Author: bharati

  • तृषा से जुड़े कथित बयान पर बढ़ा विवाद, शिकायत के बाद उदयनिधि स्टालिन पर कार्रवाई, आरोपों से किया इनकार

    तृषा से जुड़े कथित बयान पर बढ़ा विवाद, शिकायत के बाद उदयनिधि स्टालिन पर कार्रवाई, आरोपों से किया इनकार


    नई दिल्ली ।
    तमिलनाडु की राजनीति में मंगलवार को उस समय हलचल तेज हो गई जब डीएमके नेता और विधानसभा में विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन को एक कथित विवादित बयान के मामले में पुलिस ने हिरासत में ले लिया। अभिनेत्री तृषा से जुड़ी कथित टिप्पणी को लेकर दर्ज शिकायत के बाद यह कार्रवाई की गई। मामले के सामने आने के बाद राज्य की राजनीति के साथ-साथ सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को लेकर व्यापक चर्चा शुरू हो गई है।

    पुलिस कार्रवाई के बाद उदयनिधि स्टालिन ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि उनके भाषण को वास्तविक संदर्भ से हटाकर संपादित किया गया और सोशल मीडिया पर भ्रामक तरीके से प्रसारित किया गया। उनके अनुसार उन्होंने किसी भी व्यक्ति के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी नहीं की थी और पूरे मामले को राजनीतिक रूप से प्रस्तुत किया जा रहा है।

    उदयनिधि ने कहा कि उनके भाषण के कुछ हिस्सों को “कट, कॉपी और पेस्ट” कर अलग अर्थ देने की कोशिश की गई है। उनका कहना है कि उन्होंने किसी का अपमान करने की मंशा से कोई टिप्पणी नहीं की और यदि पूरा भाषण देखा जाए तो वास्तविक संदर्भ स्पष्ट हो जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि वह कानूनी प्रक्रिया का पूरा सम्मान करेंगे और मामले का जवाब कानून के दायरे में देंगे।

    यह विवाद एक सार्वजनिक सभा के दौरान दिए गए उनके संबोधन से जुड़ा बताया जा रहा है। सभा के दौरान मौजूद लोगों के एक समूह ने अभिनेत्री तृषा का नाम लेकर नारे लगाए थे। इसके बाद उदयनिधि द्वारा कही गई एक टिप्पणी को लेकर विवाद खड़ा हो गया। सोशल मीडिया पर उस बयान के विभिन्न वीडियो क्लिप वायरल हुए, जिसके बाद इस पर राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रियाएं तेज हो गईं।

    विवाद बढ़ने के बाद अभिनेता विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम की महिला इकाई ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में आरोप लगाया गया कि उदयनिधि स्टालिन की टिप्पणी महिलाओं के सम्मान के खिलाफ है और अभिनेत्री तृषा को लेकर आपत्तिजनक संकेत देती है। शिकायत के आधार पर पुलिस ने संबंधित कानूनी धाराओं के तहत मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू की।

    मामले ने राजनीतिक सीमाओं से आगे बढ़कर मनोरंजन जगत का भी ध्यान आकर्षित किया। गायिका चिन्मयी श्रीपादा और अभिनेत्री तथा राजनेता खुशबू सुंदर ने सार्वजनिक रूप से इस कथित बयान की आलोचना की। उनका कहना था कि सार्वजनिक जीवन से जुड़े नेताओं को महिलाओं के प्रति सम्मानजनक भाषा का प्रयोग करना चाहिए और किसी भी प्रकार की विवादित टिप्पणी से बचना चाहिए।

    हालांकि उदयनिधि स्टालिन लगातार यह दोहरा रहे हैं कि उनके बयान की गलत व्याख्या की गई है। उनका कहना है कि पूरा भाषण देखने पर यह स्पष्ट हो जाएगा कि वायरल किए गए वीडियो और वास्तविक संदर्भ में अंतर है। उन्होंने अपने समर्थकों से भी अपील की कि वे अफवाहों पर विश्वास करने के बजाय पूरे तथ्य सामने आने का इंतजार करें।

    फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है और शिकायत में लगाए गए आरोपों के आधार पर कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। वहीं यह विवाद तमिलनाडु की राजनीति में नया मुद्दा बन गया है, जहां सत्तारूढ़ और विपक्षी दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी तेज हो गया है। आने वाले दिनों में जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर इस मामले की आगे की दिशा तय होगी।

  • एमबीबीएस अभ्यर्थियों के लिए एम्स कल्याणी में निकली 84 पदों पर भर्ती, जानिए योग्यता, चयन प्रक्रिया और अंतिम तिथि

    एमबीबीएस अभ्यर्थियों के लिए एम्स कल्याणी में निकली 84 पदों पर भर्ती, जानिए योग्यता, चयन प्रक्रिया और अंतिम तिथि

    नई दिल्ली । सरकारी मेडिकल संस्थान में नौकरी की तैयारी कर रहे एमबीबीएस अभ्यर्थियों के लिए अच्छी खबर है। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) कल्याणी ने जूनियर रेजिडेंट (गैर-शैक्षणिक) के 84 पदों पर भर्ती के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी है। योग्य और इच्छुक उम्मीदवार निर्धारित पात्रता पूरी करने के बाद 24 अगस्त तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। भर्ती प्रक्रिया कार्यकाल आधारित होगी और चयनित अभ्यर्थियों को सातवें वेतन आयोग के अनुसार वेतन और अन्य सुविधाएं प्रदान की जाएंगी।

    जारी भर्ती अधिसूचना के अनुसार कुल 84 रिक्तियों में विभिन्न वर्गों के लिए अलग-अलग पद निर्धारित किए गए हैं। इनमें अनारक्षित वर्ग के लिए 34, आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए 8, अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए 23, अनुसूचित जाति के लिए 13 और अनुसूचित जनजाति के लिए 6 पद शामिल हैं। आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन रखी गई है और उम्मीदवारों को अंतिम तिथि की शाम 5 बजे तक अपना आवेदन सफलतापूर्वक जमा करना होगा।

    भर्ती के लिए आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों के पास राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग से मान्यता प्राप्त संस्थान से एमबीबीएस की डिग्री होना अनिवार्य है। इसके साथ ही अभ्यर्थी ने अनिवार्य इंटर्नशिप पूरी कर ली हो और उसके पास इंटर्नशिप पूर्ण होने का प्रमाणपत्र उपलब्ध होना चाहिए। किसी भी राज्य मेडिकल काउंसिल में पंजीकरण भी आवश्यक शर्तों में शामिल है। जिन अभ्यर्थियों ने पहले दो बार जूनियर रेजिडेंसी पूरी कर ली है, उन्हें इस भर्ती प्रक्रिया में पात्र नहीं माना जाएगा।

    अभ्यर्थियों की अधिकतम आयु 33 वर्ष निर्धारित की गई है। आयु की गणना आवेदन की अंतिम तिथि के आधार पर होगी। आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को सरकारी नियमों के अनुसार अधिकतम आयु सीमा में छूट का लाभ मिलेगा। अभ्यर्थियों को आवेदन से पहले सभी पात्रता शर्तों का सावधानीपूर्वक अध्ययन करने की सलाह दी गई है।

    चयन प्रक्रिया में सबसे पहले आवेदन पत्र और आवश्यक दस्तावेजों की जांच की जाएगी। इसके बाद पात्र अभ्यर्थियों को लिखित परीक्षा में शामिल होना होगा। लिखित परीक्षा में सफल उम्मीदवारों को व्यक्तिगत साक्षात्कार के लिए बुलाया जाएगा। अंतिम चयन दोनों चरणों में प्रदर्शन के आधार पर किया जाएगा। प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार लिखित परीक्षा 8 सितंबर को एम्स कल्याणी परिसर में आयोजित की जाएगी, जबकि साक्षात्कार की तिथि बाद में अलग से घोषित की जाएगी।

    चयनित उम्मीदवारों को सातवें वेतन आयोग के पे मैट्रिक्स के लेवल-10 के अनुसार वेतन मिलेगा। इसके साथ 5,400 रुपये ग्रेड पे तथा अन्य निर्धारित भत्ते और सुविधाएं भी प्रदान की जाएंगी। आवेदन शुल्क सामान्य और ओबीसी वर्ग के लिए 1,000 रुपये तथा एससी, एसटी और ईडब्ल्यूएस वर्ग के लिए 500 रुपये निर्धारित किया गया है। दिव्यांग श्रेणी के उम्मीदवारों को आवेदन शुल्क से छूट दी गई है।

    सरकारी मेडिकल संस्थानों में कार्य करने की इच्छा रखने वाले अभ्यर्थियों के लिए यह भर्ती एक महत्वपूर्ण अवसर मानी जा रही है। ऐसे उम्मीदवार जो निर्धारित योग्यता रखते हैं, वे समय सीमा के भीतर आवेदन प्रक्रिया पूरी कर इस अवसर का लाभ उठा सकते हैं।

  • JPSC-JSSC भर्ती विवाद के बीच छात्रों के पक्ष में बोलीं सोनाक्षी सिन्हा, निष्पक्ष जांच की मांग को मिला बल

    JPSC-JSSC भर्ती विवाद के बीच छात्रों के पक्ष में बोलीं सोनाक्षी सिन्हा, निष्पक्ष जांच की मांग को मिला बल

    नई दिल्ली । झारखंड में JPSC और JSSC भर्ती परीक्षाओं को लेकर जारी छात्र आंदोलन को अब बॉलीवुड अभिनेत्री सोनाक्षी सिन्हा का भी समर्थन मिल गया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा करते हुए छात्रों की स्थिति पर चिंता व्यक्त की और पूछा कि आखिर देश के छात्रों को इस तरह की परेशानियों का सामना कब तक करना पड़ेगा। उनकी प्रतिक्रिया सामने आने के बाद यह मुद्दा एक बार फिर सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है और बड़ी संख्या में लोग इस पर अपनी राय व्यक्त कर रहे हैं।

    सोनाक्षी सिन्हा ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर झारखंड के छात्र आंदोलन से जुड़ी एक वीडियो पोस्ट साझा की। इसके साथ उन्होंने लिखा कि देश के छात्रों को इस तरह संघर्ष करते देखना बेहद दुखद है और यह स्थिति कब समाप्त होगी, यह सबसे बड़ा सवाल है। उनकी इस टिप्पणी को कई सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं ने छात्रों के प्रति संवेदनशीलता और समर्थन के रूप में देखा। वहीं कुछ लोगों ने भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

    झारखंड में छात्र 29 जुलाई से रांची स्थित जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में धरना दे रहे हैं। प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों का आरोप है कि JPSC और JSSC की भर्ती परीक्षाओं में व्यापक स्तर पर अनियमितताएं हुई हैं। उनका कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच आवश्यक है ताकि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे और योग्य अभ्यर्थियों के साथ न्याय हो सके। छात्रों का आरोप है कि अब तक हुई कार्रवाई उनकी अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं रही है।

    प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों की प्रमुख मांग 19 अप्रैल को आयोजित 14वीं संयुक्त प्रारंभिक परीक्षा को रद्द करने की है। इसके अलावा वे भर्ती प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों की स्वतंत्र जांच कराने, परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी बनाने तथा OMR शीट में ‘Not Attempted’ का अलग विकल्प जोड़ने की भी मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि इससे मूल्यांकन प्रक्रिया अधिक स्पष्ट और निष्पक्ष बन सकेगी।

    छात्रों ने यह भी दावा किया है कि पहले सामने आए प्रश्नपत्र लीक प्रकरणों ने भर्ती प्रणाली की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि यदि पारदर्शी जांच नहीं हुई तो हजारों अभ्यर्थियों का भविष्य प्रभावित हो सकता है। प्रदर्शन में शामिल कई छात्रों का कहना है कि वे लंबे समय से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं और उन्हें केवल निष्पक्ष अवसर की अपेक्षा है।

    इस बीच विभिन्न सामाजिक और सार्वजनिक हस्तियों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही हैं। कुछ लोगों ने छात्रों की मांगों का समर्थन किया है, जबकि अन्य ने मामले के शीघ्र समाधान और निष्पक्ष जांच की आवश्यकता बताई है। राजनीतिक स्तर पर भी इस मुद्दे को लेकर बयानबाजी जारी है। हालांकि संबंधित संस्थाओं की ओर से समय-समय पर जांच और आवश्यक कार्रवाई का भरोसा दिया गया है।

    भर्ती परीक्षाओं से जुड़े विवादों ने एक बार फिर परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता, पारदर्शिता और जवाबदेही पर बहस तेज कर दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि समयबद्ध और निष्पक्ष जांच के साथ ऐसी व्यवस्थाएं विकसित करना आवश्यक है, जिससे अभ्यर्थियों का विश्वास बना रहे और भविष्य में इस प्रकार के विवादों की पुनरावृत्ति न हो।

  • राजबाड़ा बाजार में अचानक बिगड़ी तबीयत, देवास से खरीदारी करने आए व्यक्ति ने अस्पताल में तोड़ा दम

    राजबाड़ा बाजार में अचानक बिगड़ी तबीयत, देवास से खरीदारी करने आए व्यक्ति ने अस्पताल में तोड़ा दम


    इंदौर ।  इंदौर के व्यस्त राजबाड़ा बाजार में उस समय अफरा तफरी का माहौल बन गया जब देवास जिले के बागली से खरीदारी करने आए 50 वर्षीय व्यक्ति की अचानक तबीयत बिगड़ गई और कुछ ही देर बाद उनकी मौत हो गई। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार डॉक्टरों ने हार्ट अटैक की आशंका जताई है जबकि मौत के वास्तविक कारणों की पुष्टि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद होगी। इस घटना ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि हृदय संबंधी समस्याएं बिना किसी बड़े संकेत के भी अचानक सामने आ सकती हैं।

    मृतक की पहचान विक्रम पुत्र नाथूलाल चौहान निवासी बागली जिला देवास के रूप में हुई है। बताया गया कि वह अपने एक रिश्तेदार के साथ घरेलू खरीदारी के लिए इंदौर आए थे। दोनों राजबाड़ा क्षेत्र में अलग अलग दुकानों पर सामान खरीद रहे थे। इसी दौरान विक्रम एक दुकान पर बैठे हुए थे तभी उन्हें अचानक घबराहट महसूस हुई। आसपास मौजूद लोगों के अनुसार कुछ ही क्षणों में उनकी तबीयत और बिगड़ गई और वह बेहोश होकर जमीन पर गिर पड़े।

    घटना होते ही वहां मौजूद लोगों ने तुरंत मानवता का परिचय दिया और बिना समय गंवाए उन्हें ऑटो की मदद से महाराजा यशवंतराव अस्पताल पहुंचाया। अस्पताल में डॉक्टरों ने तत्काल जांच की लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। शुरुआती जांच में मौत की वजह हार्ट अटैक मानी जा रही है हालांकि पुलिस ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने तक अंतिम कारण पर कुछ भी कहने से इनकार किया है।

    घटना की सूचना मिलते ही सराफा थाना पुलिस अस्पताल पहुंची और आवश्यक कानूनी कार्रवाई शुरू की। पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिलने के बाद ही मौत के कारणों की आधिकारिक पुष्टि की जाएगी। यदि किसी अन्य चिकित्सकीय कारण का पता चलता है तो उसी के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    परिजनों के अनुसार विक्रम सामाजिक कार्यों से जुड़े हुए थे और बागली क्षेत्र में एक गैर सरकारी संस्था के साथ काम करते थे। उनका व्यवहार मिलनसार था और समाज सेवा में उनकी सक्रिय भूमिका रही थी। परिवार में पत्नी चार बच्चे और अन्य सदस्य हैं। अचानक हुई इस घटना से पूरे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। जैसे ही मौत की खबर गांव पहुंची परिवार और परिचितों में शोक की लहर दौड़ गई।

    चिकित्सकों का कहना है कि लगातार बढ़ती भागदौड़ तनाव अनियमित दिनचर्या और हृदय रोगों के प्रति लापरवाही के कारण इस तरह की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं। यदि किसी व्यक्ति को अचानक सीने में दर्द घबराहट सांस लेने में तकलीफ अत्यधिक पसीना या बेहोशी जैसे लक्षण महसूस हों तो तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेना बेहद जरूरी है। समय पर इलाज मिलने से कई मामलों में मरीज की जान बचाई जा सकती है।

    यह दुखद घटना एक बार फिर स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने की जरूरत को रेखांकित करती है। नियमित स्वास्थ्य जांच संतुलित जीवनशैली और समय पर चिकित्सा सलाह हृदय संबंधी गंभीर जोखिमों को काफी हद तक कम कर सकती है। वहीं सार्वजनिक स्थानों पर मौजूद लोगों की तत्परता भी आपातकालीन परिस्थितियों में किसी की जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

  • आईपीएल के दौरान उड़ी अफेयर की चर्चाओं पर वर्षों बाद बोले ब्रेट ली, प्रीति जिंटा संग रिश्ते को लेकर दिया साफ जवाब

    आईपीएल के दौरान उड़ी अफेयर की चर्चाओं पर वर्षों बाद बोले ब्रेट ली, प्रीति जिंटा संग रिश्ते को लेकर दिया साफ जवाब

    नई दिल्ली । ऑस्ट्रेलिया के पूर्व तेज गेंदबाज ब्रेट ली ने वर्षों से चली आ रही उन चर्चाओं पर आखिरकार अपनी प्रतिक्रिया दी है, जिनमें उनका नाम बॉलीवुड अभिनेत्री और पंजाब किंग्स की सह-मालिक प्रीति जिंटा के साथ जोड़ा जाता रहा। इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के शुरुआती सीजन में दोनों को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई गई थीं, लेकिन अब ब्रेट ली ने साफ कर दिया है कि उनके और प्रीति जिंटा के बीच कभी भी प्रेम संबंध नहीं था।

    ब्रेट ली ने हालिया बातचीत में कहा कि उन्होंने कभी किसी बॉलीवुड अभिनेत्री को डेट नहीं किया। उन्होंने बताया कि प्रीति जिंटा उनके लिए हमेशा एक अच्छी दोस्त रही हैं और आज भी दोनों के बीच सम्मान और मित्रता का वही रिश्ता कायम है। उन्होंने कहा कि उस समय प्रीति टीम की मालिक थीं और उनके साथ पेशेवर और दोस्ताना संबंध थे, जिन्हें लोगों ने अलग नजरिए से देखना शुरू कर दिया।

    पूर्व ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटर ने कहा कि अफवाहों का उन पर कभी कोई खास असर नहीं पड़ा क्योंकि उन्हें सच्चाई पता थी। उन्होंने बताया कि सार्वजनिक जीवन में रहने वाले लोगों के बारे में इस तरह की बातें अक्सर होती रहती हैं, लेकिन उन्होंने कभी इन चर्चाओं को गंभीरता से नहीं लिया। उनके अनुसार, लोगों की धारणाएं अलग हो सकती हैं, लेकिन वास्तविकता वही होती है जो संबंधित लोग जानते हैं।

    ब्रेट ली और प्रीति जिंटा का नाम सबसे अधिक वर्ष 2008 से 2011 के बीच चर्चा में रहा। उस समय ब्रेट ली आईपीएल में किंग्स इलेवन पंजाब की ओर से खेलते थे, जबकि प्रीति जिंटा फ्रेंचाइजी की सह-मालिक थीं। मैचों, टीम के कार्यक्रमों और विभिन्न प्रचार अभियानों में दोनों अक्सर एक साथ दिखाई देते थे। बाद में एक रेस्तरां में दोनों की मुलाकात की तस्वीरें सामने आने के बाद अफेयर की अटकलों ने और जोर पकड़ लिया था।

    हालांकि उस समय भी प्रीति जिंटा ने इन खबरों का सार्वजनिक रूप से खंडन किया था। उन्होंने सोशल मीडिया पर स्पष्ट किया था कि उनके और ब्रेट ली के बीच केवल दोस्ती का रिश्ता है। उन्होंने यह भी कहा था कि हर वर्ष एक ही तरह की अफवाहों को दोहराया जाना निराधार है और इसमें कोई सच्चाई नहीं है।

    ब्रेट ली की निजी जिंदगी की बात करें तो उन्होंने वर्ष 2006 में एलिजाबेथ केम्प से शादी की थी। इस विवाह से उनका एक बेटा हुआ, लेकिन बाद में दोनों अलग हो गए। इसके बाद वर्ष 2014 में उन्होंने लाना एंडरसन से विवाह किया। वर्तमान में वे अपने परिवार के साथ खुशहाल वैवाहिक जीवन व्यतीत कर रहे हैं।

    ब्रेट ली के इस बयान के बाद वर्षों से चली आ रही चर्चाओं पर विराम लग गया है। उनके स्पष्ट जवाब ने यह साफ कर दिया है कि आईपीएल के शुरुआती दौर में दोनों के बारे में जो अफवाहें फैली थीं, वे केवल अटकलें थीं और उनके बीच हमेशा दोस्ती का ही रिश्ता रहा।

  • CJP समर्थन के बदले पैसे लेने के आरोपों पर भड़कीं उर्फी जावेद, बोलीं- एक रुपया साबित करो, अकाउंट डिलीट कर दूंगी

    CJP समर्थन के बदले पैसे लेने के आरोपों पर भड़कीं उर्फी जावेद, बोलीं- एक रुपया साबित करो, अकाउंट डिलीट कर दूंगी

    नई दिल्ली । सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर और अभिनेत्री उर्फी जावेद एक बार फिर विवादों के केंद्र में हैं। इस बार उन पर आरोप लगाया गया कि उन्होंने Cockroach Janta Party (CJP) का समर्थन करने के बदले एक लाख रुपये लिए थे। इन आरोपों पर उर्फी ने खुलकर प्रतिक्रिया दी है और पूरे मामले को पूरी तरह निराधार बताते हुए आरोप लगाने वालों को खुली चुनौती दी है।

    हाल ही में सोशल मीडिया पर यह दावा किया गया कि CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने अपने अभियान के समर्थन के लिए कई सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स और चर्चित चेहरों को भुगतान किया था। इसी दावे में उर्फी जावेद का नाम भी शामिल किया गया और आरोप लगाया गया कि उन्हें पार्टी का समर्थन करने के बदले एक लाख रुपये मिले थे। यह दावा सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इस विषय को लेकर व्यापक चर्चा शुरू हो गई।

    इन आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए उर्फी जावेद ने अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने सोशल मीडिया पर संबंधित खबर का स्क्रीनशॉट साझा करते हुए पहले आश्चर्य व्यक्त किया और फिर वीडियो जारी कर आरोपों का विस्तार से जवाब दिया। उर्फी ने कहा कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप पूरी तरह झूठे हैं और उनका वास्तविकता से कोई संबंध नहीं है।

    उर्फी ने आरोप लगाने वाले सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर फैजान अंसारी पर भी निशाना साधा। उनका कहना है कि यह पहली बार नहीं है जब उनके बारे में गलत जानकारी फैलाई गई हो। उन्होंने दावा किया कि पहले भी उनके खिलाफ कई तरह की भ्रामक और असत्य बातें सार्वजनिक की जा चुकी हैं। उर्फी के अनुसार इस तरह के आरोप उनकी छवि खराब करने की कोशिश हैं।

    उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोई व्यक्ति उनके पेशे और सोशल मीडिया से होने वाली आय को समझता है तो वह ऐसे आरोपों पर आसानी से विश्वास नहीं करेगा। उर्फी ने तंज भरे अंदाज में कहा कि बिना किसी कारण केवल एक लाख रुपये के लिए किसी संगठन का समर्थन करने का आरोप वास्तविकता से मेल नहीं खाता। उनका कहना था कि ऐसे दावे तथ्यों के बजाय केवल अफवाहों पर आधारित हैं।

    उर्फी जावेद ने यह भी दावा किया कि उन्हें इस पूरे घटनाक्रम से आर्थिक नुकसान हुआ है। उनके अनुसार CJP का समर्थन करने के बाद कई ब्रांड्स ने उनके साथ व्यावसायिक साझेदारी समाप्त कर दी, जिससे उन्हें वित्तीय हानि उठानी पड़ी। उन्होंने कहा कि उन्हें किसी प्रकार का भुगतान नहीं मिला, बल्कि इसके विपरीत उनके काम और कमाई पर असर पड़ा है।

    इस मामले में उर्फी ने मीडिया की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि किसी भी आरोप को प्रकाशित करने से पहले उसके समर्थन में ठोस प्रमाण होना चाहिए। उन्होंने बिना पर्याप्त साक्ष्यों के केवल दावों के आधार पर खबरें प्रकाशित करने की प्रवृत्ति पर भी आपत्ति जताई।

    उर्फी ने अंत में आरोप लगाने वालों को खुली चुनौती देते हुए कहा कि यदि कोई यह साबित कर दे कि उन्होंने CJP का समर्थन करने के बदले एक रुपया भी लिया है, तो वह उसी दिन अपना इंस्टाग्राम अकाउंट स्थायी रूप से बंद कर देंगी। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया उनके करियर और आय का प्रमुख माध्यम है, लेकिन यदि आरोप सही साबित होते हैं तो वह बिना किसी हिचकिचाहट के अपना अकाउंट हटाने के लिए तैयार हैं। फिलहाल यह विवाद सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है और दोनों पक्ष अपने-अपने दावों पर कायम हैं।

  • प्रतियोगी परीक्षा का दबाव या मानसिक तनाव इंदौर में 18 वर्षीय छात्र ने उठाया खौफनाक कदम

    प्रतियोगी परीक्षा का दबाव या मानसिक तनाव इंदौर में 18 वर्षीय छात्र ने उठाया खौफनाक कदम


    इंदौर  प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए इंदौर आए एक 18 वर्षीय छात्र की आत्महत्या की घटना ने एक बार फिर छात्रों पर बढ़ते मानसिक दबाव और अकेलेपन की समस्या को उजागर कर दिया है। भंवरकुआ थाना क्षेत्र में किराए के कमरे में रह रहे छात्र ने सोमवार रात फांसी लगाकर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली। घटना की जानकारी तब मिली जब उसके दोस्त कोचिंग से लौटे और कमरे का दरवाजा खोलने पर उसे फंदे से लटका पाया। आनन फानन में उसे अस्पताल ले जाया गया लेकिन चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

    पुलिस के अनुसार मृतक की पहचान प्रियांश पुत्र अजीत कौरव निवासी इंद्रपुरी कॉलोनी जिला नरसिंहगढ़ गाडरवाड़ा के रूप में हुई है। प्रियांश एसएससी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने के उद्देश्य से करीब पंद्रह दिन पहले ही इंदौर आया था। वह भंवरकुआ क्षेत्र में अपने तीन दोस्तों के साथ किराए के कमरे में रहकर कोचिंग कर रहा था और प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी में जुटा हुआ था।

    मृतक के दोस्त शिवम ने बताया कि सोमवार शाम वह और एक अन्य साथी नियमित कोचिंग के लिए गए थे। इससे कुछ समय पहले उनका तीसरा दोस्त भी किसी परिचित से मिलने बाहर चला गया था। उस समय प्रियांश कमरे में अकेला था। जब दोनों दोस्त कोचिंग से वापस लौटे तो उन्होंने देखा कि प्रियांश फंदे पर लटका हुआ है। दोस्तों ने तुरंत उसे नीचे उतारकर नजदीकी अस्पताल पहुंचाया जहां प्राथमिक जांच के बाद उसे एमवाय अस्पताल रेफर किया गया। हालांकि वहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

    दोस्तों ने पुलिस को बताया कि इंदौर आने के बाद से ही प्रियांश का पढ़ाई में मन नहीं लग रहा था। वह एसएससी परीक्षा की तैयारी के लिए कोचिंग में डेमो क्लास कर रहा था लेकिन नए माहौल और पढ़ाई के दबाव के कारण वह सहज महसूस नहीं कर पा रहा था। उसने कुछ दिन पहले अपने माता पिता से फोन पर बातचीत करते हुए घर लौटने की इच्छा भी जताई थी। परिजनों ने उसे वापस आने के लिए कह दिया था लेकिन उससे पहले ही उसने यह आत्मघाती कदम उठा लिया।

    प्रियांश एक किसान परिवार से था। परिवार में माता पिता के अलावा उसका एक बड़ा भाई है जो भोपाल में बीटेक की पढ़ाई कर रहा है। बेटे की मौत की खबर मिलते ही परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। परिजन देर रात इंदौर पहुंचे जहां पोस्टमार्टम की प्रक्रिया के बाद शव उन्हें सौंपा जाएगा।

    भंवरकुआ थाना पुलिस ने मामले में मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस ने कमरे की तलाशी ली लेकिन वहां से कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ। फिलहाल पुलिस दोस्तों और परिजनों के बयान दर्ज कर आत्महत्या के कारणों की जांच कर रही है। प्रारंभिक जांच में किसी तरह की आपराधिक आशंका सामने नहीं आई है लेकिन सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच की जा रही है।

    यह घटना प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं के सामने मौजूद मानसिक तनाव और भावनात्मक चुनौतियों की ओर भी गंभीर संकेत देती है। विशेषज्ञों का मानना है कि नए शहर में अकेलापन पढ़ाई का दबाव और भविष्य की चिंता कई बार छात्रों पर गहरा मानसिक प्रभाव डालती है। ऐसे में परिवार मित्रों और संस्थानों को छात्रों की भावनात्मक स्थिति पर भी बराबर ध्यान देने की जरूरत है ताकि समय रहते उन्हें आवश्यक सहयोग और मार्गदर्शन मिल सके।

  • बांग्लादेश में कानून-व्यवस्था पर आवामी लीग का हमला, यूनुस और बीएनपी सरकारों पर राज्य विफलता का आरोप

    बांग्लादेश में कानून-व्यवस्था पर आवामी लीग का हमला, यूनुस और बीएनपी सरकारों पर राज्य विफलता का आरोप


    नई दिल्ली । बांग्लादेश की प्रमुख विपक्षी पार्टी आवामी लीग ने देश की मौजूदा राजनीतिक और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठाते हुए दावा किया है कि बीते दो वर्षों में देश धीरे-धीरे राज्य विफलता जैसी स्थिति की ओर बढ़ गया है। पार्टी का कहना है कि जुलाई 2024 के आंदोलन के बाद जिन सुधारों, लोकतांत्रिक मूल्यों, नागरिक स्वतंत्रता और कानून के शासन की उम्मीद जताई गई थी, वे पूरी नहीं हो सकीं। इसके विपरीत देश में असुरक्षा, राजनीतिक टकराव और संस्थागत कमजोरी लगातार बढ़ती गई है।

    पार्टी ने आरोप लगाया कि अंतरिम प्रशासन से लेकर वर्तमान बीएनपी सरकार तक किसी भी शासन ने हालात को सामान्य बनाने में प्रभावी भूमिका नहीं निभाई। उसके अनुसार दोनों सरकारों ने कानून-व्यवस्था की चुनौतियों का समाधान करने के बजाय असाधारण प्रशासनिक शक्तियों को उचित ठहराने के लिए जनता के बीच फैली असुरक्षा का इस्तेमाल किया। आवामी लीग का कहना है कि इससे सामाजिक स्तर पर अव्यवस्था बढ़ी और स्थानीय स्तर पर आपराधिक समूहों तथा भीड़तंत्र को बढ़ावा मिला।

    आवामी लीग ने दावा किया कि सबसे अधिक असर धार्मिक अल्पसंख्यकों, महिलाओं और बच्चों पर पड़ा है। पार्टी के अनुसार कई इलाकों में अल्पसंख्यक समुदायों के घरों, व्यापारिक प्रतिष्ठानों और धार्मिक स्थलों पर हमलों की घटनाएं सामने आई हैं। साथ ही संपत्तियों पर अवैध कब्जे, धमकियों और यौन हिंसा जैसी घटनाओं में भी वृद्धि हुई है। पार्टी का आरोप है कि पीड़ितों को पर्याप्त सुरक्षा और समय पर न्याय नहीं मिल पा रहा है।

    पार्टी ने कहा कि वर्ष 2025 के दौरान सांप्रदायिक हिंसा, मौतों और धार्मिक स्थलों पर हमलों की अनेक घटनाएं दर्ज की गईं। इसके अलावा वर्ष 2026 के शुरुआती महीनों में भी ऐसी घटनाओं के जारी रहने का दावा किया गया है। आवामी लीग का कहना है कि इन मामलों में प्रभावी कार्रवाई की कमी के कारण दोषियों का मनोबल बढ़ा है और प्रभावित समुदायों में भय का माहौल बना हुआ है।

    महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराधों को लेकर भी पार्टी ने चिंता जताई है। उसके अनुसार बलात्कार, यौन उत्पीड़न और बच्चों के खिलाफ हिंसा के मामलों में बढ़ोतरी देखने को मिली है। पार्टी का दावा है कि कई मामलों में आरोपी पीड़ितों के परिचित, पड़ोसी, रिश्तेदार या शिक्षक रहे हैं। ऐसे मामलों में जांच और न्यायिक प्रक्रिया की धीमी गति पर भी सवाल उठाए गए हैं।

    आवामी लीग ने यह भी आरोप लगाया कि राजनीतिक हिंसा, भीड़ द्वारा हत्याएं, पत्रकारों और शिक्षकों पर हमले तथा जमीन कब्जाने की घटनाएं एक समान पैटर्न को दर्शाती हैं। पार्टी के अनुसार इन मामलों में कमजोर जांच, राजनीतिक हस्तक्षेप और न्याय मिलने में देरी जैसी समस्याएं लगातार सामने आ रही हैं। उसका कहना है कि आम नागरिकों के बीच असुरक्षा की भावना बढ़ रही है और लोग शाम के बाद बाहर निकलने से भी परहेज करने लगे हैं।

    पार्टी ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील करते हुए कहा कि बांग्लादेश की मौजूदा स्थिति पर गंभीरता से ध्यान दिया जाना चाहिए। उसका मानना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था, कानून के शासन और मानवाधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करने के लिए संबंधित पक्षों को सरकार से जवाबदेही तय करने की अपेक्षा करनी चाहिए। वहीं, इन आरोपों पर सरकार की ओर से इस रिपोर्ट के समय तक कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

  • वृद्धाश्रम टूटा तो टूट गया मां-बेटे का साथ, इंदौर में ममता से दूर मासूम की दर्दभरी कहानी आई सामने

    वृद्धाश्रम टूटा तो टूट गया मां-बेटे का साथ, इंदौर में ममता से दूर मासूम की दर्दभरी कहानी आई सामने


    इंदौर । इंदौर के प्रेमाश्रय वृद्धाश्रम में बुजुर्गों के साथ मारपीट का मामला सामने आने के बाद प्रशासन की कार्रवाई ने जहां पूरे प्रदेश का ध्यान अपनी ओर खींचा वहीं इस कार्रवाई के बीच एक ऐसी मानवीय कहानी सामने आई जिसने हर किसी की आंखें नम कर दीं। वृद्धाश्रम को खाली कराए जाने और बाद में उसे ध्वस्त किए जाने की प्रक्रिया में एक साल का मासूम अपनी मां से बिछड़ गया। पिछले तीन दिनों से वह मां की गोद के लिए तड़प रहा है जबकि उसकी मां भी दूसरे आश्रय गृह में भेज दी गई है। यह घटना प्रशासनिक कार्रवाई के बीच मानवीय संवेदनाओं और छोटे बच्चे की जरूरतों को लेकर कई सवाल खड़े कर रही है।

    जानकारी के अनुसार करीब 30 वर्षीय मानसिक रूप से अस्वस्थ महिला को 21 जून 2025 को लसूडिया पुलिस ने रेलवे ट्रैक के पास लावारिस हालत में रेस्क्यू किया था। उस समय वह गर्भवती थी और उसकी पहचान या परिजनों के बारे में कोई जानकारी नहीं मिल सकी थी। ऐसे में प्रशासन ने उसे संरक्षण देते हुए प्रेमाश्रय वृद्धाश्रम में रहने की व्यवस्था की थी ताकि उसकी देखभाल सुरक्षित माहौल में हो सके।

    कुछ ही समय बाद जुलाई 2025 में महिला ने एक बेटे को जन्म दिया। बच्चे के जन्म के बाद मां और बेटा दोनों प्रेमाश्रय में ही साथ रह रहे थे। आश्रय गृह में मौजूद लोग बताते हैं कि मां अपने बेटे की देखभाल करती थी और बच्चा भी पूरी तरह उसी पर निर्भर था। दोनों का जीवन सीमित संसाधनों के बावजूद एक-दूसरे के सहारे चल रहा था।

    लेकिन प्रेमाश्रय वृद्धाश्रम में बुजुर्गों के साथ मारपीट का वीडियो सामने आने के बाद प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए पूरे आश्रय गृह को खाली कराने का फैसला लिया। इस दौरान वहां रह रहे सभी बुजुर्गों और आश्रितों को अलग-अलग आश्रय गृहों तथा अस्पतालों में स्थानांतरित कर दिया गया। इसी प्रक्रिया में मानसिक रूप से अस्वस्थ महिला को दूसरे आश्रय गृह भेज दिया गया जबकि उसका एक साल का बेटा प्रेमाश्रय में ही रह गया। इस तरह प्रशासनिक कार्रवाई के बीच मां और बेटा एक-दूसरे से अलग हो गए।

    वृद्धाश्रम में मौजूद लोगों का कहना है कि बच्चे को समय पर दूध और अन्य आवश्यक भोजन दिया जा रहा है तथा उसकी देखभाल में कोई कमी नहीं रखी जा रही। इसके बावजूद जब भी उसे मां की गोद नहीं मिलती वह रोने लगता है और काफी देर तक बेचैन रहता है। उसे चुप कराने और बहलाने की कोशिश की जाती है लेकिन मां का स्नेह और स्पर्श किसी भी व्यवस्था से पूरा नहीं हो पा रहा। उसकी मासूम आंखें हर पल अपनी मां को तलाशती दिखाई देती हैं।

    इस घटना ने सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों को भी भावुक कर दिया है। उनका कहना है कि एक वर्ष की उम्र में बच्चा पूरी तरह मां के स्नेह और देखभाल पर निर्भर होता है। ऐसे में लंबे समय तक दोनों का अलग रहना बच्चे के मानसिक और शारीरिक विकास पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है। इसलिए प्रशासन को जल्द से जल्द ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए जिससे मां और बेटे को फिर से एक साथ रखा जा सके।

    यह मामला केवल प्रशासनिक कार्रवाई का नहीं बल्कि संवेदनशील मानवीय पहलू का भी है। जहां एक ओर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई जरूरी है वहीं दूसरी ओर ऐसे मासूम बच्चों और असहाय महिलाओं की भावनात्मक जरूरतों का ध्यान रखना भी उतना ही आवश्यक है। अब सभी की नजर प्रशासन पर है कि वह इस मां और बेटे को दोबारा मिलाने के लिए कितनी जल्दी और क्या कदम उठाता है।

  • भारत-नेपाल सीमा पर फिर बढ़ा तनाव, सुस्ता में अस्थायी बांध तोड़े जाने के आरोप से विवाद गहराया

    भारत-नेपाल सीमा पर फिर बढ़ा तनाव, सुस्ता में अस्थायी बांध तोड़े जाने के आरोप से विवाद गहराया

    नई दिल्ली । भारत और नेपाल के बीच सीमा से जुड़े संवेदनशील सुस्ता क्षेत्र में एक बार फिर तनाव की स्थिति बन गई है। नेपाल की ओर से आरोप लगाया गया है कि भारतीय सशस्त्र सीमा बल के जवानों ने नेपाली क्षेत्र में प्रवेश कर वहां बनाया जा रहा एक अस्थायी मिट्टी का बांध हटा दिया। नेपाली पक्ष का कहना है कि यह बांध नारायणी नदी के बढ़ते जलस्तर और संभावित बाढ़ से स्थानीय बस्तियों की सुरक्षा के उद्देश्य से बनाया जा रहा था। इस घटना के बाद सीमा क्षेत्र में कुछ समय के लिए तनावपूर्ण माहौल बन गया, हालांकि प्रशासनिक हस्तक्षेप के बाद स्थिति सामान्य बताई जा रही है।

    बताया जा रहा है कि विवाद उस समय सामने आया जब स्थानीय स्तर पर अस्थायी तटबंध निर्माण का कार्य चल रहा था। नेपाल का दावा है कि भारतीय सुरक्षा कर्मियों ने इस निर्माण पर आपत्ति जताई और बाद में बांध को हटाने की कार्रवाई की। इस दौरान स्थानीय लोगों और भारतीय सुरक्षाकर्मियों के बीच बहस भी हुई। घटना का एक वीडियो भी सामने आने की चर्चा है, जिसके बाद मामला दोनों देशों के अधिकारियों तक पहुंच गया।

    नेपाल सरकार ने इस घटनाक्रम को गंभीरता से लेते हुए राजनयिक स्तर पर भारत के समक्ष अपना विरोध दर्ज कराया है। नेपाल का कहना है कि सीमा से जुड़े मामलों में पहले से तय व्यवस्थाओं का सम्मान किया जाना चाहिए और किसी भी कार्रवाई से पहले आपसी समन्वय आवश्यक है। वहीं भारतीय पक्ष की ओर से यह बताया गया कि जिस क्षेत्र में निर्माण किया जा रहा था, वह लंबे समय से विवादित माना जाता है और ऐसे इलाकों में यथास्थिति बनाए रखने पर दोनों देशों के बीच पहले भी सहमति बन चुकी है।

    सुस्ता क्षेत्र भारत और नेपाल के बीच लंबे समय से विवाद का विषय रहा है। दोनों देश इस क्षेत्र पर अपना-अपना दावा करते रहे हैं। समय-समय पर सीमा निर्धारण, नदी की धारा में बदलाव और स्थानीय गतिविधियों को लेकर मतभेद सामने आते रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि नदी के मार्ग में परिवर्तन के कारण इस क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति भी समय के साथ बदलती रही है, जिससे सीमा संबंधी विवाद और जटिल हो गया है।

    स्थानीय प्रशासन ने बताया कि हालात पूरी तरह नियंत्रण में हैं और किसी प्रकार की अप्रिय घटना नहीं हुई है। एहतियात के तौर पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की गई है ताकि दोनों ओर के नागरिकों के बीच किसी प्रकार का तनाव न बढ़े। प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और संवाद के माध्यम से समाधान निकालने की कोशिश की जा रही है।

    भारत और नेपाल के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आर्थिक संबंध बेहद मजबूत रहे हैं। दोनों देशों के बीच खुली सीमा व्यवस्था के कारण लाखों लोग रोजमर्रा के आवागमन और व्यापार से जुड़े हैं। ऐसे में सीमा से जुड़े किसी भी विवाद का शांतिपूर्ण और आपसी सहमति से समाधान निकालना दोनों देशों के हित में माना जाता है। जानकारों का मानना है कि संवाद और कूटनीतिक स्तर पर निरंतर संपर्क बनाए रखने से इस प्रकार के विवादों का स्थायी समाधान संभव हो सकता है और द्विपक्षीय संबंधों में विश्वास कायम रहेगा।