Author: bharati

  • गिरावट के बाद शेयर बाजार की दमदार वापसी, सेंसेक्स 889 अंक उछला, निफ्टी 24,250 के पार बंद

    गिरावट के बाद शेयर बाजार की दमदार वापसी, सेंसेक्स 889 अंक उछला, निफ्टी 24,250 के पार बंद

    नई दिल्ली। वैश्विक बाजारों से मिले मिश्रित संकेतों के बावजूद भारतीय शेयर बाजार ने बुधवार को जोरदार वापसी करते हुए निवेशकों का भरोसा मजबूत किया। पिछले कारोबारी सत्र की गिरावट के बाद घरेलू बाजार में व्यापक खरीदारी देखने को मिली, जिसके चलते बीएसई सेंसेक्स 889.68 अंकों की बढ़त के साथ 77,654.60 पर बंद हुआ। वहीं, एनएसई निफ्टी 50 भी 264.85 अंकों की छलांग लगाकर 24,250.20 के स्तर पर पहुंच गया। दिनभर के कारोबार में दोनों प्रमुख सूचकांकों में एक प्रतिशत से अधिक की तेजी दर्ज की गई।

    कारोबार की शुरुआत भी सकारात्मक रुख के साथ हुई थी। सेंसेक्स अपने पिछले बंद स्तर से करीब 658 अंक ऊपर खुला और कारोबार के दौरान एक समय लगभग 1,000 अंकों तक उछल गया। इसी तरह निफ्टी ने भी मजबूत शुरुआत की और दिन के दौरान 24,283.55 के उच्चतम स्तर तक पहुंचने में सफल रहा। बाजार में लगातार बनी खरीदारी ने दिन के अंत तक तेजी का माहौल कायम रखा।

    बाजार में आई तेजी का सबसे बड़ा आधार आईटी शेयर रहे, जिनमें मजबूत खरीदारी देखने को मिली। इसके अलावा फार्मा, मेटल, मीडिया, टेलीकॉम, एफएमसीजी, प्राइवेट बैंक और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर के शेयरों में भी अच्छी बढ़त दर्ज की गई। केवल रियल एस्टेट सेक्टर दबाव में रहा और लाल निशान में बंद हुआ। व्यापक बाजारों में भी सकारात्मक माहौल दिखाई दिया। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स में करीब 0.82 प्रतिशत और स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में लगभग 1.48 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई, जिससे यह संकेत मिला कि निवेशकों की रुचि केवल बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं रही।

    प्रमुख कंपनियों की बात करें तो जियो फाइनेंशियल सर्विसेज, हिंदुस्तान यूनिलीवर, इंफोसिस, हिंडाल्को इंडस्ट्रीज और लार्सन एंड टुब्रो के शेयरों में दो प्रतिशत से अधिक की तेजी देखने को मिली। दूसरी ओर, महिंद्रा एंड महिंद्रा, पावर ग्रिड, आयशर मोटर्स, बजाज ऑटो, बीईएल, ओएनजीसी और एचडीएफसी लाइफ के शेयर दबाव में रहे और इनमें हल्की गिरावट दर्ज की गई।

    बाजार की इस तेजी का सीधा फायदा निवेशकों को भी मिला। बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण एक ही कारोबारी सत्र में करीब 4 लाख करोड़ रुपये बढ़ गया। इसके साथ ही कुल मार्केट कैप बढ़कर 483 लाख करोड़ रुपये से अधिक पहुंच गया। इससे यह साफ हुआ कि व्यापक स्तर पर निवेशकों का भरोसा फिर से मजबूत हुआ है और खरीदारी का रुझान बढ़ा है।

    बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि हाल की गिरावट के बाद निवेशकों ने आकर्षक स्तरों पर खरीदारी की, जिससे बाजार को मजबूती मिली। विशेषज्ञों के अनुसार इसे वैल्यू बाइंग का संकेत माना जा सकता है। हालांकि आने वाले दिनों में बाजार की दिशा काफी हद तक कंपनियों के तिमाही नतीजों, पश्चिम एशिया की भू-राजनीतिक स्थिति और कच्चे तेल की कीमतों पर निर्भर करेगी। यदि वैश्विक हालात स्थिर रहते हैं और कॉरपोरेट नतीजे उम्मीद के अनुरूप आते हैं, तो बाजार में सकारात्मक रुख आगे भी जारी रह सकता है।

  • 38 साल बाद भी बरकरार है इस सदाबहार गीत का जादू, शादी-ब्याह की हर रस्म में आज भी गूंजती है इसकी धुन

    38 साल बाद भी बरकरार है इस सदाबहार गीत का जादू, शादी-ब्याह की हर रस्म में आज भी गूंजती है इसकी धुन

    नई दिल्ली । हिंदी सिनेमा के कई गीत समय के साथ केवल फिल्मी संगीत तक सीमित नहीं रहते, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक परंपराओं का हिस्सा बन जाते हैं। वर्ष 1988 में रिलीज हुई फिल्म ‘गंगा जमुना सरस्वती’ का लोकप्रिय गीत ‘साजन मेरा उस पार है’ भी ऐसे ही सदाबहार गीतों में शामिल है। रिलीज के करीब 38 वर्ष बाद भी यह गीत शादी-ब्याह, हल्दी, मेहंदी और महिला संगीत जैसे पारिवारिक आयोजनों में पूरे उत्साह के साथ गाया और बजाया जाता है।

    इस गीत को अभिनेत्री मीनाक्षी शेषाद्रि पर फिल्माया गया था, जो उस समय लगभग 24 वर्ष की थीं। उनके सहज अभिनय, पारंपरिक अंदाज और भावपूर्ण प्रस्तुति ने गीत को विशेष पहचान दिलाई। यही कारण है कि यह गीत केवल फिल्म का हिस्सा बनकर नहीं रह गया, बल्कि भारतीय शादियों की लोकप्रिय सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा बन गया।

    ‘गंगा जमुना सरस्वती’ में अमिताभ बच्चन, मीनाक्षी शेषाद्रि, जया प्रदा और मिथुन चक्रवर्ती जैसे बड़े कलाकार मुख्य भूमिकाओं में दिखाई दिए थे। फिल्म को लेकर दर्शकों और समीक्षकों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिली थीं, लेकिन इसके इस गीत को शुरुआत से ही व्यापक लोकप्रियता मिली। समय बीतने के बावजूद इसकी लोकप्रियता में कोई खास कमी नहीं आई और यह आज भी नई पीढ़ी के बीच अपनी जगह बनाए हुए है।

    गीत को स्वर कोकिला लता मंगेशकर ने अपनी मधुर आवाज दी थी। संगीतकार अनु मलिक ने इसकी धुन तैयार की, जबकि इसके बोल गीतकार इंद्रवीर ने लिखे थे। गीत की सरल भाषा, लोक संगीत से प्रेरित धुन और पारंपरिक माहौल इसे अन्य विवाह गीतों से अलग पहचान दिलाते हैं। यही वजह है कि यह गीत वर्षों बाद भी लोगों की पसंद बना हुआ है।

    बदलते समय के साथ शादी समारोहों में डीजे, रीमिक्स और आधुनिक वेडिंग सॉन्ग्स का चलन तेजी से बढ़ा है। इसके बावजूद ‘साजन मेरा उस पार है’ की लोकप्रियता पर इसका कोई विशेष प्रभाव नहीं पड़ा। विशेष रूप से गांवों, कस्बों और छोटे शहरों में महिला संगीत की महफिलों में यह गीत आज भी पूरे उत्साह के साथ गाया जाता है। कई परिवारों में विवाह समारोह की शुरुआत इसी गीत से करने की परंपरा अब भी देखने को मिलती है।

    इस गीत की सबसे बड़ी विशेषता इसकी सादगी मानी जाती है। ढोलक की पारंपरिक थाप के साथ गाया जाने वाला यह गीत महिलाओं को सहज रूप से जोड़ देता है। इसमें न केवल विवाह की खुशी झलकती है, बल्कि पारिवारिक अपनापन और भारतीय लोक संस्कृति की मिठास भी महसूस होती है। यही कारण है कि यह गीत अलग-अलग पीढ़ियों के लोगों को समान रूप से आकर्षित करता है।

    संगीत विशेषज्ञों का भी मानना है कि कुछ गीत अपनी धुन, भाव और सांस्कृतिक जुड़ाव के कारण समय की सीमाओं से आगे निकल जाते हैं। ‘साजन मेरा उस पार है’ भी उन्हीं गीतों में गिना जाता है जिसने दशकों बाद भी अपनी प्रासंगिकता बनाए रखी है। आज भी जब शादी समारोहों में ढोलक की थाप सुनाई देती है तो यह गीत स्वतः लोगों की जुबान पर आ जाता है और पूरे माहौल को उत्सवमय बना देता है।

  • त्वचा को बनाए चमकदार और बालों को करे मजबूत बादाम के तेल के ये चौंकाने वाले फायदे बदल सकते हैं आपकी ब्यूटी रूटीन

    त्वचा को बनाए चमकदार और बालों को करे मजबूत बादाम के तेल के ये चौंकाने वाले फायदे बदल सकते हैं आपकी ब्यूटी रूटीन


    नई दिल्ली । आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में बढ़ता प्रदूषण अनियमित खानपान तनाव और नींद की कमी का सबसे ज्यादा असर हमारी त्वचा और बालों पर दिखाई देता है। कम उम्र में बालों का झड़ना त्वचा का रूखा होना और चेहरे की प्राकृतिक चमक कम होना अब आम समस्या बन चुकी है। ऐसे में लोग महंगे ब्यूटी प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करते हैं लेकिन कई बार प्राकृतिक उपाय अधिक सुरक्षित और लाभदायक साबित हो सकते हैं। इन्हीं प्राकृतिक विकल्पों में बादाम का तेल एक बेहद लोकप्रिय और उपयोगी उपाय माना जाता है जो त्वचा और बालों दोनों की देखभाल में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

    बादाम के तेल में विटामिन ई हेल्दी फैटी एसिड एंटीऑक्सीडेंट और कई आवश्यक पोषक तत्व पाए जाते हैं। ये तत्व त्वचा को गहराई से नमी देने और उसे मुलायम बनाए रखने में मदद करते हैं। नियमित रूप से बादाम के तेल की हल्की मालिश करने से त्वचा का रूखापन कम हो सकता है और चेहरा अधिक स्वस्थ तथा चमकदार दिखाई दे सकता है। इसके एंटीऑक्सीडेंट गुण त्वचा को प्रदूषण और बाहरी वातावरण से होने वाले नुकसान से बचाने में भी सहायक माने जाते हैं।

    बालों की देखभाल के लिए भी बादाम का तेल काफी लाभकारी माना जाता है। सिर की हल्के हाथों से मालिश करने पर यह बालों की जड़ों को नमी प्रदान करता है जिससे बाल मुलायम और चमकदार महसूस होते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार बादाम के तेल में मौजूद फैटी एसिड बालों की बाहरी परत को सुरक्षित रखने में मदद कर सकते हैं जिससे रूखापन और टूटने की समस्या कुछ हद तक कम हो सकती है। कई लोग बेहतर परिणाम के लिए इसे जैतून के तेल के साथ मिलाकर भी उपयोग करते हैं। हालांकि यदि बाल अत्यधिक झड़ रहे हों या स्कैल्प से जुड़ी कोई गंभीर समस्या हो तो त्वचा विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी है।

    आंखों के नीचे काले घेरे यानी डार्क सर्कल्स आज की व्यस्त जीवनशैली में आम समस्या बन गए हैं। देर रात तक जागना तनाव पर्याप्त नींद न लेना और शरीर में पानी की कमी इसके प्रमुख कारण हैं। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि रात में सोने से पहले आंखों के नीचे थोड़ी मात्रा में बादाम के तेल से हल्की मालिश करने पर त्वचा को नमी मिल सकती है और वह अधिक स्वस्थ दिखाई दे सकती है। हालांकि केवल बादाम का तेल डार्क सर्कल्स का पूर्ण उपचार नहीं है। इसके लिए पर्याप्त नींद संतुलित आहार और अच्छी जीवनशैली भी उतनी ही आवश्यक है।

    बढ़ती उम्र के साथ त्वचा पर झुर्रियां आना एक सामान्य प्रक्रिया है लेकिन समय से पहले यह समस्या दिखाई देने लगे तो बादाम का तेल त्वचा की नमी बनाए रखने में मदद कर सकता है। विटामिन ई और एंटीऑक्सीडेंट त्वचा को स्वस्थ बनाए रखने में सहायक होते हैं जिससे त्वचा अधिक मुलायम और ताजगी भरी नजर आती है।

    रूखी त्वचा और फटी एड़ियों की समस्या में भी बादाम का तेल लाभदायक माना जाता है। नियमित रूप से लगाने पर त्वचा की ऊपरी परत में नमी बनी रहती है और रूखापन कम महसूस होता है। कुछ त्वचा रोगों में डॉक्टर मॉइस्चराइजर के रूप में इसका उपयोग करने की सलाह भी देते हैं लेकिन यदि त्वचा पर एलर्जी संक्रमण या घाव हो तो किसी भी घरेलू उपाय को अपनाने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर होता है।

    प्राकृतिक गुणों से भरपूर बादाम का तेल आपकी दैनिक ब्यूटी रूटीन का एक उपयोगी हिस्सा बन सकता है। सही खानपान पर्याप्त पानी नियमित नींद और उचित त्वचा देखभाल के साथ इसका संतुलित उपयोग लंबे समय तक त्वचा और बालों को स्वस्थ बनाए रखने में मदद कर सकता है।

  • गुरु पूर्णिमा पर काशी में मुस्लिमों ने उतारी संत की आरती, वृंदावन में प्रेमानंद महाराज के स्वागत में बिछे फूल

    गुरु पूर्णिमा पर काशी में मुस्लिमों ने उतारी संत की आरती, वृंदावन में प्रेमानंद महाराज के स्वागत में बिछे फूल

    अयोध्या। गुरु पूर्णिमा के अवसर पर बुधवार को उत्तर प्रदेश के प्रमुख धार्मिक स्थलों पर श्रद्धा और भक्ति का अनूठा संगम देखने को मिला। मथुरा, वाराणसी, प्रयागराज, अयोध्या और गोरखपुर समेत कई शहरों में हजारों श्रद्धालुओं ने अपने गुरुओं का पूजन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। जगह-जगह धार्मिक अनुष्ठान, भजन-कीर्तन और विशेष कार्यक्रम आयोजित किए गए।

    मथुरा में संत प्रेमानंद महाराज के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। शिष्यों ने उनके स्वागत में करीब 50 मीटर लंबे मार्ग पर फूल बिछाए और दंडवत प्रणाम कर गुरु के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की।

    गोरखपुर में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखनाथ मंदिर पहुंचकर महायोगी गुरु गोरखनाथ की पूजा-अर्चना की। इसके बाद उन्होंने अपने गुरु ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ की समाधि पर पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।

    अयोध्या में गुरु पूर्णिमा के अवसर पर 100 से अधिक मंदिरों को आकर्षक फूलों से सजाया गया। सुबह से ही सरयू घाटों पर स्नान के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। अनुमान है कि दो लाख से अधिक श्रद्धालु दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचे।

    वाराणसी में सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल देखने को मिली। यहां मुस्लिम समुदाय के लोगों ने जगद्गुरु बाबा बालक दास की आरती उतारकर उनका आशीर्वाद लिया। वहीं, गंगा घाटों पर भी श्रद्धालुओं ने पवित्र स्नान कर गुरु पूर्णिमा का पर्व मनाया।

    प्रयागराज में सनातनी किन्नर अखाड़े की ओर से गुरु वंदना यात्रा निकाली गई। आचार्य महामंडलेश्वर कौशल्या नंद गिरि रथ पर सवार रहीं, जबकि किन्नर समुदाय के सदस्य भजनों की धुन पर नृत्य करते हुए यात्रा में शामिल हुए। छत्तीसगढ़ से करीब 600 किलोमीटर की यात्रा कर पहुंचीं सोनिया अपने परिवार और लड्डू गोपाल की प्रतिमा के साथ संगम में स्नान करने पहुंचीं। उन्होंने कहा कि लड्डू गोपाल के घर आने के बाद उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव आए हैं।
    प्रयागराज में सनातनी किन्नर अखाड़े की ओर से गुरु वंदना यात्रा निकाली गई। आचार्य महामंडलेश्वर कौशल्या नंद गिरि रथ पर सवार रहीं, जबकि किन्नर समुदाय के सदस्य भजनों की धुन पर नृत्य करते हुए यात्रा में शामिल हुए। छत्तीसगढ़ से करीब 600 किलोमीटर की यात्रा कर पहुंचीं सोनिया अपने परिवार और लड्डू गोपाल की प्रतिमा के साथ संगम में स्नान करने पहुंचीं। उन्होंने कहा कि लड्डू गोपाल के घर आने के बाद उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव आए हैं।

    गुरु पूर्णिमा के अवसर पर प्रसिद्ध कथावाचक देवकी नंदन महाराज के दर्शन और पूजन के लिए 10 हजार से अधिक श्रद्धालु पहुंचे। भजन-कीर्तन और धार्मिक आयोजनों के बीच भक्तों ने गुरु का आशीर्वाद लिया और गुरु-शिष्य परंपरा के महत्व को आत्मसात किया।

    वात्सल्य ग्राम आश्रम में पद्म भूषण साध्वी ऋतम्भरा के शिष्यों ने श्रद्धापूर्वक उनका पूजन किया। इस दौरान उन्होंने आध्यात्मिक जीवन, सेवा और संस्कारों का संदेश दिया। उधर, काशी विश्वनाथ मंदिर में मध्य आरती के दौरान बाबा विश्वनाथ का विशेष श्रृंगार कर उन्हें राम नाम की माला अर्पित की गई, जिसने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया।

  • राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर संसद में सपा का प्रदर्शन: दानपेटी लेकर पहुंचीं डिंपल, छात्र आंदोलन पर भी घेरा

    राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर संसद में सपा का प्रदर्शन: दानपेटी लेकर पहुंचीं डिंपल, छात्र आंदोलन पर भी घेरा


    लखनऊ। राम मंदिर चढ़ावा चोरी के मुद्दे को लेकर समाजवादी पार्टी ने बुधवार को संसद भवन परिसर में जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। सपा सांसदों ने दानपेटी के साथ प्रदर्शन करते हुए सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। इस दौरान सपा सांसद डिंपल यादव दानपेटी लेकर संसद पहुंचीं और सांसदों के साथ-साथ मीडिया कर्मियों से भी उसमें प्रतीकात्मक रूप से धनराशि डालने की अपील की। इसके बाद कई सांसदों ने दानपेटी में नोट डाले, जबकि पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी इसमें सहयोग राशि डाली। प्रदर्शन के दौरान सांसदों ने “चढ़ावा चोर, गद्दी छोड़” के नारे लगाए।

    डिंपल यादव ने आरोप लगाया कि चढ़ावे के पैसे का दुरुपयोग हुआ है और मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी घटना के बाद राज्य सरकार को जवाब देना चाहिए कि यह कैसे हुआ। उनका आरोप था कि विशेष जांच दल (SIT) का गठन केवल लोगों का ध्यान भटकाने के लिए किया गया।

    अखिलेश यादव ने कहा कि यदि दानपात्र तक सुरक्षित नहीं रह सके तो व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है। उन्होंने कहा कि जो लोग आस्था से जुड़े मामलों की रक्षा नहीं कर पाए, उनसे युवाओं के भविष्य की सुरक्षा की भी उम्मीद नहीं की जा सकती।

    इसी दौरान अखिलेश यादव ने छात्र आंदोलन के मुद्दे पर भी राहुल गांधी का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि छात्रों पर पैलेट गन चलाए जाने की घटना गंभीर है और इसकी जिम्मेदारी केंद्रीय गृह मंत्री को लेनी चाहिए।

    उधर, लोकसभा की कार्यवाही बुधवार सुबह 11 बजे शुरू होते ही विपक्ष के हंगामे की भेंट चढ़ गई। लगातार नारेबाजी के कारण सदन की कार्यवाही पहले दोपहर 12 बजे तक और बाद में कई बार स्थगित करनी पड़ी। दोपहर तीन बजे कार्यवाही दोबारा शुरू हुई, लेकिन करीब 22 मिनट ही चल सकी। इस दौरान ‘पब्लिक एग्जामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026’ पारित किया गया। इसके बाद सदन की कार्यवाही गुरुवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।

    पेपर लीक से जुड़े इस संशोधन विधेयक पर लगातार दूसरे दिन चर्चा हुई। इससे पहले मंगलवार को इस विषय पर करीब नौ घंटे तक बहस चली थी।

    इस बीच फैजाबाद (अयोध्या) से सपा सांसद अवधेश प्रसाद ने भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इस मामले में “बड़ी मछलियों” को बचाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने दावा किया कि जनता सब देख रही है और आगामी चुनाव में इसका असर दिखाई देगा।

  • अदाणी एंटरप्राइजेज ने पहली तिमाही में बनाया नया रिकॉर्ड, एबिटडा 49 प्रतिशत बढ़कर 5,642 करोड़ रुपये पहुंचा

    अदाणी एंटरप्राइजेज ने पहली तिमाही में बनाया नया रिकॉर्ड, एबिटडा 49 प्रतिशत बढ़कर 5,642 करोड़ रुपये पहुंचा

    नई दिल्ली ।अदाणी एंटरप्राइजेज लिमिटेड ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के वित्तीय नतीजों में मजबूत प्रदर्शन दर्ज करते हुए अब तक का सबसे अधिक तिमाही एबिटडा हासिल किया है। कंपनी के अनुसार, जून तिमाही में एबिटडा 5,642 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 49 प्रतिशत अधिक है। मजबूत परिचालन प्रदर्शन और विभिन्न इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में बढ़ती गतिविधियों ने कंपनी के परिणामों को नई ऊंचाई तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

    कंपनी की कुल आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। पहली तिमाही के दौरान कुल आय सालाना आधार पर 50 प्रतिशत बढ़कर 33,546 करोड़ रुपये हो गई। यह वृद्धि कंपनी के विविध कारोबारी पोर्टफोलियो और अलग-अलग क्षेत्रों में लगातार विस्तार का संकेत मानी जा रही है। कंपनी का कहना है कि स्थापित व्यवसायों के साथ उभरते क्षेत्रों में निवेश का लाभ अब वित्तीय परिणामों में स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है।

    तिमाही के दौरान कर से पहले मुनाफा 1,295 करोड़ रुपये दर्ज किया गया। कंपनी ने स्पष्ट किया कि इस आंकड़े में एक विशेष सेटलमेंट से जुड़े प्रभाव को शामिल नहीं किया गया है। इस अवधि में अदाणी एयरपोर्ट्स का प्रदर्शन उल्लेखनीय रहा, जहां एबिटडा 49 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि के साथ 1,633 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। विमानन क्षेत्र में बढ़ती परिचालन क्षमता और यात्री गतिविधियों ने इस वृद्धि को समर्थन दिया।

    कंपनी का कहना है कि उसके इंफ्रास्ट्रक्चर और इनक्यूबेशन प्लेटफॉर्म लगातार मजबूत हो रहे हैं। इसी कारण कारोबार का विस्तार केवल राजस्व तक सीमित नहीं रहा, बल्कि परिचालन दक्षता और लाभप्रदता में भी लगातार सुधार देखने को मिला है। विविध क्षेत्रों में मौजूदगी के कारण कंपनी को स्थिर विकास का आधार भी मिला है।

    पहली तिमाही के दौरान कई प्रमुख परियोजनाओं में महत्वपूर्ण प्रगति दर्ज की गई। नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से अंतरराष्ट्रीय परिचालन की शुरुआत कंपनी के लिए एक बड़ा मील का पत्थर रही। इसके अलावा गंगा एक्सप्रेसवे परियोजना पर टोल संग्रह शुरू होने से भी परिचालन गतिविधियों में नई गति आई। ऊर्जा क्षेत्र में कंपनी ने सोलर मॉड्यूल उत्पादन क्षमता का विस्तार किया, जबकि डेटा सेंटर कारोबार में बड़े हाइपरस्केल ऑर्डर मिलने से भविष्य की संभावनाएं और मजबूत हुई हैं।

    कॉपर कारोबार ने भी तिमाही के प्रदर्शन में अहम योगदान दिया। क्षमता विस्तार के बाद इस कारोबार से 749 करोड़ रुपये का एबिटडा प्राप्त हुआ। वहीं अदाणी न्यू इंडस्ट्रीज ने 1.7 गीगावॉट क्षमता वाली नई मॉड्यूल उत्पादन लाइन शुरू की, जिससे स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में कंपनी की मौजूदगी और मजबूत होने की उम्मीद है।

    कंपनी ने हाल ही में 15,000 करोड़ रुपये का क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट सफलतापूर्वक पूरा किया। प्रबंधन का मानना है कि इससे संस्थागत निवेशकों का कंपनी की दीर्घकालिक रणनीति और विकास योजनाओं पर भरोसा मजबूत हुआ है। कंपनी का कहना है कि भारत में तेजी से बढ़ती बुनियादी ढांचा जरूरतों को ध्यान में रखते हुए वह वैश्विक स्तर के प्रतिस्पर्धी कारोबार विकसित करने और दीर्घकालिक मूल्य सृजन पर ध्यान केंद्रित कर रही है।

    कंपनी का मानना है कि पिछले कुछ वर्षों में किए गए अनुशासित निवेश अब बेहतर परिचालन क्षमता और वित्तीय प्रदर्शन में बदलने लगे हैं। आने वाले समय में परिसंपत्तियों का अधिक प्रभावी उपयोग, नई परियोजनाओं का विस्तार और परिचालन दक्षता कंपनी की विकास यात्रा को नई गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

  • कॉमनवेल्थ गेम्स 2026: भारत ने जीते 12 पदक, दो सिल्वर के बाद भी मेडल टैली में नौवें नंबर पर बरकरार

    कॉमनवेल्थ गेम्स 2026: भारत ने जीते 12 पदक, दो सिल्वर के बाद भी मेडल टैली में नौवें नंबर पर बरकरार


    नई दिल्ली । कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत का शानदार प्रदर्शन जारी है। छठे दिन दो और रजत पदक जीतने के बाद भारत के कुल पदकों की संख्या 12 हो गई है और वह मेडल तालिका में नौवें स्थान पर बना हुआ है। वहीं ऑस्ट्रेलिया 34 स्वर्ण सहित 78 पदकों के साथ शीर्ष पर काबिज है।
    कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत का शानदार प्रदर्शन जारी है। छठे दिन दो और रजत पदक जीतने के बाद भारत के कुल पदकों की संख्या 12 हो गई है और वह मेडल तालिका में नौवें स्थान पर बना हुआ है। वहीं ऑस्ट्रेलिया 34 स्वर्ण सहित 78 पदकों के साथ शीर्ष पर काबिज है।

    कॉमनवेल्थ गेम्स 2026: ऑस्ट्रेलिया का जलवा बरकरार, भारत 12 पदकों के साथ नौवें स्थान पर; मुक्केबाजी में तीन और मेडल पक्के

    कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय खिलाड़ियों का शानदार प्रदर्शन लगातार जारी है। प्रतियोगिता के छठे दिन भारत की झोली में दो और रजत पदक आए, जिससे देश के कुल पदकों की संख्या बढ़कर 12 हो गई। हालांकि इसके बावजूद भारत मेडल तालिका में नौवें स्थान पर बना हुआ है। दूसरी ओर ऑस्ट्रेलिया ने अपने दमदार प्रदर्शन को जारी रखते हुए शीर्ष स्थान पर मजबूत पकड़ बनाए रखी है।

    मेडल तालिका में ऑस्ट्रेलिया सबसे आगे है। उसने अब तक कुल 78 पदक जीते हैं, जिनमें 34 स्वर्ण, 17 रजत और 27 कांस्य पदक शामिल हैं। ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों का दबदबा लगभग हर खेल में देखने को मिल रहा है और फिलहाल उसके आसपास कोई अन्य देश नजर नहीं आ रहा।

    दूसरे स्थान पर कनाडा है, जिसने अब तक 35 पदक अपने नाम किए हैं। कनाडा के खाते में 13 स्वर्ण, 10 रजत और 12 कांस्य पदक हैं। तीसरे स्थान पर इंग्लैंड काबिज है, जिसके खिलाड़ियों ने 43 पदक जीते हैं। इनमें 10 स्वर्ण, 18 रजत और 15 कांस्य पदक शामिल हैं। मेजबान स्कॉटलैंड 7 स्वर्ण सहित 15 पदकों के साथ चौथे स्थान पर है, जबकि नाइजीरिया 6 स्वर्ण और कुल 11 पदकों के साथ पांचवें स्थान पर बना हुआ है।

    भारत ने अब तक 2 स्वर्ण, 7 रजत और 3 कांस्य पदक जीतकर कुल 12 पदक हासिल किए हैं। छठे दिन महिला वेटलिफ्टिंग और एथलेटिक्स में मिले दो रजत पदकों ने भारत की पदक संख्या में इजाफा किया, हालांकि मेडल तालिका में उसकी रैंकिंग में कोई बदलाव नहीं हुआ और वह नौवें स्थान पर कायम है।

    महिला वेटलिफ्टिंग के 69 किलोग्राम वर्ग में हरजिंदर कौर ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कुल 227 किलोग्राम वजन उठाकर रजत पदक अपने नाम किया। उन्होंने स्नैच में 101 किलोग्राम और क्लीन एंड जर्क में 126 किलोग्राम वजन उठाकर यह उपलब्धि हासिल की।

    एथलेटिक्स में गुलवीर सिंह ने पुरुषों की 10,000 मीटर दौड़ में 27 मिनट 49.78 सेकंड का समय निकालते हुए रजत पदक जीता। इसके साथ ही वह इस स्पर्धा में कॉमनवेल्थ गेम्स का पदक जीतने वाले पहले भारतीय एथलीट बन गए और भारतीय खेल इतिहास में अपना नाम दर्ज करा लिया।

    मुक्केबाजी में भी भारत का प्रदर्शन उत्साहजनक रहा। प्रीति, प्रिया और जादुमणि सिंह ने अपने-अपने क्वार्टर फाइनल मुकाबले जीतकर सेमीफाइनल में जगह बना ली है। कॉमनवेल्थ गेम्स के नियमों के अनुसार सेमीफाइनल में पहुंचने वाले सभी मुक्केबाजों का पदक सुनिश्चित हो जाता है। ऐसे में भारत के खाते में कम से कम तीन और कांस्य पदक पक्के हो चुके हैं, जिन्हें बेहतर रंग में बदलने का मौका अब सेमीफाइनल और फाइनल मुकाबलों में मिलेगा।

    भारतीय दल से आने वाले दिनों में वेटलिफ्टिंग, मुक्केबाजी, कुश्ती और एथलेटिक्स जैसी स्पर्धाओं में और पदकों की उम्मीद की जा रही है। यदि खिलाड़ियों का मौजूदा प्रदर्शन जारी रहता है तो भारत मेडल तालिका में अपनी स्थिति और मजबूत कर सकता है।

  • एलआईसी, यूनियन बैंक और न्यू इंडिया एश्योरेंस ने सरकार को दिया डिविडेंड, सार्वजनिक बैंकों के मजबूत प्रदर्शन की तस्वीर आई सामने

    एलआईसी, यूनियन बैंक और न्यू इंडिया एश्योरेंस ने सरकार को दिया डिविडेंड, सार्वजनिक बैंकों के मजबूत प्रदर्शन की तस्वीर आई सामने


    नई दिल्ली । 
    देश की सबसे बड़ी जीवन बीमा कंपनी भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए सरकार को 12,207 करोड़ रुपये का डिविडेंड सौंपा है। बुधवार को आयोजित एक कार्यक्रम में एलआईसी के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी आर. दोराईस्वामी ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को डिविडेंड का चेक सौंपा। यह भुगतान सरकार को सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों से मिलने वाले लाभांश का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है और सरकारी राजस्व को मजबूत करने में इसकी अहम भूमिका रहती है।

    एलआईसी के अलावा सार्वजनिक क्षेत्र के अन्य वित्तीय संस्थानों ने भी सरकार को डिविडेंड प्रदान किया। यूनियन बैंक ऑफ इंडिया ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 2,853 करोड़ रुपये का डिविडेंड दिया। बैंक के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी आशीष पांडे ने वित्त मंत्री को यह चेक सौंपा। इसी अवसर पर सार्वजनिक क्षेत्र की बीमा कंपनी न्यू इंडिया एश्योरेंस ने भी 211 करोड़ रुपये का डिविडेंड सरकार को प्रदान किया। कंपनी की अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक गिरिजा सुब्रमणियन ने वित्त मंत्री को इसका चेक सौंपा।

    इस अवसर पर सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के वित्तीय प्रदर्शन से जुड़े महत्वपूर्ण आंकड़े भी सामने आए। उपलब्ध जानकारी के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की परिसंपत्ति गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया। सकल गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (ग्रॉस एनपीए) का स्तर घटकर रिकॉर्ड निचले स्तर के करीब पहुंच गया, जबकि बैंकों का शुद्ध लाभ बढ़कर अब तक के सर्वोच्च स्तर पर पहुंच गया। यह लगातार चौथा वित्त वर्ष रहा जब सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक सामूहिक रूप से लाभ में रहे।

    आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का शुद्ध लाभ 11.1 प्रतिशत बढ़कर लगभग 1.98 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया। वहीं 31 मार्च 2026 तक इन बैंकों का कुल कारोबार बढ़कर 283.3 लाख करोड़ रुपये हो गया, जो पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 12.8 प्रतिशत अधिक है। ऋण वितरण में वृद्धि, आय में सुधार और परिसंपत्ति गुणवत्ता बेहतर होने से बैंकों की वित्तीय स्थिति पहले की तुलना में अधिक मजबूत हुई है।

    बैंकों की बैलेंस शीट में सुधार के साथ जोखिम प्रबंधन और परिचालन क्षमता में भी सकारात्मक बदलाव देखने को मिला है। वित्तीय वर्ष के अंत तक सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का सकल एनपीए अनुपात घटकर लगभग 1.93 प्रतिशत और शुद्ध एनपीए अनुपात 0.39 प्रतिशत पर आ गया। यह स्तर तनावग्रस्त परिसंपत्तियों में उल्लेखनीय कमी का संकेत देता है और बैंकिंग प्रणाली की मजबूती को दर्शाता है।

    इसके साथ ही सभी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने 90 प्रतिशत से अधिक का प्रोविजनिंग कवरेज रेशियो बनाए रखा। विशेषज्ञों के अनुसार यह बेहतर जोखिम प्रबंधन, सावधानीपूर्ण ऋण वितरण और मजबूत पूंजी स्थिति का संकेत माना जाता है। लगातार बढ़ती लाभप्रदता, बेहतर परिसंपत्ति गुणवत्ता और मजबूत वित्तीय आधार के चलते सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक और सरकारी वित्तीय संस्थान देश की आर्थिक गतिविधियों को समर्थन देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। सरकार को प्राप्त डिविडेंड भी इसी मजबूत वित्तीय प्रदर्शन का प्रत्यक्ष परिणाम माना जा रहा है।

  • CWG 2026: 10,000 मीटर में इतिहास रचने वाले गुलवीर सिंह को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की शुभकामनाएं

    CWG 2026: 10,000 मीटर में इतिहास रचने वाले गुलवीर सिंह को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की शुभकामनाएं


    नई दिल्ली । कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय खिलाड़ियों का शानदार प्रदर्शन लगातार जारी है। प्रतियोगिता के छठे दिन भारत के स्टार लंबी दूरी के धावक गुलवीर सिंह ने पुरुषों की 10,000 मीटर दौड़ में रजत पदक जीतकर इतिहास रच दिया। वह इस स्पर्धा में कॉमनवेल्थ गेम्स का पदक जीतने वाले पहले भारतीय एथलीट बन गए हैं। उनकी इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने उन्हें हार्दिक बधाई देते हुए देश का गौरव बढ़ाने वाला खिलाड़ी बताया।

    राष्ट्रपति कार्यालय की ओर से सोशल मीडिया मंच एक्स पर जारी संदेश में कहा गया कि ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में पुरुषों की 10,000 मीटर स्पर्धा में सिल्वर मेडल जीतकर गुलवीर सिंह ने भारत के लिए इतिहास रच दिया है। राष्ट्रपति ने कहा कि पूरे देश को उनकी इस उपलब्धि पर गर्व है और भविष्य में भी वे इसी तरह देश के लिए नई सफलताएं हासिल करें, यही शुभकामना है।

    उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी गुलवीर सिंह को बधाई देते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश के सपूत और भारतीय सेना के नायब सूबेदार ने अपने शानदार प्रदर्शन से देश और प्रदेश का नाम रोशन किया है। उन्होंने कहा कि गुलवीर की यह उपलब्धि कड़ी मेहनत, अनुशासन और राष्ट्र के प्रति समर्पण का उत्कृष्ट उदाहरण है, जो युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा बनेगी।

    ग्लासगो के स्कॉट्सटाउन स्टेडियम में आयोजित फाइनल मुकाबले में गुलवीर सिंह ने 10,000 मीटर की दौड़ 27 मिनट 49.78 सेकंड में पूरी कर रजत पदक अपने नाम किया। ऑस्ट्रेलिया के काई रॉबिन्सन ने 27 मिनट 48.93 सेकंड के समय के साथ स्वर्ण पदक जीता, जबकि आइल ऑफ मैन के डेविड मुलार्की 27 मिनट 50.28 सेकंड के समय के साथ कांस्य पदक हासिल करने में सफल रहे।

    उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले के सिरसा गांव में 1 जून 1998 को जन्मे गुलवीर सिंह भारतीय सेना में नायब सूबेदार के पद पर कार्यरत हैं। उनका एथलेटिक्स सफर गांव की पगडंडियों और खेतों में दौड़ लगाने से शुरू हुआ था, जब वे सेना में भर्ती की तैयारी कर रहे थे। वर्ष 2018 में भारतीय सेना की ग्रेनेडियर्स रेजिमेंट में शामिल होने के बाद उन्होंने लंबी दूरी की दौड़ में लगातार शानदार प्रदर्शन किया और देश के शीर्ष धावकों में अपनी पहचान बनाई।

    गुलवीर ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान 2023 एशियाई एथलेटिक्स चैंपियनशिप में 5,000 मीटर दौड़ का कांस्य पदक जीतकर बनाई। इसके बाद 2022 एशियाई खेलों में 10,000 मीटर स्पर्धा में भी कांस्य पदक अपने नाम किया। वर्ष 2025 में दक्षिण कोरिया में आयोजित एशियाई एथलेटिक्स चैंपियनशिप में उन्होंने 5,000 मीटर और 10,000 मीटर दोनों स्पर्धाओं में स्वर्ण पदक जीतकर एशिया के शीर्ष लंबी दूरी के धावकों में अपनी मजबूत जगह बनाई।

    अब कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में मिला यह ऐतिहासिक रजत पदक गुलवीर सिंह के करियर की सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल हो गया है। उनकी इस सफलता ने न केवल भारतीय एथलेटिक्स को नई पहचान दी है, बल्कि देश के युवा खिलाड़ियों के लिए भी एक नई प्रेरणा प्रस्तुत की है।

  • BreathEasy तकनीक से बदल सकती है कैंसर स्क्रीनिंग, कुत्ते सूंघकर करेंगे शुरुआती पहचान, जानिए कैसे करेगा काम

    BreathEasy तकनीक से बदल सकती है कैंसर स्क्रीनिंग, कुत्ते सूंघकर करेंगे शुरुआती पहचान, जानिए कैसे करेगा काम


    नई दिल्ली । कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के इलाज में समय पर पहचान सबसे बड़ी चुनौती मानी जाती है। यदि शुरुआती चरण में बीमारी का पता चल जाए तो उपचार की सफलता की संभावना काफी बढ़ जाती है। इसी दिशा में भारत की एक डीप टेक स्टार्टअप डॉग्नोसिस ऐसी नई तकनीक विकसित कर रही है जो भविष्य में कैंसर की स्क्रीनिंग का तरीका बदल सकती है। इस तकनीक की खास बात यह है कि इसमें ब्लड टेस्ट या स्कैन की जगह केवल व्यक्ति की सांस के नमूने का विश्लेषण किया जाएगा और इस प्रक्रिया में प्रशिक्षित कुत्तों की असाधारण सूंघने की क्षमता का उपयोग होगा।

    कंपनी ने अपनी इस तकनीक का नाम ब्रीथईजी रखा है। इसका उद्देश्य कैंसर का अंतिम निदान करना नहीं बल्कि उन लोगों की पहचान करना है जिनमें कैंसर होने का जोखिम अधिक हो सकता है। ऐसे लोगों को बाद में बायोप्सी ब्लड टेस्ट या इमेजिंग जैसी पारंपरिक जांच कराने की सलाह दी जाएगी। यदि मौजूदा क्लिनिकल ट्रायल सफल रहते हैं तो कंपनी वर्ष 2027 की शुरुआत में इस तकनीक को भारत में व्यावसायिक रूप से लॉन्च करने की योजना बना रही है।

    यह तकनीक एक वैज्ञानिक सिद्धांत पर आधारित है। जब शरीर में कैंसर कोशिकाएं विकसित होती हैं तो वे वॉलेटाइल ऑर्गेनिक कंपाउंड्स नामक सूक्ष्म रासायनिक अणु छोड़ती हैं जो सांस के साथ बाहर निकलते हैं। इंसानों की तुलना में कुत्तों की सूंघने की क्षमता कई हजार गुना अधिक संवेदनशील होती है इसलिए वे इन सूक्ष्म रासायनिक संकेतों को पहचान सकते हैं। डॉग्नोसिस मुख्य रूप से बीगल नस्ल के प्रशिक्षित कुत्तों का उपयोग कर रही है हालांकि अन्य नस्लों को भी इस कार्य के लिए तैयार किया जा रहा है।

    कंपनी की तकनीक केवल कुत्तों के व्यवहार पर निर्भर नहीं रहती। इसके साथ एक आधुनिक ब्रेन कंप्यूटर इंटरफेस भी विकसित किया गया है जो नमूने को सूंघते समय कुत्ते के मस्तिष्क की गतिविधियों को रिकॉर्ड और विश्लेषित करता है। इससे परिणामों की विश्वसनीयता बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। सांस का नमूना एक विशेष मास्क में लगभग दस मिनट तक सांस लेने के बाद लिया जाता है और फिर उसे स्वचालित प्रणाली में जांचा जाता है। कंपनी का दावा है कि यह प्लेटफॉर्म एक बार में 200 से अधिक नमूनों की जांच बिना मानवीय हस्तक्षेप के कर सकता है।

    फिलहाल यह तकनीक बड़े स्तर के क्लिनिकल परीक्षणों से गुजर रही है। शुरुआती अध्ययनों में कुछ मामलों में गलत पॉजिटिव और गलत निगेटिव परिणाम भी सामने आए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तकनीक में संभावनाएं जरूर हैं लेकिन इसे नियमित स्वास्थ्य सेवाओं का हिस्सा बनाने से पहले बड़े पैमाने पर वैज्ञानिक प्रमाण और व्यापक परीक्षण आवश्यक होंगे।

    विशेषज्ञ यह भी स्पष्ट करते हैं कि यह तकनीक कैंसर का अंतिम इलाज या अंतिम जांच नहीं है। इसका उद्देश्य केवल शुरुआती स्क्रीनिंग करना है ताकि जोखिम वाले लोगों की समय रहते पहचान हो सके और उन्हें आगे की आवश्यक चिकित्सीय जांच के लिए भेजा जा सके। यदि यह तकनीक सफल साबित होती है तो भविष्य में वार्षिक हेल्थ चेकअप का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकती है और कैंसर जैसी गंभीर बीमारी की जल्द पहचान में बड़ी भूमिका निभा सकती है।