Author: bharati

  • लड्डू गोपाल को क्या हर दिन चाहिए माखन मिश्री जानें कौन सा भोग है प्रिय और क्या कहते हैं शास्त्रीय नियम

    लड्डू गोपाल को क्या हर दिन चाहिए माखन मिश्री जानें कौन सा भोग है प्रिय और क्या कहते हैं शास्त्रीय नियम


    नई दिल्ली । भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप लड्डू गोपाल की सेवा सनातन परंपरा में अत्यंत शुभ और मंगलकारी मानी जाती है। मान्यता है कि जिस घर में श्रद्धा और प्रेम से लड्डू गोपाल की सेवा की जाती है वहां सुख समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है। श्रीकृष्ण को माखन और मिश्री सबसे प्रिय भोगों में माना जाता है इसलिए अधिकांश भक्त प्रतिदिन उन्हें माखन मिश्री अर्पित करते हैं। हालांकि कई लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि यदि किसी दिन माखन मिश्री उपलब्ध न हो या उसका भोग न लगाया जाए तो क्या लड्डू गोपाल नाराज हो जाते हैं।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण अपने भक्तों के प्रेम और सच्ची भावना के भूखे हैं न कि केवल किसी विशेष भोग के। यदि किसी कारणवश प्रतिदिन माखन मिश्री अर्पित करना संभव न हो तो इससे भगवान नाराज नहीं होते। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि जो भी भोग अर्पित किया जाए वह पूरी श्रद्धा पवित्रता और प्रेम के साथ समर्पित किया जाए। भगवान के लिए भाव सबसे बड़ा होता है।

    यदि माखन मिश्री उपलब्ध न हो तो लड्डू गोपाल को मिश्री दूध दही ताजे मौसमी फल धनिया पंजीरी मखाने की खीर रबड़ी मालपुआ या घर में बना सात्विक भोजन भी भोग के रूप में अर्पित किया जा सकता है। केले आम खरबूजा जैसे मौसमी फल और केसर युक्त गुनगुना दूध भी भगवान श्रीकृष्ण को अत्यंत प्रिय माने जाते हैं।

    भोग अर्पित करते समय कुछ धार्मिक नियमों का पालन करना भी आवश्यक माना गया है। भगवान को जो भी प्रसाद अर्पित करें उसमें तुलसी दल या तुलसी का पत्ता अवश्य रखें क्योंकि बिना तुलसी के श्रीकृष्ण का भोग पूर्ण नहीं माना जाता। जिस प्रकार घर के छोटे बच्चे को समय पर भोजन कराया जाता है उसी भावना से लड्डू गोपाल को भी सुबह दोपहर शाम और रात्रि का भोग अर्पित करना शुभ माना जाता है।

    भोग बनाते समय रसोई की स्वच्छता का विशेष ध्यान रखना चाहिए। भोजन पूरी तरह सात्विक होना चाहिए और उसमें लहसुन प्याज या तामसिक पदार्थों का प्रयोग नहीं करना चाहिए। भोग अर्पित करने के बाद उसे कुछ समय तक भगवान के सामने रखा रहने दें और साथ में स्वच्छ जल का पात्र भी अवश्य रखें। इसके बाद प्रसाद को परिवार के सभी सदस्यों में श्रद्धापूर्वक बांट देना चाहिए।

    धार्मिक दृष्टि से भगवान श्रीकृष्ण भक्तों के निष्कपट प्रेम और समर्पण से प्रसन्न होते हैं। इसलिए यदि किसी दिन माखन मिश्री उपलब्ध न हो तो चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। सच्चे मन से अर्पित किया गया सात्विक भोग और भक्तिभाव ही भगवान को सबसे अधिक प्रिय माना गया है।

  • आज का शेयर बाजार रहेगा उतार चढ़ाव भरा या मिलेगी शानदार तेजी निवेशकों के लिए जानना जरूरी है ये बड़े फैक्टर

    आज का शेयर बाजार रहेगा उतार चढ़ाव भरा या मिलेगी शानदार तेजी निवेशकों के लिए जानना जरूरी है ये बड़े फैक्टर


    नई दिल्ली । भारतीय शेयर बाजार में हर कारोबारी दिन नई संभावनाएं और नई चुनौतियां लेकर आता है। बाजार की चाल कई घरेलू और वैश्विक कारकों पर निर्भर करती है। ऐसे में निवेशकों की नजर सिर्फ सेंसेक्स और निफ्टी के उतार चढ़ाव पर ही नहीं बल्कि विदेशी बाजारों कच्चे तेल की कीमतों डॉलर की स्थिति विदेशी निवेशकों की खरीद बिक्री और कंपनियों के तिमाही नतीजों पर भी रहती है। आज भी बाजार की दिशा इन्हीं महत्वपूर्ण संकेतों से तय हो सकती है।

    अगर वैश्विक बाजारों से सकारात्मक संकेत मिलते हैं तो भारतीय बाजार में भी खरीदारी का माहौल बन सकता है। वहीं अमेरिका और एशियाई बाजारों में कमजोरी या किसी बड़ी आर्थिक घटना का असर घरेलू बाजार पर भी दिखाई दे सकता है। निवेशकों की नजर विदेशी संस्थागत निवेशकों और घरेलू संस्थागत निवेशकों की गतिविधियों पर भी रहेगी क्योंकि बड़े निवेशकों की खरीद और बिकवाली बाजार की दिशा बदलने की क्षमता रखती है।

    इस समय कंपनियों के तिमाही नतीजों का दौर भी जारी है। जिन कंपनियों के वित्तीय परिणाम उम्मीद से बेहतर आते हैं उनके शेयरों में तेजी देखने को मिल सकती है जबकि कमजोर नतीजे निवेशकों की निराशा बढ़ा सकते हैं। बैंकिंग आईटी ऑटो फार्मा एफएमसीजी और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर के शेयरों पर बाजार की खास नजर बनी रह सकती है।

    कच्चे तेल की कीमतों में उतार चढ़ाव भी भारतीय शेयर बाजार के लिए महत्वपूर्ण संकेत माना जाता है। यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल महंगा होता है तो इसका असर कई कंपनियों की लागत पर पड़ सकता है। वहीं तेल की कीमतों में नरमी आने से बाजार को राहत मिल सकती है। इसके साथ ही डॉलर के मुकाबले रुपये की चाल भी निवेशकों के फैसलों को प्रभावित करती है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि छोटे निवेशकों को बाजार की हर हलचल देखकर घबराने की जरूरत नहीं है। यदि निवेश लंबी अवधि के लिए किया गया है तो मजबूत कंपनियों में बने रहना अधिक लाभदायक साबित हो सकता है। बाजार में उतार चढ़ाव सामान्य प्रक्रिया है इसलिए केवल अफवाहों या सोशल मीडिया पर चल रही अपुष्ट खबरों के आधार पर निवेश संबंधी निर्णय लेने से बचना चाहिए।

    जो लोग पहली बार शेयर बाजार में निवेश करना चाहते हैं उन्हें किसी भी शेयर में पैसा लगाने से पहले कंपनी के कारोबार वित्तीय स्थिति और भविष्य की संभावनाओं का अध्ययन जरूर करना चाहिए। पोर्टफोलियो में विविधता बनाए रखना भी जोखिम कम करने का अच्छा तरीका माना जाता है। एक ही सेक्टर या एक ही कंपनी में पूरा निवेश करना समझदारी नहीं होती।

    आज के कारोबार में बाजार की दिशा वैश्विक संकेतों आर्थिक आंकड़ों विदेशी निवेशकों की गतिविधियों और कंपनियों के प्रदर्शन से तय हो सकती है। ऐसे में निवेशकों को धैर्य के साथ बाजार पर नजर रखनी चाहिए और किसी भी निवेश से पहले पूरी जानकारी हासिल करनी चाहिए। समझदारी से लिया गया फैसला लंबे समय में बेहतर रिटर्न देने में मदद कर सकता है जबकि जल्दबाजी नुकसान का कारण बन सकती है।

  • 5 साल बाद बांग्लादेश टेस्ट टीम में हिंदू क्रिकेटर की वापसी ऑस्ट्रेलिया दौरे के लिए अनुभवी सौम्य सरकार को मिला मौका

    5 साल बाद बांग्लादेश टेस्ट टीम में हिंदू क्रिकेटर की वापसी ऑस्ट्रेलिया दौरे के लिए अनुभवी सौम्य सरकार को मिला मौका


    नई दिल्ली । ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ होने वाली टेस्ट सीरीज से पहले बांग्लादेश क्रिकेट टीम ने अपनी टीम में बड़ा बदलाव करते हुए अनुभवी ऑलराउंडर सौम्य सरकार की टेस्ट टीम में वापसी कराई है। करीब पांच साल बाद लाल गेंद के क्रिकेट में उनकी वापसी हुई है। टीम प्रबंधन ने ऑस्ट्रेलियाई परिस्थितियों में उनके अनुभव को देखते हुए उन्हें टीम में शामिल किया है। सौम्य सरकार की वापसी ऐसे समय हुई है जब बांग्लादेश की टीम चोटिल खिलाड़ियों की समस्या से जूझ रही है।

    दरअसल तेज गेंदबाज नाहिद राणा और शोरीफुल इस्लाम चोट के कारण ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टेस्ट सीरीज से बाहर हो गए हैं। दोनों खिलाड़ियों की गैरमौजूदगी से टीम का संतुलन प्रभावित हुआ जिसके बाद चयनकर्ताओं ने अनुभवी खिलाड़ियों पर भरोसा जताया। इसी क्रम में सौम्य सरकार को टेस्ट टीम में जगह दी गई है।

    सौम्य सरकार आखिरी बार बांग्लादेश के लिए वर्ष 2021 में वेस्टइंडीज के खिलाफ मीरपुर टेस्ट में खेलते नजर आए थे। इसके बाद वह लंबे समय तक टेस्ट टीम से बाहर रहे और उन्हें लाल गेंद के क्रिकेट में वापसी का इंतजार करना पड़ा। अब पांच साल बाद उन्हें फिर से टेस्ट टीम में अपनी जगह बनाने का मौका मिला है।

    सौम्य सरकार का सबसे बड़ा प्लस पॉइंट ऑस्ट्रेलियाई परिस्थितियों का अनुभव है। मौजूदा बांग्लादेशी टीम में शामिल खिलाड़ियों में उन्होंने ऑस्ट्रेलिया में सबसे ज्यादा अंतरराष्ट्रीय मुकाबले खेले हैं। वह ऑस्ट्रेलिया की धरती पर आठ इंटरनेशनल मैच खेल चुके हैं। टीम प्रबंधन का मानना है कि उछाल और तेज पिचों पर उनका अनुभव युवा खिलाड़ियों के लिए भी उपयोगी साबित होगा।

    बांग्लादेश की टीम इस दौरे पर मजबूत ऑस्ट्रेलियाई टीम को कड़ी चुनौती देने की तैयारी में है। ऐसे में अनुभवी खिलाड़ियों की मौजूदगी टीम के लिए अहम मानी जा रही है। सौम्य सरकार के पास बल्लेबाजी के साथ जरूरत पड़ने पर गेंदबाजी करने की भी क्षमता है जिससे टीम को अतिरिक्त संतुलन मिलेगा।

    अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि लंबे अंतराल के बाद टेस्ट क्रिकेट में लौट रहे सौम्य सरकार अपने अनुभव का कितना फायदा उठा पाते हैं और ऑस्ट्रेलिया जैसी मजबूत टीम के खिलाफ बांग्लादेश के प्रदर्शन में कितनी अहम भूमिका निभाते हैं।
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  • वक्री शनि के साथ नए सप्ताह की शुरुआत, धनु समेत 5 राशियों को खर्चों पर रखना होगा नियंत्रण

    वक्री शनि के साथ नए सप्ताह की शुरुआत, धनु समेत 5 राशियों को खर्चों पर रखना होगा नियंत्रण


    नई दिल्ली। 27 जुलाई से शुरू होकर 2 अगस्त तक चलने वाला नया सप्ताह ज्योतिषीय दृष्टि से खास माना जा रहा है। सप्ताह की शुरुआत न्याय के देवता शनि के वक्री होने के साथ हो रही है। 27 जुलाई को शनि मीन राशि में उल्टी चाल चलेंगे और 11 दिसंबर तक इसी स्थिति में रहेंगे। इस दौरान ग्रहों की स्थिति सभी 12 राशियों के जीवन पर अलग-अलग प्रभाव डालेगी।

    सप्ताह की शुरुआत में मंगल वृषभ, बुध मिथुन, सूर्य और गुरु कर्क, शुक्र व केतु सिंह, चंद्रमा धनु तथा राहु कुंभ राशि में विराजमान हैं, जबकि वक्री शनि मीन राशि में रहेंगे। ज्योतिषाचार्य प्रवीण मिश्र के अनुसार, कुछ राशियों के लिए यह सप्ताह तरक्की के अवसर लेकर आएगा, जबकि कुछ को खर्चों और निर्णयों में विशेष सतर्कता बरतनी होगी।

    मेष
    कार्यक्षेत्र में परिस्थितियां पहले से बेहतर होंगी और वरिष्ठों का सहयोग मिलेगा। कारोबार में धैर्य से फैसले लें। फिलहाल नई संपत्ति खरीदने का विचार टालना बेहतर रहेगा। मंगलवार और गुरुवार महत्वपूर्ण निर्णयों के लिए अनुकूल हैं। क्रोध से बचें।

    शुभ रंग: केसरिया
    शुभ दिन: मंगलवार, गुरुवार
    उपाय: प्रतिदिन हनुमान चालीसा का पाठ करें।

    वृषभ
    परिवार और रिश्तों को समय देने का सप्ताह है। नौकरी बदलने का फैसला फिलहाल टालें। व्यापार में स्थिति सामान्य से बेहतर रहेगी, लेकिन अधूरे काम छोड़ने से बचें। विरोधी सक्रिय रह सकते हैं और लंबी यात्रा से बचना लाभकारी रहेगा।

    शुभ रंग: सफेद
    शुभ दिन: गुरुवार, शुक्रवार
    उपाय: दुर्गा चालीसा का नियमित पाठ करें।

    मिथुन
    करियर में नए अवसर मिलने के संकेत हैं। नौकरी की तलाश कर रहे लोगों को सफलता मिल सकती है। विद्यार्थियों के लिए समय अनुकूल रहेगा। आय बढ़ने की संभावना है, लेकिन फिजूल खर्च पर नियंत्रण रखना जरूरी होगा।

    शुभ रंग: हल्का लाल
    शुभ दिन: बुधवार
    उपाय: भगवान शिव का जलाभिषेक करें।

    कर्क
    करियर से जुड़े बड़े फैसले लेने के लिए समय अनुकूल है। नौकरी में मेहनत बढ़ानी होगी और व्यापारियों को खर्चों पर नियंत्रण रखना होगा। यात्रा लाभदायक हो सकती है। स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही न करें।

    शुभ रंग: क्रीम
    शुभ दिन: सोमवार, गुरुवार
    उपाय: शिव परिवार का पूजन एवं जलाभिषेक करें।

    सिंह
    इस सप्ताह आर्थिक अनुशासन बेहद जरूरी रहेगा। करियर से जुड़े निर्णय जल्दबाजी में न लें और वरिष्ठों से विवाद से बचें। व्यापार में सोच-समझकर आगे बढ़ें। परिवार की भावनाओं का सम्मान करें।

    शुभ रंग: लाल
    शुभ दिन: सोमवार, गुरुवार
    उपाय: सूर्यदेव को अर्घ्य दें और हनुमान चालीसा का पाठ करें।

    कन्या
    करियर और व्यापार दोनों में सकारात्मक अवसर मिल सकते हैं। पारिवारिक समस्याओं के समाधान की संभावना है। हालांकि संपत्ति से जुड़े बड़े निर्णय फिलहाल टालना बेहतर रहेगा।

    शुभ रंग: केसरिया
    शुभ दिन: बुधवार, गुरुवार
    उपाय: शिव परिवार का जलाभिषेक करें।

    तुला
    मानसिक शांति बनाए रखने की आवश्यकता रहेगी। धार्मिक गतिविधियों में रुचि बढ़ेगी। नौकरी बदलने का विचार टालें। व्यापार में मेहनत अधिक करनी पड़ सकती है। यात्रा लाभदायक होगी, लेकिन वाणी पर संयम रखें।

    शुभ रंग: सफेद
    शुभ दिन: शुक्रवार
    उपाय: दुर्गा चालीसा का पाठ करें।

    वृश्चिक
    सप्ताह के शुरुआती दिनों में चुनौतियां रहेंगी, लेकिन बाद में परिस्थितियां बेहतर होंगी। व्यापार में बड़ा निवेश करने से बचें। बजट के अनुसार खर्च करें और गुस्से पर नियंत्रण रखें।

    शुभ रंग: केसरिया
    शुभ दिन: मंगलवार, गुरुवार
    उपाय: भगवान शिव का जलाभिषेक करें।

    धनु
    मेहनत का अच्छा परिणाम मिलने के योग हैं। नौकरी और व्यापार में लाभ मिलेगा तथा पारिवारिक विवाद सुलझ सकते हैं। हालांकि खर्चों पर नियंत्रण रखना जरूरी होगा। अहंकार और आलस्य से दूरी बनाए रखें।

    शुभ रंग: पीला
    शुभ दिन: गुरुवार
    उपाय: भगवान विष्णु की पूजा और आरती करें।

    मकर
    सफलता के लिए अधिक मेहनत करनी होगी। नौकरी में जल्दबाजी से बचें और साझेदारी में नया कारोबार शुरू न करें। व्यापार सामान्य रहेगा।

    शुभ रंग: आसमानी
    शुभ दिन: गुरुवार, शुक्रवार
    उपाय: भगवान शिव को जल अर्पित करें।

    कुंभ
    आर्थिक दृष्टि से सप्ताह लाभदायक रह सकता है। अचानक धन लाभ के योग हैं। करियर में प्रगति के अवसर मिलेंगे। संपत्ति से जुड़े मामलों में सोच-समझकर निर्णय लें।

    शुभ रंग: सफेद
    शुभ दिन: शुक्रवार
    उपाय: शिव परिवार की पूजा करें और ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का 108 बार जाप करें।

    मीन
    करियर और आर्थिक मामलों में समय अनुकूल रहेगा। नौकरीपेशा लोगों को वरिष्ठ अधिकारियों का सहयोग मिलेगा और व्यापार में लाभ के अवसर बनेंगे। वाणी पर संयम रखें तथा लंबी यात्रा से बचें।

    शुभ रंग: भूरा
    शुभ दिन: सोमवार, गुरुवार
    उपाय: भगवान विष्णु की पूजा करें और ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का 108 बार जाप करें।

  • एक गिलास दूध से घर पर बनाएं हलवाई जैसी मिल्क रोल बर्फी, सावन व्रत के लिए रहेगी बेहतरीन मिठाई

    एक गिलास दूध से घर पर बनाएं हलवाई जैसी मिल्क रोल बर्फी, सावन व्रत के लिए रहेगी बेहतरीन मिठाई

    नई दिल्ली । सावन का महीना आते ही घरों में व्रत और पूजा के लिए विशेष व्यंजनों की तैयारी शुरू हो जाती है। ऐसे समय में यदि कम सामग्री और कम समय में स्वादिष्ट मिठाई तैयार करनी हो, तो मिल्क रोल बर्फी एक बेहतरीन विकल्प साबित हो सकती है। इस मिठाई की खास बात यह है कि इसे केवल एक गिलास दूध और कुछ सामान्य रसोई सामग्री से आसानी से बनाया जा सकता है। इसका स्वाद हलवाई की मिठाइयों जैसा होता है और इसे पहले से बनाकर कई दिनों तक सुरक्षित भी रखा जा सकता है।

    मिल्क रोल बर्फी बनाने के लिए सबसे पहले एक भारी तले की कड़ाही में एक गिलास फुल क्रीम दूध डालकर धीमी आंच पर गर्म करें। इसमें दो छोटे चम्मच देसी घी मिलाएं और दूध को लगातार चलाते हुए पकाएं। जब दूध में हल्का उबाल आने लगे, तब इसमें स्वादानुसार चीनी डालें और मिश्रण को अच्छी तरह घुलने दें। लगातार चलाते रहने से दूध तले में नहीं लगेगा और स्वाद भी बेहतर रहेगा।

    इसके बाद मिश्रण में आधा छोटा चम्मच इलायची पाउडर मिलाएं, जिससे बर्फी में खुशबू और स्वाद दोनों बढ़ जाएंगे। यदि चाहें तो इसमें केसर या गुलाब जल की कुछ बूंदें भी मिला सकते हैं। अब दूध को तब तक पकाएं जब तक वह थोड़ा गाढ़ा न हो जाए। इसके बाद इसमें लगभग डेढ़ सौ ग्राम नारियल का बुरादा डालकर अच्छी तरह मिलाएं। मिश्रण को लगातार चलाते हुए तब तक पकाएं, जब तक वह कड़ाही छोड़ने न लगे और आटे जैसी लोई का रूप न ले ले।

    यदि मिल्क रोल को हल्का पिस्ता फ्लेवर देना चाहते हैं, तो इसमें थोड़ा पिस्ता एसेंस, पिसा हुआ पिस्ता या एक-दो बूंद प्राकृतिक फूड कलर मिला सकते हैं। हालांकि यह पूरी तरह वैकल्पिक है और इसके बिना भी मिठाई का स्वाद शानदार रहता है। मिश्रण तैयार होने के बाद गैस बंद कर दें और इसे कुछ मिनट ठंडा होने दें।

    अब एक साफ बटर पेपर, प्लास्टिक शीट या घी लगी ट्रे तैयार करें। मिश्रण को उस पर फैलाकर बेलनाकार रोल का आकार दें या चाहें तो ट्रे में जमाकर पारंपरिक बर्फी की तरह सेट करें। ऊपर से कटे हुए बादाम, पिस्ता या अन्य सूखे मेवे हल्के हाथ से दबाकर लगा दें। इसके बाद इसे लगभग आधे घंटे के लिए फ्रिज में रख दें ताकि मिठाई अच्छी तरह जम जाए।

    जब रोल पूरी तरह सेट हो जाए तो इसे मनचाहे आकार में काट लें। तैयार मिल्क रोल बर्फी का स्वाद बेहद मुलायम, हल्का और समृद्ध होता है। यह बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी को पसंद आती है और व्रत, पूजा, त्योहार या मेहमानों के स्वागत के लिए भी उपयुक्त रहती है। यदि इसे एयरटाइट डिब्बे में रखकर फ्रिज में रखा जाए, तो यह लगभग एक सप्ताह तक ताजा बनी रह सकती है। इसलिए सावन के सोमवार, पूजा-पाठ या अन्य धार्मिक अवसरों के लिए इसे पहले से तैयार करके आसानी से उपयोग किया जा सकता है।

  • बिहार बंद में हुई हिंसा के लिए तेज प्रताप यादव पर हत्या की कोशिश का केस, दोष सिद्ध हुआ तो होगी 10 साल की जेल

    बिहार बंद में हुई हिंसा के लिए तेज प्रताप यादव पर हत्या की कोशिश का केस, दोष सिद्ध हुआ तो होगी 10 साल की जेल


    पटना। बिहार बंद के दौरान पटना में हुई हिंसा के मामले में जनशक्ति जनता दल (JJD) प्रमुख तेज प्रताप यादव की मुश्किलें बढ़ गई हैं। पुलिस ने उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई गंभीर धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की है। इनमें सबसे अहम धारा 109 (हत्या की कोशिश) भी शामिल है। यदि यह आरोप अदालत में सिद्ध होता है तो 10 वर्ष तक की कैद और जुर्माने का प्रावधान है, जबकि गंभीर चोट साबित होने पर सजा उम्रकैद तक हो सकती है।

    पटना की अदालत ने तेज प्रताप यादव को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। इसके बाद उन्हें बेऊर केंद्रीय कारागार भेजा गया। पुलिस ने शनिवार शाम उन्हें पटना के एक शॉपिंग मॉल से गिरफ्तार किया था।

    पुलिस के मुताबिक, बिहार बंद के दौरान गांधी मैदान क्षेत्र में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प हुई थी। इस दौरान पथराव और हिंसा में कई पुलिसकर्मी घायल हो गए। इसी घटना को लेकर गांधी मैदान थाना कांड संख्या 400/26 दर्ज किया गया, जिसमें तेज प्रताप यादव समेत अन्य लोगों को नामजद किया गया है।

    यह बिहार बंद कथित NEET पेपर लीक, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग और छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई के विरोध में बुलाया गया था। प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में लोग गांधी मैदान इलाके में एकत्र हुए थे। पुलिस का आरोप है कि प्रदर्शन हिंसक हो गया और पथराव में गांधी मैदान थाना प्रभारी अखिलेश मिश्रा, टीओपी प्रभारी प्रमोद कुमार सहित कई पुलिसकर्मी घायल हुए।

    एफआईआर में धारा 109 के अलावा लोक सेवक पर हमला, दंगा, आपराधिक साजिश, गैरकानूनी जमावड़ा, सरकारी आदेश की अवहेलना, धार्मिक भावनाएं आहत करने, वैमनस्य फैलाने और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने जैसी कई धाराएं भी जोड़ी गई हैं। साथ ही Prevention of Damage to Public Property Act, 1984 की धारा 3 और 4 के तहत भी मामला दर्ज किया गया है।

    दूसरी ओर, तेज प्रताप यादव के वकील ने गिरफ्तारी की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए इसे नियमों के विपरीत बताया है। उनका कहना है कि जल्द ही अदालत में जमानत याचिका दाखिल की जाएगी। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की बात कह रही है। न्यायालय में सुनवाई के बाद ही आरोपों पर अंतिम फैसला होगा।

  • ऊर्जा विभाग का बड़ा फैसला 6500 संविदा अधिकारी और कर्मचारी बन सकेंगे नियमित एक बार मिलेगा सुनहरा मौका

    ऊर्जा विभाग का बड़ा फैसला 6500 संविदा अधिकारी और कर्मचारी बन सकेंगे नियमित एक बार मिलेगा सुनहरा मौका


    मध्यप्रदेश मध्य प्रदेश सरकार ने बिजली कंपनियों में कार्यरत 6500 से अधिक संविदा अधिकारी और कर्मचारियों को बड़ी राहत देते हुए नियमित नियुक्ति का रास्ता खोल दिया है। ऊर्जा विभाग ने संविदा कर्मचारियों के लिए नई नियुक्ति योजना लागू कर दी है जिसके तहत पात्र कर्मचारियों को नियमित रिक्त पदों पर भर्ती का अवसर मिलेगा। इसके लिए अक्टूबर से पहले ऑनलाइन परीक्षा आयोजित की जाएगी। परीक्षा में सफल होने वाले अभ्यर्थियों की मेरिट परीक्षा के अंकों और संविदा सेवा के अनुभव के आधार पर दिए जाने वाले बोनस अंकों को जोड़कर तैयार की जाएगी।

    ऊर्जा विभाग ने इस योजना को संविदा आधार पर कार्यरत कार्मिकों की समकक्ष नियमित पदों पर नवीन नियुक्ति योजना 2026 नाम दिया है। योजना का उद्देश्य लंबे समय से संविदा पर कार्य कर रहे कर्मचारियों को नियमित सेवा में आने का अवसर देना है। हाल ही में नियमितीकरण की मांग को लेकर संविदाकर्मियों ने प्रदर्शन भी किया था जिसके बाद सरकार ने यह अहम फैसला लिया है।

    योजना का लाभ एमपी पावर मैनेजमेंट कंपनी पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी तथा मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी में कार्यरत संविदा कर्मचारियों को मिलेगा। हालांकि मध्यप्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी को इस योजना के दायरे से बाहर रखा गया है।

    इस योजना के तहत लाइन अटेंडेंट टेस्टिंग अटेंडेंट जूनियर इंजीनियर असिस्टेंट इंजीनियर सहित अन्य समकक्ष पदों पर कार्यरत संविदा अधिकारी और कर्मचारी आवेदन कर सकेंगे। संबंधित बिजली कंपनियों के प्रबंध संचालकों को योजना के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

    योजना में आवेदन के लिए वही कर्मचारी पात्र होंगे जिन्होंने योजना की स्वीकृति तिथि तक संबंधित कंपनी में कम से कम दो वर्ष की संविदा सेवा पूरी कर ली हो। यदि किसी कर्मचारी की दो संविदा नियुक्तियों के बीच अंतराल रहा है तो उसे सेवा में व्यवधान नहीं माना जाएगा लेकिन उस अवधि को अनुभव में नहीं जोड़ा जाएगा। पुनः नियुक्ति की स्थिति में भी वास्तविक सेवा अवधि के आधार पर अनुभव की गणना होगी। अनुभव प्रमाण पत्र कार्यपालन अभियंता या उससे वरिष्ठ अधिकारी द्वारा जारी किया जाएगा।

    नियमित पदों पर चयन पूरी तरह ऑनलाइन परीक्षा के माध्यम से होगा। केवल उन्हीं पदों पर भर्ती की जाएगी जिनके समकक्ष नियमित रिक्तियां उपलब्ध होंगी। परीक्षा में प्राप्त अंकों के साथ संविदा सेवा के अनुभव के आधार पर बोनस अंक जोड़े जाएंगे और इसी आधार पर अंतिम मेरिट सूची तैयार होगी। इससे लंबे समय से कार्यरत कर्मचारियों को प्रतिस्पर्धा में अतिरिक्त लाभ मिलेगा।

    सरकार ने स्पष्ट किया है कि सभी नियुक्तियां मध्य प्रदेश शासन के आरक्षण नियमों के अनुसार की जाएंगी। संविदा कर्मचारियों को आवेदन के लिए अधिकतम आयु सीमा में भी छूट दी जाएगी ताकि अधिक से अधिक पात्र कर्मचारी इस अवसर का लाभ उठा सकें।

    यदि कोई संविदा कर्मचारी नियमित पद पर चयनित होता है तो उसे पहले अपने संविदा पद से त्यागपत्र देना होगा। इस प्रक्रिया में एक महीने की नोटिस अवधि की अनिवार्यता को शिथिल किया गया है। त्यागपत्र स्वीकार होने के बाद संविदा सेवा समाप्त मानी जाएगी और भविष्य में उसी सेवा के आधार पर वरिष्ठता पदोन्नति या अन्य किसी लाभ का दावा मान्य नहीं होगा।

    सरकार के इस फैसले को बिजली कंपनियों में वर्षों से संविदा पर कार्यरत हजारों कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है। अब उनकी नजर अक्टूबर से पहले होने वाली परीक्षा पर रहेगी जो नियमित सरकारी सेवा का रास्ता तय करेगी।

  • पचमढ़ी घूमने का बना रहे हैं प्लान तो पहले जान लें ये जरूरी ट्रैवल टिप्स वरना सफर का मजा हो सकता है खराब

    पचमढ़ी घूमने का बना रहे हैं प्लान तो पहले जान लें ये जरूरी ट्रैवल टिप्स वरना सफर का मजा हो सकता है खराब


    मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश के होशंगाबाद जिले में स्थित पचमढ़ी को सतपुड़ा की रानी कहा जाता है। घने जंगल ऊंचे पहाड़ मनमोहक झरने शांत वातावरण और प्राकृतिक सुंदरता हर साल हजारों पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करती है। खासकर मानसून के दौरान यहां की हरियाली और झरनों का नजारा किसी स्वर्ग से कम नहीं लगता। हालांकि पचमढ़ी की यात्रा पर निकलने से पहले कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना बेहद आवश्यक है ताकि आपका सफर सुरक्षित आरामदायक और यादगार बन सके।

    अगर आप पहली बार पचमढ़ी जा रहे हैं तो सबसे पहले मौसम की जानकारी जरूर लें। बरसात के दिनों में यहां लगातार बारिश होती है इसलिए रेनकोट छाता और वाटरप्रूफ बैग साथ रखें। फिसलन वाले रास्तों पर चलने के लिए मजबूत ग्रिप वाले जूते पहनना सबसे अच्छा रहता है। आरामदायक कपड़े चुनें ताकि ट्रैकिंग और घूमने में किसी तरह की परेशानी न हो।

    पचमढ़ी में कई पर्यटन स्थल वन क्षेत्र के अंदर स्थित हैं इसलिए यहां घूमने के लिए स्थानीय गाइड या अधिकृत जिप्सी सेवा का उपयोग करना बेहतर माना जाता है। बी फॉल्स धूपगढ़ जटाशंकर गुफा पांडव गुफाएं अप्सरा विहार रजत प्रपात और महादेव मंदिर जैसे प्रमुख स्थानों की यात्रा समय के अनुसार करें ताकि सभी जगह आराम से घूम सकें।

    अगर आप ट्रैकिंग के शौकीन हैं तो सुबह जल्दी निकलना सबसे अच्छा रहेगा। सुबह का मौसम सुहावना होता है और भीड़ भी कम रहती है। साथ ही पानी की बोतल हल्का नाश्ता और जरूरी दवाइयां अपने बैग में जरूर रखें। जंगल वाले क्षेत्रों में बिना अनुमति अंदर जाने से बचें और वन विभाग के सभी निर्देशों का पालन करें।

    पचमढ़ी की प्राकृतिक सुंदरता को सुरक्षित रखना हर पर्यटक की जिम्मेदारी है। प्लास्टिक की बोतलें चिप्स के पैकेट या अन्य कचरा खुले में बिल्कुल न फेंकें। जहां डस्टबिन उपलब्ध हो वहीं कचरा डालें। प्राकृतिक स्थलों पर तेज आवाज में संगीत बजाने से बचें ताकि वहां का शांत वातावरण बना रहे और वन्यजीव भी प्रभावित न हों।

    यात्रा पर निकलने से पहले होटल की बुकिंग पहले ही कर लेना समझदारी होगी खासकर छुट्टियों और मानसून सीजन में यहां पर्यटकों की संख्या काफी बढ़ जाती है। पहले से बुकिंग होने पर आपको बेहतर सुविधा और उचित कीमत पर ठहरने की जगह मिल सकती है।

    पचमढ़ी की स्थानीय संस्कृति और स्वाद का आनंद लेना भी यात्रा का अहम हिस्सा है। यहां मिलने वाले स्थानीय व्यंजन और हस्तशिल्प आपकी यात्रा को और खास बना सकते हैं। खरीदारी करते समय स्थानीय दुकानदारों से विनम्र व्यवहार करें और स्थानीय नियमों का सम्मान करें।

    अगर आप परिवार के साथ यात्रा कर रहे हैं तो बच्चों और बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखें। फिसलन वाले झरनों और पहाड़ी किनारों पर अनावश्यक जोखिम न लें। फोटो खींचते समय भी सुरक्षा को प्राथमिकता दें क्योंकि एक छोटी सी लापरवाही बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती है।

    पचमढ़ी सिर्फ एक पर्यटन स्थल नहीं बल्कि प्रकृति प्रेमियों के लिए एक अनमोल धरोहर है। सही योजना आवश्यक तैयारी और जिम्मेदार व्यवहार के साथ की गई यात्रा न केवल आपको खूबसूरत यादें देगी बल्कि इस प्राकृतिक विरासत को सुरक्षित रखने में भी आपकी महत्वपूर्ण भूमिका होगी।

  • एमपी में मूंग खरीदी पर लेटर वॉर तेज देश का 87 फीसदी कोटा मिलने के बावजूद 2 प्रतिशत खरीद केंद्र ने राज्य सरकार से मांगा जवाब

    एमपी में मूंग खरीदी पर लेटर वॉर तेज देश का 87 फीसदी कोटा मिलने के बावजूद 2 प्रतिशत खरीद केंद्र ने राज्य सरकार से मांगा जवाब


    मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश में समर्थन मूल्य पर मूंग खरीदी को लेकर किसानों का आंदोलन तेज होने के बीच केंद्र और राज्य सरकार के बीच भी खींचतान खुलकर सामने आ गई है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर स्पष्ट किया है कि प्रदेश को देश में सबसे अधिक मूंग खरीदी का कोटा पहले ही दिया जा चुका है। इसके बावजूद राज्य सरकार स्वीकृत लक्ष्य का केवल दो प्रतिशत ही खरीद सकी है। ऐसे में पहले निर्धारित लक्ष्य पूरा किया जाए उसके बाद ही अतिरिक्त कोटा देने के प्रस्ताव पर नियमों के अनुसार विचार किया जाएगा।

    जानकारी के अनुसार मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 21 मई 2026 को केंद्र सरकार से प्रदेश के लिए मूंग खरीदी की मात्रा बढ़ाने का अनुरोध किया था। इसके जवाब में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने तीन दिन पहले भेजे गए पत्र में कहा कि मूल्य समर्थन योजना के तहत मध्य प्रदेश को पहले ही देश का सबसे बड़ा कोटा दिया गया है। इसके बावजूद खरीदी की गति बेहद धीमी है और अब तक लक्ष्य के मुकाबले बेहद कम खरीद हो पाई है।

    केंद्र सरकार के मुताबिक मध्य प्रदेश के लिए इस वर्ष 4 लाख 54 हजार 580 मीट्रिक टन मूंग खरीदी की स्वीकृति दी गई है। लेकिन 16 जुलाई 2026 तक केवल 7 हजार 947.92 मीट्रिक टन मूंग की खरीद हो सकी है जो स्वीकृत मात्रा का लगभग दो प्रतिशत है। इस दौरान करीब 12 हजार किसानों से ही उपज खरीदी गई। केंद्र ने राज्य सरकार से खरीदी प्रक्रिया में तेजी लाने और पहले स्वीकृत लक्ष्य पूरा करने पर जोर दिया है।

    पत्र में यह भी स्पष्ट किया गया है कि मूल्य समर्थन योजना के दिशा निर्देशों के अनुसार तूर उड़द और मसूर जैसी फसलों की शत प्रतिशत खरीद की व्यवस्था है जबकि अन्य अधिसूचित फसलों की खरीद अनुमानित उत्पादन के अधिकतम 25 प्रतिशत तक ही की जा सकती है। इसलिए अतिरिक्त कोटा तभी स्वीकृत किया जाएगा जब पहले से स्वीकृत मात्रा की खरीद पूरी हो जाएगी।

    केंद्र सरकार ने पिछले वर्ष के आंकड़े भी साझा किए हैं। वर्ष 2024-25 में मध्य प्रदेश के लिए 4 लाख 19 हजार 692 मीट्रिक टन मूंग खरीदी की मंजूरी दी गई थी। इसके विरुद्ध 3 लाख 93 हजार 123.79 मीट्रिक टन मूंग खरीदी गई थी। किसानों को समर्थन मूल्य के रूप में 3 हजार 413.10 करोड़ रुपए का भुगतान किया गया और 1 लाख 22 हजार 776 किसानों को इसका लाभ मिला।

    पत्र में सोयाबीन का उदाहरण भी दिया गया है। केंद्र ने बताया कि वर्ष 2025-26 में भावांतर भुगतान योजना के तहत मध्य प्रदेश के लिए 22.21 लाख मीट्रिक टन सोयाबीन स्वीकृत की गई थी। इसके लिए 1 हजार 93.13 करोड़ रुपए जारी किए गए जिससे 7 लाख 10 हजार 257 किसानों को लाभ मिला।

    इधर नर्मदापुरम सीहोर रायसेन हरदा और आसपास के जिलों में समर्थन मूल्य पर खरीदी नहीं होने से किसानों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। संयुक्त किसान मोर्चा ने 27 जुलाई से किसान क्रांति पदयात्रा शुरू करने की घोषणा की है। यह यात्रा नर्मदापुरम के सेठानी घाट से शुरू होकर बुधनी बरखेड़ा ओबेदुल्लागंज मंडीदीप होते हुए 29 और 30 जुलाई को भोपाल पहुंचेगी। किसान मुख्यमंत्री निवास तक मार्च निकालने की तैयारी में हैं। किसान नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार से सकारात्मक वार्ता नहीं हुई तो भोपाल में चक्काजाम किया जाएगा और रेल मार्ग भी बाधित किया जा सकता है। ऐसे में मूंग खरीदी का मुद्दा अब किसानों के आंदोलन के साथ राजनीतिक टकराव का भी बड़ा विषय बनता जा रहा है।

  • चार दिन तक बारिश का डबल अटैक एमपी के कई जिलों में भारी से अति भारी बारिश की चेतावनी मौसम विभाग ने जारी किया अलर्ट

    चार दिन तक बारिश का डबल अटैक एमपी के कई जिलों में भारी से अति भारी बारिश की चेतावनी मौसम विभाग ने जारी किया अलर्ट


    मध्य प्रदेश  मध्य प्रदेश में मानसून एक बार फिर पूरी ताकत के साथ सक्रिय हो गया है। प्रदेश में बने मजबूत मानसूनी सिस्टम के कारण अगले चार दिनों तक तेज बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। भारतीय मौसम विभाग ने सोमवार के लिए उमरिया शहडोल अनूपपुर डिंडौरी मंडला और बालाघाट जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। वहीं प्रदेश के 50 से अधिक जिलों में कहीं हल्की तो कहीं तेज बारिश होने की संभावना जताई गई है। मौसम विभाग का कहना है कि 27 से 30 जुलाई के बीच कई इलाकों में भारी से अति भारी बारिश दर्ज की जा सकती है इसलिए लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

    मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार प्रदेश के ऊपर से मानसून ट्रफ गुजर रही है। इसके साथ ही एक निम्न दबाव क्षेत्र और डिप्रेशन सक्रिय है जबकि पश्चिमी विक्षोभ भी जल्द प्रभाव दिखाएगा। इन सभी मौसम प्रणालियों के एक साथ सक्रिय होने से प्रदेश में बारिश की गतिविधियां तेजी से बढ़ने लगी हैं। रविवार को पूर्वी मध्य प्रदेश के कई हिस्सों में अच्छी बारिश दर्ज की गई और अब इसका असर पूरे प्रदेश में देखने को मिलेगा।

    भोपाल रायसेन सीहोर राजगढ़ विदिशा इंदौर धार आलीराजपुर बुरहानपुर बड़वानी खंडवा खरगोन झाबुआ उज्जैन नीमच आगर मालवा मंदसौर शाजापुर देवास रतलाम नर्मदापुरम बैतूल हरदा ग्वालियर गुना शिवपुरी दतिया अशोकनगर मुरैना भिंड श्योपुर जबलपुर कटनी छिंदवाड़ा सिवनी नरसिंहपुर पांढुर्णा रीवा सतना सीधी सिंगरौली मऊगंज मैहर सागर पन्ना दमोह छतरपुर टीकमगढ़ और निवाड़ी समेत अधिकांश जिलों में बारिश का सिलसिला जारी रहने का अनुमान है। कई स्थानों पर गरज चमक के साथ तेज बारिश और बिजली गिरने की भी संभावना जताई गई है।

    मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में अब तक औसतन 13.2 इंच यानी 334.9 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है जबकि इस समय तक 15.5 इंच यानी 395.2 मिलीमीटर बारिश हो जानी चाहिए थी। इस तरह प्रदेश में अब भी करीब 15 प्रतिशत बारिश की कमी बनी हुई है। पूर्वी मध्य प्रदेश में औसत से 18 प्रतिशत और पश्चिमी हिस्से में करीब 13 प्रतिशत कम बारिश रिकॉर्ड की गई है।

    प्रदेश के 55 जिलों में से केवल 14 जिलों में सामान्य से अधिक बारिश दर्ज हुई है जबकि 41 जिले अब भी सामान्य से कम बारिश वाले क्षेत्रों में शामिल हैं। निवाड़ी पूर्वी मध्य प्रदेश का एकमात्र जिला है जहां औसत से अधिक वर्षा हुई है। दूसरी ओर भोपाल इंदौर सीहोर राजगढ़ देवास हरदा बुरहानपुर नीमच मंदसौर दमोह सिवनी आगर मालवा और भिंड जैसे जिलों में बारिश का आंकड़ा सामान्य से बेहतर रहा है।

    मौसम विभाग का कहना है कि जून महीने में कमजोर मानसून के कारण बारिश का आंकड़ा काफी पीछे रह गया था। जुलाई के शुरुआती दिनों में अच्छी बारिश से स्थिति सुधरी लेकिन पिछले कुछ दिनों तक बारिश कमजोर रहने से प्रदेश फिर औसत से नीचे पहुंच गया। अब सक्रिय मानसूनी सिस्टम से उम्मीद है कि बारिश की कमी काफी हद तक पूरी हो सकती है।

    विशेषज्ञों के अनुसार जुलाई मध्य प्रदेश के लिए सबसे महत्वपूर्ण बारिश वाला महीना होता है क्योंकि पूरे मानसून की लगभग 40 प्रतिशत वर्षा इसी महीने में होती है। प्रदेश की सामान्य वार्षिक बारिश 37.3 इंच मानी जाती है जबकि भोपाल इंदौर जबलपुर और ग्वालियर जैसे बड़े शहरों में सामान्य वर्षा 38 से 39 इंच के बीच रहती है। मौसम विभाग ने लोगों को नदी नालों से दूर रहने और भारी बारिश के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी है।