Author: bharati

  • अटारी-वाघा बॉर्डर पर पाकिस्तानी रेंजर की सलामी बनी चर्चा, भारतीय अधिकारी के जवाब ने क्यों खींचा सबका ध्यान

    अटारी-वाघा बॉर्डर पर पाकिस्तानी रेंजर की सलामी बनी चर्चा, भारतीय अधिकारी के जवाब ने क्यों खींचा सबका ध्यान

    नई दिल्ली । अटारी-वाघा सीमा पर आयोजित समारोह का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें एक पाकिस्तानी रेंजर भारतीय सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी को सलामी देता दिखाई देता है। इसके जवाब में भारतीय अधिकारी सलामी लौटाने के बजाय सिर हिलाकर अभिवादन करते नजर आते हैं। इसी दृश्य को लेकर सोशल मीडिया पर विभिन्न तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं और सैन्य परंपराओं को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

    वीडियो सामने आने के बाद कुछ पाकिस्तानी सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं ने सवाल उठाया कि भारतीय अधिकारी ने औपचारिक रूप से सलामी का जवाब क्यों नहीं दिया। उनका कहना था कि सैन्य परंपराओं के अनुसार सलामी का जवाब सलामी से ही दिया जाना चाहिए। हालांकि, इस बहस के बीच कई लोगों ने सैन्य प्रोटोकॉल और वरिष्ठ अधिकारियों की परंपराओं का हवाला देते हुए अलग दृष्टिकोण भी रखा।

    एक पाकिस्तानी सोशल मीडिया उपयोगकर्ता ने इस विषय पर टिप्पणी करते हुए कहा कि वरिष्ठ सैन्य अधिकारी हर परिस्थिति में सलामी लौटाने के लिए बाध्य नहीं होते। कई अवसरों पर वे सिर हिलाकर, मुस्कुराकर या मौखिक अभिवादन के माध्यम से भी सम्मान व्यक्त करते हैं। उनके अनुसार यह तरीका भी सैन्य शिष्टाचार का हिस्सा माना जाता है और इससे अधीनस्थ जवानों के प्रति सम्मान तथा सौहार्द का संदेश जाता है।

    सैन्य मामलों के जानकारों का भी मानना है कि विभिन्न देशों की सेनाओं में सलामी देने और उसका जवाब देने से जुड़े नियम परिस्थितियों, पद और आयोजन की प्रकृति के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं। हर औपचारिक कार्यक्रम में दोनों पक्षों के अधिकारियों द्वारा एक जैसी प्रतिक्रिया देना अनिवार्य नहीं होता। कई बार निर्धारित प्रोटोकॉल के तहत केवल सम्मान प्रकट करना ही पर्याप्त माना जाता है।

    विशेषज्ञों के अनुसार भारत और पाकिस्तान के बीच आयोजित सीमा समारोहों, ध्वज बैठक, कमांडर स्तर की वार्ता या अन्य आधिकारिक आयोजनों में दोनों देशों की सेनाएं तय सैन्य परंपराओं और प्रोटोकॉल का पालन करती हैं। इनका उद्देश्य सीमावर्ती क्षेत्रों में अनुशासन बनाए रखना और औपचारिक संवाद के दौरान पेशेवर माहौल कायम रखना होता है।

    अटारी-वाघा सीमा पर होने वाला बीटिंग रिट्रीट समारोह वर्षों से दोनों देशों के बीच सैन्य अनुशासन और औपचारिक परंपराओं का प्रतीक माना जाता है। इसमें दोनों देशों के सुरक्षा बल निर्धारित नियमों के अनुसार अपनी-अपनी भूमिका निभाते हैं। ऐसे आयोजनों में व्यक्तिगत व्यवहार भी सैन्य प्रोटोकॉल और पदानुक्रम के अनुरूप होता है।

    वायरल वीडियो ने भले ही सोशल मीडिया पर बहस को जन्म दिया हो, लेकिन सैन्य विशेषज्ञों का कहना है कि इसे किसी असामान्य घटना के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उनके अनुसार भारतीय अधिकारी द्वारा सिर हिलाकर अभिवादन करना भी सम्मान प्रकट करने का एक स्वीकृत तरीका माना जाता है और यह सैन्य शिष्टाचार के दायरे में आता है।

    इस घटना ने एक बार फिर यह स्पष्ट किया है कि सैन्य परंपराएं केवल सलामी तक सीमित नहीं होतीं, बल्कि उनमें अनुशासन, पदानुक्रम, औपचारिक प्रोटोकॉल और पारस्परिक सम्मान जैसे कई महत्वपूर्ण पहलू शामिल होते हैं। यही कारण है कि अलग-अलग परिस्थितियों में अधिकारियों की प्रतिक्रिया भी निर्धारित नियमों और प्रचलित सैन्य परंपराओं के अनुरूप अलग हो सकती है।

  • PoK चुनाव पर पाकिस्तान में बढ़ा सियासी घमासान, PML-N ने बहुमत का दावा किया तो बिलावल ने उठाए गंभीर सवाल

    PoK चुनाव पर पाकिस्तान में बढ़ा सियासी घमासान, PML-N ने बहुमत का दावा किया तो बिलावल ने उठाए गंभीर सवाल

    नई दिल्ली । पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण के बाद राजनीतिक विवाद और गहरा गया है। मतगणना पूरी होने से पहले ही पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) ने साधारण बहुमत हासिल कर सरकार बनाने का दावा कर दिया है। दूसरी ओर पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) के अध्यक्ष बिलावल भुट्टो जरदारी ने चुनाव प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाते हुए बड़े पैमाने पर धांधली के आरोप लगाए हैं। उन्होंने चुनाव आयोग पर शिकायतों की अनदेखी करने का आरोप लगाया और विवादित सीटों पर दोबारा मतदान कराने की मांग की है।

    प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के सलाहकार राणा सनाउल्ला ने दावा किया कि 45 सदस्यीय विधानसभा में उनकी पार्टी को सरकार बनाने के लिए आवश्यक समर्थन मिल चुका है। उनके अनुसार दूसरे चरण में पीएमएल-एन ने 13 सीटों पर जीत दर्ज की है और मुजफ्फराबाद क्षेत्र की सात सीटों में से चार पर सफलता हासिल की है। उन्होंने कहा कि पार्टी कुल 23 सीटों तक पहुंच गई है, जिससे उसे साधारण बहुमत प्राप्त हो गया है। वहीं पीपीपी के हिस्से में मुजफ्फराबाद की तीन सीटें आने का दावा किया गया।

    इन दावों के बीच बिलावल भुट्टो जरदारी ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि चुनाव के दूसरे चरण में व्यापक स्तर पर अनियमितताएं हुई हैं। उनका आरोप है कि उनकी पार्टी ने चुनाव आयोग के समक्ष कई शिकायतें दर्ज कराईं, लेकिन उन पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने कहा कि यदि चुनाव आयोग समय रहते शिकायतों पर कार्रवाई करता तो उसकी विश्वसनीयता बनी रहती। बिलावल ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी चुनाव परिणामों का लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करेगी और जिन निर्वाचन क्षेत्रों में धांधली के आरोप हैं वहां पुनर्मतदान की मांग करेगी।

    चुनाव प्रक्रिया के दौरान कई इलाकों में तनावपूर्ण स्थिति भी देखने को मिली। मतदान केंद्रों तक चुनाव कर्मियों को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच पहुंचाया गया। सुरक्षा के लिए स्थानीय पुलिस के साथ पंजाब और सिंध से अतिरिक्त पुलिस बल की भी तैनाती की गई। इसके बावजूद कई स्थानों पर विरोध प्रदर्शन हुए और प्रदर्शनकारियों ने सड़कें अवरुद्ध कर मतदान प्रक्रिया का विरोध किया। कुछ इलाकों में मतदान प्रभावित होने की भी खबरें सामने आईं।

    प्रतिबंधित जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) से जुड़े प्रदर्शनकारियों ने चुनाव प्रक्रिया का विरोध करते हुए आरोप लगाया कि विधानसभा की 12 विवादित सीटों को लेकर पारदर्शिता नहीं बरती जा रही है। संगठन का कहना है कि इन सीटों के जरिए राजनीतिक समीकरण प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है। प्रदर्शनकारियों ने यह भी आरोप लगाया कि उनकी शिकायतों और विरोध प्रदर्शनों को पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया। चुनाव के पहले चरण के दौरान भी सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पों की घटनाएं सामने आई थीं, जिससे पूरे क्षेत्र में पहले से ही तनाव का माहौल बना हुआ था।

    पीओके की 45 सदस्यीय विधानसभा के लिए चुनाव तीन चरणों में कराए जा रहे हैं। पहले चरण में मीरपुर डिवीजन की 13 सीटों पर मतदान हुआ था, जबकि दूसरे चरण में मुजफ्फराबाद और शरणार्थी सीटों पर वोट डाले गए। तीसरे चरण का मतदान पुंछ डिवीजन की नौ सीटों पर निर्धारित है। इस बीच भारत लगातार यह दोहराता रहा है कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख सहित पाकिस्तान के कब्जे वाले सभी क्षेत्र भारत के अभिन्न और अविभाज्य अंग हैं तथा वहां कराया जा रहा चुनाव भारत के दृष्टिकोण से वैध नहीं माना जाता। ऐसे में चुनावी परिणामों के साथ-साथ राजनीतिक विवाद और विरोध प्रदर्शन आने वाले दिनों में भी चर्चा का विषय बने रह सकते हैं।

  • सीमा पर बांध हटाने के आरोप से बढ़ा तनाव, भारत-नेपाल अधिकारियों की बातचीत पर टिकी निगाहें

    सीमा पर बांध हटाने के आरोप से बढ़ा तनाव, भारत-नेपाल अधिकारियों की बातचीत पर टिकी निगाहें


    नई दिल्ली । 
    भारत-नेपाल सीमा पर एक बार फिर तनाव की स्थिति बन गई है। नेपाल के नवलपरासी वेस्ट जिले में स्थानीय लोगों ने भारतीय सुरक्षाकर्मियों पर नेपाल की सीमा में प्रवेश कर अस्थायी मिट्टी के बांध को हटाने का आरोप लगाया है। इस घटना के बाद सीमा क्षेत्र में कुछ समय के लिए तनावपूर्ण माहौल बन गया। स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं तथा मामले के समाधान के लिए दोनों देशों के अधिकारियों के बीच बातचीत की प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीद जताई जा रही है।

    बताया जा रहा है कि संबंधित अस्थायी बांध स्थानीय ग्रामीणों ने नारायणी नदी के बढ़ते जलस्तर और संभावित बाढ़ से अपने गांवों की सुरक्षा के उद्देश्य से बनाया था। ग्रामीणों का कहना है कि यह संरचना बारिश के मौसम में नदी का पानी आबादी वाले क्षेत्रों में प्रवेश करने से रोकने के लिए तैयार की गई थी। इसी बांध को हटाए जाने के आरोप के बाद स्थानीय लोगों में नाराजगी देखने को मिली।

    घटना के दौरान स्थानीय नागरिकों और भारतीय सुरक्षाकर्मियों के बीच कहासुनी होने की भी जानकारी सामने आई है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जैसे ही लोगों ने बांध के पास गतिविधियां देखीं, बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंच गए और विरोध दर्ज कराया। स्थिति को देखते हुए नेपाल के सुरक्षा बल भी घटनास्थल पर पहुंचे और दोनों पक्षों के बीच तनाव कम कराने का प्रयास किया।

    नेपाल के स्थानीय सुरक्षा अधिकारियों का कहना है कि पहले भी इस क्षेत्र में बाढ़ सुरक्षा से जुड़े निर्माण कार्यों को लेकर कई बार चर्चा हो चुकी है। उनका दावा है कि स्थायी संरचना के निर्माण में बाधाएं आने के बाद ग्रामीणों ने अस्थायी रूप से मिट्टी का बांध तैयार किया था, ताकि मानसून के दौरान बस्तियों को नुकसान से बचाया जा सके। इसी कारण ग्रामीण इस संरचना को अपने लिए महत्वपूर्ण मानते हैं।

    जिला प्रशासन ने घटना की पुष्टि करते हुए कहा है कि सीमा क्षेत्र में बांध को लेकर विवाद की जानकारी मिली है। प्रशासन का कहना है कि मामले की वास्तविक परिस्थितियों का आकलन किया जा रहा है और दोनों देशों के संबंधित अधिकारियों के बीच समन्वय स्थापित किया जा रहा है। उद्देश्य यह है कि सीमा पर शांति और सामान्य स्थिति बनी रहे तथा किसी भी प्रकार का तनाव आगे न बढ़े।

    भारत और नेपाल के बीच खुली सीमा होने के कारण दोनों देशों के नागरिकों का लंबे समय से सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक स्तर पर गहरा जुड़ाव रहा है। हालांकि समय-समय पर सीमा निर्धारण, नदी प्रबंधन और बाढ़ नियंत्रण से जुड़े मुद्दों पर स्थानीय स्तर पर विवाद सामने आते रहे हैं। ऐसे मामलों का समाधान आमतौर पर प्रशासनिक और कूटनीतिक संवाद के माध्यम से किया जाता है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि सीमा क्षेत्रों में नदी के बहाव, बाढ़ नियंत्रण और सुरक्षात्मक निर्माण जैसे विषय दोनों देशों के लिए समान रूप से महत्वपूर्ण हैं। ऐसे में किसी भी निर्माण या कार्रवाई को लेकर स्थानीय प्रशासन और संबंधित एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक होता है, ताकि सीमा क्षेत्र में रहने वाले लोगों के हित सुरक्षित रह सकें।

    फिलहाल दोनों देशों के अधिकारियों के बीच प्रस्तावित वार्ता पर सभी की निगाहें टिकी हैं। उम्मीद की जा रही है कि बातचीत के माध्यम से स्थिति स्पष्ट होगी और सीमा क्षेत्र में उत्पन्न विवाद का शांतिपूर्ण एवं पारस्परिक सहमति से समाधान निकाला जाएगा।

  • तीन राज्यों के उपचुनाव: दतिया में कांग्रेस, गुजरात में भाजपा की जीत, बांकीपुर में प्रशांत किशोर की बड़ी बढ़त

    तीन राज्यों के उपचुनाव: दतिया में कांग्रेस, गुजरात में भाजपा की जीत, बांकीपुर में प्रशांत किशोर की बड़ी बढ़त

    नई दिल्ली। बिहार, मध्य प्रदेश और गुजरात की तीन विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनावों के नतीजे सामने आ गए हैं। मध्य प्रदेश की दतिया सीट पर कांग्रेस ने जीत दर्ज की, जबकि गुजरात की मंजलपुर सीट भाजपा के खाते में गई। वहीं बिहार की बांकीपुर सीट पर मतगणना के दौरान जनसुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर निर्णायक बढ़त बनाए हुए हैं।

    बांकीपुर में प्रशांत किशोर आगे
    बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट पर 27वें राउंड की मतगणना तक जनसुराज पार्टी के उम्मीदवार प्रशांत किशोर को 59,213 वोट मिले, जबकि भाजपा उम्मीदवार नीरज कुमार को 39,794 वोट प्राप्त हुए। इस तरह प्रशांत किशोर 19,419 वोटों से आगे चल रहे हैं। बांकीपुर सीट भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष नितिन नवीन का गढ़ मानी जाती है। उनके राज्यसभा जाने के बाद यह सीट खाली हुई थी, जिसके चलते उपचुनाव कराया गया।

    बढ़त के बाद प्रशांत किशोर ने कहा कि उनके विधायक बनने से बांकीपुर रातोंरात नहीं बदलेगा, लेकिन अगले दो-तीन महीनों में लोग सकारात्मक बदलाव जरूर महसूस करेंगे। उन्होंने भाजपा नेतृत्व से बिहार के लिए बेहतर मुख्यमंत्री चुनने की भी अपील की।

    दतिया में कांग्रेस की लगातार दूसरी जीत

    मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर कांग्रेस उम्मीदवार घनश्याम सिंह ने भाजपा के आशुतोष तिवारी को 6,056 वोटों से हराकर जीत दर्ज की। भाजपा ने इस सीट पर पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटकर आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाया था। दिलचस्प बात यह रही कि डॉ. नरोत्तम मिश्रा के मतदान केंद्र बूथ नंबर-121 पर भी कांग्रेस को बढ़त मिली। यहां कांग्रेस को 291 और भाजपा को 264 वोट मिले। जीत के बाद घनश्याम सिंह ने कहा कि यह जनादेश देशभर में संदेश देगा और जनता बदलाव चाहती है।

    गुजरात के मंजलपुर में भाजपा की बड़ी जीत
    गुजरात की मंजलपुर विधानसभा सीट पर भाजपा उम्मीदवार सतेन्द्रभाई (सतीश) पटेल ने कांग्रेस के भिखाभाई रबारी को 30,630 वोटों के अंतर से हराया। जीत के बाद सतीश पटेल ने मतदाताओं का आभार जताते हुए कहा कि जनता ने उन पर भी वैसा ही भरोसा जताया है जैसा पहले उनके नेतृत्व पर जताया था। वहीं कांग्रेस उम्मीदवार भिखाभाई रबारी ने हार स्वीकार करते हुए मतदान के अंतिम चरण में भय का माहौल बनाए जाने का आरोप लगाया।

    30 जुलाई को हुआ था मतदा

    तीनों विधानसभा सीटों पर 30 जुलाई को मतदान हुआ था। गुजरात की मंजलपुर सीट पर 37.05 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया था। तीनों राज्यों के उपचुनावों के नतीजों को आगामी विधानसभा चुनावों से पहले राजनीतिक दलों के लिए महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।

  • दतिया उपचुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह विजयी, पटवारी बोले-ये BJP के कुशासन के विरुद्ध शंखनाद

    दतिया उपचुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह विजयी, पटवारी बोले-ये BJP के कुशासन के विरुद्ध शंखनाद

    दतिया। मध्‍य प्रदेश के दतिया उपचुनाव के लिए आज यानि सोमवार को मतगणना हुई। सबसे पहले टेबल नंबर 21 पर 451 डाक मतपत्रों की गिनती पूरी की गई। फिर ईवीएम की मतों की गिनती की गई। इस चुनाव में भाजपा और कांग्रेस के मुख्य प्रत्याशियों समेत कुल 21 प्रत्याशी मैदान में थे।
    प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने दतिया उप चुनाव पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह कार्यकर्ताओं की तपस्या की जीत है। हमारा एक-एक कार्यकर्ता मैदान में आखिरी समय तक डाटा रहा।
    दतिया के मतदाताओं ने भाजपा सरकार के कुशासन, भ्रष्टाचार की व्यवस्था, अनुसूचित जाति- जनजाति, पिछड़ वर्ग पर हो रहे अत्याचार, बेरोजगारी को लेकर अपना मत दिया है। किसान की जो उपेक्षा भाजपा सरकार में हो रही है, उसकी नाराजगी भी सामने आई। वहीं, पार्टी नेता राहुल गांधी द्वारा जनहित में उठाए जा रहे मुद्दों का समर्थन भी जनादेश के माध्यम से सामने आया है। मैं दतिया के मतदाताओं को साधुवाद देता हूं जिन्होंने निडरता के साथ लोकतंत्र की रक्षा के लिए मतदान किया। यह एक प्रकार से भाजपा के कुशासन के विरुद्ध शंखनाद है।
  • आज कितना बदला सोने-चांदी का रेट? खरीदारी से पहले 24K, 22K, 18K के ताजा भाव जरूर देखें

    आज कितना बदला सोने-चांदी का रेट? खरीदारी से पहले 24K, 22K, 18K के ताजा भाव जरूर देखें

    नई दिल्ली । 3 अगस्त को सर्राफा बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में सीमित बदलाव देखने को मिला। पिछले कारोबारी दिन की तुलना में सोने के विभिन्न कैरेट की कीमतों में मामूली अंतर दर्ज किया गया, जबकि चांदी के भाव में भी हल्की गिरावट देखने को मिली। हालांकि कीमतों में बड़ा बदलाव नहीं होने से बाजार में स्थिरता का माहौल बना हुआ है और खरीदारी की योजना बना रहे उपभोक्ताओं के लिए यह स्थिति महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

    आज 24 कैरेट सोने का भाव 1,44,210 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया। वहीं 22 कैरेट सोना 1,32,190 रुपये प्रति 10 ग्राम और 18 कैरेट सोना 1,08,150 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर कारोबार करता नजर आया। पिछले दिन की तुलना में इन कीमतों में केवल मामूली बदलाव हुआ है, जिससे यह साफ है कि फिलहाल बाजार में तेज उतार-चढ़ाव नहीं देखा जा रहा है।

    चांदी की बात करें तो आज एक किलोग्राम चांदी का भाव 2,34,900 रुपये दर्ज किया गया। पिछले कारोबारी दिन के मुकाबले इसमें करीब 100 रुपये की कमी देखने को मिली। हालांकि यह गिरावट बहुत बड़ी नहीं मानी जा रही, लेकिन लगातार कीमतों पर नजर रखने वाले निवेशकों और खरीदारों के लिए यह बदलाव महत्वपूर्ण हो सकता है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार, डॉलर की चाल, वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां और निवेशकों की मांग जैसे कई कारक सोने और चांदी की कीमतों को प्रभावित करते हैं। यही वजह है कि घरेलू बाजार में भी समय-समय पर कीमतों में बदलाव देखने को मिलता है। फिलहाल बाजार में स्थिरता बनी हुई है, जिससे उपभोक्ताओं को अचानक बढ़ी कीमतों का सामना नहीं करना पड़ रहा।

    ज्वेलरी खरीदने की योजना बना रहे लोगों को केवल कीमत पर ही नहीं, बल्कि सोने की शुद्धता पर भी विशेष ध्यान देना चाहिए। आभूषण खरीदते समय बीआईएस हॉलमार्क और छह अंकों वाला एचयूआईडी कोड अवश्य जांचना चाहिए। इससे आभूषण की प्रमाणिकता सुनिश्चित होती है और भविष्य में किसी भी प्रकार की परेशानी की संभावना कम हो जाती है।

    चांदी खरीदते समय भी गुणवत्ता की जांच आवश्यक मानी जाती है। बाजार में उपलब्ध चांदी पर बीआईएस हॉलमार्क और उसकी शुद्धता का प्रमाण देखना उपभोक्ताओं के हित में होता है। विशेष रूप से 925 स्टर्लिंग सिल्वर को बेहतर गुणवत्ता का मानक माना जाता है, इसलिए खरीदारी से पहले इसकी पुष्टि करना उचित रहता है।

    ध्यान देने वाली बात यह भी है कि बाजार में बताए जाने वाले सोने के मूल भाव में मेकिंग चार्ज, जीएसटी और अन्य शुल्क शामिल नहीं होते। आभूषण खरीदते समय अंतिम बिल इन अतिरिक्त शुल्कों के कारण अधिक हो सकता है। इसलिए ग्राहकों को खरीदारी से पहले कुल भुगतान की जानकारी लेना और बिल अवश्य प्राप्त करना चाहिए।

    त्योहारी सीजन और शादी-विवाह के समय सोने-चांदी की मांग बढ़ने की संभावना रहती है। ऐसे में नियमित रूप से बाजार भाव की जानकारी लेकर और प्रमाणित गुणवत्ता वाले आभूषण खरीदकर उपभोक्ता बेहतर निर्णय ले सकते हैं। वर्तमान में कीमतों में बड़ा उतार-चढ़ाव नहीं होने से खरीदारी की योजना बनाने वालों के लिए स्थिति अपेक्षाकृत संतुलित बनी हुई है।

  • एलपीजी उपभोक्ताओं के लिए अहम अपडेट, तय समय सीमा से पहले e-KYC नहीं कराया तो बढ़ सकती हैं मुश्किलें

    एलपीजी उपभोक्ताओं के लिए अहम अपडेट, तय समय सीमा से पहले e-KYC नहीं कराया तो बढ़ सकती हैं मुश्किलें

    नई दिल्ली । देशभर के एलपीजी उपभोक्ताओं के लिए एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक प्रक्रिया को समय पर पूरा करना जरूरी हो गया है। गैस कनेक्शन से जुड़े रिकॉर्ड को अधिक पारदर्शी और प्रमाणित बनाने के उद्देश्य से उपभोक्ताओं को निर्धारित समय सीमा के भीतर e-KYC कराने की सलाह दी गई है। यदि तय अवधि तक यह प्रक्रिया पूरी नहीं की जाती है, तो भविष्य में गैस सिलेंडर की आपूर्ति या उससे जुड़ी कुछ सेवाओं का लाभ लेने में कठिनाई आ सकती है।

    e-KYC का उद्देश्य उपभोक्ताओं की पहचान का सत्यापन करना और एलपीजी कनेक्शन से संबंधित जानकारी को अद्यतन रखना है। इससे वास्तविक लाभार्थियों की पहचान सुनिश्चित होगी और फर्जी या निष्क्रिय कनेक्शनों पर प्रभावी नियंत्रण लगाने में सहायता मिलेगी। साथ ही गैस वितरण प्रणाली को अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने की दिशा में भी यह कदम महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    उपभोक्ताओं को सलाह दी गई है कि वे 16 अगस्त की निर्धारित समय सीमा से पहले अपनी e-KYC प्रक्रिया पूरी कर लें। इसके लिए गैस एजेंसी, अधिकृत सेवा केंद्र या उपलब्ध डिजिटल माध्यमों का उपयोग किया जा सकता है। कई स्थानों पर उपभोक्ताओं की सुविधा के लिए विशेष शिविर भी लगाए जा रहे हैं, जहां आवश्यक दस्तावेजों के साथ पहचान सत्यापन की प्रक्रिया पूरी कराई जा रही है।

    e-KYC के दौरान आधार से जुड़ी जानकारी और बायोमेट्रिक अथवा अन्य निर्धारित पहचान प्रक्रिया के माध्यम से उपभोक्ता का सत्यापन किया जाता है। प्रक्रिया पूरी होने के बाद संबंधित गैस कनेक्शन का रिकॉर्ड अपडेट हो जाता है, जिससे भविष्य में किसी प्रकार की तकनीकी या दस्तावेजी परेशानी की संभावना कम हो जाती है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर e-KYC पूरा करने से उपभोक्ताओं को गैस वितरण, सब्सिडी से जुड़ी सेवाओं और अन्य सुविधाओं का लाभ बिना किसी रुकावट के मिलता रहेगा। वहीं, जिन उपभोक्ताओं की जानकारी अपडेट नहीं होगी, उन्हें भविष्य में सेवा प्राप्त करने के दौरान अतिरिक्त सत्यापन या अन्य औपचारिकताओं से गुजरना पड़ सकता है।

    ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों के उपभोक्ताओं के लिए भी यह प्रक्रिया समान रूप से महत्वपूर्ण है। ऐसे क्षेत्रों में संबंधित एजेंसियां लोगों को जागरूक करने के साथ-साथ आवश्यक सहायता भी उपलब्ध करा रही हैं, ताकि कोई भी पात्र उपभोक्ता समय सीमा के कारण असुविधा का सामना न करे। वरिष्ठ नागरिकों और तकनीकी जानकारी कम रखने वाले लोगों को भी परिवार या स्थानीय सेवा केंद्र की मदद से यह प्रक्रिया जल्द पूरी करने की सलाह दी गई है।

    उपभोक्ताओं को यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि उनके मोबाइल नंबर, पता और अन्य व्यक्तिगत विवरण गैस कनेक्शन के रिकॉर्ड में सही दर्ज हों। यदि किसी जानकारी में बदलाव हुआ है, तो उसे e-KYC के दौरान अपडेट कराया जा सकता है। इससे भविष्य में गैस बुकिंग, वितरण और अन्य सेवाओं में किसी प्रकार की समस्या नहीं आएगी।

    एलपीजी उपभोक्ताओं के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यही है कि अंतिम समय तक प्रतीक्षा करने के बजाय जल्द से जल्द e-KYC की प्रक्रिया पूरी कर ली जाए। समय सीमा के भीतर आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने से गैस सिलेंडर की नियमित आपूर्ति, रिकॉर्ड का सही रखरखाव और सभी उपलब्ध सेवाओं का लाभ बिना किसी बाधा के मिलता रहेगा।

  • पूर्व CSK खिलाड़ी वंश बेदी ने चौके-छक्कों से पलटा मुकाबला, सेंट्रल दिल्ली किंग्स ने दर्ज की शानदार जीत

    पूर्व CSK खिलाड़ी वंश बेदी ने चौके-छक्कों से पलटा मुकाबला, सेंट्रल दिल्ली किंग्स ने दर्ज की शानदार जीत

    नई दिल्ली । दिल्ली प्रीमियर लीग (डीपीएल) 2026 में सेंट्रल दिल्ली किंग्स ने एक रोमांचक मुकाबले में आउटर दिल्ली वॉरियर्स को चार विकेट से हराकर शानदार जीत दर्ज की। बारिश के कारण 10-10 ओवर का किया गया यह मुकाबला आखिरी गेंदों तक रोमांच से भरपूर रहा। जीत के सबसे बड़े नायक रहे चेन्नई सुपर किंग्स के पूर्व खिलाड़ी वंश बेदी, जिन्होंने दबाव की स्थिति में विस्फोटक बल्लेबाजी करते हुए टीम को यादगार जीत दिलाई।

    अरुण जेटली स्टेडियम में खेले गए इस मुकाबले में टॉस हारने के बाद पहले बल्लेबाजी करते हुए आउटर दिल्ली वॉरियर्स ने निर्धारित 10 ओवर में पांच विकेट के नुकसान पर 130 रन का मजबूत स्कोर बनाया। छोटे प्रारूप में यह लक्ष्य चुनौतीपूर्ण माना जा रहा था और सेंट्रल दिल्ली किंग्स के सामने 131 रन बनाने की कठिन चुनौती थी।

    आउटर दिल्ली वॉरियर्स की ओर से यजस शर्मा ने 16 गेंदों में 39 रन की तेज पारी खेली। वहीं मोहित पंवार ने 18 गेंदों पर 37 रन बनाकर टीम की पारी को मजबूती दी। अक्षय सैनी ने भी 15 गेंदों में 31 रन जोड़ते हुए स्कोर को 130 तक पहुंचाने में अहम योगदान दिया।

    लक्ष्य का पीछा करने उतरी सेंट्रल दिल्ली किंग्स को कप्तान यश ढुल ने तेज शुरुआत दिलाई। उन्होंने सिर्फ 16 गेंदों में 35 रन बनाए, जिसमें दो चौके और तीन छक्के शामिल रहे। इसके बाद जोंटी सिद्धू ने 12 गेंदों में 25 रन बनाकर रन गति बनाए रखी। हालांकि बीच के ओवरों में लगातार विकेट गिरने से मुकाबला एक बार फिर संतुलन की स्थिति में पहुंच गया।

    ऐसे समय में वंश बेदी ने जिम्मेदारी संभाली और आक्रामक अंदाज में बल्लेबाजी करते हुए मैच का रुख बदल दिया। उन्होंने केवल 16 गेंदों में नाबाद 47 रन बनाए। इस पारी के दौरान उनके बल्ले से तीन चौके और पांच शानदार छक्के निकले। लगभग 294 के स्ट्राइक रेट से खेली गई उनकी पारी ने विपक्षी टीम की जीत की उम्मीदों पर पानी फेर दिया।

    मुकाबले का सबसे रोमांचक क्षण अंतिम दो ओवरों में देखने को मिला। नौवें ओवर की आखिरी चार गेंदों पर वंश बेदी ने एक चौका और लगातार तीन छक्के लगाकर मैच पूरी तरह अपनी टीम के पक्ष में कर दिया। इसके बाद अंतिम ओवर में भी उन्होंने लगातार दो चौके और एक छक्का जड़ते हुए टीम को एक गेंद शेष रहते 133 रन तक पहुंचा दिया। सेंट्रल दिल्ली किंग्स ने 9.5 ओवर में छह विकेट खोकर लक्ष्य हासिल कर लिया।

    इस जीत के बाद वंश बेदी का एक वीडियो भी चर्चा का विषय बना, जिसमें वह लोकप्रिय फिल्मी संवाद ‘फ्लावर नहीं, फायर हूं मैं’ कहते नजर आए। उनकी यह प्रतिक्रिया सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गई और क्रिकेट प्रशंसकों ने उनकी मैच जिताऊ पारी की जमकर सराहना की।

    वंश बेदी की इस विस्फोटक बल्लेबाजी ने एक बार फिर साबित किया कि सीमित ओवरों के क्रिकेट में दबाव के क्षणों में संयम और आक्रामकता का सही संतुलन किसी भी मैच का परिणाम बदल सकता है। उनकी शानदार पारी ने सेंट्रल दिल्ली किंग्स को टूर्नामेंट में एक और महत्वपूर्ण जीत दिलाई और टीम का आत्मविश्वास भी बढ़ाया।

  • फिक्सिंग मामले में ICC का बड़ा एक्शन, अमेरिका के खिलाड़ी पर 8 साल का प्रतिबंध

    फिक्सिंग मामले में ICC का बड़ा एक्शन, अमेरिका के खिलाड़ी पर 8 साल का प्रतिबंध

    नई दिल्ली । अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) ने भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए अमेरिका के क्रिकेटर अखिलेश रेड्डी पर आठ वर्षों का प्रतिबंध लगा दिया है। आईसीसी की भ्रष्टाचार-रोधी ट्रिब्यूनल ने उन्हें 2025 अबू धाबी टी10 लीग से जुड़े मामले में एंटी-करप्शन कोड के कई प्रावधानों का उल्लंघन करने का दोषी पाया। इसके बाद उन्हें सभी प्रकार की क्रिकेट गतिविधियों से आठ साल के लिए निलंबित कर दिया गया है।

    आईसीसी के अनुसार यह मामला वर्ष 2025 में संयुक्त अरब अमीरात में आयोजित अबू धाबी टी10 लीग से जुड़ा है। इस प्रतियोगिता के लिए एमिरेट्स क्रिकेट बोर्ड ने आईसीसी को नामित भ्रष्टाचार-रोधी अधिकारी की जिम्मेदारी सौंपी थी। जांच के दौरान अखिलेश रेड्डी की भूमिका संदेह के दायरे में आई, जिसके बाद विस्तृत जांच और सुनवाई की प्रक्रिया पूरी की गई।

    आईसीसी ने बताया कि अखिलेश रेड्डी को भ्रष्टाचार-रोधी संहिता के तीन अलग-अलग प्रावधानों के उल्लंघन का दोषी पाया गया। उन पर मैच के परिणाम या उसके किसी पहलू को प्रभावित करने की कोशिश करने, दूसरे खिलाड़ी को ऐसे कृत्य के लिए उकसाने तथा जांच के दौरान महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्यों को नष्ट कर जांच में बाधा पहुंचाने के आरोप सिद्ध हुए।

    जांच में यह भी सामने आया कि खिलाड़ी ने अपने मोबाइल उपकरण से डेटा और संदेश हटाने की कोशिश की, जो भ्रष्टाचार-रोधी अधिकारियों की जांच के लिए महत्वपूर्ण हो सकते थे। आईसीसी ने इसे जांच प्रक्रिया में सहयोग न करने और साक्ष्य मिटाने का गंभीर मामला माना।

    आईसीसी के आदेश के अनुसार यह प्रतिबंध 21 नवंबर 2025 से प्रभावी माना जाएगा। इसी तारीख को अखिलेश रेड्डी को अस्थायी रूप से निलंबित किया गया था। अब इस अवधि को शामिल करते हुए वह अगले आठ वर्षों तक किसी भी स्तर की क्रिकेट गतिविधि में भाग नहीं ले सकेंगे।

    अखिलेश रेड्डी का अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट करियर अभी शुरुआती दौर में ही था। उन्होंने अब तक अमेरिका के लिए चार टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले खेले हैं। इन मैचों में गेंदबाजी करते हुए उनके नाम एक विकेट दर्ज है, जबकि उन्हें बल्लेबाजी का अवसर नहीं मिला। इसके अलावा वह 2025 अबू धाबी टी10 लीग में एस्पिन स्टैलियन्स टीम का हिस्सा भी रहे थे।

    आईसीसी लगातार क्रिकेट में भ्रष्टाचार रोकने के लिए अपनी निगरानी व्यवस्था को मजबूत कर रही है। परिषद का कहना है कि मैच फिक्सिंग, स्पॉट फिक्सिंग और किसी भी प्रकार के भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में शून्य सहनशीलता की नीति अपनाई जाएगी। खिलाड़ियों और अन्य संबंधित व्यक्तियों से जांच एजेंसियों के साथ पूर्ण सहयोग की अपेक्षा की जाती है।

    इस कार्रवाई को क्रिकेट की पारदर्शिता और विश्वसनीयता बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। आईसीसी का मानना है कि खेल की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए भ्रष्टाचार के मामलों में त्वरित और कठोर कार्रवाई आवश्यक है। इसी नीति के तहत दोषी पाए जाने पर अखिलेश रेड्डी पर यह लंबा प्रतिबंध लगाया गया है।

  • बुमराह की जगह टीम इंडिया में जगह बनाने वाले आकिब नबी, जानिए कितनी है उनकी अनुमानित नेटवर्थ

    बुमराह की जगह टीम इंडिया में जगह बनाने वाले आकिब नबी, जानिए कितनी है उनकी अनुमानित नेटवर्थ

    नई दिल्ली । भारतीय क्रिकेट टीम में पहली बार जगह बनाने वाले जम्मू-कश्मीर के तेज गेंदबाज आकिब नबी इन दिनों चर्चा का केंद्र बने हुए हैं। श्रीलंका दौरे के लिए घोषित भारतीय टेस्ट टीम में उन्हें चोटिल जसप्रीत बुमराह के स्थान पर शामिल किया गया है। इस चयन के साथ ही उनके क्रिकेट करियर के अलावा उनकी कमाई और नेटवर्थ को लेकर भी दिलचस्पी बढ़ गई है। उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, वर्ष 2026 की शुरुआत तक आकिब नबी की अनुमानित कुल संपत्ति 10 से 15 करोड़ रुपये के बीच आंकी गई है।

    आकिब नबी पिछले कई वर्षों से घरेलू क्रिकेट में लगातार अच्छा प्रदर्शन करते रहे हैं। उन्होंने वर्ष 2018 से जम्मू-कश्मीर के लिए घरेलू क्रिकेट खेलना शुरू किया और 2020 में प्रथम श्रेणी क्रिकेट में पदार्पण किया। लगातार मेहनत और शानदार प्रदर्शन के दम पर उन्होंने खुद को देश के उभरते तेज गेंदबाजों में शामिल किया।

    उनके करियर में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब आईपीएल 2026 की नीलामी में दिल्ली कैपिटल्स ने उन्हें 8.40 करोड़ रुपये में अपनी टीम में शामिल किया। इस बड़ी बोली ने उन्हें सीजन के सबसे चर्चित अनकैप्ड खिलाड़ियों में जगह दिलाई। आईपीएल अनुबंध के बाद उनकी आय में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई और क्रिकेट जगत में उनकी पहचान तेजी से मजबूत हुई।

    घरेलू क्रिकेट में भी आकिब का प्रदर्शन प्रभावशाली रहा है। रणजी ट्रॉफी 2025-26 सीजन में उन्होंने सबसे अधिक 60 विकेट लेकर चयनकर्ताओं का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। इसी प्रदर्शन के आधार पर उन्हें राष्ट्रीय टीम के लिए मजबूत दावेदार माना जाने लगा था। अब भारतीय टेस्ट टीम में चयन के साथ उनका सपना भी पूरा हो गया है।

    आंकड़ों पर नजर डालें तो आकिब नबी अब तक 43 प्रथम श्रेणी मुकाबले खेल चुके हैं। इन मैचों की 71 पारियों में उन्होंने 162 विकेट हासिल किए हैं। इसके अलावा 36 लिस्ट-ए मैचों में उनके नाम 56 विकेट दर्ज हैं। टी20 प्रारूप में उन्होंने 39 मुकाबलों में 43 विकेट लेकर अपनी उपयोगिता साबित की है।

    आईपीएल में उन्हें अभी सीमित अवसर मिले हैं। अपने पहले आईपीएल सीजन में उन्होंने पांच मुकाबले खेले, हालांकि इन मैचों में उन्हें कोई विकेट नहीं मिला। इसके बावजूद फ्रेंचाइजी और चयनकर्ताओं ने उनकी प्रतिभा और घरेलू प्रदर्शन पर भरोसा जताया, जिसका परिणाम अब भारतीय टीम में चयन के रूप में सामने आया है।

    आईपीएल अनुबंध के बाद आकिब नबी की लोकप्रियता में भी तेजी से इजाफा हुआ है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, क्रिकेट के अलावा उन्हें विज्ञापन और ब्रांड एंडोर्समेंट के अवसर भी मिलने लगे हैं, जिससे उनकी आय के स्रोत बढ़े हैं। हालांकि उनके वाहन संग्रह या अन्य निजी संपत्तियों को लेकर अभी विस्तृत सार्वजनिक जानकारी उपलब्ध नहीं है।

    भारतीय टीम में चयन आकिब नबी के करियर का अब तक का सबसे बड़ा पड़ाव माना जा रहा है। श्रीलंका दौरे पर अच्छा प्रदर्शन उनके लिए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में स्थायी जगह बनाने का अवसर होगा। यदि वह इस मौके का पूरा फायदा उठाने में सफल रहते हैं तो आने वाले समय में उनकी पेशेवर पहचान के साथ-साथ उनकी कमाई और ब्रांड वैल्यू में भी उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिल सकती है।