Author: bharati

  • BreathEasy तकनीक से बदल सकती है कैंसर स्क्रीनिंग, कुत्ते सूंघकर करेंगे शुरुआती पहचान, जानिए कैसे करेगा काम

    BreathEasy तकनीक से बदल सकती है कैंसर स्क्रीनिंग, कुत्ते सूंघकर करेंगे शुरुआती पहचान, जानिए कैसे करेगा काम


    नई दिल्ली । कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के इलाज में समय पर पहचान सबसे बड़ी चुनौती मानी जाती है। यदि शुरुआती चरण में बीमारी का पता चल जाए तो उपचार की सफलता की संभावना काफी बढ़ जाती है। इसी दिशा में भारत की एक डीप टेक स्टार्टअप डॉग्नोसिस ऐसी नई तकनीक विकसित कर रही है जो भविष्य में कैंसर की स्क्रीनिंग का तरीका बदल सकती है। इस तकनीक की खास बात यह है कि इसमें ब्लड टेस्ट या स्कैन की जगह केवल व्यक्ति की सांस के नमूने का विश्लेषण किया जाएगा और इस प्रक्रिया में प्रशिक्षित कुत्तों की असाधारण सूंघने की क्षमता का उपयोग होगा।

    कंपनी ने अपनी इस तकनीक का नाम ब्रीथईजी रखा है। इसका उद्देश्य कैंसर का अंतिम निदान करना नहीं बल्कि उन लोगों की पहचान करना है जिनमें कैंसर होने का जोखिम अधिक हो सकता है। ऐसे लोगों को बाद में बायोप्सी ब्लड टेस्ट या इमेजिंग जैसी पारंपरिक जांच कराने की सलाह दी जाएगी। यदि मौजूदा क्लिनिकल ट्रायल सफल रहते हैं तो कंपनी वर्ष 2027 की शुरुआत में इस तकनीक को भारत में व्यावसायिक रूप से लॉन्च करने की योजना बना रही है।

    यह तकनीक एक वैज्ञानिक सिद्धांत पर आधारित है। जब शरीर में कैंसर कोशिकाएं विकसित होती हैं तो वे वॉलेटाइल ऑर्गेनिक कंपाउंड्स नामक सूक्ष्म रासायनिक अणु छोड़ती हैं जो सांस के साथ बाहर निकलते हैं। इंसानों की तुलना में कुत्तों की सूंघने की क्षमता कई हजार गुना अधिक संवेदनशील होती है इसलिए वे इन सूक्ष्म रासायनिक संकेतों को पहचान सकते हैं। डॉग्नोसिस मुख्य रूप से बीगल नस्ल के प्रशिक्षित कुत्तों का उपयोग कर रही है हालांकि अन्य नस्लों को भी इस कार्य के लिए तैयार किया जा रहा है।

    कंपनी की तकनीक केवल कुत्तों के व्यवहार पर निर्भर नहीं रहती। इसके साथ एक आधुनिक ब्रेन कंप्यूटर इंटरफेस भी विकसित किया गया है जो नमूने को सूंघते समय कुत्ते के मस्तिष्क की गतिविधियों को रिकॉर्ड और विश्लेषित करता है। इससे परिणामों की विश्वसनीयता बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। सांस का नमूना एक विशेष मास्क में लगभग दस मिनट तक सांस लेने के बाद लिया जाता है और फिर उसे स्वचालित प्रणाली में जांचा जाता है। कंपनी का दावा है कि यह प्लेटफॉर्म एक बार में 200 से अधिक नमूनों की जांच बिना मानवीय हस्तक्षेप के कर सकता है।

    फिलहाल यह तकनीक बड़े स्तर के क्लिनिकल परीक्षणों से गुजर रही है। शुरुआती अध्ययनों में कुछ मामलों में गलत पॉजिटिव और गलत निगेटिव परिणाम भी सामने आए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तकनीक में संभावनाएं जरूर हैं लेकिन इसे नियमित स्वास्थ्य सेवाओं का हिस्सा बनाने से पहले बड़े पैमाने पर वैज्ञानिक प्रमाण और व्यापक परीक्षण आवश्यक होंगे।

    विशेषज्ञ यह भी स्पष्ट करते हैं कि यह तकनीक कैंसर का अंतिम इलाज या अंतिम जांच नहीं है। इसका उद्देश्य केवल शुरुआती स्क्रीनिंग करना है ताकि जोखिम वाले लोगों की समय रहते पहचान हो सके और उन्हें आगे की आवश्यक चिकित्सीय जांच के लिए भेजा जा सके। यदि यह तकनीक सफल साबित होती है तो भविष्य में वार्षिक हेल्थ चेकअप का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकती है और कैंसर जैसी गंभीर बीमारी की जल्द पहचान में बड़ी भूमिका निभा सकती है।

  • भारत के दो और सिल्वर पर देश को गर्व, उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन, राजनाथ और मांडविया ने खिलाड़ियों की सराहना की

    भारत के दो और सिल्वर पर देश को गर्व, उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन, राजनाथ और मांडविया ने खिलाड़ियों की सराहना की


    नई दिल्ली । कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय खिलाड़ियों का शानदार प्रदर्शन लगातार जारी है। प्रतियोगिता के छठे दिन भारत की झोली में दो अहम रजत पदक आए। महिला वेटलिफ्टर हरजिंदर कौर ने 69 किलोग्राम वर्ग में बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए सिल्वर मेडल जीता, जबकि लंबी दूरी के धावक गुलवीर सिंह ने पुरुषों की 10 हजार मीटर दौड़ में इतिहास रचते हुए भारत को पहला कॉमनवेल्थ पदक दिलाया। दोनों खिलाड़ियों की इस उपलब्धि पर देशभर से उन्हें बधाइयां मिल रही हैं।

    उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर दोनों खिलाड़ियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि हरजिंदर कौर और गुलवीर सिंह ने अपने शानदार प्रदर्शन से देश का गौरव बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि हरजिंदर का दृढ़ संकल्प और गुलवीर की ऐतिहासिक उपलब्धि देश के लाखों युवा खिलाड़ियों को प्रेरित करेगी। उपराष्ट्रपति ने दोनों खिलाड़ियों के उज्ज्वल भविष्य और आगे भी इसी तरह सफलता हासिल करने की कामना की।

    रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी दोनों खिलाड़ियों की उपलब्धियों की सराहना की। उन्होंने गुलवीर सिंह को पुरुषों की 10 हजार मीटर दौड़ में सिल्वर मेडल जीतने और इस स्पर्धा में कॉमनवेल्थ गेम्स का पदक जीतने वाले पहले भारतीय बनने पर बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह सफलता गुलवीर की कड़ी मेहनत, अनुशासन और अटूट संकल्प का परिणाम है, जिसने पूरे देश का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है।

    हरजिंदर कौर के प्रदर्शन की प्रशंसा करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि वेटलिफ्टिंग में भारत के लिए एक और पदक जीतना देश के लिए गर्व की बात है। उन्होंने कहा कि हरजिंदर ने अपने समर्पण और संघर्ष से यह साबित कर दिया है कि भारतीय खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय मंच पर लगातार उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकते हैं। उन्होंने उनके भविष्य के लिए शुभकामनाएं भी दीं।

    केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने भी दोनों खिलाड़ियों को बधाई देते हुए कहा कि गुलवीर सिंह ने एथलेटिक्स में शानदार प्रदर्शन कर भारत का सम्मान बढ़ाया है। वहीं हरजिंदर कौर ने दमदार खेल दिखाते हुए पोडियम पर जगह बनाकर भारतीय वेटलिफ्टिंग की मजबूत परंपरा को आगे बढ़ाया है। उन्होंने दोनों खिलाड़ियों की मेहनत और समर्पण की सराहना की।

    उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी गुलवीर सिंह को विशेष रूप से बधाई दी। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के सपूत और भारतीय सेना के नायब सूबेदार गुलवीर सिंह ने कॉमनवेल्थ गेम्स में सिल्वर मेडल जीतकर प्रदेश और पूरे देश का गौरव बढ़ाया है। उन्होंने इस उपलब्धि को कड़ी मेहनत, अनुशासन और राष्ट्र के प्रति समर्पण का उत्कृष्ट उदाहरण बताया तथा गुलवीर के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

    ग्लासगो में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में हरजिंदर कौर ने कुल 227 किलोग्राम वजन उठाकर महिलाओं के 69 किलोग्राम वर्ग में रजत पदक जीता। वहीं गुलवीर सिंह ने 10 हजार मीटर दौड़ में शानदार प्रदर्शन करते हुए सिल्वर मेडल अपने नाम किया और इस स्पर्धा में पदक जीतने वाले पहले भारतीय बनकर इतिहास रच दिया। दोनों खिलाड़ियों की सफलता ने भारत के पदक अभियान को नई मजबूती दी है और खेल प्रेमियों में उत्साह का माहौल बना दिया है।

  • WTC 2025-27 अंकतालिका: जीत के बावजूद वेस्टइंडीज को नहीं मिला फायदा, पाकिस्तान सबसे आखिरी पायदान पर

    WTC 2025-27 अंकतालिका: जीत के बावजूद वेस्टइंडीज को नहीं मिला फायदा, पाकिस्तान सबसे आखिरी पायदान पर

    नई दिल्ली ।  वेस्टइंडीज ने पहले टेस्ट मैच में शानदार प्रदर्शन करते हुए पाकिस्तान को 90 रन से हराकर दो मैचों की टेस्ट सीरीज में 1-0 की बढ़त हासिल कर ली है। हालांकि इस अहम जीत के बावजूद कैरेबियाई टीम को वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप (WTC) की अंकतालिका में कोई बड़ा फायदा नहीं मिला और वह आठवें स्थान पर ही बनी हुई है। दूसरी ओर पाकिस्तान की लगातार खराब फॉर्म ने उसकी मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। चौथी हार के बाद टीम अंकतालिका में सबसे निचले पायदान पर पहुंच गई है।

    वेस्टइंडीज ने मौजूदा WTC चक्र में अब तक 11 टेस्ट मुकाबले खेले हैं, जिनमें उसे केवल दो जीत मिली हैं, जबकि सात मैचों में हार का सामना करना पड़ा है। इस प्रदर्शन के बाद टीम का जीत प्रतिशत 22.73 हो गया है। दूसरी ओर पाकिस्तान ने अब तक पांच टेस्ट खेले हैं, जिनमें सिर्फ एक जीत दर्ज कर सका है। चार हार के साथ उसका जीत प्रतिशत महज 6.67 रह गया है, जो सभी टीमों में सबसे कम है।

    अंकतालिका में ऑस्ट्रेलिया अपना शानदार प्रदर्शन जारी रखते हुए शीर्ष स्थान पर कायम है। टीम ने आठ टेस्ट मैचों में सात जीत हासिल की हैं और उसका जीत प्रतिशत 87.50 है। दक्षिण अफ्रीका चार मैचों में तीन जीत के साथ 75 प्रतिशत जीत दर लेकर दूसरे स्थान पर है। न्यूजीलैंड छह मैचों में चार जीत और एक हार के साथ तीसरे स्थान पर बना हुआ है। बांग्लादेश 58.33 प्रतिशत जीत दर के साथ चौथे स्थान पर है, जबकि भारत नौ टेस्ट में चार जीत और 48.15 प्रतिशत जीत के साथ पांचवें स्थान पर मौजूद है।

    पहले टेस्ट में पाकिस्तान को जीत के लिए 211 रन का लक्ष्य मिला था, लेकिन उसकी बल्लेबाजी पूरी तरह बिखर गई। पूरी टीम दूसरी पारी में केवल 120 रन पर सिमट गई। कप्तान बाबर आजम ने सबसे अधिक 58 रन बनाए, लेकिन उन्हें दूसरे छोर से किसी बल्लेबाज का साथ नहीं मिला। पाकिस्तान के आठ बल्लेबाज दहाई का आंकड़ा भी नहीं छू सके।

    वेस्टइंडीज की जीत के नायक तेज गेंदबाज जयडेन सील्स रहे, जिन्होंने दूसरी पारी में 20 रन देकर पांच विकेट झटके। केमार रोच और जस्टिन ग्रीव्स ने भी दो-दो विकेट लेकर पाकिस्तान की बल्लेबाजी को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया। इससे पहले वेस्टइंडीज ने पहली पारी में 311 रन बनाए थे, जिसके जवाब में पाकिस्तान 282 रन पर ऑलआउट हो गया। दूसरी पारी में कैरेबियाई टीम ने 181 रन बनाकर पाकिस्तान के सामने 211 रन का लक्ष्य रखा था, जिसे मेहमान टीम हासिल नहीं कर सकी।

    इस जीत से वेस्टइंडीज ने सीरीज में बढ़त तो बना ली है, लेकिन WTC अंकतालिका में उसकी स्थिति फिलहाल नहीं बदली है। वहीं पाकिस्तान के लिए अब अगला टेस्ट मुकाबला केवल सीरीज बचाने ही नहीं, बल्कि वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप में अपनी स्थिति सुधारने के लिहाज से भी बेहद महत्वपूर्ण होगा।

  • एशियन गेम्स 2026: हरमनप्रीत की कप्तानी में उतरेगा भारत, हॉकी इंडिया ने घोषित किया 20 सदस्यीय दल

    एशियन गेम्स 2026: हरमनप्रीत की कप्तानी में उतरेगा भारत, हॉकी इंडिया ने घोषित किया 20 सदस्यीय दल


    नई दिल्ली । हॉकी इंडिया ने जापान के आइची-नागोया में आयोजित होने वाले 20वें एशियाई खेलों के लिए भारतीय पुरुष हॉकी टीम का ऐलान कर दिया है। 19 सितंबर से 4 अक्टूबर तक होने वाले इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट में स्टार डिफेंडर हरमनप्रीत सिंह भारतीय टीम की कप्तानी करेंगे। मौजूदा चैंपियन भारत इस बार भी स्वर्ण पदक बरकरार रखने के इरादे से मैदान में उतरेगा। इस टूर्नामेंट का विजेता सीधे लॉस एंजिल्स ओलंपिक 2028 के लिए क्वालीफाई करेगा, इसलिए यह प्रतियोगिता भारतीय टीम के लिए बेहद अहम मानी जा रही है।

    हॉकी इंडिया ने इस बार अनुभव और युवा जोश का संतुलित मिश्रण तैयार किया है। टीम में देश के सबसे अनुभवी खिलाड़ियों में शामिल मिडफील्डर मनप्रीत सिंह को भी जगह दी गई है। लंबे अंतरराष्ट्रीय अनुभव के साथ मनप्रीत टीम को मजबूती देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

    गोलकीपिंग की जिम्मेदारी मोहित एचएस और सूरज करकेरा के कंधों पर होगी। डिफेंस में कप्तान हरमनप्रीत सिंह के साथ जरमनप्रीत सिंह, अमित रोहिदास, जुगराज सिंह, संजय, सुमित और यशदीप सिवाच शामिल किए गए हैं। मिडफील्ड में हार्दिक सिंह, मनप्रीत सिंह, विवेक सागर प्रसाद, नीलाकांता शर्मा, राजिंदर सिंह और राज कुमार पाल टीम की कमान संभालेंगे। वहीं फॉरवर्ड लाइन में दिलप्रीत सिंह, मनदीप सिंह, सुखजीत सिंह, शिलानंद लाकड़ा और अभिषेक विरोधी टीमों के खिलाफ गोल दागने की जिम्मेदारी निभाएंगे।

    भारतीय टीम को पूल-ए में मेजबान जापान, दक्षिण कोरिया, बांग्लादेश, श्रीलंका और इंडोनेशिया के साथ रखा गया है। भारत अपने अभियान की शुरुआत 20 सितंबर को इंडोनेशिया के खिलाफ करेगा। इसके बाद श्रीलंका से 22 सितंबर, कोरिया से 24 सितंबर, जापान से 26 सितंबर और बांग्लादेश से 28 सितंबर को मुकाबला होगा। सभी मैच जापान के काकामिगहारा स्थित गिफू प्रीफेक्चुरल ग्रीन स्टेडियम में खेले जाएंगे।

    मुख्य कोच क्रेग फुल्टन ने टीम की घोषणा के बाद कहा कि भारतीय टीम पूरी तरह तैयार है और उसका सबसे बड़ा लक्ष्य एशियाई खेलों का स्वर्ण पदक जीतकर लॉस एंजिल्स ओलंपिक 2028 का सीधा टिकट हासिल करना है। उन्होंने भरोसा जताया कि अनुभवी और युवा खिलाड़ियों का यह संयोजन टीम को सफलता दिलाने में सक्षम है।

    कप्तान हरमनप्रीत सिंह ने भी टीम पर पूरा विश्वास जताया। उन्होंने कहा कि चाहे युवा खिलाड़ी हों या अनुभवी, सभी अपनी जिम्मेदारियों को अच्छी तरह समझते हैं। उनका मानना है कि खिलाड़ियों को बिना किसी दबाव के अपना स्वाभाविक खेल खेलना चाहिए और हर मौके का पूरा फायदा उठाना चाहिए।

    भारत ने 2023 के हांगझोउ एशियाई खेलों में हरमनप्रीत सिंह की कप्तानी में स्वर्ण पदक जीतकर पेरिस ओलंपिक का टिकट हासिल किया था। अब टीम की नजर लगातार दूसरी बार एशियाई खेलों का खिताब जीतने और एक बार फिर सीधे ओलंपिक में जगह बनाने पर होगी।

    भारतीय टीम

    गोलकीपर: मोहित एचएस, सूरज करकेरा

    डिफेंडर: जरमनप्रीत सिंह, हरमनप्रीत सिंह (कप्तान), अमित रोहिदास, जुगराज सिंह, संजय, सुमित, यशदीप सिवाच

    मिडफील्डर: राजिंदर सिंह, राज कुमार पाल, हार्दिक सिंह, मनप्रीत सिंह, नीलाकांता शर्मा, विवेक सागर प्रसाद

    फॉरवर्ड: दिलप्रीत सिंह, शिलानंद लाकड़ा, सुखजीत सिंह, मनदीप सिंह, अभिषेक

  • ग्लासगो में भारत का दमदार प्रदर्शन, गुलवीर ने रचा इतिहास, हरजिंदर ने जीता सिल्वर; अमित शाह ने दी शुभकामनाएं

    ग्लासगो में भारत का दमदार प्रदर्शन, गुलवीर ने रचा इतिहास, हरजिंदर ने जीता सिल्वर; अमित शाह ने दी शुभकामनाएं


    नई दिल्ली । ग्लासगो में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय खिलाड़ियों का शानदार प्रदर्शन लगातार जारी है। पुरुषों की 10,000 मीटर दौड़ में इतिहास रचने वाले गुलवीर सिंह और महिला वेटलिफ्टिंग के 69 किलोग्राम वर्ग में रजत पदक जीतने वाली हरजिंदर कौर को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बधाई देते हुए उनके प्रदर्शन की सराहना की है। दोनों खिलाड़ियों की उपलब्धियों को भारत के खेल इतिहास में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    अमित शाह ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर गुलवीर सिंह को शुभकामनाएं देते हुए लिखा कि कॉमनवेल्थ गेम्स की 10,000 मीटर दौड़ में भारत के लिए पहला पदक जीतना एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि गुलवीर की यह सफलता देश के युवा खिलाड़ियों को प्रेरित करेगी और आने वाले वर्षों में भारतीय एथलेटिक्स को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में मदद करेगी।

    गुलवीर सिंह ने ग्लासगो में बारिश के बीच बेहद चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में शानदार दौड़ लगाई। राष्ट्रीय रिकॉर्डधारी भारतीय धावक पूरे मुकाबले में शीर्ष धावकों के साथ बने रहे और अंतिम लैप में जबरदस्त गति दिखाते हुए 27 मिनट 49.78 सेकंड का समय निकालकर सिल्वर मेडल अपने नाम किया। इसके साथ ही वह कॉमनवेल्थ गेम्स की 10,000 मीटर स्पर्धा में पदक जीतने वाले पहले भारतीय एथलीट बन गए। इससे पहले उनके नाम एशियन गेम्स का कांस्य पदक और एशियन एथलेटिक्स चैंपियनशिप के दो स्वर्ण पदक भी दर्ज हैं।

    वहीं महिला वेटलिफ्टिंग में हरजिंदर कौर ने भी भारत का गौरव बढ़ाया। उन्होंने 69 किलोग्राम वर्ग में कुल 227 किलोग्राम भार उठाकर सिल्वर मेडल अपने नाम किया। स्नैच राउंड में हरजिंदर ने 101 किलोग्राम और क्लीन एंड जर्क में 126 किलोग्राम वजन उठाते हुए अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया। इस स्पर्धा का स्वर्ण पदक कनाडा की शार्लेट सिमोन्यू ने 240 किलोग्राम कुल वजन उठाकर जीता, जबकि ऑस्ट्रेलिया की नया फीबे हेमन ने 218 किलोग्राम के साथ कांस्य पदक हासिल किया।

    हरजिंदर की उपलब्धि पर अमित शाह ने कहा कि वेटलिफ्टिंग में भारत का पदक जीतने का सिलसिला लगातार जारी है। उन्होंने लिखा कि यह सफलता उनकी कड़ी मेहनत, समर्पण और संघर्ष का परिणाम है तथा भविष्य में भी उनसे ऐसे ही उत्कृष्ट प्रदर्शन की उम्मीद है।

    कॉमनवेल्थ गेम्स में वेटलिफ्टिंग हमेशा से भारत के सबसे मजबूत खेलों में शामिल रही है और इस बार भी भारतीय खिलाड़ियों ने इस परंपरा को कायम रखा है। दूसरी ओर एथलेटिक्स में गुलवीर सिंह का ऐतिहासिक पदक यह संकेत देता है कि अब भारत लंबी दूरी की दौड़ जैसी चुनौतीपूर्ण स्पर्धाओं में भी विश्व स्तर पर अपनी मजबूत पहचान बना रहा है।

    गुलवीर सिंह और हरजिंदर कौर की इन उपलब्धियों ने ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत के अभियान को नई मजबूती दी है। दोनों खिलाड़ियों के शानदार प्रदर्शन से देशवासियों में उत्साह है और भारतीय दल से आगामी मुकाबलों में भी पदकों की उम्मीदें बढ़ गई हैं।

  • सिनेमाघरों में नहीं चली किस्मत, हिंदी डब रिलीज के बाद YouTube पर 100 करोड़ व्यूज पार कर रचा अनोखा रिकॉर्ड

    सिनेमाघरों में नहीं चली किस्मत, हिंदी डब रिलीज के बाद YouTube पर 100 करोड़ व्यूज पार कर रचा अनोखा रिकॉर्ड


    नई दिल्ली ।
    फिल्म उद्योग में कई बार ऐसा देखने को मिलता है कि कोई फिल्म सिनेमाघरों में दर्शकों का अपेक्षित समर्थन नहीं जुटा पाती, लेकिन बाद में किसी दूसरे मंच पर उसे नई पहचान मिल जाती है। तेलुगु फिल्म ‘जया जानकी नायक’ इसका एक प्रमुख उदाहरण बनकर सामने आई है। वर्ष 2017 में रिलीज हुई यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर उम्मीदों के अनुरूप प्रदर्शन नहीं कर सकी थी, लेकिन कुछ वर्षों बाद डिजिटल प्लेटफॉर्म पर इसने ऐसी उपलब्धि हासिल की, जिसने इसे भारतीय सिनेमा की चर्चित फिल्मों की सूची में शामिल कर दिया।

    निर्देशक बोयापति श्रीनु के निर्देशन में बनी इस फिल्म में बेलमकोंडा श्रीनिवास और रकुल प्रीत सिंह मुख्य भूमिकाओं में नजर आए थे। फिल्म का निर्माण लगभग 40 करोड़ रुपये के बजट में किया गया था। हालांकि रिलीज के बाद यह दर्शकों को सिनेमाघरों तक आकर्षित करने में सफल नहीं रही और इसकी कमाई करीब 20 करोड़ रुपये तक ही सीमित रही। लागत की तुलना में कम कारोबार होने के कारण इसे बॉक्स ऑफिस पर असफल फिल्मों में गिना गया।

    फिल्म के कमजोर प्रदर्शन के बावजूद निर्माताओं ने इसके प्रति उम्मीद नहीं छोड़ी। उन्होंने बदलते डिजिटल दौर को देखते हुए फिल्म को नए दर्शकों तक पहुंचाने की रणनीति अपनाई। इसके तहत वर्ष 2019 में फिल्म का हिंदी डब संस्करण तैयार किया गया और इसका नाम बदलकर ‘खूंखार’ रखा गया। इसके बाद इसे YouTube पर रिलीज किया गया, जहां फिल्म को अप्रत्याशित रूप से बड़ी संख्या में दर्शकों का समर्थन मिलने लगा।

    हिंदी भाषा में उपलब्ध होने के कारण फिल्म देशभर के उन दर्शकों तक भी पहुंची, जो पहले इसे नहीं देख पाए थे। एक्शन, पारिवारिक भावनाओं और व्यावसायिक मनोरंजन से भरपूर कहानी ने डिजिटल दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया। धीरे-धीरे फिल्म के व्यूज लगातार बढ़ते गए और समय के साथ इसने एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल कर ली।

    फिल्म का हिंदी संस्करण YouTube पर 100 करोड़ यानी एक बिलियन से अधिक व्यूज का आंकड़ा पार करने में सफल रहा। इस उपलब्धि के साथ यह 100 करोड़ व्यूज हासिल करने वाली पहली भारतीय फीचर फिल्म बन गई। जिस फिल्म को कभी बॉक्स ऑफिस पर असफल माना गया था, वही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सबसे ज्यादा देखी जाने वाली भारतीय फिल्मों में शामिल हो गई।

    यह उदाहरण इस बात को भी दर्शाता है कि किसी फिल्म की सफलता अब केवल थिएटर कलेक्शन तक सीमित नहीं रह गई है। डिजिटल प्लेटफॉर्म ने फिल्मों के लिए नए अवसर तैयार किए हैं, जहां भाषा की बाधाएं भी काफी हद तक समाप्त हो चुकी हैं। हिंदी डब संस्करणों की बढ़ती लोकप्रियता ने दक्षिण भारतीय फिल्मों को देशभर में नई पहचान दिलाई है और दर्शकों का दायरा पहले से कहीं अधिक विस्तृत हुआ है।

    ‘जया जानकी नायक’ की यह यात्रा फिल्म उद्योग के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। यह साबित करती है कि यदि किसी फिल्म की सामग्री दर्शकों को पसंद आती है तो वह समय के साथ नए मंचों पर भी सफलता हासिल कर सकती है। डिजिटल माध्यमों ने फिल्मों को दूसरा अवसर दिया है और कई ऐसी फिल्मों को नई पहचान मिली है, जिन्हें सिनेमाघरों में अपेक्षित सफलता नहीं मिल पाई थी।

  • 'रामायण' में मंदोदरी निभा रहीं काजल अग्रवाल ने सुनाई पुरानी घटना, कहा- आज भी याद कर सिहर उठती हूं

    'रामायण' में मंदोदरी निभा रहीं काजल अग्रवाल ने सुनाई पुरानी घटना, कहा- आज भी याद कर सिहर उठती हूं

    नई दिल्ली । दक्षिण भारतीय और हिंदी सिनेमा की जानी-मानी अभिनेत्री काजल अग्रवाल ने अपने फिल्मी करियर के शुरुआती दौर से जुड़ा एक ऐसा अनुभव साझा किया है, जिसने उन्हें गहरे स्तर पर प्रभावित किया था। अभिनेत्री ने बताया कि एक फिल्म की शूटिंग के दौरान उनके साथ हुई एक अप्रत्याशित घटना आज भी उन्हें असहज कर देती है। उनका कहना है कि उस समय जो कुछ हुआ, उसने उन्हें कुछ क्षणों के लिए पूरी तरह स्तब्ध कर दिया था।

    हाल ही में दिए गए एक इंटरव्यू में काजल अग्रवाल ने बताया कि वह शूटिंग के बीच अपने वैनिटी वैन में आराम कर रही थीं। इसी दौरान फिल्म यूनिट से जुड़ा एक असिस्टेंट डायरेक्टर बिना किसी अनुमति के सीधे उनकी वैनिटी वैन के भीतर आ गया। अचानक किसी अनजान व्यक्ति को सामने देखकर वह हैरान रह गईं और कुछ पल के लिए समझ ही नहीं पाईं कि स्थिति से कैसे निपटा जाए।

    अभिनेत्री के अनुसार, मामला तब और अधिक चौंकाने वाला हो गया जब उस व्यक्ति ने अपनी शर्ट उतारकर उन्हें अपनी छाती पर बना उनके नाम का टैटू दिखाया। काजल ने बताया कि यह सब इतनी तेजी से हुआ कि वह पूरी तरह घबरा गई थीं। उन्हें उस समय भय और असुरक्षा का एहसास हुआ तथा उनके हाथ-पैर तक कांपने लगे थे। उन्होंने कहा कि यह घटना उनके लिए बेहद असहज और डरावनी थी तथा इसकी याद आज भी उन्हें विचलित कर देती है।

    काजल अग्रवाल ने इस अनुभव को साझा करते हुए व्यक्तिगत सीमाओं और कार्यस्थल पर पेशेवर व्यवहार के महत्व पर भी जोर दिया। उनका मानना है कि किसी भी कलाकार या कर्मचारी की निजी जगह का सम्मान किया जाना आवश्यक है और बिना अनुमति किसी के निजी क्षेत्र में प्रवेश करना स्वीकार्य नहीं माना जा सकता। उन्होंने संकेत दिया कि फिल्म उद्योग सहित हर कार्यस्थल पर सुरक्षित और सम्मानजनक माहौल सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

    फिल्मी करियर की बात करें तो काजल अग्रवाल ने दक्षिण भारतीय सिनेमा से अपने अभिनय सफर की शुरुआत की थी। अपनी दमदार अदाकारी और कई सफल फिल्मों के दम पर उन्होंने तेलुगु, तमिल और हिंदी फिल्मों में मजबूत पहचान बनाई। समय के साथ उन्होंने विभिन्न प्रकार के किरदार निभाकर खुद को एक बहुमुखी अभिनेत्री के रूप में स्थापित किया है।

    इन दिनों काजल अग्रवाल अपनी आगामी फिल्म ‘रामायण’ को लेकर भी चर्चा में हैं। इस बहुचर्चित फिल्म में वह मंदोदरी की भूमिका निभाती नजर आएंगी। बड़े बजट में तैयार की जा रही इस फिल्म को लेकर दर्शकों के बीच काफी उत्सुकता बनी हुई है। फिल्म का ट्रेलर 30 जुलाई को जारी किया जाना है और इसके बाद दर्शकों को इसके भव्य प्रस्तुतीकरण की पहली झलक देखने को मिलेगी।

    मनोरंजन जगत में जहां कलाकार अपनी उपलब्धियों के लिए चर्चा में रहते हैं, वहीं समय-समय पर उनके निजी अनुभव भी कार्यस्थल की सुरक्षा और पेशेवर मर्यादाओं जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर ध्यान आकर्षित करते हैं। काजल अग्रवाल द्वारा साझा किया गया यह अनुभव भी इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण संदेश देता है कि किसी भी पेशे में सम्मान, सहमति और व्यक्तिगत सीमाओं का पालन सर्वोपरि होना चाहिए।

  • शुभमन गिल ने फिर हासिल किया वनडे का ताज, 15 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी टी20 रैंकिंग के टॉप-50 में पहुंचे

    शुभमन गिल ने फिर हासिल किया वनडे का ताज, 15 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी टी20 रैंकिंग के टॉप-50 में पहुंचे


    नई दिल्ली । भारतीय क्रिकेट के लिए आईसीसी की ताजा रैंकिंग खुशखबरी लेकर आई है। कप्तान शुभमन गिल ने एक बार फिर वनडे क्रिकेट में दुनिया के नंबर-1 बल्लेबाज का स्थान हासिल कर लिया है, जबकि 15 वर्षीय युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी ने टी20 अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग में 230 पायदान की जबरदस्त छलांग लगाकर क्रिकेट जगत का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। दोनों खिलाड़ियों की उपलब्धियां भारतीय क्रिकेट की मजबूत होती नई पीढ़ी की तस्वीर पेश करती हैं।

    आईसीसी द्वारा जारी नई वनडे रैंकिंग में शुभमन गिल ने न्यूजीलैंड के डेरिल मिचेल को पीछे छोड़ते हुए शीर्ष स्थान हासिल किया। डेरिल मिचेल जनवरी से नंबर-1 बल्लेबाज बने हुए थे, लेकिन हाल के महीनों में अंतरराष्ट्रीय मुकाबले नहीं खेलने के कारण उनकी रेटिंग प्रभावित हुई। इसका फायदा शुभमन गिल को मिला और उन्होंने एक बार फिर दुनिया के सर्वश्रेष्ठ वनडे बल्लेबाज का ताज अपने नाम कर लिया।

    दूसरी ओर, जिम्बाब्वे के खिलाफ टी20 सीरीज में धमाकेदार प्रदर्शन करने वाले युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी ने इतिहास रच दिया। भारत ने यह सीरीज 3-0 से अपने नाम की और वैभव ने तीन मैचों में 50.33 की शानदार औसत से 151 रन बनाए। उनकी आक्रामक बल्लेबाजी के लिए उन्हें प्लेयर ऑफ द सीरीज भी चुना गया। इसी प्रदर्शन का इनाम उन्हें आईसीसी रैंकिंग में मिला, जहां उन्होंने एक साथ 230 स्थान की छलांग लगाते हुए 536 रेटिंग अंकों के साथ अपने करियर की सर्वश्रेष्ठ 48वीं रैंक हासिल की। महज 15 वर्ष की उम्र में टी20 रैंकिंग के टॉप-50 में पहुंचना उनके उज्ज्वल भविष्य का संकेत माना जा रहा है।

    टी20 बल्लेबाजों की रैंकिंग में भारत के ईशान किशन अब भी दुनिया के नंबर-1 बल्लेबाज बने हुए हैं। उनके खाते में 910 रेटिंग अंक हैं। वहीं तिलक वर्मा दो स्थान की छलांग लगाकर छठे स्थान पर पहुंच गए हैं, जबकि श्रेयस अय्यर सात स्थान की बढ़त के साथ 24वें नंबर पर पहुंच गए हैं। भारतीय बल्लेबाजों का यह शानदार प्रदर्शन टीम की मजबूत बल्लेबाजी लाइनअप को दर्शाता है।

    गेंदबाजी रैंकिंग में भी भारत को फायदा हुआ है। लेग स्पिनर रवि बिश्नोई ने जिम्बाब्वे सीरीज में तीन विकेट हासिल किए, जिसके बाद उन्होंने 31 स्थान की लंबी छलांग लगाकर टी20 गेंदबाजों की रैंकिंग में 41वां स्थान हासिल कर लिया।

    जिम्बाब्वे की टीम सीरीज हार गई, लेकिन उसके कुछ खिलाड़ियों के प्रदर्शन को भी आईसीसी ने सराहा। बल्लेबाज रयान बर्ल छह स्थान ऊपर चढ़कर संयुक्त रूप से 85वें स्थान पर पहुंच गए, जबकि तेज गेंदबाज ब्लेसिंग मुजराबानी 10 स्थान की छलांग लगाकर 26वें नंबर पर पहुंच गए।

    वनडे गेंदबाजी रैंकिंग में भी बदलाव देखने को मिला है। नामीबिया के बाएं हाथ के स्पिनर बर्नार्ड शोल्ट्ज ने नेपाल और नीदरलैंड के खिलाफ आईसीसी क्रिकेट वर्ल्ड कप लीग-2 ट्राई सीरीज में शानदार प्रदर्शन के दम पर टॉप-7 गेंदबाजों में जगह बना ली है।

    ताजा आईसीसी रैंकिंग ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि भारतीय क्रिकेट केवल अनुभवी खिलाड़ियों पर ही नहीं, बल्कि युवा प्रतिभाओं के दम पर भी लगातार नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रहा है। शुभमन गिल की नंबर-1 रैंकिंग और वैभव सूर्यवंशी की ऐतिहासिक छलांग भारतीय क्रिकेट के भविष्य के लिए बेहद सकारात्मक संकेत मानी जा रही है।

  • श्रीदेवी की याद दिलाने वाली अदाओं से छाईं कंटेंट क्रिएटर, वायरल वीडियो देख फैंस बोले- फिर लौट आईं 'हवा हवाई'

    श्रीदेवी की याद दिलाने वाली अदाओं से छाईं कंटेंट क्रिएटर, वायरल वीडियो देख फैंस बोले- फिर लौट आईं 'हवा हवाई'

    नई दिल्ली । दिवंगत अभिनेत्री श्रीदेवी को आज भी भारतीय सिनेमा की सबसे प्रतिभाशाली और लोकप्रिय अभिनेत्रियों में गिना जाता है। उनकी अभिनय शैली, नृत्य, चुलबुला अंदाज और सहज अभिव्यक्ति आज भी दर्शकों के दिलों में जिंदा है। उनके निधन के वर्षों बाद भी प्रशंसक उन्हें याद करते हैं और उनके गीतों व फिल्मों को बड़े उत्साह से देखते हैं। इसी बीच सोशल मीडिया पर एक कंटेंट क्रिएटर का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसे देखकर कई लोग श्रीदेवी की याद ताजा होने की बात कह रहे हैं।

    इन दिनों भूमिका तिवारी नाम की कंटेंट क्रिएटर इंटरनेट पर चर्चा का विषय बनी हुई हैं। उन्होंने फिल्म ‘चालबाज़’ के लोकप्रिय गीत ‘किसी के हाथ ना आएगी’ पर एक डांस वीडियो साझा किया है। वीडियो में उन्होंने श्रीदेवी की शैली से प्रेरित वेशभूषा, हावभाव और नृत्य प्रस्तुति को अपनाने की कोशिश की है। उनके एक्सप्रेशन और प्रस्तुति ने बड़ी संख्या में सोशल मीडिया यूजर्स का ध्यान अपनी ओर खींचा है।

    वीडियो सामने आने के बाद कई लोगों ने भूमिका की तुलना सीधे श्रीदेवी से करनी शुरू कर दी। सोशल मीडिया पर यूजर्स का कहना है कि उनके चेहरे के भाव, मासूम मुस्कान और चुलबुले अंदाज में उन्हें दिवंगत अभिनेत्री की झलक दिखाई देती है। हालांकि यह प्रशंसकों की व्यक्तिगत प्रतिक्रिया है, लेकिन वीडियो ने इंटरनेट पर व्यापक चर्चा जरूर छेड़ दी है।

    भूमिका तिवारी लंबे समय से श्रीदेवी के लोकप्रिय गीतों पर आधारित डांस रील्स बनाती रही हैं। उनके सोशल मीडिया प्रोफाइल पर ऐसे कई वीडियो मौजूद हैं, जिनमें उन्होंने अभिनेत्री के यादगार गानों को अपने अंदाज में प्रस्तुत किया है। इसी निरंतरता ने उन्हें बड़ी संख्या में दर्शकों तक पहुंचाया है। उनके इंस्टाग्राम अकाउंट पर 10 लाख से अधिक फॉलोअर्स हैं, जहां उनके वीडियो नियमित रूप से अच्छी प्रतिक्रिया प्राप्त करते हैं।

    वायरल हुए इस वीडियो को भी बड़ी संख्या में लोगों ने पसंद किया है। इसे एक लाख से अधिक लाइक्स मिल चुके हैं और कमेंट सेक्शन में हजारों यूजर्स ने उनकी प्रस्तुति की सराहना की है। कई लोगों ने लिखा कि उनके एक्सप्रेशन बेहद प्रभावशाली हैं, जबकि कुछ ने कहा कि वीडियो देखकर उन्हें श्रीदेवी की फिल्मों की याद आ गई। कई प्रशंसकों ने उन्हें भविष्य में फिल्मों में अभिनय करने की सलाह भी दी और उनके आत्मविश्वास तथा स्क्रीन प्रेजेंस की तारीफ की।

    सोशल मीडिया के दौर में ऐसे कई कलाकार सामने आए हैं, जिन्होंने अपनी प्रतिभा के दम पर अलग पहचान बनाई है। किसी लोकप्रिय अभिनेता या अभिनेत्री की शैली से प्रेरित प्रस्तुति दर्शकों का ध्यान आकर्षित करती है, लेकिन अपनी अलग पहचान बनाए रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण माना जाता है। भूमिका तिवारी का यह वीडियो भी इसी वजह से चर्चा में है, क्योंकि उन्होंने अपने प्रदर्शन के माध्यम से दिवंगत अभिनेत्री को श्रद्धांजलि देने का प्रयास किया है।

    श्रीदेवी भारतीय सिनेमा की उन अभिनेत्रियों में शामिल रही हैं, जिनकी फिल्मों और गीतों का प्रभाव आज भी दर्शकों के बीच बरकरार है। यही कारण है कि जब भी कोई कलाकार उनके अंदाज को मंच या सोशल मीडिया पर प्रस्तुत करता है, दर्शकों की उत्सुकता स्वाभाविक रूप से बढ़ जाती है। भूमिका तिवारी का यह वीडियो भी इसी कड़ी में इंटरनेट पर तेजी से लोकप्रिय हो रहा है और लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।

  • बिना अनुमति सलमान खान की छवि के व्यावसायिक इस्तेमाल पर अदालत सख्त, 24 घंटे में कंटेंट हटाने के निर्देश

    बिना अनुमति सलमान खान की छवि के व्यावसायिक इस्तेमाल पर अदालत सख्त, 24 घंटे में कंटेंट हटाने के निर्देश


    नई दिल्ली । 
    अभिनेता सलमान खान को उनकी पर्सनैलिटी राइट्स से जुड़े मामले में दिल्ली हाई कोर्ट से अंतरिम राहत मिली है। अदालत ने फिल्म ‘काला हिरण: द बैटल फॉर लीगल’ के टीजर और उससे संबंधित प्रचार सामग्री को विभिन्न ऑनलाइन और डिजिटल प्लेटफॉर्म से हटाने का निर्देश दिया है। साथ ही फिल्म निर्माताओं को भविष्य में भी इस प्रकार की सामग्री का प्रचार-प्रसार करने से रोक दिया गया है। अदालत का यह आदेश सलमान खान द्वारा दायर उस याचिका पर आया है, जिसमें उन्होंने अपनी अनुमति के बिना उनके नाम, व्यक्तित्व और सार्वजनिक छवि के कथित व्यावसायिक उपयोग पर आपत्ति जताई थी।

    अदालत ने अपने अंतरिम आदेश में कहा कि किसी भी सार्वजनिक व्यक्तित्व के नाम, हाव-भाव, पहचान और छवि का उनकी सहमति के बिना व्यावसायिक लाभ के लिए उपयोग नहीं किया जा सकता। न्यायालय ने यह भी माना कि यदि किसी प्रचार सामग्री से किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा प्रभावित होती है, तो उसे पर्सनैलिटी राइट्स के उल्लंघन के रूप में देखा जा सकता है। अदालत के अनुसार प्रथम दृष्टया उपलब्ध सामग्री से यह प्रतीत होता है कि संबंधित फिल्म के प्रचार में अभिनेता की लोकप्रियता और पहचान का उपयोग दर्शकों का ध्यान आकर्षित करने के उद्देश्य से किया गया।

    मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने इस बात पर भी ध्यान दिया कि फिल्म का टीजर उन घटनाओं और पात्रों का उल्लेख करता है, जिनका संबंध काले हिरण शिकार मामले से जोड़ा गया है। यह मामला अभी भी न्यायिक प्रक्रिया से जुड़ा हुआ है। अदालत ने माना कि इस प्रकार की प्रस्तुति से अभिनेता की वर्षों में बनी सार्वजनिक छवि और प्रतिष्ठा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इसी आधार पर अदालत ने तत्काल हस्तक्षेप को आवश्यक माना।

    न्यायालय ने स्पष्ट किया कि प्रत्येक व्यक्ति, विशेष रूप से सार्वजनिक जीवन से जुड़े व्यक्तियों को यह अधिकार प्राप्त है कि उनकी पहचान और व्यक्तित्व का व्यावसायिक उपयोग किस प्रकार और किन परिस्थितियों में किया जाएगा। बिना अनुमति किसी की पहचान का इस्तेमाल कर आर्थिक लाभ प्राप्त करने का प्रयास स्वीकार्य नहीं माना जा सकता। अदालत ने यह भी कहा कि सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर प्रसारित होने वाली सामग्री भी इसी सिद्धांत के दायरे में आती है और यदि उससे प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचने की आशंका हो तो न्यायिक संरक्षण उपलब्ध कराया जा सकता है।

    अंतरिम आदेश के तहत फिल्म निर्माताओं को निर्देश दिया गया है कि वे टीजर और उससे संबंधित सभी प्रचार सामग्री को 24 घंटे के भीतर सोशल मीडिया, ओटीटी प्लेटफॉर्म, टेलीविजन, प्रिंट और अन्य माध्यमों से हटा दें। साथ ही उन्हें भविष्य में भी इस प्रकार की सामग्री को अपलोड, साझा, प्रकाशित या प्रचारित करने से रोका गया है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि निर्धारित समय के भीतर संबंधित सामग्री नहीं हटाई जाती है, तो संबंधित डिजिटल प्लेटफॉर्म और सेवा प्रदाताओं को संबंधित यूआरएल हटाने की कार्रवाई करनी होगी।

    यह मामला पर्सनैलिटी राइट्स और सार्वजनिक व्यक्तियों की पहचान के व्यावसायिक उपयोग से जुड़े कानूनी पहलुओं को लेकर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अदालत का यह अंतरिम आदेश अंतिम निर्णय नहीं है, बल्कि मामले की विस्तृत सुनवाई पूरी होने तक प्रभावी रहेगा। आगे की सुनवाई में दोनों पक्षों के तर्कों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर न्यायालय अंतिम निर्णय देगा।