Author: bharati

  • मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने श्रद्धेय भगवत शरण माथुर जी का किया पुण्य स्मरण, बताया प्रेरणापुंज

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने श्रद्धेय भगवत शरण माथुर जी का किया पुण्य स्मरण, बताया प्रेरणापुंज


    भोपाल । रविवार, 14 दिसम्बर 2025 को मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ और अत्यंत श्रद्धेय प्रचारक भगवत शरण माथुर जी को उनकी पुण्यतिथि के अवसर पर श्रद्धापूर्वक नमन किया। मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में माथुर जी के बहुमूल्य योगदान और निस्वार्थ सेवाभाव को याद किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि श्रद्धेय भगवत शरण माथुर जी का जीवन वास्तव में सेवा समर्पण और संगठनात्मक निष्ठा का एक उत्कृष्ट उदाहरण रहा है। उन्होंने अपने सार्वजनिक जीवन के हर पल को पूरी तन्मयता निष्ठा और लगन से समाज एवं संगठन की सेवा में समर्पित कर दिया।

    संगठन और समाज के लिए समर्पण

    डॉ. यादव ने आगे कहा कि माथुर जी ने न केवल राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सिद्धांतों को आत्मसात किया, बल्कि उसे अपने जीवन में उतारकर एक आदर्श प्रस्तुत किया। उनका कार्यक्षेत्र व्यापक रहा और उन्होंने जहाँ भी कार्य किया वहाँ अपनी गहरी छाप छोड़ी। संघ के एक वरिष्ठ प्रचारक के रूप में उन्होंने लाखों कार्यकर्ताओं को राष्ट्र और समाज के उत्थान के लिए प्रेरित किया। उनके मार्गदर्शन में असंख्य युवाओं ने देश सेवा के मार्ग पर चलना सीखा। मुख्यमंत्री ने इस बात पर ज़ोर दिया कि जिस तरह माथुर जी ने विपरीत परिस्थितियों में भी अपनी निष्ठा को अडिग रखा वह वर्तमान और भावी पीढ़ियों के लिए एक महान सीख है। उनका जीवन हमें यह प्रेरणा देता है कि किसी भी कार्य को सफल बनाने के लिए केवल लगन ही नहीं, बल्कि उस उद्देश्य के प्रति पूर्ण समर्पण भी आवश्यक है।

    प्रेरणापुंज बने रहेंगे श्रद्धेय माथुर जी
    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने माथुर जी को याद करते हुए कहा श्रद्धेय भगवत शरण माथुर जी का जीवन हम सभी के लिए एक प्रेरणापुंज है। उनके द्वारा स्थापित सेवा के उच्च मानदंड हमें निरंतर स्मरण दिलाते रहेंगे कि राजनीतिक और सामाजिक जीवन का अंतिम उद्देश्य जन कल्याण और राष्ट्र का उत्थान होना चाहिए।उन्होंने कहा कि ऐसे समर्पित और निस्वार्थ व्यक्तित्वों के कारण ही देश और समाज संगठनात्मक रूप से मजबूत होता है।
    डॉ. यादव ने माथुर जी के दिखाए गए मार्ग पर चलने और उनके मूल्यों को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।इस पुण्य स्मरण के अवसर पर, राज्य के कई अन्य गणमान्य व्यक्तियों और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ताओं ने भी श्रद्धेय भगवत शरण माथुर जी को श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके अतुलनीय योगदान को याद किया। उनका स्मरण केवल एक औपचारिकता नहीं है बल्कि देश के प्रति निःस्वार्थ सेवा के उनके आदर्शों को पुनर्जीवित करने का एक अवसर है।

  • डेयरी क्रांति की ओर मध्यप्रदेश का बड़ा कदम: मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने डॉ. भीमराव अम्बेडकर कामधेनु योजना को बताया ऐतिहासिक

    डेयरी क्रांति की ओर मध्यप्रदेश का बड़ा कदम: मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने डॉ. भीमराव अम्बेडकर कामधेनु योजना को बताया ऐतिहासिक

    भोपाल।मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि पशुपालकों एवं दुग्ध उत्पादकों को हर संभव तरीके से आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रदेश में दुग्ध उत्पादन बढ़ाया जाएगा। आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश के निर्माण की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने, पशुपालकों को आत्मनिर्भर बनाने सहित वर्तमान डेयरी उद्योग को सुनियोजित, सुव्यवस्थित, व्यावसायिक और लाभकारी बनाने की दिशा में ‘डॉ. भीमराव अम्बेडकर कामधेनु योजना’ आरंभ की है। यह योजना खासतौर पर उन जरूरतमंद युवाओं, किसानों और पशुपालकों के लिए आशा की किरण बनकर उभरी है, जो आधुनिक डेयरी इकाई स्थापित कर अपनी आय का स्थायी साधन विकसित करना चाहते हैं। योजना का मुख्य उद्देश्य राज्य में दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देना, ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नये-नये अवसर सृजित करना और पशुपालकों की आय में वृद्धि करना है।

    डॉ. भीमराव अम्बेडकर कामधेनु योजना में लाभार्थियों को 25 दूधारू पशुओं की एक इकाई स्थापित करने का अवसर दिया जाता है। इच्छुक और सक्षम हितग्राही अधिकतम 8 इकाइयां अर्थात 200 पशुओं तक की डेयरी परियोजना भी स्थापित कर सकते हैं। यह योजना छोटे से लेकर मध्यम स्तर के डेयरी उद्यमियों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। योजना की एक प्रमुख शर्त यह है कि प्रति इकाई के लिए इच्छुक हितग्राही के पास कम से कम 3.50 एकड़ कृषि भूमि उपलब्ध हो। भूमि की यह व्यवस्था पशुओं के आवास, चारे की व्यवस्था और डेयरी के समुचित तरीके से संचालन के लिए जरूरी है। इसके साथ ही सरकार पशुपालकों/दूध उत्पादकों की प्रोफेशनल ट्रेनिंग को भी महत्व दे रही है, जिससे पशुपालक वैज्ञानिक और आधुनिक पद्धति से अपना डेयरी बिजनेस चला सकें। पशुपालकों को आर्थिक सहायता देना इस योजना का सबसे आकर्षक पहलू है। परियोजना की कुल लागत पर सरकार द्वारा अनुदान सब्सिडी भी दिया जा रहा है।

    अनुसूचित जाति एवं जनजाति वर्ग के लाभार्थियों को कुल परियोजना लागत का 33 प्रतिशत तथा अन्य सभी वर्गों को 25 प्रतिशत तक का अनुदान दिया जा रहा है। शेष राशि बैंक ऋण के जरिए उपलब्ध कराई जा रही है। इस प्रावधान से बड़े निवेश की बाधा काफी हद तक कम हो जाती है और डेयरी बिजनेस शुरू करना भी आसान हो जाता है। योजना में लाभार्थियों के चयन में पारदर्शिता पर विशेष जोर दिया गया है। आवेदन प्रक्रिया ऑनलाइन रखी गई है और चयन सामान्यत: “पहले आओ-पहले पाओ” के आधार पर ही किया जा रहा है। साथ ही उन पशुपालकों को भी प्राथमिकता दी जा रही है, जो पहले से ही किन्हीं दुग्ध संघों या सहकारी संस्थाओं को निरंतर दुग्ध आपूर्ति कर रहे हैं। आवेदन के लिए आधार कार्ड, निवास प्रमाण पत्र, भूमि के दस्तावेज, बैंक खाता विवरण, जाति प्रमाण पत्र यदि लागू हो  और प्रशिक्षण प्रमाण पत्र जैसे दस्तावेज जरूरी हैं। इच्छुक आवेदक पशुपालन एवं डेयरी विभाग के आधिकारिक पोर्टल या अपने जिले के पशु चिकित्सा सेवाएं कार्यालय से विस्तृत जानकारी और मार्गदर्शन भी ले सकते हैं।

    योजना के बारे में कुछ तथ्य

    1. मुख्यमंत्री पशुपालन विकास योजना में नवीन घटक के रूप में राज्य सरकार ने 25 अप्रैल 2025 को डॉ. भीमराव अम्बेडकर कामधेनु योजना को मंजूरी दी।

    2. योजना के अंतर्गत 25 दुधारु पशु की प्रति इकाई राशि 36 लाख से 42 लाख रुपये तक की इकाई लागत है।

    3. योजना में अधिकतम 8 इकाइयों की स्थापना एक हितग्राही द्वारा की जा सकती है। एक इकाई में एक ही नस्ल के गौ-वंश एवं भैसवंशीय पशु रहेंगे।

    4. हितग्राही के पास प्रत्येक इकाई के लिये न्यूनतम 3.50 एकड़ कृषि भूमि होना जरूरी है।

    5. भूमि के लिये परिवार के सामूहिक खाते भी सम्मिलित हैं। इनके लिये अन्य सदस्यों की सहमति भी जरूरी होगी।

    6. इकाइयों की संख्या में गुणात्मक वृद्धि होने पर आनुपातिक रूप से न्यूनतम कृषि भूमि की अर्हता में भी आनुपातिक वृद्धि जरूरी होगी।

    7. पात्र हितग्राही को ऋण राशि का भुगतान चार चरणों में किया जायेगा।

  • ग्वालियर व्यापार मेले में इस बार इलेक्ट्रॉनिक सेक्टर में भी दिखेगी 'चमक', जीएसटी कटौती से बढ़ेगी बिक्री की उम्मीद

    ग्वालियर व्यापार मेले में इस बार इलेक्ट्रॉनिक सेक्टर में भी दिखेगी 'चमक', जीएसटी कटौती से बढ़ेगी बिक्री की उम्मीद


    ग्वालियर । देश के सबसे बड़े और 120 साल से अधिक पुराने ग्वालियर व्यापार मेले में इस साल कारोबार के रिकॉर्ड टूटने की उम्मीद है। इस बार मेला केवल ऑटोमोबाइल सेक्टर तक ही सीमित नहीं रहेगा बल्कि इलेक्ट्रॉनिक सामानों सहित अन्य सेक्टरों में भी जबरदस्त बिक्री होने की संभावना है। यह मेला अपनी अनूठी परंपरा के लिए जाना जाता है जहाँ घर में उपयोग होने वाली छोटी सुई से लेकर मोटर कार तक हर चीज़ छूट के साथ उपलब्ध होती है। यही कारण है कि देश भर से खरीदार इस मेले का इंतज़ार करते हैं।

    जीएसटी लागू होने के बाद बदला परिदृश्य

    1 जुलाई 2017 को जब वस्तु एवं सेवा कर GST लागू हुआ उत्पादों पर 50% वाणिज्यकर में छूट मिलती थी। जीएसटी लागू होने के बाद सरकार ने केवल ऑटोमोबाइल सेक्टर को रोड टैक्स में 50% की छूट देकर राहत दी। इस छूट के कारण ऑटोमोबाइल सेक्टर में तो शानदार कारोबार होता रहा 2024-25 मेले में ₹900 करोड़ से अधिक का कारोबार लेकिन इलेक्ट्रॉनिक और अन्य सेक्टरों को वह फायदा नहीं मिला।

    इस बार इलेक्ट्रॉनिक सेक्टर क्यों चमकेगा

    इस वर्ष, स्थिति बदलने की उम्मीद है। सरकार ने 22 सितंबर से जीएसटी की दरों में कमी की है, जिसका असर कारोबार के सभी सेक्टरों पर दिख रहा है और चीजें सस्ती हुई हैं।दोहरी छूट का फायदा: ऑटोमोबाइल सेक्टर को तो पहले से ही रोड टैक्स में 50% की छूट मिल रही है।इलेक्ट्रॉनिक और अन्य सेक्टर: जीएसटी दरों में कमी आने से इस बार इलेक्ट्रॉनिक कंपनियों पर भी अपने प्रोडक्ट्स पर तगड़ी छूट देने का दबाव और अवसर दोनों हैं। उपभोक्ताओं को लाभजीएसटी कम होने के कारण चीज़ें पहले ही सस्ती हुई हैं और अब कंपनियों की अतिरिक्त छूट से खरीदारी करने वालों को बड़ा फायदा होगा।

    पिछले 2024-25 के मेले में कुल ₹3327 करोड़ से अधिक का कारोबार हुआ था। जानकारों का मानना है कि इस बार इलेक्ट्रॉनिक और अन्य सेक्टरों के चमकने से यह कारोबार का आंकड़ा और भी बड़ा हो सकता है। यह उम्मीद है कि इस साल का मेला ग्राहकों और व्यापारियों दोनों के लिए बेहद लाभदायक साबित होगा।

  • डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में ऊर्जा क्षेत्र में स्वर्णिम युग का सूत्रपात: मध्य प्रदेश में ऐतिहासिक उपलब्धियां

    डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में ऊर्जा क्षेत्र में स्वर्णिम युग का सूत्रपात: मध्य प्रदेश में ऐतिहासिक उपलब्धियां

    भोपाल।मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के दूरदर्शी नेतृत्व और सतत मार्गदर्शन में मध्यप्रदेश का ऊर्जा क्षेत्र आज अभूतपूर्व परिवर्तन का साक्षी बन रहा है। राज्य सरकार ने ऊर्जा के क्षेत्र में ऐसे निर्णय लिए हैं जो न केवल वर्तमान की आवश्यकताओं को पूरा करते हैं बल्कि आने वाले दशकों की बढ़ती मांगों के अनुरूप मजबूत आधारशिला तैयार करते हैं। उनका लक्ष्य स्पष्ट है-हर घर हर खेत और हर उद्योग को गुणवत्तापूर्ण, निर्बाध और किफायती बिजली उपलब्ध कराना। इसी भावना को केंद्रीय तत्व मानते हुए ऊर्जा विभाग ने बीते वर्षों में योजनाओं, संरचनात्मक सुधारों, तकनीकी उन्नयन निवेश संवर्धन और उपभोक्ता हित को केंद्र में रखते हुए कई ऐतिहासिक कदम उठाए हैं।

    राज्य में दीर्घकालिक और सतत विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने के उद्देश्य से 4000 मेगावॉट ताप विद्युत क्षमता हेतु निविदा प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूर्ण किया गया है। यह संयंत्र  DBFOO Design, Build, Finance, Own, Operate मॉडल के अंतर्गत स्थापित किए जा रहे हैं, जिनके लिए कोयला आपूर्ति ‘शक्ति’ नीति के तहत सुनिश्चित की गई है। इस कदम से प्रदेश में लगभग 50 हजार करोड़ रुपये से अधिक के निवेश की संभावनाएँ बनी हैं, जिससे 5 से 7 हजार लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार प्राप्त होगा और अनेक सहायक उद्योग भी गति पकड़ेंगे।

    51711 नवीन नियमित पद स्वीकृत

    प्रदेश में विद्युत कंपनियों की संगठनात्मक संरचना का पुनर्गठन कर 51,711 नवीन नियमित पदों को स्वीकृति प्रदान की गई है। इससे कंपनियों की कार्यक्षमता, क्षेत्रीय उपस्थिति तथा उपभोक्ता सेवाओं का प्रभावी विस्तार संभव हो सकेगा। स्वीकृत पदों में पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कम्पनी के लिये 17402, मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कम्पनी के लिये 16165, पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कम्पनी के लिये 15690, पावर ट्रांसमिशन कम्पनी के लिये 1431 और पॉवर जनरेटिंग कम्पनी के लिये 1017 पद हैं। इनमें भर्ती प्रक्रिया जारी है।

    वर्ष 2025-26 से 2029-30 तक पारेषण प्रणाली के सुदृढ़ीकरण हेतु 5163 करोड़ रुपये के कार्य तथा सारनी व चचाई में 23,000 करोड़ रुपये लागत की 2×660 मेगावॉट की नई ताप विद्युत इकाइयों की स्थापना को स्वीकृति प्रदान की गई है। गांधीसागर तथा राणा प्रताप सागर जल विद्युत गृह के नवीनीकरण और आधुनिकीकरण की संयुक्त परियोजना को भी अनुमोदन किया गया है, जिससे जल विद्युत उत्पादन की क्षमता आने वाले वर्षों में और अधिक मजबूत होगी।

    उपभोक्ताओं को राहत

    ऊर्जा उपभोक्ताओं को राहत देने के उद्देश्य से अटल गृह ज्योति योजना, अटल कृषि ज्योति योजना और निःशुल्क विद्युत प्रदाय योजना के माध्यम से लाखों परिवारों और किसानों को सस्ती बिजली उपलब्ध कराई जा रही है। वर्ष 2025-26 में इन योजनाओं पर हजारों करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है, जो राज्य सरकार की जनहितकारी सोच को परिलक्षित करता है। अटल ज्योति योजना में इस वित्तीय वर्ष में 7131 करोड़, अटल कृषि ज्योति योजना में 13909 करोड़ और नि:शुल्क विद्युत प्रदाय योजना में 5299 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। आरडीएसएस योजना अंतर्गत उपकेन्द्रों, लाइनों, कृषि फीडरों के विभक्तिकरण तथा नए ट्रांसफॉर्मरों की स्थापना जैसे कार्यों को समयबद्ध तरीके से पूर्ण किया गया है। स्मार्ट मीटरिंग के क्षेत्र में मध्यप्रदेश देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है और राज्य में 26 लाख से अधिक स्मार्ट मीटर स्थापित किए जा चुके हैं। प्री-पेड स्मार्ट मीटर को बढ़ावा देने के लिए उपभोक्ताओं को ऊर्जा प्रभार में 20 प्रतिशत की छूट भी प्रदान की जा रही है।

    समाधान योजना 2025-26

    ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों के विभिन्न श्रेणी के उपभोक्ता, जो किन्हीं कारणों से बिल नहीं जमा कर पाते, उनके लंबित बिलों पर सरचार्ज लगाया जाता है। साथ ही उनके बिजली कनेक्शन विच्छेदित कर दिये जाते हैं। ऐसे उपभोक्ताओं को सुविधा प्रदान करने के लिये समाधान योजना 2025-26 लागू की गयी है। योजना 2 चरणों में लागू की गयी है। इसका प्रथम चरण 3 नवम्बर से 31 दिसम्बर तक लागू रहेगा। दूसरा एवं अंतिम चरण एक जनवरी, 2026 से 28 फरवरी, 2026 तक रहेगा। योजना में उपभोक्ता को प्रथम चरण में एकमुश्त मूल राशि का भुगतान करने पर सर्वाधिक लाभ होगा। योजना में 6 आसानी किश्तों में भुगतान की सुविधा प्राप्त करने वाले उपभोक्ताओं को प्रथम चरण में सरचार्ज में 60 से 100 प्रतिशत तक की छूट एवं द्वितीय चरण में 50 से 90 प्रतिशत तक की छूट प्राप्त हो सकेगी। योजना में प्रदेश के सभी घरेलू, गैर घरेलू, औद्योगिक एवं कृषि श्रेणी के सभी अशासकीय उपभोक्ताओं को उनके विगत 3 माह अथवा अधिक अवधि के देयक लंबित होने की स्थिति में सरचार्ज में छूट प्राप्त कर एकमुश्त अथवा किश्तों में भुगतान की सुविधा दी गयी है।

    मुख्यमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महाअभियान PM-JANMAN अंतर्गत भारिया, बैगा और सहरिया जैसे पीवीटीजी समुदायों के लगभग 27 हजार घरों को बिजली से जोड़ने की कार्ययोजना को भारत सरकार द्वारा स्वीकृति दी गई है। इसमें से सितंबर 2025 तक 25,362 घरों का विद्युतीकरण पूरा कर लिया गया है। साथ ही धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान अंतर्गत 59,172 घरों के विद्युतीकरण की योजना तेजी से क्रियान्वित की जा रही है।

    राज्य की पारेषण कंपनी ने वर्ष 2024-25 में 99.47 प्रतिशत उपलब्धता तथा मात्र 2.60 प्रतिशत लाइन हानियों के साथ देश में उदाहरण प्रस्तुत किया है। ड्रोन पेट्रोलिंग, ऑप्टिकल फाइबर आधारित संचार प्रणाली, हाई टेम्परेचर लो-सेग कंडक्टर और GIS उपकेन्द्र जैसी तकनीकों को अपनाकर विद्युत व्यवस्था को आधुनिक, सुरक्षित और भविष्य के अनुरूप बनाया जा रहा है। वितरण कंपनियों द्वारा जीआईएस मैपिंग, इंस्टेंट बिलिंग, मोबाइल ऐप आधारित मीटर रीडिंग और ओपन-सोर्स बिलिंग सॉफ्टवेयर जैसी व्यवस्थाएँ उपभोक्ता सेवाओं को पारदर्शी और सुगम बनाती हैं। सीएम हेल्पलाइन पर लगातार 20 माह तक A ग्रेडिंग प्राप्त करना विभागीय संवेदनशीलता और तत्परता का प्रमाण है।

    उद्योगों को ऊर्जा सुरक्षा और निर्बाध सप्लाई देने के लिए ऊर्जा प्रभार में अनेक प्रकार की छूटें लागू की गई हैं। ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के अंतर्गत नए संयोजन, निरीक्षण, चार्जिंग परमिशन और सेवा-प्रदान की संपूर्ण प्रक्रियाओं को सरल, पारदर्शी और डिजिटल बनाया गया है। लोक सेवा गारंटी अधिनियम में 15 ऊर्जा सेवाओं को शामिल किया गया है, जिससे उद्योगों और आम उपभोक्ताओं दोनों को निश्चित समय-सीमा में सेवाएँ उपलब्ध हो रही हैं।

    ऊर्जा के क्षेत्र में मध्यप्रदेश की उपलब्धियों को राष्ट्रीय स्तर पर अनेक पुरस्कार भी मिले हैं। सतपुड़ा, अमरकंटक और श्री सिंगाजी ताप विद्युत गृहों को फ्लाय ऐश प्रबंधन, पर्यावरणीय उत्कृष्टता, सर्वाधिक प्लांट लोड फैक्टर तथा लंबे समय तक सतत संचालित रहने जैसी श्रेणियों में सम्मान प्राप्त हुआ है। पावर ट्रांसमिशन कंपनी ने लगातार तीन वर्षों में विज्ञान मेले में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर प्रथम स्थान प्राप्त किया है और उसे प्रतिष्ठित पीएसयू अवार्ड से भी सम्मानित किया गया है।

    ईज ऑफ डूइंग बिजनेस

    ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के तहत उच्च दाब कनेक्शन्स के लिये ऑनलाइन आवेदन प्राप्त कर ऑनलाइन भुगतान होने पर कनेक्शन स्वीकृत किये जा रहे हैं। कनेक्शन के लिये जरूरी दस्तावेजों की संख्या कम कर दी गयी है। उद्योगों को दी जाने वाली विभिन्न विद्युत सेवाओं को मध्यप्रदेश लोक सेवा प्रदाय गारंटी अधिनियम के तहत लाया गया है।

    विद्युत गृहों द्वारा लगातार 200 से अधिक दिनों तक संचालन

    मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कम्पनी संचालित 4 विद्युत गृहों ने लगातार 200 से अधिक दिनों तक संचालित रहने की उपलब्धि हासिल की है। अमरकंटक ताप विद्युत गृह चचाई की इकाई 5 ने लगातार 400, सतपुड़ा ताप विद्युत गृह सारणी की इकाई 10 ने 235, श्री सिंगाजी ताप विद्युत गृह खण्डवा की इकाई 3 ने 231 और संजय गाँधी ताप विद्युत गृह बिरसिंहपुर की इकाई 5 ने 209 दिन तक लगातार विद्युत उत्पादन किया है।

    नवाचार

    पारेषण लाइनों की टॉप पेट्रोलिंग ड्रोन के माध्यम से की जा रही है। उन लाइनों पर जहाँ क्लियरेंस की समस्या है, वहाँ हाई टेम्प्रेचर लो सेग कंडक्टर का उपयोग किया जा रहा है। ऑप्टिकल फाइबर ग्राउण्ड वायर आधारित संचार प्रणाली का उपयोग किया जा रहा है। विद्युत अधोसंरचना संधारण, निर्माण एवं विकास कार्य के लिये जीआईएस तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है। शहरी क्षेत्रों में भूमि की कमी के मद्देनजर गैस इंश्यूलेटेड सब स्टेशन का निर्माण किया जा रहा है। विद्युत संबंधी शिकायतों के त्वरित निराकरण के लिये केन्द्रीयकृत कॉल सेंटरों 1912 की क्षमता वृद्धि की गयी है।

    प्रदेश में ऊर्जा विभाग ने जिस गति, प्रतिबद्धता और नवाचार के साथ कार्य किया है, वह मध्यप्रदेश को ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर, सक्षम और भविष्य-दृष्टि सम्पन्न राज्य बनाने की दिशा में क्रांतिकारी कदम है। आने वाले वर्षों में प्रदेश की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरी क्षमता से पूरा करते हुए हर नागरिक और हर उद्योग को विश्वसनीय, स्वच्छ और किफायती बिजली उपलब्ध कराना हमारा संकल्प है और इसी संकल्प को यथार्थ में बदलने हेतु राज्य सरकार निरंतर कार्यरत है।

  • दिल्ली-NCR में प्रदूषण का कहर: GRAP 4 लागू, AAP ने केंद्र और दिल्ली सरकार को घेरा

    दिल्ली-NCR में प्रदूषण का कहर: GRAP 4 लागू, AAP ने केंद्र और दिल्ली सरकार को घेरा


    नई दिल्ली। दिल्ली में प्रदूषण लगातार उच्च स्तर पर बना हुआ है। आज राजधानी में AQI 500 के पार पहुंच गया है, जिससे सांस लेना मुश्किल हो गया है और विजिबिलिटी भी काफी कम हो गई है। स्थिति के मद्देनजर नेशनल कैपिटल में GRAP 4 लागू कर दिया गया है।

    AAP ने उठाया केंद्र और दिल्ली सरकार पर सवाल
    AAP के दिल्ली अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने कहा कि “यह सरकार लगभग एक साल से सत्ता में है, लेकिन प्रदूषण को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। बंद कमरे में भी धुंध दिखाई दे रही है। CM को यह नहीं पता कि AQI क्या होता है। एक्सपर्ट्स को आगे आना चाहिए और मुख्यमंत्री को पीछे हट जाना चाहिए।”

    GRAP 4: क्या है नियम
    GRAP-IV के तहत राज्य और केंद्रीय एजेंसियों को NCR में हवा की गुणवत्ता सुधारने के उपाय तेज करने के निर्देश दिए गए हैं।

    बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए स्कूलों में क्लास 5 तक हाइब्रिड मोड में पढ़ाई अनिवार्य कर दी गई है।

    क्लास 6 से 11 तक फिजिकल क्लास बंद करने का विकल्प भी राज्य सरकारों को दिया गया है।

    प्रदूषण का स्वास्थ्य पर असर
    दिल्ली-NCR में लोगों को सांस लेने में तकलीफ, आंखों में जलन, गले में खराश और खांसी जैसी समस्याएं हो रही हैं।

    डॉक्टरों ने सलाह दी है कि अगर संभव हो तो अगले कुछ हफ्तों तक दिल्ली से बाहर जाने पर विचार किया जाए।

    दिल्ली में लगातार बढ़ते प्रदूषण के कारण GRAP 4 लागू किया गया है, लेकिन विपक्ष और AAP का कहना है कि केंद्र और दिल्ली सरकार इस गंभीर समस्या को गंभीरता से नहीं ले रही हैं। राजधानीवासियों के लिए फिलहाल सफर और बाहरी गतिविधियों में सावधानी बरतना आवश्यक है।

  • कटनी महानदी के घाट पर मिला युवक का शव, हाथ-पैर रस्सी से बंधे हत्या कर फेंके जाने की आशंका

    कटनी महानदी के घाट पर मिला युवक का शव, हाथ-पैर रस्सी से बंधे हत्या कर फेंके जाने की आशंका


    कटनी । मध्य प्रदेश के कटनी जिले में रविवार की सुबह एक सनसनीखेज घटना सामने आई है जहाँ विजयराघवगढ़ थाना क्षेत्र के सिघनपुरी गांव के नजदीक महानदी के गुडेहा घाट पर एक युवक का शव मिला है। इस घटना ने पूरे इलाके में हड़कंप मचा दिया है क्योंकि शव के हाथ-पैर रस्सी से बंधे हुए थे, जो साफ़ तौर पर हत्या की ओर इशारा करता है।

    हत्या कर शव फेंके जाने की आशंका

    जानकारी के अनुसार रविवार की सुबह गुडेहा घाट के पास महानदी में लोगों ने एक अज्ञात युवक का शव उतराते हुए देखा। स्थानीय लोगों ने तत्काल इसकी सूचना पुलिस को दी। मौके पर पहुंची विजयराघवगढ़ थाना पुलिस ने शव को नदी से बाहर निकलवाया।

    शव की जांच करने पर पाया गया कि मृतक युवक के हाथ और पैर कसकर रस्सी से बंधे हुए थे। पुलिस के अनुसार युवक की उम्र लगभग 30 वर्ष के आसपास है। शव की इस हालत को देखते हुए पुलिस ने प्राथमिक तौर पर यह माना है कि युवक की हत्या करने के बाद पहचान छुपाने या सबूत मिटाने के उद्देश्य से उसके शव को रस्सी से बांधकर महानदी में फेंक दिया गया था।

    जांच शुरू, पहचान नहीं हो पाई

    पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर कानूनी कार्रवाई पूरी की और उसे पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है। पुलिस ने अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ हत्या का मामला प्रथम दृष्टया दर्ज कर लिया है और गहराई से जांच शुरू कर दी है।फिलहाल मृतक युवक की पहचान नहीं हो सकी है। पुलिस आसपास के थाना क्षेत्रों और पड़ोसी जिलों से गुमशुदा व्यक्तियों की जानकारी जुटा रही है ताकि शव की पहचान की जा सके। यह मामला अब पुलिस के लिए एक चुनौती बन गया है, जो हत्या के पीछे के कारणों और अपराधियों का पता लगाने की कोशिश कर रही है।

  • सस्ते धान को छत्तीसगढ़ में खपाने की साजिश नाकाम, बिचौलियों पर सरकार की बड़ी कार्रवाई

    सस्ते धान को छत्तीसगढ़ में खपाने की साजिश नाकाम, बिचौलियों पर सरकार की बड़ी कार्रवाई


    अंबिकापुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने पड़ोसी राज्यों से सस्ते धान को अपने यहां खपाने की बिचौलियों की सुनियोजित साजिश को समय रहते नाकाम कर दिया है। उत्तर प्रदेश, झारखंड और मध्यप्रदेश की सीमाओं से लगे बलरामपुर जिले में प्रशासन की सख्ती के चलते अब तक 11,300 क्विंटल धान और 48 वाहन जब्त किए जा चुके हैं। जब्त किए गए धान की अनुमानित कीमत करीब 3 करोड़ 50 लाख रुपये बताई जा रही है। प्रशासनिक अधिकारियों के मुताबिक, यदि यह धान जब्त नहीं किया जाता तो इसे छत्तीसगढ़ के सरकारी उपार्जन केंद्रों में बेच दिया जाता। इससे बिचौलियों को भारी मुनाफा होता और राज्य सरकार को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता।

    समर्थन मूल्य का अंतर बना वजह
    इस पूरे मामले की जड़ राज्यों के बीच न्यूनतम समर्थन मूल्य MSP का अंतर है। झारखंड में धान की खरीद 2,450 रुपये प्रति क्विंटल उत्तर प्रदेश में 2,369 रुपये प्रति क्विंटल जबकि छत्तीसगढ़ में सरकार 3,100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीद रही है यानी छत्तीसगढ़ में प्रति क्विंटल लगभग 700 रुपये अधिक का लाभ मिल रहा है। इसी अंतर का फायदा उठाने के लिए बिचौलिये यूपी और झारखंड से धान खरीदकर छत्तीसगढ़ में बेचने की तैयारी कर रहे थे।

    सीमावर्ती इलाकों में कड़ी निगरानी

    बलरामपुर जिला तीन राज्यों की सीमा से लगा होने के कारण बिचौलियों के लिए आसान रास्ता बनता रहा है। लेकिन इस बार प्रशासन ने पहले से ही सतर्कता बरतते हुए सीमावर्ती क्षेत्रों में विशेष निगरानी शुरू कर दी थी। धान की अवैध ढुलाई में लगे ट्रकों, पिकअप वाहनों और ट्रैक्टरों की जांच की गई। इसी दौरान बड़ी मात्रा में धान जब्त किया गया और 48 वाहनों को कब्जे में लिया गया।

    किसानों के हक की रक्षा
    प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई केवल सरकारी नुकसान रोकने के लिए नहीं, बल्कि स्थानीय किसानों के अधिकारों की रक्षा के लिए भी बेहद जरूरी थी। यदि बाहरी राज्यों का धान उपार्जन केंद्रों तक पहुंच जाता, तो असली किसानों को अपनी उपज बेचने में दिक्कत होती। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि छत्तीसगढ़ सरकार की नीति है कि समर्थन मूल्य का लाभ केवल राज्य के वास्तविक किसानों को ही मिले। बिचौलियों या बाहरी धान की किसी भी सूरत में अनुमति नहीं दी जाएगी।

    आगे भी जारी रहेगी कार्रवाई
    प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि यह कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी। सीमावर्ती जिलों में पुलिस, राजस्व और खाद्य विभाग की संयुक्त टीमें लगातार गश्त और जांच करेंगी। उपार्जन केंद्रों पर भी सख्त सत्यापन व्यवस्था लागू की गई है, ताकि बाहरी धान की पहचान की जा सके।सरकार का मानना है कि ऐसी सख्ती से न केवल बिचौलियों पर लगाम लगेगी, बल्कि किसानों में भी भरोसा बढ़ेगा कि उनकी फसल सही दाम पर सुरक्षित रूप से खरीदी जाएगी।इस पूरे अभियान के जरिए छत्तीसगढ़ सरकार ने साफ संदेश दिया है कि धान खरीदी व्यवस्था से किसी भी तरह की छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं की जाएगी। MSP का फायदा गलत तरीके से उठाने वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे।

  • विदिशा बस हादसा: 48 छात्रों से भरी स्कूल बस नदी में गिरी 28 घायल; बड़ा हादसा टला

    विदिशा बस हादसा: 48 छात्रों से भरी स्कूल बस नदी में गिरी 28 घायल; बड़ा हादसा टला


    विदिशा ।मध्य प्रदेश के विदिशा जिले से मंगलवार सुबह एक बड़ी दुर्घटना की ख़बर सामने आई जहाँ एक निजी स्कूल बस दुर्घटनाग्रस्त हो गई। यह हादसा विदिशा जिले के नटेरन थाना क्षेत्र अंतर्गत जोहद गांव में हुआ। प्राप्त जानकारी के अनुसार बंगला चौराहा स्थित एक निजी स्कूल के छात्रों को सांची पिकनिक पर ले जा रही यह बस सगड़ नदी पुल को पार करते समय अनियंत्रित हो गई और पुल से नीचे जा गिरी। यह घटना सुबह लगभग दस बजे के आसपास की बताई जा रही है।

    48 छात्र थे सवार 28 घायल

    हादसे के समय बस में करीब 48 छात्र सवार थे। पुल से गिरने के बाद बस नदी के सूखे तल पर पत्थरों पर गिरी। स्थानीय लोगों और बचाव दल की तत्परता से छात्रों को तुरंत बस से बाहर निकाला गया। शुक्र है कि नदी में पानी नहीं था जिसके चलते कोई जनहानि नहीं हुई और एक बड़ा हादसा होने से टल गया। हालांकि पत्थरों पर गिरने के कारण लगभग 28 छात्र घायल हुए हैं। इनमें से कुछ छात्रों को मामूली खरोंचें आई हैं जबकि कुछ को गंभीर चोटें भी लगी हैं।

    राहत और बचाव कार्य

    दुर्घटना के तुरंत बाद स्थानीय प्रशासन सक्रिय हो गया। सभी घायल छात्रों को तत्काल प्रभाव से प्राथमिक उपचार के लिए राजीव गांधी शासकीय जन चिकित्सालय गंजबासौदा ले जाया गया है। अस्पताल में घायलों का उपचार जारी है और उनके माता-पिता को घटना की सूचना दे दी गई है। पुलिस ने दुर्घटना के कारणों की जाँच शुरू कर दी है कि बस किस वजह से अनियंत्रित हुई।

  • एमएससी नर्सिंग प्रवेश में हाई कोर्ट सख्त, काउंसिल के अधिवक्ता को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आदेश

    एमएससी नर्सिंग प्रवेश में हाई कोर्ट सख्त, काउंसिल के अधिवक्ता को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आदेश


    भोपाल। मध्य प्रदेश में एमएससी नर्सिंग प्रवेश प्रक्रिया को लेकर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। याचिकाकर्ता एनएसयूआइ उपाध्यक्ष रवि परमार एवं अन्य की याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने मध्य प्रदेश नर्सेस रजिस्ट्रेशन काउंसिल के अधिवक्ता को 15 दिसंबर 2025 को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया है।
    हाईकोर्ट ने जताई नाराजगी
    सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता अभिषेक पांडेय ने न्यायालय को बताया कि काउंसिल ने एमएससी नर्सिंग और पोस्ट-बीएससी काउंसलिंग की समय-सारणी जारी की है, लेकिन काउंसिल की वेबसाइट पूरी तरह से कार्यशील नहीं है। इसका सीधा असर हजारों छात्रों पर पड़ा है, जो प्रवेश प्रक्रिया में भाग लेने में असमर्थ हो रहे हैं। हाईकोर्ट ने इस मामले में काउंसिल की लापरवाही पर कड़ा सवाल उठाया और आदेश दिया कि अधिकारी व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर छात्र हितों और प्रवेश प्रक्रिया की स्थिति की व्याख्या करें।

    वेबसाइट और तकनीकी खामियां

    याचिकाकर्ताओं के अनुसार, काउंसिल की वेबसाइट में लगातार तकनीकी खामियां हैं। कई छात्र पंजीकरण या आवेदन फॉर्म भरने में असफल हो रहे हैं। समय पर प्रवेश न मिलने की स्थिति में छात्रों की पढ़ाई और करियर प्रभावित होने की आशंका है। वर्तमान में कई छात्र इस समस्या के कारण परीक्षा और काउंसलिंग की तारीखों को लेकर असमंजस में हैं। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी भी तकनीकी लापरवाही के कारण छात्रों के अधिकार प्रभावित नहीं होने चाहिए।

    काउंसिल की जिम्मेदारी

    हाईकोर्ट ने रजिस्ट्रेशन काउंसिल को चेतावनी दी कि छात्रों के प्रवेश और करियर से जुड़ी प्रक्रिया में किसी भी तरह की अनियमितता या विलंब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अदालत ने निर्देश दिया कि अधिवक्ता को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर वेबसाइट की स्थिति और प्रवेश प्रक्रिया की व्याख्या करनी होगी। इस कदम से यह संदेश गया है कि छात्रों के अधिकारों की सुरक्षा सर्वोपरि है और सरकारी संस्थानों की जिम्मेदारी है कि डिजिटल और प्रशासनिक प्रक्रियाएं समय पर और सुचारु रूप से पूरी हों।

    छात्रों की बढ़ती परेशानियां
    एमएससी नर्सिंग में दाखिले की प्रक्रिया पर तकनीकी और प्रशासनिक समस्याओं के कारण छात्रों में चिंता और असमंजस बढ़ गया है। कई छात्र बार-बार वेबसाइट पर लॉग इन करने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन लगातार त्रुटि संदेश और फॉर्म अपलोड न होने की समस्याएं उन्हें बाधित कर रही हैं।हाईकोर्ट की सख्ती के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि काउंसिल जल्द ही वेबसाइट और प्रवेश प्रक्रिया को सुचारु बनाएगी। इससे छात्रों का समय बचेगा और वे बिना बाधा के काउंसलिंग में भाग ले सकेंगे। 

    आगे की प्रक्रिया
    15 दिसंबर 2025 को अधिवक्ता की व्यक्तिगत पेशी के बाद अदालत स्थिति का व्यापक आकलन करेगी और आवश्यक निर्देश जारी कर सकती है। यह सुनवाई मध्य प्रदेश में नर्सिंग प्रवेश प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

  • पाकिस्तान के खिलाफ तालिबान का बड़ा कदम, वैश्विक मंच पर बेनकाब करने की तैयारी

    पाकिस्तान के खिलाफ तालिबान का बड़ा कदम, वैश्विक मंच पर बेनकाब करने की तैयारी


    नई दिल्‍ली । पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच बढ़ते तनाव के बीच तालिबान सरकार अब इस्लामाबाद के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ा डिप्लोमैटिक अभियान शुरू करने की तैयारी में है। अफगानिस्तान का दावा है कि पाकिस्तान उसकी सीमा के भीतर अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन करते हुए सैन्य हमले कर रहा है और आम नागरिकों को निशाना बना रहा है। इसी को लेकर तालिबान प्रशासन दुनिया के अलग-अलग देशों में अपने प्रतिनिधि भेजने की योजना बना रहा है।

    तालिबान की ओर से तैयार किए गए एक विस्तृत डोजियर में पाकिस्तान पर आतंकवाद को समर्थन देने, मानवाधिकारों के उल्लंघन और अफगान नागरिकों व शरणार्थियों पर दबाव बनाने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। इस डोजियर में यह भी कहा गया है कि पाकिस्तान आर्थिक दबाव और जबरन निर्वासन के जरिए अफगानिस्तान को अस्थिर करने की कोशिश कर रहा है।

    रिपोर्ट्स के मुताबिक, अफगान विदेश मंत्रालय और गृह मंत्रालय ने मिलकर यह दस्तावेज तैयार किया है, जिसे तालिबान के सर्वोच्च नेता मुल्ला हिबतुल्लाह अखुंदज़ादा की मंजूरी के बाद प्रभावशाली और पड़ोसी देशों को सौंपा जाएगा। इसमें पाकिस्तान को “आतंकवादियों के लिए सुविधा केंद्र” बताया गया है और आरोप लगाया गया है कि पाकिस्तानी खुफिया एजेंसियां ISIS और अन्य आतंकी संगठनों को लॉजिस्टिक और वित्तीय सहायता दे रही हैं।

    अफगानिस्तान का दावा है कि पाकिस्तान इन आतंकी संगठनों का इस्तेमाल अफगानिस्तान, भारत और ईरान जैसे देशों को अस्थिर करने के लिए कर रहा है और उसके पास इन आरोपों के समर्थन में ठोस सबूत मौजूद हैं। वहीं दूसरी ओर, पाकिस्तान लगातार अफगान तालिबान पर टीटीपी को समर्थन देने का आरोप लगाता रहा है। दोनों देशों के बीच सीमा बंद है और हाल के महीनों में तनाव अपने चरम पर पहुंच चुका है।

    इस डिप्लोमैटिक अभियान के जरिए तालिबान का उद्देश्य पाकिस्तान की कथित नीतियों को वैश्विक मंच पर उजागर करना और अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान अपनी ओर खींचना बताया जा रहा है।