Author: bharati

  • उमर अब्दुल्ला के फैसले से पार्टी में बढ़ी खींचतान, मंत्रिमंडल से बाहर नेताओं की नाराजगी खुलकर आई सामने

    उमर अब्दुल्ला के फैसले से पार्टी में बढ़ी खींचतान, मंत्रिमंडल से बाहर नेताओं की नाराजगी खुलकर आई सामने

    नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर की सत्ताधारी नेशनल कॉन्फ्रेंस में इन दिनों सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के मंत्रिमंडल विस्तार के बाद पार्टी के भीतर असंतोष के सुर तेज हो गए हैं। कैबिनेट में जगह नहीं मिलने से नाराज कई वरिष्ठ विधायकों ने शुक्रवार को श्रीनगर में एक बंद कमरे में बैठक की। इस बैठक में 17 नेशनल कॉन्फ्रेंस विधायकों के साथ एक निर्दलीय विधायक के शामिल होने की खबर है। बैठक का आयोजन विधायक कैसर जमशेद लोन के आवास पर किया गया। पार्टी के भीतर बढ़ती नाराजगी और श्रीनगर से सांसद रूहुल्लाह मेहदी के इस्तीफे के ऐलान ने सियासी माहौल को और गर्म कर दिया है।

    मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक बैठक में वरिष्ठ नेता मुबारक गुल और अब्दुल मजीद लर्मी सहित कई विधायक मौजूद रहे। बताया जा रहा है कि इन नेताओं ने हालिया कैबिनेट विस्तार पर अपनी नाराजगी जाहिर की और आगे की रणनीति पर चर्चा की। कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि विधायकों का एक समूह उन मंत्रियों को हटाने की मांग कर रहा है जिन्होंने सरकार में दो साल पूरे कर लिए हैं। उनकी जगह नए चेहरों को मौका देने और मंत्रिमंडल में वरिष्ठता तथा योग्यता को महत्व देने की मांग उठाई गई है। हालांकि बैठक के बाद विधायकों की ओर से कोई साझा आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया।

    इस नाराजगी की एक बड़ी वजह मुबारक गुल और अब्दुल मजीद लर्मी जैसे वरिष्ठ नेताओं को मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिलना बताया जा रहा है। मुबारक गुल ईदगाह से विधायक हैं और लंबे समय से पार्टी से जुड़े हुए हैं। कैबिनेट सूची में नाम नहीं आने के बाद उनके समर्थकों ने भी नाराजगी जताई थी। गुल ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि उनके कार्यकर्ता और समर्थक उनके साथ हुए व्यवहार से आहत हैं और चाहते हैं कि वह पार्टी छोड़ दें। उन्होंने यह भी कहा था कि वह करीब 50 साल से पार्टी के साथ जुड़े हैं। वहीं अब्दुल मजीद लर्मी ने भी मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिलने पर निराशा जाहिर की थी।

    इस बीच पार्टी के भीतर संगठनात्मक पदों को लेकर भी हलचल दिखाई दी। पार्टी अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने अली मोहम्मद सागर को महासचिव पद पर बने रहने का निर्देश दिया। यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ जब मुबारक गुल को हाल ही में महासचिव बनाए जाने की चर्चा थी। इस फैसले को पार्टी के भीतर चल रही नाराजगी के बीच एक अहम संगठनात्मक बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है।

    नेशनल कॉन्फ्रेंस के लिए दूसरी बड़ी चुनौती श्रीनगर के सांसद आगा रूहुल्लाह मेहदी का इस्तीफा देने का ऐलान है। उन्होंने कहा है कि वह 3 नवंबर को पार्टी और लोकसभा सदस्यता दोनों से इस्तीफा देंगे। रूहुल्लाह ने पार्टी नेतृत्व पर चुनावी वादे पूरे नहीं करने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि पार्टी ने जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 की बहाली और लोगों के अधिकारों की रक्षा जैसे मुद्दों को लेकर जनता से समर्थन मांगा था लेकिन सत्ता में आने के बाद उन वादों पर अपेक्षित काम नहीं हुआ। उनके इस ऐलान ने पार्टी नेतृत्व के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है।

    गौरतलब है कि मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने 27 अक्टूबर को मंत्रिमंडल का विस्तार करते हुए अली मोहम्मद सागर मीर सैफुल्ला शमीम फिरदौस और अल्ताफ अहमद वानी को मंत्री पद की शपथ दिलाई थी। इस विस्तार के बाद नौ सदस्यीय मंत्रिमंडल में कश्मीर घाटी का प्रतिनिधित्व बढ़कर सात मंत्रियों तक पहुंच गया जबकि जम्मू क्षेत्र से उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी और जावेद राणा शामिल हैं।

    फिलहाल नेशनल कॉन्फ्रेंस के भीतर असंतोष की वास्तविक सीमा और आगे की रणनीति स्पष्ट नहीं है। लेकिन वरिष्ठ विधायकों की बैठक और रूहुल्लाह मेहदी के इस्तीफे के ऐलान ने पार्टी नेतृत्व के सामने संगठनात्मक एकजुटता बनाए रखने की चुनौती जरूर बढ़ा दी है। आने वाले दिनों में नेतृत्व इन मतभेदों को किस तरह सुलझाता है इस पर जम्मू-कश्मीर की राजनीति की नजर रहेगी।

  • अमेरिकी पहलवान को आखिरी पलों में दी मात, मनीषा भानवाला ने गोल्ड जीतकर दुनिया में लहराया तिरंगा

    अमेरिकी पहलवान को आखिरी पलों में दी मात, मनीषा भानवाला ने गोल्ड जीतकर दुनिया में लहराया तिरंगा


    नई दिल्ली। भारतीय कुश्ती के इतिहास में 30 अक्टूबर 2026 का दिन स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज हो गया। देश की महिला पहलवान मनीषा भानवाला ने वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप 2026 में शानदार प्रदर्शन करते हुए गोल्ड मेडल अपने नाम कर लिया। उन्होंने न केवल अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का गौरव बढ़ाया बल्कि ऐसी उपलब्धि हासिल की जिसका इंतजार भारतीय महिला कुश्ती को लंबे समय से था। मनीषा विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला पहलवान बन गई हैं। उनकी इस जीत की सबसे खास बात फाइनल मुकाबले में की गई जबरदस्त वापसी रही। एक समय मुकाबले में 0-6 से पिछड़ने के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और आखिरकार अमेरिकी पहलवान को 8-6 से हराकर इतिहास रच दिया।

    वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप के महिला 59 किलोग्राम भार वर्ग के फाइनल में मनीषा भानवाला का सामना अमेरिका की एबिगेल नेटे से हुआ। मुकाबले की शुरुआत भारतीय पहलवान के लिए अच्छी नहीं रही। अमेरिकी खिलाड़ी ने आक्रामक खेल दिखाते हुए लगातार अंक हासिल किए और मनीषा को छह अंकों से पीछे कर दिया। स्कोर 0-6 होने के बाद मुकाबला एकतरफा दिखाई देने लगा था। लेकिन मनीषा ने दबाव में आने के बजाय अपनी रणनीति पर भरोसा बनाए रखा। उन्होंने धीरे धीरे वापसी शुरू की और लगातार अंक जुटाकर मुकाबले का रुख बदल दिया। भारतीय पहलवान के शानदार दांव और मजबूत इरादों के सामने अमेरिकी खिलाड़ी टिक नहीं सकीं। आखिरकार मनीषा ने 8-6 की बढ़त हासिल करते हुए स्वर्ण पदक पर कब्जा जमा लिया।

    इस जीत के साथ मनीषा ने भारतीय महिला कुश्ती के लिए एक नया इतिहास बना दिया। इससे पहले विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में भारत की ओर से पुरुष पहलवान सुशील कुमार ही स्वर्ण पदक जीतने में सफल रहे थे। सुशील कुमार ने साल 2010 में 66 किलोग्राम भार वर्ग में गोल्ड मेडल हासिल किया था। अब मनीषा भानवाला का नाम भी इस खास सूची में शामिल हो गया है। उनकी उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि उन्होंने दुनिया के शीर्ष पहलवानों के बीच अपनी प्रतिभा और संघर्ष का शानदार प्रदर्शन किया।

    मनीषा ने फाइनल तक पहुंचने के लिए भी कड़ी चुनौती का सामना किया। सेमीफाइनल मुकाबले में उन्होंने कजाकिस्तान की पहलवान अल्टिन शागायेवा को हराकर खिताबी मुकाबले में जगह बनाई थी। इसके बाद फाइनल में भी उन्होंने विपरीत परिस्थितियों से उबरकर जीत हासिल की। उनका यह प्रदर्शन बताता है कि बड़े मुकाबलों में आत्मविश्वास और आखिरी क्षण तक संघर्ष करने की क्षमता कितनी अहम होती है।

    इस चैंपियनशिप में भारतीय महिला पहलवानों का सामूहिक प्रदर्शन भी खास रहा। पहली बार एक ही विश्व चैंपियनशिप संस्करण में भारत की तीन महिला पहलवानों ने स्वर्ण पदक के मुकाबले तक जगह बनाई। मनीषा ने गोल्ड जीतकर देश का नाम रोशन किया जबकि नीलम सिरोही ने 50 किलोग्राम और काजल ढोचक ने 76 किलोग्राम वर्ग में फाइनल तक पहुंचकर रजत पदक हासिल किया। वहीं तनु शर्मा ने कांस्य पदक जीतकर भारत की पदक तालिका में योगदान दिया।

    मनीषा भानवाला की यह जीत केवल एक स्वर्ण पदक तक सीमित नहीं है बल्कि भारतीय महिला कुश्ती के लिए नई संभावनाओं का संकेत भी है। छह अंकों से पिछड़ने के बाद जिस तरह उन्होंने मुकाबला अपने पक्ष में किया उसने खेल प्रेमियों को रोमांचित कर दिया। उनकी ऐतिहासिक उपलब्धि आने वाली पीढ़ी की महिला पहलवानों के लिए प्रेरणा बनेगी।

  • सच बोलने की कीमत चुकानी पड़ी प्रकाश राज को, विज्ञापन बंद हुए और फिल्मों से भी हुए बाहर, पत्नी ने बयां किया दर्द

    सच बोलने की कीमत चुकानी पड़ी प्रकाश राज को, विज्ञापन बंद हुए और फिल्मों से भी हुए बाहर, पत्नी ने बयां किया दर्द


    नई दिल्ली। फिल्मी दुनिया में प्रकाश राज अपनी दमदार अदाकारी के साथ-साथ सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर बेबाक राय रखने के लिए भी पहचाने जाते हैं। वह कई बार ऐसे विषयों पर खुलकर बोल चुके हैं जिन पर मनोरंजन जगत के दूसरे कलाकार सार्वजनिक रूप से टिप्पणी करने से बचते हैं। उनकी इसी स्पष्टवादिता का असर उनके पेशेवर जीवन पर भी पड़ा। अब उनकी पत्नी और कोरियोग्राफर पोनी वर्मा ने एक इंटरव्यू में प्रकाश राज के संघर्ष और उनके फैसलों से जुड़ी कई बातें साझा की हैं। पोनी के मुताबिक प्रकाश राज को अपनी बात रखने की कीमत चुकानी पड़ी। उन्हें काम मिलने में परेशानियों का सामना करना पड़ा और कई विज्ञापन तथा फिल्में भी उनके हाथ से निकल गईं। इसके बावजूद उन्होंने अपने विचारों से पीछे हटना स्वीकार नहीं किया।

    यूट्यूब चैनल प्रेमा को दिए इंटरव्यू में पोनी वर्मा ने बताया कि शुरुआत में वह प्रकाश राज की राजनीतिक और सामाजिक टिप्पणियों को लेकर काफी चिंतित रहती थीं। उन्हें डर लगता था कि लगातार खुलकर बोलने की वजह से उनके पति को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े। लेकिन साल 2017 में पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता गौरी लंकेश की हत्या ने प्रकाश राज को अंदर तक झकझोर दिया। पोनी के अनुसार गौरी लंकेश प्रकाश राज की बेहद करीबी दोस्त थीं और दोनों की दोस्ती 35 साल से भी अधिक पुरानी थी। उनकी हत्या की खबर मिलने के बाद प्रकाश राज पूरी तरह टूट गए थे। हालांकि इस घटना ने उन्हें चुप रहने के बजाय अपनी आवाज और मजबूती से उठाने के लिए प्रेरित किया।

    पोनी वर्मा ने बताया कि गौरी की हत्या के बाद प्रकाश राज के मन में यह सवाल था कि आखिर कब तक डरकर रहा जा सकता है। पोनी खुद उनकी सुरक्षा को लेकर चिंतित रहती थीं। उन्हें लगता था कि लगातार राजनीतिक मुद्दों पर बोलना उनके लिए खतरा पैदा कर सकता है। लेकिन प्रकाश राज का मानना था कि गलत के खिलाफ आवाज उठाना जरूरी है। पोनी के मुताबिक गौरी लंकेश भी अपने विचारों पर मजबूती से खड़ी रहती थीं और उनकी हत्या ने प्रकाश राज को इस बात का अहसास कराया कि डर के कारण अपनी बात कहना बंद नहीं किया जा सकता।

    पोनी ने यह भी बताया कि प्रकाश राज की बेबाकी का असर उनके फिल्मी करियर पर पड़ा। उनके मुताबिक इंडस्ट्री में कुछ ऐसे लोग भी थे जिन्हें प्रकाश राज की राजनीतिक राय पसंद नहीं थी। उन्होंने दावा किया कि उनके विज्ञापन बंद हो गए और कुछ फिल्में भी उनसे छीन ली गईं। पोनी ने कहा कि मनोरंजन जगत में कई कलाकार अपने काम और कमाई को सुरक्षित रखने के लिए विवादित मुद्दों पर बोलने से बचते हैं। लेकिन प्रकाश राज ने अपने जमीर की आवाज को प्राथमिकता दी। उनके अनुसार प्रकाश राज का मानना है कि जब उन्हें कोई बात गलत लगती है तो उस पर चुप रहना सही नहीं है।

    गौरी लंकेश की हत्या ने उस समय पूरे देश में अभिव्यक्ति की आजादी और पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर बहस छेड़ दी थी। बेंगलुरु में 2017 में उनके घर के बाहर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। वह अपनी निडर पत्रकारिता और सामाजिक मुद्दों पर मुखर विचारों के लिए जानी जाती थीं। उनकी मौत से प्रकाश राज भी गहरे प्रभावित हुए थे।

    पोनी वर्मा की बातों से साफ है कि प्रकाश राज के लिए सामाजिक मुद्दों पर बोलना केवल सार्वजनिक छवि का हिस्सा नहीं बल्कि उनके व्यक्तिगत विश्वास से जुड़ा फैसला है। पेशेवर नुकसान और आलोचनाओं के बावजूद उन्होंने अपनी राय रखना जारी रखा। उनके इस सफर में गौरी लंकेश की हत्या एक ऐसा मोड़ बनी जिसने उन्हें और मजबूती से अपनी बात रखने का हौसला दिया।

  • जनगणना का दूसरा चरण 10 जनवरी से…. डेढ़ महीने चलेगी प्रक्रिया, पूछे जाएंगे 40 सवाल

    जनगणना का दूसरा चरण 10 जनवरी से…. डेढ़ महीने चलेगी प्रक्रिया, पूछे जाएंगे 40 सवाल


    नई दिल्ली।
    देश में होने वाली जनगणना 2027 (Census 2027) के दूसरे चरण (Second phase) यानी जनसंख्या गणना (Population Census) की प्रक्रिया इस बार पहले के मुकाबले काफी लंबी होगी। यह प्रक्रिया करीब डेढ़ महीने तक चलेगी। इसमें 15 दिनों का स्व-गणना यानी सेल्फ एन्यूमरेशन (Self-Enumeration) का समय भी शामिल है। इस चरण में लोगों से जाति समेत कुल 40 सवाल पूछे जाएंगे, जबकि 2011 की जनगणना में सवालों की संख्या 29 थी। यानी इस बार 11 नए सवाल जोड़े गए हैं।

    जनसंख्या गणना का यह चरण 10 जनवरी से 28 फरवरी तक चलेगा। वहीं, पहले की जनगणनाओं में यह प्रक्रिया आमतौर पर 9 से 28 फरवरी के बीच महज 20 दिनों में पूरी की जाती थी। भारत के महापंजीयक एवं जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, मणिपुर (अगली घोषणा तक), गोवा, उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, लद्दाख, तथा हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के हिमपात प्रभावित क्षेत्रों को छोड़कर शेष सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 25 जनवरी 2027 से 28 फरवरी 2027 तक जनगणना का कार्य किया जाएगा।


    यूपी समेत चार राज्यों में 35 दिन चलेगी घर-घर जनगणना

    अगले साल विधानसभा चुनाव होने वाले राज्यों में जनगणना का कार्यक्रम पहले रखा गया है। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, गोवा और पंजाब में घर-घर जाकर जनसंख्या की गणना का कार्यक्रम 35 दिनों का होगा। केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से शुक्रवार को जारी अधिसूचना के अनुसार, देशभर में जनगणना 25 जनवरी से 27 फरवरी 2027 के बीच कराई जाएगी। हालांकि, कुछ राज्यों और क्षेत्रों के लिए अलग कार्यक्रम निर्धारित किया गया है। मणिपुर में फिलहाल जनगणना की घोषणा नहीं की गई है। राज्य में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) की प्रक्रिया पहले कराने की मांग के बाद जनगणना का काम रोक दिया गया था।


    कब होगी स्व-गणना और घर-घर जाकर जानकारी जुटाने की प्रक्रिया?

    जनगणना 2027 के लिए लोगों को खुद अपनी जानकारी दर्ज करने का भी मौका मिलेगा। इसके लिए 10 से 24 जनवरी 2027 तक स्व-गणना की अवधि निर्धारित की गई है। इसके बाद घर-घर जाकर जनसंख्या की गणना की जाएगी। जनगणना की संदर्भ तिथि (रेफरेंस डेट) पहले ही 1 मार्च 2027 घोषित की जा चुकी है। इसके बाद 1 से 5 मार्च 2027 तक संशोधन का चरण भी आयोजित किया जाएगा।


    जनगणना में पूछे जाएंगे ये 40 सवाल

    इस बार दूसरे चरण में सवालों की संख्या बढ़ाकर 40 कर दी गई है। इनमें जाति से जुड़ी जानकारी के अलावा परिवार और व्यक्तिगत पहचान से संबंधित कई जानकारियां भी शामिल होंगी। रिपोर्ट के मुताबिक, जनगणना के दौरान ये जानकारियां जुटाई जाएंगी:
    – जाति से संबंधित जानकारी
    – पति या पत्नी का नाम
    – माता और पिता से जुड़ी जानकारी
    – व्यक्ति की घोषित राष्ट्रीयता
    – स्थायी पता
    – कोविड-19 टीकाकरण की जगह
    – कुल बैंक खातों की संख्या
    – मोबाइल नंबर
    – आधार नंबर
    – मतदाता पहचान पत्र (वोटर आईडी) नंबर
    – पासपोर्ट नंबर
    – ड्राइविंग लाइसेंस की उपलब्धता
    – मोबाइल नंबर, आधार और वोटर आईडी की जानकारी उपलब्ध होने पर शेयर की जा सकती है। वहीं, पासपोर्ट नंबर केवल भारतीय पासपोर्ट धारकों से मांगा जाएगा। देश में पिछली जनगणना 2011 में हुई थी, जिसमें 62.32 करोड़ पुरुषों और 58.75 करोड़ महिलाओं सहित 1.21 अरब आबादी होने की बात कही गई थी। देश में उस समय 24.95 करोड़ परिवार थे।


    मणिपुर में फिलहाल जनगणना नहीं

    मणिपुर को जनगणना के मौजूदा कार्यक्रम से बाहर रखा गया है। राज्य में विभिन्न वर्गों की ओर से पहले राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) की प्रक्रिया कराने की मांग उठाई गई थी। इसके बाद वहां जनगणना की प्रक्रिया रोक दी गई। केंद्र सरकार की अधिसूचना में भी मणिपुर को फिलहाल बाहर रखा गया है। इसके अलावा लद्दाख और हिमाचल प्रदेश तथा जम्मू-कश्मीर के बर्फबारी वाले गैर-समकालिक क्षेत्रों में जनगणना का काम पहले ही पूरा किया जा चुका है।

  • सोने की कीमतों में फिर गिरावट, 1.38 लाख रुपये के करीब पहुंचा वायदा भाव….

    सोने की कीमतों में फिर गिरावट, 1.38 लाख रुपये के करीब पहुंचा वायदा भाव….

    नई दिल्ली । देश में सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव का दौर जारी है। 31 अक्टूबर 2026 को सोने के वायदा भाव में एक बार फिर गिरावट दर्ज की गई। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर शनिवार सुबह तक 24 कैरेट सोने का वायदा भाव 66 रुपये यानी 0.05 प्रतिशत घटकर 1,38,419 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। इससे पिछले कारोबारी दिन यह 1,38,485 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था। शनिवार और रविवार को बाजार बंद रहने के कारण अब कारोबार अगले कारोबारी सत्र में होगा।

    बुलियंस के अनुसार, 24 कैरेट सोने की कीमत 1,38,830 रुपये प्रति 10 ग्राम रही। वहीं, अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने का भाव 3,884.90 डॉलर प्रति औंस दर्ज किया गया। अखिल भारतीय सर्राफा संघ के आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली में सोने की कीमत गिरकर 1,45,200 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गई। इस दर में सभी कर शामिल हैं। दूसरी ओर, शहरों के खुदरा भाव के अनुसार 24 कैरेट सोने की कीमत 1,42,410 रुपये, 22 कैरेट की 1,30,550 रुपये और 18 कैरेट की 1,06,840 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज की गई।

    देश के अलग-अलग शहरों में सोने के भाव में मामूली अंतर देखने को मिल रहा है। दिल्ली, लखनऊ, मेरठ, अयोध्या, कानपुर, आगरा, प्रयागराज, वाराणसी, नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम, जयपुर, चंडीगढ़ और अमृतसर में 24 कैरेट सोने का भाव 1,42,410 रुपये प्रति 10 ग्राम है। इन शहरों में 22 कैरेट सोना 1,30,550 रुपये और 18 कैरेट सोना 1,06,840 रुपये प्रति 10 ग्राम पर दर्ज किया गया।

    मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, पुणे, नागपुर, बेंगलुरु, हैदराबाद, रायपुर, भुवनेश्वर और गुवाहाटी जैसे शहरों में 24 कैरेट सोने का भाव 1,42,260 रुपये प्रति 10 ग्राम है। यहां 22 कैरेट सोना 1,30,400 रुपये और 18 कैरेट सोना 1,06,690 रुपये प्रति 10 ग्राम पर है। चेन्नई, कोयंबटूर, मदुरै और तमिलनाडु के कई अन्य शहरों में 18 कैरेट सोने की कीमत 1,06,670 रुपये दर्ज की गई है।

    पटना, इंदौर, भोपाल, अहमदाबाद, वडोदरा, सूरत और राजकोट में 24 कैरेट सोना 1,42,310 रुपये प्रति 10 ग्राम पर है। इन शहरों में 22 कैरेट का भाव 1,30,450 रुपये और 18 कैरेट का 1,06,740 रुपये है। नासिक, वसई-विरार, भिवंडी और लातूर में 24 कैरेट सोना 1,42,290 रुपये, 22 कैरेट 1,30,430 रुपये और 18 कैरेट 1,06,720 रुपये प्रति 10 ग्राम पर दर्ज किया गया।

    इससे पहले शुक्रवार को भी घरेलू बाजार में सोने की कीमतों में बड़ी गिरावट आई थी। अखिल भारतीय सर्राफा संघ के मुताबिक, 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाला सोना 1,300 रुपये टूटकर 1,45,200 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया था। बृहस्पतिवार को इसकी कीमत 1,46,500 रुपये प्रति 10 ग्राम थी। अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर सोना 122.06 डॉलर यानी 3.04 प्रतिशत गिरकर 3,899.33 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया था और 4,000 डॉलर के स्तर से नीचे बना रहा।

    वायदा बाजार में भी शुक्रवार को सोने पर दबाव दिखाई दिया। कमजोर हाजिर मांग के बीच कारोबारियों ने अपने सौदों का आकार घटाया। इसके चलते एमसीएक्स पर दिसंबर में आपूर्ति वाले सोने के अनुबंध का भाव 976 रुपये यानी 0.68 प्रतिशत गिरकर 1,41,620 रुपये प्रति 10 ग्राम रह गया। न्यूयॉर्क के बाजार में सोना 0.93 प्रतिशत की गिरावट के साथ 3,983.99 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करता रहा।

    एचडीएफसी सिक्योरिटीज के जिंस मामलों के वरिष्ठ विश्लेषक सौमिल गांधी के अनुसार, वैश्विक स्तर पर प्रतिकूल कारकों के चलते बाजार की धारणा प्रभावित हुई। इसका असर घरेलू बाजार में सोने की कीमतों पर भी पड़ा और शुक्रवार को गिरावट जारी रही। कमजोर हाजिर मांग को भी वायदा कीमतों में कमी की प्रमुख वजह बताया गया। इस तरह 31 अक्टूबर को वायदा भाव में मामूली गिरावट के साथ सोना 1.38 लाख रुपये के स्तर के करीब बना रहा, जबकि सर्राफा और खुदरा बाजार में अलग-अलग दरें दर्ज की गईं।

  • भारत के 29वें वायुसेना प्रमुख बनेंगे एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित…. जानिए उनका अब तक का सफर

    भारत के 29वें वायुसेना प्रमुख बनेंगे एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित…. जानिए उनका अब तक का सफर


    नई दिल्ली।
    भारतीय वायुसेना (Indian Air Force) को नया मुखिया मिल जाएगा। एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित (Air Marshal Ashutosh Dixit)( देश के 29वें वायुसेना प्रमुख (Air Force Chief) बनेंगे। मौजूदा प्रमुख एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह (Amarpreet Singh) 31 अक्टूबर को रिटायर हो रहे हैं। दीक्षित अभी उप प्रमुख हैं। एक बात इस नियुक्ति को और खास बनाती है। अपने बैच में वह अकेले अफसर हैं जो वायुसेना के शीर्ष ओहदों तक पहुंचे।

    दीक्षित को दिसंबर 1986 में वायुसेना की फाइटर स्ट्रीम में कमीशन मिला था। उनका जन्म 9 दिसंबर 1966 को हुआ। उनके नाम 3500 घंटे से ज्यादा की उड़ान दर्ज है। वह 20 से ज्यादा तरह के विमान उड़ा चुके हैं। टेस्ट पायलट और फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर की भूमिका भी निभाई है। ऑपरेशन सिंदूर के वक्त वह चीफ ऑफ इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ थे। इसके बाद जुलाई 2026 में उप प्रमुख बने। सरकारी आदेश के मुताबिक उनका कार्यकाल 31 दिसंबर 2028 तक रहेगा।


    कौन हैं आशुतोष दीक्षित

    एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित का नाम भारतीय वायुसेना में उन अधिकारियों में शामिल है, जिन्हें स्वदेशी रक्षा तकनीक और देश में बने लड़ाकू विमानों को बढ़ावा देने के प्रयासों से जोड़कर देखा जाता है। लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (एलसीए) तेजस समेत दूसरे स्वदेशी विमान कार्यक्रमों को आगे बढ़ाने में उनकी भूमिका अहम रही है। ऐसे में उनके वायुसेना प्रमुख बनने के बाद रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत की मुहिम को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।

    मौजूदा वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह की विदाई की तैयारियां भी पूरी हो चुकी हैं। उन्हें अब तक तीन आधिकारिक विदाई समारोह दिए जा चुके हैं। इनमें एक समारोह रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की ओर से आयोजित किया गया था। हालांकि, उनका अंतिम विदाई समारोह शनिवार को आयोजित होगा, जिसमें उन्हें औपचारिक गार्ड ऑफ ऑनर दिया जाएगा। 31 अक्टूबर उनके कार्यकाल का आखिरी दिन होगा।


    1986 में वायुसेना में हुए थे शामिल

    एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित का सैन्य करियर काफी लंबा और अनुभवों से भरा रहा है। उन्हें 6 दिसंबर 1986 को भारतीय वायुसेना की फाइटर स्ट्रीम में कमीशन मिला था। वह नेशनल डिफेंस एकेडमी (एनडीए), डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज और नेशनल डिफेंस कॉलेज के पूर्व छात्र रहे हैं। उनके पास 3,500 घंटे से ज्यादा उड़ान का अनुभव है, जो उनके लंबे परिचालन और विमानन अनुभव को दर्शाता है।

    रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, अपने करियर के दौरान उन्होंने कई अहम परिचालन और प्रशासनिक जिम्मेदारियां संभाली हैं। उन्होंने कमांडिंग ऑफिसर के तौर पर नंबर 9 स्क्वाड्रन को मिराज-2000 विमानों से लैस करने की जिम्मेदारी निभाई। इसके बाद उन्होंने पश्चिमी क्षेत्र में एक अग्रिम लड़ाकू वायुसेना स्टेशन और दक्षिणी क्षेत्र में एक प्रमुख फाइटर ट्रेनिंग बेस की कमान भी संभाली।


    एयर डिफेंस से लेकर एयर हेडक्वार्टर तक संभाली अहम जिम्मेदारियां

    एयर मार्शल दीक्षित दक्षिणी वायु कमान में एयर डिफेंस कमांडर के पद पर भी तैनात रहे हैं। इसके अलावा उन्होंने नई दिल्ली स्थित वायुसेना मुख्यालय (वायु भवन) में कई महत्वपूर्ण पदों पर काम किया। इनमें असिस्टेंट चीफ ऑफ द एयर स्टाफ (प्रोजेक्ट्स) और असिस्टेंट चीफ ऑफ द एयर स्टाफ (प्लान्स) जैसे अहम पद शामिल हैं। इन जिम्मेदारियों के दौरान उन्हें वायुसेना की परिचालन जरूरतों, भविष्य की योजनाओं, सैन्य परियोजनाओं और आधुनिक तकनीक से जुड़े मामलों पर काम करने का अनुभव मिला।


    मिल चुके हैं कई बड़े सैन्य सम्मान

    देश के प्रति विशिष्ट सेवाओं और सैन्य योगदान के लिए एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित को कई प्रतिष्ठित सम्मान मिल चुके हैं। उन्हें साल 2006 में वायु सेना मेडल, 2011 में विशिष्ट सेवा मेडल, 2023 में अति विशिष्ट सेवा मेडल और 2026 में परम विशिष्ट सेवा मेडल से सम्मानित किया गया। अब 31 अक्टूबर को वह भारतीय वायुसेना के 29वें प्रमुख के रूप में नई जिम्मेदारी संभालेंगे। उनके सामने बदलते सुरक्षा हालात के बीच वायुसेना की युद्धक क्षमता को मजबूत करने, आधुनिक तकनीक को अपनाने और स्वदेशी रक्षा उपकरणों को बढ़ावा देने जैसी अहम चुनौतियां होंगी।

  • भारत की अंतरिक्ष में एक और लंबी छलांग… ISRO ने सफलतापूर्वक लॉन्च किया NVS-03 उपग्रह

    भारत की अंतरिक्ष में एक और लंबी छलांग… ISRO ने सफलतापूर्वक लॉन्च किया NVS-03 उपग्रह


    श्रीहरिकोटा।
    अंतरिक्ष (Space) के क्षेत्र में भारत (India) ने एक और लंबी छलांग (Another Giant Leap) लगाई है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) (Indian Space Research Organisation – ISRO) ने अपने महत्वाकांक्षी नेविगेशन उपग्रह एनवीएस-03 को सफलतापूर्वक भूस्थिर स्थानांतरण कक्षा (जीटीओ) में पहुंचा दिया है। यह भारत की अंतरिक्ष और तकनीकी ताकत को दिखाता है।

    आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के दूसरे प्रक्षेपण स्थल (लॉन्च पैड) से जीएसएलवी-एफ18 रॉकेट ने शुक्रवार रात 11:51 बजे उड़ान भरी। यह अपने साथ 2,232 किलोग्राम वजनी एनवीएस-03 उपग्रह लेकर गया।

    मिशन की सफलता सुनिश्चित करने के लिए इसरो ने 24 घंटे की उलटी गिनती शुरू की थी। यह उलटी गिनती गुरुवार रात 11:51 बजे शुरू हुई थी। जीएसएलवी-एफ18 रॉकेट 50 मीटर ऊंचा है। इसका वजन 420 टन है। यह तीन चरणों वाला रॉकेट है।

    इसरो के अनुसार, उपग्रह की तय कक्षा में पृथ्वी से सबसे कम दूरी (निकटतम) 170 किलोमीटर होगी। वहीं, पृथ्वी से इसकी सबसे अधिक दूरी (अधिकतम) 37,023 किलोमीटर होगी। इसके बाद उपग्रह अपनी कक्षा को आगे बढ़ाएगा। यह 32.5 डिग्री पूर्व में अपने अंतिम निर्धारित स्थान पर पहुंचेगा।

    जीटीओ एक अंडाकार कक्षा होती है। इसका इस्तेमाल उपग्रहों को एक कक्षा से दूसरी कक्षा में पहुंचाने के लिए किया जाता है। यह पृथ्वी की निचली कक्षा से भूस्थिर कक्षा तक पहुंचने का बीच का रास्ता है।


    नेविगेशन को बनाएगा और सटीक

    एनवीएस-03 अगली पीढ़ी के नेविगेशन उपग्रहों की श्रृंखला का तीसरा उपग्रह है। यह भारत की अपनी नेविगेशन प्रणाली नेविगेशन विद इंडियन कॉन्स्टेलेशन (एनएवीआईसी) का अहम हिस्सा है। इसे भारत का अपना जीपीएस भी कहा जा सकता है। इसका इस्तेमाल कई जरूरी सेवाओं में होता है। इनमें लोकेशन पता करना, रास्ता खोजना और सही समय की जानकारी देना शामिल है।

    यह उपग्रह भारत और उसकी सीमाओं से करीब 1,500 किलोमीटर दूर तक के इलाके में सटीक जानकारी देने में मदद करेगा। इससे लोकेशन, रास्ते और समय का पता लगाने की सुविधा मिलेगी।


    एनवीएस-03 की क्या है खासियत?

    इस उपग्रह की सबसे बड़ी खासियत इसमें लगी स्वदेशी परमाणु घड़ी है। इसे भारत में ही बनाया गया है। यह बेहद सटीक समय बताने का काम करती है। इसके अलावा, इसमें नया एल1 सिग्नल भी जोड़ा गया है। इससे आम लोगों के स्मार्टफोन और गाड़ियों में नेविगेशन सेवाएं और बेहतर होंगी। इससे रास्ता खोजने में ज्यादा सटीक जानकारी मिल सकेगी।


    ‘एक देश, एक समय’ पहल को मिलेगी गति

    यह मिशन केंद्र सरकार की ‘एक देश, एक समय’ पहल को आगे बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम है। सरकार ने 29 अगस्त को विधिक मापविज्ञान (भारतीय मानक समय) नियम, 2026 अधिसूचित किए थे। ये नियम राजपत्र में प्रकाशित होने के 180 दिन बाद लागू होंगे।

    विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अनुसार, सटीक और एक समान समय बहुत जरूरी है। यह दूरसंचार, डिजिटल वित्तीय लेनदेन, बिजली ग्रिड, परिवहन और डेटा केंद्रों के सुरक्षित संचालन का आधार है। एनवीएस-03 का सफल प्रक्षेपण देश को समय की जानकारी के लिए विदेशी स्रोतों पर निर्भरता से पूरी तरह मुक्त करने की दिशा में अहम कदम है।


    पिछली विफलता से क्या सीखा?

    इसरो ने इस मिशन में एक बड़ा तकनीकी बदलाव किया है। जनवरी 2025 में एनवीएस-02 मिशन के दौरान एक कनेक्टर में खराबी आ गई थी। इस बार ऐसी समस्या से बचने के लिए उपग्रह में बदलाव किए गए हैं। इसके अलावा, एक उच्च स्तरीय समिति की सिफारिशों के आधार पर सुरक्षा से जुड़े सुधार भी लागू किए गए हैं।

  • दिलजीत दोसांझ ने कॉन्सर्ट में तोड़ी चुप्पी, बोले पंजाबियों को लड़ना मत सिखाओ, अभिजीत दिपके ने दिया जवाब

    दिलजीत दोसांझ ने कॉन्सर्ट में तोड़ी चुप्पी, बोले पंजाबियों को लड़ना मत सिखाओ, अभिजीत दिपके ने दिया जवाब


    नई दिल्ली। पंजाबी सिंगर और अभिनेता दिलजीत दोसांझ एक बार फिर अपने बयान को लेकर चर्चा में हैं। दिल्ली में 30 अक्टूबर को आयोजित उनके कॉन्सर्ट के दौरान CJP प्रोटेस्ट और फिल्म सतलुज को लेकर उठे विवाद पर उन्होंने खुलकर अपनी बात रखी। दिलजीत ने आलोचकों को जवाब देते हुए कहा कि पंजाबियों को लड़ना मत सिखाओ। उनके इस बयान के बाद कॉकरोच जनता पार्टी यानी CJP से जुड़े अभिजीत दिपके की प्रतिक्रिया भी सामने आई है। अभिजीत ने दिलजीत के प्रति अपना सम्मान जाहिर करते हुए कहा कि एक मुद्दे पर असहमति होने का मतलब यह नहीं है कि उनके मन में सिंगर के लिए सम्मान कम हो गया है।

    दिल्ली में दिलजीत दोसांझ का औरा इंडिया टूर 2026 का कॉन्सर्ट आयोजित किया गया था। इस दौरान उन्होंने अपने संगीत से दर्शकों का मनोरंजन करने के साथ ही पिछले कुछ समय से चल रही आलोचनाओं पर भी बात की। विवाद की शुरुआत उस समय हुई थी जब NEET पेपर लीक से जुड़े आंदोलन के दौरान दिलजीत ने कहा था कि उन्हें इस मुद्दे से दूर रखा जाए क्योंकि वह एक कलाकार हैं। उनके इस बयान को लेकर सोशल मीडिया पर काफी प्रतिक्रिया हुई थी। CJP से जुड़े अभिजीत दिपके ने भी उस समय सिंगर की आलोचना की थी।

    अब दिल्ली के कॉन्सर्ट में दिलजीत ने इस पूरे विवाद पर अपनी बात रखते हुए कहा कि वह सभी लोगों से प्यार करते हैं क्योंकि वह एक कलाकार हैं। उन्होंने कहा कि अगर वह चुप हैं तो उन्हें चुप ही रहने दिया जाए। वह सभी का समर्थन करते हैं लेकिन पंजाबियों को लड़ना न सिखाया जाए। उन्होंने फिल्म सतलुज का जिक्र करते हुए कहा कि जिस फिल्म का मंच पर मजाक उड़ाया जा रहा है वह जसवंत सिंह खालड़ा से जुड़ी कहानी है और उस फिल्म के लिए उन्होंने लंबे समय तक संघर्ष किया है। दिलजीत ने यह भी कहा कि अगर कोई उनसे नफरत करता है तो भी उन्हें कोई परेशानी नहीं है क्योंकि उनकी तरफ से सभी के लिए प्यार है।

    दिलजीत के इस बयान पर अभिजीत दिपके ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि जून में जब प्रोटेस्ट चल रहा था तब दिलजीत की एक बात से उन्हें दुख पहुंचा था। हालांकि उनका कहना था कि यह नाराजगी किसी निजी वजह से नहीं थी। अभिजीत ने बताया कि वह हमेशा से दिलजीत को ऐसे कलाकार के रूप में देखते आए हैं जो जरूरी मुद्दों पर अपनी आवाज उठाता है। यही वजह थी कि उस समय उनकी बात उन्हें थोड़ी चुभ गई थी।

    अभिजीत ने अपने संदेश में यह भी बताया कि वह लंबे समय से दिलजीत के प्रशंसक रहे हैं और आज भी उनका संगीत सुनते हैं। उन्होंने लिखा कि इस साल मई में भारत लौटने से पहले वह शिकागो में दिलजीत के कॉन्सर्ट में भी शामिल हुए थे। उनके मुताबिक वह केवल संगीत सुनने नहीं गए थे बल्कि एक इंसान के तौर पर दिलजीत के प्रति उनके मन में सम्मान भी रहा है।

    अभिजीत ने दिलजीत की तारीफ करते हुए उनके बेबाक अंदाज अपनी बात पर कायम रहने और अपनी जड़ों से जुड़े रहते हुए भारतीय संगीत को वैश्विक मंच पर पहचान दिलाने की सराहना की। उन्होंने साफ किया कि किसी एक बात पर असहमति या गलतफहमी के कारण उनके मन में दिलजीत के लिए प्यार और सम्मान कम नहीं हुआ है। अंत में उन्होंने दिलजीत से छोटे भाई की गलती समझकर माफ करने की अपील भी की।

    इस तरह कॉन्सर्ट में दिलजीत के बयान और अभिजीत के जवाब के बाद यह विवाद एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। दोनों की बातों से साफ है कि असहमति के बावजूद एक-दूसरे के प्रति सम्मान बनाए रखने का संदेश भी सामने आया है।

  • अमेरिकी शेयर बाजार में AI निवेश पर उठे सवाल, नैसडैक 7.8 प्रतिशत टूटा, अक्टूबर में 2 ट्रिलियन डॉलर की पूंजी साफ

    अमेरिकी शेयर बाजार में AI निवेश पर उठे सवाल, नैसडैक 7.8 प्रतिशत टूटा, अक्टूबर में 2 ट्रिलियन डॉलर की पूंजी साफ

    नई दिल्ली । अमेरिकी शेयर बाजार में अक्टूबर 2026 के दौरान टेक्नोलॉजी कंपनियों के शेयरों में भारी बिकवाली देखने को मिली। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में बड़ी कंपनियों की ओर से किए जा रहे भारी निवेश पर अब निवेशकों के सवाल बढ़ने लगे हैं। बाजार में यह चिंता है कि कंपनियां जिस तेजी से AI तकनीक पर पूंजी खर्च कर रही हैं, क्या भविष्य में उससे पर्याप्त कमाई और रिटर्न हासिल हो पाएगा। इसी अनिश्चितता का असर अमेरिकी शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांकों पर दिखाई दिया है। अक्टूबर में नैसडैक अपने उच्चतम स्तर से 7.8 प्रतिशत नीचे आ चुका है।

    इस गिरावट के दौरान नैसडैक का कुल बाजार पूंजीकरण करीब 2 ट्रिलियन डॉलर घट गया। यह रकम एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स के अनुमानित बाजार मूल्य के बराबर बताई जा रही है। अक्टूबर का प्रदर्शन मार्च 2025 के बाद नैसडैक के लिए सबसे खराब मासिक प्रदर्शन रहा है। टेक कंपनियों के शेयरों में लगातार दबाव के कारण निवेशकों की चिंता बढ़ी है।

    शुक्रवार को अमेरिकी बाजार में बिकवाली और तेज हो गई। नैसडैक कंपोजिट इंडेक्स 2.86 प्रतिशत गिरकर बंद हुआ, जबकि एसएंडपी 500 में 1.82 प्रतिशत की कमजोरी दर्ज की गई। दोनों सूचकांकों के लिए यह जून के बाद सबसे खराब कारोबारी दिन रहा। वहीं डाउ जोंस इंडेक्स भी 572 अंक यानी 1.1 प्रतिशत टूट गया। बाजार में गिरावट का प्रमुख कारण बड़ी टेक कंपनियों के AI निवेश को लेकर पैदा हुई अनिश्चितता रही।

    मेटा, अल्फाबेट और अमेजन जैसी कंपनियां AI तकनीक के विकास, डेटा सेंटर और संबंधित बुनियादी ढांचे पर भारी रकम खर्च कर रही हैं। निवेशकों को आशंका है कि इस निवेश से होने वाली कमाई और खर्च के बीच संतुलन बनाए रखना कंपनियों के लिए चुनौती बन सकता है। एक अनुमान के मुताबिक, वैश्विक स्तर पर AI से जुड़ा पूंजीगत खर्च 2030 तक 5.5 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है। अकेले 2026 में इस क्षेत्र में करीब 900 अरब डॉलर खर्च होने की संभावना जताई गई है।

    चिप निर्माण क्षेत्र की प्रमुख कंपनी इंटेल के शेयरों में भी बड़ी गिरावट दर्ज की गई। शुक्रवार को कंपनी का शेयर करीब 30 प्रतिशत टूट गया। यह 1974 के बाद एक कारोबारी दिन में इंटेल के शेयरों की सबसे बड़ी गिरावट बताई गई है। कंपनी ने चौथी तिमाही में कमजोर राजस्व का अनुमान जताया है। इसकी एक प्रमुख वजह मेमोरी चिप की बढ़ती कीमतों के कारण उपभोक्ता मांग में कमी आना बताई गई है।

    अन्य बड़ी टेक कंपनियों के शेयर भी दबाव में रहे। अमेजन के शेयर में 1.4 प्रतिशत की गिरावट आई, जबकि एनवीडिया का शेयर 4 प्रतिशत से अधिक टूट गया। इस गिरावट के बाद एनवीडिया बाजार पूंजीकरण के मामले में ऐपल से पीछे हो गई। अल्फाबेट और मेटा के शेयर अपने शीर्ष स्तर से करीब 20 प्रतिशत नीचे आ चुके हैं। माइक्रोसॉफ्ट और स्पेसएक्स के नतीजों में AI पर किए गए निवेश से रिटर्न मिलने के संकेत जरूर सामने आए हैं, लेकिन शुक्रवार को इनके शेयरों में भी कमजोरी रही।

    शेयर बाजार में आई गिरावट का असर दुनिया के सबसे अमीर लोगों की संपत्ति पर भी पड़ा है। एलन मस्क की नेटवर्थ में 48.5 अरब डॉलर की कमी दर्ज की गई, जिसके बाद उनकी कुल संपत्ति घटकर 865 अरब डॉलर रह गई। इसके अलावा जेफ बेजोस, लैरी पेज, सर्गेई ब्रिन, माइकल डेल, मार्क जकरबर्ग, लैरी एलिसन और जेंसन हुआंग की संपत्ति में भी गिरावट आई।

    अमेरिकी शेयर बाजार की मौजूदा स्थिति ने AI क्षेत्र में निवेश की रफ्तार और उससे मिलने वाले संभावित मुनाफे को लेकर नई बहस शुरू कर दी है। कंपनियों के भारी खर्च और निवेशकों की रिटर्न संबंधी अपेक्षाओं के बीच बाजार में उतार-चढ़ाव बना हुआ है। आने वाले समय में कंपनियों के वित्तीय नतीजे और AI कारोबार से होने वाली वास्तविक कमाई इस क्षेत्र में निवेशकों का भरोसा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

  • बैंकों का कर्ज देने का तरीका बदला, होम लोन से आगे निकली NBFCs की हिस्सेदारी, गोल्ड लोन में 82.5% उछाल

    बैंकों का कर्ज देने का तरीका बदला, होम लोन से आगे निकली NBFCs की हिस्सेदारी, गोल्ड लोन में 82.5% उछाल


    नई दिल्ली । देश में बैंकों के कर्ज वितरण के तरीके में बदलाव देखने को मिल रहा है। वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही में बैंकों ने घर खरीदने वाले ग्राहकों की तुलना में गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFCs) को अधिक कर्ज दिया। 31 मार्च से 30 सितंबर के बीच बैंकों ने NBFCs को करीब 1.8 लाख करोड़ रुपये का ऋण उपलब्ध कराया, जबकि आवास क्षेत्र को 1.4 लाख करोड़ रुपये का कर्ज दिया गया। इस अवधि में गोल्ड लोन भी तेजी से बढ़ा और खुदरा कर्ज की वृद्धि में इसकी महत्वपूर्ण हिस्सेदारी रही।

    आंकड़ों के मुताबिक, 31 मार्च से 30 सितंबर के बीच बैंकों ने कुल 16.1 लाख करोड़ रुपये का अतिरिक्त गैर-खाद्य ऋण वितरित किया। इसमें बड़े उद्योगों को 2.04 लाख करोड़ रुपये का कर्ज मिला, जबकि NBFCs को 1.83 लाख करोड़ रुपये का ऋण दिया गया। आवास क्षेत्र में यह राशि 1.35 लाख करोड़ रुपये रही। गोल्ड लोन के रूप में 1.15 लाख करोड़ रुपये का अतिरिक्त कर्ज दिया गया। व्यापार क्षेत्र को 1.02 लाख करोड़ रुपये और सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों को 91,366 करोड़ रुपये का ऋण मिला।

    गोल्ड लोन में सबसे अधिक तेजी दर्ज की गई है। पिछले एक साल में इस श्रेणी का बकाया कर्ज 82.5 प्रतिशत बढ़कर 5.8 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया। वित्त वर्ष की पहली छमाही में ही इसमें 25.1 प्रतिशत की वृद्धि हुई। मार्च से सितंबर के बीच बैंकों ने सोना गिरवी रखकर 1.2 लाख करोड़ रुपये का कर्ज दिया। इस वृद्धि के साथ गोल्ड लोन बैंकिंग क्षेत्र में तेजी से बढ़ने वाले ऋण खंडों में शामिल हो गया है।

    अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों का कुल गैर-खाद्य ऋण सितंबर के अंत तक सालाना आधार पर 19.1 प्रतिशत बढ़कर 229 लाख करोड़ रुपये हो गया। मार्च के मुकाबले इसमें 7.5 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। इस कुल ऋण में सेवाओं का हिस्सा 4.9 लाख करोड़ रुपये, व्यक्तिगत कर्ज का 4.5 लाख करोड़ रुपये, उद्योगों का 3.7 लाख करोड़ रुपये और कृषि क्षेत्र का 1.8 लाख करोड़ रुपये रहा। आंकड़े बताते हैं कि बैंकिंग क्षेत्र में उद्योग, सेवा और व्यक्तिगत कर्ज की मांग बनी हुई है।

    सेवा क्षेत्र को मिलने वाला कर्ज भी तेजी से बढ़ा है। इस क्षेत्र का कुल ऋण सालाना आधार पर 28.3 प्रतिशत बढ़कर 64.9 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया। अतिरिक्त गैर-खाद्य ऋण में सेवाओं की हिस्सेदारी 30.6 प्रतिशत रही। सेवा क्षेत्र में NBFCs को दिया गया कर्ज 41.8 प्रतिशत बढ़कर 22.5 लाख करोड़ रुपये हो गया। वहीं, कमर्शियल रियल एस्टेट क्षेत्र को दिए गए ऋण में 23.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई और यह 7.5 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया।

    उद्योगों को मिलने वाले कर्ज में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई। औद्योगिक ऋण सालाना आधार पर 19.5 प्रतिशत बढ़कर 49.8 लाख करोड़ रुपये हो गया। बड़ी कंपनियों को दिया गया कर्ज 16 प्रतिशत बढ़कर 33 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया। मध्यम आकार की कंपनियों के लिए ऋण में 33.2 प्रतिशत और छोटी कंपनियों के कर्ज में 24.4 प्रतिशत की वृद्धि हुई। उद्योगों को दिए गए अतिरिक्त 3.7 लाख करोड़ रुपये के कर्ज में बड़ी कंपनियों की हिस्सेदारी करीब 2 लाख करोड़ रुपये और छोटी कंपनियों की हिस्सेदारी 1.6 लाख करोड़ रुपये रही।

    कृषि और उससे जुड़ी गतिविधियों के लिए बैंक ऋण सालाना आधार पर 19.5 प्रतिशत बढ़कर 28.2 लाख करोड़ रुपये हो गया। एक साल पहले यह 23.6 लाख करोड़ रुपये था। व्यापार क्षेत्र को मिलने वाले ऋण में भी 23.9 प्रतिशत की वृद्धि हुई। दूसरी ओर, व्यक्तिगत कर्ज 17.3 प्रतिशत बढ़कर 74.27 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया।

    फिक्स्ड डिपॉजिट के बदले दिए जाने वाले कर्ज में भी उल्लेखनीय तेजी आई। इस श्रेणी में बैंकों का बकाया ऋण 53.3 प्रतिशत बढ़कर 2.2 लाख करोड़ रुपये हो गया। पिछले छह महीनों में इसमें 28.1 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। मार्च से सितंबर के दौरान बैंकों ने फिक्स्ड डिपॉजिट के बदले 47,471 करोड़ रुपये का कर्ज दिया। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि बैंकिंग क्षेत्र में NBFCs, गोल्ड लोन और जमा राशि के बदले मिलने वाले कर्ज की मांग तेजी से बढ़ी है।