Author: bharati

  • क्रिप्टोकरेंसी पर रोक जरूरी… आयकर विभाग ने किया RBI के रूख का समर्थन

    क्रिप्टोकरेंसी पर रोक जरूरी… आयकर विभाग ने किया RBI के रूख का समर्थन


    नई दिल्ली।
    आयकर विभाग (Income Tax Department) ने बुधवार को क्रिप्टोकरेंसी जैसी वर्चुअल डिजिटल संपत्तियों (Virtual digital assets Cryptocurrencies) से जुड़े बड़े रिस्क की ओर ध्यान खींचा है। इसके साथ ही विभाग ने भारतीय रिजर्व बैंक के रुख का समर्थन करते हुए इन वित्तीय साधनों के प्रवेश का विरोध किया है। सूत्रों के मुताबिक, वित्त मामलों की संसदीय स्थायी समिति के समक्ष एक प्रस्तुति में टैक्स अफसरों ने बताया कि कैसे गुमनाम, सीमा रहित और तत्काल धन हस्तांतरण की सुविधा से बिना किसी विनियमित वित्तीय मध्यस्थ के फंड्स को सिस्टम के जरिए भेजना संभव हो पाता है।

    इसके अलावा, विदेशी क्रिप्टो एक्सचेंज, निजी वॉलेट और विकेंद्रीकृत प्लेटफॉर्म के कारण अधिकारियों के लिए टैक्सेबल इनकम का पता लगाना बहुत मुश्किल हो जाता है। इनमें संपत्ति का असली मालिक भी आसानी से पता नहीं चल पाता।


    अंतरराष्ट्रीय पहलू और चुनौतियां

    विदेशों में होने वाली वर्चुअल डिजिटल संपत्ति की गतिविधियों में अधिकार क्षेत्र की सीमाओं को भी एक समस्या बताया गया। इसमें कई देशों के नियम शामिल हो सकते हैं, जिससे फंड फ्लो को जांचना, टैक्स लायबिलिटी की पुष्टि करना और वसूली करना लगभग असंभव हो जाता है। हाल के महीनों में सूचना साझा करने के प्रयास होने के बावजूद, यह प्रक्रिया अब भी कठिन बनी हुई है। इससे कर अधिकारियों को लेन-देन की श्रृंखला का सही आकलन और पुनर्निर्माण करने की क्षमता प्रभावित होती है।


    भारत की स्थिति और सुरक्षा उपाय

    भारत उन देशों में शामिल है जो जोरदार लॉबिंग और कुछ सरकारों के दबाव के बावजूद अब तक क्रिप्टोकरेंसी और स्टेबलकॉइन को मंजूरी देने में हिचकिचा रहे हैं। इससे पहले, कई मौकों पर आरबीआई ने अपनी चिंताएं जताई हैं, जिनमें किसी भी अंतर्निहित परिसंपत्ति की कमी होना शामिल है, जो इसे निवेशकों के लिए जोखिम भरा बनाती है। यहां तक कि कानून प्रवर्तन एजेंसियां भी खासतौर पर सावधान हैं क्योंकि वर्चुअल डिजिटल संपत्तियों का इस्तेमाल मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकी वित्तपोषण के लिए किया जा सकता है।

    आयकर विभाग ने कहा कि चूंकि क्रिप्टो प्लेटफॉर्म विदेशों में काम करते हैं, इसलिए समन जारी करना या टीडीएस वसूलना जैसी कानूनी कार्रवाई करना कठिन हो सकता है। कई एक्सचेंज फाइनेंशियल इंटेलिजेंस यूनिट के साथ भी रजिस्टर्ड नहीं हैं और कर विभाग की पहुंच से बाहर हैं। भारतीय कर अधिकारियों ने लाभार्थियों को ट्रैक करने के लिए टीडीएस जैसे सुरक्षा उपाय बनाने की कोशिश की है और क्रिप्टो तथा अन्य वर्चुअल डिजिटल संपत्तियों में कारोबार करने वाली इकाइयों के पंजीकरण को भी अनिवार्य किया है।

  • Bihar:हिजाब हटाने के विवाद में 23 दिन बाद डॉ. नुसरत परवीन ने ज्वाइन की नौकरी..

    Bihar:हिजाब हटाने के विवाद में 23 दिन बाद डॉ. नुसरत परवीन ने ज्वाइन की नौकरी..


    पटना।
    बिहार ( Bihar) की आयुष चिकित्सक डॉ. नुसरत परवीन (Ayush physician Dr. Nusrat Parveen) ने आखिरकार 23 दिनों के बाद नौकरी ज्वाइन कर ली है। गर्दनीबाग स्थित सिविल सर्जन कार्यालय में उन्होंने मंगलवार को योगदान दे दिया। इस बाबत सिविल सर्जन डॉ. अविनाश कुमार ने बताया कि उनकी तैनाती सदर पीएचसी (प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र) में की गई है। उन्होंने योगदान के लिए आवेदन दिया था, जिसे स्वीकार कर लिया गया।

    डॉ. नुसरत परवीन को संविदा पर यह नौकरी मिली है। पहले उन्हें 31 दिसंबर तक ही योगदान करना था। डॉ. नुसरत परवीन उस समय चर्चा में आई थी, जब 15 दिसंबर को मुख्यमंत्री सचिवालय में नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम के दौरान हिजाब हटाए जाने का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। डॉ. नुसरत परवीन पटना स्थित राजकीय तिब्बी कॉलेज से एमडी पीजी की पढ़ाई कर रही हैं।

    राजकीय तिब्बी कॉलेज एवं अस्पताल के प्राचार्य महफूज-उर-रहमान ने बताया कि डॉक्टर नुसरत परवीन ने अंतिम तिथि पर ड्यूटी ‘ज्वाइन’ कर ली। उन्होंने कहा, “आज सेवा में शामिल होने की अंतिम तिथि थी और नुसरत ने पटना सिविल सर्जन कार्यालय में ड्यूटी के लिए रिपोर्ट कर दिया। सिविल सर्जन कार्यालय द्वारा उन्हें उपयुक्त स्थान पर पदस्थापित किया जाएगा।”

    प्राचार्य ने बताया कि सेवा में शामिल होने की अंतिम तिथि पहले 31 दिसंबर तक बढ़ाई गई थी और फिर इसे सात जनवरी तक विस्तार दिया गया था। नुसरत परवीन उसी कॉलेज की छात्रा रह चुकी हैं, जिसके रहमान प्राचार्य हैं। इससे पहले कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया था कि नुसरत ने शुरुआत में “नाराजगी” के चलते सेवा में शामिल होने से इनकार कर दिया था। हालांकि कॉलेज प्रशासन ने इस दावे को खारिज किया था।

    पिछले महीने, जब नुसरत तय समय सीमा के भीतर ड्यूटी के लिए रिपोर्ट नहीं कर पाई थीं, तब प्राचार्य ने कहा था, “उनके परिवार ने बताया था कि वे मीडिया कवरेज से बचना चाहती हैं और वह दोबारा विचार करेंगी कि उन्हें सेवा में शामिल होना है या नहीं।”

  • वेनेजुएला अब अमेरिका में बने उत्पाद ही खरीद सकता है … ट्रंप ने जारी किया नया फरमान

    वेनेजुएला अब अमेरिका में बने उत्पाद ही खरीद सकता है … ट्रंप ने जारी किया नया फरमान


    वॉशिंग्टन।
    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने बुधवार को बड़ी घोषणा करते हुए वेनेजुएला (Venezuela) के लिए नया फरमान जारी कर दिया है। ट्रंप ने कहा है कि वेनेजुएला अब नए तेल सौदे से मिलने वाले पैसे से सिर्फ अमेरिकी-निर्मित उत्पाद (American-Made Products) ही खरीदेगा। ट्रंप का यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका ने देश के राष्ट्रपति मादुरो को गिरफ्तार कर लिया है। वहीं देश की उपराष्ट्रपति ने फिलहाल यह जिम्मेदारी संभालते हुए अमेरिका के साथ सहयोग की बात कही है।

    अमेरिकी राष्ट्रपति ने ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में कहा, “मुझे अभी-अभी बताया गया है कि वेनेजुएला हमारे साथ हुए नए तेल सौदे से मिलने वाले पैसे से सिर्फ अमेरिकी-निर्मित उत्पाद खरीदने जा रहा है। इनमें अमेरिकी कृषि उत्पाद, अमेरिका में बनीं दवाएं, मेडिकल उपकरण, और वेनेजुएला के इलेक्ट्रिक ग्रिड और ऊर्जा सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए उपकरण शामिल होंगे।”

    ट्रंप ने आगे कहा, “दूसरे शब्दों में वेनेजुएला अमेरिका को अपना मुख्य भागीदार बनाकर व्यापार करने के लिए प्रतिबद्ध है। यह एक समझदारी भरा फैसला है और वेनेजुएला और अमेरिका के लोगों के लिए बहुत अच्छी बात। इस मामले पर आपके ध्यान के लिए धन्यवाद!”


    अमेरिका ही लेगा फैसले

    वहीं बुधवार को वाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिना लेविट ने एक ब्रीफिंग के दौरान कहा था कि ट्रंप प्रशासन वेनेजुएला के अंतरिम नेताओं के साथ संपर्क में है। लेविट ने बताया, “ट्रंप सरकार वेनेजुएला में अंतरिम अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क में है। अभी वेनेजुएला में अंतरिम अधिकारियों पर हमारा सबसे ज्यादा कंट्रोल है… उनके फैसले अमेरिका ही लेगा।”


    5 करोड़ बैरल तेल खरीदेगा अमेरिका

    इससे पहले मंगलवार को डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि वेनेजुएला की अंतरिम सरकार अमेरिका को बाजार मूल्य पर तीन से पांच करोड़ बैरल ‘उच्च गुणवत्ता’ वाला तेल उपलब्ध कराएगा। ट्रंप ने लिखा था कि तेल जहाजों द्वारा सीधे अमेरिका पहुंचाया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा था कि राष्ट्रपति के रूप में इस पैसे पर उनका नियंत्रण होगा लेकिन इसका उपयोग वेनेजुएला और अमेरिका के लोगों की भलाई के लिए किया जाएगा।

  • MP: शिवपुरी में हैंडपंप के पानी से बीमार हुआ व्यक्ति.. समाधान के बजाए नोटिस चिपकाकर निकल गए अधिकारी

    MP: शिवपुरी में हैंडपंप के पानी से बीमार हुआ व्यक्ति.. समाधान के बजाए नोटिस चिपकाकर निकल गए अधिकारी


    शिवपुरी।
    इंदौर के भागीरथपुरा (Indore Bhagirathpura) में दूषित पानी (Contaminated Water) से मौत का मामला अभी ठंडा भी नहीं हुआ कि मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के शिवपुरी (Shivpuri) से दूषित पानी पीने से एक युवक के बीमार पड़ने का मामला सामने आया है। शिवपुरी जिले के पोहरी जनपद अंतर्गत ग्राम पंचायत भटनावार के मठ गांव में हैंडपंप (Handpump) के दूषित पानी से एक युवक की तबीयत खराब हो गई। इसके बाद विभाग की लापरवाही देखिए, जब ग्रामीणों ने लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग को सूचना दी, तो विभागीय अमला मौके पर पहुंचा, लेकिन समाधान के बजाय हैंडपंप पर केवल “पानी पीने योग्य नहीं है” लिखकर लौट गया।

    इसके बावजूद ग्रामीणों को मजबूरी में उसी दूषित पानी को छानकर पीना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में पानी का कोई दूसरा विकल्प उपलब्ध नहीं है, ऐसे में रोक के बाद भी उन्हें इसी हैंडपंप के पानी पर निर्भर रहना पड़ रहा है। ग्रामीणों के मुताबिक, गांव में पेयजल का एकमात्र स्रोत यही हैंडपंप था। इसी का पानी पीने से रोहित पुरी गोस्वामी बीमार हुए थे। अब हैंडपंप के उपयोग पर रोक लगने और वैकल्पिक व्यवस्था न होने से लोग पीने के पानी के लिए परेशान हो रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अधिकारियों को सिर्फ चेतावनी देने के बजाय शुद्ध पानी की व्यवस्था करनी चाहिए थी।

    दुलारा पंचायत के सरपंच दिनेश धाकड़ ने विभाग पर लापरवाही के गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने बताया कि पूरी पंचायत में कई हैंडपंप खराब पड़े हैं। कुछ हैंडपंपों में पाइप बढ़ाने से पानी निकल सकता है, लेकिन इस संबंध में दी गई कई लिखित शिकायतों पर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई है। मामले में PHE विभाग के कार्यपालन यंत्री शुभम गुप्ता ने कहा कि दुलारा पंचायत और मठ गांव में जांच के लिए एसडीओ को भेजा जाएगा। जांच के बाद पेयजल समस्या के समाधान के लिए व्यावहारिक विकल्पों पर विचार कर ग्रामीणों को राहत दी जाएगी।

  • ईडी का महादेव ऑनलाइन सट्टा ऐप केस में बड़ा एक्शन… 92 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क

    ईडी का महादेव ऑनलाइन सट्टा ऐप केस में बड़ा एक्शन… 92 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क


    रायपुर।
    प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) (Enforcement Directorate – ED) ने बुधवार को बताया उसने छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) में कार्रवाई को अंजाम देते हुए अवैध ‘महादेव ऑनलाइन सट्टेबाजी’ (‘Mahadev Online Betting’) ऐप के मुख्य प्रवर्तकों में से एक सौरभ चंद्राकर (Saurabh Chandrakar) सहित विभिन्न आरोपियों की लगभग 92 करोड़ रुपए की संपत्तियों को कुर्क किया है। जिसमें चल और अचल दोनों तरह की संपत्तियां शामिल हैं। इस कार्रवाई के दौरान ईडी ने PMLA के तहत एक अंतरिम आदेश जारी करते हुए परफेक्ट प्लान इन्वेस्टमेंट LLC और एक्जिम जनरल ट्रेडिंग- GZCO के नाम पर रखी गई 74.28 करोड़ रुपए से अधिक की बैंक जमा राशि को जब्त किया।


    दोनों कंपनियों से बड़े पैमाने पर बनाई अपराध की आय

    इस बारे में एक बयान जारी करते हुए ईडी ने बताया कि, ये दोनों कंपनियां सौरभ चंद्राकर, अनिल कुमार अग्रवाल और विकास छपारिया की हैं, जिनका इस्तेमाल अपराध की आय (PoC) को छिपाने और बेदाग निवेश के रूप में दिखाने के लिए किया जाता था। इसके अलावा ईडी ने बताया कि साथ ही Skyexchange.com के मालिक हरि शंकर टिबरेवाल के करीबी सहयोगी गगन गुप्ता की भी 17.5 करोड़ रुपए की संपत्ति अटैच की गई है। इन जब्त की गई संपत्तियों में गगन गुप्ता के परिवार के सदस्यों के नाम पर रखी गई महंगी रियल एस्टेट और लिक्विड एसेट्स भी शामिल हैं, जिन्हें कैश से खरीदना पाया गया।


    अपराध की आय को बेनामी खातों के जरिए निकाला गया

    ईडी की जांच में पता चला है कि महादेव ऑनलाइन बुक, Skyexchange.com आदि जैसे अवैध सट्टेबाजी ऐप्स ने भारी मात्रा में नगदी उत्पन्न की, जिसे बेनामी बैंक खातों के एक जटिल जाल के माध्यम से निकाला गया। यह भी पता चला है कि सौरभ चंद्राकर और अन्य ने महादेव ऑनलाइन बुक एप्लिकेशन नामक एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से जनता को धोखा दिया।


    सारे ग्राहक खो देते थे लगाए गई पूरी रकम

    इस दौरान इन अवैध सट्टेबाजी खेलों के ऐप्स/वेबसाइटों को इस तरह से तैयार किया गया था कि सभी ग्राहक अंततः पैसे खो देते थे। जिसके चलते इनके संचालकों के पास हजारों करोड़ रुपए का फंड इकट्ठा हो गया और पहले से तय प्रॉफिट-शेयरिंग तरीके से बांटा गया। इसके अलावा, बैंक अकाउंट खोलने के लिए जाली या चोरी किए गए KYC का भी इस्तेमाल किया गया और अवैध सट्टेबाजी से मिले पैसे को उनके सोर्स को छिपाने के लिए लेयरिंग की गई। इन सभी ट्रांजैक्शन का न तो हिसाब रखा गया और न ही उन्हें टैक्स नेट में लाया गया।


    FPI के नाम पर वापस भारत आया अपराध की कमाई का पैसा

    जांच में पता चला कि इन अवैध सट्टेबाजी प्लेटफॉर्म से कमाए गए पैसे को हवाला चैनलों, ट्रेड-बेस्ड मनी लॉन्ड्रिंग ट्रांजैक्शन और क्रिप्टो-एसेट्स के इस्तेमाल से भारत के बाहर ट्रांसफर किया गया और बाद में विदेशी FPIs के नाम पर भारतीय स्टॉक मार्केट में वापस लाकर इन्वेस्ट किया गया। ED द्वारा की गई जांच में एक सोफिस्टिकेटेड कैशबैक स्कीम का भी पता चला, जिसमें ये FPI एंटिटी भारतीय लिस्टेड कंपनियों में भारी इन्वेस्ट करती थीं और बदले में, इन कंपनियों के प्रमोटरों को इन्वेस्टमेंट का 30% से 40% कैश में वापस देना होता था।


    गगन गुप्ता ने दो कंपनियों से लिया 98 करोड़ का फायदा

    जांच के दौरान एक आरोपी गगन गुप्ता को सालासर टेक्नो इंजीनियरिंग लिमिटेड और टाइगर लॉजिस्टिक लिमिटेड जैसी एंटिटी से जुड़े ऐसे ट्रांजैक्शन से कम से कम 98 करोड़ रुपए का लाभ मिलना पाया गया। बता दें कि अब तक इस मामले की जांच के दौरान ED ने 175 से ज़्यादा जगहों पर तलाशी ली है। साथ ही जांच के दौरान लगभग 2,600 करोड़ रुपए की चल और अचल संपत्ति जब्त, फ्रीज या अटैच भी की है। इसके अलावा, ED ने इस मामले में 13 लोगों को गिरफ्तार किया है, और अब तक दायर की गई पांच प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट में 74 लोगों को आरोपी बनाया गया है। महादेव ऐप का प्रचार सौरभ चंद्राकर और उसके सहयोगी रवि उप्पल ने किया था। ये दोनों छत्तीसगढ़ के रहने वाले हैं। उनका विदेश से प्रत्यर्पण कराने की कोशिश की जा रही है। उनके संयुक्त अरब अमीरात में होने का पता चला था।

  • इंदौर में ई-रिक्शा संचालन में बदलाव: सात सेक्टर में बांटकर शुरू होगी नई व्यवस्था

    इंदौर में ई-रिक्शा संचालन में बदलाव: सात सेक्टर में बांटकर शुरू होगी नई व्यवस्था


    इंदौर । शहर में ई-रिक्शा के बढ़ते संचालन को नियंत्रित करने के लिए अब नई व्यवस्था लागू की जा रही है। शहर को सात सेक्टरों में बांटा जाएगा, और हर ई-रिक्शा के लिए एक सीमित क्षेत्र निर्धारित मार्ग और रंग आधारित पहचान लागू की जाएगी। इस बदलाव का उद्देश्य ई-रिक्शा के संचालन को व्यवस्थित सुरक्षित और सुगम बनाना है।

    पुलिस उपायुक्त यातायात, आनंद कलादगी की अध्यक्षता में बुधवार को पलासिया स्थित पुलिस कंट्रोल रूम में एक बैठक हुई जिसमें इस योजना के बारे में जानकारी दी गई। अधिकारियों ने बताया कि सेक्टरों में ई-रिक्शा के संचालन के लिए 30 दिन की तैयारी अवधि होगी जिसके बाद एक महीने का ट्रायल रन शुरू होगा। ट्रायल के दौरान यदि किसी भी तरह की समस्या उत्पन्न होती है तो आवश्यक सुधार किए जाएंगे।

    ई-रिक्शा चालकों को अपनी गाड़ी से संबंधित वैध दस्तावेज प्रस्तुत कर, सेक्टर रजिस्ट्रेशन कराना होगा। इसके लिए अगले दो दिनों में विशेष शिविर आयोजित किए जाएंगे। शिविर में पंजीकरण प्रक्रिया पहले आएं पहले पाएं नीति के तहत होगी और इसमें चालकों को उनके इलाके के अनुसार सेक्टर का चयन करने का अवसर मिलेगा। पंजीकरण के बाद चालकों को सीरियल नंबर वाला स्टीकर दिया जाएगा जिस पर सेक्टर का नाम वाहन का रजिस्ट्रेशन नंबर और सीरियल नंबर अंकित होगा।

    नई व्यवस्था के तहत प्रत्येक सेक्टर में 20 से 25 किमी तक के रूट निर्धारित किए जाएंगे और स्टैंड भी तय किए जाएंगे। ई-रिक्शा की पहचान को और सरल बनाने के लिए प्रत्येक वाहन के आगे-पीछे एक विशेष स्टीकर लगाया जाएगा जो सवारी और निगरानी के लिए मददगार होगा। साथ ही हर सेक्टर के लिए सात अलग-अलग रंगों का कोड होगा जिससे पहचान में आसानी होगी।

    इस योजना के बारे में इंदौर बैटरी रिक्शा चालक महासंघ के संस्थापक राजेश बिड़कर ने असंतोष व्यक्त किया है। उनका कहना है कि कुछ कार्यकर्ता इस निर्णय से संतुष्ट नहीं हैं और 12 जनवरी को ई-रिक्शा बंद करने की घोषणा की है। वे सुबह 11 बजे गांधी हाल परिसर में एकत्र होकर विरोध प्रदर्शन करेंगे।आगामी 15 दिनों में रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया पूरी की जाएगी, और फिर अगले 10 दिनों में सेक्टर और स्टीकर वितरण की प्रक्रिया की जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि यदि जरूरत पड़ी तो भविष्य में सेक्टर व्यवस्था में सुधार किए जा सकते हैं।

  • ऊर्जा जरूरतों के लिए भारत पर निर्भर बांग्लादेश… तनाव के बावजूद खरीदेगा एक लाख 80 हजार टन डीजल

    ऊर्जा जरूरतों के लिए भारत पर निर्भर बांग्लादेश… तनाव के बावजूद खरीदेगा एक लाख 80 हजार टन डीजल


    गुवाहाटी।
    भारत और बांग्लादेश (India and Bangladesh) के बीच चल रहे राजनीतिक तनाव के बावजूद, बांग्लादेश (Bangladesh) अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए भारत पर निर्भर है। बांग्लादेश पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (Bangladesh Petroleum Corporation- BPC) ने भारत की सरकारी तेल कंपनी नुमालीगढ़ रिफाइनरी लिमिटेड (Numaligarh Refinery Limited- NRL) से 180,000 मीट्रिक टन डीजल आयात करने का फैसला किया है। इस आयात की कुल लागत लगभग 14.62 अरब टका होगी जो अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों में उतार-चढ़ाव के साथ बदल सकती है। यह सौदा 2026 के लिए हुआ है।

    यह फैसला 6 जनवरी को ढाका में हुई सरकारी खरीद सलाहकार समिति की बैठक में लिया गया, जिसकी अध्यक्षता वित्त सलाहकार सालेहुद्दीन अहमद ने की। सरकार संचालित बांग्लादेश पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (बीपीसी) इस डीजल का आयात करेगी। भुगतान का कुछ हिस्सा बीपीसी अपने बजट से करेगी, जबकि शेष राशि बैंक लोन के माध्यम से जुटाई जाएगी।

    सूत्रों के अनुसार, आयात लागत एनआरएल के साथ बातचीत के बाद तय की गई है। असम स्थित एनआरएल ऑयल इंडिया लिमिटेड (OIL) की सहायक कंपनी है। इस सौदे की कुल वैल्यू 119.13 मिलियन डॉलर तय की गई है, जो 83.22 डॉलर प्रति बैरल की बेस कीमत पर 5.50 डॉलर प्रति बैरल के प्रीमियम पर आधारित है। अंतिम लागत अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों के अनुसार बदलती रहेगी।

    पत्रकारों के सवालों के जवाब में बिजली, ऊर्जा और खनिज संसाधन सलाहकार मुहम्मद फौजुल कबीर खान ने कहा कि यह आयात पिछले सरकार के कार्यकाल में हस्ताक्षरित 15 वर्षीय दीर्घकालिक समझौते के तहत किया जा रहा है।

    एनआरएल की रिफाइनरी असम राज्य में स्थित है। डीजल को पहले सिलीगुड़ी तक ले जाया जाता है और फिर भारत-बांग्लादेश मैत्री पाइपलाइन के माध्यम से बांग्लादेश पहुंचाया जाता है। यह पाइपलाइन 2022-23 में चालू हुई थी, जिससे परिवहन लागत और समय में काफी बचत हुई है। इससे पहले डीजल रेलवे वैगनों से आयात किया जाता था। यह आयात बांग्लादेश की बढ़ती ऊर्जा मांग को पूरा करने में मदद करेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत-बांग्लादेश मैत्री पाइपलाइन ने दोनों देशों के बीच ऊर्जा सहयोग को मजबूत किया है।

    हालांकि दोनों देशों के बीच सीमा विवाद, अल्पसंख्यकों पर हमले और अन्य मुद्दों पर तनाव बना हुआ है, लेकिन ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग जारी है। बांग्लादेश की सालाना डीजल मांग का बड़ा हिस्सा आयात से पूरा होता है और भारत इसका विश्वसनीय स्रोत बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि आर्थिक जरूरतें राजनीतिक तनाव से ऊपर हैं, जिससे ऐसे समझौते बरकरार रहते हैं।

  • बड़ा खुलासा… मप्र के गांवों में मिल रहा पानी लोगों के इस्तेमाल के लायक नहीं

    बड़ा खुलासा… मप्र के गांवों में मिल रहा पानी लोगों के इस्तेमाल के लायक नहीं


    भोपाल।
    इंदौर के भागीरथपुरा (Bhagirathpura, Indore) में काल बने पीने के पानी ने अब तक 20 लोगों की जिंदगियां लील ली हैं और जो इससे बच गए, उनका अस्पताल में इलाज जारी है। सरकार कटघरे में है तो विपक्ष भी इस मुद्दे पर हावी है। इस बीच मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के गांवों (Villages) में पीने के पानी (Drinking water) पर आई एक रिपोर्ट आपको भी हैरान कर देगी। केंद्र सरकार के ‘जल जीवन मिशन’ (‘Jal Jeevan Mission’) की एक नई रिपोर्ट से पता चला है कि राज्य के ग्रामीण इलाकों में एक-तिहाई से अधिक पीने का पानी इंसानों के इस्तेमाल के लायक नहीं है, जिससे लाखों लोग अनदेखे लेकिन जानलेवा खतरों की चपेट में हैं।


    रिपोर्ट में चौंकाने वाले आंकड़े

    4 जनवरी 2026 को जारी ‘फंक्शनैलिटी असेसमेंट रिपोर्ट’ (कार्यक्षमता मूल्यांकन रिपोर्ट) के अनुसार मध्य प्रदेश में पानी के केवल 63.3% नमूने ही गुणवत्ता मानकों पर खरे उतरे, जबकि इसका राष्ट्रीय औसत 76% है। इसका मतलब है कि राज्य के ग्रामीण इलाकों में 36.7% पानी के नमूने असुरक्षित पाए गए हैं। इनमें हानिकारक बैक्टीरिया (कीटाणु) या रासायनिक मिलावट पाई गई है। ये नमूने सितंबर-अक्टूबर 2024 के दौरान मध्य प्रदेश के 15,000 से अधिक ग्रामीण घरों से इकट्ठा किए गए थे।

    यह स्थिति उन जगहों पर और भी अधिक चिंताजनक है जो सुरक्षा और इलाज के लिए बनी हैं। रिपोर्ट के मुताबिक सरकारी अस्पतालों में पानी के केवल 12% नमूने ही सूक्ष्मजीवविज्ञानी (microbiological) सुरक्षा जांच में पास हो पाए, जबकि इसका राष्ट्रीय औसत 83.1% है। इसका मतलब है कि मध्य प्रदेश के लगभग 88% अस्पतालों में मरीजों को असुरक्षित पानी दिया जा रहा है। स्कूलों में 26.7% नमूने माइक्रोबायोलॉजिकल टेस्ट में फेल हो गए, जिससे बच्चे हर दिन दूषित पानी पीने को मजबूर हैं।


    इन जिलों की हालत सबसे खराब

    अनूपपुर और डिंडोरी जैसे आदिवासी बहुल जिलों में स्थिति सबसे खराब है, जहां एक भी पानी का नमूना सुरक्षित नहीं पाया गया। बालाघाट, बैतुल और छिंदवाड़ा में 50% से अधिक पानी के नमूने दूषित मिले हैं। मध्य प्रदेश में केवल 31.5% घरों में नल के कनेक्शन हैं, जो कि 70.9% के राष्ट्रीय औसत से बहुत कम है। जहां पाइपलाइन बिछी भी है, वहां व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई है; राज्य के 99.1% गांवों में पाइप से जलापूर्ति की व्यवस्था तो है, लेकिन केवल 76.6% घरों में ही चालू हालत में नल लगे हैं। इसका सीधा मतलब यह है कि हर चौथे घर में या तो नल खराब है या पानी ही नहीं आता।


    नल से पानी आने का मतलब सुरक्षित पानी होना नहीं….

    इससे भी बदतर बात यह है कि नल से पानी आने का मतलब सुरक्षित पानी होना नहीं है। इंदौर जिला, जिसे आधिकारिक तौर पर 100% नल कनेक्शन वाला घोषित किया गया है, वहां भी केवल 33% घरों को ही सुरक्षित पीने का पानी मिल रहा है। पूरे राज्य में 33% पानी के नमूने गुणवत्ता जांच में फेल हो गए, जो इस बात की पुष्टि करता है कि संकट केवल पानी की पहुंच का नहीं, बल्कि ‘जहरीली सप्लाई’ का है। केंद्र सरकार ने इस स्थिति को “सिस्टम की ओर से पैदा की गई आपदा” करार दिया है और चेतावनी दी है कि यदि पानी की गुणवत्ता में सुधार नहीं हुआ, तो इस साल फंड (बजट) में कटौती की जा सकती है।

    यह चेतावनी एक बड़ी त्रासदी के बाद आई है। इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी पीने से 20 लोगों की मौत हो गई। 429 लोगों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा, जिनमें से 16 आईसीयू (ICU) में हैं और तीन वेंटिलेटर पर हैं। अब मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने औपचारिक रूप से इस संकट को ‘पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी’ (सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल) घोषित कर दिया है। अपने आदेश में अदालत ने कहा कि “अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार में साफ पीने का पानी पाने का अधिकार भी शामिल है” और वर्तमान स्थिति सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल के दायरे में आती है।

  • स्मार्ट वेलनेस रूटीन: सुबह की हल्की एक्सरसाइज और मेडिटेशन से जीवन में संतुलन

    स्मार्ट वेलनेस रूटीन: सुबह की हल्की एक्सरसाइज और मेडिटेशन से जीवन में संतुलन

    Smart wellness
    नई दिल्ली । आज की तेज रफ्तार और भागदौड़ भरी जिंदगी में शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को संतुलित रखना एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। बढ़ते काम का दबावस्क्रीन टाइम और अनियमित दिनचर्या लोगों को तनावथकान और बीमारियों की ओर धकेल रही है। ऐसे में विशेषज्ञ स्मार्ट वेलनेस रूटीन अपनाने की सलाह दे रहे हैंजिसमें सुबह की हल्की एक्सरसाइजमेडिटेशन और हेल्दी नाश्ता को प्राथमिकता दी जाती है।

    विशेषज्ञों के अनुसारसुबह की शुरुआत अगर हल्की एक्सरसाइज से की जाए तो इसका असर पूरे दिन दिखाई देता है। स्ट्रेचिंगवॉकयोग या हल्की फ्री-हैंड एक्सरसाइज मांसपेशियों को सक्रिय बनाती है और ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर करती है। इससे न केवल शरीर में फुर्ती आती हैबल्कि दिनभर ऊर्जा बनी रहती है और थकान की समस्या कम होती है। नियमित रूप से की गई हल्की एक्सरसाइज दिल की सेहतवजन नियंत्रण और इम्यून सिस्टम को भी मजबूत बनाती है।शारीरिक लाभों के साथ-साथ हल्की एक्सरसाइज मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी बेहद फायदेमंद मानी जाती है। यह तनाव और चिंता को कम करने में मदद करती है और मूड को बेहतर बनाती है। विशेषज्ञ बताते हैं कि सुबह की ताजी हवा में की गई वॉक या योग दिमाग को शांत करता है और दिनभर सकारात्मक सोच बनाए रखने में सहायक होता है।

    स्मार्ट वेलनेस रूटीन का दूसरा अहम हिस्सा मेडिटेशन है। रोजाना 10 से 15 मिनट का ध्यान मन को स्थिरता और शांति प्रदान करता है। मेडिटेशन से न केवल मानसिक तनाव कम होता हैबल्कि एकाग्रता और निर्णय लेने की क्षमता भी बढ़ती है। विशेषज्ञों का मानना है कि ध्यान करने से नींद की गुणवत्ता में सुधार होता है और भावनात्मक संतुलन बना रहता है।हेल्दी नाश्ता भी स्मार्ट वेलनेस रूटीन की बुनियाद है। सुबह का नाश्ता शरीर को दिनभर की ऊर्जा देता है। पोषण विशेषज्ञों के अनुसारनाश्ते में प्रोटीनफाइबर और विटामिन का संतुलन होना चाहिए। अंडादलियाओट्सफलनट्स या स्मूदी जैसे विकल्प शरीर को लंबे समय तक ऊर्जावान बनाए रखते हैं और बार-बार भूख लगने से बचाते हैं।

    इसके साथ ही आज के डिजिटल युग में तकनीक का संतुलित इस्तेमाल भी जरूरी है। मोबाइललैपटॉप और अन्य डिजिटल डिवाइस का अत्यधिक उपयोग मानसिक स्वास्थ्य और नींद को प्रभावित कर सकता है। स्मार्ट वेलनेस रूटीन में डिजिटल डिटॉक्स और स्क्रीन टाइम मैनेजमेंट को शामिल करना बेहद जरूरी माना जा रहा है।विशेषज्ञों का कहना है कि वेलनेस के लिए बड़े और कठिन बदलाव जरूरी नहीं हैं। रोज सुबह 10 मिनट वॉक10 मिनट मेडिटेशन और एक संतुलित नाश्ता जैसे छोटे कदम भी जीवन में बड़ा सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं। यह रूटीन न केवल शरीर को स्वस्थ रखता हैबल्कि मन को भी शांत और संतुलित बनाता है।

  • माइक्रो स्पेस लिविंग का बढ़ता क्रेज: छोटे घरों में स्मार्ट डिजाइन और स्टाइलिश जीवन का नया दौर

    माइक्रो स्पेस लिविंग का बढ़ता क्रेज: छोटे घरों में स्मार्ट डिजाइन और स्टाइलिश जीवन का नया दौर


    नई दिल्ली । तेजी से बढ़ते शहरीकरण और सीमित जगह के कारण बड़े घरों का सपना अब हर किसी के लिए संभव नहीं रह गया है। महानगरों में बढ़ती जनसंख्या और महंगे रियल एस्टेट के बीच छोटे घरों यानी माइक्रो स्पेस लिविंग का चलन तेजी से बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि माइक्रो स्पेस लिविंग केवल मजबूरी नहीं बल्कि स्मार्ट और स्टाइलिश जीवनशैली का नया विकल्प बन चुका है।

    माइक्रो स्पेस लिविंग का मूल विचार है-कम जगह में अधिक सुविधा और आराम। छोटे घरों को इस तरह डिजाइन किया जा रहा है कि हर कोना उपयोगी बने। मल्टीफंक्शनल फर्नीचर इस ट्रेंड की सबसे बड़ी खासियत है। सोफा-बेड फोल्डिंग डाइनिंग टेबल वॉल-माउंटेड डेस्क और स्टोरेज-बेड जैसी चीजें न केवल जगह बचाती हैं बल्कि घर को व्यवस्थित और आधुनिक लुक भी देती हैं।मिनिमल डेकोर माइक्रो स्पेस लिविंग का अहम हिस्सा बन गया है। भारी फर्नीचर और ज्यादा सजावट की जगह हल्के रंग सिंपल डिजाइन और कम लेकिन उपयोगी चीजों को प्राथमिकता दी जा रही है। हल्के रंगों की दीवारें और बड़ी खिड़कियां घर को खुला और बड़ा महसूस कराती हैं। सही लाइटिंग खासकर नेचुरल और स्मार्ट लाइट्स छोटे घरों को आरामदायक और आकर्षक बनाती हैं।

    स्मार्ट होम टेक्नोलॉजी ने माइक्रो स्पेस लिविंग को और आसान बना दिया है। स्मार्ट लाइटिंग ऑटोमेटेड क्लाइमेट कंट्रोल वॉइस-एक्टिवेटेड डिवाइस और स्मार्ट सिक्योरिटी सिस्टम छोटे घरों में ज्यादा सुविधा प्रदान करते हैं। ये तकनीकें न केवल समय और ऊर्जा की बचत करती हैं बल्कि घर को भविष्य-अनुकूल भी बनाती हैं।छोटे घरों में काम और आराम के बीच संतुलन बनाना भी एक चुनौती होती है जिसे स्मार्ट डिजाइन के जरिए हल किया जा रहा है। मल्टीफंक्शनल वर्क डेस्क फोल्डिंग कुर्सियां और छुपा हुआ स्टोरेज कम जगह में होम ऑफिस और रिलैक्सेशन दोनों के लिए जगह तैयार करते हैं। इससे वर्क-फ्रॉम-होम करने वालों को भी सुविधा मिलती है।

    माइक्रो स्पेस लिविंग का एक बड़ा फायदा पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार जीवनशैली है। छोटे घरों में बिजली पानी और संसाधनों की खपत कम होती है जिससे यह ट्रेंड सस्टेनेबल लिविंग को बढ़ावा देता है। कम जगह कम सामान और स्मार्ट उपयोग से कार्बन फुटप्रिंट भी घटता है।युवाओं सिंगल प्रोफेशनल्स और छोटे परिवारों के बीच माइक्रो स्पेस लिविंग तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में स्मार्ट डिजाइन तकनीक और सस्टेनेबिलिटी के मेल से छोटे घरों का यह ट्रेंड और मजबूत होगा। माइक्रो स्पेस लिविंग यह साबित कर रहा है कि घर का आकार नहीं बल्कि उसकी समझदारी से की गई प्लानिंग जीवन को बेहतर बनाती है।