Author: bharati

  • थाईलैंड में दर्दनाक हादसा, 11 वर्षीय बच्चे की चलाई पिकअप धार्मिक जुलूस में घुसी, 10 बौद्ध भिक्षुओं की मौत, कानून के दायरे पर उठे सवाल

    थाईलैंड में दर्दनाक हादसा, 11 वर्षीय बच्चे की चलाई पिकअप धार्मिक जुलूस में घुसी, 10 बौद्ध भिक्षुओं की मौत, कानून के दायरे पर उठे सवाल

    नई दिल्ली । थाईलैंड के मुकदाहान प्रांत में एक बेहद दर्दनाक सड़क हादसे ने पूरे देश को झकझोर दिया है। धार्मिक पदयात्रा पर निकले बौद्ध भिक्षुओं के समूह में एक पिकअप वाहन के घुस जाने से 10 भिक्षुओं की मौत हो गई, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि वाहन एक 11 वर्षीय बच्चा चला रहा था, जिसने बिना अनुमति अपने माता-पिता की पिकअप लेकर घर से बाहर निकलने के बाद नियंत्रण खो दिया। घटना के बाद पूरे देश में सड़क सुरक्षा, अभिभावकों की जिम्मेदारी और नाबालिगों से जुड़े कानूनी प्रावधानों पर चर्चा तेज हो गई है।

    जानकारी के अनुसार हादसे के समय 35 बौद्ध भिक्षु और पांच श्रद्धालु धार्मिक पदयात्रा पर थे। सभी सड़क के किनारे एक पंक्ति में आगे बढ़ रहे थे, तभी तेज रफ्तार पिकअप अनियंत्रित होकर सीधे जुलूस में जा घुसी। टक्कर इतनी भीषण थी कि कई भिक्षु दूर तक उछल गए। पांच लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि पांच अन्य ने अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। कई घायल अब भी अस्पताल में भर्ती हैं और उनमें से तीन की हालत अत्यंत गंभीर बताई जा रही है।

    पुलिस जांच में पता चला है कि बच्चा अपने माता-पिता की जानकारी के बिना वाहन लेकर निकल गया था। वाहन के घर से गायब होने पर परिजनों ने तत्काल पुलिस को इसकी सूचना दी थी। इसके कुछ समय बाद हादसे की जानकारी सामने आई। पुलिस ने वाहन को कब्जे में लेकर फॉरेंसिक जांच शुरू कर दी है और घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। हादसे में बचे भिक्षुओं और अन्य प्रत्यक्षदर्शियों के बयान भी दर्ज किए जा रहे हैं।

    जांच अधिकारियों ने बताया कि बच्चा फिलहाल विस्तृत बयान देने की स्थिति में नहीं है। शुरुआती स्तर पर यह आशंका भी जताई गई है कि वह विशेष आवश्यकताओं वाला बच्चा हो सकता है। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि चिकित्सकीय परीक्षण और विशेषज्ञों की रिपोर्ट आने के बाद ही होगी। स्वास्थ्य विशेषज्ञ उसकी मानसिक और शारीरिक स्थिति का भी मूल्यांकन कर रहे हैं।

    प्रत्यक्षदर्शी एक भिक्षु ने बताया कि सभी लोग धार्मिक मंत्रों का जाप करते हुए शांतिपूर्वक आगे बढ़ रहे थे। तभी सामने से तेज गति से आती पिकअप अचानक उनकी ओर मुड़ गई। उन्होंने समय रहते स्वयं को बचा लिया, लेकिन उनके पीछे चल रहे कई भिक्षु वाहन की चपेट में आ गए। हादसे के बाद घटनास्थल पर अफरा-तफरी मच गई और राहत एवं बचाव दल ने घायलों को तुरंत अस्पताल पहुंचाया।

    स्थानीय अस्पताल ने घायलों की संख्या अधिक होने के कारण लोगों से रक्तदान की अपील की है। चिकित्सकों के अनुसार कई घायलों का उपचार जारी है और कुछ की स्थिति अभी भी गंभीर बनी हुई है। प्रशासन ने पूरे मामले की विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं ताकि दुर्घटना के सभी पहलुओं का पता लगाया जा सके।

    थाईलैंड के कानून के अनुसार 12 वर्ष से कम आयु के बच्चों पर सामान्य परिस्थितियों में आपराधिक दायित्व लागू नहीं होता। ऐसे में इस मामले में बच्चे के विरुद्ध आपराधिक कार्रवाई की संभावना सीमित मानी जा रही है। हालांकि पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद सभी कानूनी पहलुओं का परीक्षण किया जाएगा। प्रशासन ने इस घटना को गंभीर चेतावनी बताते हुए अभिभावकों से अपील की है कि वे बच्चों की पहुंच से वाहन दूर रखें और सड़क सुरक्षा नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करें, ताकि भविष्य में ऐसी दुखद घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

  • विश्व धरोहर तक्षशिला पर मंडराया संकट, संरक्षण के नाम पर आधुनिक निर्माण से पाकिस्तान को यूनेस्को की सख्त फटकार

    विश्व धरोहर तक्षशिला पर मंडराया संकट, संरक्षण के नाम पर आधुनिक निर्माण से पाकिस्तान को यूनेस्को की सख्त फटकार

    नई दिल्ली । विश्व धरोहर स्थलों के संरक्षण को लेकर पाकिस्तान एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सवालों के घेरे में आ गया है। प्राचीन तक्षशिला में संरक्षण कार्यों के दौरान आधुनिक निर्माण सामग्री और तकनीकों के उपयोग पर संयुक्त राष्ट्र की सांस्कृतिक संस्था यूनेस्को ने गंभीर आपत्ति जताई है। संस्था ने स्पष्ट किया है कि यदि विवादित निर्माण कार्यों को तत्काल नहीं रोका गया और पहले किए गए बदलावों को वापस नहीं लिया गया, तो तक्षशिला को विश्व धरोहर सूची से हटाने तक की कार्रवाई की जा सकती है।

    तक्षशिला भारतीय उपमहाद्वीप की सबसे महत्वपूर्ण प्राचीन ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों में गिनी जाती है। यह स्थल वैदिक, बौद्ध और प्राचीन भारतीय सभ्यता के विकास का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है। यहां विभिन्न कालखंडों के नगरों, मठों, धार्मिक स्थलों और पुरातात्विक अवशेषों का विशाल समूह मौजूद है, जो सदियों पुराने शहरी विकास और सांस्कृतिक इतिहास की महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करता है।

    यूनेस्को की आपत्ति उन संरक्षण कार्यों को लेकर है जिनमें ऐतिहासिक संरचनाओं की मरम्मत के दौरान आधुनिक सीमेंट, नई चिनाई और अतिरिक्त निर्माण का उपयोग किया गया। संस्था का मानना है कि इस प्रकार के हस्तक्षेप से स्मारकों की मौलिकता और ऐतिहासिक स्वरूप प्रभावित होता है। अंतरराष्ट्रीय संरक्षण मानकों के अनुसार किसी भी विश्व धरोहर स्थल पर मरम्मत या संरक्षण का कार्य मूल निर्माण शैली और पारंपरिक तकनीकों के अनुरूप होना चाहिए।

    जानकारी के अनुसार तक्षशिला परिसर के दो प्रमुख पुरातात्विक स्थलों पर किए गए निर्माण कार्यों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता व्यक्त की गई। निरीक्षण के दौरान ऐसे बदलाव सामने आए जिनमें पुरानी दीवारों के स्थान पर नई दीवारें तैयार करना, उनकी ऊंचाई बढ़ाना तथा आधुनिक सामग्री का उपयोग शामिल बताया गया। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के निर्माण से ऐतिहासिक संरचनाओं की प्रामाणिकता और सांस्कृतिक महत्व पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

    यूनेस्को ने पाकिस्तान से स्पष्ट रूप से कहा है कि संबंधित निर्माण कार्यों को तुरंत रोका जाए और जिन हिस्सों में आधुनिक हस्तक्षेप किया गया है, उनकी समीक्षा कर आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए जाएं। संस्था ने यह भी संकेत दिया है कि यदि निर्धारित मानकों का पालन नहीं किया गया तो तक्षशिला को संकटग्रस्त विश्व धरोहर स्थलों की सूची में शामिल किया जा सकता है। स्थिति में सुधार नहीं होने पर विश्व धरोहर का दर्जा वापस लेने की प्रक्रिया भी शुरू की जा सकती है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि विश्व धरोहर स्थलों का संरक्षण केवल संरचनाओं को बचाने तक सीमित नहीं होता, बल्कि उनके मूल स्वरूप, ऐतिहासिक संदर्भ और सांस्कृतिक पहचान को सुरक्षित रखना भी उतना ही आवश्यक होता है। आधुनिक निर्माण सामग्री का अनियंत्रित उपयोग किसी भी प्राचीन स्मारक की ऐतिहासिक विश्वसनीयता को प्रभावित कर सकता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय संरक्षण सिद्धांत अत्यंत सावधानी बरतने की सलाह देते हैं।

    तक्षशिला लंबे समय से इतिहास, पुरातत्व और सांस्कृतिक अध्ययन का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। यहां स्थित अवशेष भारतीय उपमहाद्वीप की प्राचीन शिक्षा, व्यापार, धर्म और नगर नियोजन की समृद्ध विरासत को दर्शाते हैं। ऐसे में संरक्षण कार्यों में अंतरराष्ट्रीय मानकों का पालन केवल औपचारिक आवश्यकता नहीं, बल्कि इस वैश्विक धरोहर की ऐतिहासिक पहचान और आने वाली पीढ़ियों के लिए इसके संरक्षण की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी भी है।

  • विंबलडन 2026: एलेक्जेंड्रा एला ने रचा इतिहास, पहली फिलीपीन खिलाड़ी बनीं जो तीसरे दौर में पहुंचीं

    विंबलडन 2026: एलेक्जेंड्रा एला ने रचा इतिहास, पहली फिलीपीन खिलाड़ी बनीं जो तीसरे दौर में पहुंचीं


    नई दिल्ली। विंबलडन 2026 में फिलीपींस की युवा टेनिस स्टार एलेक्जेंड्रा एला ने ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए पहली बार महिला एकल के तीसरे दौर में प्रवेश कर लिया। गुरुवार को ऑल इंग्लैंड क्लब में खेले गए दूसरे दौर के मुकाबले में एला ने ऑस्ट्रेलिया की माया जॉइंट को 3-6, 6-2, 6-0 से हराकर न सिर्फ शानदार वापसी की, बल्कि विंबलडन के तीसरे दौर में पहुंचने वाली फिलीपींस की पहली खिलाड़ी बनने का गौरव भी हासिल किया।

    मुकाबले की शुरुआत एला के लिए चुनौतीपूर्ण रही। पहले सेट में माया जॉइंट ने आक्रामक खेल दिखाते हुए 6-3 से बढ़त बना ली। शुरुआती झटके के बाद एला ने अपना खेल पूरी तरह बदल दिया और दूसरे सेट में बेहतरीन सर्विस तथा दमदार ग्राउंड स्ट्रोक्स की बदौलत 6-2 से मुकाबला बराबरी पर ला दिया।

    निर्णायक तीसरे सेट में 21 वर्षीय एला ने अपने प्रतिद्वंद्वी को कोई मौका नहीं दिया। उन्होंने शुरुआत में ही सर्विस ब्रेक हासिल कर दबाव बनाया और लगातार शानदार प्रदर्शन करते हुए 6-0 से सेट जीतकर मैच अपने नाम कर लिया। पूरे मुकाबले में उनकी फिटनेस, संयम और आक्रामक खेल ने दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया।

    यह जीत एला के लिए इसलिए भी खास रही क्योंकि पिछले वर्ष ईस्टबोर्न ओपन के फाइनल में उन्हें माया जॉइंट के खिलाफ बेहद करीबी मुकाबले में हार का सामना करना पड़ा था। उस मैच का फैसला तीसरे सेट के टाईब्रेक में 12-10 से हुआ था। विंबलडन में मिली यह जीत उनके लिए उस हार का बेहतरीन जवाब साबित हुई।

    महिला एकल के अन्य मुकाबलों में 21वीं वरीयता प्राप्त मैरी बौजकोवा ने शानदार प्रदर्शन करते हुए ग्रांट को 7-5, 6-3 से हराकर तीसरी बार विंबलडन के तीसरे दौर में जगह बनाई। अब उनका सामना पिछले साल की क्वार्टर फाइनलिस्ट ल्यूडमिला सैमसनोवा से होगा, जिन्होंने 15वीं वरीयता प्राप्त डायना श्नाइडर को 6-4, 4-6, 6-2 से हराया।

    अमेरिका की एमा नवारो ने भी लगातार तीसरे वर्ष विंबलडन के तीसरे दौर में प्रवेश किया। उन्होंने ओक्साना सेलेखमेतेवा को 3-6, 6-4, 6-1 से मात देकर शानदार वापसी दर्ज की। नवारो का अगला मुकाबला मार्टा कोस्त्युक और अन्ना ब्लिंकोवा के बीच होने वाले मैच की विजेता से होगा।

    एलेक्जेंड्रा एला की इस ऐतिहासिक जीत ने न केवल फिलीपींस के टेनिस इतिहास में नया अध्याय जोड़ा है, बल्कि यह भी साबित कर दिया कि युवा खिलाड़ी अब ग्रैंड स्लैम स्तर पर बड़े उलटफेर करने का दम रखते हैं।

  • महिला टी20 विश्व कप 2026: साइवर-ब्रंट की कप्तानी पारी से इंग्लैंड फाइनल में, दक्षिण अफ्रीका को 40 रन से हराया

    महिला टी20 विश्व कप 2026: साइवर-ब्रंट की कप्तानी पारी से इंग्लैंड फाइनल में, दक्षिण अफ्रीका को 40 रन से हराया


    नई दिल्ली। आईसीसी महिला टी20 विश्व कप 2026 के दूसरे सेमीफाइनल में इंग्लैंड ने दमदार प्रदर्शन करते हुए दक्षिण अफ्रीका को 40 रन से हराकर पांचवीं बार फाइनल का टिकट हासिल कर लिया। लंदन के केनिंग्टन ओवल में खेले गए मुकाबले में इंग्लिश टीम ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवर में 5 विकेट पर 169 रन बनाए। जवाब में दक्षिण अफ्रीका की टीम 20 ओवर में 8 विकेट पर 129 रन ही बना सकी।

    इंग्लैंड की शुरुआत अच्छी नहीं रही। एमी जोन्स 2 रन और डैनी व्याट 12 रन बनाकर आउट हो गईं, जबकि एलिसा कैप्सी भी सिर्फ 1 रन बनाकर पवेलियन लौट गईं। महज 23 रन पर तीन विकेट गिरने के बाद कप्तान नेट साइवर-ब्रंट और अनुभवी हीथर नाइट ने मोर्चा संभाला। दोनों बल्लेबाजों ने चौथे विकेट के लिए 133 रन की शानदार साझेदारी कर टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचाया।

    कप्तान साइवर-ब्रंट ने जिम्मेदारी भरी बल्लेबाजी करते हुए 47 गेंदों में 75 रन बनाए। उनकी पारी में 11 चौके और एक छक्का शामिल रहा। वहीं हीथर नाइट ने 47 गेंदों पर 58 रन की उपयोगी पारी खेली जिसमें छह चौके और एक छक्का शामिल था। दोनों की शानदार बल्लेबाजी की बदौलत इंग्लैंड ने चुनौतीपूर्ण स्कोर खड़ा किया।

    दक्षिण अफ्रीका की ओर से शबनम इस्माइल और नॉनकुलुलेको म्लाबा ने दो-दो विकेट लिए लेकिन बाकी गेंदबाज इंग्लैंड की बड़ी साझेदारी को तोड़ने में सफल नहीं हो सके।

    170 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी दक्षिण अफ्रीका को कप्तान लौरा वोल्वार्ट और ताजमिन ब्रिट्स ने अच्छी शुरुआत दिलाई। दोनों ने पहले विकेट के लिए 43 रन जोड़े लेकिन इसके बाद टीम लगातार अंतराल पर विकेट गंवाती रही। वोल्वार्ट 17 रन बनाकर आउट हुईं जबकि एनेरी डर्कसेन, मारिजाने कैप, सुने लुस और क्लो ट्रायोन बड़ी पारी नहीं खेल सकीं।

    ताजमिन ब्रिट्स ने अकेले संघर्ष करते हुए 45 गेंदों में 51 रन बनाए लेकिन दूसरे छोर से उन्हें अपेक्षित सहयोग नहीं मिला। नादिन डी क्लर्क 14 रन बनाकर नाबाद रहीं, जबकि बाकी बल्लेबाज इंग्लैंड के अनुशासित गेंदबाजी आक्रमण के सामने टिक नहीं सके।

    इंग्लैंड की ओर से लॉरेन बेल और चार्ली डीन ने दो-दो विकेट झटके। फ्रेया केम्प और लिन्से स्मिथ ने एक-एक विकेट लेकर दक्षिण अफ्रीका की उम्मीदों पर पूरी तरह पानी फेर दिया।

    इस जीत के साथ इंग्लैंड ने पांचवीं बार महिला टी20 विश्व कप के फाइनल में प्रवेश किया है। अब रविवार को लॉर्ड्स के ऐतिहासिक मैदान पर उसका मुकाबला छह बार की चैंपियन ऑस्ट्रेलिया से होगा। क्रिकेट प्रेमियों को खिताबी मुकाबले में महिला क्रिकेट की दो सबसे सफल टीमों के बीच रोमांचक टक्कर देखने को मिलेगी।

  • मूसलाधार बारिश से यूपी बेहाल, अंडरपास डूबे, स्कूटी बही, 75 जिलों में बारिश का अलर्ट

    मूसलाधार बारिश से यूपी बेहाल, अंडरपास डूबे, स्कूटी बही, 75 जिलों में बारिश का अलर्ट


    उत्तर प्रदेश। उत्तर प्रदेश में मानसून अब पूरी तरह सक्रिय हो गया है और शुक्रवार को प्रदेश के कई जिलों में तेज बारिश ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया। मथुरा में महज आधे घंटे की मूसलाधार बारिश ने सड़कों को नदी में बदल दिया, जबकि कानपुर में देर रात हुई भारी बारिश के कारण जलभराव, दीवार गिरने और इमारतों को नुकसान जैसी घटनाएं सामने आईं। मौसम विभाग ने प्रदेश के सभी 75 जिलों में बारिश का अलर्ट जारी करते हुए 11 जिलों में भारी वर्षा, आकाशीय बिजली और तेज हवाओं की चेतावनी दी है।

    मथुरा में दोपहर करीब एक बजे हुई तेज बारिश के बाद शहर के कई इलाके जलमग्न हो गए। रेलवे अंडरपास में गर्दन तक पानी भर गया, जिससे यातायात पूरी तरह बाधित हो गया। कई वाहन पानी में फंस गए और सड़क पर तेज बहाव के कारण एक स्कूटी बह गई। दुकानों के बाहर रखा सामान भी पानी के तेज बहाव में बहता नजर आया। कई लोग अपनी बाइक पकड़कर सड़क किनारे सुरक्षित स्थान तलाशते दिखाई दिए।

    कानपुर में गुरुवार देर रात से शुक्रवार तड़के तक लगातार हुई बारिश ने शहर की व्यवस्थाओं की पोल खोल दी। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज परिसर में पानी भर गया, जिससे मरीजों और उनके परिजनों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। पार्किंग में खड़ी कई कारें और बाइकें आधी पानी में डूब गईं। ऑर्डिनेंस फैक्ट्री परिसर की करीब 100 फीट लंबी दीवार भरभराकर गिर गई, जबकि एक अपार्टमेंट के बेसमेंट की दीवार धंसकने के बाद सुरक्षा के लिहाज से पूरी इमारत खाली करानी पड़ी।

    प्रदेश के अन्य जिलों में भी बारिश का असर देखने को मिला। झांसी में आकाशीय बिजली गिरने से एक किसान की मौत हो गई। उन्नाव में नालियां जाम होने के कारण बरसाती पानी लोगों के घरों में घुस गया। जालौन में तेज आंधी के साथ बारिश हुई, जिससे कई स्थानों पर जनजीवन प्रभावित रहा।

    मौसम विभाग के अनुसार शुक्रवार को प्रदेश के सभी जिलों में बारिश की संभावना है। 11 जिलों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। इसके साथ ही आकाशीय बिजली गिरने, ओलावृष्टि और 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की भी आशंका जताई गई है। लोगों को खराब मौसम के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचने और सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी गई है।

    लखनऊ स्थित मौसम केंद्र के वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह के अनुसार मानसून अब पूरे प्रदेश में सक्रिय हो चुका है और अगले एक सप्ताह तक रुक-रुककर बारिश का सिलसिला जारी रहने की संभावना है। लगातार बारिश के कारण तापमान में करीब 8 डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि पूरे मानसून सीजन में प्रदेश में सामान्य से कम वर्षा होने की संभावना भी जताई गई है।

    आंकड़ों के अनुसार पिछले 24 घंटे में उत्तर प्रदेश में औसतन 8.4 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जो सामान्य से करीब 54 प्रतिशत अधिक है। इस अवधि में संभल में सबसे ज्यादा 46.3 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई। इसके अलावा मिर्जापुर, आजमगढ़, बदायूं, मुरादाबाद, वाराणसी, हरदोई, बिजनौर, एटा और लखीमपुर-खीरी में भी अच्छी बारिश दर्ज हुई। वहीं 1 जून से 2 जुलाई तक के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में अब तक सामान्य से लगभग 45 प्रतिशत कम बारिश हुई है, जिससे आने वाले दिनों की वर्षा कृषि और जल संसाधनों के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

  • ई-रिक्शा चालकों की सुरक्षा से खिलवाड़ करने वाले ऐप पर शिकंजा, ब्लूटूथ के जरिए बैटरी कंट्रोल के दुरुपयोग के बाद सरकार ने उठाया बड़ा कदम

    ई-रिक्शा चालकों की सुरक्षा से खिलवाड़ करने वाले ऐप पर शिकंजा, ब्लूटूथ के जरिए बैटरी कंट्रोल के दुरुपयोग के बाद सरकार ने उठाया बड़ा कदम


    नई दिल्ली। ई-रिक्शा चालकों की सुरक्षा और डिजिटल तकनीक के दुरुपयोग को लेकर सामने आए मामलों के बाद सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। ऐसे मोबाइल ऐप, जिनके जरिए ब्लूटूथ समर्थित ई-रिक्शा बैटरियों को दूर से नियंत्रित किए जाने की आशंका जताई गई थी, उन्हें प्रमुख ऐप स्टोर से हटाने के निर्देश दिए गए हैं। इस कार्रवाई का उद्देश्य ई-रिक्शा चालकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और तकनीकी खामियों के संभावित दुरुपयोग पर रोक लगाना है।

    हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर कई वीडियो तेजी से वायरल हुए थे, जिनमें दावा किया गया कि कुछ लोग मोबाइल ऐप के माध्यम से चलते हुए ई-रिक्शा की बैटरी से कनेक्ट होकर वाहन को अचानक बंद कर दे रहे हैं। इन वीडियो ने ई-रिक्शा चालकों, बैटरी डीलरों और इलेक्ट्रिक वाहन उपयोगकर्ताओं के बीच सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा कर दी थी। कई मामलों में चालक बीच सड़क पर वाहन बंद हो जाने के कारण असहाय नजर आए और उन्हें ई-रिक्शा को धक्का देकर सुरक्षित स्थान तक ले जाना पड़ा।

    घटनाओं के सामने आने के बाद संबंधित विभागों ने पूरे मामले को गंभीरता से लिया। प्रारंभिक स्तर पर तकनीकी जांच शुरू की गई ताकि यह पता लगाया जा सके कि संबंधित मोबाइल ऐप वास्तव में किस प्रकार कार्य करते हैं और उनके फीचर्स का दुरुपयोग किस सीमा तक संभव है। जांच के दौरान यह जानकारी सामने आई कि ये ऐप ब्लूटूथ तकनीक के माध्यम से सीमित दूरी के भीतर मौजूद संगत लिथियम बैटरियों से वायरलेस तरीके से जुड़ सकते हैं।

    विशेषज्ञों के अनुसार ऐसे ऐप मूल रूप से बैटरी की स्थिति पर निगरानी रखने के लिए विकसित किए जाते हैं। इनके माध्यम से बैटरी का वोल्टेज, तापमान, करंट और अन्य तकनीकी जानकारी देखी जा सकती है, जिससे बैटरी की कार्यक्षमता और रखरखाव में सुविधा मिलती है। हालांकि यदि सुरक्षा मानकों को पर्याप्त रूप से लागू नहीं किया जाए तो इसी नियंत्रण प्रणाली का गलत इस्तेमाल कर बैटरी के संचालन को प्रभावित किया जा सकता है, जिससे वाहन अचानक रुक सकता है।

    सरकार ने इसी संभावित खतरे को देखते हुए संबंधित ऐप को सार्वजनिक प्लेटफॉर्म से हटाने की प्रक्रिया शुरू कराई है। अधिकारियों का मानना है कि इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती संख्या के साथ साइबर सुरक्षा और डिजिटल नियंत्रण प्रणाली की मजबूती भी उतनी ही आवश्यक है। यदि बैटरी प्रबंधन प्रणाली में पर्याप्त सुरक्षा नहीं होगी तो भविष्य में इस प्रकार के मामलों की पुनरावृत्ति हो सकती है।

    तकनीकी विशेषज्ञों का कहना है कि इलेक्ट्रिक वाहनों में प्रयुक्त बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम को मजबूत एन्क्रिप्शन, सुरक्षित प्रमाणीकरण और नियमित सॉफ्टवेयर अपडेट जैसी सुविधाओं से लैस किया जाना चाहिए। इससे अनधिकृत व्यक्तियों द्वारा बैटरी तक पहुंच बनाने और नियंत्रण हासिल करने की संभावना काफी हद तक कम हो सकती है। निर्माता कंपनियों को भी अपने सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर सुरक्षा मानकों की समय-समय पर समीक्षा करनी होगी।

    ई-रिक्शा देश के अनेक शहरों में सार्वजनिक परिवहन का महत्वपूर्ण माध्यम बन चुके हैं और लाखों लोगों की आजीविका इससे जुड़ी हुई है। ऐसे में उनकी सुरक्षा से जुड़ी किसी भी तकनीकी कमजोरी को समय रहते दूर करना आवश्यक माना जा रहा है। सरकार की ताजा कार्रवाई को इलेक्ट्रिक वाहन क्षेत्र में डिजिटल सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिससे भविष्य में चालकों और यात्रियों दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद मिल सकती है।

  • सीधे सेटों में जीते जेवरेव, बेरेटिनी और आर्थर फेरी ने भी अगले दौर का टिकट कटाया

    सीधे सेटों में जीते जेवरेव, बेरेटिनी और आर्थर फेरी ने भी अगले दौर का टिकट कटाया


    नई दिल्ली। विंबलडन 2026 में दूसरी वरीयता प्राप्त अलेक्जेंडर जेवरेव ने अपने शानदार खेल का प्रदर्शन करते हुए पुरुष एकल के तीसरे दौर में जगह बना ली है। जर्मनी के स्टार खिलाड़ी ने फ्रांस के वैलेंटिन रॉयर को सीधे सेटों में 6-1, 6-3, 7-6(3) से हराकर जीत दर्ज की। वहीं इटली के माटेओ बेरेटिनी और मेजबान ब्रिटेन के युवा खिलाड़ी आर्थर फेरी ने भी अपने-अपने मुकाबले जीतकर अगले दौर का टिकट हासिल कर लिया।

    फ्रेंच ओपन चैंपियन जेवरेव ने मुकाबले की शुरुआत से ही आक्रामक अंदाज अपनाया और पहले दो सेट बेहद आसानी से अपने नाम कर लिए। तीसरे सेट में रॉयर ने कड़ी चुनौती पेश की और मुकाबले को टाई-ब्रेक तक पहुंचा दिया, लेकिन निर्णायक क्षणों में जेवरेव का अनुभव भारी पड़ा। दो घंटे चार मिनट तक चले मुकाबले में उन्होंने संयम बनाए रखते हुए जीत अपने नाम कर ली।

    जीत के बाद जेवरेव ने कहा कि लगभग ढाई सेट तक उन्होंने अपना सर्वश्रेष्ठ टेनिस खेला। इसके बाद उनका ध्यान थोड़ा भटका, जिसका प्रतिद्वंद्वी ने फायदा उठाने की कोशिश की। उन्होंने माना कि ग्रैंड स्लैम के आगे के दौर में ऊर्जा बचाकर रखना बेहद जरूरी होता है और सीधे सेटों में मिली जीत उनके आत्मविश्वास को भी बढ़ाएगी। जेवरेव ने यह भी कहा कि विंबलडन हमेशा से उनका पसंदीदा टूर्नामेंट रहा है और इस बार वह यहां बड़ी सफलता हासिल करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

    इटली के माटेओ बेरेटिनी ने भी प्रभावशाली प्रदर्शन करते हुए फ्रांस के आर्थर फिल्स को 6-4, 7-5, 3-6, 6-3 से मात दी। 2021 के विंबलडन उपविजेता बेरेटिनी ने सेंटर कोर्ट पर दमदार सर्विस और शानदार शॉट्स से मुकाबले पर नियंत्रण बनाए रखा। तीसरा सेट गंवाने के बाद उन्होंने बेहतरीन वापसी करते हुए चौथा सेट जीत लिया और 2023 के बाद पहली बार विंबलडन के तीसरे दौर में प्रवेश किया।

    दिन का सबसे चर्चित प्रदर्शन ब्रिटेन के 23 वर्षीय आर्थर फेरी का रहा। उन्होंने फिनलैंड के ओटो विर्टानेन को 5-7, 7-6(3), 6-3, 6-3 से हराकर अपने करियर की सबसे बड़ी जीत दर्ज की। पहला सेट हारने के बाद फेरी ने शानदार वापसी करते हुए लगातार तीन सेट अपने नाम किए। इस उपलब्धि के साथ वह वर्ष 2000 के बाद विंबलडन पुरुष एकल के तीसरे दौर में पहुंचने वाले केवल चौथे ब्रिटिश वाइल्ड कार्ड खिलाड़ी बन गए हैं।

    फेरी का मुकाबला देखने के लिए प्रिंसेस ऑफ वेल्स भी कुछ समय तक स्टेडियम में मौजूद रहीं। हालांकि घरेलू दर्शकों और खास मेहमानों की मौजूदगी के बावजूद युवा खिलाड़ी पर किसी तरह का दबाव नहीं दिखा। उन्होंने पूरे आत्मविश्वास के साथ अपना खेल जारी रखा। हाल के सप्ताहों में भी उनकी फॉर्म शानदार रही है। वह बर्मिंघम और नॉटिंघम के ग्रास कोर्ट टूर्नामेंट के फाइनल तक पहुंचे थे और पहले दौर में चौथी वरीयता प्राप्त बेन शेल्टन को हराकर बड़ा उलटफेर भी कर चुके हैं।

    जीत के बाद फेरी ने कहा कि जिस इलाके में वह बड़े हुए वहां से कुछ ही मिनट की दूरी पर स्थित विंबलडन में खेलना उनके लिए किसी सपने के सच होने जैसा है। उन्होंने बताया कि स्टेडियम में परिवार, दोस्त और कई परिचितों की मौजूदगी ने उन्हें अतिरिक्त आत्मविश्वास दिया। अब तीसरे दौर में उनकी कोशिश इस शानदार लय को बरकरार रखते हुए अपने यादगार अभियान को आगे बढ़ाने की होगी।

  • आम महोत्सव में दिखेगी स्वाद, तकनीक और निर्यात की नई तस्वीर, किसानों से लेकर बच्चों तक के लिए होंगे विशेष आकर्षण, यूपी की आम अर्थव्यवस्था बनेगी चर्चा का केंद्र

    आम महोत्सव में दिखेगी स्वाद, तकनीक और निर्यात की नई तस्वीर, किसानों से लेकर बच्चों तक के लिए होंगे विशेष आकर्षण, यूपी की आम अर्थव्यवस्था बनेगी चर्चा का केंद्र

    नई दिल्ली। आम केवल स्वाद का प्रतीक नहीं, बल्कि भारत की कृषि, बागवानी और निर्यात अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा भी बन चुका है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए आयोजित होने वाले आम महोत्सव में किसानों, बागवानों, कृषि विशेषज्ञों, व्यापारियों और आम प्रेमियों को एक ही मंच पर जोड़ने की तैयारी की गई है। इस आयोजन में आम की आधुनिक खेती, गुणवत्तापूर्ण उत्पादन, अंतरराष्ट्रीय निर्यात, बाजार प्रबंधन और नई तकनीकों पर विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी। साथ ही बच्चों के लिए आम खाने की प्रतियोगिता जैसे मनोरंजक कार्यक्रम भी आकर्षण का केंद्र रहेंगे।

    महोत्सव के दौरान कृषि विशेषज्ञ आम की बागवानी से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर मार्गदर्शन देंगे। इसमें पौधों के वैज्ञानिक प्रबंधन, उन्नत किस्मों का चयन, समय पर कटाई, कीट एवं रोग नियंत्रण, फलों की गुणवत्ता बनाए रखने और बाजार में बेहतर मूल्य प्राप्त करने की रणनीतियों पर विस्तार से चर्चा होगी। विशेषज्ञ किसानों को आधुनिक तकनीकों के माध्यम से उत्पादन बढ़ाने और लागत कम करने के व्यावहारिक उपाय भी बताएंगे।

    उत्तर प्रदेश देश में आम उत्पादन का सबसे बड़ा केंद्र माना जाता है। यहां की जलवायु और मिट्टी कई प्रसिद्ध किस्मों के लिए उपयुक्त है। राज्य के दशहरी, लंगड़ा, चौसा, रटौल, बॉम्बे ग्रीन और गौरजीत जैसे आम देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी अपनी अलग पहचान बना चुके हैं। विशेष रूप से मलिहाबाद का दशहरी अपनी मिठास, सुगंध और रेशारहित गूदे के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लोकप्रिय है, जबकि वाराणसी का लंगड़ा और सहारनपुर का चौसा भी निर्यात बाजार में लगातार मांग बनाए हुए हैं।

    राज्य में आम के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए आधुनिक पैक हाउस, प्रसंस्करण इकाइयों और गुणवत्ता परीक्षण सुविधाओं का तेजी से विस्तार किया जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप फलों की पैकिंग और ट्रीटमेंट के कारण उत्तर प्रदेश से कई देशों में बड़ी मात्रा में आम और आम उत्पादों का निर्यात हो रहा है। भविष्य में जेवर क्षेत्र में प्रस्तावित फ्रूट टेस्टिंग एवं ट्रीटमेंट सेंटर से निर्यात प्रक्रिया को और अधिक गति मिलने की उम्मीद है। किसानों को फ्रूट बैग वितरण और पुराने बागों के पुनर्जीवन के लिए दी जा रही सब्सिडी जैसी योजनाएं भी उत्पादन क्षमता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

    आम महोत्सव में विभिन्न किस्मों की विशेषताओं को भी प्रमुखता से प्रस्तुत किया जाएगा। दशहरी अपनी सुगंध और मिठास के लिए प्रसिद्ध है, जबकि लंगड़ा का खट्टा-मीठा स्वाद इसे अलग पहचान देता है। चौसा अपनी रसीली बनावट के कारण पसंद किया जाता है और रटौल अपनी विशिष्ट खुशबू के लिए जाना जाता है। बॉम्बे ग्रीन और गौरजीत जैसी किस्में भी अपने स्वाद और समय से पहले पकने की विशेषता के कारण किसानों और उपभोक्ताओं के बीच लोकप्रिय हैं।

    महोत्सव का एक प्रमुख आकर्षण जापान की प्रसिद्ध मियाजाकी किस्म भी होगी, जिसे दुनिया के सबसे महंगे आमों में गिना जाता है। पकने पर इसका रंग गहरा लाल और बैंगनी हो जाता है तथा इसका गूदा पूरी तरह रेशारहित होता है। इसमें प्राकृतिक शर्करा की मात्रा सामान्य किस्मों की तुलना में अधिक होती है, जिससे इसका स्वाद अत्यंत मीठा माना जाता है। उत्तर प्रदेश के कुछ किसानों ने भी इसकी सफल खेती शुरू कर नई संभावनाओं का मार्ग प्रशस्त किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक तकनीक, गुणवत्तापूर्ण उत्पादन और निर्यात उन्मुख खेती के माध्यम से भारत का आम उद्योग आने वाले वर्षों में वैश्विक बाजार में और अधिक मजबूत स्थिति हासिल कर सकता है।

  • फीफा वर्ल्ड कप 2026: अतिरिक्त समय में रामोस का वार, पुर्तगाल ने क्रोएशिया को किया बाहर

    फीफा वर्ल्ड कप 2026: अतिरिक्त समय में रामोस का वार, पुर्तगाल ने क्रोएशिया को किया बाहर


    नई दिल्ली । फीफा वर्ल्ड कप 2026 में स्विट्जरलैंड ने शानदार प्रदर्शन करते हुए अल्जीरिया को 2-0 से हराकर राउंड ऑफ-16 में अपनी जगह पक्की कर ली। वैंकूवर के बीसी प्लेस स्टेडियम में खेले गए राउंड ऑफ-32 मुकाबले में स्विस टीम ने शुरुआत से ही आक्रामक खेल दिखाया और पूरे मैच में अल्जीरिया को दबाव में रखा।

    स्विट्जरलैंड ने मैच के 10वें मिनट में बढ़त हासिल कर ली। जोहान मंजांबी की तेज दौड़ और सटीक पास पर ब्रील एम्बोलो ने शानदार फिनिश करते हुए गेंद को गोलपोस्ट में पहुंचा दिया। इस गोल के बाद स्विस टीम ने लगातार गेंद पर नियंत्रण बनाए रखा जबकि अल्जीरिया बराबरी के लिए संघर्ष करता रहा। पहले हाफ में अल्जीरियाई खिलाड़ियों ने कुछ अच्छे मूव बनाए लेकिन स्विट्जरलैंड की मजबूत रक्षापंक्ति के सामने उन्हें सफलता नहीं मिली।

    दूसरे हाफ की शुरुआत भी स्विट्जरलैंड के नाम रही। खेल शुरू होने के महज एक मिनट बाद डेनिस जकारिया के क्रॉस को अल्जीरिया की टीम सही तरीके से क्लियर नहीं कर सकी। गेंद डैन नडोये के पास पहुंची और उन्होंने पेनल्टी बॉक्स के बाहर से जोरदार शॉट लगाकर स्कोर 2-0 कर दिया। यह नडोये का वर्ल्ड कप में पहला गोल रहा जिसे उन्होंने खास अंदाज में सेलिब्रेट किया।

    दो गोल से पिछड़ने के बाद अल्जीरिया ने वापसी की कोशिश की लेकिन स्विट्जरलैंड ने विपक्षी टीम को कोई बड़ा मौका नहीं दिया। मिडफील्ड और डिफेंस के बेहतरीन तालमेल की बदौलत स्विस टीम ने मुकाबले पर अपनी पकड़ मजबूत बनाए रखी और अंतिम सीटी तक बढ़त सुरक्षित रखी।

    इस जीत के साथ स्विट्जरलैंड ने टूर्नामेंट में लगातार तीसरी जीत दर्ज की। इससे पहले टीम ग्रुप चरण में बोस्निया और हर्जेगोविना तथा कनाडा को भी मात दे चुकी है। खास बात यह रही कि वर्ल्ड कप इतिहास में पहली बार स्विट्जरलैंड ने लगातार तीन मुकाबले जीतने का कारनामा किया है।

    शानदार फॉर्म में चल रही स्विस टीम अब 7 जुलाई को होने वाले राउंड ऑफ-16 मुकाबले में कोलंबिया और घाना के बीच होने वाले मैच के विजेता से भिड़ेगी। यह मुकाबला भी वैंकूवर में खेला जाएगा जहां स्विट्जरलैंड लगातार तीसरी बार मैदान पर उतरेगा। टीम की कोशिश अपनी जीत की लय बरकरार रखते हुए क्वार्टर फाइनल में जगह बनाने की होगी।

  • फीफा वर्ल्ड कप 2026: एम्बोलो-नडोये के गोल से स्विट्जरलैंड ने अल्जीरिया को किया बाहर

    फीफा वर्ल्ड कप 2026: एम्बोलो-नडोये के गोल से स्विट्जरलैंड ने अल्जीरिया को किया बाहर


    नई दिल्ली। फीफा वर्ल्ड कप 2026 में स्विट्जरलैंड ने शानदार प्रदर्शन करते हुए अल्जीरिया को 2-0 से हराकर राउंड ऑफ-16 में अपनी जगह पक्की कर ली। वैंकूवर के बीसी प्लेस स्टेडियम में खेले गए राउंड ऑफ-32 मुकाबले में स्विस टीम ने शुरुआत से ही आक्रामक खेल दिखाया और पूरे मैच में अल्जीरिया को दबाव में रखा।

    स्विट्जरलैंड ने मैच के 10वें मिनट में बढ़त हासिल कर ली। जोहान मंजांबी की तेज दौड़ और सटीक पास पर ब्रील एम्बोलो ने शानदार फिनिश करते हुए गेंद को गोलपोस्ट में पहुंचा दिया। इस गोल के बाद स्विस टीम ने लगातार गेंद पर नियंत्रण बनाए रखा जबकि अल्जीरिया बराबरी के लिए संघर्ष करता रहा। पहले हाफ में अल्जीरियाई खिलाड़ियों ने कुछ अच्छे मूव बनाए लेकिन स्विट्जरलैंड की मजबूत रक्षापंक्ति के सामने उन्हें सफलता नहीं मिली।

    दूसरे हाफ की शुरुआत भी स्विट्जरलैंड के नाम रही। खेल शुरू होने के महज एक मिनट बाद डेनिस जकारिया के क्रॉस को अल्जीरिया की टीम सही तरीके से क्लियर नहीं कर सकी। गेंद डैन नडोये के पास पहुंची और उन्होंने पेनल्टी बॉक्स के बाहर से जोरदार शॉट लगाकर स्कोर 2-0 कर दिया। यह नडोये का वर्ल्ड कप में पहला गोल रहा जिसे उन्होंने खास अंदाज में सेलिब्रेट किया।

    दो गोल से पिछड़ने के बाद अल्जीरिया ने वापसी की कोशिश की लेकिन स्विट्जरलैंड ने विपक्षी टीम को कोई बड़ा मौका नहीं दिया। मिडफील्ड और डिफेंस के बेहतरीन तालमेल की बदौलत स्विस टीम ने मुकाबले पर अपनी पकड़ मजबूत बनाए रखी और अंतिम सीटी तक बढ़त सुरक्षित रखी।

    इस जीत के साथ स्विट्जरलैंड ने टूर्नामेंट में लगातार तीसरी जीत दर्ज की। इससे पहले टीम ग्रुप चरण में बोस्निया और हर्जेगोविना तथा कनाडा को भी मात दे चुकी है। खास बात यह रही कि वर्ल्ड कप इतिहास में पहली बार स्विट्जरलैंड ने लगातार तीन मुकाबले जीतने का कारनामा किया है।

    शानदार फॉर्म में चल रही स्विस टीम अब 7 जुलाई को होने वाले राउंड ऑफ-16 मुकाबले में कोलंबिया और घाना के बीच होने वाले मैच के विजेता से भिड़ेगी। यह मुकाबला भी वैंकूवर में खेला जाएगा जहां स्विट्जरलैंड लगातार तीसरी बार मैदान पर उतरेगा। टीम की कोशिश अपनी जीत की लय बरकरार रखते हुए क्वार्टर फाइनल में जगह बनाने की होगी।