Author: bharati

  • 31 जुलाई को ओटीटी पर सिनेमाई महासंग्राम: एक्शन, थ्रिल और खौफ के तड़के संग रिलीज होंगी 6 नई फिल्में और सीरीज

    31 जुलाई को ओटीटी पर सिनेमाई महासंग्राम: एक्शन, थ्रिल और खौफ के तड़के संग रिलीज होंगी 6 नई फिल्में और सीरीज

    नई दिल्ली । समेत देशभर के ओटीटी प्रेमियों के लिए जुलाई महीने का अंतिम दिन मनोरंजन का बड़ा सौगात लेकर आ रहा है। डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर सस्पेंस, थ्रिलर, एक्शन और ड्रामा से भरपूर छह नई फिल्में और वेब सीरीज एक साथ दर्शकों के सामने प्रस्तुत की जा रही हैं। सिनेमाघरों में किसी बड़े बजट की फिल्म की अनुपस्थिति के बीच ओटीटी प्लेटफॉर्म्स ने वीकेंड को खास बनाने की पूरी योजना तैयार कर ली है। नेटफ्लिक्स, अमेजन प्राइम वीडियो, सोनी लिव, जी5 और लायन्सगेट जैसे प्रमुख प्लेटफॉर्म्स पर विविध शैलियों का यह समन्वय दर्शकों को बेहतरीन अनुभव प्रदान करने वाला है।

    एनिमेटेड सीरीज के शौकीनों के लिए गोथम शहर की पृष्ठभूमि पर आधारित एक चर्चित शो का दूसरा सीजन वापसी कर रहा है। इसमें मुख्य किरदार एक बार फिर अंधेरे के बीच खतरनाक अपराधियों से मुकाबला करता और शहर की रक्षा में नए रहस्यों को सुलझाता नजर आएगा। वहीं, भावनात्मक और शांत जीवन की तलाश पर केंद्रित एक जापानी-कोरियन ड्रामा नेटफ्लिक्स पर दस्तक देने जा रहा है। इसमें नौकरी छूटने के बाद अपनी दादी के तटीय घर पहुंची मुख्य पात्र की जीवन यात्रा और उसके केयरटेकर के साथ बनते रिश्तों की सहज कहानी देखने को मिलेगी।

    क्षेत्रीय सिनेमा के शौकीनों के लिए जी5 पर एक मलयालम साइकोलॉजिकल सर्वाइवल ड्रामा पेश किया जा रहा है। यह कहानी एक मां और उसके छोटे बेटे की है, जो अपनी पहचान छिपाकर कानून से बचते फिर रहे हैं। गहरे मानसिक आघात और अकेलेपन के बीच संघर्ष करते इस परिवार का अनिश्चित भविष्य दर्शकों को बांधे रखेगा। इसके अतिरिक्त, लायन्सगेट पर एक उत्तरजीविता थ्रिलर रिलीज हो रही है, जिसमें माल्टा में छुट्टियां मना रहे एक जोड़े पर पहले एक विशाल शार्क और फिर एक कातिल मछुआरे का खतरा मंडराता है।

    भारतीय पौराणिक कथाओं में रुचि रखने वालों के लिए सोनी लिव पर महाभारत के महान योद्धा कर्ण के जीवन पर केंद्रित एक एनिमेटेड सीरीज आ रही है। इसमें कर्ण के एक साधारण परिवार में पालन-पोषण से लेकर महान योद्धा बनने और जीवनभर के सामाजिक भेदभाव तथा नियति से उसके संघर्ष को दिखाया गया है। इसके साथ ही, नेटफ्लिक्स पर सत्यदेव अभिनीत एक साइकोलॉजिकल पीरियड ड्रामा भी प्रस्तुत किया जा रहा है। यह कहानी एक बुजुर्ग राजा के इर्द-गिर्द घूमती है, जो अपने मृत पुत्र की वास्तविक पहचान की तलाश में अतीत के कई दफन राज उजागर करता है। इन सभी नए रिलीज के साथ इस वीकेंड दर्शकों के पास विविध प्रकार का कंटेंट चुनने का शानदार अवसर रहेगा।

  • कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत के सितारों का कमाल, राष्ट्रपति से लेकर रक्षा मंत्री तक ने दी बधाई, कहा- आपने रचा नया इतिहास

    कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत के सितारों का कमाल, राष्ट्रपति से लेकर रक्षा मंत्री तक ने दी बधाई, कहा- आपने रचा नया इतिहास


    नई दिल्ली।  कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय खिलाड़ियों का शानदार प्रदर्शन लगातार देश का गौरव बढ़ा रहा है। सातवें दिन भारत के एथलीटों ने एक बार फिर अपनी प्रतिभा और दमदार प्रदर्शन से दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा। पुरुषों की पैरा 100 मीटर टी47 स्पर्धा में दिलीप महादु गावित ने स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया जबकि मोहम्मद बासिल ने रजत पदक अपने नाम किया। वहीं पुरुषों की लंबी कूद स्पर्धा में मुरली श्रीशंकर ने शानदार प्रदर्शन करते हुए लगातार दूसरे कॉमनवेल्थ गेम्स में रजत पदक जीतकर अपनी निरंतरता साबित की। इन ऐतिहासिक उपलब्धियों पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु सहित देश के कई वरिष्ठ नेताओं ने खिलाड़ियों को बधाई दी और उनके प्रदर्शन को भारतीय खेलों के लिए प्रेरणादायक बताया।

    राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर दिलीप महादु गावित और मोहम्मद बासिल को बधाई देते हुए कहा कि भारतीय पैरा एथलेटिक्स ने कॉमनवेल्थ गेम्स में एक नया और यादगार अध्याय लिखा है। उन्होंने कहा कि दिलीप का स्वर्ण और बासिल का रजत पदक भारतीय पैरा एथलेटिक्स के लिए बड़ी उपलब्धि है। राष्ट्रपति ने दोनों खिलाड़ियों के दृढ़ संकल्प और उत्कृष्ट प्रदर्शन की सराहना करते हुए विश्वास जताया कि वे भविष्य में भी देश का नाम रोशन करते रहेंगे और नई पीढ़ी के खिलाड़ियों को प्रेरित करेंगे।

    राष्ट्रपति ने मुरली श्रीशंकर की भी जमकर प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि लगातार दूसरे कॉमनवेल्थ गेम्स में रजत पदक जीतना असाधारण उपलब्धि है। यह उनकी मेहनत निरंतरता और खेल के प्रति समर्पण का प्रमाण है। उन्होंने श्रीशंकर के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि पूरा देश उनकी सफलता पर गर्व महसूस कर रहा है।

    केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने भी तीनों खिलाड़ियों की उपलब्धियों को ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा कि पुरुष पैरा 100 मीटर टी47 स्पर्धा में भारत का वन टू फिनिश भारतीय खेल इतिहास का गर्व का क्षण है। उन्होंने विशेष रूप से दिलीप गावित की सराहना करते हुए कहा कि वे कॉमनवेल्थ गेम्स में एथलेटिक्स का स्वर्ण जीतने वाले पहले भारतीय पुरुष पैरा एथलीट बन गए हैं। यह उपलब्धि भारतीय पैरा खेलों के लिए मील का पत्थर है। वहीं उन्होंने मुरली श्रीशंकर की 8.09 मीटर की शानदार छलांग की भी प्रशंसा करते हुए इसे भारतीय एथलेटिक्स के लिए गौरवपूर्ण पल बताया।

    केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी मुरली श्रीशंकर को बधाई देते हुए कहा कि लगातार दो कॉमनवेल्थ गेम्स में रजत पदक जीतना उनकी अद्भुत निरंतरता और मानसिक मजबूती का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि गंभीर घुटने की चोट से उबरकर इतनी शानदार वापसी करना हर खिलाड़ी के लिए प्रेरणा का विषय है। उनकी सफलता देशभर के युवा खिलाड़ियों के लिए एक मिसाल है।

    दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने भी दिलीप महादु गावित और मोहम्मद बासिल को बधाई देते हुए कहा कि दोनों खिलाड़ियों ने भारत को ऐतिहासिक वन टू फिनिश दिलाकर देश का गौरव बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि दोनों एथलीटों की यह उपलब्धि भारतीय पैरा एथलेटिक्स के स्वर्णिम भविष्य की झलक है और आने वाले वर्षों में उनसे और भी बड़ी सफलताओं की उम्मीद है।

    कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय खिलाड़ियों के इस शानदार प्रदर्शन ने यह साबित कर दिया है कि देश के एथलीट अब वैश्विक मंच पर लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहे हैं। इन खिलाड़ियों की मेहनत और उपलब्धियां न केवल भारत के लिए गर्व का विषय हैं बल्कि आने वाली पीढ़ियों को बड़े सपने देखने और उन्हें साकार करने की प्रेरणा भी दे रही हैं।

  • रियलिटी शो के मंच पर राम कपूर के व्यवहार को लेकर उठे सवालों के बीच पत्नी गौतमी ने साथी प्रतिभागियों से व्यक्त की खेद

    रियलिटी शो के मंच पर राम कपूर के व्यवहार को लेकर उठे सवालों के बीच पत्नी गौतमी ने साथी प्रतिभागियों से व्यक्त की खेद

    नई दिल्ली। लोकप्रिय डिजिटल रियलिटी शो के हालिया एपिसोड में उस समय एक नया मोड़ देखने को मिला, जब मंच पर बंद प्रतियोगियों से मिलने पहुंचे उनके परिजनों के दौरान गंभीर भावनात्मक और संवेदनशील स्थितियां उत्पन्न हो गईं। शो में हिस्सा ले रहे प्रसिद्ध अभिनेता राम कपूर की पत्नी गौतमी कपूर ने मंच पर प्रवेश करते ही सह-प्रतियोगी श्रेया कालरा और अन्य महिला प्रतिभागियों से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने अपने पति के पिछले व्यवहार और शारीरिक संपर्क से जुड़ी कुछ घटनाओं पर हाथ जोड़कर खेद प्रकट किया। इस वाकये के प्रसारित होने के बाद से मनोरंजन जगत और सोशल मीडिया पर व्यक्तिगत सीमाओं तथा सार्वजनिक मंचों पर व्यक्तिगत व्यवहार को लेकर एक नई बहस शुरू हो गई है।

    दरअसल, बीते कुछ एपिसोड्स के दौरान शो के भीतर महिला प्रतियोगियों के बीच राम कपूर के बार-बार गले मिलने, माथे पर स्पर्श करने और अत्यधिक निकटता दर्शाने की आदत को लेकर असहजता व्यक्त की गई थी। प्रतियोगी श्रेया कालरा ने अन्य सदस्यों के साथ बातचीत में इस बात को स्पष्ट रूप से स्वीकार किया था कि इस प्रकार का व्यवहार उनके लिए आरामदायक नहीं था और इससे वे काफी असहज महसूस कर रही थीं। अन्य अतिथियों और प्रतियोगियों द्वारा भी इस प्रकार के स्नेह प्रदर्शन पर सवाल उठाए गए थे, जिससे शो के भीतर तनाव का माहौल बन गया था।

    पारिवारिक मुलाकात के लिए निर्धारित सत्र के दौरान गौतमी कपूर ने सीधे तौर पर श्रेया कालरा से संपर्क किया और अत्यंत विनम्र भाव से बात की। उन्होंने कहा कि यदि उनके पति द्वारा अनजाने में भी किसी प्रकार का अनुचित स्पर्श या असहज स्थिति पैदा की गई हो, तो वह अपनी ओर से क्षमा याचना करती हैं। इसके बाद उन्होंने घर में मौजूद अन्य सभी महिला सदस्यों से भी बात की और स्पष्ट किया कि वह अपने पति के कृत्यों का बचाव नहीं कर रही हैं, बल्कि उनका उद्देश्य केवल यह समझाना है कि उनका व्यक्तित्व स्वाभाविक रूप से बहुत अधिक मित्रवत और भावनात्मक है।

    इस मुलाकात के दौरान मंच पर अन्य प्रतियोगियों के परिजन और मित्र भी उपस्थित थे, जिससे कई अन्य समीकरण भी सामने आए। जहां श्रेया कालरा से मिलने उनके मित्र पहुंचे, वहीं अन्य प्रतिभागियों से मिलने भी उद्योग जगत के उनके करीबी सहयोगी आए। इस दौरान कुछ सदस्यों के बीच आपसी तीखी बहस और तनातनी भी देखने को मिली। परिजनों के इस आगमन ने खेल के रणनीतिक और व्यक्तिगत पहलुओं को गहराई से प्रभावित किया है।

    इस पूरे प्रकरण ने न केवल शो के भीतर के माहौल को बदल दिया है, बल्कि दर्शकों के बीच भी यह संदेश दिया है कि सार्वजनिक या व्यावसायिक जीवन में व्यक्तिगत स्थान और प्राथमिकताओं का सम्मान करना कितना आवश्यक है। किसी भी व्यक्ति का स्नेह दर्शाने का तरीका यदि दूसरे के लिए असुविधाजनक बनता है, तो उस पर बातचीत और सुधार अनिवार्य हो जाता है। आगामी एपिसोड्स में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस घटनाक्रम का प्रतियोगियों के आपसी संबंधों और खेल की रणनीति पर क्या असर पड़ता है।

  • अमेरिकी सैनिक से विवाह करने वाली भारतीय महिला द्वारा सैन्य सुविधाओं का खुलासा किए जाने के बाद इंटरनेट पर छिड़ी भारतीय एवं अमेरिकी रक्षा व्यवस्था की बहस

    अमेरिकी सैनिक से विवाह करने वाली भारतीय महिला द्वारा सैन्य सुविधाओं का खुलासा किए जाने के बाद इंटरनेट पर छिड़ी भारतीय एवं अमेरिकी रक्षा व्यवस्था की बहस

    नई दिल्ली। वैश्विक स्तर पर सशस्त्र बलों के जवानों और उनके परिवारों को मिलने वाली सरकारी सुविधाओं तथा कल्याणकारी योजनाओं को लेकर डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर एक नई और व्यापक बहस छिड़ गई है। हाल ही में एक भारतीय मूल की महिला और उनके अमेरिकी सैन्यकर्मी पति द्वारा सोशल मीडिया पर साझा किए गए विवरणों के बाद यह मुद्दा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा के केंद्र में आ गया है। इस विवरण में अमेरिकी सशस्त्र बलों से जुड़े कर्मियों को मिलने वाले विभिन्न दीर्घकालिक और तात्कालिक लाभों का उल्लेख किया गया है, जिसके बाद इंटरनेट उपयोगकर्ताओं के बीच विभिन्न देशों की रक्षा कल्याण नीतियों और उनकी प्रभावशीलता को लेकर तुलनात्मक समीक्षाएं शुरू हो गई हैं।

    सशस्त्र बलों के कल्याणकारी ढांचे के तहत मिलने वाले मुख्य लाभों में शिक्षा, चिकित्सा और आवास संबंधी नीतियां सर्वोपरि होती हैं। साझा किए गए विवरणों में दावा किया गया है कि अमेरिकी सैन्य व्यवस्था के अंतर्गत कर्मियों को जीवनभर के लिए मुफ्त शिक्षा सहायता, उच्च शिक्षा के दौरान मासिक भत्ता तथा ‘डिपार्टमेंट ऑफ वेटरन्स अफेयर्स’ के माध्यम से संपूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान की जाती हैं। इसके अतिरिक्त, गृह निर्माण या खरीद प्रक्रिया के दौरान अत्यधिक न्यूनतम प्रशासनिक शुल्क पर आवास आवंटन की प्रक्रिया को भी मुख्य लाभ के रूप में रेखांकित किया गया है। इन जानकारियों के सार्वजनिक होते ही दुनिया भर के सैन्य परिवारों और आम नागरिकों ने अपने-अपने देशों के सैन्य सेवा नियमों से इसकी तुलना करना शुरू कर दिया है।

    भारतीय परिप्रेक्ष्य में इस बहस ने एक नया मोड़ ले लिया है, जहां अनेक पूर्व सैनिकों, उनके आश्रितों और रक्षा विशेषज्ञों ने भारतीय सशस्त्र बलों की कल्याणकारी नीतियों को भी उतना ही सुदृढ़ और व्यापक बताया है। चर्चा के दौरान यह तथ्य प्रमुखता से उभरा कि भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना में कार्यरत तथा सेवानिवृत्त कर्मियों को भी अत्यंत सुव्यवस्थित स्वास्थ्य योजनाएं, रियायती दरों पर राशन, सैन्य छावनियों में आवास सुविधाएं और विशिष्ट शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश जैसी सुविधाएं दी जाती हैं। भारतीय रक्षा कल्याण तंत्र के तहत पूर्व सैनिकों के लिए विशेष स्वास्थ्य योजना जैसी व्यवस्थाएं मौजूद हैं, जो देश भर में विस्तृत अस्पतालों के नेटवर्क के माध्यम से मुफ्त चिकित्सा सहायता सुनिश्चित करती हैं।

    आवास और पारिश्रमिक के अतिरिक्त, विदेशी रक्षा कर्मियों के परिवारों को मिलने वाली आव्रजन संबंधी सुलभता भी इस वैश्विक चर्चा का एक महत्वपूर्ण बिंदु बन गई है। सैन्य सेवा में कार्यरत कर्मियों के विदेशी जीवनसाथियों के लिए वीजा और स्थायी निवास संबंधी प्रशासनिक प्रक्रियाओं में प्राथमिकता दिए जाने के मामलों को लेकर भी विशेषज्ञ अपनी राय रख रहे हैं। विभिन्न विश्लेषकों का मानना है कि रणनीतिक और सुरक्षा कारणों से सैन्य कर्मियों के परिवारों को प्रशासनिक स्तर पर शीघ्रता से नागरिक सुविधाएं प्रदान करना कई देशों की आधिकारिक नीति का हिस्सा होता है।

    इस पूरे घटनाक्रम ने न केवल आम नागरिकों के बीच रक्षा बलों के प्रति आकर्षण और जागरूकता को बढ़ाया है, बल्कि इस बात पर भी ध्यान केंद्रित किया है कि आधुनिक युग में रक्षा बल केवल एक पेशा नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा की एक व्यापक गारंटी प्रदान करते हैं। सोशल मीडिया पर जारी यह बहस अब केवल सुविधाओं के आंकड़ों तक सीमित न रहकर इस बात का विश्लेषण बन चुकी है कि विभिन्न विकसित और विकासशील देश अपने सैनिकों के जीवन स्तर को सुरक्षित करने के लिए किस प्रकार की नीतियां अपनाते हैं।

  • 8वें वेतन आयोग पर संसद में पहली बार फिटमेंट फैक्टर और फैमिली यूनिट पर चर्चा, सरकार ने दिया बड़ा जवाब

    8वें वेतन आयोग पर संसद में पहली बार फिटमेंट फैक्टर और फैमिली यूनिट पर चर्चा, सरकार ने दिया बड़ा जवाब

    नई दिल्ली। केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए महत्वपूर्ण माने जा रहे आठवें वेतन आयोग को लेकर चर्चाएं लगातार तेज होती जा रही हैं। वेतन वृद्धि, फिटमेंट फैक्टर और फैमिली यूनिट जैसे मुद्दों पर कर्मचारी संगठनों की ओर से लगातार मांगें उठाई जा रही हैं। इसी बीच संसद में पहली बार इन दोनों अहम विषयों पर विस्तार से सवाल-जवाब हुए, जिससे लाखों कर्मचारियों और पेंशनर्स की निगाहें आयोग की आगामी प्रक्रिया पर टिक गई हैं।

    संसद में हुई चर्चा के दौरान सरकार से पूछा गया कि आठवें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर तय करते समय किन मानकों को आधार बनाया जाएगा और क्या फैमिली यूनिट की मौजूदा व्यवस्था में बदलाव पर विचार किया जा रहा है। सरकार ने अपने जवाब में स्पष्ट किया कि इन सभी विषयों पर अंतिम निर्णय आयोग की सिफारिशों के आधार पर ही लिया जाएगा। आयोग को स्वतंत्र रूप से अपनी रिपोर्ट तैयार करने और सरकार को सुझाव देने का अधिकार दिया गया है।

    फिटमेंट फैक्टर वह महत्वपूर्ण गुणांक होता है जिसके आधार पर केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के मूल वेतन और पेंशन में संशोधन किया जाता है। नए वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होने पर पुराने मूल वेतन को निर्धारित फिटमेंट फैक्टर से गुणा कर नया वेतन तय किया जाता है। यही कारण है कि कर्मचारी संगठनों की सबसे बड़ी मांग फिटमेंट फैक्टर को अधिक रखने की है ताकि वेतन में उल्लेखनीय वृद्धि हो सके।

    वर्तमान में विभिन्न कर्मचारी संगठनों की ओर से फिटमेंट फैक्टर को 3.68 तक रखने की मांग की जा रही है। वहीं कुछ अन्य संगठन इसे 3 से 3.5 के बीच निर्धारित करने की पैरवी कर रहे हैं। उनका तर्क है कि बढ़ती महंगाई, जीवन-यापन की लागत और कर्मचारियों की आर्थिक जरूरतों को देखते हुए बेहतर फिटमेंट फैक्टर तय किया जाना चाहिए। हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस संबंध में अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।

    फैमिली यूनिट को लेकर भी कर्मचारी और पेंशनर संगठनों ने अपनी मांग दोहराई है। उनकी मांग है कि वर्तमान व्यवस्था में परिवार की परिभाषा का विस्तार किया जाए और परिवार के सदस्यों की संख्या तीन से बढ़ाकर पांच की जाए, जिसमें माता-पिता को भी शामिल किया जाए। संसद में इस मुद्दे को भी उठाया गया और सरकार से इस संबंध में नीति स्पष्ट करने का आग्रह किया गया। हालांकि सरकार ने कहा कि इस विषय पर भी आयोग अपनी सिफारिशों के आधार पर विचार करेगा।

    सरकार ने यह भी बताया कि आठवें वेतन आयोग की बैठकें लगातार जारी हैं और आयोग विभिन्न राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों के कर्मचारियों और पेंशनर्स के प्रतिनिधियों से सुझाव प्राप्त कर रहा है। आगामी बैठक 7 अगस्त को दिल्ली में आयोजित होगी। इसके बाद सितंबर महीने में चेन्नई और पुडुचेरी में भी बैठकें प्रस्तावित हैं। आयोग ने संबंधित संगठनों से आग्रह किया है कि वे केवल अपने निर्धारित क्षेत्र की बैठकों में ही भाग लें, क्योंकि आयोग स्वयं विभिन्न राज्यों का दौरा कर सुझाव एकत्र कर रहा है।

    फिलहाल केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए सबसे बड़ा सवाल यही है कि फिटमेंट फैक्टर कितना तय होगा और वेतन में वास्तविक बढ़ोतरी कितनी होगी। सरकार ने साफ किया है कि आयोग की अंतिम रिपोर्ट मिलने के बाद ही इस पर निर्णय लिया जाएगा। ऐसे में फिलहाल सभी की नजरें आयोग की आगामी बैठकों और अंतिम सिफारिशों पर बनी हुई हैं।

  • आईटीआर फाइलिंग ने पार किया 5 करोड़ का आंकड़ा, आयकर विभाग बोला- अंतिम दिन की जल्दबाजी से बचें

    आईटीआर फाइलिंग ने पार किया 5 करोड़ का आंकड़ा, आयकर विभाग बोला- अंतिम दिन की जल्दबाजी से बचें

    नई दिल्ली । असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए आयकर रिटर्न दाखिल करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। निर्धारित अंतिम तारीख 31 जुलाई से ठीक पहले 5 करोड़ से अधिक करदाताओं ने अपना आयकर रिटर्न दाखिल कर दिया है। इसके साथ ही आयकर विभाग ने शेष पात्र करदाताओं से अपील की है कि वे अंतिम दिन तक इंतजार करने के बजाय जल्द से जल्द अपना रिटर्न दाखिल कर लें। विभाग का कहना है कि समय रहते रिटर्न फाइल करने से अंतिम समय में संभावित तकनीकी दिक्कतों और अनावश्यक भागदौड़ से बचा जा सकता है।

    आयकर विभाग ने अपने आधिकारिक संदेश के माध्यम से बताया कि असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए 5 करोड़ से अधिक आयकर रिटर्न सफलतापूर्वक दाखिल किए जा चुके हैं। विभाग ने विशेष रूप से उन करदाताओं को सलाह दी है, जिन्हें आईटीआर-1 या आईटीआर-2 फॉर्म के माध्यम से रिटर्न दाखिल करना है, वे अपने दस्तावेजों का मिलान करने के बाद बिना देरी के रिटर्न जमा करें। विभाग का मानना है कि अंतिम दिन बड़ी संख्या में उपयोगकर्ताओं के एक साथ पोर्टल पर आने से तकनीकी दबाव बढ़ सकता है, जिससे रिटर्न दाखिल करने में परेशानी हो सकती है।

    31 जुलाई की समयसीमा उन करदाताओं के लिए निर्धारित है, जिनके खातों का ऑडिट कराना आवश्यक नहीं है। ऐसे में बड़ी संख्या में वेतनभोगी कर्मचारियों, पेंशनभोगियों और अन्य सामान्य करदाताओं के लिए समय पर रिटर्न दाखिल करना महत्वपूर्ण माना जा रहा है। निर्धारित समय के भीतर रिटर्न दाखिल करने से आगे की प्रक्रिया भी सुगमता से पूरी हो सकती है और आवश्यक होने पर रिफंड की प्रक्रिया भी समय पर शुरू हो सकती है।

    विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि रिटर्न दाखिल करने से पहले सभी करदाता अपने वित्तीय विवरणों का सावधानीपूर्वक सत्यापन अवश्य करें। इसके लिए फॉर्म-16, वार्षिक सूचना विवरण, फॉर्म-26एएस, बैंक स्टेटमेंट तथा आय से संबंधित अन्य दस्तावेजों का मिलान करना जरूरी है। यदि किसी दस्तावेज में दर्ज जानकारी और रिटर्न में भरी गई जानकारी में अंतर पाया जाता है, तो भविष्य में नोटिस या स्पष्टीकरण की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। इसलिए विभाग ने सही और पूर्ण जानकारी के आधार पर रिटर्न दाखिल करने पर जोर दिया है।

    आयकर विभाग पिछले कई दिनों से लगातार करदाताओं को समय पर रिटर्न दाखिल करने के लिए जागरूक कर रहा है। विभाग का कहना है कि अंतिम समय तक प्रतीक्षा करने की प्रवृत्ति के कारण पोर्टल पर अचानक अत्यधिक ट्रैफिक बढ़ जाता है, जिससे तकनीकी समस्याएं सामने आ सकती हैं। ऐसे में समय रहते प्रक्रिया पूरी करना करदाताओं के हित में रहेगा और अनावश्यक तनाव से भी बचाव होगा।

    पिछले वित्त वर्ष के आंकड़े भी आयकर प्रणाली में बढ़ती भागीदारी को दर्शाते हैं। वित्त वर्ष 2024-25 में 31 मार्च 2025 तक 9 करोड़ से अधिक करदाताओं ने आयकर रिटर्न दाखिल किए थे। इनमें से 8.64 करोड़ रिटर्न का ई-वेरिफिकेशन भी पूरा किया गया था। इसी अवधि में 4,35,008 करोड़ रुपये से अधिक के रिफंड जारी किए गए, जिससे यह स्पष्ट होता है कि समय पर और सही तरीके से रिटर्न दाखिल करने वाले करदाताओं को प्रक्रिया का लाभ तेजी से मिल सकता है। ऐसे में विभाग ने एक बार फिर सभी पात्र करदाताओं से अपील की है कि वे अंतिम तारीख से पहले अपना आयकर रिटर्न दाखिल कर निर्धारित प्रक्रिया को समय पर पूरा करें।

  • भोपाल में किसानों का शक्ति प्रदर्शन, राजधानी दो दिन रही थमी, सरकार ने मानी बड़ी मांगें, आंदोलन हुआ खत्म

    भोपाल में किसानों का शक्ति प्रदर्शन, राजधानी दो दिन रही थमी, सरकार ने मानी बड़ी मांगें, आंदोलन हुआ खत्म


    भोपाल । भोपाल में किसानों के आंदोलन ने दो दिनों तक राजधानी की रफ्तार लगभग थाम दी। मूंग की समर्थन मूल्य पर खरीदी और खाद वितरण व्यवस्था में बदलाव की मांग को लेकर नर्मदापुरम हरदा सीहोर समेत कई जिलों से आए हजारों किसानों ने ऐसा दबाव बनाया कि आखिरकार सरकार को बातचीत की मेज पर आना पड़ा। किसान एक के बाद एक 22 बैरिकेड पार करते हुए मुख्यमंत्री निवास से महज एक किलोमीटर पहले तक पहुंच गए। उनके सामने केवल तीन बैरिकेड शेष थे। इसी दौरान सरकार ने वार्ता का रास्ता अपनाया और देर रात आंदोलन समाप्त हो गया।

    आंदोलन के चलते रोशनपुरा न्यू मार्केट और मुख्यमंत्री निवास के आसपास का पूरा इलाका पुलिस छावनी में तब्दील हो गया। कई स्कूलों में छुट्टी घोषित करनी पड़ी जबकि प्रमुख मार्गों पर स्कूल बसों और गिट्टी से भरे डंपरों को बैरिकेड के रूप में खड़ा कर यातायात रोकने की कोशिश की गई। इसके बावजूद किसानों का काफिला लगातार आगे बढ़ता रहा और पुलिस की अधिकांश रणनीतियां नाकाम साबित हुईं।

    सुबह मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने कृषक कल्याण वर्ष के तहत किसानों से संवाद कर समस्याओं का समाधान निकालने की बात कही थी। लेकिन जब प्रदर्शनकारी रोशनपुरा तक पहुंच गए तब सरकार ने कृषि मंत्री एदल सिंह कंषाना विश्वास सारंग और कृष्णा गौर सहित चार मंत्रियों की समिति गठित कर किसान नेताओं से बातचीत शुरू कराई। मंत्रालय में करीब दो घंटे चली चर्चा के बाद सरकार ने कई अहम घोषणाएं कीं।

    सरकार ने मूंग खरीदी की सीमा 25 प्रतिशत से बढ़ाकर 60 प्रतिशत करने का फैसला लिया। इसके साथ ही खाद वितरण की ई टोकन व्यवस्था को तत्काल प्रभाव से स्थगित कर दिया गया। स्लॉट बुकिंग की अंतिम तिथि 10 अगस्त तक और खरीदी की अंतिम तिथि 20 अगस्त तक बढ़ा दी गई। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि भविष्य में खाद वितरण हाईब्रिड व्यवस्था के तहत किया जाएगा जिसमें आधार नंबर मोबाइल नंबर और वितरण का पूरा रिकॉर्ड ऑनलाइन दर्ज रहेगा।

    हालांकि किसान नेताओं ने कहा कि सरकार ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है लेकिन उनकी मूल मांग अब भी पूरी नहीं हुई है। किसानों का कहना है कि उनकी पूरी मूंग की फसल समर्थन मूल्य पर खरीदी जानी चाहिए और वे इस मांग से पीछे नहीं हटेंगे। संगठन के नेताओं ने स्पष्ट किया कि यदि आगे भी जरूरत पड़ी तो आंदोलन दोबारा किया जाएगा।

    इस आंदोलन के दौरान पुलिस ने किसानों को रोकने के लिए हर संभव प्रयास किए। नर्मदापुरम हरदा इटारसी और भैरूंदा सहित कई स्थानों पर प्रदर्शनकारियों को रोकने की कोशिश हुई। करीब 60 किसान नेताओं को हिरासत में भी लिया गया लेकिन बाद में उन्हें छोड़ना पड़ा। इसके बावजूद किसान बड़ी संख्या में भोपाल पहुंचने में सफल रहे और सरकार को अंततः वार्ता के लिए मजबूर होना पड़ा।

    इधर केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राज्य सरकार को लिखे पत्र में स्पष्ट किया कि केंद्र ने मध्य प्रदेश को देश में सबसे अधिक 4.54 लाख टन मूंग खरीदी की स्वीकृति दी है। उन्होंने कहा कि पहले स्वीकृत कोटे की पूरी खरीदी की जाए उसके बाद अतिरिक्त कोटे पर विचार किया जाएगा।

    करीब दो दिन तक चले इस आंदोलन के बाद देर रात किसानों ने धरना समाप्त कर दिया और वापस लौटना शुरू किया। जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि आंदोलन खत्म होने के बाद गुरुवार से स्कूल और सामान्य यातायात पूर्ववत संचालित होंगे।

  • मनीपाल हेल्थ आईपीओ में लिस्टिंग गेन सीमित, मजबूत कारोबार के दम पर दीर्घकालिक निवेश की सलाह

    मनीपाल हेल्थ आईपीओ में लिस्टिंग गेन सीमित, मजबूत कारोबार के दम पर दीर्घकालिक निवेश की सलाह

    नई दिल्ली । देश के हेल्थकेयर सेक्टर की प्रमुख अस्पताल श्रृंखलाओं में शामिल मनीपाल हेल्थ एंटरप्राइजेज का ₹9,275.22 करोड़ का आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) निवेशकों के लिए खुल चुका है। कंपनी इस सार्वजनिक निर्गम के माध्यम से अपने विस्तार की योजनाओं को गति देने के साथ-साथ कर्ज का बोझ कम करने का लक्ष्य लेकर चल रही है। पहले दिन मिले शुरुआती निवेशकों के रुझान के बाद बाजार में यह चर्चा तेज है कि इस आईपीओ में निवेश करना कितना लाभदायक हो सकता है और किन निवेशकों के लिए यह अवसर उपयुक्त माना जा रहा है।

    मनीपाल हेल्थ देश की सबसे बड़ी निजी अस्पताल श्रृंखलाओं में गिनी जाती है। कंपनी के नेटवर्क में 13,000 से अधिक बेड उपलब्ध हैं और पिछले कुछ वर्षों में इसने नए अस्पताल स्थापित करने के साथ-साथ अस्पतालों के अधिग्रहण के जरिए अपने कारोबार का लगातार विस्तार किया है। मजबूत ब्रांड पहचान, व्यापक उपस्थिति और स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में लंबे अनुभव ने कंपनी को उद्योग की प्रमुख संस्थाओं में शामिल किया है।

    कंपनी की एक बड़ी विशेषता इसके प्रमोटर समूह और संस्थागत निवेशकों की मजबूत भागीदारी मानी जा रही है। वैश्विक स्तर के प्रतिष्ठित निवेशकों की मौजूदगी से कंपनी की विश्वसनीयता को मजबूती मिली है। साथ ही, बीते वर्षों में कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन में भी सुधार देखने को मिला है, जिससे इसके भविष्य की विकास संभावनाओं को लेकर निवेशकों का भरोसा बढ़ा है।

    आईपीओ के मूल्यांकन को भी उद्योग के अन्य सूचीबद्ध अस्पताल समूहों की तुलना में प्रतिस्पर्धी माना जा रहा है। कंपनी ने प्रति शेयर ₹560 से ₹590 का प्राइस बैंड तय किया है। विश्लेषकों का मानना है कि यह मूल्यांकन बाजार की मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए संतुलित दिखाई देता है। सार्वजनिक निर्गम से प्राप्त राशि का बड़ा हिस्सा कंपनी अपने मौजूदा कर्ज को कम करने में लगाएगी, जिससे भविष्य में ब्याज व्यय में उल्लेखनीय कमी आने की संभावना है। इससे कंपनी की लाभप्रदता और नकदी प्रवाह दोनों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

    हालांकि निवेशकों के सामने कुछ जोखिम भी मौजूद हैं। कंपनी की आय का लगभग 46 प्रतिशत हिस्सा केवल कर्नाटक से आता है, जिससे किसी एक भौगोलिक क्षेत्र पर अधिक निर्भरता का जोखिम बना रहता है। यदि उस क्षेत्र में कारोबार प्रभावित होता है तो कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन पर असर पड़ सकता है। हालांकि कंपनी अन्य राज्यों में नए अस्पताल शुरू करने और अपनी मौजूदगी बढ़ाने की दिशा में लगातार काम कर रही है, जिससे भविष्य में यह निर्भरता कम होने की उम्मीद है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि इस आईपीओ से पहले दिन भारी प्रीमियम पर लिस्टिंग की संभावना सीमित हो सकती है। इसलिए केवल अल्पकालिक मुनाफे या लिस्टिंग गेन की उम्मीद रखने वाले निवेशकों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल सकता। इसके विपरीत, जिन निवेशकों का निवेश दृष्टिकोण तीन वर्ष या उससे अधिक का है, उनके लिए यह आईपीओ बेहतर विकल्प माना जा रहा है। स्वास्थ्य सेवाओं की बढ़ती मांग, कंपनी का मजबूत प्रबंधन और विस्तार की योजनाएं इसे लंबी अवधि में संभावनाओं वाला निवेश बना सकती हैं।

    मनीपाल हेल्थ का आईपीओ 29 जुलाई से 31 जुलाई 2026 तक निवेशकों के लिए खुला है। कंपनी इस निर्गम के जरिए कुल ₹9,275.22 करोड़ जुटाने की योजना पर काम कर रही है। इसमें नए शेयर जारी करने के साथ ऑफर फॉर सेल भी शामिल है। रिटेल निवेशकों के लिए न्यूनतम 25 शेयरों का एक लॉट निर्धारित किया गया है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्गम उन निवेशकों के लिए अधिक उपयुक्त हो सकता है जो गुणवत्तापूर्ण कंपनियों में लंबी अवधि के निवेश के माध्यम से स्थिर रिटर्न की तलाश कर रहे हैं।

  • सोना-चांदी के दामों में हलचल, जानिए आज 10 ग्राम गोल्ड का नया रेट

    सोना-चांदी के दामों में हलचल, जानिए आज 10 ग्राम गोल्ड का नया रेट


    नई दिल्ली ।
    अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति बैठक के बाद गुरुवार को वैश्विक और घरेलू सर्राफा बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में उल्लेखनीय बदलाव देखने को मिला। ब्याज दरों को यथावत रखने के फैसले के बाद शुरुआती कारोबार में सोने की कीमतों में तेजी दर्ज की गई, लेकिन कुछ ही घंटों बाद बाजार में मुनाफावसूली और निवेशकों की बदली रणनीति के कारण कीमतों में फिर नरमी आ गई। इसका असर भारतीय बाजार में भी दिखाई दिया, जहां सोने और चांदी के ताजा भाव में बदलाव दर्ज किया गया।

    अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने अपनी बेंचमार्क ब्याज दर को 3.50 प्रतिशत से 3.75 प्रतिशत के दायरे में बरकरार रखने का निर्णय लिया। बाजार पहले से ही इस फैसले की संभावना जता रहा था, लेकिन निवेशकों की निगाहें महंगाई और भविष्य की मौद्रिक नीति को लेकर फेड नेतृत्व की टिप्पणियों पर टिकी रहीं। महंगाई को निर्धारित लक्ष्य के करीब लाने की चुनौती बरकरार रहने के कारण निवेशकों ने सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर भी ध्यान दिया।

    फेड के फैसले के तुरंत बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट गोल्ड की कीमत में तेजी आई और यह लगभग 4,078 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गया। शुरुआती कारोबार के दौरान कीमतें 4,080 डॉलर प्रति औंस के स्तर को भी छूती दिखाई दीं। हालांकि यह तेजी लंबे समय तक कायम नहीं रह सकी और बाद में बाजार में बिकवाली बढ़ने से सोने का भाव घटकर करीब 4,058 डॉलर प्रति औंस पर आ गया। अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स में भी शुरुआती मजबूती के बाद इसी तरह का रुख देखने को मिला।

    वैश्विक बाजार में आई इस हलचल का असर घरेलू सर्राफा बाजार पर भी पड़ा। भारतीय बाजार में 10 ग्राम सोने की कीमत लगभग 1,47,000 रुपये के स्तर तक पहुंच गई। वहीं चांदी के दाम में भी बढ़त दर्ज की गई और इसका भाव करीब 2,25,300 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गया। कारोबारियों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय संकेतों और डॉलर की चाल का असर आने वाले कारोबारी सत्रों में भी घरेलू कीमतों पर देखने को मिल सकता है।

    वायदा बाजार में भी सोने के दाम मजबूत रहे। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर 10 ग्राम सोना लगभग 570 रुपये की बढ़त के साथ 1,42,192 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार करता दिखाई दिया। इसके विपरीत एमसीएक्स पर चांदी की कीमतों में कमजोरी रही और इसका भाव करीब 852 रुपये घटकर 2,16,652 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गया। इससे स्पष्ट है कि हाजिर और वायदा बाजार में निवेशकों की रणनीति अलग-अलग बनी हुई है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में सोने और चांदी की कीमतों की दिशा मुख्य रूप से वैश्विक आर्थिक संकेतकों, अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों, डॉलर इंडेक्स की चाल और केंद्रीय बैंकों की भविष्य की नीति पर निर्भर करेगी। यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनिश्चितता बनी रहती है तो सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की मांग बढ़ सकती है। वहीं आर्थिक संकेतकों में सुधार और डॉलर की मजबूती की स्थिति में कीमतों पर दबाव भी देखने को मिल सकता है।

    बाजार विश्लेषकों का कहना है कि फिलहाल निवेशकों को अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों और घरेलू बाजार के रुझानों पर लगातार नजर रखनी चाहिए। सोने और चांदी की कीमतों में हाल के दिनों में लगातार उतार-चढ़ाव देखा गया है, इसलिए निवेश संबंधी निर्णय बाजार की मौजूदा स्थिति और दीर्घकालिक रणनीति को ध्यान में रखकर लेना अधिक उपयुक्त माना जा रहा है।

  • फेड के ब्याज दर फैसले के बाद अमेरिकी बाजार में भारी गिरावट, वैश्विक दबाव के बीच भारतीय शेयर बाजार ने दिखाई मजबूती

    फेड के ब्याज दर फैसले के बाद अमेरिकी बाजार में भारी गिरावट, वैश्विक दबाव के बीच भारतीय शेयर बाजार ने दिखाई मजबूती

    नई दिल्ली । अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति के फैसले के बाद वैश्विक वित्तीय बाजारों में उतार-चढ़ाव देखने को मिला। ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करने के फैसले से अमेरिकी निवेशकों की उम्मीदों को झटका लगा, जिसके चलते अमेरिकी शेयर बाजार में तेज बिकवाली दर्ज की गई। दूसरी ओर, वैश्विक दबाव के बावजूद भारतीय शेयर बाजार ने अपेक्षाकृत स्थिर शुरुआत की और शुरुआती कारोबार में प्रमुख सूचकांक बढ़त के साथ कारोबार करते दिखाई दिए।

    अमेरिका में डॉऊ जोंस इंडस्ट्रियल एवरेज कारोबार के दौरान 1,100 अंकों से अधिक तक फिसल गया। इसके साथ ही नैस्डैक और एसएंडपी 500 सूचकांकों में भी उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि निवेशकों को ब्याज दरों को लेकर अधिक स्पष्ट संकेतों की उम्मीद थी, लेकिन फेडरल रिजर्व द्वारा मौजूदा दरों को बरकरार रखने के फैसले ने बाजार की धारणा को प्रभावित किया। इसके बाद निवेशकों ने जोखिम वाले निवेश से दूरी बनानी शुरू कर दी, जिससे व्यापक बिकवाली देखने को मिली।

    फेडरल रिजर्व ने अपनी नीति समीक्षा के बाद ब्याज दरों को 3.50 से 3.75 प्रतिशत के दायरे में बनाए रखने का निर्णय लिया। केंद्रीय बैंक ने यह संकेत भी दिया कि महंगाई पर पूरी तरह नियंत्रण पाने की प्रक्रिया अभी जारी है और भविष्य के निर्णय आर्थिक आंकड़ों के आधार पर लिए जाएंगे। इसी कारण बाजार को निकट भविष्य में ब्याज दरों को लेकर कोई स्पष्ट दिशा नहीं मिल सकी।

    अमेरिकी बाजार में आई गिरावट का असर एशियाई बाजारों पर भी दिखाई दिया, हालांकि विभिन्न देशों के बाजारों में मिश्रित रुख रहा। कुछ प्रमुख एशियाई सूचकांकों में बढ़त दर्ज की गई, जबकि कुछ बाजारों में हल्की कमजोरी देखने को मिली। इससे यह स्पष्ट हुआ कि निवेशक वैश्विक आर्थिक संकेतकों और अमेरिकी मौद्रिक नीति के संभावित प्रभाव का आकलन करने में जुटे हुए हैं।

    वैश्विक दबाव के बावजूद भारतीय शेयर बाजार ने अपेक्षाकृत संतुलित प्रदर्शन किया। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों हरे निशान के साथ खुले। बाजार में ऑटोमोबाइल और सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र के शेयरों में खरीदारी देखने को मिली, जबकि बैंकिंग और रियल एस्टेट क्षेत्र के कुछ शेयरों पर दबाव बना रहा। विश्लेषकों का मानना है कि घरेलू निवेशकों का भरोसा और भारतीय अर्थव्यवस्था की अपेक्षाकृत मजबूत स्थिति ने बाजार को शुरुआती समर्थन दिया।

    विदेशी बाजारों की हलचल के बीच भारतीय मुद्रा में भी मजबूती दर्ज की गई। शुरुआती कारोबार में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले छह पैसे मजबूत होकर 95.59 के स्तर पर पहुंच गया। मुद्रा बाजार के जानकारों का कहना है कि घरेलू बाजार की स्थिरता और विदेशी मुद्रा प्रवाह से रुपये को समर्थन मिला, हालांकि वैश्विक घटनाक्रमों पर निवेशकों की नजर बनी हुई है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में वैश्विक बाजारों की दिशा काफी हद तक अमेरिका से आने वाले आर्थिक आंकड़ों, महंगाई के रुझान और फेडरल रिजर्व की भविष्य की नीति पर निर्भर करेगी। वहीं भारतीय बाजार में भी विदेशी निवेश, कंपनियों के तिमाही नतीजे और वैश्विक संकेतकों का असर देखने को मिल सकता है। फिलहाल निवेशकों की निगाहें अंतरराष्ट्रीय आर्थिक परिस्थितियों और घरेलू बाजार की मजबूती के बीच संतुलन पर बनी हुई हैं।