Author: bharati

  • शनिवार को भूलकर भी घर में न करें ये काम वास्तु के इन नियमों का ध्यान रखेंगे तो बनी रहेगी सुख शांति

    शनिवार को भूलकर भी घर में न करें ये काम वास्तु के इन नियमों का ध्यान रखेंगे तो बनी रहेगी सुख शांति


    नई दिल्ली। शनिवार का दिन धार्मिक दृष्टि से बेहद खास माना जाता है। इस दिन शनि देव की पूजा करने के साथ घर के वास्तु से जुड़ी कुछ बातों का ध्यान रखने की भी मान्यता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार घर में मौजूद ऊर्जा का सीधा संबंध परिवार के वातावरण से माना जाता है। ऐसे में शनिवार को कुछ छोटे और आसान उपाय अपनाकर घर में सकारात्मक माहौल बनाए रखने की कोशिश की जा सकती है। इन उपायों का उद्देश्य धार्मिक आस्था के साथ घर की साफ सफाई और व्यवस्थित वातावरण को बढ़ावा देना भी है।

    शनिवार के दिन सबसे पहले घर की साफ सफाई पर विशेष ध्यान देना चाहिए। घर में लंबे समय से बेकार पड़ी वस्तुओं को इकट्ठा करके रखने से अव्यवस्था बढ़ती है। वास्तु मान्यताओं में भी टूटे फूटे और अनुपयोगी सामान को घर में जमा करके रखना उचित नहीं माना जाता। इसलिए शनिवार को घर के कोनों और विशेष रूप से मुख्य द्वार के आसपास अच्छी तरह सफाई करना शुभ माना जाता है।

    मुख्य द्वार को घर की ऊर्जा का महत्वपूर्ण स्थान माना जाता है। शनिवार को मुख्य दरवाजे की सफाई करके वहां पर्याप्त रोशनी रखने की कोशिश करनी चाहिए। दरवाजे के आसपास कूड़ा या बेकार सामान नहीं रखना चाहिए। मान्यता है कि साफ और व्यवस्थित प्रवेश द्वार घर के वातावरण को सकारात्मक बनाए रखने में मदद करता है।

    शनिवार के दिन सरसों के तेल का दीपक जलाने की धार्मिक परंपरा भी प्रचलित है। कई लोग शनि देव की पूजा के दौरान तेल का दीपक जलाते हैं। कुछ परंपराओं में घर के बाहर या पूजा स्थान पर दीपक जलाने की मान्यता है। दीपक जलाते समय मन को शांत रखते हुए शनि देव का स्मरण किया जा सकता है। यह उपाय धार्मिक आस्था से जुड़ा है इसलिए इसे श्रद्धा के साथ करना महत्वपूर्ण माना जाता है।

    घर में काले तिल और सरसों के तेल जैसी वस्तुओं को लेकर भी शनिवार के दिन कई धार्मिक मान्यताएं हैं। जरूरतमंद व्यक्ति को इन वस्तुओं का दान करना शुभ माना जाता है। इसके अलावा शनिवार को किसी गरीब या जरूरतमंद व्यक्ति की सहायता करना भी सेवा का अच्छा माध्यम हो सकता है। धार्मिक मान्यताओं में दान और सेवा को विशेष महत्व दिया गया है।

    वास्तु से जुड़े उपायों के साथ शनिवार को घर के वातावरण में अनुशासन और सकारात्मकता बनाए रखना भी जरूरी माना जाता है। घर में बेवजह विवाद करने से बचना चाहिए और परिवार के सदस्यों के साथ शांतिपूर्ण व्यवहार करना चाहिए। घर में खराब बिजली के उपकरण या टूटे सामान लंबे समय तक पड़े हों तो उन्हें ठीक करवाना या हटाना बेहतर होता है।

    शनिवार को कुछ लोग पीपल के पेड़ की पूजा भी करते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाया जाता है। हालांकि ऐसा करते समय स्थानीय नियमों और सुरक्षा का ध्यान रखना चाहिए। किसी भी धार्मिक उपाय को अंधविश्वास के बजाय अपनी आस्था और परंपरा के अनुसार करना उचित है।

    कुल मिलाकर शनिवार को वास्तु के नाम पर बड़े बदलाव करने की जरूरत नहीं है। घर की साफ सफाई मुख्य द्वार को व्यवस्थित रखना बेकार सामान हटाना जरूरतमंदों की मदद करना और सकारात्मक वातावरण बनाए रखना जैसे छोटे कदम रोजमर्रा की जिंदगी में भी उपयोगी हो सकते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार किए जाने वाले इन उपायों को श्रद्धा के साथ अपनाया जा सकता है और साथ ही घर को स्वच्छ व्यवस्थित और शांत रखने पर ध्यान दिया जा सकता है।

  • शनि दोष और परेशानियों से राहत के लिए करें शनिवार का व्रत जानिए शनि देव की पूजा में किन बातों का रखें ध्यान

    शनि दोष और परेशानियों से राहत के लिए करें शनिवार का व्रत जानिए शनि देव की पूजा में किन बातों का रखें ध्यान


    नई दिल्ली। हिंदू धर्म में शनिवार का दिन न्याय के देवता शनि देव को समर्पित माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शनि देव व्यक्ति को उसके कर्मों के आधार पर फल प्रदान करते हैं। यही वजह है कि जीवन में लगातार परेशानियां आने आर्थिक स्थिति कमजोर होने कामकाज में रुकावट बनने या शनि से संबंधित दोष की स्थिति में कई लोग शनिवार का व्रत रखते हैं। मान्यता है कि श्रद्धा और नियम के साथ शनि देव की पूजा करने से उनका आशीर्वाद प्राप्त किया जा सकता है और जीवन में सकारात्मक बदलाव आने की राह बनती है।

    शनिवार का व्रत रखने के लिए सुबह सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करना शुभ माना जाता है। इसके बाद साफ कपड़े पहनकर घर के पूजा स्थान की सफाई करनी चाहिए। पूजा स्थल पर शनि देव की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करके उनके सामने दीपक जलाया जा सकता है। शनि देव की पूजा में सरसों के तेल का दीपक विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार शनिवार को शनि देव को काला तिल काला वस्त्र सरसों का तेल और उड़द दाल जैसी वस्तुएं अर्पित की जाती हैं।

    पूजा के दौरान सबसे पहले भगवान गणेश का स्मरण करना शुभ माना जाता है। इसके बाद शनि देव का ध्यान करते हुए उनकी पूजा करनी चाहिए। भक्त शनि देव के मंत्र का जाप कर सकते हैं। शनि देव का बीज मंत्र ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः माना जाता है। अपनी श्रद्धा के अनुसार इस मंत्र का जाप किया जा सकता है। इसके अलावा शनि चालीसा का पाठ और शनि देव की आरती भी की जाती है।

    शनिवार के व्रत में भोजन को लेकर अलग अलग धार्मिक परंपराएं देखने को मिलती हैं। कुछ लोग पूरे दिन निराहार रहते हैं जबकि कुछ लोग फलाहार करते हैं। व्रत रखने वाले व्यक्ति को अपनी क्षमता और स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए ही उपवास करना चाहिए। दिनभर भगवान का स्मरण और सकारात्मक विचार बनाए रखना भी व्रत की भावना का हिस्सा माना जाता है।

    शनिवार के दिन जरूरतमंद व्यक्ति को दान देना भी शुभ माना जाता है। काला तिल काली उड़द सरसों का तेल कंबल या काले वस्त्र का दान धार्मिक मान्यताओं में महत्वपूर्ण बताया गया है। इसके अलावा गरीब और जरूरतमंद लोगों को भोजन कराना भी पुण्यदायी माना जाता है। कई परंपराओं में शनिवार को पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाने की भी मान्यता है।

    व्रत के दौरान कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए। किसी व्यक्ति के प्रति गलत भावना रखना झूठ बोलना क्रोध करना या किसी को नुकसान पहुंचाना धार्मिक दृष्टि से उचित नहीं माना जाता। शनि देव को न्याय का देवता माना जाता है इसलिए शनिवार के व्रत में अच्छे कर्म और संयम को विशेष महत्व दिया जाता है।

    व्रत का पारण पूजा और अपनी परंपरा के अनुसार किया जाता है। सूर्यास्त के बाद या पूजा पूर्ण होने पर सात्विक भोजन ग्रहण किया जा सकता है। हालांकि व्रत और पूजा की विधि अलग अलग क्षेत्रों और परिवारों में अलग हो सकती है। इसलिए अपनी पारिवारिक परंपरा और धार्मिक गुरु की सलाह को प्राथमिकता देना उचित है। शनि व्रत का मुख्य उद्देश्य केवल किसी समस्या से मुक्ति पाना नहीं बल्कि संयम सेवा और अच्छे कर्मों के प्रति अपनी आस्था को मजबूत करना भी माना जाता है।

  • दृश्यम 3 की कमाई ने बदला रिलीज का प्लान उड़ता तीर अब 9 नहीं 23 अक्टूबर को होगी रिलीज

    दृश्यम 3 की कमाई ने बदला रिलीज का प्लान उड़ता तीर अब 9 नहीं 23 अक्टूबर को होगी रिलीज


    नई दिल्ली। अजय देवगन की फिल्म दृश्यम 3 ने रिलीज होते ही बॉक्स ऑफिस पर ऐसा असर दिखाया है कि दूसरी फिल्मों की रिलीज रणनीति तक बदलती नजर आ रही है। 2 अक्टूबर को सिनेमाघरों में पहुंची दृश्यम 3 ने अपने पहले ही दिन जबरदस्त कमाई करते हुए दर्शकों के बीच अपनी मजबूत पकड़ का संकेत दे दिया है। फिल्म के इसी शानदार प्रदर्शन के बीच आयुष्मान खुराना और सारा अली खान की आने वाली फिल्म उड़ता तीर की रिलीज डेट आगे बढ़ा दी गई है। पहले यह फिल्म 9 अक्टूबर को रिलीज होने वाली थी लेकिन अब इसे 23 अक्टूबर तक टाल दिया गया है।

    दृश्यम 3 की ओपनिंग ने बॉक्स ऑफिस पर नया माहौल तैयार कर दिया है। सैकनिल्क के आंकड़ों के मुताबिक फिल्म ने भारत में पहले दिन 66.75 करोड़ रुपये का नेट कलेक्शन किया जबकि इंडिया ग्रॉस कमाई 80.10 करोड़ रुपये रही। विदेशों में करीब 15 करोड़ रुपये की कमाई के साथ फिल्म का वर्ल्डवाइड ग्रॉस कलेक्शन 95.10 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। इस शानदार शुरुआत के बाद फिल्म की चर्चा लगातार तेज है और सिनेमाघरों में दर्शकों की दिलचस्पी भी देखने को मिल रही है।

    इसी माहौल के बीच उड़ता तीर के मेकर्स ने फिल्म को कुछ समय आगे खिसकाने का फैसला किया है। टीम की ओर से बताया गया है कि फिल्म के ट्रेलर और प्रमोशन को अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है। ऐसे में मेकर्स चाहते हैं कि फिल्म को थिएटर्स में पर्याप्त स्क्रीन और दर्शकों तक पहुंचने का बेहतर मौका मिले। कई फिल्मों के आसपास रिलीज होने के कारण 9 अक्टूबर का समय काफी व्यस्त माना जा रहा था। ऐसे में उड़ता तीर को 23 अक्टूबर को रिलीज करने का फैसला लिया गया है।

    हालांकि फिल्म की रिलीज डेट आगे बढ़ने की चर्चा के बीच दृश्यम 3 की कमाई को भी एक महत्वपूर्ण वजह माना जा रहा है। दृश्यम 3 की जबरदस्त शुरुआत के कारण सिनेमाघरों में इसके शो और दर्शकों की मांग पर नजर बनी हुई है। ऐसे माहौल में नई फिल्म के लिए पर्याप्त स्क्रीन हासिल करना चुनौती बन सकता है। यही वजह है कि उड़ता तीर की टीम ने रिलीज को आगे बढ़ाकर एक अलग रिलीज विंडो चुनने का फैसला किया है।

    उड़ता तीर में आयुष्मान खुराना एक अलग तरह के किरदार में नजर आएंगे। फिल्म में वह एक पाकिस्तानी जासूस की भूमिका निभा रहे हैं जिसकी याददाश्त चली जाती है। कहानी में कॉमेडी के साथ स्पाई एंगल भी देखने को मिलेगा। सारा अली खान भी फिल्म का अहम हिस्सा हैं। फिल्म का निर्देशन आकाश ए कौशिक ने किया है और यह उनके निर्देशन में पहली फिल्म बताई जा रही है।

    उड़ता तीर की रिलीज इससे पहले भी बदली जा चुकी है। अब 23 अक्टूबर की नई तारीख के साथ मेकर्स को उम्मीद है कि फिल्म को सिनेमाघरों में बेहतर जगह मिल सकेगी और दर्शकों तक ज्यादा प्रभावी तरीके से पहुंचा जा सकेगा। वहीं दृश्यम 3 की शानदार शुरुआत के बाद अब यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले दिनों में इसका बॉक्स ऑफिस प्रदर्शन कितना आगे जाता है और 23 अक्टूबर को रिलीज होने वाली उड़ता तीर दर्शकों के बीच कैसी शुरुआत करती है।

  • जितिया व्रत से पहले मड़ुआ की रोटी खाने से 51 बीमार, अस्पताल में भर्ती मां के लिए भूख से बिलखता रहा छह माह का बच्चा

    जितिया व्रत से पहले मड़ुआ की रोटी खाने से 51 बीमार, अस्पताल में भर्ती मां के लिए भूख से बिलखता रहा छह माह का बच्चा

    नई दिल्ली: बलिया। बांसडीह क्षेत्र के आसचौरा और चौकन गांव में जीवित्पुत्रिका व्रत से एक दिन पहले मड़ुआ के आटे से बनी रोटी और लिट्टी खाने के बाद 51 लोगों की तबीयत बिगड़ गई। बीमार लोगों में महिलाएं, पुरुष और बच्चे शामिल हैं। रोटी-लिट्टी खाने के कुछ देर बाद ही पेट में दर्द, उल्टी, कंपकंपी और चक्कर की शिकायत शुरू हो गई। इसके बाद गांव में अफरातफरी मच गई। परिजनों और आसपास के लोगों ने बीमारों को बांसडीह सीएचसी, निजी अस्पतालों और जिला अस्पताल पहुंचाया। डॉक्टरों ने फूड प्वाइजनिंग के लक्षणों के आधार पर इलाज शुरू किया। देर शाम स्वास्थ्य विभाग की टीम ने मड़ुआ के बीज का आटा बेचने वाली दुकान को सीज कर दिया।

    जिउतिया व्रत से पहले मड़ुआ की रोटी खाने की दोनों गांवों में पुरानी परंपरा बताई गई है। संतान की मंगलकामना के लिए माताएं चौबीस घंटे का निर्जला व्रत रखती हैं, लेकिन इस बार व्रत से एक दिन पहले रोटी खाने के बाद बड़ी संख्या में महिलाएं बीमार पड़ गईं। एक साथ 50 से अधिक मरीजों के अस्पताल पहुंचने से वहां भी अफरातफरी की स्थिति बन गई। एक बेड पर दो मरीजों को लेटाकर उपचार किया गया। स्ट्रेचर कम पड़ने पर कुछ मरीजों को गोद में उठाकर ले जाया गया। देर शाम तक अस्पताल में मरीजों के पहुंचने का सिलसिला जारी रहा। प्रशासन के निर्देश पर दोनों गांवों में दो एम्बुलेंस के साथ स्वास्थ्य विभाग की टीम तैनात की गई।

    चौकन निवासी 35 वर्षीय सुनीता भी मड़ुआ की रोटी खाने के बाद जिला अस्पताल में भर्ती हैं। दूसरी ओर उनका छह माह का बेटा भूख से बिलखता रहा। जिस बेटे के स्वास्थ्य के लिए मां जिउतिया का निर्जला व्रत रखने वाली थीं, वह अपनी तबीयत खराब होने के कारण उसे दूध पिलाने की स्थिति में नहीं थीं। बच्चा अपने पिता राजकुमार की गोद से मां को देखकर रो रहा था। डॉक्टरों की टीम के पूछने पर पिता ने बताया कि बच्चा अब तक केवल मां का दूध ही पीता है। उधर, देर शाम जिलाधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह ने बताया कि दोनों गांवों के 49 लोग अस्पताल में भर्ती हैं। इनमें 43 जिला अस्पताल, तीन बांसडीह सीएचसी और तीन निजी अस्पताल में भर्ती हैं। इनमें 37 महिलाएं, 12 पुरुष और 10 बच्चे शामिल बताए गए। सभी की हालत खतरे से बाहर है।

    प्रारंभिक जांच में सामने आया कि सभी लोगों को मड़ुआ का आटा एक ही दुकान से मिला था। चौकन गांव के किसान रिंकू सिंह ने पिछले वर्ष बांसडीह कचहरी स्थित सरकारी बीज भंडार से खेत में बोने के लिए मिले मड़ुआ के बीज को घर में रखा था। जीवित्पुत्रिका व्रत के लिए मड़ुआ का आटा नहीं मिलने की बात सामने आने पर उन्होंने करीब दो किलो बीज को आसचौरा में छितेश्वर वर्मा की चक्की पर पिसवा दिया। गुरुवार रात आटा तैयार हुआ। उसमें से कुछ आटा चक्की संचालक ने भी रख लिया। चक्की से लौटते समय सोनू की मां ने रिंकू से व्रत के लिए आटा मांग लिया। बाद में वही आटा दुकान पर रखा गया और गांव की कुछ महिलाओं को बांटा गया।

    घटना की सूचना मिलने पर जिलाधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह, एसपी ओमवीर सिंह और सीएमओ डॉ. अभय नारायण राय समेत प्रशासनिक टीम जिला अस्पताल पहुंची और इलाज की व्यवस्था का जायजा लिया। इसके बाद अधिकारियों ने प्रभावित गांवों का निरीक्षण किया। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन के सहायक आयुक्त (द्वितीय) जेपी सिंह के नेतृत्व में टीम ने दुकानदार सोनू वर्मा और किसान रिंकू सिंह से पूछताछ की। प्रारंभिक जांच में आटा मड़ुआ के बीज से तैयार होने की बात सामने आई है। खाद्य विभाग ने आटा और उससे बनी रोटी के नमूने जांच के लिए लखनऊ भेजे हैं। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही आटे में मौजूद पदार्थ और बीमारी के कारण की स्थिति स्पष्ट होगी।

  • भारत चीन टकराव पर बनी सलमान की मातृभूमि में हुआ बड़ा बदलाव सरकार की मंजूरी के बाद रिलीज की उम्मीद बढ़ी

    भारत चीन टकराव पर बनी सलमान की मातृभूमि में हुआ बड़ा बदलाव सरकार की मंजूरी के बाद रिलीज की उम्मीद बढ़ी


    नई दिल्ली। सलमान खान की मचअवेटेड फिल्म मातृभूमि को लेकर लंबे समय से इंतजार कर रहे फैंस के लिए बड़ी खबर सामने आई है। 2020 में भारत और चीन के बीच हुए गलवान टकराव की पृष्ठभूमि पर तैयार की गई इस वॉर ड्रामा फिल्म की रिलीज का रास्ता अब काफी हद तक साफ हो गया है। फिल्म के नए संशोधित वर्जन को सरकार की ओर से हरी झंडी मिल गई है और इसके बाद मेकर्स ने रिलीज की तैयारियां तेज कर दी हैं। हालांकि सिनेमाघरों तक पहुंचने से पहले फिल्म को सेंसर बोर्ड की मंजूरी मिलना अभी बाकी है।

    रिपोर्ट के मुताबिक फिल्म को लेकर रक्षा मंत्रालय और सूचना प्रसारण मंत्रालय की ओर से कुछ आपत्तियां सामने आई थीं। खासतौर पर फिल्म में भारत और चीन से जुड़े संदर्भों तथा कंटेंट को लेकर बदलाव की जरूरत महसूस की गई थी। इसी वजह से फिल्म की रिलीज में देरी होती रही। अब मेकर्स की ओर से संशोधित वर्जन जमा किए जाने के बाद अधिकारियों की ओर से इसे मंजूरी मिल गई है। फिल्म को नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट यानी NOC जारी किए जाने के बाद इसकी रिलीज को लेकर तस्वीर पहले के मुकाबले काफी स्पष्ट हो गई है।

    सरकारी निर्देशों के बाद फिल्म के मूल ड्राफ्ट में कई बदलाव किए गए हैं। बताया जा रहा है कि नए वर्जन में भारत और चीन के संबंधों से जुड़े सकारात्मक पहलुओं को भी जगह दी गई है। ऐसे में फिल्म की कहानी और प्रस्तुति पहले तैयार किए गए वर्जन से अलग नजर आ सकती है। अब मेकर्स जल्द ही फिल्म को केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड यानी CBFC के पास भेजने की तैयारी में हैं।

    मातृभूमि की संभावित रिलीज डेट को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। रिपोर्ट के अनुसार सलमान खान और फिल्म की टीम 13 नवंबर की तारीख पर विचार कर रही है। यह तारीख दिवाली के बाद के त्योहारों वाले माहौल को देखते हुए चुनी जा सकती है। अगर सेंसर बोर्ड से समय पर मंजूरी मिल जाती है तो फिल्म 13 नवंबर को सिनेमाघरों में दस्तक दे सकती है। हालांकि अभी इस तारीख की आधिकारिक घोषणा होना बाकी है।

    फिल्म का निर्देशन अपूर्व लाखिया ने किया है। इसमें सलमान खान के साथ चित्रांगदा सिंह मुख्य भूमिका में नजर आएंगी। फिल्म की कहानी 2020 के गलवान टकराव से जुड़े घटनाक्रम की पृष्ठभूमि पर आधारित बताई जा रही है। यही वजह है कि फिल्म की घोषणा के बाद से ही इसे लेकर दर्शकों के बीच काफी उत्सुकता बनी हुई है।

    अब सरकार से NOC मिलने के बाद फिल्म की अगली बड़ी परीक्षा सेंसर बोर्ड की प्रक्रिया होगी। अगर यहां से भी मंजूरी मिल जाती है तो लंबे समय से अटकी यह फिल्म आखिरकार बड़े पर्दे पर पहुंच सकती है। ऐसे में सलमान खान के फैंस की नजरें अब मेकर्स की आधिकारिक घोषणा और रिलीज डेट पर टिकी हैं।

  • भूषण कुमार निकले बॉलीवुड के सबसे अमीर शख्स, 36,300 करोड़ की नेटवर्थ ने शाहरुख-सलमान को छोड़ा पीछे

    भूषण कुमार निकले बॉलीवुड के सबसे अमीर शख्स, 36,300 करोड़ की नेटवर्थ ने शाहरुख-सलमान को छोड़ा पीछे

    नई दिल्ली: बॉलीवुड के सबसे अमीर शख्स के तौर पर भूषण कुमार का नाम सामने आया है। टी-सीरीज के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर भूषण कुमार की अनुमानित नेटवर्थ 36,300 करोड़ रुपये बताई गई है। वह रिच लिस्ट में 87वें नंबर पर हैं और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री से टॉप 100 में जगह बनाने वाले इकलौते शख्स हैं। उनकी अनुमानित संपत्ति शाहरुख खान, अमिताभ बच्चन, सलमान खान और ऋतिक रोशन समेत लिस्ट में शामिल अन्य बॉलीवुड हस्तियों की कुल अनुमानित नेटवर्थ से भी ज्यादा बताई गई है। भूषण कुमार की संपत्ति ने बॉलीवुड के कई बड़े नामों को पीछे छोड़ दिया है।

    शाहरुख खान की अनुमानित नेटवर्थ में पिछले साल के मुकाबले 2,490 करोड़ रुपये की कमी आई है और इस साल उनकी संपत्ति करीब 10 हजार करोड़ रुपये आंकी गई है। अमिताभ बच्चन की नेटवर्थ में पिछले साल के मुकाबले काफी बढ़ोतरी हुई है। इस साल उनकी अनुमानित नेटवर्थ 4,000 करोड़ रुपये बताई गई है, जबकि पिछले साल यह 1,630 करोड़ रुपये थी। अमिताभ बच्चन ने पिछले कुछ वर्षों में रियल एस्टेट में काफी निवेश किया है। वहीं, सलमान खान की अनुमानित नेटवर्थ 3,000 करोड़ रुपये और ऋतिक रोशन की नेटवर्थ 2,500 करोड़ रुपये बताई गई है। ऋतिक रोशन की संपत्ति में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

    इस रिच लिस्ट में पिछले साल जूही चावला और करण जौहर के नाम भी शामिल थे, लेकिन इस साल दोनों का नाम लिस्ट में नहीं है। बॉलीवुड के लोगों के अलावा इस सूची में रामायण के प्रोड्यूसर नमित मल्होत्रा के पिता नरेश मल्होत्रा का नाम भी शामिल है। उनकी नेटवर्थ 16,000 करोड़ रुपये दर्ज की गई है। इस तरह मनोरंजन जगत से जुड़े कई बड़े नाम इस सूची में अलग-अलग संपत्ति के साथ शामिल हैं, लेकिन भूषण कुमार की अनुमानित नेटवर्थ सबसे अधिक बताई गई है।

    भूषण कुमार भारत की सबसे बड़ी संगीत और फिल्म निर्माण कंपनियों में से एक टी-सीरीज के अध्यक्ष और मैनेजिंग डायरेक्टर हैं। वह टी-सीरीज के संस्थापक गुलशन कुमार के बेटे हैं। पिता के निधन के बाद भूषण कुमार ने महज 19 साल की उम्र में कंपनी की कमान संभाली थी। गुलशन कुमार ने 11 जुलाई, 1983 को टी-सीरीज की स्थापना की थी। कंपनी को साल 1988 में बड़ा ब्रेक मिला, जब आमिर खान और जूही चावला की फिल्म कयामत से कयामत तक रिलीज हुई। फिल्म के गानों के 80 लाख कैसेट बिके थे। इसके बाद 1990 में रिलीज हुई फिल्म आशिकी के म्यूजिक एल्बम ने भी रिकॉर्ड बनाए।

    गुलशन कुमार का निधन 12 अगस्त, 1997 को हुआ था। उनकी गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। घटना के समय टी-सीरीज अपने चरम पर था। गुलशन कुमार रोज की तरह मंदिर में दर्शन करने के बाद बाहर निकले थे, तभी हमलावरों ने उन पर गोलियां चला दीं। उनकी हत्या के मामले में शूटर अब्दुल रऊफ मर्चेंट को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। जनवरी 2026 में जेल में ही उसकी मौत हो गई थी। इस घटना ने बॉलीवुड को बड़ा झटका दिया था।

  • जेल में तोड़ने की कोशिश पर संजय दत्त ने सुनाया किस्सा, बोले- पिता की आंखों में आंसू थे, फिर भी खुद को रखा मजबूत

    जेल में तोड़ने की कोशिश पर संजय दत्त ने सुनाया किस्सा, बोले- पिता की आंखों में आंसू थे, फिर भी खुद को रखा मजबूत

    नई दिल्ली: संजय दत्त ने जेल में बिताए अपने समय को याद करते हुए बताया कि वहां उन्हें तोड़ने की कोशिश की गई थी, लेकिन वह परिस्थितियों के सामने नहीं टूटे। एक बातचीत के दौरान उन्होंने अपने करियर में आए उतार-चढ़ाव के साथ जेल के अनुभव भी साझा किए। उन्होंने बताया कि अधिकारियों को लगता था कि उनके सेलिब्रिटी स्टेटस से जुड़ी सुविधाएं छीन लेने से वह परेशान होकर टूट जाएंगे। हालांकि, संजय दत्त के मुताबिक ऐसा नहीं हुआ और उन्होंने मुश्किल परिस्थितियों में खुद को संभाले रखा। उन्होंने यह भी बताया कि जेल में उनके साथ व्यवहार और सुविधाओं में हुए बदलावों का उन पर वैसा असर नहीं पड़ा, जैसा अधिकारियों ने सोचा था।

    बातचीत के दौरान संजय दत्त से यह भी पूछा गया कि क्या जेल की कठिन परिस्थितियों में कभी उन्होंने अपना जीवन समाप्त करने के बारे में सोचा था। उन्होंने इस सवाल का जवाब साफ तौर पर ‘नहीं, कभी नहीं’ में दिया। इससे पहले बातचीत में उनके जेल में रहने और मानसिक संतुलन बनाए रखने का जिक्र किया गया था। संजय दत्त ने अपने अनुभव बताते हुए कहा कि वहां मौजूद अधिकारियों को लगता था कि उनके लिए उपलब्ध सुविधाएं छीन लेने से वह टूट जाएंगे। उन्होंने बताया कि जब उन्हें सिगरेट नहीं मिलने की बात कही गई, तब उन्होंने मजाकिया अंदाज में पूछा कि क्या बीड़ी मिल सकती है। उनके मुताबिक इस तरह के बदलावों से उन्हें कोई खास फर्क नहीं पड़ा।

    संजय दत्त ने जेल जाने से पहले का एक भावुक पल भी याद किया। उन्होंने बताया कि जब पुलिस ने पहली बार उन्हें हथकड़ी पहनाई, तब उनके पिता सुनील दत्त को गहरा झटका लगा था। उनकी आंखों में आंसू थे और उन्होंने पूछा था कि उनके बेटे के साथ ऐसा क्यों किया जा रहा है। संजय दत्त के मुताबिक उन्होंने उस समय अपने पिता को गले लगाया और उन्हें समझाने की कोशिश की कि हथकड़ी लगना प्रक्रिया का हिस्सा है और उन्हें परेशान नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि वास्तविकता यह थी कि वह खुद भी अंदर से इस स्थिति से प्रभावित थे, लेकिन उस समय उनके लिए अपने पिता के सामने मजबूत बने रहना जरूरी था।

    संजय दत्त को साल 1993 में मुंबई सीरियल ब्लास्ट मामले में गिरफ्तार किया गया था। उन पर मामले से जुड़े अवैध हथियार रखने के आरोप में टेररिस्ट एंड डिसरप्टिव एक्टिविटीज (प्रिवेंशन) एक्ट यानी TADA और आर्म्स एक्ट के तहत कार्रवाई हुई थी। उन्होंने अलग-अलग समय में कुल मिलाकर करीब 18 महीने अंडरट्रायल के तौर पर जेल में बिताए। साल 2007 में विशेष TADA अदालत ने उन्हें आतंकवाद से जुड़े आरोपों से बरी कर दिया, लेकिन आर्म्स एक्ट के तहत दोषी ठहराते हुए छह साल की सजा सुनाई। इसके बाद साल 2013 में सुप्रीम कोर्ट ने उनकी सजा की अवधि छह साल से घटाकर पांच साल कर दी। जेल के अपने अनुभव को याद करते हुए संजय दत्त ने बताया कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने खुद को संभाले रखा।

  • ‘गांधी एंड माय मदर’ की पहली झलक सामने, मनोज बाजपेयी और वहीदा रहमान की जोड़ी ने खींचा ध्यान

    ‘गांधी एंड माय मदर’ की पहली झलक सामने, मनोज बाजपेयी और वहीदा रहमान की जोड़ी ने खींचा ध्यान

    नई दिल्ली: गांधी जयंती के खास मौके पर फिल्म ‘गांधी एंड माय मदर’ की पहली झलक सामने आई है। फिल्म की नई तस्वीरों में उस दौर और माहौल की झलक देखने को मिल रही है, जिसमें इसकी कहानी आधारित है। फिल्म का निर्देशन सुधीर मिश्रा ने किया है। सामने आई तस्वीरों के जरिए दर्शकों को फिल्म की दुनिया और उसके वातावरण की शुरुआती झलक मिली है। यह फिल्म महात्मा गांधी के जीवन और उनकी विरासत से जुड़ी हुई है। हालांकि, फिल्म की कहानी से जुड़ी ज्यादा जानकारी अभी सामने नहीं आई है। ऐसे में तस्वीरों के जरिए दर्शकों को फिलहाल फिल्म के दौर, माहौल और इसके विषय की एक शुरुआती झलक ही देखने को मिली है।

    ‘गांधी एंड माय मदर’ में महात्मा गांधी के जीवन को केवल इतिहास और राजनीति के नजरिए से दिखाने के बजाय उनके जीवन के निजी और मानवीय पहलुओं पर भी ध्यान केंद्रित किया जाएगा। फिल्म में उस समय के माहौल और रिश्तों को कहानी का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है। सामने आई तस्वीरों में भी इसी पृष्ठभूमि की झलक दिखाई देती है। फिल्म की कहानी और घटनाक्रम को लेकर अभी ज्यादा जानकारी साझा नहीं की गई है। इसलिए तस्वीरों से फिल्म की पूरी कहानी का अंदाजा लगाना संभव नहीं है। फिलहाल सामने आई झलक से इतना स्पष्ट है कि फिल्म गांधी के जीवन से जुड़े कम चर्चित और मानवीय पहलुओं को पर्दे पर प्रस्तुत करने की कोशिश करेगी।

    फिल्म की स्टारकास्ट में मनोज बाजपेयी और दिग्गज अभिनेत्री वहीदा रहमान अहम भूमिकाओं में नजर आएंगे। इनके अलावा दिव्या दत्ता और सौरभ शुक्ला भी फिल्म का हिस्सा हैं। सुधीर मिश्रा के निर्देशन में बनी इस फिल्म में गहराई वाले किरदारों और जटिल रिश्तों को कहानी का हिस्सा बनाया गया है। सामने आई तस्वीरों में कलाकारों के साथ फिल्म के दौर से जुड़ा वातावरण भी दिखाई दे रहा है। गांधी जयंती के मौके पर पहली झलक सामने आने से फिल्म की कहानी और कलाकारों को लेकर दर्शकों की दिलचस्पी बढ़ी है।

    फिलहाल फिल्म की रिलीज डेट की घोषणा नहीं की गई है। फिल्म की कहानी, बाकी किरदारों और घटनाक्रम को लेकर भी ज्यादा जानकारी सामने नहीं आई है। उपलब्ध तस्वीरों में फिल्म के कालखंड और उसके माहौल को प्रमुखता से दिखाया गया है। मनोज बाजपेयी और वहीदा रहमान जैसे अनुभवी कलाकारों की मौजूदगी फिल्म की स्टारकास्ट को खास बनाती है। दिव्या दत्ता और सौरभ शुक्ला भी इस फिल्म का हिस्सा हैं। अब फिल्म की कहानी से जुड़ी अतिरिक्त जानकारी और रिलीज डेट की घोषणा का इंतजार है।

  • नींद में भी एक्टिव रहता है दिमाग, शरीर की मरम्मत से लेकर याददाश्त और हार्मोन तक होते हैं कई जरूरी काम

    नींद में भी एक्टिव रहता है दिमाग, शरीर की मरम्मत से लेकर याददाश्त और हार्मोन तक होते हैं कई जरूरी काम


    नई दिल्ली: सोने का मतलब केवल शरीर को आराम देना नहीं है। जब हम नींद में होते हैं, तब भी शरीर के भीतर कई जरूरी प्रक्रियाएं लगातार चलती रहती हैं। दिमाग दिनभर मिली जानकारी को व्यवस्थित करने और याददाश्त से जुड़े काम करता रहता है, जबकि शरीर की कोशिकाएं खुद को दुरुस्त करने में जुटी रहती हैं। हार्मोन और इम्यून सिस्टम से जुड़ी गतिविधियां भी इस दौरान जारी रहती हैं। यही वजह है कि पर्याप्त और अच्छी नींद को शारीरिक और मानसिक सेहत के लिए जरूरी माना जाता है। रात में शरीर अलग-अलग नींद के चरणों से गुजरता है और हर चरण का अपना महत्व होता है। कभी दिमाग दिनभर की जानकारी को व्यवस्थित करता है, तो कभी शरीर की मरम्मत और ऊर्जा बहाली से जुड़े काम तेज होते हैं।

    वयस्कों के लिए रात में 7 से 9 घंटे की नींद जरूरी मानी जाती है। गहरी नींद के दौरान दिमाग, हार्मोन, इम्यून सिस्टम और शरीर के कई दूसरे हिस्से अपना काम जारी रखते हैं। रात में नींद नॉन-आरईएम और आरईएम चरणों से होकर गुजरती है। ये चरण रात में कई बार आते हैं और आम तौर पर एक नींद चक्र करीब 80 से 100 मिनट का होता है। नॉन-आरईएम नींद के तीसरे चरण को गहरी नींद कहा जाता है। इस दौरान शरीर की धड़कन और सांस की गति धीमी हो जाती है और शरीर मरम्मत तथा ऊर्जा बहाली से जुड़े काम करता है। वहीं आरईएम नींद के दौरान दिमाग काफी सक्रिय रहता है और सपने अधिक स्पष्ट हो सकते हैं।

    नींद के दौरान दिमाग का काम केवल सपने देखने तक सीमित नहीं रहता। यह दिनभर हासिल की गई जानकारियों को व्यवस्थित करने और याददाश्त बनाने की प्रक्रिया में भी शामिल रहता है। नींद की कमी या खराब नींद का असर ध्यान केंद्रित करने, नई जानकारी समझने और चीजों को याद रखने की क्षमता पर पड़ सकता है। आरईएम और नॉन-आरईएम नींद के अलग-अलग चरण सीखने और याददाश्त से जुड़े विभिन्न कामों में भूमिका निभाते हैं। इस दौरान शरीर भी अपने स्तर पर जरूरी बदलावों से गुजरता रहता है, इसलिए पूरी और अच्छी नींद अगले दिन शरीर और दिमाग को तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

    गहरी नींद में शरीर के ऊतकों की वृद्धि और मरम्मत से जुड़े काम होते हैं। इसी दौरान कुछ हार्मोन भी रिलीज होते हैं। ग्रोथ हार्मोन शरीर के विकास के साथ मांसपेशियों और ऊतकों की मरम्मत में भूमिका निभाता है। इसके अलावा वैज्ञानिकों ने ग्लिम्फैटिक सिस्टम नाम की एक व्यवस्था का भी अध्ययन किया है, जो दिमाग से कुछ मेटाबॉलिज्म संबंधी अपशिष्ट पदार्थों को हटाने का काम करती है। इस तरह रात की नींद को केवल आराम का समय समझना सही नहीं है। नींद के दौरान शरीर में मरम्मत, याददाश्त, हार्मोन और दिमागी गतिविधियों से जुड़ी कई महत्वपूर्ण प्रक्रियाएं चलती रहती हैं। यही कारण है कि शरीर को स्वस्थ रखने के लिए पर्याप्त और अच्छी नींद को जरूरी माना जाता है।

  • सागर के गर्ल्स हॉस्टल में खौफनाक नजारा बाथरूम में मिला 10 फीट लंबा अजगर छात्राओं में मची अफरा तफरी

    सागर के गर्ल्स हॉस्टल में खौफनाक नजारा बाथरूम में मिला 10 फीट लंबा अजगर छात्राओं में मची अफरा तफरी


    सागर । मध्य प्रदेश के सागर में गर्ल्स हॉस्टल में उस समय हड़कंप मच गया जब छात्राओं को बाथरूम के अंदर करीब 10 फीट लंबा अजगर दिखाई दिया। तिली इलाके में स्थित हॉस्टल में छात्राएं सामान्य तरीके से बाथरूम की ओर गई थीं लेकिन अंदर पहुंचते ही उनकी नजर विशाल अजगर पर पड़ गई। इतना बड़ा सांप सामने देखकर छात्राएं घबरा गईं और तत्काल हॉस्टल प्रबंधन को इसकी जानकारी दी गई। कुछ ही देर में पूरे हॉस्टल में यह खबर फैल गई और छात्राओं के बीच डर का माहौल बन गया।

    मामले की सूचना मिलने के बाद स्नेक कैचर अकील बाबा को मौके पर बुलाया गया। जानकारी मिलते ही वह हॉस्टल पहुंचे और बाथरूम का निरीक्षण किया। अजगर अभी भी वहीं मौजूद था। इसके बाद उन्होंने बेहद सावधानी के साथ रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। काफी मशक्कत के बाद करीब 10 फीट लंबे अजगर को सुरक्षित तरीके से पकड़ लिया गया। अजगर के बाहर निकलते ही छात्राओं और हॉस्टल स्टाफ ने राहत की सांस ली। रेस्क्यू के दौरान आसपास के लोग भी मौके पर पहुंच गए और इतने बड़े अजगर को देखकर हैरान रह गए।

    स्नेक कैचर अकील बाबा के मुताबिक छात्राओं की नजर समय रहते अजगर पर पड़ गई थी जिसके बाद तत्काल सूचना दी गई। इसी वजह से उसे बिना किसी नुकसान के सुरक्षित बाहर निकाला जा सका। अब अजगर को सुरक्षित प्राकृतिक स्थान पर छोड़ने की तैयारी की जा रही है। उन्होंने बताया कि तिली क्षेत्र पहाड़ी इलाके से लगा हुआ है। आसपास प्राकृतिक क्षेत्र होने के कारण यहां अक्सर सांप और अजगर निकलते रहते हैं। बारिश के दौरान सांप सुरक्षित जगह की तलाश में कई बार रिहायशी इलाकों और इमारतों तक पहुंच जाते हैं।

    अकील बाबा ने बताया कि तिली इलाके में अजगर मिलने की यह पहली घटना नहीं है। आवास योजना के तहत बनी कई इमारतों के आसपास पहले भी बड़े अजगर देखे जा चुके हैं। उनके मुताबिक वह अब तक इस इलाके से करीब 70 से 75 अजगरों का रेस्क्यू कर चुके हैं। इन अजगरों को सुरक्षित तरीके से पकड़ने के बाद संबंधित विभाग की मौजूदगी में प्राकृतिक क्षेत्र में छोड़ा गया है। ऐसे में इस घटना ने एक बार फिर इलाके में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ा दी है।

    गर्ल्स हॉस्टल के बाथरूम में अजगर मिलने की घटना छात्राओं के लिए निश्चित तौर पर डराने वाली थी। जिस जगह पर वे रोजमर्रा के काम के लिए जाती थीं वहीं अचानक विशाल अजगर दिखाई देने से कुछ समय के लिए अफरा तफरी की स्थिति बन गई। हालांकि समय पर सूचना मिलने के कारण स्थिति गंभीर होने से पहले ही संभाल ली गई।

    स्नेक कैचर ने लोगों से अपील की है कि घर हॉस्टल या किसी भी रिहायशी परिसर में सांप अथवा अजगर दिखाई देने पर खुद उसे पकड़ने या मारने की कोशिश न करें। ऐसी स्थिति में तुरंत प्रशिक्षित स्नेक कैचर या संबंधित विभाग को सूचना देनी चाहिए। इससे लोगों की सुरक्षा के साथ वन्यजीव को भी सुरक्षित रखा जा सकता है। सागर की इस घटना में भी समय पर सूचना और सावधानी से करीब 10 फीट लंबे अजगर का सुरक्षित रेस्क्यू संभव हो सका।