Author: bharati

  • बैंकिंग सेक्टर में बड़ा बदलाव, आरबीआई के नए फैसले से जमा दरों और फंडिंग रणनीति पर पड़ेगा असर

    बैंकिंग सेक्टर में बड़ा बदलाव, आरबीआई के नए फैसले से जमा दरों और फंडिंग रणनीति पर पड़ेगा असर

     
    नई दिल्ली । भारतीय रिजर्व बैंक ने बैंकों के लिए बल्क डिपॉजिट से जुड़े नियमों में बदलाव किया है, जिससे उन्हें जमा दरें तय करने में पहले की तुलना में अधिक लचीलापन मिलेगा। नए नियमों के तहत बैंक अब बल्क डिपॉजिट की कीमत तय करते समय लिक्विडिटी कवरेज रेश्यो यानी एलसीआर के रन-ऑफ रेट्स को ध्यान में रख सकेंगे। माना जा रहा है कि यह बदलाव बैंकों की फंडिंग लागत, तरलता प्रबंधन और एसेट-लायबिलिटी मैनेजमेंट को बेहतर बनाने में मदद करेगा।

    रेटिंग एजेंसी की एक रिपोर्ट के अनुसार, आरबीआई का यह कदम बैंकिंग क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण बदलाव है। इससे बैंक अपनी जरूरतों और जमा की तरलता विशेषताओं के आधार पर बल्क डिपॉजिट की ब्याज दरों को अधिक प्रभावी तरीके से तय कर सकेंगे। पहले जमा की लिक्विडिटी विशेषताओं के आधार पर ब्याज दरों में अंतर करने की गुंजाइश सीमित थी।

    नए ढांचे के तहत बैंक अलग-अलग प्रकार के डिपॉजिट और उनसे जुड़े तरलता जोखिम को ध्यान में रखते हुए कीमत तय कर पाएंगे। इससे बैंकों को यह आकलन करने में सुविधा होगी कि किसी जमा राशि के अचानक निकलने की स्थिति में उन्हें कितनी नकदी की जरूरत पड़ सकती है। इसके लिए बैंकों को पर्याप्त हाई-क्वालिटी लिक्विड एसेट्स रखने की आवश्यकता होगी, ताकि किसी भी चुनौतीपूर्ण स्थिति में नकदी की जरूरत पूरी की जा सके।

    विशेषज्ञों के अनुसार, इस बदलाव से बैंकों के बीच जमा आकर्षित करने की प्रतिस्पर्धा बढ़ सकती है। जिन बैंकों का जमा आधार मजबूत है और जिनके पास करंट अकाउंट तथा सेविंग्स अकाउंट की अच्छी हिस्सेदारी है, उन्हें इसका फायदा मिल सकता है। वहीं, कमजोर जमा आधार वाले बैंकों को फंड जुटाने के लिए अधिक लागत का सामना करना पड़ सकता है।

    आरबीआई ने नए नियमों में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए डिस्क्लोजर से जुड़ी शर्तों को भी मजबूत किया है। बैंकों को यह सुनिश्चित करना होगा कि एक जैसी डिपॉजिट कैटेगरी के लिए ब्याज दर तय करने में किसी तरह का भेदभाव न हो। यानी समान परिस्थितियों वाले ग्राहकों के लिए दरों में मनमाना अंतर नहीं किया जा सकेगा।

    संशोधित निर्देशों के अनुसार, सभी बैंक शाखाओं में जमा पर लागू ब्याज दरों को समान रखना जरूरी होगा। हालांकि, बल्क डिपॉजिट के मामले में लिक्विडिटी रिस्क और उससे जुड़ी लागत के आधार पर कीमत तय करने की अनुमति दी गई है। यह व्यवस्था बैंकों को जोखिम और लागत के अनुसार बेहतर रणनीति बनाने में मदद करेगी।

    आरबीआई के नए निर्देश 1 अक्टूबर 2026 से लागू होंगे। इसके तहत बैंक द्वारा ग्राहकों को दिया जाने वाला वास्तविक ब्याज उनकी वेबसाइट पर पहले से घोषित ब्याज दरों के शेड्यूल के अनुसार ही होना चाहिए। इससे ग्राहकों को भी जमा दरों की जानकारी पहले से उपलब्ध रहेगी और पारदर्शिता बढ़ेगी।

    नए नियमों के तहत बैंकों को प्रत्येक कार्य दिवस की सुबह 10 बजे तक अपनी वेबसाइट पर बल्क डिपॉजिट के लिए लागू ब्याज दरें प्रकाशित करनी होंगी। इसके लिए उन्हें 10 मिनट का अतिरिक्त समय यानी ग्रेस पीरियड भी दिया जाएगा। इससे बैंकिंग व्यवस्था में स्पष्टता बढ़ेगी और ग्राहक भी बेहतर जानकारी के आधार पर अपने निवेश संबंधी फैसले ले सकेंगे।

    कुल मिलाकर, आरबीआई का यह कदम बैंकिंग क्षेत्र में तरलता प्रबंधन को मजबूत करने और जमा बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धा बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे बैंकों को अपनी वित्तीय रणनीति तैयार करने में अधिक स्वतंत्रता मिलेगी, जबकि नियामकीय निगरानी और पारदर्शिता भी बनी रहेगी।

  • निवेश और तकनीक साझेदारी को मिलेगी नई रफ्तार, वैश्विक बाजारों में भारत की स्थिति होगी मजबूत

    निवेश और तकनीक साझेदारी को मिलेगी नई रफ्तार, वैश्विक बाजारों में भारत की स्थिति होगी मजबूत

    नई दिल्ली ।भारत, फ्रांस और अरब देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। देश के प्रमुख उद्योग संगठन एसोचैम ने अंतरराष्ट्रीय कारोबारी सहयोग को बढ़ावा देने के लिए बिजनेस फ्रांस और भारत एवं अरब देशों के वाणिज्य, उद्योग एवं कृषि मंडल के साथ रणनीतिक समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं। इन समझौतों का उद्देश्य व्यापार विस्तार, निवेश को प्रोत्साहन, तकनीकी साझेदारी और वैश्विक बाजारों में भारतीय कंपनियों की पहुंच को मजबूत करना है।

    एसोचैम के अनुसार, इन समझौतों के माध्यम से विभिन्न देशों के उद्योगों और संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाएगा। इसके तहत व्यापारिक प्रतिनिधिमंडलों के आदान-प्रदान, निवेश के अवसरों की पहचान, नई तकनीकों के उपयोग और संयुक्त कारोबारी परियोजनाओं को बढ़ावा देने पर जोर दिया जाएगा।

    बिजनेस फ्रांस के साथ हुए समझौते में भारत और फ्रांस की कंपनियों के बीच व्यापार एवं निवेश के नए अवसर विकसित करने की योजना बनाई गई है। दोनों संस्थाएं तकनीकी सहयोग, संयुक्त उद्यमों को बढ़ावा देने, बाजार से जुड़ी जानकारियों के आदान-प्रदान और व्यापारिक आयोजनों के संयुक्त संचालन में सहयोग करेंगी।

    समझौते के तहत व्यापार मेलों, प्रदर्शनियों, सम्मेलनों और अन्य कारोबारी गतिविधियों के जरिए दोनों देशों के उद्यमों को एक-दूसरे के करीब लाने का प्रयास किया जाएगा। इससे छोटे और मध्यम उद्योगों को भी अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच बनाने में सहायता मिलने की उम्मीद है।

    एसोचैम के महासचिव सौरभ सान्याल ने कहा कि वैश्विक बाजारों में भारत की बढ़ती भागीदारी उद्योगों के लिए नए अवसर पैदा कर रही है। उन्होंने कहा कि फ्रांस और अरब देशों के साथ हुई ये साझेदारियां मजबूत संस्थागत संबंध बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। इससे कंपनियों को नए बाजार तलाशने, निवेश बढ़ाने और लंबे समय तक टिकाऊ आर्थिक विकास को गति देने में मदद मिलेगी।

    बिजनेस फ्रांस के कृषि निर्यात प्रभाग के प्रमुख वियानी मेनिएर ने इस साझेदारी को भारत और फ्रांस के कारोबारी संबंधों को मजबूत करने वाला कदम बताया। उन्होंने कहा कि इससे दोनों देशों की कंपनियों, संस्थानों और निवेशकों के बीच सहयोग के नए रास्ते खुलेंगे।

    भारत एवं अरब देशों के वाणिज्य, उद्योग एवं कृषि मंडल के कार्यवाहक महासचिव डॉ. वाइल एस. एच. अव्वाद ने कहा कि यह समझौता भारत और अरब क्षेत्र के बीच व्यापारिक संवाद को बढ़ाने में मदद करेगा। इसके जरिए निवेश साझेदारियों को प्रोत्साहन मिलेगा और दोनों क्षेत्रों के बीच आर्थिक सहयोग को नई दिशा मिलेगी।

    इस समझौते के तहत व्यापारिक सूचनाओं का साझा उपयोग, निवेश संबंधी अवसरों की पहचान, संयुक्त परियोजनाओं को बढ़ावा देना और तकनीकी हस्तांतरण जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाया जाएगा। इससे भारतीय कंपनियों को नए अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी मौजूदगी मजबूत करने का अवसर मिलेगा।

    भारत, फ्रांस और अरब देशों के बीच यह पहल ऐसे समय में हुई है जब वैश्विक स्तर पर व्यापारिक साझेदारियां तेजी से बदल रही हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह के समझौते भारतीय उद्योगों को विदेशी बाजारों से जोड़ने, निवेश आकर्षित करने और नई तकनीकों तक पहुंच बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

  • भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता को मजबूती, कैप्टिव और कमर्शियल खदानों से कोयला उत्पादन 14.78 मिलियन टन पहुंचा

    भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता को मजबूती, कैप्टिव और कमर्शियल खदानों से कोयला उत्पादन 14.78 मिलियन टन पहुंचा


    नई दिल्ली ।
    भारत के कैप्टिव और वाणिज्यिक कोयला खदानों से उत्पादन में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। जुलाई 2026 में इन खदानों से कोयला उत्पादन सालाना आधार पर 9.6 प्रतिशत बढ़कर 14.78 मिलियन टन (एमटी) तक पहुंच गया है। कोयला मंत्रालय ने सोमवार को जारी जानकारी में बताया कि यह वृद्धि देश के कोयला क्षेत्र में बेहतर परिचालन क्षमता, उत्पादन दक्षता और खनन संसाधनों के प्रभावी इस्तेमाल को दर्शाती है।

    मंत्रालय के अनुसार जुलाई के दौरान कैप्टिव और वाणिज्यिक खदानों से कोयले की आपूर्ति भी बढ़कर 17.49 मिलियन टन हो गई। उत्पादन और आपूर्ति में यह वृद्धि ऐसे समय में महत्वपूर्ण मानी जा रही है, जब देश लगातार ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए घरेलू कोयला उत्पादन बढ़ाने पर जोर दे रहा है। सरकार का लक्ष्य कोयला क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाकर आयात पर निर्भरता को कम करना है।

    कोयला मंत्रालय ने बताया कि चालू वित्त वर्ष की शुरुआत से जुलाई तक कैप्टिव और वाणिज्यिक खदानों से कुल उत्पादन 63.16 मिलियन टन दर्ज किया गया है। यह पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में हुए 59.42 मिलियन टन उत्पादन की तुलना में 6.2 प्रतिशत अधिक है। इसी अवधि में कोयले की संचयी आपूर्ति भी बढ़कर 70.14 मिलियन टन हो गई, जबकि पिछले वर्ष यह आंकड़ा 66.02 मिलियन टन था। इस तरह आपूर्ति में करीब 5.8 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई है।

    मंत्रालय ने कहा कि कैप्टिव और वाणिज्यिक खदानों से उत्पादन में लगातार सुधार होने से देश में आयातित कोयले की आवश्यकता कम होगी। इससे न केवल विदेशी मुद्रा की बचत होगी, बल्कि ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला को भी मजबूती मिलेगी। कोयला देश के बिजली उत्पादन और कई औद्योगिक क्षेत्रों के लिए एक प्रमुख कच्चा माल है, इसलिए घरेलू उत्पादन में वृद्धि को आर्थिक विकास और ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से अहम माना जा रहा है।

    सरकार की आत्मनिर्भर भारत पहल के तहत कोयला क्षेत्र में उत्पादन क्षमता बढ़ाने, नई खदानों को सक्रिय करने और निजी भागीदारी को प्रोत्साहित करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। मंत्रालय ने कहा कि कैप्टिव और वाणिज्यिक कोयला खनन क्षेत्र की पूरी क्षमता का उपयोग करने के लिए नीतिगत सुधारों, बेहतर निगरानी व्यवस्था और हितधारकों के सहयोग के माध्यम से लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

    मंत्रालय के मुताबिक आने वाले समय में कोयला उत्पादन और आपूर्ति से जुड़ी बाधाओं को दूर करने के लिए कई स्तरों पर काम जारी रहेगा। इसका उद्देश्य देश की बढ़ती ऊर्जा और औद्योगिक जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त कोयला उपलब्ध कराना है। उत्पादन में यह वृद्धि भारत को ऊर्जा क्षेत्र में अधिक मजबूत और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।

  • भारत में डेटा सेंटर का बढ़ता जाल, 2030 तक लाखों नौकरियों और रियल एस्टेट में आएगा बड़ा बदलाव

    भारत में डेटा सेंटर का बढ़ता जाल, 2030 तक लाखों नौकरियों और रियल एस्टेट में आएगा बड़ा बदलाव

    नई दिल्ली । भारत में डिजिटल सेवाओं के तेजी से विस्तार के बीच डेटा सेंटर परियोजनाएं आने वाले वर्षों में रोजगार, बुनियादी ढांचे और रियल एस्टेट क्षेत्र के विकास का बड़ा आधार बन सकती हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार देश में प्रस्तावित लगभग 9,030 मेगावाट क्षमता वाली डेटा सेंटर परियोजनाएं वर्ष 2030 तक करीब 4.33 लाख प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार अवसर पैदा कर सकती हैं। इसके अलावा इन परियोजनाओं के आसपास आवासीय क्षेत्र में भी बड़ी मांग उत्पन्न होने का अनुमान लगाया गया है।

    डेटा सेंटर आधुनिक डिजिटल अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाते हैं, क्योंकि इनमें इंटरनेट सेवाओं, क्लाउड कंप्यूटिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और बड़े पैमाने पर डिजिटल डेटा को सुरक्षित रखने के लिए जरूरी तकनीकी ढांचा तैयार किया जाता है। भारत में डिजिटल गतिविधियों के बढ़ने के साथ डेटा स्टोरेज और प्रोसेसिंग की जरूरत लगातार बढ़ रही है, जिससे इस क्षेत्र में निवेश को गति मिल रही है।

    रिपोर्ट के मुताबिक भारत वर्तमान में दुनिया के कुल डिजिटल डेटा का लगभग 20 प्रतिशत तैयार करता है, लेकिन वैश्विक डेटा सेंटर क्षमता में देश की हिस्सेदारी करीब 4 प्रतिशत ही है। यह अंतर बताता है कि भारत में डेटा सेंटर अवसंरचना के विस्तार की काफी संभावनाएं मौजूद हैं। आने वाले वर्षों में डिजिटल सेवाओं की मांग बढ़ने के साथ इस क्षेत्र में बड़े निवेश की उम्मीद जताई जा रही है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि डेटा सेंटर केवल तकनीकी क्षेत्र तक सीमित नहीं रहते, बल्कि इनके निर्माण और संचालन से आसपास के क्षेत्रों में कई अन्य गतिविधियां भी विकसित होती हैं। बिजली आपूर्ति व्यवस्था, फाइबर नेटवर्क, लॉजिस्टिक्स, सुरक्षा सेवाएं और अन्य व्यावसायिक सुविधाओं का विस्तार होता है, जिससे नए आर्थिक केंद्रों का विकास शुरू हो जाता है।

    रिपोर्ट में कहा गया है कि डेटा सेंटर परियोजनाओं का असर लंबे समय तक रहने वाला है। इन परियोजनाओं के आसपास रोजगार बढ़ने के साथ आवासीय मांग भी तेजी से बढ़ सकती है। अनुमान के अनुसार डेटा सेंटर परिसरों के आसपास 5 से 15 किलोमीटर का क्षेत्र सबसे अधिक लाभान्वित हो सकता है। इन क्षेत्रों में सड़क, बिजली और संचार सुविधाओं के विकास के साथ आवासीय टाउनशिप, खुदरा बाजार और अन्य नागरिक सुविधाओं का विस्तार होने की संभावना है।

    डेटा सेंटर आधारित विकास को रियल एस्टेट क्षेत्र के लिए भी एक नए अवसर के रूप में देखा जा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2030 तक इन परियोजनाओं के कारण देश में लगभग 19.5 करोड़ वर्गफुट अतिरिक्त आवासीय मांग पैदा हो सकती है। इससे नए विकास क्षेत्रों में निर्माण गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

    राज्यों के स्तर पर महाराष्ट्र को इसका सबसे अधिक फायदा मिलने का अनुमान लगाया गया है। रिपोर्ट के अनुसार महाराष्ट्र में डेटा सेंटर निवेश के कारण करीब 5.4 करोड़ वर्गफुट से अधिक आवासीय मांग पैदा हो सकती है। इसके बाद कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश, तेलंगाना और तमिलनाडु जैसे राज्यों में भी बड़े अवसर बनने की संभावना जताई गई है।

    विशेषज्ञों के अनुसार भारत में पहले राजमार्ग, औद्योगिक गलियारे, हवाई अड्डे और आईटी पार्क आर्थिक विकास के प्रमुख केंद्र रहे हैं। अब डेटा सेंटर इस विकास यात्रा का नया आधार बन सकते हैं। इनके लिए जरूरी बिजली, इंटरनेट कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क में निवेश बढ़ने से उद्योगों और निवेशकों का भरोसा मजबूत होगा।

    आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्लाउड सेवाओं और डिजिटल कारोबार के विस्तार के साथ डेटा सेंटर क्षेत्र आने वाले समय में भारत की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। रोजगार सृजन के साथ-साथ यह क्षेत्र नए शहरी विकास क्षेत्रों को भी आकार देने वाला प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर केंद्र बन सकता है।

  • चीन में भारतीयों की बढ़ी चिंता: सोशल मीडिया पर भारत-विरोधी कंटेंट, वीजा और रोजगार प्रतिबंध के मुद्दे उठे

    चीन में भारतीयों की बढ़ी चिंता: सोशल मीडिया पर भारत-विरोधी कंटेंट, वीजा और रोजगार प्रतिबंध के मुद्दे उठे


    नई दिल्ली। चीन में रह रहे भारतीय समुदाय ने बीजिंग स्थित भारतीय दूतावास के ‘ओपन हाउस’ कार्यक्रम में सोशल मीडिया पर भारत-विरोधी सामग्री, कार्य वीजा में कमी और भारतीयों के जीवनसाथियों के रोजगार पर प्रतिबंध जैसे कई अहम मुद्दे उठाए। भारतीय राजदूत विक्रम दुरईस्वामी ने इन चिंताओं पर चर्चा करते हुए समाधान के लिए लगातार प्रयास किए जाने का भरोसा दिलाया।

    सोशल मीडिया और वीजा से जुड़े मुद्दे प्रमुख
    शुक्रवार को आयोजित इस कार्यक्रम में बीजिंग में विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत भारतीय पेशेवरों ने भाग लिया। उन्होंने चीनी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भारतीयों, उनके खान-पान और संस्कृति के खिलाफ बढ़ती आपत्तिजनक सामग्री पर चिंता जताई।

    इसके अलावा भारतीय पेशेवरों को कार्य वीजा मिलने में कमी, उनके जीवनसाथियों के रोजगार पर लगी पाबंदियों और दूतावास संबंधी सेवाओं में आने वाली दिक्कतों को भी प्रमुख मुद्दों के रूप में उठाया गया।

    चीनी अधिकारियों से लगातार संवाद
    मई में चीन में भारत के राजदूत का कार्यभार संभालने वाले विक्रम दुरईस्वामी ने बताया कि उन्होंने इन मुद्दों पर चीनी अधिकारियों के साथ संवाद बढ़ाया है। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि अगले सप्ताह से भारतीय वीजा के लिए आवेदन करने वाले चीनी नागरिकों के दस्तावेजों की प्रक्रिया को और सरल बनाया जाएगा, ताकि दोनों देशों के बीच यात्रा और संपर्क को बढ़ावा मिल सके।

    भ्रामक प्रचार का तथ्यात्मक जवाब
    भारत-विरोधी और भ्रामक सामग्री के मुद्दे पर राजदूत ने कहा कि चीनी सरकार भी इस तरह की सामग्री को लेकर चिंतित है और उस पर नियंत्रण के लिए कदम उठा रही है। उन्होंने बताया कि भारतीय दूतावास भी अपने आधिकारिक सोशल मीडिया मंचों के जरिए तथ्यात्मक जानकारी साझा कर गलत सूचनाओं का जवाब दे रहा है।

    भारतीय संस्कृति के प्रचार की तैयारी
    दुरईस्वामी ने कहा कि भारतीय संस्कृति और व्यंजनों की विविधता को बढ़ावा देने के लिए दूतावास भविष्य में और अधिक सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करेगा। उन्होंने बताया कि वसंत मेला जैसे आयोजनों को मिली सकारात्मक प्रतिक्रिया के बाद इस दिशा में प्रयास बढ़ाए जाएंगे।

    कानूनी सहायता और नियमित संवाद
    राजदूत ने बताया कि कार्यस्थल से जुड़े विवादों या अन्य समस्याओं का सामना कर रहे भारतीयों की मदद के लिए दूतावास कानूनी विशेषज्ञों के साथ एक सहयोग तंत्र विकसित कर रहा है। साथ ही भारतीय समुदाय की समस्याओं के समाधान और बेहतर दूतावास सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए समय-समय पर ‘ओपन हाउस’ कार्यक्रम आयोजित किए जाते रहेंगे।

  • सतना से किसान कांग्रेस का बड़ा ऐलान, MSP और बिजली समेत मांगों को लेकर आंदोलन तेज करने की तैयारी

    सतना से किसान कांग्रेस का बड़ा ऐलान, MSP और बिजली समेत मांगों को लेकर आंदोलन तेज करने की तैयारी

    मध्य प्रदेश : में किसानों की विभिन्न समस्याओं और मांगों को लेकर किसान कांग्रेस ने प्रदेश सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। सतना में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में किसान कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष धर्मेंद्र सिंह चौहान ने किसानों से जुड़े मुद्दों को लेकर सरकार पर निशाना साधा और जल्द समाधान नहीं होने पर बड़े आंदोलन की चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि यदि किसानों की मांगों पर समय रहते ध्यान नहीं दिया गया तो संगठन सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन करेगा और विधानसभा का घेराव भी किया जाएगा।

    किसान कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान किसानों से जुड़ी कई मांगें उठाईं। उन्होंने भारत-अमेरिका कृषि ट्रेड डील को किसानों के हितों के खिलाफ बताते हुए इसे रद्द करने की मांग की। उनका कहना था कि कृषि क्षेत्र से जुड़े फैसलों में किसानों के हितों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए और ऐसे समझौतों से पहले किसानों की चिंताओं को ध्यान में रखना जरूरी है।

    उन्होंने न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी एमएसपी को लेकर भी सरकार से ठोस कानून बनाने की मांग की। धर्मेंद्र सिंह चौहान ने कहा कि किसानों की उपज को तय समर्थन मूल्य से कम कीमत पर खरीदने और बेचने की स्थिति को रोकने के लिए प्रभावी व्यवस्था होनी चाहिए। उन्होंने एमएसपी सुरक्षा कानून लागू करने की मांग को प्रमुख मुद्दा बताया।

    किसान कांग्रेस ने प्रदेश में मूंग खरीदी को लेकर भी सवाल उठाए। संगठन की मांग है कि सरकार किसानों से मूंग की शत-प्रतिशत खरीदी सुनिश्चित करे, ताकि किसानों को अपनी उपज बेचने में परेशानी का सामना न करना पड़े। इसके साथ ही खेती के लिए पर्याप्त बिजली आपूर्ति उपलब्ध कराने की मांग भी उठाई गई। किसान कांग्रेस ने कृषि कार्यों के लिए 24 घंटे थ्री-फेज बिजली देने की मांग की।

    इसके अलावा कृषि उपज मंडी और सहकारिता चुनावों को लेकर भी संगठन ने सरकार को घेरा। किसान कांग्रेस का कहना है कि पिछले कई वर्षों से लंबित इन चुनावों को जल्द कराया जाना चाहिए, ताकि किसानों से जुड़े संस्थानों में लोकतांत्रिक प्रक्रिया मजबूत हो सके।

    धर्मेंद्र सिंह चौहान ने भाजपा सरकार पर किसानों से किए गए चुनावी वादों को पूरा नहीं करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि चुनाव के दौरान धान और गेहूं की खरीदी को लेकर जो घोषणाएं की गई थीं, सरकार अब उनसे पीछे हट रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि किसान महंगे डीजल, खाद की बढ़ती कीमतों, बिजली बिल और कर्ज जैसी समस्याओं से परेशान हैं।

    उन्होंने कहा कि प्रदेश में किसानों को मंडियों में उचित मूल्य नहीं मिल रहा है और सरकार की नीतियां किसानों की परेशानियां कम करने में सफल नहीं हो रही हैं। किसान कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने सरकार पर किसान कल्याण के दावों और जमीनी स्थिति के बीच अंतर होने का आरोप लगाया।

    किसान कांग्रेस ने साफ किया है कि यदि किसानों की समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो संगठन प्रदेशभर में किसानों को एकजुट कर आंदोलन करेगा। इसके तहत राजधानी भोपाल में विधानसभा घेराव की चेतावनी भी दी गई है। फिलहाल किसान कांग्रेस के इस ऐलान के बाद प्रदेश में किसानों से जुड़े मुद्दों को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज होने की संभावना है।

  • उज्जैन पहुंचे CM मोहन यादव, पूर्व मंत्री पारस जैन को दी श्रद्धांजलि; परिवार से मिलकर जताया दुख

    उज्जैन पहुंचे CM मोहन यादव, पूर्व मंत्री पारस जैन को दी श्रद्धांजलि; परिवार से मिलकर जताया दुख

    मध्य प्रदेश: के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव सोमवार को उज्जैन पहुंचे, जहां उन्होंने वरिष्ठ भाजपा नेता और पूर्व मंत्री पारस जैन के निधन पर श्रद्धांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री हेलीपैड से सीधे पारस जैन के निवास पहुंचे और उनके पार्थिव शरीर पर श्रद्धा सुमन अर्पित कर परिवार के सदस्यों से मुलाकात की। उन्होंने शोक संतप्त परिवार को सांत्वना देते हुए दिवंगत नेता के योगदान को याद किया।

    मध्य प्रदेश के उज्जैन शहर में पूर्व मंत्री पारस जैन के निधन के बाद शोक का माहौल है। लंबे समय से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे पारस जैन का निधन होने की खबर सामने आने के बाद भाजपा कार्यकर्ताओं और समर्थकों में दुख की लहर फैल गई। उनके निधन को पार्टी के लिए एक बड़ी क्षति माना जा रहा है।

    मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के उज्जैन पहुंचने पर हेलीपैड पर जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों ने उनका स्वागत किया। इसके बाद मुख्यमंत्री बिना किसी अन्य कार्यक्रम के सीधे पारस जैन के निवास पहुंचे। वहां उन्होंने दिवंगत नेता को श्रद्धांजलि दी और परिवार के लोगों से मिलकर संवेदना व्यक्त की।

    मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने कहा कि वरिष्ठ भाजपा नेता, पूर्व मंत्री और उज्जैन उत्तर विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक पारस जैन का निधन अत्यंत दुखद और पीड़ादायक है। उन्होंने कहा कि पारस जैन ने अपने राजनीतिक जीवन में जनता के बीच मजबूत पकड़ बनाई और लंबे समय तक समाज एवं संगठन के लिए कार्य किया।

    मुख्यमंत्री ने दिवंगत नेता को याद करते हुए कहा कि पारस जैन का योगदान हमेशा स्मरणीय रहेगा। उन्होंने भगवान से प्रार्थना की कि दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें और शोकाकुल परिवार को इस कठिन समय में धैर्य और शक्ति प्रदान करें। मुख्यमंत्री ने मध्य प्रदेश सरकार की ओर से भी पारस जैन को श्रद्धांजलि अर्पित की।

    इस अवसर पर प्रदेश सरकार के मंत्री और कई जनप्रतिनिधि भी मौजूद रहे। उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार, प्रभारी मंत्री गौतम टेटवाल सहित अन्य नेताओं ने भी पारस जैन को श्रद्धांजलि दी और उनके परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की।

    पारस जैन उज्जैन उत्तर विधानसभा क्षेत्र से विधायक रह चुके थे और मध्य प्रदेश सरकार में मंत्री पद की जिम्मेदारी भी संभाल चुके थे। भाजपा संगठन में उनकी पहचान एक अनुभवी और जमीन से जुड़े नेता के रूप में रही। लंबे राजनीतिक सफर के दौरान उन्होंने क्षेत्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान बनाई थी।

    उनके निधन के बाद उज्जैन सहित पूरे प्रदेश में भाजपा नेताओं, कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने दुख व्यक्त किया है। अंतिम यात्रा से पहले मुख्यमंत्री सहित कई वरिष्ठ नेताओं ने उनके निवास पहुंचकर उन्हें अंतिम श्रद्धांजलि दी। पारस जैन के राजनीतिक योगदान और सामाजिक जुड़ाव को याद करते हुए लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी और उनके परिवार के प्रति अपनी संवेदनाएं प्रकट कीं

  • KitKat चॉकलेट के पैकेट में छिपाकर ला रहे थे ड्रग्स, IGI एयरपोर्ट पर 2.759 किलो गांजे के साथ यात्री गिरफ्तार

    KitKat चॉकलेट के पैकेट में छिपाकर ला रहे थे ड्रग्स, IGI एयरपोर्ट पर 2.759 किलो गांजे के साथ यात्री गिरफ्तार

    नई दिल्ली । दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर कस्टम विभाग ने मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ कार्रवाई करते हुए एक यात्री को गिरफ्तार किया है। आरोपी यात्री फुकेट से दिल्ली पहुंचा था और उसके पास मौजूद KitKat चॉकलेट के पैकेटों में छिपाकर हाइड्रोपोनिक गांजा लाया जा रहा था। जांच के दौरान कस्टम अधिकारियों ने 2.759 किलोग्राम प्रतिबंधित पदार्थ बरामद किया, जिसके बाद यात्री के खिलाफ एनडीपीएस अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई।

    कस्टम अधिकारियों के अनुसार, यह मामला 2 अगस्त का है। एयर इंडिया की फ्लाइट से फुकेट से दिल्ली पहुंचे एक यात्री को एयर इंटेलिजेंस यूनिट की प्रोफाइलिंग के आधार पर संदिग्ध श्रेणी में रखा गया था। यात्री जब ग्रीन चैनल से बाहर निकलने की कोशिश कर रहा था, तभी अधिकारियों ने उसे रोककर उसके सामान की जांच शुरू की।

    जांच के दौरान बैग की हाई रिजॉल्यूशन एक्स-रे स्कैनिंग की गई। तलाशी लेने पर KitKat चॉकलेट के पैकेटों के अंदर चार वैक्यूम सील पैकेट मिले। इन पैकेटों में हाइड्रोपोनिक गांजा छिपाकर रखा गया था। अधिकारियों ने सभी पैकेटों को जब्त कर लिया और यात्री को गिरफ्तार कर आगे की जांच शुरू कर दी।

    जांच एजेंसियों के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स तस्कर लगातार नए-नए तरीके अपनाकर सुरक्षा जांच को चकमा देने की कोशिश कर रहे हैं। इससे पहले भी दिल्ली एयरपोर्ट पर मादक पदार्थों को गीजर, मिक्सर, ट्रॉली बैग के अंदर छिपाकर लाने के मामले सामने आ चुके हैं। अब चॉकलेट के पैकेटों का इस्तेमाल तस्करी के लिए किया जाना जांच एजेंसियों के लिए एक नई चुनौती के रूप में सामने आया है।

    कस्टम विभाग अब संदिग्ध यात्रियों की पहचान के लिए आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर रहा है। एयरपोर्ट पर यात्री प्रोफाइलिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित जोखिम विश्लेषण, एक्स-रे स्कैनिंग और खुफिया जानकारी के आधार पर जांच प्रक्रिया को मजबूत किया गया है। इसी वजह से कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें तस्करों ने छिपाने के बेहद अलग तरीके अपनाए थे।

    आंकड़ों के अनुसार, पिछले कुछ समय में दिल्ली एयरपोर्ट पर हाइड्रोपोनिक गांजे की कई बड़ी खेप पकड़ी गई हैं। जून महीने में बड़ी मात्रा में मादक पदार्थ बरामद किए गए, जबकि जुलाई से अगस्त के शुरुआती दिनों तक भी लगातार कार्रवाई जारी रही। इन अभियानों में कई यात्रियों को गिरफ्तार किया गया है और बड़ी मात्रा में प्रतिबंधित पदार्थ जब्त किए गए हैं।

    कस्टम अधिकारियों की नजर खासतौर पर बैंकॉक, फुकेट और कुआलालंपुर जैसे अंतरराष्ट्रीय रूटों से आने वाली उड़ानों पर है। इन मार्गों को हाई रिस्क श्रेणी में रखा गया है क्योंकि अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स नेटवर्क भारत में मादक पदार्थ पहुंचाने के लिए इनका इस्तेमाल करने की कोशिश करते हैं।

    इससे पहले भी एयरपोर्ट पर बड़ी कार्रवाई में गीजर के अंदर छिपाकर लाई गई हाइड्रोपोनिक गांजे की खेप पकड़ी गई थी। वहीं बैंकॉक से आने वाले यात्रियों के पास से भी बड़ी मात्रा में प्रतिबंधित पदार्थ बरामद किया गया था। लगातार हो रही इन कार्रवाइयों से साफ है कि तस्कर तरीके बदल रहे हैं, लेकिन जांच एजेंसियां भी आधुनिक तकनीक और सतर्कता के जरिए उनकी योजनाओं को नाकाम करने में जुटी हैं।

  • डिवाइडर से टकराई बाइक, स्ट्रीट लाइट बंद होने से दर्दनाक हादसा, रतलाम में दो दोस्तों की मौके पर मौत

    डिवाइडर से टकराई बाइक, स्ट्रीट लाइट बंद होने से दर्दनाक हादसा, रतलाम में दो दोस्तों की मौके पर मौत

     मध्य प्रदेश के रतलाम जिले में रविवार देर रात एक दर्दनाक सड़क हादसे में दो दोस्तों की जान चली गई। हादसा करमदी रोड फोरलेन पर स्थित एचपी पेट्रोल पंप के पास हुआ, जहां अंधेरा होने के कारण उनकी बाइक डिवाइडर से टकरा गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि दोनों युवकों के सिर में गंभीर चोटें आईं और उनकी मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद पूरे इलाके में शोक का माहौल है, जबकि पुलिस दुर्घटना के सभी पहलुओं की जांच कर रही है।

    जानकारी के अनुसार लक्ष्मीनगर निवासी 20 वर्षीय केशव परिहार अपने दोस्त 25 वर्षीय शोएब उर्फ शाहिद के साथ करमदी गांव से बाइक पर सवार होकर रतलाम लौट रहे थे। रात करीब 10 बजे जब वे करमदी फोरलेन पर एचपी पेट्रोल पंप के पास पहुंचे, तब वहां स्ट्रीट लाइट बंद होने के कारण सड़क पर पर्याप्त रोशनी नहीं थी। इसी दौरान उनकी बाइक अनियंत्रित होकर डिवाइडर से जा टकराई। टक्कर इतनी तेज थी कि दोनों युवक सड़क पर गिर पड़े और उनके सिर में गंभीर चोटें आईं। हादसे के बाद सड़क पर काफी खून फैल गया।

    घटना की आवाज सुनकर आसपास मौजूद लोग मौके पर पहुंचे और तत्काल डायल-112 को सूचना दी। सूचना मिलते ही पुलिस टीम घटनास्थल पर पहुंची और दोनों घायलों को मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले जाया गया। हालांकि डॉक्टरों ने जांच के बाद दोनों को मृत घोषित कर दिया। सोमवार सुबह दोनों शवों का पोस्टमार्टम कराया गया, जिसके बाद उन्हें परिजनों को सौंपने की प्रक्रिया शुरू की गई।

    मृतक केशव परिहार डेकोरेशन का काम करता था। उसके पिता फूलमंडी क्षेत्र में चाय की दुकान संचालित करते हैं। वहीं शोएब उर्फ शाहिद एक आइसक्रीम पार्लर पर कार्यरत था और उसके पिता शहर में फल का ठेला लगाकर परिवार का पालन-पोषण करते हैं। दोनों युवकों की असमय मौत से परिवारों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है और मोहल्ले में मातम का माहौल है।

    जांच के दौरान यह भी जानकारी सामने आई कि दोनों दोस्तों के साथ उनका एक अन्य साथी धर्मेंद्र राठौर भी करमदी से निकला था। रास्ते में वह पेट्रोल पंप पर काम करने वाले अपने एक परिचित से मिलने के लिए रुक गया, जबकि केशव और शोएब आगे निकल गए। कुछ ही देर बाद सड़क हादसे की सूचना मिलने पर उसे घटना का पता चला। यदि वह भी उनके साथ आगे बढ़ा होता तो हादसे का शिकार हो सकता था।

    माणकचौक थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर दुर्घटना के कारणों की जांच शुरू कर दी है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि हादसे की मुख्य वजह केवल अंधेरा था या फिर तेज रफ्तार अथवा अन्य कोई कारण भी इसमें शामिल था। साथ ही घटनास्थल पर स्ट्रीट लाइट बंद रहने के कारणों की भी जानकारी जुटाई जा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस मार्ग पर पर्याप्त रोशनी और सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जाए ताकि भविष्य में इस तरह की दर्दनाक घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

  • NEET पेपर लीक: फास्ट ट्रैक कोर्ट की पहली जज का एक हफ्ते में तबादला, अब अजय गुप्ता करेंगे सुनवाई

    NEET पेपर लीक: फास्ट ट्रैक कोर्ट की पहली जज का एक हफ्ते में तबादला, अब अजय गुप्ता करेंगे सुनवाई


    नई दिल्ली। नीट पेपर लीक और सार्वजनिक परीक्षाओं में गड़बड़ी से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए गठित विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट में बड़ा प्रशासनिक बदलाव किया गया है। हाईकोर्ट ने विशेष अदालत की जज अनु ग्रोवर बलिगा का तबादला कर दिया है। उन्होंने 25 जुलाई को ही इस अदालत का कार्यभार संभाला था और एक सप्ताह पूरा होने से पहले ही उन्हें नई जिम्मेदारी सौंप दी गई। उनकी जगह अब विशेष जज अजय गुप्ता इस अदालत की कार्यवाही संभालेंगे।

    137 न्यायाधीशों के साथ हुआ तबादला
    हाईकोर्ट ने कुल 137 न्यायाधीशों के तबादले किए हैं। 23 जुलाई को अधिसूचित इस विशेष अदालत का गठन पेपर लीक और सार्वजनिक परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं से जुड़े आपराधिक मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए किया गया था। अब जज अनु ग्रोवर बलिगा को एनआईए अधिनियम के तहत गठित विशेष अदालत में नियुक्त किया गया है।

    आज चार्जशीट पर होगा विचार
    नीट पेपर लीक मामले की पहली सुनवाई 27 जुलाई को हुई थी, लेकिन बचाव पक्ष के आग्रह पर उसे स्थगित कर दिया गया था। अब सोमवार को अदालत सीबीआई द्वारा दाखिल चार्जशीट पर संज्ञान लेने के साथ-साथ दो आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर भी सुनवाई करेगी। सीबीआई इस मामले में 13 आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल कर चुकी है। सभी आरोपी फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं।

    सुप्रीम कोर्ट में भी अहम सुनवाई
    इधर, नीट पेपर लीक और परीक्षा में कथित अनियमितताओं के विरोध में हुए प्रदर्शनों के दौरान पुलिस कार्रवाई को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर भी सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ, जिसमें जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना शामिल हैं, इन याचिकाओं पर विचार करेगी।

    शीर्ष अदालत ने 28 जुलाई को राज्यों को निर्देश दिया था कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई न की जाए। साथ ही, जिन 18 वर्ष से कम आयु के प्रदर्शनकारियों का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है, उन्हें रिहा करने को कहा था। अदालत ने निष्पक्ष जांच पर जोर देते हुए कहा था कि कानून हाथ में लेने या किसी भी प्रकार की ज्यादती करने वालों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।

    त्वरित न्याय के लिए बनी विशेष अदालत
    सरकार ने नीट पेपर लीक प्रकरण में त्वरित न्याय सुनिश्चित करने के उद्देश्य से फास्ट ट्रैक कोर्ट के गठन की घोषणा की थी। सरकार का कहना है कि परीक्षा घोटालों के पीड़ितों को जल्द न्याय दिलाना प्राथमिकता है। इसके साथ ही पेपर लीक से जुड़े मामलों में सख्त सजा का प्रावधान करने के लिए संशोधन विधेयक लाने की भी तैयारी की जा रही है।