Author: bharati

  • रात में सो रहे 8 साल के बच्चे के साथ दर्दनाक हादसा सांप ने दो बार डसा अस्पताल पहुंचने से पहले बिगड़ी हालत

    रात में सो रहे 8 साल के बच्चे के साथ दर्दनाक हादसा सांप ने दो बार डसा अस्पताल पहुंचने से पहले बिगड़ी हालत


    शिवपुरी । शिवपुरी जिले के इंदार थाना क्षेत्र में एक दर्दनाक घटना ने परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया। बिजरौनी गांव में बुधवार और गुरुवार की दरमियानी रात 8 साल के बच्चे को जहरीले सांप ने दो बार डस लिया। बताया जा रहा है कि पहली बार डसने के बाद सांप बच्चे के बिस्तर में ही छिपा रहा और कुछ देर बाद उसने दोबारा बच्चे को डस लिया। हालत बिगड़ने पर परिजन उसे इलाज के लिए अस्पताल लेकर पहुंचे लेकिन डॉक्टरों की कोशिश के बावजूद बच्चे की जान नहीं बच सकी।

    जानकारी के अनुसार 8 वर्षीय पुरुषोत्तम आदिवासी अपने परिवार के साथ बिजरौनी गांव में रहता था। उसके पिता अशोक आदिवासी मूल रूप से शिवपुरी जिले के धपोरा गांव के रहने वाले हैं। परिवार पिछले करीब तीन साल से बिजरौनी में रहकर हलवाई का काम करता है। बुधवार रात परिवार के बाकी सदस्यों की तरह पुरुषोत्तम भी तखत पर सो रहा था। रात करीब 12 बजे के आसपास वह हादसे का शिकार हो गया।

    परिजनों के मुताबिक सोते समय एक जहरीला कोबरा सांप बिस्तर में पहुंच गया। सांप ने पहले बच्चे के हाथ में डस लिया। पहली बार डसने के बाद परिवार को इसकी जानकारी हुई और उन्होंने बच्चे को संभालने की कोशिश की। इसी दौरान बताया जा रहा है कि सांप कंबल में ही छिपा रहा। कुछ समय बाद उसने बच्चे को दूसरी बार डस लिया। दो बार सांप के काटने के बाद बच्चे की हालत तेजी से बिगड़ने लगी।

    बच्चे की स्थिति गंभीर होती देख परिवार के लोग उसे तत्काल बदरवास अस्पताल लेकर पहुंचे। वहां प्राथमिक उपचार के बाद उसकी हालत को देखते हुए डॉक्टरों ने उसे गुना जिला अस्पताल रेफर कर दिया। परिजन बिना देर किए बच्चे को लेकर गुना पहुंचे लेकिन उसकी हालत लगातार नाजुक बनी रही। जानकारी के मुताबिक रात करीब 2 बजे इलाज के दौरान पुरुषोत्तम ने दम तोड़ दिया।

    बच्चे की मौत की खबर मिलते ही परिवार में मातम छा गया। जिस घर में कुछ घंटे पहले तक सामान्य माहौल था वहां अचानक चीख पुकार मच गई। परिजन बच्चे को बचाने के लिए अस्पतालों के चक्कर लगाते रहे लेकिन इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। घटना के बाद गांव में भी शोक का माहौल है।

    गुरुवार सुबह गुना जिला अस्पताल में बच्चे के शव का पोस्टमार्टम कराया गया। पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद शव परिवार वालों को सौंप दिया गया। इसके बाद परिजन शव को लेकर अपने गांव रवाना हुए।

    ग्रामीण इलाकों में रात के समय सांपों के घरों और बिस्तरों तक पहुंचने की घटनाएं सामने आती रहती हैं। बारिश और बदलते मौसम के दौरान सांप सुरक्षित जगह की तलाश में घरों में घुस सकते हैं। ऐसे में बिस्तर और कंबल इस्तेमाल करने से पहले उन्हें अच्छी तरह जांचना जरूरी माना जाता है। इस घटना ने भी परिवारों को रात में सोने की जगह और आसपास के हिस्से को लेकर अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत को सामने ला दिया है। हालांकि इस मामले में बच्चे की मौत के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है और गांव में भी घटना को लेकर शोक का माहौल बना हुआ है।

  • आदिवासी बच्चों की मौत के बीच बालाघाट पहुंचे राहुल गांधी जगला में पीड़ित परिवारों से मुलाकात पर सबकी नजर

    आदिवासी बच्चों की मौत के बीच बालाघाट पहुंचे राहुल गांधी जगला में पीड़ित परिवारों से मुलाकात पर सबकी नजर


    बालाघाट । मध्य प्रदेश के बालाघाट में आदिवासी बच्चों की मौत का मामला अब एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी एक अक्टूबर को बालाघाट के बिरसा ब्लॉक के जगला गांव पहुंचे हैं जहां वे बीमारी से जान गंवाने वाले बैगा आदिवासी बच्चों के परिवारों से मुलाकात कर रहे हैं। राहुल गांधी गोंदिया से सड़क मार्ग के जरिए बालाघाट पहुंचे। उनके कार्यक्रम को लेकर स्थानीय स्तर पर सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई है और कार्यक्रम स्थल पर पहुंचने वाले लोगों की जांच के बाद प्रवेश दिया जा रहा है। इस दौरान बड़ी संख्या में स्थानीय लोग भी मौके पर मौजूद हैं।

    बालाघाट के आदिवासी बहुल इलाकों में बच्चों की मौत का मामला पिछले कुछ समय से स्वास्थ्य व्यवस्था और पोषण से जुड़े सवालों के बीच सामने आया है। उपलब्ध सरकारी रिकॉर्ड में बीमारी से 32 बच्चों की मौत दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। वहीं कांग्रेस की ओर से इससे अधिक मौतों का दावा किया गया है। बैहर विधायक संजय उइके ने 43 बच्चों की मौत की बात कही है। ऐसे में सरकारी आंकड़े और विपक्ष की ओर से बताए जा रहे आंकड़ों में अंतर भी इस पूरे मामले का अहम पहलू बन गया है। इन अलग अलग आंकड़ों की आधिकारिक पुष्टि को लेकर स्थिति को अलग से देखना जरूरी है।

    राहुल गांधी के दौरे का मुख्य उद्देश्य प्रभावित परिवारों से सीधे मुलाकात करना और उनकी स्थिति को समझना बताया गया है। वे जगला गांव में उन परिवारों से मिलेंगे जिन्होंने बीमारी के दौरान अपने बच्चों को खोया है। रिपोर्टों के मुताबिक प्रभावित क्षेत्रों में बच्चों की मौत के पीछे एक ही कारण सामने नहीं आया है। स्वास्थ्य जांच में मलेरिया खसरा कुपोषण एनीमिया डिहाइड्रेशन और सांस से जुड़ी परेशानियों जैसे कई स्वास्थ्य कारकों की जानकारी सामने आई है। इसलिए पूरे मामले को किसी एक बीमारी से जोड़कर देखना उचित नहीं होगा।

    इस मामले में स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुंच और दूरदराज के आदिवासी इलाकों में चिकित्सा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठे हैं। प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त चिकित्सा अधिकारियों की तैनाती और स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार जैसे कदमों की जानकारी दी गई है। सरकार की ओर से प्रभावित परिवारों के लिए सहायता और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की बात भी सामने आई है। वहीं कांग्रेस इस पूरे मामले को लेकर सरकार की व्यवस्था पर सवाल उठा रही है।

    बालाघाट का यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि मध्य प्रदेश में आदिवासी आबादी का हिस्सा काफी बड़ा है। 2011 की जनगणना के अनुसार राज्य की कुल आबादी में अनुसूचित जनजाति की हिस्सेदारी 21.1 प्रतिशत थी। विधानसभा की 230 सीटों में 47 सीटें अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हैं। इसके अलावा कई सामान्य सीटों पर भी आदिवासी मतदाताओं की संख्या चुनावी समीकरणों को प्रभावित करती है। लोकसभा में मध्य प्रदेश की 29 सीटों में से 6 सीटें अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हैं।

    विधानसभा चुनाव के आंकड़ों पर नजर डालें तो 2018 में अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित 47 सीटों में कांग्रेस ने 30 सीटें जीती थीं जबकि बीजेपी को 16 सीटें मिली थीं। 2023 के चुनाव में बीजेपी ने 24 एसटी आरक्षित सीटें जीतीं जबकि कांग्रेस को 22 और भारत आदिवासी पार्टी को एक सीट मिली। ये आंकड़े बताते हैं कि आदिवासी क्षेत्रों का राजनीतिक महत्व लगातार बना हुआ है।

    राहुल गांधी का बालाघाट दौरा ऐसे समय हो रहा है जब बच्चों की मौत का मामला स्वास्थ्य और प्रशासनिक व्यवस्था के साथ राजनीतिक बहस का विषय भी बन चुका है। बीजेपी ने इस दौरे को राजनीतिक लाभ से जोड़कर सवाल उठाए हैं जबकि कांग्रेस प्रभावित परिवारों से मुलाकात को जमीनी स्थिति समझने का माध्यम बता रही है। अब राहुल गांधी की परिवारों से मुलाकात और उनके बाद सामने आने वाली प्रतिक्रियाओं पर पूरे प्रदेश की नजर रहेगी।

  • अमित शाह का भोपाल दौरा आज, 35 हजार गोपालकों से संवाद, 16.80 करोड़ के डेयरी प्लांट का शुभारंभ

    अमित शाह का भोपाल दौरा आज, 35 हजार गोपालकों से संवाद, 16.80 करोड़ के डेयरी प्लांट का शुभारंभ


    भोपाल। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह का मध्य प्रदेश दौरा कई महत्वपूर्ण कार्यक्रमों के साथ होने जा रहा है। 3 अक्टूबर को भोपाल में राज्य स्तरीय गोपालक सम्मेलन आयोजित किया जाएगा जिसमें 35 हजार से अधिक गोपालक और दुग्ध सहकारी समितियों से जुड़े सदस्य शामिल होने की जानकारी दी गई है। शाह के दौरे में पशुपालन और डेयरी के साथ सहकारिता शिक्षा बुनियादी ढांचे और नए आपराधिक कानूनों से जुड़े कार्यक्रम भी शामिल हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अधिकारियों के साथ बैठक कर कार्यक्रम की तैयारियों की समीक्षा की है।
    शाह का मुख्य कार्यक्रम भेल दशहरा मैदान में होने वाला राज्य स्तरीय गोपालक सम्मेलन रहेगा। इसमें प्रदेश के अलग अलग जिलों से पशुपालकों और दुग्ध सहकारी समितियों के सदस्यों के पहुंचने की योजना है। कार्यक्रम में पशुपालकों को बोनस राशि देने के साथ गौशालाओं के लिए सहायता उपलब्ध कराने और गोपालक दीदियों को सम्मानित करने की जानकारी सामने आई है। डॉ. भीमराव आंबेडकर कामधेनु योजना से जुड़े स्वीकृति पत्र भी वितरित किए जाएंगे। इसके अलावा राज्य में कृषक कल्याण वर्ष के तहत हुए काम और बलराम कृषि महोत्सव से जुड़ी गतिविधियों का प्रस्तुतीकरण भी किया जाएगा।

    अमित शाह के दौरे में डेयरी क्षेत्र से जुड़ी परियोजनाएं भी प्रमुख रहेंगी। भोपाल सहकारी दुग्ध संघ परिसर में 16.80 करोड़ रुपए की लागत से तैयार फर्मेंटेड प्रोडक्ट डेयरी प्लांट का शुभारंभ प्रस्तावित है। इस परियोजना में केंद्र सरकार की ओर से 6 करोड़ रुपए का अनुदान दिया गया है जबकि भोपाल सहकारी दुग्ध संघ ने 10.80 करोड़ रुपए का योगदान किया है। प्लांट की कुल प्रसंस्करण क्षमता प्रतिदिन 40 हजार लीटर बताई गई है। यहां दूध से दही छाछ लस्सी श्रीखंड और मावा जैसे मूल्यवर्धित उत्पाद तैयार किए जा सकेंगे।

    इस प्लांट के जरिए सांची के दुग्ध कारोबार में मूल्यवर्धित उत्पादों की हिस्सेदारी बढ़ाने पर जोर रहेगा। परियोजना के तहत प्रतिदिन 10 हजार लीटर दूध और 10 हजार लीटर दही तैयार करने की क्षमता बताई गई है। इसके अलावा 30 हजार लीटर छाछ 1 हजार लीटर लस्सी 800 किलो श्रीखंड और 1 हजार किलो मावा तैयार करने की क्षमता भी प्रस्तावित है। इससे दुग्ध प्रसंस्करण को आधुनिक तकनीक से जोड़ने और उत्पादों की विविधता बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा।

    दौरे के दौरान उज्जैन में 255 करोड़ रुपए की लागत से प्रस्तावित डेयरी प्लांट समेत प्रदेश की अन्य डेयरी प्रसंस्करण और गुणवत्ता जांच परियोजनाओं का भी उल्लेख किया गया है। भोपाल और इंदौर दुग्ध संघों से जुड़े पशुपालकों को बोनस राशि देने तथा गौशालाओं के लिए सहायता उपलब्ध कराने की योजना भी कार्यक्रम का हिस्सा है। इससे प्रदेश में दुग्ध उत्पादन से जुड़े सहकारी नेटवर्क और प्रसंस्करण व्यवस्था को विस्तार देने पर फोकस दिखाई देता है।

    भेल दशहरा मैदान में नए आपराधिक कानूनों से संबंधित राज्य स्तरीय प्रदर्शनी भी कार्यक्रम का हिस्सा रहेगी। इसके बाद शाह भोपाल बायपास के पास भौरी स्थित IISER परिसर के शिलान्यास कार्यक्रम में शामिल होंगे। परिसर में स्थापित स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा के अनावरण का कार्यक्रम भी प्रस्तावित है। इस तरह उनका भोपाल दौरा डेयरी और पशुपालन से लेकर शिक्षा और कानून व्यवस्था से जुड़े कई क्षेत्रों को कवर करेगा।

    उपलब्ध कार्यक्रम विवरण के अनुसार शाह 2 अक्टूबर की रात भोपाल पहुंचेंगे और 3 अक्टूबर को दिनभर विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल होने के बाद दिल्ली रवाना होंगे। पूरे दौरे में गोपालक सम्मेलन और डेयरी परियोजनाएं प्रमुख केंद्र में रहेंगी। प्रदेश सरकार की ओर से कार्यक्रम से जुड़ी व्यवस्थाओं को समय पर पूरा करने के लिए अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं।

  • अफगानिस्तान के कुनार और हेलमंद में हवाई हमले का दावा, घरों को बनाया निशाना, बच्चों समेत कई लोगों की मौत

    अफगानिस्तान के कुनार और हेलमंद में हवाई हमले का दावा, घरों को बनाया निशाना, बच्चों समेत कई लोगों की मौत

    नई दिल्ली। अफगानिस्तान के कुनार और हेलमंद प्रांत में अलग-अलग हवाई हमलों की खबर सामने आई है। इन हमलों में आम लोगों के घरों को निशाना बनाए जाने का दावा किया गया है। शुरुआती जानकारी के अनुसार, दोनों घटनाओं में कई लोगों की मौत हुई है और कई अन्य घायल हुए हैं। मरने वालों में बच्चे भी शामिल बताए जा रहे हैं। कुछ महिलाओं और बच्चों के घायल होने की भी जानकारी सामने आई है। हमलों के बाद प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव का काम शुरू किया गया। इन घटनाओं के बाद अफगानिस्तान और पाकिस्तान की सीमा पर तनाव बढ़ने की बात सामने आई है।

    कुनार प्रांत के शेल्टन जिले की चोगाम घाटी में गुरुवार सुबह करीब 3 बजे हवाई हमला होने की बात कही गई है। शुरुआती जानकारी के अनुसार, इस हमले में एक घर पूरी तरह टूट गया। हमले के बाद पांच लोगों की मौत होने का दावा किया गया है। मृतकों में ज्यादातर बच्चे बताए जा रहे हैं। घटना में दो महिलाओं और एक बच्चे के घायल होने की भी खबर है। हमले के बाद प्रभावित परिवारों तक राहत और बचाव पहुंचाने का काम शुरू किया गया। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में हमले से जुड़े अन्य विवरण सामने नहीं आए हैं।

    दक्षिणी अफगानिस्तान के हेलमंद प्रांत में भी हवाई हमले की खबर सामने आई है। यहां गरमसिर जिले के सफर इलाके में दो आम लोगों के घरों को निशाना बनाए जाने का दावा किया गया है। स्थानीय अधिकारियों के अनुसार, इस घटना में चार लोगों की मौत हुई है और आठ लोग घायल हुए हैं। घायलों में महिलाएं और बच्चे भी शामिल बताए जा रहे हैं। दोनों घरों को निशाना बनाए जाने के बाद इलाके में राहत और बचाव का काम शुरू किया गया। घटना में प्रभावित लोगों को लेकर शुरुआती जानकारी में मौत और चोटों का जिक्र किया गया है।

    कुनार और हेलमंद में सामने आई इन दोनों घटनाओं ने अफगानिस्तान में हवाई हमलों को लेकर तनाव को फिर बढ़ा दिया है। कुनार में हुए हमले को लेकर एक घर के पूरी तरह टूटने और पांच लोगों की मौत का दावा सामने आया है, जबकि हेलमंद में दो घरों को निशाना बनाए जाने और चार लोगों की मौत की जानकारी दी गई है। दोनों घटनाओं में महिलाओं और बच्चों के घायल होने की बात कही गई है। शुरुआती जानकारी में आम लोगों के घरों को हमलों का निशाना बनाए जाने का दावा किया गया है। प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव की गतिविधियां शुरू की गई हैं।

    इन घटनाओं के सामने आने के बाद अफगानिस्तान-पाकिस्तान सीमा पर तनाव और बढ़ने की बात कही जा रही है। कुनार के शेल्टन जिले की चोगाम घाटी में सुबह करीब 3 बजे हुए हमले में पांच लोगों की मौत और तीन लोगों के घायल होने का दावा है। वहीं, हेलमंद के गरमसिर जिले के सफर इलाके में दो घरों पर हमले में चार लोगों की मौत और आठ लोगों के घायल होने की जानकारी स्थानीय अधिकारियों की ओर से सामने आई है। दोनों घटनाओं में मृतकों और घायलों की संख्या को लेकर फिलहाल यही शुरुआती जानकारी उपलब्ध है।

  • फ्लाईदुबई फ्लाइट में 174 यात्रियों को बचाने वाले घायल पायलट स्मित मच्छार से पीएम मोदी ने की बात

    फ्लाईदुबई फ्लाइट में 174 यात्रियों को बचाने वाले घायल पायलट स्मित मच्छार से पीएम मोदी ने की बात

    नई दिल्ली। फ्लाईदुबई की फ्लाइट में 174 यात्रियों की जान बचाने वाले भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छार की बहादुरी की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सराहना की है। प्रधानमंत्री ने कैप्टन स्मित से बातचीत कर मुश्किल समय में उनके साहस की तारीफ की और उन्हें हीरो बताया। पीएम मोदी ने कहा कि गंभीर परिस्थिति में स्मित ने जिस तरह हिम्मत दिखाई, वह काबिले-तारीफ है। प्रधानमंत्री ने घायल भारतीय पायलट के परिवार से भी बातचीत की। फ्लाइट में हुई इस घटना के दौरान स्मित ने घायल होने के बावजूद हालात संभालने की कोशिश की और कॉकपिट का दरवाजा खोलकर मदद का रास्ता बनाया।

    इजरायल जा रही फ्लाईदुबई की फ्लाइट में उस समय हड़कंप मच गया, जब एक पायलट ने अपने ही साथी भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छार पर चाकू से हमला कर दिया। हमला गंभीर था और इसके बाद विमान के हालात बिगड़ने लगे। फ्लाइट अचानक नीचे जाने लगी। घायल होने के बावजूद स्मित ने स्थिति को संभालने की कोशिश जारी रखी। उन्होंने कॉकपिट का दरवाजा खोलकर मदद मांगी। इसके बाद एक यात्री कॉकपिट के अंदर पहुंचा और स्थिति को संभालने में मदद की। वहीं, दूसरे यात्रियों और क्रू मेंबर ने आरोपी पायलट को काबू करने की कोशिश की।

    हमले के बाद विमान को संभालने में यात्रियों और क्रू की भूमिका सामने आई। कॉकपिट का दरवाजा खुलने के बाद इजरायली यात्री यानिव हयून अंदर पहुंचे। हयून पेशे से प्लंबर हैं। उन्होंने कॉकपिट में पहुंचकर देखा कि आरोपी पायलट विमान के कंट्रोल से छेड़छाड़ कर रहा था। इसके बाद हयून ने तुरंत विमान के कंट्रोल को पीछे की तरफ खींचा। इसी दौरान एक अन्य यात्री और क्रू मेंबर ने आरोपी पायलट को काबू कर लिया। स्थिति को नियंत्रित करने के बाद रिजर्व पायलट कॉकपिट में पहुंचे और विमान का कंट्रोल संभाल लिया।

    यानिव हयून की भूमिका भी इस घटनाक्रम में सामने आई। घटना के बाद एयरपोर्ट पर उनकी मुलाकात हुई। बताया गया कि हयून के कपड़ों पर घायल भारतीय पायलट का काफी खून लगा हुआ था। उन्होंने कॉकपिट में पहुंचने के बाद आरोपी पायलट को विमान के कंट्रोल से छेड़छाड़ करते देखा था और तत्काल कंट्रोल को पीछे की ओर खींचा था। इसके बाद दूसरे यात्री और क्रू मेंबर ने आरोपी पायलट को काबू किया, जबकि रिजर्व पायलट ने विमान को स्थिर करने की जिम्मेदारी संभाली। इस पूरे घटनाक्रम में घायल कैप्टन स्मित मच्छार ने भी कॉकपिट का दरवाजा खोलकर मदद का रास्ता बनाया था।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कैप्टन स्मित मच्छार से बातचीत के दौरान उनकी हिम्मत की सराहना की। उन्होंने मुश्किल हालात में दिखाई गई बहादुरी के लिए भारतीय पायलट को हीरो बताया। पीएम मोदी ने स्मित के परिवार से भी बातचीत की। फ्लाइट में मौजूद 174 यात्रियों की जान बचाने की कोशिश के दौरान कैप्टन स्मित घायल हुए थे। घटना के दौरान यात्रियों और क्रू ने आरोपी पायलट को काबू करने में मदद की, जबकि रिजर्व पायलट ने बाद में विमान का नियंत्रण संभाला। इस तरह घायल भारतीय पायलट द्वारा मदद का रास्ता खोलने और यात्रियों तथा क्रू की मदद से विमान को संभालने का घटनाक्रम सामने आया।

  • अक्टूबर की शुरुआत में बड़ा झटका कमर्शियल गैस सिलेंडर 65 रुपए तक महंगा रीवा में सबसे ज्यादा रेट

    अक्टूबर की शुरुआत में बड़ा झटका कमर्शियल गैस सिलेंडर 65 रुपए तक महंगा रीवा में सबसे ज्यादा रेट


    भोपाल । मध्य प्रदेश में अक्टूबर की शुरुआत कमर्शियल गैस सिलेंडर के बढ़े हुए दामों के साथ हुई है। तेल कंपनियों ने एक अक्टूबर से कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी की है। प्रदेश के अलग अलग शहरों में इसके दाम करीब 62.50 रुपए से लेकर 65 रुपए तक बढ़े हैं। नई कीमत लागू होने के बाद होटल रेस्टोरेंट ढाबे कैटरिंग और अन्य व्यावसायिक संस्थानों के लिए रसोई गैस का खर्च बढ़ गया है। इसका असर आने वाले दिनों में खाने पीने की चीजों और खासकर शादी समारोह की कैटरिंग के बजट पर भी दिखाई दे सकता है।

    राजधानी भोपाल में अब कमर्शियल सिलेंडर 2815 रुपए में मिलेगा। इंदौर में इसकी कीमत 2919 रुपए पहुंच गई है। जबलपुर में नया रेट 3030 रुपए है जबकि ग्वालियर में 3037 रुपए चुकाने होंगे। उज्जैन में कमर्शियल सिलेंडर की कीमत 2980 रुपए हो गई है। प्रदेश में सबसे ज्यादा कीमत रीवा में दर्ज की गई है जहां 19 किलो वाले कमर्शियल सिलेंडर के लिए अब 3066 रुपए देने होंगे। यानी शहरों के बीच कीमत में अच्छा खासा अंतर देखने को मिल रहा है।

    प्रदेश के कई अन्य जिलों में भी कमर्शियल गैस के दाम तीन हजार रुपए के पार पहुंच चुके हैं। रीवा के बाद सिंगरौली में कीमत 3064 रुपए है। सतना और नरसिंहपुर में सिलेंडर 3063.50 रुपए में मिलेगा। कटनी में नया रेट 3062.50 रुपए और पन्ना में 3061 रुपए हो गया है। जानकारी के मुताबिक मध्य प्रदेश के 26 जिलों में कमर्शियल सिलेंडर की कीमत तीन हजार रुपए या उससे अधिक है। वहीं शाजापुर और सीहोर में यह करीब 2822 रुपए में उपलब्ध होगा।

    कमर्शियल गैस के दाम बढ़ने का सीधा असर उन कारोबारियों पर पड़ता है जो रोजाना बड़ी मात्रा में गैस का इस्तेमाल करते हैं। होटल और रेस्टोरेंट संचालकों के लिए सिलेंडर की कीमत पहले से ही बड़ा खर्च बनी हुई है। रेस्टोरेंट कारोबार से जुड़े प्रतिनिधि और कैफे संचालक अभिषेक बाहेती के मुताबिक गैस संकट से पहले कमर्शियल सिलेंडर करीब 1800 रुपए में मिलता था। बाद में इसकी कीमत बढ़ते हुए करीब 3300 रुपए तक पहुंच गई थी। इसके बाद कीमतों में कमी आई लेकिन पिछले दो महीनों से फिर बढ़ोतरी का सिलसिला देखा जा रहा है।

    शादी समारोह के कारोबार से जुड़े कैटरर्स पर भी बढ़ी कीमत का असर पड़ सकता है। दीवाली के बाद प्रदेश में शादियों का सीजन शुरू होने वाला है और इस दौरान बड़े स्तर पर कैटरिंग का काम होता है। खाना तैयार करने में बड़ी मात्रा में एलपीजी की खपत होने के कारण सिलेंडर की कीमत बढ़ने से आयोजन का कुल बजट प्रभावित हो सकता है। कैटरिंग संचालकों के अनुसार बढ़ी हुई लागत का असर अंततः ग्राहकों के पैकेज पर भी पड़ सकता है।

    हालांकि राहत की बात यह है कि घरेलू रसोई गैस सिलेंडर की कीमत में इस बार कोई बदलाव नहीं किया गया है। 14 किलो वाला घरेलू सिलेंडर पुराने दाम पर ही मिल रहा है। भोपाल में इसकी कीमत 947.50 रुपए है। इंदौर में 970 रुपए और जबलपुर में 948.50 रुपए में घरेलू सिलेंडर उपलब्ध है। ग्वालियर में इसका दाम 1025.50 रुपए जबकि उज्जैन में 1001.50 रुपए है। इस तरह अक्टूबर में बढ़ोतरी का असर फिलहाल कमर्शियल गैस इस्तेमाल करने वाले कारोबारियों पर ही पड़ा है।

  • महंगे पेट्रोल-डीजल से परेशान अमेरिका में राज्यों ने दी टैक्स राहत, चुनाव से पहले ईंधन की कीमतों पर बढ़ा दबाव

    महंगे पेट्रोल-डीजल से परेशान अमेरिका में राज्यों ने दी टैक्स राहत, चुनाव से पहले ईंधन की कीमतों पर बढ़ा दबाव


    नई दिल्ली । ईरान युद्ध के बाद कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का असर अमेरिका में भी दिखाई दे रहा है। पेट्रोल, डीजल और गैस की बढ़ती कीमतों से आम लोगों पर आर्थिक दबाव बढ़ा है। ईंधन महंगा होने के साथ राज्य सरकारों की चिंता भी बढ़ी है। इसी के चलते कई राज्यों ने लोगों को राहत देने के लिए गैस टैक्स में अस्थायी कटौती या छूट शुरू की है। नवंबर में होने वाले मिडटर्म चुनावों से पहले ईंधन की किफायती कीमतें मतदाताओं के लिए महत्वपूर्ण मुद्दा बन गई हैं।

    ओहायो में सांसदों ने दोनों दलों के समर्थन से 90 दिन की गैस टैक्स छुट्टी को मंजूरी दी है। इसके तहत इस साल के बाकी महीनों में राज्य का पेट्रोल टैक्स 38.5 सेंट और डीजल टैक्स 47 सेंट प्रति गैलन निलंबित रहेगा। राज्य सरकार सड़क और पुलों के रखरखाव के लिए जनरल फंड से करीब 725 मिलियन डॉलर खर्च करेगी, ताकि फ्यूल टैक्स से होने वाली आय में कमी की भरपाई की जा सके।

    बुधवार को अमेरिका में सामान्य पेट्रोल की औसत कीमत 4.43 डॉलर प्रति गैलन रही। ईरान युद्ध शुरू होने के बाद इसकी कीमत में करीब 50 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। वहीं डीजल की औसत कीमत 6.41 डॉलर प्रति गैलन रही, जो पिछले सप्ताह के रिकॉर्ड स्तर से कुछ ही सेंट नीचे है। एक गैलन में करीब 3.785 लीटर होते हैं। इस हिसाब से पेट्रोल की कीमत करीब 1.17 डॉलर प्रति लीटर और डीजल की कीमत करीब 1.69 डॉलर प्रति लीटर बैठती है।

    ओहायो के अलावा कई अन्य राज्यों में भी ईंधन टैक्स को लेकर राहत दी गई है। जॉर्जिया ने मार्च में मध्य पूर्व संघर्ष के बाद ईंधन की कीमतें बढ़ने पर टैक्स निलंबित किया था। बाद में इसकी अवधि बढ़ाई गई और हाल में 30 दिन का नया मोटर फ्यूल टैक्स हॉलिडे शुरू किया गया। इंडियाना में भी फ्यूल टैक्स राहत को कई बार बढ़ाया गया है और मौजूदा छूट 5 अक्टूबर तक जारी है। यूटा में छह महीने के लिए फ्यूल टैक्स में 6 सेंट प्रति गैलन की कटौती की गई है। इलिनॉय और केंटकी ने प्रस्तावित ईंधन टैक्स बढ़ोतरी को भी टाल दिया है।

    कई राज्यों ने किसानों को राहत देने के लिए डीजल टैक्स नियमों में अस्थायी बदलाव किए हैं। अलाबामा, अर्कांसस, लुइसियाना, मिसौरी, नेब्रास्का, नॉर्थ कैरोलाइना, नॉर्थ डकोटा, ओकलाहोमा और टेक्सास में यह कदम उठाया गया है। आम तौर पर टैक्स-फ्री डाइड डीजल का इस्तेमाल ट्रैक्टर, लॉगिंग मशीन और सिंचाई पंप जैसी ऑफ-रोड मशीनों में होता है। फसल कटाई के मौसम में कुछ राज्यों ने इसके इस्तेमाल के नियमों में अस्थायी ढील दी है।

    कैलिफोर्निया ने भी पेट्रोल की कीमत कम करने के लिए समर-ब्लेंड ईंधन की अनिवार्यता में ढील दी है। राज्य के कई हिस्सों में आम तौर पर 31 अक्टूबर तक समर-ब्लेंड पेट्रोल जरूरी होता है। गवर्नर गेविन न्यूसम ने सोमवार को यह शर्त खत्म कर दी।

    ओहायो में गैस टैक्स छुट्टी का मुद्दा आगामी गवर्नर चुनाव से भी जुड़ गया है। डेमोक्रेटिक उम्मीदवार एमी एक्टन ने पिछले सप्ताह गैस टैक्स छुट्टी की मांग की थी। इसके कुछ घंटों बाद रिपब्लिकन उम्मीदवार विवेक रामास्वामी ने भी इसी तरह की योजना का ऐलान किया। दोनों उम्मीदवार मौजूदा गवर्नर माइक डीवाइन की जगह लेने के लिए चुनाव मैदान में हैं। डेमोक्रेट्स ने रामास्वामी पर एक्टन के प्रस्ताव का श्रेय लेने का आरोप लगाया, जबकि उनके समर्थकों ने दोनों योजनाओं के बीच अंतर बताया।

    हालांकि टैक्स राहत का असर पेट्रोल पंप पर तुरंत और पूरी तरह दिखाई देना जरूरी नहीं है। ईंधन की कीमत अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल के दाम, थोक कीमत, परिवहन, स्टॉक और स्थानीय बाजार समेत कई कारकों पर निर्भर करती है। टैक्स हटने के समय रिटेलर के पास पहले से टैक्स देकर खरीदा गया ईंधन मौजूद हो सकता है। ऐसे में बिना टैक्स वाला नया स्टॉक आने के बाद ही राहत का पूरा असर खुदरा कीमतों में दिखाई दे सकता है।

  • शहजाद पूनावाला के एक कमेंट से भड़कीं प्रियंका टीवी की नागिन ने खोया आपा बोलीं यहां भी थप्पड़ खाएगा

    शहजाद पूनावाला के एक कमेंट से भड़कीं प्रियंका टीवी की नागिन ने खोया आपा बोलीं यहां भी थप्पड़ खाएगा


    नई दिल्ली। रियलिटी शो राइज एंड फॉल 2 इन दिनों अपने कंटेस्टेंट्स के बीच होने वाले विवादों को लेकर चर्चा में बना हुआ है। शो के लेटेस्ट एपिसोड में प्रियंका चाहर चौधरी और शहजाद पूनावाला के बीच तीखी बहस देखने को मिली। दोनों के बीच बातचीत इतनी बढ़ गई कि मामला व्यक्तिगत टिप्पणियों तक पहुंच गया। बहस के दौरान शहजाद ने प्रियंका को गोल्ड डिगर कहा जिसके बाद एक्ट्रेस काफी नाराज हो गईं। प्रियंका ने भी शहजाद पर पलटवार किया और गुस्से में उन्हें थप्पड़ मारने तक की बात कह दी।

    दरअसल विवाद की शुरुआत प्रियंका की एक टिप्पणी से हुई थी। उन्होंने शहजाद को मैनचाइल्ड कहा था। इसका मतलब ऐसे व्यक्ति से है जो उम्र में बड़ा होने के बावजूद बचकानी हरकतें करता है। प्रियंका की इस बात पर शहजाद ने जवाब देते हुए उन्हें गोल्ड डिगर कह दिया। इसके साथ ही उन्होंने प्रियंका पर विक्टिम कार्ड खेलने का आरोप भी लगाया। शहजाद की यह टिप्पणी प्रियंका को काफी बुरी लगी और इसके बाद उनके तेवर बदल गए।

    प्रियंका ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए शहजाद को कड़ा जवाब दिया। उन्होंने कहा कि उन्हें शहजाद के बारे में कई लोगों से ऐसी बातें सुनने को मिली हैं जिनका जिक्र उन्होंने बहस के दौरान किया। इसी दौरान प्रियंका ने गुस्से में कहा कि शहजाद यहां भी उनसे थप्पड़ खाएंगे। उनकी यह बात शो में मौजूद लोगों के साथ साथ दर्शकों के बीच भी चर्चा का विषय बन गई।

    विवाद के बाद प्रियंका काफी भावुक भी नजर आईं। उन्होंने बताया कि शहजाद की कही बात उनके मन में रह गई थी। प्रियंका ने अपनी जिंदगी और परिवार से जुड़ी जिम्मेदारियों का जिक्र करते हुए कहा कि वह अपने परिवार के खर्च में योगदान देती हैं। उन्होंने बताया कि उन्होंने अपने छह भाई बहनों की पढ़ाई में मदद की है और उनकी शादियों में भी जिम्मेदारी निभाई है। प्रियंका के मुताबिक उन्होंने अपने परिवार के लिए घर तक बनवाए हैं। ऐसे में बिना उनकी परिस्थितियों को समझे उन्हें गोल्ड डिगर कहना उन्हें बेहद अपमानजनक लगा।

    प्रियंका ने अपनी बात रखते हुए यह भी बताया कि वह अपने परिवार के लिए लगातार मेहनत करती रही हैं। उनके लिए आर्थिक जिम्मेदारियां और परिवार की जरूरतें हमेशा महत्वपूर्ण रही हैं। इसी वजह से शहजाद की टिप्पणी ने उन्हें भावुक कर दिया। बहस के बाद उन्होंने अपने गुस्से को खुलकर जाहिर किया और कैमरे के सामने शहजाद को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी।

    इस पूरे घटनाक्रम के दौरान शो का माहौल काफी गर्म हो गया। प्रियंका ने बातचीत के दौरान शहजाद की एनर्जी को लेकर भी टिप्पणी की। उन्होंने स्वरा भास्कर से बात करते हुए कहा कि रात में सोते समय भी उन्हें ऐसा महसूस हो रहा था जैसे शहजाद की एनर्जी आसपास मौजूद हो। उनकी इस टिप्पणी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि बहस का असर उन पर काफी देर तक रहा।

    राइज एंड फॉल 2 में कंटेस्टेंट्स के बीच समीकरण लगातार बदलते दिखाई दे रहे हैं। कभी साथ नजर आने वाले प्रतिभागियों के बीच भी रणनीति और मतभेद को लेकर टकराव देखने को मिल रहा है। प्रियंका और शहजाद का यह विवाद भी इसी माहौल का हिस्सा है। गोल्ड डिगर वाली टिप्पणी के बाद प्रियंका का भावुक होना और फिर थप्पड़ मारने की बात कहना अब शो के सबसे चर्चित पलों में शामिल हो गया है। आने वाले एपिसोड में दोनों के बीच यह विवाद आगे किस तरह बढ़ता है यह देखने वाली बात होगी।

  • एंटीलिया बम केस में सचिन वाजे की जमानत के खिलाफ NIA की अपील पर दो बेंचों ने सुनवाई से खुद को अलग किया

    एंटीलिया बम केस में सचिन वाजे की जमानत के खिलाफ NIA की अपील पर दो बेंचों ने सुनवाई से खुद को अलग किया


    नई दिल्ली । उद्योगपति मुकेश अंबानी के दक्षिण मुंबई स्थित आवास एंटीलिया से जुड़े बम धमकी मामले में सचिन वाजे की जमानत के बाद कानूनी प्रक्रिया में नया मोड़ आया है। बर्खास्त पुलिस अधिकारी सचिन वाजे को विशेष मुंबई अदालत से जमानत मिल चुकी है। इस फैसले को चुनौती देते हुए राष्ट्रीय जांच एजेंसी यानी NIA ने बॉम्बे हाईकोर्ट का रुख किया, लेकिन अपील पर सुनवाई को लेकर लगातार अड़चन सामने आई।

    बुधवार को हाईकोर्ट की एक बेंच ने सुनवाई से खुद को अलग कर लिया। इससे पहले मंगलवार को भी एक अन्य बेंच ने मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया था। बुधवार की कार्यवाही के दौरान जजों के सवाल पर NIA ने बताया कि वाजे को उस समय तक जेल से रिहा नहीं किया गया था।

    बुधवार को मामला जस्टिस भारती एच. डांगरे और जस्टिस आशीष एस. चव्हाण की बेंच के सामने आया। बेंच ने बताया कि वाजे की ओर से दायर कुछ अलग कार्यवाहियों में जस्टिस डांगरे पहले ही खुद को मामले से अलग कर चुकी हैं। इसके बाद बेंच के दूसरे सदस्य जस्टिस आशीष एस. चव्हाण ने भी मामले की सुनवाई करने में असमर्थता जताई।

    जस्टिस चव्हाण ने बताया कि वह एक अलग लेकिन संबंधित मामले में सीबीआई की ओर से पेश हो चुके हैं। इसके बाद बेंच ने निर्देश दिया कि NIA की अपील को उसके सामने सूचीबद्ध नहीं किया जाए। इस तरह बुधवार को भी मामले की सुनवाई नहीं हो सकी। इससे एक दिन पहले मंगलवार को जस्टिस सारंग वी. कोतवाल ने भी सुनवाई से खुद को अलग कर लिया था।

    लगातार दो बेंचों से सुनवाई नहीं होने के बाद NIA ने बुधवार को बॉम्बे हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश महेश चंद्र त्रिपाठी के सामने मामला उठाया। NIA की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अनिल सिंह ने कहा कि तीन अन्य डिवीजन बेंच भी इस मामले की सुनवाई करने की स्थिति में नहीं हो सकती हैं।

    अनिल सिंह ने यह भी कहा कि अगर इस बीच सचिन वाजे को रिहा कर दिया जाता है तो इससे आगे की कार्यवाही प्रभावित हो सकती है। इसके बाद मामले को जस्टिस गिरिश एस. कुलकर्णी की अगुवाई वाली बेंच को सौंप दिया गया।

    विशेष अदालत के जमानत आदेश के तुरंत बाद मंगलवार को ही NIA ने हाईकोर्ट का रुख किया था। ASG अनिल सिंह ने जस्टिस सारंग वी. कोतवाल की अगुवाई वाली डिवीजन बेंच के सामने विशेष अदालत के फैसले को चुनौती देते हुए तत्काल सुनवाई की मांग की थी। हालांकि जस्टिस कोतवाल ने मामले से खुद को अलग कर लिया।

    जस्टिस कोतवाल ने कहा था कि वह उन पक्षों से जुड़े मामलों की सुनवाई नहीं करते, जिनकी ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मनोज मोहते पेश हुए हैं। मनोज मोहते पहले सचिन वाजे की ओर से पेश हो चुके हैं। इसके बाद मामले को बुधवार को जस्टिस भारती एच. डांगरे की अगुवाई वाली वैकल्पिक बेंच के सामने सूचीबद्ध किया गया था।

    सचिन वाजे को जमानत देते समय विशेष अदालत ने कहा था कि प्रथम दृष्टया उनका कृत्य गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम यानी UAPA की धारा 15 में दी गई आतंकवादी कृत्य की परिभाषा को पूरा करता हुआ नहीं दिखता।

    विशेष अदालत ने यह भी कहा था कि NIA ऐसे बयान दर्ज करने में विफल रही, जिनसे यह साबित हो सके कि मुंबई स्थित घर के बाहर विस्फोटकों से भरी SUV मिलने के बाद अंबानी परिवार आतंकित हुआ था।

    यह मामला 25 फरवरी 2021 का है। उस दिन दक्षिण मुंबई में उद्योगपति मुकेश अंबानी के आवास एंटीलिया के पास खड़ी एक कार में धमकी भरा नोट मिला था। मामले की जांच आगे बढ़ने के बाद बर्खास्त पुलिस अधिकारी सचिन वाजे की भूमिका सामने आई और उनके खिलाफ कार्रवाई हुई।

    अब विशेष अदालत से मिली जमानत को चुनौती देने वाली NIA की अपील की सुनवाई नए सिरे से आगे बढ़ेगी। लगातार बेंचों के मामले से अलग होने के बाद इसे जस्टिस गिरिश एस. कुलकर्णी की अगुवाई वाली बेंच को सौंपा गया है।

  • थलपति विजय की TVK ने CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग से बनाई दूरी, SIR के विरोध पर कायम पार्टी

    थलपति विजय की TVK ने CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग से बनाई दूरी, SIR के विरोध पर कायम पार्टी

    नई दिल्ली । तमिलनाडु की सत्ताधारी तमिळगा वेत्री कड़गम यानी TVK ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग से खुद को अलग कर लिया है। कांग्रेस समेत कई विपक्षी दल इस मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं और ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग उठा रहे हैं। हालांकि थलपति विजय की पार्टी ने इस मांग का समर्थन नहीं किया है।

    TVK की ओर से कहा गया है कि किसी एक व्यक्ति को पद से हटाने से समस्या का समाधान नहीं होगा। पार्टी ने इसे मुद्दे से ध्यान भटकाने वाली रणनीति बताया है। हालांकि इसके साथ ही TVK ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR का विरोध जारी रखने की बात भी स्पष्ट की है।

    यह विवाद चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और SIR प्रक्रिया को लेकर सामने आई आपत्तियों के बाद तेज हुआ। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, चुनाव आयुक्त विवेक जोशी और सुखबीर सिंह संधू ने पिछले 10 महीनों में SIR की प्रक्रिया को लेकर कम से कम 14 बार आपत्ति दर्ज कराई थी। इसके बाद विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर सवाल उठाए और उनके खिलाफ इस्तीफे के साथ कानूनी कार्रवाई की मांग भी सामने आई।

    TVK के वरिष्ठ नेता और तमिलनाडु के स्कूली शिक्षा मंत्री ए राजमोहन ने पार्टी का रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि CEC को पद से हटाना किसी समस्या का समाधान नहीं है। उनके मुताबिक, किसी एक व्यक्ति को हटाने से व्यवस्था में बदलाव नहीं आएगा और पार्टी किसी भटकाने वाली रणनीति का हिस्सा नहीं बनेगी।

    हालांकि राजमोहन ने यह भी कहा कि TVK SIR का विरोध करती रहेगी। उन्होंने बताया कि पार्टी अध्यक्ष विजय ने सत्ता में आने से पहले ही SIR प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग की थी। राजमोहन के मुताबिक, SIR के दौरान चुनिंदा मतदाताओं के नाम हटाए गए और अगर ऐसा नहीं हुआ होता तो विधानसभा चुनाव में पार्टी की जीत और बड़ी होती।

    विजय और कांग्रेस के बीच पहले भी मतभेद सामने आ चुके हैं। इससे पहले TVK के नेताओं और मंत्रियों की ओर से वर्ष 2029 के लिए विजय को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बताए जाने के बाद विवाद पैदा हुआ था। उस समय कांग्रेस के मंत्रियों की ओर से कैबिनेट से इस्तीफा देने की धमकी तक सामने आई थी।

    फिलहाल तमिलनाडु में कांग्रेस के पांच विधायक हैं, जिनके समर्थन से TVK ने सरकार बनाई थी। इनमें से दो विधायकों को विजय ने मंत्री भी बनाया है। ऐसे में CEC के इस्तीफे के मुद्दे पर TVK का कांग्रेस से अलग रुख गठबंधन के भीतर मतभेदों को सामने लाता है।

    दूसरी ओर, डीएमके प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री एम के स्टालिन ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग का समर्थन किया है। डीएमके ने कहा है कि वह इंडिया गठबंधन का हिस्सा नहीं है, लेकिन संसद में ज्ञानेश कुमार को हटाने का प्रस्ताव आता है तो पार्टी उसका समर्थन करेगी।

    डीएमके प्रवक्ता टी के एस एलंगोवन ने कहा कि जब भी विपक्षी दल किसी मुद्दे पर बीजेपी का विरोध करेंगे, उनकी पार्टी उनके साथ खड़ी रहेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि डीएमके इंडिया गठबंधन का हिस्सा नहीं है, लेकिन संसद में ज्ञानेश कुमार के खिलाफ हटाने का प्रस्ताव लाया जाता है तो पार्टी उसका समर्थन करेगी।

    इससे पहले 23 सितंबर को स्टालिन ने बयान जारी कर कहा था कि मुख्य चुनाव आयुक्त को पद पर बने रहने का कोई अधिकार नहीं है। इस तरह ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे को लेकर कांग्रेस और डीएमके की मांग के बीच TVK ने अलग रुख अपनाया है। पार्टी ने SIR के विरोध को बरकरार रखते हुए CEC को हटाने की मांग को व्यवस्था में बदलाव का समाधान मानने से इनकार किया है।