Author: bharati

  • सहेली के साथ रहने की जिद पर युवती से मारपीट, इंदौर में घर में घुसकर हमले का आरोप

    सहेली के साथ रहने की जिद पर युवती से मारपीट, इंदौर में घर में घुसकर हमले का आरोप


    इंदौर । इंदौर के द्वारकापुरी क्षेत्र में दो युवतियों की दोस्ती और साथ रहने की इच्छा ने गंभीर विवाद का रूप ले लिया है। एक युवती ने आरोप लगाया है कि उसकी सहेली के परिजनों ने उसके घर में घुसकर मारपीट की और उसे गंभीर रूप से घायल किया।

    पुलिस के अनुसार, पीड़िता स्वाति की शिकायत पर नितेश, उमेश, कृष्णा और नेहा के खिलाफ घर में घुसकर मारपीट सहित अन्य धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। घटना रविवार देर रात की बताई जा रही है।

    पीड़िता का कहना है कि उसकी एक युवती से पिछले लगभग पांच वर्षों से गहरी दोस्ती है और दोनों साथ रहने की इच्छा रखती हैं। इसी संबंध को लेकर दोनों के परिवारों के बीच तनाव बढ़ता जा रहा था।

    मामले में नया मोड़ उस समय आया जब आरोप है कि सहेली के परिजन रविवार और सोमवार की दरमियानी रात करीब 12:30 बजे पीड़िता के घर पहुंचे और वहां जमकर विवाद किया। शिकायत के मुताबिक उमेश नामक आरोपी ने युवती का सिर दीवार से टकराया, जबकि अन्य लोगों ने हाथ-मुक्कों से मारपीट की। इसके बाद कथित तौर पर उसे घर से बाहर सड़क पर भी खींचकर पीटा गया।

    पीड़िता ने यह भी दावा किया है कि यह पूरी घटना आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों में रिकॉर्ड हुई है, जिससे जांच में मदद मिल सकती है।

    जानकारी के मुताबिक, यह विवाद नया नहीं है। दोनों युवतियां कुछ समय पहले वैष्णो देवी, मथुरा, जम्मू-कश्मीर और हरिद्वार की यात्रा पर साथ गई थीं, जिसके बाद सहेली के परिवार को उनके संबंध पर आपत्ति होने लगी थी।

    पीड़िता का आरोप है कि पहले भी उसने और उसकी सहेली ने पुलिस कमिश्नर से मिलकर साथ रहने और सुरक्षा की मांग की थी। शिकायत महिला थाने को भेजी गई थी, लेकिन कथित रूप से उन्हें अलग रहने की सलाह दी गई थी। बाद में सहेली को उसके परिजन अपने साथ ले गए थे, लेकिन वह फिर से स्वाति के पास लौट आई।

    घटना के बाद दोनों युवतियों ने खुद को असुरक्षित बताते हुए इंदौर पुलिस के डीसीपी जोन-4 कार्यालय में भी सुरक्षा की गुहार लगाई है। उनका कहना है कि उन्हें अपने-अपने परिवारों से जान का खतरा है। फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और सीसीटीवी फुटेज व अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है।

  • इंडी गठबंधन की अहम बैठक से दूर रही सीएम विजय की TVK, तमिलनाडु और राष्ट्रीय राजनीति के बीच संतुलन साधने की रणनीति पर चर्चा तेज

    इंडी गठबंधन की अहम बैठक से दूर रही सीएम विजय की TVK, तमिलनाडु और राष्ट्रीय राजनीति के बीच संतुलन साधने की रणनीति पर चर्चा तेज

    नई दिल्ली । राष्ट्रीय राजनीति में विपक्षी एकजुटता को मजबूत करने के उद्देश्य से आयोजित इंडिया ब्लॉक की बैठक के बीच तमिलनाडु की सत्तारूढ़ पार्टी तमिलगा वेत्त्री कझगम की अनुपस्थिति ने राजनीतिक हलकों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली पार्टी के बैठक में शामिल न होने को लेकर विभिन्न तरह के राजनीतिक संकेत और संभावित रणनीतियों पर चर्चा तेज हो गई है।

    तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के बाद कांग्रेस और कुछ अन्य विपक्षी दलों के समर्थन से सरकार बनाने वाली टीवीके फिलहाल राज्य की सत्ता में है। इसके बावजूद पार्टी ने दिल्ली में आयोजित विपक्षी गठबंधन की बैठक से दूरी बनाए रखी। इस फैसले को केवल एक औपचारिक अनुपस्थिति के रूप में नहीं देखा जा रहा, बल्कि इसके पीछे व्यापक राजनीतिक रणनीति होने की संभावना जताई जा रही है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि टीवीके की अनुपस्थिति का एक प्रमुख कारण उसका राष्ट्रीय संसद में प्रतिनिधित्व न होना हो सकता है। वर्तमान में पार्टी के पास लोकसभा या राज्यसभा में कोई सदस्य नहीं है। ऐसे में केंद्र सरकार के खिलाफ संसदीय रणनीति और संसद से जुड़े मुद्दों पर केंद्रित बैठक में उसकी भूमिका सीमित मानी जा सकती है। यही कारण है कि पार्टी ने फिलहाल दूरी बनाए रखना अधिक उपयुक्त समझा हो।

    एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि टीवीके अभी तक औपचारिक रूप से इंडिया ब्लॉक का हिस्सा नहीं बनी है। तमिलनाडु में सरकार गठन के लिए कांग्रेस और अन्य दलों का समर्थन मिलने के बावजूद राष्ट्रीय स्तर पर गठबंधन की संरचना और सदस्यता अलग विषय मानी जाती है। ऐसे में राज्य स्तर के राजनीतिक सहयोग और राष्ट्रीय गठबंधन की सदस्यता को एक समान नहीं माना जा रहा है।

    तमिलनाडु की राजनीति में डीएमके और टीवीके के बीच प्रतिस्पर्धा भी इस पूरे घटनाक्रम का महत्वपूर्ण पहलू मानी जा रही है। डीएमके लंबे समय से इंडिया ब्लॉक की प्रमुख सहयोगी पार्टियों में शामिल रही है। विधानसभा चुनाव के बाद राज्य की सत्ता से बाहर होने के बावजूद डीएमके प्रदेश में एक प्रभावशाली विपक्षी दल बनी हुई है। ऐसे में टीवीके का इंडिया ब्लॉक की गतिविधियों में सक्रिय रूप से शामिल होना राज्य की राजनीति में विरोधाभासी संदेश दे सकता है।

    विश्लेषकों का यह भी मानना है कि मुख्यमंत्री विजय अपनी पार्टी की स्वतंत्र राजनीतिक पहचान को मजबूत बनाए रखना चाहते हैं। विधानसभा चुनावों में टीवीके ने खुद को पारंपरिक राजनीतिक दलों के विकल्प के रूप में प्रस्तुत किया था। यदि पार्टी जल्दबाजी में किसी राष्ट्रीय गठबंधन का औपचारिक हिस्सा बनती है, तो उसकी स्वतंत्र राजनीतिक छवि प्रभावित हो सकती है। इसलिए फिलहाल वह मुद्दों के आधार पर समर्थन और सहयोग की नीति अपनाना चाहती है।

    भविष्य की राजनीति को ध्यान में रखते हुए भी टीवीके का यह रुख महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राष्ट्रीय गठबंधनों में औपचारिक रूप से शामिल होने से राजनीतिक विकल्प सीमित हो सकते हैं। जबकि वर्तमान परिस्थितियों में पार्टी अपने लिए अधिक लचीलापन बनाए रखना चाहती है। इससे उसे राज्य और राष्ट्रीय दोनों स्तरों पर परिस्थितियों के अनुसार निर्णय लेने की स्वतंत्रता मिलती है।

    तमिलनाडु में बदलते राजनीतिक समीकरणों के बीच मुख्यमंत्री विजय की पार्टी का यह कदम आने वाले समय की रणनीति का संकेत माना जा रहा है। फिलहाल टीवीके सत्ता संचालन, संगठन विस्तार और अपनी स्वतंत्र राजनीतिक पहचान को मजबूत करने पर ध्यान देती दिखाई दे रही है। ऐसे में इंडिया ब्लॉक की बैठक से दूरी को केवल एक अनुपस्थिति नहीं, बल्कि एक सोची-समझी राजनीतिक रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।

  • भोपाल में अनोखा विरोध प्रदर्शन, पेट्रोल-सीएनजी महंगाई पर ऑटो यूनियन का हल्ला बोल

    भोपाल में अनोखा विरोध प्रदर्शन, पेट्रोल-सीएनजी महंगाई पर ऑटो यूनियन का हल्ला बोल


    नई दिल्ली। भोपाल में महंगाई और ईंधन कीमतों में लगातार बढ़ोतरी का असर अब सड़क पर साफ दिखाई देने लगा है। सोमवार सुबह रायसेन रोड स्थित छावनी पठार क्षेत्र में ऑटो चालकों ने अपनी मांगों को लेकर अनोखे और प्रतीकात्मक तरीके से प्रदर्शन किया।

    प्रदर्शन में शामिल ऑटो चालकों ने बढ़ी हुई सीएनजी और पेट्रोल-डीजल की कीमतों के विरोध में फटे हुए अंडरवियर दिखाकर सरकार का ध्यान आकर्षित करने की कोशिश की। चालकों का कहना था कि महंगाई इतनी बढ़ चुकी है कि उनकी आर्थिक स्थिति बेहद खराब हो गई है और अब तो दैनिक जरूरतें पूरी करना भी मुश्किल हो गया है।

    इस प्रदर्शन का आयोजन रायसेन रोड स्थित शनि मंदिर के पास किया गया, जहां ऑटो संगठन के अध्यक्ष संजू अहिरवार के नेतृत्व में बड़ी संख्या में चालक एकत्र हुए। प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा, लेकिन संदेश बेहद स्पष्ट था “किराया बढ़ाओ, वरना गुजारा मुश्किल है।”

    संजू अहिरवार ने बताया कि मौजूदा समय में एक सीएनजी ऑटो को रोजाना लगभग 500 रुपये की गैस भरवानी पड़ती है, जबकि औसतन 1200 रुपये की कमाई होती है। इसमें से ईंधन, किश्त और रखरखाव का खर्च निकालने के बाद चालकों के पास बहुत कम बचत बचती है। उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात में ऑटो चलाना घाटे का सौदा बन गया है।

    चालकों का आरोप है कि लंबे समय से ऑटो किराए में कोई संशोधन नहीं किया गया है, जबकि ईंधन की कीमतें लगातार बढ़ती जा रही हैं। इसी असंतुलन के कारण हजारों ऑटो चालकों की आय प्रभावित हो रही है।

    प्रदर्शन में मौजूद चालकों पुषेंद्र अहिरवार, विशाल और राजेश ने भी अपनी पीड़ा साझा की। उन्होंने कहा कि बढ़ती महंगाई का सबसे ज्यादा असर मेहनतकश वर्ग पर पड़ रहा है। रोजाना की कमाई का बड़ा हिस्सा ईंधन और खर्चों में चला जाता है, जिससे घर चलाना भी मुश्किल हो गया है।

    इसी दौरान चालकों ने फटे कपड़ों को दिखाकर अपनी आर्थिक स्थिति का प्रतीकात्मक प्रदर्शन किया और कहा कि “किश्त भरते-भरते कपड़े तक फट गए हैं।”

    ऑटो संगठन ने सरकार से मांग की है कि वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए ऑटो किराए का पुनर्निर्धारण किया जाए, ताकि चालक अपनी किश्त समय पर चुका सकें और परिवार का भरण-पोषण ठीक से कर सकें।

    इस बीच देशभर में ईंधन कीमतों को लेकर भी चिंता बढ़ रही है। हाल ही में क्रिसिल की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार के प्रभाव से पेट्रोल-डीजल की कीमतों में और बढ़ोतरी संभव है, जिससे आम जनता और परिवहन व्यवसाय पर अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है। भोपाल में हुआ यह अनोखा प्रदर्शन एक बार फिर इस बात को उजागर करता है कि महंगाई का दबाव अब सीधे सड़क पर काम करने वाले वर्ग तक पहुंच चुका है।

  • साई पल्लवी और रुक्मिणी वसंत के बाद अब रश्मिका मंदाना के नाम की चर्चा तेज, आधिकारिक घोषणा का इंतजार

    साई पल्लवी और रुक्मिणी वसंत के बाद अब रश्मिका मंदाना के नाम की चर्चा तेज, आधिकारिक घोषणा का इंतजार

    नई दिल्ली । भारतीय संगीत जगत की सर्वकालिक महान विभूतियों में शुमार और भारत रत्न से सम्मानित कर्नाटक संगीत की दिग्गज गायिका एमएस सुब्बुलक्ष्मी की गौरवशाली जीवन यात्रा जल्द ही बड़े पर्दे पर अवतरित होने जा रही है। इस ऐतिहासिक और संगीत से ओतप्रोत बायोपिक फिल्म को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर सिनेमाई गलियारों और सोशल मीडिया पर व्यापक चर्चाएं शुरू हो गई हैं। इस महत्वाकांक्षी परियोजना में मुख्य किरदार अर्थात एमएस सुब्बुलक्ष्मी की प्रतिष्ठित भूमिका को पर्दे पर जीवंत करने के लिए दक्षिण भारतीय और हिंदी सिनेमा की शीर्ष अभिनेत्री रश्मिका मंदाना के नाम पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है।

    इस बहुप्रतीक्षित बायोपिक फिल्म के तकनीकी और रचनात्मक पहलुओं की जिम्मेदारी फिल्म इंडस्ट्री के जाने-माने निर्देशक गौतम तिन्ननुरी संभाल रहे हैं। गौतम तिन्ननुरी को समीक्षकों द्वारा प्रशंसित और व्यावसायिक रूप से बेहद सफल रही फिल्म ‘जर्सी’ के निर्देशन के लिए विशेष पहचान हासिल है। प्राप्त विवरण के अनुसार, निर्देशक पिछले एक लंबे समय से महान गायिका एमएस सुब्बुलक्ष्मी के जीवन, उनके संगीत के सफर और उनके ऐतिहासिक योगदान पर गहन शोध (रिसर्च) कर रहे हैं, ताकि कहानी को पूरी प्रामाणिकता के साथ दर्शकों के समक्ष प्रस्तुत किया जा सके।

    फिल्म की मुख्य अभिनेत्री के चयन को लेकर वर्तमान में फिल्म उद्योग के भीतर गहरा सस्पेंस बना हुआ है, जिसके कारण विभिन्न कयास लगाए जा रहे हैं। तेलुगु सिनेमाई मीडिया रिपोर्ट्स के दावों के अनुसार, रश्मिका मंदाना को इस ऐतिहासिक भूमिका के लिए लगभग तय माना जा रहा है और हाल ही में उनके आवास पर इस किरदार से जुड़े पहनावे और स्वरूप को लेकर एक गुप्त लुक टेस्ट भी सफलतापूर्वक आयोजित किया गया है। रश्मिका के इस प्रोजेक्ट से जुड़ने की खबर ने उनके प्रशंसकों के बीच भारी उत्साह पैदा कर दिया है।

    हालांकि, इस महत्वपूर्ण भूमिका के लिए रश्मिका मंदाना के अलावा इंडस्ट्री की कुछ अन्य प्रतिभाशाली अभिनेत्रियों के नाम भी पूर्व में सामने आते रहे हैं। कुछ समय पहले तक यह चर्चा बेहद गर्म थी कि अपनी संजीदा अदाकारी के लिए मशहूर साई पल्लवी इस बायोपिक का हिस्सा होंगी और उन्होंने इस किरदार की तैयारी के लिए बकायदा कर्नाटक संगीत की बुनियादी बारीकियां सीखना भी शुरू कर दिया था। इसके बाद बीच में उभरती हुई अभिनेत्री रुक्मिणी वसंत को भी इस रोल के लिए साइन किए जाने की खबरें आईं। चूंकि फिल्म के निर्माताओं ने अभी तक कास्टिंग को लेकर कोई औपचारिक प्रेस विज्ञप्ति जारी नहीं की है, इसलिए अंतिम नाम को लेकर आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है।

    दूसरी ओर, रश्मिका मंदाना वर्तमान में अपनी एक अन्य बड़ी और आधुनिक प्रेम कहानी पर आधारित फिल्म ‘कॉकटेल 2’ के प्रचार-प्रसार में व्यस्त हैं। हाल ही में डिजिटल प्लेटफॉर्म पर रिलीज हुए ‘कॉकटेल 2’ के आधिकारिक ट्रेलर को दर्शकों और नेटिजन्स की ओर से बेहद सकारात्मक प्रतिक्रियाएं मिली हैं, जिसके लिए रश्मिका ने अपने प्रशंसकों के प्रति आभार भी व्यक्त किया है। होमी अदजानिया के निर्देशन में बनी यह फिल्म आगामी 19 जून 2026 को देश भर के सिनेमाघरों में प्रदर्शित होने के लिए पूरी तरह तैयार है, जिसमें रश्मिका के साथ शाहिद कपूर और कृति सेनन मुख्य भूमिकाओं में दिखाई देंगे। इस व्यावसायिक फिल्म के तुरंत बाद एमएस सुब्बुलक्ष्मी जैसी ऐतिहासिक शख्सियत की बायोपिक रश्मिका के करियर के लिए एक बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हो सकती है।

  • मध्य प्रदेश की राज्यसभा जंग तेज, कांग्रेस-बीजेपी आमने-सामने; मीनाक्षी नटराजन बोलीं- एकजुट हैं हम

    मध्य प्रदेश की राज्यसभा जंग तेज, कांग्रेस-बीजेपी आमने-सामने; मीनाक्षी नटराजन बोलीं- एकजुट हैं हम


    नई दिल्ली। भोपाल में राज्यसभा चुनाव का राजनीतिक तापमान लगातार बढ़ता जा रहा है। एक ओर कांग्रेस की उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन ने अपने नामांकन के बाद पार्टी में एकजुटता का संदेश दिया, वहीं दूसरी ओर बीजेपी ने भी अपने चुनावी समीकरणों को मजबूत करने की कवायद तेज कर दी है।

    कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन ने कहा कि यह चुनाव विचारधाराओं की लड़ाई है और पार्टी पूरी मजबूती के साथ मैदान में उतरी है। नामांकन के दौरान प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी, प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार और कई विधायक मौजूद रहे। इस दौरान विधायकों ने एकजुटता दिखाते हुए पार्टी नेतृत्व के साथ फोटो सेशन भी कराया
    हालांकि इसी बीच कांग्रेस को एक झटका भी लगा जब हुजूर सीट से पूर्व प्रत्याशी नरेश ज्ञानचंदानी ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया। वे मीनाक्षी नटराजन को राज्यसभा उम्मीदवार बनाए जाने से नाराज बताए जा रहे हैं। इस घटनाक्रम ने कांग्रेस खेमे में हलचल बढ़ा दी है।

    वहीं बीजेपी खेमे में भी हलचल कम नहीं है। मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि पार्टी के पास अतिरिक्त वोट हैं और विकास चाहने वाले लोग बीजेपी उम्मीदवारों के साथ खड़े होंगे। उन्होंने दावा किया कि चुनाव परिणाम पार्टी के पक्ष में रहेगा।

    बीजेपी उम्मीदवार महेश केवट ने भी अपनी जिम्मेदारी को लेकर भरोसा जताया और कहा कि राष्ट्रीय नेतृत्व ने जो जिम्मेदारी दी है, उसे वे पूरी निष्ठा से निभाएंगे। इसी बीच उनके परिवार की ओर से धार्मिक माहौल भी देखने को मिला। महेश केवट के भाई और बेटे ने ओरछा में विशेष पूजा-अर्चना कर उनके राजनीतिक भविष्य की सफलता की कामना की।

    भोपाल में बीजेपी दफ्तर में भी लगातार विधायकों की आवाजाही जारी है। उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा और कई वरिष्ठ नेता बैठक के लिए पहुंचे। वहीं मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सभी विधायकों को भोपाल में ही रहने के निर्देश दिए हैं, जिससे वोटिंग प्रक्रिया में पूरी एकजुटता बनी रहे।

    राज्यसभा चुनाव को लेकर दोनों दलों ने अपनी रणनीति अंतिम चरण में पहुंचा दी है। कांग्रेस जहां एकजुटता का दावा कर रही है, वहीं बीजेपी अपने संख्याबल और संगठनात्मक ताकत पर भरोसा जता रही है। आने वाले दिनों में यह चुनाव राज्य की राजनीति की दिशा तय कर सकता है।

  • स्टोर रूम की सफाई से लेकर वन विभाग की मदद तक, बारिश के मौसम में इन जरूरी घरेलू सुरक्षा नियमों का करें पालन

    स्टोर रूम की सफाई से लेकर वन विभाग की मदद तक, बारिश के मौसम में इन जरूरी घरेलू सुरक्षा नियमों का करें पालन


    नई दिल्ली । देश के विभिन्न हिस्सों में मानसून की सक्रियता बढ़ने के साथ ही आम नागरिकों के लिए मौसमी बीमारियों के अलावा एक और बड़ा और गंभीर खतरा पैदा हो जाता है। भारी बारिश, जलभराव और जमीन के भीतर नमी बढ़ने के कारण सांप, बिच्छू और अन्य जहरीले रेंगने वाले जीव अपने प्राकृतिक आवासों यानी बिलों से बाहर निकलने के लिए मजबूर हो जाते हैं। सुरक्षित और सूखी जगहों की तलाश में ये जीव अक्सर इंसानी बस्तियों, घरों के बगीचों, स्टोर रूम और बेसमेंट जैसी जगहों पर शरण ले लेते हैं। इस स्थिति से निपटने और अपने परिवार को पूरी तरह सुरक्षित रखने के लिए गृह स्वामियों को कुछ विशेष और महत्वपूर्ण सुरक्षा उपायों को अमल में लाने की तत्काल आवश्यकता है।

    घरेलू सुरक्षा के दृष्टिकोण से सबसे पहला और बुनियादी कदम घर के आसपास के बाहरी वातावरण को पूरी तरह से साफ-सुथरा रखना है। घर के परिसर या बगीचे में जमा होने वाले कचरे, सूखी लकड़ियों के गट्ठर, पुरानी ईंटों के ढेर और बेतरतीब उगी झाड़ियों को तुरंत साफ किया जाना चाहिए, क्योंकि ये स्थान सांप और बिच्छुओं के छिपने के लिए सबसे अनुकूल माने जाते हैं। इसके अतिरिक्त, यदि घर के लॉन या आसपास के मैदान में घास अधिक बढ़ गई है, तो उसकी नियमित रूप से छंटाई कराना अनिवार्य है, ताकि खुले और साफ स्थान पर ये जीव ठहर न सकें।

    सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने के अगले चरण में घर के भौतिक ढांचे का बारीकी से निरीक्षण करना आवश्यक है। भवन की दीवारों, खिड़कियों के कोनों, मुख्य दरवाजों के निचले हिस्सों और फर्श में मौजूद किसी भी प्रकार की छोटी-बड़ी दरारों या गैप की सघन जांच की जानी चाहिए। बिच्छू और छोटे सांप बेहद महीन दरारों के रास्ते भी घर के भीतर सुगमता से प्रवेश कर जाते हैं। अतः ऐसी किसी भी संभावित एंट्री पॉइंट या झिरी के दिखाई देने पर उसे अविलंब सीमेंट, सिलिकॉन सीलेंट या अन्य मजबूत निर्माण सामग्री की सहायता से पूरी तरह एयरटाइट बंद कर देना चाहिए।

    बरसात के दिनों में घर के आंतरिक वातावरण को सूखा रखना और वहां पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था करना भी सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। स्टोर रूम, बेसमेंट और घर के उन कोनों में जहां हवा और रोशनी कम पहुंचती है, वहां नियमित रूप से सफाई और कीटनाशक दवाओं का छिड़काव किया जाना चाहिए। अक्सर लोग जूते, चप्पल, पुराने कपड़े या कार्डबोर्ड के बक्से लंबे समय तक एक ही स्थान पर रख देते हैं, जो इन जीवों के लिए छिपने का आदर्श स्थान बन जाते हैं। विशेषज्ञों की सलाह है कि इस मौसम में किसी भी रखे हुए सामान, कपड़ों या जूतों का उपयोग करने से पहले उन्हें एक बार अच्छी तरह से झाड़कर और जांचकर ही इस्तेमाल में लाएं।

    इन तमाम सावधानियों के बावजूद यदि कभी घर के भीतर या आसपास कोई जहरीला सांप अथवा अन्य जीव दिखाई दे, तो नागरिकों को अत्यधिक संयम बरतने की आवश्यकता है। ऐसी आपातकालीन स्थिति में जीव को खुद पकड़ने, सहलाने या लाठी-डंडों से मारने का प्रयास बिल्कुल नहीं करना चाहिए, क्योंकि भयभीत होने पर ये जीव और अधिक आक्रामक होकर हमला कर सकते हैं। इसके स्थान पर स्थानीय वन विभाग के अधिकारियों, पशु बचाव दल (एनिमल रेस्क्यू टीम) या किसी प्रमाणित और प्रशिक्षित सर्प विशेषज्ञ से तुरंत संपर्क करना चाहिए, जो आधुनिक उपकरणों की मदद से सुरक्षित रूप से जीव को वहां से रेस्क्यू कर सकें।

  • महिला क्रिकेट के सबसे बड़े महाकुंभ का बिगुल बजा: इंग्लैंड और वेल्स में 12 जून से शुरू होगा महिला टी20 विश्व कप, आईसीसी चेयरमैन जय शाह ने टीमों को दीं शुभकामनाएं

    महिला क्रिकेट के सबसे बड़े महाकुंभ का बिगुल बजा: इंग्लैंड और वेल्स में 12 जून से शुरू होगा महिला टी20 विश्व कप, आईसीसी चेयरमैन जय शाह ने टीमों को दीं शुभकामनाएं

    नई दिल्ली । महिला क्रिकेट के इतिहास में एक नया मील का पत्थर स्थापित करने के उद्देश्य से आईसीसी महिला टी20 विश्व कप 2026 का बिगुल बज चुका है। इंग्लैंड और वेल्स के ऐतिहासिक मैदानों पर आयोजित होने जा रहे क्रिकेट के इस सबसे बड़े महाकुंभ की तैयारियां अपने अंतिम चरण में हैं। रविवार को टूर्नामेंट के आधिकारिक उद्घाटन के सिलसिले में एक भव्य ‘कैप्टंस मीट’ का आयोजन किया गया। इस विशेष अवसर पर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) के चेयरमैन जय शाह ने व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहकर सभी 12 प्रतिभागी देशों के कप्तानों का हौसला बढ़ाया और उन्हें खेल भावना के साथ ऐतिहासिक प्रदर्शन करने के लिए शुभकामनाएं दीं।

    आईसीसी चेयरमैन जय शाह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपने आधिकारिक संदेश के माध्यम से इस आगामी संस्करण को महिला क्रिकेट के इतिहास का सबसे भव्य और क्रांतिकारी टूर्नामेंट करार दिया। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इंग्लैंड और वेल्स के प्रतिष्ठित क्रिकेट स्टेडियमों में इस बार रिकॉर्ड संख्या में दर्शक मैच देखने पहुंचेंगे, जिससे महिला क्रिकेट की लोकप्रियता को एक नया आयाम मिलेगा। शाह ने यह भी रेखांकित किया कि वैश्विक प्रसारण नेटवर्क के व्यापक विस्तार के कारण दुनिया भर के करोड़ों क्रिकेट प्रेमी इस बार अपनी पसंदीदा महिला क्रिकेट टीमों और खिलाड़ियों को लाइव एक्शन में देख सकेंगे।

    प्रशासनिक और तकनीकी दृष्टिकोण से इस बार का टूर्नामेंट कई मायनों में अनूठा होने जा रहा है क्योंकि महिला टी20 विश्व कप के इतिहास में पहली बार 12 टीमें खिताब की दौड़ में शामिल हो रही हैं। टूर्नामेंट का आधिकारिक आगाज 12 जून को पहले ग्रुप मुकाबले के साथ होगा। यह इस प्रतिष्ठित वैश्विक प्रतियोगिता का 10वां संस्करण है और साल 2009 में आयोजित हुए उद्घाटन सत्र के बाद यह पहला मौका है जब इंग्लैंड इसकी पूर्ण रूप से मेजबानी कर रहा है। पूरे टूर्नामेंट के दौरान कुल 33 मुकाबले खेले जाएंगे, जिनका आयोजन इंग्लैंड और वेल्स के सात सबसे प्रमुख क्रिकेट मैदानों पर किया जाएगा।

    टूर्नामेंट के समीकरणों पर नजर डालें तो सभी 12 टीमों को दो अलग-अलग समूहों में विभाजित किया गया है। ग्रुप-A में छह बार की सर्वाधिक सफल चैंपियन टीम ऑस्ट्रेलिया के साथ भारत, पाकिस्तान, दक्षिण अफ्रीका, बांग्लादेश और पहली बार इस वैश्विक मंच पर पदार्पण कर रही नीदरलैंड्स की टीम को जगह मिली है। वहीं दूसरी ओर ग्रुप-B में मेजबान इंग्लैंड के साथ गत विजेता न्यूजीलैंड, वेस्टइंडीज, श्रीलंका, आयरलैंड और स्कॉटलैंड की टीमें शामिल हैं। लीग चरण के दौरान प्रत्येक टीम कुल पांच-पांच मुकाबले खेलेगी और दोनों समूहों की शीर्ष दो टीमें नॉकआउट चरण अर्थात सेमीफाइनल के लिए क्वालिफाई करेंगी।

    क्रिकेट समीक्षकों के अनुसार, जहां न्यूजीलैंड की टीम अपने मौजूदा चैंपियन के खिताब की रक्षा करने के इरादे से मैदान पर उतरेगी, वहीं छह बार की विश्व विजेता ऑस्ट्रेलियाई टीम का दबदबा बरकरार रखने की चुनौती होगी। मेजबान इंग्लैंड भी अपनी पूर्व कप्तान और वर्तमान मुख्य कोच शार्लोट एडवर्ड्स के मार्गदर्शन में साल 2009 की खिताबी सफलता को अपनी घरेलू धरती पर दोहराना चाहेगी। टूर्नामेंट के वार्म-अप मैचों की प्रक्रिया छह जून से डर्बी, लॉफबोरो और कार्डिफ में पहले ही शुरू हो चुकी है। मुख्य चरण के बाद दोनों महत्वपूर्ण सेमीफाइनल मुकाबले क्रमशः 30 जून और 2 जुलाई को लंदन के द ओवल मैदान पर खेले जाएंगे, जबकि विश्व विजेता का फैसला करने वाला ऐतिहासिक फाइनल महामुकाबला 5 जुलाई को मक्का ऑफ क्रिकेट कहे जाने वाले लॉर्ड्स मैदान पर खेला जाएगा।

  • 'अगर सचिन क्रिकेट के भगवान हैं, तो वैभव हो सकते हैं भगवान का बेटा': पूर्व मुख्य चयनकर्ता कृष्णमाचारी श्रीकांत का बड़ा बयान, टीम मैनेजमेंट को दी खास सलाह

    'अगर सचिन क्रिकेट के भगवान हैं, तो वैभव हो सकते हैं भगवान का बेटा': पूर्व मुख्य चयनकर्ता कृष्णमाचारी श्रीकांत का बड़ा बयान, टीम मैनेजमेंट को दी खास सलाह

    नई दिल्ली । भारतीय क्रिकेट के इतिहास में एक नया स्वर्णिम अध्याय जुड़ने जा रहा है, जहां मात्र 15 वर्ष की आयु में एक युवा बल्लेबाज ने अपनी असाधारण प्रतिभा के दम पर सीनियर राष्ट्रीय टीम का दरवाजा खटखटाया है। इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) 2026 में अपने बल्ले से रनों का अंबार लगाने वाले युवा बल्लेबाजी सनसनी वैभव सूर्यवंशी को चयनकर्ताओं ने आगामी आयरलैंड और इंग्लैंड दौरे के लिए घोषित भारतीय टी20 अंतरराष्ट्रीय टीम में शामिल कर लिया है। इस चयन के साथ ही वैभव के पास मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर का दशकों पुराना ऐतिहासिक रिकॉर्ड तोड़ने का एक बेहद सुनहरा अवसर आ गया है।

    यदि वैभव सूर्यवंशी को आगामी दौरों पर किसी भी मुकाबले में भारत की ओर से खेलने का अवसर प्राप्त होता है, तो वह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले सबसे कम उम्र के खिलाड़ी बन जाएंगे। इस अभूतपूर्व प्रतिभा को लेकर भारतीय क्रिकेट जगत में भारी उत्साह देखा जा रहा है। पूर्व भारतीय कप्तान और राष्ट्रीय चयन समिति के पूर्व मुख्य चयनकर्ता कृष्णमाचारी श्रीकांत ने वैभव की जमकर सराहना की है। उन्होंने अपने आधिकारिक डिजिटल मंच पर बयान देते हुए यहां तक कह दिया कि यदि सचिन तेंदुलकर को क्रिकेट का भगवान माना जाता है, तो वैभव सूर्यवंशी में क्रिकेट के भगवान का बेटा बनने की पूरी क्षमता दिखाई देती है।

    पूर्व मुख्य चयनकर्ता श्रीकांत ने हालांकि टीम प्रबंधन को एक बेहद महत्वपूर्ण तकनीकी सलाह भी दी है। उनका मानना है कि इस युवा खिलाड़ी के चयन में उम्र कोई बाधा नहीं है क्योंकि उन्होंने अपने शानदार प्रदर्शन और रनों के आधार पर टीम में जगह बनाई है। इसके बावजूद, टीम मैनेजमेंट को उन्हें अंतिम एकादश (प्लेइंग XI) में शामिल करने की जल्दबाजी से बचना चाहिए। श्रीकांत के अनुसार, वैभव को आगामी तीन वर्षों के लिए 16 सदस्यीय मुख्य टीम में स्थान की गारंटी दी जानी चाहिए, ताकि वे बिना किसी मानसिक दबाव के वरिष्ठ खिलाड़ियों के साथ रहकर खेल की बारीकियों को सीख सकें और खुद को अंतरराष्ट्रीय स्तर के लिए पूरी तरह परिपक्व कर सकें।

    क्रिकेट समीक्षकों के अनुसार, वैभव का यह फास्ट्रैक चयन उनके आईपीएल 2026 के अविश्वसनीय प्रदर्शन का परिणाम है, जहां उन्होंने पूरे सीजन में कुल 776 रन बनाकर प्रतिष्ठित ‘ऑरेंज कैप’ पर अपना अधिकार जमाया था। अपने करियर के दूसरे ही सीजन में यह कीर्तिमान रचने वाले वे दुनिया के सबसे युवा बल्लेबाज बने। इतना ही नहीं, इस 15 वर्षीय खब्बू बल्लेबाज ने एक ही आईपीएल सीजन में कुल 72 गगनचुंबी छक्के जड़कर वेस्टइंडीज के दिग्गज बल्लेबाज क्रिस गेल के बरसों पुराने ऐतिहासिक रिकॉर्ड को भी नेस्तनाबूद कर दिया था, जिसने चयनकर्ताओं को उन्हें सीनियर टीम में शामिल करने के लिए मजबूर किया।

    भारतीय टीम का आगामी आयरलैंड दौरा 26 जून से आधिकारिक तौर पर शुरू होने जा रहा है, जिसके तुरंत बाद टीम को इंग्लैंड के खिलाफ भी सीमित ओवरों की श्रृंखला खेलनी है। इसके अतिरिक्त, चयनकर्ताओं ने दूरगामी सोच का परिचय देते हुए वैभव सूर्यवंशी को आगामी एशियन गेम्स के लिए घोषित भारतीय क्रिकेट दल में भी स्थान दिया है। वर्तमान में शीर्ष क्रम में संजू सैमसन और अभिषेक शर्मा जैसे आक्रामक सलामी बल्लेबाजों की मौजूदगी के बीच, यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि भारतीय टीम प्रबंधन इस युवा खिलाड़ी को कब और किस तरह अंतरराष्ट्रीय मंच पर पदार्पण करने का ऐतिहासिक अवसर प्रदान करता है।

  • मानव सुथार की गेंदबाजी ने मचाया कहर, रिकॉर्ड बुक में दर्ज हुआ नाम

    मानव सुथार की गेंदबाजी ने मचाया कहर, रिकॉर्ड बुक में दर्ज हुआ नाम


    नई दिल्ली। मानव सुथार ने 22 ओवर में मात्र 33 रन देकर 6 विकेट हासिल किए। यह प्रदर्शन उन्हें भारत के टेस्ट इतिहास में डेब्यू पर दूसरा सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजी स्पेल बनाने वालों की सूची में शामिल कर देता है। भारत के लिए डेब्यू टेस्ट में सर्वश्रेष्ठ स्पेल का रिकॉर्ड अब भी नरेंद्र हिरवानी के नाम है, जिन्होंने 1988 में वेस्टइंडीज के खिलाफ 8 विकेट लेकर इतिहास रचा था।

    रिकॉर्ड्स की कतार में मानव सुथार
    मानव सुथार ने कई अहम उपलब्धियां अपने नाम कीं-
    भारत की ओर से पिछले 35 वर्षों में डेब्यू पर 6 विकेट लेने वाले चुनिंदा गेंदबाजों में शामिल
    अफगानिस्तान के खिलाफ दूसरा सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजी प्रदर्शन
    इस सदी में डेब्यू पर 5+ विकेट लेने वाले दूसरे भारतीय स्पिनर
    इससे पहले यह उपलब्धि अमित मिश्रा ने 2008 में हासिल की थी।

    अफगानिस्तान की बल्लेबाजी बिखरी
    Afghanistan national cricket team की पारी में केवल रहमत शाह ही संघर्ष करते नजर आए और उन्होंने 60 रनों की उपयोगी पारी खेली। कप्तान हशमतुल्लाह शाहिदी और अन्य बल्लेबाज बड़ा स्कोर नहीं बना सके।

    भारत की मजबूत पकड़
    प्रसिद्ध कृष्णा ने 3 विकेट लेकर तेज गेंदबाजी में योगदान दिया, जबकि वॉशिंगटन सुंदर को भी एक सफलता मिली। इसके चलते भारत ने पहली पारी के आधार पर 412 रनों की विशाल बढ़त हासिल कर ली है।

    डेब्यू टेस्ट में ही मानव सुथार ने जिस तरह का प्रदर्शन किया है, उसने उन्हें भविष्य के प्रमुख स्पिनरों की सूची में ला खड़ा किया है। उनका यह स्पेल भारतीय टेस्ट क्रिकेट के यादगार प्रदर्शनों में गिना जाएगा।

  • बिहार एनडीए में विलय की अटकलों पर उपेंद्र कुशवाहा का पूर्ण विराम: बोले- 'दुनिया की कोई ताकत राष्ट्रीय लोक मोर्चा का अस्तित्व खत्म नहीं कर सकती'

    बिहार एनडीए में विलय की अटकलों पर उपेंद्र कुशवाहा का पूर्ण विराम: बोले- 'दुनिया की कोई ताकत राष्ट्रीय लोक मोर्चा का अस्तित्व खत्म नहीं कर सकती'

    नई दिल्ली । बिहार की क्षेत्रीय राजनीति और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के आंतरिक समीकरणों के बीच दलगत अस्तित्व को लेकर जारी कयासबाजियों पर आखिरकार राष्ट्रीय लोक मोर्चा के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा ने अपनी चुप्पी तोड़ी है। उन्होंने बेहद कड़े और स्पष्ट शब्दों में अपनी पार्टी का भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में विलय होने की तमाम संभावनाओं और मीडिया में चल रही अटकलों को सिरे से खारिज कर दिया है। रविवार को आयोजित अपनी पार्टी के एक महत्वपूर्ण संगठनात्मक मंच से बोलते हुए उन्होंने साफ किया कि राष्ट्रीय लोक मोर्चा का किसी अन्य दल में विलय होने का प्रश्न ही उत्पन्न नहीं होता।

    पार्टी के प्रदेश सम्मेलन को संबोधित करते हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा ने गठबंधन की राजनीति पर अपनी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि वे और उनकी पार्टी गठबंधन धर्म का पूरी निष्ठा से पालन करने वाले लोग हैं और एनडीए में शामिल सबसे बड़े राजनीतिक दल के प्रति उनके मन में पूरा सम्मान है। गठबंधन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय लोक मोर्चा पूरी मजबूती के साथ एनडीए का हिस्सा था, वर्तमान में भी है और भविष्य में भी बना रहेगा, इसलिए इस विषय को लेकर किसी के मन में कोई संदेह या संशय नहीं होना चाहिए।

    मीडिया के एक वर्ग में पिछले कुछ महीनों से चल रही खबरों पर नाराजगी व्यक्त करते हुए कुशवाहा ने कहा कि कुछ चैनलों पर तो विलय की बाकायदा तारीखें तक घोषित कर दी गई थीं और इसे महज एक औपचारिकता बताया जा रहा था। इन दावों को पूरी तरह भ्रामक करार देते हुए उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं को आश्वस्त किया कि वे शत-प्रतिशत इस बात को लेकर निश्चिंत रहें कि किसी एक राजनीतिक पद के लिए उनकी पार्टी का स्वतंत्र वजूद कभी समाप्त नहीं होगा। उन्होंने हुंकार भरते हुए कहा कि दुनिया की कोई भी ताकत राष्ट्रीय लोक मोर्चा के अस्तित्व को मिटा नहीं सकती है।

    इस राजनीतिक बयानबाजी के पीछे बिहार की हालिया विधायी राजनीति को एक प्रमुख कारण माना जा रहा है। दरअसल, आगामी 18 जून को बिहार में होने वाले विधान परिषद (MLC) चुनाव को लेकर एनडीए ने अपने उम्मीदवारों की सूची घोषित की है, जिसमें उपेंद्र कुशवाहा के पुत्र और बिहार सरकार के मौजूदा मंत्री दीपक प्रकाश का नाम शामिल नहीं है। टिकट न मिलने के कारण राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज थी कि कुशवाहा गुट एनडीए के शीर्ष नेतृत्व से नाराज चल रहा है। सम्मेलन के दौरान कार्यकर्ताओं को एकजुट रखने के उद्देश्य से उन्होंने भावुक संदेश देते हुए कहा कि वे एक राजनीतिक दल नहीं बल्कि एक परिवार चलाते हैं, जिसका हिस्सा सभी कार्यकर्ता हैं।

    संवैधानिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो दीपक प्रकाश के उम्मीदवारों की सूची में शामिल न होने से उनके मंत्री पद पर कानूनी संकट गहरा गया है। भारतीय संविधान के नियमों के मुताबिक, यदि कोई व्यक्ति विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य नहीं है, तो वह अधिकतम छह महीने तक ही मंत्री पद पर रह सकता है। इस अवधि के भीतर उसे किसी भी एक सदन का सदस्य निर्वाचित होना अनिवार्य होता है। चूंकि दीपक प्रकाश वर्तमान में नीतीश कैबिनेट में मंत्री हैं और उन्हें आगामी चुनाव के लिए टिकट नहीं मिला है, इसलिए उनके राजनीतिक भविष्य और मंत्री पद पर बने रहने को लेकर प्रशासनिक और राजनैतिक हलचलें काफी तेज हो गई हैं।