Author: bharati

  • कंगना रनौत के बयान पर झांसी में महिला कांग्रेस का प्रदर्शन, उठाई माफी की मांग

    कंगना रनौत के बयान पर झांसी में महिला कांग्रेस का प्रदर्शन, उठाई माफी की मांग

    झांसी। जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्र-छात्राओं को लेकर भाजपा सांसद कंगना रनौत की कथित टिप्पणी के विरोध में गुरुवार को झांसी में महिला कांग्रेस ने कचहरी चौराहा पर प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी करते हुए सांसद से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की।

    महिला कांग्रेस की शहर अध्यक्ष आसिया सिद्दीकी ने आरोप लगाया कि भाजपा विरोध और असहमति की आवाज को दबाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में प्रत्येक नागरिक को अपनी बात रखने का अधिकार है, लेकिन छात्रों के आंदोलन को अपमानित करने वाली भाषा का इस्तेमाल दुर्भाग्यपूर्ण है।

    कांग्रेस नेताओं ने कहा कि नीट पेपर लीक जैसे मामलों से देशभर के कई छात्र मानसिक रूप से प्रभावित हुए हैं और कुछ ने आत्महत्या जैसा कदम भी उठाया। ऐसे समय में आंदोलनरत छात्रों के संघर्ष का मजाक उड़ाना उनकी भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला है।

    प्रदर्शन के दौरान महिला कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने कंगना रनौत से देश के विद्यार्थियों से सार्वजनिक रूप से क्षमा मांगने की मांग की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सांसद अपने बयान पर माफी नहीं मांगती हैं तो विरोध प्रदर्शन को और व्यापक किया जाएगा। इस मौके पर कार्यकर्ताओं ने भाजपा और केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अपना विरोध दर्ज कराया।

  • फिरोजाबाद में फ्लोराइड का कहर: गर्भ से नवजात तक असर, हर महीने 2 हजार से अधिक बच्चे कुपोषण की चपेट में

    फिरोजाबाद में फ्लोराइड का कहर: गर्भ से नवजात तक असर, हर महीने 2 हजार से अधिक बच्चे कुपोषण की चपेट में


    फिरोजाबाद। फिरोजाबाद जिले में भूजल में बढ़ते फ्लोराइड का असर अब नवजातों के स्वास्थ्य पर भी दिखाई देने लगा है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, फ्लोराइडयुक्त पानी के सेवन से गर्भवती महिलाओं में कैल्शियम की कमी बढ़ रही है, जिससे कम वजन और कुपोषित बच्चों का जन्म हो रहा है। हालात ऐसे हैं कि जिले में हर महीने औसतन दो हजार से अधिक बच्चे कुपोषण का शिकार मिल रहे हैं।

    जिला बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, जुलाई में 2,354 बच्चे कुपोषित और 559 बच्चे अति कुपोषित पाए गए। वहीं जून में यह संख्या क्रमशः 2,542 और 667 दर्ज की गई थी।

    351 गांवों का भूजल फ्लोराइड से प्रभावित
    जल जीवन मिशन के सर्वे के अनुसार, जिले के 790 गांवों में से 351 गांवों के भूजल में फ्लोराइड की मात्रा निर्धारित सीमा से अधिक पाई गई है। कुछ क्षेत्रों में इसकी मात्रा 3 मिलीग्राम प्रति लीटर तक पहुंच गई है, जबकि सुरक्षित सीमा 1 से 1.5 मिलीग्राम प्रति लीटर मानी जाती है। सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में टूंडला, नारखी, हाथवंत, एका और जसराना ब्लॉक शामिल हैं। अगस्त 2023 में 2,500 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली ‘हर घर नल से जल’ योजना शुरू होने के बावजूद अब तक प्रभावित क्षेत्रों को अपेक्षित राहत नहीं मिल सकी है।

    विशेषज्ञ बोले- फ्लोराइड और पोषण की कमी दोनों जिम्मेदार

    शिकोहाबाद संयुक्त चिकित्सालय के पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) के प्रभारी एवं सीएमएस डॉ. रमेश चंद केशव का कहना है कि फ्लोराइडयुक्त पानी गर्भवती महिलाओं के शरीर में कैल्शियम की कमी पैदा करता है, जिससे कमजोर और कम वजन वाले बच्चों का जन्म होता है। उन्होंने बताया कि गर्भावस्था के दौरान संतुलित आहार की कमी और जन्म के बाद उचित पोषण न मिलना भी कुपोषण का बड़ा कारण है। वर्तमान में एनआरसी में सात कुपोषित बच्चों का इलाज चल रहा है।

    इलाज से सुधर रही बच्चों की स्थिति
    हाथवंत की निवासी प्रियंका देवी ने बताया कि उनके क्षेत्र में खारा और फ्लोराइडयुक्त पानी मिलता है। उनके बच्चे का जन्म के समय वजन केवल 1.8 किलोग्राम था, जो उपचार के बाद बढ़कर 3.8 किलोग्राम हो गया है। वहीं शिकोहाबाद की संगीता देवी ने बताया कि उनके छह माह के बेटे का जन्म के समय वजन 1.6 किलोग्राम था, जो अब बढ़कर 3.4 किलोग्राम हो चुका है।

    पुष्टाहार वितरण भी बना चुनौती
    जिला बाल विकास एवं पुष्टाहार अधिकारी केसरी नंदन तिवारी ने बताया कि मेन्यू में बदलाव के कारण उत्पादन प्रभावित होने से पुष्टाहार की आपूर्ति बाधित हुई है। नतीजतन आंगनबाड़ी केंद्रों तक जून और जुलाई का पुष्टाहार नहीं पहुंच सका। जिले में 15,036 गर्भवती महिलाओं और 15,520 धात्री माताओं को इसका लाभ मिलना है।

    जल जीवन मिशन का लक्ष्य 2027
    नमामि गंगे एडीएम मोहनलाल गुप्ता ने बताया कि ‘हर घर नल से जल’ योजना का कार्य दिसंबर 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। बजट मिलने के बाद परियोजना पर काम दोबारा शुरू हो गया है। उन्होंने कहा कि फ्लोराइड प्रभावित गांवों में दोबारा पानी की जांच कराकर प्राथमिकता के आधार पर स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा।

    सुरक्षित फ्लोराइड की सीमा
    विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के अनुसार, पीने के पानी में फ्लोराइड की आदर्श मात्रा 1 मिलीग्राम प्रति लीटर है, जबकि 1.5 मिलीग्राम प्रति लीटर से अधिक फ्लोराइड स्वास्थ्य के लिए हानिकारक माना जाता है। अधिक मात्रा में फ्लोराइड हड्डियों, दांतों, गर्भवती महिलाओं और बच्चों के शारीरिक विकास पर गंभीर असर डाल सकता है।

  • गोरखपुर में खाकी हुई शर्मसार: अस्पताल से 10 वर्षीय बच्ची का अपहरण, दुष्कर्म के बाद की हत्या

    गोरखपुर में खाकी हुई शर्मसार: अस्पताल से 10 वर्षीय बच्ची का अपहरण, दुष्कर्म के बाद की हत्या


    गोरखपुर। उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में पुलिस महकमे को शर्मसार कर देने वाली वारदात सामने आई है। पुलिस की वर्दी पहने एक सिपाही ने जिला अस्पताल से 10 वर्षीय बच्ची का कथित रूप से अपहरण कर उसके साथ दुष्कर्म किया और बाद में हत्या कर शव चिवटहा पुल के नीचे फेंक दिया। पुलिस ने आरोपी सिपाही अभिषेक यादव को गिरफ्तार कर लिया है। मामले में उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करते हुए बर्खास्तगी की संस्तुति भेजी गई है और उस पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) लगाने की तैयारी की जा रही है।

    पुलिस के अनुसार, आजमगढ़ के कप्तानगंज थाना क्षेत्र के गोपालगंज निवासी पीड़ित परिवार पिछले चार वर्षों से गोरखपुर में रह रहा है। बच्ची के पिता ई-रिक्शा चलाते हैं। 27 जुलाई को बड़ी बेटी की तबीयत खराब होने पर उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उसी रात करीब साढ़े आठ बजे 10 वर्षीय बच्ची अपनी बहन के लिए खाना लेकर अस्पताल पहुंची। खाना खिलाने के बाद वह रात करीब नौ बजे घर लौटने के लिए निकली, लेकिन घर नहीं पहुंची।

    परिजनों ने काफी तलाश के बाद कोतवाली थाने में अपहरण की शिकायत दर्ज कराई। जांच के दौरान अस्पताल और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली गई। 39 सेकंड की फुटेज में पुलिस की वर्दी पहने एक युवक बच्ची से बातचीत करता और फिर उसे बाइक पर बैठाकर ले जाता दिखाई दिया। जांच में उसकी पहचान सिपाही अभिषेक यादव के रूप में हुई।

    पुलिस ने आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ की। इसके बाद गुरुवार तड़के चिवटहा पुल के नीचे से बच्ची का शव बरामद किया गया। शव मिलने के बाद मामले में हत्या की धाराएं भी जोड़ दी गईं। पुलिस अब वारदात के पूरे घटनाक्रम और हत्या के कारणों की जांच कर रही है।

    एसएसपी डॉ. कौस्तुभ ने बताया कि प्रारंभिक जांच में स्पष्ट हुआ है कि बच्ची को दुर्भावनापूर्ण तरीके से अगवा किया गया था। आरोपी सिपाही अभिषेक यादव को गिरफ्तार कर लिया गया है। उसके खिलाफ एनएसए की कार्रवाई की जाएगी और सेवा से बर्खास्त करने की रिपोर्ट भी भेज दी गई है।

    पांच बहनों में दूसरे नंबर पर थी मासूम
    परिजनों ने बताया कि बच्ची पांच बहनों में दूसरे नंबर की थी। उसकी मां नौ माह की गर्भवती है। बड़ी बहन के अस्पताल में भर्ती होने के कारण वह उसके लिए खाना लेकर गई थी। घर लौटते समय आरोपी सिपाही के संपर्क में आने के बाद वह लापता हो गई, जिसके बाद यह दर्दनाक वारदात सामने आई।

  • कांवड़ यात्रा के चलते मुरादाबाद में आज रात से लागू होगा डायवर्जन, दिल्ली-लखनऊ समेत कई रूटों पर बदलेगा ट्रैफिक

    कांवड़ यात्रा के चलते मुरादाबाद में आज रात से लागू होगा डायवर्जन, दिल्ली-लखनऊ समेत कई रूटों पर बदलेगा ट्रैफिक

    मुरादाबाद। कांवड़ यात्रा को देखते हुए मुरादाबाद में गुरुवार रात से दिल्ली रोड पर भारी वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित कर दिया जाएगा। इसके साथ ही प्रशासन की ओर से विस्तृत डायवर्जन योजना लागू होगी। फिलहाल छोटे और चार पहिया वाहनों का आवागमन जारी रहेगा, लेकिन कांवड़ियों की संख्या बढ़ने पर इनके लिए भी वैकल्पिक मार्ग लागू किए जा सकते हैं।

    पुलिस अधीक्षक (यातायात) सुभाष चंद्र गंगवार ने बताया कि डायवर्जन व्यवस्था का सख्ती से पालन कराने के लिए प्रमुख चौराहों और मार्गों पर पुलिस बल तैनात रहेगा। एसपी सिटी कुमार रण विजय सिंह के अनुसार, कांवड़ यात्रा के मद्देनजर हाईवे और कांवड़ मार्ग से जुड़े थाना क्षेत्रों में अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था की गई है।

    इन मार्गों से गुजरेंगे भारी वाहन
    शाहजहांपुर से दिल्ली जाने वाले वाहन बदायूं, बबराला, नरौरा और बुलंदशहर होकर जाएंगे।
    मुरादाबाद से दिल्ली जाने वाले ट्रक और अन्य भारी वाहन संभल, बबराला, नरौरा, बुलंदशहर और हापुड़ के रास्ते भेजे जाएंगे।
    बरेली और रामपुर से दिल्ली जाने वाले वाहन बिलारी, सिरसी, संभल, चौधरी सराय और गंगा एक्सप्रेस-वे के जरिए निकलेंगे।
    मुरादाबाद से मेरठ और दिल्ली की ओर जाने वाले वाहन गांगन तिराहा, मनोटा, सिरसी, संभल, बबराला, नरौरा, डिबाई, बुलंदशहर और हापुड़ मार्ग का उपयोग करेंगे।
    दिल्ली और गाजियाबाद से रामपुर, बरेली व लखनऊ जाने वाले भारी वाहन हापुड़, सिंभावली, डिबाई, नरौरा और बदायूं होकर गुजरेंगे।
    बिजनौर और हरिद्वार की दिशा में जाने वाले वाहनों को काशीपुर तिराहा, ठाकुरद्वारा, जसपुर, अफजलगढ़ और धामपुर मार्ग से भेजा जाएगा, जबकि हल्के वाहन टीएमयू और अगवानपुर मार्ग से संचालित होंगे।

    डीजीपी के सामने पेश होगा कांवड़ यात्रा का प्लान
    गुरुवार को बरेली में डीजीपी कांवड़ यात्रा की तैयारियों की समीक्षा करेंगे। इस बैठक में मुरादाबाद के जिलाधिकारी डॉ. राजेंद्र पैंसिया जिले की ट्रैफिक और सुरक्षा व्यवस्था का विस्तृत प्रेजेंटेशन देंगे। प्रशासन ने कांवड़ियों की सुविधा और सुचारु यातायात बनाए रखने के लिए व्यापक योजना तैयार की है।

    काशीपुर-रामनगर रूट पर आधी बसें चलेंगी
    31 जुलाई से 24 अगस्त तक लागू रहने वाले डायवर्जन के कारण काशीपुर-रामनगर रूट पर बस संचालन भी प्रभावित रहेगा। सामान्य दिनों में जहां 70 बसें चलती हैं, वहीं इस अवधि में केवल 35 बसों का संचालन होगा। यात्रियों की सुविधा के लिए रामपुर दोराहा से हर 30 मिनट पर बस उपलब्ध रहेगी। कांवड़ यात्रा समाप्त होने के बाद 24 अगस्त से सभी बसें पहले की तरह नियमित रूप से संचालित की जाएंगी।

  • जन औषधि योजना के तहत किफायती न्यूट्रास्यूटिकल्स पर सरकार का जोर, कम कीमत में मिल रहे पोषण सप्लीमेंट

    जन औषधि योजना के तहत किफायती न्यूट्रास्यूटिकल्स पर सरकार का जोर, कम कीमत में मिल रहे पोषण सप्लीमेंट

    नई दिल्ली । केंद्र सरकार ने कहा है कि प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना (पीएमबीजेपी) के तहत उपलब्ध न्यूट्रास्यूटिकल उत्पाद देशभर के परिवारों के लिए स्वास्थ्यवर्धक पोषण सप्लीमेंट को अधिक सुलभ और किफायती बना रहे हैं। सरकार के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य आवश्यक पोषण उत्पादों को कम कीमत पर उपलब्ध कराकर आम लोगों के स्वास्थ्य संबंधी खर्च को कम करना और संतुलित पोषण को बढ़ावा देना है।

    सरकार के मुताबिक, जन औषधि केंद्रों पर विभिन्न आयु वर्ग और जरूरतों को ध्यान में रखते हुए कई प्रकार के न्यूट्रास्यूटिकल उत्पाद उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इनमें प्रोटीन बार, इम्यूनिटी बार, महिलाओं के लिए विशेष प्रोटीन सप्लीमेंट, माल्ट आधारित पोषण आहार तथा प्रोटीन पाउडर जैसे उत्पाद शामिल हैं। इन उत्पादों को बच्चों, कामकाजी लोगों, महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों और फिटनेस के प्रति जागरूक उपभोक्ताओं की पोषण आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।

    सरकारी जानकारी के अनुसार, जन औषधि प्रोटीन बार और इम्यूनिटी बार 35 ग्राम के चॉकलेट पैक में उपलब्ध हैं। वहीं महिलाओं के लिए तैयार किए गए विशेष प्रोटीन बूस्ट को चॉकलेट और वनीला फ्लेवर में 250 ग्राम पैक के रूप में उपलब्ध कराया गया है। सरकार का कहना है कि इन उत्पादों का उद्देश्य रोजमर्रा के आहार में अतिरिक्त पोषण उपलब्ध कराना है ताकि विभिन्न वर्गों की पोषण संबंधी जरूरतों को आसानी से पूरा किया जा सके।

    जन औषधि योजना के अंतर्गत पोषण रेंज में माल्ट आधारित न्यूट्रिशनल फूड भी शामिल किया गया है। सरकार के अनुसार, यह उत्पाद आवश्यक विटामिन और खनिजों से समृद्ध है और पूरे परिवार के लिए दैनिक पोषण का एक उपयोगी विकल्प माना जाता है। 500 ग्राम के सामान्य माल्ट पैक के साथ कोको फ्लेवर वाला विकल्प भी उपलब्ध है। इसके अलावा कम मात्रा में खरीदारी करने वाले उपभोक्ताओं के लिए छोटे सैशे पैक भी उपलब्ध कराए गए हैं, जिससे कम बजट वाले परिवारों को भी इन उत्पादों तक आसान पहुंच मिल सके।

    सरकार का कहना है कि विभिन्न पैक आकार उपलब्ध होने से उपभोक्ता अपनी आवश्यकता और आर्थिक क्षमता के अनुसार उत्पाद चुन सकते हैं। इन पोषण उत्पादों को तैयार करना भी आसान है और नियमित उपयोग के लिए उपयुक्त माना गया है। इससे परिवारों को कम लागत में अतिरिक्त पोषण प्राप्त करने का अवसर मिलता है।

    फिटनेस और प्रोटीन की बढ़ती जरूरतों को देखते हुए योजना के तहत 100 प्रतिशत व्हे प्रोटीन पाउडर और जन औषधि प्रोटीन पाउडर भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं। सरकार के अनुसार, ये उत्पाद दैनिक प्रोटीन की आवश्यकता पूरी करने के साथ-साथ मांसपेशियों की रिकवरी में भी सहायक माने जाते हैं। विशेष रूप से व्यायाम करने वाले लोगों और अधिक प्रोटीन की आवश्यकता वाले उपभोक्ताओं के लिए इन्हें उपयोगी विकल्प बताया गया है।

    प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना का मुख्य उद्देश्य गुणवत्तापूर्ण दवाओं और स्वास्थ्य संबंधी उत्पादों को आम नागरिकों तक किफायती दरों पर पहुंचाना है। सरकार का कहना है कि न्यूट्रास्यूटिकल उत्पादों को योजना में शामिल करने से अब लोगों को केवल सस्ती दवाएं ही नहीं, बल्कि कम कीमत पर पोषण संबंधी उत्पाद भी उपलब्ध हो रहे हैं। इससे स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक समावेशी बनाने और पोषण संबंधी जागरूकता बढ़ाने में भी सहायता मिलने की उम्मीद है।

    सरकार का मानना है कि जन औषधि केंद्रों के माध्यम से उपलब्ध इन उत्पादों से परिवारों का स्वास्थ्य व्यय कम करने, संतुलित पोषण को प्रोत्साहित करने और विभिन्न आय वर्ग के लोगों तक आवश्यक पोषण उत्पाद पहुंचाने में मदद मिल रही है। आने वाले समय में भी इस श्रेणी में नए उत्पाद शामिल किए जाने की संभावना पर काम जारी है।

  • कपल्स के लिए परफेक्ट है उदयपुर सिर्फ 10 हजार में घूमिए महल झीलें बाजार और स्वादिष्ट राजस्थानी व्यंजन

    कपल्स के लिए परफेक्ट है उदयपुर सिर्फ 10 हजार में घूमिए महल झीलें बाजार और स्वादिष्ट राजस्थानी व्यंजन


    नई दिल्ली । अगर आप अपने पार्टनर के साथ किसी खूबसूरत और रोमांटिक जगह पर छुट्टियां बिताने का सपना देख रहे हैं लेकिन बजट की चिंता आपको रोक रही है तो उदयपुर आपके लिए शानदार विकल्प साबित हो सकता है। झीलों की नगरी के नाम से मशहूर यह शहर अपनी प्राकृतिक सुंदरता भव्य महलों ऐतिहासिक इमारतों रंगीन बाजारों और राजस्थानी संस्कृति के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है। अच्छी बात यह है कि थोड़ी सी प्लानिंग के साथ एक कपल करीब 10 हजार रुपये के बजट में यहां आरामदायक और यादगार यात्रा कर सकता है।

    कम खर्च में उदयपुर घूमने के लिए अप्रैल से सितंबर का समय सबसे बेहतर माना जाता है। इस दौरान पर्यटकों की भीड़ कम रहती है जिससे होटल और यात्रा दोनों पर अच्छी बचत हो जाती है। अगर पहले से ट्रेन या फ्लाइट की बुकिंग कर ली जाए तो किराया काफी कम हो सकता है। ट्रेन से यात्रा सबसे किफायती विकल्प मानी जाती है जबकि ऑफ सीजन में कई बार सस्ती फ्लाइट भी मिल जाती है।

    रहने के लिए उदयपुर में कई बजट होटल गेस्ट हाउस और होमस्टे उपलब्ध हैं। यहां साफ सुथरे कमरे उचित कीमत पर मिल जाते हैं। कई जगहों पर नाश्ता और मुफ्त वाईफाई जैसी सुविधाएं भी दी जाती हैं। अगर थोड़ा अलग अनुभव चाहते हैं तो छोटे हेरिटेज होटल भी अच्छे विकल्प हो सकते हैं जहां राजस्थानी मेहमाननवाजी का शानदार अनुभव मिलता है।

    उदयपुर का स्वादिष्ट भोजन आपकी यात्रा को और खास बना देता है। यहां दाल बाटी चूरमा गट्टे की सब्जी प्याज कचौरी और पारंपरिक मिठाइयों का स्वाद जरूर लेना चाहिए। स्थानीय ढाबों और रेस्टोरेंट में कम कीमत में भरपेट भोजन मिल जाता है। अगर स्ट्रीट फूड पसंद है तो हाथीपोल बाजार और बड़ा बाजार में कई स्वादिष्ट व्यंजन बेहद किफायती दामों में उपलब्ध हैं।

    शहर घूमने के लिए लोकल बस ऑटो और किराये की स्कूटी सबसे अच्छे विकल्प हैं। स्कूटी लेकर आप अपनी सुविधा के अनुसार पूरे दिन आराम से शहर की खूबसूरत गलियों झीलों और दर्शनीय स्थलों का आनंद ले सकते हैं। इससे समय की बचत भी होती है और खर्च भी कम आता है।

    उदयपुर की यात्रा सिटी पैलेस देखे बिना पूरी नहीं मानी जाती। यह भव्य महल शहर की शान है जहां से पिछोला झील का अद्भुत नजारा दिखाई देता है। शाम के समय यहां का वातावरण और भी आकर्षक हो जाता है। पिछोला झील में बोट राइड का अनुभव कपल्स के लिए बेहद यादगार होता है। सूर्यास्त के समय झील का दृश्य किसी फिल्मी नजारे से कम नहीं लगता। इसके अलावा जगमंदिर फतेह सागर झील सहेलियों की बाड़ी भारतीय लोक कला मंडल और सज्जनगढ़ मानसून पैलेस भी घूमने लायक प्रमुख स्थान हैं।

    अगर आपको खरीदारी का शौक है तो हाथीपोल बाजार बड़ा बाजार चेतक सर्किल और पैलेस रोड जरूर जाएं। यहां राजस्थानी बंधनी साड़ियां मिनिएचर पेंटिंग चांदी के आभूषण हस्तशिल्प और पारंपरिक मोजड़ियां उचित दामों पर मिल जाती हैं। थोड़ा मोलभाव करके आप अच्छी खरीदारी भी कर सकते हैं।

    सही बजट प्लानिंग सस्ते ठहरने के विकल्प लोकल ट्रांसपोर्ट और स्थानीय भोजन का चुनाव करके एक कपल आसानी से दो से तीन दिन की शानदार उदयपुर यात्रा करीब 10 हजार रुपये में पूरी कर सकता है। अगर आप कम खर्च में रॉयल फील और यादगार छुट्टियों का आनंद लेना चाहते हैं तो उदयपुर निश्चित रूप से आपकी ट्रैवल लिस्ट में सबसे ऊपर होना चाहिए।

  • सलमान रुश्दी पर हमले के मामले में बड़ा फैसला, हमलावर आतंकवाद से जुड़े आरोपों में भी दोषी करार

    सलमान रुश्दी पर हमले के मामले में बड़ा फैसला, हमलावर आतंकवाद से जुड़े आरोपों में भी दोषी करार

    नई दिल्ली । बुकर पुरस्कार विजेता लेखक सलमान रुश्दी पर वर्ष 2022 में हुए जानलेवा हमले के मामले में अमेरिकी फेडरल कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत की जूरी ने आरोपी हादी मतर को आतंकवाद से जुड़े आरोपों में दोषी ठहराया है। इससे पहले वह न्यूयॉर्क राज्य की अदालत में हत्या के प्रयास के मामले में भी दोषी करार दिया जा चुका है और वर्तमान में सजा काट रहा है। ताजा फैसले के बाद उस पर अतिरिक्त संघीय सजा का रास्ता भी खुल गया है।

    अभियोजन पक्ष ने अदालत में दलील दी कि हादी मतर ने सलमान रुश्दी पर हमला अकेले नहीं किया, बल्कि वह ईरान से जुड़े एक संगठन के समर्थन और विचारधारा से प्रभावित होकर काम कर रहा था। अभियोजकों ने अदालत के समक्ष ऐसे साक्ष्य प्रस्तुत किए, जिनमें आरोपी की तस्वीरें और वीडियो शामिल थे। इन साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने माना कि आरोपी पर लगाए गए आतंकवाद से संबंधित आरोप साबित होते हैं।

    मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने यह भी कहा कि हमला वर्ष 1989 में जारी उस विवादित फतवे की पृष्ठभूमि से जुड़ा था, जिसमें सलमान रुश्दी के खिलाफ कार्रवाई की अपील की गई थी। यह फतवा उनके उपन्यास ‘सैटेनिक वर्सेज’ को लेकर उत्पन्न विवाद के बाद जारी हुआ था। इसी संदर्भ को अभियोजन ने हमले के संभावित उद्देश्य के रूप में अदालत के सामने रखा।

    दूसरी ओर, बचाव पक्ष ने यह स्वीकार किया कि हादी मतर ने लेखक पर हमला किया था, लेकिन उसने यह दलील दी कि आरोपी ने यह कृत्य किसी संगठन के निर्देश पर नहीं, बल्कि व्यक्तिगत रूप से किया। बचाव पक्ष का कहना था कि मतर अपनी धार्मिक भावनाओं के कारण आक्रोशित था और उसने किसी विदेशी सरकार या संगठन के साथ मिलकर साजिश नहीं रची।

    79 वर्षीय सलमान रुश्दी पर अगस्त 2022 में न्यूयॉर्क राज्य के चौटाक्वा इंस्टीट्यूशन में आयोजित एक साहित्यिक कार्यक्रम के दौरान हमला हुआ था। विडंबना यह थी कि उस समय वह लेखकों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सुरक्षा से जुड़े विषय पर बोलने वाले थे। कार्यक्रम शुरू होने से पहले मंच पर पहुंचे आरोपी ने उन पर कई बार चाकू से हमला किया, जिसमें वह गंभीर रूप से घायल हो गए।

    हमले के कारण सलमान रुश्दी की एक आंख की रोशनी चली गई और उनके हाथ तथा शरीर के अन्य हिस्सों में भी गंभीर चोटें आईं। अदालत में गवाही के दौरान उन्होंने बताया कि हमले के कारण उन्हें स्थायी शारीरिक नुकसान हुआ है और अब वह पहले की तरह सामान्य जीवन नहीं जी सकते। उन्होंने अपने अनुभवों और हमले के बाद के संघर्ष को लेकर एक पुस्तक भी लिखी है, जिसमें उन्होंने पूरे घटनाक्रम का विस्तार से उल्लेख किया है।

    अमेरिकी न्याय व्यवस्था के तहत किसी एक घटना में राज्य और संघीय स्तर पर अलग-अलग कानूनों के आधार पर मुकदमा चलाया जा सकता है। इसी प्रक्रिया के तहत हादी मतर को पहले राज्य अदालत में हत्या के प्रयास के मामले में दोषी ठहराया गया था, जबकि अब संघीय अदालत ने उसे आतंकवाद से जुड़े आरोपों में भी दोषी माना है। इस मामले में नवंबर में सजा सुनाई जानी है और उसे बिना पैरोल के आजीवन कारावास तक की सजा मिल सकती है।

    यह फैसला अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, लेखकों की सुरक्षा और आतंकवाद से जुड़े मामलों में अमेरिकी न्याय प्रणाली की कार्रवाई के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मामले पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी लंबे समय से नजर बनी हुई थी और अब संघीय अदालत के फैसले के बाद इसकी कानूनी प्रक्रिया एक नए चरण में पहुंच गई है।

  • दतिया उपचुनाव में लोकतंत्र का उत्सव मतदान केंद्रों पर उमड़ी भीड़ तकनीकी बाधाओं के बाद भी प्रक्रिया रही सुचारु

    दतिया उपचुनाव में लोकतंत्र का उत्सव मतदान केंद्रों पर उमड़ी भीड़ तकनीकी बाधाओं के बाद भी प्रक्रिया रही सुचारु


    दतिया  दतिया विधानसभा उपचुनाव में गुरुवार को लोकतंत्र का उत्साह पूरे जिले में देखने को मिला। सुबह सात बजे मतदान शुरू होने के साथ ही शहर और ग्रामीण क्षेत्रों के मतदान केंद्रों पर मतदाताओं की लंबी कतारें नजर आईं। दोपहर तक जिले के 291 मतदान केंद्रों पर कुल 32.53 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। निर्वाचन आयोग और जिला प्रशासन ने शांतिपूर्ण तथा निष्पक्ष मतदान के लिए व्यापक इंतजाम किए हैं और सभी केंद्रों पर सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है।

    मतदान शुरू होने से पहले तीन मतदान केंद्रों पर ईवीएम से जुड़े उपकरणों में तकनीकी खराबी सामने आई। मतदान केंद्र क्रमांक 186 पर वीवीपैट क्रमांक 108 पर बैलेटिंग यूनिट और क्रमांक 290 पर कंट्रोल यूनिट में समस्या आई थी। हालांकि मॉक पोल के दौरान सभी राजनीतिक दलों के एजेंटों और कैमरों की मौजूदगी में खराब उपकरणों को तुरंत बदल दिया गया। इसके बाद सभी केंद्रों पर तय समय पर मतदान प्रक्रिया शुरू कर दी गई।

    कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी स्वप्निल वानखेड़े ने बताया कि तकनीकी खराबियों का समय रहते समाधान कर लिया गया था और कहीं भी मतदान प्रभावित नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि सभी मतदान केंद्रों पर मतदान शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से चल रहा है तथा प्रशासन लगातार हर गतिविधि पर नजर बनाए हुए है।

    इस बीच बसई क्षेत्र के लखनपुर गांव में ग्रामीणों ने मुख्य सड़क निर्माण की मांग को लेकर मतदान का बहिष्कार करते हुए सड़क नहीं तो वोट नहीं के नारे लगाए। सूचना मिलने पर एसडीएम अशोक अवस्थी मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों से बातचीत की। प्रशासन की समझाइश के बाद लगभग 50 ग्रामीणों ने मतदान किया और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भागीदारी निभाई।

    कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह ने मतदान के बाद अपनी जीत का दावा करते हुए कहा कि जनता इस बार बदलाव का मन बना चुकी है और भाजपा के अहंकार का जवाब वोट के जरिए देगी। उन्होंने आरोप लगाया कि बसई क्षेत्र के एक मतदान केंद्र पर कांग्रेस के पोलिंग एजेंट को प्रवेश नहीं दिया गया जिसकी शिकायत निर्वाचन अधिकारियों से की गई है।

    वहीं भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी ने मतदान से पहले पीतांबरा पीठ पहुंचकर पूजा अर्चना की और दतिया के विकास युवाओं को रोजगार तथा क्षेत्र में शांति और समृद्धि की कामना की। इसके बाद उन्होंने विभिन्न मतदान केंद्रों का दौरा कर कार्यकर्ताओं और पोलिंग एजेंटों से मुलाकात की। उन्होंने दावा किया कि जनता का भरपूर समर्थन भाजपा के साथ है और पार्टी को बड़ी जीत मिलेगी।

    दतिया विधानसभा क्षेत्र में कुल दो लाख बीस हजार चार सौ मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग कर रहे हैं। मतदान शाम छह बजे तक जारी रहेगा। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मंजीत सिंह चावला सहित वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों ने कई मतदान केंद्रों का निरीक्षण कर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया। निर्वाचन आयोग का कहना है कि मतदान पूरी तरह शांतिपूर्ण और पारदर्शी तरीके से संपन्न कराने के लिए सभी आवश्यक इंतजाम किए गए हैं और मतदाताओं की सुविधा का विशेष ध्यान रखा जा रहा है। लोकतंत्र के इस महत्वपूर्ण पर्व में मतदाताओं की सक्रिय भागीदारी उपचुनाव को और अधिक महत्वपूर्ण बना रही है।

  • PoK में प्रदर्शन, बलूचिस्तान पर भी उठे सवाल; बढ़ते असंतोष के बीच पाकिस्तान की आंतरिक चुनौतियां गहराईं

    PoK में प्रदर्शन, बलूचिस्तान पर भी उठे सवाल; बढ़ते असंतोष के बीच पाकिस्तान की आंतरिक चुनौतियां गहराईं

    नई दिल्ली । पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में जारी विरोध प्रदर्शनों और हिंसा की घटनाओं ने पाकिस्तान की आंतरिक स्थिति को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है। क्षेत्र में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच बढ़ते तनाव के बीच कई लोगों की मौत और बड़ी संख्या में घायल होने के दावे सामने आए हैं। इन घटनाओं के बाद स्थानीय संगठनों ने सुरक्षा बलों की कार्रवाई का विरोध तेज कर दिया है, जबकि राजनीतिक स्तर पर भी सरकार और सेना की भूमिका पर सवाल उठाए जा रहे हैं।

    क्षेत्र में सक्रिय जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) का कहना है कि बुनियादी सुविधाओं, महंगाई, बिजली संकट और नागरिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों को लेकर शुरू हुआ आंदोलन अब व्यापक जन असंतोष का रूप ले चुका है। संगठन का आरोप है कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बल प्रयोग किया गया, जिससे कई लोगों की जान गई। संगठन ने इन घटनाओं की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए आंदोलन जारी रखने की घोषणा की है।

    स्थानीय स्तर पर यह भी दावा किया जा रहा है कि कई स्थानों पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और अतिरिक्त बल तैनात किए गए हैं। इंटरनेट सेवाओं पर प्रतिबंध और आवाजाही पर नियंत्रण जैसे कदमों की भी चर्चा है। दूसरी ओर, पाकिस्तान सरकार की ओर से इन दावों पर अलग रुख सामने आया है और प्रशासन कानून-व्यवस्था बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दे रहा है।

    राजनीतिक स्तर पर भी इन घटनाओं ने बहस को तेज कर दिया है। पाकिस्तान के कुछ नेताओं ने देश की मौजूदा परिस्थितियों पर चिंता व्यक्त करते हुए चेतावनी दी है कि यदि विभिन्न क्षेत्रों की शिकायतों का समाधान नहीं किया गया तो आंतरिक असंतोष और बढ़ सकता है। इन बयानों में बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा जैसे क्षेत्रों का भी उल्लेख किया गया, जहां पहले से सुरक्षा और राजनीतिक चुनौतियां बनी हुई हैं। हालांकि, यह राजनीतिक टिप्पणियां हैं और इन्हें आधिकारिक सरकारी आकलन नहीं माना जा सकता।

    इसी बीच, पाकिस्तान के रक्षा प्रतिष्ठान की नीतियों को लेकर भी विपक्षी नेताओं और कुछ विश्लेषकों ने सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि केवल सुरक्षा उपायों से स्थिति सामान्य नहीं होगी और लोगों की सामाजिक तथा आर्थिक मांगों पर गंभीरता से विचार करना आवश्यक है। वहीं सरकार समर्थक पक्ष का तर्क है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है और किसी भी प्रकार की हिंसा को स्वीकार नहीं किया जा सकता।

    मानवाधिकार से जुड़े मुद्दे भी इस पूरे घटनाक्रम का महत्वपूर्ण पहलू बनकर सामने आए हैं। प्रदर्शनकारियों से जुड़े संगठनों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वतंत्र जांच की मांग की है। वहीं मानवाधिकार संगठनों ने भी नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और बल प्रयोग के आरोपों की निष्पक्ष जांच की आवश्यकता पर जोर दिया है। इन संगठनों का कहना है कि किसी भी विवादित स्थिति में नागरिकों के अधिकारों की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।

    विश्लेषकों का मानना है कि PoK में जारी घटनाक्रम केवल स्थानीय प्रशासनिक चुनौती नहीं है, बल्कि यह पाकिस्तान के सामने मौजूद व्यापक राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक चुनौतियों को भी उजागर करता है। आने वाले दिनों में सरकार की रणनीति, राजनीतिक संवाद और सुरक्षा व्यवस्था की दिशा पर सभी की नजर रहेगी। फिलहाल विभिन्न पक्षों के दावों और आरोपों के बीच स्थिति संवेदनशील बनी हुई है और घटनाक्रम पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।

  • दुनिया को परिवार की तरह स्वागत का न्योता कॉमनवेल्थ गेम्स 2030 के लिए गुजरात ने दिखाई अपनी भव्य तैयारी

    दुनिया को परिवार की तरह स्वागत का न्योता कॉमनवेल्थ गेम्स 2030 के लिए गुजरात ने दिखाई अपनी भव्य तैयारी


    नई दिल्ली। कॉमनवेल्थ गेम्स 2030 की मेजबानी के लिए अहमदाबाद पूरी दुनिया का स्वागत करने की तैयारी में जुटा है। गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने कहा कि यह आयोजन केवल एक अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिता नहीं बल्कि गुजरात और पूरे भारत के युवाओं का साझा सपना है। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले वर्षों में अहमदाबाद विश्व स्तरीय खेल आयोजन की मेजबानी कर भारत की नई पहचान दुनिया के सामने पेश करेगा।

    ग्लासगो में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के दौरान अहमदाबाद एक्सपीरियंस सेंटर के उद्घाटन अवसर पर हर्ष संघवी ने कहा कि इस पहल को खिलाड़ियों खेल अधिकारियों और अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों से शानदार प्रतिक्रिया मिली है। उन्होंने बताया कि 30 जुलाई से 2 अगस्त तक इस सेंटर में पांच हजार से अधिक पंजीकरण हुए हैं और विश्व खेल महासंघों के प्रतिनिधियों सहित कई एथलीट यहां पहुंच रहे हैं। उनके अनुसार यह केवल मेजबानी हासिल करने का अभियान नहीं बल्कि भारत के भविष्य का सपना है जिसे हर युवा अपने साथ जुड़ा हुआ महसूस कर रहा है।

    हर्ष संघवी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खेलों को बढ़ावा देने वाले विजन ने गुजरात में खेल अवसंरचना के विकास को नई दिशा दी है। इसी सोच का परिणाम है कि राज्य ने बेहद कम समय में राष्ट्रीय खेलों का सफल आयोजन कर अपनी क्षमता साबित की। उनका मानना है कि यही अनुभव और मजबूत आधारभूत ढांचा वर्ष 2030 में कॉमनवेल्थ गेम्स के सफल आयोजन की नींव बनेगा।

    उन्होंने गुजरात की सांस्कृतिक विरासत और भारतीय आतिथ्य परंपरा को भी आयोजन की सबसे बड़ी ताकत बताया। उनके अनुसार अहमदाबाद एक्सपीरियंस सेंटर में देश के विभिन्न राज्यों के पारंपरिक व्यंजन और संस्कृति को प्रदर्शित किया गया है जिसे विदेशी मेहमानों ने काफी पसंद किया है। मिठाइयों से लेकर पारंपरिक स्नैक्स और विभिन्न राज्यों के व्यंजनों तक हर स्टॉल पर लोगों की भारी भीड़ देखने को मिली। इससे यह संदेश गया कि भारत केवल खेलों का आयोजन ही नहीं करेगा बल्कि अपनी संस्कृति और मेहमाननवाजी से भी दुनिया का दिल जीतेगा।

    संघवी ने कहा कि भारत की विविधता ही उसकी सबसे बड़ी पहचान है। अलग अलग राज्यों की संस्कृति भोजन और परंपराएं दुनिया के सामने भारत की समृद्ध विरासत को प्रस्तुत करती हैं। यही वजह है कि एक्सपीरियंस सेंटर में आने वाले विदेशी प्रतिनिधि भारतीय संस्कृति को करीब से जानने और अनुभव करने में विशेष रुचि दिखा रहे हैं।

    उन्होंने दुनिया भर के खिलाड़ियों खेल संगठनों और खेल प्रेमियों को संदेश देते हुए कहा कि वर्ष 2030 में भारत आने वाले सभी लोग मेहमान नहीं बल्कि परिवार के सदस्य होंगे। गुजरात और भारत उनका पूरे दिल से स्वागत करेंगे और उन्हें ऐसा अनुभव देंगे जिसे वे हमेशा याद रखेंगे।

    कॉमनवेल्थ गेम्स 2030 की मेजबानी भारत के लिए केवल एक खेल आयोजन नहीं बल्कि वैश्विक स्तर पर अपनी संगठन क्षमता आधुनिक खेल सुविधाओं सांस्कृतिक विरासत और युवा शक्ति को प्रदर्शित करने का सुनहरा अवसर माना जा रहा है। यदि यह आयोजन अहमदाबाद में सफलतापूर्वक संपन्न होता है तो भारत विश्व खेल मानचित्र पर अपनी स्थिति और अधिक मजबूत करने में सफल होगा। साथ ही यह देश के युवाओं को खेलों में आगे बढ़ने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने के लिए नई प्रेरणा भी देगा।