Author: bharati

  • 1 अगस्त से चीनी कारोबार पर सख्ती, जमाखोरी रोकने के लिए सरकार ने तय की नई स्टॉक सीमा

    1 अगस्त से चीनी कारोबार पर सख्ती, जमाखोरी रोकने के लिए सरकार ने तय की नई स्टॉक सीमा

    नई दिल्ली । देशभर में चीनी की उपलब्धता बनाए रखने और बढ़ती कीमतों पर नियंत्रण के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। सरकार ने 1 अगस्त 2026 से 30 नवंबर 2026 तक चीनी के थोक और खुदरा कारोबारियों के लिए स्टॉक सीमा लागू करने का निर्णय लिया है। इस व्यवस्था का उद्देश्य जमाखोरी और सट्टेबाजी जैसी गतिविधियों पर रोक लगाना है, ताकि त्योहारी सीजन के दौरान उपभोक्ताओं को उचित कीमत पर पर्याप्त मात्रा में चीनी उपलब्ध हो सके।

    नए नियम के अनुसार थोक व्यापारी, खुदरा विक्रेता और बड़े रिटेल स्टोर अधिकतम 4,000 क्विंटल तक ही चीनी का स्टॉक अपने पास रख सकेंगे। इसके साथ ही कारोबारियों को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि मिलों से खरीदी गई चीनी को 30 दिनों के भीतर बाजार में बेच दिया जाए। निर्धारित अवधि से अधिक समय तक स्टॉक रोककर रखने की अनुमति नहीं होगी। सरकार का मानना है कि इससे बाजार में कृत्रिम कमी पैदा करने की कोशिशों पर प्रभावी रोक लगाई जा सकेगी।

    सरकार ने कारोबारियों के लिए पारदर्शिता बढ़ाने के उद्देश्य से साप्ताहिक स्टॉक विवरण देना भी अनिवार्य किया है। सभी संबंधित व्यापारियों को प्रत्येक सप्ताह सरकारी पोर्टल पर उपलब्ध चीनी के स्टॉक की जानकारी दर्ज करनी होगी। इससे प्रशासन को बाजार की स्थिति पर लगातार नजर रखने और आवश्यक होने पर त्वरित कार्रवाई करने में सुविधा मिलेगी।

    यह निर्णय ऐसे समय लिया गया है जब त्योहारों के मौसम में चीनी की मांग बढ़ने की संभावना रहती है। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मांग बढ़ने के बावजूद बाजार में कृत्रिम संकट उत्पन्न न हो और उपभोक्ताओं को आवश्यक वस्तु उचित मूल्य पर मिलती रहे। साथ ही, चीनी की आपूर्ति श्रृंखला भी सुचारु रूप से संचालित होती रहे।

    सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह आदेश आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत लागू किया जाएगा। यदि कोई व्यापारी निर्धारित स्टॉक सीमा या समयसीमा का उल्लंघन करता पाया जाता है तो उसके विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी। खाद्य विभाग के अधिकारी जांच के दौरान गोदामों का निरीक्षण कर सकेंगे और नियमों के विरुद्ध पाए गए पुराने स्टॉक को जब्त भी किया जा सकता है।

    नियमों का उल्लंघन करने वाले कारोबारियों के खिलाफ व्यापारिक लाइसेंस रद्द करने, संबंधित सरकारी पोर्टल पर पंजीकरण समाप्त करने और अन्य कानूनी कार्रवाई का भी प्रावधान रखा गया है। गंभीर मामलों में दोष सिद्ध होने पर जुर्माना लगाने के साथ-साथ कारावास की सजा भी दी जा सकती है। सरकार का मानना है कि कड़े प्रावधानों से जमाखोरी की प्रवृत्ति पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकेगा।

    विशेषज्ञों का मानना है कि व्यापारियों को अब अपनी खरीद और बिक्री की योजना मांग के अनुरूप बनानी होगी। उन्हें उतनी ही मात्रा में चीनी का स्टॉक रखना होगा, जिसे स्थानीय बाजार में लगभग 20 से 25 दिनों के भीतर आसानी से बेचा जा सके। इससे गोदामों में अनावश्यक भंडारण कम होगा और बाजार में नियमित आपूर्ति बनी रहेगी।

    सरकार को उम्मीद है कि इस व्यवस्था से चीनी की उपलब्धता बेहतर होगी, कीमतों में अनावश्यक उतार-चढ़ाव पर नियंत्रण रहेगा और त्योहारी सीजन के दौरान उपभोक्ताओं को किसी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा। साथ ही, बाजार में पारदर्शिता बढ़ेगी और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति व्यवस्था अधिक संतुलित बनेगी।

  • शिक्षा मंत्री की नियुक्ति पर संजय राउत का तंज, बोले- देवेंद्र फडणवीस इस जिम्मेदारी के लिए बेहतर विकल्प

    शिक्षा मंत्री की नियुक्ति पर संजय राउत का तंज, बोले- देवेंद्र फडणवीस इस जिम्मेदारी के लिए बेहतर विकल्प

    नई दिल्ली । शिवसेना (यूबीटी) के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने केंद्र सरकार में शिक्षा मंत्री की नियुक्ति को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने नए शिक्षा मंत्री के चयन पर सवाल उठाते हुए कहा कि शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालय की जिम्मेदारी ऐसे व्यक्ति को दी जानी चाहिए, जिसका इस क्षेत्र से गहरा जुड़ाव और समझ हो। इसी दौरान उन्होंने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का नाम लेते हुए तंज भरे अंदाज में उन्हें इस पद के लिए बेहतर विकल्प बताया।

    संजय राउत ने कहा कि उनके अनुसार देवेंद्र फडणवीस शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी बेहतर तरीके से निभा सकते हैं। उन्होंने कहा कि फडणवीस शिक्षित और प्रशासनिक अनुभव रखने वाले नेता हैं तथा उन्हें शिक्षा मंत्री बनाया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी टिप्पणी की कि वर्तमान व्यवस्था में जिस तरह मंत्रालयों का बंटवारा किया जा रहा है, उस पर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है।

    राउत ने नए शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी की नियुक्ति पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि शिक्षा क्षेत्र से प्रत्यक्ष रूप से जुड़े अनुभव वाले व्यक्ति को यह जिम्मेदारी मिलनी चाहिए। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि प्रह्लाद जोशी को उनके पहले के मंत्रालय में ही रहने दिया जाता तो अधिक उचित होता। हालांकि यह उनका राजनीतिक मत है और इसे लेकर सरकार की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई।

    राज्यसभा सांसद ने यह भी दावा किया कि इससे पहले भी वह कई बार सार्वजनिक रूप से कह चुके हैं कि देवेंद्र फडणवीस शिक्षा मंत्री की भूमिका निभाने में सक्षम हैं। उन्होंने अपने पुराने बयान का उल्लेख करते हुए कहा कि शिक्षा मंत्रालय जैसे अहम विभाग में ऐसे व्यक्ति की आवश्यकता है, जो नीति निर्माण और प्रशासनिक निर्णयों को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ा सके।

    केंद्र सरकार की शिक्षा व्यवस्था पर निशाना साधते हुए संजय राउत ने आरोप लगाया कि देश में शिक्षा क्षेत्र कई चुनौतियों का सामना कर रहा है। उन्होंने कहा कि विभिन्न राज्यों में सरकारी स्कूलों की स्थिति चिंता का विषय बनी हुई है और परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर भी लगातार सवाल उठ रहे हैं। उनके अनुसार समय-समय पर सामने आने वाले पेपर लीक जैसे मामलों ने विद्यार्थियों और अभिभावकों की चिंता बढ़ाई है।

    राउत ने अपने बयान में केंद्र सरकार की नीतियों की भी आलोचना की और कहा कि शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए केवल मंत्रालय में बदलाव पर्याप्त नहीं होगा। उन्होंने दावा किया कि सरकार को शिक्षा की गुणवत्ता, संस्थानों की मजबूती और पारदर्शी परीक्षा प्रणाली जैसे मुद्दों पर अधिक गंभीरता से काम करना चाहिए। साथ ही उन्होंने कुछ राजनीतिक टिप्पणियां भी कीं, जिनमें उन्होंने सरकार के निर्णयों पर सवाल उठाए।

    राजनीतिक हलकों में संजय राउत का यह बयान चर्चा का विषय बन गया है। शिक्षा मंत्री की नियुक्ति और शिक्षा व्यवस्था को लेकर दिए गए उनके बयान को विपक्ष की ओर से केंद्र सरकार पर एक और राजनीतिक हमला माना जा रहा है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।

  • कॉकरोच प्रोटेस्ट से जुड़े कथित आपत्तिजनक पोस्ट पर दिल्ली पुलिस की कार्रवाई, पीएम मोदी के खिलाफ अभद्र भाषा मामले में एफआईआर दर्ज

    कॉकरोच प्रोटेस्ट से जुड़े कथित आपत्तिजनक पोस्ट पर दिल्ली पुलिस की कार्रवाई, पीएम मोदी के खिलाफ अभद्र भाषा मामले में एफआईआर दर्ज


    नई दिल्ली । कॉकरोच प्रोटेस्ट से जुड़े कथित आपत्तिजनक पोस्ट और वीडियो को लेकर दिल्ली पुलिस ने कार्रवाई शुरू कर दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कथित रूप से अभद्र और आपत्तिजनक भाषा के इस्तेमाल के आरोप में पुलिस ने मामला दर्ज किया है। इस कार्रवाई के तहत कुछ न्यूज पोर्टलों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सक्रिय कई हैंडल को नोटिस जारी कर संबंधित जानकारी मांगी गई है। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच कानून के प्रावधानों के तहत आगे बढ़ाई जा रही है।

    पुलिस के अनुसार दर्ज एफआईआर में भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि कथित आपत्तिजनक वीडियो और पोस्ट सबसे पहले किस माध्यम से प्रसारित किए गए, उन्हें किन-किन सोशल मीडिया खातों से साझा किया गया और उनका मूल स्रोत क्या था। इस संबंध में संबंधित व्यक्तियों और संस्थाओं से आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराने के लिए नोटिस भी भेजे गए हैं।

    प्राथमिक जानकारी के अनुसार आरोप है कि कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) से जुड़े एक विरोध प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री के खिलाफ कथित रूप से अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया गया। इसके बाद उससे जुड़े वीडियो और अन्य सामग्री सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्म पर प्रसारित हुई। जांच के दौरान पुलिस ने संबंधित प्लेटफॉर्म से ऐसे वीडियो हटाने और उनके प्रसार से जुड़ी तकनीकी जानकारी उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि संबंधित सामग्री किन खातों के माध्यम से व्यापक स्तर पर साझा की गई।

    दिल्ली पुलिस की सोशल मीडिया मॉनिटरिंग टीम लगातार विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सार्वजनिक रूप से उपलब्ध सामग्री की निगरानी कर रही है। अधिकारियों के अनुसार यदि किसी पोस्ट या वीडियो में कानून का उल्लंघन या आपत्तिजनक सामग्री पाए जाने की आशंका होती है, तो संबंधित सोशल मीडिया इंटरमीडियरी को नोटिस जारी कर आवश्यक कार्रवाई के लिए कहा जाता है। अधिकारियों का दावा है कि ऐसे कई पोस्ट और वीडियो पहले ही हटाए जा चुके हैं, जिनमें प्रधानमंत्री के खिलाफ कथित रूप से अभद्र भाषा का प्रयोग किया गया था।

    इसी क्रम में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से जुड़े एक अन्य मामले का भी उल्लेख सामने आया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 23 जुलाई को साझा की गई एक सेल्फी वीडियो कुछ समय के लिए प्लेटफॉर्म से हटाए जाने के बाद केंद्र सरकार ने संबंधित कंपनी से स्पष्टीकरण मांगा था। कंपनी ने इसे तकनीकी त्रुटि बताते हुए खेद व्यक्त किया, लेकिन सरकार ने उपलब्ध कराए गए जवाब को पर्याप्त नहीं माना और विस्तृत जानकारी की मांग की।

    मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित कंपनी के अधिकारी को भी तलब किया गया है। सरकार का कहना है कि वह इस पूरे घटनाक्रम से जुड़े तकनीकी और प्रशासनिक पहलुओं की विस्तृत जानकारी चाहती है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि संबंधित सामग्री हटाने की परिस्थितियां क्या थीं और भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न हो। दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस का कहना है कि कॉकरोच प्रोटेस्ट से जुड़े कथित आपत्तिजनक पोस्ट और वीडियो की जांच तथ्यों एवं उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर आगे बढ़ाई जा रही है। जांच पूरी होने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई नियमानुसार की जाएगी।

  • होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों पर हमलों पर संयुक्त राष्ट्र में भारत का कड़ा रुख, भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को बताया सर्वोच्च प्राथमिकता

    होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों पर हमलों पर संयुक्त राष्ट्र में भारत का कड़ा रुख, भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को बताया सर्वोच्च प्राथमिकता


    नई दिल्ली ।
    संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत ने पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य में वाणिज्यिक जहाजों पर हुए हालिया हमलों को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। भारत ने स्पष्ट किया कि क्षेत्र में भारतीय नागरिकों और नाविकों की सुरक्षा उसके लिए सर्वोच्च प्राथमिकता है। साथ ही अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार और नौवहन को बिना किसी बाधा के बहाल करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया। भारत ने कहा कि क्षेत्र में जारी अस्थिरता न केवल वैश्विक व्यापार बल्कि लाखों लोगों की सुरक्षा और आर्थिक गतिविधियों को भी प्रभावित कर सकती है।

    संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की खुली बहस के दौरान भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत पर्वतनेनी हरीश ने कहा कि पश्चिम एशिया भारत के लिए रणनीतिक, आर्थिक और मानवीय दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण क्षेत्र है। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में एक करोड़ से अधिक भारतीय रहते और काम करते हैं, इसलिए वहां की सुरक्षा स्थिति भारत के लिए विशेष महत्व रखती है। उन्होंने सभी पक्षों से संयम बरतने और तनाव कम करने के लिए प्रभावी कदम उठाने का आग्रह किया।

    भारत ने होर्मुज जलडमरूमध्य में हाल के दिनों में कई वाणिज्यिक जहाजों पर हुए हमलों की कड़ी निंदा की। भारतीय प्रतिनिधि ने विशेष रूप से उन जहाजों का उल्लेख किया जिन पर भारतीय नाविक सवार थे और जो हमलों से प्रभावित हुए। उन्होंने कहा कि इन घटनाओं में कई भारतीय नागरिक घायल हुए हैं, जिनमें कुछ गंभीर रूप से घायल बताए गए हैं। इसके अलावा एक भारतीय नागरिक की मृत्यु और एक अन्य के लापता होने की जानकारी भी सामने आई है, जिसे भारत ने अत्यंत गंभीर विषय बताया।

    राजदूत पर्वतनेनी हरीश ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। ऐसे में इन मार्गों पर किसी भी प्रकार का हमला पूरी दुनिया की आपूर्ति श्रृंखला और आर्थिक स्थिरता को प्रभावित कर सकता है। उन्होंने सभी संबंधित पक्षों से अपील की कि समुद्री मार्गों पर सुरक्षित और निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम तत्काल उठाए जाएं, ताकि व्यापारिक गतिविधियां सामान्य रूप से जारी रह सकें।

    भारत ने यह भी कहा कि हाल के समय में संघर्ष में अस्थायी विराम के संकेत मिले थे, लेकिन उसके बाद दोबारा हिंसक घटनाओं में वृद्धि देखने को मिली है। इस स्थिति को चिंताजनक बताते हुए भारत ने कूटनीतिक संवाद और शांतिपूर्ण समाधान का समर्थन किया। भारतीय पक्ष का मानना है कि क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने के लिए सभी देशों को जिम्मेदारी के साथ सहयोग करना होगा।

    संयुक्त राष्ट्र में भारत ने दोहराया कि वह अंतरराष्ट्रीय कानूनों, सुरक्षित समुद्री परिवहन और वैश्विक शांति के पक्ष में है। भारत ने यह भी स्पष्ट किया कि निर्दोष नागरिकों और समुद्री कर्मियों पर होने वाले हमले किसी भी परिस्थिति में स्वीकार नहीं किए जा सकते। भारतीय प्रतिनिधि ने कहा कि समुद्री सुरक्षा केवल क्षेत्रीय नहीं बल्कि वैश्विक चिंता का विषय है और इसके लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता है।

    भारत ने अपने वक्तव्य में यह संदेश भी दिया कि पश्चिम एशिया में शांति और स्थिरता बनाए रखना पूरे अंतरराष्ट्रीय समुदाय के हित में है। भारत ने उम्मीद जताई कि संबंधित पक्ष संयम और संवाद का रास्ता अपनाएंगे, जिससे तनाव कम होगा, समुद्री मार्ग पूरी तरह सुरक्षित बनेंगे और क्षेत्र में सामान्य स्थिति जल्द बहाल हो सकेगी। भारत ने स्पष्ट किया कि विदेशों में रह रहे भारतीय नागरिकों और नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए वह हर आवश्यक कदम उठाने के लिए प्रतिबद्ध है।

  • राम मंदिर दान मामले की जांच में बड़ा मोड़, SIT की रडार पर पूर्व ट्रस्टी अनिल मिश्रा, पूछताछ की तैयारी तेज

    राम मंदिर दान मामले की जांच में बड़ा मोड़, SIT की रडार पर पूर्व ट्रस्टी अनिल मिश्रा, पूछताछ की तैयारी तेज

    नई दिल्ली। अयोध्या स्थित राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़ी कथित वित्तीय अनियमितताओं और दान राशि की कथित चोरी के मामले की जांच अब तेज हो गई है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) ने मामले में साक्ष्य जुटाने की प्रक्रिया को गति देते हुए जांच का दायरा ट्रस्ट के पूर्व पदाधिकारियों तक बढ़ा दिया है। सूत्रों के अनुसार, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा से जल्द पूछताछ की जा सकती है। जांच एजेंसी उनके बयान के साथ बैंक रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजों का मिलान कर पूरे मामले की तह तक पहुंचने की कोशिश करेगी।

    जांच से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक, एसआईटी पहले ही मंदिर में चढ़ावे की गिनती से जुड़े बैंक कर्मचारियों के बयान दर्ज कर चुकी है। अब जांच टीम उन अधिकारियों और पदाधिकारियों से भी पूछताछ की तैयारी कर रही है, जिनकी भूमिका दान राशि के प्रबंधन और रिकॉर्ड से जुड़ी रही है। इसी क्रम में डॉ. अनिल मिश्रा को नोटिस भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। पूछताछ के दौरान बैंक लेनदेन, वित्तीय दस्तावेजों और अब तक जुटाए गए साक्ष्यों के आधार पर उनसे कई महत्वपूर्ण सवाल किए जा सकते हैं।

    सूत्रों का कहना है कि आवश्यकता पड़ने पर ट्रस्ट से जुड़े अन्य पदाधिकारियों से भी पूछताछ की जा सकती है। इनमें गोपाल राव का नाम भी सामने आ रहा है। हालांकि जांच एजेंसियों की ओर से अभी किसी व्यक्ति की भूमिका को लेकर कोई आधिकारिक निष्कर्ष नहीं दिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी तरह तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे बढ़ाई जा रही है तथा किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी पहलुओं की विस्तृत पड़ताल की जाएगी।

    इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 20 जुलाई को निष्पक्ष और व्यापक जांच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों की निगरानी में नई एसआईटी गठित करने का निर्देश दिया था। इसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने आईजी किरण एस. की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन किया। टीम में डीआईजी सोमेन वर्मा और एसएसपी डॉ. गौरव ग्रोवर को भी शामिल किया गया। सरकार का उद्देश्य जांच को पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से आगे बढ़ाना बताया गया है।

    हालांकि एसआईटी की औपचारिक बैठक अभी तक आयोजित नहीं हुई है, लेकिन पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच कार्य लगातार जारी है। साक्ष्य जुटाने, दस्तावेजों की जांच और संबंधित लोगों के बयान दर्ज करने की प्रक्रिया समानांतर रूप से चल रही है। इसी क्रम में 26 जुलाई को राज्य सरकार ने एसआईटी का आधिकारिक पुनर्गठन भी किया, ताकि जांच को और प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाया जा सके।

    दूसरी ओर, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने भी हाल ही में आयोजित विशेष बैठक में कई प्रशासनिक फैसले लिए हैं। ट्रस्ट ने फिलहाल पहले मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) की नियुक्ति टालने का निर्णय लिया है। साथ ही पूर्णकालिक महासचिव और प्रवक्ता नियुक्त करने की मंजूरी दी गई है। मंदिर की धार्मिक परंपराओं, पूजा व्यवस्था और प्रशासनिक समन्वय को मजबूत करने के उद्देश्य से धार्मिक समिति के पुनर्गठन का भी फैसला लिया गया है।

    जांच एजेंसियों का कहना है कि मामले की जांच पूरी होने के बाद ही किसी भी प्रकार की जिम्मेदारी या कानूनी कार्रवाई को लेकर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। फिलहाल एसआईटी सभी वित्तीय रिकॉर्ड, बैंक दस्तावेजों और संबंधित व्यक्तियों के बयानों का मिलान कर पूरे घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ने में जुटी हुई है। आने वाले दिनों में इस मामले में कई और अहम लोगों से पूछताछ होने की संभावना जताई जा रही है।

  • एयरफोर्स बाल भारती स्कूल पहुंचीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, छात्रों से संवाद कर शिक्षा और नैतिक मूल्यों का दिया संदेश

    एयरफोर्स बाल भारती स्कूल पहुंचीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, छात्रों से संवाद कर शिक्षा और नैतिक मूल्यों का दिया संदेश


    नई दिल्ली ।
    राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने बुधवार को नई दिल्ली के लोदी रोड स्थित एयरफोर्स बाल भारती स्कूल का दौरा किया। इस अवसर पर उन्होंने विद्यार्थियों के साथ संवाद कर उन्हें शिक्षा, अनुशासन, नैतिक मूल्यों और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी का संदेश दिया। स्कूल प्रशासन ने इस दौरे को संस्थान के इतिहास का एक महत्वपूर्ण और प्रेरणादायक अवसर बताया। राष्ट्रपति की मौजूदगी से विद्यार्थियों और शिक्षकों में विशेष उत्साह देखने को मिला।

    स्कूल पहुंचने पर राष्ट्रपति का स्वागत भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह और एयर फोर्स फैमिलीज वेलफेयर एसोसिएशन की अध्यक्ष सरिता सिंह ने किया। विद्यालय परिसर में उनके स्वागत के लिए विशेष तैयारियां की गई थीं। विद्यार्थियों ने पारंपरिक तरीके से उनका अभिनंदन किया और पूरे कार्यक्रम के दौरान अनुशासन तथा उत्साह का परिचय दिया।

    दौरे की शुरुआत सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से हुई, जिसमें विद्यार्थियों ने भारतीय संस्कृति, राष्ट्रीय एकता और देशभक्ति पर आधारित रंगारंग कार्यक्रम प्रस्तुत किए। विभिन्न प्रस्तुतियों में छात्रों की प्रतिभा, आत्मविश्वास और रचनात्मक क्षमता की झलक दिखाई दी। कार्यक्रम में मौजूद अतिथियों ने विद्यार्थियों के प्रदर्शन की सराहना की और उनके प्रयासों की प्रशंसा की।

    राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों से सीधे संवाद भी किया। उन्होंने छात्रों से उनकी पढ़ाई, भविष्य की योजनाओं, रुचियों और जीवन के लक्ष्यों के बारे में जानकारी ली। बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि जीवन में सफलता केवल प्रतिभा से नहीं बल्कि निरंतर मेहनत, अनुशासन और सकारात्मक सोच से हासिल होती है। उन्होंने विद्यार्थियों को अपने सपनों को पूरा करने के लिए समर्पण और ईमानदारी के साथ प्रयास करने की प्रेरणा दी।

    उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल शैक्षणिक उपलब्धियां प्राप्त करना नहीं, बल्कि जिम्मेदार, संवेदनशील और जागरूक नागरिक तैयार करना भी है। राष्ट्रपति ने विद्यार्थियों से अच्छे नैतिक मूल्यों को अपनाने, समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझने और देश के विकास में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया। उनके अनुसार शिक्षा और चरित्र निर्माण साथ-साथ आगे बढ़ने चाहिए, तभी व्यक्ति और राष्ट्र दोनों मजबूत बनते हैं।

    अपने दौरे के दौरान राष्ट्रपति ने स्कूल परिसर में आयोजित कला प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया। प्रदर्शनी में जूनियर और सीनियर वर्ग के विद्यार्थियों द्वारा तैयार की गई चित्रकृतियों और विभिन्न रचनात्मक कलाकृतियों को प्रदर्शित किया गया था। उन्होंने छात्रों की कल्पनाशीलता, कलात्मक अभिव्यक्ति और सृजनात्मक सोच की सराहना करते हुए कहा कि कला व्यक्तित्व विकास का महत्वपूर्ण माध्यम है और शिक्षा के साथ इसका संतुलित विकास आवश्यक है।

    राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने स्कूल के आधुनिक बुनियादी ढांचे, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने की प्रतिबद्धता और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए किए जा रहे प्रयासों की भी प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि ऐसे शिक्षण संस्थान भविष्य के जिम्मेदार नागरिक तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि विद्यालय आगे भी शिक्षा, अनुशासन और उत्कृष्टता के क्षेत्र में नई उपलब्धियां हासिल करेगा तथा विद्यार्थियों को देश और समाज की सेवा के लिए प्रेरित करता रहेगा।

  • करिश्मा तन्ना के घर गूंजी किलकारी, शादी के चार साल बाद बेटे का जन्म, पोस्ट शेयर कर लिखा- सबसे बड़ा आशीर्वाद

    करिश्मा तन्ना के घर गूंजी किलकारी, शादी के चार साल बाद बेटे का जन्म, पोस्ट शेयर कर लिखा- सबसे बड़ा आशीर्वाद

    नई दिल्ली। टीवी और फिल्म अभिनेत्री करिश्मा तन्ना के घर खुशियों ने दस्तक दी है। 42 वर्ष की उम्र में अभिनेत्री ने बेटे को जन्म दिया है। शादी के चार साल बाद माता-पिता बने करिश्मा तन्ना और उनके पति वरुण बंगेरा ने इस खुशखबरी को सोशल मीडिया के माध्यम से अपने प्रशंसकों के साथ साझा किया। पोस्ट सामने आते ही फैंस, दोस्तों और मनोरंजन जगत की कई हस्तियों ने दोनों को बधाई और शुभकामनाएं देना शुरू कर दिया।

    करिश्मा तन्ना ने अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक भावुक पोस्ट साझा करते हुए लिखा कि गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर 29 जुलाई 2026 को उनके जीवन का सबसे बड़ा आशीर्वाद उनके घर आया है। उन्होंने अपने नवजात बेटे का स्वागत करते हुए उसे परिवार की नई खुशी बताया। अभिनेत्री की इस पोस्ट को कुछ ही समय में हजारों लोगों ने पसंद किया और कमेंट सेक्शन में शुभकामनाओं की बाढ़ आ गई।

    गर्भावस्था के दौरान भी करिश्मा लगातार अपने प्रशंसकों से जुड़ी रहीं। उन्होंने समय-समय पर अपनी प्रेग्नेंसी से जुड़े अनुभव, तस्वीरें और फोटोशूट सोशल मीडिया पर साझा किए। उनके मैटरनिटी फोटोशूट भी काफी चर्चा में रहे और फैंस ने उनकी सादगी व आत्मविश्वास की जमकर सराहना की। अभिनेत्री ने अपनी इस नई यात्रा के हर अहम पल को प्रशंसकों के साथ साझा करने की कोशिश की।

    करिश्मा तन्ना ने अपने अभिनय करियर की शुरुआत छोटे पर्दे से की थी और उन्हें लोकप्रियता एकता कपूर के चर्चित धारावाहिक ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी’ में निभाए गए किरदार से मिली। इसके बाद उन्होंने कई टीवी धारावाहिकों और रियलिटी शोज़ में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। उन्होंने रियलिटी शो ‘बिग बॉस 8’ और ‘खतरों के खिलाड़ी 10’ में अपने दमदार प्रदर्शन से अलग पहचान बनाई और दर्शकों का भरपूर प्यार हासिल किया।

    छोटे पर्दे के साथ-साथ करिश्मा ने फिल्मों में भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। वह ‘संजू’ और ‘सूरज पे मंगल भारी’ जैसी फिल्मों में नजर आ चुकी हैं। अपने अभिनय, आत्मविश्वास और अलग व्यक्तित्व के कारण उन्होंने मनोरंजन उद्योग में एक मजबूत पहचान बनाई है। सोशल मीडिया पर भी उनकी अच्छी-खासी फैन फॉलोइंग है और वह अपनी निजी व पेशेवर जिंदगी से जुड़े अपडेट नियमित रूप से साझा करती रहती हैं।

    बेटे के जन्म की खबर के बाद करिश्मा तन्ना और वरुण बंगेरा के परिवार में खुशी का माहौल है। प्रशंसकों को अब दोनों की ओर से अपने नन्हे मेहमान की पहली झलक का इंतजार है। अभिनेत्री की इस नई पारी को लेकर उनके चाहने वाले लगातार शुभकामनाएं दे रहे हैं और सोशल मीडिया पर उनकी पोस्ट तेजी से वायरल हो रही है।

  • Xtranet Technologies IPO का अलॉटमेंट आज, 12.24 गुना सब्सक्रिप्शन के बाद 6% प्रीमियम पर लिस्टिंग की उम्मीद, निवेशकों की बढ़ी नजरें

    Xtranet Technologies IPO का अलॉटमेंट आज, 12.24 गुना सब्सक्रिप्शन के बाद 6% प्रीमियम पर लिस्टिंग की उम्मीद, निवेशकों की बढ़ी नजरें

    नई दिल्ली। आईटी सेक्टर की कंपनी Xtranet Technologies के प्रारंभिक सार्वजनिक निर्गम (IPO) में निवेश करने वाले निवेशकों का इंतजार अब खत्म होने वाला है। कंपनी के 166.80 करोड़ रुपये के IPO का अलॉटमेंट आज फाइनल होने की उम्मीद है। जिन निवेशकों ने इस इश्यू में आवेदन किया था, वे जल्द ही यह जान सकेंगे कि उन्हें शेयर आवंटित हुए हैं या नहीं। IPO को निवेशकों का मजबूत समर्थन मिला था और सभी श्रेणियों में अच्छी मांग देखने को मिली। अब बाजार की निगाहें अलॉटमेंट प्रक्रिया और आगामी लिस्टिंग पर टिकी हैं।

    कंपनी का IPO 23 जुलाई 2026 को निवेशकों के लिए खुला था और 27 जुलाई तक आवेदन स्वीकार किए गए। यह पूरी तरह फ्रेश इश्यू था, जिसके तहत करीब 1.31 करोड़ नए इक्विटी शेयर जारी किए गए। कंपनी ने किसी भी प्रमोटर या मौजूदा निवेशक के लिए ऑफर फॉर सेल (OFS) शामिल नहीं किया। शेयरों का प्राइस बैंड 120 से 127 रुपये प्रति शेयर तय किया गया था और ऊपरी मूल्य पर कंपनी का प्री-आईपीओ मार्केट कैपिटलाइजेशन लगभग 664 करोड़ रुपये रहा।

    इस IPO को कुल 12.24 गुना सब्सक्रिप्शन प्राप्त हुआ, जो निवेशकों की मजबूत रुचि को दर्शाता है। सबसे अधिक उत्साह गैर-संस्थागत निवेशकों (NII) में देखने को मिला, जहां यह श्रेणी 26.65 गुना सब्सक्राइब हुई। खुदरा निवेशकों का हिस्सा 8.98 गुना और योग्य संस्थागत खरीदारों (QIB) का हिस्सा 7.13 गुना सब्सक्राइब हुआ। मजबूत सब्सक्रिप्शन के बाद अब निवेशकों को अलॉटमेंट और लिस्टिंग से बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद है।

    ग्रे मार्केट में भी कंपनी के शेयर सकारात्मक संकेत दे रहे हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, शेयर लगभग 8 रुपये के प्रीमियम पर कारोबार कर रहे हैं। यदि यही रुझान बना रहता है तो कंपनी के शेयर लगभग 135 रुपये के आसपास सूचीबद्ध हो सकते हैं, जो ऊपरी इश्यू प्राइस 127 रुपये की तुलना में करीब 6 प्रतिशत प्रीमियम दर्शाता है। हालांकि, बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रे मार्केट प्रीमियम केवल संभावित संकेत होता है और वास्तविक लिस्टिंग बाजार की परिस्थितियों तथा निवेशकों की मांग पर निर्भर करती है।

    कंपनी वर्ष 2002 से आईटी समाधान और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन सेवाओं के क्षेत्र में कार्यरत है। इसके कारोबार में क्लाउड कंप्यूटिंग, साइबर सिक्योरिटी, सिस्टम इंटीग्रेशन, डेटा सेंटर मैनेजमेंट, एप्लीकेशन डेवलपमेंट और आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर जैसी सेवाएं शामिल हैं। कंपनी सरकारी विभागों, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और निजी संस्थानों को भी तकनीकी सेवाएं प्रदान करती है। इसके प्रमुख उत्पादों में डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन प्लेटफॉर्म और क्लाउड आधारित समाधान शामिल हैं।

    वित्तीय प्रदर्शन की बात करें तो कंपनी ने वित्त वर्ष 2025-26 में मजबूत वृद्धि दर्ज की है। इस दौरान कुल आय बढ़कर 366 करोड़ रुपये पहुंच गई, जो पिछले वित्त वर्ष के 276 करोड़ रुपये से लगभग 32 प्रतिशत अधिक है। वहीं, कंपनी का शुद्ध लाभ 36 प्रतिशत बढ़कर 41 करोड़ रुपये हो गया। EBITDA में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई, जो 47 करोड़ रुपये से बढ़कर 63 करोड़ रुपये हो गया। कंपनी IPO से जुटाई गई राशि का उपयोग मुख्य रूप से कार्यशील पूंजी की जरूरतों, कर्ज चुकाने, सिस्टम और हार्डवेयर अपग्रेड तथा अन्य सामान्य कॉरपोरेट उद्देश्यों के लिए करेगी। कंपनी के शेयरों की संभावित लिस्टिंग 30 जुलाई 2026 को बीएसई और एनएसई पर होने की उम्मीद है, जिस पर निवेशकों की खास नजर रहेगी।

  • मामूली GMP के बावजूद HR Hygiene Products IPO में निवेशकों की दिलचस्पी, पहले दिन जोरदार बोली

    मामूली GMP के बावजूद HR Hygiene Products IPO में निवेशकों की दिलचस्पी, पहले दिन जोरदार बोली

    नई दिल्ली। एसएमई आईपीओ बाजार में एचआर हाइजीन प्रोडक्ट्स लिमिटेड के सार्वजनिक निर्गम को पहले ही दिन निवेशकों का सकारात्मक प्रतिसाद मिला। बुधवार को सब्सक्रिप्शन के लिए खुले 43.17 करोड़ रुपये के इस आईपीओ में शुरुआती घंटों से ही अच्छी खरीदारी देखने को मिली। दिन के दौरान उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, इश्यू कुल मिलाकर करीब 84 प्रतिशत सब्सक्राइब हो चुका था। निवेशकों की इस शुरुआती दिलचस्पी ने संकेत दिया है कि कंपनी के कारोबार विस्तार की योजनाओं और वित्तीय प्रदर्शन पर बाजार का भरोसा बना हुआ है।

    कंपनी का आईपीओ 29 जुलाई से 31 जुलाई 2026 तक निवेशकों के लिए खुला रहेगा। इस सार्वजनिक निर्गम के माध्यम से जुटाई गई राशि का उपयोग मुख्य रूप से गुजरात के राजकोट में नई विनिर्माण इकाई स्थापित करने, कर्ज कम करने और सामान्य कॉरपोरेट जरूरतों को पूरा करने के लिए किया जाएगा। कंपनी का मानना है कि नई उत्पादन क्षमता से उसके कारोबार को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।

    सब्सक्रिप्शन के शुरुआती रुझानों में अलग-अलग निवेशक श्रेणियों से सकारात्मक भागीदारी देखने को मिली। खुदरा निवेशकों के लिए आरक्षित हिस्से में लगभग 64 प्रतिशत आवेदन प्राप्त हुए, जबकि गैर-संस्थागत निवेशकों (एनआईआई) की श्रेणी पूरी तरह भरते हुए 122 प्रतिशत से अधिक सब्सक्राइब हो गई। वहीं, योग्य संस्थागत खरीदार (क्यूआईबी) श्रेणी में भी करीब 92 प्रतिशत तक आवेदन प्राप्त हुए। इससे यह संकेत मिलता है कि विभिन्न वर्गों के निवेशकों ने कंपनी में रुचि दिखाई है।

    ग्रे मार्केट में भी कंपनी के शेयर हल्के प्रीमियम पर कारोबार करते दिखाई दिए। बाजार में लगभग 2 रुपये प्रति शेयर का ग्रे मार्केट प्रीमियम दर्ज किया गया। कंपनी ने आईपीओ का मूल्य दायरा 83 से 88 रुपये प्रति शेयर निर्धारित किया है। मौजूदा ग्रे मार्केट प्रीमियम के आधार पर संभावित लिस्टिंग मूल्य करीब 90 रुपये प्रति शेयर आंका जा रहा है। हालांकि बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि ग्रे मार्केट केवल एक संकेतक होता है और अंतिम लिस्टिंग प्रदर्शन बाजार की परिस्थितियों तथा निवेशकों की मांग पर निर्भर करेगा।

    यह आईपीओ फ्रेश इश्यू और ऑफर फॉर सेल (ओएफएस) दोनों का मिश्रण है। कंपनी नए शेयर जारी कर पूंजी जुटा रही है, जबकि कुछ मौजूदा शेयरधारक ऑफर फॉर सेल के माध्यम से अपनी हिस्सेदारी का आंशिक विनिवेश करेंगे। खुदरा निवेशकों के लिए न्यूनतम आवेदन 1,600 शेयरों का रखा गया है, जिसके लिए ऊपरी मूल्य बैंड के अनुसार लगभग 2.81 लाख रुपये का निवेश करना होगा।

    आईपीओ के लिए शेयरों का आवंटन 3 अगस्त 2026 को संभावित रूप से अंतिम रूप दिया जाएगा, जबकि कंपनी के शेयर 5 अगस्त 2026 को बीएसई एसएमई प्लेटफॉर्म पर सूचीबद्ध होने की उम्मीद है। सार्वजनिक निर्गम से पहले कंपनी ने एंकर निवेशकों से लगभग 14.84 करोड़ रुपये जुटाए थे, जिससे बड़े निवेशकों का शुरुआती भरोसा भी सामने आया।

    एचआर हाइजीन प्रोडक्ट्स वर्ष 2016 से हाइजीन और पर्सनल केयर उत्पादों के निर्माण एवं विपणन के क्षेत्र में सक्रिय है। कंपनी सैनिटरी नैपकिन, बेबी केयर और एडल्ट केयर उत्पादों के साथ अपने कई ब्रांड संचालित करती है और व्हाइट लेबल मैन्युफैक्चरिंग सेवाएं भी उपलब्ध कराती है। वित्त वर्ष 2026 में कंपनी की आय बढ़कर 131.90 करोड़ रुपये रही, जबकि कर पश्चात लाभ 11.41 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। आय और मुनाफे में दर्ज हुई इस वृद्धि को निवेशकों की सकारात्मक प्रतिक्रिया का एक प्रमुख कारण माना जा रहा है। अब बाजार की नजर आईपीओ के अंतिम सब्सक्रिप्शन आंकड़ों और आगामी लिस्टिंग प्रदर्शन पर बनी रहेगी।

  • मुख्‍यमंत्री बोले- पृथ्वी पर यदि कहीं बाघ इंसानों के सबसे नजदीक रहते हैं तो वह भोपाल है

    मुख्‍यमंत्री बोले- पृथ्वी पर यदि कहीं बाघ इंसानों के सबसे नजदीक रहते हैं तो वह भोपाल है


    बाघों की धरती पर संरक्षण का नया संकल्प: मध्य प्रदेश ने एक हजार टाइगर की ओर बढ़ाए कदम

    भोपाल । देश में सर्वाधिक बाघों वाले राज्य मध्य प्रदेश ने अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस पर वन्यजीव संरक्षण की दिशा में अपनी प्रतिबद्धता को नए संकल्प के साथ दोहराया। भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में आयोजित राज्य स्तरीय समारोह में बुधवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्पष्ट किया कि प्रदेश बाघ संरक्षण के क्षेत्र में लगातार नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है।

    उन्‍होंने कहा, वर्ष 2022 की गणना में 785 बाघों वाला मध्य प्रदेश अब आगामी गणना में एक हजार बाघों के आंकड़े के करीब पहुंचने की उम्मीद कर रहा है। इस अवसर पर रातापानी टाइगर रिजर्व का लोगो जारी किया गया, पेंच एडवांस्ड वॉर्निंग सिस्टम का लोकार्पण हुआ तथा वन्यजीव संरक्षण को मजबूत बनाने वाली अनेक पहलें सामने आईं।

    बाघ संरक्षण में अग्रणी बना मध्य प्रदेश
    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मध्य प्रदेश आज देश में बाघ संरक्षण का सबसे मजबूत केंद्र बनकर उभरा है। प्रदेश की वन संपदा, संरक्षित क्षेत्र और वन विभाग के समर्पित प्रयासों ने बाघों के लिए सुरक्षित वातावरण तैयार किया है। वर्ष 2022 की बाघ गणना में प्रदेश में 785 बाघ दर्ज किए गए थे और वर्तमान प्रयासों को देखते हुए अगली गणना में यह संख्या एक हजार के करीब पहुंचने की संभावना है। उन्होंने इसे वन विभाग, स्थानीय समुदायों और जनभागीदारी की बड़ी उपलब्धि बताया।

    वन्यजीव संरक्षण को नई तकनीक और नई पहचान
    समारोह के दौरान मुख्यमंत्री ने वन्यजीव संरक्षण गतिविधियों पर आधारित प्रदर्शनी का अवलोकन किया और संरक्षण कार्यों के लिए उपलब्ध कराए गए विशेष वाहनों का लोकार्पण किया। उन्होंने रातापानी टाइगर रिजर्व के आधिकारिक लोगो का अनावरण किया तथा पेंच एडवांस्ड वॉर्निंग सिस्टम का शुभारंभ किया। जैव विविधता और वन्यजीव संरक्षण पर आधारित पुस्तिकाओं का विमोचन भी किया गया। सक्रिय वन्यजीव प्रबंधन से जुड़े वृत्तचित्रों के टीजर जारी कर संरक्षण अभियानों को जन-जन तक पहुंचाने का संदेश दिया गया।

    प्रकृति संरक्षण भारतीय संस्कृति का मूल विचार
    मुख्यमंत्री ने गुरु पूर्णिमा के अवसर का उल्लेख करते हुए कहा कि यह पर्व अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाने वाली भारतीय परंपरा का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि भारत सदियों से प्रकृति के प्रति सम्मान और सह-अस्तित्व की भावना को जीवन का आधार मानता आया है। वैज्ञानिक जगदीश चंद्र बसु का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि पेड़ों में जीवन होने का विचार भारतीय ज्ञान परंपरा में बहुत पहले से स्वीकार किया गया था। प्रकृति और वन्यजीवों के संरक्षण की यही भावना आज भी हमारी सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा है।

    भोपाल के आसपास बाघों की विशेष मौजूदगी
    मुख्यमंत्री ने कहा कि पृथ्वी पर यदि कहीं बाघ मानव आबादी के सबसे निकट सुरक्षित रूप से निवास करते हैं तो वह भोपाल और उसके आसपास का क्षेत्र है। उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार बाघों के साथ-साथ नदियों में घड़ियालों के संरक्षण पर भी विशेष ध्यान दे रही है। पहले प्रदेश में छोड़े गए घड़ियाल दूसरे राज्यों की ओर चले जाते थे, अब ऐसी व्यवस्थाएं विकसित की जा रही हैं जिससे उनका सुरक्षित संरक्षण मध्य प्रदेश में ही सुनिश्चित हो सके। हाथियों की आवाजाही से होने वाली जनहानि को रोकने के लिए किए गए प्रयासों के भी सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं।

    वन विभाग के कार्यों की सराहना
    मुख्यमंत्री ने ओरछा स्थित माता महालक्ष्मी मंदिर की भव्यता का उल्लेख करते हुए कहा कि शासन के सभी विभाग महत्वपूर्ण हैं, फिर भी वन विभाग के साथ काम करने में उन्हें विशेष संतोष मिलता है। उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार अन्य राज्यों के साथ वन्यजीवों के आदान-प्रदान और संरक्षण सहयोग को भी बढ़ावा दे रही है, जिससे जैव विविधता के संरक्षण को नई गति मिल रही है।

    सम्मानित हुए वन संरक्षण के प्रहरी
    इस अवसर पर वन बल प्रमुख शुभरंजन सेन ने कहा कि अच्छा जंगल वही है, जहां बाघ, बाघिन और उनके शावक सुरक्षित हों। उन्होंने कहा कि बाघों का संरक्षण प्रकृति, जल स्रोतों और मानव जीवन की सुरक्षा से सीधे जुड़ा है। समारोह में वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले वन कर्मियों, वन सुरक्षा समितियों, ईको विकास समितियों, ग्राम वन समितियों तथा विशिष्ट विभूतियों को सम्मानित किया गया।

    इसके अलावा राज्य वन्य प्राणी बोर्ड के पद्मश्री सम्मानित सदस्यों का अभिनंदन भी किया गया। कार्यक्रम में स्कूल और कॉलेज के विद्यार्थियों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देकर प्रकृति संरक्षण का संदेश दिया। समारोह में वन एवं पर्यावरण राज्य मंत्री दिलीप अहिरवार सहित वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे।