Author: bharati

  • तीन तेज गेंदबाज और ऑलराउंडर की मौजूदगी, प्रिंस के लिए जगह बनाना चुनौती

    तीन तेज गेंदबाज और ऑलराउंडर की मौजूदगी, प्रिंस के लिए जगह बनाना चुनौती


    नई दिल्ली। जसप्रीत बुमराह को आराम दिए जाने के बाद भी भारत की तेज गेंदबाजी लाइन-अप कमजोर नहीं हुई है। जिम्मेदारी अब मोहम्मद सिराज के कंधों पर होगी, जिनके साथ अर्शदीप सिंह और हर्षित राणा जैसे विकल्प मौजूद हैं। हर्षित राणा की खासियत यह है कि वह गेंदबाजी के साथ-साथ निचले क्रम में बल्लेबाजी भी कर सकते हैं, जिससे उनकी प्लेइंग-11 में दावेदारी और मजबूत हो जाती है।

    प्रिंस यादव के लिए चुनौती क्यों बढ़ी?
    प्रिंस यादव ने आईपीएल 2026 में शानदार प्रदर्शन करते हुए 14 मैचों में 16 विकेट लिए थे। उन्होंने एक यादगार स्पेल में विराट कोहली को भी क्लीन बोल्ड कर सुर्खियां बटोरी थीं। इसके बावजूद टीम में पहले से ही स्थापित तेज गेंदबाज मौजूद हैं, जिससे प्रिंस को सीधे प्लेइंग-11 में जगह मिलना मुश्किल लग रहा है।

    ऑलराउंडर्स ने भी बढ़ाई प्रतिस्पर्धा
    टीम में नीतीश कुमार रेड्डी और शिवम दुबे जैसे खिलाड़ी भी शामिल हैं, जो गेंद और बल्ले दोनों से योगदान दे सकते हैं। ऐसे में टीम मैनेजमेंट अक्सर ऐसे खिलाड़ियों को प्राथमिकता देता है जो अतिरिक्त बैलेंस प्रदान करते हैं।

    क्या सिर्फ एक-दो मैच का मौका मिलेगा?
    सूत्रों के अनुसार, अगर प्रिंस यादव को मौका मिलता भी है, तो वह संभवतः आयरलैंड के खिलाफ शुरुआती मैचों तक सीमित रह सकता है। क्योंकि इस दौरे पर भारत को सिर्फ दो टी20 मुकाबले आयरलैंड के खिलाफ खेलने हैं।

    चयन पर भी उठ रहे सवाल
    विशेषज्ञों का मानना है कि अगर प्रिंस को लगातार मैच खेलने का मौका नहीं मिलता, तो उन्हें भारत ए या किसी अन्य डेवलपमेंट सीरीज में भेजना ज्यादा उपयोगी हो सकता था, जहां उन्हें नियमित गेम टाइम मिलता।

    टीम इंडिया की तेज गेंदबाजी यूनिट इस समय बेहद प्रतिस्पर्धी है, और यही वजह है कि प्रिंस यादव के लिए प्लेइंग-11 में जगह बनाना आसान नहीं दिख रहा। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि टीम मैनेजमेंट उन्हें मौका देकर भविष्य का निवेश मानता है या नहीं।

  • खाकी का खौफ खत्म! मुरैना में चेकिंग टीम पर हमला कर ट्रैक्टर सहित फरार हुए आरोपी, पुलिस ने शुरू की नाकाबंदी

    खाकी का खौफ खत्म! मुरैना में चेकिंग टीम पर हमला कर ट्रैक्टर सहित फरार हुए आरोपी, पुलिस ने शुरू की नाकाबंदी

    मध्य प्रदेश । मुरैना जिले में चंबल की प्रतिबंधित रेत के अवैध उत्खनन और परिवहन में लिप्त माफियाओं के हौसले इस कदर बुलंद हैं कि उन्हें अब कानून और प्रशासन का कोई डर नहीं रह गया है। सिविल लाइन थाना क्षेत्र के अंतर्गत नेशनल हाईवे-44 पर नहर के समीप अवैध रेत के परिवहन के खिलाफ कार्रवाई करने उतरी परिवहन विभाग (RTO) की संयुक्त चेकिंग टीम पर हमला करने और उन्हें वाहन से कुचलने का एक सनसनीखेज मामला प्रकाश में आया है। इस जानलेवा हमले के दौरान मौके पर मौजूद परिवहन अधिकारी और सुरक्षाकर्मी बेहद बाल-बाल बचे।

    प्राप्त विवरण के अनुसार, परिवहन विभाग की टीम वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर राष्ट्रीय राजमार्ग से गुजरने वाले संदिग्ध और ओवरलोड वाहनों की नियमित चेकिंग कर रही थी। इसी दौरान टीम को अवैध उत्खनन कर लाई जा रही रेत से भरी एक तेज रफ्तार ट्रैक्टर-ट्रॉली आती हुई दिखाई दी। आरटीओ के कर्मचारियों ने जब नियमानुसार उस वाहन को रुकने का इशारा किया, तो ट्रैक्टर चालक ने वाहन की रफ्तार धीमी करने के बजाय उसे सीधे चेकिंग कर रहे अधिकारियों और कर्मचारियों की तरफ मोड़ दिया और उन्हें कुचलने का प्रयास किया।

    वहां तैनात सुरक्षाकर्मियों और आरटीओ अमले ने समय रहते मुस्तैदी दिखाई और सड़क किनारे कूदकर अपनी जान बचाई। शासकीय टीम को निशाना बनाने के तुरंत बाद आरोपी चालक बेहद लापरवाही और तेज गति से ट्रैक्टर-ट्रॉली को दौड़ाते हुए मौके से फरार हो गया। इस अप्रत्याशित हमले से हाईवे पर कुछ समय के लिए अफरा-तफरी की स्थिति निर्मित हो गई। घटना की सूचना मिलते ही सिविल लाइन थाना पुलिस तुरंत हरकत में आई और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के निर्देश पर क्षेत्र में सघन नाकाबंदी लागू की गई।

    परिवहन विभाग के अधिकारियों द्वारा घटना के संबंध में सिविल लाइन थाने में एक औपचारिक लिखित शिकायत दर्ज कराई गई है, जिसके आधार पर पुलिस ने शासकीय कार्य में बाधा डालने, जानलेवा हमला करने और अवैध खनिज परिवहन की विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत अज्ञात माफियाओं के खिलाफ आपराधिक मामला पंजीकृत कर लिया है। पुलिस प्रशासन द्वारा हाईवे और उसके आसपास के क्षेत्रों में लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले जा रहे हैं ताकि हमलावर ट्रैक्टर और उसके चालक की सटीक पहचान की जा सके।

    मुरैना और चंबल संभाग में कानून प्रवर्तन एजेंसियों और प्रशासनिक टीमों पर खनन माफियाओं द्वारा हमले का यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी इस क्षेत्र में पुलिस, वन विभाग और राजस्व टीम को निशाना बनाए जाने की कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं। स्थानीय प्रशासन ने इस घटना को बेहद गंभीरता से लिया है और दावा किया है कि सरकारी अमले पर हमला करने वाले तत्वों को जल्द ही गिरफ्तार कर उनके खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी और प्रतिबंधात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

  • टीम इंडिया की गेंदबाजी ने दिखाया दम, अफगानिस्तान की पारी लड़खड़ाई

    टीम इंडिया की गेंदबाजी ने दिखाया दम, अफगानिस्तान की पारी लड़खड़ाई


    नई दिल्ली। भारत के 564 रनों के जवाब में अफगानिस्तान की शुरुआत ही कमजोर रही। टीम ने तीसरे दिन 113/5 से आगे खेलना शुरू किया, लेकिन इसके बाद बल्लेबाजी क्रम पूरी तरह बिखर गया। केवल अनुभवी बल्लेबाज रहमत शाह ही टिककर खेल सके और उन्होंने 60 रनों की उपयोगी पारी खेली, लेकिन उन्हें दूसरे छोर से कोई खास समर्थन नहीं मिला।

    मानव सुथार का ‘अबूझ पहेली’ जैसा डेब्यू
    मानव सुथार ने अपने टेस्ट डेब्यू को यादगार बना दिया। उन्होंने अफगान बल्लेबाजों को पूरी तरह परेशान करते हुए 33 रन देकर 6 विकेट अपने नाम किए। उनकी गेंदबाजी इतनी प्रभावशाली रही कि अफगानिस्तान के बल्लेबाज लगातार दबाव में नजर आए और एक के बाद एक विकेट गिरते चले गए।

    तेज गेंदबाजों का भी योगदान
    भारत की ओर से प्रसिद्ध कृष्णा ने भी शानदार गेंदबाजी करते हुए 3 विकेट झटके, जबकि वॉशिंगटन सुंदर को एक सफलता मिली। भारतीय गेंदबाजों के सामूहिक प्रदर्शन ने अफगानिस्तान को पूरी तरह बैकफुट पर धकेल दिया।

    भारत की मजबूत पकड़
    पहली पारी के आधार पर भारत ने 412 रनों की विशाल बढ़त हासिल कर ली है, जिससे मुकाबला पूरी तरह एकतरफा होता नजर आ रहा है। भारत की बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों ही विभागों ने अब तक शानदार प्रदर्शन किया है।

    डेब्यू मैच में ही मानव सुथार ने जिस तरह का प्रदर्शन किया है, उसने उन्हें भविष्य के बड़े स्पिनरों की सूची में चर्चा में ला दिया है। अफगानिस्तान के लिए यह मैच मुश्किल साबित हो रहा है, जबकि भारत पूरी तरह नियंत्रण में है।

  • चार घंटे से अधिक चले रोमांचक संघर्ष में ज्वेरेव ने कोबोली को दी शिकस्त, रचा ऐतिहासिक कीर्तिमान

    चार घंटे से अधिक चले रोमांचक संघर्ष में ज्वेरेव ने कोबोली को दी शिकस्त, रचा ऐतिहासिक कीर्तिमान

    नई दिल्ली । विश्व टेनिस परिदृश्य पर जर्मनी के स्टार खिलाड़ी अलेक्जेंडर ज्वेरेव ने आखिरकार अपने करियर का सबसे बड़ा मील का पत्थर हासिल करते हुए इतिहास के पन्नों में अपना नाम स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज करा लिया है। पेरिस के प्रतिष्ठित क्ले कोर्ट पर खेले गए फ्रेंच ओपन 2026 के पुरुष एकल वर्ग के खिताबी मुकाबले में विश्व नंबर-3 ज्वेरेव ने अपनी खेल क्षमता और मानसिक दृढ़ता का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। उन्होंने पांच सेट तक खिंचे बेहद कड़े और सांस रोक देने वाले फाइनल मैच में इटली के उभरते हुए खिलाड़ी फ्लेवियो कोबोली की चुनौती को ध्वस्त करते हुए अपने जीवन का पहला ग्रैंड स्लैम खिताब जीत लिया।

    अंतरराष्ट्रीय टेनिस कैलेंडर के इस बेहद महत्वपूर्ण खिताबी मुकाबले में दोनों खिलाड़ियों के बीच करीब चार घंटे और 20 मिनट तक मैराथन संघर्ष देखा गया। अलेक्जेंडर ज्वेरेव ने अंततः कोबोली को 6-1, 4-6, 6-4, 6-7(5), 6-1 से मात देकर रोलां गैरो की चमचमाती ट्रॉफी पर कब्जा जमाया। मैच का अंतिम और निर्णायक अंक जीतते ही जर्मन खिलाड़ी कोर्ट पर ही बेहद भावुक नजर आए। उनके लिए यह जीत इसलिए भी ऐतिहासिक है क्योंकि इससे पहले वे तीन बड़े ग्रैंड स्लैम फाइनल मुकाबलों में पहुंचकर भी उपविजेता बनकर रह गए थे, जिसमें 2020 का यूएस ओपन, 2024 का फ्रेंच ओपन और 2025 का ऑस्ट्रेलियन ओपन शामिल है।

    मैच की तकनीकी समीक्षा की जाए तो ज्वेरेव ने मुकाबले की आक्रामक शुरुआत करते हुए पहले सेट में पूरी तरह अपना दबदबा कायम किया और महज 34 मिनट के भीतर इसे 6-1 से अपने पक्ष में कर लिया। इसके बाद अपना पहला ग्रैंड स्लैम फाइनल खेल रहे इटली के फ्लेवियो कोबोली ने दूसरे सेट में शानदार वापसी की। कोबोली ने अपने बेहतरीन ड्रॉप शॉट्स और आक्रामक ग्राउंडस्ट्रोक्स के दम पर ज्वेरेव की सर्विस ब्रेक की और दूसरा सेट 6-4 से जीतकर मैच में रोमांच वापस ला दिया। तीसरे सेट में भी दोनों के बीच कांटे की टक्कर रही, लेकिन कोबोली की कुछ अप्रत्याशित गलतियों का लाभ उठाकर ज्वेरेव ने इसे 6-4 से जीत लिया।

    चौथे सेट में दोनों खिलाड़ियों का जज्बा चरम पर था जहां इतालवी खिलाड़ी कोबोली ने टाई-ब्रेकर में शानदार फोरहैंड विनर लगाते हुए खेल को निर्णायक पांचवें सेट में धकेल दिया। हालांकि, अंतिम सेट में ज्वेरेव ने एक सच्चे चैंपियन की तरह वापसी की और अपनी सर्विस पर 83 प्रतिशत अंक हासिल करते हुए कोबोली पर मानसिक दबाव बना दिया। ज्वेरेव ने शुरुआती गेम में ही विरोधी की सर्विस ब्रेक की और पीछे मुड़कर नहीं देखा तथा अंतिम सेट 6-1 से जीतकर खिताब अपने नाम कर लिया।

    इस ऐतिहासिक विजय के साथ ही अलेक्जेंडर ज्वेरेव ने जर्मन टेनिस के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ दिया है। वह साल 1937 में हेनर हेन्केल के बाद फ्रेंच ओपन का पुरुष एकल खिताब जीतने वाले पहले जर्मन खिलाड़ी बन गए हैं। इसके अतिरिक्त, वर्ष 1996 के ऑस्ट्रेलियन ओपन में बोरिस बेकर की ऐतिहासिक जीत के बाद वे किसी भी ग्रैंड स्लैम इवेंट में पुरुष एकल का खिताब जीतने वाले पहले जर्मन पुरुष खिलाड़ी बने हैं। दूसरी ओर, उपविजेता रहे कोबोली भले ही खिताब से चूक गए हों, लेकिन इस टूर्नामेंट में उनके शानदार प्रदर्शन के दम पर वे विश्व रैंकिंग में शीर्ष-10 के बेहद करीब पहुंच गए हैं।

  • किस टीम ने कितनी बार खेला फाइनल? जानिए महिला टी20 विश्व कप का रिकॉर्ड

    किस टीम ने कितनी बार खेला फाइनल? जानिए महिला टी20 विश्व कप का रिकॉर्ड


    नई दिल्ली। Australia women’s national cricket team महिला टी20 वर्ल्ड कप इतिहास की सबसे सफल टीम है। ऑस्ट्रेलिया अब तक 7 बार फाइनल में पहुंच चुकी है और इनमें से 6 बार खिताब जीत चुकी है। सिर्फ 2016 में वेस्टइंडीज ने उसे फाइनल में हराकर बड़ा उलटफेर किया था। ऑस्ट्रेलियाई टीम आज भी इस टूर्नामेंट की सबसे मजबूत दावेदार मानी जाती है।

    इंग्लैंड: लगातार मजबूत प्रदर्शन, लेकिन ऑस्ट्रेलिया से टकराव भारी
    England women’s national cricket team ने अब तक 4 बार फाइनल में जगह बनाई है। टीम ने 2009 में खिताब जीता था, लेकिन 2012, 2014 और 2018 में उसे ऑस्ट्रेलिया के हाथों हार का सामना करना पड़ा। इंग्लैंड की टीम हर बार फाइनल तक पहुंचने में सक्षम रही है, लेकिन निर्णायक मुकाबलों में उसे लगातार निराशा मिली है।

    न्यूजीलैंड: उतार-चढ़ाव भरा सफर, लेकिन हाल में चैंपियन
    New Zealand women’s national cricket team तीन बार फाइनल में पहुंच चुकी है। 2009 और 2010 में उसे हार मिली थी, लेकिन 2024 में टीम ने इतिहास रचते हुए पहली बार खिताब जीत लिया।

    साउथ अफ्रीका: लगातार फाइनल, लेकिन खिताब अब भी दूर
    South Africa women’s national cricket team ने पिछले दो वर्ल्ड कप फाइनल में जगह बनाई, लेकिन दोनों बार टीम को हार का सामना करना पड़ा। 2023 में ऑस्ट्रेलिया और 2024 में न्यूजीलैंड ने उसे हराया।

    भारत: एक बार फाइनल, लेकिन अब भी पहली ट्रॉफी का इंतजार
    India women’s national cricket team ने 2020 में पहली बार फाइनल तक का सफर तय किया था, लेकिन ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा। उस प्रदर्शन के बाद से टीम लगातार सुधार कर रही है और 2026 में खिताब की मजबूत दावेदार मानी जा रही है।

    महिला टी20 वर्ल्ड कप का इतिहास ऑस्ट्रेलिया के दबदबे से भरा रहा है, लेकिन इंग्लैंड, न्यूजीलैंड, साउथ अफ्रीका और भारत जैसी टीमें लगातार चुनौती पेश कर रही हैं। 2026 का संस्करण और भी रोमांचक होने की उम्मीद है।

  • कामा अस्पताल के डॉक्टरों और नर्सों के अदम्य साहस पर आधारित सिनेमाई कहानी में स्टाफ नर्स की भूमिका निभाएंगी कंगना रनौत

    कामा अस्पताल के डॉक्टरों और नर्सों के अदम्य साहस पर आधारित सिनेमाई कहानी में स्टाफ नर्स की भूमिका निभाएंगी कंगना रनौत

    नई दिल्ली । मुंबई में हुए 26/11 के भीषण आतंकवादी हमलों की त्रासदी के बीच मानवता और कर्तव्यनिष्ठा की एक ऐसी अनसुनी गाथा अब बड़े पर्दे पर अवतरित होने जा रही है, जिसने चिकित्सा जगत के सर्वोच्च सेवा भाव को रेखांकित किया था। प्रख्यात अभिनेत्री और भारतीय जनता पार्टी की सांसद कंगना रनौत इन दिनों अपनी आगामी फिल्म ‘भारत भाग्य विधाता’ को लेकर व्यापक रूप से चर्चा में हैं। इस फिल्म के माध्यम से मुंबई आतंकी हमले के दौरान कामा अस्पताल के डॉक्टरों, नर्सों और स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा दिखाई गई अदम्य वीरता और अप्रतिम साहस की वास्तविक कहानी को देश के सामने लाया जा रहा है।

    इस ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर बात करते हुए कंगना रनौत ने एक साक्षात्कार में बताया कि जब पूरा मुंबई शहर आतंकी हमलों और विस्फोटों से थर्रा रहा था, उस भयावह दौर में कामा अस्पताल के भीतर एक अलग ही संघर्ष चल रहा था। अस्पताल परिसर के ठीक बाहर और भीतर लगातार गोलियां चल रही थीं और चारों तरफ दहशत का माहौल था। ऐसी विकट और जानलेवा परिस्थितियों में भी अस्पताल की नर्सों और डॉक्टरों ने अपने कदम पीछे नहीं खींचे। चिकित्सा कर्मियों ने अपनी जान की परवाह न करते हुए न केवल मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित की, बल्कि उस भीषण अफरा-तफरी के बीच 20 गर्भवती महिलाओं की सुरक्षित डिलीवरी भी करवाई।

    फिल्म की मुख्य विषयवस्तु और प्रेरणा के संबंध में जानकारी देते हुए अभिनेत्री ने कहा कि संकट के समय स्वास्थ्य कर्मियों का यह समर्पण देश के इतिहास का एक ऐसा अध्याय है, जिसके बारे में बहुत कम लोगों को जानकारी है। उन्होंने कोविड-19 महामारी के दौर का उदाहरण देते हुए कहा कि डॉक्टर और नर्सें हर परिस्थिति में समाज के रक्षक बनकर सामने आते हैं। कंगना ने विशेष रूप से अस्पताल की उन नर्सों के साहस की सराहना की, जो बम धमाकों के बीच भी मरीजों की सुध लेने के लिए अस्पताल की विभिन्न मंजिलों पर दौड़ती रहीं और अपने मानवीय दायित्वों को पूरा किया।

    व्यावसायिक और रणनीतिक मोर्चे पर इस फिल्म की एक विशेष स्क्रीनिंग हाल ही में भुवनेश्वर में आयोजित की गई थी। इस उच्च स्तरीय स्क्रीनिंग के दौरान ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी और उपमुख्यमंत्री कनक वर्धन सिंह देव सहित कई वरिष्ठ राजनेता उपस्थित रहे। इस अवसर पर कंगना रनौत ने फिल्म को राष्ट्र निर्माण में अदृश्य भूमिका निभाने वाले मेहनतकश लोगों को समर्पित करते हुए इसे राज्य में टैक्स फ्री करने की आधिकारिक मांग की, जिस पर उन्हें राज्य सरकार की ओर से सकारात्मक आश्वासन भी प्राप्त हुआ है।

    फिल्म के शीर्षक ‘भारत भाग्य विधाता’ के चयन के पीछे की पृष्ठभूमि को साझा करते हुए यह स्पष्ट किया गया कि यह नाम देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक विशेष संबोधन से प्रेरित है। प्रधानमंत्री ने अपने एक भाषण के दौरान देश के श्रमिकों, कारीगरों और समाज के निचले पायदान पर काम करने वाले मेहनतकश लोगों को ‘भारत भाग्य विधाता’ कहकर सम्मानित किया था। इसी विचार को आत्मसात करते हुए फिल्म का नाम तय किया गया, जिसमें कंगना रनौत स्वयं एक साधारण स्टाफ नर्स के रूप में मुख्य भूमिका निभा रही हैं, जो व्यवस्था की एक अत्यंत महत्वपूर्ण कड़ी है।

    फिल्म के हालिया आधिकारिक ट्रेलर में यह स्पष्ट रूप से दर्शाया गया है कि किस प्रकार कुछ बेहद साधारण पृष्ठभूमि से आने वाले वार्ड बॉयज और नर्सों ने 26/11 के उस काले दौर में सूझबूझ का परिचय देते हुए 400 से अधिक नागरिकों की जान बचाई थी। यह फिल्म न केवल एक आतंकी हमले की पृष्ठभूमि पर बनी थ्रिलर है, बल्कि यह देश की स्वास्थ्य प्रणाली की रीढ़ माने जाने वाले ग्राउंड स्टाफ के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने का एक गंभीर सिनेमाई प्रयास है। यह बहुप्रतीक्षित फिल्म आगामी 12 जून को देश भर के सिनेमाघरों में आधिकारिक रूप से प्रदर्शित की जाएगी।

  • बांग्लादेश के खिलाफ सीरीज में ऑस्ट्रेलिया ने बदली रणनीति, स्टार खिलाड़ियों को रेस्ट

    बांग्लादेश के खिलाफ सीरीज में ऑस्ट्रेलिया ने बदली रणनीति, स्टार खिलाड़ियों को रेस्ट


    नई दिल्ली। ऑस्ट्रेलियाई चयन समिति ने साफ किया है कि ट्रेविस हेड को व्यक्तिगत कारणों से आराम दिया गया है, जबकि मिचेल मार्श टखने की चोट से पूरी तरह उबर नहीं पाए हैं। हालांकि मार्श टी20 सीरीज के लिए टीम के साथ जुड़ेंगे। इन दोनों अनुभवी खिलाड़ियों की गैरमौजूदगी में ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाजी क्रम पर बड़ा असर पड़ सकता है, लेकिन चयनकर्ताओं ने इसे युवा खिलाड़ियों के लिए अवसर बताया है।

    जोश इंग्लिस के हाथों में कप्तानी
    जोश इंग्लिस को इस दौरे के लिए कप्तान बनाकर चयनकर्ताओं ने बड़ा भरोसा जताया है। उनके नेतृत्व में टीम एक नए संयोजन के साथ मैदान पर उतरेगी। इंग्लिस ने कहा है कि यह युवा खिलाड़ियों के लिए खुद को साबित करने का सुनहरा मौका है।

    नई प्रतिभाओं को मौका
    टीम में कई नए चेहरों को शामिल किया गया है। स्पिनर टॉड मर्फी को पहली बार वनडे टीम में जगह मिली है, जबकि तनवीर संघा चोट के कारण बाहर हैं। इसके अलावा ओलिवर पीक और मैट शॉर्ट जैसे खिलाड़ियों को भी मौका दिया गया है। तेज गेंदबाजी विभाग में बेन ड्वारशुइस और जेवियर बार्टलेट को शामिल किया गया है। वहीं अनुभवी गेंदबाज मिचेल स्टार्क और जोश हेजलवुड की अनुपस्थिति से गेंदबाजी आक्रमण अपेक्षाकृत युवा दिखाई दे रहा है।

    टीम में संतुलन और रणनीति
    टीम में बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों विभागों में मिश्रण देखने को मिल रहा है। मार्नस लाबुशेन, कैमरून ग्रीन और एलेक्स कैरी जैसे खिलाड़ी टीम की रीढ़ साबित हो सकते हैं। Bangladesh national cricket team के खिलाफ यह सीरीज ऑस्ट्रेलिया के लिए युवा प्रतिभाओं को परखने का बड़ा मंच होगी, खासकर तब जब सीनियर खिलाड़ी टीम में नहीं हैं।

    सीरीज का शेड्यूल
    वनडे सीरीज का पहला मैच 9 जून को, दूसरा 11 जून को और तीसरा तथा अंतिम मुकाबला 14 जून को ढाका के शेर-ए-बांग्ला नेशनल क्रिकेट स्टेडियम में खेला जाएगा। इसके बाद दोनों टीमों के बीच तीन मैचों की टी20 सीरीज भी आयोजित होगी।

    ऑस्ट्रेलिया का यह दौरा टीम के भविष्य की रणनीति के लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है। सीनियर खिलाड़ियों की गैरमौजूदगी में युवा खिलाड़ियों के पास खुद को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने का बेहतरीन अवसर होगा।

  • अटारी-वाघा बॉर्डर पर ए आर रहमान ने लाइव प्रस्तुति देकर रचा नया इतिहास, बीएसएफ जवानों को समर्पित किया ऐतिहासिक कॉन्सर्ट

    अटारी-वाघा बॉर्डर पर ए आर रहमान ने लाइव प्रस्तुति देकर रचा नया इतिहास, बीएसएफ जवानों को समर्पित किया ऐतिहासिक कॉन्सर्ट

    नई दिल्ली । देश की सीमाओं की रक्षा में मुस्तैद सीमा सुरक्षा बल (BSF) के जांबाज जवानों को सम्मान देने और राष्ट्रभक्ति की भावना को सुरों से सजाने के लिए अटारी-वाघा बॉर्डर एक ऐतिहासिक पल का गवाह बना। महान संगीतकार और ऑस्कर विजेता ए आर रहमान ने पहली बार अंतरराष्ट्रीय सीमा चौकी पर लाइव परफॉर्मेंस देकर एक नया इतिहास रच दिया है। इस अनूठे और भव्य कॉन्सर्ट का आयोजन देश के वीर जवानों को समर्पित करने के साथ-साथ एक विशेष सिनेमाई कलाकृति के प्रचार के उद्देश्य से किया गया था।

    मशहूर फिल्ममेकर इम्तियाज अली ने अपनी बहुप्रतीक्षित आगामी फिल्म ‘मैं वापस आऊंगा’ के प्रमोशन के लिए एक बेहद अनूठा और प्रभावशाली रास्ता चुना। वे फिल्म की मुख्य संगीत टीम, जिसमें दिग्गज संगीतकार ए आर रहमान और लोकप्रिय पार्श्व गायक मोहित चौहान शामिल थे, के साथ सीधे भारत-पाकिस्तान की अटारी-वाघा सीमा पर पहुंचे। इस दौरान सीमा पर तैनात जवानों का हौसला बढ़ाने और उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए एक विशेष म्यूजिकल ट्रिब्यूट का आयोजन किया गया, जिसने वहां मौजूद हर व्यक्ति को भावविभ्वल कर दिया।

    अटारी बॉर्डर पोस्ट पर आयोजित इस लाइव कॉन्सर्ट के दौरान ए आर रहमान ने जब अपनी सुरीली और जादुई आवाज में कालजयी गीत ‘वंदे मातरम’ गाना शुरू किया, तो पूरा वातावरण देशभक्ति के नारों और सुरों से गूंज उठा। सीमाओं की रक्षा करने वाले बीएसएफ के जवानों के लिए यह एक बेहद भावुक और गौरवशाली क्षण था। इस ऐतिहासिक प्रस्तुति में गायक मोहित चौहान ने भी सुर से सुर मिलाकर समां बांध दिया, जिससे वहां उपस्थित जवानों और दर्शकों का उत्साह चरम पर पहुंच गया।

    फिल्म इंडस्ट्री में इस तरह के प्रमोशन को एक क्रांतिकारी कदम के रूप में देखा जा रहा है, जहां व्यावसायिक लाभ से ऊपर उठकर राष्ट्र के प्रहरियों को केंद्र में रखा गया। इम्तियाज अली और ए आर रहमान की इस जोड़ी ने हमेशा अपने संगीत और फिल्मों से दर्शकों के दिलों को छुआ है, लेकिन इस बार सरहद पर दी गई इस लाइव प्रस्तुति ने कला और राष्ट्र सेवा के मेल की एक नई मिसाल पेश की है। सीमा सुरक्षा बल के अधिकारियों और जवानों ने इस सम्मान के लिए पूरी टीम का आभार व्यक्त किया।

    यह आयोजन न केवल संगीत की दुनिया में एक मील का पत्थर साबित हुआ है, बल्कि इसने यह भी संदेश दिया है कि कला और संस्कृति देश के रक्षकों के योगदान की सदैव ऋणी रहेगी। अटारी बॉर्डर पर गूंजे ए आर रहमान के सुरों की गूंज और जवानों के चेहरों पर तैरती मुस्कान सोशल मीडिया से लेकर मुख्यधारा के मीडिया में लगातार चर्चा का विषय बनी हुई है। देशभक्ति से ओतप्रोत यह कॉन्सर्ट आने वाले लंबे समय तक भारतीय संगीत और संस्कृति के इतिहास में याद रखा जाएगा।

  • महिला टी20 वर्ल्ड कप में भारत का जलवा, बड़ी पारियों में एक भारतीय नाम

    महिला टी20 वर्ल्ड कप में भारत का जलवा, बड़ी पारियों में एक भारतीय नाम


    नई दिल्ली। महिला टी20 विश्व कप 2026 की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है। 11 जून से इंग्लैंड की धरती पर इस मेगा इवेंट का आयोजन होना है। आइए आपको उन 5 बल्लेबाजों के नाम बताते हैं, जिन्होंने क्रिकेट के सबसे छोटे फॉर्मेट के वर्ल्ड कप में सबसे बड़ी पारी खेली है।

    मेग लेनिंग: ऑस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान और स्टार बल्लेबाज मेग लेनिंग के नाम महिला टी20 विश्व कप में सबसे बड़ी पारी खेलने का रिकॉर्ड दर्ज है। लेनिंग ने साल 2014 में आयरलैंड के खिलाफ खेले गए मुकाबले में बेहतरीन बल्लेबाजी करते हुए शतकीय पारी खेली थी। उन्होंने महज 67 गेंदों का सामना कररते हुए 126 रन बनाए थे। अपनी इस पारी में लेनिंग ने 18 चौके और 4 छक्के लगाए थे।

    डिएंड्रा डॉटिन: वेस्टइंडीज की धाकड़ बल्लेबाज ड्रिएंडा डॉटिन टी20 विश्व कप में दूसरी सबसे बड़ी पारी खेलने वाली बल्लेबाज रही हैं। उन्होंने 2010 में हुए वर्ल्ड कप में साउथ अफ्रीका के खिलाफ बेहतरीन बल्लेबाजी करते हुए महज 45 गेंदों में 112 रनों की नाबाद पारी खेली थी। उन्होंने अपनी इस पारी में 7 चौके और 9 गगनचुंबी छक्के लगाए थे।

    हीथर नाइट: महिला टी20 विश्व कप में सबसे बड़ी पारी खेलने वाले बल्लेबाजों की सूची में तीसरे नंबर पर इंग्लैंड की बल्लेबाज हीथर नाइट का नाम दर्ज है। उन्होंने 2020 में थाईलैंड के खिलाफ खेले गए मुकाबले में शानदार बैटिंग करते हुए 66 गेंदों में 108 रनों की नाबाद पारी खेली थी। अपनी इस पारी में नाइट ने 13 चौके और 4 छक्के लगाए थे।

    हरमनप्रीत कौर:भारतीय टीम की कप्तान हरमनप्रीत कौर ने 2020 में हुए महिला टी20 विश्व कप में न्यूजीलैंड के खिलाफ 51 गेंदों में 103 रनों की दमदार पारी खेली थी। हरमनप्रीत ने अपनी इस पारी में 7 चौके और 8 छक्के लगाए। उन्होंने 103 रनों की अपनी इस पारी में से 76 रन सिर्फ चौके-छक्के से बटोरे थे।

    मुनीबा अली: पाकिस्तान टीम की बल्लेबाज मुनीबा अली के नाम महिला टी20 विश्व कप में पांचवीं सबसे बड़ी पारी खेलने का रिकॉर्ड दर्ज है। उन्होंने 2023 में हुए वर्ल्ड कप में आयरलैंड के खिलाफ शानदार बल्लेबाजी करते हुए 68 गेंदों में 102 रनों की दमदार पारी खेली थी। मुनीबा ने अपनी इस इनिंग में 14 चौके जमाए थे।

  • ATM कैश की कमी पर शिकायत, बैंकिंग सेवाओं की कार्यप्रणाली पर सवाल

    ATM कैश की कमी पर शिकायत, बैंकिंग सेवाओं की कार्यप्रणाली पर सवाल


    नई दिल्ली। देश के सबसे बड़े बैंक भारतीय स्टेट बैंक के एटीएम नेटवर्क को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। देशभर में लगभग 65,000 एटीएम वाले इस नेटवर्क में कैश की कमी को लेकर ATM इंडस्ट्री बॉडी CATMi ने भारतीय रिजर्व बैंक भारतीय रिज़र्व बैंक को शिकायत भेजी है। संगठन का आरोप है कि कैश सप्लाई में प्राथमिकता बड़े शहरों को दी जा रही है, जिससे छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में एटीएम खाली पड़े हैं।

    ₹100 करोड़ मुआवजे की मांग
    ATM ऑपरेटरों के संगठन CATMi का कहना है कि कैश की अनुपलब्धता के कारण हजारों एटीएम बंद हो गए हैं, जिससे उन्हें भारी नुकसान हो रहा है। संगठन ने बैंकिंग सिस्टम से करीब ₹100 करोड़ मुआवजे की मांग भी की है। उनका कहना है कि हर खाली एटीएम का मतलब एक खोया हुआ ट्रांजैक्शन है, जिससे इंटरचेंज और ऑपरेशन फीस का सीधा नुकसान होता है।

    छोटे शहरों में सबसे ज्यादा असर
    रिपोर्ट के अनुसार समस्या मुख्य रूप से टियर-2 और टियर-3 शहरों में देखने को मिल रही है। कई जगहों पर एटीएम में कैश रिफिल समय पर नहीं हो रहा, जिससे लोग घंटों तक परेशान हो रहे हैं। उद्योग के अनुसार, दिसंबर 2025 के बाद से कई राज्यों में बैंक शाखाओं और करेंसी चेस्ट से कैश उपलब्धता में भी दिक्कत बढ़ी है।

    बढ़ती लागत और घटता ट्रांजैक्शन बना संकट की वजह
    ATM ऑपरेटरों के सामने एक और बड़ी चुनौती ऑपरेशनल कॉस्ट में बढ़ोतरी है। मजदूरी और ईंधन की कीमतें बढ़ने से खर्च 60% तक बढ़ गया है। वहीं दूसरी ओर कैश निकासी में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, जनवरी 2023 में जहां मासिक ट्रांजैक्शन 57 करोड़ थे, वहीं सितंबर 2025 तक यह घटकर 43.95 करोड़ रह गए।

    ग्रामीण क्षेत्रों में घटते ATM
    देश में ATM की संख्या भी धीरे-धीरे कम हो रही है। वित्त वर्ष 2024-25 में कुल ATM संख्या घटकर लगभग 2.51 लाख रह गई, जबकि पिछले साल यह आंकड़ा 2.53 लाख से अधिक था। सबसे ज्यादा गिरावट ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में दर्ज की गई है।

    आम लोगों पर क्या असर होगा?
    अगर कैश सप्लाई की समस्या जल्द हल नहीं हुई, तो छोटे शहरों और गांवों में लोगों को नकदी निकालने में और दिक्कत हो सकती है। हालांकि डिजिटल पेमेंट का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन भारत में अब भी बड़ी आबादी रोजमर्रा के लेनदेन के लिए कैश पर निर्भर है। ऐसे में ATM संकट सीधे आम जनता की जेब और सुविधा दोनों को प्रभावित कर सकता है।