Author: bharati

  • रिटायरमेंट के बाद पुलिस वर्दी: सम्मान या अनुशासन की कसौटी?

    रिटायरमेंट के बाद पुलिस वर्दी: सम्मान या अनुशासन की कसौटी?



    नई दिल्ली। सेवानिवृत्त पुलिसकर्मी आमतौर पर पूरी यूनिफॉर्म नहीं पहन सकते, क्योंकि वर्दी सक्रिय सेवा का प्रतीक है। केवल विशेष अवसरों जैसे पुलिस स्मृति दिवस, वीरता पुरस्कार वितरण या औपचारिक राज्य स्तर के समारोह में विभाग की अनुमति मिलने पर सीमित समय के लिए पहनना वैध होता है। इसके अलावा, मेडल, बैज और रैंक चिन्ह को नागरिक पोशाक पर प्रदर्शित करना पूरी तरह कानूनी और स्वीकार्य है।
    यह नियम पुलिस सेवा की गरिमा, अनुशासन और पहचान बनाए रखने के लिए लागू किया गया है।

    पुलिस की वर्दी केवल सक्रिय सेवा का प्रतीक होती है और रिटायरमेंट के बाद इसे पहनना आमतौर पर नियमों के खिलाफ माना जाता है। भारत में पुलिस अधिनियम 1861 और इसके बाद के संशोधन स्पष्ट करते हैं कि वर्दी का इस्तेमाल केवल तैनात अधिकारियों के लिए वैध है। रिटायर होने के बाद बिना अनुमति वर्दी पहनना कानूनी उल्लंघन और फोर्स की पहचान का अनुचित उपयोग माना जाता है।

    हालांकि, कुछ विशेष अवसरों पर जैसे पुलिस स्मृति दिवस, वीरता पुरस्कार वितरण, राज्य स्तरीय कार्यक्रम या औपचारिक समारोह में विभाग की अनुमति मिलने पर सीमित समय के लिए वर्दी पहनने की छूट होती है। इसके अलावा, सेवानिवृत्त अधिकारी अपने मेडल, बैज और रैंक चिन्ह को नागरिक पोशाक या औपचारिक ड्रेस पर प्रदर्शित कर सकते हैं। पूरी यूनिफॉर्म पहनने की अनुमति केवल राष्ट्रपति पदक या विशेष सम्मान प्राप्त वरिष्ठ अधिकारियों को ही सीमित अवसरों पर मिलती है।

    सामाजिक दृष्टि से भी मतभेद हैं।

    कुछ लोग मानते हैं कि वर्दी पुलिसकर्मी की आजीवन पहचान है और इसे विशेष अवसरों पर पहनने की आजादी होनी चाहिए, जबकि अन्य मानते हैं कि यह केवल सक्रिय सेवा का प्रतीक है और इसे रिटायरमेंट के बाद पहनना अनुशासन के खिलाफ है। नियमों के अनुसार, वर्दी पहनने का अधिकार केवल सम्मान और समारोह तक सीमित है, जबकि मेडल और बैज को नागरिक पोशाक पर प्रदर्शित करना पूरी तरह वैध हैयह नियम पुलिस सेवा के अनुशासन और पहचान की गरिमा बनाए रखने के लिए लागू किया गया है।
  • साल के अंतिम मंगलवार पर सिद्धि योग का संयोग, ज्योतिषाचार्यों ने बताया आस्था और सकारात्मकता से जुड़ा विशेष दिन

    साल के अंतिम मंगलवार पर सिद्धि योग का संयोग, ज्योतिषाचार्यों ने बताया आस्था और सकारात्मकता से जुड़ा विशेष दिन


    नई दिल्ली: साल 2025 का अंतिम मंगलवार 30 दिसंबर को पड़ रहा है और इस दिन सिद्धि योग का विशेष संयोग बन रहा है। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार यह योग देर रात लगभग 1 बजे तक प्रभावी रहेगा। धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं में सिद्धि योग को शुभ कार्यों की शुरुआत, मंत्र जाप और साधना के लिए अत्यंत अनुकूल माना जाता है। इसी कारण मंगलवार और सिद्धि योग के मेल को लेकर श्रद्धालुओं और ज्योतिष से जुड़े लोगों के बीच खास चर्चा देखने को मिल रही है।

    ज्योतिषाचार्यों के अनुसार मंगलवार का संबंध मंगल ग्रह से होता है, जिसे साहस, ऊर्जा, आत्मविश्वास और कर्म का प्रतीक माना जाता है। जब इसी दिन सिद्धि योग का निर्माण होता है, तो इसे प्रयासों को सफलता की ओर ले जाने वाला संयोग कहा जाता है। यही वजह है कि इस दिन किए गए धार्मिक और आध्यात्मिक उपायों को जीवन के विभिन्न पहलुओं-जैसे करियर, आर्थिक स्थिति, पारिवारिक संतुलन और संतान सुख-से जोड़कर देखा जाता है।धार्मिक परंपराओं में मंगलवार को भगवान हनुमान और भगवान विष्णु की उपासना का विशेष महत्व बताया गया है। कई ज्योतिषाचार्य मानते हैं कि इस दिन विष्णु मंत्रों का जप, पूजा-अर्चना और दान करने से मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है। विशेष रूप से संतान से जुड़े विषयों को लेकर किए जाने वाले उपायों की चर्चा अधिक रहती है, जिनमें पूजा-पाठ, दान और प्रतीकात्मक धार्मिक अनुष्ठान शामिल हैं।

    आस्था रखने वाले लोगों का यह भी मानना है कि साल के अंतिम मंगलवार को किए गए उपायों का प्रभाव आने वाले वर्ष तक बना रह सकता है। इसी विश्वास के चलते लोग 2026 को बेहतर और शुभ बनाने की कामना के साथ इस दिन विशेष पूजा-अर्चना करते हैं। कई परिवारों में यह परंपरा भी है कि मंगलवार को जरूरतमंदों को वस्त्र, भोजन या दान दिया जाए, ताकि घर में सुख-समृद्धि और सकारात्मकता बनी रहे।हालांकि विशेषज्ञ यह भी स्पष्ट करते हैं कि ऐसे उपाय आस्था और परंपरा से जुड़े विषय हैं। इन्हें किसी वैज्ञानिक, चिकित्सकीय या व्यावहारिक समाधान का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए। समाज के एक वर्ग का मानना है कि पूजा-पाठ और धार्मिक गतिविधियां व्यक्ति को मानसिक रूप से मजबूत बनाती हैं, जिससे वह अपने लक्ष्य के प्रति अधिक सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ता है।

    सिद्धि योग और मंगलवार के संयोग को लेकर धार्मिक स्थलों और मंदिरों में विशेष चहल-पहल देखने को मिल सकती है। कई स्थानों पर सुंदरकांड पाठ, विष्णु सहस्रनाम और सामूहिक प्रार्थनाओं का आयोजन किया जाता है। श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए प्रशासन की ओर से भीड़ प्रबंधन को लेकर सामान्य इंतजाम किए जाते हैं।कुल मिलाकर, साल के अंतिम मंगलवार और सिद्धि योग का यह संयोग आस्था से जुड़ा एक महत्वपूर्ण अवसर माना जा रहा है। लोग इसे आत्मविश्वास बढ़ाने, मानसिक शांति पाने और नए वर्ष के लिए सकारात्मक शुरुआत के रूप में देख रहे हैं।

  • कलेक्टर–CEO के दावों की परतें खुलीं: राष्ट्रपति अवॉर्ड के पीछे का सच, जांच टीम के सामने बेनकाब हुआ ‘जल संरक्षण’ का फर्जीवाड़ा

    कलेक्टर–CEO के दावों की परतें खुलीं: राष्ट्रपति अवॉर्ड के पीछे का सच, जांच टीम के सामने बेनकाब हुआ ‘जल संरक्षण’ का फर्जीवाड़ा



    खंडवा। खंडवा जिले को जल संरक्षण के नाम पर मिले राष्ट्रपति पुरस्कार को लेकर बड़ा खुलासा सामने आया है। जहां एक चर्चित अखबार के पड़ताल के बाद भोपाल से सीनियर आईएएस दिनेश कुमार जैन के नेतृत्व में दो सदस्यीय जांच दल मंगलवार को खंडवा पहुंचा और मौके पर जाकर तथाकथित जल संरचनाओं का ‘रियलिटी चेक’ किया। जांच के दौरान जो सामने आया, उसने प्रशासन के दावों की पोल खोल दी।

    जांच दल चर्चित अखबार के रिपोर्ट के आधार परहरसूद जनपद समेत कई गांवों में पहुंचा।

    कहीं कागजों में तालाब मिले, तो जमीन पर सिर्फ मिट्टी का ढेर। कहीं 6 फीट गहरे सोख्ता गड्ढों का दावा था, लेकिन हकीकत में 1 फीट से भी कम गहराई निकली। टीम ने किसानों और ग्रामीणों से बात की, खुद गड्ढे खुदवाकर देखे और कई जगह देखकर चौंक गई।

    डोटखेड़ा गांव में खेत के बीच कागजों में तालाब दिखाया गया था, लेकिन मौके पर कोई जल संरचना नहीं मिली। सिर्फ मिट्टी फैलाकर तालाब का रूप देने की कोशिश की गई थी।

    पलानी माल गांव में ग्रामीणों ने खुद अधिकारियों को उन जगहों पर ले जाकर दिखाया, जहां सरकारी रिकॉर्ड और जमीन की सच्चाई बिल्कुल अलग थी। आंगनवाड़ी भवन में रूफ वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम अधूरा मिला, पाइप ही गायब था। आरोग्य केंद्र में सोख्ता गड्ढा नाममात्र का निकला, जिसे बारिश में ओवरफ्लो के बाद तोड़ दिया गया था।

    सबसे चौंकाने वाला मामला शाहपुरा माल गांव में सामने आया, जहां जांच दल के आने की सूचना मिलते ही पंचायत सचिव ने सुबह-सुबह जेसीबी से नया गड्ढा खुदवा दिया।

    जबकि रिकॉर्ड में उसका भुगतान पहले ही हो चुका था। तय साइज 10×10 फीट था, लेकिन मौके पर सिर्फ 1 फीट गहरा गड्ढा मिला, वो भी खेत के ऐसे कोने में जहां उसका कोई मतलब नहीं था।

    पूरा मामला तब उजागर हुआ जब 11 नवंबर को केंद्र सरकार ने खंडवा जिले को जल संरक्षण के लिए नेशनल वाटर अवॉर्ड और 2 करोड़ रुपये देने की घोषणा की। प्रशासन ने 1.29 लाख जल संरचनाओं के निर्माण का दावा किया था। लेकिन जांच में सामने आया कि कई तालाब, डक वैल और स्टॉप डैम सिर्फ कागजों में थे। कुछ तस्वीरें तो एआई द्वारा जनरेटेड पाई गईं। कहीं 150 सोख्ता गड्ढे दिखाए गए, तो जमीन पर 1–2 फीट के गड्ढे या सिर्फ पाइप नजर आए। कहीं 11 तालाबों का दावा था, लेकिन एक भी मौजूद नहीं था।

    अखबार के खुलासे के बाद अब भोपाल की टीम इन फर्जीवाड़ों की आधिकारिक तस्दीक कर रही है।

    साफ है कि खंडवा को मिला यह पुरस्कार जल संरक्षण की सफलता नहीं, बल्कि कागजी आंकड़ों और झूठे दावों पर खड़ा किया गया अब तक का सबसे बड़ा सरकारी भ्रम साबित हो रहा है।

    खंडवा के नारायण नगर इलाके में सामने आया मामला जल संरक्षण के नाम पर किए गए फर्जीवाड़े की एक और बानगी बन गया है।

    यहां रहने वाली शिक्षिका संध्या राजपूत को उच्च अधिकारियों की ओर से निर्देश दिया गया था कि वह अपने घर पर वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगवाएं। लेकिन हकीकत कुछ और ही निकली।

    जांच में सामने आया कि संध्या राजपूत के घर पर कोई वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम मौजूद नहीं था। इसके बजाय उनके घर से कुछ मकान दूर स्थित एक अन्य घर की छत से लगी पाइप को ही वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बताकर पेश कर दिया गया। यह पाइप दरअसल छत का पानी सीधे नाली में पहुंचाने के लिए लगाई गई थी, जिसका जल संरक्षण या रिचार्ज से कोई लेना-देना नहीं था।

    इसके बावजूद उसी मकान की फोटो खींचकर प्रशासन को सौंप दी गई और कागजों में इसे वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम के रूप में दर्ज कर दिया गया। यह मामला साफ तौर पर दिखाता है कि कैसे जमीनी हकीकत को दरकिनार कर सिर्फ फोटो और फाइलों के सहारे योजनाओं की सफलता दिखाई गई, जबकि वास्तविकता में जल संरक्षण का कोई काम नहीं हुआ।

  • बांग्लादेश में जहां भीड़ ने ली थी जान, वहीं फिर खूनखराबा: मैमनसिंह में हिंदू युवक की हत्या

    बांग्लादेश में जहां भीड़ ने ली थी जान, वहीं फिर खूनखराबा: मैमनसिंह में हिंदू युवक की हत्या

    नई दिल्ली। पड़ोसी देश बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं पर हमलों की कड़ी थमने का नाम नहीं ले रही है। मैमनसिंह जिले से एक बार फिर दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां एक हिंदू युवक की गोली मारकर हत्या कर दी गई। यह वही इलाका है, जहां कुछ दिन पहले ईशनिंदा के आरोप में दीपू चंद्र दास को भीड़ ने बेरहमी से पीट-पीटकर मार डाला था।
    लगातार हो रही हत्याओं से पूरे क्षेत्र में भय और तनाव का माहौल बना हुआ है।

    ताजा मामले में बांग्लादेश के ग्रामीण अर्धसैनिक बल अंसार के सदस्य बजेंद्र बिस्वास की जान चली गई। सोमवार, 29 दिसंबर की शाम करीब 6:45 बजे भालुका उपजिला क्षेत्र स्थित लबीब ग्रुप की गारमेंट फैक्ट्री सुल्ताना स्वेटर्स लिमिटेड में यह घटना हुई। बजेंद्र बिस्वास वहां सुरक्षा गार्ड के रूप में तैनात थे और फैक्ट्री परिसर में बने अंसार बैरक में अपने साथियों के साथ रहते थे।

    पुलिस और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बातचीत के दौरान बजेंद्र के साथी नोमान मियां ने कथित तौर पर मजाक में सरकारी शॉटगन उनकी ओर तान दी। कुछ ही पलों बाद अचानक गोली चल गई, जो बजेंद्र की बाईं जांघ में जा लगी। गंभीर रूप से घायल बजेंद्र को तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।

    घटना के बाद पुलिस ने आरोपी नोमान मियां को हिरासत में ले लिया और वारदात में इस्तेमाल की गई शॉटगन जब्त कर ली है। संबंधित थाने के प्रभारी मोहम्मद जाहिदुल इस्लाम ने बताया कि शव को पोस्टमार्टम के लिए मैमनसिंह मेडिकल कॉलेज अस्पताल भेज दिया गया है और मामले की गहन जांच की जा रही है।

    गौर करने वाली बात यह है कि बीते दो हफ्तों में यह इसी इलाके में हिंदू समुदाय से जुड़ी तीसरी हत्या है। 18 दिसंबर को दीपू चंद्र दास की भीड़ द्वारा हत्या और अब बजेंद्र बिस्वास की गोली मारकर मौत ने अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। लगातार हो रही इन घटनाओं से भालुका और आसपास के क्षेत्रों में तनाव गहराता जा रहा है, जबकि स्थानीय प्रशासन कानून-व्यवस्था बनाए रखने के दावे कर रहा है।

  • रतलाम की बेटी की रूह कंपा देने वाली दास्तां,सगे माता-पिता और मामा ही धकेलते थे देह व्यापार के दलदल में, भोपाल में दर्ज हुई FIR

    रतलाम की बेटी की रूह कंपा देने वाली दास्तां,सगे माता-पिता और मामा ही धकेलते थे देह व्यापार के दलदल में, भोपाल में दर्ज हुई FIR


    भोपाल। रिश्तों को शर्मसार कर देने वाली एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसने मानवता को झकझोर कर रख दिया है। रतलाम जिले के एक गांव की 21 वर्षीय युवती ने अपने ही जन्मदाताओं और सगे मामाओं पर उसे देह व्यापार के नर्क में धकेलने का सनसनीखेज आरोप लगाया है। पिछले 7 सालों से जुल्म सह रही यह युवती किसी तरह जान बचाकर भोपाल पहुंची, जहां उसने पुलिस के सामने अपनी आपबीती सुनाई।
    7 साल की उम्र से सह रही थी जुल्म
    पीड़िता ने भोपाल के महिला थाने में दर्ज कराई अपनी शिकायत में बताया कि जब वह महज 14 साल की थी, तभी से उसके माता-पिता और दो मामा मिलकर उससे जबरन देह व्यापार करवा रहे थे। जिस उम्र में बच्चों के हाथों में किताबें होनी चाहिए, उस उम्र में उसे दरिंदगी के हवाले कर दिया गया।
    युवती का आरोप है कि जब भी वह इस घिनौने काम का विरोध करती, तो उसके परिजन उसे बेरहमी से पीटते और तरह-तरह की शारीरिक व मानसिक यातनाएं देते थे।

    नर्क से भागकर भोपाल में ली शरण
    सालों तक जुल्म की बेड़ियां सहने के बाद, युवती ने आखिरकार साहस जुटाया और मौका मिलते ही अपने गांव से भागकर भोपाल आ गई। यहां उसने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से गुहार लगाई और एक आवेदन के माध्यम से अपनी पूरी कहानी बयां की।

    पीड़िता की हालत और उसकी बातों की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तत्काल कार्रवाई शुरू की।

    भोपाल में ‘जीरो’ पर FIR, अब रतलाम पुलिस करेगी जांच
    महिला थाना प्रभारी (TI) अंजना दुबे के अनुसार, 21 वर्षीय पीड़िता के बयानों के आधार पर उसके माता-पिता और दो मामा के खिलाफ गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई है।

    चूंकि मामला रतलाम जिले का है, इसलिए भोपाल पुलिस ने ‘जीरो पर एफआईआर’ दर्ज की है। अब केस डायरी आगे की वैधानिक कार्रवाई के लिए रतलाम पुलिस को सौंपी जा रही है।

    मामले के मुख्य आरोपी: सगे माता-पिता और दो मामा।
    पिछले 7 सालों से (14 वर्ष की आयु से) लगातार शोषण।
    अपराध: जबरन देह व्यापार और मारपीट।
    कानूनी स्थिति, भोपाल में जीरो FIR दर्ज, मामला रतलाम ट्रांसफर।
    यह मामला समाज के उस काले चेहरे को उजागर करता है जहां संरक्षक ही भक्षक बन गए। अब सबकी नजरें रतलाम पुलिस पर हैं कि वह इन आरोपियों के खिलाफ कितनी सख्त कार्रवाई करती है।

  • न्यू ईयर 2026 पर भोपाल की सड़कों पर हाई अलर्ट, नशा ड्राइविंग के खिलाफ सख्त अभियान

    न्यू ईयर 2026 पर भोपाल की सड़कों पर हाई अलर्ट, नशा ड्राइविंग के खिलाफ सख्त अभियान


    भोपाल। नए साल की दस्तक से ठीक पहले भोपाल की सड़कों पर यातायात पुलिस अलर्ट मोड में है। नववर्ष 2026 से पहले होने वाले समारोहों और पार्टियों के मद्देनज़र पुलिस ने नशे में वाहन चलाने से होने वाले हादसों और युवाओं की बढ़ती मौतों को रोकने के लिए सघन अभियान शुरू किया है। इस अभियान के तहत शहर के प्रमुख चौराहों और तिराहों पर 48 चेकिंग पॉइंट लगाए गए हैं, जहां दोपहिया, चारपहिया, ऑटो और टैक्सी चालकों की शराब सेवन की जांच ब्रीथ एनालाइजर से की जा रही है।
    पुलिस ने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई किसी को परेशान करने के लिए नहीं, बल्कि लोगों की जान बचाने के उद्देश्य से की जा रही है।

    आंकड़ों के मुताबिक, प्रदेश में हर साल सड़क हादसों में एक लाख 20 हजार से ज्यादा लोग घायल होते हैं। इनमें सबसे ज्यादा प्रभावित 15 से 30 साल के युवाओं का आयु वर्ग है, जो कुल दुर्घटना पीड़ितों का 61 प्रतिशत है।

    इसके बाद 31 से 45 वर्ष के लोग 25 प्रतिशत, 46 से 60 वर्ष के 9 प्रतिशत और 60 वर्ष से अधिक के केवल 2 प्रतिशत लोग शामिल हैं। इंदौर, भोपाल और जबलपुर में सबसे ज्यादा सड़क हादसे हुए हैं, जहां तेज रफ्तार, ट्रैफिक नियमों की अनदेखी और नशे में वाहन चलाना मुख्य कारण बने हैं।

    नगरीय यातायात पुलिस ने कहा कि नशे में वाहन चलाने वालों के खिलाफ मोटर व्हीकल एक्ट के तहत कड़ी कार्रवाई की जा रही है। दोषी पाए जाने पर 10 हजार रुपए तक का जुर्माना लगाया जा सकता है और अन्य कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी।

    पुलिस ने अब तक एक दर्जन से अधिक चालकों पर कार्रवाई की है। नववर्ष की पूर्व संध्या और 1 जनवरी को जिलेभर में लगभग चार दर्जन स्थानों पर चेकिंग प्वाइंट सक्रिय रहेंगे, जिसमें यातायात पुलिस के साथ जिले के थाने का बल भी शामिल होगा ताकि किसी भी तरह की लापरवाही पर तुरंत कार्रवाई की जा सके।

    भोपाल पुलिस ने जनता से अपील की है कि वे नशे की हालत में वाहन न चलाएं। एक छोटी सी गलती न केवल चालक की, बल्कि सड़क पर मौजूद अन्य लोगों की जान भी खतरे में डाल सकती है। साथ ही पुलिस ने कहा कि यातायात नियमों का पालन कर लोग अपनी और दूसरों की सुरक्षा सुनिश्चित करें। किसी भी असुविधा या मदद के लिए यातायात नियंत्रण कक्ष के नंबर 0755-2677340 या 2443850 पर संपर्क किया जा सकता है।

  • बांग्लादेश की लोकतंत्र की जननी खालिदा जिया का निधन, तारिक रहमान बोले ‘अल्लाह की पुकार’

    बांग्लादेश की लोकतंत्र की जननी खालिदा जिया का निधन, तारिक रहमान बोले ‘अल्लाह की पुकार’


    नई दिल्ली। बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री और बीएनपी (Bangladesh Nationalist Party) प्रमुख बेगम खालिदा जिया का मंगलवार, 30 दिसंबर 2025 को 80 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उनके निधन की खबर ने देश और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शोक की लहर दौड़ा दी। बेटे तारिक रहमान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर भावुक पोस्ट साझा करते हुए लिखा, मेरी मां और BNP की अध्यक्ष बेगम खालिदा जिया अल्लाह की पुकार सुनकर आज हमें छोड़कर चली गईं।

    तारिक ने अपने पोस्ट में कहा कि उनकी मां केवल राजनीतिक नेता नहीं थीं, बल्कि लोकतंत्र की जननी और बांग्लादेश की मां के रूप में जानी जाती थीं।

    उन्होंने जीवनभर देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करने के लिए संघर्ष किया और तानाशाही व राजनीतिक उत्पीड़न के खिलाफ मजबूती से खड़ी रहीं। इसके अलावा, तारिक ने खालिदा जिया के मातृत्व और करुणा की भी तारीफ की, बताया कि राजनीतिक संघर्षों के बीच उन्होंने हमेशा अपने परिवार को संभाला और कठिन परिस्थितियों में भी साहस नहीं खोया।

    गिरफ्तारी, बीमारी और संघर्ष भरा जीवन
    खालिदा जिया का जीवन संघर्षों और चुनौतियों से भरा रहा।

    उन्हें कई बार गिरफ्तार किया गया, इलाज से वंचित रखा गया और लगातार राजनीतिक उत्पीड़न झेलना पड़ा। बावजूद इसके उनका व्यक्तित्व शांत, अडिग और मजबूत रहा। निजी जीवन में उन्हें अपने पति और बच्चों को खोने का दर्द भी सहना पड़ा, लेकिन उन्होंने देश की सेवा को अपना सर्वोच्च उद्देश्य बनाया और जनता को अपने परिवार की तरह अपनाया।

    लोकतांत्रिक विरासत और योगदान
    खालिदा जिया ने तीन बार बांग्लादेश की प्रधानमंत्री के रूप में सेवा की और महिलाओं की भागीदारी, शिक्षा, स्वास्थ्य और विकास के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण पहल की।

    उनके नेतृत्व में BNP ने बांग्लादेश में राष्ट्रीयता, लोकतंत्र और विकास के मुद्दों को मजबूती से उठाया। उनके राजनीतिक जीवन और संघर्षों की कहानी आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी।

    पारिवारिक जीवन और BNP में योगदान
    खालिदा जिया के पति, जियाउर रहमान, बांग्लादेश के पूर्व राष्ट्रपति थे, जिनकी हत्या 1981 में हुई। इस व्यक्तिगत और राजनीतिक सदमे के बावजूद, खालिदा जिया ने पार्टी और देश की सेवा जारी रखी। उनके बेटे तारिक रहमान भी BNP में सक्रिय भूमिका निभाते रहे और उनकी राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं। BNP, बांग्लादेश की प्रमुख राजनीतिक पार्टी, 1978 में जियाउर रहमान द्वारा स्थापित की गई थी और यह राष्ट्रीयता, लोकतंत्र और विकास के मुद्दों पर सक्रिय रही है।

    देश और दुनिया के प्रति आभार
    तारिक रहमान ने परिवार की ओर से देश और दुनिया भर से मिले प्रेम, सम्मान और संवेदनाओं के लिए आभार जताया। खालिदा जिया का निधन बांग्लादेश की राजनीति में एक युग के अंत के रूप में देखा जा रहा है। उनका जीवन, संघर्ष और लोकतांत्रिक सिद्धांत आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बने रहेंगे।

    खालिदा जिया का जीवन केवल बीएनपी या बांग्लादेश तक सीमित नहीं था, बल्कि पूरे दक्षिण एशिया में लोकतंत्र और महिलाओं की राजनीति में उनकी पहचान अमिट रही। उनकी मातृत्व, नेतृत्व क्षमता और लोकतंत्र के प्रति समर्पण उन्हें हमेशा यादगार बनाए रखेंगे।

  • रणवीर सिंह की 'धुरंधर' का बॉक्‍स आफिस पर धमाल, 690 करोड़ की कमाई

    रणवीर सिंह की 'धुरंधर' का बॉक्‍स आफिस पर धमाल, 690 करोड़ की कमाई

    मुंबई। रणवीर सिंह की ‘धुरंधर’ का बॉक्‍स आफिस पर धमाल, 690 करोड़ की कमाई
    मुंबई। बॉलीवुड स्टार रणवीर सिंह इन दिनों अपनी सुपरहिट फिल्म ‘धुरंधर’ की कामयाबी का जश्न मना रहे हैं। आदित्य धर के निर्देशन में बनी यह फिल्म 5 दिसंबर को रिलीज हुई थी और तब से बॉक्स ऑफिस पर मजबूती से टिकी हुई है। खास यह है कि इसके सामने रिलीज हुई दूसरी फिल्म दर्शकों का ध्यान खींचने में नाकाम रही है। लगातार जबरदस्त कमाई करते हुए ‘धुरंधर’ ने रिलीज के 24वें दिन एक नया कीर्तिमान बना दिया है।
    इस फिल्म में रणवीर के अलावा मुख्य भूमिका में संजय दत्त, आर माधवन, अक्षय खन्न, अर्जुन रामपाल, राकेश बेदी के साथ कई अन्य कलाकार हैं। वहीं सारा अर्जुन इस फिल्म में रणवीर के साथ इश्क फरमाते नजर आ रहीं हैं।

    चौथे वीकेंड पर भी बरकरार रहा जादू

    ‘धुरंधर’ का असर चौथे वीकेंड पर भी साफ देखने को मिला, सैकनिल्क की रिपोर्ट के अनुसार, फिल्म ने 24वें दिन यानी चौथे रविवार को करीब 22.25 करोड़ रुपये की कमाई की। इससे पहले 23वें दिन फिल्म का कलेक्शन 20.5 करोड़ रुपये रहा था। इसके साथ ही भारतीय बॉक्स ऑफिस पर फिल्म की कुल कमाई 690.25 करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी है। इस शानदार प्रदर्शन ने ‘धुरंधर’ के सीक्वल को लेकर दर्शकों की उम्मीदें और बढ़ा दी हैं।

    वर्ल्डवाइड कलेक्शन में रचा इतिहास

    रिपोर्ट के मुताबिक, ‘धुरंधर’ ने दुनियाभर में 1,064 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर लिया है। 24वें दिन ही फिल्म ने ग्लोबल बॉक्स ऑफिस पर 30 करोड़ से ज्यादा का बिजनेस किया। इस दौरान इसने प्रभास की ‘कल्कि 2898 AD’ (1,042 करोड़) और शाहरुख खान की ‘पठान’ (1,055 करोड़) को पीछे छोड़ दिया। इसके साथ ही ‘धुरंधर’ अब सबसे ज्यादा कमाई करने वाली 7वीं भारतीय फिल्म बन चुकी है। अब फिल्म की नजर ‘जवान’ (1,160 करोड़), ‘केजीएफ चैप्टर 2’ (1,215 करोड़) और आरआरआर (1,230 करोड़) जैसे बड़े रिकॉर्ड्स पर टिकी हुई है।

  • सेवा के नाम रहा विश्वास सारंग का जन्मदिन, वर्चुअल आयोजन के साथ गरीबों को कंबल-भोजन और स्वास्थ्य सुविधाएं

    सेवा के नाम रहा विश्वास सारंग का जन्मदिन, वर्चुअल आयोजन के साथ गरीबों को कंबल-भोजन और स्वास्थ्य सुविधाएं


    भोपाल। मध्य प्रदेश के सहकारिता खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास सारंग ने इस वर्ष अपने जन्मदिन को पारंपरिक समारोहों से अलग हटकर सेवा और सामाजिक सरोकारों के साथ मनाया। उन्होंने व्यक्तिगत मिलन या भव्य आयोजन से दूरी बनाते हुए जन्मदिन को वर्चुअल माध्यम से मनाने का निर्णय लिया जिससे अधिक से अधिक लोग सेवा कार्यों से जुड़ सकें।मंत्री के इस आह्वान पर प्रदेशभर में उनके समर्थक कार्यकर्ता और शुभचिंतक सामाजिक सेवा गतिविधियों में सक्रिय नजर आए। विभिन्न जिलों और बस्तियों में गरीब बेसहारा और जरूरतमंद लोगों को कंबल गर्म कपड़े और भोजन वितरित किया गया। ठंड के मौसम को देखते हुए यह पहल खास तौर पर जरूरतमंदों के लिए राहत लेकर आई।

    सेवा कार्य केवल भोजन और वस्त्र वितरण तक सीमित नहीं रहा। कई स्थानों पर निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर रक्तदान कार्यक्रम और जागरूकता अभियान भी आयोजित किए गए जिससे आम लोगों को प्रत्यक्ष लाभ मिला। इसके साथ ही पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए बड़ी संख्या में पौधारोपण किया गया।शिक्षा के क्षेत्र में भी योगदान देते हुए नरेला विधानसभा क्षेत्र सहित अन्य इलाकों में विद्यार्थियों को किताबें और स्टेशनरी वितरित की गईं। आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों के लिए शैक्षणिक सामग्री उपलब्ध कराकर शिक्षा को प्रोत्साहित किया गया।

    जन्मदिन के अवसर पर मंत्री विश्वास सारंग ने मथुरा में संतजनों को भोजन कराया और गिरिराज धाम में दर्शन-पूजन कर प्रदेशवासियों के सुख-समृद्धि की कामना की। इस दौरान उन्होंने सामाजिक एकता सेवा और संवेदनशीलता को जीवन का महत्वपूर्ण मूल्य बताया।सोशल मीडिया पर भी इस अनूठे जन्मदिन की झलक देखने को मिली। ट्विटर एक्स पर HBDVishvasSarang हैशटैग लंबे समय तक ट्रेंड करता रहा। मंत्री ने जनता के प्रति आभार जताते हुए कहा कि जनता का विश्वास और आशीर्वाद ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने यह भी कहा कि जन्मदिन जैसे व्यक्तिगत अवसरों को समाज सेवा से जोड़ना हर सार्वजनिक प्रतिनिधि का दायित्व होना चाहिए।

    सामाजिक कार्यकर्ताओं और विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के प्रयास समाज में सकारात्मक संदेश देते हैं और नेतृत्व की सही परिभाषा प्रस्तुत करते हैं। वर्चुअल माध्यम से जन्मदिन मनाने का यह प्रयोग दिखाता है कि व्यक्तिगत उत्सव से अधिक समाज के प्रति जिम्मेदारी अहम है।कुल मिलाकर विश्वास सारंग का जन्मदिन केवल एक व्यक्तिगत अवसर न होकर सेवा सहयोग और सामाजिक चेतना का प्रतीक बनकर सामने आया जिसने जनसेवा के नए मानक स्थापित किए।

  • प्रियंका गांधी के बेटे रेहान वाड्रा की सगाई की अटकलें, वायरल फोटो से सोशल मीडिया में हलचल

    प्रियंका गांधी के बेटे रेहान वाड्रा की सगाई की अटकलें, वायरल फोटो से सोशल मीडिया में हलचल


    नई दिल्ली। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी और उद्योगपति रॉबर्ट वाड्रा के बेटे रेहान वाड्रा को लेकर इन दिनों सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज है। वजह है एक वायरल तस्वीर जिसके सामने आने के बाद यह कयास लगाए जा रहे हैं कि रेहान वाड्रा ने अपनी लंबे समय से गर्लफ्रेंड मानी जा रही अविवा बेग से सगाई कर ली है। हालांकि गांधी या वाड्रा परिवार की ओर से अब तक इस खबर को लेकर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

    मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार रेहान वाड्रा और अविवा बेग पिछले करीब सात वर्षों से एक-दूसरे को जानते हैं और उनके बीच करीबी रिश्ता बताया जाता है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रही तस्वीर में दोनों एक साथ नजर आ रहे हैं जिसके बाद सगाई की चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया। बताया जा रहा है कि यह तस्वीर किसी निजी पारिवारिक कार्यक्रम के दौरान ली गई थी जिसमें सीमित लोग ही मौजूद थे।सूत्रों के मुताबिक यदि सगाई हुई भी है तो उसे बेहद निजी रखा गया और इसमें गांधी-वाड्रा परिवार तथा बेग परिवार के कुछ करीबी सदस्य ही शामिल हुए। तस्वीर के सार्वजनिक होते ही सोशल मीडिया पर तरह-तरह की अटकलें लगाई जाने लगीं लेकिन किसी भी पक्ष की ओर से इसकी पुष्टि नहीं की गई है।

    बताया जा रहा है कि वायरल फोटो प्रियंका गांधी और रॉबर्ट वाड्रा की बेटी मिराया वाड्रा की वर्ष 2025 की ग्रेजुएशन सेरेमनी के दौरान की है। इसी कार्यक्रम से जुड़ी तस्वीर सामने आने के बाद रेहान और अविवा की सगाई को लेकर चर्चाएं तेज हो गईं। फिलहाल आधिकारिक पुष्टि के अभाव में इसे केवल अटकलों के तौर पर देखा जा रहा है।अविवा बेग दिल्ली की रहने वाली हैं और उनका परिवार लंबे समय से राजधानी में निवास कर रहा है। जानकारी के अनुसार गांधी-वाड्रा और बेग परिवार एक-दूसरे को पहले से जानते हैं। अविवा पेशे से फोटोग्राफर और आर्ट क्यूरेटर हैं। वहएटेलियर-11 की को-फाउंडर हैं जो एक फोटोग्राफी स्टूडियो और प्रोडक्शन कंपनी के रूप में जानी जाती है।

    अविवा बेग कला और डिजाइन की दुनिया में एक जाना-पहचाना नाम हैं। वह इंडिया आर्ट फेयर के यंग कलेक्टर प्रोग्राम और इंडिया डिजाइन आईडी जैसी प्रतिष्ठित प्रदर्शनियों में अपनी उपस्थिति दर्ज करा चुकी हैं। उनकी क्रिएटिव प्रोफाइल और अंतरराष्ट्रीय कला मंचों से जुड़ाव की भी काफी चर्चा रहती है।वहीं रेहान वाड्रा भी फोटोग्राफी के शौकीन माने जाते हैं खासतौर पर वाइल्डलाइफ फोटोग्राफी में उनकी गहरी रुचि है। एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया था कि आठ साल की उम्र से ही उन्हें कैमरे से लगाव हो गया था। उनके सोशल मीडिया अकाउंट पर प्रकृति और वन्यजीवों से जुड़ी कई तस्वीरें देखी जा सकती हैं। इसी साझा रुचि को रेहान और अविवा के रिश्ते की मजबूत नींव माना जाता है।

    राजनीतिक दृष्टि से रेहान वाड्रा अब तक सक्रिय भूमिका में नजर नहीं आए हैं लेकिन जनवरी 2023 में राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा में उनकी मौजूदगी ने लोगों का ध्यान जरूर खींचा था। मध्य प्रदेश में यात्रा के दौरान वे करीब तीन दिन तक राहुल गांधी के साथ पदयात्रा करते दिखे थे। इसके बाद से उनके भविष्य को लेकर राजनीतिक हलकों में भी चर्चाएं होती रही हैं।फिलहाल रेहान वाड्रा और अविवा बेग की सगाई को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। परिवार की ओर से आधिकारिक पुष्टि या खंडन का इंतजार किया जा रहा है। तब तक यह मामला सोशल मीडिया और राजनीतिक चर्चाओं में बना हुआ है।