Author: bharati

  • एलन मस्क की स्पेसएक्स ने रचा नया इतिहास, स्टारशिप पहली बार पृथ्वी की कक्षा में पहुंचा, 26 स्टारलिंक V3 सैटेलाइट भी तैनात

    एलन मस्क की स्पेसएक्स ने रचा नया इतिहास, स्टारशिप पहली बार पृथ्वी की कक्षा में पहुंचा, 26 स्टारलिंक V3 सैटेलाइट भी तैनात

    नई दिल्ली। एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स ने अंतरिक्ष अभियान के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। विशाल अंतरिक्ष यान स्टारशिप पहली बार पृथ्वी की कक्षा में सफलतापूर्वक पहुंचा। इसके साथ ही मिशन के दौरान 26 अगली पीढ़ी के स्टारलिंक V3 सैटेलाइट भी कक्षा में तैनात किए गए। यह उपलब्धि पूरी तरह पुन: उपयोग योग्य प्रक्षेपण प्रणाली विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

    यह उड़ान 28 सितंबर को भारतीय समयानुसार शाम 6:16 बजे शुरू हुई। यह स्टारशिप का 14वां परीक्षण था। मिशन का उद्देश्य केवल अंतरिक्ष यान को कक्षा तक पहुंचाना नहीं था, बल्कि इसके विभिन्न सिस्टम और भविष्य की अंतरिक्ष गतिविधियों से जुड़ी तकनीकों का परीक्षण करना भी था।

    हालांकि उड़ान के दौरान एक तकनीकी चुनौती भी सामने आई। वाहन के छह रैप्टर वैक्यूम यानी आरवी इंजनों में से एक इंजन बंद हो गया। इससे मिशन के दौरान कुछ समय के लिए चुनौती की स्थिति बनी। इसके बावजूद बाकी इंजनों के प्रदर्शन और उनकी स्थिति का आकलन करने के बाद मिशन को जारी रखा गया और स्टारशिप कक्षा तक पहुंचने में सफल रहा।

    स्टारशिप को करीब 275 किलोमीटर की ऊंचाई पर उड़ान भरते हुए पृथ्वी के लगभग छह चक्कर लगाने के लिए तैयार किया गया था। मिशन की शुरुआती योजना करीब 10 घंटे की थी। इसके बाद अंतरिक्ष यान को नियंत्रित तरीके से पृथ्वी के वातावरण में दोबारा प्रवेश कर प्रशांत महासागर में चिली के पश्चिमी तट के पास स्प्लैशडाउन करना था।

    इस मिशन की सबसे अहम उपलब्धियों में 26 स्टारलिंक V3 सैटेलाइट की तैनाती भी शामिल रही। ये सैटेलाइट नई पीढ़ी के स्टारलिंक नेटवर्क का हिस्सा हैं। इन्हें अधिक डेटा क्षमता, ज्यादा पावर और बेहतर नेटवर्क क्षमता के लिए डिजाइन किया गया है। उपलब्ध मिशन विवरण के अनुसार प्रत्येक सैटेलाइट करीब 1 Tbps डाउनलिंक क्षमता जोड़ सकता है।

    स्टारशिप-सुपर हेवी की ऊंचाई करीब 124.4 मीटर यानी 407 फीट है। इसके दो प्रमुख हिस्से हैं—सुपर हेवी बूस्टर और स्टारशिप का ऊपरी चरण। दोनों को भविष्य में तेजी से दोबारा इस्तेमाल किए जाने के उद्देश्य से तैयार किया गया है।

    मिशन में सुपर हेवी बूस्टर की चढ़ाई, स्टेज सेपरेशन, बूस्टबैक बर्न और लैंडिंग बर्न भी महत्वपूर्ण परीक्षणों का हिस्सा थे। पिछले परीक्षणों में सामने आई समस्याओं को देखते हुए हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर में बदलाव किए गए थे।

    स्टारशिप के ऊपरी चरण ने ऑर्बिटल इंसर्शन मैनूवर के साथ 26 स्टारलिंक V3 सैटेलाइट तैनात किए। इसके बाद रैप्टर इंजन की मदद से डीऑर्बिट बर्न और नियंत्रित पुनः प्रवेश की प्रक्रिया पूरी करने की योजना थी। तीन स्टारलिंक V3 सैटेलाइटों में अतिरिक्त कैमरे भी लगाए गए, जिनका इस्तेमाल स्टारशिप की हीट शील्ड की तस्वीरें लेने के लिए किया जाना था।

    कक्षा में पहुंचने के बाद सैटेलाइट अपने एंटीना और सोलर एरे तैनात करेंगे। इसके बाद रेडियो फ्रीक्वेंसी और लेजर लिंक के जरिए ग्राउंड सिस्टम तथा मौजूदा नेटवर्क से संपर्क स्थापित किया जाएगा। ऑर्बिट में जरूरी जांच पूरी होने के बाद कुछ हफ्तों में इनके ग्राहकों को सेवा देने की उम्मीद है।

    स्टारशिप की यह उड़ान भविष्य में पृथ्वी की कक्षा से आगे चांद और मंगल तक इंसानों तथा कार्गो को पहुंचाने की क्षमता विकसित करने के लक्ष्य की दिशा में एक अहम परीक्षण है।

  • ओम शांति ओम के सेट पर मचा था जबरदस्त हंगामा, शाहरुख-सलमान भी पड़े फीके, मिथुन दा को देखते ही बेकाबू हुई भीड़

    ओम शांति ओम के सेट पर मचा था जबरदस्त हंगामा, शाहरुख-सलमान भी पड़े फीके, मिथुन दा को देखते ही बेकाबू हुई भीड़


    नई दिल्ली। बॉलीवुड की कुछ फिल्में और उनके गाने ऐसे होते हैं जो सालों बाद भी दर्शकों की यादों में बने रहते हैं। फराह खान की फिल्म ओम शांति ओम भी ऐसी ही फिल्मों में शामिल है। फिल्म का गाना दीवानगी दीवानगी आज भी अपने शानदार स्टारकास्ट और खास अंदाज के लिए याद किया जाता है। इस गाने में बॉलीवुड के कई बड़े सितारे एक साथ नजर आए थे। शाहरुख खान और दीपिका पादुकोण के अलावा सलमान खान सैफ अली खान संजय दत्त धर्मेंद्र जीतेंद्र काजोल रानी मुखर्जी प्रियंका चोपड़ा रेखा तब्बू करिश्मा कपूर और जूही चावला जैसे सितारों ने इस गाने में हिस्सा लिया था। करीब 32 सितारों से सजे इस गाने की शूटिंग अपने आप में किसी बड़े इवेंट से कम नहीं थी लेकिन इसी दौरान एक ऐसा किस्सा हुआ जिसने सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया।

    फराह खान ने अपने यूट्यूब व्लॉग में इस पुराने किस्से को याद करते हुए बताया कि गाने की शूटिंग के दौरान बड़े-बड़े सितारे लगातार सेट पर पहुंच रहे थे। माहौल पहले से ही बेहद खास था लेकिन जैसे ही मिथुन चक्रवर्ती यानी मिथुन दा सेट पर पहुंचे पूरा नजारा बदल गया। फराह के मुताबिक मिथुन दा को देखते ही सेट पर मौजूद लोग उनके पास पहुंचने लगे। यहां तक कि शूटिंग में व्यस्त लाइटमैन भी अपनी जगह छोड़कर उनसे मिलने के लिए पहुंच गए। फराह और शाहरुख खान दोनों यह देखकर हैरान रह गए कि आखिर अचानक ऐसा क्या हुआ कि पूरा सेट एक ही स्टार के इर्द-गिर्द जमा हो गया।

    फराह ने बताया कि मिथुन चक्रवर्ती की मौजूदगी का असर इतना जबरदस्त था कि एक महिला उन्हें देखकर बेहोश तक हो गई थी। इसी वास्तविक घटना को बाद में दीवानगी दीवानगी के एक सीन में भी इस्तेमाल किया गया। यानी गाने में दिखाया गया महिला के बेहोश होने वाला दृश्य पूरी तरह काल्पनिक नहीं था बल्कि शूटिंग के दौरान हुई वास्तविक घटना से प्रेरित था। इस किस्से ने मिथुन दा की लोकप्रियता और उनके स्टारडम की एक अलग झलक सामने रख दी।

    मिथुन दा और शाहरुख खान से जुड़ा एक और मजेदार किस्सा भी फराह ने साझा किया। उन्होंने बताया कि शूटिंग के दौरान उन्होंने शाहरुख से मिथुन चक्रवर्ती के डांस स्टेप्स फॉलो करने को कहा था। हालांकि शाहरुख उन स्टेप्स को ठीक से नहीं कर पा रहे थे। इसके बाद मिथुन दा ने मजाकिया अंदाज में शाहरुख के सिर पर टपली मारनी शुरू कर दी। खास बात यह रही कि कैमरे के पीछे हुआ यह मजेदार पल इतना स्वाभाविक था कि इसे फिल्म के गाने में भी जगह मिल गई।

    दीवानगी दीवानगी में बॉलीवुड के अलग-अलग दौर के सितारों को एक साथ लाने का आइडिया उस समय काफी खास माना गया था। एक ही गाने में इतने बड़े कलाकारों की मौजूदगी ने इसे यादगार बना दिया। हालांकि फराह खान के खुलासे के बाद इस गाने से जुड़ा मिथुन दा वाला किस्सा एक बार फिर चर्चा में आ गया है। पर्दे पर जहां सितारों की दीवानगी दिखाई देती है वहीं कैमरे के पीछे हुई यह घटना बताती है कि मिथुन चक्रवर्ती का स्टारडम अपने दौर में कितना जबरदस्त था। शाहरुख और सलमान जैसे बड़े नामों की मौजूदगी के बावजूद सेट पर मिथुन दा को लेकर मची हलचल ने इस शूटिंग को बॉलीवुड के यादगार किस्सों में शामिल कर दिया।

  • रक्षा उत्पादन में बड़ा बदलाव, 5वीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान प्रोजेक्ट से एचएएल बाहर, निजी कंपनियों को मिली बड़ी जिम्मेदारी

    रक्षा उत्पादन में बड़ा बदलाव, 5वीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान प्रोजेक्ट से एचएएल बाहर, निजी कंपनियों को मिली बड़ी जिम्मेदारी

    नई दिल्ली। देश में स्वदेशी लड़ाकू विमान और रक्षा उत्पादों के निर्माण को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ा बदलाव सामने आया है। पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान तैयार करने वाली एडवांस मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट यानी एएमसीए परियोजना से हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड को बाहर कर दिया गया है। यह पहली बार होगा जब किसी स्वदेशी लड़ाकू विमान परियोजना में एचएएल की भागीदारी नहीं होगी।

    एएमसीए को देश की उन्नत लड़ाकू विमान परियोजनाओं में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस परियोजना का उद्देश्य पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान का विकास करना है। एचएएल लंबे समय से देश के लड़ाकू विमान निर्माण कार्यक्रमों का प्रमुख हिस्सा रही है, लेकिन इस बार परियोजना की अगली प्रक्रिया में उसे शामिल नहीं किया गया है।

    रक्षा सचिव आरके सिंह के मुताबिक, एचएएल को कुछ जरूरी तकनीकी शर्तें पूरी नहीं कर पाने के कारण परियोजना से बाहर किया गया। एचएएल इस समय तेजस-एमके2 लड़ाकू विमान के विकास पर भी काम कर रही है। ऐसे में एएमसीए परियोजना से उसका बाहर होना रक्षा विमान निर्माण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण बदलाव है।

    एचएएल के बाहर होने के बाद अब एएमसीए के प्रोटोटाइप तैयार करने की दौड़ में तीन दावेदार बचे हैं। इनमें टाटा एडवांस्ड सिस्टम, एलएंडटी-बेल-डायनामैटिक कंसोर्टियम और भारत फोर्ज-बीईएमएल-डाटा पैटर्न्स का कंसोर्टियम शामिल है।

    इस बदलाव के साथ पहली बार किसी लड़ाकू विमान परियोजना के प्रोटोटाइप निर्माण की जिम्मेदारी निजी क्षेत्र की कंपनियों के हाथों में जाने जा रही है। इससे देश के निजी रक्षा उद्योग की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो गई है। अब चयनित कंपनी को एएमसीए परियोजना के तहत निर्धारित तकनीकी और निर्माण संबंधी जिम्मेदारियों को पूरा करना होगा।

    एएमसीए परियोजना की अनुमानित लागत करीब 15 हजार करोड़ रुपये बताई गई है। चुनी जाने वाली कंपनी को कुल पांच उड़ने वाले प्रोटोटाइप तैयार करने होंगे। इसके अलावा एक ऐसा विमान भी बनाना होगा, जिसका इस्तेमाल जमीन पर तकनीकी परीक्षण के लिए किया जा सके।

    परियोजना की समयसीमा के अनुसार एएमसीए का पहला प्रोटोटाइप सितंबर 2028 में पहली उड़ान भर सकता है। इसके बाद बाकी प्रोटोटाइप तैयार किए जाएंगे और उनकी अलग-अलग स्तर पर टेस्टिंग की जाएगी। इस परीक्षण प्रक्रिया के जरिए विमान की तकनीकी क्षमताओं और परियोजना से जुड़ी आवश्यकताओं को परखा जाएगा।

    एएमसीए परियोजना से एचएएल के बाहर होने के बाद अब निजी क्षेत्र की कंपनियों के बीच प्रोटोटाइप निर्माण के लिए प्रतिस्पर्धा होगी। परियोजना में चयनित कंपनी को विमान के विकास और प्रोटोटाइप निर्माण से जुड़ी निर्धारित जिम्मेदारियां निभानी होंगी। इस तरह पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान कार्यक्रम में पहली बार निजी क्षेत्र को बड़ी भूमिका मिलने जा रही है।

  • मैच के बाद टीम बस से उतरते वक्त फिसले रोहित शर्मा…. कैमरे में कैद हुआ कोहली का रिएक्शन…?

    मैच के बाद टीम बस से उतरते वक्त फिसले रोहित शर्मा…. कैमरे में कैद हुआ कोहली का रिएक्शन…?


    तिरुवनंतपुरम।
    भारत और वेस्टइंडीज (India vs West Indies) के बीच तीन मैचों की वनडे सीरीज (ODI Series) का पहला मुकाबला टीम इंडिया (Team India) ने आठ विकेट से जीत लिया। तिरुवनंतपुरम में खेले गए इस मुकाबले में विराट कोहली के नाबाद शतक से भारतीय टीम ने धांसू जीत हासिल की। अब अगला मुकाबला 30 सितंबर को गुवाहाटी में खेला जाएगा। इस शतक की वजह से कोहली तो चर्चा में हैं ही, लेकिन रोहित शर्मा (Rohit Sharma) भी एक अलग वजह से सुर्खियों में आ गए हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पहले वनडे में भारत की जीत के बाद वह टीम बस से उतरते वक्त फिसल गए और लुढ़क कर बस की गेट पर पहुंच गए। इस घटना पर विराट कोहली का रिएक्शन भी वायरल हो रहा है।


    कब की है घटना?

    दरअसल, यह हादसा भारत बनाम वेस्टइंडीज पहले वनडे के बाद हुआ। एक्स पर वायरल हो रहे वीडियोज में विंडीज पर शानदार जीत के बाद जब भारतीय खिलाड़ी टीम बस से होटल पहुंचे, तो सारे खिलाड़ी एक एक कर बस से उतरने लगे। वहां मौजूद पैपराजी भारतीय खिलाड़ियों को उतरते हुए शूट कर रहे थे। विराट कोहली समेत कुछ खिलाड़ी पहले ही उतर गए थे। वहीं, रोहित ऊपर की तरफ देखते हुए बस की सीढ़ी से उतर रहे थे। इसी बीच उनका पैर फिसला और वह लुढ़कते हुए गेट पर जा पहुंचे। वहां मौजूद अन्य स्टाफ ने रोहित को उठाया और फिर वह कुछ बोलते दिखे। वहां हुए शोर के बाद कोहली पीछे की तरफ मुड़े और रोहित की ओर चौंककर देखते हुए नजर आए। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है।


    बीसीसीआई की ओर से अपडेट नहीं

    फिलहाल बीसीसीआई की ओर से रोहित को किसी प्रकार की चोट की पुष्टि नहीं की गई है। वेस्टइंडीज के खिलाफ पहले वनडे में रोहित 35 गेंद में दो चौके और तीन छक्के की मदद से 32 रन बनाकर आउट हुए थे। मैच की बात करें तो भारतीय टीम ने विराट कोहली और कप्तान शुभमन गिल के शतकों की मदद से वेस्टइंडीज पर आठ विकेट से जीत दर्ज की। भारत ने इस तरह तीन मैचों की वनडे सीरीज में 1-0 की बढ़त बना ली है। भारत ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया। वेस्टइंडीज ने जस्टिन ग्रीव्स के शतक की मदद से 50 ओवर में सात विकेट पर 295 रन बनाए। ग्रीव्स ने 108 गेंद में 12 चौके की मदद से 101 रन बनाए। वहीं, जॉन कैंपबेल ने 60 गेंद में 62 रन की पारी खेली। इसके अलावा आमिर जांगो ने 58 रन बनाए। भारत की ओर से कुलदीप ने चार विकेट झटके। वहीं, प्रसिद्ध कृष्णा को दो विकेट मिले। नीतीश रेड्डी ने एक विकेट लिया।


    भारत की ओर से कोहली-गिल का शतक

    जवाब में कोहली और गिल ने शतक लगाए जिसकी मदद से भारत ने 41.4 ओवर में दो विकेट पर 300 रन बनाकर जीत दर्ज की। कोहली 88 गेंद में 10 चौके और नौ छक्के की मदद से 139 रन बनाकर नाबाद रहे। वहीं, गिल ने 108 गेंद में 13 चौके और एक छक्के की मदद से 110 रन की पारी खेली। दूसरा वनडे 30 सितंबर को गुवाहाटी में खेला जाएगा, जबकि तीसरा वनडे तीन अक्तूबर को न्यू चंडीगढ़ में होगा। तीन मैचों की वनडे सीरीज खत्म होने के बाद पांच मैचों की टी20 सीरीज खेली जाएगी। इसकी शुरुआत छह अक्तूबर से होगी।

  • ईरान के सुप्रीम लीडर का अमेरिका को लेकर बड़ा बयान…., बोले- दुश्मन को जल्द अरब सागर से निकाल देंगे

    ईरान के सुप्रीम लीडर का अमेरिका को लेकर बड़ा बयान…., बोले- दुश्मन को जल्द अरब सागर से निकाल देंगे


    तेहरान।
    ईरान (Iran) के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई (Supreme Leader Mojtaba Khamenei) ने सोमवार को बिना अमेरिका (America) का नाम लिए बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि दुश्मन ताकतों को जल्द अरब सागर से निकाल दिया जाएगा। उनके मुताबिक, हमलावर ताकतें अब खुद लड़ाई जारी रखने की बजाय युद्ध खत्म करने की अपील कर रही हैं। यह बयान ऐसे समय आया है जब क्षेत्र में तनाव पहले से काफी बढ़ा हुआ माना जा रहा है। खामेनेई ने यह बात ईरान-इराक युद्ध (Iran-Iraq War) की बरसी और हिजबुल्लाह नेता हसन नसरल्लाह (Hezbollah leader Hassan Nasrallah) की बरसी पर जारी संदेश में कही। नसरल्लाह की 2024 में हत्या कर दी गई थी। इन दोनों मौकों का जिक्र कर उन्होंने ईरान की सैन्य ताकत, क्षेत्रीय स्थिति और दुश्मन ताकतों के दबाव का भी जिक्र किया।

    उन्होंने कहा कि ‘सिस्टम ऑफ डोमिनेशन’ यानी दबदबा बनाने वाली ताकतों के हमलों के शुरुआती दिनों में ईरान की स्थिति बहुत कमजोर थी। उस समय देश को पिछली सरकार से कई खतरे विरासत में मिले थे। उनके शब्दों में, तब देश लगभग खाली हाथ था और अपने बचाव के लिए तैयारियां पर्याप्त नहीं थीं। खामेनेई का दावा है कि उसके बाद ईरान ने अपनी सैन्य क्षमता को तेजी से बढ़ाया। अब स्थिति इतनी बदल गई है कि हमलावर ताकतें खुद ईरानी सेना के हमलों से बचने की कोशिश कर रही हैं। उन्होंने कहा कि सच्चाई और खुदा की मदद से देश अब उस मुकाम पर पहुंच गया है जहां बहुत सी हमलावर ताकतें खुद, सिर्फ उनके साथी नहीं, इस्लामी गणराज्य के लड़ाकों के हमलों से बचने के लिए पनाह मांग रही हैं और युद्ध खत्म करने की गुहार लगा रही हैं।

    इस दौरान खामेनेई ने समुद्री मोर्चे का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि ईरानी सेना ने दक्षिणी ईरान के पानी से दुश्मन को पीछे धकेल दिया है और उसे अरब सागर की ओर हटना पड़ा है। उनके अनुसार, होर्मुज की सुरक्षा करने वाले ईरानी लड़ाकों ने दुश्मन को बड़ा नुकसान पहुंचाया है। उन्होंने कहा कि हमारे बहादुर लड़ाकों और होर्मुज के रखवालों से दर्दनाक चोटें खाने के बाद वे अरब सागर से आगे जाने की हिम्मत नहीं करते। खामेनेई ने आगे कहा कि जब भी दुश्मन ताकतों ने आगे बढ़ने की कोशिश की, नुकसान उन्हें ही हुआ। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि वह समय तेजी से आ रहा है जब अरब सागर भी उनकी मौजूदगी से साफ हो जाएगा।

    इस दौरान उन्होंने ईरान की अंदरूनी एकता पर भी जोर दिया। खामेनेई ने कहा कि देश के अलग-अलग वर्गों में मतभेद हो सकते हैं, लेकिन जब बात देश की सुरक्षा और सही मांगों की आती है, तो सब एक साथ खड़े हैं। इसमें सबसे अहम मुद्दा होर्मुज स्ट्रेट पर नियंत्रण बनाए रखना है। यह जलमार्ग दुनिया के तेल व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इसलिए इस पर कब्जा या दबाव बनाए रखना ईरान की रणनीति का बड़ा हिस्सा है।

  • US ने कुछ खास दवाओं के कच्चे माल पर 100% टैरिफ से दी छूट… भारत समेत 20 देशों को फायदा

    US ने कुछ खास दवाओं के कच्चे माल पर 100% टैरिफ से दी छूट… भारत समेत 20 देशों को फायदा


    वाशिंगटन।
    अमेरिका (America) ने भारत (India) समेत 20 देशों से आने वाली कुछ खास दवाओं और उनके इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल (Raw materials) पर 100% टैरिफ लगाने से छूट दी है। यह फैसला भारतीय फार्मा कंपनियों (Indian Pharmaceutical Companies) के लिए राहत देने वाला है। हालांकि, यह छूट भारत से अमेरिका भेजी जाने वाली सभी दवाओं पर लागू नहीं होगी।

    एक खबर के मुताबिक अमेरिका 29 सितंबर यानी आज से कुछ पेटेंट वाली दवाओं और उनसे जुड़े उत्पादों पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने की तैयारी कर रहा है, लेकिन कुछ विशेष श्रेणी की दवाओं को इस शुल्क से बाहर रखा गया है।


    सभी भारतीय दवाओं को छूट नहीं

    अमेरिका का फैसला भारत की सभी दवाओं पर लागू नहीं है। केवल तय की गई विशेष श्रेणी की दवाओं और उनसे जुड़े घटकों को ही 100 प्रतिशत टैरिफ से छूट मिलेगी। वहीं, सामान्य जेनेरिक दवाएं और उनके संबंधित घटक पहले से ही इस विशेष टैरिफ के दायरे में नहीं हैं।


    किन दवाओं को मिलेगी छूट?

    अमेरिका की इस व्यवस्था में मुख्य रूप से नीचे दी गई दवाओं में छूट दी गई है।
    – दुर्लभ बीमारियों के इलाज की दवाएं।
    – बांझपन के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाएं।
    – सेल थेरेपी से जुड़ी दवाएं।
    – जीन थेरेपी से जुड़ी दवाएं।
    – एंटीबॉडी-ड्रग कंजुगेट्स (ADCs)।
    – पशुओं के इलाज में इस्तेमाल होने वाली कुछ दवाएं।
    इन दवाओं को बनाने में इस्तेमाल होने वाले संबंधित कच्चे माल और अन्य जरूरी घटकों को भी इस छूट में शामिल किया गया है।


    भारत समेत और कौन-कौन से देशों को होगा फायदा

    अमेरिका की इस लिस्ट में भारत के अलावा अर्जेंटीना, बांग्लादेश, कंबोडिया, इक्वाडोर, अल सल्वाडोर, यूरोपीय यूनियन, ग्वाटेमाला, इंडोनेशिया, जापान, जॉर्डन, मलेशिया, नॉर्थ मैसेडोनिया, दक्षिण कोरिया, स्विट्जरलैंड, लिकटेंस्टीन, ताइवान, थाईलैंड, ब्रिटेन और वियतनाम शामिल हैं।


    क्यों दी गई सुविधा:

    अमेरिकी वाणिज्य विभाग के मुताबिक इन देशों को यह सुविधा इसलिए दी गई है, क्योंकि इनके साथ अमेरिका के मौजूदा या भविष्य में लागू होने वाले व्यापार और सुरक्षा समझौते हैं।


    अमेरिका ने क्यों लगाया 100% टैरिफ?

    अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने अप्रैल में पेटेंट वाली दवाओं, बायोलॉजिक्स और उनसे जुड़े कुछ घटकों के आयात पर शुल्क लगाने की घोषणा की थी। यह फैसला अमेरिकी कानून के सेक्शन 232 के तहत लिया गया है। अमेरिकी सरकार का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य अमेरिका में दवाओं का उत्पादन बढ़ाना है।


    आज से लागू होना है टैरिफ

    100 प्रतिशत टैरिफ का प्रावधान कुछ कंपनियों के लिए 31 जुलाई से प्रभावी हो चुका है। बाकी कवर की गई कंपनियों पर यह व्यवस्था 29 सितंबर 2026 यानी आज से लागू होनी है।अमेरिका ने इस व्यवस्था में कुछ तकनीकी बदलाव भी किए हैं। इनमें जेनेरिक दवाओं की परिभाषा को स्पष्ट करना शामिल है। इसके अलावा यह भी स्पष्ट किया गया है कि ‘फार्मास्युटिकल आर्टिकल्स’ में तैयार दवाओं के साथ-साथ उनके एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रेडिएंट्स (API) और इन्हें बनाने में इस्तेमाल होने वाले प्रमुख शुरुआती कच्चे माल को भी शामिल किया जा सकता है।

  • देहरादून बना देश में सबसे कम AQI वाला शहर…. दो दिन की बारिश से साफ हुई शहर की हवा

    देहरादून बना देश में सबसे कम AQI वाला शहर…. दो दिन की बारिश से साफ हुई शहर की हवा


    देहरादून।
    दो दिन की बारिश (Rain) ने देहरादून (Dehradun) की हवा को बेहद साफ कर दिया। सोमवार को यहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) (Air Quality Index – AQI) न्यूनतम चार और औसत करीब 11 दर्ज किया गया। इसके साथ देहरादून देश में सबसे कम एक्यूआई वाला शहर बन गया। पीएम-10 की मात्रा भी 170 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर से घटकर करीब 20 माइक्रोग्राम रह गई। दिल्ली और बरेली में एक्यूआई कितना दर्ज हुआ?

    बारिश से पहले देहरादून की हवा काफी खराब हो गई थी। पिछले दिनों एक्यूआई करीब 200 तक पहुंच गया था। सड़कों की धूल, निर्माण कार्य और वाहनों से निकलने वाले प्रदूषक कणों के कारण पीएम-10 की मात्रा भी बढ़ी थी। लगातार दो दिन हुई बारिश ने वातावरण में मौजूद धूल और प्रदूषणकारी कणों को काफी हद तक साफ कर दिया। ताजा वायु गुणवत्ता आंकड़ों में देहरादून का एक्यूआई देश के सभी शहरों में सबसे कम रहा।


    दूसरे नंबर पर कौन, दिल्ली-बरेली में कितना AQI

    सिक्किम के गंगटोक का एक्यूआई 15 दर्ज हुआ और वह दूसरे स्थान पर रहा। दिल्ली में 53, आगरा में 46 और बरेली में 60 एक्यूआई दर्ज किया गया। अधिकांश प्रमुख शहरों में एक्यूआई 50 के आसपास या इससे अधिक रहा। पीसीबी के सदस्य सचिव डॉ.पराग मधुकर धकाते के अनुसार प्रदूषण कम करने के लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इसका नतीजा भी एक्यूआई में दिख रहा है। हालांकि, इसमें बारिश की भी बड़ी भूमिका है।


    बारिश से बैठी धूल

    देहरादून विवि के पर्यावरण विभाग की एचओडी डॉ. विजय श्रीधर के मुताबिक बारिश के दौरान वातावरण में मौजूद धूल और महीन कण बारिश की बूंदों के साथ नीचे आ जाते हैं। इससे हवा में तैरने वाले पीएम-10, पीएम-2.5 और अन्य कणों की मात्रा तेजी से घटती है। बारिश थमने के बाद सड़कों पर जमा मिट्टी सूखने, वाहनों की आवाजाही और निर्माण गतिविधियां बढ़ने से दोबारा धूल उड़ सकती है। ऐसे में एक्यूआई फिर बढ़ने की आशंका है। हाल के दिनों में देहरादून का एक्यूआई 40 से 200 तक पहुंचा है। इससे हवा की गुणवत्ता पर मौसम और धूल के असर का पता चलता है।

  • देश के 62% राष्ट्रीय राजमार्गों पर चलना खतरे से खाली नहीं… मॉनसून के बाद खराब हो जाती हैं हालत

    देश के 62% राष्ट्रीय राजमार्गों पर चलना खतरे से खाली नहीं… मॉनसून के बाद खराब हो जाती हैं हालत


    नई दिल्ली।
    देश में एक तरफ जहां हर दिन रिकॉर्ड गति (Record Speed) से नए एक्सप्रेस-वे (New Expressways) और राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच) (National Highway – NH) बिछाए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर हाईवे बनने के बाद उनके रख-रखाव की अनदेखी हो रही है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, देश के कुल 1.46 लाख किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क में से लगभग 62 फीसदी हिस्सा स्थायी डेवलपर या डिफेक्ट लायबिलिटी पीरियड (डीएलपी) (Defect Liability Period – DLP) के सुरक्षा कवच में नहीं हैं। यानी नेटवर्क पर सफर सुरक्षित नहीं है। क्योंकि, इन सड़कों को महज अल्पकालिक अनुबंधों (एसटीसी) और पेचवर्क की खानापूर्ति के भरोसे छोड़ दिया गया है, जो हाईवे पर सफर करने वाले करोड़ों यात्रियों के लिए जानलेवा साबित हो रहा है। सड़क परिवहन व राजमार्ग मंत्रालय के सूत्रों ने बताया, देश के 90,000 किलोमीटर से अधिक लंबा हाईवे नेटवर्क बिना किसी स्थायी जवाबदेही के केवल अल्पकालिक अनुबंधों और प्रदर्शन-आधारित रखरखाव अनुबंधों के भरोसे है।


    चालकों को गंवानी पड़ती है जान

    विश्वस्तरीय बुनियादी ढांचे के दावों के बीच पेचवर्क की इस खानापूर्ति का सबसे दर्दनाक और सीधा परिणाम देश के आम वाहन चालकों को अपनी जान गंवाकर भुगतना पड़ रहा है। कोई पारदर्शी केंद्रीय डेटाबेस न होने से जवाबदेही किसी एक बड़ी कंपनी के बजाय छोटे-छोटे स्थानीय ठेकेदारों में बंट जाती है, जिससे काम की गुणवत्ता की निगरानी लगभग न के बराबर हो जाती है। शॉर्ट-टर्म मेंटेनेंस कॉन्ट्रैक्ट्स की औसतन अवधि केवल 1 से 2 वर्ष होती है। इतने कम समय के लिए कोई भी ठेकेदार सड़क के डामरीकरण या उसकी नींव को मजबूत करने जैसा स्थायी कार्य नहीं करता। इन अनुबंधों का दायरा केवल गड्ढे भरने, नालियों की सफाई या साइनबोर्ड लगाने तक सीमित रह जाता है।


    ब्लैक स्पॉट्स कई साल तक नहीं सुधारे जाते

    दीर्घकालिक डेवलपर न होने के कारण सड़कों के ब्लैक स्पॉट्स वर्षों तक नहीं सुधारे जाते हैं। इसके अलावा क्रैश बैरियर, रेट्रो-रिफ्लेक्टिव साइनेज, सोलर स्टड्स और पर्याप्त स्ट्रीट लाइटों का रखरखाव समय पर न होने से रात या कोहरे में वाहन चालकों को किनारे या डिवाइडर का सही अंदाजा नहीं लगता। मानसून में ड्रेनेज खराब होने से सड़क पर पानी जमा होने से गाड़ियों का फिसलना और बड़े गड्ढे जानलेवा साबित होते हैं।


    जिन हाईवे का रखरखाव नहीं, वहां ज्यादा मौतें

    मंत्रालय और सेवलाइफ फाउंडेशन के आंकड़ों के अनुसार, हाईवे पर होने वाली कुल मौतों में से लगभग 55 से 62 फीसदी मौतें उन्हीं हिस्सों पर होती हैं, जहां दीर्घकालिक रखरखाव का अभाव है। राष्ट्रीय राजमार्गों के 58 फीसदी से 60 प्रतिशत हादसे इन 90,000 किमी से अधिक फैले शॉर्ट-टर्म मेंटेनेंस वाले हिस्सों में होते हैं। हाईवे पर हर साल 55 हजार से 60 हजार मौतें दर्ज की जाती हैं।


    मानसून के बाद हर बार सड़कें हो जाती हैं बदहाल

    हाईवे विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी राष्ट्रीय राजमार्ग की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए पूरी लाइफ-साइकिल मेंटेनेंस (5 से 10 वर्ष की दीर्घकालिक जवाबदेही) आवश्यक होती है। 1-2 साल के टुकड़ों में बांटे गए अनुबंध सड़क की उम्र बढ़ाने में पूरी तरह विफल साबित हो रहे हैं और हर मानसून के बाद सड़कें फिर बदहाल हो जाती हैं। वहीं, रखरखाव में पर्याप्त धनराशि खर्च नहीं की जाती है।

  • देश में फिर बदला मौसम का मिजाज…. आज इन राज्यों में आंधी-बारिश का अलर्ट

    देश में फिर बदला मौसम का मिजाज…. आज इन राज्यों में आंधी-बारिश का अलर्ट


    नई दिल्ली।
    पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) उत्तर भारत (North India) में सक्रिय होने के कारण जम्मू-कश्मीर (Jammu and Kashmir) से उत्तराखंड तक पहाड़ों पर बर्फबारी और मैदान में भारी बारिश जारी है। इससे पारा 10 डिग्री तक गिरा है। केदारनाथ मार्ग (Kedarnath Route) में लगातार दूसरे दिन भूस्खलन के बाद यात्रा रोक दी गई है। चट्टान की चपेट में आने से एक बच्चे की मौत हो गई, जबकि रास्ते पर मलबा आने से 1,500 से अधिक श्रद्धालु फंस गए, जिन्हें मुश्किल से सुरक्षित निकाल कर गौरीकुंड पहुंचाया गया। मौसम विभाग ने मौजूदा हालात पर सोमवार आधी रात के बाद करीब ढाई बजे अपडेट दिया। इसके मुताबिक उत्तरी अंडमान सागर और उससे सटे म्यांमार तट पर बना गहरा निम्न दबाव पिछले 6 घंटों में 13 किमी प्रति घंटे की गति से उत्तर-उत्तर-पश्चिम की ओर बढ़ा है।


    अगले दो दिनों में कैसा रहेगा मिजाज

    मौसम विभाग ने बताया कि 28 सितंबर को भारतीय समयानुसार रात करीब 1930 बजे से 2130 बजे के बीच गहरा निम्न दबाव का क्षेत्र क्यैकटो के पूर्व में म्यांमार तट को पार कर गया। इस दौरान हवा की गति 50-60 किमी प्रति घंटे रही। इसके बाद, यह उत्तर-उत्तरपश्चिम की ओर बढ़ गया। अगले दो दिनों के दौरान निम्न दबाव का क्षेत्र तटीय म्यांमार और उससे सटे पूर्वी मध्य और उत्तरपूर्वी बंगाल की खाड़ी और दक्षिणपूर्वी बांग्लादेश में उत्तर-उत्तरपश्चिम की ओर बढ़ते रहने की संभावना है।


    निम्न दबाव का क्षेत्र अब कमजोर, मौसम विभाग चक्रवाती हवा पर क्या बोला?

    मौसम विभाग के मुताबिक, उत्तर प्रदेश के ऊपर बना निम्न दबाव का क्षेत्र अब कमजोर हो गया है, लेकिन चक्रवाती हवाओं का क्षेत्र अभी भी बना हुआ है। वहीं, एक पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय है। इसके चलते ही सोमवार को उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल, राजस्थान, बिहार और अंडमान-निकोबार में गरज के साथ बौछारें पड़ीं। वहीं, मराठवाड़ा, ओडिशा, पूर्वी असम, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश में अलग-अलग स्थानों पर हल्की बारिश हुई।


    आज नौ राज्यों में आंधी-बारिश के आसार

    उत्तर-पश्चिम समेत पूर्वी भारत के नौ से अधिक राज्यों में मंगलवार को आंधी-तूफान के साथ बारिश होने की संभावना है और बुधवार से राहत की उम्मीद है, लेकिन उमस बढ़ सकती है।


    जम्मू-कश्मीर-लद्दाख

    29 सितंबर और 2-4 अक्तूबर को बारिश और आंधी-तूफान की संभावना है।


    उत्तराखंड

    29 सितंबर से 4 अक्तूबर के दौरान कहीं-कहीं बारिश और आंधी-तूफान के साथ बिजली गिर सकती है।


    हिमाचल प्रदेश

    29 सितंबर को प्रदेश के कुछ इलाकों में बारिश के साथ तेज हवाएं चलने के आसार


    पंजाब-हरियाणा-चंडीगढ़

    29 सितंबर को कुछ जगहों पर आंधी-तूफान के साथ बारिश और बिजली गिरने की संभावना


    दिल्ली-पूर्वी राजस्थान-पश्चिमी यूपी

    छिटपुट स्थानों पर तेज हवाओं के साथ बारिश और वज्रपात संभव को कहीं-कहीं बारिश के साथ


    पूर्वी उत्तर प्रदेश

    29-30 सितंबर को कहीं-कहीं बारिश के साथ तेज हवा और बिजली गिर सकती है।


    पहाड़ों पर बर्फबारी के कारण सड़कें बंद

    हिमाचल प्रदेश में सोमवार को लगातार तीसरे दिन किन्नौर, लाहौल स्पीति और चंबा के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी हुई, जबकि राजधानी शिमला, धर्मशाला समेत अन्य जिलों में बादल बरसे। प्रदेश के अधिकतम तापमान में आठ से दस डिग्री की गिरावट आने से मौसम में ठंडक बढ़ गई है। प्रदेश में 61 सड़कों पर वाहनों की आवाजाही ठप रही। 49 बिजली ट्रांसफार्मर भी बंद रहे।


    फसलों को संभावित नुकसान से ग्रामीण चिंतित

    उत्तराखंड की व्यास घाटी में आदि कैलाश, नाभीढांग, कुटी में दो से पांच फीट बर्फ की सफेद चादर बिछ गई है इससे कुटी से आदि कैलाश को जोड़ने वाला यात्रा मार्ग बंद हो गया है। व्यास घाटी आदि कैलाश में पांच फीट तक बर्फ होने से जहां पर्यटक खुश हो गए। वहीं, फसलों को संभावित नुकसान ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी।


    बिहार में कई नदियां उफान पर

    नेपाल और सीमावर्ती क्षेत्रों में भारी बारिश से बिहार में गंडक, कोसी, बागमती नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं, जिससे निचले इलाकों में पानी भर गया है। सुपौल और पश्चिम चंपारण जिले में करीब 82,000 लोग प्रभावित हुए हैं।


    उत्तर भारत में बढ़ेगी उत्तर-पश्चिमी हवा

    आईएमडी के अनुसार, जम्मू के आसपास बना पश्चिमी विक्षोभ अगले 36 घंटों में पहाड़ों से आगे निकल जाएगा। इसके बाद मंगलवार से निचले स्तरों पर तेज उत्तर-पश्चिमी हवाएं चलने लगेंगी, जिससे मौसम साफ होगा।


    नेपाल में देखते-देखते ढही इमारत

    नेपाल में लगातार जारी बारिश के बीच बांगलुंग में नगर पालिका भवन ढहने का वीडियो सामने आया है। नदी के कटाव के कारण इमारत का एक हिस्सा धराशायी हो गया और देखते ही देखते इमारत नदी में समा गई। उधर, पानी बढ़ने से नारायणी नदी में बंधे एक क्रूज शिप की रस्सी टूट गई। शिप करीब 100 मीटर तक नदी के बहाव के साथ बहता चला गया और पुल के पिलर से टकरा गया। नेपाल के कई इलाकों में बाढ़ की स्थिति एक बार फिर विकराल हो गई है।


    दिल्ली-एनसीआर

    मनांग में 7,126 मीटर ऊंची हिमलुंग हिमाल चोटी के बेस कैंप पर रविवार को हुए हिमस्खलन में मृतकों की संख्या चार हो गई है। सोमवार को दो और शव मिले। 8 लोग अब भी लापता हैं। लापता 22 लोगों में से 10 से संपर्क स्थापित कर लिया गया है। लगातार बर्फबारी, बारिश और खराब मौसम के चलते खोज एवं बचाव कार्य में भारी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

  • MP की बड़ी उपलब्धि…. यूनेस्को की टेंटेटिव सूची में शामिल हुए चार और नए ऐतिहासिक स्थल

    MP की बड़ी उपलब्धि…. यूनेस्को की टेंटेटिव सूची में शामिल हुए चार और नए ऐतिहासिक स्थल


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) की समृद्ध ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत (Rich Historical and Cultural Heritage) को अंतरराष्ट्रीय मंच पर एक और ऐतिहासिक सफलता मिली है. प्रदेश के चार ऐतिहासिक स्थलों को UNESCO की Tentative List में शामिल किया गया है. इनमें धार की बाघ गुफाओं के भित्ति चित्र, सीहोर की गिन्नौरगढ़ किला, मुरैना के बटेश्वर-पदावली-ककरामठ मंदिर समूह और विदिशा की उदयगिरि गुफाएं शामिल हैं।

    UNESCO के आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक इन चारों स्थलों को 8 जुलाई 2026 को भारत की ओर से Tentative List के लिए प्रस्तुत किया गया. भारत की Tentative List में फिलहाल 78 स्थल दर्ज हैं. हालांकि, Tentative List में शामिल होना अभी UNESCO की World Heritage List में शामिल होने के बराबर नहीं है. यह किसी स्थल के संभावित विश्व धरोहर नामांकन की दिशा में एक महत्वपूर्ण शुरुआती चरण है।


    चारों धरोहरों में क्या है खास?

    मध्य प्रदेश के इन चारों स्थलों की खासियत अलग-अलग है. कहीं हजारों साल पुरानी कला और धार्मिक परंपराओं के प्रमाण मिलते हैं तो कहीं मध्यकालीन मंदिर वास्तुकला और गोंड शासन की स्थापत्य विरासत दिखाई देती है.


    1. बाघ गुफाएं: पत्थरों पर दर्ज बौद्ध कला की कहानी

    धार जिले में बाघ नदी के किनारे विंध्य क्षेत्र की पहाड़ियों में स्थित बाघ गुफाएं नौ रॉक-कट बौद्ध गुफाओं का समूह हैं. UNESCO के अनुसार इनका विकास लगभग चौथी से छठी शताब्दी ईस्वी के बीच हुआ. इन गुफाओं की सबसे बड़ी पहचान यहां मौजूद भित्ति चित्र हैं. खासतौर पर गुफा संख्या-4, जिसे रंग महल के नाम से जाना जाता है, अपने म्यूरल्स के लिए प्रसिद्ध है.

    इन चित्रों में तत्कालीन जीवन, धार्मिक विषयों, संगीत, नृत्य और सामाजिक गतिविधियों की झलक मिलती है. UNESCO के रिकॉर्ड के अनुसार यहां बड़ी संख्या में प्राचीन अभिलेख भी मिले हैं, जो गुप्तकालीन राजनीतिक और प्रशासनिक गतिविधियों से इसके संबंध की ओर संकेत करते हैं.


    2. गिन्नौरगढ़ किला: गोंड विरासत की मजबूत पहचान

    सीहोर जिले में रातापानी क्षेत्र के वन परिदृश्य के बीच स्थित गिन्नौरगढ़ किला मध्य प्रदेश की गोंड विरासत से जुड़ा महत्वपूर्ण स्थल है. यह किला केवल सैन्य सुरक्षा के लिहाज से ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि इसके आसपास की प्राकृतिक भौगोलिक संरचना और जल प्रबंधन व्यवस्था भी इसे खास बनाती है. किले की संरचना और आसपास के ऐतिहासिक अवशेष मध्य भारत में गोंड शासन की राजनीतिक व्यवस्था, वास्तुकला और जल प्रबंधन की परंपराओं को समझने में महत्वपूर्ण माने जाते हैं. UNESCO की Tentative List में गिन्नौरगढ़ किले की प्रविष्टि भी 8 जुलाई 2026 की है।


    3. बटेश्वर-पदावली-ककरामठ: एक जगह तीन ऐतिहासिक मंदिर समूह

    मुरैना जिले के चंबल क्षेत्र में स्थित बटेश्वर, पदावली और ककरामठ मंदिर समूह को एक संयुक्त विरासत स्थल के रूप में Tentative List में शामिल किया गया है. UNESCO के मुताबिक ये मंदिर मुख्य रूप से 8वीं से 11वीं शताब्दी के बीच विकसित हुए और मध्य भारत में प्रारंभिक मध्यकालीन नागर मंदिर वास्तुकला के विकास को दर्शाते हैं। बटेश्वर अपने बड़े मंदिर समूह के लिए जाना जाता है, जबकि पदावली की नक्काशी और ककरामठ की स्थापत्य विशेषताएं इस पूरे क्षेत्र की मंदिर निर्माण परंपरा को समझने में मदद करती हैं।

    UNESCO के अनुसार इन तीनों स्थलों को एक साथ देखने पर चंबल घाटी में विकसित क्षेत्रीय मंदिर स्थापत्य और कलात्मक परंपरा की तस्वीर सामने आती है.


    4. उदयगिरि गुफाएं: गुप्तकाल की धार्मिक और राजनीतिक विरासत

    विदिशा के पास स्थित उदयगिरि गुफाएं गुप्तकालीन भारत की धार्मिक और राजनीतिक अभिव्यक्ति के महत्वपूर्ण प्रमाणों में शामिल हैं. यहां चट्टानों को काटकर बनाई गई गुफाएं, मूर्तियां और अभिलेख प्राचीन धार्मिक परंपराओं के साथ तत्कालीन राजसत्ता के संबंध को भी सामने रखते हैं. उदयगिरि की सबसे चर्चित प्रतिमाओं में विशाल वराह प्रतिमा शामिल है. यह वैष्णव परंपरा और गुप्तकालीन राजकीय विचारधारा के अध्ययन के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है. UNESCO की एक अलग 2025 की Tentative List प्रविष्टि में उदयगिरि की गुफा संख्या-1 को उत्तर भारत के गुप्तकालीन मंदिरों की एक Serial Nomination का हिस्सा भी बनाया गया है।


    मध्य प्रदेश में अब 19 Tentative List entries?

    मध्य प्रदेश की ये चार नई प्रविष्टियां राज्य की विरासत को UNESCO के मंच पर और विस्तार देती हैं. UNESCO के आधिकारिक रिकॉर्ड में राज्य से जुड़ी कई अन्य प्रविष्टियां भी दर्ज हैं, जिनमें ग्वालियर किला, भोजेश्वर महादेव मंदिर, ओरछा का ऐतिहासिक समूह, धामनार का ऐतिहासिक समूह, खूनी भंडारा और रामनगर के गोंड स्मारक जैसी धरोहरें शामिल हैं। प्रदेश की विरासत सूची में प्राकृतिक और सांस्कृतिक दोनों तरह के स्थल शामिल हैं. भेड़ाघाट-लामेताघाट और सतपुड़ा टाइगर रिजर्व भी UNESCO की Tentative List में दर्ज हैं।


    Tentative List में शामिल होने का क्या मतलब है?

    किसी स्थल का UNESCO की Tentative List में शामिल होना यह बताता है कि संबंधित देश उसे भविष्य में World Heritage List के लिए नामांकित करने पर विचार कर रहा है. इसके बाद नामांकन, मूल्यांकन और UNESCO की निर्धारित प्रक्रियाओं के तहत आगे की कार्रवाई होती है. इसलिए इन चारों स्थलों का Tentative List में आना विश्व धरोहर का अंतिम दर्जा मिलना नहीं, बल्कि उस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

    मध्य प्रदेश की विरासत को मिलेगा नया मंच
    बाघ की भित्ति चित्रकारी से लेकर गिन्नौरगढ़ की गोंड स्थापत्य विरासत, चंबल के मंदिर समूह और उदयगिरि की गुप्तकालीन गुफाओं तक इन चार स्थलों की विशेषताएं मध्य प्रदेश के इतिहास की अलग-अलग परतों को सामने लाती हैं। UNESCO की आधिकारिक सूची में चारों स्थलों का शामिल होना प्रदेश की पुरातात्विक और सांस्कृतिक विरासत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत करने की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण उपलब्धि है।