Author: bharati

  • हामिद अंसारी के नेहरू वाले बयान पर BJP का कांग्रेस पर हमला, सुधांशु त्रिवेदी ने लगाए वैचारिक बदलाव के आरोप

    हामिद अंसारी के नेहरू वाले बयान पर BJP का कांग्रेस पर हमला, सुधांशु त्रिवेदी ने लगाए वैचारिक बदलाव के आरोप

    नई दिल्ली । पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी के जवाहरलाल नेहरू से जुड़े एक पुराने कथन के संदर्भ के बाद भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच राजनीतिक बहस तेज हो गई है। भाजपा सांसद और राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने 21 सितंबर को प्रेस कॉन्फ्रेंस में अंसारी के बयान को कांग्रेस की मौजूदा वैचारिक दिशा से जोड़ते हुए कई सवाल उठाए।

    विवाद की शुरुआत अंसारी के उस बयान से हुई, जिसमें उन्होंने संविधान विशेषज्ञ और लेखक ए.जी. नूरानी की 2019 में प्रकाशित पुस्तक ‘द आरएसएस: ए मेनेस टू इंडिया’ का हवाला दिया। अंसारी ने पुस्तक में दर्ज एक संदर्भ के आधार पर नेहरू के विचारों का उल्लेख किया था। यह संदर्भ तत्कालीन विदेश सचिव जगत सिंह गुंडेविया द्वारा दर्ज किए गए एक आधिकारिक रिकॉर्ड से जुड़ा बताया गया है।

    अंसारी के अनुसार, उस रिकॉर्ड में नेहरू के हवाले से कहा गया था कि भारत के लिए बड़ा खतरा कम्युनिज्म नहीं, बल्कि हिंदू दक्षिणपंथी सांप्रदायिकता है। अंसारी ने यह बात नागरिक राष्ट्रवाद और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद से जुड़े व्यापक संदर्भ में रखी थी।

    अंसारी के बयान के बाद भाजपा की ओर से तीखी प्रतिक्रिया सामने आई। सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि अंसारी ने जिस पुस्तक और नेहरू के कथन का हवाला दिया, उससे कांग्रेस की मौजूदा विचारधारा पर सवाल उठते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि आज की कांग्रेस अति-वामपंथ की दिशा में आगे बढ़ गई है।

    त्रिवेदी ने अपने बयान में कांग्रेस को ‘मुस्लिम लीग माओइस्ट कांग्रेस’ कहा। उन्होंने यह भी कहा कि अंसारी के संदर्भ से यह बात सामने आती है कि नेहरू के दौर में कम्युनिज्म को भी एक खतरे के रूप में देखा जाता था। इसी आधार पर उन्होंने कांग्रेस की वर्तमान राजनीतिक दिशा को लेकर सवाल खड़े किए।

    भाजपा नेता ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के राजनीतिक विमर्श को भी इस बहस से जोड़ते हुए निशाना साधा। उनका कहना था कि राहुल गांधी की ओर से व्यक्त किए जाने वाले विचारों को नेहरू के राजनीतिक संदर्भ से जोड़कर देखा जाना चाहिए। यह टिप्पणी भाजपा और कांग्रेस के बीच जारी वैचारिक बहस का हिस्सा बन गई है।

    त्रिवेदी ने केरल में कांग्रेस और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के राजनीतिक गठबंधन का भी उल्लेख किया। उन्होंने मुस्लिम लीग की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और मोहम्मद इस्माइल से जुड़े राजनीतिक इतिहास का हवाला देते हुए कांग्रेस के मौजूदा गठबंधन पर सवाल उठाए।

    उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि यदि आज की इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग को जिन्ना की मुस्लिम लीग से अलग पहचान के रूप में देखा जाता है, तो कांग्रेस को भी उसके ऐतिहासिक राजनीतिक संदर्भ से अलग करके देखने पर सवाल उठ सकते हैं।

    इस पूरे विवाद का केंद्र नेहरू से जुड़ा वह ऐतिहासिक कथन है, जिसे हामिद अंसारी ने ए.जी. नूरानी की पुस्तक के हवाले से सामने रखा। भाजपा ने इसे कांग्रेस की वैचारिक दिशा पर हमला करने के आधार के रूप में इस्तेमाल किया है। वहीं, इस बहस में नेहरू के कथन के ऐतिहासिक संदर्भ और वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों को लेकर अलग-अलग दृष्टिकोण सामने आए हैं।

    नेहरू के पुराने कथन से शुरू हुई यह राजनीतिक बहस अब कांग्रेस की वर्तमान विचारधारा, नागरिक राष्ट्रवाद, हिंदू दक्षिणपंथी राजनीति और कांग्रेस के राजनीतिक गठबंधनों तक पहुंच गई है। हामिद अंसारी की टिप्पणी और सुधांशु त्रिवेदी की प्रतिक्रिया ने इस मुद्दे को मौजूदा राजनीतिक विमर्श में चर्चा का विषय बना दिया है।

  • एनएसई आईपीओ के सब्सक्रिप्शन का आज आखिरी दिन, ग्रे मार्केट प्रीमियम गिरकर 59 रुपये पर पहुंचा

    एनएसई आईपीओ के सब्सक्रिप्शन का आज आखिरी दिन, ग्रे मार्केट प्रीमियम गिरकर 59 रुपये पर पहुंचा

    नई दिल्ली ।नेशनल स्टॉक एक्सचेंज यानी एनएसई के आईपीओ में निवेश के लिए सोमवार को आखिरी मौका है। सब्सक्रिप्शन के अंतिम दिन इश्यू के ग्रे मार्केट प्रीमियम यानी जीएमपी में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। मौजूदा स्थिति में जीएमपी 60 रुपये के स्तर से नीचे फिसलकर 59 रुपये प्रति शेयर पर आ गया है। यह इश्यू प्राइस के मुकाबले करीब 3.31 प्रतिशत का प्रीमियम दर्शाता है।

    एनएसई के आईपीओ के ग्रे मार्केट प्रीमियम में पिछले कुछ दिनों के दौरान लगातार कमजोरी देखने को मिली है। 11 सितंबर को प्राइस बैंड की घोषणा के बाद जीएमपी करीब 218 रुपये प्रति शेयर के स्तर पर था। इसके बाद इसमें लगातार गिरावट दर्ज की गई। 17 सितंबर को जब आईपीओ सब्सक्रिप्शन के लिए खुला था, तब ग्रे मार्केट प्रीमियम 142 रुपये प्रति शेयर या करीब 7.96 प्रतिशत था।

    अब अंतिम दिन तक जीएमपी घटकर 59 रुपये रह गया है। हालांकि, ग्रे मार्केट प्रीमियम को आधिकारिक बाजार संकेतक नहीं माना जाता है। यह आईपीओ के इश्यू प्राइस से ऊपर अनौपचारिक बाजार में मिलने वाले प्रीमियम को दर्शाता है। इसलिए जीएमपी का मौजूदा स्तर शेयर की वास्तविक लिस्टिंग कीमत की गारंटी नहीं देता।

    एनएसई ने आईपीओ के लिए 1,700 रुपये से 1,785 रुपये प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय किया है। ऊपरी प्राइस बैंड के आधार पर इश्यू का आकार 22,561.57 करोड़ रुपये है। इस आईपीओ में कुल 12.64 करोड़ शेयर पेश किए जा रहे हैं।

    यह आईपीओ पूरी तरह ऑफर फॉर सेल यानी ओएफएस है। इसका मतलब है कि शेयरों की बिक्री से जुटाई जाने वाली रकम कंपनी के पास नहीं जाएगी, बल्कि मौजूदा निवेशकों को प्राप्त होगी। ऐसे में आईपीओ के जरिए कंपनी के कारोबार में सीधे नई पूंजी का प्रवेश नहीं होगा।

    निवेशकों के बीच एनएसई के वित्तीय प्रदर्शन को लेकर भी चर्चा है। वित्त वर्ष 2026 में ऑपरेशन से कंपनी की आय 16,601.31 करोड़ रुपये रही। यह वित्त वर्ष 2025 में दर्ज 17,140.67 करोड़ रुपये की आय से कम है। इस तरह सालाना आधार पर ऑपरेशन से आय में तीन प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज हुई।

    कंपनी की आय के प्रमुख स्रोतों में शामिल ट्रांजैक्शन चार्जेज में भी कमी आई है। समीक्षा अवधि के दौरान ट्रांजैक्शन चार्जेज से प्राप्त आय 13,635.76 करोड़ रुपये से घटकर 13,057.01 करोड़ रुपये रह गई। यह सालाना आधार पर करीब चार प्रतिशत की गिरावट है।

    आईपीओ के अंतिम दिन जीएमपी में आई कमी और कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन में दर्ज गिरावट निवेशकों के बीच चर्चा का प्रमुख विषय बनी हुई है। इश्यू की अंतिम स्थिति और आगे शेयर की बाजार में लिस्टिंग का प्रदर्शन निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण रहेगा।

  • माइक्रोसॉफ्ट ने हैदराबाद में भारत का चौथा क्लाउड रीजन शुरू किया, एआई और डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार को मिलेगा नया बल

    माइक्रोसॉफ्ट ने हैदराबाद में भारत का चौथा क्लाउड रीजन शुरू किया, एआई और डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार को मिलेगा नया बल

    नई दिल्ली । माइक्रोसॉफ्ट ने हैदराबाद में अपना चौथा क्लाउड रीजन लॉन्च किया है। ‘इंडिया साउथ सेंट्रल’ नाम से शुरू किया गया यह क्लाउड रीजन भारत में कंपनी की क्लाउड और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई अवसंरचना क्षमता के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इसके साथ ही देश में माइक्रोसॉफ्ट की हाइपरस्केल क्लाउड मौजूदगी और मजबूत हुई है।

    हैदराबाद का नया क्लाउड रीजन माइक्रोसॉफ्ट के पुणे, चेन्नई और मुंबई स्थित मौजूदा क्लाउड रीजन से जुड़ गया है। कंपनी के अनुसार, भारत में डेटा सेंटर क्षमता बढ़ाने और एंटरप्राइज स्तर पर एआई के इस्तेमाल में तेजी आने की संभावनाओं के बीच यह विस्तार किया गया है।

    यह लॉन्च भारत में माइक्रोसॉफ्ट के पहले घोषित 20.5 अरब डॉलर के निवेश कार्यक्रम का हिस्सा है। इस कार्यक्रम के तहत देश में क्लाउड क्षमताओं, एआई इंफ्रास्ट्रक्चर, कौशल विकास और परिचालन विस्तार को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया है।

    क्लाउड रीजन के लॉन्च के दौरान माइक्रोसॉफ्ट इंडिया एवं दक्षिण एशिया के अध्यक्ष पुनीत चंदोक ने भारत की डिजिटल परिवर्तन यात्रा को तेजी से आगे बढ़ने वाला चरण बताया। उन्होंने कहा कि भारत दुनिया के सबसे बड़े डेटा उत्पादक देशों में तेजी से उभर रहा है और आने वाले समय में डिजिटल सेवाओं की जरूरत और बढ़ सकती है।

    चंदोक के अनुसार, भारत वर्तमान में दुनिया के कुल डेटा का लगभग 20 प्रतिशत उत्पन्न करता है, जबकि वैश्विक डेटा सेंटर क्षमता में देश की हिस्सेदारी केवल करीब 3 प्रतिशत है। उनके मुताबिक, डेटा उत्पादन और डेटा सेंटर क्षमता के बीच का यह अंतर भारत में डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार की बड़ी संभावना को दर्शाता है।

    उन्होंने बताया कि भारत में मौजूदा डेटा सेंटर क्षमता लगभग 2 गीगावाट है। अनुमान है कि वर्ष 2035 तक यह क्षमता बढ़कर 12 से 14 गीगावाट के बीच पहुंच सकती है। इस विस्तार के पीछे डिजिटल सेवाओं, क्लाउड कंप्यूटिंग और एआई आधारित तकनीकों की बढ़ती जरूरत को प्रमुख कारण माना जा रहा है।

    एआई के क्षेत्र में बदलाव अब केवल प्रयोग या शुरुआती इस्तेमाल तक सीमित नहीं रह गया है। कंपनियां, सरकारी विभाग और विभिन्न संस्थान बड़े स्तर पर एआई आधारित अनुप्रयोगों को लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। इसके कारण कंप्यूटिंग क्षमता, डेटा स्टोरेज और क्लाउड सेवाओं की मांग में भी वृद्धि हो रही है।

    बढ़ती मांग के बीच पर्याप्त भौतिक और डिजिटल अवसंरचना तैयार करना बड़ी आवश्यकता बन गई है। एआई मॉडल और उनसे जुड़ी सेवाओं के संचालन के लिए बड़े पैमाने पर डेटा सेंटर, कंप्यूटिंग संसाधन और क्लाउड क्षमता की जरूरत होती है।

    माइक्रोसॉफ्ट का हैदराबाद क्लाउड रीजन ऐसे समय शुरू हुआ है जब भारत में डिजिटल अर्थव्यवस्था के विस्तार के साथ डेटा की मात्रा भी लगातार बढ़ रही है। नए क्लाउड रीजन से देश में स्थानीय स्तर पर क्लाउड सेवाओं की क्षमता बढ़ाने और एआई आधारित तकनीकों के लिए आवश्यक इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

    चंदोक ने कहा कि जिस डिजिटल पैमाने पर भारत आगे बढ़ रहा है, उसके अनुरूप भौतिक अवसंरचना का विस्तार भी जरूरी है। उनके अनुसार, डिजिटल विकास की गति को बनाए रखने के लिए डेटा सेंटर क्षमता बढ़ाना आने वाले वर्षों में महत्वपूर्ण प्राथमिकता होगी।

  • लद्दाख हिंसा की पहली बरसी पर सोनम वांगचुक का शहीद दिवस कार्यक्रम, 23 सितंबर को 20 किलोमीटर की सांकेतिक पदयात्रा

    लद्दाख हिंसा की पहली बरसी पर सोनम वांगचुक का शहीद दिवस कार्यक्रम, 23 सितंबर को 20 किलोमीटर की सांकेतिक पदयात्रा

    नई दिल्ली ।लद्दाख में पिछले साल हुई हिंसा में मारे गए लोगों की पहली बरसी के मौके पर सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने 23 सितंबर को एक दिवसीय सांकेतिक पदयात्रा निकालने का ऐलान किया है। इसके साथ ही 24 सितंबर को शहीद दिवस से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। कार्यक्रम का उद्देश्य मृतकों को श्रद्धांजलि देने के साथ उनके परिवारों के लिए उचित मुआवजे और संबंधित मामलों में दर्ज मुकदमों को वापस लेने की मांग उठाना है।

    वांगचुक के अनुसार, 24 सितंबर को हुई मौतों की पहली बरसी पर उन लोगों को याद किया जाएगा, जिन्होंने लद्दाख की संस्कृति और पर्यावरण की रक्षा तथा संरक्षण के लिए अपनी जान गंवाई। इस अवसर पर शांतिपूर्ण कार्यक्रम आयोजित किए जाने की योजना है।

    पहले वांगचुक ने 19 से 23 सितंबर तक छह दिवसीय पदयात्रा की घोषणा की थी। उन्होंने कहा था कि यदि सरकार की ओर से ठोस आश्वासन नहीं मिलता है तो यह यात्रा निकाली जाएगी। बाद में उन्होंने अपने कार्यक्रम में बदलाव करते हुए छह दिवसीय यात्रा को स्थगित कर दिया।

    अब तय कार्यक्रम के मुताबिक 23 सितंबर को केवल एक दिन की सांकेतिक पदयात्रा होगी। यह पदयात्रा लेह की दिशा में निकाली जाएगी और इसकी दूरी करीब 20 किलोमीटर बताई गई है। कार्यक्रम को शांतिपूर्ण तरीके से आयोजित करने की बात कही गई है।

    वांगचुक लंबे समय से लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देने और क्षेत्र को संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग उठाते रहे हैं। उनके आंदोलन में लद्दाख के लिए राजनीतिक अधिकारों के साथ क्षेत्र की संस्कृति और पर्यावरण से जुड़े मुद्दे भी प्रमुख रहे हैं।

    शहीद दिवस कार्यक्रम के तहत पिछले वर्ष मारे गए लोगों के परिवारों के लिए उचित मुआवजे की मांग दोहराई जाएगी। इसके अलावा मृतकों से जुड़े मामलों में दर्ज मुकदमों को वापस लेने की मांग भी कार्यक्रम का हिस्सा होगी।

    इस बीच लद्दाख के प्रतिनिधिमंडल और केंद्र सरकार के बीच बातचीत का मुद्दा भी चर्चा में है। गृह मंत्रालय की सब-कमेटी के साथ बैठक के बाद लद्दाख के प्रतिनिधिमंडल ने केंद्र सरकार की ओर से प्रस्तावित चुनी हुई संस्था से संबंधित ड्राफ्ट पेश नहीं किए जाने पर निराशा जताई थी।

    नए कार्यक्रम के अनुसार, 23 सितंबर को कारगिल में शांतिपूर्ण विरोध रैली भी आयोजित की जाएगी। इसके बाद 24 सितंबर को शहीद दिवस से जुड़े अन्य कार्यक्रम होंगे। इस दौरान पिछले साल की घटनाओं में जान गंवाने वाले लोगों को श्रद्धांजलि दी जाएगी और उनकी मांगों को फिर से सामने रखा जाएगा।

    वांगचुक को पिछले वर्ष लद्दाख में हुई हिंसा के सिलसिले में नेशनल सिक्योरिटी एक्ट के तहत हिरासत में लिया गया था और वह करीब छह महीने तक हिरासत में रहे थे। अब पहली बरसी के मौके पर प्रस्तावित कार्यक्रमों के जरिए लद्दाख से जुड़ी लंबित मांगों को फिर सार्वजनिक रूप से उठाने की तैयारी है।

  • रेजीनगर उपचुनाव से पहले हुमायूं कबीर का बड़ा ऐलान, बेटे के लिए प्रचार से बनाई दूरी, प्रशासन पर लगाए पक्षपात के आरोप

    रेजीनगर उपचुनाव से पहले हुमायूं कबीर का बड़ा ऐलान, बेटे के लिए प्रचार से बनाई दूरी, प्रशासन पर लगाए पक्षपात के आरोप

    नई दिल्ली ।पश्चिम बंगाल में रेजीनगर विधानसभा उपचुनाव से पहले राजनीतिक घटनाक्रम तेजी से बदल रहा है। एजेयूपी प्रमुख हुमायूं कबीर ने अपने बेटे और पार्टी उम्मीदवार गुलाम नबी आजाद के लिए चुनाव प्रचार नहीं करने का ऐलान किया है। उन्होंने प्रशासन पर पक्षपात और दुश्मनी का आरोप लगाते हुए कहा कि वह अब जनता के फैसले को स्वीकार करेंगे।

    हुमायूं कबीर का यह फैसला ऐसे समय आया है, जब रेजीनगर उपचुनाव को लेकर पहले ही कई राजनीतिक घटनाक्रम सामने आ चुके हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जिन लोगों से वह मिलते हैं या बातचीत करते हैं, उनके खिलाफ गिरफ्तारी या धमकी जैसी कार्रवाई की जा रही है। कबीर के मुताबिक उनकी पार्टी के करीब 25 कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया है।

    उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में पार्टी को पारंपरिक तरीके से प्रचार करने की जरूरत नहीं है। वह सोशल मीडिया के माध्यम से मतदाताओं तक अपनी बात पहुंचाएंगे और मतदान के दिन जमीन पर मौजूद रहेंगे। उनका कहना है कि पार्टी का चुनाव चिह्न टेबल है और मतदाता इसे पहचानते हैं।

    हुमायूं कबीर ने पुलिस और प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन का रवैया उनकी पार्टी के प्रति पक्षपातपूर्ण है। उनका कहना था कि सरकारी अधिकारियों को संविधान और कानून के मुताबिक काम करना चाहिए, न कि किसी राजनीतिक दल के पक्ष में। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी पार्टी ऐसे किसी दबाव के सामने पीछे नहीं हटेगी।

    इस बीच हुमायूं कबीर के प्रचार से दूरी बनाने के बाद उनके बेटे गुलाम नबी आजाद ने भी प्रचार से दूर रहने का फैसला किया है। इससे रेजीनगर उपचुनाव में एजेयूपी की चुनावी रणनीति को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है। पार्टी की ओर से अब मतदाताओं तक पहुंचने के लिए सोशल मीडिया और मतदान के दिन की सक्रियता पर जोर दिया जा रहा है।

    रेजीनगर उपचुनाव में तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार रबीउल आलम चौधरी को लेकर भी हाल में बड़ा घटनाक्रम सामने आया था। उन्होंने पहले चुनाव से अपना नाम वापस लेने की घोषणा की थी। कुछ समय बाद उन्होंने अपना फैसला बदल दिया और चुनाव मैदान में बने रहने का ऐलान किया। इसके बाद उपचुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां और तेज हो गईं।

    रेजीनगर सीट हुमायूं कबीर के लिए भी महत्वपूर्ण रही है। हालिया विधानसभा चुनाव में उन्होंने इस सीट से जीत दर्ज की थी। उन्हें करीब 51 प्रतिशत वोट मिले थे और उन्होंने 58,876 मतों के अंतर से जीत हासिल की थी। उन्होंने नौदा विधानसभा सीट से भी चुनाव जीता था। बाद में उन्होंने रेजीनगर सीट छोड़ने का फैसला किया, जिसके कारण यहां उपचुनाव की स्थिति बनी।

    अब 6 अक्टूबर को होने वाले रेजीनगर उपचुनाव से पहले हुमायूं कबीर का प्रचार से हटना चुनावी समीकरणों में एक नया घटनाक्रम है। उनके आरोपों पर प्रशासन और अन्य राजनीतिक पक्षों की प्रतिक्रियाएं भी आगे महत्वपूर्ण होंगी। फिलहाल एजेयूपी ने जनता के फैसले को स्वीकार करने की बात कही है और चुनावी प्रक्रिया के अगले चरण पर नजर बनी हुई है।

  • पुरुलिया में शुभेंदु अधिकारी का ऐलान, कुर्मी आंदोलन से जुड़े सभी मामले होंगे वापस, समुदाय के विकास के लिए 50 करोड़ रुपये

    पुरुलिया में शुभेंदु अधिकारी का ऐलान, कुर्मी आंदोलन से जुड़े सभी मामले होंगे वापस, समुदाय के विकास के लिए 50 करोड़ रुपये

    नई दिल्ली ।पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने पुरुलिया जिले में आयोजित करम उत्सव के एक कार्यक्रम में कुर्मी समुदाय को लेकर बड़ा ऐलान किया। उन्होंने कहा कि 2025 के कुर्मी आंदोलन के दौरान दर्ज किए गए सभी मामलों को वापस लिया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि विधानसभा चुनाव से पहले समुदाय से किए गए वादों को सरकार पूरा करने की दिशा में आगे बढ़ेगी।

    पश्चिम बंगाल के पश्चिमी जिलों में कुर्मी समुदाय लंबे समय से अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने समेत कई मांगों को लेकर आंदोलन करता रहा है। आंदोलन के दौरान कई बार विरोध प्रदर्शन हुए और यह मुद्दा राज्य की राजनीति में भी चर्चा का विषय बना रहा है।

    शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि पिछले वर्ष हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान कुर्मी समुदाय के सदस्यों के खिलाफ दर्ज किए गए मामलों को वापस लेने का फैसला किया गया है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में वह दुर्गापुर में हुई एक बैठक के दौरान भी घोषणा कर चुके हैं।

    मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि पिछली तृणमूल कांग्रेस सरकार ने कुर्मी समुदाय के आंदोलन को दबाने का प्रयास किया और समुदाय के भीतर विभाजन पैदा करने का काम किया। यह आरोप शुभेंदु अधिकारी की ओर से लगाया गया है। उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार कुर्मी समुदाय से किए गए वादों को पूरा करेगी।

    उन्होंने बताया कि समुदाय के विकास के लिए इस वर्ष के बजट में 50 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। आने वाले समय में इस राशि को बढ़ाने की बात भी कही गई है। सरकार की ओर से कुर्मी समुदाय के विकास से जुड़े मुद्दों को आगे बढ़ाने का आश्वासन दिया गया है।

    कुर्मी समुदाय की प्रमुख मांगों में अनुसूचित जनजाति का दर्जा शामिल है। समुदाय की ओर से लंबे समय से इस मांग को उठाया जाता रहा है। इसके अलावा कुर्माली भाषा को संवैधानिक मान्यता देने की मांग भी इससे जुड़े प्रमुख मुद्दों में रही है।

    शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि उनकी सरकार कुर्माली और राजबंशी भाषाओं को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल कराने के लिए प्रयास करेगी। उन्होंने सत्ता संभालने के बाद कुर्मी समुदाय के लिए सरकार की ओर से उठाए गए कदमों का भी उल्लेख किया।

    कुर्मी आंदोलन से जुड़े मामलों की वापसी की घोषणा के साथ सरकार ने समुदाय के विकास और भाषाई पहचान से जुड़े मुद्दों पर भी अपना रुख सामने रखा है। हालांकि, मामलों को वापस लेने की घोषणा के बाद संबंधित कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया के जरिए इसे लागू किया जाएगा।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार चुनाव से पहले किए गए वादों को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है। इसी क्रम में कुर्मी समुदाय से जुड़े मामलों की वापसी, विकास के लिए बजट प्रावधान और भाषाओं को संवैधानिक मान्यता दिलाने की कोशिशों का उल्लेख किया गया।

    पुरुलिया में हुई घोषणा के बाद कुर्मी समुदाय से जुड़े पुराने आंदोलन और उसकी मांगें एक बार फिर चर्चा में हैं। सरकार के फैसले का केंद्र बिंदु 2025 के आंदोलन के दौरान दर्ज मामलों को वापस लेना है। इसके साथ ही विकास और भाषा से जुड़े मुद्दों को लेकर भी सरकार ने अपनी प्राथमिकताएं स्पष्ट की हैं।

    कुर्मी समुदाय के लिए 50 करोड़ रुपये के बजट प्रावधान को आने वाले समय में बढ़ाने की बात भी कही गई है। अब मामलों की वापसी और अन्य घोषणाओं को लागू करने के लिए आगे की प्रशासनिक प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी।

  • MP News: देवास के हाटपिपलिया में 31.34 किलोमीटर सड़क निर्माण का वर्चुअल भूमिपूजन, 97.62 करोड़ रुपये की परियोजना शुरू

    MP News: देवास के हाटपिपलिया में 31.34 किलोमीटर सड़क निर्माण का वर्चुअल भूमिपूजन, 97.62 करोड़ रुपये की परियोजना शुरू

    मध्यप्रदेश: के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोमवार को मंत्रालय, भोपाल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से देवास जिले के हाटपिपलिया क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण सड़क परियोजना का वर्चुअल भूमिपूजन किया। राजोदा-कैलोद-डबलचौकी सड़क का निर्माण 31.34 किलोमीटर लंबाई में किया जाएगा। परियोजना की अनुमानित लागत 9,762.78 लाख रुपये है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि सड़क परियोजना के पूरा होने के बाद क्षेत्र में आवागमन अधिक सुगम होगा। उन्होंने कहा कि बेहतर सड़क संपर्क से ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच कनेक्टिविटी मजबूत होगी, जिससे क्षेत्रीय विकास को गति मिलने की संभावना है।

    राजोदा-कैलोद-डबलचौकी मार्ग हाटपिपलिया क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण सड़क संपर्क परियोजना के तौर पर सामने आया है। सड़क निर्माण से इस मार्ग से जुड़े क्षेत्रों में आने-जाने वाले लोगों को बेहतर परिवहन सुविधा मिलने की उम्मीद है। परियोजना का उद्देश्य क्षेत्र में सड़क बुनियादी ढांचे को मजबूत करना है।

    वर्चुअल भूमिपूजन के दौरान मुख्यमंत्री ने सड़क निर्माण को क्षेत्रीय संपर्क और विकास से जोड़ते हुए इसके महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि मजबूत सड़क नेटवर्क से ग्रामीण क्षेत्रों की शहरी क्षेत्रों तक पहुंच बेहतर होती है और आवागमन की सुविधा बढ़ने से विकास गतिविधियों को भी समर्थन मिलता है।

    31.34 किलोमीटर लंबी इस सड़क परियोजना पर 9,762.78 लाख रुपये खर्च किए जाने हैं। यानी परियोजना की लागत करीब 97.63 करोड़ रुपये है। इस राशि के साथ सड़क निर्माण कार्य को आगे बढ़ाया जाएगा, जिससे संबंधित क्षेत्र में परिवहन सुविधाओं के विस्तार की दिशा में काम होगा।

    देवास जिले के हाटपिपलिया क्षेत्र में सड़क संपर्क स्थानीय स्तर पर लोगों की आवाजाही के लिए महत्वपूर्ण है। ग्रामीण क्षेत्रों को बेहतर सड़क नेटवर्क से जोड़ने से दैनिक आवागमन के साथ आर्थिक गतिविधियों के लिए भी परिवहन सुविधा उपलब्ध होती है। परियोजना पूरी होने के बाद राजोदा, कैलोद और डबलचौकी के बीच सड़क संपर्क को बेहतर बनाने का लक्ष्य है।

    मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में क्षेत्रीय विकास के लिए बेहतर कनेक्टिविटी की आवश्यकता को रेखांकित किया। उनका कहना था कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच मजबूत संपर्क स्थापित होने से विकास की प्रक्रिया को नई गति मिल सकती है।

    मध्यप्रदेश सरकार के आधिकारिक पोर्टल पर भी मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में दर्ज किया गया है।

    राजोदा-कैलोद-डबलचौकी सड़क परियोजना के वर्चुअल भूमिपूजन के साथ अब इसके निर्माण कार्य को आगे बढ़ाने की प्रक्रिया शुरू होगी। सड़क बनने के बाद इस क्षेत्र में आवागमन की सुविधा और संपर्क व्यवस्था में सुधार होने की उम्मीद है।

    यह परियोजना देवास जिले के हाटपिपलिया क्षेत्र में सड़क बुनियादी ढांचे को मजबूत करने से जुड़ी है। 31.34 किलोमीटर लंबा मार्ग पूरा होने के बाद आसपास के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच संपर्क को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है। सरकार ने परियोजना को क्षेत्रीय विकास और सुगम आवागमन से जोड़कर देखा है।

  • पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के कुनार में की एयरस्ट्राइक, तीन की मौत और कई घायल; तालिबान ने दी जवाबी कार्रवाई की चेतावनी

    पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के कुनार में की एयरस्ट्राइक, तीन की मौत और कई घायल; तालिबान ने दी जवाबी कार्रवाई की चेतावनी

    नई दिल्ली ।पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच सीमा पर जारी तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के उत्तर-पूर्वी कुनार प्रांत में एयरस्ट्राइक की है। इस हमले में तीन लोगों की मौत और कई अन्य के घायल होने की जानकारी सामने आई है। हमले के बाद तालिबान ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है।

    बताया गया है कि पाकिस्तान की ओर से यह कार्रवाई साझा सीमा पर बढ़ती चरमपंथी गतिविधियों और दोनों देशों के बीच लगातार बने मतभेदों के बीच की गई। पाकिस्तान लंबे समय से आरोप लगाता रहा है कि तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान यानी टीटीपी के सदस्य अफगानिस्तान की जमीन से उसके खिलाफ गतिविधियां संचालित कर रहे हैं।

    अफगानिस्तान में तालिबान इन आरोपों को खारिज करता रहा है। उसका कहना है कि पाकिस्तान को अपनी आंतरिक सुरक्षा से जुड़े मामलों पर ध्यान देना चाहिए। इसी आरोप-प्रत्यारोप के कारण दोनों पड़ोसी देशों के संबंध लंबे समय से तनावपूर्ण बने हुए हैं।

    कुनार में हुई एयरस्ट्राइक के बाद तालिबान की ओर से पाकिस्तान को कड़ी चेतावनी दी गई है। तालिबान ने कहा है कि अफगानिस्तान की जमीन पर इस तरह के हमले स्वीकार नहीं किए जाएंगे और कार्रवाई का जवाब दिया जाएगा। इससे दोनों देशों के बीच सैन्य तनाव बढ़ने की आशंका पैदा हो गई है।

    पाकिस्तान की यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब उसके उत्तर-पश्चिमी हिस्से में सुरक्षा बलों और चरमपंथियों के बीच हिंसक घटनाएं बढ़ी हैं। हाल ही में एक पुलिस स्टेशन परिसर में आत्मघाती बम धमाके और उसके बाद हुई हिंसा ने स्थिति को और गंभीर किया था। पाकिस्तान इन घटनाओं के लिए अफगानिस्तान से सक्रिय होने वाले चरमपंथी समूहों को जिम्मेदार ठहराता रहा है।

    पाकिस्तान का आरोप है कि टीटीपी से जुड़े तत्व अफगानिस्तान में सुरक्षित ठिकानों का इस्तेमाल करते हैं और वहां से पाकिस्तान में हमलों की योजना बनाते हैं। दूसरी ओर तालिबान इन आरोपों को स्वीकार नहीं करता और पाकिस्तान के आरोपों को खारिज करता रहा है।

    दोनों देशों के बीच सीमा विवाद और चरमपंथी गतिविधियों को लेकर पहले भी सैन्य टकराव की स्थिति बन चुकी है। तालिबान ने पहले भी चेतावनी दी है कि अफगानिस्तान के भीतर किसी तरह का हमला उसकी संप्रभुता का उल्लंघन माना जाएगा। उसका कहना है कि यदि अफगानिस्तान की जमीन पर हमला किया गया तो वह सैन्य जवाब देने से पीछे नहीं हटेगा।

    ताजा एयरस्ट्राइक के बाद दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ने की स्थिति बन गई है। आने वाले दिनों में पाकिस्तान और तालिबान की ओर से उठाए जाने वाले कदम इस पूरे घटनाक्रम की दिशा तय कर सकते हैं।

    इस बीच दोनों देशों के बीच मतभेदों को बातचीत के जरिए सुलझाने की संभावना भी चर्चा में है। सऊदी अरब के दोनों देशों के साथ संबंधों को देखते हुए मध्यस्थता की भूमिका निभाने की संभावना का भी उल्लेख किया गया है। हालांकि, फिलहाल तत्काल प्राथमिकता सीमा पर तनाव कम करने और आगे किसी सैन्य टकराव को रोकने की है।

    कुनार में हुई एयरस्ट्राइक और उसके बाद तालिबान की चेतावनी ने पाकिस्तान-अफगानिस्तान संबंधों को एक बार फिर संवेदनशील स्थिति में ला दिया है। दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी रहने के साथ अब निगाह इस बात पर है कि आगे कोई जवाबी सैन्य कार्रवाई होती है या तनाव को बातचीत के जरिए नियंत्रित करने की कोशिश की जाती है।

  • हवाई हमले करके लौट जाते हो, सीरियस हो तो सेना भेजो’, ईरान ने अमेरिका को दी जमीनी लड़ाई की चुनौती

    हवाई हमले करके लौट जाते हो, सीरियस हो तो सेना भेजो’, ईरान ने अमेरिका को दी जमीनी लड़ाई की चुनौती


    तेहरान।
    ईरान और अमेरिका के बीच जारी सैन्य तनाव के बीच ईरान के सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव मोहसिन रेजाई ने अमेरिका को जमीनी लड़ाई में उतरने की चुनौती दी है। उन्होंने कहा कि यदि अमेरिका अपने सैन्य अभियान को लेकर गंभीर है तो उसे अपने सैनिक ईरान भेजने चाहिए। रेजाई ने सवाल उठाया कि अमेरिकी सेना जमीनी कार्रवाई से क्यों बच रही है और केवल हवाई हमले करके वापस लौट रही है।

    रेजाई ने कहा कि युद्ध में अंततः जमीनी सेना निर्णायक भूमिका निभाती है। उनके इस बयान को अमेरिका की मौजूदा दूर से हमला करने वाली सैन्य रणनीति पर ईरान की प्रतिक्रिया के तौर पर देखा जा रहा है।

    अमेरिकी हमले की स्थिति में जवाब की चेतावनी

    रेजाई ने दावा किया कि ईरान ने अमेरिका के खिलाफ अपनी सैन्य रणनीति में बदलाव किया है और वह संभावित अमेरिकी हवाई हमले का जवाब देने के लिए पहले की तुलना में अधिक तैयार है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि अमेरिका ने दोबारा हमला किया तो ईरान क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों और अन्य अमेरिकी हितों के खिलाफ हमले तेज कर सकता है।

    रेजाई के इन सैन्य दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। हालांकि, हालिया बयानों में उन्होंने कहा है कि ईरान भविष्य में किसी अमेरिकी हमले की स्थिति को गंभीरता से ले रहा है और उसके जवाब की तैयारी कर रहा है।

    ईरान में जमीनी अभियान आसान नहीं

    ईरान में बड़े पैमाने पर जमीनी सैन्य अभियान किसी भी बाहरी शक्ति के लिए जटिल चुनौती हो सकता है। देश का बड़ा भूभाग पहाड़ी और दुर्गम क्षेत्रों वाला है तथा उसकी आबादी भी काफी बड़ी है। ऐसे में व्यापक जमीनी अभियान के लिए बड़ी संख्या में सैनिकों, लंबी आपूर्ति व्यवस्था और लगातार सैन्य मौजूदगी की आवश्यकता होगी।

    अमेरिका ने अब तक ईरान के खिलाफ मुख्य रूप से हवाई हमलों और दूर से हमला करने वाली सैन्य क्षमताओं का इस्तेमाल किया है। दूसरी ओर, ईरान ने क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों और अमेरिकी हितों को निशाना बनाने की रणनीति अपनाने की चेतावनी दी है।

    सैन्य बयानबाजी के बीच बातचीत का रास्ता खुला

    दिलचस्प बात यह है कि सैन्य बयानबाजी के बावजूद ईरान ने बातचीत का रास्ता पूरी तरह बंद नहीं किया है। रेजाई ने हालिया साक्षात्कार में बताया कि कतर के माध्यम से अमेरिका तक युद्ध समाप्त करने की ईरान की शर्तें पहुंचाई गई हैं और तेहरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के जवाब का इंतजार कर रहा है।

    रेजाई के मुताबिक ईरान ने युद्ध खत्म करने के लिए तीन प्रमुख शर्तें बताई हैं—सभी मोर्चों पर युद्ध समाप्त करना, ईरान की जब्त की गई या फ्रीज की गई धनराशि जारी करना और अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी समाप्त करना। उन्होंने यह भी कहा कि यदि इन शर्तों पर प्रगति नहीं होती तो ईरान किसी निर्णायक युद्ध के लिए तैयार है।

    कतर और पाकिस्तान की मध्यस्थता

    ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत दोबारा शुरू कराने के प्रयासों में कतर और पाकिस्तान की भूमिका बनी हुई है। दोनों देशों ने पिछले समझौते के समाप्त होने के बाद बातचीत का रास्ता फिर खोलने के लिए मध्यस्थता की कोशिशें जारी रखी हैं। रेजाई के अनुसार कतर ने ईरान की शर्तें अमेरिका तक पहुंचाई हैं और अब तेहरान वाशिंगटन के जवाब की प्रतीक्षा कर रहा है।

    इस तरह ईरान की मौजूदा रणनीति में एक ओर संभावित अमेरिकी सैन्य कार्रवाई का जवाब देने की तैयारी और कड़े बयान शामिल हैं, वहीं दूसरी ओर मध्यस्थों के जरिए बातचीत का चैनल भी खुला हुआ है। स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि दोनों पक्ष सैन्य टकराव के बीच कूटनीतिक संपर्क को किस तरह आगे बढ़ाते हैं।

  • शराब और दवा का कॉम्बिनेशन पड़ सकता है भारी पेनकिलर से लेकर BP की दवा तक इन बातों का रखें ध्यान

    शराब और दवा का कॉम्बिनेशन पड़ सकता है भारी पेनकिलर से लेकर BP की दवा तक इन बातों का रखें ध्यान


    नई दिल्ली। पार्टी या किसी सोशल गैदरिंग के बाद कई लोग सिरदर्द बदहजमी या दूसरी परेशानी होने पर तुरंत दवा ले लेते हैं। कई बार लोग यह मान लेते हैं कि सामान्य दर्द या बुखार की दवा शराब पीने के कुछ समय बाद लेने में कोई परेशानी नहीं होगी। लेकिन शराब और दवाओं का असर हर व्यक्ति में एक जैसा नहीं होता और कुछ दवाओं के साथ शराब का सेवन गंभीर नुकसान का कारण बन सकता है। इसलिए शराब पीने के बाद अपनी मर्जी से कोई भी दवा लेना सुरक्षित तरीका नहीं माना जाता।

    शराब और कई दवाओं को शरीर मुख्य रूप से लिवर की मदद से प्रोसेस करता है। ऐसे में दोनों का एक साथ शरीर में पहुंचना कुछ परिस्थितियों में दवा के असर को बदल सकता है। दवा का प्रभाव जरूरत से ज्यादा बढ़ सकता है या शरीर में उसके स्तर में बदलाव हो सकता है। इसके कारण चक्कर मतली उल्टी अत्यधिक नींद या दूसरी गंभीर परेशानियां हो सकती हैं। कुछ दवाओं के साथ सांस लेने में परेशानी और ब्लड प्रेशर में गिरावट का जोखिम भी बढ़ सकता है।

    पेनकिलर को लेकर विशेष सावधानी जरूरी है। पैरासिटामोल जैसी दवा का इस्तेमाल आमतौर पर दर्द और बुखार के लिए किया जाता है लेकिन शराब का अधिक सेवन करने वाले लोगों में इसे बार बार या अधिक मात्रा में लेना लिवर के लिए नुकसानदायक हो सकता है। इसी तरह कुछ मजबूत दर्द निवारक दवाएं केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करती हैं। इनके साथ शराब लेने पर अत्यधिक नींद और सांस धीमी होने जैसे गंभीर प्रभावों का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए किसी भी पेनकिलर को शराब के बाद अपनी मर्जी से लेने के बजाय डॉक्टर या फार्मासिस्ट से सलाह लेना बेहतर है।

    ब्लड प्रेशर की दवाएं लेने वाले लोगों को भी सावधानी बरतनी चाहिए। शराब कुछ लोगों में ब्लड प्रेशर को कम कर सकती है और जब इसके साथ ऐसी दवा ली जाती है जो रक्तचाप कम करती है तो चक्कर कमजोरी या बेहोशी जैसी समस्या हो सकती है। इसी तरह डायबिटीज की कुछ दवाओं के साथ शराब लेने से ब्लड शुगर कम होने का जोखिम बढ़ सकता है। बुजुर्ग लोगों और पहले से किसी बीमारी से जूझ रहे मरीजों के लिए यह स्थिति अधिक चिंता का विषय हो सकती है।

    एंटीबायोटिक दवाओं के मामले में भी बिना जानकारी के शराब का सेवन करना उचित नहीं है। सभी एंटीबायोटिक शराब के साथ एक जैसा असर नहीं करते लेकिन कुछ विशेष दवाओं के साथ शराब लेने पर उल्टी पेट खराब होना सिरदर्द और अन्य प्रतिकूल प्रभाव हो सकते हैं। इसलिए यदि कोई व्यक्ति नियमित दवा ले रहा है तो शराब के बाद दवा लेने या दवा के दौरान शराब पीने से पहले चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।

    सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि शराब पीने के बाद दवा लेने के लिए कोई एक सुरक्षित अंतराल सभी दवाओं पर लागू नहीं होता। दवा का नाम उसकी खुराक शराब की मात्रा व्यक्ति की उम्र लिवर की स्थिति और दूसरी चल रही दवाओं के आधार पर जोखिम बदल सकता है। इसलिए केवल कुछ घंटे का अंतर रखकर हर दवा को सुरक्षित मान लेना सही नहीं है।

    अगर शराब पीने के बाद दवा लेने पर अत्यधिक नींद सांस लेने में परेशानी बेहोशी लगातार उल्टी सीने में दर्द या असामान्य रक्तस्राव जैसे गंभीर लक्षण दिखाई दें तो तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए। किसी भी दवा का इस्तेमाल डॉक्टर की सलाह या दवा के आधिकारिक निर्देशों के अनुसार करना सबसे सुरक्षित तरीका है।