Author: bharati

  • वाराणसी की आध्यात्मिक यात्रा ने छुआ निवेथा पेथुराज का मन, काशी विश्वनाथ और मां गंगा पर लिखी भावुक बात

    वाराणसी की आध्यात्मिक यात्रा ने छुआ निवेथा पेथुराज का मन, काशी विश्वनाथ और मां गंगा पर लिखी भावुक बात

    नई दिल्ली । दक्षिण भारतीय फिल्म अभिनेत्री निवेथा पेथुराज एक बार फिर अपनी आध्यात्मिक यात्रा को लेकर चर्चा में हैं। उन्होंने वाराणसी स्थित काशी की यात्रा की कुछ झलकियां साझा करते हुए अपने अनुभवों को भावनात्मक शब्दों में व्यक्त किया है। अभिनेत्री ने बताया कि कुछ स्थान केवल घूमने के लिए नहीं होते, बल्कि वे इंसान को अपने भीतर झांकने और ईश्वर से जुड़ने का अवसर देते हैं। उनकी इस पोस्ट को सोशल मीडिया पर व्यापक प्रतिक्रिया मिल रही है और प्रशंसक उनकी आस्था तथा विचारों की सराहना कर रहे हैं।

    निवेथा पेथुराज ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर काशी यात्रा का एक वीडियो साझा किया, जिसमें घाटों, मंदिरों और आध्यात्मिक वातावरण की झलक दिखाई गई। इसके साथ उन्होंने लिखा कि जब भी वह मणिकर्णिका घाट पर बैठकर मां गंगा के प्रवाह को देखती हैं, तो उन्हें उत्तरों से अधिक नए प्रश्न मिलते हैं। उनके अनुसार, मां गंगा सदियों के इतिहास की साक्षी रही हैं, लेकिन इसके बावजूद बिना किसी रुकावट और शिकायत के निरंतर बहती रहती हैं। यही निरंतरता और धैर्य जीवन के लिए सबसे बड़ी सीख प्रतीत होती है।

    अभिनेत्री ने अपनी पोस्ट में यह भी लिखा कि वह अक्सर सोचती हैं कि क्या मां गंगा हर व्यक्ति को यही संदेश देने का प्रयास करती हैं कि जीवन में परिस्थितियों से उलझने के बजाय निरंतर आगे बढ़ते रहना चाहिए। उन्होंने इस अनुभव को केवल धार्मिक नहीं, बल्कि आत्मचिंतन से जुड़ा एक गहरा एहसास बताया। उनके शब्दों में काशी का वातावरण व्यक्ति को स्वयं से संवाद करने का अवसर देता है और यही इस शहर की सबसे बड़ी विशेषता है।

    निवेथा ने अपनी यात्रा के दौरान मिले धार्मिक अनुभवों का भी विस्तार से उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि उन्हें काशी विश्वनाथ मंदिर में भगवान शिव का जलाभिषेक करने का सौभाग्य मिला। इसके अलावा उन्होंने महाशिवरात्रि के अवसर पर आयोजित रुद्री पाठ पूजा में भाग लिया और पवित्र निशिता काल पूजा के दौरान काल भैरव के दर्शन भी किए। उन्होंने इन धार्मिक अनुष्ठानों को अपने जीवन के सबसे यादगार और आध्यात्मिक अनुभवों में शामिल बताया।

    अभिनेत्री ने यह भी कहा कि उन्हें कई बार ऐसा महसूस होता है जैसे भगवान काल भैरव स्वयं उन्हें दोबारा काशी आने के लिए प्रेरित करते हैं। उनके अनुसार, हर बार कोई न कोई ऐसा संयोग बन जाता है, जो उन्हें फिर से इस पवित्र नगरी तक पहुंचा देता है। उन्होंने सवाल किया कि आखिर काशी उन्हें बार-बार अपनी ओर क्यों आकर्षित करती है, लेकिन साथ ही यह भी स्वीकार किया कि शायद हर आस्था का उत्तर तर्क से नहीं, बल्कि अनुभूति से मिलता है।

    अपनी पोस्ट के अंतिम हिस्से में निवेथा पेथुराज ने लिखा कि कुछ स्थान केवल यात्रा की मंजिल नहीं होते, बल्कि वे ईश्वर के साथ होने वाली ऐसी मौन बातचीत होते हैं, जिसका प्रभाव वहां से लौटने के बाद भी लंबे समय तक मन में बना रहता है। उनके इस भावनात्मक संदेश को प्रशंसकों ने काफी पसंद किया है। बड़ी संख्या में लोगों ने उनकी पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए काशी की आध्यात्मिक महिमा और अभिनेत्री की आस्था की सराहना की। निवेथा की यह यात्रा एक बार फिर यह दर्शाती है कि व्यस्त पेशेवर जीवन के बीच भी आध्यात्मिक अनुभव व्यक्ति को आत्मिक शांति और नई ऊर्जा प्रदान कर सकते हैं।

  • 30 साल बाद भी कायम है ‘दिल की तन्हाई’ का जादू, शाहरुख खान और रम्या कृष्णन का यह गीत आज भी है यादगार

    30 साल बाद भी कायम है ‘दिल की तन्हाई’ का जादू, शाहरुख खान और रम्या कृष्णन का यह गीत आज भी है यादगार

    नई दिल्ली । हिंदी सिनेमा के लोकप्रिय गीतों में शामिल ‘दिल की तन्हाई’ ने अपनी रिलीज के तीन दशक पूरे कर लिए हैं। वर्ष 1996 में आई फिल्म ‘चाहत’ का यह भावनात्मक गीत आज भी संगीत प्रेमियों की पसंद बना हुआ है। इस अवसर पर फिल्म के संगीतकार अनु मलिक ने पुराने दिनों को याद करते हुए अभिनेता शाहरुख खान के अभिनय, उनकी भाव-भंगिमाओं और गीत की स्थायी लोकप्रियता की सराहना की। सोशल मीडिया पर साझा किए गए उनके संदेश ने एक बार फिर इस गीत को चर्चा का विषय बना दिया है।

    अनु मलिक ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर ‘दिल की तन्हाई’ गीत का एक वीडियो साझा करते हुए लिखा कि शाहरुख खान के प्रभावशाली अभिनय और भावनात्मक अभिव्यक्तियों ने इस गीत को एक अलग पहचान दी। उन्होंने कहा कि अभिनेता ने अपने प्रदर्शन से गीत की संवेदनाओं को और गहराई प्रदान की, जिसकी वजह से यह आज भी दर्शकों के दिलों में अपनी जगह बनाए हुए है। उन्होंने यह भी कहा कि समय बदलने के बावजूद इस गीत की लोकप्रियता में कोई कमी नहीं आई है।

    संगीतकार ने फिल्म के निर्देशक महेश भट्ट की भी प्रशंसा करते हुए कहा कि वे मानवीय भावनाओं को समझने और उन्हें प्रभावी ढंग से पर्दे पर प्रस्तुत करने की विशेष क्षमता रखते थे। उनके अनुसार, ‘चाहत’ में संगीत और कहानी का तालमेल ही इस गीत की सबसे बड़ी ताकत बना। अनु मलिक ने यह भी माना कि भावनात्मक विषयों पर आधारित गीतों को यादगार बनाने में निर्देशन की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

    उन्होंने गीत के गायक कुमार सानू के योगदान को भी विशेष रूप से रेखांकित किया। अनु मलिक ने कहा कि कुमार सानू की आवाज ने ‘दिल की तन्हाई’ को ऐसी भावनात्मक गहराई दी, जिसने इसे लंबे समय तक श्रोताओं की यादों में जीवित रखा। उनका मानना है कि कुछ गीत केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं होते, बल्कि लोगों की व्यक्तिगत यादों और भावनाओं का हिस्सा बन जाते हैं और यह गीत भी उन्हीं में से एक है।

    वर्ष 1996 में रिलीज हुई फिल्म ‘चाहत’ में शाहरुख खान, पूजा भट्ट, नसीरुद्दीन शाह, रम्या कृष्णन और अनुपम खेर ने प्रमुख भूमिकाएं निभाई थीं। फिल्म में शाहरुख खान ने रूप सिंह राठौड़ का किरदार निभाया था, जबकि पूजा भट्ट उनकी प्रेमिका की भूमिका में नजर आई थीं। वहीं रम्या कृष्णन ने भी अपनी दमदार उपस्थिति से दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया। बाद के वर्षों में ‘बाहुबली’ श्रृंखला में शिवगामी देवी की भूमिका निभाकर रम्या कृष्णन को नई पीढ़ी के दर्शकों के बीच भी व्यापक पहचान मिली।

    ‘चाहत’ अपने संगीत, भावनात्मक कहानी और कलाकारों के अभिनय के कारण उस दौर की चर्चित फिल्मों में गिनी जाती है। इसके गीतों ने फिल्म की लोकप्रियता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। विशेष रूप से ‘दिल की तन्हाई’ को उन गीतों में शामिल किया जाता है, जिन्हें आज भी रेडियो, डिजिटल प्लेटफॉर्म और संगीत कार्यक्रमों में पसंद किया जाता है। इसकी धुन, बोल और प्रस्तुति ने इसे समय के साथ भी प्रासंगिक बनाए रखा है।

    फिल्म से जुड़ी एक महत्वपूर्ण बात यह भी रही कि वर्ष 2013 में शाहरुख खान की प्रोडक्शन कंपनी ने इसके अधिकार अपने पास ले लिए थे। इसके अलावा फिल्म की कहानी से प्रेरित होकर ओड़िया भाषा में भी इसका रीमेक बनाया गया था। तीन दशक बाद भी ‘दिल की तन्हाई’ की लोकप्रियता यह साबित करती है कि बेहतरीन संगीत, सशक्त अभिनय और प्रभावशाली प्रस्तुति समय की सीमाओं से परे जाकर दर्शकों के दिलों में अपनी जगह बनाए रखती है।

  • दीपिका के बाहर होने के बाद कैटरीना का नाम चर्चा में, 'स्पिरिट' को लेकर दावों पर अभी नहीं लगी मुहर

    दीपिका के बाहर होने के बाद कैटरीना का नाम चर्चा में, 'स्पिरिट' को लेकर दावों पर अभी नहीं लगी मुहर

    नई दिल्ली ।प्रभास और निर्देशक संदीप रेड्डी वांगा की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘स्पिरिट’ एक बार फिर सुर्खियों में है। इस बार चर्चा फिल्म की कहानी या निर्माण को लेकर नहीं, बल्कि इसकी संभावित स्टारकास्ट को लेकर हो रही है। हाल के दिनों में ऐसी अटकलें सामने आईं कि अभिनेत्री कैटरीना कैफ इस बड़े बजट की फिल्म का हिस्सा बनने जा रही हैं। हालांकि इन दावों के बीच अब तक फिल्म निर्माताओं या अभिनेत्री की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, जिससे स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो सकी है।

    फिल्म पहले भी चर्चा में रही थी, जब अभिनेत्री दीपिका पादुकोण के इससे अलग होने की खबर सामने आई थी। इसके बाद से लगातार यह कयास लगाए जा रहे थे कि उनकी जगह किस अभिनेत्री को लिया जाएगा। इसी क्रम में कैटरीना कैफ का नाम तेजी से सामने आया और सोशल मीडिया पर उनकी संभावित वापसी को लेकर कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं।

    हालांकि अभिनेत्री से जुड़े करीबी सूत्रों ने इन दावों को सही नहीं माना है। उनके अनुसार, कैटरीना कैफ के ‘स्पिरिट’ से जुड़ने की खबरों की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है और फिलहाल उनके भविष्य के अभिनय प्रोजेक्ट्स को लेकर सामने आ रही कई बातें केवल अटकलों पर आधारित हैं। सूत्रों का कहना है कि ऐसी रिपोर्टों को तथ्यात्मक मानने का कोई आधार नहीं है, क्योंकि अभिनेत्री की ओर से इस संबंध में कोई घोषणा नहीं की गई है।

    कैटरीना कैफ का नाम इस फिल्म से जुड़ने की चर्चा इसलिए भी तेजी से फैली क्योंकि इससे उनकी लंबे समय बाद तेलुगु सिनेमा में वापसी हो सकती थी। उन्होंने अपने करियर के शुरुआती दौर में तेलुगु फिल्मों में काम किया था। वर्ष 2004 में उन्होंने ‘मल्लिश्वरी’ से तेलुगु फिल्म उद्योग में कदम रखा था, जबकि 2005 में रिलीज हुई ‘अल्लारी पिडुगु’ उनकी आखिरी तेलुगु फिल्म रही थी। ऐसे में यदि वह ‘स्पिरिट’ का हिस्सा बनतीं तो लगभग दो दशक बाद उनकी टॉलीवुड में वापसी होती।

    इसके अलावा यह भी माना जा रहा था कि यह फिल्म मां बनने के बाद कैटरीना की बड़े पर्दे पर वापसी का माध्यम बन सकती है। अभिनेत्री आखिरी बार वर्ष 2024 में रिलीज हुई फिल्म ‘मेरी क्रिसमस’ में विजय सेतुपति के साथ नजर आई थीं। इसके बाद उन्होंने फिल्मों से कुछ समय का विराम लिया और अपने निजी जीवन पर अधिक ध्यान दिया।

    कैटरीना कैफ और अभिनेता विक्की कौशल ने दिसंबर 2021 में राजस्थान में पारिवारिक और निजी समारोह में विवाह किया था। दोनों की शादी उस समय काफी चर्चा में रही थी। इसके बाद नवंबर 2025 में उनके घर बेटे विहान कौशल का जन्म हुआ। अभिनेत्री ने अपने निजी जीवन को हमेशा सार्वजनिक चर्चा से दूर रखने की कोशिश की है और अब तक उन्होंने अपने बेटे का चेहरा सार्वजनिक रूप से साझा नहीं किया है। हाल ही में अपने जन्मदिन के अवसर पर साझा की गई तस्वीरों में उन्होंने परिवार की कुछ झलकियां जरूर दिखाई थीं, जिन्हें प्रशंसकों ने काफी पसंद किया।

    फिलहाल ‘स्पिरिट’ की स्टारकास्ट को लेकर अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं, लेकिन किसी भी नए कलाकार की आधिकारिक घोषणा का इंतजार किया जा रहा है। जब तक निर्माता या कलाकार स्वयं इस विषय पर पुष्टि नहीं करते, तब तक कैटरीना कैफ के फिल्म से जुड़ने की खबरों को केवल अटकलों के रूप में ही देखा जा रहा है। ऐसे में प्रशंसकों की नजर अब फिल्म से जुड़े अगले आधिकारिक अपडेट पर बनी हुई है।

  • 'रामायण' का ट्रेलर रिलीज से पहले लीक, रणबीर कपूर और यश की झलक ने बढ़ाई फिल्म को लेकर उत्सुकता

    'रामायण' का ट्रेलर रिलीज से पहले लीक, रणबीर कपूर और यश की झलक ने बढ़ाई फिल्म को लेकर उत्सुकता

    नई दिल्ली । रणबीर कपूर की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘रामायण’ एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गई है। फिल्म का आधिकारिक ट्रेलर अभी जारी नहीं किया गया है, लेकिन सोशल मीडिया पर इसके कथित वीडियो क्लिप्स तेजी से वायरल हो रहे हैं। इन क्लिप्स में फिल्म के कई प्रमुख किरदारों की झलक दिखाई देने का दावा किया जा रहा है। इसके बाद से दर्शकों के बीच फिल्म को लेकर उत्सुकता और बढ़ गई है तथा बड़ी संख्या में प्रशंसक आधिकारिक ट्रेलर जल्द जारी करने की मांग कर रहे हैं।

    बताया जा रहा है कि फिल्म का ट्रेलर पहले जुलाई के अंतिम सप्ताह में रिलीज किए जाने की तैयारी थी। हालांकि अंतिम समय में इसकी रिलीज को टाल दिया गया। इसके बाद से दर्शकों के बीच नई रिलीज तारीख को लेकर लगातार चर्चा बनी हुई है। अब तक निर्माताओं की ओर से ट्रेलर की नई आधिकारिक रिलीज तिथि की घोषणा नहीं की गई है, जिससे प्रशंसकों की उत्सुकता और बढ़ गई है।

    फिल्म के ट्रेलर को आम दर्शकों के लिए सार्वजनिक करने से पहले सीमित स्तर पर कुछ विशेष कार्यक्रमों में प्रदर्शित किया गया था। दिल्ली और मुंबई में आयोजित विशेष स्क्रीनिंग के अलावा अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी चुनिंदा दर्शकों को इसकी प्रस्तुति दिखाई गई थी। माना जा रहा है कि इन्हीं आयोजनों में मौजूद किसी व्यक्ति द्वारा रिकॉर्ड किए गए कथित वीडियो बाद में इंटरनेट पर साझा किए गए, जो अब विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वायरल हो रहे हैं।

    वायरल हो रहे कथित क्लिप्स में अभिनेता यश को रावण के रूप में दिखाए जाने का दावा किया जा रहा है। इसके साथ ही रणबीर कपूर के भगवान राम, साई पल्लवी के माता सीता, लक्ष्मण और शूर्पणखा जैसे प्रमुख पात्रों की झलक भी दिखाई दे रही है। एक दृश्य में राम-सीता स्वयंवर का प्रसंग नजर आता है, जहां भगवान राम शिव के पिनाक धनुष को उठाते हुए दिखाई देते हैं। वहीं एक अन्य दृश्य में रावण का युद्ध से जुड़ा भव्य दृश्य चर्चा का विषय बना हुआ है।

    हालांकि वायरल वीडियो की गुणवत्ता काफी कम बताई जा रही है, फिर भी फिल्म के सेट, विजुअल इफेक्ट्स, वेशभूषा और भव्य प्रस्तुति को लेकर सोशल मीडिया पर सकारात्मक प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कई दर्शकों का मानना है कि यदि कम गुणवत्ता वाले वीडियो में दृश्य इतने प्रभावशाली दिखाई दे रहे हैं, तो आधिकारिक ट्रेलर और अधिक आकर्षक हो सकता है। इसी वजह से सोशल मीडिया पर फिल्म से जुड़े हैशटैग भी तेजी से ट्रेंड कर रहे हैं।

    फिल्म का निर्देशन नितेश तिवारी ने किया है और इसे भारतीय पौराणिक महाकाव्य पर आधारित बड़े बजट की फिल्मों में शामिल माना जा रहा है। कलाकारों की लंबी सूची, आधुनिक तकनीक और बड़े पैमाने पर तैयार किए गए दृश्य पहले से ही दर्शकों का ध्यान आकर्षित कर चुके हैं। यही कारण है कि ट्रेलर के आधिकारिक रूप से सामने आने से पहले ही फिल्म को लेकर व्यापक चर्चा शुरू हो गई है।

    निर्माताओं की योजना के अनुसार ‘रामायण’ को दो भागों में सिनेमाघरों में रिलीज किया जाएगा। पहला भाग दिवाली 2026 के अवसर पर दर्शकों के बीच आएगा, जबकि दूसरा भाग अगले वर्ष त्योहारों के सीजन में रिलीज किए जाने की तैयारी है। फिलहाल दर्शकों की नजर आधिकारिक ट्रेलर की नई रिलीज तारीख पर टिकी हुई है। कथित लीक क्लिप्स ने फिल्म को लेकर उत्सुकता को और बढ़ा दिया है, लेकिन अब सभी को उस ट्रेलर का इंतजार है जिसे निर्माता आधिकारिक रूप से जारी करेंगे।

  • भारतीय निर्यातकों के लिए राहत भरी खबर अमेरिका ने सेक्शन 301 के तहत भारत को कम टैरिफ श्रेणी में रखा

    भारतीय निर्यातकों के लिए राहत भरी खबर अमेरिका ने सेक्शन 301 के तहत भारत को कम टैरिफ श्रेणी में रखा


    नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक संबंधों के लिए एक सकारात्मक खबर सामने आई है। केंद्र सरकार ने जानकारी दी है कि अमेरिका द्वारा सेक्शन 301 के तहत लागू किए गए अंतिम टैरिफ उपायों में भारत को अपेक्षाकृत कम शुल्क श्रेणी में रखा गया है। सरकार का कहना है कि जांच प्रक्रिया के दौरान अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय के साथ लगातार संवाद और सक्रिय भागीदारी का ही परिणाम है कि भारत को प्रस्तावित शुल्क की तुलना में राहत मिली है। इससे भारतीय निर्यातकों को कई प्रमुख क्षेत्रों में प्रतिस्पर्धात्मक लाभ मिलने की उम्मीद है।

    अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय ने 23 जुलाई को अमेरिकी व्यापार अधिनियम 1974 के सेक्शन 301 के तहत अंतिम उपायों की घोषणा की थी। यह कार्रवाई उन देशों और अर्थव्यवस्थाओं की नीतियों की समीक्षा के बाद की गई जिनकी जांच कथित फोर्स्ड लेबर से जुड़े आयात नियमों के संदर्भ में की गई थी। इस प्रक्रिया में भारत सहित 60 अर्थव्यवस्थाएं शामिल थीं।

    सरकार के अनुसार शुरुआती प्रस्ताव में भारत से आयातित उत्पादों पर 12.5 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगाने की बात कही गई थी लेकिन अंतिम निर्णय में इसे घटाकर 10 प्रतिशत कर दिया गया। सरकार का मानना है कि यह कमी भारत की सक्रिय कूटनीतिक और व्यापारिक पहल का परिणाम है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने बताया कि भारत ने लिखित प्रस्तुतियों व्यक्तिगत स्तर पर विचार विमर्श और सार्वजनिक सुनवाई के माध्यम से लगातार अपना पक्ष प्रभावी ढंग से रखा।

    सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिका को होने वाले भारत के कुल निर्यात का बड़ा हिस्सा इस अतिरिक्त शुल्क के दायरे से बाहर रहेगा। जेनेरिक दवाएं स्मार्टफोन और कुछ अन्य निर्दिष्ट उत्पादों पर अतिरिक्त शुल्क लागू नहीं होगा। इसके अलावा स्टील एल्युमीनियम और ऑटो पार्ट्स जैसे वे उत्पाद जो पहले से सेक्शन 232 के तहत अलग व्यवस्था में आते हैं उन पर भी यह अतिरिक्त 10 प्रतिशत शुल्क लागू नहीं किया जाएगा।

    इन छूटों के कारण अमेरिका को भारत के कुल निर्यात का लगभग 45 प्रतिशत हिस्सा अतिरिक्त सेक्शन 301 शुल्क से मुक्त रहेगा। शेष लगभग 55 प्रतिशत निर्यात पर अतिरिक्त शुल्क लागू होगा लेकिन सरकार का कहना है कि अन्य कई देशों की तुलना में भारत पर कुल टैरिफ का प्रभाव अपेक्षाकृत कम रहेगा। इससे भारतीय निर्यातकों की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति मजबूत बनी रहने की संभावना है।

    सरकार ने यह भी दोहराया कि भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते को जल्द अंतिम रूप देने के लिए बातचीत लगातार जारी है। विशेष रूप से टेक्सटाइल क्षेत्र से जुड़े मुद्दों पर दोनों देशों के बीच संवाद चल रहा है। सरकार का मानना है कि भविष्य में यह समझौता दोनों देशों के व्यापार और निवेश संबंधों को नई ऊंचाई देगा तथा भारतीय उद्योगों को वैश्विक बाजार में और बेहतर अवसर उपलब्ध कराएगा।

    विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका की ओर से कम टैरिफ श्रेणी में रखा जाना भारतीय निर्यात के लिए सकारात्मक संकेत है। इससे कई क्षेत्रों में लागत का दबाव कम रहेगा और भारतीय कंपनियां अमेरिकी बाजार में अपनी प्रतिस्पर्धा बनाए रखने में सक्षम होंगी। साथ ही यह निर्णय दोनों देशों के बीच बढ़ते आर्थिक सहयोग और व्यापारिक विश्वास का भी संकेत माना जा रहा है।

  • ग्रैंड फिनाले के बाद अंकिता लोखंडे ने जताया आभार, कहा- 'लाफ्टर शेफ्स' ने हर हफ्ते परिवारों तक खुशियां पहुंचाईं

    ग्रैंड फिनाले के बाद अंकिता लोखंडे ने जताया आभार, कहा- 'लाफ्टर शेफ्स' ने हर हफ्ते परिवारों तक खुशियां पहुंचाईं


    नई दिल्ली ।
    लोकप्रिय अभिनेत्री अंकिता लोखंडे ने रियलिटी शो ‘लाफ्टर शेफ्स- अनलिमिटेड एंटरटेनमेंट सीजन 3’ के समापन पर अपने अनुभव साझा करते हुए इस पूरे सफर को बेहद खास और भावनात्मक बताया। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं था, बल्कि हर सप्ताह लाखों परिवारों के जीवन में हंसी और सकारात्मकता लेकर आने का माध्यम बना। शो के ग्रैंड फिनाले के बाद उन्होंने कलाकारों, तकनीकी टीम और दर्शकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए इस यात्रा को अपने करियर की यादगार उपलब्धियों में शामिल बताया।

    ग्रैंड फिनाले के अवसर पर अंकिता ने अपने सोशल मीडिया पर कुछ खास पलों की झलक साझा की। तस्वीरों और वीडियो में वह ब्लू रंग की साड़ी में नजर आईं, जबकि पर्दे के पीछे की हल्की-फुल्की मस्ती और शूटिंग के अंतिम दिन का उत्साह भी दिखाई दिया। इस दौरान उनके पति विक्की जैन भी मौजूद रहे, जिन्होंने फिनाले के माहौल का आनंद लिया। इन पलों ने शो से जुड़े कलाकारों और टीम के बीच मजबूत रिश्तों की झलक भी पेश की।

    अपने संदेश में अंकिता ने लिखा कि यह कार्यक्रम उनके लिए सिर्फ एक पेशेवर जिम्मेदारी नहीं था, बल्कि एक ऐसा अनुभव था जिसने उन्हें हर सप्ताह दर्शकों के करीब पहुंचने का अवसर दिया। उन्होंने कहा कि यदि उनके काम से लोग कुछ समय के लिए अपनी परेशानियां भूलकर मुस्कुरा सके, तो यही उनके लिए सबसे बड़ा सम्मान और उपलब्धि है। उनके अनुसार, कलाकार का सबसे बड़ा पुरस्कार दर्शकों के चेहरे पर आने वाली मुस्कान होती है।

    अभिनेत्री ने यह भी कहा कि इस शो ने सभी प्रतिभागियों के भीतर छिपी सकारात्मक ऊर्जा और रचनात्मकता को सामने लाने का काम किया। लगातार कई सप्ताह तक मनोरंजन और हास्य से भरपूर माहौल में काम करना उनके लिए सीखने और नए अनुभव हासिल करने का अवसर रहा। उन्होंने माना कि इस तरह के कार्यक्रम केवल प्रतियोगिता नहीं होते, बल्कि कलाकारों के बीच सहयोग, दोस्ती और आपसी सम्मान को भी मजबूत बनाते हैं।

    अंकिता लोखंडे ने शो के निर्माण से जुड़े सभी लोगों का विशेष रूप से धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि कैमरे के सामने दिखाई देने वाले कलाकारों के साथ-साथ पर्दे के पीछे काम करने वाली पूरी टीम की मेहनत और समर्पण की वजह से ही कार्यक्रम को दर्शकों का इतना प्यार मिला। उनके अनुसार, हर सदस्य ने पूरी लगन से काम किया, जिसकी बदौलत शो सफल रहा।

    उन्होंने अपने साथी कलाकारों की भी सराहना करते हुए कहा कि सभी ने मिलकर ऐसा माहौल बनाया, जहां प्रतिस्पर्धा के साथ दोस्ती और मनोरंजन का संतुलन बना रहा। यही कारण रहा कि कार्यक्रम केवल एक रियलिटी शो नहीं बल्कि एक पारिवारिक मनोरंजन का माध्यम बन गया। इस दौरान बनी यादें और अनुभव लंबे समय तक उनके साथ रहेंगे।

    अंकिता ने अपने संदेश में दर्शकों को इस सफलता का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि दर्शकों ने जिस तरह कार्यक्रम और कलाकारों को अपने परिवार का हिस्सा बनाया, उसी ने इस शो को लोकप्रियता की नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। उनके प्यार और विश्वास ने पूरी टीम का उत्साह लगातार बढ़ाया। उन्होंने विश्वास जताया कि इस सफर की यादें, हंसी, अपनापन और सकारात्मक ऊर्जा हमेशा उनके दिल में बनी रहेंगी और भविष्य में भी उन्हें नए कार्यों के लिए प्रेरित करती रहेंगी।

  • सरकारी तेल कंपनियों ने अपडेट किए ईंधन के भाव, अलग-अलग शहरों में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बना अंतर

    सरकारी तेल कंपनियों ने अपडेट किए ईंधन के भाव, अलग-अलग शहरों में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बना अंतर

    नई दिल्ली । देशभर में पेट्रोल और डीजल की नई कीमतें 26 जुलाई के लिए जारी कर दी गई हैं। सरकारी तेल विपणन कंपनियां प्रतिदिन सुबह ईंधन के दाम अपडेट करती हैं, जिसके तहत आज भी प्रमुख महानगरों समेत विभिन्न शहरों के ताजा रेट सामने आए हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत, डॉलर के मुकाबले रुपये की विनिमय दर और केंद्र व राज्य सरकारों द्वारा लगाए जाने वाले करों के आधार पर ईंधन की कीमतों में समय-समय पर बदलाव देखने को मिलता है। हालांकि, अलग-अलग राज्यों में वैट और अन्य स्थानीय करों की दरें भिन्न होने के कारण प्रत्येक शहर में पेट्रोल और डीजल के दाम अलग-अलग बने रहते हैं।

    राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में आज पेट्रोल 102.12 रुपये प्रति लीटर और डीजल 95.20 रुपये प्रति लीटर पर उपलब्ध है। देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में पेट्रोल की कीमत 111.21 रुपये प्रति लीटर जबकि डीजल 97.83 रुपये प्रति लीटर दर्ज की गई है। पूर्वी भारत के प्रमुख महानगर कोलकाता में पेट्रोल 113.51 रुपये प्रति लीटर और डीजल 99.82 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है। वहीं दक्षिण भारत के प्रमुख शहर चेन्नई में पेट्रोल का दाम 107.76 रुपये प्रति लीटर और डीजल 99.55 रुपये प्रति लीटर निर्धारित किया गया है।

    ईंधन की कीमतों में दिखाई देने वाला यह अंतर मुख्य रूप से राज्यों के कर ढांचे के कारण होता है। केंद्र सरकार द्वारा लगाए जाने वाले उत्पाद शुल्क के अलावा प्रत्येक राज्य अपनी कर नीति के अनुसार वैट और अन्य स्थानीय शुल्क निर्धारित करता है। इसी वजह से एक ही दिन देश के अलग-अलग शहरों में पेट्रोल और डीजल की कीमतें अलग दिखाई देती हैं। परिवहन लागत और स्थानीय प्रशासनिक शुल्क भी कुछ क्षेत्रों में खुदरा कीमतों को प्रभावित करते हैं।

    तेल विपणन कंपनियां प्रतिदिन सुबह छह बजे नई कीमतें जारी करती हैं। यदि वैश्विक बाजार में कच्चे तेल के दाम बढ़ते या घटते हैं अथवा विदेशी मुद्रा विनिमय दर में उल्लेखनीय परिवर्तन होता है, तो उसका प्रभाव घरेलू ईंधन कीमतों पर भी पड़ सकता है। हालांकि कई बार अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद खुदरा कीमतों में तत्काल बदलाव नहीं होता और कंपनियां समग्र बाजार परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए निर्णय लेती हैं।

    वाहन चालकों और आम उपभोक्ताओं के लिए यात्रा या ईंधन भरवाने से पहले अपने शहर के ताजा रेट की जानकारी लेना उपयोगी माना जाता है। इसके लिए संबंधित तेल कंपनियों की आधिकारिक वेबसाइट, मोबाइल एप और एसएमएस सेवा का उपयोग किया जा सकता है। इन माध्यमों पर प्रतिदिन अपडेट किए गए रेट उपलब्ध रहते हैं, जिससे उपभोक्ताओं को अपने क्षेत्र की वास्तविक कीमत की जानकारी मिल जाती है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल के बाजार, वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों और मुद्रा विनिमय दर में होने वाले बदलाव आने वाले समय में भी ईंधन की कीमतों को प्रभावित कर सकते हैं। ऐसे में उपभोक्ताओं के लिए नियमित रूप से ताजा रेट पर नजर रखना आवश्यक है। फिलहाल 26 जुलाई के लिए जारी नई कीमतों में प्रमुख महानगरों के बीच पहले की तरह अंतर बना हुआ है और राज्यवार कर संरचना इसका प्रमुख कारण बनी हुई है।

  • 31 जुलाई से पहले ITR फाइल करते समय न भूलें ये जरूरी टैक्स छूट, सही क्लेम से बच सकते हैं हजारों रुपये

    31 जुलाई से पहले ITR फाइल करते समय न भूलें ये जरूरी टैक्स छूट, सही क्लेम से बच सकते हैं हजारों रुपये

    नई दिल्ली । आयकर रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तिथि नजदीक आने के साथ ही लाखों करदाता अपनी टैक्स प्रक्रिया पूरी करने में जुटे हैं। हालांकि जल्दबाजी में रिटर्न भरते समय कई लोग ऐसे महत्वपूर्ण टैक्स डिडक्शन का दावा करना भूल जाते हैं, जिनसे उनकी कर देनदारी काफी कम हो सकती है। विशेष रूप से पुरानी टैक्स व्यवस्था अपनाने वाले करदाताओं के लिए उपलब्ध विभिन्न छूटों की सही जानकारी होना आवश्यक है, क्योंकि एक छोटी सी चूक भी अतिरिक्त टैक्स भुगतान का कारण बन सकती है।

    पुरानी टैक्स व्यवस्था के तहत सबसे अधिक उपयोग किए जाने वाले प्रावधानों में धारा 80C प्रमुख है। इसके अंतर्गत पीपीएफ, ईपीएफ, ईएलएसएस, टैक्स सेविंग फिक्स्ड डिपॉजिट, राष्ट्रीय बचत पत्र, सुकन्या समृद्धि योजना, जीवन बीमा प्रीमियम, बच्चों की ट्यूशन फीस और होम लोन की मूल राशि के भुगतान जैसी योग्य निवेश एवं खर्च पर अधिकतम 1.5 लाख रुपये तक की टैक्स छूट प्राप्त की जा सकती है। यदि किसी करदाता ने इन योजनाओं में निवेश किया है, तो रिटर्न दाखिल करते समय उसका सही दावा करना आवश्यक है।

    राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली यानी एनपीएस में निवेश करने वाले करदाताओं को भी अतिरिक्त लाभ मिलता है। धारा 80CCD(1B) के अंतर्गत 80C की सीमा से अलग 50 हजार रुपये तक की अतिरिक्त कटौती उपलब्ध है। कई करदाता इस अलग प्रावधान का लाभ लेना भूल जाते हैं, जबकि इससे कुल टैक्स देनदारी में उल्लेखनीय कमी आ सकती है।

    स्वास्थ्य बीमा पर चुकाया गया प्रीमियम भी टैक्स बचाने का महत्वपूर्ण माध्यम है। धारा 80D के तहत स्वयं, जीवनसाथी, बच्चों और माता-पिता के लिए खरीदे गए स्वास्थ्य बीमा पर निर्धारित सीमा तक कर छूट का दावा किया जा सकता है। वरिष्ठ नागरिकों के लिए यह सीमा अधिक निर्धारित की गई है, जिससे परिवार के स्वास्थ्य सुरक्षा खर्च पर भी कर राहत मिलती है।

    जिन लोगों ने घर खरीदने के लिए होम लोन लिया है, वे धारा 24(b) के अंतर्गत होम लोन के ब्याज पर दो लाख रुपये तक की टैक्स छूट प्राप्त कर सकते हैं। वहीं लोन की मूल राशि के भुगतान का लाभ अलग से धारा 80C के अंतर्गत लिया जा सकता है। इस प्रकार दोनों प्रावधानों का सही उपयोग कर टैक्स बचत को और प्रभावी बनाया जा सकता है।

    उच्च शिक्षा के लिए लिए गए एजुकेशन लोन पर भी कर राहत उपलब्ध है। धारा 80E के तहत शिक्षा ऋण पर चुकाए गए ब्याज की पूरी राशि पर कटौती का दावा किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त सरकार से मान्यता प्राप्त संस्थाओं, ट्रस्टों या राहत कोष में किए गए दान पर धारा 80G के अंतर्गत निर्धारित नियमों के अनुसार 50 प्रतिशत या 100 प्रतिशत तक टैक्स छूट मिल सकती है। इसके लिए संबंधित रसीद और आवश्यक दस्तावेज सुरक्षित रखना जरूरी होता है।

    आईटीआर दाखिल करने से पहले सभी वित्तीय विवरणों का मिलान करना भी बेहद महत्वपूर्ण है। करदाताओं को फॉर्म-16, वार्षिक सूचना विवरण और फॉर्म 26एएस में दर्ज जानकारी की जांच करनी चाहिए ताकि आय और कर कटौती से संबंधित कोई अंतर न रहे। साथ ही सभी निवेश प्रमाण, बीमा प्रीमियम की रसीदें और अन्य आवश्यक दस्तावेज अपने पास सुरक्षित रखें। पुरानी और नई टैक्स व्यवस्था की तुलना कर वही विकल्प चुनें, जिससे अधिक कर लाभ मिले। बैंक खाते की जानकारी सावधानीपूर्वक भरने के बाद रिटर्न का ई-वेरिफिकेशन समय पर पूरा करना भी आवश्यक है, क्योंकि इसके बिना आयकर रिटर्न की प्रक्रिया अधूरी मानी जाती है और रिफंड में भी देरी हो सकती है।

  • बाजार की अस्थिरता से घबराने की जरूरत नहीं, लंबी अवधि के निवेशकों के लिए मौजूदा समय बेहतर अवसर: रमेश दमानी

    बाजार की अस्थिरता से घबराने की जरूरत नहीं, लंबी अवधि के निवेशकों के लिए मौजूदा समय बेहतर अवसर: रमेश दमानी

    नई दिल्ली । शेयर बाजार में जारी उतार-चढ़ाव के बीच दिग्गज निवेशक रमेश दमानी ने लंबी अवधि के निवेशकों को धैर्य बनाए रखने और बाजार की अल्पकालिक अस्थिरता से प्रभावित न होने की सलाह दी है। उनका मानना है कि वर्तमान परिस्थितियों में बाजार की दैनिक हलचल पर ध्यान देने के बजाय मजबूत कंपनियों में लंबे समय तक निवेश बनाए रखना बेहतर रणनीति साबित हो सकती है। उन्होंने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था की दीर्घकालिक संभावनाएं मजबूत हैं और यही निवेशकों के लिए सबसे बड़ा सकारात्मक संकेत है।

    एक कार्यक्रम के दौरान अपने विचार रखते हुए रमेश दमानी ने कहा कि शेयर बाजार स्वभाव से अस्थिर होता है और समय-समय पर इसमें तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिलते हैं। ऐसे दौर में कई निवेशक घबराकर जल्दबाजी में फैसले लेते हैं, जिससे उन्हें नुकसान उठाना पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि जो निवेशक अनुशासन बनाए रखते हैं और बाजार की अल्पकालिक चाल के बजाय लंबी अवधि के लक्ष्य पर ध्यान देते हैं, उनके लिए संपत्ति निर्माण की संभावनाएं अधिक मजबूत होती हैं।

    उन्होंने कहा कि निवेश के क्षेत्र में धैर्य सबसे महत्वपूर्ण गुणों में से एक है। यदि किसी निवेशक ने मजबूत आधार वाली कंपनियों का चयन किया है, तो उसे बाजार में आने वाली अस्थायी गिरावट से घबराने की आवश्यकता नहीं है। उनके अनुसार, समय के साथ गुणवत्तापूर्ण कंपनियां बेहतर प्रदर्शन करती हैं और निवेशकों को अच्छे प्रतिफल का अवसर देती हैं।

    रमेश दमानी ने भारत की आर्थिक स्थिति पर भी विश्वास जताया। उन्होंने कहा कि देश की युवा आबादी, बढ़ती खपत, तेज़ी से विकसित होता औद्योगिक ढांचा और सुधारों पर आधारित आर्थिक नीतियां भारत की दीर्घकालिक विकास यात्रा को मजबूत आधार प्रदान कर रही हैं। उनका मानना है कि आने वाले वर्षों में भारत वैश्विक निवेशकों के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र बना रहेगा।

    उन्होंने यह भी कहा कि भारत को लगभग आठ प्रतिशत की आर्थिक विकास दर बनाए रखने के लिए लगातार विदेशी निवेश की आवश्यकता होगी। विदेशी पूंजी से उद्योगों का विस्तार, रोजगार के नए अवसर और आधुनिक तकनीकों का विकास संभव होता है। उनके अनुसार, यदि भारत अपनी विकास गति को बनाए रखना चाहता है, तो विदेशी प्रत्यक्ष निवेश की निरंतर उपलब्धता महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

    आधुनिक तकनीकों पर चर्चा करते हुए रमेश दमानी ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तेजी से वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर रहा है। हालांकि उन्होंने यह भी माना कि ऐसे कई उद्योग और व्यवसाय हैं, जिन पर एआई का प्रभाव अपेक्षाकृत कम रहेगा और भविष्य में वही क्षेत्र निवेशकों के लिए नए अवसर लेकर आ सकते हैं। उनका कहना था कि निवेशकों को केवल चर्चित क्षेत्रों तक सीमित रहने के बजाय व्यापक दृष्टिकोण अपनाकर संभावनाओं का आकलन करना चाहिए।

    उन्होंने विदेशी निवेश के रुझानों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत में सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और नई तकनीकों से जुड़े क्षेत्रों में निवेश लगातार बढ़ रहा है। इससे देश के तकनीकी और औद्योगिक विकास को गति मिलने की संभावना है। उन्होंने यह भी कहा कि वैश्विक निवेशकों का भरोसा भारत की आर्थिक क्षमता और भविष्य की विकास संभावनाओं को दर्शाता है।

    वैश्विक बाजारों पर टिप्पणी करते हुए रमेश दमानी ने कहा कि अमेरिकी शेयर बाजार अपने उच्च स्तर के करीब दिखाई देता है, जबकि कुछ औद्योगिक और विनिर्माण क्षेत्रों में चीन अब भी मजबूत स्थिति में है। इसके बावजूद उनका मानना है कि भारत के पास विकास की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं। उन्होंने निवेशकों से अपील की कि वे अल्पकालिक उतार-चढ़ाव के बजाय दीर्घकालिक दृष्टिकोण अपनाएं, क्योंकि अनुशासित निवेश और धैर्य ही समय के साथ बेहतर संपत्ति निर्माण का सबसे प्रभावी माध्यम साबित होता है।

  • शेयर बाजार में तेज गिरावट का असर, देश की शीर्ष 10 में से केवल एक कंपनी का मार्केटकैप बढ़ा

    शेयर बाजार में तेज गिरावट का असर, देश की शीर्ष 10 में से केवल एक कंपनी का मार्केटकैप बढ़ा

    नई दिल्ली । वैश्विक बाजारों में बढ़ती अनिश्चितता और घरेलू शेयर बाजार में लगातार बिकवाली के दबाव का असर देश की सबसे बड़ी सूचीबद्ध कंपनियों पर भी साफ दिखाई दिया। बीते कारोबारी सप्ताह में भारत की शीर्ष 10 कंपनियों में से नौ के संयुक्त बाजार पूंजीकरण में लगभग 2.74 लाख करोड़ रुपए की कमी दर्ज की गई। निवेशकों की सतर्कता और व्यापक मुनाफावसूली के कारण अधिकांश प्रमुख कंपनियों के शेयरों में गिरावट देखने को मिली, जिससे उनके मार्केटकैप पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ा।

    20 से 24 जुलाई के कारोबारी सप्ताह के दौरान भारतीय शेयर बाजार में कमजोरी का माहौल बना रहा। इस अवधि में सेंसेक्स 2,091.68 अंक यानी 2.68 प्रतिशत गिरकर 76,059.77 के स्तर पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 566.85 अंक यानी 2.33 प्रतिशत की गिरावट के साथ 23,767.45 पर आ गया। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों, निवेशकों की सतर्क रणनीति और व्यापक बिकवाली ने बाजार की धारणा को प्रभावित किया।

    बाजार पूंजीकरण के लिहाज से सबसे अधिक नुकसान एचडीएफसी बैंक को हुआ। सप्ताह के दौरान बैंक के मार्केटकैप में 1.18 लाख करोड़ रुपए से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। इसके बाद रिलायंस इंडस्ट्रीज को भी बड़ा झटका लगा, जिसके बाजार पूंजीकरण में 65 हजार करोड़ रुपए से अधिक की कमी आई। देश की सबसे मूल्यवान सूचीबद्ध कंपनी होने के बावजूद रिलायंस का शीर्ष स्थान बरकरार रहा, लेकिन बाजार मूल्य में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई।

    अन्य प्रमुख कंपनियों में भारतीय स्टेट बैंक, बजाज फाइनेंस, आईसीआईसीआई बैंक, भारती एयरटेल, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, लार्सन एंड टुब्रो और भारतीय जीवन बीमा निगम के बाजार पूंजीकरण में भी कमी आई। इन कंपनियों के शेयरों में आई गिरावट का असर निवेशकों की संपत्ति पर भी दिखाई दिया। बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं, सूचना प्रौद्योगिकी और औद्योगिक क्षेत्र की कंपनियां इस सप्ताह बिकवाली के दबाव में रहीं।

    दूसरी ओर, शीर्ष 10 कंपनियों में केवल हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड ऐसी कंपनी रही, जिसके बाजार पूंजीकरण में मामूली बढ़त दर्ज की गई। हालांकि यह वृद्धि कुल गिरावट की तुलना में काफी सीमित रही और समग्र रूप से शीर्ष कंपनियों के संयुक्त मूल्यांकन पर इसका विशेष प्रभाव नहीं पड़ा।

    सप्ताह के अंत तक बाजार पूंजीकरण के आधार पर रिलायंस इंडस्ट्रीज देश की सबसे मूल्यवान सूचीबद्ध कंपनी बनी रही। इसके बाद भारती एयरटेल, एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, भारतीय स्टेट बैंक, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, बजाज फाइनेंस, भारतीय जीवन बीमा निगम, लार्सन एंड टुब्रो तथा हिंदुस्तान यूनिलीवर का स्थान रहा। इन कंपनियों का प्रदर्शन भारतीय शेयर बाजार की समग्र दिशा का महत्वपूर्ण संकेतक माना जाता है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक आर्थिक संकेतकों, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों और आगामी कॉरपोरेट नतीजों पर बाजार की नजर बनी रहेगी। यदि वैश्विक परिस्थितियों में स्थिरता आती है और निवेशकों का भरोसा मजबूत होता है, तो आने वाले कारोबारी सत्रों में बाजार में सुधार की संभावना बन सकती है। फिलहाल निवेशकों के लिए बाजार की चाल पर सतर्क निगरानी बनाए रखना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।