Author: bharati

  • भारत और ओमान के बीच ऊर्जा, सुरक्षा और एसएएफ सहयोग की संभावनाएं बढ़ीं, 2030 तक ईंधन मिश्रण लक्ष्य पर जोर

    भारत और ओमान के बीच ऊर्जा, सुरक्षा और एसएएफ सहयोग की संभावनाएं बढ़ीं, 2030 तक ईंधन मिश्रण लक्ष्य पर जोर


    नई दिल्ली। भारत और ओमान के बीच ऊर्जा, सुरक्षा और सतत विमानन ईंधन यानी एसएएफ के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की व्यापक संभावनाएं हैं। भारत में ओमान के राजदूत इस्सा सालेह अब्दुल्ला अल शिबानी ने कहा कि दोनों देश पड़ोसी हैं और उनके बीच एयरस्पेस भी साझा होता है। ऐसे में ऊर्जा और विमानन क्षेत्र समेत कई क्षेत्रों में साझेदारी को आगे बढ़ाया जा सकता है।

    ओमान के राजदूत ने यह बात राजधानी नई दिल्ली में आयोजित दूसरे इंडिया एसएएफ कॉन्क्लेव और अवार्ड 2026 के दौरान कही। उन्होंने कहा कि ऊर्जा, सस्टेनेबल एयर फ्यूल और सुरक्षा के क्षेत्र में दोनों देशों के बीच सहयोग की पर्याप्त गुंजाइश मौजूद है। उनके मुताबिक, दोनों देश मिलकर इन क्षेत्रों में अपनी क्षमताओं का बेहतर इस्तेमाल कर सकते हैं।

    उन्होंने दोनों देशों के नेट जीरो उत्सर्जन लक्ष्यों का भी उल्लेख किया। ओमान ने वर्ष 2050 तक नेट जीरो उत्सर्जन हासिल करने का लक्ष्य तय किया है, जबकि भारत ने वर्ष 2070 तक नेट जीरो का लक्ष्य निर्धारित किया है। राजदूत ने कहा कि दोनों देश इस दिशा में अपनी क्षमता विकसित करने के लिए आगे बढ़ रहे हैं।

    एसएएफ को लेकर विशेषज्ञों ने भारत के लिए अलग रणनीति अपनाने की जरूरत पर भी जोर दिया। एसएएफ एसोसिएशन के अध्यक्ष और जेडआर2 ग्रुप के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक जिमी ओल्सन ने कहा कि भारत ने सौर ऊर्जा, बायोमास, ऊर्जा उपलब्धता और अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के क्षेत्र में महत्वपूर्ण क्षमता विकसित की है। इसी आधार पर देश को एसएएफ के लिए अपनी जरूरतों के अनुरूप रास्ता तैयार करना चाहिए।

    उन्होंने कहा कि एसएएफ क्षेत्र में सरकार की ओर से वायबिलिटी फंडिंग का इस्तेमाल किया जा सकता है। हालांकि, यह क्षेत्र काफी पूंजी निवेश वाला है और बड़े स्तर पर उत्पादन शुरू होने के बाद ही इसकी लागत को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।

    भारत में विमानन ईंधन में एसएएफ की हिस्सेदारी बढ़ाने को लेकर भी लक्ष्य तय किए जा रहे हैं। एसएएफ एसोसिएशन ने विमानन ईंधन में 5 प्रतिशत एसएएफ मिश्रण का लक्ष्य रखा है। अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए प्रस्तावित मिश्रण व्यवस्था के तहत वर्ष 2027 में 1 प्रतिशत, 2028 में 2 प्रतिशत और वर्ष 2030 तक 5 प्रतिशत एसएएफ मिश्रण का अनुमान है।

    इस लक्ष्य के साथ एसएएफ की मांग में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी की संभावना है। अनुमान के मुताबिक मांग वर्ष 2027 में करीब 46 हजार टन से बढ़कर 2030 तक लगभग 2.50 लाख टन हो सकती है। मौजूदा उत्पादन क्षमता वर्ष 2027 और 2028 की जरूरतों को पूरा करने में सक्षम बताई गई है।

    हालांकि, वर्ष 2030 के लक्ष्य को हासिल करने के लिए आने वाले वर्षों में नई परियोजनाओं का समय पर शुरू होना महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बताया गया कि 2028 से 2030 के बीच प्रस्तावित एचईएफए और एटीजे परियोजनाओं के शुरू नहीं होने की स्थिति में 2030 के एसएएफ मिश्रण लक्ष्य को हासिल करना मुश्किल हो सकता है।

    एसएएफ उत्पादन के लिए लगातार और पर्याप्त मात्रा में फीडस्टॉक की जरूरत होगी। ऐसे में किसानों और कच्चे माल के संग्रह से जुड़े नेटवर्क की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। मजबूत सप्लाई चेन के बिना बड़े स्तर पर एसएएफ उत्पादन को आगे बढ़ाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

    भारत और ओमान के बीच ऊर्जा सहयोग के साथ विमानन क्षेत्र में सतत ईंधन को लेकर बढ़ती संभावनाएं ऐसे समय सामने आई हैं, जब वैश्विक विमानन उद्योग कार्बन उत्सर्जन कम करने के विकल्पों पर तेजी से काम कर रहा है। एसएएफ को इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण विकल्प माना जा रहा है।

  • वैश्विक तनाव और महंगे कच्चे तेल से शेयर बाजार में भारी गिरावट, सेंसेक्स 1,124 अंक टूटा और निफ्टी 1.56 प्रतिशत लुढ़का

    वैश्विक तनाव और महंगे कच्चे तेल से शेयर बाजार में भारी गिरावट, सेंसेक्स 1,124 अंक टूटा और निफ्टी 1.56 प्रतिशत लुढ़का

    नई दिल्ली 28 सितंबर। वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच सोमवार को भारतीय शेयर बाजार में भारी बिकवाली देखने को मिली। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और वैश्विक बाजारों में दबाव के कारण सप्ताह के पहले कारोबारी दिन दोनों प्रमुख सूचकांक बड़ी गिरावट के साथ बंद हुए।

    बीएसई सेंसेक्स 1,124.02 अंक यानी 1.52 प्रतिशत की गिरावट के साथ 72,771.72 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं, निफ्टी 50 में 360.25 अंक यानी 1.56 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और यह 22,780.25 पर बंद हुआ। कारोबारी सत्र के दौरान दोनों सूचकांकों में लगातार दबाव बना रहा।सेंसेक्स अपने पिछले बंद स्तर 73,895.74 से 160.91 अंक यानी 0.21 प्रतिशत की गिरावट के साथ 73,734.83 पर खुला था। कारोबार के दौरान यह एक समय 1,179.51 अंक यानी 1.59 प्रतिशत तक टूटकर 72,716.23 के निचले स्तर पर पहुंच गया।

    इसी तरह निफ्टी 50 अपने पिछले बंद स्तर 23,140.50 से 0.32 प्रतिशत नीचे 23,064.90 पर खुला। कारोबार के दौरान इसमें गिरावट बढ़ी और यह 378.3 अंक यानी 1.63 प्रतिशत टूटकर 22,762.20 के दिन के निचले स्तर तक पहुंच गया।

    बाजार में गिरावट के पीछे कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के साथ पश्चिम एशिया में जारी तनाव प्रमुख कारणों में रहा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा ईरान के नवीनतम प्रस्ताव को अस्वीकार किए जाने के बाद वैश्विक बॉन्ड यील्ड में भी उछाल आया। इससे निवेशकों की धारणा पर दबाव बढ़ा और शेयर बाजारों में बिकवाली तेज हुई।व्यापक बाजार में भी कमजोरी देखने को मिली। निफ्टी मिडकैप 100 में 1.63 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप 100 में 1.85 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। सेक्टरों की बात करें तो निफ्टी पीएसयू बैंक सबसे कमजोर रहा। निफ्टी प्राइवेट बैंक और निफ्टी बैंक में भी दबाव रहा, जबकि निफ्टी आईटी में तुलनात्मक रूप से सबसे कम गिरावट दर्ज की गई।

    निफ्टी 50 में शामिल ज्यादातर शेयर गिरावट के साथ बंद हुए। डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज, इंफोसिस और एचडीएफसी लाइफ को छोड़कर अन्य शेयरों में कमजोरी रही। टीएमपीवी, जियो फाइनेंशियल सर्विसेज, पावरग्रिड और एलएंडटी के शेयरों में सबसे अधिक गिरावट देखने को मिली।

    बाजार में तेज गिरावट का असर सूचीबद्ध कंपनियों के कुल बाजार पूंजीकरण पर भी पड़ा। बीएसई में सूचीबद्ध सभी कंपनियों का बाजार पूंजीकरण करीब 482 लाख करोड़ रुपये से घटकर 474 लाख करोड़ रुपये रह गया। इस तरह एक ही कारोबारी सत्र में निवेशकों की संपत्ति में करीब 8 लाख करोड़ रुपये की कमी आई।वैश्विक स्तर पर भी शेयर बाजारों पर दबाव रहा। ट्रम्प द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने और लड़ाई समाप्त करने से संबंधित ईरानी प्रस्ताव को खारिज किए जाने के बाद बाजारों में चिंता बढ़ी। ईरान ने संघर्ष के समाधान के लिए कूटनीति को ही रास्ता बताया है। इस घटनाक्रम का असर वैश्विक शेयर, तेल और बॉन्ड बाजारों पर दिखाई दिया।

    एशियाई बाजारों में भी अधिकांश प्रमुख सूचकांक गिरावट के साथ बंद हुए। दक्षिण कोरिया का सूचकांक करीब 2 प्रतिशत और जापान का निक्केई 0.10 प्रतिशत नीचे रहा। चीन के बाजारों में भी 1 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई।पश्चिम एशिया संकट के समाधान में देरी के कारण तेल आपूर्ति को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं। भारत के लिए महंगा कच्चा तेल मुद्रास्फीति और चालू खाता घाटे पर दबाव बढ़ा सकता है, क्योंकि देश अपनी तेल जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है।

    ब्रेंट क्रूड वायदा 2.2 प्रतिशत बढ़कर 106.6 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया, जबकि अमेरिकी डब्ल्यूटीआई क्रूड 1.45 प्रतिशत बढ़कर 93.76 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। तेल की कीमतों में तेजी और मुद्रास्फीति की बढ़ती चिंता के बीच बॉन्ड बाजार में भी बिकवाली फिर से शुरू हुई, जिसका असर भारतीय शेयर बाजार की धारणा पर पड़ा।

  • बोइंग 737 मैक्स में सॉफ्टवेयर खामी से सुरक्षा पर असर नहीं, अकासा एयर ने यात्रियों को लेकर स्थिति साफ की

    बोइंग 737 मैक्स में सॉफ्टवेयर खामी से सुरक्षा पर असर नहीं, अकासा एयर ने यात्रियों को लेकर स्थिति साफ की

    नई दिल्ली। बोइंग 737 मैक्स विमानों में सामने आई सॉफ्टवेयर समस्या को लेकर अकासा एयर ने स्पष्ट किया है कि इससे उसके परिचालन की सुरक्षा पर कोई असर नहीं पड़ा है। एयरलाइन ने कहा कि वह इस मामले को लेकर बोइंग के साथ लगातार संपर्क में है और उसके विमान सभी निर्धारित प्रक्रियाओं तथा लागू नियामकीय आवश्यकताओं के अनुसार सुरक्षित तरीके से उड़ान भर रहे हैं।

    यह मामला बोइंग की ओर से 737 मैक्स विमान संचालकों को दी गई जानकारी के बाद सामने आया है। विमान निर्माता ने एक ऐसी स्थिति की पहचान की है, जिसमें लैंडिंग के एक विशेष चरण के दौरान सॉफ्टवेयर से जुड़ी समस्या के कारण पायलट ऑटोमेटेड फ्लाइट गाइडेंस सुविधा का इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे।

    बोइंग ने इस संबंध में दुनिया भर में 737 मैक्स विमानों का संचालन करने वाले ऑपरेटरों को पहले ही जानकारी उपलब्ध करा दी है। कंपनी का कहना है कि मौजूदा पायलट प्रक्रियाएं ऐसी स्थिति से सुरक्षित तरीके से निपटने के लिए पर्याप्त हैं। साथ ही समस्या का स्थायी समाधान तैयार करने के लिए सॉफ्टवेयर अपडेट पर काम किया जा रहा है।

    अकासा एयर ने इस मुद्दे पर यात्रियों और क्रू की सुरक्षा को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि उसके विमान सुरक्षित रूप से परिचालित हो रहे हैं। एयरलाइन के मुताबिक, बोइंग के साथ मिलकर इस मामले पर काम किया जा रहा है और मौजूदा समस्या का उसके परिचालन की सुरक्षा पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा है।

    एयरलाइन ने यह भी कहा कि उसके विमानों का संचालन निर्धारित प्रक्रियाओं और लागू नियमों के अनुरूप किया जा रहा है। यात्रियों और चालक दल की सुरक्षा को उसने अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता बताया है।

    हालांकि, अकासा एयर ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि उसके बेड़े में शामिल किसी विशेष विमान पर इस सॉफ्टवेयर समस्या का सीधा प्रभाव पड़ा है या नहीं। ऐसे में फिलहाल एयरलाइन की ओर से यह जानकारी दी गई है कि उसके परिचालन में सुरक्षा संबंधी कोई जोखिम नहीं है।

    बोइंग के अनुसार, कंपनी ने पिछले महीने ही सभी 737 ऑपरेटरों को इस समस्या की जानकारी दे दी थी। कंपनी ने लैंडिंग के दौरान सामने आ सकने वाली उस विशेष परिस्थिति की पहचान की है, जिसमें पायलटों को ऑटोमेटेड फ्लाइट गाइडेंस उपलब्ध नहीं हो सकता है।

    विमान निर्माता ने कहा है कि स्थायी तकनीकी समाधान उपलब्ध होने तक पायलटों के लिए मौजूदा प्रक्रियाएं ऐसी परिस्थितियों को सुरक्षित ढंग से संभालने में सक्षम हैं। इसके साथ ही ऑपरेटरों के साथ जरूरी जानकारी साझा की गई है, ताकि ऐसी परिस्थितियों से निपटने के लिए मौजूदा प्रक्रियाओं को और मजबूत किया जा सके।

    बोइंग के इंजीनियर इस समस्या को स्थायी रूप से दूर करने के लिए सॉफ्टवेयर अपडेट विकसित कर रहे हैं। अपडेट लागू होने के बाद तकनीकी समस्या का स्थायी समाधान उपलब्ध होने की उम्मीद है।

    अकासा एयर के लिए यह घटनाक्रम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि एयरलाइन अपनी विस्तार योजना के तहत बोइंग 737 मैक्स विमानों का बेड़ा बढ़ाने की तैयारी कर रही है। कंपनी की योजना 200 से अधिक अतिरिक्त 737 मैक्स विमानों का ऑर्डर देने की है।

    फिलहाल एयरलाइन ने अपने मौजूदा परिचालन को सुरक्षित बताया है, जबकि बोइंग की ओर से समस्या के स्थायी समाधान के लिए सॉफ्टवेयर अपडेट तैयार किया जा रहा है। इससे विमान संचालन में पायलट प्रक्रियाओं और तकनीकी सुधार दोनों की भूमिका महत्वपूर्ण बनी हुई है।

  • दिल्ली में त्योहारों से पहले महंगी हो सकती है शराब, नई आबकारी नीति में टैक्स और रिटेल मार्जिन बदलने की तैयारी

    दिल्ली में त्योहारों से पहले महंगी हो सकती है शराब, नई आबकारी नीति में टैक्स और रिटेल मार्जिन बदलने की तैयारी

    नई दिल्ली, 28 सितंबर। राजधानी दिल्ली में आने वाले त्योहारों के दौरान शराब खरीदने वाले लोगों को पहले की तुलना में अधिक कीमत चुकानी पड़ सकती है। दिल्ली सरकार नई आबकारी नीति लागू करने की तैयारी में है। प्रस्तावित नीति के लागू होने के बाद शराब की कीमतों में बढ़ोतरी होने की संभावना जताई जा रही है।

    नई आबकारी नीति का अंतिम मसौदा तैयार होने की जानकारी सामने आई है। आबकारी विभाग में नए कमिश्नर की नियुक्ति के बाद प्रस्ताव को मंजूरी के लिए दिल्ली कैबिनेट और उपराज्यपाल के पास भेजा जाना है। सरकार की कोशिश है कि अक्टूबर में त्योहारों का सीजन तेज होने से पहले नई नीति लागू कर दी जाए।

    नई व्यवस्था में शराब की कीमतों पर असर डालने वाले कई बदलाव प्रस्तावित हैं। इनमें सबसे प्रमुख शराब पर लगने वाली आबकारी ड्यूटी में बढ़ोतरी से जुड़ा है। फिलहाल दिल्ली में शराब की अलग-अलग कैटेगरी और व्होलसेल प्राइस स्लैब के आधार पर 30 प्रतिशत से 300 प्रतिशत तक आबकारी ड्यूटी लगती है।

    अगर ड्यूटी बढ़ाई जाती है तो उसका असर शराब की खुदरा कीमतों पर पड़ सकता है। इसके अलावा रिटेल विक्रेताओं के लिए मौजूदा निश्चित मार्जिन व्यवस्था में बदलाव का प्रस्ताव भी सामने आया है। वर्तमान व्यवस्था में भारतीय निर्मित विदेशी शराब यानी IMFL पर 50 रुपये और विदेशी शराब पर 100 रुपये का निश्चित मार्जिन मिलता है।

    प्रस्तावित व्यवस्था में इस फिक्स मार्जिन को खत्म करने या बदलने की तैयारी है। इसका उद्देश्य शराब के खुदरा कारोबार में कीमत और उपलब्धता से जुड़े मौजूदा ढांचे में बदलाव करना बताया जा रहा है।

    नई आबकारी नीति में प्रीमियम शराब की दुकानों की संख्या बढ़ाने का प्रस्ताव भी शामिल है। मौजूदा व्यवस्था में प्रीमियम स्टोर सीमित संख्या में हैं। इनकी संख्या बढ़ने से महंगी और प्रीमियम श्रेणी की शराब के लिए ग्राहकों को दिल्ली में ही अधिक विकल्प उपलब्ध कराने की कोशिश की जा सकती है।

    होटल, क्लब और रेस्तरां में शराब परोसने के समय को लेकर भी बदलाव की संभावना है। नई नीति में सर्विंग टाइम से जुड़े मौजूदा नियमों में परिवर्तन का प्रस्ताव बताया गया है। हालांकि इन बदलावों का अंतिम स्वरूप नीति को मंजूरी मिलने के बाद स्पष्ट होगा।

    फिक्स रिटेल मार्जिन में बदलाव के पीछे एक प्रमुख कारण महंगी शराब की उपलब्धता से जुड़ी समस्या बताई गई है। मौजूदा व्यवस्था में 1,000 रुपये से अधिक कीमत वाली विदेशी और प्रीमियम शराब रखने में कुछ विक्रेताओं की रुचि कम रहती है। कम मार्जिन के कारण प्रीमियम उत्पादों का स्टॉक सीमित रहने की स्थिति सामने आती है।

    इसका असर यह भी बताया गया है कि दिल्ली के कुछ ग्राहक प्रीमियम शराब खरीदने के लिए आसपास के शहरों का रुख करते हैं। नई व्यवस्था में प्रीमियम स्टोर बढ़ाने और मार्जिन ढांचे में बदलाव के जरिए इस स्थिति को बदलने का प्रयास किया जा सकता है।

    नई आबकारी नीति का एक उद्देश्य दिल्ली के राजस्व को बढ़ाना और शराब बिक्री की मौजूदा व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित करना भी बताया जा रहा है। फिलहाल राजधानी में सरकारी निगमों द्वारा 700 से अधिक शराब की दुकानें संचालित की जा रही हैं।

    नई व्यवस्था में निजी कंपनियों को शराब की खुदरा दुकानों के संचालन में शामिल करने के बजाय सरकारी निगमों के माध्यम से ही दुकानों का संचालन जारी रखने का प्रस्ताव है। इस तरह सरकार मौजूदा सरकारी खुदरा ढांचे को बनाए रखते हुए उसमें आवश्यक बदलाव करने की तैयारी में है।

    दिल्ली की पिछली विवादित आबकारी नीति को जांच के बाद रद्द कर दिया गया था। इसके बाद राजधानी में शराब की खुदरा बिक्री सरकारी निगमों के माध्यम से संचालित व्यवस्था के तहत जारी है। अब प्रस्तावित नई नीति के जरिए कीमत, मार्जिन, प्रीमियम स्टोर और सर्विंग टाइम से जुड़े नियमों में बदलाव किए जाने की तैयारी है।

  • MP में SIR को लेकर कांग्रेस का प्रदर्शन, CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और स्वतंत्र जांच की मांग पर भोपाल में बढ़ा तनाव

    MP में SIR को लेकर कांग्रेस का प्रदर्शन, CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और स्वतंत्र जांच की मांग पर भोपाल में बढ़ा तनाव


    मध्य प्रदेश: में विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर कांग्रेस का विरोध प्रदर्शन सोमवार को राजधानी भोपाल में तेज हो गया। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी के नेतृत्व में पार्टी कार्यकर्ताओं ने अरेरा हिल्स स्थित चुनाव आयोग के कार्यालय की ओर मार्च किया। कांग्रेस ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे के साथ मामले की स्वतंत्र जांच और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग उठाई।

    प्रदर्शन को देखते हुए भोपाल में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई। चुनाव आयोग के कार्यालय तक प्रदर्शनकारियों को पहुंचने से रोकने के लिए पुलिस ने कई स्थानों पर बैरिकेड लगाए और बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया। प्रदर्शन से पहले कांग्रेस नेताओं ने पार्टी कार्यालय के सामने सभा भी की। इसमें वरिष्ठ नेताओं के साथ कई विधायक और प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से पहुंचे पदाधिकारी तथा कार्यकर्ता शामिल हुए।

    कांग्रेस का यह आंदोलन SIR के तहत मतदाता सूची में हुए बदलावों को लेकर है। पार्टी की ओर से आरोप लगाया जा रहा है कि मध्य प्रदेश की अंतिम मतदाता सूची से 34 लाख 25 हजार 78 मतदाताओं के नाम हटा दिए गए। कांग्रेस इन बदलावों को लेकर चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और जिम्मेदारी तय किए जाने की मांग कर रही है।

    विरोध के बीच मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के साथ चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर भी राजनीतिक विवाद बढ़ा हुआ है। हाल में सामने आई जानकारी के मुताबिक चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में आयोग के कुछ फैसलों और प्रक्रियाओं पर 14 बार आपत्तियां दर्ज की थीं। इन मामलों में नए मतदाताओं के पंजीकरण, मतदाता सूची से नाम हटाने और बहाल करने तथा मतदाता डेटा से जुड़े विषय शामिल थे।

    इन घटनाक्रमों के बाद विपक्षी दलों की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ सवाल उठाए गए और उनके इस्तीफे की मांग तेज हुई। कांग्रेस ने भी इसी मुद्दे को लेकर भोपाल में अपना प्रदर्शन आयोजित किया और स्वतंत्र जांच की मांग सामने रखी।

    हालांकि, चुनाव आयोग ने आंतरिक मतभेदों को लेकर सामने आई खबरों पर अपना पक्ष स्पष्ट किया है। आयोग की ओर से कहा गया कि चुनाव आयुक्तों द्वारा किसी विषय पर व्यक्तिगत टिप्पणी, सुझाव या आपत्ति दर्ज करना निर्णय में असहमति के समान नहीं है। आयोग के मुताबिक SIR समेत उसके सभी फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी और सर्वसम्मति से लिए गए हैं।

    इस पूरे विवाद पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कांग्रेस पर पलटवार किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को सुप्रीम कोर्ट, लोकतंत्र और चुनाव आयोग पर भरोसा नहीं है। मुख्यमंत्री ने संवैधानिक संस्थाओं को लेकर कांग्रेस के रुख पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस तरह के आरोप संस्थाओं की विश्वसनीयता से जुड़े गंभीर प्रश्न खड़े करते हैं।

    भोपाल में कांग्रेस के प्रदर्शन के दौरान पार्टी ने SIR से जुड़े अपने सवालों को प्रमुखता से उठाया। कांग्रेस का कहना है कि मतदाता सूची में बदलाव की प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए और जिन अधिकारियों पर जिम्मेदारी बनती है, उनके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।

    इस बीच चुनाव आयोग की ओर से SIR और अन्य फैसलों को सर्वसम्मति से लिए जाने की बात कही गई है। ऐसे में मध्य प्रदेश में SIR को लेकर कांग्रेस के आरोप और सरकार का जवाब आमने-सामने हैं, जबकि भोपाल में हुआ प्रदर्शन इस राजनीतिक विवाद के और तेज होने का संकेत देता है।

  • भोपाल में विश्व फार्मासिस्ट दिवस पर छात्रों ने दवा सुरक्षा और जिम्मेदार उपयोग का संदेश दिया, क्विज से जागरूकता रैली तक हुए आयोजन

    भोपाल में विश्व फार्मासिस्ट दिवस पर छात्रों ने दवा सुरक्षा और जिम्मेदार उपयोग का संदेश दिया, क्विज से जागरूकता रैली तक हुए आयोजन

    मध्य प्रदेश, 28 सितंबर। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में विश्व फार्मासिस्ट दिवस 2026 के अवसर पर फार्मेसी विद्यार्थियों ने विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से सुरक्षित और जिम्मेदार दवा उपयोग का संदेश दिया। भोपाल स्थित एक विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ फार्मास्यूटिकल साइंसेज द्वारा आयोजित कार्यक्रम में विद्यार्थियों और शिक्षकों ने सक्रिय सहभागिता की।

    कार्यक्रम का आयोजन शारदा सभागार में किया गया। इस वर्ष विश्व फार्मासिस्ट दिवस की थीम “Empowering Pharmacists for Healthier Futures” रखी गई। आयोजन का मुख्य उद्देश्य दवाओं के सुरक्षित और जिम्मेदार इस्तेमाल, मरीजों को उचित परामर्श, दवा सुरक्षा तथा जनस्वास्थ्य जागरूकता में फार्मासिस्ट की भूमिका को सामने लाना रहा।

    कार्यक्रम के दौरान विश्वविद्यालय के कुलाधिपति डॉ. सिद्धार्थ चतुर्वेदी ने फार्मासिस्टों की भूमिका को स्वास्थ्य सेवाओं के लिए महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि दवाओं के सुरक्षित और जिम्मेदार उपयोग को सुनिश्चित करने के साथ स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने में फार्मासिस्टों की अहम भूमिका होती है।उन्होंने विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, व्यावहारिक अनुभव और आवश्यक कौशल उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता भी जताई। उनका कहना था कि इन क्षमताओं के जरिए विद्यार्थी जिम्मेदार स्वास्थ्य पेशेवर बनकर समाज के विकास में योगदान दे सकते हैं।

    विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. विजय सिंह ने कहा कि विश्व फार्मासिस्ट दिवस स्वास्थ्य सेवाओं और जनकल्याण में फार्मासिस्टों के योगदान को पहचानने का अवसर देता है। उन्होंने शैक्षणिक और सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों को विद्यार्थियों के व्यावसायिक ज्ञान, संवाद कौशल, आत्मविश्वास और सामाजिक जिम्मेदारी को विकसित करने वाला माध्यम बताया। कुलसचिव डॉ. साईटेश कुमार सिन्हा ने विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी को फार्मेसी के प्रति उनके उत्साह, रचनात्मकता और प्रतिबद्धता से जोड़ा। उन्होंने कहा कि फार्मेसी जागरूकता रैली जैसी गतिविधियों से विद्यार्थियों को अपने शैक्षणिक ज्ञान को समाज के प्रति जिम्मेदारी के साथ जोड़ने का अवसर मिलता है।

    इस अवसर पर स्कूल ऑफ फार्मास्यूटिकल साइंसेज की प्राचार्य डॉ. खुशी चौकसे ने विद्यार्थियों को अपने व्यावसायिक ज्ञान और संवाद कौशल को लगातार मजबूत करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने मरीजों और समाज के प्रति फार्मेसी पेशेवरों की जिम्मेदारी को भी महत्वपूर्ण बताया।विश्व फार्मासिस्ट दिवस के तहत विद्यार्थियों के लिए फार्मेसी क्विज, रंगोली प्रतियोगिता, फार्मेसी डांस एक्ट और फार्मेसी अवेयरनेस रैली का आयोजन किया गया। इन गतिविधियों में विद्यार्थियों ने अपनी ज्ञान क्षमता, रचनात्मकता, टीमवर्क और पेशेवर भावना का प्रदर्शन किया।

    जागरूकता रैली के जरिए लोगों को दवाओं के तर्कसंगत और जिम्मेदार उपयोग का संदेश दिया गया। विद्यार्थियों की गतिविधियों का उद्देश्य फार्मेसी शिक्षा को जनस्वास्थ्य से जोड़ते हुए दवा इस्तेमाल के प्रति जागरूकता बढ़ाना रहा।कार्यक्रम में डीन एकेडमिक्स डॉ. वी. के. गुप्ता, डीन स्टूडेंट्स वेलफेयर डॉ. विनोद कुमार शर्मा, स्कूल ऑफ फार्मास्यूटिकल साइंसेज की प्राचार्य डॉ. खुशी चौकसे सहित शिक्षक और विद्यार्थी मौजूद रहे।

    कार्यक्रम के दौरान विश्वविद्यालय के पदाधिकारियों ने विद्यार्थियों और शिक्षकों की सक्रिय सहभागिता की सराहना की। साथ ही उन्हें स्वास्थ्य सेवाओं और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझते हुए आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया गया।आयोजन का संचालन स्कूल ऑफ फार्मास्यूटिकल साइंसेज के शिक्षकों और विद्यार्थियों के सहयोग से किया गया। कार्यक्रम में शैक्षणिक गतिविधियों के साथ जागरूकता और रचनात्मक कार्यक्रमों को जोड़कर फार्मासिस्टों की सामाजिक और स्वास्थ्य संबंधी भूमिका को रेखांकित किया गया।

  • CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर कांग्रेस का देशभर में प्रदर्शन, भोपाल से दिल्ली और पटना तक बढ़ा विरोध

    CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर कांग्रेस का देशभर में प्रदर्शन, भोपाल से दिल्ली और पटना तक बढ़ा विरोध

    नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कांग्रेस और विपक्षी कार्यकर्ताओं का विरोध प्रदर्शन सोमवार को कई राज्यों में देखने को मिला। मध्य प्रदेश, दिल्ली, बिहार, राजस्थान, झारखंड और हिमाचल प्रदेश सहित विभिन्न स्थानों पर कार्यकर्ताओं ने सड़कों पर उतरकर उनके इस्तीफे की मांग की। प्रदर्शन के दौरान कई जगह पुलिस ने बैरिकेडिंग कर भीड़ को रोकने की कोशिश की, जबकि पटना में प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया गया।

    विरोध प्रदर्शन का केंद्र मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की कार्यप्रणाली को लेकर विपक्ष की ओर से लगाए जा रहे आरोप रहे। विपक्षी दलों का कहना है कि निर्वाचन आयोग में महत्वपूर्ण फैसलों को लेकर असहमति सामने आई है और मुख्य चुनाव आयुक्त अन्य चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों को पर्याप्त महत्व नहीं दे रहे हैं। इसी मुद्दे को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने अलग-अलग राज्यों में विरोध दर्ज कराया।

    मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों को चुनाव आयोग के कार्यालय तक पहुंचने से रोकने के लिए पुलिस प्रशासन ने बड़ी संख्या में बल तैनात किया और कई स्थानों पर बैरिकेड लगाए। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने बैरिकेड पार करने की कोशिश की। कुछ प्रदर्शनकारी बैरिकेड के ऊपर से कूदकर आगे बढ़ने का प्रयास करते दिखाई दिए, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की।

    मध्य प्रदेश विधानसभा में विपक्ष के नेता उमंग सिंघार ने प्रदर्शन के दौरान ज्ञानेश कुमार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ लगाए जा रहे आरोपों को लेकर देश में चिंता है और लोकतांत्रिक व्यवस्था की रक्षा के लिए कांग्रेस सड़कों पर उतर रही है। उन्होंने युवाओं, किसानों और नागरिकों के अधिकारों का मुद्दा उठाते हुए कहा कि कांग्रेस संविधान की रक्षा के लिए राहुल गांधी के साथ खड़ी है।

    बिहार की राजधानी पटना में भी मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हुआ। यहां वामपंथी दलों के कार्यकर्ता प्रदर्शन कर रहे थे, जिन्हें नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया। प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर नारेबाजी की और निर्वाचन प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर अपना विरोध दर्ज कराया।

    पटना में बिहार यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज के मेडिकल छात्रों का प्रदर्शन भी जारी था। छात्र अपनी अलग मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। इस दौरान शहर में अलग-अलग स्थानों पर विरोध प्रदर्शन के कारण पुलिस और प्रशासन को सुरक्षा व्यवस्था संभालनी पड़ी।

    नई दिल्ली में भारतीय युवा कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने भी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी करते हुए अपना विरोध दर्ज कराया और इस्तीफे की मांग उठाई। प्रदर्शन को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई और पुलिस ने प्रदर्शनकारियों की गतिविधियों पर निगरानी रखी।

    हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला में भी कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं ने निर्वाचन प्रक्रिया और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली से जुड़े मुद्दों को लेकर अपना विरोध जताया।

    इस तरह अलग-अलग राज्यों में हुए प्रदर्शनों के जरिए कांग्रेस और विपक्षी कार्यकर्ताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को प्रमुखता से उठाया। वहीं, पुलिस और प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों को संवेदनशील स्थानों तक पहुंचने से रोकने के लिए बैरिकेडिंग और अन्य सुरक्षा इंतजाम किए।

  • उज्जैन में सिंहस्थ-2028 की तैयारी के बीच शाही मस्जिद का हिस्सा हटाया जा रहा, कलेक्टर और शहर काजी ने अफवाहों से बचने की अपील की

    उज्जैन में सिंहस्थ-2028 की तैयारी के बीच शाही मस्जिद का हिस्सा हटाया जा रहा, कलेक्टर और शहर काजी ने अफवाहों से बचने की अपील की

    मध्य प्रदेश 28 सितंबर। मध्य प्रदेश के उज्जैन में सिंहस्थ-2028 की तैयारियों के बीच छत्री चौक स्थित शाही मस्जिद का एक हिस्सा समुदाय द्वारा स्वत: हटाया जा रहा है। उज्जैन प्रशासन के अनुसार, सिंहस्थ की व्यवस्थाओं के लिए मास्टर प्लान के तहत मार्गों के चौड़ीकरण का काम चल रहा है और इसमें सभी समुदायों की भागीदारी सामने आ रही है।

    सिंहस्थ-2028 के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के उज्जैन पहुंचने की संभावना है। इसे देखते हुए शहर में विभिन्न विकास और निर्माण कार्य किए जा रहे हैं। प्रशासन के अनुसार, इन कार्यों के तहत ऐसे मकान और धर्मस्थल जो प्रस्तावित मार्गों के बीच आ रहे हैं, उन्हें संबंधित लोग स्वयं हटाने के लिए आगे आ रहे हैं।

    इसी क्रम में छत्री चौक स्थित शाही मस्जिद के एक हिस्से को भी समुदाय द्वारा स्वत: हटाया जा रहा है। इस संबंध में उज्जैन कलेक्टर रोशन सिंह ने लोगों से किसी भी तरह की अफवाह पर ध्यान नहीं देने की अपील की है।

    उन्होंने कहा कि वर्ष 2028 में सिंहस्थ महाकुंभ का आयोजन होना है और बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं को ध्यान में रखते हुए निर्माण कार्य किए जा रहे हैं। मास्टर प्लान के अनुसार मार्गों का चौड़ीकरण किया जा रहा है और इसमें अलग-अलग धर्म एवं समुदाय के लोग अपना सहयोग दे रहे हैं।

    कलेक्टर के अनुसार, जिन लोगों के मकान या धर्मस्थल विकास कार्यों के बीच आ रहे हैं, वे स्वयं आगे आकर उन्हें हटाने में सहयोग कर रहे हैं। इसी प्रक्रिया के तहत छत्री चौक पर शाही मस्जिद का हिस्सा भी समुदाय द्वारा स्वत: हटाया जा रहा है।

    प्रशासन ने इस मामले को लेकर लोगों से शांति व्यवस्था बनाए रखने की अपील की है। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी तरह की अफवाहों से बचना जरूरी है, ताकि विकास कार्यों के बीच शहर में किसी प्रकार की अनावश्यक स्थिति उत्पन्न न हो।

    उज्जैन शहर काजी खली कुर्रे रहमान ने भी लोगों से अफवाहों पर ध्यान नहीं देने की अपील की है। उन्होंने कहा कि मस्जिद से जुड़ा मामला रात में ही आपसी सहमति से सुलझ गया था। उनके अनुसार, ऐसी कोई स्थिति नहीं है जिसके कारण किसी व्यक्ति को मौके पर जाने की आवश्यकता हो।

    शहर काजी ने कहा कि जिस कार्य को पूरा करने का संकल्प लिया गया है, उसे पूरा किया जा रहा है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अफवाहों के कारण घर से बाहर निकलकर अनावश्यक रूप से मौके पर न जाएं।

    सिंहस्थ-2028 को लेकर उज्जैन में सड़क, मार्ग और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं से जुड़े काम लगातार आगे बढ़ाए जा रहे हैं। प्रशासन का कहना है कि इन विकास कार्यों में लोगों का सहयोग महत्वपूर्ण है। छत्री चौक पर शाही मस्जिद के हिस्से को हटाने की प्रक्रिया भी इसी क्रम में बताई गई है।

    मामले को लेकर प्रशासन और शहर काजी दोनों ने लोगों से संयम बनाए रखने और किसी भी अपुष्ट जानकारी पर भरोसा न करने की अपील की है। साथ ही लोगों से कहा गया है कि वे अनावश्यक रूप से मौके पर पहुंचने के बजाय शांति व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग करें।

  • भारत के IPO बाजार में तेजी, 3.86 लाख करोड़ रुपये की पाइपलाइन से कंपनियों के बढ़ते पूंजी जुटाने के रुझान का संकेत

    भारत के IPO बाजार में तेजी, 3.86 लाख करोड़ रुपये की पाइपलाइन से कंपनियों के बढ़ते पूंजी जुटाने के रुझान का संकेत

    नई दिल्ली, 28 सितंबर। भारत का प्राइमरी मार्केट अब कंपनियों के लिए पूंजी जुटाने के एक नियमित और महत्वपूर्ण माध्यम के रूप में मजबूत होता जा रहा है। देश में मेनबोर्ड आईपीओ की पाइपलाइन करीब 3.86 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। यह राशि 2026 में अब तक 84 मेनबोर्ड आईपीओ के जरिए जुटाए गए 1.10 लाख करोड़ रुपये की तुलना में करीब साढ़े तीन गुना अधिक है।

    इस पाइपलाइन में करीब 130 कंपनियां ऐसी हैं जिन्हें बाजार नियामक से मंजूरी मिल चुकी है। इसके अलावा लगभग 75 कंपनियों ने ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस यानी डीआरएचपी दाखिल किया है और वे नियामकीय मंजूरी की प्रतीक्षा कर रही हैं।

    इतनी बड़ी पाइपलाइन से संकेत मिलता है कि कंपनियां सार्वजनिक बाजारों के माध्यम से पूंजी जुटाने में लगातार रुचि दिखा रही हैं। इससे भारतीय प्राइमरी मार्केट के आकार, गहराई और भविष्य में पूंजी उपलब्ध कराने की क्षमता का भी पता चलता है।

    संस्थागत निवेशकों, उच्च निवल मूल्य वाले निवेशकों और खुदरा निवेशकों की बढ़ती भागीदारी ने भी इस बाजार के विस्तार में भूमिका निभाई है। इससे प्राइमरी मार्केट का इस्तेमाल केवल तत्काल फंड जुटाने के बजाय लंबे समय के पूंजी निर्माण के माध्यम के रूप में बढ़ रहा है।

    आंकड़ों के अनुसार, 2016 से 2026 के बीच मेनबोर्ड आईपीओ के जरिए कंपनियों ने कुल 8.36 लाख करोड़ रुपये जुटाए हैं। वर्ष 2016 में यह राशि 26,494 करोड़ रुपये थी, जो 2025 में बढ़कर 1.76 लाख करोड़ रुपये हो गई।

    मेनबोर्ड आईपीओ की संख्या में भी इसी अवधि में उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिली। वर्ष 2016 में देश में 26 मेनबोर्ड आईपीओ आए थे। 2025 में इनकी संख्या बढ़कर 103 हो गई, जबकि 2026 में अब तक 84 मेनबोर्ड आईपीओ बाजार में आ चुके हैं।

    भारतीय पूंजी बाजार में घरेलू निवेश की भूमिका भी लगातार बढ़ी है। बाजार की मजबूती अब केवल विदेशी पूंजी पर निर्भर नहीं है। म्यूचुअल फंड उद्योग के विस्तार के साथ सार्वजनिक इक्विटी, निजी पूंजी और ऋण बाजार के बीच भी बेहतर जुड़ाव विकसित हुआ है।

    आगे की दिशा में यह महत्वपूर्ण होगा कि सार्वजनिक बाजार से जुटाई गई पूंजी का इस्तेमाल कारोबारी विस्तार, नई उत्पादन क्षमता, बुनियादी ढांचे और अन्य दीर्घकालिक उत्पादक निवेश में किस तरह किया जाता है।

    SME IPO बाजार में भी गतिविधियां तेज हुई हैं। वर्ष 2025 में 267 SME आईपीओ आए, जो उस वर्ष का सबसे बड़ा वार्षिक आंकड़ा रहा। वहीं 2026 में अब तक 156 SME इश्यू बाजार में आ चुके हैं।

    2016 से 2026 के बीच SME कंपनियों ने आईपीओ के माध्यम से कुल 39,849 करोड़ रुपये जुटाए हैं। इसी अवधि में औसत SME इश्यू का आकार भी बढ़ा है। वर्ष 2016 में यह करीब 8 करोड़ रुपये था, जो 2026 में बढ़कर 45 करोड़ रुपये हो गया।

    पब्लिक मार्केट गतिविधियों में बढ़ोतरी का असर निवेश बैंकिंग क्षेत्र पर भी दिखाई दिया है। सितंबर 2016 में देश में 188 मर्चेंट बैंकर पंजीकृत थे। सितंबर 2026 तक यह संख्या बढ़कर 250 हो गई, जो करीब 33 प्रतिशत की वृद्धि है।

    भारतीय प्राइमरी मार्केट के अगले चरण में केवल आईपीओ की संख्या बढ़ना ही महत्वपूर्ण नहीं होगा। सूचीबद्ध होने वाली कंपनियों की गुणवत्ता, संस्थागत निवेशकों की भागीदारी, बेहतर खुलासे, पूंजी का व्यापक वितरण और कारोबार के अलग-अलग चरणों में कंपनियों को समर्थन देने की क्षमता भी बाजार के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

  • सोने और चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट, शुरुआती कारोबार में चांदी 2.34 प्रतिशत और सोना 1.80 प्रतिशत तक टूटा

    सोने और चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट, शुरुआती कारोबार में चांदी 2.34 प्रतिशत और सोना 1.80 प्रतिशत तक टूटा

    नई दिल्ली । सोने और चांदी की कीमतों में सोमवार, 28 सितंबर को गिरावट देखने को मिली। घरेलू वायदा बाजार में शुरुआती कारोबार के दौरान दोनों कीमती धातुओं के भाव में कमजोरी दर्ज की गई। कारोबार के शुरुआती दौर में सोना करीब 1.80 प्रतिशत और चांदी 2.34 प्रतिशत तक टूट गई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी दोनों धातुओं की कीमतों में गिरावट रही।

    मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर सोने का 5 अक्टूबर 2026 का वायदा कॉन्ट्रैक्ट पिछले कारोबारी सत्र में 1,50,881 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था। सोमवार को यह 1,50,100 रुपये प्रति 10 ग्राम पर खुला। इसके बाद कीमत में और गिरावट दर्ज की गई।

    सुबह 9:50 बजे सोने का वायदा भाव 2,721 रुपये यानी 1.80 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 1,48,160 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा था। कारोबारी सत्र के दौरान सोने ने 1,47,667 रुपये प्रति 10 ग्राम का न्यूनतम स्तर छुआ। वहीं, इसका उच्चतम स्तर 1,50,100 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया।

    सोने की तरह चांदी के भाव में भी गिरावट दर्ज की गई। एमसीएक्स पर चांदी का 4 दिसंबर 2026 का वायदा कॉन्ट्रैक्ट पिछले कारोबारी सत्र में 2,34,696 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुआ था। सोमवार को यह 2,32,300 रुपये प्रति किलोग्राम पर खुला।

    सुबह 9:50 बजे चांदी 5,490 रुपये यानी 2.34 प्रतिशत की गिरावट के साथ 2,29,206 रुपये प्रति किलोग्राम पर कारोबार कर रही थी। कारोबार के दौरान चांदी का न्यूनतम भाव 2,28,035 रुपये प्रति किलोग्राम और उच्चतम भाव 2,32,300 रुपये प्रति किलोग्राम रहा।

    घरेलू बाजार के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने और चांदी की कीमतों में कमजोरी देखी गई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना 2.09 प्रतिशत गिरकर 4,230 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रहा था। वहीं, चांदी की कीमत 3.67 प्रतिशत की गिरावट के साथ 62.43 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई।

    बाजार के जानकारों के मुताबिक, कीमती धातुओं की कीमतों में गिरावट के पीछे अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ओर से ब्याज दरें बढ़ाए जाने की आशंका और डॉलर इंडेक्स में लगातार तेजी को प्रमुख वजह माना जा रहा है। डॉलर इंडेक्स बढ़कर 100.83 पर पहुंच गया है। डॉलर में मजबूती का असर सोने और चांदी की अंतरराष्ट्रीय कीमतों पर भी देखने को मिल रहा है।

    डॉलर इंडेक्स के जरिए दुनिया की छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की स्थिति को मापा जाता है। इसमें यूरो, जापानी येन, पाउंड स्टर्लिंग, कनाडाई डॉलर, स्वीडिश क्रोना और स्विस फ्रैंक शामिल हैं। इन मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की मजबूती या कमजोरी को दर्शाने वाला यह सूचकांक वैश्विक बाजार में डॉलर की स्थिति का संकेत देता है।

    सोमवार के शुरुआती कारोबार में घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों बाजारों में सोने तथा चांदी की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। हालांकि, दिए गए कारोबारी आंकड़े सुबह 9:50 बजे तक के हैं और पूरे दिन के अंतिम भाव इनमें शामिल नहीं हैं।