Author: bharati

  • सुप्रीम कोर्ट ने TMC के चार फ्रीज बैंक खातों को संचालित करने की अनुमति देने से किया इनकार

    सुप्रीम कोर्ट ने TMC के चार फ्रीज बैंक खातों को संचालित करने की अनुमति देने से किया इनकार

    नई दिल्ली, 1 अक्टूबर 2026। सुप्रीम कोर्ट ने ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले तृणमूल कांग्रेस गुट को चार डेबिट-फ्रीज बैंक खातों को संचालित करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया है। इन चार खातों में करीब 804 करोड़ रुपये की राशि मौजूद है। TMC गुट ने पश्चिम बंगाल पुलिस की कार्रवाई को चुनौती देते हुए शीर्ष अदालत से इन खातों को संचालित करने की अनुमति मांगी थी। न्यायमूर्ति एम. एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति पी. बी. वराले की पीठ ने तत्काल राहत देने से इनकार करते हुए कलकत्ता हाई कोर्ट के उस आदेश में हस्तक्षेप करने से भी मना कर दिया, जिसमें खातों को संचालित करने की अंतरिम अनुमति देने से इनकार किया गया था।

    सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह फिलहाल मामले के गुण-दोष में नहीं जा रहा है, क्योंकि मुख्य मामला कलकत्ता हाई कोर्ट में लंबित है। पीठ ने हाई कोर्ट से मामले की सुनवाई जल्द पूरी करने का अनुरोध किया है। अदालत ने कहा कि निर्वाचन आयोग की ओर से चुनाव चिह्न पर रोक लगाए जाने के बाद इन बैंक खातों में मौजूद राशि पर अधिकार किसका है, यह महत्वपूर्ण सवाल अभी न्यायिक निर्णय के लिए लंबित है। ऐसे में शीर्ष अदालत ने इस स्तर पर खातों को संचालित करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया। पीठ ने स्पष्ट किया कि वह हाई कोर्ट के अंतरिम आदेश में हस्तक्षेप नहीं करना चाहती।

    यह मामला पहले फ्रीज किए गए तीन HDFC बैंक खातों से अलग है। TMC गुट ने जिन चार बैंक खातों को संचालित करने की अनुमति मांगी थी, उन्हें डेबिट लेनदेन के लिए फ्रीज किया गया था। पार्टी ने पश्चिम बंगाल पुलिस की कार्रवाई को चुनौती देते हुए इन खातों के संचालन की अनुमति मांगी थी। TMC गुट की ओर से कहा गया था कि खातों पर रोक के कारण पार्टी के कामकाज पर असर पड़ रहा है और इसलिए इन्हें संचालित करने की अनुमति दी जानी चाहिए। हालांकि, इस मांग पर तत्काल राहत देने से इनकार कर दिया गया है।

    इससे पहले 27 अगस्त को कलकत्ता हाई कोर्ट ने ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले TMC गुट को करीब 804 करोड़ रुपये वाले इन चार बैंक खातों को संचालित करने की अंतरिम अनुमति देने से इनकार कर दिया था। इसके बाद इस आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया गया। शीर्ष अदालत ने अब हाई कोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है। साथ ही लंबित मामले की सुनवाई जल्द पूरी करने का अनुरोध किया है। इस दौरान अदालत ने खातों में मौजूद राशि पर अधिकार को लेकर उठे सवाल को भी महत्वपूर्ण माना है।

    सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद चारों फ्रीज बैंक खातों को संचालित करने की मांग पर फिलहाल राहत नहीं मिली है। हालांकि, शीर्ष अदालत ने मामले के मूल विवाद पर कोई अंतिम राय नहीं दी है। अदालत के अनुसार, खातों में मौजूद धन पर अधिकार किसका है, यह सवाल अभी लंबित है और संबंधित न्यायिक प्रक्रिया के जरिए तय किया जाना बाकी है। 1 अक्टूबर को हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने केवल हाई कोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप से इनकार किया और मामले की सुनवाई जल्द पूरी करने का अनुरोध किया।

  • पिछोर में शराब तस्करी पर पुलिस की कार्रवाई 27 पेटी देशी प्लेन शराब के साथ 4.50 लाख की बलेनो जब्त

    पिछोर में शराब तस्करी पर पुलिस की कार्रवाई 27 पेटी देशी प्लेन शराब के साथ 4.50 लाख की बलेनो जब्त


    शिवपुरी । शिवपुरी जिले के पिछोर में पुलिस ने शराब के अवैध परिवहन के खिलाफ कार्रवाई करते हुए एक बलेनो कार से 27 पेटी देशी प्लेन शराब बरामद की है। पुलिस के अनुसार जब्त शराब की अनुमानित कीमत करीब 1 लाख 8 हजार रुपए है। कार्रवाई के दौरान कार चालक पुलिस को देखकर वाहन लेकर भागने लगा। पुलिस टीम ने उसका पीछा किया तो वह कच्चे रास्ते की ओर चला गया। आगे रास्ता बंद मिलने के बाद चालक कार छोड़कर अंधेरे का फायदा उठाते हुए मौके से फरार हो गया। पुलिस ने शराब और कार को कब्जे में लेकर आरोपी की तलाश शुरू कर दी है।

    जानकारी के अनुसार 1 अक्टूबर की रात पिछोर पुलिस क्षेत्र में गश्त कर रही थी। इसी दौरान पुलिस को सूचना मिली कि नीले रंग की मारुति सुजुकी बलेनो कार के जरिए देशी शराब को मायापुर की तरफ से पिछोर लाया जा रहा है। सूचना मिलने के बाद पुलिस टीम ने वाहन की पहचान और संभावित रास्ते पर नजर रखते हुए लभेड़ा तिराहे के पास चेकिंग शुरू कर दी।

    कुछ समय बाद मुखबिर द्वारा बताए गए हुलिए से मिलती जुलती बलेनो कार वहां से गुजरती दिखाई दी। पुलिस ने वाहन को रोकने का प्रयास किया लेकिन चालक ने रुकने के बजाय कार की रफ्तार बढ़ा दी और उसे लभेड़ा रोड की तरफ तेजी से ले जाने लगा। पुलिस टीम ने तत्काल वाहन का पीछा शुरू किया। पीछा किए जाने के दौरान चालक कार को मुख्य सड़क से हटाकर कच्चे रास्ते की ओर ले गया।

    पुलिस के मुताबिक कच्चे रास्ते पर आगे जाने के बाद चालक को रास्ता बंद मिला। इसके बाद उसने वाहन को वहीं छोड़ दिया और अंधेरे का फायदा उठाकर मौके से भाग निकला। पुलिस ने आसपास के इलाके में आरोपी की तलाश की लेकिन चालक तत्काल हाथ नहीं आया। इसके बाद पुलिस ने लावारिस हालत में खड़ी बलेनो कार की तलाशी ली।

    तलाशी के दौरान कार के अंदर देशी प्लेन शराब की 27 पेटियां बरामद हुईं। पुलिस के अनुसार शराब की अनुमानित कीमत करीब 1 लाख 8 हजार रुपए है। शराब के साथ पुलिस ने उस बलेनो कार को भी जब्त कर लिया जिसका इस्तेमाल परिवहन के लिए किया जा रहा था। जब्त वाहन की अनुमानित कीमत करीब 4 लाख 50 हजार रुपए बताई गई है।

    पुलिस ने मामले में अज्ञात आरोपी के खिलाफ आबकारी अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज किया है। अब पुलिस जब्त वाहन के आधार पर उसके मालिक और फरार चालक की पहचान करने में जुटी है। साथ ही यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि इतनी मात्रा में शराब कहां से लाई जा रही थी और इसे किस स्थान पर पहुंचाया जाना था।

    पुलिस की इस कार्रवाई के बाद शराब के अवैध परिवहन से जुड़े नेटवर्क को लेकर भी जांच आगे बढ़ाई जा रही है। वाहन के दस्तावेजों और अन्य उपलब्ध जानकारी के आधार पर आरोपी तक पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है। फिलहाल मामले में आरोपी फरार है और पुलिस उसकी तलाश कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच के दौरान शराब के स्रोत और इसके परिवहन से जुड़े अन्य लोगों की जानकारी सामने आने की संभावना है।

  • मडगांव-मंगलुरु वंदे भारत का बेंगलुरु तक विस्तार, हासन, उडुपी और कारवार होते हुए चलेगी नई सेवा

    मडगांव-मंगलुरु वंदे भारत का बेंगलुरु तक विस्तार, हासन, उडुपी और कारवार होते हुए चलेगी नई सेवा


    नई दिल्ली। भारतीय रेलवे ने मडगांव-मंगलुरु वंदे भारत एक्सप्रेस का विस्तार बेंगलुरु तक कर दिया है। अब यह ट्रेन हासन, मंगलुरु, उडुपी और कारवार होते हुए बेंगलुरु और मडगांव के बीच चलेगी। बदली हुई व्यवस्था के तहत ट्रेन नई समय-सारणी के साथ ट्रेन नंबर 26655/26656 यशवंतपुर-मंगलुरु-मडगांव वंदे भारत एक्सप्रेस के रूप में संचालित होगी। इस विस्तार की जानकारी केंद्रीय मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी की ओर से दी गई। नई व्यवस्था से इस रेल मार्ग पर यात्रियों के लिए यात्रा के विकल्प बढ़ेंगे और बेंगलुरु, तटीय कर्नाटक तथा गोवा के बीच रेल संपर्क को विस्तार मिलेगा।

    कर्नाटक से आने वाले केंद्रीय मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी ने बताया कि मौजूदा मडगांव-मंगलुरु वंदे भारत एक्सप्रेस को अब बेंगलुरु तक बढ़ाया गया है। ट्रेन हासन, उडुपी और कारवार होते हुए बेंगलुरु पहुंचेगी। कुमारस्वामी कर्नाटक की मांड्या लोकसभा सीट से सांसद हैं और वर्तमान में केंद्र सरकार में भारी उद्योग और इस्पात मंत्री हैं। उन्होंने कहा कि बढ़ते यात्री यातायात के साथ पर्यटन, धार्मिक यात्रा, शिक्षा और व्यापार के लिए इस मार्ग के महत्व को ध्यान में रखते हुए उन्होंने हासन, मंगलुरु, उडुपी और कारवार होते हुए बेंगलुरु तथा मडगांव को जोड़ने वाली वंदे भारत सेवा शुरू करने का अनुरोध किया था।

    कुमारस्वामी ने अपने बयान में केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि उनके अनुरोध पर रेल मंत्री की ओर से तुरंत और सकारात्मक प्रतिक्रिया दी गई। इसके बाद मौजूदा मडगांव-मंगलुरु वंदे भारत एक्सप्रेस का विस्तार बेंगलुरु तक किया गया है। अब यह ट्रेन बदली हुई समय-सारणी के साथ ट्रेन नंबर 26655/26656 यशवंतपुर-मंगलुरु-मडगांव वंदे भारत एक्सप्रेस के रूप में चलेगी। नई व्यवस्था में हासन, मंगलुरु, उडुपी और कारवार के रास्ते बेंगलुरु और मडगांव को जोड़ा गया है।

    कुमारस्वामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आधुनिक रेल कनेक्टिविटी को मजबूत करने और बेंगलुरु, तटीय कर्नाटक तथा गोवा को एक-दूसरे के करीब लाने की दिशा में यह एक और महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि बेहतर रेल संपर्क से यात्रियों को सुविधा मिलेगी। इसके साथ ही पर्यटन, क्षेत्रीय आर्थिक गतिविधियों और राज्यों के बीच आपसी संपर्क को भी बढ़ावा मिलेगा। मडगांव-मंगलुरु वंदे भारत एक्सप्रेस के बेंगलुरु तक विस्तार के साथ इस रेल मार्ग से जुड़े यात्रियों को अब नई सेवा के जरिए यात्रा का विकल्प मिलेगा।

    रेल सेवा के इस विस्तार में बेंगलुरु से मडगांव के बीच हासन, मंगलुरु, उडुपी और कारवार को जोड़ा गया है। मौजूदा ट्रेन सेवा को विस्तार देने के साथ इसका नाम और ट्रेन नंबर भी बदला गया है। नई व्यवस्था में ट्रेन नंबर 26655/26656 यशवंतपुर-मंगलुरु-मडगांव वंदे भारत एक्सप्रेस के तौर पर सेवा संचालित होगी। इसके लिए बेहतर समय-सारणी तय की गई है। इस विस्तार को यात्रियों की बढ़ती जरूरतों, पर्यटन, धार्मिक यात्रा, शिक्षा और व्यापार के लिए इस मार्ग के महत्व से जोड़कर देखा गया है। बेहतर कनेक्टिविटी के जरिए यात्रियों की सुविधा के साथ क्षेत्रीय गतिविधियों और राज्यों के बीच संपर्क को बढ़ावा देने की बात कही गई है।

  • खुदरा चीनी की कीमतों में 15 प्रतिशत की गिरावट, एक्स-मिल दाम 28 प्रतिशत घटे, सरकार ने स्टॉक सीमा भी तय की

    खुदरा चीनी की कीमतों में 15 प्रतिशत की गिरावट, एक्स-मिल दाम 28 प्रतिशत घटे, सरकार ने स्टॉक सीमा भी तय की

    नई दिल्ली। खुदरा बाजार में चीनी की कीमतों में अगस्त के उच्चतम स्तर से करीब 15 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। वहीं, मिल से निकलने वाली चीनी यानी एक्स-मिल कीमतों में भी उच्चतम स्तर से करीब 28 प्रतिशत की कमी आई है। सरकार के अनुसार एक्स-मिल चीनी की कीमतें पिछले करीब तीन सप्ताह से स्थिर बनी हुई हैं। सरकार ने उम्मीद जताई है कि कम एक्स-मिल कीमतों का लाभ सप्लाई चेन तक पहुंचने के बाद खुदरा बाजार में चीनी की कीमतों में आगे भी कमी आ सकती है। अगस्त में चीनी की कीमतें अपने सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंची थीं, जिसके बाद औसत खुदरा कीमतों में लगातार गिरावट देखने को मिली है।

    सरकार के मुताबिक चीनी की कीमतों में आई इस गिरावट के पीछे पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने और बाजार में चीनी की सुचारू आवाजाही बनाए रखने के लिए उठाए गए विभिन्न कदम हैं। जमाखोरी रोकने और सप्लाई व्यवस्था को बेहतर बनाए रखने के लिए चीनी डीलरों के स्टॉक रखने की अवधि घटाकर 15 दिन कर दी गई है। इसके साथ ही डीलरों के लिए स्टॉक रखने की अधिकतम सीमा 1,000 क्विंटल तय की गई है। ये नए नियम 15 अक्टूबर से 30 नवंबर 2026 तक लागू रहेंगे। नियमों के तहत डीलरों को चीनी मिलने की तारीख से 15 दिन से अधिक समय तक उसका स्टॉक रखने की अनुमति नहीं होगी।

    इसके अलावा देश में किसी भी स्थान पर और किसी भी समय डीलर 1,000 क्विंटल से अधिक चीनी का स्टॉक नहीं रख सकेंगे। हालांकि क्षेत्रीय बाजार की विशेष जरूरतों को देखते हुए कोलकाता और उसके आसपास के महानगरीय इलाकों तथा असम के लिए अलग सीमा निर्धारित की गई है। इन क्षेत्रों में चीनी डीलरों के लिए स्टॉक रखने की अधिकतम सीमा 2,000 क्विंटल तय की गई है। सरकार के अनुसार इन क्षेत्रों में आपूर्ति की जरूरतों और भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए यह अलग सीमा तय की गई है।

    सरकार ने बताया कि कोलकाता में चीनी की आपूर्ति उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक से होती है। यहां से चीनी की आपूर्ति पूर्वी भारत के विभिन्न हिस्सों के साथ पूर्वोत्तर क्षेत्र में भी की जाती है। वहीं, असम के लिए अधिक स्टॉक सीमा तय करने के पीछे भौगोलिक चुनौतियों और परिवहन से जुड़ी लॉजिस्टिक्स को ध्यान में रखा गया है। सरकार के अनुसार पूर्वोत्तर क्षेत्र में उपभोक्ताओं के हितों को देखते हुए भी असम के लिए 2,000 क्विंटल की सीमा रखी गई है। इस व्यवस्था का उद्देश्य संबंधित क्षेत्रों में चीनी की आपूर्ति को प्रभावित किए बिना स्टॉक नियंत्रण बनाए रखना है।

    नए नियमों का मुख्य उद्देश्य डिस्ट्रीब्यूशन चेन में चीनी के अनावश्यक जमावड़े को रोकना और मिलों से डीलरों के माध्यम से उपभोक्ताओं तक इसकी आपूर्ति सुचारू बनाए रखना है। सरकार के अनुसार स्टॉक रखने की मात्रा और अवधि दोनों सीमित करने से सप्लाई चेन में चीनी की आवाजाही व्यवस्थित होगी। इससे जमाखोरी पर रोक लगाने, सट्टेबाजी को हतोत्साहित करने और डीलरों द्वारा लंबे समय तक चीनी जमा करके रखने की स्थिति को रोकने में मदद मिलेगी। सरकार का कहना है कि इन उपायों के जरिए बाजार में उचित कीमतों पर चीनी की लगातार उपलब्धता बनाए रखने में मदद मिलेगी। वहीं, एक्स-मिल कीमतों में पहले ही करीब 28 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की जा चुकी है और पिछले तीन सप्ताह से इसमें स्थिरता बनी हुई है।

  • IAS अधिकारियों की नई पदस्थापना से बदली अहम मंत्रालयों की कमान नरेंद्र भूषण पर्यावरण मंत्रालय के सचिव नियुक्त

    IAS अधिकारियों की नई पदस्थापना से बदली अहम मंत्रालयों की कमान नरेंद्र भूषण पर्यावरण मंत्रालय के सचिव नियुक्त


    नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने भारतीय प्रशासनिक सेवा यानी IAS के दो वरिष्ठ अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां सौंपी हैं। प्रशासनिक स्तर पर हुए इस बदलाव के तहत 1992 बैच के IAS अधिकारी नरेंद्र भूषण को पर्यावरण वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय का सचिव नियुक्त किया गया है। वहीं 1995 बैच के अधिकारी दिलीप कुमार को ग्रामीण विकास मंत्रालय के भूमि संसाधन विभाग में सचिव की जिम्मेदारी दी गई है। दोनों अधिकारियों की नई पदस्थापना के साथ केंद्र सरकार के दो महत्वपूर्ण विभागों में प्रशासनिक नेतृत्व में बदलाव हुआ है।
    नरेंद्र भूषण इससे पहले ग्रामीण विकास मंत्रालय के भूमि संसाधन विभाग में सचिव के पद पर कार्यरत थे। अब उन्हें पर्यावरण वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय में सचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई है। यह बदलाव तन्मय कुमार के सेवानिवृत्त होने के बाद किया गया है। तन्मय कुमार 1993 बैच के राजस्थान कैडर के IAS अधिकारी थे और 30 सितंबर 2026 को सेवानिवृत्त हुए। उनके कार्यकाल के बाद पर्यावरण मंत्रालय में सचिव के पद पर नरेंद्र भूषण की नियुक्ति की गई है।

    नरेंद्र भूषण के पास प्रशासनिक क्षेत्र में लंबे अनुभव के साथ केंद्र सरकार के महत्वपूर्ण विभागों में काम करने का अनुभव है। भूमि संसाधन विभाग में सचिव के तौर पर उनकी जिम्मेदारी के दौरान भूमि प्रबंधन और उससे जुड़े प्रशासनिक विषयों से संबंधित कामकाज उनके अधीन रहा। अब नई भूमिका में उनके सामने पर्यावरण संरक्षण वन प्रबंधन और जलवायु परिवर्तन से जुड़े विषयों पर मंत्रालय के प्रशासनिक कामकाज को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी होगी।

    इसी प्रशासनिक फेरबदल में दिलीप कुमार को भी नई महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिली है। 1995 बैच के IAS अधिकारी दिलीप कुमार फिलहाल कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय में महानिदेशक प्रशिक्षण के पद पर कार्यरत थे। अब उन्हें ग्रामीण विकास मंत्रालय के भूमि संसाधन विभाग का सचिव बनाया गया है। वह नरेंद्र भूषण का स्थान लेंगे और विभाग के प्रशासनिक कामकाज की जिम्मेदारी संभालेंगे।

    भूमि संसाधन विभाग ग्रामीण विकास मंत्रालय से जुड़ा महत्वपूर्ण विभाग है। भूमि से संबंधित नीतियों और प्रशासनिक प्रक्रियाओं के साथ भूमि रिकॉर्ड में सुधार और भूमि संसाधन प्रबंधन जैसे विषय इसके कामकाज का हिस्सा हैं। ऐसे में दिलीप कुमार की नई नियुक्ति को प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है। उनके सामने विभाग की मौजूदा योजनाओं और कामकाज को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी होगी।

    केंद्र सरकार में वरिष्ठ IAS अधिकारियों की नियुक्तियां प्रशासनिक व्यवस्था का अहम हिस्सा होती हैं। अलग अलग मंत्रालयों और विभागों में अनुभवी अधिकारियों को जिम्मेदारी देकर सरकार अपने कामकाज को आगे बढ़ाती है। इस ताजा बदलाव में भी दो वरिष्ठ अधिकारियों को उनके अनुभव के अनुरूप महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी दी गई है।

    एक ओर नरेंद्र भूषण अब पर्यावरण वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय में सचिव के रूप में काम करेंगे तो दूसरी ओर दिलीप कुमार भूमि संसाधन विभाग में सचिव की भूमिका संभालेंगे। दोनों नियुक्तियों के साथ संबंधित मंत्रालयों में प्रशासनिक जिम्मेदारियों का नया क्रम प्रभावी हो गया है। यह बदलाव 30 सितंबर को तन्मय कुमार की सेवानिवृत्ति के बाद सामने आया है और केंद्र सरकार के वरिष्ठ प्रशासनिक स्तर पर इसे महत्वपूर्ण पदस्थापना के तौर पर देखा जा रहा है।

  • बैंक ग्राहकों के लिए जरूरी खबर, हर शनिवार छुट्टी की पोस्ट फर्जी, दूसरे-चौथे शनिवार ही अवकाश

    बैंक ग्राहकों के लिए जरूरी खबर, हर शनिवार छुट्टी की पोस्ट फर्जी, दूसरे-चौथे शनिवार ही अवकाश


    भोपाल । सोशल मीडिया पर इन दिनों बैंकों में हर शनिवार छुट्टी होने को लेकर एक पोस्ट तेजी से वायरल हो रही है। वायरल पोस्ट में भारत सरकार के राजपत्र यानी Gazette of India का हवाला देते हुए दावा किया जा रहा है कि 30 सितंबर 2026 से भारतीय स्टेट बैंक समेत देश के सभी सरकारी बैंकों में हर शनिवार अवकाश रहेगा। इस खबर के सामने आने के बाद बैंक ग्राहकों के बीच भी असमंजस की स्थिति बन गई है। हालांकि सरकार की ओर से इस दावे को पूरी तरह फर्जी और भ्रामक बताया गया है।

    PIB Fact Check ने वायरल दावे की जांच करते हुए स्पष्ट किया है कि वित्त मंत्रालय की ओर से बैंकों में हर शनिवार छुट्टी घोषित करने के संबंध में ऐसा कोई गजट नोटिफिकेशन या आधिकारिक आदेश जारी नहीं किया गया है। सोशल मीडिया पर प्रसारित किया जा रहा कथित भारत सरकार का राजपत्र वास्तविक सरकारी दस्तावेज नहीं है। ऐसे में बैंक ग्राहकों को इस तरह की पोस्ट पर भरोसा करने से पहले उसकी सत्यता जरूर जांचनी चाहिए।

    मौजूदा व्यवस्था की बात करें तो देश के बैंकों में फिलहाल हर शनिवार छुट्टी नहीं होती है। भारतीय रिजर्व बैंक के नियमों के अनुसार महीने के दूसरे और चौथे शनिवार को बैंकों में अवकाश रहता है। इसके अलावा पहले और तीसरे शनिवार को बैंक सामान्य रूप से काम करते हैं। यदि किसी महीने में पांचवां शनिवार आता है तो उस दिन भी बैंक खुले रहते हैं। इसलिए हर शनिवार बैंक बंद रहने की बात फिलहाल लागू नहीं हुई है।

    बैंकों में पांच दिन कामकाज यानी 5 Days Banking की मांग हालांकि काफी समय से चर्चा में है। बैंक कर्मचारी संगठनों और बैंकिंग क्षेत्र से जुड़े संगठनों की ओर से सभी शनिवार को अवकाश देने की मांग उठाई जाती रही है। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस यानी UFBU और इंडियन बैंक्स एसोसिएशन यानी IBA के बीच इस मुद्दे पर चर्चा भी हुई है। इसी मांग को लेकर एक उच्चस्तरीय समिति बनाए जाने की जानकारी सामने आई है। लेकिन समिति के गठन या मांग पर चर्चा होने का अर्थ यह नहीं है कि सरकार ने पांच दिन बैंकिंग व्यवस्था को मंजूरी दे दी है।

    फिलहाल इस संबंध में केंद्र सरकार की ओर से कोई अंतिम निर्णय या आधिकारिक अधिसूचना जारी नहीं की गई है। ऐसे में 30 सितंबर 2026 से सभी शनिवार को बैंकों में छुट्टी होने का दावा सही नहीं है। ग्राहकों को बैंकिंग सेवाओं से जुड़ी छुट्टियों और कामकाज के समय की जानकारी के लिए आधिकारिक बैंक वेबसाइट या संबंधित बैंक की सूचना को ही आधार बनाना चाहिए।

    सोशल मीडिया पर सरकारी दस्तावेज जैसी दिखने वाली तस्वीरें और नोटिफिकेशन अक्सर लोगों के बीच तेजी से फैल जाते हैं। ऐसे मामलों में किसी भी जानकारी को आगे साझा करने से पहले उसके आधिकारिक स्रोत की जांच करना जरूरी है। खासकर बैंकिंग व्यवस्था से जुड़ी सूचना का असर सीधे ग्राहकों के लेनदेन और जरूरी कामों पर पड़ सकता है। इसलिए वायरल पोस्ट के आधार पर बैंक जाने या अपना जरूरी काम टालने के बजाय आधिकारिक सूचना की पुष्टि करना ज्यादा उचित है।

    फिलहाल देश के बैंकिंग नियमों में हर शनिवार छुट्टी की व्यवस्था लागू नहीं हुई है। दूसरे और चौथे शनिवार को बैंक अवकाश की मौजूदा व्यवस्था ही प्रभावी है। यदि भविष्य में पांच दिन बैंकिंग को लेकर सरकार की ओर से कोई अंतिम फैसला लिया जाता है तो उसकी जानकारी आधिकारिक अधिसूचना के जरिए ही सामने आएगी।

  • मनिहारी दुकानें हटने से संकट में महिलाएं, कर्ज लेकर लाया दीपावली का सामान, अब बिक्री की चिंता

    मनिहारी दुकानें हटने से संकट में महिलाएं, कर्ज लेकर लाया दीपावली का सामान, अब बिक्री की चिंता


    शिवपुरी । शिवपुरी शहर में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के बाद मनिहारी का सामान बेचकर परिवार चलाने वाली महिलाओं के सामने रोजी रोटी का संकट खड़ा हो गया है। गांधी चौक की सड़क पर लंबे समय से दुकानें लगाने वाली महिलाओं ने दुकान हटाए जाने के विरोध में बुधवार रात धरना शुरू कर दिया। महिलाओं का कहना है कि वे कई वर्षों से इसी जगह पर छोटी दुकानें लगाकर अपना और परिवार का खर्च चलाती आ रही हैं। त्योहार का सीजन शुरू होने से पहले अचानक दुकान हट जाने के कारण उनकी परेशानी और बढ़ गई है।

    बुधवार को नगरीय प्रशासन की टीम ने अस्पताल चौराहा से माधव चौक तक अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की। इसी अभियान के दौरान गांधी चौक पर सड़क किनारे लगने वाली मनिहारी की दुकानों को भी हटा दिया गया। कार्रवाई के बाद प्रभावित महिलाओं ने गांधी चौक पर ही बैठकर विरोध जताया। उनका कहना है कि प्रशासन को दुकान हटाने से पहले उन्हें पर्याप्त समय देना चाहिए था ताकि वे अपना सामान व्यवस्थित कर सकें और वैकल्पिक जगह पर कारोबार शुरू करने की तैयारी कर सकें।

    महिलाओं के मुताबिक दीपावली का त्योहार नजदीक है और इसी उम्मीद में उन्होंने बड़ी मात्रा में सामान खरीदकर रखा था। कई दुकानदारों ने इसके लिए उधार लिया है। अब दुकान नहीं लग पा रही है तो सामान बिक नहीं रहा है और कर्ज चुकाने की चिंता बढ़ती जा रही है। उनका कहना है कि त्योहार के दौरान मनिहारी के सामान की मांग बढ़ती है और इसी समय होने वाली बिक्री से उन्हें पूरे परिवार के खर्च में मदद मिलती है।

    धरने पर बैठी बसंती ने बताया कि वह वर्ष 1980 से गांधी चौक पर दुकान लगाती आ रही हैं। इतने लंबे समय से इसी छोटे कारोबार के जरिए उनका परिवार चलता रहा है। उनका कहना है कि अब उम्र अधिक हो चुकी है और उनके लिए दूसरा काम करना आसान नहीं है। दुकान हटने के बाद उनके सामने आय का कोई स्पष्ट साधन नहीं बचा है। इसलिए वह चाहती हैं कि प्रशासन उनकी स्थिति को देखते हुए दुकान लगाने के लिए कोई स्थायी और सुविधाजनक व्यवस्था करे।

    एक अन्य बुजुर्ग महिला मुन्नी ने बताया कि दीपावली के लिए उन्होंने कर्ज लेकर दुकान का सामान खरीदा है। इस कर्ज पर उन्हें ब्याज भी देना पड़ रहा है। पिछले कुछ दिनों से दुकान नहीं लगा पाने के कारण बिक्री पूरी तरह प्रभावित हुई है। उनका कहना है कि यदि त्योहार तक उन्हें दुकान लगाने की अनुमति मिल जाए तो वे अपना खरीदा हुआ सामान बेचकर कर्ज चुका सकेंगी और परिवार का खर्च भी चला सकेंगी।

    वहीं प्रशासन का कहना है कि अतिक्रमण हटाने के साथ दुकानदारों के रोजगार को ध्यान में रखते हुए वैकल्पिक स्थान भी चिन्हित किए गए हैं। यातायात प्रभारी रणवीर सिंह यादव के मुताबिक हाथ ठेला संचालकों के लिए मंडी के पीछे ठंडी सड़क पर जगह तय की गई है। गांधी चौक की मनिहारी दुकानों के लिए मंडी के सामने टेकरी बाजार के मुख्य रास्ते पर स्थान चिन्हित किया गया है।

    प्रशासन का कहना है कि सड़क से अतिक्रमण हटाने का उद्देश्य यातायात व्यवस्था को बेहतर करना है और साथ ही दुकानदारों के रोजगार को पूरी तरह खत्म करना नहीं है। दूसरी ओर महिलाओं की मांग है कि वैकल्पिक जगह ऐसी हो जहां ग्राहकों की आवाजाही बनी रहे और उनका कारोबार प्रभावित न हो। फिलहाल गांधी चौक पर महिलाओं का विरोध दुकान हटाने की कार्रवाई के बाद प्रशासन और छोटे दुकानदारों के बीच खड़े हुए रोजगार से जुड़े सवाल को सामने ला रहा है।

  • नदी में मानव अवशेष मिलने से सनसनी, कमर के नीचे का हिस्सा बरामद, जांच में जुटी पुलिस

    नदी में मानव अवशेष मिलने से सनसनी, कमर के नीचे का हिस्सा बरामद, जांच में जुटी पुलिस


    शिवपुरी । शिवपुरी जिले में नदी के अंदर मानव शरीर का निचला हिस्सा मिलने से इलाके में सनसनी फैल गई। मामला रन्नौद थाना क्षेत्र का है जहां अकाझिरी और गुरुकुदवाया गांव के बीच बहने वाली नदी में ग्रामीणों की नजर मानव शरीर के अवशेष पर पड़ी। ग्रामीणों ने तत्काल इसकी सूचना पुलिस को दी। सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और नदी से मिले अवशेष को बाहर निकलवाकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। फिलहाल मृतक की पहचान नहीं हो सकी है और यह भी स्पष्ट नहीं है कि अवशेष किसी महिला के हैं या पुरुष के।

    पुलिस के मुताबिक नदी में कमर से नीचे का हिस्सा मिला है। शरीर का पेट वाला हिस्सा धड़ और सिर मौके पर मौजूद नहीं था। शरीर के अन्य हिस्से नहीं मिलने के कारण मामला और भी उलझ गया है। पुलिस अब नदी के आसपास के इलाके में तलाशी अभियान चला रही है। टीम का प्रयास है कि शरीर के बाकी हिस्सों का पता लगाया जा सके ताकि मृतक की पहचान करने में मदद मिल सके और मौत की परिस्थितियों को समझने के लिए जरूरी सुराग हासिल किए जा सकें।

    मानव शरीर का हिस्सा मिलने की खबर फैलते ही आसपास के गांवों के लोग भी नदी के पास पहुंचने लगे। घटना को लेकर ग्रामीणों में चर्चा का माहौल बन गया। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू की और अवशेष को सुरक्षित तरीके से पोस्टमार्टम के लिए भेजा। जांच अधिकारियों का कहना है कि अभी किसी भी संभावना को पूरी तरह खारिज नहीं किया जा सकता है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच से जुड़े दूसरे तथ्यों के सामने आने के बाद ही मौत की वास्तविक स्थिति के बारे में कुछ स्पष्ट हो सकेगा।

    प्रारंभिक जांच में नदी में मौजूद मगरमच्छ को लेकर भी एक संभावना सामने आई है। पुलिस को आशंका है कि नदी में मौजूद मगरमच्छ ने शव के कुछ हिस्सों को खा लिया हो सकता है। इसी वजह से शरीर का बाकी हिस्सा मौके पर नहीं मिला हो ऐसी संभावना जताई जा रही है। हालांकि पुलिस ने अभी इसकी पुष्टि नहीं की है। इसे केवल शुरुआती जांच के दौरान सामने आया एक संभावित कारण माना जा रहा है। शरीर के अन्य हिस्से मिलने और जांच आगे बढ़ने के बाद ही इस पहलू की सच्चाई स्पष्ट होगी।

    पुलिस मौत की वजह को लेकर भी कई एंगल से जांच कर रही है। यह किसी हादसे का मामला है या व्यक्ति की किसी अन्य कारण से मौत हुई है या फिर मामला आपराधिक घटना से जुड़ा है इसकी पड़ताल की जा रही है। पुलिस आसपास के क्षेत्र में पिछले कुछ दिनों के दौरान लापता हुए लोगों की जानकारी जुटा रही है। गांवों में ऐसे परिवारों से संपर्क किया जा रहा है जिनके किसी सदस्य के लापता होने की सूचना हो सकती है।

    मृतक की पहचान के लिए पुलिस को शरीर के अन्य हिस्सों के मिलने का इंतजार है। इसके साथ ही पोस्टमार्टम जांच और उपलब्ध अन्य साक्ष्यों से भी पहचान की दिशा में काम किया जाएगा। पुलिस नदी और आसपास के इलाकों में लगातार तलाश कर रही है। फिलहाल महिला या पुरुष की पहचान नहीं होने और शरीर के कई हिस्से गायब होने के कारण यह मामला रहस्य बना हुआ है। पुलिस का कहना है कि जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

  • होर्मुज संकट के बीच भारत-UAE पाइपलाइन योजना, समुद्र के नीचे तेल और गैस आपूर्ति के विकल्प पर काम तेज

    होर्मुज संकट के बीच भारत-UAE पाइपलाइन योजना, समुद्र के नीचे तेल और गैस आपूर्ति के विकल्प पर काम तेज

    नई दिल्ली। होर्मुज संकट के बीच भारत ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित रखने के लिए वैकल्पिक रास्तों पर काम कर रहा है। इसी क्रम में भारत और यूएई के बीच समुद्र के नीचे तेल और गैस पाइपलाइन बिछाने की तैयारी की जा रही है। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने भी इस दिशा में चल रही पहल की पुष्टि की है। यह पुष्टि उन्होंने यूएई के विदेश व्यापार मंत्री थानी बिन अहमद अल जेउदी से मुलाकात के बाद की। पीयूष गोयल के अनुसार, ओमान और यूएई से भारत तक समुद्र के नीचे पाइपलाइन परियोजना को प्राथमिकता में रखा गया है।

    इस प्रस्तावित परियोजना को MEIDP यानी मिडिल ईस्ट टू इंडिया डीप-वॉटर पाइपलाइन के नाम से जाना जाता है। इसके तहत पाइपलाइन ओमान और यूएई के तट से शुरू होकर अरब सागर के नीचे से गुजरते हुए भारत के गुजरात और महाराष्ट्र के तट तक पहुंच सकती है। शुरुआत में इस परियोजना में केवल गैस पाइपलाइन की योजना पर काम किया जा रहा था, लेकिन अब समुद्र के रास्ते कच्चा तेल भारत तक लाने की संभावना पर भी तकनीकी अध्ययन शुरू किया गया है। पेट्रोलियम मंत्रालय के निर्देश पर सरकारी कंपनियां परियोजना की विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर रही हैं। इस रिपोर्ट में गहरे समुद्र में पाइपलाइन बिछाने की तकनीक, लागत, सुरक्षा और अन्य महत्वपूर्ण पहलुओं की जांच की जाएगी।

    इस परियोजना की जरूरत होर्मुज क्षेत्र में जारी तनाव के बीच महसूस की जा रही है। भारत अपनी जरूरत का करीब 88 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है। वहीं, देश में आने वाली आधी से अधिक एलपीजी और एलएनजी भी कतर और यूएई से इसी समुद्री मार्ग के जरिए जहाजों से आती है। ऐसे में ऊर्जा आपूर्ति के लिए वैकल्पिक रास्ता तैयार करना महत्वपूर्ण माना जा रहा है। समुद्र के नीचे पाइपलाइन के जरिए सीधे आपूर्ति मिलने से समुद्री जहाजों पर निर्भरता कम करने का विकल्प तैयार हो सकता है।

    परियोजना के सामने सबसे बड़ी चुनौती समुद्र की अत्यधिक गहराई में पाइपलाइन बिछाना है। इसके लिए करीब 3,450 मीटर तक की गहराई में पाइपलाइन स्थापित करनी होगी। इतनी गहराई में पानी का दबाव काफी अधिक होता है। इसके अलावा समुद्र तल पर मौजूद चट्टानों और खाइयों के बीच पाइपलाइन के लिए सुरक्षित रास्ता तैयार करना तथा भविष्य में उसकी मरम्मत करना भी बड़ी तकनीकी चुनौतियों में शामिल है। परियोजना के तहत इन सभी पहलुओं का विस्तृत तकनीकी अध्ययन किया जा रहा है।

    सीधे ओमान, यूएई, कतर और सऊदी अरब के गैस और तेल भंडार से आपूर्ति मिलने की स्थिति में समुद्री जहाजों पर निर्भरता कम हो सकती है। इससे तेल और गैस के परिवहन तथा बीमा पर होने वाला खर्च घटाने में मदद मिल सकती है। साथ ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल और गैस की कीमतों में अचानक बढ़ोतरी होने पर भारत पर पड़ने वाला दबाव भी कम किया जा सकता है।

    परियोजना विकसित करने वाली संस्था साउथ एशिया गैस एंटरप्राइज ने करीब 25 करोड़ रुपये की लागत से लगभग 3 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन बिछाकर इसका परीक्षण किया है। परियोजना की सभी शर्तें पूरी होने के बाद पूरी पाइपलाइन के निर्माण में करीब 5 से 7 साल लगने का अनुमान है। इस तरह होर्मुज संकट के बीच भारत ऊर्जा आपूर्ति के लिए समुद्री मार्गों पर निर्भरता कम करने और वैकल्पिक व्यवस्था तैयार करने की दिशा में इस परियोजना को आगे बढ़ा रहा है।

  • CM फडणवीस से बैठक के बाद MPSC छात्रों का 2 अक्टूबर का आंदोलन स्थगित, ऑफलाइन परीक्षा और जांच की मांग पर बनी सहमति

    CM फडणवीस से बैठक के बाद MPSC छात्रों का 2 अक्टूबर का आंदोलन स्थगित, ऑफलाइन परीक्षा और जांच की मांग पर बनी सहमति

    नई दिल्ली। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग यानी MPSC के छात्र प्रतिनिधिमंडल के बीच 30 सितंबर 2026 को हुई बैठक के बाद 2 अक्टूबर को प्रस्तावित छात्रों का आंदोलन फिलहाल स्थगित कर दिया गया है। बैठक में छात्रों की विभिन्न मांगों पर विस्तार से चर्चा हुई और मुख्यमंत्री की ओर से कई मांगों पर सकारात्मक आश्वासन दिया गया। इस दौरान फडणवीस ने स्पष्ट किया कि MPSC की परीक्षाएं ऑफलाइन ही आयोजित की जाएंगी। परीक्षा प्रणाली में किसी तरह का बदलाव सभी छात्र संगठनों और संबंधित पक्षों से चर्चा किए बिना नहीं किया जाएगा। छात्रों की ओर से आयोग के पूर्व और वर्तमान अध्यक्षों तथा सदस्यों को हटाने की मांग भी रखी गई थी।

    बैठक में MPSC सचिव के तबादले और आयोग के कामकाज से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि MPSC अध्यक्ष का पद संवैधानिक है और राज्य सरकार या राज्यपाल को अध्यक्ष को हटाने का अधिकार नहीं है। अध्यक्ष को हटाने का अधिकार राष्ट्रपति के पास है और यह प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट की सलाह के आधार पर होती है। छात्रों ने आयोग के पूर्व और वर्तमान अध्यक्षों तथा सदस्यों के आचरण को लेकर शिकायतें रखी थीं। इन शिकायतों के संबंध में मुख्यमंत्री ने कहा कि तीन महीने के भीतर न्यायिक जांच कराई जाएगी। जांच में सामने आने वाले निष्कर्षों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। इस तरह छात्रों की ओर से उठाए गए पदाधिकारियों के आचरण और आयोग के कामकाज से जुड़े मुद्दे पर जांच का आश्वासन दिया गया।

    MPSC छात्रों की मांगों में परीक्षा व्यवस्था और भर्ती प्रक्रिया से जुड़े मुद्दे भी शामिल थे। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि आगामी MPSC परीक्षाएं ऑफलाइन ही होंगी और परीक्षा के तरीके में बदलाव से पहले सभी संबंधित पक्षों से चर्चा की जाएगी। भर्ती को लेकर भी सरकार की ओर से अधिक संख्या में रिक्त पदों को भरने की बात कही गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने आगामी परीक्षाओं में बड़े पैमाने पर रिक्तियों को शामिल करने और रिकॉर्ड संख्या में पद भरने का आश्वासन दिया है। विशेष रूप से 3 जनवरी को होने वाली ग्रुप सी परीक्षा में बड़ी संख्या में रिक्त पद शामिल किए जाने की बात कही गई। छात्रों की मांग के अनुसार भर्ती प्रक्रिया में रिक्तियों की संख्या बढ़ाने पर भी चर्चा हुई।

    मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि राज्य में बड़ी संख्या में रिक्त पदों को भरने की योजना बनाई गई है। सरकार की ओर से भर्ती प्रक्रिया से जुड़े नियमों में बदलाव की दिशा में काम किए जाने की जानकारी दी गई। बैठक के दौरान छात्रों की उन मांगों पर भी चर्चा हुई, जिनका संबंध आयोग के कामकाज और भर्ती प्रक्रिया को अधिक स्पष्ट तरीके से आगे बढ़ाने से है। छात्रों ने पूर्व और वर्तमान MPSC अध्यक्षों तथा सदस्यों के खिलाफ कार्रवाई की मांग रखी थी, जबकि सरकार की ओर से इस मामले में न्यायिक जांच के बाद निष्कर्षों के आधार पर आगे की कार्रवाई का आश्वासन दिया गया।

    मुख्यमंत्री के साथ हुई इस बैठक के बाद MPSC छात्र प्रतिनिधिमंडल ने 2 अक्टूबर को प्रस्तावित आंदोलन को फिलहाल स्थगित करने का फैसला किया। बैठक में छात्रों की प्रमुख मांगों पर चर्चा और सरकार की ओर से दिए गए आश्वासनों के बाद यह निर्णय लिया गया। इस दौरान परीक्षा प्रणाली को ऑफलाइन रखने, आयोग के पदाधिकारियों के आचरण की तीन महीने में न्यायिक जांच कराने और भर्ती प्रक्रिया में रिक्त पदों को बड़े स्तर पर शामिल करने जैसे मुद्दों पर सरकार का रुख स्पष्ट किया गया। छात्रों की ओर से रखी गई मांगों और मुख्यमंत्री के साथ हुई बातचीत के बाद 2 अक्टूबर का प्रस्तावित आंदोलन फिलहाल टाल दिया गया है।