर्माण अत्याधुनिक विजुअल इफेक्ट्स और बड़े पैमाने पर तैयार किए गए सेट्स के साथ किया जा रहा है। निर्माताओं का उद्देश्य भारतीय संस्कृति और रामायण की कथा को वैश्विक स्तर पर भव्य रूप में प्रस्तुत करना है। इसी कारण फिल्म के तकनीकी और दृश्य पक्ष पर विशेष ध्यान दिया गया है।

    फिल्म का कुल बजट भी भारतीय सिनेमा के सबसे बड़े बजट वाली परियोजनाओं में गिना जा रहा है। निर्माताओं को उम्मीद है कि यह फिल्म न केवल देश बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी दर्शकों का ध्यान आकर्षित करेगी। अब पहले भाग की रिलीज से पहले दूसरे भाग की आधी शूटिंग पूरी होने की जानकारी ने फिल्म को लेकर दर्शकों की उत्सुकता को और बढ़ा दिया है।

  • UPI पेमेंट सिस्टम में हो सकता है बड़ा बदलाव, सरकार डिजिटल भुगतान व्यवस्था को टिकाऊ बनाने की तैयारी में

    UPI पेमेंट सिस्टम में हो सकता है बड़ा बदलाव, सरकार डिजिटल भुगतान व्यवस्था को टिकाऊ बनाने की तैयारी में

    नई दिल्ली । देश में डिजिटल भुगतान का सबसे बड़ा माध्यम बन चुके यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) को लेकर बड़े बदलाव की चर्चा तेज हो गई है। सरकार डिजिटल भुगतान प्रणाली को अधिक टिकाऊ और मजबूत बनाने के लिए मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) से जुड़े नियमों में बदलाव की संभावनाओं पर विचार कर रही है। हालांकि अभी इस संबंध में कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है और मौजूदा व्यवस्था पहले की तरह जारी है।

    चर्चा के अनुसार बड़े कारोबारियों द्वारा किए जाने वाले उच्च मूल्य के UPI लेनदेन पर सीमित MDR लागू किया जा सकता है। इस प्रस्ताव का उद्देश्य छोटे व्यापारियों और आम उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ डाले बिना डिजिटल भुगतान प्रणाली के संचालन, तकनीकी विकास और सुरक्षा से जुड़ी लागत के लिए स्थायी व्यवस्था तैयार करना है।

    वर्तमान में बैंक-टू-बैंक UPI भुगतान पर किसी प्रकार का MDR लागू नहीं है। यही वजह है कि पिछले कुछ वर्षों में देशभर में UPI का उपयोग तेजी से बढ़ा है। लाखों व्यापारी और करोड़ों उपभोक्ता रोजाना बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के डिजिटल भुगतान का उपयोग कर रहे हैं। इस व्यवस्था ने नकदरहित लेनदेन को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

    डिजिटल भुगतान से जुड़े संस्थानों का मानना है कि भुगतान नेटवर्क का विस्तार, साइबर सुरक्षा, सर्वर क्षमता और नई तकनीकों के विकास पर लगातार निवेश करना पड़ता है। ऐसे में लंबे समय तक इस व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने के लिए एक संतुलित राजस्व मॉडल की आवश्यकता महसूस की जा रही है। इसी कारण MDR व्यवस्था में सीमित बदलाव की संभावना पर विचार किया जा रहा है।

    यदि प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो यह मुख्य रूप से बड़े व्यापारिक प्रतिष्ठानों और अधिक मूल्य वाले लेनदेन तक सीमित रह सकता है। आम उपभोक्ताओं से सीधे अतिरिक्त शुल्क वसूले जाने का कोई अंतिम निर्णय फिलहाल नहीं हुआ है। सरकार का उद्देश्य डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देना और साथ ही भुगतान प्रणाली को आर्थिक रूप से मजबूत बनाए रखना बताया जा रहा है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि MDR केवल बड़े व्यापारियों तक सीमित रहता है तो सामान्य ग्राहकों पर इसका सीधा असर नहीं पड़ेगा। हालांकि कुछ मामलों में व्यापारियों की लागत बढ़ने पर उसका प्रभाव वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों पर दिखाई दे सकता है। इसलिए किसी भी निर्णय से पहले सभी पक्षों के हितों को ध्यान में रखा जाएगा।

    डिजिटल भुगतान ने देश में वित्तीय लेनदेन की तस्वीर बदल दी है। छोटे दुकानदारों से लेकर बड़े व्यापारिक प्रतिष्ठानों तक UPI का व्यापक उपयोग हो रहा है। इसी वजह से सरकार और संबंधित संस्थाएं ऐसी व्यवस्था विकसित करना चाहती हैं, जिससे डिजिटल भुगतान की गति भी बनी रहे और इसका संचालन भी लंबे समय तक प्रभावी ढंग से किया जा सके।

    फिलहाल UPI उपयोगकर्ताओं के लिए कोई नया शुल्क लागू नहीं हुआ है और न ही नए नियम प्रभावी हुए हैं। यदि भविष्य में इस संबंध में कोई निर्णय लिया जाता है तो उसके बाद ही नई व्यवस्था लागू होगी। तब तक आम लोग पहले की तरह बिना किसी बदलाव के UPI के माध्यम से भुगतान कर सकेंगे।

  • ईरान की राजनीति में बड़ा उलटफेर, विदेश मंत्री पर संकट, राष्ट्रपति कमजोर, सुरक्षा मामलों में IRGC का बढ़ा नियंत्रण

    ईरान की राजनीति में बड़ा उलटफेर, विदेश मंत्री पर संकट, राष्ट्रपति कमजोर, सुरक्षा मामलों में IRGC का बढ़ा नियंत्रण

    ईरान । ईरान में सत्ता का समीकरण बदलता नजर आ रहा है। विदेश मंत्री अब्बास अराघची पर महाभियोग की तैयारी और राष्ट्रपति मसूद पजशकियान की शक्तियों में कटौती के दावों ने देश की राजनीति में हलचल मचा दी है। इसी बीच इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC की भूमिका पहले से कहीं अधिक मजबूत होती दिखाई दे रही है। इन घटनाक्रमों ने यह संकेत दे दिया है कि आने वाले दिनों में ईरान की विदेश नीति और सुरक्षा रणनीति में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

    ईरान के वरिष्ठ सांसद होसैनअली हाजीदेलिगानी ने कहा है कि विदेश मंत्री अब्बास अराघची के खिलाफ महाभियोग लाने के लिए आवश्यक दस्तावेज और सबूत जुटाए जा रहे हैं। उनका कहना है कि उचित समय आने पर संसद में यह प्रक्रिया शुरू की जाएगी। सांसदों का आरोप है कि अमेरिका के साथ युद्धविराम के दौरान हुई बातचीत ने ईरान के राष्ट्रीय हितों को नुकसान पहुंचाया और भविष्य में ऐसे समझौते देश की संप्रभुता के लिए खतरा बन सकते हैं।

    इसी बीच इजराइली मीडिया की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि राष्ट्रपति मसूद पजशकियान की शक्तियां सीमित कर दी गई हैं। रिपोर्ट के अनुसार राष्ट्रीय सुरक्षा परमाणु कार्यक्रम और अमेरिका से जुड़ी रणनीतिक बातचीत जैसे अहम मामलों में अब अंतिम निर्णय सुप्रीम लीडर के प्रभाव वाली IRGC के हाथों में होगा। सुरक्षा मामलों में कमांडर अहमद वाहिदी की भूमिका भी पहले से अधिक मजबूत बताई जा रही है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है लेकिन इससे ईरान की आंतरिक राजनीति को लेकर नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

    अमेरिका और ईरान के बीच संभावित वार्ता को लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं है। दोनों देशों के बीच बातचीत की तारीख और स्थान अब तक तय नहीं हो सके हैं। पाकिस्तान और कतर संभावित मेजबान देशों के रूप में सामने आए हैं और दोनों मध्यस्थता की कोशिश कर रहे हैं। दूसरी ओर अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने उम्मीद जताई है कि होर्मुज स्ट्रेट को लेकर दोनों देशों के बीच जल्द कोई सहमति बन सकती है। यदि ऐसा होता है तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों पर राहत मिलने की संभावना बढ़ जाएगी।

    इस बीच होर्मुज स्ट्रेट लगातार वैश्विक चिंता का केंद्र बना हुआ है। ईरान ने दावा किया है कि उसने इस क्षेत्र के ऊपर उड़ रहे एक MQ-9 रीपर ड्रोन को मार गिराया है हालांकि उसने यह स्पष्ट नहीं किया कि ड्रोन किस देश का था। दूसरी ओर एक लाइबेरियाई मालवाहक जहाज पर हमले की खबर भी सामने आई है जिसमें इंजन रूम में विस्फोट के बाद आग लग गई और एक नाविक लापता बताया गया। समुद्री सुरक्षा एजेंसियां पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

    यमन के हूती विद्रोहियों ने भी सऊदी अरब के नजरीन एयरपोर्ट पर ड्रोन हमला करने का दावा किया है। वहीं लाल सागर में बढ़ते खतरे के कारण कई सऊदी सुपरटैंकरों ने अपना समुद्री मार्ग बदल लिया है। इससे वैश्विक शिपिंग और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ईरान के भीतर सत्ता का संतुलन पूरी तरह सुरक्षा प्रतिष्ठान के पक्ष में जाता है तो विदेश नीति और परमाणु कार्यक्रम को लेकर उसका रुख और अधिक कठोर हो सकता है। ऐसे में अमेरिका और पश्चिमी देशों के साथ तनाव बढ़ने की आशंका भी बनी रहेगी। दूसरी ओर यदि वार्ता की कोई सकारात्मक पहल होती है तो इससे पश्चिम एशिया में लंबे समय से चले आ रहे तनाव को कम करने का रास्ता भी खुल सकता है। फिलहाल पूरी दुनिया की नजर ईरान के बदलते राजनीतिक घटनाक्रम और उसके अगले कदम पर टिकी हुई है।

  • बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने सोशल मीडिया कंपनियों की जवाबदेही पर उठाए सवाल, कानून में बदलाव की कही बात

    बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने सोशल मीडिया कंपनियों की जवाबदेही पर उठाए सवाल, कानून में बदलाव की कही बात

    नई दिल्ली । भारतीय जनता पार्टी के सांसद निशिकांत दुबे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की कार्यप्रणाली, कर व्यवस्था और कानूनी जवाबदेही को लेकर केंद्र में बहस छेड़ दी है। संसद परिसर में मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने प्रमुख सोशल मीडिया कंपनियों पर कई गंभीर सवाल उठाए और कहा कि मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत मिलने वाले ‘सेफ हार्बर’ प्रावधान की समीक्षा की जानी चाहिए।

    निशिकांत दुबे ने दावा किया कि प्रमुख सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म भारत में बड़ा कारोबार करते हैं, लेकिन उनके अनुसार कर भुगतान उस अनुपात में नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि इन कंपनियों की आय और टैक्स भुगतान के बीच बड़ा अंतर है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म को भारत में अपने कारोबार और गतिविधियों के प्रति अधिक जवाबदेह बनाया जाना चाहिए।

    उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध सामग्री को लेकर भी चिंता व्यक्त की। उनका कहना था कि कुछ मामलों में आपत्तिजनक और अवैध सामग्री को समय पर हटाने में प्लेटफॉर्म प्रभावी कार्रवाई नहीं करते। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ संगठनों और अभियानों को डिजिटल माध्यम पर असामान्य रूप से अधिक पहुंच मिलती है, जिससे पारदर्शिता को लेकर सवाल खड़े होते हैं।

    भाजपा सांसद ने हाल के कुछ सामाजिक और राजनीतिक अभियानों का उल्लेख करते हुए कहा कि कम समय में कुछ संगठनों की व्यूअरशिप और डिजिटल पहुंच में तेज वृद्धि देखी गई है। उन्होंने कहा कि इस तरह के मामलों में संबंधित प्लेटफॉर्म को स्पष्ट करना चाहिए कि कंटेंट की पहुंच और प्रसार किन आधारों पर निर्धारित होता है। उनके अनुसार इस विषय में अधिक पारदर्शिता आवश्यक है।

    निशिकांत दुबे ने वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क यानी वीपीएन के उपयोग का भी मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया कंपनियों को यह स्पष्ट करना चाहिए कि उनके प्लेटफॉर्म पर कितने उपयोगकर्ता वीपीएन का इस्तेमाल कर रहे हैं। उनका मानना है कि इस प्रकार की जानकारी से डिजिटल गतिविधियों की बेहतर निगरानी और पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सकती है।

    उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ अवसरों पर महत्वपूर्ण सार्वजनिक व्यक्तियों से जुड़े कंटेंट को प्लेटफॉर्म से हटाया गया, जिससे अभिव्यक्ति और निष्पक्षता को लेकर प्रश्न खड़े हुए। उनके अनुसार यदि किसी प्रकार की सामग्री हटाई जाती है तो उसके लिए स्पष्ट और समान मानदंड होने चाहिए ताकि किसी भी प्रकार के पक्षपात की आशंका न रहे।

    अपने वक्तव्य में निशिकांत दुबे ने तेलंगाना सरकार द्वारा सोशल मीडिया कंपनियों के खिलाफ की गई कानूनी कार्रवाई का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यदि प्लेटफॉर्म अपनी जिम्मेदारियों का पालन नहीं करते हैं तो सरकारों को कानूनी विकल्पों पर विचार करना पड़ सकता है। साथ ही उन्होंने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 के तहत उपलब्ध ‘सेफ हार्बर’ प्रावधान की समीक्षा की आवश्यकता भी जताई।

    सेफ हार्बर वह कानूनी व्यवस्था है जिसके तहत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और अन्य इंटरनेट सेवा प्रदाताओं को उपयोगकर्ताओं द्वारा साझा किए गए थर्ड पार्टी कंटेंट के लिए सीमित कानूनी सुरक्षा मिलती है, बशर्ते वे निर्धारित नियमों और कानूनी निर्देशों का पालन करें। फिलहाल सांसद के इन बयानों के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की जवाबदेही, डिजिटल नियमन और सेफ हार्बर व्यवस्था को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।

  • सरकार का स्पैम कॉल और मैसेज पर बड़ा शिकंजा, पहली तिमाही में 1.83 लाख टेलीकॉम संसाधनों पर कार्रवाई

    सरकार का स्पैम कॉल और मैसेज पर बड़ा शिकंजा, पहली तिमाही में 1.83 लाख टेलीकॉम संसाधनों पर कार्रवाई

    नई दिल्ली । अनचाहे व्यावसायिक कॉल और संदेशों पर नियंत्रण के लिए केंद्र सरकार ने चालू वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में व्यापक कार्रवाई की है। संचार मंत्रालय के अनुसार अप्रैल से जून के बीच नियमों का उल्लंघन करने वाले 1.83 लाख टेलीकॉम संसाधनों के खिलाफ कार्रवाई की गई, जबकि 263 प्रेषकों को ब्लैकलिस्ट किया गया। सरकार का कहना है कि इस अभियान का उद्देश्य मोबाइल उपभोक्ताओं को स्पैम कॉल और अवांछित प्रचार संदेशों से राहत दिलाना तथा दूरसंचार सेवाओं को अधिक सुरक्षित और भरोसेमंद बनाना है।

    मंत्रालय के मुताबिक बार-बार नियमों का उल्लंघन करने वाले प्रेषकों के खिलाफ कई स्तरों पर कार्रवाई की गई। इनमें आउटगोइंग सेवाओं पर रोक लगाना, लंबे समय तक कनेक्शन निलंबित करना, सभी टेलीकॉम कंपनियों के स्तर पर ब्लैकलिस्ट करना और एसएमएस हेडर ब्लॉक करना जैसे कदम शामिल हैं। सरकार का मानना है कि ऐसे कड़े उपायों से अनधिकृत प्रचार गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सकेगा।

    आंकड़ों के अनुसार पहली तिमाही के दौरान देश के दूरसंचार नेटवर्क से कुल 730.82 अरब कॉल की गईं। इस दौरान अनचाहे व्यावसायिक संचार से संबंधित 10.85 लाख शिकायतें दर्ज हुईं। औसतन प्रत्येक 10 लाख कॉल पर लगभग 1.5 शिकायतें प्राप्त हुईं। मंत्रालय का कहना है कि लगातार निगरानी और कार्रवाई के कारण शिकायतों के समाधान की प्रक्रिया को और अधिक प्रभावी बनाया जा रहा है।

    स्पैम कॉल और संदेशों की पहचान के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित तकनीक का भी उपयोग किया जा रहा है। एआई प्रणाली ने पहली तिमाही में 24.43 अरब संदिग्ध स्पैम कॉल और एसएमएस की पहचान की। इससे उपभोक्ताओं को ऐसे कॉल और संदेशों को लेकर सतर्क रहने तथा उन्हें स्वीकार या नजरअंदाज करने का बेहतर विकल्प मिला। मंत्रालय के अनुसार भविष्य में इस तकनीक को और अधिक उन्नत बनाया जाएगा ताकि धोखाधड़ी और स्पैम गतिविधियों पर तेजी से अंकुश लगाया जा सके।

    सरकार ने नियमों के पालन को बढ़ावा देने के लिए बड़े पैमाने पर चेतावनी अभियान भी चलाया। नई चेतावनी प्रणाली लागू होने के केवल एक सप्ताह के भीतर 2.43 लाख से अधिक चेतावनी संदेश संदिग्ध प्रेषकों को भेजे गए। इसका उद्देश्य नियमों के प्रति जागरूकता बढ़ाना और उल्लंघन की घटनाओं को शुरुआती स्तर पर ही रोकना है।

    मंत्रालय ने बताया कि स्पैम शिकायत दर्ज कराने के लिए ट्राई का डीएनडी ऐप सबसे अधिक उपयोग किया जा रहा है। कुल शिकायतों में लगभग 89 प्रतिशत शिकायतें इसी ऐप के माध्यम से दर्ज हुईं। इसके अलावा उपभोक्ता अपने टेलीकॉम सेवा प्रदाता की वेबसाइट, मोबाइल ऐप या 1909 पर कॉल अथवा एसएमएस के जरिए भी अपनी डू नॉट डिस्टर्ब प्राथमिकताएं दर्ज और संशोधित कर सकते हैं।

    सरकार के अनुसार देश में अब भी 112 करोड़ से अधिक मोबाइल उपभोक्ताओं ने डीएनडी प्राथमिकताएं दर्ज नहीं कराई हैं। ऐसे उपभोक्ताओं तक पंजीकृत टेलीमार्केटर और कंपनियां व्यावसायिक कॉल तथा संदेश भेज सकती हैं। मंत्रालय ने लोगों से अपनी डीएनडी प्राथमिकताएं दर्ज कराने की अपील की है। सरकार का दावा है कि डीएनडी व्यवस्था के कारण पहली तिमाही में 1.48 अरब प्रमोशनल कॉल और 7.30 अरब प्रमोशनल एसएमएस ब्लॉक किए गए। साथ ही प्रमोशनल कॉल के लिए 140 सीरीज और बैंकिंग तथा सरकारी सेवाओं से जुड़े कॉल के लिए 1600 सीरीज का उपयोग जारी है, जिससे उपभोक्ताओं को आधिकारिक और प्रचार संबंधी कॉल की पहचान करने में आसानी मिल रही है।

  • दतिया हार के बाद भाजपा में समीक्षा शुरू, सीएम आवास पर हुई बड़ी बैठक, भीतरघात की होगी जांच

    दतिया हार के बाद भाजपा में समीक्षा शुरू, सीएम आवास पर हुई बड़ी बैठक, भीतरघात की होगी जांच


    भोपाल। मध्य प्रदेश के दतिया विधानसभा उपचुनाव में मिली हार के बाद भारतीय जनता पार्टी ने संगठनात्मक समीक्षा तेज कर दी है। मंगलवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के भोपाल स्थित आवास पर हुई उच्चस्तरीय बैठक में चुनावी नतीजों, भीतरघात की शिकायतों और भविष्य की रणनीति पर विस्तार से चर्चा हुई। पार्टी ने पूरे मामले की जांच के लिए दो सदस्यीय समिति का भी गठन किया है।

    सोमवार को आए उपचुनाव परिणामों में कांग्रेस उम्मीदवार घनश्याम सिंह ने भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी को 6,016 मतों से पराजित किया था। इसके बाद मुख्यमंत्री आवास पर हुई बैठक में प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल, उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा, चुनाव प्रभारी भारत सिंह कुशवाह, मंत्री राव उदय प्रताप सिंह सहित करीब दो दर्जन वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। भाजपा उम्मीदवार आशुतोष तिवारी ने भी बैठक में पहुंचकर कथित भीतरघात से जुड़े ऑडियो साक्ष्य संगठन के समक्ष रखे।

    भीतरघात और फर्जी प्रचार की होगी जांच
    सूत्रों के मुताबिक, शहरी क्षेत्रों में अपेक्षित प्रदर्शन नहीं होने के कारण कुछ स्थानीय पार्षदों और संगठन पदाधिकारियों की भूमिका की समीक्षा की जा रही है। चुनाव के दौरान सोशल मीडिया पर वायरल हुए कथित भ्रामक पोस्ट और फर्जी पत्रों की भी जांच होगी। ऐसे मामलों में शामिल लोगों की सूची तैयार कर उनके राजनीतिक संबंधों की पड़ताल की जाएगी।

    उल्लेखनीय है कि पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने टिकट नहीं मिलने के बावजूद भाजपा उम्मीदवार के पक्ष में सक्रिय प्रचार किया था, लेकिन इसके बावजूद पार्टी को हार का सामना करना पड़ा।

    दो सदस्यीय जांच समिति गठित
    प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने चुनावी हार के कारणों की विस्तृत समीक्षा के लिए प्रदेश महामंत्री गौरव रणदीवे और वरिष्ठ नेता अंबाराम कराड़ा की दो सदस्यीय समिति बनाई है। समिति जमीनी स्तर पर पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं से चर्चा कर अपनी रिपोर्ट प्रदेश नेतृत्व को सौंपेगी।

    खंडेलवाल ने स्पष्ट कहा कि भाजपा में अनुशासन सर्वोपरि है और संगठन के नियमों के विरुद्ध कार्य करने वाले किसी भी कार्यकर्ता या पदाधिकारी के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी।

    पार्टी के भीतर भी उठे सवाल
    चुनाव परिणाम के बाद भाजपा के भीतर से भी आत्ममंथन की आवाजें सामने आई हैं। पूर्व मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया ने सोशल मीडिया पर “आत्ममंथन का समय…” लिखकर संगठन को संकेत दिया, जबकि टीकमगढ़ जिला पंचायत अध्यक्ष उमिता राहुल सिंह ने अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब कार्यकर्ताओं की जगह अधिकारी प्रभावी होने लगते हैं तो चुनावी परिणाम प्रभावित होते हैं।

    जनादेश स्वीकार, भविष्य की तैयारी
    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि लोकतंत्र में जनता का निर्णय सर्वोपरि होता है और भाजपा जनादेश का सम्मान करती है। उन्होंने कहा कि पार्टी अपनी कमियों का आकलन करेगी और भविष्य में अधिक मजबूती के साथ जनता के बीच जाएगी।

    दतिया उपचुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह को 66,757 (42.39%) और भाजपा उम्मीदवार आशुतोष तिवारी को 60,741 (38.57%) मत मिले। हार के बाद भाजपा ने संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने और चुनावी रणनीति की समीक्षा का अभियान शुरू कर दिया है।

  • सरकारी नौकरी का मौका, पांच राज्यों में आधार सेवा केंद्रों के लिए निकली भर्ती, जानिए योग्यता और अंतिम तिथि

    सरकारी नौकरी का मौका, पांच राज्यों में आधार सेवा केंद्रों के लिए निकली भर्ती, जानिए योग्यता और अंतिम तिथि

    नई दिल्ली । सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए रोजगार का एक नया अवसर सामने आया है। सीएससी ई-गवर्नेंस सर्विसेज इंडिया लिमिटेड ने आधार सेवा केंद्रों में आधार सुपरवाइजर और ऑपरेटर के पदों पर भर्ती के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी है। यह भर्ती संविदा के आधार पर एक वर्ष की अवधि के लिए की जाएगी। इच्छुक और पात्र अभ्यर्थी निर्धारित योग्यता पूरी करने के बाद ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन की अंतिम तिथि 20 अगस्त निर्धारित की गई है।

    इस भर्ती अभियान के तहत कुल 32 रिक्त पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी। इनमें हरियाणा, मध्य प्रदेश, ओडिशा, राजस्थान और पंजाब के विभिन्न जिलों में पद शामिल हैं। सबसे अधिक 15 रिक्तियां हरियाणा में जारी की गई हैं, जबकि पंजाब में 9, ओडिशा में 4, मध्य प्रदेश में 2 और राजस्थान में 2 पदों पर भर्ती की जाएगी। चयनित अभ्यर्थियों की नियुक्ति संबंधित जिलों के आधार सेवा केंद्रों में की जाएगी।

    मध्य प्रदेश में यह भर्ती छिंदवाड़ा और शहडोल जिले के लिए निकाली गई है, जहां एक-एक पद उपलब्ध है। राजस्थान में दोनों पद कोटा जिले के लिए हैं। वहीं पंजाब और हरियाणा के कई जिलों में भी रिक्तियों का वितरण किया गया है। इससे विभिन्न राज्यों के पात्र उम्मीदवारों को अपने जिले या आसपास के क्षेत्र में आवेदन करने का अवसर मिलेगा।

    भर्ती के लिए आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन रखी गई है। इच्छुक उम्मीदवार निर्धारित अंतिम तिथि तक आवेदन पत्र भर सकते हैं। समय सीमा समाप्त होने के बाद किसी भी प्रकार का आवेदन स्वीकार नहीं किया जाएगा। इसलिए अभ्यर्थियों को सलाह दी जाती है कि वे सभी आवश्यक दस्तावेज तैयार रखते हुए समय रहते आवेदन प्रक्रिया पूरी कर लें।

    शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उम्मीदवार के पास किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से 12वीं पास होने का प्रमाणपत्र होना चाहिए। इसके अलावा मैट्रिक के साथ दो वर्षीय आईटीआई या तीन वर्षीय पॉलिटेक्निक डिप्लोमा रखने वाले अभ्यर्थी भी आवेदन के पात्र होंगे। भर्ती के लिए कंप्यूटर का सामान्य ज्ञान भी आवश्यक रखा गया है, क्योंकि कार्य पूरी तरह डिजिटल प्रणाली से जुड़ा होगा।

    इन पदों पर आवेदन करने वाले उम्मीदवारों के पास भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण द्वारा अधिकृत टेस्टिंग एवं सर्टिफाइंग एजेंसी से जारी आधार ऑपरेटर या सुपरवाइजर प्रमाणपत्र होना भी अनिवार्य है। बिना वैध प्रमाणपत्र वाले उम्मीदवार आवेदन के पात्र नहीं माने जाएंगे। यह प्रमाणपत्र आधार सेवाओं के संचालन और तकनीकी कार्यों के लिए आवश्यक योग्यता का हिस्सा है।

    आयु सीमा के अनुसार उम्मीदवार की न्यूनतम आयु 18 वर्ष निर्धारित की गई है। भर्ती संविदा आधारित होगी और प्रारंभिक नियुक्ति एक वर्ष के लिए की जाएगी। कार्य प्रदर्शन और प्रशासनिक आवश्यकता के आधार पर आगे की प्रक्रिया संबंधित नियमों के अनुसार तय की जा सकती है।

    डिजिटल सेवाओं के लगातार विस्तार के बीच आधार सेवा केंद्रों की भूमिका भी बढ़ रही है। ऐसे में यह भर्ती युवाओं के लिए सरकारी व्यवस्था से जुड़े डिजिटल सेवा क्षेत्र में काम करने का अच्छा अवसर मानी जा रही है। योग्य अभ्यर्थियों को अंतिम तिथि से पहले आवेदन प्रक्रिया पूरी कर सभी आवश्यक दस्तावेजों की जांच कर लेनी चाहिए ताकि आवेदन में किसी प्रकार की त्रुटि न रह जाए।

  • सेबी के नए सीएएस सिस्टम से बढ़ी उलझन, बीएसई और एनएसई पर एक ही शेयर के क्लोजिंग भाव में बड़ा अंतर

    सेबी के नए सीएएस सिस्टम से बढ़ी उलझन, बीएसई और एनएसई पर एक ही शेयर के क्लोजिंग भाव में बड़ा अंतर

    नई दिल्ली । भारतीय शेयर बाजार में बाजार बंद होने के बाद शेयरों के अंतिम भाव को लेकर नई स्थिति सामने आई है। बाजार नियामक द्वारा लागू किए गए क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (सीएएस) सिस्टम के बाद बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज पर कई प्रमुख कंपनियों के शेयर अलग-अलग क्लोजिंग प्राइस पर बंद हुए। इससे निवेशकों, ट्रेडर्स और बाजार पर नजर रखने वाले विशेषज्ञों के बीच चर्चा तेज हो गई है कि एक ही समय पर कारोबार समाप्त होने के बावजूद दोनों एक्सचेंजों पर अंतिम भाव में इतना अंतर क्यों दिखाई दे रहा है।

    मंगलवार के कारोबारी सत्र में कई बड़ी कंपनियों के शेयरों में यह अंतर स्पष्ट रूप से देखने को मिला। ट्रेंट का शेयर बीएसई पर बढ़त के साथ 3,070 रुपये पर बंद हुआ, जबकि एनएसई पर इसका क्लोजिंग भाव 3,107.70 रुपये दर्ज किया गया। इसी तरह भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल) के शेयर में भी दोनों एक्सचेंजों पर अलग-अलग प्रदर्शन देखने को मिला। बीएसई पर यह बढ़त के साथ बंद हुआ, जबकि एनएसई पर हल्की गिरावट दर्ज की गई।

    बजाज फाइनेंस के शेयरों में भी दोनों एक्सचेंजों के क्लोजिंग प्राइस में उल्लेखनीय अंतर दिखाई दिया। बीएसई पर शेयर बढ़त के साथ बंद हुआ, जबकि एनएसई पर इसमें गिरावट दर्ज की गई। महिंद्रा एंड महिंद्रा, बजाज फिनसर्व, टाइटन, टीसीएस, अल्ट्राटेक सीमेंट सहित कई अन्य प्रमुख कंपनियों के शेयरों में भी इसी तरह का अंतर देखने को मिला। इससे यह स्पष्ट हुआ कि नया सिस्टम लागू होने के बाद दोनों एक्सचेंजों की क्लोजिंग प्रक्रिया अलग-अलग परिणाम दे रही है।

    कारोबार की शुरुआत से ही दोनों प्रमुख सूचकांकों की चाल में भी अंतर दिखाई दिया। शुरुआती कारोबार में जहां सेंसेक्स बढ़त के साथ खुला, वहीं निफ्टी कमजोरी के साथ कारोबार करता नजर आया। दिनभर के उतार-चढ़ाव के बाद बाजार बंद होने पर भी दोनों सूचकांकों के प्रदर्शन में अंतर बना रहा। सेंसेक्स गिरावट के साथ बंद हुआ, जबकि निफ्टी में अपेक्षाकृत अधिक कमजोरी दर्ज की गई। दोनों सूचकांकों की क्लोजिंग के बीच प्रतिशत के आधार पर भी अंतर देखा गया।

    विशेषज्ञों का मानना है कि सीएएस प्रणाली का उद्देश्य बाजार बंद होने के समय अंतिम कीमतों की खोज को अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी बनाना है। हालांकि शुरुआती चरण में दोनों एक्सचेंजों पर उपलब्ध ऑर्डर, मांग और आपूर्ति के अलग-अलग स्वरूप के कारण अंतिम क्लोजिंग प्राइस में अंतर देखने को मिल सकता है। ऐसे में निवेशकों को यह समझना होगा कि दोनों एक्सचेंज स्वतंत्र रूप से अपने-अपने क्लोजिंग ऑक्शन के आधार पर अंतिम मूल्य निर्धारित करते हैं।

    बाजार विश्लेषकों का कहना है कि नए सिस्टम को पूरी तरह स्थिर होने में कुछ समय लग सकता है। शुरुआती दिनों में निवेशकों के लिए यह बदलाव नया अनुभव है, इसलिए भ्रम की स्थिति स्वाभाविक मानी जा रही है। यदि भविष्य में भी यह अंतर लगातार बना रहता है तो बाजार सहभागियों को अपनी निवेश और ट्रेडिंग रणनीतियों में आवश्यक बदलाव करने पड़ सकते हैं।

    फिलहाल निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे किसी भी निवेश निर्णय से पहले संबंधित एक्सचेंज पर दर्ज आधिकारिक क्लोजिंग प्राइस और बाजार के समग्र रुझान का सावधानीपूर्वक अध्ययन करें। नए सिस्टम के प्रभाव का वास्तविक आकलन आने वाले कारोबारी सत्रों में अधिक स्पष्ट रूप से सामने आने की संभावना है।

  • बिग बॉस 20 का टीजर रिलीज, सलमान खान के रहस्यमयी बयान से नए सीजन को लेकर तेज हुई चर्चाएं

    बिग बॉस 20 का टीजर रिलीज, सलमान खान के रहस्यमयी बयान से नए सीजन को लेकर तेज हुई चर्चाएं

    नई दिल्ली । टीवी के लोकप्रिय रियलिटी शो बिग बॉस का 20वां सीजन जल्द ही दर्शकों के बीच आने वाला है। शो के पहले टीजर के साथ नए सीजन की आधिकारिक घोषणा कर दी गई है। इस बार भी सुपरस्टार सलमान खान ही शो की मेजबानी करेंगे। टीजर में सलमान खान के अलग अंदाज और रहस्यमयी संवाद ने दर्शकों की उत्सुकता को और बढ़ा दिया है। मेकर्स ने साथ ही यह भी स्पष्ट कर दिया है कि शो का प्रीमियर 6 सितंबर 2026 को होगा।

    जारी किए गए टीजर में सलमान खान शाही अंदाज में घोड़े पर सवार होकर नजर आते हैं। इसके बाद वह कहते हैं, “जो करण-अर्जुन में हुआ था, वही अब बिग बॉस में होगा… तथास्तु 2।” इस एक संवाद ने सोशल मीडिया पर कई तरह की चर्चाओं को जन्म दे दिया है। टीजर में ऐसे कई दृश्य भी शामिल किए गए हैं, जो संकेत देते हैं कि इस बार शो की कहानी में कोई बड़ा रहस्य और नया ट्विस्ट छिपा हुआ है।

    सलमान खान ने टीजर लॉन्च के दौरान कहा कि बिग बॉस का हर सीजन नए खेल, नए समीकरण और अप्रत्याशित मोड़ लेकर आता है, लेकिन इस बार दर्शकों को कुछ ऐसा देखने को मिलेगा जो पहले कभी नहीं हुआ। उन्होंने बताया कि नए सीजन का पहला संकेत टीजर में ही दे दिया गया है और दर्शकों को इस रहस्य को समझने के लिए आने वाले एपिसोड का इंतजार करना होगा।

    टीजर सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर फैंस अपने-अपने अनुमान लगाने लगे हैं। कई दर्शकों का मानना है कि इस बार पुराने लोकप्रिय कंटेस्टेंट्स की वापसी हो सकती है। वहीं कुछ लोगों का कहना है कि ‘करण-अर्जुन’ वाला संवाद किसी खास थीम या पुराने खिलाड़ियों की वापसी की ओर इशारा करता है। हालांकि मेकर्स ने इन अटकलों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।

    बिग बॉस पिछले कई वर्षों से भारतीय टेलीविजन के सबसे चर्चित रियलिटी शोज़ में शामिल रहा है। हर नए सीजन में कंटेस्टेंट्स, टास्क और थीम को लेकर दर्शकों में खास उत्साह देखने को मिलता है। इस बार 20वें सीजन के कारण दर्शकों की उम्मीदें पहले से कहीं अधिक बढ़ गई हैं। मेकर्स भी लगातार नए प्रयोगों के जरिए शो को और दिलचस्प बनाने की कोशिश कर रहे हैं।

    शो का प्रसारण 6 सितंबर से शुरू होगा। इसे टेलीविजन पर कलर्स चैनल पर देखा जा सकेगा, जबकि डिजिटल दर्शकों के लिए इसकी स्ट्रीमिंग जियोहॉटस्टार पर उपलब्ध रहेगी। आने वाले दिनों में कंटेस्टेंट्स की सूची और नए सीजन से जुड़ी अन्य जानकारियां भी धीरे-धीरे सामने आने की संभावना है।

    बिग बॉस 20 के पहले टीजर ने यह साफ कर दिया है कि इस बार शो केवल नए प्रतियोगियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि कहानी और प्रस्तुति में भी कुछ अलग देखने को मिलेगा। अब दर्शकों की नजर मेकर्स की अगली घोषणा और शो के पहले एपिसोड पर टिकी हुई है।