Author: bharati

  • जयपुर के खेतों में फैक्ट्री का जहर, मिट्टी हो रही काली, सब्जियां बन गईं 'स्लो पॉइजन'

    जयपुर के खेतों में फैक्ट्री का जहर, मिट्टी हो रही काली, सब्जियां बन गईं 'स्लो पॉइजन'


    जयपुर । जयपुर(Jaipur) में फैक्ट्रियों से निकल रहा केमिकल (Chemical)और ब्लीच मिला पानी लोगों की सेहत के लिए बड़ा खतरा बनता जा रहा है. सवाल यह है कि जो हरी सब्जियां(green vegetables) और फल लोग सेहत के लिए खाते हैं, क्या वे सच में उन्हें स्वस्थ बना रहे हैं या धीरे-धीरे बीमार कर रहे हैं.

    अगर इन सब्जियों और फलों की खेती ऐसे पानी से हो रही हो, जिसमें फैक्ट्रियों का जहरीला कचरा और रसायन मिले हों, तो इसका सीधा असर आम लोगों की सेहत पर पड़ता है. ऐसा पानी किडनी फेल होने, दिल की बीमारियों और यहां तक कि कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है.

    स्लो पॉइजन का काम कर रही सब्जियां
    जयपुर के सांगानेर इलाके में सांगानेर से चांदलई तक करीब 20 किलोमीटर के दायरे में दो दर्जन से ज्यादा गांव आते हैं. यहां कपड़ों की रंगाई, छपाई और ब्लीच का काम करने वाली फैक्ट्रियां आसपास के जल स्रोतों में केमिकल और ब्लीच वाला पानी छोड़ रही हैं. इससे पूरे इलाके में भारी प्रदूषण फैल गया है. जानकारी के मुताबिक, इस दूषित पानी से उगाई गई फसलें धीमे जहर की तरह काम कर रही हैं, जो समय के साथ गंभीर बीमारियों की वजह बन सकती हैं.

    काली हो चुकी है खेतों की मिट्टी
    मीडिया की टीम जब जयपुर की सांगानेर तहसील के शिकारपुरा और मुहाना समेत कई इलाकों में पहुंची, तो वहां काले रंग का पानी खेतों में पंप किया जा रहा था. इन खेतों में पत्तागोभी, बैंगन, पालक और लगभग हर तरह की मौसमी सब्जियों की खेती हो रही थी. कई जगहों पर इस गंदे पानी की वजह से मिट्टी का रंग भी ग्रे और काला हो चुका है. किसान सीताराम का कहना है कि इससे खाने वाली सभी फसलों को नुकसान हो रहा है, लेकिन जांच के लिए अब तक कोई अधिकारी नहीं आया है.

    ‘कई साल से छोड़ा जा रहा पानी, कोई कार्रवाई नहीं’
    जानकारी यह भी है कि कुछ फैक्ट्रियों में गंदे पानी को साफ करने की व्यवस्था जरूर है, लेकिन ज्यादातर फैक्ट्रियां बिना किसी सफाई के केमिकल और रंग मिला पानी सीधे नालों और जल स्रोतों में छोड़ रही हैं. इसका असर सीधे खेतों और फसलों पर पड़ रहा है.

    स्थानीय लोगों का कहना है कि सालों से फैक्ट्रियों का जहरीला पानी इन खेतों में छोड़ा जा रहा है, लेकिन अब तक इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है. एक फैक्ट्री कर्मचारी सिकंदर का दावा है कि उनके यहां गंदे पानी को साफ करने की व्यवस्था है और फिल्टर के बाद ही पानी बाहर छोड़ा जाता है. हालांकि, जमीनी हालात कुछ और ही कहानी बयान कर रहे हैं.

  • दिल्ली-NCR में GRAP-4 लागू, प्रदूषण संकट के बीच स्कूल हाइब्रिड मोड पर शिफ्ट…

    दिल्ली-NCR में GRAP-4 लागू, प्रदूषण संकट के बीच स्कूल हाइब्रिड मोड पर शिफ्ट…


    नई दिल्ली/ दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र NCR में वायु गुणवत्ता AQI का स्तर एक बार फिर ‘बेहद खराब’ Severe श्रेणी में पहुंचने के कारण स्थिति गंभीर हो गई है। प्रदूषण के खतरनाक स्तर को देखते हुए, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के तहत कार्यरत वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग CAQM ने तत्काल प्रभाव से ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान GRAP के सबसे सख्त चरण, यानी चरण 4 GRAP-4 को लागू करने का आदेश दिया है।

    प्रदूषण की स्थिति और GRAP-4 की आवश्यकता

    राजधानी दिल्ली के कई निगरानी स्टेशनों पर वायु गुणवत्ता सूचकांक AQI 450 के आंकड़े को पार कर गया है, जो ‘गंभीर’ श्रेणी को दर्शाता है। यह स्थिति न केवल स्वास्थ्य के लिए अत्यंत हानिकारक है, बल्कि इसे एक सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल के करीब माना जाता है। इस भयावह स्थिति से निपटने और प्रदूषण के खतरनाक स्रोतों पर तत्काल नियंत्रण लगाने के उद्देश्य से प्रशासन ने ये कड़े कदम उठाए हैं। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, आने वाले कुछ दिनों तक वायुमंडलीय स्थिरता और हवा की कम गति के कारण प्रदूषण के स्तर में किसी बड़े सुधार की संभावना कम है, जिसने स्थिति की गंभीरता को और बढ़ा दिया है।

    शिक्षा पर तत्काल प्रभाव: हाइब्रिड मोड की वापसी
    GRAP-4 के लागू होते ही, दिल्ली शिक्षा निदेशालय DoE ने छात्रों के स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए स्कूलों के लिए विस्तृत और सख्त दिशानिर्देश जारी किए हैं। इन दिशानिर्देशों का मुख्य फोकस कक्षा 9वीं से लेकर 11वीं तक के छात्रों की शिक्षा पद्धति में परिवर्तन लाना है:हाइब्रिड मोड: कक्षा 9वीं, 10वीं और 11वीं के छात्रों के लिए पढ़ाई अब हाइब्रिड मोड में आयोजित की जाएगी। इसका अर्थ है कि शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से संचालित होगी।

    स्कूलों पर लागू: यह नई व्यवस्था दिल्ली के सभी सरकारी, सहायता प्राप्त Aided और निजी Private स्कूलों पर समान रूप से लागू होगी। स्कूलों को यह सुनिश्चित करना होगा कि जो छात्र ऑनलाइन क्लास का विकल्प चुनते हैं, उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध हो। अन्य कक्षाएं: हालांकि, आदेश में 12वीं कक्षा के छात्रों और छोटी कक्षाओं 8वीं तक के लिए स्पष्ट निर्देश नहीं दिए गए हैं, लेकिन यह संकेत है कि सबसे अधिक संवेदनशील आयु वर्ग को घर से पढ़ने का विकल्प दिया जा रहा है। यह कदम छात्रों को अत्यधिक प्रदूषित वातावरण में बाहर निकलने और स्कूल आने-जाने से रोकने के लिए उठाया गया है।

    कार्यालयों और परिवहन पर सख्त नियंत्रण

    प्रदूषण के स्रोतों को कम करने के लिए कार्यस्थलों और परिवहन क्षेत्र पर भी महत्वपूर्ण पाबंदियां लगाई गई हैं:सरकारी कार्यालयों में उपस्थिति पर सीमा:कर्मचारी सीमा: सरकारी कार्यालयों में कर्मचारियों की उपस्थिति को सीमित कर दिया गया है। केवल 50 प्रतिशत कर्मचारी ही भौतिक रूप से कार्यालय में उपस्थित रहेंगे। वर्क फ्रॉम होम: शेष 50 प्रतिशत कर्मचारी ‘वर्क फ्रॉम होम’ WFH मोड पर कार्य करेंगे। इस व्यवस्था का लक्ष्य सड़क पर वाहनों की संख्या को कम करना है।

    निजी दफ्तरों को निर्देश:
    निजी दफ्तरों और प्रतिष्ठानों को भी सक्रिय रूप से फ्लेक्सिबल टाइमिंग Flexible Timings अपनाने और कर्मचारियों को अधिकतम संभव सीमा तक घर से काम Work From Home करने के लिए प्रोत्साहित करने का निर्देश दिया गया है। यह व्यवस्था भीड़भाड़ वाले समय में वाहनों के आवागमन को कम करने में सहायक होगी।

    परिवहन पर पाबंदियां:
    भारी वाहनों पर रोक: दिल्ली की सीमा में बाहरी राज्यों से आने वाले ट्रकों और अन्य भारी/मध्यम मालवाहक वाहनों आवश्यक सेवाओं को छोड़कर के प्रवेश पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है। यह कदम भारी वाहनों से होने वाले उत्सर्जन को रोकने के लिए महत्वपूर्ण है। निर्माण कार्य पर पाबंदी: GRAP-4 के तहत पहले से ही गैर-आवश्यक निर्माण और विध्वंस गतिविधियों पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है।

    आगे की राह
    प्रदूषण नियंत्रण के लिए उठाए गए ये कदम अल्पकालिक राहत प्रदान करने के उद्देश्य से हैं। दिल्ली-NCR के नागरिकों को भी दिशानिर्देशों का सख्ती से पालन करने की सलाह दी गई है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने नागरिकों से अपील की है कि वे अत्यंत आवश्यक न होने पर घर से बाहर न निकलें और N-95 जैसे मास्क का उपयोग करें। प्रशासन की ओर से लोगों से अपील की गई है कि वे निजी वाहनों के इस्तेमाल को कम करें और सार्वजनिक परिवहन, साइकिलिंग या पैदल चलने को प्राथमिकता दें, ताकि इस राष्ट्रीय संकट से मिलकर लड़ा जा सके।

  • इंदौर में 1450 बेड के नए एमवाय अस्पताल का भूमिपूजनलागत 713 करोड़ रुपये

    इंदौर में 1450 बेड के नए एमवाय अस्पताल का भूमिपूजनलागत 713 करोड़ रुपये


    इंदौर । इंदौर के सबसे बड़े सरकारी अस्पतालएमवाय हॉस्पिटलके नए भवन का भूमिपूजन रविवार को किया गया। इस नई इमारत में 1450 बेड की क्षमता होगीजो शहर के बढ़ते स्वास्थ्य सेवा आवश्यकताओं को पूरा करने में मदद करेगा। नया सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल नौ मंजिलों में बनेगाजिसमें एक तल मंजिल भी शामिल होगी। इसके साथ ही नर्सिंग होस्टलपार्किंग और अन्य आवश्यक सुविधाओं का भी निर्माण किया जाएगा।

    इस ऐतिहासिक भूमिपूजन कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भाग लिया। यह दूसरी बार है जब मुख्यमंत्री एमजीएम मेडिकल कॉलेज परिसर में आए हैं। नए अस्पताल भवन के निर्माण के लिए 713 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत आएगीजिसमें जीएसटी और अन्य टैक्स शामिल हैं। इसमें से 570 करोड़ रुपये अस्पताल भवन के निर्माण के लिए होंगे और बाकी का खर्च पार्किंगनर्सिंग होस्टल आदि पर होगा।

    वर्तमान मेंएमवाय अस्पताल का संचालन एक पुरानी बिल्डिंग से हो रहा हैजिसमें 1150 बेड की क्षमता है। यहां रोजाना लगभग 4,000 मरीज इलाज के लिए आते हैंऔर विभिन्न प्रकार की बीमारियों का इलाज किया जाता है। हालांकिपुरानी बिल्डिंग में दीवारों में सीलिंग की समस्या उत्पन्न हो रही हैजो अब मरम्मत के लिए चुनौती बन गई है। इस कारण नए अस्पताल भवन का निर्माण अत्यंत आवश्यक हो गया था।

    नए अस्पताल में आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं के साथ-साथ सुपर स्पेशियलिटी सेवाएं भी प्रदान की जाएंगीजिससे इंदौर और आसपास के क्षेत्रों के मरीजों को उच्च स्तरीय इलाज मिल सकेगा। इसके अतिरिक्त  अस्पताल के पास पर्याप्त पार्किंग और कर्मचारियों के लिए नर्सिंग होस्टल जैसी सुविधाएं भी होंगीजो मरीजों और स्वास्थ्यकर्मियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए तैयार की गई हैं।

    एमवाय अस्पताल का नया भवन न केवल इंदौर बल्कि पूरे मध्यप्रदेश के स्वास्थ्य ढांचे को एक नई दिशा देने वाला कदम साबित होगा। यह अस्पताल मरीजों को बेहतर इलाज के साथ-साथ चिकित्सा क्षेत्र में रोजगार के अवसर भी प्रदान करेगा।

  • भोपाल में साढ़े चार लाख में से 1.30 लाख मतदाताओं को नोटिस, नाम काटने की प्रक्रिया तेज

    भोपाल में साढ़े चार लाख में से 1.30 लाख मतदाताओं को नोटिस, नाम काटने की प्रक्रिया तेज


    भोपाल । भोपाल में सात विधानसभा क्षेत्रों में एक सप्ताह पहले शुरू किए गए विशेष गहन पुनरीक्षण SIR के बाद मतदाता सूची में नाम कटने वालों की संख्या में वृद्धि हो गई है। वर्तमान में, इन मतदाताओं की संख्या बढ़कर 4 लाख 45 हजार 32 हो गई है जिसमें हर 24 घंटे में करीब 1500 और मतदाताओं का नाम कटने का आंकड़ा सामने आ रहा है। अब इन नामों को बिना किसी नोटिस के सीधे मतदाता सूची से हटा दिया जाएगा। यह प्रक्रिया जिले के चुनाव कार्यालय के निर्देशों के अनुसार चल रही है।

    इस विशेष पुनरीक्षण के दौरान मुख्य रूप से मृतक अनुपस्थित स्थानांतरित या दोहरी पंजीकरण के कारण नाम कटने की संभावना है। जिले के निर्वाचन कार्यालय ने बीएलओ को यह निर्देश दिए हैं कि वे मृत, अनुपस्थित और स्थानांतरित मतदाताओं की जानकारी इकट्ठा कर सूची से बाहर करें। इसके अलावा, ‘नो मैपिंग’ वाले मतदाताओं के आंकड़े भी जुटाए जा रहे हैं और इस वर्ग के मतदाताओं के नाम सीधे अनकलेक्टेबल श्रेणी में डाले जा रहे हैं।

    यह विशेष अभियान इस उद्देश्य से चलाया जा रहा है ताकि चुनावी प्रक्रिया को पारदर्शी और सटीक रखा जा सके। जिला निर्वाचन कार्यालय ने सभी बीएलओ से यह सुनिश्चित करने के लिए कहा है कि बिना किसी गलतफहमी के किसी का भी नाम न कटे।इस पुनरीक्षण के तहत, 85 वार्डों में मतदाताओं की सुनवाई की जाएगी। यह प्रक्रिया 18 दिसंबर तक जारी रहेगी जिसमें मतदाता अपनी नागरिकता को प्रमाणित करने के लिए दस्तावेज़ पेश करेंगे।

    जिला निर्वाचन कार्यालय ने 23 दिसंबर को ड्रॉफ्ट रोल जारी करने की तारीख तय की है जिसके बाद अंतिम नामों की सूची तैयार की जाएगी।दूसरी ओर, बैरसिया तहसील में सुनवाई की प्रक्रिया अलग से की जाएगी। जबकि शेष मतदान क्षेत्रों में वार्ड स्तर पर ही सुनवाई की जाएगी, जहां पर संबंधित मतदाता अपनी स्थिति का स्पष्टिकरण देंगे।

    यह विशेष पुनरीक्षण इस बात को सुनिश्चित करेगा कि चुनावी प्रक्रिया में शामिल हर मतदाता का नाम सही तरीके से और निष्पक्ष रूप से लिस्ट में हो। भोपाल में सात विधानसभा क्षेत्रों में एक सप्ताह पहले शुरू किए गए विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान, 1.30 लाख मतदाताओं के नाम कटने की संभावना है। बीएलओ द्वारा मृत, अनुपस्थित स्थानांतरित और अन्य कारणों से नाम हटाए जाएंगे। 18 दिसंबर तक दस्तावेज़ जमा होंगे और 23 दिसंबर को ड्रॉफ्ट रोल जारी किया जाएगा।

  • 22KM तक पीछा कर युवक पर जानलेवा हमला: भोपाल में पुरानी रंजिश में मारी गोली पत्नी-बहन को भी चाकू

    22KM तक पीछा कर युवक पर जानलेवा हमला: भोपाल में पुरानी रंजिश में मारी गोली पत्नी-बहन को भी चाकू


    भोपाल  के ईटखेड़ी में एक दहला देने वाली वारदात सामने आई है जहाँ पुरानी रंजिश में एक युवक को बेरहमी से गोली मारी गई और चाकुओं से गोदा गया। दर्दनाक घटनाक्रम: हमले का शिकार हुए दानिश अली अब होश में हैं और उन्होंने घटना का पूरा ब्यौरा दिया। उन्होंने बताया कि शुक्रवार देर रात वह पत्नी के साथ दोस्त की रिसेप्शन पार्टी से लौट रहे थे। ईटखेड़ी कलारी के पास जब उन्होंने अपनी स्कॉर्पियो रोकी तभी पहले दो बाइक सवार युवक आए और संदेह होने पर वह कार में बैठ गए। इसके तुरंत बाद दो और बाइकों पर सवार होकर आए करीब आधा दर्जन आरोपियों ने उन्हें घेर लिया।

    दानिश के मुताबिक आरोपियों ने उन्हें कार से घसीटकर बाहर निकाला और तीन से अधिक राउंड फायरिंग की जिसमें दो गोलियां उन्हें लगीं। इसके बाद उन पर चाकुओं से भी कई वार किए गए जिससे उन्हें हाथ और पांव में गंभीर चोटें आईं। पत्नी को भी लगी चोट: हमले के दौरान दानिश की पत्नी मदद के लिए चिल्लाती रहीं लेकिन दहशत के कारण राहगीर आगे नहीं आए। इस दौरान बचाव करने आईं उनकी पत्नी खबर के एक हिस्से में बहन का भी ज़िक्र है के हाथ में भी चाकू लग गया। भागते समय आरोपियों ने धमकाते हुए कहा हमने बोला था गोली मारेंगे गोली मार दी।

    22KM तक किया पीछा: दानिश ने बताया कि उनका आरोपियों से पुराना झगड़ा था जो स्टेशन पर रहने वाले रूसी से हुआ था। उनके ही साथियों ने यह हमला किया। दानिश के अनुसार हमलावर करीब 22 किलोमीटर तक उनका पीछा करते रहे और पार्टी से निकलते ही मौका देखकर हमला कर दिया। पुलिस कार्रवाई और पीड़ित की हालत: शनिवार देर रात पुलिस ने आरोपी शाहबेज और फरदीन को हिरासत में लिया है। फरार चल रहे शन्नू और जुबैर समेत अन्य आरोपियों की तलाश के लिए दो टीमें लगाई गई हैं। सर्जरी के बाद दानिश के पांव से गोली निकाली गई है और उनकी हालत में सुधार हो रहा है हालांकि वे डॉक्टरों की निगरानी में हैं। उन्हें चाकू से एक दर्जन से अधिक वार किए गए हैं और अलग-अलग जख्मों पर करीब 42 टांके लगाए गए हैं।

  • मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पूर्व रक्षा मंत्री स्व. मनोहर पर्रिकर की जयंती पर किया नमन

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पूर्व रक्षा मंत्री स्व. मनोहर पर्रिकर की जयंती पर किया नमन


    मध्य प्रदेशमुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गोवा के पूर्व मुख्यमंत्री और भारत के पूर्व रक्षा मंत्री स्व. मनोहर पर्रिकर की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने स्व. पर्रिकर के जीवन और उनके कार्यों को याद करते हुए कहा कि उनका जीवन राष्ट्र सेवा, अनुशासन, और सादगी का प्रतीक था, जो हमेशा युवाओं को प्रेरणा देता रहेगा।

    स्व. मनोहर पर्रिकर एक आदर्श नेता थे जिनका जीवन उच्च नैतिकता और कर्तव्यनिष्ठा से ओत-प्रोत था। उनका कार्यकाल न केवल गोवा की जनता के लिए, बल्कि पूरे देश के लिए प्रेरणादायक था। उन्होंने रक्षा मंत्री के रूप में देश की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूती प्रदान की और हमेशा अपनी सादगी और ईमानदारी से पहचाने गए। उनका शासनकाल देश की रक्षा, सुरक्षा और रणनीतिक मामलों में महत्वपूर्ण था, जिसमें उन्होंने कई अहम निर्णय लिए।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा, “स्व. पर्रिकर का जीवन हमें यह सिखाता है कि सेवा का मतलब केवल कागजी योजनाएं नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर काम करना और जनता की समस्याओं को दूर करना है। उनका व्यक्तिगत जीवन भी अत्यंत साधारण और अनुशासनप्रिय था, जो उनकी महानता का प्रतीक है। वे हमेशा दूसरों के लिए प्रेरणा बनकर रहते थे।”

    उन्होंने आगे कहा, “स्व. पर्रिकर का समर्पण देश और समाज के प्रति अनमोल था। उन्होंने हमेशा अपनी कर्तव्यनिष्ठा से देश की सेवा की। चाहे वह रक्षा मंत्रालय का कार्यकाल हो या गोवा राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में उनका कार्यकाल, उन्होंने हमेशा अपने फैसलों में पारदर्शिता और सादगी का पालन किया।”

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्व. पर्रिकर के द्वारा किए गए कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि उनका योगदान भारतीय राजनीति और रक्षा क्षेत्र में अविस्मरणीय रहेगा। उन्होंने बताया कि स्व. पर्रिकर का जीवन युवाओं के लिए प्रेरणा है और उनकी सरलता, ईमानदारी और अनुशासन को हम सभी को अपने जीवन में आत्मसात करना चाहिए।

    स्व. मनोहर पर्रिकर की जयंती पर आयोजित इस श्रद्धांजलि कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए और उनके योगदान को नमन किया। इसके साथ ही, मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर युवाओं से अपील की कि वे स्व. पर्रिकर के अनुशासन और देश सेवा के मार्ग को अपने जीवन का हिस्सा बनाएं, ताकि उनकी महानता को आगे बढ़ाया जा सके।

    स्व. पर्रिकर का योगदान न केवल उनकी राजनीतिक उपलब्धियों में, बल्कि उनके दृढ़ नायकत्व और देशभक्ति में भी नजर आता है। उनके योगदान को कभी नहीं भुलाया जा सकता और उनका आदर्श हमेशा हमारे साथ रहेगा।

  • मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने संसद भवन पर आतंकी हमले में शहीद जवानों को श्रद्धांजलि दी

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने संसद भवन पर आतंकी हमले में शहीद जवानों को श्रद्धांजलि दी


    मध्य प्रदेश/3 दिसंबर 2001 को संसद भवन पर हुआ आतंकी हमला भारतीय लोकतंत्र पर एक बड़ा हमला था, जिसमें आतंकियों ने संसद भवन में घुसने का प्रयास किया और भारी गोलाबारी शुरू कर दी। इस हमले में सुरक्षा बलों के जवानों ने अदम्य साहस और वीरता का परिचय दिया। कई जवानों ने अपनी जान की आहुति देकर संसद भवन और देश की सुरक्षा को सुनिश्चित किया।
    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस अवसर पर शहीद जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि यह घटना भारतीय इतिहास में एक काले दिन के रूप में याद की जाती है। डॉ. यादव ने यह भी कहा कि आतंकवाद का सामना करते हुए हमारे वीर जवानों ने न केवल अपने प्राणों की आहुति दी, बल्कि देश के स्वाभिमान की रक्षा भी की। यह बलिदान देशवासियों के लिए हमेशा प्रेरणा का स्रोत रहेगा।
    मुख्यमंत्री ने कहा, “हमारे पराक्रमी जवानों ने उस समय आतंकवादियों को कड़ी टक्कर दी और आतंकियों को मौके पर ही ढेर कर दिया। आज पूरा देश उन जवानों की वीरता को याद कर रहा है। यह घटना हम सभी को यह याद दिलाती है कि देश की रक्षा करने वाले सुरक्षा बलों के जवान अपने प्राणों की आहुति देने से भी पीछे नहीं हटते।
    शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए मुख्यमंत्री ने उनके साहस और बलिदान को नमन किया और कहा कि उनका योगदान देश के लिए अविस्मरणीय है। “हम सभी शहीदों की वीरता को सलाम करते हैं, और उनकी बलिदान की भावना को अपने दिलों में हमेशा जिंदा रखते हैं।”
    यह हमला उस समय हुआ था जब संसद में एक सत्र चल रहा था और इसमें कई महत्वपूर्ण नेता उपस्थित थे। आतंकवादियों का मकसद संसद में घुसकर बड़े पैमाने पर आतंक फैलाना था, लेकिन सुरक्षा बलों की तत्परता और साहस ने उन्हें नाकाम कर दिया। इस हमले में 9 सुरक्षा कर्मी और 5 आतंकवादी मारे गए थे, जिनमें से कई जवानों ने अपने प्राणों की आहुति दी थी।
    मुख्यमंत्री ने कहा कि यह शहीद जवानों के परिवारों के लिए सबसे कठिन समय था, और उनके परिवारों का संघर्ष और बलिदान भी कभी भुलाया नहीं जाएगा। उन्होंने शहीदों के परिवारों के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त की और कहा कि राज्य सरकार हर संभव मदद देने के लिए तत्पर है।
    आज पूरा देश उन जवानों की वीरता को याद कर रहा है जिन्होंने अपने प्राणों की आहुति देकर हमें सुरक्षा प्रदान की। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर आतंकवाद के खिलाफ एकजुट होकर लड़ने का संकल्प लिया और कहा कि हम सभी को इस प्रकार के हमलों को नाकाम करने के लिए हमेशा तैयार रहना चाहिए।

  • सर्दियों में कर्ली बालों की खास देखभाल: इस होममेड तेल से मिलेगा नेचुरल पोषण

    सर्दियों में कर्ली बालों की खास देखभाल: इस होममेड तेल से मिलेगा नेचुरल पोषण


    नई दिल्ली ।सर्दियों के मौसम में कर्ली बालों को खास देखभाल की जरूरत होती है। ठंडी हवा कम नमी और रूखापन इन बालों की मुख्य समस्याएं बन जाते हैं। इसके परिणामस्वरूप कर्ली बाल बेजान फ्रिज़ी और टूटने लगते हैं। लेकिन अब आपको महंगे हेयर प्रोडक्ट्स पर खर्च करने की जरूरत नहीं है। ब्यूटी एक्सपर्ट के अनुसार एक आसान और किफायती होममेड तेल कर्ली बालों को प्राकृतिक रूप से पोषण देने में मदद करता है।

    कर्ली बालों को अतिरिक्त पोषण की आवश्यकता होती है

    दिल्ली के शाहदरा स्थित Colorrs Salon की ओनर और ब्यूटी एक्सपर्ट रेणु माहेश्वरी बताती हैं कि कर्ली बालों की बनावट ऐसी होती है कि स्कैल्प का नैचुरल ऑयल बालों की लंबाई तक नहीं पहुंच पाता जिससे बाल ज्यादा ड्राई उलझे हुए और बेजान नजर आते हैं। इस समस्या को दूर करने के लिए कर्ली बालों को अतिरिक्त पोषण की जरूरत होती है जो उन्हें मुलायम मजबूत और खूबसूरत बनाए।

    होममेड तेल की सामग्री

    यह होममेड तेल बालों को गहरी नमी और पोषण देने के लिए तैयार किया जाता है। इसके लिए कुछ साधारण सामग्री की आवश्यकता होती है विटामिन ई कैप्सूल बालों को डैमेज से बचाता है और उन्हें स्वस्थ रखता है।बादाम का तेल बालों में नमी बनाए रखने में मदद करता है।
    करी पत्ता बालों की ग्रोथ को बढ़ावा देता है और स्कैल्प को स्वस्थ बनाता है।तिल का तेल स्कैल्प को मजबूत करता है और बालों को पोषण देता है।

    तेल बनाने का तरीका

    यह होममेड तेल तैयार करने की प्रक्रिया बेहद सरल है सबसे पहले एक कटोरी में विटामिन ई कैप्सूल का तेल निकाल लें। अब इसमें थोड़े से करी पत्ते और तिल डालें और अच्छे से मिक्स करें। चाहें तो इस मिश्रण में थोड़ा सा बादाम का तेल भी डाल सकती हैं।अब आपका होममेड कर्ली हेयर ऑयल तैयार है।

    तेल का सही तरीका

    इस तेल को बालों में लगाने का तरीका बहुत आसान है हफ्ते में दो बार इस तेल को हल्के हाथों से स्कैल्प और बालों में लगाएं।इसे रातभर बालों में छोड़ दें या कम से कम एक घंटे तक इसे लगा रहने दें।इसके बाद माइल्ड शैंपू से बाल धो लें।इस तेल का नियमित इस्तेमाल करने से कर्ली बालों में नमी बनी रहती है फ्रिज़ीनेस कम होती है और कर्ल्स ज्यादा शाइनी और डिफाइंड दिखते हैं।

    सर्दियों में कर्ली बालों की देखभाल के लिए यह आसान और किफायती होममेड तेल एक बेहतरीन उपाय है। इस तेल का इस्तेमाल करने से बालों को प्राकृतिक पोषण मिलता है जिससे वे मुलायम मजबूत और खूबसूरत बनते हैं। इस उपाय को अपनाकर आप बिना किसी साइड इफेक्ट के हेल्दी कर्ली हेयर पा सकती हैं।

  • छात्र-अभिभावकों को राहत दिल्ली सरकार ने प्राइवेट स्कूल फीस पर कसा शिकंजा

    छात्र-अभिभावकों को राहत दिल्ली सरकार ने प्राइवेट स्कूल फीस पर कसा शिकंजा


    नई दिल्ली।दिल्ली सरकार ने प्राइवेट स्कूलों द्वारा मनमानी फीस बढ़ोतरी पर कड़ा कदम उठाते हुए नया कानून लागू किया है। दिल्ली स्कूल शिक्षा शुल्क निर्धारण एवं विनियमन में पारदर्शिता धिनियम-2025 और इसके संबंधित नियम अब पूरी तरह से लागू हो गए हैं। इस कानून के तहत अब कोई भी निजी स्कूल बिना सरकारी मंजूरी और निर्धारित प्रक्रिया के अपनी फीस नहीं बढ़ा सकेगा।

    शिक्षा मंत्री आशीष सूद का बयान

    दिल्ली के शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने इस नए कानून की जानकारी दी और इसे 27 साल बाद आया एक ऐतिहासिक सुधार बताया। उन्होंने कहा कि पिछले कई दशकों से निजी स्कूलों की फीस बढ़ोतरी अभिभावकों के लिए सबसे बड़ी परेशानी रही है लेकिन पहले की सरकारें इस पर कोई ठोस कदम नहीं उठा पाई थीं। मौजूदा सरकार ने इस मुद्दे पर जल्दी और प्रभावी कदम उठाया है जिससे यह साफ हो गया कि सरकार अभिभावकों की समस्याओं को गंभीरता से ले रही है।

    आशीष सूद ने यह भी स्पष्ट किया कि शिक्षा कोई कारोबार नहीं बल्कि यह बच्चों का अधिकार है। अब स्कूलों द्वारा फीस वृद्धि की जांच और वित्तीय स्थिति की समीक्षा शिक्षा विभाग करेगा और बिना मंजूरी फीस बढ़ाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

    अभिभावकों की भागीदारी अनिवार्य

    नए कानून में अभिभावकों को भी बड़ी ताकत दी गई है। फीस बढ़ाने की प्रक्रिया में अभिभावकों की भागीदारी अनिवार्य कर दी गई है। अब सभी निजी स्कूलों को अपनी फीस संरचना आय-व्यय का विवरण और वित्तीय जरूरतें सार्वजनिक रूप से घोषित करनी होंगी। इसके अलावा एक मजबूत शिकायत निवारण प्रणाली भी बनाई जाएगी जिससे अभिभावक सीधे अपनी बात रख सकेंगे और पारदर्शिता सुनिश्चित हो सकेगी।

    निजी स्कूलों पर विशेष निगरानी और कठोर कार्रवाई

    दिल्ली में लंबे समय से निजी स्कूल हर साल ट्यूशन फीस एडमिशन फीस और अन्य शुल्कों में भारी बढ़ोतरी कर रहे थे। 2007 और 2012 में फीस नियंत्रण के प्रयास जरूर किए गए थे लेकिन कानूनी खामियों के कारण वे ज्यादा प्रभावी नहीं हो पाए। अब 2025 का यह नया कानून उन कमियों को दूर करने का दावा करता है।

    सरकार ने कहा है कि आने वाले महीनों में सभी निजी स्कूलों की विशेष निगरानी की जाएगी और जो स्कूल नियमों का उल्लंघन करेंगे उनके खिलाफ कठोर कदम उठाए जाएंगे। यह कदम यह सुनिश्चित करेगा कि स्कूलों की फीस वृद्धि में पारदर्शिता हो और अभिभावकों के अधिकारों का उल्लंघन न हो।

    इस कानून से दिल्ली के लाखों अभिभावकों को राहत मिलने की उम्मीद है। अब निजी स्कूलों में फीस वृद्धि के मामले में पारदर्शिता होगी अभिभावकों का सक्रिय रूप से इसमें योगदान रहेगा और शिक्षा व्यवस्था अधिक जवाबदेह ईमानदार और सुरक्षित बनेगी। यह कदम निश्चित तौर पर प्राइवेट स्कूलों में मनमानी फीस बढ़ोतरी की समस्या को जड़ से खत्म करने की दिशा में अहम साबित होगा।

  • दिल्ली में निजी स्कूलों की मनमानी फीस पर लगेगी लगाम सरकार ने लागू किया नया कानून

    दिल्ली में निजी स्कूलों की मनमानी फीस पर लगेगी लगाम सरकार ने लागू किया नया कानून


    नई दिल्ली ।दिल्ली में निजी स्कूलों की मनमानी फीस वृद्धि पर अब दिल्ली सरकार ने कड़ा कदम उठाया है। दिल्ली सरकार ने दिल्ली स्कूल शिक्षा शुल्क निर्धारण एवं विनियमन में पारदर्शिता अधिनियम-2025 और उससे जुड़े नियमों को पूरी तरह से लागू कर दिया है। इस नए कानून के तहत अब कोई भी निजी स्कूल अपनी फीस बढ़ाने से पहले सरकारी मंजूरी और पूरी पारदर्शिता सुनिश्चित करेगा।

    शिक्षा मंत्री का बयान

    दिल्ली के शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने इस निर्णय की जानकारी दी और इसे 27 साल बाद आया एक ऐतिहासिक सुधार बताया। उन्होंने कहा कि कई दशकों से निजी स्कूलों की फीस बढ़ोतरी अभिभावकों के लिए सबसे बड़ी समस्या रही थी। हालांकि पहले की सरकारें इस मुद्दे पर ठोस कदम नहीं उठा सकीं लेकिन वर्तमान सरकार ने यह कानून जल्दी लागू कर यह साबित कर दिया है कि वह अभिभावकों की समस्याओं को गंभीरता से ले रही है।

    शिक्षा मंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा शिक्षा कोई कारोबार नहीं बल्कि बच्चों का अधिकार है। उन्होंने यह भी बताया कि सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि कोई भी निजी स्कूल बिना ठोस कारण के और बिना मंजूरी के फीस न बढ़ा सके। अब शिक्षा विभाग स्कूलों द्वारा प्रस्तावित फीस वृद्धि की जांच करेगा उनकी वित्तीय स्थिति का मूल्यांकन करेगा और पूरी प्रक्रिया की निगरानी करेगा। अगर कोई स्कूल बिना मंजूरी के फीस बढ़ाता है तो उस पर तुरंत सख्त कार्रवाई की जाएगी।

    अभिभावकों की भागीदारी अनिवार्य

    इस नए कानून के तहत अभिभावकों की भागीदारी भी अनिवार्य कर दी गई है। अब फीस बढ़ाने की प्रक्रिया में अभिभावकों को शामिल किया जाएगा। हर निजी स्कूल को अपनी फीस संरचना आय-व्यय का विवरण और वित्तीय जरूरतें सार्वजनिक रूप से घोषित करनी होंगी। इसके अलावा एक मजबूत शिकायत निवारण प्रणाली भी बनाई जाएगी जिससे अभिभावक सीधे अपनी शिकायतें और सुझाव दे सकेंगे।

    निजी स्कूलों की निगरानी

    पिछले कई सालों से दिल्ली में निजी स्कूल हर साल ट्यूशन फीस एडमिशन फीस और अन्य शुल्कों में भारी बढ़ोतरी कर रहे थे। इस पर 2007 और 2012 में कुछ प्रयास जरूर किए गए थे लेकिन कानूनी खामियों के कारण वे ज्यादा प्रभावी नहीं हो पाए। अब 2025 का यह नया कानून उन सभी खामियों को दूर करने का दावा करता है।

    सरकार ने कहा है कि आने वाले महीनों में सभी निजी स्कूलों की विशेष निगरानी की जाएगी। जो स्कूल नियमों का उल्लंघन करेंगे उनके खिलाफ कठोर कदम उठाए जाएंगे। यह कदम यह सुनिश्चित करेगा कि निजी स्कूलों की फीस बढ़ोतरी में पारदर्शिता बनी रहे और अभिभावकों के अधिकारों का उल्लंघन न हो।

    दिल्ली सरकार के इस नए कानून से लाखों अभिभावकों को राहत मिलने की उम्मीद है। अब निजी स्कूल अपनी फीस बढ़ाने से पहले पूरी पारदर्शिता और सरकारी मंजूरी हासिल करेंगे। इस कदम से दिल्ली की शिक्षा व्यवस्था और भी जवाबदेह ईमानदार और पारदर्शी बनेगी। यह कानून न केवल अभिभावकों के लिए राहत का कारण बनेगा बल्कि यह शिक्षा क्षेत्र में सुधार की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगा।