Author: bharati

  • डिगर में टॉम क्रूज का जबरदस्त ट्रांसफॉर्मेशन, भारी फैट सूट पहनकर निभाया अनोखा किरदार, 10 मिनट के मोनोलॉग ने चौंकाया

    डिगर में टॉम क्रूज का जबरदस्त ट्रांसफॉर्मेशन, भारी फैट सूट पहनकर निभाया अनोखा किरदार, 10 मिनट के मोनोलॉग ने चौंकाया


    नई दिल्ली। हॉलीवुड के सुपरस्टार टॉम क्रूज अपनी नई फिल्म डिगर को लेकर चर्चा में हैं। इस फिल्म में उनका अंदाज और किरदार पहले की फिल्मों से काफी अलग नजर आ रहा है। फिल्म में क्रूज ने डिगर रॉकवेल नाम के एक ताकतवर और अजीब स्वभाव वाले ऑयल टाइकून की भूमिका निभाई है। खास बात यह है कि इस किरदार को पर्दे पर उतारने के लिए अभिनेता को न केवल अपने लुक में बड़ा बदलाव करना पड़ा बल्कि एक बेहद चुनौतीपूर्ण सीन भी फिल्माना पड़ा। टॉम क्रूज ने हाल ही में खुलासा किया कि फिल्म का लगभग 10 मिनट लंबा मोनोलॉग उनके लिए खास अनुभव रहा जिसे उन्होंने एक ही शॉट और एक ही टेक में पूरा किया।

    फिल्म डिगर का निर्देशन ऑस्कर विजेता फिल्ममेकर एलेजांद्रो जी. इनारितु ने किया है। यह एक ब्लैक कॉमेडी फिल्म है जो एक ऐसे प्रभावशाली व्यक्ति की कहानी दिखाती है जो दुनिया को यह विश्वास दिलाने की कोशिश करता है कि वह मानवता को उस तबाही से बचा सकता है जिसे पैदा करने में उसकी अपनी भूमिका रही है। फिल्म की कहानी और किरदारों की जटिलता इसे सामान्य मनोरंजक फिल्मों से अलग बनाती है। दर्शकों को टॉम क्रूज का एक नया रूप देखने को मिल रहा है और यही वजह है कि फिल्म को लेकर प्रशंसकों के बीच उत्सुकता बनी हुई है।

    लंदन में 23 सितंबर को आयोजित फिल्म के वर्ल्ड प्रीमियर के दौरान अभिनेत्री अवनीत कौर ने टॉम क्रूज से खास बातचीत की थी। अवनीत ने इस मुलाकात का वीडियो अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर साझा किया। बातचीत के दौरान उन्होंने क्रूज से कहा कि उन्होंने उन्हें पहले कभी डिगर जैसे किरदार में नहीं देखा। इस पर अभिनेता ने बताया कि इस फिल्म को बनाने के लिए काफी हुनर कल्पनाशक्ति और रचनात्मकता की जरूरत थी। उनके मुताबिक कलाकारों के लिए हर नया किरदार सीखने और कुछ अलग करने का अवसर लेकर आता है।

    जब अवनीत ने उनसे फिल्म के किसी खास सीन के बारे में पूछा तो टॉम क्रूज ने 10 मिनट के लंबे मोनोलॉग का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि यह सीन बिना किसी कट के एक ही शॉट में फिल्माया गया था और इसे पूरा करने के लिए उन्होंने केवल एक टेक लिया। अभिनेता ने निर्देशक एलेजांद्रो और पूरी टीम के साथ काम करने के अनुभव को शानदार बताया। उन्होंने समझाया कि इस तरह के सीन में संवाद बोलना ही काफी नहीं होता बल्कि किरदार की भावनाओं उसकी गति और हर नाटकीय पल को सही ढंग से प्रस्तुत करना भी जरूरी होता है।

    क्रूज ने इस प्रक्रिया की तुलना डांस और रिदम से की। उनके अनुसार एक अभिनेता को यह समझना होता है कि किस पल किस तरह प्रतिक्रिया देनी है और दृश्य की लय को कैसे बनाए रखना है। निर्देशक की सटीक स्टेजिंग ने इस चुनौतीपूर्ण सीन को प्रभावशाली बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अभिनेता ने कहा कि उन्होंने इस मोनोलॉग को कुछ ही बार किया लेकिन अंतिम प्रस्तुति एक ही टेक में पूरी हो गई।

    फिल्म के लिए टॉम क्रूज को अपने शारीरिक हावभाव और आवाज पर भी खास काम करना पड़ा। उन्होंने बताया कि किरदार के लुक को वास्तविक बनाने के लिए उन्हें भारी फैट सूट पहनना पड़ा जो काफी वजनदार था। कॉमेडी टाइमिंग के साथ इस पोशाक में अभिनय करना उनके लिए अलग अनुभव रहा। डिगर में रिज अहमद जॉन गुडमैन सैंड्रा हुलर माइकल स्टुहलबर्ग जेसी प्लेमन्स सोफी वाइल्ड और एम्मा डी’आर्सी जैसे कलाकार भी नजर आते हैं। फिल्म 2 अक्टूबर 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज हुई। अब दर्शकों की दिलचस्पी इस बात में है कि टॉम क्रूज का यह नया अवतार और फिल्म की अनोखी कहानी उन्हें कितना प्रभावित करती है।

  • बचत का पैसा शेयर मार्केट में लगाने से पहले जान लें ये जरूरी नियम छोटी गलती पड़ सकती है भारी

    बचत का पैसा शेयर मार्केट में लगाने से पहले जान लें ये जरूरी नियम छोटी गलती पड़ सकती है भारी


    नई दिल्ली। शेयर मार्केट में निवेश करके पैसा बढ़ाने की चाहत आज बड़ी संख्या में लोगों में देखने को मिल रही है। खासकर डिजिटल प्लेटफॉर्म और ऑनलाइन ट्रेडिंग की सुविधा ने शेयर बाजार तक आम निवेशकों की पहुंच आसान कर दी है। हालांकि शेयर मार्केट में पैसा लगाना केवल किसी शेयर को खरीदने और कुछ समय बाद बेचने तक सीमित नहीं है। इसमें बाजार की समझ जोखिम उठाने की क्षमता और सही वित्तीय योजना का होना बेहद जरूरी माना जाता है। इसलिए अगर आप अपनी कमाई या बचत का पैसा शेयर मार्केट में इस्तेमाल करने की सोच रहे हैं तो सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि कितना पैसा निवेश करना चाहिए और किस उद्देश्य से करना चाहिए।

    शेयर बाजार में निवेश के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि रोजमर्रा की जरूरतों के लिए रखे पैसे को बाजार में लगाने से बचना चाहिए। घर का खर्च बच्चों की पढ़ाई स्वास्थ्य संबंधी जरूरतें बीमा और आपातकालीन स्थिति के लिए जरूरी रकम अलग रखना बेहतर वित्तीय अनुशासन माना जाता है। निवेश के लिए वही पैसा इस्तेमाल करना चाहिए जिसकी तत्काल जरूरत नहीं है। बाजार में उतार चढ़ाव सामान्य है इसलिए अचानक जरूरत पड़ने पर निवेश को नुकसान में बेचने की स्थिति से बचना जरूरी है।

    अगर आप शेयर मार्केट में नए हैं तो बिना जानकारी किसी दोस्त रिश्तेदार या सोशल मीडिया की सलाह पर शेयर खरीदना जोखिम भरा हो सकता है। किसी कंपनी में निवेश करने से पहले उसके कारोबार वित्तीय स्थिति आय मुनाफे कर्ज और भविष्य की संभावनाओं जैसी बुनियादी बातों को समझना जरूरी है। केवल इसलिए किसी शेयर में पैसा लगाना उचित नहीं माना जाता क्योंकि उसकी कीमत तेजी से बढ़ रही है। बाजार में किसी भी समय तेजी के बाद गिरावट आ सकती है।

    निवेश में पैसे को अलग अलग विकल्पों में बांटने की रणनीति भी महत्वपूर्ण हो सकती है। पूरी बचत को एक ही शेयर या एक ही सेक्टर में लगाने के बजाय अपनी जोखिम क्षमता और वित्तीय लक्ष्य के अनुसार विविधता रखना जोखिम को नियंत्रित करने में मदद कर सकता है। लंबी अवधि के निवेश और छोटी अवधि की ट्रेडिंग को भी एक जैसा नहीं समझना चाहिए। ट्रेडिंग में बाजार की गतिविधियों पर लगातार नजर रखने और अधिक जोखिम उठाने की जरूरत पड़ सकती है जबकि लंबी अवधि का निवेश अलग रणनीति पर आधारित होता है।

    निवेश करते समय जल्द अमीर बनने की उम्मीद से बचना भी जरूरी है। शेयर बाजार में रिटर्न निश्चित नहीं होता और पिछले प्रदर्शन से भविष्य के रिटर्न की गारंटी नहीं मिलती। इसलिए किसी भी निवेश का फैसला अपनी आर्थिक स्थिति वित्तीय लक्ष्य और जोखिम उठाने की क्षमता को ध्यान में रखकर लेना चाहिए।

    सबसे जरूरी बात यह है कि शेयर मार्केट को कमाई का आसान रास्ता समझने के बजाय एक वित्तीय निवेश माध्यम के रूप में देखा जाए। पर्याप्त जानकारी हासिल करने नियमित रूप से अपने निवेश की समीक्षा करने और जरूरत पड़ने पर योग्य वित्तीय सलाह लेने से निवेश संबंधी फैसलों को अधिक व्यवस्थित बनाया जा सकता है। बाजार में पैसा लगाने से पहले यह तय करें कि आपका लक्ष्य क्या है कितने समय के लिए निवेश करना है और नुकसान की स्थिति में आप कितना जोखिम उठा सकते हैं। यही तैयारी आपके निवेश को अधिक अनुशासित बनाने में मदद कर सकती है।

  • नाक बंद गले में खराश और लगातार छींक से हैं परेशान तो जानिए सर्दी जुकाम में राहत पाने के असरदार उपाय

    नाक बंद गले में खराश और लगातार छींक से हैं परेशान तो जानिए सर्दी जुकाम में राहत पाने के असरदार उपाय


    नई दिल्ली। बदलते मौसम में सर्दी जुकाम की समस्या आम हो जाती है। मौसम में बदलाव तापमान का उतार चढ़ाव धूल धुआं और वायरल संक्रमण जैसी वजहों से नाक बहना छींक आना गले में खराश खांसी और हल्का बुखार जैसी परेशानियां हो सकती हैं। सामान्य सर्दी जुकाम अक्सर कुछ दिनों में अपने आप ठीक हो जाता है लेकिन इस दौरान सही देखभाल करने से असहजता और लक्षणों से राहत मिल सकती है। इसके लिए सबसे पहले शरीर को पर्याप्त आराम और पानी देना जरूरी है।

    सर्दी जुकाम के दौरान पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ लेना फायदेमंद हो सकता है। पानी गुनगुने तरल पदार्थ और सूप जैसे विकल्प शरीर में पानी की कमी नहीं होने देते और गले को आराम पहुंचाने में मदद कर सकते हैं। बहुत गर्म पेय लेने से बचना चाहिए क्योंकि इससे मुंह या गले में जलन हो सकती है। गले में खराश होने पर गुनगुने नमक वाले पानी से गरारे भी किए जा सकते हैं। छोटे बच्चों को गरारे कराते समय विशेष सावधानी जरूरी है।

    नाक बंद होने की समस्या में कमरे की हवा में पर्याप्त नमी बनाए रखना मददगार हो सकता है। गर्म पानी से भाप लेने की सलाह आमतौर पर दी जाती है लेकिन बहुत गर्म भाप से त्वचा या सांस की नली जलने का खतरा रहता है। खासकर बच्चों को सीधे गर्म पानी की भाप देने से बचना चाहिए। आरामदायक तापमान पर नम हवा या सुरक्षित तरीके से इस्तेमाल किया गया ह्यूमिडिफायर बेहतर विकल्प हो सकता है।

    सर्दी जुकाम में नींद और आराम को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। शरीर संक्रमण से लड़ने के दौरान अधिक आराम चाहता है इसलिए पर्याप्त नींद लेना जरूरी है। साथ ही हाथों को साबुन से अच्छी तरह धोना खांसते या छींकते समय मुंह और नाक को ढकना और इस्तेमाल किए गए टिश्यू को तुरंत फेंकना संक्रमण फैलने की संभावना कम करने में मदद कर सकता है। घर में किसी अन्य व्यक्ति को संक्रमण होने से बचाने के लिए व्यक्तिगत सामान साझा करने से भी बचना बेहतर है।

    दवाओं के मामले में खुद से एंटीबायोटिक लेना उचित नहीं है। सामान्य सर्दी जुकाम अक्सर वायरस के कारण होता है और एंटीबायोटिक वायरल संक्रमण पर काम नहीं करते। बुखार या दर्द जैसी परेशानी होने पर दवा लेने से पहले उम्र स्वास्थ्य स्थिति और पहले से चल रही दवाओं को ध्यान में रखना जरूरी है। बच्चों के लिए किसी भी दवा की खुराक डॉक्टर या फार्मासिस्ट की सलाह के अनुसार ही होनी चाहिए।

    अगर सर्दी जुकाम के लक्षण लगातार बढ़ रहे हों तेज या लंबे समय तक बुखार बना रहे सांस लेने में परेशानी हो सीने में दर्द हो अत्यधिक कमजोरी महसूस हो या लक्षण कुछ समय बाद भी बेहतर न हों तो डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। छोटे बच्चों बुजुर्गों और पहले से किसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे लोगों में लक्षणों को लेकर विशेष सावधानी जरूरी है। सही आराम पर्याप्त तरल पदार्थ और साफ सफाई की आदतें सामान्य सर्दी जुकाम के दौरान राहत पाने और संक्रमण फैलने से रोकने में मदद कर सकती हैं।

  • ऑफिस में सहकर्मी उठा रहे गलत फायदा? चाणक्य के 5 नियम अपनाकर अपनी सीमाएं और काम की गोपनीयता रखें सुरक्षित

    ऑफिस में सहकर्मी उठा रहे गलत फायदा? चाणक्य के 5 नियम अपनाकर अपनी सीमाएं और काम की गोपनीयता रखें सुरक्षित

    नई दिल्ली: ऑफिस में केवल मेहनत करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि कार्यस्थल पर लोगों को समझना और अपनी सीमाओं को तय करना भी जरूरी है। कई बार सीधे और भरोसा करने वाले कर्मचारियों की इसी आदत का सहकर्मी गलत फायदा उठा लेते हैं। ऐसे माहौल में आचार्य चाणक्य की नीतियों में बताई गई कुछ बातें काम आ सकती हैं। चाणक्य की पांच बातों में अपनी कमजोरियों को हर किसी के सामने जाहिर न करने, जरूरत से ज्यादा सीधेपन से बचने, भविष्य की योजनाओं को गोपनीय रखने, काम के परिणाम पर ध्यान देने और नकारात्मक सोच वाले लोगों से दूरी बनाए रखने पर जोर दिया गया है।

    चाणक्य नीति के अनुसार अपनी कमजोरियों और डर को सभी के सामने जाहिर नहीं करना चाहिए। ऑफिस में कई लोग जल्दी दूसरों पर भरोसा करके अपनी निजी जिंदगी की परेशानियां या पेशेवर कमजोरियां सहकर्मियों के साथ साझा कर देते हैं। बाद में इन्हीं बातों का गलत इस्तेमाल करके उन्हें नीचे गिराने की कोशिश की जा सकती है। इसलिए अपनी कमजोरियों को सीमित रखना चाहिए और अपनी निजी बातें केवल उन्हीं लोगों से साझा करनी चाहिए, जो पूरी तरह भरोसेमंद और हितैषी हों। इसी तरह जरूरत से ज्यादा सीधा होना या हर बात पर हां कहना भी नुकसानदायक हो सकता है। जब कोई व्यक्ति हर अनुचित बात मानने लगता है, तो दूसरे उसकी सीमाओं की कद्र करना छोड़ सकते हैं। विनम्र रहना अच्छी बात है, लेकिन जहां बात गलत हो, वहां ना कहना भी जरूरी है। अपनी सीमाएं तय नहीं करने पर सहकर्मी अपने काम का बोझ भी आपके ऊपर डाल सकते हैं।

    ऑफिस में अपने नए विचार, करियर प्लान या किसी प्रोजेक्ट की रणनीति को समय से पहले सभी के सामने जाहिर करने से भी बचना चाहिए। चाणक्य नीति के अनुसार काम पूरा होने तक उसकी चर्चा दूसरों से नहीं करनी चाहिए। यदि योजना पहले ही सबको बता दी जाए, तो कुछ लोग उसका श्रेय लेने की कोशिश कर सकते हैं या आपके काम में अड़ंगा डाल सकते हैं। इसलिए अपनी अगली योजना के बारे में केवल संबंधित टीम और वरिष्ठ अधिकारियों से ही बात करने की सलाह दी गई है। इसके साथ ही कार्यस्थल पर अपनी मेहनत का बार-बार प्रचार करने के बजाय काम के परिणाम पर ध्यान देना चाहिए। जब व्यक्ति शांत रहकर अपने लक्ष्य पर काम करता है और सही समय पर परिणाम देता है, तो उसका काम खुद सामने आता है।

    कार्यस्थल पर किए गए काम का पूरा रिकॉर्ड और ईमेल का बैकअप सुरक्षित रखना भी जरूरी है। इससे किसी झूठे आरोप या गलतफहमी की स्थिति में अपने काम से जुड़ी जानकारी सामने रखी जा सकती है। इसके अलावा ऑफिस में हर सहकर्मी के साथ दोस्ती निभाना जरूरी नहीं है। यदि कोई व्यक्ति बार-बार पीठ पीछे बातें करता है या आपको नीचा दिखाने की कोशिश करता है, तो उससे दूरी बनाए रखना बेहतर है। ऐसे लोगों के साथ केवल काम से जुड़ा व्यवहार रखने और निजी बातें साझा न करने की सलाह दी गई है। इस तरह अपनी निजी जानकारी, योजनाओं और काम से जुड़े रिकॉर्ड को लेकर सावधानी बरतने से कार्यस्थल पर अनावश्यक परेशानियों से बचने में मदद मिल सकती है।

  • सूर्य देव की कृपा पाने का खास उपाय, व्रत के साथ इस विधि से दें अर्घ्य, घर में सुख-समृद्धि आने की है मान्यता

    सूर्य देव की कृपा पाने का खास उपाय, व्रत के साथ इस विधि से दें अर्घ्य, घर में सुख-समृद्धि आने की है मान्यता


    नई दिल्ली। हिंदू धर्म में सूर्य देव को प्रत्यक्ष देवता माना जाता है क्योंकि सूर्य ही पृथ्वी पर प्रकाश और ऊर्जा का प्रमुख स्रोत हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सूर्य देव की उपासना करने से व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा आती है और आत्मविश्वास बढ़ता है। रविवार का दिन सूर्य देव की आराधना और व्रत के लिए विशेष माना जाता है। इस दिन श्रद्धालु अपनी आस्था के अनुसार व्रत रखते हैं और सुबह सूर्य को अर्घ्य देकर पूजा करते हैं। माना जाता है कि नियमित रूप से सूर्य उपासना करने से जीवन में अनुशासन और सकारात्मक सोच विकसित करने में भी मदद मिलती है।

    सूर्य देव का व्रत रखने वाले भक्त सुबह जल्दी उठकर स्नान करते हैं और साफ कपड़े पहनकर पूजा की तैयारी करते हैं। इसके बाद उगते हुए सूर्य को जल अर्पित करने की परंपरा है। अर्घ्य देने के लिए तांबे के पात्र का इस्तेमाल करने की धार्मिक मान्यता है। पात्र में साफ जल लेकर सूर्य की ओर मुख करके धीरे धीरे जल अर्पित किया जाता है। इस दौरान सूर्य देव का ध्यान किया जाता है और अपनी श्रद्धा के अनुसार मंत्र का जाप किया जा सकता है। अर्घ्य देते समय जल की धार से सूर्य की किरणों को देखना भी पूजा परंपरा का हिस्सा माना जाता है।

    सूर्य देव की पूजा में लाल रंग के फूल और लाल चंदन का प्रयोग किया जाता है। श्रद्धालु अपनी सामर्थ्य और परंपरा के अनुसार गुड़ का भोग भी लगा सकते हैं। पूजा के बाद सूर्य देव से परिवार की सुख शांति और समृद्धि की कामना की जाती है। कुछ लोग रविवार के दिन पूरे दिन व्रत रखते हैं जबकि कुछ श्रद्धालु फलाहार या सात्विक भोजन के साथ व्रत करते हैं। व्रत का तरीका व्यक्ति की परंपरा और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार अलग हो सकता है।

    धार्मिक मान्यताओं में सूर्य देव को मान सम्मान नेतृत्व और ऊर्जा से भी जोड़ा गया है। ज्योतिष में सूर्य को आत्मविश्वास पिता प्रतिष्ठा और अधिकार का कारक माना जाता है। इसी वजह से कुंडली में सूर्य से संबंधित स्थितियों को लेकर भी लोग सूर्य उपासना करते हैं। हालांकि इन मान्यताओं का संबंध धार्मिक और ज्योतिषीय परंपराओं से है और इन्हें वैज्ञानिक उपचार या निश्चित परिणाम के रूप में नहीं देखना चाहिए।

    सूर्य देव की पूजा करते समय कुछ सामान्य बातों का ध्यान रखना भी जरूरी है। सुबह का समय पूजा के लिए विशेष माना जाता है इसलिए सूर्योदय के आसपास अर्घ्य देने की परंपरा प्रचलित है। पूजा में स्वच्छता का ध्यान रखना चाहिए और अपनी क्षमता के अनुसार ही व्रत रखना चाहिए। लंबे समय तक भोजन या पानी से दूर रहने वाला कठिन व्रत हर व्यक्ति के लिए उचित नहीं हो सकता। बच्चों बुजुर्गों गर्भवती महिलाओं या किसी स्वास्थ्य समस्या से जूझ रहे लोगों को व्रत रखने से पहले चिकित्सकीय सलाह लेना बेहतर होता है।

    सूर्य देव की आराधना का मुख्य उद्देश्य श्रद्धा के साथ प्रकृति के इस महत्वपूर्ण स्रोत के प्रति सम्मान व्यक्त करना माना जाता है। सुबह सूर्य को जल अर्पित करना ध्यान और प्रार्थना के साथ दिन की शुरुआत करने का एक धार्मिक तरीका भी हो सकता है। नियमित पूजा के साथ यदि व्यक्ति अनुशासन सकारात्मक सोच और अच्छे कर्मों को अपने जीवन का हिस्सा बनाए तो यही सूर्य उपासना उसके दैनिक जीवन में भी सकारात्मक बदलाव लाने का माध्यम बन सकती है।

  • एशियन गेम्स में सबसे कम उम्र में गोल्ड जीतने वाले ये हैं 5 भारतीय, वैभव सूर्यवंशी ने तोड़ा 8 साल पुराना रिकॉर्ड

    एशियन गेम्स में सबसे कम उम्र में गोल्ड जीतने वाले ये हैं 5 भारतीय, वैभव सूर्यवंशी ने तोड़ा 8 साल पुराना रिकॉर्ड


    नई दिल्ली। 15 साल की उम्र में वैभव सूर्यवंशी ने एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रच दिया है। पाकिस्तान के खिलाफ पुरुष टी20 फाइनल में भारतीय टीम की जीत के साथ वह एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाले सबसे कम उम्र के भारतीय बन गए और उन्होंने निशानेबाज सौरभ चौधरी का करीब आठ साल पुराना रिकॉर्ड पीछे छोड़ दिया।

    वैभव ने यह उपलब्धि 15 साल, 6 महीने और 6 दिन की उम्र में हासिल की। इससे पहले यह रिकॉर्ड सौरभ चौधरी के नाम था, जिन्होंने 2018 के जकार्ता एशियन गेम्स में पुरुषों की 10 मीटर एयर पिस्टल स्पर्धा में 16 साल, 3 महीने और 9 दिन की उम्र में गोल्ड जीता था। हालांकि, एक अहम फर्क है-सौरभ अब भी सबसे कम उम्र में व्यक्तिगत स्पर्धा का एशियन गेम्स गोल्ड जीतने वाले भारतीय हैं, जबकि वैभव का गोल्ड टीम स्पर्धा में आया है।

    एशियन गेम्स में सबसे कम उम्र में गोल्ड जीतने वाले 5 भारतीय

    1. वैभव सूर्यवंशी – क्रिकेट
    वैभव इस सूची में पहले स्थान पर हैं। 2026 ऐची-नागोया एशियन गेम्स में पाकिस्तान के खिलाफ पुरुष क्रिकेट टीम की गोल्ड मेडल जीत के साथ उन्होंने 15 साल, 6 महीने और 6 दिन की उम्र में यह उपलब्धि हासिल की। फाइनल में वैभव ने 9 गेंदों पर 15 रन बनाए, जिसमें दो छक्के शामिल थे।

    2. सौरभ चौधरी – शूटिंग
    2018 जकार्ता एशियन गेम्स में सौरभ चौधरी ने पुरुषों की 10 मीटर एयर पिस्टल में गोल्ड जीता था। उस समय उनकी उम्र 16 साल, 3 महीने और 9 दिन थी। वैभव के रिकॉर्ड से पहले करीब आठ साल तक यही सबसे कम उम्र में भारतीय गोल्ड मेडल जीतने का रिकॉर्ड था।

    3. कुमकुम मोहोड – तीरंदाजी
    महाराष्ट्र की 17 वर्षीय कुमकुम मोहोड ने 2026 ऐची-नागोया एशियन गेम्स में महिला व्यक्तिगत रिकर्व तीरंदाजी में गोल्ड जीता। वह एशियन गेम्स में व्यक्तिगत रिकर्व गोल्ड जीतने वाली पहली भारतीय बनीं। दक्षिण कोरिया की ओह येजिन के खिलाफ शूट-ऑफ में कुमकुम ने दबाव के बीच शानदार प्रदर्शन करते हुए खिताब अपने नाम किया।

    4. जी. कमलिनी – क्रिकेट
    तमिलनाडु की विकेटकीपर-बल्लेबाज जी. कमलिनी 18 साल की उम्र में 2026 एशियन गेम्स में गोल्ड जीतने वाली भारतीय महिला क्रिकेट टीम का हिस्सा बनीं। भारत ने फाइनल में श्रीलंका को 147 रन से हराकर लगातार दूसरी बार महिला क्रिकेट का एशियन गेम्स गोल्ड जीता। कमलिनी का जन्म 20 जुलाई 2008 को मदुरै में हुआ था।

    5. पलक गुलिया – शूटिंग
    निशानेबाज पलक गुलिया ने 2023 हांगझोउ एशियन गेम्स में महिलाओं की 10 मीटर एयर पिस्टल स्पर्धा में गोल्ड जीता था। वह उस समय 17 साल, 10 महीने और 20 दिन की थीं। उन्होंने फाइनल में 242.1 अंक के एशियन गेम्स रिकॉर्ड स्कोर के साथ स्वर्ण पदक हासिल किया था।

    पाकिस्तान को 19 रन से हराकर भारत ने जीता गोल्ड

    वैभव का रिकॉर्ड भारत और पाकिस्तान के बीच खेले गए रोमांचक पुरुष टी20 फाइनल के बाद बना। जापान के निसिन स्थित कोरोगी स्पोर्ट्स पार्क में भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवर में 211 रन बनाए। इसके जवाब में पाकिस्तान की टीम 20 ओवर में 192/6 रन ही बना सकी और भारत ने मुकाबला 19 रन से जीत लिया।

    भारत की पारी में अभिषेक शर्मा ने 28 गेंदों पर 61 रन की तेजतर्रार पारी खेली। इसके बाद तिलक वर्मा ने 22 गेंदों पर नाबाद 51 रन बनाकर टीम को 200 के पार पहुंचाया। वैभव ने भी पारी की शुरुआत करते हुए 9 गेंदों पर 15 रन बनाए।

    पाकिस्तान की ओर से हसन नवाज ने 51 गेंदों पर 96 रन बनाकर भारतीय गेंदबाजों पर दबाव बनाया, लेकिन भारत ने आखिरी ओवरों में संयम बनाए रखा और पाकिस्तान को 192 रन पर रोक दिया। इस जीत के साथ भारत ने पुरुष क्रिकेट में अपना एशियन गेम्स गोल्ड भी बरकरार रखा।

    वैभव की इस उपलब्धि के साथ एक और बात भी खास है। वह एशियन गेम्स में सबसे कम उम्र के भारतीय गोल्ड मेडलिस्ट तो बन गए हैं, लेकिन सबसे कम उम्र के भारतीय पदक विजेता का रिकॉर्ड अभी संजना बथुला के नाम है, जिन्होंने 2023 हांगझोउ गेम्स में 15 साल, 3 महीने और 11 दिन की उम्र में कांस्य पदक जीता था।

  • फिरोजपुर सीमा पर घुसपैठ को लेकर भारत सख्त, पाकिस्तानी उच्चायोग के चार्ज द अफेयर्स तलब

    फिरोजपुर सीमा पर घुसपैठ को लेकर भारत सख्त, पाकिस्तानी उच्चायोग के चार्ज द अफेयर्स तलब


    नई दिल्ली। पंजाब के फिरोजपुर सेक्टर में 2 अक्टूबर को अंतरराष्ट्रीय सीमा पर हुई घटना को लेकर भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ कड़ा राजनयिक विरोध दर्ज कराया है। विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान उच्चायोग के चार्ज द अफेयर्स को तलब कर सीमा पार से अवैध घुसपैठ को बढ़ावा दिए जाने पर आपत्ति जताई और पाकिस्तान की ओर से लगाए गए आरोपों को बेबुनियाद और प्रेरित बताया।

    विदेश मंत्रालय के मुताबिक, पाकिस्तानी पक्ष को घटना का भारत का पूरा पक्ष बताया गया। भारत ने कहा कि तीन लोग पाकिस्तान की ओर से भारतीय क्षेत्र में दाखिल हुए थे। बीएसएफ ने उन्हें कई बार चेतावनी देकर वापस लौटने को कहा, लेकिन वे नहीं रुके और सीमा पर लगी बाड़ की तरफ बढ़ते रहे। भारत के अनुसार, सुरक्षा के लिए तत्काल खतरा पैदा होने पर बीएसएफ को उनके खिलाफ कार्रवाई करनी पड़ी।

    भारत ने कहा- यह अकेली घटना नहीं
    विदेश मंत्रालय ने कहा कि फिरोजपुर की घटना को अलग-थलग मामले के तौर पर नहीं देखा जा सकता। भारत के मुताबिक, पाकिस्तान से संचालित हथियारबंद नशा तस्करी गिरोहों की सीमा पार आवाजाही का एक पैटर्न सामने आता रहा है।

    भारत ने पाकिस्तान सरकार से सीमा पार घुसपैठ और मादक पदार्थों की तस्करी से जुड़ी गतिविधियों की जांच करने को कहा है। इसके साथ ही पाकिस्तान के सीमा सुरक्षा बलों की कथित मिलीभगत की भी जांच कराने और आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाने की मांग की गई है।

    अंतरराष्ट्रीय सीमा की पवित्रता का सम्मान करने को कहा
    भारत ने पाकिस्तान से कहा कि वह अंतरराष्ट्रीय सीमा की पवित्रता का सम्मान करे और दोनों देशों के बीच लागू संबंधित द्विपक्षीय व्यवस्थाओं का सख्ती से पालन सुनिश्चित करे। विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान से यह भी कहा कि वह अपने सीमा सुरक्षा बलों को अपनी तरफ से होने वाली अनधिकृत आवाजाही पर प्रभावी नियंत्रण रखने के निर्देश दे। भारत ने जोर दिया कि ऐसे ठोस कदम उठाए जाने चाहिए, जिससे इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।

    पाकिस्तान ने भी दर्ज कराया था विरोध
    इस घटना को लेकर दोनों देशों के पक्ष अलग-अलग हैं। पाकिस्तान ने इससे पहले भारतीय राजनयिक को तलब कर बीएसएफ की कार्रवाई पर आपत्ति जताई थी। पाकिस्तानी पक्ष का कहना है कि मारे गए लोग निर्दोष नागरिक थे और उन्होंने अनजाने में सीमा पार की थी। पाकिस्तान ने घटना की पारदर्शी जांच की मांग भी की है।

    वहीं भारत का कहना है कि तीन लोग भारतीय क्षेत्र की ओर बढ़ रहे थे और बीएसएफ की बार-बार चेतावनी के बावजूद उन्होंने आगे बढ़ना जारी रखा। भारतीय अधिकारियों के मुताबिक, इनमें से एक व्यक्ति वापस पाकिस्तान की ओर चला गया, जबकि दो अन्य आगे बढ़ते रहे और बीएसएफ की कार्रवाई में मारे गए।

    सीमा सुरक्षा और नशा तस्करी पर भारत का जोर
    विदेश मंत्रालय ने अपने विरोध के दौरान घुसपैठ के साथ सीमा पार मादक पदार्थों की तस्करी का मुद्दा भी उठाया। भारत ने पाकिस्तान से इस नेटवर्क और इसमें शामिल लोगों की भूमिका की जांच करने को कहा है।

    फिलहाल दोनों देशों की ओर से घटना को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए हैं। भारत ने जहां इसे घुसपैठ की कोशिश और सुरक्षा खतरे के रूप में पेश किया है, वहीं पाकिस्तान ने बीएसएफ की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। ऐसे में घटना से जुड़े आगे के तथ्य जांच और संबंधित सुरक्षा एजेंसियों की रिपोर्ट के बाद और स्पष्ट हो सकते हैं।

  • शनिवार को पीपल के पेड़ के पास करें ये 4 धार्मिक उपाय, पितृ दोष से राहत की ज्योतिषीय मान्यता

    शनिवार को पीपल के पेड़ के पास करें ये 4 धार्मिक उपाय, पितृ दोष से राहत की ज्योतिषीय मान्यता

    नई दिल्ली: पितृ दोष को लेकर ज्योतिष में कई तरह की मान्यताएं बताई गई हैं। माना जाता है कि पितृ दोष के कारण जीवन में काम रुकने, आर्थिक परेशानी और मानसिक तनाव जैसी स्थितियां बनी रह सकती हैं। शनिवार का दिन पितरों और शनिदेव से जुड़े उपायों के लिए विशेष माना जाता है। धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इस दिन पीपल के पेड़ के पास कुछ उपाय किए जाते हैं। मान्यता है कि नियमित रूप से कम से कम सात शनिवार तक इन उपायों को करने से पितरों का आशीर्वाद मिलता है और जीवन की परेशानियां कम हो सकती हैं। इन उपायों को आस्था और श्रद्धा के अनुसार करने की बात कही गई है।

    शनिवार की शाम सूर्यास्त के बाद पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का चौमुखी दीपक जलाने की परंपरा है। दीपक जलाने के बाद पितरों का स्मरण कर सुख-शांति की प्रार्थना की जाती है। इसके बाद ‘ॐ सर्व पितृ प्रशनो भवः ओम’ मंत्र का 108 बार जाप करने की मान्यता बताई गई है। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार इससे पितरों का आशीर्वाद मिलता है और आर्थिक स्थिति में सुधार के रास्ते खुल सकते हैं। दीपक जलाते समय मन में श्रद्धा और शांत भाव रखने को भी महत्वपूर्ण माना गया है। शनिवार की शाम पीपल के पेड़ की जड़ में सरसों के तेल का दीपक जलाकर हनुमान चालीसा का पाठ करने की भी परंपरा है।

    धार्मिक मान्यता के अनुसार शनिवार को सात बार हनुमान चालीसा का पाठ करना शुभ माना जाता है। ऐसा करने से हनुमान जी और शनिदेव की कृपा मिलने के साथ पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होने की मान्यता है। नियमित रूप से यह उपाय करने से मन को शांति मिलने और नकारात्मक विचारों से राहत मिलने की बात कही जाती है। इसी तरह शनिवार को पीपल के पेड़ की सात बार परिक्रमा करने का भी धार्मिक महत्व बताया गया है। परिक्रमा के दौरान पीपल के तने पर सूत या सफेद धागा लपेटने की परंपरा है। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार पीपल की पूजा से शनि के साथ राहु और केतु से जुड़े दोषों को शांत करने में मदद मिल सकती है। इन्हीं ग्रहों को पितृ दोष से जोड़कर भी देखा जाता है।

    शनिवार की सुबह स्नान और पूजा के बाद एक लोटे में साफ जल लेकर उसमें थोड़े काले तिल मिलाने और इसे पीपल के पेड़ की जड़ में अर्पित करने की भी मान्यता है। जल चढ़ाते समय पितरों का ध्यान कर उनकी शांति के लिए प्रार्थना की जाती है। धार्मिक मान्यता में काले तिल का पितृ कर्म में विशेष महत्व बताया गया है। पीपल को जल अर्पित करने और पितरों का स्मरण करने से उनकी कृपा मिलने की मान्यता है। इसे आर्थिक परेशानी और जीवन की रुकावट दूर करने वाला उपाय भी माना जाता है। इन उपायों में नियमितता को विशेष महत्व दिया गया है और अपनी सुविधा व श्रद्धा के अनुसार किसी एक उपाय को लगातार सात शनिवार तक करने की बात कही गई है।

    पूजा के दौरान पीपल के पेड़ की स्वच्छता और आसपास के वातावरण का ध्यान रखने की सलाह दी गई है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार उपाय करते समय मन में श्रद्धा बनाए रखना जरूरी माना जाता है। इन सभी उपायों का आधार ज्योतिष और धार्मिक मान्यताएं हैं। इसलिए इन्हें आस्था और व्यक्तिगत विश्वास के अनुसार ही अपनाने की बात कही गई है। पितृ दोष से जुड़े इन उपायों को धार्मिक परंपराओं के रूप में देखा जाता है और इनके परिणामों के संबंध में वैज्ञानिक प्रमाण का दावा नहीं किया गया है।

  • 4 अक्टूबर का राशिफल, किस राशि के लिए दिन रहेगा खास और किसे बरतनी होगी सावधानी, जानें आज का पूरा भविष्यफल

    4 अक्टूबर का राशिफल, किस राशि के लिए दिन रहेगा खास और किसे बरतनी होगी सावधानी, जानें आज का पूरा भविष्यफल


    नई दिल्ली। 4 अक्टूबर 2026 रविवार का दिन है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार ग्रहों की स्थिति और राशि के आधार पर दिनभर के कामकाज को लेकर कुछ संकेत मिल सकते हैं। आज किसी को करियर में आगे बढ़ने का अवसर मिल सकता है तो किसी को आर्थिक मामलों में सावधानी बरतने की जरूरत महसूस हो सकती है। परिवार में बातचीत और रिश्तों में समझदारी बनाए रखना भी जरूरी रहेगा। आइए जानते हैं मेष से मीन तक सभी 12 राशियों के लिए आज का दिन कैसा रह सकता है।

    मेष राशि के जातकों के लिए आज का दिन नई योजनाओं पर काम शुरू करने का संकेत दे रहा है। नौकरी करने वालों को अपने काम पर ध्यान देना होगा। जल्दबाजी में कोई फैसला लेने से बचें। परिवार के सदस्यों के साथ समय बिताने से मन प्रसन्न रह सकता है।

    वृषभ राशि वालों के लिए आर्थिक मामलों में सोच समझकर आगे बढ़ना जरूरी रहेगा। अनावश्यक खर्चों पर नियंत्रण रखें और निवेश से पहले पूरी जानकारी जुटाएं। कार्यक्षेत्र में धैर्य से काम लेने पर लाभ मिल सकता है। रिश्तों में अपनी बात स्पष्ट तरीके से रखें।

    मिथुन राशि के जातकों को आज बातचीत और संपर्कों से फायदा मिल सकता है। किसी पुराने मित्र से मुलाकात या बातचीत होने की संभावना बन सकती है। कामकाज में नई जिम्मेदारी मिल सकती है। हालांकि एक साथ कई काम करने के बजाय जरूरी कामों को प्राथमिकता दें।

    कर्क राशि वालों को परिवार और निजी जीवन पर ध्यान देने का अवसर मिल सकता है। घर से जुड़ा कोई फैसला लेते समय सभी की राय सुनना उपयोगी रहेगा। नौकरी में जिम्मेदारियां बढ़ सकती हैं। भावनाओं में बहकर किसी से कठोर बात कहने से बचें।

    सिंह राशि के जातकों के लिए आत्मविश्वास के साथ काम करने का दिन है। कार्यक्षेत्र में अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिल सकता है। किसी वरिष्ठ व्यक्ति की सलाह काम आ सकती है। आर्थिक मामलों में जोखिम लेने से पहले अपनी स्थिति का आकलन जरूर करें।

    कन्या राशि वालों को आज योजनाबद्ध तरीके से काम करना चाहिए। अधूरे काम पूरे करने में सफलता मिल सकती है। खर्च और बचत के बीच संतुलन बनाकर चलें। स्वास्थ्य के लिए नियमित दिनचर्या और पर्याप्त आराम पर ध्यान देना लाभकारी रहेगा।

    तुला राशि के जातकों के लिए रिश्तों में तालमेल बनाए रखना महत्वपूर्ण रहेगा। साझेदारी से जुड़े कामों में स्पष्ट बातचीत करें। किसी नए अवसर पर विचार कर सकते हैं लेकिन फैसला लेने से पहले उसके सभी पहलुओं को समझें। परिवार के साथ बिताया गया समय सुकून दे सकता है।

    वृश्चिक राशि वालों को कामकाज में धैर्य बनाए रखने की जरूरत है। किसी महत्वपूर्ण विषय पर जल्द निष्कर्ष निकालने के बजाय तथ्यों को समझें। धन से जुड़े मामलों में सतर्क रहें। निजी रिश्तों में विश्वास और पारदर्शिता बनाए रखना आपके लिए उपयोगी रहेगा।

    धनु राशि के जातकों के लिए सीखने और नई योजनाओं पर विचार करने का दिन हो सकता है। नौकरी या कारोबार में नए विकल्पों पर नजर रखें। यात्रा की योजना बनाते समय जरूरी तैयारियां पहले पूरी कर लें। परिवार के साथ बातचीत से मन हल्का हो सकता है।

    मकर राशि वालों को जिम्मेदारियों के बीच संतुलन बनाकर चलना होगा। कार्यक्षेत्र में नियमित मेहनत और अनुशासन से काम आगे बढ़ सकता है। बड़े खर्चों को टालना संभव हो तो बजट की समीक्षा करें। सेहत को नजरअंदाज न करें और आराम के लिए समय निकालें।

    कुंभ राशि के जातकों को नए विचारों पर काम करने की प्रेरणा मिल सकती है। दोस्तों या सहकर्मियों के साथ मिलकर किसी योजना पर चर्चा हो सकती है। दूसरों की राय सुनें लेकिन जरूरी निर्णय पूरी जानकारी के आधार पर लें। अनावश्यक विवादों से दूरी बनाए रखें।

    मीन राशि वालों के लिए आज आत्ममंथन और भविष्य की योजना बनाने का अवसर हो सकता है। कामकाज में अपनी प्राथमिकताएं तय करें। भावनात्मक मामलों में संतुलित रवैया अपनाएं और आर्थिक फैसलों में व्यावहारिक सोच रखें। परिवार के साथ शांतिपूर्ण समय बिताने की कोशिश करें।

    कुल मिलाकर 4 अक्टूबर का दिन सभी राशियों के लिए अपनी जिम्मेदारियों को समझने और सोच समझकर आगे बढ़ने का संदेश देता है। राशिफल ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित सामान्य संकेत हैं। इन्हें निश्चित भविष्यवाणी नहीं मानना चाहिए। महत्वपूर्ण आर्थिक स्वास्थ्य और करियर संबंधी निर्णय वास्तविक परिस्थितियों और उचित सलाह के आधार पर ही लें।

  • मंगल की बदली चाल से 6 राशियों के लिए शुभ संकेत, 12 नवंबर तक होगा लाभ ही लाभ

    मंगल की बदली चाल से 6 राशियों के लिए शुभ संकेत, 12 नवंबर तक होगा लाभ ही लाभ


    नई दिल्ली। ग्रहों के सेनापति मंगल इस समय कर्क राशि में गोचर कर रहे हैं, जहां पहले से देवगुरु बृहस्पति मौजूद हैं। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार मंगल और गुरु की यह युति मेष, वृषभ, कन्या, तुला, वृश्चिक और सिंह राशि के जातकों के लिए नौकरी, कारोबार, धन और शिक्षा से जुड़े मामलों में सकारात्मक बदलाव के योग बना सकती है।

    मंगल 12 नवंबर 2026 तक कर्क राशि में रहेंगे, जबकि गुरु-मंगल की युति 31 अक्टूबर तक बनी रहेगी। हालांकि, ज्योतिष में किसी भी गोचर का परिणाम व्यक्ति की जन्मकुंडली, लग्न, चंद्र राशि और ग्रहों की स्थिति के आधार पर अलग-अलग माना जाता है।

    कर्क राशि में मंगल का गोचर क्यों खास?
    मंगल ने 18 सितंबर 2026 को शाम 4:44 बजे कर्क राशि में प्रवेश किया था। पंचांग गणना के अनुसार अब वह 12 नवंबर को रात करीब 8:30 बजे सिंह राशि में प्रवेश करेंगे। इस तरह मंगल करीब 55 दिनों तक कर्क राशि में रहेंगे।

    ज्योतिष में कर्क राशि को मंगल की नीच राशि माना जाता है, जबकि बृहस्पति कर्क राशि में उच्च के माने जाते हैं। इसी कारण इस राशि में दोनों ग्रहों की मौजूदगी को ज्योतिषीय दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कुछ ज्योतिषीय मत इस स्थिति को गुरु-मंगल योग और नीचभंग राजयोग से भी जोड़ते हैं।

    मेष: नौकरी और आय के नए अवसर
    मेष राशि वालों के लिए मंगल का यह गोचर आर्थिक मामलों में बदलाव का संकेत दे सकता है। नौकरीपेशा लोगों को काम से जुड़े नए अवसर मिल सकते हैं। लंबे समय से किसी प्रोजेक्ट या जिम्मेदारी पर काम कर रहे लोगों को उसका परिणाम मिलने की संभावना बन सकती है। आय के नए स्रोत तलाशने के मौके मिल सकते हैं। हालांकि इस दौरान निवेश से जुड़े फैसले जल्दबाजी में लेने के बजाय सोच-समझकर निर्णय लेना बेहतर रहेगा।

    वृषभ: जिम्मेदारियां बढ़ेंगी, आर्थिक स्थिति संभलेगी
    वृषभ राशि के जातकों के लिए यह गोचर कामकाज और आर्थिक स्थिति के लिहाज से महत्वपूर्ण हो सकता है। कार्यक्षेत्र में जिम्मेदारियां बढ़ सकती हैं और नई भूमिका मिलने की संभावना बन सकती है।

    बजट का सही प्रबंधन आर्थिक स्थिति को संतुलित रखने में मदद करेगा। परिवार के किसी सदस्य से जुड़ा पुराना आर्थिक मामला भी बातचीत के जरिए सुलझ सकता है। ज्योतिषीय गणना में वृषभ को मंगल-गुरु के इस संयोग से लाभ की संभावना वाली राशियों में रखा गया है।

    कन्या: करियर में नए विकल्प मिल सकते हैं
    कन्या राशि वालों के लिए मंगल का गोचर करियर के लिहाज से अहम रह सकता है। नौकरी की तलाश कर रहे लोगों को नए अवसर मिल सकते हैं। कार्यक्षेत्र में जिम्मेदारी बढ़ने के साथ सक्रियता और आत्मविश्वास भी बढ़ सकता है। नौकरी बदलने की योजना बना रहे लोगों के सामने नए विकल्प आ सकते हैं। काम के सिलसिले में होने वाली यात्रा या किसी नए व्यक्ति से बना संपर्क भविष्य में फायदेमंद साबित हो सकता है।

    तुला: पढ़ाई और करियर में आगे बढ़ने के योग
    तुला राशि के जातकों के लिए मंगल-गुरु की युति शिक्षा और करियर से जुड़े मामलों में सकारात्मक बदलाव ला सकती है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों को अपनी रणनीति पर ज्यादा फोकस करने का अवसर मिलेगा।

    कामकाज में नई जिम्मेदारी मिल सकती है। लंबे समय से किए जा रहे किसी प्रयास का परिणाम भी सामने आने की संभावना है। हालांकि सफलता के लिए निरंतर मेहनत बनाए रखना जरूरी होगा।

    वृश्चिक: अटके कामों को मिलेगी गति
    वृश्चिक राशि के जातकों के लिए यह गोचर लंबे समय से रुके कामों को आगे बढ़ाने वाला हो सकता है। किसी अटके हुए प्रोजेक्ट या जिम्मेदारी को पूरा करने के लिए नई ऊर्जा और अवसर मिल सकते हैं।

    करियर में अपनी स्थिति मजबूत करने के मौके बन सकते हैं। नौकरीपेशा लोगों को काम में पहचान मिलने की संभावना है, जबकि कारोबारियों को नए संपर्कों से लाभ मिल सकता है। आर्थिक स्थिति सुधारने के प्रयास भी आगे बढ़ सकते हैं।

    सिंह: मेहनत का मिल सकता है परिणाम
    सिंह राशि वालों के लिए मंगल और गुरु का प्रभाव करियर में मेहनत का परिणाम दिलाने वाला माना जा रहा है। कार्यक्षेत्र में किए गए प्रयासों की सराहना हो सकती है। किसी महत्वपूर्ण काम की जिम्मेदारी मिलने से पेशेवर भूमिका मजबूत हो सकती है।

    आने वाले समय में करियर से जुड़ा कोई अहम फैसला लेना पड़ सकता है। इस दौरान आत्मविश्वास बनाए रखते हुए काम करना महत्वपूर्ण रहेगा। ज्योतिषीय गणना में सिंह को भी इस गोचर से लाभ की संभावना वाली राशियों में शामिल किया गया है।

    31 अक्टूबर तक गुरु-मंगल की युति
    मंगल और गुरु की युति 31 अक्टूबर 2026 तक कर्क राशि में रहेगी। इसके बाद गुरु कर्क राशि से निकलकर सिंह राशि में प्रवेश करेंगे, जबकि मंगल 12 नवंबर तक कर्क में ही रहेंगे। इसी वजह से अक्टूबर का समय इस गोचर के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इस अवधि में कुछ राशियों के लिए नौकरी, कारोबार, धन और शिक्षा से जुड़े मामलों में सकारात्मक बदलाव के योग बन सकते हैं। हालांकि इन प्रभावों को ज्योतिषीय मान्यता के तौर पर ही देखा जाना चाहिए, क्योंकि किसी व्यक्ति पर गोचर का वास्तविक प्रभाव उसकी जन्मकुंडली, लग्न, चंद्र राशि और ग्रहों की स्थिति के आधार पर अलग-अलग माना जाता है।