नगदी के अलावा आत्मसमर्पण किए हुए नक्सलियों की निशानदेही पर पुलिस ने जंगल के डंप से भारी मात्रा में युद्ध सामग्री भी जब्त की है। बरामदगी में निम्नलिखित प्रमुख सामग्रियां शामिल हैं
नक्सल विरोधी अभियान को मिली गति

नक्सल विरोधी अभियान को मिली गति

छुट्टी पर नानी के घर आई थी बच्ची
पड़ोसी ने रची झूठ की कहानी
इसी दौरान पड़ोस में रहने वाला रियाज खान नामक युवक अपने घर से बच्ची को बेहोशी की हालत में उठाकर लाया। उसने परिवार वालों को गुमराह करने की कोशिश करते हुए यह झूठी कहानी सुनाई कि बच्ची छत से गिर गई है। लेकिन जब परिवार ने बच्ची को देखा तो वे हतप्रभ रह गए। बच्ची का चेहरा बुरी तरह सूजा हुआ था और उसके सिर नाक व आंख पर गहरी चोटें थीं जिनसे खून बह रहा था। परिवार तुरंत बच्ची को खाचरोद अस्पताल ले गया जहां डॉक्टरों ने उसकी गंभीर हालत को देखते हुए उसे रतलाम रेफर कर दिया। रतलाम के अस्पताल में सोमवार को इलाज के दौरान बच्ची ने दम तोड़ दिया।
चिल्लाने पर बोरी में भरकर पीटा
जब बच्ची चीखने-चिल्लाने लगी और हाथ-पैर पटकने लगी तो गुस्से में आकर आरोपी ने उसे धक्का दे दिया जिससे वह जमीन पर गिरकर बेसुध हो गई। इसके बाद आरोपी की हैवानियत यहीं नहीं रुकी। उसने बच्ची को एक बोरी में बंद कर दिया और मोगरी से लगातार वार किए। आरोपी ने बच्ची को मरा समझकर उसे वहीं छोड़ दिया और घर से बाहर निकल गया।कुछ देर बाद जब वह लौटा तो उसने देखा कि बच्ची की सांसें चल रही हैं। इसके बाद उसने अपनी गलती छिपाने के लिए बच्ची को उसकी नानी के पास ले जाकर छत से गिरने का मनगढ़ंत किस्सा सुनाया।
पुलिस जांच और आरोपी की गिरफ्तारी

1. लोधी गार्डन – सुकून और हरियाली का ठिकाना
3. हौज खास विलेज – इतिहास और मॉडर्न लाइफ का मेल
4. सुंदर नर्सरी – शहर की भागदौड़ से राहत
5. चांदनी चौक -स्वाद और संस्कृति का संगम

सूत्रों के मुताबिक, शिवसेना शिंदे गुट इस बातचीत की शुरुआत 50-50 सीट बंटवारे के फार्मूले के साथ करेगी। पार्टी का तर्क है कि 2012 और 2017 के बीएमसी चुनावों को मिलाकर शिवसेना के कुल 125 पार्षद रह चुके हैं, जबकि बीजेपी ने 2017 के चुनाव में अपने दम पर 82 सीटें जीती थीं। दूसरी ओर बीजेपी इस बार और आक्रामक रुख में है और उसने 100 से ज्यादा सीटें जीतने का लक्ष्य तय किया है। यही वजह है कि दोनों दलों के बीच सीट बंटवारे को लेकर कड़ा मंथन तय माना जा रहा है। इस सियासी समीकरण के बीच यह भी साफ हो गया है कि राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे का गठबंधन आगामी चुनावों में एकजुट रहेगा, जिससे मुकाबला और ज्यादा त्रिकोणीय और रोचक बन सकता है।
ठाणे में भी चुनावी हलचल तेज
मुंबई के साथ-साथ ठाणे महानगरपालिका चुनाव को लेकर भी गतिविधियां तेज हो गई हैं। मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे आज ठाणे में पार्टी पदाधिकारियों के साथ एक बड़ी बैठक करने जा रहे हैं। इस बैठक में सभी पुराने हेड्स, डिपार्टमेंट हेड्स, ब्रांच हेड्स, विधायक, सांसद और पूर्व कॉर्पोरेटर्स शामिल होंगे। इस बैठक को ठाणे चुनाव के लिए शुरुआती रोडमैप माना जा रहा है। यहां सीट बंटवारे, प्रचार रणनीति, बड़ी जनसभाओं और इच्छुक उम्मीदवारों को लेकर अहम दिशा-निर्देश दिए जाएंगे। चूंकि ठाणे में भी बीजेपी के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ा जाना है, इसलिए दोनों दलों के बीच तालमेल और रणनीति पर विशेष जोर रहेगा। यह बैठक आज शाम ठाणे के टिप टॉप प्लाजा में आयोजित की गई है।
कांग्रेस और अन्य दल भी सक्रिय
महायुति की बैठकों के बाद अब कांग्रेस ने भी महानगरपालिका चुनावों को लेकर कमर कस ली है। नगर निगम क्षेत्रों के जिला कांग्रेस अध्यक्षों और विधानसभा प्रभारियों की बैठक आज 16 दिसंबर को दोपहर 1 बजे प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल की अध्यक्षता में होगी। इस बैठक में संगठन को मजबूत करने और चुनावी रणनीति पर चर्चा की जाएगी।
वहीं बीजेपी ने भी बीएमसी चुनाव के लिए अपने घटक दलों के साथ बैठकों का सिलसिला शुरू कर दिया है। पार्टी आज आरपीआई आठवले गुट और शिवसेना के साथ अलग-अलग बैठकें करेगी। ये सभी बैठकें दादर स्थित वसंत स्मृति कार्यालय में होंगी, जहां से महायुति की चुनावी दिशा और दशा तय होने की उम्मीद है।कुल मिलाकर, बीएमसी और ठाणे चुनावों को लेकर महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल अपने चरम पर है। आज होने वाली बैठकें यह तय करेंगी कि आने वाले दिनों में सियासी समीकरण किस दिशा में आगे बढ़ते हैं।

एनआईए द्वारा दायर 1597 पन्नों की चार्जशीट में पाकिस्तान के तीन मारे गए आतंकियों के नाम भी शामिल हैं जिनकी पहचान फैसल जट्ट उर्फ सुलेमान शाह हबीब ताहिर उर्फ जिब्रान और हमजा अफगानी के रूप में हुई है। इन तीन आतंकवादियों को भारतीय सुरक्षा बलों ने जुलाई में श्रीनगर के दाचीगाम में ऑपरेशन महादेव के दौरान मार गिराया था।
कौन है साजिद जट्ट
साजिद जट्ट को द रेजिस्टेंस फ्रंट का चीफ भी बताया जाता है जो जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम देता है। TRF ने ही पहलगाम आतंकी हमले को अंजाम दिया था। भारत सरकार ने साल 2023 में TRF को यूएपीए के तहत बैन कर दिया था। एनआईए ने साजिद जट्ट पर 10 लाख रुपये का इनाम भी घोषित कर रखा है।
चार्जशीट में साजिद जट्ट के अलावा अन्य चार आतंकवादियों पर भी आरोप लगाए गए हैं जिनमें भारतीय न्याय संहिता शस्त्र अधिनियम 1959 और गैरकानूनी गतिविधियां अधिनियम 1967 के प्रासंगिक प्रावधानों के तहत आरोप लगाए गए हैं। इसके अलावा भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ने के आरोप में दो स्थानीय कश्मीरियों परवेज अहमद और बशीर अहमद को भी गिरफ्तार किया गया था। इन दोनों को आतंकवादियों को पनाह देने और उनकी मदद करने के आरोप में 22 जून को एनआईए ने गिरफ्तार किया था।
एनआईए ने अपनी जांच में यह पुष्टि की कि दोनों स्थानीय कश्मीरी आरोपियों ने हमले में शामिल तीन पाकिस्तानी आतंकवादियों की पहचान की और यह भी बताया कि ये आतंकवादी लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े हुए थे। इसके अलावा एनआईए ने पाकिस्तान के प्रायोजित आतंकवाद के खिलाफ अपनी सख्त कार्रवाई जारी रखने का संकल्प लिया है।
इस चार्जशीट से यह स्पष्ट हो गया है कि पाकिस्तान लगातार भारतीय सीमा में आतंकवादी गतिविधियों को प्रायोजित कर रहा है और ऐसे आतंकवादियों की मदद करने में स्थानीय कश्मीरी भी शामिल हो रहे हैं। एनआईए की यह कार्रवाई इस बात को भी उजागर करती है कि भारत आतंकवाद के खिलाफ अपनी कार्रवाई में कोई कसर नहीं छोड़ने वाला है।

दरअसल, कर्नाटक राज्य सरकार ने एम चिन्नास्वामी स्टेडियम को शर्तों के साथ आयोजन की मंजूरी दी है। जून 2025 में आरसीबी की ऐतिहासिक जीत के जश्न के दौरान स्टेडियम के बाहर मची भगदड़ में 11 प्रशंसकों की दुखद मौत हो गई थी। इस घटना के बाद सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठे थे। अब सरकार और प्रशासन की ओर से साफ कर दिया गया है कि स्टेडियम को सभी जरूरी सुरक्षा मानकों और दिशानिर्देशों को पूरा करना होगा, तभी उसे उद्घाटन मैच या बड़े मुकाबलों की मेजबानी की अनुमति दी जाएगी।आईपीएल 2026 से जुड़ी एक और बड़ी खबर मिनी ऑक्शन को लेकर है। इस सीजन के लिए छोटी नीलामी का आयोजन अबू धाबी में किया जा रहा है, जहां सभी 10 फ्रेंचाइजी अपनीअपनी टीमों को मजबूत करने के लिए बोली लगाएंगी।
आईपीएल 2026 की मिनी नीलामी 16 दिसंबर मंगलवार को आयोजित की जाएगी। भारतीय समयानुसार यह ऑक्शन दोपहर 2:30 बजे शुरू होगा। नीलामी का आयोजन एतिहाद स्टेडियम, अबू धाबी में किया जाएगा, जहां दुनियाभर की नजरें फ्रेंचाइजियों की रणनीति पर टिकी रहेंगी।इस मिनी ऑक्शन में कुल 77 खिलाड़ियों पर बोली लगेगी। सभी 10 टीमों के पास मिलाकर 237 करोड़ 55 लाख रुपये की राशि उपलब्ध है। सबसे दिलचस्प बात यह है कि तीन बार की चैंपियन कोलकाता नाइट राइडर्स KKR इस नीलामी में सबसे ज्यादा पर्स के साथ उतरने वाली टीम है, जिससे उनसे बड़े और चौंकाने वाले दांव की उम्मीद की जा रही है।वहीं दूसरी ओर, मुंबई इंडियंस MI की स्थिति इस ऑक्शन में थोड़ी कमजोर नजर आ रही है। मुंबई के पास केवल 2 करोड़ 75 लाख रुपये का पर्स बचा हुआ है। ऐसे में माना जा रहा है कि MI ज्यादातर अनकैप्ड खिलाड़ियों को उनके बेस प्राइस पर खरीदने की रणनीति अपना सकती है।
आईपीएल 2026 का यह सीजन कई मायनों में खास होने वाला है। एक तरफ आरसीबी अपने खिताब को डिफेंड करने उतरेगी, तो दूसरी ओर बाकी टीमें नए संयोजन और नई रणनीति के साथ मैदान में होंगी। ओपनिंग मैच की मेजबानी, सुरक्षा मानकों की चुनौती और मिनी ऑक्शन की चालेंये सभी पहलू इस सीजन को और भी रोमांचक बना रहे हैं।अब फैंस को सिर्फ आधिकारिक शेड्यूल और ओपनिंग मैच के वेन्यू के ऐलान का इंतजार है, जिसके बाद आईपीएल 2026 का क्रिकेटी माहौल पूरी तरह से गर्म हो जाएगा।

आयोग की संरचना कैसी होगी?
प्रस्तावित अधिष्ठान में एक अध्यक्ष, एक वरिष्ठ शिक्षाविद या विषय विशेषज्ञ, केंद्र सरकार का प्रतिनिधि और एक सचिव शामिल होंगे। इसके अलावा, आयोग के अंतर्गत तीन अलग-अलग परिषदें बनाई जाएंगी ताकि नियमन, मान्यता और मानक तय करने के काम आपस में टकराएं नहीं।
तीन परिषदों की भूमिका क्या होगी?
पहली है नियामक परिषद Regulatory Council । यह परिषद कॉलेजों और यूनिवर्सिटी के संचालन पर नजर रखेगी। यह सुनिश्चित करेगी कि संस्थान शिक्षा को केवल मुनाफे का जरिया न बनाएं, फंड का सही इस्तेमाल हो और छात्रों व शिक्षकों की शिकायतों का समाधान समय पर हो।
दूसरी है मान्यता परिषद Accreditation Council । इसका काम यह तय करना होगा कि कौन-सा संस्थान तय शैक्षणिक मानकों पर खरा उतरता है। कॉलेजों और विश्वविद्यालयों को मान्यता देना या वापस लेना इसी परिषद की जिम्मेदारी होगी। मान्यता से जुड़ी सभी जानकारियां सार्वजनिक की जाएंगी, ताकि पारदर्शिता बनी रहे।
तीसरी है मानक परिषद Standards Council। यह परिषद पढ़ाई के स्तर, सिलेबस, क्रेडिट ट्रांसफर सिस्टम और शिक्षकों की योग्यता से जुड़े मानक तय करेगी। इसका मकसद यह होगा कि छात्रों को एक संस्थान से दूसरे संस्थान में जाने में दिक्कत न हो और शिक्षा की गुणवत्ता समान बनी रहे।
किन संस्थानों पर लागू होगा यह कानून?
यह बिल सभी केंद्रीय और राज्य विश्वविद्यालयों, डीम्ड यूनिवर्सिटी, IIT, NIT, कॉलेजों, ऑनलाइन और दूरस्थ शिक्षा संस्थानों पर लागू होगा। हालांकि मेडिकल, कानून, फार्मेसी और नर्सिंग जैसे पेशेवर कोर्स सीधे इस कानून के दायरे में नहीं आएंगे, लेकिन उन्हें भी नए शैक्षणिक मानकों का पालन करना होगा।
केंद्र सरकार की भूमिका क्या होगी?
केंद्र सरकार इस अधिष्ठान को दिशा-निर्देश दे सकेगी, प्रमुख पदों पर नियुक्तियां करेगी और विदेशी विश्वविद्यालयों को भारत में काम करने की मंजूरी देगी। जरूरत पड़ने पर आयोग या उसकी परिषदों को भंग करने का अधिकार भी सरकार के पास रहेगा। साथ ही, आयोग को हर साल संसद और ऑडिट के सामने जवाबदेह होना होगा।
इससे क्या बदलाव और फायदे होंगे?
सरकार का दावा है कि इससे उच्च शिक्षा अधिक छात्र-केंद्रित बनेगी, नए कॉलेज और कोर्स खोलना आसान होगा और रोजगार से जुड़ी स्किल्स पर जोर दिया जाएगा। शिकायत निवारण प्रणाली मजबूत होगी और छोटे संस्थानों को भी गुणवत्ता सुधार का मौका मिलेगा।
लेकिन विवाद क्यों है?
आलोचकों का कहना है कि यह बिल कॉलेजों और विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता को कमजोर कर सकता है। उन्हें डर है कि शिक्षा पर केंद्र सरकार का नियंत्रण बढ़ेगा और अकादमिक फैसलों में शिक्षकों व छात्रों की भूमिका घट जाएगी। यह भी आशंका जताई जा रही है कि ग्रामीण और छोटे कॉलेज सख्त नियमों का पालन नहीं कर पाएंगे और बंद होने की कगार पर पहुंच सकते हैं।
विपक्ष की आपत्ति क्या है?
कांग्रेस, टीएमसी और वाम दलों ने इस बिल का विरोध किया है। उनका कहना है कि इतना बड़ा शिक्षा सुधार वाला बिल बिना पर्याप्त चर्चा के पेश किया गया। विपक्षी सांसदों ने इसे संयुक्त संसदीय समिति JPC को भेजने की मांग की थी, जिसे सरकार ने स्वीकार कर लिया है। अब इस बिल पर विस्तृत जांच और चर्चा होगी।

इन अटकलों पर प्रतिक्रिया देते हुए शशि थरूर ने चर्चित समाचार एजेंसी से बातचीत में साफ कहा कि उनकी तरफ से किसी भी तरह की नाराजगी या असंतोष नहीं है। रैली में शामिल न हो पाने के सवाल पर उन्होंने कहा मैं जरूर अटेंड करता क्यों नहीं करता? लेकिन उस दिन मैं विदेश में था। यह कार्यक्रम मैंने करीब छह महीने पहले तय किया था। थरूर ने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी गैरहाजिरी को पार्टी से दूरी या असहमति के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
जब उनसे सीधे तौर पर पूछा गया कि क्या कांग्रेस में सब कुछ ठीक है तो थरूर ने दो टूक जवाब दिया बिल्कुल ठीक है। मुझे यह कहने की जरूरत क्यों पड़े? मेरी तरफ से सब कुछ ठीक है। उनके इस बयान को कांग्रेस नेतृत्व के प्रति भरोसे और प्रतिबद्धता के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
इस बीच सोशल मीडिया मंच ‘एक्स पर एक यूजर द्वारा किए गए विश्लेषण ने भी राजनीतिक हलकों में चर्चा बटोरी। यूजर ने अपने लंबे पोस्ट में शशि थरूर और कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी के बीच कथित वैचारिक विरोधाभास की बात कही थी। पोस्ट में यह तर्क दिया गया था कि यह विरोधाभास दरअसल कांग्रेस पार्टी के भीतर मौजूद दो अलग-अलग वैचारिक प्रवृत्तियों को दर्शाता है।
यूजर के अनुसार समस्या थरूर और राहुल गांधी के सह-अस्तित्व में नहीं है बल्कि कांग्रेस की उस अक्षमता में है जिसमें पार्टी अलग-अलग विचारधाराओं को चुनने एकजुट करने और उन्हें व्यवस्थित तरीके से लागू करने में सफल नहीं हो पा रही है। इस पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए शशि थरूर ने इसे विचारशील विश्लेषण करार दिया।
थरूर ने लिखा इस विचारशील विश्लेषण के लिए धन्यवाद। कांग्रेस पार्टी में हमेशा एक से अधिक प्रवृत्तियां रही हैं। आपका आकलन निष्पक्ष है और वर्तमान वास्तविकता की एक निश्चित धारणा को प्रतिबिंबित करता है। उनके इस बयान से यह संकेत मिलता है कि वे पार्टी के भीतर वैचारिक विविधता को एक स्वाभाविक और ऐतिहासिक प्रक्रिया मानते हैं न कि टकराव का कारण।
गौरतलब है कि इससे पहले राहुल गांधी की अध्यक्षता में हुई कांग्रेस सांसदों की एक अहम बैठक में भी शशि थरूर शामिल नहीं हुए थे। इस पर भी सवाल उठे थे। हालांकि चर्चित सूत्रों के हवाले से बताया कि थरूर ने बैठक में शामिल न हो पाने की जानकारी पहले ही पार्टी को दे दी थी। सोशल मीडिया पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार उस समय वह कोलकाता में प्रभा खैतान फाउंडेशन द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में मौजूद थे।
कुल मिलाकर शशि थरूर के हालिया बयानों और स्पष्टीकरण से यह स्पष्ट होता है कि कांग्रेस में उनके और पार्टी नेतृत्व के बीच किसी बड़े टकराव की बात फिलहाल केवल अटकलों तक सीमित है। थरूर ने न सिर्फ अपनी गैरहाजिरी के कारण गिनाए बल्कि यह भी जताया कि पार्टी के भीतर विभिन्न विचारधाराओं का होना कांग्रेस की परंपरा का हिस्सा रहा है। ऐसे में उनके बयान कांग्रेस के भीतर एकता और संवाद के महत्व को रेखांकित करते हैं।

चार्जशीट में यह भी बताया गया है कि इस हमले की साजिश पाकिस्तान में रची गई थी और लश्कर-ए-तैयबा तथा के आतंकवादियों ने मिलकर इस हमले को अंजाम दिया। इसके अलावा पाकिस्तान के तीन मारे गए आतंकियों के नाम भी इसमें शामिल हैं जिनमें फैसल जट्ट उर्फ सुलेमान शाह हबीब ताहिर उर्फ जिब्रान और हमजा अफगानी का नाम शामिल है। ये तीनों आतंकवादी श्रीनगर के जंगलों में चलाए गए ऑपरेशन महादेव के दौरान भारतीय सेना के साथ मुठभेड़ में ढेर हो गए थे।
चार्जशीट में एनआईए ने भारतीय दंड संहिता के तहत आर्म्स एक्ट 1969 और यूएपीए 1967 की धारा 13 18 और 20 के तहत आरोप लगाए हैं। इसके अलावा एनआईए ने दो स्थानीय कश्मीरियों परवेज अहमद और बशीर अहमद को भी आरोपी बनाया है। इन दोनों को 22 जून को गिरफ्तार किया गया था। उन पर आतंकवादियों को पनाह देने और उन्हें मदद पहुंचाने का आरोप है। पूछताछ के दौरान इन दोनों ने यह भी स्वीकार किया कि पाकिस्तान के ये आतंकवादी लश्कर-ए-तैयबा के सदस्य थे।
एनआईए के मुताबिक आतंकवादियों को पनाह देने और उनकी मदद करने के आरोप में गिरफ्तार किए गए दोनों स्थानीय कश्मीरियों ने हमले में शामिल तीन पाकिस्तानी आतंकवादियों की पहचान भी की। इससे यह साबित होता है कि पाकिस्तान में बैठे आतंकवादी संगठनों ने इस हमले की साजिश रची थी और इसमें स्थानीय कश्मीरियों का भी सहयोग था।
चार्जशीट में यह भी उल्लेख किया गया कि हमले के बाद भारतीय सेना ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में स्थित आतंकवादी ठिकानों को तबाह किया। इसके बाद पाकिस्तान ने भारत पर हमला करना शुरू कर दिया लेकिन भारतीय सेना के मजबूत डिफेंस सिस्टम के सामने पाकिस्तान की कार्रवाइयां नाकाम हो गईं। अंत में पाकिस्तान को युद्धविराम की ओर कदम बढ़ाना पड़ा।
यह चार्जशीट आतंकवाद के खिलाफ भारत की दृढ़ नीति और पाकिस्तान द्वारा आतंकवादियों को पनाह देने की निरंतर कोशिशों को उजागर करती है। एनआईए द्वारा किए गए इस खुलासे से यह स्पष्ट हो गया है कि लश्कर-ए-तैयबा और TRF जैसे आतंकवादी संगठन भारत के खिलाफ लगातार साजिशें रच रहे हैं।
एनआईए की चार्जशीट से यह भी संदेश जाता है कि भारत आतंकवाद के खिलाफ अपनी लड़ाई में कोई कसर नहीं छोड़ने वाला है और पाकिस्तान के खिलाफ कड़ी कार्रवाई जारी रखेगा। इस मामले में आगे की जांच जारी है और आरोपी आतंकवादियों को पकड़ा जाने तक उनकी तलाश जारी रहेगी।

पंजाब सरकार के गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव आलोक शेखर द्वारा जारी अधिसूचना में कहा गया है कि राज्यपाल को यह घोषणा करते हुए प्रसन्नता हो रही है कि जिला अमृतसर का चारदीवारी क्षेत्र वॉल्ड सिटीजिला रूपनगर का श्री आनंदपुर साहिब नगर और जिला बठिंडा का तलवंडी साबो नगर अब पंजाब राज्य के पवित्र शहर घोषित किए जाते हैं। यह दर्जा मिलने के बाद इन इलाकों में कई तरह की गतिविधियों पर नियंत्रण लागू होगा।सरकार ने सबसे पहले आबकारी विभाग को निर्देश जारी किए हैं। विभाग को कहा गया है कि इन तीनों पवित्र शहरों की नगरपालिका सीमाओं के भीतर शराब और उससे जुड़े सभी उत्पादों की बिक्री और उपयोग पर प्रतिबंध लगाने के आदेश तुरंत जारी किए जाएं। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इन क्षेत्रों में मौजूद शराब के ठेकों को बंद करने या उन्हें शहर की सीमा से बाहर स्थानांतरित करने को लेकर भी कार्रवाई की जाएगी।
इसके अलावा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग को भी इस फैसले में महत्वपूर्ण भूमिका दी गई है। विभाग से अनुरोध किया गया है कि इन पवित्र शहरों में सिगरेट तंबाकू और अन्य नशीले पदार्थों की बिक्री व उपयोग पर प्रतिबंध लगाने के लिए आवश्यक आदेश जारी किए जाएं। सरकार का मानना है कि इससे न सिर्फ धार्मिक वातावरण शुद्ध रहेगा बल्कि लोगों के स्वास्थ्य पर भी सकारात्मक असर पड़ेगा।सरकार ने पशुपालन विभाग को भी स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि अमृतसर की वॉल्ड सिटी श्री आनंदपुर साहिब और तलवंडी साबो की नगरपालिका सीमाओं के भीतर मांस और उससे जुड़े उत्पादों की बिक्री व उपयोग पर रोक लगाने के आदेश जारी किए जाएं। इस कदम को खास तौर पर धार्मिक भावनाओं के सम्मान और पवित्र स्थलों की गरिमा बनाए रखने से जोड़कर देखा जा रहा है।
इस फैसले को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए स्थानीय सरकार विभाग को भी अधिसूचना भेजी गई है। साथ ही अमृतसर रूपनगर और बठिंडा के उपायुक्तों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने-अपने जिलों में इस निर्णय को जमीन पर उतारने के लिए जरूरी कदम उठाएं। उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही स्थानीय प्रशासन विस्तृत दिशा-निर्देश और नियमावली जारी करेगा।सरकार के इस फैसले को सिख धर्म के प्रमुख धार्मिक स्थलों की पवित्रता से जोड़कर देखा जा रहा है। अमृतसर सिख धर्म का सबसे बड़ा केंद्र है जहां श्री हरमंदिर साहिब स्थित है। वहीं श्री आनंदपुर साहिब सिख इतिहास में खालसा पंथ की स्थापना का साक्षी रहा है जबकि तलवंडी साबो जिसे श्री दमदमा साहिब भी कहा जाता है सिखों के पांच तख्तों में से एक है। पंजाब सरकार का कहना है कि इन ऐतिहासिक और धार्मिक शहरों की आध्यात्मिक गरिमा बनाए रखने और श्रद्धालुओं की भावनाओं का सम्मान करने के लिए यह फैसला समय की जरूरत था।