Author: bharati

  • देश की सबसे लंबी वाटर टनल 98% पूरी, विंध्य में नर्मदा जल पहुंचाने का सपना अंतिम चरण में

    देश की सबसे लंबी वाटर टनल 98% पूरी, विंध्य में नर्मदा जल पहुंचाने का सपना अंतिम चरण में

    मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश के लिए एक ऐतिहासिक जल परियोजना अपने अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। विंध्य क्षेत्र तक नर्मदा जल पहुंचाने की 17 साल पुरानी महत्वाकांक्षी योजना अब लगभग पूरी होने वाली है। कटनी जिले के स्लीमनाबाद में बन रही 11.95 किलोमीटर लंबी देश की सबसे बड़ी वाटर टनल अब 98 प्रतिशत तक तैयार हो चुकी है, और केवल 108 मीटर की खुदाई बाकी रह गई है।

    इस परियोजना के पूरा होने के बाद बरगी बांध से पानी पहली बार सीधे रीवा, सतना, मैहर और पन्ना जिलों तक पहुंचेगा, जिससे करीब 1.85 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि सिंचित होने की उम्मीद है। इसके साथ ही कटनी जिले को पीने के पानी की बड़ी राहत भी मिलेगी।

    यह महत्वाकांक्षी परियोजना पिछले 17 वर्षों से कई तकनीकी और प्राकृतिक चुनौतियों से जूझती रही है। कभी खुदाई के दौरान चट्टानी परतें और बड़े बोल्डर सामने आए, तो कभी मशीनों ने काम करना बंद कर दिया। कई बार मीथेन गैस के रिसाव और भूजल के तेज प्रवाह ने काम को रोक दिया।

    परियोजना के दौरान करोड़ों रुपये के टनल कटर भी बदलने पड़े, और करीब 100 करोड़ रुपये की अमेरिकी मशीन भी इस कठिन भूगर्भीय स्थिति में सफल नहीं हो सकी। कुल मिलाकर यह परियोजना भारत की सबसे जटिल जल सुरंग परियोजनाओं में गिनी जा रही है।

    फिलहाल अंतिम चरण में एक जर्मन टनल बोरिंग मशीन (TBM) लगातार 100 मीटर से ज्यादा हिस्से की खुदाई कर रही है। यह मशीन सुरंग को अंतिम आकार देने का काम भी कर रही है। अत्यधिक तापमान और नमी के कारण यहां काम करने वाले तकनीशियन केवल सीमित समय तक ही कार्य कर पा रहे हैं, और उनकी लगातार मेडिकल मॉनिटरिंग की जा रही है।

    सुरंग के भीतर काम की स्थिति बेहद चुनौतीपूर्ण है। अंदर करीब तीन फीट पानी के बीच लोको ट्रेन केवल 3–4 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल पाती है। हर दिन हजारों लीटर भूजल को निकालने के लिए पांच डीवाटरिंग स्टेशन लगातार काम कर रहे हैं।

    टनल का व्यास 10.14 मीटर है, जो किसी तीन मंजिला इमारत की ऊंचाई के बराबर है। सुरक्षा के लिए M-50 ग्रेड सीमेंट से बने भारी कंक्रीट रिंग्स का उपयोग किया गया है, जिनका वजन लगभग 1420 किलो है।

    जल संसाधन विभाग के अधिकारियों के अनुसार यह परियोजना 30 जून 2026 तक पूरी होने की संभावना है। इसके बाद विंध्य क्षेत्र में कृषि उत्पादन और जल उपलब्धता में बड़ा बदलाव आने की उम्मीद जताई जा रही है।

  • राज्यसभा चुनाव में बीजेपी के फैसले से बदले सियासी समीकरण, 93 वर्षीय एचडी देवेगौड़ा के संसदीय भविष्य पर गहराए सवाल

    राज्यसभा चुनाव में बीजेपी के फैसले से बदले सियासी समीकरण, 93 वर्षीय एचडी देवेगौड़ा के संसदीय भविष्य पर गहराए सवाल

    नई दिल्ली । कर्नाटक से होने वाले राज्यसभा चुनावों ने देश की राजनीति में एक महत्वपूर्ण चर्चा को जन्म दे दिया है। भारतीय जनता पार्टी द्वारा राज्यसभा के लिए अपने उम्मीदवार की घोषणा के बाद पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा के संसदीय भविष्य को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। 93 वर्षीय देवेगौड़ा वर्तमान में संसद के सबसे वरिष्ठ सदस्य हैं और उनका कार्यकाल इसी महीने समाप्त होने जा रहा है।

    भाजपा ने कर्नाटक से राज्यसभा चुनाव के लिए प्रो. डॉ. एम. नागराजा को अपना उम्मीदवार बनाया है। इस निर्णय के बाद यह लगभग स्पष्ट माना जा रहा है कि जनता दल (सेकुलर) के संरक्षक और पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा को इस बार पुनः राज्यसभा भेजे जाने की संभावना बेहद सीमित रह गई है। राजनीतिक गलियारों में लंबे समय से यह चर्चा चल रही थी कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के भीतर सहयोगी दल होने के नाते जेडीएस को एक सीट मिल सकती है, लेकिन भाजपा के ताजा कदम ने इन संभावनाओं को काफी हद तक समाप्त कर दिया है।

    कर्नाटक की मौजूदा राजनीतिक स्थिति भी इस समीकरण को प्रभावित कर रही है। राज्य विधानसभा में कांग्रेस के पास स्पष्ट बहुमत है, जिसके कारण राज्यसभा की चार सीटों में से तीन सीटों पर उसकी जीत लगभग सुनिश्चित मानी जा रही है। विपक्षी दलों के लिए केवल एक सीट पर सफलता की संभावना दिखाई दे रही है। ऐसे में भाजपा ने अपने संगठनात्मक और राजनीतिक हितों को ध्यान में रखते हुए अपना उम्मीदवार मैदान में उतारने का फैसला किया है।

    एचडी देवेगौड़ा भारतीय राजनीति के उन चुनिंदा नेताओं में शामिल हैं जिन्होंने कई दशकों तक सक्रिय भूमिका निभाई है। वह देश के प्रधानमंत्री भी रह चुके हैं और कर्नाटक की राजनीति में उनका प्रभाव लंबे समय तक बना रहा। संसद और लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को लेकर अक्सर राजनीतिक दलों के बीच सम्मानजनक सहमति दिखाई देती रही है। हालांकि बदलते राजनीतिक समीकरण और संख्या बल की वास्तविकताएं इस बार उनके पक्ष में नहीं दिखाई दे रही हैं।

    राज्यसभा चुनावों के साथ-साथ विभिन्न राज्यों में विधान परिषद और अन्य राजनीतिक नियुक्तियों को लेकर भी दलों के बीच रणनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। कांग्रेस ने कर्नाटक से अपने वरिष्ठ नेताओं को उम्मीदवार बनाया है, जिससे यह संकेत मिलता है कि पार्टी राज्यसभा में अपनी ताकत और बढ़ाने के लिए पूरी तैयारी के साथ मैदान में उतरी है। विधानसभा में मौजूद संख्यात्मक बढ़त उसके लिए सबसे बड़ा राजनीतिक आधार बन रही है।

    उधर मध्य प्रदेश में भी राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां बढ़ी हुई हैं। भाजपा और कांग्रेस दोनों ने अपने-अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कुछ सीटों पर क्रॉस वोटिंग और दलगत रणनीतियां चुनावी परिणामों को रोचक बना सकती हैं। हालांकि कुल संख्या बल को देखते हुए प्रमुख दलों की स्थिति काफी हद तक स्पष्ट मानी जा रही है।

    कर्नाटक के राज्यसभा चुनाव का महत्व इसलिए भी बढ़ गया है क्योंकि यह केवल सीटों की लड़ाई नहीं बल्कि गठबंधन राजनीति और भविष्य की रणनीतियों का भी संकेत माना जा रहा है। एचडी देवेगौड़ा का संसदीय कार्यकाल समाप्त होने की संभावना के साथ भारतीय राजनीति का एक लंबा अध्याय नए मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि अनुभवी नेता राष्ट्रीय राजनीति में किस भूमिका में सक्रिय बने रहते हैं, लेकिन फिलहाल राज्यसभा में उनके अगले कार्यकाल की राह बेहद कठिन नजर आ रही है।

  • राहुल गांधी, ममता बनर्जी और अखिलेश यादव समेत 23 दलों के नेता एक मंच पर, इंडिया ब्लॉक की बैठक में कई मुद्दों पर चर्चा

    राहुल गांधी, ममता बनर्जी और अखिलेश यादव समेत 23 दलों के नेता एक मंच पर, इंडिया ब्लॉक की बैठक में कई मुद्दों पर चर्चा


    नई दिल्ली ।
    राष्ट्रीय राजनीति में विपक्षी एकजुटता को मजबूत करने के उद्देश्य से इंडिया ब्लॉक की महत्वपूर्ण बैठक सोमवार को राजधानी दिल्ली में शुरू हुई। कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में आयोजित इस बैठक में देश के विभिन्न हिस्सों से आए 23 राजनीतिक दलों के नेताओं ने भाग लिया। आगामी राजनीतिक चुनौतियों, संसद और राष्ट्रीय मुद्दों पर साझा रणनीति तैयार करने के उद्देश्य से बुलाई गई यह बैठक विपक्षी गठबंधन के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

    बैठक में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के साथ कई प्रमुख विपक्षी दलों के शीर्ष नेता मौजूद रहे। कांग्रेस नेता राहुल गांधी और सोनिया गांधी ने बैठक में भाग लिया, जबकि तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी, समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव और राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव भी चर्चा का हिस्सा बने। इसके अलावा कई अन्य सहयोगी दलों के प्रतिनिधि भी बैठक में शामिल हुए।

    विपक्षी नेताओं की इस बैठक का मुख्य उद्देश्य विभिन्न राष्ट्रीय और राजनीतिक मुद्दों पर साझा दृष्टिकोण विकसित करना बताया जा रहा है। गठबंधन के घटक दल केंद्र सरकार की नीतियों, संसद के भीतर और बाहर विपक्ष की भूमिका तथा आगामी राजनीतिक कार्यक्रमों को लेकर विचार-विमर्श कर रहे हैं। माना जा रहा है कि बैठक में विपक्षी दलों के बीच बेहतर समन्वय और संयुक्त अभियान को लेकर भी चर्चा हो सकती है।

    बैठक में राज्यसभा सदस्य कपिल सिब्बल और तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता डेरेक ओ’ब्रायन भी मौजूद रहे। वहीं शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के प्रमुख उद्धव ठाकरे ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक में हिस्सा लिया। नेताओं की मौजूदगी को विपक्षी गठबंधन की सक्रियता और राजनीतिक एकजुटता के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

    हालांकि बैठक में कुछ प्रमुख दलों की अनुपस्थिति भी चर्चा का विषय बनी रही। तमिलनाडु की सत्तारूढ़ पार्टी डीएमके के प्रमुख एमके स्टालिन इस बैठक में शामिल नहीं हुए। इसी तरह आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल भी बैठक से दूर रहे। दोनों दलों की ओर से पहले ही अपनी अनुपस्थिति के कारण स्पष्ट किए जा चुके थे।

    इसके अलावा अभिनेता और राजनेता थलपति विजय की पार्टी भी इस बैठक का हिस्सा नहीं बनी। राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा रही कि पार्टी को बैठक के लिए आमंत्रित नहीं किया गया था। हालांकि बैठक का केंद्रबिंदु उन दलों के बीच समन्वय को मजबूत करना रहा जो पहले से इंडिया ब्लॉक का हिस्सा हैं।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों में विपक्षी दलों के लिए साझा रणनीति और बेहतर तालमेल बेहद महत्वपूर्ण है। विभिन्न राज्यों में अलग-अलग राजनीतिक समीकरण होने के बावजूद राष्ट्रीय स्तर पर एकजुटता बनाए रखना इंडिया ब्लॉक के लिए बड़ी चुनौती और अवसर दोनों माना जा रहा है।

    बैठक के दौरान नेताओं के बीच संगठनात्मक मजबूती, जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों और लोकतांत्रिक संस्थाओं से संबंधित विषयों पर भी चर्चा होने की संभावना है। विपक्षी दलों का प्रयास है कि राष्ट्रीय स्तर पर एक प्रभावी और समन्वित राजनीतिक संदेश तैयार किया जाए, जिससे गठबंधन की एकजुटता और मजबूत दिखाई दे।

    इंडिया ब्लॉक की यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब देश की राजनीति में विभिन्न मुद्दों को लेकर बहस तेज है। ऐसे में इस बैठक से निकलने वाले निर्णय और संदेश आने वाले समय में विपक्ष की राजनीतिक दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

  • ईरान-इजरायल तनाव पर पूर्व सुरक्षा अधिकारी का बड़ा दावा, कहा- युद्ध बढ़ा तो दुनिया दो धड़ों में बंट सकती है

    ईरान-इजरायल तनाव पर पूर्व सुरक्षा अधिकारी का बड़ा दावा, कहा- युद्ध बढ़ा तो दुनिया दो धड़ों में बंट सकती है

    नई दिल्ली । पश्चिम एशिया में ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंताओं को एक बार फिर बढ़ा दिया है। दोनों देशों के बीच हाल के हमलों और जवाबी कार्रवाइयों के बाद क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति को लेकर गंभीर चर्चाएं शुरू हो गई हैं। इसी बीच पूर्व सुरक्षा अधिकारी और पूर्व एनएसजी कमांडो लकी बिष्ट के कुछ बयानों ने भू-राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है।

    लकी बिष्ट ने दावा किया है कि वर्तमान संघर्ष भविष्य में और अधिक व्यापक रूप ले सकता है। उनके अनुसार यदि क्षेत्रीय तनाव लगातार बढ़ता रहा तो इसमें अन्य वैश्विक शक्तियों की प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष भागीदारी भी देखने को मिल सकती है। उन्होंने यह आशंका भी व्यक्त की कि दुनिया की प्रमुख शक्तियां अलग-अलग पक्षों में खड़ी हो सकती हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय तनाव और बढ़ सकता है।

    हालांकि अंतरराष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के दावे फिलहाल विश्लेषण और व्यक्तिगत आकलन की श्रेणी में आते हैं। किसी संभावित युद्ध, सैन्य गठबंधन की भागीदारी या भविष्य की सैन्य कार्रवाई को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए ऐसे दावों को स्थापित तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

    पश्चिम एशिया में हालिया घटनाक्रमों ने निश्चित रूप से वैश्विक चिंता बढ़ाई है। ईरान और इजरायल के बीच मिसाइल हमलों और जवाबी कार्रवाई के बाद कई देशों ने अपने नागरिकों के लिए यात्रा संबंधी एडवाइजरी जारी की हैं। ऊर्जा आपूर्ति, समुद्री व्यापार मार्गों और क्षेत्रीय स्थिरता पर भी इन घटनाओं का प्रभाव पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि वर्तमान स्थिति का सबसे बड़ा असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, शेयर बाजारों में अस्थिरता और निवेशकों की बढ़ती चिंता पहले से दिखाई देने लगी है। यदि संघर्ष लंबा खिंचता है तो इसका असर दुनिया के कई देशों की आर्थिक गतिविधियों पर पड़ सकता है।

    चीन और ताइवान को लेकर भी समय-समय पर विभिन्न अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों द्वारा संभावित तनाव की आशंकाएं व्यक्त की जाती रही हैं। हालांकि मौजूदा समय में किसी बड़े सैन्य संघर्ष की आधिकारिक घोषणा या पुष्टि नहीं हुई है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय लगातार संवाद और कूटनीतिक प्रयासों के माध्यम से क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने की कोशिश कर रहा है।

    इस बीच कई वैश्विक नेता संयम बरतने और बातचीत के रास्ते को प्राथमिकता देने की अपील कर रहे हैं। विभिन्न देशों की सरकारें स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और संभावित जोखिमों का आकलन कर रही हैं। अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने भी तनाव कम करने और संघर्ष को व्यापक रूप लेने से रोकने पर जोर दिया है।

    भू-राजनीतिक मामलों के जानकारों का मानना है कि वर्तमान समय में सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकता तथ्यों और आधिकारिक सूचनाओं पर आधारित विश्लेषण की है। युद्ध और वैश्विक संघर्षों को लेकर सामने आने वाले दावों और अनुमानों के बीच सत्यापित जानकारी को प्राथमिकता देना जरूरी है, ताकि अनावश्यक भ्रम और आशंकाओं से बचा जा सके।

    पश्चिम एशिया की स्थिति फिलहाल अंतरराष्ट्रीय राजनीति का सबसे महत्वपूर्ण विषय बनी हुई है। आने वाले दिनों में क्षेत्रीय घटनाक्रम, कूटनीतिक प्रयास और वैश्विक शक्तियों की प्रतिक्रियाएं यह तय करेंगी कि हालात किस दिशा में आगे बढ़ते हैं। फिलहाल दुनिया की नजरें इसी क्षेत्र पर टिकी हुई हैं।

  • जबलपुर में बड़ा खुलासा: नाम बदलकर ठगी, रेप और ब्लैकमेलिंग करने वाला शातिर आरोपी बेंगलुरु से गिरफ्तार

    जबलपुर में बड़ा खुलासा: नाम बदलकर ठगी, रेप और ब्लैकमेलिंग करने वाला शातिर आरोपी बेंगलुरु से गिरफ्तार


    मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश के जबलपुर में पुलिस ने एक बेहद शातिर और धोखाधड़ी के तरीके से अपराध करने वाले आरोपी को गिरफ्तार किया है, जो देश के कई राज्यों में युवतियों को अपना शिकार बना चुका था। आरोपी को बेंगलुरु से पकड़ा गया और अब उसे ट्रांजिट रिमांड पर जबलपुर लाकर पूछताछ की जा रही है।

    पुलिस के अनुसार, आरोपी कभी “आदित्य”, कभी “दिव्यांशु” तो कभी “पंकज” बनकर सोशल मीडिया और मैट्रिमोनियल साइट्स के जरिए युवतियों से संपर्क करता था। वह खुद को बिजनेसमैन बताकर शादी का झांसा देता, भरोसा जीतता और फिर निजी मुलाकात के बहाने होटल में बुलाकर शारीरिक संबंध बनाता था।

    इसके बाद वह युवतियों के निजी फोटो और वीडियो बनाकर उन्हें ब्लैकमेल करता और पैसों की मांग करता था। जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी के पहचान दस्तावेजों—आधार कार्ड, पैन कार्ड और ड्राइविंग लाइसेंस—में अलग-अलग नाम दर्ज थे, जिससे उसकी असली पहचान को लेकर भ्रम बना हुआ था।

    पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी बिहार का रहने वाला है, हालांकि वह खुद को अलग-अलग नामों से पेश करता था और फिलहाल उसका असली नाम ओमप्रकाश बताया जा रहा है। पुलिस को शक है कि उसने मध्य प्रदेश सहित कई राज्यों में इसी तरह की वारदातों को अंजाम दिया है।

    मामले की शुरुआत तब हुई जब 20 मार्च 2026 को महिला थाना जबलपुर में एक युवती ने शिकायत दर्ज कराई। पीड़िता के अनुसार, उसकी पहचान शादी डॉट कॉम पर एक युवक से हुई थी, जिसने खुद को “आदित्य सिंह” और बिजनेसमैन बताया था।

    शिकायत में कहा गया कि आरोपी ने 14 मार्च को जबलपुर आकर एक होटल में मिलने के बहाने उसे बुलाया और शादी का झांसा देकर दुष्कर्म किया। इसके बाद उसने निजी फोटो और वीडियो के जरिए ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया।

    पीड़िता का आरोप है कि आरोपी लगातार अलग-अलग नामों से संपर्क करता रहा और धमकी देकर पैसे मांगता रहा। बाद में जब पीड़िता ने परिवार को जानकारी दी, तो मामला पुलिस तक पहुंचा।

    जांच के दौरान तकनीकी साक्ष्यों और लोकेशन ट्रैकिंग के आधार पर पुलिस आरोपी तक पहुंची। बाद में पता चला कि वह बेंगलुरु में रह रहा है, जहां से उसे गिरफ्तार किया गया।

    पुलिस के अनुसार, यह भी सामने आया है कि आरोपी पहले भी 2022 के एक मामले में इसी तरह की वारदात कर चुका है, जिसमें वह फर्जी पहचान का इस्तेमाल करता था।

    इस पूरे मामले ने साइबर अपराध और ऑनलाइन रिश्तों के जरिए होने वाली ठगी को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस अब आरोपी से पूछताछ कर उसके नेटवर्क और अन्य पीड़ितों की जानकारी जुटा रही है।

  • जबलपुर के इंद्रा मार्केट में 2 सांडों की भिड़ंत से मचा हड़कंप, आधे घंटे ठप रहा ट्रैफिक

    जबलपुर के इंद्रा मार्केट में 2 सांडों की भिड़ंत से मचा हड़कंप, आधे घंटे ठप रहा ट्रैफिक


    मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश के जबलपुर में रविवार शाम उस समय हड़कंप मच गया जब इंद्रा मार्केट क्षेत्र में दो आवारा सांड आपस में भिड़ गए। यह घटना सिविल लाइन और एसपी ऑफिस के बीच सड़क पर हुई, जहां दोनों सांडों के बीच सींग से सींग भिड़ाकर करीब आधे घंटे तक जोरदार संघर्ष चलता रहा।

    इस दौरान सड़क पर यातायात पूरी तरह से ठप हो गया और वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। लोग अपनी जान जोखिम में डालकर किसी तरह वहां से निकलते नजर आए। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।

    प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, सांडों की लड़ाई इतनी उग्र थी कि आसपास खड़े वाहन और राहगीर भी असहज हो गए। इसी दौरान एक स्कूटी सवार हल्की टक्कर की चपेट में आ गया और उसकी गाड़ी सड़क पर गिर गई, हालांकि वह बाल-बाल बच गया।

    स्थिति को नियंत्रित करने के लिए स्थानीय लोगों ने पानी डालकर और लाठी की मदद से दोनों सांडों को अलग करने की कोशिश की, लेकिन काफी देर तक वे नहीं माने। करीब आधे घंटे बाद थककर दोनों सांड अलग-अलग दिशा में चले गए, तब जाकर यातायात सामान्य हो सका।

    इस घटना ने एक बार फिर शहर में आवारा मवेशियों की समस्या को उजागर कर दिया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि नगर निगम जबलपुर की लापरवाही के कारण ऐसे हालात बार-बार बन रहे हैं।

    स्थानीय नागरिकों का कहना है कि क्षेत्र में आवारा मवेशियों की समस्या लंबे समय से बनी हुई है, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही। गोहलपुर, रसल चौक, इंद्रा मार्केट और गोकलपुर रोड जैसे इलाकों में रात के समय स्थिति और भी गंभीर हो जाती है, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा लगातार बना रहता है।

    लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि शहर में आवारा पशुओं को नियंत्रित करने के लिए सख्त और स्थायी व्यवस्था की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं से आम जनता को परेशानी न झेलनी पड़े।

  • क्षेत्रीय तनाव के बीच भारतीय दूतावास का बड़ा निर्देश, ईरान में रह रहे नागरिकों से तत्काल सुरक्षित वापसी का आग्रह

    क्षेत्रीय तनाव के बीच भारतीय दूतावास का बड़ा निर्देश, ईरान में रह रहे नागरिकों से तत्काल सुरक्षित वापसी का आग्रह

    नई दिल्ली । पश्चिम एशिया में लगातार बिगड़ते सुरक्षा हालात और क्षेत्रीय तनाव के बीच भारत सरकार ने ईरान में रह रहे भारतीय नागरिकों के लिए एक नई एडवाइजरी जारी की है। भारतीय दूतावास ने नागरिकों से सतर्क रहने का आग्रह करते हुए स्पष्ट रूप से कहा है कि जो भारतीय अभी ईरान में मौजूद हैं, वे उपलब्ध परिवहन साधनों का उपयोग कर जल्द से जल्द वहां से निकलने की व्यवस्था करें। साथ ही भारत से ईरान की यात्रा करने की योजना बना रहे लोगों को फिलहाल अपनी यात्रा स्थगित करने की सलाह भी दी गई है।

    यह एडवाइजरी ऐसे समय में जारी की गई है जब पश्चिम एशिया के कई हिस्सों में सुरक्षा स्थिति को लेकर चिंताएं लगातार बढ़ रही हैं। क्षेत्र में जारी घटनाक्रमों ने कई देशों को अपने नागरिकों के लिए यात्रा संबंधी चेतावनियां जारी करने के लिए मजबूर किया है। भारत ने भी अपने नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए एहतियाती कदम उठाया है।

    भारतीय दूतावास ने अपने आधिकारिक संदेश में कहा है कि हालिया परिस्थितियों को देखते हुए पहले जारी की गई सलाह को दोहराया जा रहा है। दूतावास ने भारतीय नागरिकों से अपील की है कि वे अनावश्यक यात्रा से बचें और स्थिति सामान्य होने तक ईरान जाने की योजना न बनाएं। इसके अलावा वहां पहले से मौजूद लोगों को स्थानीय परिस्थितियों पर लगातार नजर रखने और आधिकारिक निर्देशों का पालन करने के लिए कहा गया है।

    विदेश मंत्रालय और भारतीय मिशन क्षेत्र की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। अधिकारियों का कहना है कि नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। दूतावास भारतीय समुदाय के साथ संपर्क में है और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त सहायता उपलब्ध कराने की तैयारी भी रखी जा रही है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी अंतरराष्ट्रीय संकट की स्थिति में समय रहते जारी की गई यात्रा सलाह नागरिकों की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। ऐसे मामलों में सरकारें संभावित जोखिमों का आकलन कर अपने नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह देती हैं ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से बचा जा सके।

    ईरान में भारतीय समुदाय का एक हिस्सा व्यापार, शिक्षा, चिकित्सा और अन्य पेशेवर गतिविधियों से जुड़ा हुआ है। ऐसे में एडवाइजरी का उद्देश्य वहां रह रहे लोगों को सुरक्षा संबंधी जोखिमों के प्रति जागरूक करना और आवश्यक सावधानियां अपनाने के लिए प्रेरित करना है। अधिकारियों ने नागरिकों को सलाह दी है कि वे अपने यात्रा दस्तावेज तैयार रखें और स्थानीय प्रशासन तथा भारतीय दूतावास द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें।

    पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर केवल सुरक्षा मामलों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव वैश्विक अर्थव्यवस्था, ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय परिवहन सेवाओं पर भी पड़ रहा है। यही कारण है कि कई देश अपने नागरिकों को सतर्क रहने और प्रभावित क्षेत्रों की यात्रा से बचने की सलाह दे रहे हैं।

    भारत सरकार की यह नई एडवाइजरी दर्शाती है कि क्षेत्रीय परिस्थितियों को गंभीरता से लिया जा रहा है और नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च महत्व दिया जा रहा है। आने वाले दिनों में हालात किस दिशा में जाते हैं, इस पर नजर बनी रहेगी, लेकिन फिलहाल भारतीय नागरिकों को सतर्कता बरतने और आधिकारिक सलाह का पालन करने की आवश्यकता बताई गई है।

  • जबलपुर में भीषण सड़क हादसा: हाईवा ने स्कूटी सवार को कुचला, आग लगी, मौके पर दर्दनाक मौत

    जबलपुर में भीषण सड़क हादसा: हाईवा ने स्कूटी सवार को कुचला, आग लगी, मौके पर दर्दनाक मौत


    मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश के जबलपुर में रविवार देर रात एक दर्दनाक सड़क हादसे ने हर किसी को झकझोर दिया। माढ़ोताल थाना क्षेत्र के खजरी खिरिया बाईपास पर तेज रफ्तार हाईवा ने स्कूटी सवार युवक को कुचल दिया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई।

    जानकारी के अनुसार, रात करीब 2 बजे स्कूटी सवार युवक बायपास से जबलपुर की ओर जा रहा था। इसी दौरान पीछे से आ रहे तेज रफ्तार हाईवा ने उसे जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि स्कूटी वाहन हाईवा के नीचे फंस गई और करीब 50 मीटर तक घिसटती चली गई।

    घर्षण और टकराव के कारण स्कूटी और हाईवा के निचले हिस्से में आग लग गई। आग ने कुछ ही देर में विकराल रूप ले लिया, जिसे बुझाने के लिए फायर ब्रिगेड को मौके पर बुलाना पड़ा। दमकलकर्मियों ने कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया।

    हादसा इतना भयावह था कि सड़क पर मानव शरीर के अवशेष बिखर गए, जिससे मौके पर मौजूद लोगों में दहशत फैल गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, मंजर बेहद दर्दनाक और भयावह था।

    घटना के बाद आसपास मौजूद ट्रक चालकों ने तुरंत पुलिस को सूचना दी और नीचे फंसे वाहन को निकालने का प्रयास किया। सूचना मिलते ही माढ़ोताल थाना पुलिस और हनुमानताल थाना पुलिस की टीम मौके पर पहुंची और हालात का जायजा लिया।

    थाना प्रभारी अपूर्वा चौरसिया ने बताया कि हाईवा को जब्त कर लिया गया है, जबकि चालक मौके से फरार हो गया। उसकी तलाश के लिए पुलिस टीम लगाई गई है। मामले की जांच जारी है।

    इस हादसे ने एक बार फिर तेज रफ्तार और भारी वाहनों की लापरवाही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों ने क्षेत्र में बायपास पर ट्रैफिक नियंत्रण और सुरक्षा उपायों को मजबूत करने की मांग की है।

  • इंदौर में कल से शुरू होगा BRICS देशों का सम्मेलन, 20 देशों के प्रतिनिधि होंगे शामिल

    इंदौर में कल से शुरू होगा BRICS देशों का सम्मेलन, 20 देशों के प्रतिनिधि होंगे शामिल


    नई दिल्ली। मध्य प्रदेश का इंदौर शहर एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय आयोजन का केंद्र बनने जा रहा है। कल यानी 9 जून से यहां ब्रिक्स (BRICS) देशों के कृषि मंत्रियों का अहम सम्मेलन शुरू होगा, जिसमें भारत सहित लगभग 20 देशों के प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे।

    केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि भारत इस वर्ष ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है और इसी क्रम में यह महत्वपूर्ण बैठक इंदौर में आयोजित की जा रही है। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स की शुरुआत 2006 में हुई थी और आज यह समूह 11 सदस्य देशों व 10 साझेदार देशों के साथ वैश्विक स्तर पर बेहद प्रभावशाली बन चुका है।

    शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि दुनिया की लगभग 42 प्रतिशत कृषि भूमि, 68 प्रतिशत कृषि जोतें और करीब 42 प्रतिशत खाद्य उत्पादन ब्रिक्स देशों से जुड़ा है, जिससे यह मंच वैश्विक खाद्य सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाता है।

    भारत इससे पहले 2012, 2016 और 2021 में भी ब्रिक्स की अध्यक्षता कर चुका है। 2016 में भारत ने ब्रिक्स कृषि अनुसंधान मंच जैसी बड़ी पहल शुरू की थी, जिसका उद्देश्य कृषि क्षेत्र में सहयोग और नवाचार को बढ़ावा देना था।

    इस बार इंदौर सम्मेलन को विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि पहली बार ब्रिक्स कृषि मंत्रियों की बैठक मंत्री स्तर पर आयोजित की जा रही है। इसमें सदस्य और साझेदार देशों सहित करीब 20 देशों के प्रतिनिधि शामिल होंगे।

    सम्मेलन में मुख्य रूप से चार प्रमुख विषयों पर फोकस किया जाएगा-खाद्य सुरक्षा एवं पोषण, कृषि व्यापार और सहयोग, जलवायु अनुकूलन एवं सतत कृषि, तथा कृषि और खाद्य प्रणालियों में नवाचार व साझेदारी।

    मंत्री ने कहा कि सरकार की नीति का केंद्र हमेशा छोटे और सीमांत किसान रहे हैं। उनके अनुसार, किसानों की आय बढ़ाना, कृषि ऋण तक आसान पहुंच सुनिश्चित करना और कृषि अनुसंधान का लाभ सीधे किसानों तक पहुंचाना प्राथमिक लक्ष्य है।

    कार्यक्रम के दौरान 9 से 11 जून तक कृषि कार्य समूह की बैठकें होंगी, जबकि 12 से 13 जून को कृषि मंत्रियों की मुख्य बैठक आयोजित की जाएगी। इसी दौरान “लघु किसानों, महिलाओं एवं युवाओं के माध्यम से भविष्य की खाद्य सुरक्षा” विषय पर विशेष चर्चा भी होगी।

    पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए इस सम्मेलन में “ब्रिक्स वाटिका” का निर्माण और सामूहिक वृक्षारोपण भी किया जाएगा। साथ ही विदेशी प्रतिनिधियों को इंदौर के प्रसिद्ध स्थलों जैसे राजवाड़ा, छप्पन दुकान और मांडू का भ्रमण भी कराया जाएगा, ताकि वे भारत की सांस्कृतिक विरासत से परिचित हो सकें।

    सरकार का मानना है कि इंदौर में होने वाला यह सम्मेलन वैश्विक कृषि सहयोग को नई दिशा देगा और छोटे किसानों के हितों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर मजबूती से स्थापित करेगा।

  • कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और वैश्विक बिकवाली से शेयर बाजार दबाव में, खुलते ही सेंसेक्स-निफ्टी लुढ़के

    कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और वैश्विक बिकवाली से शेयर बाजार दबाव में, खुलते ही सेंसेक्स-निफ्टी लुढ़के

    नई दिल्ली । सप्ताह के पहले कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार में कमजोर शुरुआत देखने को मिली। वैश्विक स्तर पर बढ़ती अनिश्चितताओं, वेस्ट एशिया में गहराते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल के बीच निवेशकों की धारणा प्रभावित हुई, जिसका असर घरेलू बाजारों पर भी साफ दिखाई दिया। सोमवार सुबह कारोबार शुरू होते ही प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी दबाव में आ गए और शुरुआती सत्र में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई।

    बाजार विशेषज्ञों के अनुसार अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों ने निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता को प्रभावित किया है। वेस्ट एशिया में जारी तनाव ने ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं, जिसके चलते वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखी जा रही है। भारत जैसे आयात-निर्भर देशों के लिए तेल कीमतों में वृद्धि आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जाती है, क्योंकि इसका असर महंगाई, व्यापार घाटे और कॉर्पोरेट लागत पर पड़ सकता है।

    कारोबार की शुरुआत में बीएसई सेंसेक्स में तेज गिरावट दर्ज की गई और यह सैकड़ों अंकों की कमजोरी के साथ नीचे फिसल गया। इसी तरह एनएसई निफ्टी भी शुरुआती सत्र में दबाव में दिखाई दिया। बाजार में व्यापक बिकवाली के चलते निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया और कई प्रमुख कंपनियों के शेयर लाल निशान में कारोबार करते नजर आए।

    सेंसेक्स की प्रमुख कंपनियों में ऑटोमोबाइल, आईटी, एविएशन और वित्तीय क्षेत्र से जुड़ी कई बड़ी कंपनियों के शेयरों पर दबाव देखने को मिला। निवेशकों की बिकवाली के कारण इन क्षेत्रों में कमजोरी दर्ज की गई। दूसरी ओर कुछ चुनिंदा बैंकिंग और फार्मा शेयरों ने बाजार को सीमित समर्थन देने का प्रयास किया, लेकिन व्यापक गिरावट के सामने यह समर्थन पर्याप्त नहीं रहा।

    भारतीय बाजार पर वैश्विक संकेतों का प्रभाव भी स्पष्ट रूप से दिखाई दिया। एशिया के प्रमुख शेयर बाजारों में भी कमजोरी का माहौल बना रहा। जापान, दक्षिण कोरिया, चीन और हांगकांग के बाजार गिरावट के साथ कारोबार करते नजर आए। इससे यह संकेत मिला कि निवेशक फिलहाल जोखिम वाली परिसंपत्तियों से दूरी बनाकर सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं।

    अमेरिकी बाजारों में पिछले कारोबारी सत्र के दौरान आई कमजोरी का असर भी भारतीय बाजार पर पड़ा। वैश्विक निवेशक भू-राजनीतिक घटनाक्रम और ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी को लेकर चिंतित दिखाई दे रहे हैं। यही कारण है कि दुनिया भर के बाजारों में अस्थिरता का माहौल बना हुआ है।

    विदेशी संस्थागत निवेशकों की गतिविधियां भी बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। हाल के कारोबारी सत्रों में विदेशी निवेशकों की ओर से लगातार बिकवाली देखी गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच विदेशी पूंजी का सुरक्षित बाजारों की ओर जाना उभरते बाजारों पर दबाव बढ़ा सकता है।

    आर्थिक जानकारों का कहना है कि आने वाले दिनों में बाजार की चाल काफी हद तक वेस्ट एशिया की स्थिति, कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी निवेशकों के रुख पर निर्भर करेगी। यदि वैश्विक तनाव में कमी आती है तो बाजार में स्थिरता लौट सकती है, लेकिन फिलहाल निवेशकों को सतर्कता बरतने और दीर्घकालिक दृष्टिकोण बनाए रखने की सलाह दी जा रही है।

    भारतीय शेयर बाजार ने पिछले कुछ समय में मजबूत प्रदर्शन किया है, लेकिन वर्तमान वैश्विक परिस्थितियां निवेशकों के लिए नई चुनौतियां लेकर आई हैं। ऐसे में बाजार प्रतिभागियों की नजर अब अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम और आर्थिक संकेतकों पर टिकी हुई है, जो आगे की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।