Author: bharati

  • पटना कोचिंग विवाद: खान सर को लेकर पुलिस का बड़ा बयान, कानून व्यवस्था बिगाड़ने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई

    पटना कोचिंग विवाद: खान सर को लेकर पुलिस का बड़ा बयान, कानून व्यवस्था बिगाड़ने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई

    नई दिल्ली । पटना कोचिंग विवाद में खान सर के कोचिंग सेंटर को लेकर लगातार खबरों का दौर जारी है। हाल ही में एफआईआर दर्ज होने के बाद सोशल मीडिया और स्थानीय मीडिया में इस बात को लेकर चर्चा गर्म है कि क्या खान सर को गिरफ्तार किया जाएगा। इस मामले में पटना के एसएसपी कार्तिकेय शर्मा ने मीडिया के सामने स्पष्ट बयान दिया है।

    एसएसपी ने कहा कि कानून व्यवस्था को बिगाड़ने वाले किसी भी व्यक्ति या समूह के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि मामले में गिरफ्तार किए गए सुरक्षा गार्ड्स के बयानों की जांच जारी है और उनके बयान पूरे केस की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। पुलिस ने स्पष्ट किया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए सभी कानूनी विकल्पों पर विचार किया जा रहा है।

    पटना कोचिंग विवाद तब शुरू हुआ जब स्थानीय प्रशासन ने खान सर के कोचिंग सेंटर में कुछ अनियमितताएं पाई। इसके बाद एफआईआर दर्ज की गई और सुरक्षा गार्ड्स को गिरफ्तार किया गया। इस मामले में संगीन धाराओं को शामिल किया गया है, जिससे यह मामला और गंभीर रूप ले चुका है। स्थानीय प्रशासन ने यह सुनिश्चित करने की कोशिश की कि किसी भी तरह का उग्र प्रदर्शन या कानून व्यवस्था का उल्लंघन न हो।

    एसएसपी कार्तिकेय शर्मा ने मीडिया को बताया कि पुलिस मामले की जांच में पूरी पारदर्शिता बनाए रखेगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि गिरफ्तार किए गए सुरक्षा गार्ड्स के बयान जांच का अहम हिस्सा हैं और इनके आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी। उन्होंने कहा कि कानून के अनुसार किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कदम उठाने से पहले सभी तथ्यों और सबूतों की जांच की जाएगी।

    इस पूरे मामले ने पटना में छात्रों और अभिभावकों के बीच भी चर्चा का विषय बना दिया है। कोचिंग सेंटर के बंद होने और कानूनी कार्रवाई के बाद कई अभिभावक चिंतित हैं कि उनके बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो। प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि छात्रों की पढ़ाई और भविष्य को ध्यान में रखते हुए उचित कदम उठाए जाएंगे।

    इस विवाद ने सोशल मीडिया पर भी बहस को जन्म दिया है। कई लोग इस मामले में खान सर के समर्थन में हैं, जबकि कुछ लोग प्रशासन और पुलिस की कार्रवाई को उचित मान रहे हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने स्थानीय और राष्ट्रीय स्तर पर भी ध्यान खींचा है।

    पुलिस ने स्पष्ट किया है कि अगली रणनीति पर काम जारी है और गिरफ्तार सुरक्षा गार्ड्स के बयान जांच का मुख्य आधार होंगे। एसएसपी ने कहा कि किसी भी कानून तोड़ने वाले के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी और सभी कानूनी प्रावधानों का पालन किया जाएगा।

    पटना कोचिंग विवाद अब एक संवेदनशील मामला बन चुका है और इसके हर अपडेट पर जनता और मीडिया की नजरें बनी हुई हैं। प्रशासन और पुलिस का ध्यान इस बात पर है कि कानून व्यवस्था को बनाए रखते हुए मामले का निष्पक्ष समाधान निकाला जाए।

  • 4 महीने की गर्भवती महिला की संदिग्ध मौत: 5 महीने पहले की थी लव मैरिज, कलाई पर मिले गहरे कट के निशान

    4 महीने की गर्भवती महिला की संदिग्ध मौत: 5 महीने पहले की थी लव मैरिज, कलाई पर मिले गहरे कट के निशान


    भोपाल । राजधानी भोपाल के बैरागढ़ क्षेत्र में एक 25 वर्षीय गर्भवती नवविवाहिता की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। महिला की मौत के बाद उसके परिजनों ने पति पर गंभीर आरोप लगाते हुए हत्या की आशंका जताई है, जबकि पुलिस फिलहाल आत्महत्या की दिशा में जांच कर रही है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस ने मर्ग कायम कर सभी पहलुओं की जांच शुरू कर दी है।

    मृतका की पहचान भारती सोलंकी के रूप में हुई है, जो संजय नगर बैरागढ़ की निवासी थीं। जानकारी के अनुसार भारती ने करीब पांच महीने पहले परिवार की इच्छा के विरुद्ध विक्की सोलंकी से प्रेम विवाह किया था। विवाह के बाद वह अपने पति के साथ रह रही थीं। परिजनों के मुताबिक भारती चार माह की गर्भवती थीं और दो दिन पहले ही नियमित स्वास्थ्य जांच के लिए डॉक्टर के पास गई थीं।

    घटना शनिवार रात की बताई जा रही है। इसके बाद महिला को अस्पताल ले जाया गया, जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया। रविवार सुबह पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी की गई। घटना की जानकारी मिलने पर मृतका के परिजन अस्पताल पहुंचे और मौत को संदिग्ध बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की।

    मृतका के भाई जीतू सोलंकी का आरोप है कि उनकी बहन की मौत सामान्य नहीं है। उनका कहना है कि अस्पताल पहुंचने पर पति विक्की ने फांसी लगाकर आत्महत्या करने की बात कही, जबकि अन्य परिजनों द्वारा अलग-अलग बातें बताई जा रही थीं। परिवार का दावा है कि भारती के हाथ की कलाई पर गहरा कट का निशान था और गले पर भी चोट के निशान दिखाई दिए। इन्हीं परिस्थितियों के आधार पर परिजन हत्या की आशंका जता रहे हैं।

    परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि घटना से एक दिन पहले पति-पत्नी के बीच विवाद हुआ था। परिवार के अनुसार भारती ने अपने पति को किसी अन्य महिला से फोन पर बातचीत करते हुए देख लिया था, जिसके बाद दोनों के बीच कहासुनी हुई थी। परिजनों का दावा है कि इस विवाद की जानकारी स्वयं भारती ने उन्हें फोन कर दी थी। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हो सकी है और पुलिस सभी तथ्यों की जांच कर रही है।

    दूसरी ओर पुलिस का कहना है कि प्रारंभिक जांच में मामला आत्महत्या का प्रतीत हो रहा है। जांच अधिकारी के अनुसार घटनास्थल से फिलहाल कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है। इसलिए महिला के इस कदम के पीछे की वास्तविक वजह अभी स्पष्ट नहीं है। पुलिस ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और फोरेंसिक जांच के बाद ही मौत के कारणों और परिस्थितियों को लेकर कोई निष्कर्ष निकाला जा सकेगा।

    फिलहाल पुलिस मृतका के परिजनों, पति और अन्य संबंधित लोगों के बयान दर्ज कर रही है। साथ ही मोबाइल कॉल रिकॉर्ड, घटनास्थल से मिले साक्ष्यों और मेडिकल रिपोर्ट की भी जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद यदि किसी प्रकार की आपराधिक भूमिका सामने आती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

    यह मामला प्रेम विवाह, पारिवारिक विवाद और एक गर्भवती महिला की असामयिक मौत से जुड़ा होने के कारण बेहद संवेदनशील माना जा रहा है। अब सभी की निगाहें पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिस जांच के अंतिम निष्कर्ष पर टिकी हैं।

  • राहुल गांधी को लेकर गुहा–थरूर में टकराव, सोशल मीडिया पर बयानबाज़ी से बढ़ी सियासी बहस

    राहुल गांधी को लेकर गुहा–थरूर में टकराव, सोशल मीडिया पर बयानबाज़ी से बढ़ी सियासी बहस


    नई दिल्ली ।
    कांग्रेस नेता राहुल गांधी के नेतृत्व और राजनीतिक क्षमता को लेकर इतिहासकार रामचंद्र गुहा और कांग्रेस सांसद शशि थरूर के बीच सोशल मीडिया पर तीखी बहस देखने को मिली है। यह विवाद उस समय शुरू हुआ जब रामचंद्र गुहा ने एक इंटरव्यू में राहुल गांधी की नेतृत्व क्षमता पर सवाल उठाए थे। इसके बाद शशि थरूर ने सार्वजनिक रूप से उनका बचाव किया, जिसके जवाब में गुहा ने फिर से प्रतिक्रिया देते हुए अपने रुख को दोहराया।

    रामचंद्र गुहा ने सोशल मीडिया मंच पर अपनी टिप्पणी में कहा कि राहुल गांधी के बचाव में दिए गए तर्क उनके मुख्य सवालों का उत्तर नहीं देते। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के हालिया चुनावी प्रदर्शन को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता और तथ्यों के आधार पर ही राजनीतिक नेतृत्व का मूल्यांकन किया जाना चाहिए। गुहा ने यह भी उल्लेख किया कि राहुल गांधी के नेतृत्व में पार्टी को लगातार आम चुनावों में हार का सामना करना पड़ा है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

    इतिहासकार ने आगे कहा कि उनके अनुसार कांग्रेस की राजनीतिक स्थिति में पिछले वर्षों में गिरावट आई है। उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि कई राज्यों में पार्टी की सत्ता सीमित हो गई है और संगठनात्मक प्रभाव भी पहले की तुलना में कमजोर हुआ है। गुहा ने यह सवाल भी उठाया कि जब किसी पार्टी का नेतृत्व लंबे समय तक चुनावी सफलता हासिल नहीं कर पाता, तो उस नेतृत्व पर चर्चा होना स्वाभाविक है।

    दूसरी ओर, शशि थरूर ने रामचंद्र गुहा के तर्कों का जवाब देते हुए अंतरराष्ट्रीय उदाहरणों का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि किसी नेता के अनुभव को केवल प्रशासनिक पृष्ठभूमि के आधार पर नहीं आंका जा सकता। थरूर ने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा का उदाहरण देते हुए कहा कि जब वे राष्ट्रपति बने थे, तब उनके पास भी सीमित राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय अनुभव था, लेकिन उन्होंने बाद में नेतृत्व क्षमता साबित की।

    थरूर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का उदाहरण देते हुए कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर नेतृत्व करने के लिए प्रारंभिक अनुभव हमेशा निर्णायक नहीं होता। उन्होंने तर्क दिया कि राजनीतिक नेतृत्व को व्यापक दृष्टिकोण से देखना चाहिए और केवल शुरुआती पृष्ठभूमि के आधार पर निष्कर्ष निकालना उचित नहीं है।

    इस पूरे विवाद के बाद रामचंद्र गुहा ने एक बार फिर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके सवालों का मूल उद्देश्य नेतृत्व के परिणामों पर चर्चा करना था। उन्होंने कांग्रेस के चुनावी प्रदर्शन का उल्लेख करते हुए कहा कि लगातार चुनावी हार और संगठनात्मक कमजोरी को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

    गुहा ने यह भी कहा कि पिछले वर्षों में कांग्रेस की राजनीतिक स्थिति में उल्लेखनीय बदलाव आया है। उनके अनुसार, पार्टी की राज्यों में मौजूदगी पहले की तुलना में काफी कम हो गई है। उन्होंने यह सवाल भी दोहराया कि जब राजनीतिक परिणाम स्पष्ट रूप से सामने हों, तो नेतृत्व की भूमिका पर चर्चा होना आवश्यक है।

    इस बहस ने सोशल मीडिया पर व्यापक चर्चा को जन्म दिया है, जहां अलग-अलग विचार सामने आ रहे हैं। कुछ लोग इसे राजनीतिक विश्लेषण के रूप में देख रहे हैं, जबकि कुछ इसे नेतृत्व और उत्तरदायित्व पर बहस मान रहे हैं।

    फिलहाल, इस विवाद पर किसी भी पक्ष ने अपने रुख में बड़ा बदलाव नहीं किया है और सोशल मीडिया पर यह चर्चा अभी भी जारी है।

  • केंद्रीय मंत्री की स्वीकृति: पंजाब विश्वविद्यालय में आधुनिक एथलेटिक ट्रैक और ग्रामीण खेल केंद्रों का विकास

    केंद्रीय मंत्री की स्वीकृति: पंजाब विश्वविद्यालय में आधुनिक एथलेटिक ट्रैक और ग्रामीण खेल केंद्रों का विकास

    नई दिल्ली । केंद्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने पंजाब विश्वविद्यालय में ओलंपिक स्तर के सिंथेटिक एथलेटिक ट्रैक के निर्माण को आधिकारिक मंजूरी दे दी है। यह निर्णय अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) द्वारा केंद्रीय मंत्री को प्रस्तुत किए गए विस्तृत सुझावों के बाद आया है। प्रस्ताव में देशभर में खेल संस्कृति के विकास और युवा प्रतिभाओं को सशक्त बनाने के लिए कई पहलुओं पर जोर दिया गया।

    इस प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय मंत्री को प्रत्येक राज्य में स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी की स्थापना, राष्ट्रीय स्तर पर खेल उत्कृष्टता केंद्र और मल्टी-स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स विकसित करने के सुझाव भी प्रस्तुत किए। इसके अलावा, ग्रामीण एवं जनजातीय क्षेत्रों में खेल प्रतिभाओं की खोज और उन्हें उचित प्रशिक्षण उपलब्ध कराने के उपायों पर भी चर्चा हुई।

    विशेष रूप से, ABVP ने 2036 ओलंपिक की तैयारियों के लिए एक राष्ट्रीय ढांचा विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया। इसमें खिलाड़ियों के लिए स्वास्थ्य और दुर्घटना बीमा, स्पोर्ट्स सामग्री बैंक, राष्ट्रीय डिजिटल एथलीट पोर्टल और ‘माई भारत’ वालंटियर्स के मानदेय में वृद्धि जैसी सिफारिशें शामिल थीं। इन सभी सुझावों को केंद्रीय मंत्री ने गंभीरता से लिया और कई मामलों में सरकार द्वारा शीघ्र कार्रवाई का आश्वासन दिया।

    पंजाब विश्वविद्यालय में ओलंपिक मानक के सिंथेटिक एथलेटिक ट्रैक की स्थापना इस चर्चा की प्रमुख उपलब्धि मानी जा रही है। निर्माण कार्य की प्रक्रिया को अगले दो से तीन महीनों में तेज़ गति से आगे बढ़ाने की जानकारी दी गई है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह ट्रैक न केवल छात्रों और एथलीटों के प्रशिक्षण के अवसर बढ़ाएगा बल्कि अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए भारत की तैयारी को भी मजबूत करेगा।

    सरकारी अधिकारियों ने ग्रामीण क्षेत्रों में ‘स्पोर्ट्स सामग्री बैंक’ स्थापित करने की योजना की भी सराहना की। यह पहल खिलाड़ियों को आवश्यक खेल उपकरण और संसाधन प्रदान करने में मदद करेगी। मंत्रालय ने बताया कि इस दिशा में जल्द ही सकारात्मक कदम उठाए जाएंगे।

    ABVP का मानना है कि भारत की युवा शक्ति देश की सबसे बड़ी संपत्ति है और इसे खेल के माध्यम से सशक्त बनाने से न केवल खेल क्षेत्र में बल्कि सामाजिक और आर्थिक विकास में भी योगदान मिलेगा। आधुनिक खेल अवसंरचना, वैज्ञानिक प्रशिक्षण, गुणवत्तापूर्ण कोचिंग और खिलाड़ियों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करने से भारत वैश्विक खेल महाशक्ति बनने की ओर तेजी से बढ़ सकता है।

    छात्र संगठन ने सरकार के सकारात्मक आश्वासनों का स्वागत किया और कहा कि शीघ्र और प्रभावी निर्णयों से देश में खेल संस्कृति को नई गति मिलेगी। इसके साथ ही यह पहल युवाओं और खिलाड़ियों के सर्वांगीण विकास के लिए एक मजबूत आधार तैयार करेगी। विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह की परियोजनाएं भविष्य में देश की अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतिस्पर्धा में बढ़त बनाने में निर्णायक साबित होंगी।

    पंजाब विश्वविद्यालय में इस उच्च स्तरीय ट्रैक के निर्माण से राज्य और देश दोनों में खेल प्रतिभाओं को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शन के अवसर मिलेंगे। इस परियोजना से न केवल छात्रों और एथलीटों का विकास होगा बल्कि खेल क्षेत्र में निवेश और रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।

  • महिला किसानों की मेहनत को मिला अंतरराष्ट्रीय बाजार, झारखंड से आमों का पहला निर्यात ब्रिटेन रवाना

    महिला किसानों की मेहनत को मिला अंतरराष्ट्रीय बाजार, झारखंड से आमों का पहला निर्यात ब्रिटेन रवाना


    नई दिल्ली ।
    भारत के कृषि निर्यात क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज करते हुए झारखंड से पहली बार ताजे आमों का वाणिज्यिक निर्यात शुरू हो गया है। राज्य के सिमडेगा जिले में उत्पादित आम्रपाली किस्म के आमों की पहली खेप यूनाइटेड किंगडम के लिए रवाना की गई है। इस पहल को किसानों की आय बढ़ाने, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और भारतीय कृषि उत्पादों को वैश्विक बाजार तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

    झारखंड के सिमडेगा जिले के बानो प्रखंड में कार्यरत महिला किसान उत्पादक कंपनी द्वारा उत्पादित आम्रपाली आमों को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने की प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी की गई। लगभग 1.5 मीट्रिक टन आमों की पहली खेप को कोलकाता के माध्यम से यूनाइटेड किंगडम भेजा गया। इस उपलब्धि ने राज्य के बागवानी क्षेत्र और स्थानीय किसानों के लिए नए अवसरों के द्वार खोल दिए हैं।

    इस निर्यात की सबसे विशेष बात यह है कि इसमें महिला किसानों की सक्रिय भागीदारी रही है। किसान उत्पादक कंपनी से जुड़े समूहों ने गुणवत्तापूर्ण उत्पादन, फसल प्रबंधन और निर्यात मानकों के अनुरूप खेती को अपनाकर यह उपलब्धि हासिल की है। इससे न केवल महिला किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में महिला नेतृत्व वाले कृषि उद्यमों को भी नई पहचान मिलेगी।

    विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय आमों की लगातार बढ़ती मांग का लाभ अब उन राज्यों को भी मिलने लगा है, जो अब तक निर्यात गतिविधियों में अपेक्षाकृत पीछे रहे हैं। झारखंड से शुरू हुआ यह निर्यात राज्य के किसानों को बेहतर मूल्य प्राप्त करने में मदद करेगा और उन्हें घरेलू बाजार पर पूरी तरह निर्भर रहने की आवश्यकता नहीं होगी।

    इस सफलता के पीछे किसानों को निर्यात संबंधी जानकारी, गुणवत्ता मानकों और वैश्विक बाजार की आवश्यकताओं से परिचित कराने के लिए किए गए प्रशिक्षण कार्यक्रमों की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। किसानों और निर्यातकों के बीच समन्वय स्थापित कर उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने की व्यवस्था तैयार की गई, जिसका प्रत्यक्ष परिणाम पहली निर्यात खेप के रूप में सामने आया है।

    कृषि क्षेत्र से जुड़े जानकारों का कहना है कि यदि इसी प्रकार गुणवत्ता, पैकेजिंग और आपूर्ति श्रृंखला पर ध्यान दिया जाए तो झारखंड के अन्य फल एवं कृषि उत्पाद भी वैश्विक बाजारों में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा सकते हैं। इससे राज्य में कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा और रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।

    सरकार को उम्मीद है कि इस पहल से क्षेत्र के किसान आधुनिक खेती तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित होंगे। साथ ही फसल कटाई के बाद की प्रक्रियाओं, भंडारण और गुणवत्ता नियंत्रण पर भी अधिक ध्यान दिया जाएगा। इससे कृषि उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ेगी और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में उनकी स्वीकार्यता मजबूत होगी।

    झारखंड से आमों का यह पहला निर्यात केवल एक व्यापारिक उपलब्धि नहीं बल्कि ग्रामीण किसानों, विशेषकर महिला कृषकों की क्षमता और संभावनाओं का प्रमाण भी है। यह पहल राज्य के कृषि क्षेत्र को नई दिशा देने के साथ भारत के बढ़ते कृषि निर्यात अभियान को भी मजबूती प्रदान करेगी। आने वाले समय में इससे राज्य के अन्य किसान समूहों को भी वैश्विक बाजारों से जुड़ने की प्रेरणा मिलने की उम्मीद है।

  • अमेरिका-ईरान तनाव, एआई शेयरों की गिरावट और कच्चे तेल की कीमतें तय करेंगी भारतीय बाजार की दिशा: निवेशक सतर्क

    अमेरिका-ईरान तनाव, एआई शेयरों की गिरावट और कच्चे तेल की कीमतें तय करेंगी भारतीय बाजार की दिशा: निवेशक सतर्क


    नई दिल्ली ।
    भारतीय शेयर बाजार के लिए अगला सप्ताह महत्वपूर्ण संकेत लेकर आ सकता है। अमेरिका और ईरान के बीच लगातार बढ़ते तनाव ने वैश्विक निवेशकों को सतर्क कर दिया है। मध्य पूर्व में अमेरिका के ठिकानों पर ईरान की आक्रामक प्रतिक्रिया और इजरायल की लेबनान में बमबारी की खबरें बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकती हैं। निवेशक इन geopolitical घटनाओं पर नजर रखकर जोखिम और अवसर का मूल्यांकन करेंगे।

    कच्चे तेल की कीमतें भी बाजार के मूड पर सीधे असर डाल रही हैं। ब्रेंट क्रूड वर्तमान में 93 डॉलर प्रति बैरल और डब्ल्यूटीआई क्रूड 90 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर कारोबार कर रहे हैं। तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव ऊर्जा और इनर्जी सेक्टर से जुड़े शेयरों की चाल को प्रभावित कर सकता है। उच्च तेल मूल्य न केवल ए너지 कंपनियों के मुनाफे को प्रभावित करता है, बल्कि आर्थिक महंगाई को भी बढ़ा सकता है।

    अमेरिका में एआई से जुड़े शेयरों की गिरावट ने वैश्विक निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। अमेरिकी टेक्नोलॉजी इंडेक्स नैस्डैक में शुक्रवार को 5 प्रतिशत तक की गिरावट देखी गई। विशेष रूप से एनवीडिया, माइक्रोन टेक्नोलॉजी और मार्वल टेक्नोलॉजी जैसी एआई थीम वाले शेयरों में लगभग 17 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। इस प्रवृत्ति से भारतीय निवेशक भी प्रभावित हो सकते हैं, क्योंकि कई एआई और टेक्नोलॉजी कंपनियों के शेयर वैश्विक निवेश प्रवाह से जुड़े हैं।

    भारत में निवेशकों की निगाह 12 जून को जारी होने वाले खुदरा महंगाई आंकड़ों पर भी रहेगी। महंगाई के आंकड़े समग्र आर्थिक स्थिति और केंद्रीय बैंक की नीतियों पर असर डालते हैं। यदि महंगाई दर उम्मीद से अधिक होती है, तो इससे ब्याज दरों में संभावित बदलाव और निवेशकों की धारणा प्रभावित हो सकती है।

    बीते सप्ताह भारतीय शेयर बाजार नुकसान के साथ बंद हुआ। निफ्टी 181.05 अंक या 0.77 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 23,366.70 पर रहा। सेंसेक्स 532.40 अंक या 0.71 प्रतिशत की गिरावट के साथ 74,243.34 पर बंद हुआ। हालांकि, कुछ सेक्टरों ने बेहतर प्रदर्शन किया। मीडिया और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स शेयरों में तेजी रही। निफ्टी मीडिया 6.69 प्रतिशत, निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स 1.49 प्रतिशत और निफ्टी पीएसयू बैंक 1.26 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुए।

    वहीं, निफ्टी एफएमसीजी, निफ्टी कमोडिटीज, निफ्टी इन्फ्रा, निफ्टी रियल्टी, निफ्टी मेटल, निफ्टी पीएसई और निफ्टी एनर्जी सेक्टरों में कमजोरी देखने को मिली। क्रमशः 1.30 से 2.19 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज हुई। यह संकेत है कि निवेशकों ने जोखिम वाले और साइकिलिक सेक्टरों से परहेज किया और सुरक्षित या अधिक स्थिर क्षेत्रों की ओर रुख किया।

    विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले सप्ताह में बाजार की दिशा कई वैश्विक और घरेलू कारकों पर निर्भर करेगी। अमेरिका-ईरान तनाव, कच्चे तेल की कीमत, एआई शेयरों की चाल और महंगाई के आंकड़े मिलकर निवेशकों की रणनीति और बाजार की उतार-चढ़ाव की सीमा तय करेंगे। इस अवधि में निवेशक सतर्क रहकर बाजार की हर छोटी-सी प्रतिक्रिया का अध्ययन करेंगे।

    कुल मिलाकर, अगले सप्ताह भारतीय इक्विटी बाजार में सतर्कता और रणनीति की आवश्यकता होगी। निवेशक वैश्विक और घरेलू आर्थिक संकेतकों के आधार पर अपने निवेश निर्णय लेंगे। सुरक्षित सेक्टरों और स्थिर प्रदर्शन वाले शेयरों में निवेश को प्राथमिकता मिल सकती है, जबकि जोखिम वाले क्षेत्र अस्थिर रह सकते हैं।

  • केंद्र सरकार की पहल से राजौरी के युवाओं की बदली किस्मत: पोल्ट्री फार्म से 50-60 हजार की मासिक कमाई

    केंद्र सरकार की पहल से राजौरी के युवाओं की बदली किस्मत: पोल्ट्री फार्म से 50-60 हजार की मासिक कमाई

    नई दिल्ली । जम्मू और कश्मीर के राजौरी जिले में केंद्र सरकार की प्रायोजित योजनाओं का सकारात्मक असर अब साफ नजर आने लगा है। युवा बेरोजगार और किसान अब स्थिर आय के लिए पारंपरिक खेती के साथ-साथ मुर्गी पालन को एक आकर्षक विकल्प मान रहे हैं।

    तांडवाल-मुबारकपुरा क्षेत्र के निवासी एहतेशाम ने इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया। उन्होंने केंद्र सरकार और पशुपालन विभाग के मार्गदर्शन और सहयोग से एक पोल्ट्री फार्म स्थापित किया। इस उद्यम के माध्यम से अब उनकी मासिक आय लगभग 50,000 से 60,000 रुपये तक पहुंच गई है।

    एहतेशाम के फार्म ने न केवल उनके परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत की, बल्कि आसपास के ग्रामीणों के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा किए। इस पहल से स्पष्ट होता है कि सरकारी योजनाएँ किस प्रकार जमीनी स्तर पर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने में मदद कर सकती हैं।

    राजौरी के मुख्य पशुपालन अधिकारी डॉ. खालिद ने बताया कि मुर्गी पालन जिले में आजीविका का एक संभावित और लाभदायक विकल्प बनकर उभरा है। उन्होंने कहा कि विभाग यह सुनिश्चित कर रहा है कि लाभार्थियों को उद्यम स्थापित करने और उसका विस्तार करने के लिए पर्याप्त प्रशिक्षण, मार्गदर्शन और वित्तीय सहायता प्राप्त हो।

    डॉ. खालिद के अनुसार, विशेष रूप से शिक्षित बेरोजगार युवा इस योजना से लाभान्वित हो रहे हैं। ये युवा अपने घरों के पास स्वरोजगार के अवसर तलाश रहे हैं और पोल्ट्री फार्म उनके लिए स्थिर आय का स्रोत बन गया है। विभाग लगातार नए उद्यमियों को प्रोत्साहित कर रहा है और उन्हें व्यवसाय में स्थायित्व और सफलता दिलाने के लिए सभी संभव साधन प्रदान कर रहा है।

    एहतेशाम ने बताया कि उनके पिता को इस योजना के बारे में जानकारी मिली और उन्होंने इसका आवेदन किया। पशुपालन विभाग ने उन्हें मुर्गियों के बच्चों के साथ प्रशिक्षण और लोन उपलब्ध कराए। पहले परिवार के लिए जीवन बहुत कठिन था और घर चलाने के लिए अक्सर कर्ज लेना पड़ता था।

    अब फार्म शुरू होने के बाद एहतेशाम की स्थिति पूरी तरह बदल गई है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में उनका मासिक आय स्तर 50,000 से 60,000 रुपये तक है और उन्होंने पांच स्थानीय युवाओं को रोजगार भी दिया है। यह स्थानीय रोजगार सृजन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के सशक्तिकरण की दिशा में एक स्पष्ट उदाहरण है।

    राजौरी जिले में केंद्र सरकार और पशुपालन विभाग की योजनाओं ने दिखा दिया है कि सही मार्गदर्शन, वित्तीय सहायता और प्रशिक्षण के साथ छोटे स्तर के व्यवसाय भी लाभदायक और टिकाऊ बन सकते हैं। इस सफलता ने स्थानीय युवाओं और किसानों में आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा भी जगाई है।

    यह कहानी यह साबित करती है कि सरकारी योजनाएँ केवल लाभार्थी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उनके माध्यम से व्यापक सामाजिक और आर्थिक प्रभाव भी उत्पन्न होते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार को बढ़ावा देना और स्थानीय रोजगार सृजन करना इन योजनाओं के प्रमुख उद्देश्य हैं।

    राजौरी के उदाहरण ने स्पष्ट कर दिया है कि केंद्र सरकार और विभागीय सहयोग के माध्यम से छोटे उद्यमी भी बड़े आर्थिक बदलाव ला सकते हैं। मुर्गी पालन का यह मॉडल अन्य ग्रामीण क्षेत्रों में भी युवाओं और बेरोजगारों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन सकता है।

  • कक्षा 12वीं के छात्रों के लिए आखिरी मौका: सीबीएसई री-इवैल्यूएशन और उत्तर पुस्तिका सत्यापन के लिए आज अंतिम दिन

    कक्षा 12वीं के छात्रों के लिए आखिरी मौका: सीबीएसई री-इवैल्यूएशन और उत्तर पुस्तिका सत्यापन के लिए आज अंतिम दिन

    नई दिल्ली । कक्षा 12वीं के छात्रों के लिए सीबीएसई द्वारा री-इवैल्यूएशन और उत्तर पुस्तिका सत्यापन का आवेदन आज अंतिम दिन है। जिन छात्रों को अपने परीक्षा परिणाम पर आपत्ति है, उनके पास अब केवल कुछ घंटे बचे हैं। बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि आवेदन की समय सीमा आज रात 11 बजकर 59 मिनट पर समाप्त हो जाएगी।

    केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने इस बार पोस्ट-रिजल्ट सर्विसेज पोर्टल के माध्यम से छात्रों को उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन की जांच कराने का अवसर दिया है। पहले यह समय सीमा 6 जून तय की गई थी, लेकिन तकनीकी समस्याओं और उच्च मांग को देखते हुए इसे एक दिन बढ़ा दिया गया।

    छात्रों के लिए इस प्रक्रिया में सबसे पहले अपनी मूल्यांकित उत्तर पुस्तिका की स्कैन कॉपी उपलब्ध कराई जाती है। इसके बाद छात्र सत्यापन के लिए आवेदन कर सकते हैं या किसी विशेष प्रश्न के पुनर्मूल्यांकन का अनुरोध कर सकते हैं। री-इवैल्यूएशन और सत्यापन की यह व्यवस्था मूल्यांकन की निष्पक्षता सुनिश्चित करने और छात्रों का भरोसा मजबूत करने के उद्देश्य से बनाई गई है।

    इस वर्ष बोर्ड ने कक्षा 12वीं के परिणाम तैयार करने में ‘ऑन-स्क्रीन मार्किंग’ प्रणाली का उपयोग किया है। कई छात्रों ने स्कैन की गई उत्तर पुस्तिकाओं में धुंधली तस्वीरें या अंकन न दिखने जैसी समस्याओं की शिकायत की थी। यही कारण है कि इस प्रक्रिया के लिए आवेदन की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई। अब तक 70 हजार से अधिक आवेदन दर्ज किए जा चुके हैं।

    छात्रों को सत्यापन के लिए निर्धारित शुल्क और पुनर्मूल्यांकन के लिए प्रति प्रश्न शुल्क जमा करना होता है। बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि पुनर्मूल्यांकन के बाद जारी अंक अंतिम और बाध्यकारी होंगे। इसके बाद किसी अन्य स्तर पर अपील की अनुमति नहीं होगी। इसलिए जिन छात्रों को अपने परिणाम पर संदेह है, उनके लिए आज का दिन अत्यंत महत्वपूर्ण है।

    सीबीएसई ने छात्रों से अपील की है कि वे समय रहते पोर्टल पर जाकर आवेदन प्रक्रिया पूरी करें। रात 11:59 के बाद पोर्टल बंद हो जाएगा और इसके बाद कोई नया आवेदन स्वीकार नहीं किया जाएगा। यह कदम छात्रों को उनकी उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन में पारदर्शिता का भरोसा देने के उद्देश्य से उठाया गया है।

    छात्रों के लिए यह अवसर उनकी मेहनत और प्रयासों की सही पहचान सुनिश्चित करने का महत्वपूर्ण अवसर है। बोर्ड की यह व्यवस्था छात्रों और अभिभावकों के बीच भरोसे को बढ़ाने में सहायक साबित होगी।

    इसलिए कक्षा 12वीं के वे छात्र जिन्होंने अपने अंक या परिणाम पर आपत्ति दर्ज कराई है, उन्हें तुरंत री-इवैल्यूएशन और सत्यापन के लिए आवेदन करना चाहिए। समय सीमा के बाद किसी भी प्रकार का आवेदन स्वीकार नहीं किया जाएगा।

  • णवीर सिंह के सतरंगी फैशन पर कभी हंसती थीं अभिनेत्री मधु: ट्रोल करने के बाद अब जागा साथ काम करने का अरमान, 'डॉन 3' स्टार को बताया शानदार कलाकार

    णवीर सिंह के सतरंगी फैशन पर कभी हंसती थीं अभिनेत्री मधु: ट्रोल करने के बाद अब जागा साथ काम करने का अरमान, 'डॉन 3' स्टार को बताया शानदार कलाकार

    नई दिल्ली। बॉलीवुड के ‘धुरंधर’ और वर्सेटाइल अभिनेता रणवीर सिंह अपने बेहतरीन अभिनय के साथ-साथ अपने सतरंगी, अनूठे और अजीबोगरीब ड्रेसिंग सेंस के लिए हमेशा चर्चा में रहते हैं। उनके इस जुदा अंदाज पर जहां लाखों फैंस फिदा रहते हैं, वहीं कई बार उन्हें सोशल मीडिया और इंडस्ट्री के भीतर भी ट्रोलिंग का सामना करना पड़ता है। अब इस फेहरिस्त में नब्बे के दशक की मशहूर अभिनेत्री मधु का नाम भी जुड़ गया है। मधु ने हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान बेहद ईमानदारी से स्वीकार किया है कि वह भी एक वक्त पर रणवीर सिंह के पहनावे और उनके फैशन चॉइस पर जमकर हंसती थीं और उन्हें ट्रोल किया करती थीं।

    अभिनेत्री मधु ने अपने पुराने दिनों और विचारों को याद करते हुए बताया कि जब उन्होंने शुरुआती दौर में रणवीर सिंह को पब्लिक अपीयरेंस और अवॉर्ड फंक्शन्स में लीक से हटकर कपड़े पहने हुए देखा था, तो उन्हें यह काफी अजीब लगा था। मधु के अनुसार, वह अक्सर रणवीर के लुक को देखकर अपनी हंसी नहीं रोक पाती थीं और सोचती थीं कि कोई अभिनेता ऐसे अजीब कपड़े पहनकर बाहर कैसे आ सकता है। उन्होंने माना कि वह भी उन लोगों में शामिल थीं जो रणवीर सिंह के कपड़ों का मजाक उड़ाते थे और उनके स्टाइल स्टेटमेंट को समझ नहीं पाती थीं।

    हालांकि, समय बीतने के साथ-साथ रणवीर सिंह के प्रति मधु की सोच में एक बड़ा और सकारात्मक बदलाव आया है। मधु ने कहा कि जैसे-जैसे उन्होंने रणवीर सिंह की फिल्मों को देखा और पर्दे पर उनके दमदार अभिनय को महसूस किया, वैसे-वैसे कपड़ों को लेकर उनका नजरिया पूरी तरह बदल गया। उन्होंने महसूस किया कि रणवीर सिंह सिर्फ कपड़ों से नहीं, बल्कि अपनी असाधारण अभिनय क्षमता से इंडस्ट्री पर राज कर रहे हैं। ‘बाजीराव मस्तानी’, ‘पद्मावत’ और ‘गली बॉय’ जैसी फिल्मों में उनके किरदारों ने मधु को प्रभावित किया।

    अपने इस बदले हुए नजरिए के बाद, अब अभिनेत्री मधु ने रणवीर सिंह के साथ स्क्रीन स्पेस शेयर करने की अपनी तीव्र इच्छा व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि वह रणवीर सिंह की अभिनय कला की बहुत बड़ी प्रशंसक बन चुकी हैं और भविष्य में यदि मौका मिले, तो वह उनके साथ एक फिल्म में काम करना पसंद करेंगी। मधु ने रणवीर सिंह को मौजूदा दौर का एक बेहद प्रभावशाली और ऊर्जावान कलाकार बताया, जो किसी भी किरदार में पूरी तरह जान फूंकने का दम रखता है।

    गौरतलब है कि रणवीर सिंह इन दिनों अपनी आगामी बड़ी फिल्मों को लेकर लगातार सुर्खियों में बने हुए हैं, जिनमें फरहान अख्तर के निर्देशन में बनने वाली ‘डॉन 3’ सबसे प्रमुख है। इसके अलावा वह इंडस्ट्री के कई बड़े प्रोजेक्ट्स का भी हिस्सा हैं। दूसरी तरफ, ‘रोजा’ और ‘जेंटलमैन’ जैसी कल्ट फिल्मों से पहचान बनाने वाली अभिनेत्री मधु भी इन दिनों विभिन्न प्रोजेक्ट्स और इंटरव्यूज के जरिए लगातार चर्चा में बनी हुई हैं। उनका यह बयान यह साफ तौर पर दिखाता है कि कला और टैलेंट के आगे अंततः हर तरह की रूढ़िवादिता और पूर्वाग्रह घुटने टेक देते हैं।

  • बॉक्स ऑफिस पर राम चरण की 'पेद्दी' का महातूफान: टिकट बिक्री में अपनी ही ब्लॉकबस्टर 'RRR' को पछाड़ा, ढाई दिन में बिके 20 लाख से ज्यादा टिकट

    बॉक्स ऑफिस पर राम चरण की 'पेद्दी' का महातूफान: टिकट बिक्री में अपनी ही ब्लॉकबस्टर 'RRR' को पछाड़ा, ढाई दिन में बिके 20 लाख से ज्यादा टिकट

    नई दिल्ली। साउथ सिनेमा के ग्लोबल सुपरस्टार राम चरण और बॉलीवुड अभिनेत्री जाह्नवी कपूर की हालिया रिलीज फिल्म ‘पेद्दी’ ने बॉक्स ऑफिस पर अपनी धुआंधार कमाई और टिकटों की रिकॉर्डतोड़ बिक्री से तहलका मचा दिया है। फिल्म समीक्षकों की मिली-जुली प्रतिक्रियाओं के बावजूद, इस एक्शन-ड्रामा फिल्म को देखने के लिए थिएटर्स में दर्शकों का हुजूम उमड़ रहा है। आलम यह है कि टिकट बुकिंग के सबसे बड़े ऑनलाइन प्लेटफॉर्म बुकमाईशो पर इस फिल्म ने कमाई और बुकिंग के कई पुराने कीर्तिमानों को ध्वस्त करते हुए इतिहास रच दिया है। फिल्म ने महज ढाई दिनों के भीतर अपनी सफलता का जो परचम लहराया है, उसने ट्रेड एनालिस्ट्स को भी हैरान कर दिया है।

    रिलीज के साथ ही ‘पेद्दी’ ने टिकटों की रफ्तार के मामले में राम चरण की ही ऑस्कर विजेता और ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘RRR’ की बराबरी कर ली है। बुकमाईशो पर सबसे तेजी से 20 लाख टिकट बेचने वाली फिल्मों की सूची में ‘पेद्दी’ अब ‘RRR’ के साथ संयुक्त रूप से चौथे स्थान पर आ गई है। इस ऐतिहासिक लिस्ट में केवल प्री-रिलीज के जरिए सबसे आगे रहने वाली ‘पुष्पा 2: द रूल’ पहले नंबर पर है, जबकि ‘कल्कि 2898 AD’ डेढ़ दिन के साथ दूसरे और ‘बाहुबली 2: द कन्क्लूज़न’ दो दिन के रिकॉर्ड के साथ तीसरे स्थान पर काबिज है। ‘पेद्दी’ ने महज 2.5 दिनों में 20 लाख का आंकड़ा पार कर इस सूची में अपनी जगह पक्की की है।

    फिल्म की इस तूफानी रफ्तार का अंदाजा इसके शुरुआती आंकड़ों से लगाया जा सकता है। अपनी रिलीज से पहले ही भारी बज के कारण फिल्म के प्री-सेल में रिकॉर्ड 8,74,900 टिकट बिक चुके थे। इसके बाद गुरुवार को ओपनिंग डे पर जनता ने इस पर खूब प्यार लुटाया और पहले दिन 6,51,040 टिकटों की बुकिंग हुई। यह सिलसिला शुक्रवार को भी थमा नहीं और उस दिन भी 3,87,780 टिकट बिक गए। शनिवार की सुबह तक कुल बिक्री का ग्राफ 19,13,720 तक पहुंच चुका था, जो वीकेंड की छुट्टी शुरू होते ही कुछ ही घंटों में 20 लाख के पार चला गया। इस जबरदस्त रिस्पॉन्स के दम पर फिल्म ने केवल दो दिनों में ही दुनिया भर से लगभग 150 करोड़ रुपये का कलेक्शन कर लिया है।

    बात सिर्फ कुल टिकटों की संख्या तक ही सीमित नहीं है, बल्कि ‘पेद्दी’ ने पीक आवर्स यानी सबसे व्यस्त घंटों के दौरान प्रति घंटा टिकट बिक्री में भी एक नया बेंचमार्क सेट किया है। बुकमाईशो पर इस फिल्म ने अपने सबसे व्यस्ततम समय में एक घंटे के भीतर 47,330 टिकट बेचने का रिकॉर्ड बनाया है। इस मामले में राम चरण की इस फिल्म ने जूनियर एनटीआर की ‘देवरा’ और खुद राम चरण की ही बहुचर्चित फिल्म ‘गेम चेंजर’ को बहुत पीछे छोड़ दिया है। ‘देवरा’ जहां पीक आवर्स में 38.02K टिकटों के साथ छठे और ‘गेम चेंजर’ 36.74K टिकटों के साथ सातवें नंबर पर है, वहीं ‘पेद्दी’ ने चौथे स्थान पर छलांग लगाई है।

    पीक आवर्स की इस विशिष्ट टॉप 10 सूची में भी अल्लू अर्जुन की ‘पुष्पा 2’ (107.65K) शीर्ष पर है, प्रभास की ‘कल्कि 2898 AD’ (95.71K) दूसरे और ‘सालार’ (54.76K) तीसरे स्थान पर बनी हुई है। ‘पेद्दी’ के बाद इस सूची में ‘राजा साहब’, ‘एमएसजी’, ‘दे कॉल हिम ओजी’ और ‘एसकेवी’ जैसी फिल्में शामिल हैं। हालांकि कई फिल्म समीक्षकों ने ‘पेद्दी’ की कहानी और स्क्रीनप्ले को लेकर कुछ कमजोर कड़ियां गिनाई थीं, लेकिन थिएटर्स की तरफ खिंची चली आ रही आम जनता के उत्साह ने यह साफ कर दिया है कि राम चरण का स्क्रीन प्रेजेंस और जाह्नवी कपूर के साथ उनकी नई ऑन-स्क्रीन केमिस्ट्री दर्शकों को सिनेमाघरों तक खींचने में पूरी तरह कामयाब रही है।