Author: bharati

  • SC जज संदीप मेहता के आरोपों पर पूर्व जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा का पलटवार, बोले- जजों को अपनी सीमाएं पता होनी चाहिए

    SC जज संदीप मेहता के आरोपों पर पूर्व जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा का पलटवार, बोले- जजों को अपनी सीमाएं पता होनी चाहिए

    नई दिल्ली । राजस्थान हाईकोर्ट के पूर्व कार्यवाहक चीफ जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा ने सुप्रीम कोर्ट के जज संदीप मेहता की ओर से लगाए गए आरोपों पर जवाब दिया है। शर्मा ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि इनके पीछे पेशेवर ईर्ष्या की संभावना हो सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि जस्टिस मेहता को हाईकोर्ट के मामलों में दखल देने का अधिकार नहीं था।

    जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा हाल ही में राजस्थान हाईकोर्ट के जज पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें जस्टिस संदीप मेहता से जिरह करने का मौका दिया जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि राजस्थान में वकीलों को उनके खिलाफ प्रदर्शन के लिए उकसाया गया।

    जस्टिस मेहता ने अगस्त में भारत के मुख्य न्यायाधीश को कई पत्र भेजे थे। इन पत्रों में उन्होंने जस्टिस शर्मा पर शक्तियों के दुरुपयोग का आरोप लगाया था। उन्होंने यह भी दावा किया था कि उन्हें जस्टिस शर्मा के खिलाफ कई शिकायतें मिली हैं, जिनसे उनकी ईमानदारी को लेकर सवाल उठते हैं।

    इन शिकायतों के आधार पर जस्टिस मेहता ने कार्यवाहक चीफ जस्टिस को किसी दूसरे हाईकोर्ट में स्थानांतरित करने और राजस्थान हाईकोर्ट में नए चीफ जस्टिस की नियुक्ति की मांग की थी। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के जज संजय के. अग्रवाल को राजस्थान हाईकोर्ट का चीफ जस्टिस बनाने की सिफारिश की। यह सिफारिश उस समय हुई जब वकीलों के विरोध के बीच जस्टिस शर्मा छुट्टी पर चले गए थे।

    जस्टिस शर्मा ने प्रभावशाली मुकदमेदारों को फायदा पहुंचाने, रोस्टर में हेरफेर करने, जांच में दखल देने और किसी खास पक्ष को फायदा पहुंचाने के लिए न्यायिक अधिकारियों के तबादले के आरोपों से इनकार किया। उन्होंने कहा कि काम करने के तरीके में अंतर होने का मतलब यह नहीं है कि कोई गलत है। उन्होंने कार्यवाहक चीफ जस्टिस के तौर पर अपने प्रशासनिक रिकॉर्ड का भी बचाव किया और लंबित पदोन्नतियों, तबादलों तथा बढ़ी हुई फंडिंग का जिक्र किया।

    शर्मा ने कहा कि अगर कोई शिकायत थी तो वह सबसे पहले चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया के पास क्यों नहीं गई। उन्होंने बताया कि उन्होंने जस्टिस मेहता के चार पत्रों के जवाब दिए हैं और खुद सीजेआई को पत्र लिखकर सवाल उठाया है कि क्या सुप्रीम कोर्ट का कोई जज हाईकोर्ट के कामकाज में दखल दे सकता है।

    जस्टिस शर्मा ने कहा कि जजों को अपनी सीमाएं पता होनी चाहिए। उनके मुताबिक, जजों को यह समझना चाहिए कि उन्हें कहां बोलना है और कहां नहीं। उन्होंने कहा कि जज अपने फैसलों के जरिए बोलते हैं और उनके फैसलों की न्यायिक समीक्षा होती है। उन्होंने अपने कार्यकाल का जिक्र करते हुए कहा कि करीब साढ़े नौ साल के छोटे से कार्यकाल में उन्होंने 88 हजार से अधिक मामलों का फैसला किया। उनके मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट में जांचे गए उनके कई फैसले बरकरार रखे गए।

    जब जस्टिस मेहता की ओर से लगाए गए आरोपों की वजह के बारे में पूछा गया तो शर्मा ने कहा कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं है। हालांकि उन्होंने इसकी वजह साधारण पेशेवर जलन होने की संभावना जताई। उन्होंने बताया कि वर्ष 2011 में दोनों को सीनियर एडवोकेट बनाया गया था। शर्मा के मुताबिक, उन्होंने इसके लिए आवेदन नहीं किया था, जबकि जस्टिस मेहता ने आवेदन किया था।

    शर्मा ने कहा कि वह पहली पीढ़ी के वकील हैं, जबकि जस्टिस मेहता न्यायिक परिवार से आते हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि दोनों के सीनियर एडवोकेट बनने के बाद पदोन्नति के समय जस्टिस मेहता ने यह सुनिश्चित किया कि वह चीफ जस्टिस न बनें।

    दोनों के कभी साथ काम नहीं करने की बात कहते हुए शर्मा ने बताया कि वकालत के दौरान जस्टिस मेहता जोधपुर और वह जयपुर में थे। जज बनने के बाद भी दोनों अलग-अलग जगहों पर रहे। उनके मुताबिक, जस्टिस मेहता मुख्य रूप से आपराधिक मामलों से जुड़े रहे, जबकि वह संवैधानिक मामलों के वकील रहे हैं।

    बूंदी के एक मुकदमेदार रघुबीर सिंह अत्री से मुलाकात पर सफाई देते हुए शर्मा ने कहा कि अत्री उनके साले नहीं, बल्कि पारिवारिक रिश्ते में भाई-बहन के संबंध में हैं। उन्होंने बताया कि अत्री छुट्टियों में आए थे और वह उन्हें मंदिर ले गए थे। उन्होंने कहा कि बाद में इस मुलाकात को मुकदमे को प्रभावित करने की कोशिश के तौर पर पेश किया गया।

    करीब 800 तबादलों के सवाल पर शर्मा ने कहा कि अत्री के मामले से इन्हें जोड़ना बिल्कुल बेतुका है। उन्होंने बताया कि सामान्य तौर पर तबादले रजिस्ट्रार जनरल करते हैं और इसमें अधिकारी के किसी स्थान पर बिताए गए समय समेत कई बातों को देखा जाता है। रोस्टर में हेरफेर के आरोप पर उन्होंने कहा कि मामलों के आवंटन का अधिकार चीफ जस्टिस के पास होता है।

    उदयपुर डेवलपमेंट अथॉरिटी मामले पर शर्मा ने कहा कि तीन जजों के खुद को मामले से अलग करने के बाद उन्होंने इसकी सुनवाई की थी। उन्होंने बताया कि एडवोकेट जनरल ने उनसे अपील की सुनवाई करने का अनुरोध किया था। वकीलों के विरोध पर उन्होंने कहा कि यदि उनकी मांगों का आधार नहीं है तो जजों को उन्हें खुश करने की जरूरत नहीं है।

  • अभिजीत दीपके मुंबई की सड़क पर चेहरे पर नकाब लगाकर निकले, बोले- कई महीनों बाद अकेले चलने का मिला मौका

    अभिजीत दीपके मुंबई की सड़क पर चेहरे पर नकाब लगाकर निकले, बोले- कई महीनों बाद अकेले चलने का मिला मौका


    नई दिल्ली । कॉकरोच जनता पार्टी के प्रमुख अभिजीत दीपके इन दिनों मुंबई में हैं, जहां वह मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रस्तावित आंदोलन की तैयारियों में जुटे हुए हैं। इसी दौरान उनका एक वीडियो सामने आया, जिसमें वह चेहरे पर रुमाल से नकाब बांधकर सड़क पर पैदल चलते नजर आए। उन्होंने इस दौरान बताया कि कई महीनों बाद उन्हें इस तरह अकेले सड़क पर चलने का मौका मिला है।

    दरअसल, सोशल मीडिया पर अपनी पहचान बनाने के बाद अभिजीत दीपके काफी चर्चित हो चुके हैं। उनके समर्थकों और आलोचकों की बड़ी संख्या है। ऐसे में आम लोगों की तरह सार्वजनिक जगहों पर अकेले घूमना उनके लिए आसान नहीं रहता। मुंबई में जब ट्रैफिक जाम के कारण उनकी गाड़ी आगे नहीं बढ़ पा रही थी, तब उन्होंने कार से उतरकर पैदल चलने का फैसला किया।

    दीपके ने इस दौरान अपने चेहरे को रुमाल से ढक लिया था। उनके साथ मौजूद एक व्यक्ति ने इस पल को कैमरे में रिकॉर्ड किया और उनसे सड़क पर अकेले चलने के अनुभव के बारे में पूछा। इस पर दीपके ने खुशी जताते हुए कहा कि कई महीनों बाद वह इस तरह सड़क पर अकेले चल रहे हैं। उन्होंने ट्रैफिक रुकने की स्थिति को ही उनके लिए पैदल चलने का मौका बनने वाला कारण बताया।

    दीपके ने कहा कि सड़क पर कोई उनके साथ नहीं है और इस तरह अकेले चलना उन्हें अच्छा लग रहा है। उन्होंने इसे अच्छा अनुभव बताया। चेहरे पर नकाब लगाने की वजह से वह कुछ समय के लिए आम लोगों की तरह सड़क पर पैदल चल सके।

    यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब अभिजीत दीपके और उनके संगठन ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आंदोलन का ऐलान किया है। आंदोलन की शुरुआत 2 अक्टूबर से मुंबई में करने की घोषणा की गई है। संगठन की ओर से मुंबई के शिवाजी पार्क में प्रदर्शन की योजना बताई गई थी। हालांकि, मुंबई पुलिस ने वहां प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी है। पुलिस ने शिवाजी पार्क के इस्तेमाल से जुड़े नियमों और अन्य प्रशासनिक कारणों का हवाला दिया है।

    दीपके ने अनुमति नहीं मिलने के बावजूद आंदोलन जारी रखने की बात कही थी। उन्होंने कहा था कि अगर प्रदर्शन के अधिकार से रोका गया तो जेल भरो आंदोलन किया जाएगा। संगठन की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग की जा रही है। यह मांग मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े आरोपों को लेकर उठाई गई है।

    चुनाव आयोग ने दूसरी ओर कहा है कि संस्थागत विचार-विमर्श के दौरान अलग-अलग राय और टिप्पणियां होना सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है तथा आयोग के फैसले कानूनी प्रक्रिया के अनुरूप हैं। इस पूरे मामले को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर अलग-अलग दावे और प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

    अभिजीत दीपके इससे पहले भी आंदोलनों को लेकर चर्चा में रहे हैं। अब 2 अक्टूबर को प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले उनका मुंबई की सड़क पर नकाब लगाकर अकेले पैदल चलना भी चर्चा का विषय बन गया है। उनके मुताबिक, ट्रैफिक जाम की वजह से मिला यह मौका उन्हें कई महीनों बाद सामान्य तरीके से सड़क पर चलने का अनुभव दे गया।

  • जुबिन नौटियाल के पिता रामशरण नौटियाल ने भाजपा से दिया इस्तीफा, कांग्रेस में जाने और 2027 चुनाव लड़ने की अटकलें तेज

    जुबिन नौटियाल के पिता रामशरण नौटियाल ने भाजपा से दिया इस्तीफा, कांग्रेस में जाने और 2027 चुनाव लड़ने की अटकलें तेज


    नई दिल्ली । मशहूर गायक जुबिन नौटियाल के पिता रामशरण नौटियाल ने भारतीय जनता पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। रामशरण नौटियाल देहरादून जिले की विकासनगर विधानसभा क्षेत्र में भाजपा के प्रमुख चेहरों में शामिल रहे हैं और जिला पंचायत अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। उनके इस्तीफे के बाद उत्तराखंड की राजनीति में उनके अगले कदम को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।

    रामशरण नौटियाल वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के टिकट पर चकराता विधानसभा सीट से चुनाव लड़ चुके हैं। उस चुनाव में उन्हें 27,417 वोट मिले थे, जबकि कांग्रेस के प्रीतम सिंह को 36,853 मत प्राप्त हुए थे। इसके बाद भी रामशरण नौटियाल क्षेत्र की राजनीति में सक्रिय रहे। अब पार्टी से उनके अलग होने के फैसले ने चकराता और विकासनगर क्षेत्र में राजनीतिक चर्चाओं को बढ़ा दिया है।

    रामशरण नौटियाल के इस्तीफे के बाद उनके कांग्रेस में शामिल होने की अटकलें भी सामने आई हैं। यह चर्चा है कि वह विकासनगर विधानसभा सीट से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ने की दावेदारी कर सकते हैं। उनके कांग्रेस के कुछ नेताओं के संपर्क में होने की बातें भी सामने आई हैं, लेकिन इस संबंध में उनकी ओर से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। इसलिए फिलहाल इसे राजनीतिक अटकलों के तौर पर ही देखा जा रहा है।

    इस्तीफे को लेकर भाजपा की ओर से भी अलग प्रतिक्रिया सामने आई है। रामशरण नौटियाल ने अपने निजी सहायक राज के माध्यम से पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष को इस्तीफा भेजे जाने की बात सामने आई है। हालांकि, प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने उनके इस्तीफे की जानकारी होने से इनकार किया है। इस वजह से इस्तीफे की प्रक्रिया और उसके औपचारिक रूप से स्वीकार होने को लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं है।

    रामशरण नौटियाल पिछले कुछ समय से पार्टी के भीतर चल रहे घटनाक्रमों को लेकर नाराज बताए जा रहे थे। हाल ही में एक कार्यक्रम के दौरान भाजपा के एक कैबिनेट मंत्री की ओर से कथित तौर पर मधु चौहान को अगला दावेदार बताए जाने के बाद रामशरण नौटियाल की पार्टी से दूरी की चर्चा शुरू हुई थी।

    इसके अलावा देहरादून में भाजपा की दावेदार मानी जा रही मधु चौहान ने भी हाल में अपनी ही सरकार के एक मंत्री के खिलाफ मोर्चा खोला था। इस पूरे घटनाक्रम में रामशरण नौटियाल की ओर से कार्रवाई की मांग किए जाने की बात सामने आई थी। उनका कहना था कि इस मामले में पार्टी की ओर से अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। इसी वजह से वह नाराज चल रहे थे और अब उनका इस्तीफा सामने आया है।

    रामशरण नौटियाल वर्ष 2023 में भी अपनी ही पार्टी के स्थानीय नेताओं को लेकर सार्वजनिक रूप से सवाल उठा चुके हैं। उन्होंने चकराता और कालसी ब्लॉक में कथित भ्रष्टाचार तथा जौनसार-बावर क्षेत्र में लकड़ी की कथित तस्करी को लेकर आरोप लगाए थे। ये आरोप उस समय उनके द्वारा लगाए गए थे और इन्हें स्वतंत्र रूप से सिद्ध तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जा सकता।

    अब 2027 के उत्तराखंड विधानसभा चुनाव से पहले रामशरण नौटियाल के भाजपा से अलग होने के बाद उनके अगले राजनीतिक कदम पर नजर बनी हुई है। कांग्रेस में शामिल होने और विकासनगर से चुनाव लड़ने की चर्चाएं जरूर हैं, लेकिन अंतिम फैसला और आधिकारिक घोषणा अभी सामने नहीं आई है।

  • कृष्णा-कश्मीरा संग सुनीता आहूजा का फैमिली मोमेंट गोविंदा का नाम आते ही सबने किया सवाल को इग्नोर

    कृष्णा-कश्मीरा संग सुनीता आहूजा का फैमिली मोमेंट गोविंदा का नाम आते ही सबने किया सवाल को इग्नोर


    नई दिल्ली। बॉलीवुड के चर्चित परिवारों में शामिल गोविंदा और सुनीता आहूजा का रिश्ता एक बार फिर सुर्खियों में है। लंबे समय से दोनों के बीच रिश्तों को लेकर तरह तरह की चर्चाएं सामने आती रही हैं। इसी बीच सुनीता आहूजा अपने बेटे यशवर्धन के साथ एक पार्टी में पहुंचीं जहां उनकी मुलाकात कृष्णा अभिषेक और कश्मीरा शाह से हुई। पार्टी में दोनों परिवारों के सदस्यों ने एक साथ वक्त बिताया और कैमरे के सामने तस्वीरें भी खिंचवाईं। इस दौरान सुनीता और कश्मीरा के बीच जिस तरह की गर्मजोशी दिखाई दी उसने लोगों का ध्यान खींच लिया।

    पार्टी में पहुंचते ही कश्मीरा शाह ने अपनी सास सुनीता आहूजा का गर्मजोशी से स्वागत किया। दोनों एक दूसरे से गले मिलीं और कश्मीरा ने सुनीता के प्रति अपना प्यार भी जाहिर किया। सुनीता भी अपनी बहू के साथ काफी सहज और खुश नजर आईं। दोनों की बॉन्डिंग देखकर ऐसा लगा जैसे परिवार के पुराने मतभेद अब पीछे छूट चुके हैं। कृष्णा अभिषेक भी इस दौरान परिवार के साथ नजर आए और सभी ने पैपराजी के सामने मिलकर पोज दिए।

    हालांकि इस मुलाकात के दौरान एक सवाल ऐसा भी आया जिसने सबका ध्यान खींच लिया। पैपराजी ने सुनीता आहूजा से पूछा कि मामा यानी गोविंदा कहां हैं। लेकिन इस सवाल पर सुनीता ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। वहां मौजूद किसी भी व्यक्ति ने गोविंदा को लेकर बात नहीं की और सवाल को नजरअंदाज कर दिया गया। यही वजह है कि पार्टी की तस्वीरों और वीडियो के साथ गोविंदा का नाम भी सोशल मीडिया पर चर्चा में आ गया।

    सुनीता और कश्मीरा के रिश्ते की कहानी भी काफी दिलचस्प रही है। एक समय दोनों के बीच अनबन की खबरें सामने आती थीं और दोनों परिवारों के बीच दूरी की चर्चाएं लंबे समय तक बनी रहीं। हालांकि बाद में परिस्थितियां बदलीं और दोनों के रिश्ते में सुधार देखने को मिला। खास तौर पर एक कुकिंग शो के दौरान कश्मीरा ने सुनीता से पुरानी बातों को लेकर माफी मांगी थी। सुनीता ने भी उन्हें खुले दिल से माफ कर दिया था। इसके बाद दोनों के बीच रिश्ते काफी सहज नजर आने लगे।

    कश्मीरा कई मौकों पर सुनीता के प्रति अपना समर्थन जाहिर कर चुकी हैं। सार्वजनिक कार्यक्रमों और सोशल मीडिया से जुड़े उनके कुछ बयानों के कारण भी यह रिश्ता चर्चा में रहा है। सास और बहू के बीच अब दिखाई देने वाली नजदीकी फैंस के लिए भी खास है क्योंकि कभी दोनों के बीच मतभेदों की खबरें खूब सुर्खियों में रहती थीं। अब एक ही जगह पर दोनों का हंसते हुए नजर आना रिश्तों में आए बदलाव की तस्वीर दिखाता है।

    दूसरी तरफ गोविंदा और सुनीता आहूजा के रिश्ते को लेकर मीडिया में लगातार चर्चाएं चलती रही हैं। गोविंदा की निजी जिंदगी और कथित नजदीकियों को लेकर सामने आने वाली खबरों ने भी इस परिवार को सुर्खियों में रखा है। हालांकि इन मामलों से जुड़े कई दावे सार्वजनिक चर्चाओं और रिपोर्टों पर आधारित हैं और हर दावे की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।

    फिलहाल पार्टी का यह वीडियो और तस्वीरें इसलिए खास बन गए हैं क्योंकि इसमें सुनीता आहूजा कृष्णा अभिषेक और कश्मीरा शाह एक साथ नजर आ रहे हैं। जहां एक तरफ सास बहू की शानदार बॉन्डिंग देखने को मिली वहीं मामा यानी गोविंदा के सवाल पर मिली खामोशी ने लोगों की उत्सुकता बढ़ा दी। इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर गोविंदा परिवार के रिश्तों को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

  • स्त्री 3 पर बड़ा अपडेट, दिनेश विजान ने रिलीज से पहले शूटिंग और कहानी को लेकर बताया पूरा प्लान

    स्त्री 3 पर बड़ा अपडेट, दिनेश विजान ने रिलीज से पहले शूटिंग और कहानी को लेकर बताया पूरा प्लान


    नई दिल्ली । स्त्री फ्रेंचाइजी की तीसरी फिल्म स्त्री 3 को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। श्रद्धा कपूर और राजकुमार राव की इस चर्चित हॉरर कॉमेडी फ्रेंचाइजी की अगली फिल्म के लिए दर्शकों को अभी लंबा इंतजार करना होगा। फिल्म के प्रोड्यूसर दिनेश विजान ने बताया है कि स्त्री 3 साल 2028 में रिलीज होगी। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि फिल्म की कहानी लिखने का काम पूरा हो चुका है।

    दिनेश विजान ने बताया कि अमर कौशिक ने स्त्री 3 की राइटिंग पूरी कर ली है। उनके मुताबिक, फिल्म में वह सभी चीजें देखने को मिलेंगी जो दर्शकों को पिछली फिल्म में पसंद आई थीं। हालांकि, उन्होंने कहानी से जुड़ी ज्यादा जानकारी साझा करने से इनकार किया, क्योंकि अमर कौशिक को लगता है कि वह फिल्म से जुड़े ज्यादा स्पॉइलर दे देते हैं। इसके बावजूद उन्होंने संकेत दिया कि फिल्म की शुरुआत और अंत दर्शकों को हैरान कर सकता है।

    उन्होंने कहा कि स्त्री 3 साल 2028 में आएगी। उनके मुताबिक, फिल्म को स्वतंत्रता दिवस या क्रिसमस के मौके पर रिलीज किया जा सकता है और यह दर्शकों के लिए एक खास तोहफा हो सकती है। हालांकि, अभी रिलीज की कोई निश्चित तारीख सामने नहीं आई है।

    स्त्री 3 से पहले अमर कौशिक एक अन्य महत्वाकांक्षी फिल्म महावतार का निर्देशन करेंगे। इस फिल्म में विकी कौशल मुख्य भूमिका में नजर आएंगे। महावतार की कहानी भगवान परशुराम से जुड़ी होगी। दिनेश विजान ने बताया कि अमर कौशिक जनवरी के आखिर में महावतार का निर्देशन शुरू करेंगे और जून तक इसका डायरेक्शन पूरा करने की योजना है।

    इसके बाद अगले साल के अंत तक स्त्री 3 की शूटिंग शुरू होने की बात कही गई है। इस तरह फिल्म की शूटिंग शुरू होने से पहले महावतार का काम पूरा किया जाएगा। स्त्री फ्रेंचाइजी से अमर कौशिक लंबे समय से जुड़े हुए हैं और वह इसके निर्देशन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं।

    स्त्री फ्रेंचाइजी की पहली फिल्म साल 2018 में रिलीज हुई थी। इसमें राजकुमार राव, श्रद्धा कपूर, पंकज त्रिपाठी, अभिषेक बनर्जी और अपारशक्ति खुराना जैसे कलाकार नजर आए थे। फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर अच्छा प्रदर्शन किया और भारत में करीब 129.90 करोड़ रुपये की कमाई की थी।

    इसके बाद स्त्री 2 साल 2024 में रिलीज हुई। फिल्म 15 अगस्त को सिनेमाघरों में आई थी। इसमें राजकुमार राव, श्रद्धा कपूर, अपारशक्ति खुराना और अभिषेक बनर्जी के साथ अक्षय कुमार और मुश्ताक खान भी नजर आए। स्त्री 2 ने भारत में करीब 627.02 करोड़ रुपये की कमाई की थी और उस साल की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्मों में शामिल रही।

    स्त्री के बाद इस हॉरर कॉमेडी यूनिवर्स का विस्तार हुआ। भेड़िया 2022 में, मुंज्या और स्त्री 2 साल 2024 में, जबकि थामा 2025 में रिलीज हुई। अब इस यूनिवर्स की अगली बड़ी कड़ी स्त्री 3 होगी।

  • सलमान खान से 9 साल छोटी सोनाली कुलकर्णी ने निभाया उनकी मां का किरदार, बताया क्यों पहले रोल ठुकराना चाहती थीं

    सलमान खान से 9 साल छोटी सोनाली कुलकर्णी ने निभाया उनकी मां का किरदार, बताया क्यों पहले रोल ठुकराना चाहती थीं

    नई दिल्ली । साल 2019 में रिलीज हुई फिल्म भारत में सलमान खान की मां का किरदार निभाने वाली सोनाली कुलकर्णी उम्र में उनसे 9 साल छोटी हैं। पर्दे पर मां की भूमिका निभाने को लेकर सोनाली ने बताया कि शुरुआत में वह इस रोल को स्वीकार करने को लेकर झिझक रही थीं। उन्हें लगा था कि किरदार उनकी उम्र और व्यक्तित्व के लिहाज से उपयुक्त नहीं है।

    सोनाली ने बताया कि जब उन्हें भारत में यह भूमिका ऑफर की गई थी, तब उन्हें लगा कि यह रोल उन्हें सही तरीके से सूट नहीं कर रहा है। उन्होंने इस भूमिका के लिए उपयुक्त लगने वाले कुछ कलाकारों के नाम भी सुझाए थे। उन्होंने फिल्म के निर्देशक अली अब्बास जफर और कास्टिंग निर्देशक मुकेश छाबड़ा से सवाल किया था कि आखिर उन्हें यह भूमिका क्यों ऑफर की जा रही है।

    हालांकि, सोनाली ने यह भी स्पष्ट किया कि उन्हें किसी खास तरह के किरदार को निभाने से डर नहीं लगता। उन्होंने अपने पुराने काम का उदाहरण देते हुए बताया कि उनकी पहली फिल्म चेलुवी में उन्होंने ऐसी लड़की की भूमिका निभाई थी, जो फूलों वाला पेड़ बन सकती थी। वहीं दायरा में उन्होंने एक लड़के का किरदार निभाया था। उनके मुताबिक, किसी किरदार को सिर्फ इसलिए अलग नजर से नहीं देखना चाहिए क्योंकि उसमें किसी की मां की भूमिका निभानी है।

    सोनाली ने कहा कि किसी महिला का मां होना उसके दूसरे रिश्तों और पहचान को खत्म नहीं करता। उनके मुताबिक, एक मां किसी की दोस्त, भाभी या पत्नी भी हो सकती है। उन्होंने मिशन कश्मीर का उदाहरण देते हुए कहा कि आज भी लोग उन्हें उस फिल्म में संजय दत्त के किरदार की पत्नी के रूप में जानते हैं, न कि ऋतिक रोशन की सरोगेट मां के रूप में।

    भारत के मामले में उनकी झिझक की एक वजह यह भी थी कि किरदार के अनुसार उम्र का असर दिखना जरूरी था। हालांकि, जब उन्होंने फिल्म की कहानी सुनी तो उन्हें समझ आया कि इसमें सलमान खान के बचपन के फ्लैशबैक पर काफी जोर दिया गया है। इसी वजह से उन्हें लगा कि किरदार को निभाने का अवसर अलग तरह से काम कर सकता है।

    सोनाली ने यह भी बताया कि उन्होंने सलमान खान के साथ पहले कभी काम नहीं किया था। उनकी सलमान से सिर्फ एक बार मुलाकात हुई थी, जब वह अपनी फिल्म के म्यूजिक लॉन्च कार्यक्रम में उनसे मिली थीं। इसलिए उन्हें लगा कि भारत में उनकी मां की भूमिका निभाना सलमान के साथ जुड़ने का अच्छा अवसर हो सकता है। इसी सोच के बाद उन्होंने भूमिका स्वीकार कर ली।

    फिल्म में सलमान खान के साथ कटरीना कैफ भी नजर आई थीं। सोनाली ने कटरीना के साथ काम करने के अनुभव की भी तारीफ की। उन्होंने बताया कि उन्होंने कटरीना को डांस नंबरों के लिए काफी गंभीरता और मेहनत के साथ रिहर्सल करते देखा था और उनके साथ काम करना अच्छा अनुभव रहा।

    भारत में सुनील ग्रोवर, दिशा पाटनी और जैकी श्रॉफ ने भी अहम भूमिकाएं निभाईं। फिल्म का बजट 165 करोड़ रुपये बताया गया था, जबकि दुनियाभर में इसकी कमाई 321 करोड़ रुपये रही थी।

  • KBC 18 में बिग बी के साथ हुआ हादसा पैर फिसलने से चोटिल हुआ घुटना अमिताभ ने फैंस को दिया बड़ा अपडेट

    KBC 18 में बिग बी के साथ हुआ हादसा पैर फिसलने से चोटिल हुआ घुटना अमिताभ ने फैंस को दिया बड़ा अपडेट


    नई दिल्ली। कौन बनेगा करोड़पति सीजन 18 का लेटेस्ट एपिसोड अमिताभ बच्चन के लिए कुछ अलग रहा। हर बार की तरह इस बार भी दर्शक अपने पसंदीदा होस्ट को मंच के बीचोंबीच खड़े होकर शो की शुरुआत करते देखने का इंतजार कर रहे थे लेकिन अमिताभ बच्चन इस बार बैठे हुए नजर आए। इसकी वजह उन्होंने खुद दर्शकों को बताई। बिग बी ने जानकारी दी कि शूटिंग के दौरान उनका पैर फिसल गया था और वह गिर गए थे। इस हादसे में उनके घुटने में चोट लग गई जिसके कारण उन्हें खड़े होने में थोड़ी परेशानी हो रही थी।

    अमिताभ बच्चन ने KBC 18 के एपिसोड की शुरुआत में अपनी चोट के बारे में बात करते हुए दर्शकों को पूरी स्थिति बताई। उन्होंने कहा कि आमतौर पर वह स्टेज के बीच में खड़े होकर अपना मोनोलॉग बोलते हैं लेकिन इस बार घुटने में चोट होने के कारण वह ऐसा नहीं कर पा रहे थे। उन्होंने बताया कि शूटिंग के दौरान उनका पैर अचानक फिसला और वह गिर गए। इसके बाद घुटने में चोट लग गई। हालांकि बिग बी ने यह भी साफ किया कि चोट गंभीर नहीं है और फैंस को ज्यादा चिंता करने की जरूरत नहीं है।

    अमिताभ बच्चन ने बताया कि वह चाहें तो खड़े होकर अपना मोनोलॉग बोल सकते थे लेकिन लंबे समय तक खड़े रहने में उन्हें परेशानी महसूस हो रही थी। इसी वजह से उन्होंने बैठे हुए ही शो की शुरुआत करने का फैसला किया। उनके इस अंदाज को देखकर दर्शकों को उनकी चोट की गंभीरता को लेकर चिंता हुई लेकिन अमिताभ की बातों से यह संकेत मिला कि वह काम जारी रखने की स्थिति में हैं।

    अमिताभ बच्चन लंबे समय से KBC के मंच का प्रमुख चेहरा बने हुए हैं और शो में उनकी खास शैली दर्शकों को लगातार पसंद आती रही है। ऐसे में शूटिंग के दौरान उनके चोटिल होने की खबर सामने आते ही उनके प्रशंसकों की नजर उनकी सेहत पर टिक गई। हालांकि खुद अमिताभ ने अपनी स्थिति के बारे में जानकारी देकर फैंस को राहत दी। चोट के बावजूद उन्होंने एपिसोड की शूटिंग जारी रखी और दर्शकों से बातचीत भी की।

    बिग बी का काम केवल KBC 18 तक सीमित नहीं है। वह आने वाले समय में कई बड़े प्रोजेक्ट्स का हिस्सा भी हैं। नाग अश्विन की फिल्म काल्कि 2898 एडी के अगले भाग में वह अश्वत्थामा के किरदार में फिर नजर आने वाले हैं। रिपोर्ट के मुताबिक फिल्म की शूटिंग अक्टूबर 2026 से आगे बढ़ने की उम्मीद है। इसके अलावा सेक्शन 84 भी उनके आगामी प्रोजेक्ट्स में शामिल है। यह रिभु दासगुप्ता की कोर्टरूम ड्रामा फिल्म बताई जा रही है।

    अमिताभ बच्चन के साथ शूटिंग के दौरान चोट लगने का यह पहला मामला नहीं है। मार्च 2023 में हैदराबाद में कल्कि 2898 एडी की शूटिंग के दौरान एक एक्शन सीन करते समय उनके दाहिने पसली वाले हिस्से में चोट लगी थी। उस समय उन्हें मांसपेशियों में खिंचाव की शिकायत हुई थी और चलने फिरने के साथ सांस लेने में भी दर्द महसूस हो रहा था। इसके बाद शूटिंग रोककर उन्हें आराम करने की सलाह दी गई थी। स्वस्थ होने के बाद उन्होंने दोबारा काम शुरू किया था।

    फिलहाल KBC 18 के सेट पर लगी घुटने की चोट को लेकर अमिताभ बच्चन ने खुद स्थिति स्पष्ट कर दी है। उन्होंने अपने अंदाज में फैंस को भरोसा दिलाया कि चोट गंभीर नहीं है। शो के दौरान उनका बैठे हुए नजर आना जरूर दर्शकों के लिए अलग अनुभव रहा लेकिन अमिताभ की मौजूदगी ने यह साफ कर दिया कि चोट के बावजूद उनका काम और KBC के प्रति उनका जुड़ाव जारी है।

  • यूक्रेन पर रूस का मिसाइल-ड्रोन अटैक, बिजली और इंटरनेट केंद्रों को बनाया निशाना

    यूक्रेन पर रूस का मिसाइल-ड्रोन अटैक, बिजली और इंटरनेट केंद्रों को बनाया निशाना

    कीव। रूस ने यूक्रेन पर एक बार फिर बड़े पैमाने पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं। बुधवार को यूक्रेनी अधिकारियों ने बताया कि रातभर चले हमलों में राजधानी कीव और आसपास के इलाकों को निशाना बनाया गया। हमलों में ऊर्जा ढांचे के साथ एक अहम इंटरनेट केंद्र को भी नुकसान पहुंचने की जानकारी सामने आई है। अधिकारियों के मुताबिक कीव और उसके उत्तरी बाहरी इलाके में दो महिलाओं और 14 वर्षीय बच्चे समेत कई लोगों की मौत हुई है।

    कीव के मेयर विटाली क्लिचको ने बताया कि शहर के एक गोदाम पर हुए हमले में एक व्यक्ति की मौत हुई। वहीं, कीव क्षेत्र के विशहोरोद में एक निजी मकान के मलबे से 14 वर्षीय बच्चे का शव बरामद किया गया। इसी मकान से तीन अन्य लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। क्षेत्रीय सैन्य प्रशासन के प्रमुख तिमुर तकाचेंको के अनुसार, राजधानी और आसपास के इलाकों में कई लोग घायल भी हुए हैं।

    अगस्त के अंत से बढ़े हवाई हमले

    यूक्रेनी अधिकारियों के अनुसार, अगस्त के अंत से रूस ने हवाई हमलों की तीव्रता बढ़ाई है। यह हमले ऐसे समय हो रहे हैं जब यूक्रेन सर्दियों की तैयारी कर रहा है। रूस की ओर से लगातार ऊर्जा संयंत्रों, बिजली सबस्टेशनों और उनसे जुड़ी सुविधाओं को निशाना बनाए जाने की बात कही जा रही है।

    यूक्रेन की बिजली कंपनी डीटीईके ने नुकसान का विस्तृत आंकड़ा नहीं दिया, लेकिन बताया कि उसके कर्मचारियों ने हमलों के बाद करीब 8,000 घरों में बिजली की आपूर्ति बहाल कर दी।

    188 ड्रोन और कई मिसाइलें दागने का दावा

    यूक्रेन की वायुसेना के मुताबिक, रूस ने रातभर के हमलों में एंटी-शिप और बैलिस्टिक मिसाइलों के साथ 188 ड्रोन दागे। यूक्रेन का दावा है कि इनमें से पांच मिसाइलों और 155 ड्रोन को रोक दिया गया। बाकी हथियारों में से कुछ अपने निशाने तक पहुंचे।

    रूस ने भी हमलों की पुष्टि की है। उसके रक्षा मंत्रालय के अनुसार, रूसी सेना ने कीव में सैन्य गतिविधियों से जुड़े एक डेटा सेंटर, कीव क्षेत्र के बिजली संयंत्र, ओडेसा क्षेत्र के एक औद्योगिक परिसर और इजमाइल बंदरगाह की सुविधाओं को निशाना बनाया।

    हालांकि, यूक्रेन ने रूस के इन विशिष्ट दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की है। यूक्रेनी अधिकारियों ने कहा कि कीव के कम से कम चार जिलों में नागरिक इलाके भी हमलों की चपेट में आए।

    जेलेंस्की बोले- ऊर्जा व्यवस्था पर है मुख्य निशाना

    यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि रूस के हमलों का मुख्य निशाना कीव और उसके आसपास की ऊर्जा व्यवस्था है। उन्होंने इसे मुश्किल हमला बताते हुए कहा कि लगातार हो रहे हमलों से यूक्रेन की वायु रक्षा व्यवस्था पर दबाव बढ़ रहा है।

    जेलेंस्की ने उन देशों का भी आभार जताया, जिन्होंने हाल में यूक्रेन को हवाई रक्षा के लिए सहायता उपलब्ध कराई है।

    युद्ध खत्म कराने की कोशिशों के बीच जारी हैं हमले

    रूस-यूक्रेन युद्ध को शुरू हुए साढ़े चार साल से अधिक समय हो चुका है। यूक्रेनी अधिकारियों का कहना है कि रूस अमेरिकी प्रयासों के तहत युद्ध समाप्त करने की प्रक्रिया में आगे बढ़ने को तैयार नहीं है।

    वहीं, रूस का कहना है कि वह सीमित अवधि के युद्धविराम के बजाय व्यापक और स्थायी समझौता चाहता है। रूस की ओर से यूक्रेन के कुछ क्षेत्रों पर उसके दावे और क्षेत्रीय रियायतों की मांग विवाद का प्रमुख मुद्दा बनी हुई है, जबकि कीव अपनी जमीन छोड़ने को तैयार नहीं है। दोनों पक्षों की अलग-अलग शर्तों के बीच शांति वार्ता में प्रगति नहीं हो सकी है और इसी दौरान हवाई हमले लगातार जारी हैं।

  • ट्रंप ने सुंदर पिचई को कहा ‘मॉन्स्टर’, गूगल CEO ने मुस्कुराकर दिया जवाब

    ट्रंप ने सुंदर पिचई को कहा ‘मॉन्स्टर’, गूगल CEO ने मुस्कुराकर दिया जवाब


    वाशिंगटन।
    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस में आयोजित एआई बैठक के बाद गूगल के सीईओ सुंदर पिचई को ‘मॉन्स्टर’ कहकर संबोधित किया। हालांकि, ट्रंप का इशारा अपमान की ओर नहीं बल्कि पिचई की तकनीकी क्षेत्र में प्रभावशाली पहचान और सफलता की ओर था। पिचई ने भी मुस्कुराते हुए इस टिप्पणी का हल्के-फुल्के अंदाज में जवाब दिया।

    मंगलवार को ट्रंप ने एआई और टेक्नोलॉजी जगत के कई दिग्गजों के साथ व्हाइट हाउस में बैठक की। इसमें पिचई के अलावा मेटा के सीईओ मार्क जुकरबर्ग, एंथ्रोपिक के सीईओ डारियो अमोदेई, एनवीडिया के सीईओ जेनसन हुआंग और अन्य प्रमुख तकनीकी कंपनियों के अधिकारी शामिल हुए। बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने पिचई की ओर इशारा करते हुए उन्हें ‘मॉन्स्टर’ बताया।

    ट्रंप बोले- ‘यह व्यक्ति मॉन्स्टर है’

    ट्रंप ने पिचई को पत्रकारों से परिचित कराते हुए कहा कि ये लोग दुनिया के बड़े टेक लीडर हैं और पिचई के बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। इसके बाद उन्होंने पिचई की ओर इशारा करते हुए उन्हें ‘मॉन्स्टर’ बताया और कहा कि वे बिना रोजाना मीडिया का सामना किए शानदार जिंदगी जी रहे हैं।

    ट्रंप के बयान का संदर्भ पिचई की तकनीकी उपलब्धियों और प्रभाव से था। अमेरिकी बोलचाल में किसी व्यक्ति को अपने क्षेत्र में ‘मॉन्स्टर’ कहना असाधारण क्षमता या प्रभाव के लिए प्रशंसा के तौर पर भी इस्तेमाल किया जाता है।

    पिचई ने इस टिप्पणी पर मुस्कुराते हुए कहा कि उम्मीद है कि इससे बेहतर टैगलाइन हो सकती थी कि ‘मैं मॉन्स्टर हूं’। उनके जवाब के बाद वहां मौजूद लोगों के बीच हल्का माहौल बन गया।

    एआई पर टेक कंपनियों ने किया स्वैच्छिक समझौता

    ट्रंप और टेक कंपनियों के प्रमुखों की बैठक का मुख्य मुद्दा उन्नत एआई तकनीक की सुरक्षा और निगरानी था। बैठक के बाद प्रमुख टेक कंपनियों ने एआई के विकास के लिए एक स्वैच्छिक समझौते पर हस्ताक्षर किए। इसमें कंपनियों ने आंतरिक नियंत्रण मजबूत करने, स्वतंत्र बाहरी ऑडिट कराने और बोर्ड स्तर पर जोखिमों की समीक्षा जैसे कदमों पर सहमति जताई है।

    समझौता कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं है। ट्रंप ने इसे ‘मॉरल बाइंडिंग’ यानी नैतिक रूप से बाध्यकारी समझौता बताया और कहा कि एआई कंपनियों को खुद अपनी तकनीक पर निगरानी रखनी होगी।

    ट्रंप ने AI को ‘सुपर इंटेलिजेंस’ कहने का निर्देश दिया

    ट्रंप प्रशासन ने सरकारी संदर्भों में ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ के बजाय ‘सुपर इंटेलिजेंस’ शब्द इस्तेमाल करने की दिशा में भी कदम बढ़ाया है। ट्रंप का कहना है कि मौजूदा एआई तकनीक की क्षमताएं पारंपरिक ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ की पुरानी अवधारणा से काफी आगे निकल चुकी हैं।

    ट्रंप ने यह भी कहा कि वह एआई के विकास को रोकने के पक्ष में नहीं हैं। उनका कहना है कि अमेरिका को इस तकनीकी क्षेत्र में अपनी बढ़त बनाए रखनी चाहिए। इसी के साथ उन्होंने कंपनियों से सुरक्षा और निगरानी के लिए खुद जिम्मेदारी लेने पर जोर दिया।

    पिचई बोले- सुपर इंटेलिजेंस पर हुआ समझौता

    बैठक के बाद सुंदर पिचई ने कहा कि यह एक महत्वपूर्ण बातचीत थी और उन्होंने ‘व्हाइट हाउस एकॉर्ड ऑन सुपर इंटेलिजेंस’ पर हस्ताक्षर किए हैं। उन्होंने बताया कि गूगल एआई क्षेत्र में बड़े पैमाने पर निवेश कर रहा है और आगे भी ऐसे उत्पाद विकसित करने पर काम जारी रखेगा, जो लोगों और कारोबारों के लिए उपयोगी हों।

    इस समझौते में कंपनियों की ओर से एआई सिस्टम के विकास और इस्तेमाल के दौरान जोखिमों की पहचान, आंतरिक नियंत्रण और स्वतंत्र समीक्षा जैसे उपायों पर जोर दिया गया है।

  • सिंधु जल संधि पर फिर भड़का पाकिस्तान, ‘बोला-भारत पानी को हथियार बना रहा

    सिंधु जल संधि पर फिर भड़का पाकिस्तान, ‘बोला-भारत पानी को हथियार बना रहा


    इस्लामाबाद।
    सिंधु जल संधि (IWT) को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच विवाद एक बार फिर तेज हो गया है। पाकिस्तान के सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार ने भारत पर पानी को ‘हथियार’ की तरह इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान सिंधु जल संधि को लेकर अपने रुख पर कायम है और इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाता रहेगा। तरार ने यह भी दावा किया कि संधि को भारत एकतरफा तरीके से बदल, रद्द या स्थगित नहीं कर सकता।

    तरार ने बुधवार को इस्लामाबाद स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ स्ट्रैटेजिक स्टडीज में सिंधु जल संधि पर एक रिपोर्ट जारी करने के कार्यक्रम को संबोधित करते हुए ये बातें कहीं। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान शांतिप्रिय देश है, लेकिन वह भारत को पानी को हथियार बनाने की अनुमति नहीं दे सकता, क्योंकि उनके मुताबिक सिंधु का पानी पाकिस्तान के 24 करोड़ लोगों का बुनियादी अधिकार है।

    ‘संधि को एकतरफा नहीं रोका जा सकता’

    अताउल्लाह तरार ने कहा कि सिंधु जल संधि दोनों देशों के बीच एक कानूनी समझौता है और उनके अनुसार यह दोनों पक्षों के लिए बाध्यकारी है। उन्होंने दावा किया कि विवाद होने की स्थिति में भी दोनों देशों को संधि में तय शर्तों और विवाद समाधान की प्रक्रिया का पालन करना चाहिए।

    पाकिस्तानी मंत्री ने कहा कि अगर कोई देश स्थापित विवाद समाधान तंत्र के बावजूद किसी बाध्यकारी अंतरराष्ट्रीय जल संधि को एकतरफा तरीके से स्थगित कर सकता है, तो इसका असर दुनिया में सीमा-पार जल प्रबंधन की व्यवस्था पर पड़ सकता है।

    उन्होंने कहा कि पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ बातचीत जारी रखेगा और अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए कानूनी तथा कूटनीतिक माध्यमों का इस्तेमाल करेगा।

    PCA के फैसले का भी दिया हवाला

    तरार ने स्थायी मध्यस्थता न्यायालय (PCA) के अगस्त 2026 के फैसले का हवाला देते हुए दावा किया कि इससे पाकिस्तान के इस रुख को मजबूती मिली है कि संधि की स्थिति को एकतरफा कार्रवाई से नहीं बदला जा सकता।

    हालांकि, PCA के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, 31 अगस्त 2026 को कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन ने सिंधु जल संधि की स्थिति और रतले जलविद्युत परियोजना से संबंधित अंतरिम उपायों पर फैसला जारी किया था। PCA की वेबसाइट पर संबंधित मामले में फैसलों की सूची भी उपलब्ध है।

    शहबाज शरीफ के UN भाषण का जिक्र

    तरार ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के भाषण का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि शरीफ ने सिंधु के पानी को पाकिस्तान और पूरे क्षेत्र के लिए ‘जीवनरेखा’ बताया था।

    तरार के मुताबिक, पाकिस्तान का सिंधु जल संधि पर रुख पूरी तरह स्पष्ट है और वह इसे क्षेत्र में शांति तथा स्थिरता का माध्यम मानता है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान इस मामले में अंतरराष्ट्रीय संगठनों और दूसरे देशों के साथ संपर्क बनाए रखेगा।

    1960 में हुई थी सिंधु जल संधि

    भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल संधि पर सितंबर 1960 में हस्ताक्षर हुए थे। विश्व बैंक की मध्यस्थता से हुए इस समझौते में सिंधु नदी प्रणाली की नदियों के जल के इस्तेमाल को लेकर दोनों देशों के अधिकार और दायित्व तय किए गए थे।

    मौजूदा विवाद में दोनों देशों के रुख अलग हैं। पाकिस्तान संधि को बाध्यकारी बताते हुए इसके प्रावधानों को जारी रखने की मांग कर रहा है, जबकि भारत ने संधि को लेकर अपनी अलग स्थिति अपनाई है। PCA के आधिकारिक रिकॉर्ड में 31 अगस्त 2026 को ‘संधि की स्थिति’ पर अवॉर्ड दर्ज है और संबंधित मध्यस्थता मामला फिलहाल PCA के रिकॉर्ड में लंबित मामलों में शामिल है।

    इस बीच अताउल्लाह तरार ने कहा कि पाकिस्तान अपने कानूनी और कूटनीतिक पक्ष को अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने रखता रहेगा। उन्होंने सीमा-पार जल समझौतों पर इस विवाद के संभावित व्यापक प्रभावों का भी मुद्दा उठाया।