Author: bharati

  • पाकिस्तान में बढ़ता फर्जी शादियों का ट्रेंड, युवाओं के लिए सिर्फ मनोरंजन का जरिया..

    पाकिस्तान में बढ़ता फर्जी शादियों का ट्रेंड, युवाओं के लिए सिर्फ मनोरंजन का जरिया..


    नई दिल्ली /पाकिस्तान में हाल ही में एक नया ट्रेंड उभरकर सामने आया है-फर्जी शादियां। इन शादियों में हिस्सा लेने वाले युवा केवल मनोरंजन और सामाजिक अनुभव के लिए शादी करते हैं। इसमें कोई भी पारिवारिक दबाव या जीवन भर की जिम्मेदारी नहीं होती। यह ट्रेंड खासकर शहरों और विश्वविद्यालयों में तेजी से लोकप्रिय हो रहा है।

    शादी दक्षिण एशियाई समाज में हमेशा से एक बड़ा उत्सव रही है। भारत और पाकिस्तान में शादी का आयोजन कई दिनों तक चलता है, जिसमें हल्दी, मेहंदी, संगीत और विदाई जैसी रस्में शामिल होती हैं। पारंपरिक शादियों में दूल्हा-दुल्हन के अलावा परिवार और समाज की जिम्मेदारियां भी बड़ी होती हैं। लेकिन फर्जी शादियों में इसका उल्टा माहौल होता है-युवाओं को केवल अनुभव और मनोरंजन का अवसर मिलता है।पाकिस्तान में इस ट्रेंड की शुरुआत लाहौर यूनिवर्सिटी ऑफ मैनेजमेंट साइंसेज से हुई। वहां दो छात्राओं ने एक फर्जी शादी का आयोजन किया, जिसमें शादी की सारी रस्में और सजावट वही थी जो असली शादी में होती हैं। सोशल मीडिया पर इस शादी के वीडियो वायरल होने के बाद पूरे देश में ध्यान खींचा गया। युवाओं में इसे लेकर उत्सुकता और उत्साह बढ़ा।

    हालांकि, इस घटना ने विरोध भी खड़ा किया। कुछ लोगों ने इसे समलैंगिक विवाह समझकर आपत्ति जताई। वीडियो वायरल होने के बाद दुल्हन बनने वाली छात्रा को ऑनलाइन ट्रोलिंग और आलोचना का सामना करना पड़ा। यूनिवर्सिटी प्रशासन ने छात्रों की सुरक्षा और निजता सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाए। सबसे पहले वीडियो और फोटो को ऑनलाइन पोस्ट करने पर रोक लगा दी गई। साथ ही केवल उन लोगों को ही इस आयोजन में आने की अनुमति दी जाने लगी, जो इसे केवल मनोरंजन के रूप में लेते हों।

    फर्जी शादी में दुल्हन बनने वाली छात्रा के परिवार को भी काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। इसके विपरीत, दूल्हा बनी छात्रा का परिवार इस पूरे मामले में अपेक्षाकृत शांत रहा। इस अनुभव के बावजूद, इस ट्रेंड ने युवाओं में लोकप्रियता हासिल की और कई समूहों ने इसे व्यवस्थित रूप से आयोजित करना शुरू कर दिया।एक ऐसा ही समूहहुनर क्रिएटिव मार्केट है, जिसकी संस्थापक रिदा इमरान ने महिलाओं के लिए विशेष फर्जी शादियों और मेहंदी पार्टियों का आयोजन किया। इसमें कारीगरों, कलाकारों, कंटेंट क्रिएटर्स और इवेंट मैनेजर्स ने हिस्सा लिया। इस तरह की घटनाएं खासतौर पर उन लोगों के लिए वरदान साबित हुईं जो पारंपरिक शादियों की थकावट और सामाजिक दबाव के कारण शादी का असली आनंद नहीं ले पाते।

    फर्जी शादियों का यह ट्रेंड युवा पीढ़ी में खुद को व्यक्त करने और सामाजिक अनुभव का मज़ा लेने का एक नया तरीका बन गया है। इसमें विवाह के वास्तविक दायित्वों की कमी होने के बावजूद लोग शादी की रस्मों, उत्सव और उत्साह का आनंद ले सकते हैं।पाकिस्तान में फर्जी शादियों का यह चलन यह दिखाता है कि समाज में नई पीढ़ी पारंपरिक धारणाओं और सामाजिक दबावों से हटकर, स्वतंत्र और रचनात्मक तरीके से अपनी खुशियों का अनुभव करना चाहती है। यह केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं बल्कि युवाओं के लिए सामाजिक और सांस्कृतिक प्रयोग का एक नया रूप बन चुका है।

  • हिमंत सरमा ने ममता बनर्जी को ठहराया मेसी के कोलकाता इवेंट में भगदड़ के लिए जिम्मेदारकहा गिरफ्तार हो राज्य के मुख्यमंत्री और पुलिस आयुक्त

    हिमंत सरमा ने ममता बनर्जी को ठहराया मेसी के कोलकाता इवेंट में भगदड़ के लिए जिम्मेदारकहा गिरफ्तार हो राज्य के मुख्यमंत्री और पुलिस आयुक्त


    नई दिल्ली । लियोनेल मेसी के भारत दौरे के पहले दिन कोलकाता में आयोजित उनके कार्यक्रम के दौरान मची भगदड़ ने राज्य की कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस घटना के बाद असम के मुख्यमंत्री हिमंत सरमा ने ममता बनर्जी की सरकार पर हमला बोला है। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में वीआईपी कल्चर के चलते इस कार्यक्रम का संचालन सही तरीके से नहीं हो सकाजिससे अफरा-तफरी मच गई। सरमा ने यहां तक कहा कि राज्य के मुख्यमंत्रीगृहमंत्री और पुलिस आयुक्त को गिरफ्तार किया जाना चाहिए।

    सरमा ने आरोप लगाया कि बंगाल में ऐसे बड़े सार्वजनिक कार्यक्रमों के दौरान भीड़ प्रबंधन की भारी नाकामी नजर आती है। उन्होंने कहा”दूसरे राज्यों में भीड़ को शांतिपूर्वक संभाला जाता हैलेकिन बंगाल में कुछ भी सुनिश्चित नहीं होता। यहां वीआईपी कल्चर का प्रभाव बहुत ज्यादा हैजो कार्यक्रमों को बर्बाद कर देता है।

    उनके अनुसारगुवाहाटी में गायक जुबिन गर्ग के निधन के बाद तीन दिनों तक 10 लाख लोग सड़कों पर थेलेकिन कोई हादसा नहीं हुआ। वहींमुंबई में विश्व कप फाइनल भी शांति से संपन्न हुआ था। सरमा ने कहा”बंगाल में कोई बड़ी घटना कभी भी घट सकती हैक्योंकि यहां हर चीज पर वीआईपी कल्चर हावी है।

    कोलकाता के सॉल्ट लेक स्टेडियम में हुए इस कार्यक्रम में हजारों प्रशंसक अपने पसंदीदा फुटबॉल आइकॉन मेसी की एक झलक पाने पहुंचे थे। लेकिन केवल 15 मिनट के कार्यक्रम के बाद मेसी वहां से चले गएजिससे दर्शकों में नाराजगी फैल गई। गुस्साए प्रशंसकों ने आयोजकों पर आरोप लगाते हुए पानी की बोतलें फेंकी। आयोजकों का कहना था कि कार्यक्रम लगभग 45 मिनट तक चलने वाला थालेकिन मेसी केवल 15 मिनट के बाद ही चले गए।

    इसके बाद प्रशंसकों ने आरोप लगाया कि कार्यक्रम के दौरान टीएमसी नेताओं और वीआईपी लोगों के परिवारों ने मेसी को घेरे रखाजिससे आम दर्शकों को किसी भी प्रकार का सामान्य अनुभव नहीं मिला।हिमंत सरमा ने इस घटना की जिम्मेदारी राज्य सरकार की ठहराते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रमों का आयोजन सही ढंग से किया जाताअगर वहां पर कानून और व्यवस्था को बेहतर तरीके से लागू किया जाता।

  • AIIMS की सबसे बड़ी स्टडी: कोविड वैक्सीन और युवाओं की अचानक मौत में 'कोई संबंध नहीं'

    AIIMS की सबसे बड़ी स्टडी: कोविड वैक्सीन और युवाओं की अचानक मौत में 'कोई संबंध नहीं'


    नई दिल्ली/ दिल्ली स्थित AIIMS ऑल इंडिया इंस्टिट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंसेज की हालिया स्टडी में यह पुष्टि हुई है कि कोरोना वायरस के टीकाकरण और युवाओं 18-45 साल में अचानक मौतों के बीच कोई वैज्ञानिक संबंध नहीं है। यह अध्ययन फोरेंसिक और पैथोलॉजिकल जांच पर आधारित है और कोविड वैक्सीन की सुरक्षा को दोहराता है। स्टडी में एक वर्ष के दौरान अचानक मौत के 2,214 मामलों का अध्ययन किया गया, जिनमें से 180 मामलों को अचानक मौत माना गया। इसमें दुर्घटना, आत्महत्या, हत्या और ड्रग्स से मौत के केस बाहर रखे गए। हर मामले में परिवार से बातचीत करके मृतक की पुरानी बीमारियों, कोविड संक्रमण का इतिहास, वैक्सीनेशन स्टेटस, धूम्रपान-शराब की आदतें जैसी जानकारियां जुटाई गईं। अध्ययन में मौखिक ऑटोप्सी, पोस्ट-मॉर्टम इमेजिंग, पारंपरिक ऑटोप्सी और हिस्टोपैथोलॉजिकल जांच शामिल थी। शोध टीम में फोरेंसिक विशेषज्ञ, पैथोलॉजिस्ट, रेडियोलॉजिस्ट और क्लिनिशियन शामिल थे।

    मुख्य निष्कर्ष:

    कोविड वैक्सीन सुरक्षित: टीकाकरण की स्थिति और अचानक मौतों के बीच कोई सांख्यिकीय संबंध नहीं पाया गया। हृदय रोग प्रमुख कारण: युवाओं में अचानक मौत का सबसे आम कारण अस्पष्ट हृदय रोग रहा। इसके बाद श्वसन प्रणाली और अन्य गैर-हृदय संबंधी कारण जिम्मेदार थे। युवाओं और बड़ों की तुलना: 18-45 साल के युवाओं और 46-65 साल के बड़ों में कोविड-19 का इतिहास और टीकाकरण लगभग समान पाया गया। सुरक्षा और जागरूकता: डॉक्टरों ने कहा कि अचानक मौतों के पीछे छिपे हृदय रोग और जीवनशैली संबंधी कारण ज़्यादातर जिम्मेदार हैं। इसलिए समय पर जांच, स्वस्थ जीवनशैली और इलाज जरूरी है। AIIMS के प्रोफेसर डॉ. सुधीर अरावा ने कहा, झूठे दावों और अफवाहों के बीच यह स्टडी बहुत जरूरी थी। इससे साबित होता है कि युवाओं में अचानक मौतें कोविड-19 टीकाकरण से संबंधित नहीं हैं। इस अध्ययन के नतीजे दुनिया भर के वैज्ञानिक अध्ययनों से मेल खाते हैं, जो कोविड-19 वैक्सीन को सुरक्षित और प्रभावी बताते हैं।

    स्टडी की अवधि और तरीका:

    समय: मई 2023 से अप्रैल 2024 कुल मामले: 2,214 लाशों में से 180 अचानक मौत छानबीन: पारिवारिक जानकारी, स्वास्थ्य इतिहास, ऑटोप्सी, पोस्ट-मॉर्टम इमेजिंग निष्कर्ष: टीकाकरण और अचानक मौत में कोई संबंध नहीं युवाओं में अचानक मौतें मुख्य रूप से अस्पष्ट हृदय रोगों और जीवनशैली से संबंधित कारणों से होती हैं, न कि कोविड-19 वैक्सीन से। विशेषज्ञों का कहना है कि जल्दी जांच, सही जीवनशैली और समय पर इलाज से इन मौतों को रोका जा सकता है।

  • गोवा अग्निकांड: लूथरा ब्रदर्स को जल्द लाया जा सकता है भारतथाइलैंड से प्रत्यर्पण प्रक्रिया शुरू

    गोवा अग्निकांड: लूथरा ब्रदर्स को जल्द लाया जा सकता है भारतथाइलैंड से प्रत्यर्पण प्रक्रिया शुरू


    नई दिल्ली । गोवा के बर्च बाय रोमियो लेन नाइटक्लब में 6 दिसंबर को हुए भयंकर अग्निकांड में कम से कम 25 लोग मारे गए थेजिनमें क्लब के कई कर्मचारी भी शामिल थे। इस हादसे के बाद नाइटक्लब के मालिक सौरभ और गौरव लूथरादोनों भाईथाइलैंड के फुकेट भाग गए थे। गोवा पुलिस ने उनकी तलाश शुरू कर दी थीऔर अब खबर है कि उन्हें अगले 24 से 48 घंटे में भारत लाया जा सकता है।

    सरकारी सूत्रों के अनुसारलूथरा भाइयों के प्रत्यर्पण की प्रक्रिया तेज़ी से चल रही हैऔर जल्द ही उन्हें थाइलैंड से भारत लाया जा सकता है। विदेश मंत्रालय ने उनके पासपोर्ट को कैंसल कर दिया है और इंटरपोल ने उनके खिलाफ ब्लू कॉर्नर नोटिस जारी किया है। इसके अलावादिल्ली की एक अदालत ने उनकी जमानत याचिका भी खारिज कर दी थीजिसमें उन्होंने यह दावा किया था कि गोवा में उनकी जान को खतरा है और उन्हें पीट-पीट कर मार डाला जाएगा।

    अग्निकांड के बाद गोवा पुलिस ने क्लब के पांच कर्मचारियों और प्रबंधकों को गिरफ्तार किया है। इन कर्मचारियों से पूछताछ की जा रही हैजबकि सौरभ और गौरव लूथरा की गिरफ्तारी के लिए कार्यवाही चल रही है। जांच समितिजो इस घटना की गहन जांच कर रही हैने गोवा के अन्य प्रमुख व्यक्तियोंजैसे क्लब के जमीन के मालिक प्रदीप घाडी अमोणकर और आरपोरा-नागोवा के सरपंच रोशन रेडकर से भी पूछताछ की है। अमोणकर को गहन पूछताछ के लिए शनिवार देर रात तक तलब किया गया था।
    सरकार की ओर से लूथरा भाइयों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा रही है। उनके प्रत्यर्पण के बाद यह स्पष्ट होगा कि इस भीषण अग्निकांड के लिए जिम्मेदार व्यक्तियों को न्याय दिलाया जा सके।

  • इसरो के अगले साल के सात प्रमुख मिशन: गगनयान से लेकर क्वांटम-की वितरण तक

    इसरो के अगले साल के सात प्रमुख मिशन: गगनयान से लेकर क्वांटम-की वितरण तक


    नई दिल्ली । भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन इसरो ने अगले साल मार्च तक सात महत्वपूर्ण अंतरिक्ष मिशनों की योजना बनाई है। इनमें कई नई प्रौद्योगिकियां और भारतीय अंतरिक्ष यात्रा के प्रमुख मील के पत्थर शामिल हैं। इनमें से एक प्रमुख मिशन 2026 में होने वाला गगनयान का पहला मानवरहित अभियान होगाजो भारत के मानवयुक्त अंतरिक्ष अभियान की शुरुआत का संकेत देगा। इसके अलावाइसरो द्वारा स्वदेशी रूप से निर्मित इलेक्ट्रिक प्रणोदन प्रणालियों और क्वांटम-की वितरण जैसी अत्याधुनिक तकनीकों का परीक्षण भी किया जाएगा।
    इसरो के मुताबिकपहले मिशन की शुरुआत अगले हफ्ते की संभावना हैजिसमें भारत का सबसे भारी रॉकेटएलवीएम3‘ब्लूबर्ड-6’ संचार उपग्रह को अंतरिक्ष में स्थापित करेगा। यह रॉकेट इसरो की न्यू स्पेस इंडिया लिमिटेड और अमेरिकी कंपनी एएसटी स्पेसमोबाइल के बीच एक वाणिज्यिक करार के तहत उड़ान भरेगा। एलवीएम3जिसे ह्यूमन रेटेड माना जाता है2026 की शुरुआत में फिर से उड़ान भरेगा और गगनयान के तहत भारत के पहले मानवयुक्त अंतरिक्ष मिशन का पहला मानवरहित यानव्योममित्रलेकर अंतरिक्ष की कक्षा में प्रवेश करेगा।
    गगनयान मिशन के तहत भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को 2027 में पृथ्वी की निचली कक्षा में भेजे जाने की योजना है। इसके पहलेअगले साल एक और मानवरहित मिशन लॉन्च किया जाएगाजो गगनयान के विभिन्न पहलुओं का आकलन करेगा। इस मिशन में ह्यूमन रेटेड प्रक्षेपण वाहन के वायुगतिकीय पैमानेकक्षीय मॉड्यूल के प्रदर्शन और चालक दल मॉड्यूल के पुनः प्रवेश एवं पुनर्प्राप्ति की प्रक्रिया को परखा जाएगा।
    इसके अलावाइसरो द्वारा पहली बार उद्योग जगत द्वारा निर्मित ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान पीएसएलवी का प्रक्षेपण भी किया जाएगा। इस मिशन में ओशनसैट उपग्रह को कक्षा में स्थापित किया जाएगासाथ ही भारत-मॉरीशस संयुक्त उपग्रह और ध्रुव स्पेस का लीप-2 उपग्रह भी भेजा जाएगा। पीएसएलवी रॉकेट में एक अन्य महत्वपूर्ण मिशनईओएस-एन1और 18 छोटे उपग्रहों को कक्षा में भेजने की योजना है।
    इसरो के अनुसार2026 में और भी महत्वपूर्ण मिशन हो सकते हैंजिनमें क्वांटम-की वितरण और स्वदेशी यात्रा-तरंग नली प्रवर्धक जैसी नई प्रौद्योगिकियों का प्रदर्शन शामिल है। इसरो द्वारा किए गए प्रौद्योगिकी हस्तांतरण समझौते के तहत एचएएल-एलएंडटी कंसोर्टियम को पांच पीएसएलवी रॉकेट के निर्माण का ठेका भी दिया गया हैजिससे उपग्रहों के वाणिज्यिक प्रक्षेपण को बढ़ावा मिलेगा।
    इसरो के इन मिशनों से न केवल भारत की अंतरिक्ष यात्रा की दिशा स्पष्ट होगीबल्कि ये वैश्विक अंतरिक्ष उद्योग में भारत की ताकत को भी प्रमाणित करेंगे। इसरो की ये योजनाएं आने वाले वर्षों में भारतीय अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देंगी।
  • यूपी में कफ सिरप रैकेट का बड़ा खुलासा: 700 से अधिक फर्जी फर्मों से अरबों की कमाई, ईडी ने कहा-ऐसा फर्जीवाड़ा पहले कभी नहीं देखा

    यूपी में कफ सिरप रैकेट का बड़ा खुलासा: 700 से अधिक फर्जी फर्मों से अरबों की कमाई, ईडी ने कहा-ऐसा फर्जीवाड़ा पहले कभी नहीं देखा


    नई दिल्ली।उत्तर प्रदेश/ प्रवर्तन निदेशालय ईडी ने उत्तर प्रदेश में कफ सिरप रैकेट को लेकर एक बड़ा खुलासा किया है। ईडी के अनुसार-इस रैकेट में 700 से अधिक फर्जी फर्मों के जरिए अरबों रुपये की कमाई की गई-और यह यूपी में अब तक का सबसे बड़ा फर्जीवाड़ा माना जा रहा है। जांच में यह सामने आया है कि अधिकांश फर्में केवल कागजों में ही मौजूद थीं और इनके अधिकृत अधिकारी भी केवल दस्तावेजों में थे। ईडी की टीम ने उत्तर प्रदेश-गुजरात और झारखंड में 25 से अधिक ठिकानों पर छापेमारी की। इन तीन प्रदेशों में 40 घंटे से अधिक की जांच में रैकेट का पूरा नेटवर्क उजागर हुआ। शुरुआती साक्ष्यों के अनुसार-220 संचालकों के नाम से यह 700 से अधिक फर्जी फर्में बनाई गईं। इन फर्मों के माध्यम से अरबों रुपये की कमाई हुई-जबकि कई कंपनियों के अधिकारी इस अवैध कारोबार की जानकारी रखते हुए भी चुप्पी साधे रहे।

    ईडी ने मास्टरमाइंड्स पर शिकंजा कसा

    ईडी ने रैकेट के मुख्य आरोपियों-शुभम जायसवाल-पूर्व सांसद के करीबी आलोक सिंह और अमित टाटा-के ठिकानों पर छापेमारी कर महत्वपूर्ण साक्ष्य जुटाए। एसटीएफ की पिछले साल की जांच के दौरान ये आरोपी कुछ हद तक सुरक्षित महसूस कर रहे थे-लेकिन ईडी की कार्रवाई ने उनके खेमे में खलबली मचा दी। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि शुभम जायसवाल के पिता-भोला प्रसाद जायसवाल-के खातों में भी संदिग्ध लेन-देन हुए हैं। दुबई में छिपे मास्टरमाइंड्स के अलावा इन खातों और फर्मों के माध्यम से अन्य नाम भी जांच में सामने आएंगे। रांची और धनबाद में भी कुछ फर्मों से रकम का आदान-प्रदान हुआ है-जिसकी गहराई से जांच जारी है।

    फर्जीवाड़े की तकनीक और प्रणाली पर सवाल
    ईडी के अधिकारियों का कहना है कि जिस तरह से फर्जीवाड़ा किया गया-उसने पूरे सिस्टम की पोल खोल दी। फेंसेडिल सिरप बनाने वाली कंपनी के कई अधिकारियों ने रैकेट की जानकारी होने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की। फर्जी फर्मों और खातों के माध्यम से यह कारोबार पूरी तरह से कागजों तक सीमित नहीं रहा अरबों रुपये का लेन-देन हुआ और धन शुद्धिकरण का खेल खेला गया।

    आगे की कार्रवाई

    ईडी ने कहा है कि वे अब इन फर्जी फर्मों और संबंधित संपत्तियों को जब्त करने की कार्रवाई शुरू करेंगे। इसके अलावा-जीएसटी विभाग से फर्मों की सूची भी प्राप्त की जाएगी-जिससे जांच का दायरा और बढ़ेगा। अधिकारियों का कहना है कि अभी कई और फर्जी फर्में और संदिग्ध नाम सामने आने बाकी हैं।उत्तर प्रदेश में कफ सिरप रैकेट का यह खुलासा न केवल अवैध कारोबार की जटिलता को दर्शाता है-बल्कि प्रशासनिक और कानूनी सिस्टम की कमजोरी को भी उजागर करता है। ईडी की इस कार्रवाई से उम्मीद की जा रही है कि आने वाले समय में इस रैकेट के सभी मुख्य आरोपियों पर कठोर कदम उठाए जाएंगे और अवैध कमाई की जाँच पूरी की जाएगी।

  • सर्दियों में हनीमून के लिए भारत की सबसे खूबसूरत और रोमांटिक जगहें, अभी करें बुकिंग

    सर्दियों में हनीमून के लिए भारत की सबसे खूबसूरत और रोमांटिक जगहें, अभी करें बुकिंग

    नई दिल्ली  शादी का सीजन और बैंड-बाजा-बरात का माहौल हो-तो नए जोड़ों के लिए हनीमून प्लान करना सबसे रोमांटिक अनुभव बन जाता है। सर्दियों में भारत के कई ऐसे खूबसूरत हनीमून डेस्टिनेशन हैं-जहां आप अपने पार्टनर के साथ यादगार पल बिता सकते हैं। यहाँ का मौसम, प्राकृतिक सुंदरता और रोमांटिक माहौल आपके हनीमून को और भी खास बना देंगेनई दिल्ली
    1. जम्मू और कश्मीर – बर्फ से ढकी रोमांस की दुनिया
    सर्दियों में हनीमून के लिए अगर आप ठंडी और बर्फ से ढकी जगहों को पसंद करते हैं तो जम्मू और कश्मीर परफेक्ट है। यहाँ आप गुलमर्ग, पहलगाम, सोनमर्ग, पत्नीतॉप जैसी जगहों पर जा सकते हैं। बर्फीले पहाड़ और खूबसूरत घाटियां आपका रोमांस और बढ़ा देंगी। अगर आप धार्मिक यात्रा भी पसंद करते हैं तो वैष्णो देवी मंदिर की यात्रा भी रोमांचक अनुभव देगी।

    2. जैसलमेर  -गिस्तानी रोमांस और सांस्कृतिक अनुभव

    अगर आपको ज्यादा ठंड पसंद नहीं है और आप कुछ अलग चाहते हैं तो राजस्थान का जैसलमेर अच्छा विकल्प है। यहाँ आप रेगिस्तानी सफारी का मज़ा ले सकते हैं और सुनहरी हवेलियों, किलों और ऐतिहासिक जगहों को देख सकते हैं। शाम के समय रेगिस्तान में सूरज ढलते हुए सुनहरा नजारा और रात में स्टार गेजिंग आपके हनीमून को रोमांचक बना देंगे।

    3. ऊटी, तमिलनाडु – हरियाली और पहाड़ी रोमांस
    हरियाली और ठंडी हवा के बीच अगर आप शांत और रोमांटिक पल बिताना चाहते हैं तो ऊटी आपके लिए सही है। नीलगिरी पहाड़ों के बीच बसे ऊटी में आप ऊटी लेक, रोज गार्डन, नीलगिरी माउंटेन रेलवे और पास के कुन्नूर घूम सकते हैं। यहाँ का मौसम और प्राकृतिक सुंदरता आपके हनीमून को यादगार बना देगा।

    4. दार्जिलिंग, पश्चिम बंगाल – चाय बागानों और पहाड़ियों का नजारा
    अगर आप अपने हनीमून को और भी रंगीन बनाना चाहते हैं तो दार्जिलिंग एक शानदार विकल्प है। यहाँ चाय के बागान, देवदार के जंगल और रंग-बिरंगे नदियों का संगम आपका मन मोह लेंगे। आप माउंट कैनिंग और टाइगर हिल जैसी जगहों की सैर कर सकते हैं, जहाँ से सूर्योदय का दृश्य बेहद रोमांटिक लगता है।

    हनीमून के लिए टिप्स

    बुकिंग जल्दी करें: सर्दियों में हनीमून डेस्टिनेशन जल्दी भर जाते हैं, इसलिए पहले से बुकिंग कर लें।
    बजट का ध्यान रखें: चाहे आप लग्जरी होटल लें या बजट में रहें, हर जगह रोमांस का अनुभव शानदार रहेगा। सही मौसम का चुनाव: ठंडी जगहों के लिए गर्म कपड़े साथ रखें और हल्की ठंडी जगहों के लिए हल्के कपड़े पर्याप्त हैं।सर्दियों में हनीमून के लिए भारत के ये डेस्टिनेशन नए जोड़ों के लिए परफेक्ट हैं। चाहे बर्फीले पहाड़ हों, रेगिस्तान की सुनहरी धूप, हरियाली से भरे हिल स्टेशन हों या चाय के बागानों वाली पहाड़ियों का रोमांस, हर जगह अपने खास अनुभव के लिए यादगार बन सकती है। अपने हनीमून की योजना अभी बनाएं और अपने जीवन के सबसे रोमांटिक पलों का आनंद लें।

  • मनरेगा की जगह अब आएगा 'G Ram G'125 दिन रोजगार की गारंटी वाला नया बिल संसद में पेश होगाBJP ने जारी किया व्हिप

    मनरेगा की जगह अब आएगा 'G Ram G'125 दिन रोजगार की गारंटी वाला नया बिल संसद में पेश होगाBJP ने जारी किया व्हिप


    नई दिल्ली । केंद्र सरकार ने ग्रामीण रोजगार प्रणाली में एक बड़ा बदलाव करने की योजना बनाई है। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम मनरेगा के स्थान पर एक नया विधेयक लाने की तैयारी हैजिसे ‘विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन ग्रामीण 2025’ नाम दिया गया है। इस विधेयक को संक्षेप में VB-G RAM G कहा जाएगा। इस नए बिल का उद्देश्य ग्रामीण इलाकों में रोजगार और आजीविका के लिए एक नया और अधिक मजबूत ढांचा तैयार करना हैजो गरीब और पिछड़े समुदायों के लिए जीवन की गुणवत्ता में सुधार ला सके।

    मनरेगा की जगह VB-G RAM G

    मनरेगा महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम को ग्रामीण भारत में रोजगार की स्थिरता देने वाला एक महत्वपूर्ण कानून माना जाता है। यह कानून ग्रामीण इलाकों के बेरोजगारों को कम से कम 100 दिन का रोजगार मुहैया कराता है। हालांकियह योजना कई मायनों में विफल रही है और सरकार ने अब इसे बदलने का निर्णय लिया है। नए विधेयक का मकसद रोजगार की गारंटी को बढ़ाकर 125 दिनों तक करना है और इसके जरिए ग्रामीण इलाकों में नई रोजगार योजनाओं को लागू करना है।

    क्या है VB-G RAM G का उद्देश्य

    ‘VB-G RAM G’ विधेयक का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ाना और जीवन यापन को बेहतर बनाना है। यह विधेयक न केवल रोजगार की गारंटी देगाबल्कि इससे ग्रामीण इलाकों में रोजगार के नए अवसर और स्वरोजगार के विकल्प भी पैदा होंगे। इसके अलावायह योजनाएं ग्रामीण बुनियादी ढांचे में सुधार करनेग्रामीण शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ावा देने और महिलाओं तथा युवा वर्ग को रोजगार में अधिक शामिल करने पर भी ध्यान केंद्रित करेंगी।

    125 दिन रोजगार की गारंटी

    VB-G RAM G के तहतसरकार अब ग्रामीण क्षेत्रों में 125 दिन का रोजगार देने का वादा कर रही है। इससे पहले मनरेगा में 100 दिन तक रोजगार की गारंटी दी जाती थी। यह कदम सरकार द्वारा ग्रामीण इलाकों में स्थिर रोजगार और आर्थिक वृद्धि को बढ़ावा देने की दिशा में उठाया गया है। इसके तहत ग्रामीण कामकाजी वर्ग को लंबे समय तक रोजगार प्राप्त होगाजिससे उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में मदद मिलेगी।

    BJP ने जारी किया व्हिप

    सूत्रों के मुताबिककेंद्र सरकार ने अपने विधायकों और सांसदों को इस विधेयक के पक्ष में मतदान करने के लिए व्हिप जारी किया है। भाजपा ने सुनिश्चित किया है कि इस विधेयक के समर्थन में पूरी पार्टी एकजुट रहेताकि इसे संसद में जल्दी से पास किया जा सके। पार्टी का मानना है कि यह नया विधेयक ग्रामीण विकास की दिशा में एक बड़ा कदम है और इससे लाखों लोगों को रोजगार मिलेगा।

    नए विधेयक की संभावित विशेषताएं

    125 दिन रोजगार की गारंटी: यह मनरेगा से एक कदम आगे होगाजहां ग्रामीण श्रमिकों को 125 दिन तक काम मिल सकेगा। स्वरोजगार को बढ़ावा: इस विधेयक में स्वरोजगार के अवसरों को बढ़ावा देने के लिए नई योजनाएं बनाई जाएंगी। ग्रामीण बुनियादी ढांचे में सुधार: इसमें ग्रामीण क्षेत्रों के लिए बुनियादी ढांचे का विकास करने का भी प्रस्ताव हैजिससे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। महिलाओं और युवाओं को प्राथमिकता: महिलाओं और युवाओं के लिए विशेष रोजगार अवसर दिए जाएंगे। नई परियोजनाओं की शुरुआत: ग्रामीण विकासजल संरक्षणशिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के लिए नई परियोजनाएं शुरू की जाएंगी।

    क्या होगा मनरेगा के स्थान पर

    मनरेगा को पूरी तरह से खत्म नहीं किया जाएगाबल्कि इसे नए विधेयक के तहत अपडेट किया जाएगा। जहां मनरेगा में मुख्य रूप से फिजिकल कामों पर ध्यान केंद्रित किया गया थावहीं VB-G RAM G का उद्देश्य रोजगार के अवसरों को और विस्तारित करना हैताकि अधिक से अधिक लोगों को फायदा हो सके।

    आखिरकारइस विधेयक का क्या असर होगा

    ‘VB-G RAM G’ विधेयक के लागू होने से यह उम्मीद की जा रही है कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार की स्थिरता में सुधार होगा और श्रमिकों को अधिक काम मिलेगा। इससे न केवल गांवों में आर्थिक सुधार होगाबल्कि यह राष्ट्रीय विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है। यह कदम केंद्र सरकार द्वारा ग्रामीण इलाकों में रोजगार की गारंटी देने के लिए उठाया गया एक बड़ा कदम हैऔर यह देश के किसानों और श्रमिकों के लिए बहुत महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। हालांकिइसे लेकर विपक्ष में विभिन्न विचार हो सकते हैंलेकिन इसे ग्रामीण विकास और रोजगार की दिशा में एक महत्वपूर्ण सुधार माना जा रहा है।

  • पहाड़ों का असली स्वाद: उत्तराखंड की रसोईजहां हर कौर में बसती है देवभूमि की खुशबू

    पहाड़ों का असली स्वाद: उत्तराखंड की रसोईजहां हर कौर में बसती है देवभूमि की खुशबू


    नई दिल्ली । उत्तराखंडजिसे देवभूमि के नाम से भी जाना जाता हैएक ऐसी जगह है जो अपनी प्राकृतिक सुंदरता और धार्मिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है। जब भी इस राज्य का नाम लिया जाता हैतो अक्सर हमारे दिमाग में बर्फ से ढके पहाड़शांत झीलें और ऐतिहासिक मंदिरों की छवियां उभर आती हैं। लेकिन इस राज्य की असली खूबसूरती केवल उसके दृश्य नहीं हैंबल्कि उसकी पारंपरिक रसोई में भी बसी हुई है। पहाड़ों का खाना सिर्फ पेट भरने का साधन नहीं हैयह एक कला हैजो सादगीस्वाद और सेहत का बेहतरीन मिश्रण है।

    उत्तराखंड का जायका: सादगी और सेहत का अनोखा संयोजन

    उत्तराखंड के हर कोने में आपको एक अनोखा जायका मिलेगाजो परंपरा और प्रकृति से गहरे जुड़ा हुआ है। पहाड़ी इलाकों में जहां संसाधनों की कमी रहती हैवहां की रसोई ने सादगी में भी स्वाद का खजाना खोज निकाला है। यहां का खाना न केवल आपके शरीर को ताजगी और ऊर्जा देता हैबल्कि आपके स्वाद कलियों को भी एक नई यात्रा पर ले जाता है।

    पहाड़ी व्यंजन: सेहत से भरपूर और स्वादिष्ट

    उत्तराखंड की पारंपरिक रसोई में स्थानीय सामग्री का इस्तेमाल प्रमुख होता है। यहां के भोजन में ताजे और प्राकृतिक सामान का भरपूर उपयोग किया जाता है। खासतौर पर गेंहूमक्काजौदालऔर फल-सब्जियां प्रमुख होती हैं। पहाड़ी खाने का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है ‘भात’जो विभिन्न प्रकार से पकाया जाता हैजैसे ताजे घी के साथ ‘कढ़ी’ या ‘अलू के पकौड़े’ के साथ।
    यहां की सबसे प्रसिद्ध डिश है क्योंली जो जौ से बनी होती है और आलू के गुटके’जो आलू को मसाले और हरी मिर्च के साथ पकाकर बनाए जाते हैं। इन्हें आमतौर पर मक्के की रोटी के साथ खाया जाता है। इसके अलावा गड़ै और घोल भी बहुत लोकप्रिय हैंजो किसी विशेष मौके पर तैयार किए जाते हैं।

    जखिया और चूल्हे पर पकते व्यंजन

    उत्तराखंड की रसोई में जखिया जो एक प्रकार का धान का भोजन है और लकड़ी के चूल्हे पर पकने वाली डिशेज की खुशबू आपको कहीं भी नहीं मिलती। जब पहाड़ों में सुबह-सुबह ठंडी हवा का एहसास होता हैतो घी और लकड़ी के चूल्हे पर पकने वाले व्यंजनों की खुशबू आपके दिल को सुकून देती है। ये व्यंजनजो पूरी तरह से प्राकृतिक और स्थानीय होते हैंआपके शरीर के लिए बेहद पौष्टिक होते हैं और मन को शांति का अहसास कराते हैं।

    नैनीतालमसूरी और केदारनाथ के पारंपरिक व्यंजन

    उत्तराखंड के प्रमुख पर्यटन स्थलोंजैसे नैनीतालमसूरी और केदारनाथमें पर्यटकों के लिए विशेष प्रकार के व्यंजन उपलब्ध हैं। नैनीताल की ‘सूखी भिंडी’ और मसूरी के ‘पेटिस’ विशेष रूप से प्रसिद्ध हैं। वहींकेदारनाथ में ‘भात-दाल’ का स्वाद यात्रा के बाद एक अलग ही आनंद देता है। इन जगहों पर यात्रा करते वक्त इन पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद आपको देवभूमि की असली आत्मा से जोड़े रखता है।

    पहाड़ी भोजन का सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व

    उत्तराखंड के पहाड़ी घरों में भोजन केवल पेट भरने का एक साधन नहीं होताबल्कि यह एक सांस्कृतिक परंपरा का हिस्सा है। यहां की रसोई में एक विशेष सादगी और प्रेम होता हैजो परिवार के हर सदस्य को जोड़ता है। स्थानीय त्योहारों और विशेष अवसरों पर परिवार एक साथ बैठकर पारंपरिक भोजन का आनंद लेते हैंजो उनके रिश्तों में गर्माहट और प्यार की भावना पैदा करता है। पहाड़ी भोजन का महत्व सिर्फ स्वाद तक सीमित नहीं है। यह हर कौर में प्रकृति और परिवार की मेहनत की महक को समेटे हुए है। इन व्यंजनों के सेवन से शरीर को पौष्टिकता मिलती है और आत्मिक शांति का अनुभव होता है।

    उत्तराखंड की रसोई: एक अद्भुत अनुभव

    अगर आप उत्तराखंड की यात्रा पर हैंतो सिर्फ पहाड़ों की सुंदरता और मंदिरों की ओर न भागें। उत्तराखंड का असली अनुभव तो उसकी रसोई में बसा है। यहां का हर कौरहर स्वाददेवभूमि की खुशबू और संस्कृति को महसूस कराने में सक्षम है। उत्तराखंड के पहाड़ी व्यंजन न सिर्फ खाने का अनुभव बल्कि एक सांस्कृतिक और आत्मिक यात्रा भी हैंजो आपको जीवनभर याद रहेगी।

  • मार्च से पहले पीएफ से यूपीआई लिंक, एटीएम से भी निकलेगा पैसा; प्रोसेस होगा और आसान…

    मार्च से पहले पीएफ से यूपीआई लिंक, एटीएम से भी निकलेगा पैसा; प्रोसेस होगा और आसान…


    नई दिल्ली/केंद्रीय मंत्री मनसुख मांडविया ने प्रोविडेंट फंड (PF) से जुड़ी नई डिजिटल पहल का ऐलान किया है। उन्होंने बताया कि मार्च 2026 से पहले कर्मचारी अपने पीएफ खाते को UPI और एटीएम से लिंक कर सकेंगे। इसका मतलब यह होगा कि भविष्य में पीएफ निकालना अब पहले से कहीं आसान और डिजिटल हो जाएगा।

    पीएफ निकालने की मौजूदा प्रक्रिया में कठिनाई

    आज की तारीख में पीएफ निकालने के लिए कर्मचारियों को कई फॉर्म भरने और लंबी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। कई बार लोग फार्म भरते-भरते थक जाते हैं और प्रक्रिया पूरी नहीं कर पाते। मनसुख मांडविया ने कहा कि यही परेशानी ध्यान में रखकर सरकार ने नियमों में बदलाव किया है। अब कर्मचारी अपने पीएफ का 75 प्रतिशत हिस्सा बिना किसी वजह के निकाल सकेंगे।

    क्यों रखा जाएगा 25 प्रतिशत पीएफ?

    केंद्रीय मंत्री ने बताया कि पीएफ में 25 प्रतिशत राशि इसलिए सुरक्षित रखी जाएगी ताकि कर्मचारियों की नौकरी की निरंतरता बनी रहे। उदाहरण के तौर पर, अगर कोई कर्मचारी 7 महीने काम करने के बाद पूरी राशि निकाल लेता है और बाद में नई नौकरी ज्वाइन करता है, तो उसकी पीएफ कंटिन्यूटी टूट जाती है। वहीं पेंशन के लिए 10 साल की लगातार नौकरी जरूरी होती है। 25 प्रतिशत राशि जमा रहने से कर्मचारी पेंशन के लिए पात्र बने रहेंगे और नई नौकरी मिलने तक सुरक्षा भी मिलती है।

    एटीएम और यूपीआई से पीएफ निकासी कैसे होगी

    मनसुख मांडविया ने बताया कि सरकार ने पीएफ खाते को बैंक खाता, आधार और यूएन से पहले ही जोड़ दिया है। अब इसमें डेबिट कार्ड और एटीएम फंक्शनैलिटी जोड़ने की तैयारी चल रही है। इसका मतलब यह है कि मार्च 2026 से पहले कर्मचारी सीधे एटीएम से अपने पीएफ का पैसा निकाल सकेंगे। इसके अलावा, पीएफ खाते को UPI से भी लिंक किया जा सकेगा। इससे कर्मचारियों को डिजिटल प्लेटफार्म पर पैसा ट्रांसफर करने की सुविधा मिलेगी और उन्हें कागजी प्रक्रिया से मुक्ति मिलेगी। मंत्री ने कहा कि यह फैसला कर्मचारियों के जीवन को आसान बनाने और डिजिटल सुविधा बढ़ाने के उद्देश्य से लिया गया है।

    सरल और डिजिटल भविष्य की ओर

    पीएफ से जुड़े यह बदलाव कर्मचारियों के लिए बड़ा लाभ हैं। अब उन्हें बैंक, ऑफिस या सरकारी विभागों के चक्कर नहीं लगाने होंगे। डिजिटल प्लेटफार्म और एटीएम के माध्यम से कभी भी, कहीं भी पीएफ निकालने की सुविधा उपलब्ध होगी। यह नई पहल सरकारी सेवाओं को और पारदर्शी और सुलभ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

    सरकार की तैयारी और अगला कदम

    मनसुख मांडविया ने यह भी स्पष्ट किया कि यह योजना केवल शुरुआत है। भविष्य में और भी डिजिटल सुधार किए जाएंगे, जिससे पीएफ खाताधारकों को तेजी से और सुरक्षित तरीके से पैसा निकालने की सुविधा मिले। यह पहल कर्मचारियों की मेहनत की कमाई को सुरक्षित और आसान बनाने के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।